कई धर्मों में वर्जित प्रश्न क्यों होते हैं? क्या धर्म का मतलब ही हर सवाल का जवाब देना नहीं होता?...


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मित्र आप का प्रश्न है कि कई धर्मों में बारिश प्रसन्न होती हैं होते होंगे क्या धर्म का मतलब ही हर सवाल का जवाब देना नहीं होता है बिल्कुल होता है अब कई धर्मों में होते होंगे हम मान लेते हैं आपकी बात के कई धर्मों में है कि इसमें प्रश्न मत पूछो लेकिन जो हिंदू सनातन धर्म है उसमें आपको बिल्कुल अधिकार है गोस्वामी बाबा तुलसीदास जी लिखते हैं रामचरितमानस में जो अनिल का शुभा को भाई करिए विरोध ता है भविष्य लाई जो आपको चीज गलत रखती है उसका विरोध करना चाहिए और दूर करना चाहिए कहानी नहीं मानते कि कोई जो हिंदुस्तान स्थिति हमें विस्तार से हमें आदेश देते हैं कि आपको जो चीज गलत लगती है आपको जो प्रश्न समझ में आते शास्त्रों से जो आपको रिलेटेड आबू आपको सकते लेकिन आपको पूछने का एक तरीका होना चाहिए जो आपको पता नहीं है आप पूछ सकते हैं बेवकूफ सकते हैं साधु संतों से विद्वानों से पूछ सकते लेकिन उसके लिए भी माया दाएं बताएंगे कि प्रश्न कैसे पूछना है कैसे सुनना है तो इस चीज का विशेष ध्यान दिया जाए तो आप लेकिन आदत में रहकर पूछो कि हमें कैसे पूछना है तरीका कौन सा होना चाहिए कैसे पूछा जाए क्योंकि हमें किसी से ज्ञान चाहिए होता है या किसी से कुछ चीज चाहिए होती है तो बाप बन कर नहीं मिलती है आपको किसी से कुछ सही है तो पत्थर बनना पड़ेगा धन्यवाद जय श्री राम

mitra aap ka prashna hai ki kai dharmon me barish prasann hoti hain hote honge kya dharm ka matlab hi har sawaal ka jawab dena nahi hota hai bilkul hota hai ab kai dharmon me hote honge hum maan lete hain aapki baat ke kai dharmon me hai ki isme prashna mat pucho lekin jo hindu sanatan dharm hai usme aapko bilkul adhikaar hai goswami baba tulsidas ji likhte hain ramcharitmanas me jo anil ka shubha ko bhai kariye virodh ta hai bhavishya lai jo aapko cheez galat rakhti hai uska virodh karna chahiye aur dur karna chahiye kahani nahi maante ki koi jo Hindustan sthiti hamein vistaar se hamein aadesh dete hain ki aapko jo cheez galat lagti hai aapko jo prashna samajh me aate shastron se jo aapko related aabu aapko sakte lekin aapko poochne ka ek tarika hona chahiye jo aapko pata nahi hai aap puch sakte hain bewakoof sakte hain sadhu santo se vidvaano se puch sakte lekin uske liye bhi maya dayen batayenge ki prashna kaise poochna hai kaise sunana hai toh is cheez ka vishesh dhyan diya jaaye toh aap lekin aadat me rahkar pucho ki hamein kaise poochna hai tarika kaun sa hona chahiye kaise poocha jaaye kyonki hamein kisi se gyaan chahiye hota hai ya kisi se kuch cheez chahiye hoti hai toh baap ban kar nahi milti hai aapko kisi se kuch sahi hai toh patthar banna padega dhanyavad jai shri ram

मित्र आप का प्रश्न है कि कई धर्मों में बारिश प्रसन्न होती हैं होते होंगे क्या धर्म का मतलब

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Dr. Mahesh Mohan Jha

Asst. Professor,Astrologer,Author

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नमस्कार आपका प्लस में कई धर्मों में वर्जित प्रश्न क्यों होते हैं क्या धर्म का मतलब ही हर सवाल का जवाब देना नहीं होता है निश्चित रूप से सनातन धर्म में ऐसा कोई भी प्रश्न नहीं है जो आप नहीं पूछ सकते हैं क्योंकि जब तक आप पूछेंगे नहीं तब तक ऐसे समझेंगे जो धर्म क्या है इस पर क्या है आत्मा क्या है परमात्मा क्या है और जब आप समझेंगे तभी आपका विश्वास उत्पन्न होगा सलाम फॉर्म में है जो आप अल्लाह के अस्तित्व पर किसी भी प्रकार का अब सवाल नहीं कर सकते हैं या मोहम्मद पैगंबर पर किसी भी प्रकार का समान नहीं कर सकती सुना तंत्र

namaskar aapka plus me kai dharmon me varjit prashna kyon hote hain kya dharm ka matlab hi har sawaal ka jawab dena nahi hota hai nishchit roop se sanatan dharm me aisa koi bhi prashna nahi hai jo aap nahi puch sakte hain kyonki jab tak aap puchenge nahi tab tak aise samjhenge jo dharm kya hai is par kya hai aatma kya hai paramatma kya hai aur jab aap samjhenge tabhi aapka vishwas utpann hoga salaam form me hai jo aap allah ke astitva par kisi bhi prakar ka ab sawaal nahi kar sakte hain ya muhammad paigambar par kisi bhi prakar ka saman nahi kar sakti suna tantra

नमस्कार आपका प्लस में कई धर्मों में वर्जित प्रश्न क्यों होते हैं क्या धर्म का मतलब ही हर स

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Arpna Singh

Social Activist|Motivational Speaker|Yoga Teacher|Story Writer

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J.P. Y👌g i

Psychologist

4:42

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प्रसन्न है कई धर्मों में वर्जित प्रश्नों क्या नाम का मतलब हर सवाल का जवाब दर्शन समस्त प्रश्न और समस्या का समाधान अध्यात्म में धर्म में होता है लेकिन उसमें दो विवेचना से देखते हैं एक शालीनता के साथ असलील दूसरी उन्हीं भाव का असली रूप से प्रस्तुति होती है तो उसमें वर्जित कर दिया जाता है और दूसरी बात गलत दिशा में उसका उत्तर का प्रयोग देना हो कि मानती हो जाए और लोगों में गलत आचरण का अनुभव इस प्रकार से कुछ प्रश्नों के लिए वर्जित कर दिया जाता है लेकिन ऐसा नहीं है कि उसका जवाब नहीं है हर एक चीज का जवाब है और इतना खुला जवाब होता है और कितना स्वतंत्र होता है की जो बात जो ज्ञान हम किसी से नहीं कर पाते हैं नहीं हो पाता है वह भी उल्लेख हो जाता है तो ऐसा कोई ज्ञान धारा विचार सैलरी नहीं है कि जिसका जवाब ना हो लेकिन पूछने वाले और बताने वाले अपनी योग्यता के आधार पर अपने ढंग के हिसाब से उसको टैकल करते हैं इसलिए ऐसा होता लेकिन ऐसा तो नहीं है और कुछ इस तरह के प्रश्न आ जाते हैं जो भी मुड़ता का प्रदर्शन करते तो कोई खास उसमें रस उत्पन्न नहीं होता है और कभी का उसमें अहंकार का उद्दीपन ज्यादा रहता है या किसी को समझने का भाव रहता है ऑपरेशन के पीछे जो आश्चर्य होता है वह समझा जाता है कि प्रशन क्यों हो रहा है किस कारण से ही प्रसन्न है बनाया जा रहा है और उसका भाव देश क्या प्रभावित करेगा तो बहुत सी बातों का अवलोकन करके और जो भी बात के दायरे से मुक्त रहें और प्रश्न और उत्तर जो चित्त को प्रशांत करें वही उत्तम होता है प्रभारी प्रश्न भी अच्छा होता है और तुम भी उत्तर से ज्यादा श्रेष्ठ होते हैं यह बात नहीं है कि पसंद ना हो तो दो बार नहीं होगा तड़का दोनों की बहुत महत्वपूर्ण महत्वपूर्ण ता है शपथ आवश्यकता के अनुसार से जो प्रश्न उत्पादित होता है वह वास्तव में कल्याण दायक हो जाता है क्योंकि अध्यात्म और धर्म के लेबल में तर्क वितर्क का ज्यादा स्थान नहीं रहता अनुभूति का दायरा होता है और इसे शांत रूप संस्करण की धारा में अनुभव पिलाया आचरण किया जाता है मैं यही कहूंगा और विशेष ऐसा नहीं है हर प्रश्न का हल अगर इंसान का अंत करण शांत और विवेकपूर्ण है तो उसका समाधान उसके अंदर से ही प्राप्त हो जाता है आवश्यकता नहीं पड़ती है लेकिन फिर भी हमें विकास और विश्वास बढ़ाने के लिए प्रश्न उत्तर की अपेक्षा करनी पड़ती है तो यह विषय ऐसा नहीं है नहीं कहूंगा शुभचिंतक धन्यवाद

prasann hai kai dharmon mein varjit prashnon kya naam ka matlab har sawaal ka jawab darshan samast prashna aur samasya ka samadhan adhyaatm mein dharm mein hota hai lekin usme do vivechna se dekhte hai ek shalinata ke saath asalil dusri unhi bhav ka asli roop se prastuti hoti hai toh usme varjit kar diya jata hai aur dusri baat galat disha mein uska uttar ka prayog dena ho ki maanati ho jaaye aur logo mein galat aacharan ka anubhav is prakar se kuch prashnon ke liye varjit kar diya jata hai lekin aisa nahi hai ki uska jawab nahi hai har ek cheez ka jawab hai aur itna khula jawab hota hai aur kitna swatantra hota hai ki jo baat jo gyaan hum kisi se nahi kar paate hai nahi ho pata hai vaah bhi ullekh ho jata hai toh aisa koi gyaan dhara vichar salary nahi hai ki jiska jawab na ho lekin poochne waale aur batane waale apni yogyata ke aadhaar par apne dhang ke hisab se usko tackle karte hai isliye aisa hota lekin aisa toh nahi hai aur kuch is tarah ke prashna aa jaate hai jo bhi mudta ka pradarshan karte toh koi khaas usme ras utpann nahi hota hai aur kabhi ka usme ahankar ka uddipan zyada rehta hai ya kisi ko samjhne ka bhav rehta hai operation ke peeche jo aashcharya hota hai vaah samjha jata hai ki prashn kyon ho raha hai kis karan se hi prasann hai banaya ja raha hai aur uska bhav desh kya prabhavit karega toh bahut si baaton ka avalokan karke aur jo bhi baat ke daayre se mukt rahein aur prashna aur uttar jo chitt ko prashant kare wahi uttam hota hai prabhari prashna bhi accha hota hai aur tum bhi uttar se zyada shreshtha hote hai yah baat nahi hai ki pasand na ho toh do baar nahi hoga tadaka dono ki bahut mahatvapurna mahatvapurna ta hai shapath avashyakta ke anusaar se jo prashna utpadit hota hai vaah vaastav mein kalyan dayak ho jata hai kyonki adhyaatm aur dharm ke lebal mein tark vitark ka zyada sthan nahi rehta anubhuti ka dayara hota hai aur ise shaant roop sanskaran ki dhara mein anubhav pilaaya aacharan kiya jata hai yahi kahunga aur vishesh aisa nahi hai har prashna ka hal agar insaan ka ant karan shaant aur vivekpurn hai toh uska samadhan uske andar se hi prapt ho jata hai avashyakta nahi padti hai lekin phir bhi hamein vikas aur vishwas badhane ke liye prashna uttar ki apeksha karni padti hai toh yah vishay aisa nahi hai nahi kahunga shubhchintak dhanyavad

प्रसन्न है कई धर्मों में वर्जित प्रश्नों क्या नाम का मतलब हर सवाल का जवाब दर्शन समस्त प्

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M S Aditya Pandit

Entrepreneur | Politician

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ऐसे भी लोग हैं जो ऐसे सवाल करते हैं जो किसी भी धर्म में भी उत्तर नहीं होता अगर कोई पूछेगा कि हवा का रंग कैसे हैं तो कौन बचा पाएगा आत्मा कैसा दिखता है कौन बता मन कैसा दिखता है कौन बता पाएगा यह सब जो होते हैं कोई पूछता है तो उसको वर्जित किया जाता है क्योंकि यह सवाल का जवाब किसी के पास नहीं होता लोग समझते नहीं उसके प्रश्न उत्तर तो हमें ऐसे सवाल से बचना चाहिए

aise bhi log hain jo aise sawaal karte hain jo kisi bhi dharm mein bhi uttar nahi hota agar koi puchhega ki hawa ka rang kaise hain toh kaun bacha payega aatma kaisa dikhta hai kaun bata man kaisa dikhta hai kaun bata payega yah sab jo hote hain koi poochta hai toh usko varjit kiya jata hai kyonki yah sawaal ka jawab kisi ke paas nahi hota log samajhte nahi uske prashna uttar toh hamein aise sawaal se bachna chahiye

ऐसे भी लोग हैं जो ऐसे सवाल करते हैं जो किसी भी धर्म में भी उत्तर नहीं होता अगर कोई पूछेगा

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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आपको ऐसा किसने कहा नहीं ऐसा नहीं सभी धर्मों में कुछ बुराइयां होती सभी धर्मों में कुछ लोग अपनी संपत्ति और समझदार लोग परंपराओं को मिटाने सकते हैं इसलिए आपको हिंदू धर्म हिंदू धर्म में आप स्वतंत्र हैं आपके पोस्ट को पढ़ सकते हैं इस पर रखिए और आपको जवाब मिलेंगे इस ऐप चाहिए जो धर्म संबंधित ज्ञान रखते हैं आपके मन में कोई संशय है कोई पुरुष है कोई उलझन है अपने संकोच रखे निरोग रखें ऐसा कुछ भी नहीं है लेकिन हां सीमाओं का धर्म को लांच मेरा मानना यह है कि मुझे मेरे धर्म आने की कृपा है लेकिन दूसरों के धर्म को कोई भी अधिकार नहीं दूसरे धर्मों को मैं दूसरों के लिए मेरी एमएटीकेबी है यह बिलपांक की संतति है जो दूसरों का भी पालन करना चाहिए धर्म कोई सहारा नहीं है आप धर्मावलंबियों की मानसिकता कोरियर पुणे संगीता संगीता व्हाट्सएप डांस दिखाई देगा उसको हमारे धार्मिक होने का कार्य

aapko aisa kisne kaha nahi aisa nahi sabhi dharmon mein kuch buraiyan hoti sabhi dharmon mein kuch log apni sampatti aur samajhdar log paramparaon ko mitne sakte hain isliye aapko hindu dharm hindu dharm mein aap swatantra hain aapke post ko padh sakte hain is par rakhiye aur aapko jawab milenge is app chahiye jo dharm sambandhit gyaan rakhte hain aapke man mein koi sanshay hai koi purush hai koi uljhan hai apne sankoch rakhe nirog rakhen aisa kuch bhi nahi hai lekin haan seemaon ka dharm ko launch mera manana yah hai ki mujhe mere dharm aane ki kripa hai lekin dusro ke dharm ko koi bhi adhikaar nahi dusre dharmon ko main dusro ke liye meri MATKB hai yah bilpank ki santati hai jo dusro ka bhi palan karna chahiye dharm koi sahara nahi hai aap dharmavalambiyon ki mansikta courier pune sangeeta sangeeta whatsapp dance dikhai dega usko hamare dharmik hone ka karya

आपको ऐसा किसने कहा नहीं ऐसा नहीं सभी धर्मों में कुछ बुराइयां होती सभी धर्मों में कुछ लोग अ

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Dr. Suman Aggarwal

Personal Development Coach

0:48
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बिल्कुल सही कह रहे हैं आप धर्म के अंदर कोई भी सवाल आप पूछ सकते हो और अगर कोई भी आपको सवाल पूछने से मना करता है या कहीं वर्जित है तो चेक करने की जरूरत है कि कहीं हम गलत जगह तो नहीं है धर्म का तो बहुत सीधा-साधा नियम ने धर्म का अर्थ ही है प्रकृति के नियम तो हर इंसान को यह जानना और समझना बहुत जरूरी है कि धर्म शुद्ध धर्म है क्या बहुत ही आसान और सीधी सीधी चीजें होती है धर्म के अंदर और हर सवाल को वेलकम किया जाता है आप कुछ भी पूछो यह आपकी मर्जी है जब तक आप पूछोगे नहीं आपको जवाब नहीं पता चलेगा तो आप किसी बात को समझो गे या उस पर अमल करोगे कैसे

bilkul sahi keh rahe hain aap dharm ke andar koi bhi sawaal aap puch sakte ho aur agar koi bhi aapko sawaal poochne se mana karta hai ya kahin varjit hai toh check karne ki zarurat hai ki kahin hum galat jagah toh nahi hai dharm ka toh bahut seedha saadha niyam ne dharm ka arth hi hai prakriti ke niyam toh har insaan ko yah janana aur samajhna bahut zaroori hai ki dharm shudh dharm hai kya bahut hi aasaan aur seedhi seedhi cheezen hoti hai dharm ke andar aur har sawaal ko welcome kiya jata hai aap kuch bhi pucho yah aapki marji hai jab tak aap puchoge nahi aapko jawab nahi pata chalega toh aap kisi baat ko samjho gay ya us par amal karoge kaise

बिल्कुल सही कह रहे हैं आप धर्म के अंदर कोई भी सवाल आप पूछ सकते हो और अगर कोई भी आपको सवाल

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सभी धर्म एक समान है बस पूछने वालों के मुंह में लगा लगा नहीं है जो मर्जी आए वह पूछ लेते हैं उनको यह नहीं पता कि आपस में भाई भाई सब एक ही है

sabhi dharm ek saman hai bus poochne walon ke mooh me laga laga nahi hai jo marji aaye vaah puch lete hain unko yah nahi pata ki aapas me bhai bhai sab ek hi hai

सभी धर्म एक समान है बस पूछने वालों के मुंह में लगा लगा नहीं है जो मर्जी आए वह पूछ लेते हैं

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Er Jaisingh

Mathematics Solution, 1:00PM TO 2:00PM

3:34
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देसी सभी धर्मों में वर्जित प्रश्न क्यों होते हैं क्या धर्म का मतलब ही हर्षल हर सवाल का जवाब देना नहीं होता देखिए यह आपका प्रश्न है बहुत ही अच्छा है कि सभी धर्मों में वर्जित प्रश्न क्यों होते हैं एक समुदाय होता है ऐसे गायों का समुदाय भैंसों का समुदाय बकरियों का समुदाय पेड़ों का समुदाय शेरों का समुदाय कीटों का समुदाय चरण का समुदाय प्यार का समुदाय समुदाय होता है अब आ गए उनमें जानवरों में पशु पक्षियों में पक्षियों का समुदाय देखा होगा झुंड के झुंड उठते हैं अब आ जाइए मनुष्य योनि में मनुष्य योनि में महाराष्ट्रीयन का समुदाय मुसलमानों का समुदाय हिंदुओं का समुदाय पंजाबियों का चंदा कश्मीरियों का समुदाय नेपालियों का समुदाय घोड़ों का समुदाय यानी कहने का मतलब इस समुदाय हैं और समुदाय उसे ही भाषा का निरूपण हुआ है कि अपनी-अपनी भाषाएं जैसा समुदाय में रहेगा वैसे ही भाषा और पैदाइशी सीखेगा भैंस की भाषा अलग होगी गाय की भाषा अलग होगी बकरी की भाषा अलग होगी शेर की भाषा अलग होगी कि ताकि भाषा अलग होगी प्यार की भाषा अलग होगी समुदाय में अलग-अलग भाषा है अपनी प्रकृति की देन से विकास आ जाएगी शिक्षा एवं बुद्धिजीवी हैं शिक्षित हुए बुद्धि का ज्ञान बड़ा ज्ञान हुआ तो हमने उसको अलग अलग बात अब समुदाय है तो समुदाय में यानी बकरियों का समुदाय तो बकरियों का शब्द आया तो प्रेम से रहना चाहते हैं यदि दूसरे से लड़ेंगे तो फेसबुक कैसे पाएंगे शेर हैं सुंधा में प्रेम से रहना चाहते हैं यदि एक दूसरे से सिर खाने लगेगा तो कैसे काम चलेगा इसलिए मनुष्य योनि में हम हम चाहते हैं कि प्रेम से रहें क्या हम एक दूसरे से लड़ेंगे तो कैसे काम चलेगा कैसे जीवन जी पाएगा प्रेम और प्यार प्यार करना मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार ऐसी हम चाहते हैं कि प्रेम से रहें प्रेम और प्यार का विलोम शब्द होता है घृणा और नफरत घृणा और नफरत होती है तो क्या नफरत हो गया में जी पाएंगे नहीं प्रेम से आप प्यार से जीवन यापन करना चाहे इसलिए हम लोगों ने कुछ रूल्स बना दी हैं हम इन्हें रूल्स का निर्माण किया है हम ही नजर रूट्स आपने पढ़े होंगे रोड रूल्स इसलिए बना दिए हैं ऐसे भारतवर्ष में लेफ्ट साइड चलिए हम लेफ्ट और राइट लेफ्ट हो जाएंगे तो हमारा एक्सीडेंट हो जाएगा इसलिए हमेशा बाय चलिए अपने यहां देश में दूसरे देश में राइट साइड को भी चलते हैं तो यह अपने अपने रूठ हम लोगों ने बनाए हैं ठीक है अब आप समझ गए होंगे कि धर्मों में बलजीत प्रश्न क्यों है इसलिए ही वर्जित प्रश्न है कि प्रेम से रहो यह कार्य मत करिए यह कार्य मत चलिए यह बुरा कार्य धर्म के विरुद्ध है इसलिए रोका गया है तो बस यही आप समझते हैं इसका किया कि धन्यवाद

desi sabhi dharmon mein varjit prashna kyon hote kya dharm ka matlab hi harshal har sawaal ka jawab dena nahi hota dekhiye yah aapka prashna hai bahut hi accha hai ki sabhi dharmon mein varjit prashna kyon hote hain ek samuday hota hai aise gayon ka samuday bhainson ka samuday bakariyon ka samuday pedon ka samuday sheron ka samuday keeton ka samuday charan ka samuday pyar ka samuday samuday hota hai ab aa gaye unmen jaanvaro mein pashu pakshiyo mein pakshiyo ka samuday dekha hoga jhund ke jhund uthte hain ab aa jaiye manushya yoni mein manushya yoni mein maharashtriyan ka samuday musalmanon ka samuday hinduon ka samuday panjabiyon ka chanda kashmiriyon ka samuday nepaliyon ka samuday ghodon ka samuday yani kehne ka matlab is samuday hain aur samuday use hi bhasha ka nirupan hua hai ki apni apni bhashayen jaisa samuday mein rahega waise hi bhasha aur paidaishi sikhega bhains ki bhasha alag hogi gaay ki bhasha alag hogi bakri ki bhasha alag hogi sher ki bhasha alag hogi ki taki bhasha alag hogi pyar ki bhasha alag hogi samuday mein alag alag bhasha hai apni prakriti ki then se vikas aa jayegi shiksha evam buddhijeevi hain shikshit hue buddhi ka gyaan bada gyaan hua toh humne usko alag alag baat ab samuday hai toh samuday mein yani bakariyon ka samuday toh bakariyon ka shabd aaya toh prem se rehna chahte hain yadi dusre se ladenge toh facebook kaise payenge sher hain sundha mein prem se rehna chahte hain yadi ek dusre se sir khane lagega toh kaise kaam chalega isliye manushya yoni mein hum hum chahte hain ki prem se rahein kya hum ek dusre se ladenge toh kaise kaam chalega kaise jeevan ji payega prem aur pyar pyar karna manushya ka janmsiddh adhikaar aisi hum chahte hain ki prem se rahein prem aur pyar ka vilom shabd hota hai ghrina aur nafrat ghrina aur nafrat hoti hai toh kya nafrat ho gaya mein ji payenge nahi prem se aap pyar se jeevan yaapan karna chahen isliye hum logo ne kuch rules bana di hain hum inhen rules ka nirmaan kiya hai hum hi nazar roots aapne padhe honge road rules isliye bana diye hain aise bharatvarsh mein left side chaliye hum left aur right left ho jaenge toh hamara accident ho jaega isliye hamesha bye chaliye apne yahan desh mein dusre desh mein right side ko bhi chalte hain toh yah apne apne rooth hum logo ne banaye hain theek hai ab aap samajh gaye honge ki dharmon mein baljit prashna kyon hai isliye hi varjit prashna hai ki prem se raho yah karya mat kariye yah karya mat chaliye yah bura karya dharm ke viruddh hai isliye roka gaya hai toh bus yahi aap samajhte hain iska kiya ki dhanyavad

देसी सभी धर्मों में वर्जित प्रश्न क्यों होते हैं क्या धर्म का मतलब ही हर्षल हर सवाल का जवा

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धर्मानुसार कोई भी प्रश्न वर्जित नहीं होता जिज्ञासु की जो जिज्ञासा है उसको शांत करना धार्मिक प्रवक्ता का प्रथम कर्तव्य होता है

dharmanusar koi bhi prashna varjit nahi hota jigyasu ki jo jigyasa hai usko shaant karna dharmik pravakta ka pratham kartavya hota hai

धर्मानुसार कोई भी प्रश्न वर्जित नहीं होता जिज्ञासु की जो जिज्ञासा है उसको शांत करना धार्मि

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