क्या नॉन-वेज खाने से हमारी आध्यात्मिक आभा नष्ट हो जाती है?...


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Vinita Mishra

Meditation

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ऐसे और सवाल
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BK Kalyani

Teacher On Rajyoga Spiritual Knowledge

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्वेश्चन है आपकी बहुत अच्छी क्वेश्चन है क्या नंद भेज खाने से हमारी याद आती है आधा नष्ट हो जाती हां जी बिल्कुल बिल्कुल जो जाती है आप अगर भक्ति मार्ग में उपवास करते हो पूजा करते हो मंदिर में जाते हो तो स्नान करके जाते हो और उसी वक्त अगर कोई मर जाता है और उसके घर से गुजरते हैं और उस घर के व्यक्ति किसी ने अगर आपको छोड़ दिया तो क्या कहते हो मैं अपवित्र हो क्या वह व्यक्ति मर गया है मर गया है उसके शरीर से आत्मा निकल गई हो तो हमारी तरफ मानो था ना तो कहते हम चुप हो गए गन्ना है मंदिर पी जाएंगे अगर घर पर कोई जानवर यानी चूहा मर जाए यह कुत्ता मिल जाए उसे हम सफाई करते फेंक देते हैं और उसी वस्त्रम पूजा के मंदिर में प्रवेश नहीं करते पूजा के घर में प्रवेश नहीं करते क्या मौजूद हो गए हैं आएंगे जब तक नहीं तुमको जाने कर सकते हैं अशुद्ध हो गए हैं उसके शरीर को हमने छुआ है उसकी भोजन थोड़ी क्रांति है जूतों के यम पूजा नहीं कर सकते मंदिर में नहीं जा सकते जो मरने वाले व्यक्ति आत्मा छोड़ कर चली गई दूसरे व्यक्ति उसके पास उसके घर पर गया है उसके लाभ कुछ हुआ नहीं है बस उस घर पर है उस घर से निकल कर में छूट गया तो हम भ्रष्ट हो गया पवित्र हो गए हमें सलाम करना होगा अलग से स्नान करते हैं तो फिर हम तो इस नानवेज को अपने पेट में डालते हैं भाई तो हमारी आदत में क्यों नहीं भ्रष्ट होगी क्यों नहीं नष्ट होगी जब हम उन चीजों के अपने नियम करते हैं और इसे तो अपने पेट में डालते हैं हो जाता है

question hai aapki bahut achi question hai kya nand bhej khane se hamari yaad aati hai aadha nasht ho jaati haan ji bilkul bilkul jo jaati hai aap agar bhakti marg me upvaas karte ho puja karte ho mandir me jaate ho toh snan karke jaate ho aur usi waqt agar koi mar jata hai aur uske ghar se gujarate hain aur us ghar ke vyakti kisi ne agar aapko chhod diya toh kya kehte ho main apavitra ho kya vaah vyakti mar gaya hai mar gaya hai uske sharir se aatma nikal gayi ho toh hamari taraf maano tha na toh kehte hum chup ho gaye ganna hai mandir p jaenge agar ghar par koi janwar yani chuha mar jaaye yah kutta mil jaaye use hum safaai karte fenk dete hain aur usi vastram puja ke mandir me pravesh nahi karte puja ke ghar me pravesh nahi karte kya maujud ho gaye hain aayenge jab tak nahi tumko jaane kar sakte hain ashuddh ho gaye hain uske sharir ko humne chhua hai uski bhojan thodi kranti hai jooton ke yum puja nahi kar sakte mandir me nahi ja sakte jo marne waale vyakti aatma chhod kar chali gayi dusre vyakti uske paas uske ghar par gaya hai uske labh kuch hua nahi hai bus us ghar par hai us ghar se nikal kar me chhut gaya toh hum bhrasht ho gaya pavitra ho gaye hamein salaam karna hoga alag se snan karte hain toh phir hum toh is nanvej ko apne pet me daalte hain bhai toh hamari aadat me kyon nahi bhrasht hogi kyon nahi nasht hogi jab hum un chijon ke apne niyam karte hain aur ise toh apne pet me daalte hain ho jata hai

क्वेश्चन है आपकी बहुत अच्छी क्वेश्चन है क्या नंद भेज खाने से हमारी याद आती है आधा नष्ट हो

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है क्या नॉनवेज खाने से हमारी आध्यात्मिक आवा नष्ट हो जाती है तो इस संदर्भ में इतना कहना चाहूंगा कि वास्तव में इसमें नॉनवेज खाने से हमारे आध्यात्मिक आवर नष्ट होती है इसके पीछे बहुत बड़ा कारण है और इसके पीछे सिर्फ और सिर्फ एक कारण है कि परमात्मा ने और प्रकृति ने हमें खाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था दिए हमें अपना भोजन खुद परमात्मा ने अपने हाथों से परीक्षा है प्रकृति के रूप में तो और प्रकृति के द्वारा बनाई हुई जो चीजें हैं मनुष्य को दी गई है खाने के लिए उनको छोड़कर अब उन प्राणियों को खाते हैं जो इस प्रकृति ने आप को उपहार स्वरूप में अपना जीवन जीने के लिए प्रदान किए गए और अपना जीवन उनको जीने का भी अधिकार है अब उन चीजों को खाते हैं जिनको खुद इस दुनिया में रहने का अधिकार है उनकी संपूर्ण जीवन कौन को खत्म कर देते हो तो निश्चित ही आपको इस चीज का प्रायश्चित भुगतना पड़ता है इसका पापा आपको लगता है कि आप किसी भी प्राणी को खाते हो तो आपको इसका अधिकार नहीं है इसका हक अधिकार परमात्मा ने और प्रकृति ने आपको नहीं दिया है कि परमात्मा ने आपको इतनी सारी चीजें खाने के लिए भी हैं जो सिर्फ मनुष्य के लिए बनाई गई हैं अलग से ही बनाई है परमात्मा ने ताकि आप कभी किसी जीव जंतुओं को ना खाएं नानवेज ना खाएं हैं जितना कुछ है परमात्मा ने इतने सुंदर सुंदर फल दिए हैं खाने के लिए इतनी अच्छी-अच्छी सब्जियां दिए हैं दूध दही और न जाने कितने अच्छे-अच्छे पदार्थ भी आपको खाने के लिए जिसमें किसी भी प्रकार के जीव की हिंसा नहीं है फिर भी अगर आप नॉनवेज खाते हैं मांसाहारी भोजन करते हैं तो इससे आपकी आवाज तो नष्ट होती है और वास्तव में कहीं न कहीं इसका पावर इसका प्रायश्चित आप को भुगतना पड़ता है आपका जो जन्म होता है ईश्वर को जानने के लिए होता है ईश्वर को मानने के लिए होता है परमात्मा के दर्शन करने के लिए होता है कि जो व्यक्ति मांसाहारी होता है नॉनवेज बच्चे मन करता है वह ईश्वर तक उस परमात्मा तक उस परम शक्ति तक कभी नहीं पहुंच सकता और परम शक्ति तक अगर पहुंच भी जाता है तो फिर भी नॉनवेज को हाथ नहीं लगा सकता उसके अंदर फिर स्थिति ऐसी गंभीर हो जाती है कि वह फिर नानवेज को कभी सपने में भी उसको भक्षण करने की कल्पना भी नहीं कर सकता तक पहुंचने के बाद तो असंभव है कि वह नॉनवेज खाए परमात्मा को जानने के बाद मानने के बाद उसे सुनने सोचने समझने और महसूस करने के बाद उसके बाद की स्थिति यह है तो यही स्थिति पहले भी होना चाहिए तभी आप ईश्वर तक पहुंच सकते हैं परमात्मा तक पहुंच सकते हैं और उसका अनुभव कर सकते हैं तो इससे हमारी सलाह ईश्वर ने आपको बहुत कुछ दिया खाने के लिए बहुत ही पौष्टिक चीजें दी हैं और बहुत ही ताकतवर चीजें परमात्मा ने आप को दे रखी का सेवन करें तो बहुत अच्छा होगा इससे किसी चीज की हिंसा भी नहीं होगी किसी भी जीत की जीत की बद्दुआ नहीं लगेगी आपको किसी को तकलीफ नहीं होगी इससे और आप जीवन भी सफल होगा सुखद होगा और इस तरीके से आपको ही जीवन में कोई तकलीफ की घड़ियां नहीं आएंगे ठीक है ना तो मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि नॉनवेज हनी से बात तो हमारे आदमी आध्यात्मिक बाबा नष्ट होती है ना खाएं यही मेरा आपसे आग्रह लगाएंगे तो आपके लिए अच्छा है और खाएंगे तो कहीं ना कहीं गलत तो है वह मैं इतना मानता हूं नॉनवेज आपके लिए नहीं बना है ना आपके लिए तो बहुत सारी चीजें ऐसी परमात्मा ने खुद ने बनाई है प्रकृति अपने बच्चों के लिए आकर्षित हो आपका जीवन सफल सुखद होगा और आनंदित होगा तुम्हें इतना ही कहना चाहूंगी आप कौन कहना चाहूंगा कि नानवेज ना खाएं आप इस यात्रा जाति का बाप की सर से आप दूर होते हैं परमात्मा की गरीबा पहुंच ले पाते हैं तो आपके सवाल का जवाब यही है कि नॉनवेज खाने से मारी आध्यात्मिक आवा नष्ट हो जाती है तो वास्तव में हो जाती है तो मेरा करारा जवाब आपको अच्छा लगा हो तो इसके लिए मैं बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं जय जय श्री राधे जय श्री राम

aapka sawaal hai kya nonveg khane se hamari aadhyatmik ava nasht ho jaati hai toh is sandarbh me itna kehna chahunga ki vaastav me isme nonveg khane se hamare aadhyatmik hour nasht hoti hai iske peeche bahut bada karan hai aur iske peeche sirf aur sirf ek karan hai ki paramatma ne aur prakriti ne hamein khane ke liye paryapt vyavastha diye hamein apna bhojan khud paramatma ne apne hathon se pariksha hai prakriti ke roop me toh aur prakriti ke dwara banai hui jo cheezen hain manushya ko di gayi hai khane ke liye unko chhodkar ab un praniyo ko khate hain jo is prakriti ne aap ko upahar swaroop me apna jeevan jeene ke liye pradan kiye gaye aur apna jeevan unko jeene ka bhi adhikaar hai ab un chijon ko khate hain jinako khud is duniya me rehne ka adhikaar hai unki sampurna jeevan kaun ko khatam kar dete ho toh nishchit hi aapko is cheez ka prayashchit bhugatna padta hai iska papa aapko lagta hai ki aap kisi bhi prani ko khate ho toh aapko iska adhikaar nahi hai iska haq adhikaar paramatma ne aur prakriti ne aapko nahi diya hai ki paramatma ne aapko itni saari cheezen khane ke liye bhi hain jo sirf manushya ke liye banai gayi hain alag se hi banai hai paramatma ne taki aap kabhi kisi jeev jantuon ko na khayen nanvej na khayen hain jitna kuch hai paramatma ne itne sundar sundar fal diye hain khane ke liye itni achi achi sabjiyan diye hain doodh dahi aur na jaane kitne acche acche padarth bhi aapko khane ke liye jisme kisi bhi prakar ke jeev ki hinsa nahi hai phir bhi agar aap nonveg khate hain masahari bhojan karte hain toh isse aapki awaaz toh nasht hoti hai aur vaastav me kahin na kahin iska power iska prayashchit aap ko bhugatna padta hai aapka jo janam hota hai ishwar ko jaanne ke liye hota hai ishwar ko manne ke liye hota hai paramatma ke darshan karne ke liye hota hai ki jo vyakti masahari hota hai nonveg bacche man karta hai vaah ishwar tak us paramatma tak us param shakti tak kabhi nahi pohch sakta aur param shakti tak agar pohch bhi jata hai toh phir bhi nonveg ko hath nahi laga sakta uske andar phir sthiti aisi gambhir ho jaati hai ki vaah phir nanvej ko kabhi sapne me bhi usko bhakshan karne ki kalpana bhi nahi kar sakta tak pahuchne ke baad toh asambhav hai ki vaah nonveg khaye paramatma ko jaanne ke baad manne ke baad use sunne sochne samjhne aur mehsus karne ke baad uske baad ki sthiti yah hai toh yahi sthiti pehle bhi hona chahiye tabhi aap ishwar tak pohch sakte hain paramatma tak pohch sakte hain aur uska anubhav kar sakte hain toh isse hamari salah ishwar ne aapko bahut kuch diya khane ke liye bahut hi paushtik cheezen di hain aur bahut hi takatwar cheezen paramatma ne aap ko de rakhi ka seven kare toh bahut accha hoga isse kisi cheez ki hinsa bhi nahi hogi kisi bhi jeet ki jeet ki baddua nahi lagegi aapko kisi ko takleef nahi hogi isse aur aap jeevan bhi safal hoga sukhad hoga aur is tarike se aapko hi jeevan me koi takleef ki ghadiyan nahi aayenge theek hai na toh main itna hi kehna chahunga ki nonveg honey se baat toh hamare aadmi aadhyatmik baba nasht hoti hai na khayen yahi mera aapse agrah lagayenge toh aapke liye accha hai aur khayenge toh kahin na kahin galat toh hai vaah main itna maanta hoon nonveg aapke liye nahi bana hai na aapke liye toh bahut saari cheezen aisi paramatma ne khud ne banai hai prakriti apne baccho ke liye aakarshit ho aapka jeevan safal sukhad hoga aur anandit hoga tumhe itna hi kehna chahungi aap kaun kehna chahunga ki nanvej na khayen aap is yatra jati ka baap ki sir se aap dur hote hain paramatma ki gariba pohch le paate hain toh aapke sawaal ka jawab yahi hai ki nonveg khane se mari aadhyatmik ava nasht ho jaati hai toh vaastav me ho jaati hai toh mera karara jawab aapko accha laga ho toh iske liye main bahut bahut dhanyavad deta hoon jai jai shri radhe jai shri ram

आपका सवाल है क्या नॉनवेज खाने से हमारी आध्यात्मिक आवा नष्ट हो जाती है तो इस संदर्भ में इतन

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

राजनीति करने से हमारी आध्यात्मिक दृष्टि नहीं होती है और आज जब आप मेरे से आपकी आवाज नष्ट नहीं होगी यह बिल्कुल गलत बात है आध्यात्मिक शक्ति है आपके अंदर आत्म चेतना और आपके ज्ञान के आधार पर और कभी भी नष्ट नहीं होती है

raajneeti karne se hamari aadhyatmik drishti nahi hoti hai aur aaj jab aap mere se aapki awaaz nasht nahi hogi yah bilkul galat baat hai aadhyatmik shakti hai aapke andar aatm chetna aur aapke gyaan ke aadhaar par aur kabhi bhi nasht nahi hoti hai

राजनीति करने से हमारी आध्यात्मिक दृष्टि नहीं होती है और आज जब आप मेरे से आपकी आवाज नष्ट नह

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Shailesh Kumar Dubey

Yoga Teacher , Retired Government Employee

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मुस्कान आपका पसंद है क्या नॉनवेज खाने से हमारी अदा आत्मिक आभार नष्ट हो जाती है लिखित खानपान कहीं ना कहीं हमारा अपना व्यक्तिगत निर्णय है परंतु यह मान के चलिए कि यदि आप अध्यात्म के रास्ते पर चल रहे हैं तो आपको बेजुबान जानवरों पक्षियों पर कहीं ना कहीं दया / / रखना होगा यदि वैभव आपके अंदर नहीं है तो कहीं ना कहीं कुछ समस्या आपको अध्यात्म के रास्ते में आगे बढ़ने से रोक सकती है परंतु यह किसी का व्यक्तिगत कई लोग नॉनवेज खा कर भी अगर पाते हैं तो उनकी अपनी चीजें हैं परंतु 999 पर्सेंट लोग इस तरह की चीजों को नहीं कर पाते इसलिए आध्यात्मिक रास्ते पर चलते हुए जहां तक हो सके इन चीजों से दूर रहे अब आप कुछ गुरुओं का नाम लेंगे कुछ लोगों का नाम लेंगे जिन्होंने इस तरह की चीजें करते हुए भी अध्यात्म के रास्ते को पा लिया वह कुछ अपवाद होते हैं हर कोई अब बात भी बन सकता लाखों लाखों लोग जो नहीं खा रहे वह पूछ रहे हैं और एक दो लोग अगर खाकर पहुंच गए तो वह अपवाद है तो आप बात बनने की कोशिश मत कीजिए क्योंकि अब बात कभी कभी हो भी सकता है और ज्यादातर नहीं होता धन्यवाद

muskaan aapka pasand hai kya nonveg khane se hamari ada atmik abhar nasht ho jaati hai likhit khanpan kahin na kahin hamara apna vyaktigat nirnay hai parantu yah maan ke chaliye ki yadi aap adhyaatm ke raste par chal rahe hain toh aapko bezubaan jaanvaro pakshiyo par kahin na kahin daya rakhna hoga yadi vaibhav aapke andar nahi hai toh kahin na kahin kuch samasya aapko adhyaatm ke raste me aage badhne se rok sakti hai parantu yah kisi ka vyaktigat kai log nonveg kha kar bhi agar paate hain toh unki apni cheezen hain parantu 999 percent log is tarah ki chijon ko nahi kar paate isliye aadhyatmik raste par chalte hue jaha tak ho sake in chijon se dur rahe ab aap kuch guruon ka naam lenge kuch logo ka naam lenge jinhone is tarah ki cheezen karte hue bhi adhyaatm ke raste ko paa liya vaah kuch apavad hote hain har koi ab baat bhi ban sakta laakhon laakhon log jo nahi kha rahe vaah puch rahe hain aur ek do log agar khakar pohch gaye toh vaah apavad hai toh aap baat banne ki koshish mat kijiye kyonki ab baat kabhi kabhi ho bhi sakta hai aur jyadatar nahi hota dhanyavad

मुस्कान आपका पसंद है क्या नॉनवेज खाने से हमारी अदा आत्मिक आभार नष्ट हो जाती है लिखित खानपा

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नॉनवेज खाने से हमारी आध्यात्मिक अर्बनदर्ट हो जाती है जी हां मनोज खाने से हमारी आध्यात्मिक अपन नष्ट हो जाती है जो सोचते हैं वह पॉजिटिव नहीं सोच पाते नेगेटिव सबसे ज्यादा सोचते हैं ठीक है और जब भी देखो तब भी किसी का अच्छा करने में आपका मन नहीं होगा बुरा ही अब सबका चाहोगे ठीक है कभी कबार अपने फैमिली को भी अब बुरा चाहते हो तो नॉनवेज खाने में बहुत प्रॉब्लम होती है ठीक है चैट में सबसे धर्म के हिसाब से आपको भी नॉनवेज मत खाइए ठीक है जब नॉनवेज खाते हैं तो अपना पेट ही एक कब्रिस्तान बन जाता है ठीक है जिसमें मरे हुए मुर्दे रखते हैं वह पेट कब्रस्तान बन जाता है तो नॉनवेज को त्यागी और हो सके तो वेजिटेरियन की तरफ आगे बढ़ी है अभी बहुत सारे संस्कार है लेकिन उनको पता चला तो उन्होंने नॉनवेज का त्याग करके हो व्हिस्की और आगे बढ़े अब तो वह अंडा भी नहीं खाते एक भी नहीं खाते ठीक है तो अगर वह सुधर सकते हैं तो आप क्यों नहीं ठीक है आपका दिन शुभ हो धन्यवाद

nonveg khane se hamari aadhyatmik arbanadart ho jaati hai ji haan manoj khane se hamari aadhyatmik apan nasht ho jaati hai jo sochte hain vaah positive nahi soch paate Negative sabse zyada sochte hain theek hai aur jab bhi dekho tab bhi kisi ka accha karne mein aapka man nahi hoga bura hi ab sabka chahoge theek hai kabhi kabar apne family ko bhi ab bura chahte ho toh nonveg khane mein bahut problem hoti hai theek hai chat mein sabse dharm ke hisab se aapko bhi nonveg mat khaiye theek hai jab nonveg khate hain toh apna pet hi ek kabristan ban jata hai theek hai jisme mare hue murde rakhte hain vaah pet kabrastan ban jata hai toh nonveg ko tyagi aur ho sake toh vegetarian ki taraf aage badhi hai abhi bahut saare sanskar hai lekin unko pata chala toh unhone nonveg ka tyag karke ho whiskey aur aage badhe ab toh vaah anda bhi nahi khate ek bhi nahi khate theek hai toh agar vaah sudhar sakte hain toh aap kyon nahi theek hai aapka din shubha ho dhanyavad

नॉनवेज खाने से हमारी आध्यात्मिक अर्बनदर्ट हो जाती है जी हां मनोज खाने से हमारी आध्यात्मिक

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Veer Bhupinder Singh Ji

The Visionary, www.thelivingtreasure.org

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हमारी शिनचैन ऑरा डिपेंड करती है मैं सोचता कैसे हो नॉनवेज और वेज खाने से उसकी चोरा को कोई भी फैक्ट्री में होता है मोशन बनी हुई है राधा हमने जो सोचना है कि अगर मैं पराया हाथ खाता हूं कि नॉनवेज खाने से भी बदतर है सो पराया हाथ खाना ग्रीडी होना लालची हो पर दूसरों को हाईएस्ट खून चूसना यह ज्यादा मेरे फोटो सब को खराब करता है और जैसे-जैसे फॉर ट्रांसलेटिंग और खराब होता जाता है तो महाराष्ट्रीयन और खराब हो जाता है लेकिन लोगों के साथ व्यवहार कैसा करता हूं और लोग समझते हैं जैसे कि किसी अवतार या भगवान की फोटो बनाकर अतिक्रमण की फोटो बनाते उसके पीछे क्षमता बना देते हैं इसको का रियल हरियाली तीज में नहीं माना जाता है और वह व्यवहार होना चाहिए

hamari shinchain aura depend karti hai sochta kaise ho nonveg aur veg khane se uski chorra ko koi bhi factory mein hota hai motion bani hui hai radha humne jo sochna hai ki agar main paraaya hath khaata hoon ki nonveg khane se bhi badataar hai so paraaya hath khana greedy hona lalchi ho par dusro ko highest khoon chusna yah zyada mere photo sab ko kharab karta hai aur jaise jaise for transaleting aur kharab hota jata hai toh maharashtriyan aur kharab ho jata hai lekin logo ke saath vyavhar kaisa karta hoon aur log samajhte hain jaise ki kisi avatar ya bhagwan ki photo banakar atikraman ki photo banate uske peeche kshamta bana dete hain isko ka real hariyali teej mein nahi mana jata hai aur vaah vyavhar hona chahiye

हमारी शिनचैन ऑरा डिपेंड करती है मैं सोचता कैसे हो नॉनवेज और वेज खाने से उसकी चोरा को कोई भ

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Dr Asha B Jain

Dip in Naturopathy, Yoga therapist Pranic healer, Counselor

1:08
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नॉनवेज खाने से क्या हमारी आध्यात्मिक आवा नष्ट हो जाती है प्रश्न है आपका देखें आध्यात्मिकता का तो मैं कुछ नहीं बोल सकती परंतु नॉनवेज खाना एक तरीके तामसिक प्रवृत्ति बढ़ाती है आपको सात्विकता क्यों नहीं ले जाएगी वह शरीर में तमस बढ़ेगा क्योंकि एक जानवर को खाना उसको दुख देने के अलावा और कुछ भी नहीं है जब वह दुख में हो जाता है तभी आप उसको खाते हो तो डेफिनेटली नेगेटिविटी आएगी शरीर में भी और मन में भी तो फिर कैसे आध्यात्मिकता आपकी बढ़ेगी ऐसा हो नहीं सकता कि आध्यात्मिक कैसे बड़े डेफिनेटली वह कर्म अच्छा नहीं है तो जो कर्म अच्छा नहीं है उसका फल कैसे अच्छा मिलेगा आपको सिंपल सी बात है तो मुझे नहीं लगता कि उससे आदमी आध्यात्मिकता बढ़ेगी कटेगी सही धन्यवाद

nonveg khane se kya hamari aadhyatmik ava nasht ho jaati hai prashna hai aapka dekhen aadhyatmikta ka toh main kuch nahi bol sakti parantu nonveg khana ek tarike tamasik pravritti badhti aapko satwikata kyon nahi le jayegi vaah sharir mein tamas badhega kyonki ek janwar ko khana usko dukh dene ke alava aur kuch bhi nahi hai jab vaah dukh mein ho jata hai tabhi aap usko khate ho toh definetli negativity aayegi sharir mein bhi aur man mein bhi toh phir kaise aadhyatmikta aapki badhegi aisa ho nahi sakta ki aadhyatmik kaise bade definetli vaah karm accha nahi hai toh jo karm accha nahi hai uska fal kaise accha milega aapko simple si baat hai toh mujhe nahi lagta ki usse aadmi aadhyatmikta badhegi kategi sahi dhanyavad

नॉनवेज खाने से क्या हमारी आध्यात्मिक आवा नष्ट हो जाती है प्रश्न है आपका देखें आध्यात्मिकता

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

4:35
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धर्मेंद्र खाने से हमारी आध्यात्मिक आधार नष्ट हो जाते हैं ऐसे तो इस संसार में किसी का भोजन है उसको ईपरिजन करने वाला है सब कुछ खाने लायक है ऐसा करते हैं लोग सिक्किम हम विश्वास पेट की कथा विचार हमारे जैसे आहार होता है वैसे ही हमारे विचारों पर जैन धर्म में नॉनवेज तो ठीक लेकिन लहसुन प्याज कभी खाने की अनमोल खाने के लिए बनाई की गई है क्योंकि ऊपर उनके अनुसार तामसी आहार अब जब कंदमूल भी तामसी हो गया तो नॉनवेज की तो क्या बात कहेंगे लेकिन लोग खाते हैं अपने अपने पसंद के रूप में अपने विचारों की ये बात है ऐसी बात नहीं है कोई विशेष धर्म से दिए नहीं जुड़ा हुआ है कि कोई विशेष धर्म वाले विशेष प्रकार का भोजन करते हैं ऐसी बात नहीं लेकिन हमारे हिंदू दल है धार्मिक स्थल जैसे कि वैष्णो देवी जाएंगे तो आपको नॉनवेज यार लहसुन और प्याज नहीं दिया जाएगा खाने में अंतर नहीं मिलता है इसी तरह हरिद्वार में भी आप देखेंगे तो वह सब चीजों का भातर अभी तक चैनल नहीं है इस बात से सुधार मिक्सल है कि वहां पर इन सब चीजों को स्वीकार किया हुआ है लोगों ने किस चीज को आप पर हम नहीं भेजेंगे यह बहुत अच्छी बात है अब रही कि नॉनवेज खाने से आध्यात्मिक आधा स्तुति लिखी आध्यात्मिक आज होती है वह होता है जो इंसान को उसके आसपास होता है तो आवाज में तेज है जो इंसान का वह सात्विक भोजन साथी कार्य और सत्य विचार जिनकी सब चीजें महासचिव विचार कब का और आज आभामंडल निखरने लगता है और जैसे-जैसे बड़ा होता है तो वह और किसने करता जाता है और इस तरह की आकर्षक व्यक्तित्व का आकर्षण हो जाता है कि जब किसी व्यक्ति के सामने वह बात करता है तो सामने वाला व्यक्ति से प्रेस होता है अभी भूत होता है उसकी आभा इतनी होती है इसमें अच्छा होगा कि हम ना खाए हो ना क्योंकि इसमें चिंता होती है किसी को मारकर खाना हमें खुद मन हमारा एक बात पता है हमारी आत्मा विकास करती है इसलिए बाकी सबकी अपनी अपनी सोच होती है कि अपने अपने विचार होते हैं सबके अपने अपने तरीके से लोग जीते हैं धन्यवाद आपका दिन शुभ रहे

dharmendra khane se hamari aadhyatmik aadhaar nasht ho jaate hain aise toh is sansar mein kisi ka bhojan hai usko iparijan karne vala hai sab kuch khane layak hai aisa karte hain log Sikkim hum vishwas pet ki katha vichar hamare jaise aahaar hota hai waise hi hamare vicharon par jain dharm mein nonveg toh theek lekin lehsun pyaaz kabhi khane ki anmol khane ke liye banai ki gayi hai kyonki upar unke anusaar taamsi aahaar ab jab kandamul bhi taamsi ho gaya toh nonveg ki toh kya baat kahenge lekin log khate hain apne apne pasand ke roop mein apne vicharon ki ye baat hai aisi baat nahi hai koi vishesh dharm se diye nahi juda hua hai ki koi vishesh dharm waale vishesh prakar ka bhojan karte hain aisi baat nahi lekin hamare hindu dal hai dharmik sthal jaise ki vaishno devi jaenge toh aapko nonveg yaar lehsun aur pyaaz nahi diya jaega khane mein antar nahi milta hai isi tarah haridwar mein bhi aap dekhenge toh vaah sab chijon ka bhatar abhi tak channel nahi hai is baat se sudhaar miksal hai ki wahan par in sab chijon ko sweekar kiya hua hai logo ne kis cheez ko aap par hum nahi bhejenge yah bahut achi baat hai ab rahi ki nonveg khane se aadhyatmik aadha stuti likhi aadhyatmik aaj hoti hai vaah hota hai jo insaan ko uske aaspass hota hai toh awaaz mein tez hai jo insaan ka vaah Satvik bhojan sathi karya aur satya vichar jinki sab cheezen mahasachiv vichar kab ka aur aaj abhamandal nikharane lagta hai aur jaise jaise bada hota hai toh vaah aur kisne karta jata hai aur is tarah ki aakarshak vyaktitva ka aakarshan ho jata hai ki jab kisi vyakti ke saamne vaah baat karta hai toh saamne vala vyakti se press hota hai abhi bhoot hota hai uski aabha itni hoti hai isme accha hoga ki hum na khaye ho na kyonki isme chinta hoti hai kisi ko marakar khana hamein khud man hamara ek baat pata hai hamari aatma vikas karti hai isliye baki sabki apni apni soch hoti hai ki apne apne vichar hote hain sabke apne apne tarike se log jeete hain dhanyavad aapka din shubha rahe

धर्मेंद्र खाने से हमारी आध्यात्मिक आधार नष्ट हो जाते हैं ऐसे तो इस संसार में किसी का भोजन

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Harish Chand

Social Worker

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हमारे एक मित्र ने एक सवाल किया है कि क्या नॉनवेज खाने से हमारी आध्यात्मिक आवा नष्ट हो जाती है तो मैं आपको बता दूं कि आपका जवाब बिल्कुल सही है और बिल्कुल बात है कि अगर हम गलत लोगों की संगत में रहेंगे तो हम आध्यात्मिक शक्तियों को प्राप्त नहीं कर सकते नॉनवेज किसी जीव की हत्या करके उससे अपने पेट को भरना तुम बहुत ही गलत बात है तो हमारा ध्यान उस तरफ नहीं जा पाएगा जहां जाना चाहिए क्यों क्योंकि अब ऑलरेडी अपने शरीर को कब्रिस्तान बना लिया है यह संसार बना लिया है उसमें तुम नॉनवेज खाओगे तू क्या सिस्टम रह जाएगा तुम्हारा मन कैसा होगा निरंकुश हो जाएगा उसमें दया भावना नहीं होगी और जान दया भावना नहीं होगी जीवो पर करने के लिए ईश्वर कहां इस बार तो प्रेम के वशीभूत है दया के वशीभूत हैं ईश्वर ईश्वर निस्वार्थ भावना से कार्य करने से समस्त जीव-जंतुओं पर दया दिखाने से उसे प्रेम करने से प्रसन्न होते हैं और जो मरे आध्यात्मिक शक्तियों को जागृत होती हैं जो हमारी आत्मा है उसको परमात्मा से बुलाने का कार्य करती है तो मैं आप सभी से ज्यादा से ज्यादा जोर इस बात पर दूंगा कि आप बिल्कुल भी ऐसे पदार्थों का भक्षण ना करें जिससे आपका शरीर आपकी आत्मा आपका समाज और समस्त बूथ छोटी-छोटी जी आप की गलत नीतियों के कारण काल के गाल में समा जाएं आशा है कि आप शुद्ध शाकाहारी बनेंगे और अपने लक्ष्य को प्राप्त करेंगे जय हिंद

hamare ek mitra ne ek sawaal kiya hai ki kya nonveg khane se hamari aadhyatmik ava nasht ho jaati hai toh main aapko bata doon ki aapka jawab bilkul sahi hai aur bilkul baat hai ki agar hum galat logo ki sangat mein rahenge toh hum aadhyatmik shaktiyon ko prapt nahi kar sakte nonveg kisi jeev ki hatya karke usse apne pet ko bharna tum bahut hi galat baat hai toh hamara dhyan us taraf nahi ja payega jaha jana chahiye kyon kyonki ab already apne sharir ko kabristan bana liya hai yah sansar bana liya hai usme tum nonveg khaoge tu kya system reh jaega tumhara man kaisa hoga nirankush ho jaega usme daya bhavna nahi hogi aur jaan daya bhavna nahi hogi jeevo par karne ke liye ishwar kaha is baar toh prem ke vashibhut hai daya ke vashibhut hain ishwar ishwar niswarth bhavna se karya karne se samast jeev jantuon par daya dikhane se use prem karne se prasann hote hain aur jo mare aadhyatmik shaktiyon ko jagrit hoti hain jo hamari aatma hai usko paramatma se bulane ka karya karti hai toh main aap sabhi se zyada se zyada jor is baat par dunga ki aap bilkul bhi aise padarthon ka bhakshan na kare jisse aapka sharir aapki aatma aapka samaj aur samast booth choti choti ji aap ki galat nitiyon ke karan kaal ke gaal mein sama jayen asha hai ki aap shudh shakahari banenge aur apne lakshya ko prapt karenge jai hind

हमारे एक मित्र ने एक सवाल किया है कि क्या नॉनवेज खाने से हमारी आध्यात्मिक आवा नष्ट हो जाती

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बिल्कुल नहीं यह सोचते विचार सोच के ऊपर है उठता है कि हम क्या सोचते हैं मैं चीज को नहीं मानता कि नॉनवेज खाने से हमारे धर्म पर जा मारी कर्मों पर या किसी भी बात पर आघात हो तो मैं चीजें हैं नॉनवेज एक बना है खाने के लिए तो मैं नहीं मानता इसमें एतराज नहीं करता हूं अब किसी धर्म में इसको अच्छा मानते हैं किसी धर्म में चीज को बुरा मानते हैं तो बनी अग्रसेन हिसाब से देखा जाए तो यह हमारे स्वास्थ्य के लिए एक विटामिन प्रोटीन आहार है तो हम खा सकते हैं और हम एक धर्म के हिसाब से देखें तो यह चीजें गलत बताया गया है लेकिन जहां तक मेरा विचार है यह चीज गलत नहीं है हां मानता हूं एक जीव की हत्या करना एक अपराध एक पाप माना जाता है लेकिन एक ऐसा जीव जिसका उपयोग और कुछ हो नहीं सकता जिसकी आबादी दिन पर दिन बढ़ती है और वह कहीं पर उपयोग नहीं हो सकती या उसके द्वारा कुछ बीमारियां कह सकती है तो उसको हम खा सकते मतलब एक पौष्टिक आहार के तौर पर उसे हम यूज कर सकते हैं बाकी सभी की अलग अलग सोच होती है यह सब सोच पर डिपेंड करता है जहां तक मेरी सोच है यह गलत नहीं है मायके हिंदू मैं कह सकता हूं जैसे चिकन हो गया जिसकी करने मतलब है मुर्गे हो गए हैं या मुझे जो खाते हैं अंडे हो गए इसे भी काफी लोग अंडे को भी नॉनवेज बोला जाता है बल्कि मैं अंडे को नों वेज कीमा तरीके से तो यहां दूध जो होता है वह भी नॉनवेज होता है क्योंकि वह भी एक के नॉनवेज के अंदर से होते हुए आता है और वही चीज एक अंडा है तो मैं इसको नहीं मान सकता है कि चीज गलत है बाकी हर इंसान की अपनी अपनी सोच होती है वह किस आधार पर इस चीज को सोचते हैं अगर समाज के आधार पर सोचते हैं तो गलत नहीं होगा अगर धर्म के हिसाब से सोचते हैं तो गलत है अगर कुछ लोग यह मानते हैं लेकिन मेरे विचार और मेरे हिसाब से हम धर्म के हिसाब से भी देखें तो आपसे कुछ हजारों साल पहले भी तब साइंस नहीं था तो लोगे खाने का ज्यादातर यूसी नॉनवेज या फल फ्रूट जो जो उन्हें अच्छा लगता जो उनको टेस्टी खाने में अच्छा लगता है वह चीज खाते थे वह तो मैं नहीं मानता ही चीज को कि उस टाइम पर देवी-देवता भी थे तो जैसे वह रहते थे जंगलों में भी रहते थे ऋषि मुनि सब बगैरा रहते थे तो जहां पर रहते थे तो यह नहीं कि हर लोगे सिर्फ एक फल फ्रूट ओके ऊपर से आधारित होते होंगे उस टाइम पर स्वीकार भी किया जाता था उन्हें वह खाते देवी राजा महाराजा तेरी बॉर्बी का लड़का स्टोर पर थे तो वह भी खाते थे तो मैं किसी को गलत नहीं मानता बाकी आप इस बारे में और क्या कह सकता हूं बस की स्थाई पहलू है अगर समाज के हिसाब से देखें तो इस चीज गलत नहीं है अगर धर्म के हिसाब से हम उन धर्मों को मानते हैं जिस धर्मों में यह गलत बताया है तो काफी लोग इसको यूज़ नहीं करते हैं इसको गलत मानते हैं बाकी क्या कहूंगा मेरा विचार जहां तक था मैंने यही बताया आप लोगों को

bilkul nahi yah sochte vichar soch ke upar hai uthata hai ki hum kya sochte hain main cheez ko nahi maanta ki nonveg khane se hamare dharm par ja mari karmon par ya kisi bhi baat par aaghat ho toh main cheezen hain nonveg ek bana hai khane ke liye toh main nahi maanta isme ittaraj nahi karta hoon ab kisi dharm me isko accha maante hain kisi dharm me cheez ko bura maante hain toh bani agrasen hisab se dekha jaaye toh yah hamare swasthya ke liye ek vitamin protein aahaar hai toh hum kha sakte hain aur hum ek dharm ke hisab se dekhen toh yah cheezen galat bataya gaya hai lekin jaha tak mera vichar hai yah cheez galat nahi hai haan maanta hoon ek jeev ki hatya karna ek apradh ek paap mana jata hai lekin ek aisa jeev jiska upyog aur kuch ho nahi sakta jiski aabadi din par din badhti hai aur vaah kahin par upyog nahi ho sakti ya uske dwara kuch bimariyan keh sakti hai toh usko hum kha sakte matlab ek paushtik aahaar ke taur par use hum use kar sakte hain baki sabhi ki alag alag soch hoti hai yah sab soch par depend karta hai jaha tak meri soch hai yah galat nahi hai mayke hindu main keh sakta hoon jaise chicken ho gaya jiski karne matlab hai murge ho gaye hain ya mujhe jo khate hain ande ho gaye ise bhi kaafi log ande ko bhi nonveg bola jata hai balki main ande ko non veg keema tarike se toh yahan doodh jo hota hai vaah bhi nonveg hota hai kyonki vaah bhi ek ke nonveg ke andar se hote hue aata hai aur wahi cheez ek anda hai toh main isko nahi maan sakta hai ki cheez galat hai baki har insaan ki apni apni soch hoti hai vaah kis aadhar par is cheez ko sochte hain agar samaj ke aadhar par sochte hain toh galat nahi hoga agar dharm ke hisab se sochte hain toh galat hai agar kuch log yah maante hain lekin mere vichar aur mere hisab se hum dharm ke hisab se bhi dekhen toh aapse kuch hazaro saal pehle bhi tab science nahi tha toh loge khane ka jyadatar UC nonveg ya fal fruit jo jo unhe accha lagta jo unko tasty khane me accha lagta hai vaah cheez khate the vaah toh main nahi maanta hi cheez ko ki us time par devi devta bhi the toh jaise vaah rehte the jungalon me bhi rehte the rishi muni sab bagaira rehte the toh jaha par rehte the toh yah nahi ki har loge sirf ek fal fruit ok upar se aadharit hote honge us time par sweekar bhi kiya jata tha unhe vaah khate devi raja maharaja teri barbi ka ladka store par the toh vaah bhi khate the toh main kisi ko galat nahi maanta baki aap is bare me aur kya keh sakta hoon bus ki sthai pahaloo hai agar samaj ke hisab se dekhen toh is cheez galat nahi hai agar dharm ke hisab se hum un dharmon ko maante hain jis dharmon me yah galat bataya hai toh kaafi log isko use nahi karte hain isko galat maante hain baki kya kahunga mera vichar jaha tak tha maine yahi bataya aap logo ko

बिल्कुल नहीं यह सोचते विचार सोच के ऊपर है उठता है कि हम क्या सोचते हैं मैं चीज को नहीं मा

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जी हां नॉनवेज खाने से मारी आत्मा आत्मा हमारी आत्मा को नष्ट हो जाती है या हम अपने आप से संतुष्ट नहीं कर पाते हैं अगर मनुष्य अपने जीवन में कुछ भी ऐसा करता है वैसे भी प्राणी को देखो किसी की यादों को कैसे उसका जवाब अवश्य किया था पर बहुत प्यारा सा पड़ता है और वह अपने आप से खेलना पसंद करता है और मैं अपने जीवन को जो है सत्य के मार्ग पर गया आंखों से रिश्ता प्रदान करना और प्रमोद कुमार का पुराना हो गई सर प्राप्त करने पर पैसों को प्राप्त करने से दूर हो जाता है वही है ईश्वर प्राप्ति के मार्ग बदल जाता है और उसके नजरें कई प्रकार के जैसे मेरे संसार में जीवन मरण और अन्नू जो है भाइयों को भाइयों का जो है सामना करना पड़ता है और उनसे प्रभावित होता है यह सरकार तो आप मुझे अपना स्ट कर लेता है थैंक्यू खंडवा

ji haan nonveg khane se mari aatma aatma hamari aatma ko nasht ho jaati hai ya hum apne aap se santusht nahi kar paate hain agar manushya apne jeevan me kuch bhi aisa karta hai waise bhi prani ko dekho kisi ki yaadon ko kaise uska jawab avashya kiya tha par bahut pyara sa padta hai aur vaah apne aap se khelna pasand karta hai aur main apne jeevan ko jo hai satya ke marg par gaya aakhon se rishta pradan karna aur pramod kumar ka purana ho gayi sir prapt karne par paison ko prapt karne se dur ho jata hai wahi hai ishwar prapti ke marg badal jata hai aur uske najarein kai prakar ke jaise mere sansar me jeevan maran aur annu jo hai bhaiyo ko bhaiyo ka jo hai samana karna padta hai aur unse prabhavit hota hai yah sarkar toh aap mujhe apna st kar leta hai thainkyu khandwa

जी हां नॉनवेज खाने से मारी आत्मा आत्मा हमारी आत्मा को नष्ट हो जाती है या हम अपने आप से संत

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Satya Prakash Soni

Administration

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सही थोड़ा सा प्रकाश डालते हैं व्यक्ति की शारीरिक बनावट पर तो व्यक्ति की शारीरिक बनावट के पहले अपन देखते हैं जानवरों की शारीरिक विशेषताएं आप शेर तेंदुआ लोमड़ी सियार गीदड़ चीता इन सब की शरीर को अब देखिए तो प्रकृति ने इनकी दांतो को पहना बनाया हुआ है इतना क्यों बनाया है आपने सोचा होगा शायद क्योंकि प्रकृति ने इन्हें विशेषता दी है कि यह सिर्फ मांस भक्षण ही करेंगे यानी इनकी दांतो से सिर्फ मास को पढ़ने के लिए छेदने के लिए रोशनी के लिए अपने दांतो का उपयोग किया जाएगा अब इसके बाद आपको गाय बैल घोड़ा गधा ऊंट इनकी दांतो को आप देख लीजिए आपने देखा होगा इनकी दांत थोड़ी सी छपते होते हैं वर्गाकार होते अंदर से आगे से भी चलते होते हैं इसका कारण ही होता है कि प्रकृति ने इनको पत्ते टहनी चलाने के लिए बनाया गया है और यह सब शाकाहारी भी होते हैं प्योर वेज होते हैं अब आप बात करिए व्यक्ति की इंसान की तो इंसान की दांत आगे से आपने देखी ना पहने होते हैं नुकीले होते हैं और पीछे से चुपके टाइप के होते हैं क्योंकि प्रकृति ने इन्हें सर्वाहारी बनाया है नेचर ने ने मांस खाने के लिए भी बनाया है और शाकाहारी भी बनाया है अब अब सवाल उठता है कि व्यक्ति को मास नहीं खाना चाहिए मास नहीं खाना चाहिए या खाना चाहिए वह बात अलग है लेकिन यदि प्रकृति ने उसको यह विशेषता दी है तो यही विशेषता दी है कि वह मास्को डाइजेस्ट कर सकता है मीट को पचा सकता है यदि व्यक्ति मांस को नहीं पचा सकता तो आज तक व्यक्ति मांस खाने से बीमार क्यों नहीं पड़ा घोड़े गधे गाय मांस नहीं पहुंचा सकती इसलिए उम्र खाती नहीं है और जो नहीं खा सकता उसके अंदर घुसकर डाइजेस्ट सिस्टम ही नहीं बनाया पैसा खाने के लिए दवाई क्यों खाएगा लेकिन जब प्रकृति ने व्यक्ति को खुद बनाया है उसको दे दिए हैं उसके अंदर को कैपेबिलिटी पीती है कि व्यक्ति मीट को डाइजेस्ट कर सकता है हम आप बात को समझ गए कि यदि आप से मैं बोलता हूं कि मासूम मत खाइए मत खाइए मतलब यह मैं आपको सजेशन दे रहा हूं उसमें कोई विशेष बुराई की बात नहीं है कि आप को नहीं खाना है वह बुरी चीज है वह मेरे को डिंगली बुरी चीज है लेकिन आप उसको यदि साइंटिफिकली देखें तो उसके अंदर कैलोरी से फैट है विटामिन से कार्बोहाइड्रेट भी है जो कि आपकी बॉडी के लिए जरूरी है हां यह गलत मानते हैं क्योंकि आप शादी में शाकाहार में फल में आपका काम चल रहा है आपका कंप्लीमेंट्री है कोई दिक्कत नहीं आपका काम चल रहा है लेकिन यह कहीं से कहीं तक जरूरी नहीं है कि खाना गलत है जब प्रकृति आपको बना रही है उसकी कंफर्टेबल आपकी बॉडी है तो आप खा सकते हैं यहां पर मैं आपको बता दूं कि मैं अंडा भी नहीं खाता हूं लेकिन यह मेरी सोच है कि जब प्रकृति ने बनाया है आपको आप खा सकते हैं

sahi thoda sa prakash daalte hain vyakti ki sharirik banawat par toh vyakti ki sharirik banawat ke pehle apan dekhte hain jaanvaro ki sharirik visheshtayen aap sher tenduaa lomadi siyar gidad chita in sab ki sharir ko ab dekhiye toh prakriti ne inki daanto ko pehna banaya hua hai itna kyon banaya hai aapne socha hoga shayad kyonki prakriti ne inhen visheshata di hai ki yah sirf maas bhakshan hi karenge yani inki daanto se sirf mass ko padhne ke liye chadne ke liye roshni ke liye apne daanto ka upyog kiya jaega ab iske baad aapko gaay bail ghoda gadha unth inki daanto ko aap dekh lijiye aapne dekha hoga inki dant thodi si chupte hote hain vargakar hote andar se aage se bhi chalte hote hain iska karan hi hota hai ki prakriti ne inko patte tahani chalane ke liye banaya gaya hai aur yah sab shakahari bhi hote hain pure veg hote hain ab aap baat kariye vyakti ki insaan ki toh insaan ki dant aage se aapne dekhi na pehne hote hain nukile hote hain aur peeche se chupake type ke hote hain kyonki prakriti ne inhen sarvwaahaare banaya hai nature ne ne maas khane ke liye bhi banaya hai aur shakahari bhi banaya hai ab ab sawaal uthata hai ki vyakti ko mass nahi khana chahiye mass nahi khana chahiye ya khana chahiye vaah baat alag hai lekin yadi prakriti ne usko yah visheshata di hai toh yahi visheshata di hai ki vaah moscow Digest kar sakta hai meat ko pacha sakta hai yadi vyakti maas ko nahi pacha sakta toh aaj tak vyakti maas khane se bimar kyon nahi pada ghode gadhe gaay maas nahi pohcha sakti isliye umar khati nahi hai aur jo nahi kha sakta uske andar ghuskar Digest system hi nahi banaya paisa khane ke liye dawai kyon khaega lekin jab prakriti ne vyakti ko khud banaya hai usko de diye hain uske andar ko capability piti hai ki vyakti meat ko Digest kar sakta hai hum aap baat ko samajh gaye ki yadi aap se main bolta hoon ki masoom mat khaiye mat khaiye matlab yah main aapko suggestion de raha hoon usme koi vishesh burayi ki baat nahi hai ki aap ko nahi khana hai vaah buri cheez hai vaah mere ko dingali buri cheez hai lekin aap usko yadi scientifically dekhen toh uske andar calorie se fat hai vitamin se carbohydrate bhi hai jo ki aapki body ke liye zaroori hai haan yah galat maante hain kyonki aap shaadi me shaakaahaar me fal me aapka kaam chal raha hai aapka kamplimentri hai koi dikkat nahi aapka kaam chal raha hai lekin yah kahin se kahin tak zaroori nahi hai ki khana galat hai jab prakriti aapko bana rahi hai uski Comfortable aapki body hai toh aap kha sakte hain yahan par main aapko bata doon ki main anda bhi nahi khaata hoon lekin yah meri soch hai ki jab prakriti ne banaya hai aapko aap kha sakte hain

सही थोड़ा सा प्रकाश डालते हैं व्यक्ति की शारीरिक बनावट पर तो व्यक्ति की शारीरिक बनावट के

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Beniram Birla

Teacher बी एड समाज सेवा

0:15
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101 पर्सेंट क्योंकि आदमी में दयालु खत्म हो जाती है वही सब विचारधारा वाला बन जाता है

101 percent kyonki aadmi me dayalu khatam ho jaati hai wahi sab vichardhara vala ban jata hai

101 पर्सेंट क्योंकि आदमी में दयालु खत्म हो जाती है वही सब विचारधारा वाला बन जाता है

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मानव

फिलोशफर प्रवक्ता

1:09
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शास्त्रों में कहा गया है जैसा अन्न वैसा मन जैसा पानी वैसे वाणी का पानी पीने से यानी गया गर्म पानी पीता है तो आदमी का शरीर शीतल होता दूध पिता है तो उसका घमंड आ जाता है अपनी ताकत का और अगर वह दारू पीता है तो फिर वह अपनी बुद्धि से परे हुआ था उसको चोदा चोदी चित्र चिंतन किसी भी प्रकार का कुछ भी उसको याद नहीं रहता कि मैं क्या कह रहा है क्या कर रहा है ठीक उसी प्रकार भोजन का भी हमारे मन मस्तिष्क और शरीर पर फर्क पड़ता है अभी यह तो उसके ऊपर निर्भर है जो मनुष्य भोजन करता है कि मैं आध्यात्मिक होते हुए भी मांसाहार करता है या मांसाहार होते हुए भी आजादी में से प्रत्येक व्यक्ति अपने विचार और 4G कृष्णा अलग अलग है लेकिन फिर भी जातक प्रश्न है आध्यात्मिकता तो मासारप में कहीं न कहीं व्यवधान डालता है उसे लिए आयुर्वेद में पर विशेष बल दिया गया है और आयुर्वेद और शाकाहार और आध्यात्मिक तीनों एक दूसरे के पूरक है

shastron me kaha gaya hai jaisa ann waisa man jaisa paani waise vani ka paani peene se yani gaya garam paani pita hai toh aadmi ka sharir shital hota doodh pita hai toh uska ghamand aa jata hai apni takat ka aur agar vaah daaru pita hai toh phir vaah apni buddhi se pare hua tha usko choda chodi chitra chintan kisi bhi prakar ka kuch bhi usko yaad nahi rehta ki main kya keh raha hai kya kar raha hai theek usi prakar bhojan ka bhi hamare man mastishk aur sharir par fark padta hai abhi yah toh uske upar nirbhar hai jo manushya bhojan karta hai ki main aadhyatmik hote hue bhi mansahaari karta hai ya mansahaari hote hue bhi azadi me se pratyek vyakti apne vichar aur 4G krishna alag alag hai lekin phir bhi jatak prashna hai aadhyatmikta toh masarap me kahin na kahin vyavdhan dalta hai use liye ayurveda me par vishesh bal diya gaya hai aur ayurveda aur shaakaahaar aur aadhyatmik tatvo ek dusre ke purak hai

शास्त्रों में कहा गया है जैसा अन्न वैसा मन जैसा पानी वैसे वाणी का पानी पीने से यानी गया गर

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जी नॉनवेज खाने से हमारे आध्यात्मिक आवा नष्ट हो जाती है क्योंकि जब सनातन धर्म बनाया गया है तो उसमें नॉनवेज का तो कहीं नाम ही नहीं आता पर आकर देखा जाए तो कितने पंडित ही शराब पीते हैं मंदिर में बैठकर नॉनवेज खाते हैं पर अध्याय 1 फिर भी अलग चीज है इसलिए नॉनवेज का सेवन ना किया जाए

ji nonveg khane se hamare aadhyatmik ava nasht ho jaati hai kyonki jab sanatan dharm banaya gaya hai toh usme nonveg ka toh kahin naam hi nahi aata par aakar dekha jaaye toh kitne pandit hi sharab peete hain mandir me baithkar nonveg khate hain par adhyay 1 phir bhi alag cheez hai isliye nonveg ka seven na kiya jaaye

जी नॉनवेज खाने से हमारे आध्यात्मिक आवा नष्ट हो जाती है क्योंकि जब सनातन धर्म बनाया गया है

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Mahesh Kumar

M.no 8360366118.Business Owner,spiritual.social Worker.

2:12
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डीपी पर बाइबिल के मुताबिक हम देखे तो बाइबल तो नहीं ऐसा कहती है कि मैं तो मेरे बाइबल स्टडी करिए जी बाइबिल के मुताबिक आपको मैं बता सकता हूं सिर्फ यह कहा था कि जो हम खाते पीते हैं वह तो निकल जाता है जी हमने खाया पिया को निकल गया तो उससे अध्यात्मिकता तो नहीं लगती है और परमेश्वर के साथ रिश्ता कैसे बना रहेगा जब हम परमेश्वर के वचन के ऊपर चलेंगे मैं खाने से पाप नहीं होता से परमेश्वर के दिन कहता कि आप जरूरी नॉनवेज को अगर आप नहीं खाना चाहते तो अपना दिखाओ कोई जबरदस्ती नहीं है आपका दिल नहीं मानता आप वेजिटेरियन और नॉन वेज ना खाएं आप व आपके लिए और पास होते तो कहां होते हमारे मन से होते हैं कल 4:00 का पाप मन से शुरू होता है झूठ बोलना या गाली देना यह सारी बातें हमारे मन से शुरू होती है तो पापा चमन में होते हैं इसका करना जब मन के द्वारा होते हैं खाने पीने से नहीं होते बल्कि शिक्षा और आगे आप सोच सकते हैं बाकी और आप ज्यादा समझना चाहते हैं तो बाइबल डिलीट करेंगे या नीचे मति मति मरकुस लुक्का यू ना चक्कर में पड़ गए आपको बहुत सारे सवालों की बहुत जवाब मिल जाएंगे लेकिन नॉलेज लेनी पड़ेगी पैदल में लिखें क्या ना होने की वजह से मेरी जाति का नाश हो रहा है अच्छी तरह से चल सकते हैं जीवन में भी है जो आप पढ़ने में आपको इसी को तो वहां पर दो बाइबल में 2 दिन से मैं एक पुराना डीजे में कन्हैया ने जो पुराना निगम प्रभु यीशु मसीह के आने से पहले की डिटेल है और ले लीजिए में प्रभु यीशु के आने के बाद के परफ्यूशन एल्बम को पड़ी है वहां से मति चैप्टर से स्टार्ट कीजिए मस्ती मरकुस चैप्टर पढ़िए आपको वह बहुत सारी बातें समझ में आएगी और आपकी बहुत सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे

dipi par bible ke mutabik hum dekhe toh bible toh nahi aisa kehti hai ki main toh mere bible study kariye ji bible ke mutabik aapko main bata sakta hoon sirf yah kaha tha ki jo hum khate peete hain vaah toh nikal jata hai ji humne khaya piya ko nikal gaya toh usse adhyatmikata toh nahi lagti hai aur parmeshwar ke saath rishta kaise bana rahega jab hum parmeshwar ke vachan ke upar chalenge main khane se paap nahi hota se parmeshwar ke din kahata ki aap zaroori nonveg ko agar aap nahi khana chahte toh apna dikhaao koi jabardasti nahi hai aapka dil nahi maanta aap vegetarian aur non veg na khayen aap va aapke liye aur paas hote toh kaha hote hamare man se hote hain kal 4 00 ka paap man se shuru hota hai jhuth bolna ya gaali dena yah saari batein hamare man se shuru hoti hai toh papa chaman me hote hain iska karna jab man ke dwara hote hain khane peene se nahi hote balki shiksha aur aage aap soch sakte hain baki aur aap zyada samajhna chahte hain toh bible delete karenge ya niche mati mati markus luckka you na chakkar me pad gaye aapko bahut saare sawalon ki bahut jawab mil jaenge lekin knowledge leni padegi paidal me likhen kya na hone ki wajah se meri jati ka naash ho raha hai achi tarah se chal sakte hain jeevan me bhi hai jo aap padhne me aapko isi ko toh wahan par do bible me 2 din se main ek purana DJ me kanhaiya ne jo purana nigam prabhu yeshu masih ke aane se pehle ki detail hai aur le lijiye me prabhu yeshu ke aane ke baad ke parafyushan album ko padi hai wahan se mati chapter se start kijiye masti markus chapter padhiye aapko vaah bahut saari batein samajh me aayegi aur aapki bahut saare sawalon ke jawab mil jaenge

डीपी पर बाइबिल के मुताबिक हम देखे तो बाइबल तो नहीं ऐसा कहती है कि मैं तो मेरे बाइबल स्टडी

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Anil Rajbhar

Motivationel speaker /Counsellor/ business owner,.,mob.7769065459

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सवाल बहुत ही अच्छा है आपका क्या नाम है खाने से हमारे अध्यक्ष ने कहा नष्ट हो जाते तो भ्रष्ट हो जाती है देखो कुछ उदाहरण देना चाहूंगा पहले में उसके बाद आपको ही खुद उसको डिसाइड करना है देखो अगर हम नॉलेज कर दिया फिर किसी का मांस खाते हैं तो यह तो बहुत अच्छा है मतलब जैसे कहते कि इस से ताकत मिलती है शरीर में हार्मोन सोते हैं तो यह हम मानते किस में ताकत होती जिसे डॉक्टर लोग भी कहते कि इसको खाना चाहिए क्योंकि इसमें ताकत है ना देखो मैं लेकिन कुछ बात बताना चाहूंगा जैसे अगर किसी मानो किसी को एक्सीडेंट से उसको चोट लगी है उसको टांके पड़े हैं लेकिन थोडा करने के बाद देखो एक गर्भवती स्त्री होती है उसको भेजो टांके पढ़ते हैं तो उस समय उनको तो मनोज खाने नहीं देते हैं बस उसको दाल भात या फिर भेज खाना खाने के लिए कहते हैं तो अगर वेज खाने से शरीर बनता है तो उस समय तो ताकत की जरूरत होती है तो फिर सनम आप मुझसे क्यों नहीं देती खाने के लिए कुछ शरीर जिससे बन रहा है जिससे शरीर बनता है और फिर वह है जो शरीर को बनाता है चुनाव में शरीर को पढ़ने नहीं दे रहा है यह बात पहली और दूसरी बात देखो कोई भी हॉस्पिटल में हो या फिर कोई बीमार हो तो उसके लिए हम जब कुछ ले जाते भेटवस्तू तो हम उसको क्या ले जाते हैं उसको तो हम सोने जाते हैं ना तो ताकत किस में अगर उसको बीमारी से ऊपर आना है ना तो उसको क्या आवश्यकता है और एक बात बताना चाहूंगा मैं देखो इस दुनिया में सबसे बड़ा शक्तिशाली जानवर जो मतलब उसको हाथी कहते हैं और हाथी को देखो खाता क्या है वहां से खाता है तो इतना बड़ा शरीर है शक्तिशाली है और उसी का शरीर तो भर भगवान गणेश को भी दिया है तो देखो ताकत भी जब आती है तू भी आता है हाथी भेजो हाथी शक्तिशाली होती उसके बच्चे जो घोड़ा होता है उसका भी थकता नहीं है तो खाता क्या है वह तो उसने तो नॉनवेज खाना चाहिए खाने वाला आदमी जाएगा और ज्यादा जिंदगी उसकी खत्म होती जाती है तुम्हें बताना चाहूंगा देखो एक देश में आपको लेना है नॉन वेज चिकन के बिस्कुट लेने हैं और एक देश में लेना है आपको गोभी पत्ता फ्लावर के होते हैं सब्जियां उसको एक घंटा धूप में रखी है या फिर एक दिन तो फिर 2 दिन दिन तक लेकिन वही गोभी पत्ता हूं या फिर फॉलो और हो जो भी हो सब्जी उनको है वैसे ही रह गया उसको आप 4 दिन के बाद खाओ उसमें कुछ नहीं करता लेकिन जो चीज लुट जाती है जो चीज खुद में टिकने की ताकत नहीं जिसमें वह दूसरों को क्या टिक पाया तक आएगा उसको क्या बनाएगा वह इंसान जो सबसे बड़ा माध्यम से जुड़ते भगवान को हम पूजा-पाठ व करते हैं जो भी आध्यात्मिक जोड़ते जहां पर वहां पर नॉनवेज क्या करते हैं उस बुद्धि पर अटैक डालता है मतलब जो सोचने वाली चीज है ना हम अंदर में सोचने वाली को गंदा कर देता तो बंदे से अगर हम किसी भगवान से जुड़ना चाहे ना तो झूठ नहीं पाएंगे कि मन बुद्धि शुद्ध होगी भगवान का कनेक्शन से कनेक्शन जोड़ पर उसकी भाषा समझ पाएंगे उसको देख पाएंगे सारा खेल से जुड़ा हुआ है तो अंधा होता और एक में लास्ट का उदाहरण देना चाहूंगा कि जो नॉनवेज कटने के बाद क्या होता है क्योंकि को उसके हाथ पैर पकड़े जाते हैं और उसको गर्दन ऐसे उलटी के जाते थे लेकिन उसकी आंखें तो खुली होती है काम तो खुले होते हैं और देख भी रहा होता है उस इंसान को लेकिन तड़पता काटते समय तड़पने के बाद क्या होता है कि तड़पने के बाद जो हमारे शरीर में तैयार हो जाते हैं कोई मास्टर पर लाते हो बहुत ऊंची से खाते हैं उसको पकड़ में कोई घटना घटती है या फिर कुछ और जैसे हमारे जिसको हम बहुत प्यार करते हैं उसके बारे में अगर कुछ गलत चीज हो जाती तो हमारे हाथ पैर कांपने लगते हाथ पैर कांपने लगते हैं या फिर कभी कभी हमें डर लगता है मन भयभीत हो जाते सारी चीजों को भी तो खोना शांति होना चिंता होना डर लगना भाई होना ही जीवन में सारे नॉनवेज खाते ना उस इंसान को आते हैं तो यह सारी चीजें को हमें ध्यान और जितना भी उससे ही मन बुद्धि सेहतमंद उजागर दूषित हो जाएगी तो भगवान से हम झूठ नहीं पाएंगे

sawaal bahut hi accha hai aapka kya naam hai khane se hamare adhyaksh ne kaha nasht ho jaate toh bhrasht ho jaati hai dekho kuch udaharan dena chahunga pehle me uske baad aapko hi khud usko decide karna hai dekho agar hum knowledge kar diya phir kisi ka maas khate hain toh yah toh bahut accha hai matlab jaise kehte ki is se takat milti hai sharir me hormone sote hain toh yah hum maante kis me takat hoti jise doctor log bhi kehte ki isko khana chahiye kyonki isme takat hai na dekho main lekin kuch baat batana chahunga jaise agar kisi maano kisi ko accident se usko chot lagi hai usko tanken pade hain lekin thoda karne ke baad dekho ek garbhwati stree hoti hai usko bhejo tanken padhte hain toh us samay unko toh manoj khane nahi dete hain bus usko daal bhat ya phir bhej khana khane ke liye kehte hain toh agar veg khane se sharir banta hai toh us samay toh takat ki zarurat hoti hai toh phir sanam aap mujhse kyon nahi deti khane ke liye kuch sharir jisse ban raha hai jisse sharir banta hai aur phir vaah hai jo sharir ko banata hai chunav me sharir ko padhne nahi de raha hai yah baat pehli aur dusri baat dekho koi bhi hospital me ho ya phir koi bimar ho toh uske liye hum jab kuch le jaate bhetavastu toh hum usko kya le jaate hain usko toh hum sone jaate hain na toh takat kis me agar usko bimari se upar aana hai na toh usko kya avashyakta hai aur ek baat batana chahunga main dekho is duniya me sabse bada shaktishali janwar jo matlab usko haathi kehte hain aur haathi ko dekho khaata kya hai wahan se khaata hai toh itna bada sharir hai shaktishali hai aur usi ka sharir toh bhar bhagwan ganesh ko bhi diya hai toh dekho takat bhi jab aati hai tu bhi aata hai haathi bhejo haathi shaktishali hoti uske bacche jo ghoda hota hai uska bhi thakata nahi hai toh khaata kya hai vaah toh usne toh nonveg khana chahiye khane vala aadmi jaega aur zyada zindagi uski khatam hoti jaati hai tumhe batana chahunga dekho ek desh me aapko lena hai non veg chicken ke biscuit lene hain aur ek desh me lena hai aapko gobhi patta flower ke hote hain sabjiyan usko ek ghanta dhoop me rakhi hai ya phir ek din toh phir 2 din din tak lekin wahi gobhi patta hoon ya phir follow aur ho jo bhi ho sabzi unko hai waise hi reh gaya usko aap 4 din ke baad khao usme kuch nahi karta lekin jo cheez lut jaati hai jo cheez khud me tikne ki takat nahi jisme vaah dusro ko kya tick paya tak aayega usko kya banayega vaah insaan jo sabse bada madhyam se judte bhagwan ko hum puja path va karte hain jo bhi aadhyatmik jodte jaha par wahan par nonveg kya karte hain us buddhi par attack dalta hai matlab jo sochne wali cheez hai na hum andar me sochne wali ko ganda kar deta toh bande se agar hum kisi bhagwan se judna chahen na toh jhuth nahi payenge ki man buddhi shudh hogi bhagwan ka connection se connection jod par uski bhasha samajh payenge usko dekh payenge saara khel se juda hua hai toh andha hota aur ek me last ka udaharan dena chahunga ki jo nonveg katane ke baad kya hota hai kyonki ko uske hath pair pakde jaate hain aur usko gardan aise ulti ke jaate the lekin uski aankhen toh khuli hoti hai kaam toh khule hote hain aur dekh bhi raha hota hai us insaan ko lekin tadpata katatey samay tadpane ke baad kya hota hai ki tadpane ke baad jo hamare sharir me taiyar ho jaate hain koi master par laate ho bahut unchi se khate hain usko pakad me koi ghatna ghatati hai ya phir kuch aur jaise hamare jisko hum bahut pyar karte hain uske bare me agar kuch galat cheez ho jaati toh hamare hath pair kaapne lagte hath pair kaapne lagte hain ya phir kabhi kabhi hamein dar lagta hai man bhayabhit ho jaate saari chijon ko bhi toh khona shanti hona chinta hona dar lagna bhai hona hi jeevan me saare nonveg khate na us insaan ko aate hain toh yah saari cheezen ko hamein dhyan aur jitna bhi usse hi man buddhi sehatmand ujagar dushit ho jayegi toh bhagwan se hum jhuth nahi payenge

सवाल बहुत ही अच्छा है आपका क्या नाम है खाने से हमारे अध्यक्ष ने कहा नष्ट हो जाते तो भ्रष्ट

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नॉनवेज खाने से ऐसा कोई भी अपनी आध्यात्मिक किया कोई भी मानसिक परेशानी नहीं होती है नॉनवेज तो शरीर में प्रोटीन की आवश्यकता की पूर्ति करता है वैसे अपने ही कुछ शारीरिक दोष ऐसी भी हो जाते हैं जिससे डॉक्टर भी खिला देते कि नॉनवेज ज्यादा से ज्यादा खाओ ताकि आपको इसमें जल्दी रिलीफ होगा जैसे एक हड्डी का टूट जाना नॉनवेज बहुत जल्दी ठीक कर देता है आपने सुना ही होगा यदि पैर की हड्डी या कोई भी हड्डी टूट जाए तो हमें कहा जाता है कि बकरे का खिलौने का सूप पीने से हड्डी बहुत जल्दी दूर जाती है इसलिए ऐसा कुछ नहीं है कि हमारी आदत में काबा नष्ट हो जाती है

nonveg khane se aisa koi bhi apni aadhyatmik kiya koi bhi mansik pareshani nahi hoti hai nonveg toh sharir me protein ki avashyakta ki purti karta hai waise apne hi kuch sharirik dosh aisi bhi ho jaate hain jisse doctor bhi khila dete ki nonveg zyada se zyada khao taki aapko isme jaldi relief hoga jaise ek haddi ka toot jana nonveg bahut jaldi theek kar deta hai aapne suna hi hoga yadi pair ki haddi ya koi bhi haddi toot jaaye toh hamein kaha jata hai ki bakre ka khilone ka soup peene se haddi bahut jaldi dur jaati hai isliye aisa kuch nahi hai ki hamari aadat me Kaba nasht ho jaati hai

नॉनवेज खाने से ऐसा कोई भी अपनी आध्यात्मिक किया कोई भी मानसिक परेशानी नहीं होती है नॉनवेज त

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Manali Longia

Social Worker

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चने खाने से हमारी आध्यात्मिक आता नष्ट हो जाती है कि हम भी कुछ खाने से परमात्मा से कोसों दूर चले जाते हैं क्योंकि हम परमात्मा की आत्मा को ही खाते हैं और थी उनमें से परमात्मा की आत्मा होती है परमात्मा की आत्मा परमात्मा का अंश होते हैं जो परमात्मा के अंश को दुख हो जाता है समझो परमात्मा को दुख हो जाता है और अगर हम नॉनवेज खाते हैं तो परमात्मा बहुत दुखी होते हैं और हम से दुख दूर हो जाते हैं और उनसे मिलने वाला लाभ हम को नहीं मिलता इसका प्रमाण में बाइबल में भी देखने को मिलता है कि परमात्मा बताते हैं कि जो पेड़ पौधे भी हैं वह परमात्मा ने हमारे खाने के लिए बनाए हैं हमें नॉनवेज खाने के खिलाफ परमात्मा ने कभी नहीं थी इसलिए हमें नॉलेज खाना बिल्कुल बंद कर देना चाहिए

chane khane se hamari aadhyatmik aata nasht ho jaati hai ki hum bhi kuch khane se paramatma se koson dur chale jaate hain kyonki hum paramatma ki aatma ko hi khate hain aur thi unmen se paramatma ki aatma hoti hai paramatma ki aatma paramatma ka ansh hote hain jo paramatma ke ansh ko dukh ho jata hai samjho paramatma ko dukh ho jata hai aur agar hum nonveg khate hain toh paramatma bahut dukhi hote hain aur hum se dukh dur ho jaate hain aur unse milne vala labh hum ko nahi milta iska pramaan mein bible mein bhi dekhne ko milta hai ki paramatma batatey hain ki jo ped paudhe bhi hain vaah paramatma ne hamare khane ke liye banaye hain hamein nonveg khane ke khilaf paramatma ne kabhi nahi thi isliye hamein knowledge khana bilkul band kar dena chahiye

चने खाने से हमारी आध्यात्मिक आता नष्ट हो जाती है कि हम भी कुछ खाने से परमात्मा से कोसों दू

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Hemant rajbale

शिक्षा सेवा, लेखक, विचारक

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क्या नॉनवेज खाने से हमारी आध्यात्मिक गाबा नष्ट हो जाती हैं कुछ कह नहीं सकते लेकिन नॉनवेज खाना एक सैनिक के लिए बहुत जरूरी है आपने सैनिकों को देखा होगा बहुत गुस्से में रहते हैं क्योंकि वह तामसिक भोजन करते मारकाट मचाने के लिए नई चीज खानी पड़ती है ताकि सभी में ऐसी ताकत आए सेक्सी नॉन वेज खाता कितना आक्रमक खूंखार हो जाता इसी प्रकार हाथी जो है प्रकाश प्रत्यय परस्पर देखा था लेकिन वह थोड़ा सा शांत पाए ठीक है बहुत कम ऐसे मौके होंगे जब आपका मन करे उसी प्रकार हरि नहीं और अनीसा कारी कि मनुष्य पर भी थोड़ा बहुत ही लागू होता है अब बात करके देख लेना किसी से जो नॉनवेज खाता है उसमें क्रोध की मात्रा अधिक शाकाहारी होता है सुमित क्रोध की मात्रा कम होती है तो नॉनवेज खाने से आध्यात्मिक आवाज से तो कोई लेना देना है या नहीं है यह मुझे नहीं मालूम लेकिन जैसा खाए अन्न वैसा होगा मन और जैसा कि पानी वैसे वाणी यह कहानी तो चरितार्थ है उसके कुछ ना कुछ तो इसमें है फिर खाना भी चाहिए क्योंकि इसके बिना तो काम चलता है जो सैनिक नहीं खाएगा तो कमजोर हो जाएगा और कमजोर कमजोर फिर सैनिक के लिए बहुत बड़ा अभिशाप है हां शिवलिंग के लिए इसे थोड़ा कम खाना चाहिए क्योंकि या गुस्से का कोई काम नहीं हम सब भी है इसलिए आप गुस्सा और आक्रामकता किसी काम के नहीं आ सकता युद्ध में अच्छी लगती है पर तो मैंने देखा आजकल समाज में लोग आपस में लड़ते आक्रमक हो गए पता नहीं किस काम से हो सकता है शराब के सेवन से या नॉनवेज के सेवन से उड़ती जाग गई परंतु सब ताकतवर लोग जो हैं उनको सैनिक कर्तव्य के लिए और कठिन कार्य है में लगाना चाहिए डाइवर्ट हो जाए और कैसी भी इन पर असर नहीं परंतु यह सब जय हो नहीं सकता तो खूब खाते और उनकी प्रवृत्ति कैसे बनती रहती हैं धन्यवाद

kya nonveg khane se hamari aadhyatmik gabah nasht ho jaati hain kuch keh nahi sakte lekin nonveg khana ek sainik ke liye bahut zaroori hai aapne sainikon ko dekha hoga bahut gusse me rehte hain kyonki vaah tamasik bhojan karte maar kaat machane ke liye nayi cheez khaani padti hai taki sabhi me aisi takat aaye sexy non veg khaata kitna aakraman khunkhar ho jata isi prakar haathi jo hai prakash pratyay paraspar dekha tha lekin vaah thoda sa shaant paye theek hai bahut kam aise mauke honge jab aapka man kare usi prakar hari nahi aur anisa kaari ki manushya par bhi thoda bahut hi laagu hota hai ab baat karke dekh lena kisi se jo nonveg khaata hai usme krodh ki matra adhik shakahari hota hai sumit krodh ki matra kam hoti hai toh nonveg khane se aadhyatmik awaaz se toh koi lena dena hai ya nahi hai yah mujhe nahi maloom lekin jaisa khaye ann waisa hoga man aur jaisa ki paani waise vani yah kahani toh charitarth hai uske kuch na kuch toh isme hai phir khana bhi chahiye kyonki iske bina toh kaam chalta hai jo sainik nahi khaega toh kamjor ho jaega aur kamjor kamjor phir sainik ke liye bahut bada abhishap hai haan shivling ke liye ise thoda kam khana chahiye kyonki ya gusse ka koi kaam nahi hum sab bhi hai isliye aap gussa aur aakraamakata kisi kaam ke nahi aa sakta yudh me achi lagti hai par toh maine dekha aajkal samaj me log aapas me ladte aakraman ho gaye pata nahi kis kaam se ho sakta hai sharab ke seven se ya nonveg ke seven se udati jag gayi parantu sab takatwar log jo hain unko sainik kartavya ke liye aur kathin karya hai me lagana chahiye Divert ho jaaye aur kaisi bhi in par asar nahi parantu yah sab jai ho nahi sakta toh khoob khate aur unki pravritti kaise banti rehti hain dhanyavad

क्या नॉनवेज खाने से हमारी आध्यात्मिक गाबा नष्ट हो जाती हैं कुछ कह नहीं सकते लेकिन नॉनवेज ख

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श्री दामा

आध्यात्म

1:20
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राधे-राधे प्रश्न किया है कि क्या नॉनवेज खाने से आत्मिक आभार नष्ट हो जाती है तो मेरे अनुसार नहीं होती हां लेकिन यह जरूर निश्चित है कि अधिक भोजन क्या होता है कि जो हम करते हैं आमतौर पर वही हम अपने ईश्वर को भी चढ़ाते हैं उन्हें भी अर्पित करते हैं अब देखा यह जाता है कि कुछ भगवान भी ऐसे होते हैं जिन्हें हम मांस मदिरा भी चढ़ाते हैं तो अगर आप मांस मदिरा का सेवन करते हैं तो आप ऐसे भगवान को चुने जो मांस मदिरा का सेवन करते हैं जैसे मां काली को मांस मदिरा चढ़ाया जाता है भैरव को मांस मदिरा चढ़ाया जाता है और अघोरी बाबा और ऐसी कई और कुछ देवस्थान होते हैं जहां पर मांस मदिरा आएगा तो मैं आपको इस सेशन दूंगा कि आध्यात्मिक आवा का नॉनवेज से कोई संबंध नहीं है आध्यात्मिक आवर्ती है पचासी तब से साधना से पूजन से लेकिन भोजन आप जिसे आप अगर नॉन वेज नहीं खाते आपका कार्य और आपको कैसा लगेगा जो ईश्वर नॉनवेज एक तक करते हैं आप उन्हीं को बस नॉनवेज दे सकते हैं धन्यवाद

radhe radhe prashna kiya hai ki kya nonveg khane se atmik abhar nasht ho jaati hai toh mere anusaar nahi hoti haan lekin yah zaroor nishchit hai ki adhik bhojan kya hota hai ki jo hum karte hain aamtaur par wahi hum apne ishwar ko bhi chadhate hain unhe bhi arpit karte hain ab dekha yah jata hai ki kuch bhagwan bhi aise hote hain jinhen hum maas madira bhi chadhate hain toh agar aap maas madira ka seven karte hain toh aap aise bhagwan ko chune jo maas madira ka seven karte hain jaise maa kali ko maas madira chadaya jata hai bhairav ko maas madira chadaya jata hai aur aghori baba aur aisi kai aur kuch devasthaan hote hain jaha par maas madira aayega toh main aapko is session dunga ki aadhyatmik ava ka nonveg se koi sambandh nahi hai aadhyatmik aawarti hai pachasi tab se sadhna se pujan se lekin bhojan aap jise aap agar non veg nahi khate aapka karya aur aapko kaisa lagega jo ishwar nonveg ek tak karte hain aap unhi ko bus nonveg de sakte hain dhanyavad

राधे-राधे प्रश्न किया है कि क्या नॉनवेज खाने से आत्मिक आभार नष्ट हो जाती है तो मेरे अनुसार

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Er Jaisingh

Mathematics Solution, 1:00PM TO 2:00PM

1:16
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क्या नॉनवेज खाने से हमारी आध्यात्मिक आवाज नष्ट होती है हम बिल्कुल होती है आध्यात्मिक आवा कष्ट यदि हम नॉनवेज खाएंगे तो यह किसी को आपने कष्ट दिया किसी का आपने हत्या के या हत्या किसी की की हुई मांस है उसको खाया तो कहते भले ही हैं कि मांस खाए मांस बढ़ेगी खाए खोपड़ी दूध पीकर चल पड़ी 100 वर्ष की डोकरी उसको क्यों नहीं पीते 100 वर्ष की दुखी भी चलने लगती हो दूध में सर्वगुण संपन्न में मांस क्यों बनाना चाहते हैं क्यों मोटा को बढ़ाना चाहते तो कहने का मतलब मेरा यह है कि नॉनवेज खाने से मारी आध्यात्मिक शक्ति आध्यात्मिक आवा निश्चित ही तौर पर नष्ट होती है यदि आप वास्तव में दूसरे जन्म में इंसान के रूप में ही पैदा होना चाहते हैं या फिर मोक्ष की गति को प्राप्त करना चाहते हैं तो आप नॉनवेज कतई खाने से दूर रहें कतई न खाएं बस मेरा तो यही कहना है धन्यवाद

kya nonveg khane se hamari aadhyatmik awaaz nasht hoti hai hum bilkul hoti hai aadhyatmik ava kasht yadi hum nonveg khayenge toh yah kisi ko aapne kasht diya kisi ka aapne hatya ke ya hatya kisi ki ki hui maas hai usko khaya toh kehte bhale hi hain ki maas khaye maas badhegi khaye khopdi doodh peekar chal padi 100 varsh ki dokri usko kyon nahi peete 100 varsh ki dukhi bhi chalne lagti ho doodh mein sarvagun sampann mein maas kyon banana chahte hain kyon mota ko badhana chahte toh kehne ka matlab mera yah hai ki nonveg khane se mari aadhyatmik shakti aadhyatmik ava nishchit hi taur par nasht hoti hai yadi aap vaastav mein dusre janam mein insaan ke roop mein hi paida hona chahte hain ya phir moksha ki gati ko prapt karna chahte hain toh aap nonveg katai khane se dur rahein katai na khayen bus mera toh yahi kehna hai dhanyavad

क्या नॉनवेज खाने से हमारी आध्यात्मिक आवाज नष्ट होती है हम बिल्कुल होती है आध्यात्मिक आवा क

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Suresh bilavliya

Ex Army Veer Kisan

0:53
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अगर कुत्ता सेक्सी हम नॉनवेज खाते हैं जो कि एक इसमें भी कुछ जीव होता है और हम जीव हत्या करके खाते हैं तो हम धर्म को बालन नग्न नहीं कर पाते और उन्हें भगवान भी माफ नहीं करता क्योंकि हम किसी जीव हत्या किसी के जीव की हत्या करके उसको हम अपना भोजन बनाकर नहीं खा सकते हैं इसलिए यह एक गलत है और इसका गलत परिणाम भुगतना उनको पड़ेगा इसीलिए कभी भी किसी जीव के अच्छे ना करेगी हर धर्म में यही सिखाता है और उसी के साथ साथ अगर आप नॉनवेज खाते हैं तो आपके अंदर कोई प्रेम की भावना नहीं रहेगी आप का परिणाम भूतनाथ

agar kutta sexy hum nonveg khate hain jo ki ek isme bhi kuch jeev hota hai aur hum jeev hatya karke khate hain toh hum dharm ko balan nagna nahi kar paate aur unhe bhagwan bhi maaf nahi karta kyonki hum kisi jeev hatya kisi ke jeev ki hatya karke usko hum apna bhojan banakar nahi kha sakte hain isliye yah ek galat hai aur iska galat parinam bhugatna unko padega isliye kabhi bhi kisi jeev ke acche na karegi har dharm mein yahi sikhata hai aur usi ke saath saath agar aap nonveg khate hain toh aapke andar koi prem ki bhavna nahi rahegi aap ka parinam bhutnath

अगर कुत्ता सेक्सी हम नॉनवेज खाते हैं जो कि एक इसमें भी कुछ जीव होता है और हम जीव हत्या करक

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जी हां बिल्कुल नॉनवेज खाने से हमारी आध्यात्मिक आधा ही नहीं हमारे जीवन के संस्कार भी खत्म हो जाते हैं और हमारे जो ईश्वर से स्वयं को जानने का आध्यात्मिक जो अनुभव में प्राप्त कम कर सकते हैं जीते जी वह नहीं कर पाते क्योंकि इसमें रुकावट आ जाती है अगर अब नॉनवेज खाते तो नॉन वेज खाना ही गलत है किसी प्राणी के मारकर आप खाते हैं आपके जीवन में कैसे संस्कार आएंगे ऋषि मुनि कितने ताप करते थे वह सादगी कालाधन करते थे जो प्रकृति प्रकृति ने नहीं बनाई है इसे के जीवन को काटकर मारकर खाने से क्या लाभ होगा काम क्रोध मद लोभ है यह बढ़ जाता है क्योंकि आपने खा ली नकारात्मकता से आती है बहुत ज्यादा जानवर में कोई बीमारी है तो वह भी आपको ऊपर आएगी जब हम जैसा व्यवहार करते जैसा खाए अन्न वैसा मन तो आपके विचार भी सुधरेंगे पवित्र देंगे आपके मन में कोई गलत विचार नहीं आएगा तो नॉनवेज खाने से आध्यात्मिक आवाज नष्ट होती है और ईश्वर को भी पसंद नहीं जो चीज मेरे को पसंद नहीं है उसे अपना प्रयोग करते हैं तो अध्यक्ष होगी होगी आपकी शादी कब होगी

ji haan bilkul nonveg khane se hamari aadhyatmik aadha hi nahi hamare jeevan ke sanskar bhi khatam ho jaate hain aur hamare jo ishwar se swayam ko jaanne ka aadhyatmik jo anubhav me prapt kam kar sakte hain jeete ji vaah nahi kar paate kyonki isme rukavat aa jaati hai agar ab nonveg khate toh non veg khana hi galat hai kisi prani ke marakar aap khate hain aapke jeevan me kaise sanskar aayenge rishi muni kitne taap karte the vaah saadgi kaladhan karte the jo prakriti prakriti ne nahi banai hai ise ke jeevan ko katkar marakar khane se kya labh hoga kaam krodh mad lobh hai yah badh jata hai kyonki aapne kha li nakaratmakta se aati hai bahut zyada janwar me koi bimari hai toh vaah bhi aapko upar aayegi jab hum jaisa vyavhar karte jaisa khaye ann waisa man toh aapke vichar bhi sudhrenge pavitra denge aapke man me koi galat vichar nahi aayega toh nonveg khane se aadhyatmik awaaz nasht hoti hai aur ishwar ko bhi pasand nahi jo cheez mere ko pasand nahi hai use apna prayog karte hain toh adhyaksh hogi hogi aapki shaadi kab hogi

जी हां बिल्कुल नॉनवेज खाने से हमारी आध्यात्मिक आधा ही नहीं हमारे जीवन के संस्कार भी खत्म ह

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हमारा आध्यात्मिक स्वरूप सत्यम आए हैं अहिंसा मैं प्रेम में तू किसी जीव की हत्या करके उसे भोजन के रूप में प्रयुक्त करना हमारी केवल आध्यात्मिक आभा को ही नष्ट नहीं करता बल्कि हमारी आध्यात्मिकता को ही समाप्त करने का एक स्वरूप है हमारी आध्यात्मिकता ही हम पूर्ण रूप से समाप्त कर देते हैं हमारी जो आध्यात्मिक भावना है उसमें प्राणी मात्र में ईश्वर के दर्शन करना किसी को कष्ट न पहुंचाना यह महत्वपूर्ण बात है बड़े-बड़े आध्यात्मिक महापुरुष तो पेड़ों के पतियों को तोड़ना यहां तक कि फूल तोड़ कर के भगवान को चाहने को भी हिंसा का स्वरूप मानते हैं बहुत सूक्ष्म रूप से जितने में काम चल सके इस तरह से जीवन निर्वाह कर लेते हैं तो किसी जीव की हिंसा करके उसे मार कर के और इस नश्वर शरीर के पोषण में लगाना यह आध्यात्मिकता नहीं हो सकती और कोई भी आध्यात्मिक व्यक्ति उसकी अंतरात्मा ऐसा करने के लिए उसे अनुमति नहीं प्रदान कर सकती बस इतना सा ही एक छोटा उत्तर इस प्रश्न का हो सकता है हमारी दृष्टि में

hamara aadhyatmik swaroop satyam aaye hain ahinsa main prem me tu kisi jeev ki hatya karke use bhojan ke roop me prayukt karna hamari keval aadhyatmik aabha ko hi nasht nahi karta balki hamari aadhyatmikta ko hi samapt karne ka ek swaroop hai hamari aadhyatmikta hi hum purn roop se samapt kar dete hain hamari jo aadhyatmik bhavna hai usme prani matra me ishwar ke darshan karna kisi ko kasht na pahunchana yah mahatvapurna baat hai bade bade aadhyatmik mahapurush toh pedon ke patiyon ko todna yahan tak ki fool tod kar ke bhagwan ko chahne ko bhi hinsa ka swaroop maante hain bahut sukshm roop se jitne me kaam chal sake is tarah se jeevan nirvah kar lete hain toh kisi jeev ki hinsa karke use maar kar ke aur is nashwar sharir ke poshan me lagana yah aadhyatmikta nahi ho sakti aur koi bhi aadhyatmik vyakti uski antaraatma aisa karne ke liye use anumati nahi pradan kar sakti bus itna sa hi ek chota uttar is prashna ka ho sakta hai hamari drishti me

हमारा आध्यात्मिक स्वरूप सत्यम आए हैं अहिंसा मैं प्रेम में तू किसी जीव की हत्या करके उसे भो

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डा दिवेश युवा अध्यात्मिक गुरु

योग ध्यान आयुर्वेदा

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