क्या नास्तिक आध्यात्मिक हो सकता है?...


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Isu Vasava

PASTOR in CHURCH.

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नास्तिक उस इंसान को कहा जाता है जो यह मानता है कि इस दुनिया में भगवान नाम की कोई चीज है ही नहीं यह दुनिया ऐसे ही चल रही है अपने हिसाब से लेकिन यह उनकी खुद की सोच होती लेकिन जब उसको पता चलता है नहीं यार यह दुनिया इतनी बड़ी है अगर हम एक अपना घर चलाना चाहे तो भी हम से नहीं चलता सही तरह से तो यह दुनिया कैसे चलती है तब उसको ऐसा महसूस होता है कि नहीं सच में परमेश्वर है जिसने आकाश को से बनाया और जो इस दुनिया को चला रहा है तब वह सच्चे और जिंदा खुदा को ढूंढता है और उस को पहचानता है और वह उसकी स्तुति आराधना करता है और आत्मिक बनता है इसलिए एक नास्तिक हो सकता है इसमें कोई बड़ी बात नहीं लेकिन उसको जानना जरूरी है कि 33 करोड़ में से सच्चा और जिंदा खुदा कौन है किसने आकाश पृथ्वी बनाई और किसने इंसान या ने हम लोगों को बनाया है

nastik us insaan ko kaha jata hai jo yah maanta hai ki is duniya me bhagwan naam ki koi cheez hai hi nahi yah duniya aise hi chal rahi hai apne hisab se lekin yah unki khud ki soch hoti lekin jab usko pata chalta hai nahi yaar yah duniya itni badi hai agar hum ek apna ghar chalana chahen toh bhi hum se nahi chalta sahi tarah se toh yah duniya kaise chalti hai tab usko aisa mehsus hota hai ki nahi sach me parmeshwar hai jisne akash ko se banaya aur jo is duniya ko chala raha hai tab vaah sacche aur zinda khuda ko dhundhta hai aur us ko pahachanta hai aur vaah uski stuti aradhana karta hai aur atmik banta hai isliye ek nastik ho sakta hai isme koi badi baat nahi lekin usko janana zaroori hai ki 33 crore me se saccha aur zinda khuda kaun hai kisne akash prithvi banai aur kisne insaan ya ne hum logo ko banaya hai

नास्तिक उस इंसान को कहा जाता है जो यह मानता है कि इस दुनिया में भगवान नाम की कोई चीज है ही

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Loan Guru

Financial Expert

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नास्तिक आध्यात्मिक हो सकता है बिल्कुल हो सकता है क्यों नहीं हो सकता यह नहीं है कि पूजा पाठ नहीं कर रहा भगवान को नहीं मानता नहीं करता ना बीवी आत्मा और परमात्मा को जानता है समझता है मानता है अगर वास्तविक वह जानता होगा तो देश में हो सकता है कोई दिक्कत है कोई बड़ी बात नहीं करते हैं लेकिन आज तक कोई बड़ी बात नहीं

nastik aadhyatmik ho sakta hai bilkul ho sakta hai kyon nahi ho sakta yah nahi hai ki puja path nahi kar raha bhagwan ko nahi maanta nahi karta na biwi aatma aur paramatma ko jaanta hai samajhata hai maanta hai agar vastavik vaah jaanta hoga toh desh me ho sakta hai koi dikkat hai koi badi baat nahi karte hain lekin aaj tak koi badi baat nahi

नास्तिक आध्यात्मिक हो सकता है बिल्कुल हो सकता है क्यों नहीं हो सकता यह नहीं है कि पूजा पाठ

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जिस व्यक्ति को ईश्वर और धर्म पर भरोसा नहीं हो नास्तिक है तो वह कभी सर को प्राप्त नहीं कर सकता है केवल चक्कर लगाता रहेगा अपने दिमाग को भ्रमित करता लेकिन नकारात्मक शक्ति स्वर के पास तो कुछ मुझे नहीं नहीं देगी

jis vyakti ko ishwar aur dharm par bharosa nahi ho nastik hai toh vaah kabhi sir ko prapt nahi kar sakta hai keval chakkar lagaata rahega apne dimag ko bharmit karta lekin nakaratmak shakti swar ke paas toh kuch mujhe nahi nahi degi

जिस व्यक्ति को ईश्वर और धर्म पर भरोसा नहीं हो नास्तिक है तो वह कभी सर को प्राप्त नहीं कर स

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ज्योतिषी झा मेरठ (Pt. K L Shashtri)

Astrologer Jhaमेरठ,झंझारपुर और मुम्बई

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BK Kalyani

Teacher On Rajyoga Spiritual Knowledge

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बिल्कुल आपका क्वेश्चन बहुत अच्छा है या नास्तिक आध्यात्मिक हो सकता है भाई नास्तिक किसे कहा जाता है जो दिल से भगवान को कभी याद ना किया हो किसी भी वक्त परमात्मा का एहसानमंद अलावा किसी भी परमात्मा के नाम अपनी जुबां पर ना लाया हूं उसे नास्तिक कहा जाता है जो पूजा ना करता गरबा जलाता मंदिर ना जाता नहीं होता है नाश्ते का अर्थ है कि परमात्मा की एक भी नाम एक भी ऐसा एक भी याद अपने दिल पर ना लिया उसे नाश्ते कहा जाता है लेकिन यहां जन्म लेते ही हर एक बच्चा बड़ा होने से बुजुर्ग तक भगवान को याद करते हैं तो वह नास्तिक नहीं है वह आस्तिक है और आध्यात्मिक आध्यात्मिक में वह हो सकता है जा सकता है और धारण कर दी जाता है

bilkul aapka question bahut accha hai ya nastik aadhyatmik ho sakta hai bhai nastik kise kaha jata hai jo dil se bhagwan ko kabhi yaad na kiya ho kisi bhi waqt paramatma ka ehasanamand alava kisi bhi paramatma ke naam apni juban par na laya hoon use nastik kaha jata hai jo puja na karta garba jalata mandir na jata nahi hota hai naste ka arth hai ki paramatma ki ek bhi naam ek bhi aisa ek bhi yaad apne dil par na liya use naste kaha jata hai lekin yahan janam lete hi har ek baccha bada hone se bujurg tak bhagwan ko yaad karte hain toh vaah nastik nahi hai vaah astik hai aur aadhyatmik aadhyatmik me vaah ho sakta hai ja sakta hai aur dharan kar di jata hai

बिल्कुल आपका क्वेश्चन बहुत अच्छा है या नास्तिक आध्यात्मिक हो सकता है भाई नास्तिक किसे कहा

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Bihari Lal Yadav

Health and Fitness Expert

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नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट आयुर्वेद aashiqui.com पर आपका प्रश्न है नाश्ते का आध्यात्मिक हो सकता है यह प्रश्न जो नास्तिक होता है वह कभी अध्यात्मिक हो ही नहीं सकता किसी भी परिस्थिति में किसी नास्तिक मनुष्य ईश्वर पर विश्वास नहीं करता जब तक वह नहीं करें ईश्वर में विश्वास नहीं करेगा उसे स्वयं पर विश्वास नहीं होगा उसे स्वयं पर भरोसा नहीं होता ना ही वह अध्यात्म में विश्वास रखता है और ना ही परमेश्वर क्योंकि नास्तिक मनुष्य के लिए जब जब ईश्वर से सारी चीज बड़ी होती है हमारा अस्तित्व ही ईश्वर से जुड़ा है अगर परमेश्वर पर हम भरोसा हम चाहे ना चाहे हमारे भरोसे करने या ना करने से कोई फर्क नहीं पड़ता अनंत और स्थिर आज भी है और हम उसे हमारी आवश्यकता नहीं है ना ही हम चंद लोग अगर ईश्वर को नहीं मानेंगे तो क्या उसका अस्तित्व मिट जाएगा कभी नहीं यह तो हम पर निर्भर करता है हम जानते हुए भी अनजान बनते हैं इसे कहते हैं प्रज्ञा उड़ा दी जो जानबूझकर गलती करता है जो अपनी मनमानी को दिखाता है मनमानी आप किसी भी करो तो आपको कोई रोकने वाला नहीं है ना लेकिन परिणाम परिणाम के बारे में आपने नहीं सोचा वह परिणाम कर माफ करोगे तो परमेश्वर नहीं रोकेगा तुम ही कर्म में आप हम स्वतंत्र हैं तुझे हम पर निर्भर करता है कि हम कैसे कम करें अब व्यक्ति यह सोच लेता है कि मुझे ईश्वर ईश्वर को नहीं मानता यह नहीं तो ठीक है ना तुम वही सोच लेता सोचने और ना सोचने से क्या फर्क पड़ता है फर्क तो हमारे जीवन पर पड़ता है कि हम अपनी लाइफ को कैसे जीते हैं क्या हम उस में विश्वास नहीं रखते और हमारे जीवन को सही बना सकते हैं कि केवल कुछ कहने में ही अच्छी है बुरी लगती हो मन से कोई फर्क नहीं पड़ता परमेश्वर से जब तक हम परमेश्वर में यकीन नहीं करेंगे विश्वास नहीं करेंगे तो खुद पर यकीन करना बहुत जरूरी होता है हमें खुद पर विश्वास नहीं होगा तो इसमें कहां से विश्वास करेंगे इसलिए अपने आप और नाश्ते के सेविका हमारे अंदर आते हैं उसका यह यही कारण होता है कि हम अपने आप में विश्वास नहीं रखते और जो स्वयं पर विश्वास नहीं करता उससे परमेश्वर पर विश्वास नहीं होता धन्यवाद

namaskar doston swaagat hai aapka hamare website ayurveda aashiqui com par aapka prashna hai naste ka aadhyatmik ho sakta hai yah prashna jo nastik hota hai vaah kabhi adhyatmik ho hi nahi sakta kisi bhi paristhiti me kisi nastik manushya ishwar par vishwas nahi karta jab tak vaah nahi kare ishwar me vishwas nahi karega use swayam par vishwas nahi hoga use swayam par bharosa nahi hota na hi vaah adhyaatm me vishwas rakhta hai aur na hi parmeshwar kyonki nastik manushya ke liye jab jab ishwar se saari cheez badi hoti hai hamara astitva hi ishwar se juda hai agar parmeshwar par hum bharosa hum chahen na chahen hamare bharose karne ya na karne se koi fark nahi padta anant aur sthir aaj bhi hai aur hum use hamari avashyakta nahi hai na hi hum chand log agar ishwar ko nahi manenge toh kya uska astitva mit jaega kabhi nahi yah toh hum par nirbhar karta hai hum jante hue bhi anjaan bante hain ise kehte hain pragya uda di jo janbujhkar galti karta hai jo apni manmani ko dikhaata hai manmani aap kisi bhi karo toh aapko koi rokne vala nahi hai na lekin parinam parinam ke bare me aapne nahi socha vaah parinam kar maaf karoge toh parmeshwar nahi rokega tum hi karm me aap hum swatantra hain tujhe hum par nirbhar karta hai ki hum kaise kam kare ab vyakti yah soch leta hai ki mujhe ishwar ishwar ko nahi maanta yah nahi toh theek hai na tum wahi soch leta sochne aur na sochne se kya fark padta hai fark toh hamare jeevan par padta hai ki hum apni life ko kaise jeete hain kya hum us me vishwas nahi rakhte aur hamare jeevan ko sahi bana sakte hain ki keval kuch kehne me hi achi hai buri lagti ho man se koi fark nahi padta parmeshwar se jab tak hum parmeshwar me yakin nahi karenge vishwas nahi karenge toh khud par yakin karna bahut zaroori hota hai hamein khud par vishwas nahi hoga toh isme kaha se vishwas karenge isliye apne aap aur naste ke sevika hamare andar aate hain uska yah yahi karan hota hai ki hum apne aap me vishwas nahi rakhte aur jo swayam par vishwas nahi karta usse parmeshwar par vishwas nahi hota dhanyavad

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट आयुर्वेद aashiqui.com पर आपका प्रश्न है नाश्त

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आध्यात्मिक होने के लिए आज तुम ना आपकी आस्था चाहे किसी व्यक्ति है भगवान आपके जैसी सुंदर लगे जब तक आप किसी से जुड़े अपने आप से

aadhyatmik hone ke liye aaj tum na aapki astha chahen kisi vyakti hai bhagwan aapke jaisi sundar lage jab tak aap kisi se jude apne aap se

आध्यात्मिक होने के लिए आज तुम ना आपकी आस्था चाहे किसी व्यक्ति है भगवान आपके जैसी सुंदर लगे

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Rajeev Agrawal

Health Consultant

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Rajkumar

Astrologer

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आपका सवाल है कि क्या नास्तिक का आशिक हो सकता है क्यों नहीं हो सकता जब उसकी कृपा होती है तो पत्थर के अंदर भी फूल खिल जाते हैं जब वह हस्ती को अगर अपनी अपनी शरण में लेना चाहेगा तो नासिक भी आशिक हो सकता है क्योंकि पहली बात तो हो वही लोग भगवान का नाम स्मरण करते हैं और भगवान की शरण में जाते हैं भगवान जिन को पसंद करते हैं जय राम जी की भगवान की मर्जी के सिवा कोई आदमी उनके नजदीक आ नहीं सकता है अगर आप ही गया भगवान किसी ना किसी तरह से उसे अपने से दूर कर देंगे और उसका भी विश्वास उठा देंगे कि भगवान है करके ठीक है ना तो भगवान दिन को पसंद करते हैं तुमको ही वे अपने करीब किसी ना किसी तरह से ले आते हैं कि कि देर सबेर वे उस मनुष्य का हित करके हित चाहते हुए और उसके ह्रदय में प्रकट होना चाहते हैं जय श्री राम

aapka sawaal hai ki kya nastik ka aashik ho sakta hai kyon nahi ho sakta jab uski kripa hoti hai toh patthar ke andar bhi fool khil jaate hain jab vaah hasti ko agar apni apni sharan me lena chahega toh nashik bhi aashik ho sakta hai kyonki pehli baat toh ho wahi log bhagwan ka naam smaran karte hain aur bhagwan ki sharan me jaate hain bhagwan jin ko pasand karte hain jai ram ji ki bhagwan ki marji ke siva koi aadmi unke nazdeek aa nahi sakta hai agar aap hi gaya bhagwan kisi na kisi tarah se use apne se dur kar denge aur uska bhi vishwas utha denge ki bhagwan hai karke theek hai na toh bhagwan din ko pasand karte hain tumko hi ve apne kareeb kisi na kisi tarah se le aate hain ki ki der saber ve us manushya ka hit karke hit chahte hue aur uske hriday me prakat hona chahte hain jai shri ram

आपका सवाल है कि क्या नास्तिक का आशिक हो सकता है क्यों नहीं हो सकता जब उसकी कृपा होती है तो

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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नासिक आध्यात्मिक हो सकता है हो सकता है जब उन अपराधियों को छोड़ दें तो आशिक हो सकता है हमारा मानना है कि नास्तिक रिंगटोन मास्टर में आस्तिक होता है लेकिन व्यवहार शिव नाजुक होते हैं वह बार-बार हजार बार भगवान कृष्ण करता है और यह कहता है मैं मना नहीं भगवान को नहीं मानता मैं फना नहीं भगवान से नहीं डरता मैं उसे चिंता नहीं खाता मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता उसका अहंकार उसके नखरे क्यों ना जितना हो ना करता है उतनी बार वह भगवान का इसमें सोचिए अगर एक बार भगवान से सच्चे मन से स्वपन में तो भगवान भूले बढ़कर उसके प्राण रक्षा के लिए आ जाते हैं मेरे भक्तों ने मुझे पुकारा है डूबे हुए नदी में जब मगरमच्छ ने हाथी का भाव अपने मुंह में ले लिया तो हाथी की चित्कार सुनकर भगवान सिंह आतंकी दौड़े चले आए और मगरमच्छ का सर अपने चक्र से काटते अपने भक्तों के कारण बताए तो नासिक पर डोमेस्टिक होता है वहां उचित दिन एहसास हो जाता है कि मैंने तो इस नकारात्मकता के कारण आध्यात्मिक ज्ञान मेरे पास था अनूप से वंचित उसी दिन अध्यात्मिक हो जाता है

nashik aadhyatmik ho sakta hai ho sakta hai jab un apradhiyon ko chhod de toh aashik ho sakta hai hamara manana hai ki nastik ringtone master me astik hota hai lekin vyavhar shiv naajuk hote hain vaah baar baar hazaar baar bhagwan krishna karta hai aur yah kahata hai main mana nahi bhagwan ko nahi maanta main fana nahi bhagwan se nahi darta main use chinta nahi khaata mera kuch nahi bigad sakta uska ahankar uske nakhare kyon na jitna ho na karta hai utani baar vaah bhagwan ka isme sochiye agar ek baar bhagwan se sacche man se swapan me toh bhagwan bhule badhkar uske praan raksha ke liye aa jaate hain mere bhakton ne mujhe pukaara hai doobe hue nadi me jab magarmach ne haathi ka bhav apne mooh me le liya toh haathi ki chitkar sunkar bhagwan Singh aatanki daude chale aaye aur magarmach ka sir apne chakra se katatey apne bhakton ke karan bataye toh nashik par domestic hota hai wahan uchit din ehsaas ho jata hai ki maine toh is nakaratmakta ke karan aadhyatmik gyaan mere paas tha anup se vanchit usi din adhyatmik ho jata hai

नासिक आध्यात्मिक हो सकता है हो सकता है जब उन अपराधियों को छोड़ दें तो आशिक हो सकता है हमार

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जय श्री राधे कृष्ण है या नास्तिक आध्यात्मिक हो सकता है इसके संबंध में कहना चाहते हैं इस समय परिवर्तनशील है परिस्थितियां निरंतर बदलती रहती हैं नास्तिक में आर्थिक शब्द जुड़ा हुआ है जब व्यक्ति के भाव बदलते हैं उनमें क्षणिक समय नहीं लगता जब उसके साथ में कोई ऐसी घटना घट जाती है जो उस पर भी डिलीट कर देती है और वह ईश्वर का स्मरण कर लगता है और उसकी बुद्धि नेता या जो परेशानी थी वह उसे समाप्त हो जाती है तो उसका मन परिवर्तित होकर आध्यात्मिकता की ओर जुड़ जाता है इस प्रकार नास्तिक आध्यात्मिक बन जाता है जय श्री राधे

jai shri radhe krishna hai ya nastik aadhyatmik ho sakta hai iske sambandh me kehna chahte hain is samay parivartanshil hai paristhiyaann nirantar badalti rehti hain nastik me aarthik shabd juda hua hai jab vyakti ke bhav badalte hain unmen kshanik samay nahi lagta jab uske saath me koi aisi ghatna ghat jaati hai jo us par bhi delete kar deti hai aur vaah ishwar ka smaran kar lagta hai aur uski buddhi neta ya jo pareshani thi vaah use samapt ho jaati hai toh uska man parivartit hokar aadhyatmikta ki aur jud jata hai is prakar nastik aadhyatmik ban jata hai jai shri radhe

जय श्री राधे कृष्ण है या नास्तिक आध्यात्मिक हो सकता है इसके संबंध में कहना चाहते हैं इस सम

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Kaushik Chaitnya

Spiritual expert

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मैंने सुना था कि शायद आप लोगों ने भी यह बात सुनी होगी कि कण-कण में भगवान है आप इस चीज को मानते भी होंगे और जानते भी होंगे तो मैं नहीं मानता कि कोई नास्तिक है क्योंकि कोई ना कोई व्यक्ति किसी ना किसी चीज को मानता जरूर है ऐसा नहीं है कि वह हर एक का उल्टा चले हर एक के नेगेटिव चले वह किसी के पॉजिटिव तो जरूर होगा ही जो मंदिर नहीं जाता जो यह कहता है कि मैं भगवान को नहीं मानता अगर वह बाजार से जाकर सब्जी लेकर आता है अगर वह सब्जी खाता है तो वह नास्तिक नहीं है तो वह भी तो आस्तिक है कण-कण में भगवान है कण कण मतलब प्रकृति प्रकृति में हर एक चीज है हर एक टाइप की आपको मिलती है हां तो मैं यही कहना चाहता हूं कि मेरा तो मानना यही है कि इस दुनिया में कोई भी नास्तिक नहीं कोई ना कोई

maine suna tha ki shayad aap logo ne bhi yah baat suni hogi ki kan kan me bhagwan hai aap is cheez ko maante bhi honge aur jante bhi honge toh main nahi maanta ki koi nastik hai kyonki koi na koi vyakti kisi na kisi cheez ko maanta zaroor hai aisa nahi hai ki vaah har ek ka ulta chale har ek ke Negative chale vaah kisi ke positive toh zaroor hoga hi jo mandir nahi jata jo yah kahata hai ki main bhagwan ko nahi maanta agar vaah bazaar se jaakar sabzi lekar aata hai agar vaah sabzi khaata hai toh vaah nastik nahi hai toh vaah bhi toh astik hai kan kan me bhagwan hai kan kan matlab prakriti prakriti me har ek cheez hai har ek type ki aapko milti hai haan toh main yahi kehna chahta hoon ki mera toh manana yahi hai ki is duniya me koi bhi nastik nahi koi na koi

मैंने सुना था कि शायद आप लोगों ने भी यह बात सुनी होगी कि कण-कण में भगवान है आप इस चीज को म

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Joshi Vinoda

Motivational Speaker

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Siyaram Dubey

YouTuber/Spiritual Person/Thinker/Social-media Activist

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कोई भी व्यक्ति कभी भी नास्तिक नहीं हो सकता क्योंकि वह अपने अंतःकरण में सत्य की जो भावना है वह बनी ही रहती है जैसे ही उसकी चेतना में आत्म भाव प्रेरित हो जाता है वह आध्यात्मिक बन जाता है वह अपनी आत्मा को अनुभव करने लगता है अनेक ऐसे व्यक्तियों का इतिहास है जो नास्तिक थे धर्म और ईश्वर के बारे में बिल्कुल भी नहीं जानते थे लेकिन घटनाओं ने उनको आत्ममंथन की ओर ले कर उन्हें उनके स्वत्व को चेतना को जागृत किया और वह आध्यात्मिक पुरुषों में शेर से जाने जाते हैं बाल्मीकि अंगुलिमाल आदि ऐसे ही व्यक्ति थे

koi bhi vyakti kabhi bhi nastik nahi ho sakta kyonki vaah apne antahkaran me satya ki jo bhavna hai vaah bani hi rehti hai jaise hi uski chetna me aatm bhav prerit ho jata hai vaah aadhyatmik ban jata hai vaah apni aatma ko anubhav karne lagta hai anek aise vyaktiyon ka itihas hai jo nastik the dharm aur ishwar ke bare me bilkul bhi nahi jante the lekin ghatnaon ne unko atmamanthan ki aur le kar unhe unke swatwa ko chetna ko jagrit kiya aur vaah aadhyatmik purushon me sher se jaane jaate hain balmiki angulimal aadi aise hi vyakti the

कोई भी व्यक्ति कभी भी नास्तिक नहीं हो सकता क्योंकि वह अपने अंतःकरण में सत्य की जो भावना है

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

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आपका प्रश्न है क्या नासिक अध्यात्मिक हो सकता है जी हां नास्तिक अध्यात्मिक हो सकता है ठीक है भले ही वह पूजा-पाठ ना करें पूजा अर्चना ना करें दिया बत्ती ना करें लेकिन वह सब की सेवा करता है कि मदद करता है तो वह आध्यात्मिक अध्यात्मिक में ही आ जाएगा ठीक है धन्यवाद

aapka prashna hai kya nashik adhyatmik ho sakta hai ji haan nastik adhyatmik ho sakta hai theek hai bhale hi vaah puja path na kare puja archna na kare diya batti na kare lekin vaah sab ki seva karta hai ki madad karta hai toh vaah aadhyatmik adhyatmik mein hi aa jaega theek hai dhanyavad

आपका प्रश्न है क्या नासिक अध्यात्मिक हो सकता है जी हां नास्तिक अध्यात्मिक हो सकता है ठीक ह

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महेश दुबे

कवि साहित्यकार

0:35

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दरअसल नास्तिकता और आस्तिक का एक ही सिक्के के दो पहलू हैं आर्थिक कहता है पहले मान लो तब तुम उसे जान जाओगे और नास्तिक कहता है पहले मैं उसे जान लूं तब मैं उसे मान लूंगा आस्तिक और नास्तिक का यही फर्क है तो नास्तिक भी आध्यात्मिक होता है वह भी अपने अंदर ढूंढने का प्रयास करता है उस परम सत्ता के बारे में जानने की कोशिश करता है लेकिन मानता तब तक नहीं जब तक है जान और आस्तिक पहले ही मान लेता है और बाद में उसे जानने की कोशिश करता है

darasal nastikata aur astik ka ek hi sikke ke do pahaloo hai aarthik kahata hai pehle maan lo tab tum use jaan jaoge aur nastik kahata hai pehle main use jaan loon tab main use maan lunga astik aur nastik ka yahi fark hai toh nastik bhi aadhyatmik hota hai vaah bhi apne andar dhundhne ka prayas karta hai us param satta ke bare mein jaanne ki koshish karta hai lekin manata tab tak nahi jab tak hai jaan aur astik pehle hi maan leta hai aur baad mein use jaanne ki koshish karta hai

दरअसल नास्तिकता और आस्तिक का एक ही सिक्के के दो पहलू हैं आर्थिक कहता है पहले मान लो तब तुम

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International Yogi

spiritual Guru (Life Coach)

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हां नास्तिक अध्यात्मिक हो सकता है देखिए तो फर्क आस्तिक और नास्तिक में है आप तक सुनी हुई बातों को मान लेता है और जो नास्तिक होता है वह पहले देखना चाहता है और वह केवल अपनी देखी हुई चीजों पर विश्वास करता और फिर मानना शुरू करता है

haan nastik adhyatmik ho sakta hai dekhiye toh fark astik aur nastik mein hai aap tak suni hui baaton ko maan leta hai aur jo nastik hota hai vaah pehle dekhna chahta hai aur vaah keval apni dekhi hui chijon par vishwas karta aur phir manana shuru karta hai

हां नास्तिक अध्यात्मिक हो सकता है देखिए तो फर्क आस्तिक और नास्तिक में है आप तक सुनी हुई बा

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कोई भी व्यक्ति अगर नास्तिक है तो आध्यात्मिक हो सकता है और कोई भी आध्यात्मिक व्यक्ति है तो वह कभी भी नास्तिक हो सकता है इसमें कोई दो राय नहीं है समय बड़ा बलवान होता है और वह व्यक्ति को क्या से क्या बना देता है

koi bhi vyakti agar nastik hai toh aadhyatmik ho sakta hai aur koi bhi aadhyatmik vyakti hai toh vaah kabhi bhi nastik ho sakta hai isme koi do rai nahi hai samay bada balwan hota hai aur vaah vyakti ko kya se kya bana deta hai

कोई भी व्यक्ति अगर नास्तिक है तो आध्यात्मिक हो सकता है और कोई भी आध्यात्मिक व्यक्ति है तो

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Veer Bhupinder Singh Ji

The Visionary, www.thelivingtreasure.org

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देखिए स्तुति वाले टीका मैना अगर लोगों ने यह बदायूं तहसील कुलपहाड़ जिसका नंबर रिचुअल्स उसके चेले आ सकता उसको नहीं बोलते हैं लेकिन कोई इंसान बोले मैं भगवान को नहीं मानता और लॉस ऑफ नेचर को पौधों को इंसान नासिक है ही नहीं तुम मेरी नजर में दुनिया में ऐसी कोई हो ही नहीं सकता जो इंसान नौटंकी बन सकता है हाथों से नहीं चलता रोटी नहीं खाता अपने मुंह से खाता है इसका मतलब वह जाने अनजाने में प्रेग्नेंट को पाकिस्तान से नासिक कोई हो ही नहीं सकता जिसको दुनिया ने नागपुर का लेबल दिया है अगर वह आइडियल से शादी है तो वह नास्तिक नहीं है चाहे वह अपनी जुबान से बोले कि मैं तो बहुत क्योंकि उसके ना कहने से ही आए दिन की तस्वीरों को नहीं छोड़ता वर्ल्ड कप के कहने से क्या होता है उसको बोलते हैं कि भगवान हमारे शरीर करने का मूड नहीं है उसी के मना करने के किसी के हाथ में किताब मस्तानी डिफेंस कि वह आईपीएल के साथ सेक्स करता है तो वह आइडियल की बची की प्रैक्टिस कर रहा है तो वह नास्तिक नहीं है

dekhiye stuti waale tika maina agar logo ne yah badayun tehsil kulpahar jiska number rituals uske chele aa sakta usko nahi bolte hai lekin koi insaan bole main bhagwan ko nahi manata aur loss of nature ko paudho ko insaan nashik hai hi nahi tum meri nazar mein duniya mein aisi koi ho hi nahi sakta jo insaan nautanki ban sakta hai hathon se nahi chalta roti nahi khaata apne mooh se khaata hai iska matlab vaah jaane anjaane mein pregnant ko pakistan se nashik koi ho hi nahi sakta jisko duniya ne nagpur ka lebal diya hai agar vaah ideal se shadi hai toh vaah nastik nahi hai chahen vaah apni jubaan se bole ki main toh bahut kyonki uske na kehne se hi aaye din ki tasviron ko nahi chodta world cup ke kehne se kya hota hai usko bolte hai ki bhagwan hamare sharir karne ka mood nahi hai usi ke mana karne ke kisi ke hath mein kitab mastani defence ki vaah IPL ke saath sex karta hai toh vaah ideal ki bachi ki practice kar raha hai toh vaah nastik nahi hai

देखिए स्तुति वाले टीका मैना अगर लोगों ने यह बदायूं तहसील कुलपहाड़ जिसका नंबर रिचुअल्स उसके

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Harish Chand

Social Worker

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आपका सवाल है कि क्या कोई नास्तिक आदमी आध्यात्मिक हो सकता है कि नहीं नास्तिक आदमी आध्यात्मिक नहीं हो सकता है क्योंकि अगर वह आध्यात्मिक होगा तो आस्तिक होगा ना कि नाश्ते नास्तिक इस परमात्मा की बुनाई सिस्टर को नहीं मानता है वह विज्ञान को ही सब कुछ मानता है जबकि उसको यह नहीं पता कि उसके शरीर में वह चीज है जिसके कर्मों खाना खाता हाथ पर चलाता है वह सब परमात्मा की दी हुई चीज है अगर गहराई में कोई नाश्ते की चाहेगा और उसको सही मार्ग मिलेगा हो सकता है कि वह आध्यात्मिक हो जाए ठीक है मित्रों

aapka sawaal hai ki kya koi nastik aadmi aadhyatmik ho sakta hai ki nahi nastik aadmi aadhyatmik nahi ho sakta hai kyonki agar vaah aadhyatmik hoga toh astik hoga na ki naste nastik is paramatma ki bunaii sister ko nahi maanta hai vaah vigyan ko hi sab kuch maanta hai jabki usko yah nahi pata ki uske sharir mein vaah cheez hai jiske karmon khana khaata hath par chalata hai vaah sab paramatma ki di hui cheez hai agar gehrai mein koi naste ki chahega aur usko sahi marg milega ho sakta hai ki vaah aadhyatmik ho jaaye theek hai mitron

आपका सवाल है कि क्या कोई नास्तिक आदमी आध्यात्मिक हो सकता है कि नहीं नास्तिक आदमी आध्यात्मि

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अतर सिंह राष्ट्रीय अध्यक्ष हो सकता है नासिक के पूरे चांस होता चाहते क्योंकि जो इसे मान लिया उसकी कुछ खत्म हो गया खुशी होती है देखो चालू रहती है कि भगवान है यह सब है उसकी खोज नहीं होती है तो उसकी खोज नहीं होने के कारण वही का वही रहता है

ater Singh rashtriya adhyaksh ho sakta hai nashik ke poore chance hota chahte kyonki jo ise maan liya uski kuch khatam ho gaya khushi hoti hai dekho chaalu rehti hai ki bhagwan hai yah sab hai uski khoj nahi hoti hai toh uski khoj nahi hone ke karan wahi ka wahi rehta hai

अतर सिंह राष्ट्रीय अध्यक्ष हो सकता है नासिक के पूरे चांस होता चाहते क्योंकि जो इसे मान लिय

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Anil Kumar

Fashion Expert

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आपने कहा क्या नास्तिक आध्यात्मिक हो सकता है बिल्कुल हो सकता है नास्तिक का मतलब यह नहीं कि कोई आदमी अगर किसी कोई पूजा पाठ नहीं करता तो इसका मतलब यह नहीं कि मासिक नास्तिक तो कोई हो ही नहीं सकता

aapne kaha kya nastik aadhyatmik ho sakta hai bilkul ho sakta hai nastik ka matlab yah nahi ki koi aadmi agar kisi koi puja path nahi karta toh iska matlab yah nahi ki maasik nastik toh koi ho hi nahi sakta

आपने कहा क्या नास्तिक आध्यात्मिक हो सकता है बिल्कुल हो सकता है नास्तिक का मतलब यह नहीं कि

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Narendra Bhardwaj

Spirituality Reformer

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क्या नास्तिक आध्यात्मिक हो सकता है बिल्कुल हो सकता है जीवन में कुछ ऐसी घटनाएं हैं जो आदमी को कभी भी बदल सकती है कभी भी अभी स्वास्थ्य विश्वास हो सकता है नाचते हुए जिसे ईश्वर पर भरोसा नहीं है जो ईश्वर को नहीं मानता है लेकिन यदि उसके जीवन में कुछ ऐसी घटना हो जाए सब कुछ करो उसका बालक बीमार हो जाए और वह असहाय हो जाए वह सब तरफ से निराश हो जाए और किसी की सलाह पर किसी की बात पर किसी की प्रेरणा से को ईश्वर में जाके मंदिर में जाकर या किसी ईश्वर के पास जाकर वह प्रार्थना करके प्रभु मेरा बालक स्वस्थ हो जाए मैं आपको कभी नहीं भूलूंगा और अगर उसका बालक स्वस्थ हो जाता है तब आप कल्पना कीजिए कि जो आदमी कभी ईश्वर को नहीं मानता था क्या पर वह मानेगा मेरा मत है कि वह मानेगा क्यों क्योंकि उसे विश्वास हो गया कि ईश्वर से प्रार्थना करने पर मेरा बालक स्वस्थ हो गया खतना जीवन में आदमी का स्वभाव बदल सकती है कोई एक छोटी सी चीज भी आदमी को नास्तिक से आशिक बना सकती है कोई एक छोटा सा सहयोग कोई एक छोटी सी प्रेरणा तो कभी भी नास्तिक प्लास्टिक बन सकता है कभी आध्यात्मिक हो सकता है यह तो जब ईश्वर को चाहना है कि इसे आस्तिक करना है तो वह ऐसी घटना जीवन में घटित कर देंगे कि वह आध्यात्मिक हो जाएगा क्योंकि सूची जगत बहुत बड़ा नासिक से आध्यात्मिक हुआ जा सकता है कोई बड़ी बात नहीं है धन्यवाद

kya nastik aadhyatmik ho sakta hai bilkul ho sakta hai jeevan me kuch aisi ghatnaye hain jo aadmi ko kabhi bhi badal sakti hai kabhi bhi abhi swasthya vishwas ho sakta hai naachte hue jise ishwar par bharosa nahi hai jo ishwar ko nahi maanta hai lekin yadi uske jeevan me kuch aisi ghatna ho jaaye sab kuch karo uska balak bimar ho jaaye aur vaah asahay ho jaaye vaah sab taraf se nirash ho jaaye aur kisi ki salah par kisi ki baat par kisi ki prerna se ko ishwar me jake mandir me jaakar ya kisi ishwar ke paas jaakar vaah prarthna karke prabhu mera balak swasth ho jaaye main aapko kabhi nahi bhulunga aur agar uska balak swasth ho jata hai tab aap kalpana kijiye ki jo aadmi kabhi ishwar ko nahi maanta tha kya par vaah manega mera mat hai ki vaah manega kyon kyonki use vishwas ho gaya ki ishwar se prarthna karne par mera balak swasth ho gaya khatana jeevan me aadmi ka swabhav badal sakti hai koi ek choti si cheez bhi aadmi ko nastik se aashik bana sakti hai koi ek chota sa sahyog koi ek choti si prerna toh kabhi bhi nastik plastic ban sakta hai kabhi aadhyatmik ho sakta hai yah toh jab ishwar ko chaahana hai ki ise astik karna hai toh vaah aisi ghatna jeevan me ghatit kar denge ki vaah aadhyatmik ho jaega kyonki suchi jagat bahut bada nashik se aadhyatmik hua ja sakta hai koi badi baat nahi hai dhanyavad

क्या नास्तिक आध्यात्मिक हो सकता है बिल्कुल हो सकता है जीवन में कुछ ऐसी घटनाएं हैं जो आदमी

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guddu das

You Tuber

1:05
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प्रश्न है क्या नास्तिक अध्यात्मिक हो सकता है हो सकता है क्योंकि अध्यात्मिक संसार में जो आध्यात्मिक जगत से जुड़े होते जो सत्य को मानने वाले होते हैं वह ना सुना स्टिक का मतलब होता है नाशवान वस्तु जो संसार में सब कुछ दिख रहा है वह नाशवान है इसलिए नास्तिक चीजों पर जो विश्वास करते हैं वह यहां तक कि आध्यात्मिक जगत वाले कभी नाशवान वस्तुओं पर विश्वास नहीं करते इसलिए नास्तिक अध्यात्मिक हो सकता है क्योंकि नास्तिक जोना समान वस्तु को ना मानकर संसार में जो भी खुश दिख रहा है वह सारी वस्तुएं बेचने वाली है वह नाशवान है इसलिए अध्यात्मिक जो सत्यता होता जो सत्य को जानने वाला होता है जो गुरु के द्वारा ज्ञान लेकर आध्यात्मिक जगत पर चलने वाला आता है वही इसलिए नास्तिक अध्यात्मिक हो सकता है

prashna hai kya nastik adhyatmik ho sakta hai ho sakta hai kyonki adhyatmik sansar me jo aadhyatmik jagat se jude hote jo satya ko manne waale hote hain vaah na suna stick ka matlab hota hai nashvan vastu jo sansar me sab kuch dikh raha hai vaah nashvan hai isliye nastik chijon par jo vishwas karte hain vaah yahan tak ki aadhyatmik jagat waale kabhi nashvan vastuon par vishwas nahi karte isliye nastik adhyatmik ho sakta hai kyonki nastik joanna saman vastu ko na maankar sansar me jo bhi khush dikh raha hai vaah saari vastuyen bechne wali hai vaah nashvan hai isliye adhyatmik jo satyata hota jo satya ko jaanne vala hota hai jo guru ke dwara gyaan lekar aadhyatmik jagat par chalne vala aata hai wahi isliye nastik adhyatmik ho sakta hai

प्रश्न है क्या नास्तिक अध्यात्मिक हो सकता है हो सकता है क्योंकि अध्यात्मिक संसार में जो आध

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जय श्री राम मैं हूं संदीप बेटियों का शिक्षक बात करते हैं आपके सवाल कि क्या नास्तिक अध्यात्मिक हो सकता है देखिए ऐसा है कि पहले तू नास्तिक और आस्तिक यह क्या चीज होती है कि समझना बहुत जरूरी है क्योंकि यहां पर आप ईश्वर को लेकर आ रहे हैं योग में जब आप आध्यात्म करकट आध्यात्म का मतलब होता है आपको खुद का ध्यान करना अब खुद का ध्यान करते हैं उसे अध्यात्म जाते हैं तो यहां आस्तिक और नास्तिक वाली बात आती ही नहीं है जय श्री राम

jai shri ram main hoon sandeep betiyon ka shikshak baat karte hain aapke sawaal ki kya nastik adhyatmik ho sakta hai dekhiye aisa hai ki pehle tu nastik aur astik yah kya cheez hoti hai ki samajhna bahut zaroori hai kyonki yahan par aap ishwar ko lekar aa rahe hain yog me jab aap aadhyatm karakat aadhyatm ka matlab hota hai aapko khud ka dhyan karna ab khud ka dhyan karte hain use adhyaatm jaate hain toh yahan astik aur nastik wali baat aati hi nahi hai jai shri ram

जय श्री राम मैं हूं संदीप बेटियों का शिक्षक बात करते हैं आपके सवाल कि क्या नास्तिक अध्यात्

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Radha Rangoli

Holistic Healer And Energy Therapist

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क्या नास्तिक आध्यात्मिक हो सकता है जी हां बिल्कुल नास्तिक ही सच्चा आध्यात्मिक हो सकता है जी हां क्योंकि एक नास्तिक जब जानकर ईश्वर को मानता है तो वह सच्चा आध्यात्मिक होता है क्योंकि अभी तक कहीं ना कहीं हमारे अंदर हम जो ईश्वर को मानते हैं वह डर के डर से मानते हैं कि ईश्वर हमारे साथ यह बुरा कर देंगे अगर हम ईश्वर का नाम ले लेंगे तो हमारे साथ यह बुरा होगा वह बुरा होगा इस तरीके से अगर आप इस पर को मानते हैं तो आप बिल्कुल भी आधारित नहीं है लेकिन आप जब जानते हैं उसके बाद ईश्वर को मानते हैं तो आप सच्चे आध्यात्मिक बनते हैं इसीलिए एक नास्तिक बिल्कुल सच्चा आशिक हो सकता है थैंक यू सो मच

kya nastik aadhyatmik ho sakta hai ji haan bilkul nastik hi saccha aadhyatmik ho sakta hai ji haan kyonki ek nastik jab jaankar ishwar ko manata hai toh vaah saccha aadhyatmik hota hai kyonki abhi tak kahin na kahin hamare andar hum jo ishwar ko maante hai vaah dar ke dar se maante hai ki ishwar hamare saath yah bura kar denge agar hum ishwar ka naam le lenge toh hamare saath yah bura hoga vaah bura hoga is tarike se agar aap is par ko maante hai toh aap bilkul bhi aadharit nahi hai lekin aap jab jante hai uske baad ishwar ko maante hai toh aap sacche aadhyatmik bante hai isliye ek nastik bilkul saccha aashik ho sakta hai thank you so match

क्या नास्तिक आध्यात्मिक हो सकता है जी हां बिल्कुल नास्तिक ही सच्चा आध्यात्मिक हो सकता है ज

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Vimla Bidawatka

Spiritual Thinker

2:13
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आपका प्रश्न है कि क्या नास्तिक आध्यात्मिक हो सकता है तो हां हो सकता है नाश्ते को आध्यात्मिक दोनों अलग-अलग चीजें नास्तिक उसे कहते हैं जिसको भगवान पर विश्वास नहीं कोई बात नहीं है जरूरी नहीं है बहुत लोगों को है जिनको भगवान पर विश्वास नहीं है तो इसीलिए लेकिन कोई तो एक सकता है जो उनको चला रही है कोई ऐसी पावर है जो उनको चलाती है सारी बोल्ड को चला रही है फिलहाल जो अभी कोरोनावायरस साफ पूरी दुनिया में फैला हुआ है तो यह कैसे करके फैला और कैसे निकलेगा बहुत सारे स्क्रीन पर सोचने की जरूरत है कि किस प्रकार से हुआ और अध्यात्मिक उसको बोलते जो आध्यात्मिक अपना अध्ययन करें मतलब कि जैसे विपासना के बारे में बताया गया है कि अपना अध्ययन मतलब खुद जाने वह किस समय मुझे दुख हो रहा है कि समय मुझे सुख हो रहा है मुझे किस बातों से मां लग रहा है कि से अपमान लग रहा है और उसको कैसे हो और काम करते हैं मतलब अगर मान मिल जाए तो खुश नहीं होते अपमान मिल जाए तो दुखी नहीं होती है क्योंकि यह तो शरीर है इसको कभी मान भी मिलेगा मानदेय मिलेगा जिसमें कभी अच्छा भी लगेगा कभी बुरा भी लेते जा अध्यात्मिक उसको बोलते हैं जो आत्मा का अध्ययन करें आत्मा का अध्यन करना मतलब किस शरीर का अध्यन करना शरीर का अध्ययन करने का मतलब है इस शरीर से क्या गलत क्या सही काम हो रहा है उसकी जानकारी उसको होनी चाहिए अगर जानकारी रखता है कि जैसे अगर उसके मन में किसी के लिए गलत आ पाया तो मैं उसको ऐसा लगेगा कि कुछ गलत संवेदना आ रही है कुछ गलत हो रहा है मेरे तुम यह जो मत सोचना इसको जालना इसको अध्यात्मिक बोलते थे ₹2000 जानने लगेगा तो मन से किसी को कुछ गलत बोलेगा नहीं मुंह से कुछ गलत नहीं बोलेगा उसके हाथों से कुछ गलत काम नहीं करेगा इसको अध्यात्मिक बोलते हैं तो नास्तिक को अध्यात्मिक का कोई संबंध नहीं है और नास्तिक भी अध्यात्मिक हो सकता है

aapka prashna hai ki kya nastik aadhyatmik ho sakta hai toh haan ho sakta hai naste ko aadhyatmik dono alag alag cheezen nastik use kehte hain jisko bhagwan par vishwas nahi koi baat nahi hai zaroori nahi hai bahut logo ko hai jinako bhagwan par vishwas nahi hai toh isliye lekin koi toh ek sakta hai jo unko chala rahi hai koi aisi power hai jo unko chalati hai saari bold ko chala rahi hai filhal jo abhi coronavirus saaf puri duniya me faila hua hai toh yah kaise karke faila aur kaise niklega bahut saare screen par sochne ki zarurat hai ki kis prakar se hua aur adhyatmik usko bolte jo aadhyatmik apna adhyayan kare matlab ki jaise vipaasana ke bare me bataya gaya hai ki apna adhyayan matlab khud jaane vaah kis samay mujhe dukh ho raha hai ki samay mujhe sukh ho raha hai mujhe kis baaton se maa lag raha hai ki se apman lag raha hai aur usko kaise ho aur kaam karte hain matlab agar maan mil jaaye toh khush nahi hote apman mil jaaye toh dukhi nahi hoti hai kyonki yah toh sharir hai isko kabhi maan bhi milega manday milega jisme kabhi accha bhi lagega kabhi bura bhi lete ja adhyatmik usko bolte hain jo aatma ka adhyayan kare aatma ka adhyan karna matlab kis sharir ka adhyan karna sharir ka adhyayan karne ka matlab hai is sharir se kya galat kya sahi kaam ho raha hai uski jaankari usko honi chahiye agar jaankari rakhta hai ki jaise agar uske man me kisi ke liye galat aa paya toh main usko aisa lagega ki kuch galat samvedana aa rahi hai kuch galat ho raha hai mere tum yah jo mat sochna isko jalna isko adhyatmik bolte the Rs jaanne lagega toh man se kisi ko kuch galat bolega nahi mooh se kuch galat nahi bolega uske hathon se kuch galat kaam nahi karega isko adhyatmik bolte hain toh nastik ko adhyatmik ka koi sambandh nahi hai aur nastik bhi adhyatmik ho sakta hai

आपका प्रश्न है कि क्या नास्तिक आध्यात्मिक हो सकता है तो हां हो सकता है नाश्ते को आध्यात्मि

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