आप आत्मा के मानवीय अनुभव का वर्णन कैसे करेंगे? क्या यह एक प्रकार की आध्यात्मिक ऊर्जा है या यह कुछ पूरी तरह से अलग है?...


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Gaurav Sethia

Career & Spiritual Coach

0:48
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

दिखेगा मैंने जो अपने जीवन में अनुभव किया है उसके अनुसार जो आत्मा है वह एक एनर्जी के प्रकार ही है उसको देखा तो नहीं जा सकता बट इसको फील किया जा सकता है तू और जब हम किसी तरह की मेडिटेशन में बैठते हैं और अपने आप में लीन हो जाते हैं तब हमें इसका अब कहीं ना कहीं आभास होता है कि हां कुछ ऐसी चीज है शरीर में जो शायद हमको एनर्जी प्रदान कर रही है और हम संपर्क जो हैं अपने माइंड से एक यूनिवर्सल माइंड जिसे हम कहते हैं स्प्रिचुअल माइंड कह सकते हैं या गॉड कह सकते हैं तो उसके साथ जो कनेक्शन बनता है वह एक एनर्जी ही है जो बनाती है वह कनेक्शन तो आत्मा को हम किस कई कई मतलब तरह से कह सकते हैं कि वह जो है एक आध्यात्मिक ऊर्जा की तरह ही है

dikhega maine jo apne jeevan me anubhav kiya hai uske anusaar jo aatma hai vaah ek energy ke prakar hi hai usko dekha toh nahi ja sakta but isko feel kiya ja sakta hai tu aur jab hum kisi tarah ki meditation me baithate hain aur apne aap me Lean ho jaate hain tab hamein iska ab kahin na kahin aabhas hota hai ki haan kuch aisi cheez hai sharir me jo shayad hamko energy pradan kar rahi hai aur hum sampark jo hain apne mind se ek universal mind jise hum kehte hain sprichual mind keh sakte hain ya god keh sakte hain toh uske saath jo connection banta hai vaah ek energy hi hai jo banati hai vaah connection toh aatma ko hum kis kai kai matlab tarah se keh sakte hain ki vaah jo hai ek aadhyatmik urja ki tarah hi hai

दिखेगा मैंने जो अपने जीवन में अनुभव किया है उसके अनुसार जो आत्मा है वह एक एनर्जी के प्रकार

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Bk soni

Rajyoga Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बहुत अच्छा प्रश्न है कि आप आत्मा के मानवीय अनुभव का वर्णन कैसे करें क्या यह एक प्रकार की आध्यात्मिक ऊर्जा है या यह कुछ पूरी तरह से अलग है हम आत्मा का मानवीय अनुभव मनोबल बढ़ाने के लिए आत्मा में ही मन होता है उसका अनुभव बढ़ाने के लिए आपको थोड़ा टिप्स देती हूं कि आत्मा की है क्या आत्मा कौन सी ऊर्जा है हां आध्यात्मिक ऊर्जा है पर आत्मा स्वयं एक शक्ति है जो इस शरीर के बीच इस शरीर के अंदर हमारे मस्तक के बीच में जहां हम तिलक लगाते हैं बिंदी लगाते हैं आध्यात्मिक व्यक्ति से वहां ही रहती है उसके अंदर 3 इंच अंदर हाइपोथैलेमस ग्लैंड और पिट्यूटरी ग्लैंड के बीच में रहती है और एक चमकता हुआ सितारा के रूप में दिखाई देते हैं और इसे हम इस आंखों से नहीं बुद्धि की आंखों से देख सकते हैं जैसे कार में ड्राइवर होता है और कार को हम रोज चलाते हैं ड्राइवर के अगर खाना नहीं लेंगे तो क्या हाल होगा इसी तरह से हमारी आत्मा का हाल हो गए शरीर रूपी कार में आत्मा ड्राइवर है आत्मा के बारे में पता नहीं यार मार्को चार्ज नहीं कर रहे हैं आत्मा को खाना नहीं दे रहे इस कारण ही हमारी आत्मा बहुत भले ही हो गई है बहुत शक्ति आदिशक्ति हो गई बहुत मिस शक्ति होने के कारण ही हम जो सोचते हैं वह बोल नहीं पाते हैं जो बोलते हैं वह कर नहीं पाते हैं या आत्मा की कमजोरी है आत्मा में मन बुद्धि संस्कार होते हैं मन सोचती है बुद्धि निर्णय करती है और कहीं भी बैठे हम जहां जहां घूम कर आते हैं वह सब के बारे में बुद्धि पिक्चर क्रिएट करती है वह हमारा तीसरा आंख है बुद्धि और संस्कार जब हम जो सोचते हैं फिर जो निर्णय करते हैं पिक्चर क्रिएट करते हैं तीसरी आंख से और वही इस शरीर के द्वारा करते हैं वही हमारा संस्कार हो जाता है और संकल्पों का बहुत विस्तार है मन के बारे में बुद्धि के बारे में संस्कार के बारे में और भी बहुत सारे विस्तार हैं मन के बारे में हम विस्तार करें तो मन में चार प्रकार के संकल्प उठते हैं फिर भी हम देखे तो 1 मिनट में ज्यादा से ज्यादा 35 से 55 संकल्पम अरे उठती है तो पूरे दिन में कितने संकल्प उठते हैं वह भी नेगेटिव नेगेटिव संकल्प उठती है क्योंकि हमारी आत्मा अभी बहुत मिस सकती हो गई है शक्ति भी नहीं है ऐसा हालत हो गया है अब जब किसी को खाना नहीं दो और ही उसको पिटाई करो तो कैसी हालत होती है ऐसी हमारी आत्मा की हालत हो गई है जिस कारण ही बोलते हैं महात्मा गांधी क्या बोले बुरा ना देखो बुरा मत सुनो बुरा ना बोलो पर आज क्या हो गया है कि हम बुरा देख रहे हैं बुरा सुन रहे हैं और बुरा बोल रहे हैं चाहते नहीं करना फिर भी कर रहे हैं ऐसे ही बुरा ना सोचना चाहते फिर भी हो रहा है क्योंकि हमारी आत्मा की कमजोरी है यह रह गई बात बुद्धि की बात जब हम हमारी आत्मा कमजोर हो गई है गलत गलत सोच रही है तो गलत ही नहीं लाइक करेंगे ना और फिर गलत ही करेंगे ना तो फिर क्या बोलते हैं पता नहीं क्यों तब तक नहीं हो रहा है माना अंदर का बॉक्स खाली है आत्मा रूपी बॉक्स खाली है और बाहर हम क्या बाहर हम सुख शांति ढूंढ रहे हैं बाहर सक्सेस ढूंढ रहे हैं तो नहीं ना मिलेगा इसके बाद मन की बात आती है तो हमारे मन में चार प्रकार के संकल्प उठते हैं पहला है नेगेटिव बाद में दूसरा पालते थे ताकि हम भगवान के बारे में सोचते हैं वह पल वीडियो फिर आती है इंपॉर्टेंट संकल्प लेना आवश्यक संकल्प आवश्यक संकल्पना सुबह से शाम तक हमको क्या करना है क्या इंपॉर्टेंट हमारे लाइफ में काम करना घर में या बाहर बच्चों को संभालने या कोई घर का मरे जो काम है सुबह से शाम तक वह जो जरूरी है वह करना और फिर आती है हमारे बीते हुए बातों को चिंतन करना कि सेना में कैसे दुख दिया ऐसे शब्द बोले किस प्रकार से हमारे साथ भी हेल्प किया वह सब को याद कर कर के हम दुखी होते हैं इससे क्या होता है वातावरण के लिए होता है आप देखे हुए जिस घर में ज्यादा झगड़ा होता है तो वहां पर क्या होता है कि कोई ज्यादा ही इज्जत उसको गुस्सा आती है लगता है कि यहां से चले जाते तो अच्छा होता तो बात आमंत्रित किया किसने संकल्पों के प्रभाव से क्रिएट हुआ ना झगड़ा का वातावरण में गुस्सा आ रही है बाजार का वातावरण देखो मार्केट का वातावरण देखो घर का वातावरण देखो और एक मंदिर का मंदिर में जाते हैं जैसे यह मंदिर में पैर रखते हैं तो गलत सोचना बंद कर देते अगर कोई गलत सोच हे भगवान मुझे माफ कर देना मना हमारे सूट के प्रभाव से ही सब चल रहा है दुनिया में अगर हमारा रहे तो हमारे आत्मा की शक्ति और भी बढ़ेगी और सोच को बदलने का एकमात्र इजी तरीका है मेरी टेशन राज्यों का मेडिटेशन और सोच से ही देखिए तो पिछले जमाने में जब भी किसी को हम पत्र भेजते तो तो 1 महीने के बाद पहुंचता था जब भी कोई हमारे घर में आने वाला होता है तो हमें पता चल जाती थी उस टाइम यहां आज कोई घर में आने वाला है चाहे वह बोलता था चाहे देखिए तो घर में कोई पानी गिर जाता था तो सोचते थे आज कोई प्यासा हमारे घर में आने वाला है उस टाइम मोबाइल तो नहीं था ना मना हमारी आत्मा की शक्ति से हम पहचान जाते थे कि हां कोई आज घर में आने वाला या कोई अनहोनी होने वाला है आज हमारी आत्मा में शक्ति ना होने के कारण ऐसी हालत हो गई है आज भी कोई कोई बातों में देखिए तो लोग क्या बोलते हैं कि पता नहीं आज कुछ होने वाला है नहीं तो हम किसी को फोन करने वाले होते हैं उसके बारे में सोचते हैं तो तब उसका फोन आ जाता है फिर क्या बोलते हैं अच्छा हुआ फोन कर दी आपके पास ही फोन करने वाले थे आप का 100 साल उमर हो ऐसे बोलते हैं मना यह सब आत्मा का ही प्रभाव है संकल्पों का ही प्रभाव है आत्मा में शक्ति रहेगी तो संकल्प में भी हमारी शक्ति जो सोचते वह पूरा हो जाता है यह सब आत्मा का प्रभाव है और आत्मा को शक्तिशाली बनाने के लिए बुद्धि से हम आत्मा को देखते हैं और परमात्मा को देख कर सकते हैं आत्मा की गुणों को उच्चारण करते हैं आत्मा में 7 गुण होता है आत्मा सात गुणों का स्वरुप है आत्मा शांति का स्वरुप है आत्मा शुक्र का स्वरुप है आत्मा प्रेम का स्वरूप है आत्मज्ञान का स्वरूप है आत्मा आनंद का स्वरुप है आत्मा पवित्रता का स्वरुप है आत्म शक्ति का स्वरूप है यह सात गुणों को उच्चारण करते हैं आत्माएं रूपी घर में रह रही है जैसे किसी कोई न कोई मर जाता है तो क्या करते हो उसके सर के आगे दिया जलाते क्यों जलाते हैं आत्माओं के अंधेरे में नहीं जाए पर आज ही इस शरीर रूपी घर में आत्मा अंधेरी में है ना इसलिए पहले क्या करना है इस शरीर रूपी घर में आत्मा रूपी दीपक को जलाना है तो क्या होगा जैसे उदाहरण से देखिए तो कोई घर में अगर सफाई नहीं हो रहा है बहुत दिन से घर नहीं खुला दीपक नहीं जलाया रोशनी नहीं किया तो क्या होता है उसमें बिच्छू बिच्छू और बहुत सारे छोटे-छोटे कीट कीट पुरानी सब उत्पन्न हो जाते हैं बहुत सारे गंदगी हो जाती है लोग बोलते भूत बंगला है इसी तरह से हमारा शरीर रूपी घर में आत्मा रूपी दीपक नहीं जलाते तो यह भी एक भूत बंगला है बना पांच विकारों का प्रवेश हो जाती है जो है काम क्रोध लोभ मोह अहंकार इसकी प्रवेश का होने के कारण ही हमारी आत्मा आज नहीं सकती हो गई है अंधेरे में है जब हम इरिटेशन करते हैं राज्यों का स्टेशन करते हैं तो उससे हमारी आत्मा रूपी ज्योत जलती है परमात्मा से कंटिन्यू सकती जब हम आत्मा को देखते तो साथ-साथ परमात्मा को देखकर कंटिन्यू शक्ति लेना शुरू कर उसकी शक्तियों से हमारी आत्मा पर बारिश होती है हमारी आत्मा पर बारिश होने से हमारी आत्मा और शक्तिशाली बनते हैं जैसे सावन में स्नान करते हैं तो सावर क्या है परमात्मा है परमात्मा को सावरकर अनुभव करके सांवर की तरह बारिश हमारे यहां पर हो रही है ऐसे राज्यों का मेडिटेशन करते हैं और मेडिटेशन की अधिक जानकारी के लिए यूट्यूब में बीके मेडिटेशन टाइप करेंगे तो आपको इसके अधिक जानकारी मिल जाएगी और अधिक अनुभव कर सकते आशा है कि आप टाइप करके उसको अनुभव करेंगे एक और बात बुद्धि हमारी फिर से हमारी आत्मा सीसीटीवी कैमरा है जो भी हम रिकॉर्ड करना चाहते हैं वह रिकॉर्ड क्लास जाना जरूरी नहीं है हम अकेले भी कोई गलत काम करते हैं या कोई सही काम करते हैं हमारी आत्मा में रिकॉर्ड होती है कि एक गुप्त ही चित्र निकलता रहता है इसलिए परमात्मा चित्रगुप्त नहीं है हम आत्माएं चित्रगुप्त हैं इसलिए परमात्मा को आध्यात्मिक ऊर्जा भी कहा जाता है पॉइंट ऑफ लाइट है सकती है वह इस शरीर की मालिक है शरीर रूपी घर का मालिक है आत्मा राजा है इस शरीर रूपी कर्मेंद्रियों के ऊपर राज्य करने वाली अधिकार करने वाली अधिकारी आत्मा में हूं ऐसे मेडिटेशन करना चाहिए

bahut accha prashna hai ki aap aatma ke manviya anubhav ka varnan kaise kare kya yah ek prakar ki aadhyatmik urja hai ya yah kuch puri tarah se alag hai hum aatma ka manviya anubhav manobal badhane ke liye aatma mein hi man hota hai uska anubhav badhane ke liye aapko thoda tips deti hoon ki aatma ki hai kya aatma kaun si urja hai haan aadhyatmik urja hai par aatma swayam ek shakti hai jo is sharir ke beech is sharir ke andar hamare mastak ke beech mein jaha hum tilak lagate hai bindi lagate hai aadhyatmik vyakti se wahan hi rehti hai uske andar 3 inch andar haipothailemas gland aur pituitary gland ke beech mein rehti hai aur ek chamakta hua sitara ke roop mein dikhai dete hai aur ise hum is aankho se nahi buddhi ki aankho se dekh sakte hai jaise car mein driver hota hai aur car ko hum roj chalte hai driver ke agar khana nahi lenge toh kya haal hoga isi tarah se hamari aatma ka haal ho gaye sharir rupee car mein aatma driver hai aatma ke bare mein pata nahi yaar marco charge nahi kar 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Negative Negative sankalp uthati hai kyonki hamari aatma abhi bahut miss sakti ho gayi hai shakti bhi nahi hai aisa halat ho gaya hai ab jab kisi ko khana nahi do aur hi usko pitai karo toh kaisi halat hoti hai aisi hamari aatma ki halat ho gayi hai jis karan hi bolte hai mahatma gandhi kya bole bura na dekho bura mat suno bura na bolo par aaj kya ho gaya hai ki hum bura dekh rahe hai bura sun rahe hai aur bura bol rahe hai chahte nahi karna phir bhi kar rahe hai aise hi bura na sochna chahte phir bhi ho raha hai kyonki hamari aatma ki kamzori hai yah reh gayi baat buddhi ki baat jab hum hamari aatma kamjor ho gayi hai galat galat soch rahi hai toh galat hi nahi like karenge na aur phir galat hi karenge na toh phir kya bolte hai pata nahi kyon tab tak nahi ho raha hai mana andar ka box khaali hai aatma rupee box khaali hai aur bahar hum kya bahar hum sukh shanti dhundh rahe hai bahar success dhundh rahe hai toh nahi na milega iske baad man ki baat aati hai toh hamare man mein char prakar ke sankalp uthte hai pehla hai Negative baad mein doosra palate the taki hum bhagwan ke bare mein sochte hai vaah pal video phir aati hai important sankalp lena aavashyak sankalp aavashyak sankalpana subah se shaam tak hamko kya karna hai kya important hamare life mein kaam karna ghar mein ya bahar baccho ko sambhalne ya koi ghar ka mare jo kaam hai subah se shaam tak vaah jo zaroori hai vaah karna aur phir aati hai hamare bite hue baaton ko chintan karna ki sena mein kaise dukh diya aise shabd bole kis prakar se hamare saath bhi help kiya vaah sab ko yaad kar kar ke hum dukhi hote hai isse kya hota hai vatavaran ke liye hota hai aap dekhe hue jis ghar mein zyada jhadna hota hai toh wahan par kya hota hai ki koi zyada hi izzat usko gussa aati hai lagta hai ki yahan se chale jaate toh accha hota toh baat aamantrit kiya kisne sankalpon ke prabhav se create hua na jhadna ka vatavaran mein gussa aa rahi hai bazaar ka vatavaran dekho market ka vatavaran dekho ghar ka vatavaran dekho aur ek mandir ka mandir mein jaate hai jaise yah mandir mein pair rakhte hai toh galat sochna band kar dete agar koi galat soch hai bhagwan mujhe maaf kar dena mana hamare suit ke prabhav se hi sab chal raha hai duniya mein agar hamara rahe toh hamare aatma ki shakti aur bhi badhegi aur soch ko badalne ka ekmatra easy tarika hai meri teshan rajyo ka meditation aur soch se hi dekhiye toh pichle jamane mein jab bhi kisi ko hum patra bhejate toh toh 1 mahine ke baad pahuchta tha jab bhi koi hamare ghar mein aane vala hota hai toh hamein pata chal jaati thi us time yahan aaj koi ghar mein aane vala hai chahen vaah bolta tha chahen dekhiye toh ghar mein koi paani gir jata tha toh sochte the aaj koi pyaasa hamare ghar mein aane vala hai us time mobile toh nahi tha na mana hamari aatma ki shakti se hum pehchaan jaate the ki haan koi aaj ghar mein aane vala ya koi anahoni hone vala hai aaj hamari aatma mein shakti na hone ke karan aisi halat ho gayi hai aaj bhi koi koi baaton mein dekhiye toh 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hai aatma raja hai is sharir rupee karmendriyon ke upar rajya karne wali adhikaar karne wali adhikari aatma mein hoon aise meditation karna chahiye

बहुत अच्छा प्रश्न है कि आप आत्मा के मानवीय अनुभव का वर्णन कैसे करें क्या यह एक प्रकार की आ

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Karan Janwa

Automobile Engineer

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आत्मा अर्थात जहां से विचार उत्पन्न होता है जो आपके जैसे संवेदन है जो लोग हैं उनको शुक्रण करती है वह ख्यात मई ग्रहण करके आप अपनी आज क्या नियंत्रण से बाहर के बचाव से संवेदन यात्रा करते हैं उनको आत्मा ही करती है तो आत्मा मन को निर्देशित करते हैं और मंत्रियों को निर्देशित करता है तो हमारे मस्तिष्क में चेतन मन होता है तो आपको चेतन मन भी नहीं हो उसके बाद देख अब से तन मन होता है तो आप और चेतन मन भी नहीं हो उसके बाद एक अति चेतन मन होता है अब वही चेतन मन भी नहीं हो तो ना तो आप को जागृत हो नहीं सपना हो इन दिनों के बाद में जो बसता है वह आपको ऋषिकेश ब्रह्मास्मि शो में कब आओगे मैं जो कह रहा है वह तो आत्मा ही ब्रह्म है आपकी तरह की फिल्मों के अंतर होता है और आत्मा तो एक ही होती है लेकिन आदमी के शरीर अलग-अलग होते हैं पेड़ पौधे होते हैं चीटियां होती है पक्षी होते उनके दर भी आता है लेकिन उनका शरीर और मनुष्य का शरीर अलग होता है

aatma arthat jaha se vichar utpann hota hai jo aapke jaise samvedan hai jo log hain unko shukran karti hai vaah khyat may grahan karke aap apni aaj kya niyantran se bahar ke bachav se samvedan yatra karte hain unko aatma hi karti hai toh aatma man ko nirdeshit karte hain aur mantriyo ko nirdeshit karta hai toh hamare mastishk mein chetan man hota hai toh aapko chetan man bhi nahi ho uske baad dekh ab se tan man hota hai toh aap aur chetan man bhi nahi ho uske baad ek ati chetan man hota hai ab wahi chetan man bhi nahi ho toh na toh aap ko jagrit ho nahi sapna ho in dino ke baad mein jo basta hai vaah aapko rishikesh brahmasmi show mein kab aaoge main jo keh raha hai vaah toh aatma hi Brahma hai aapki tarah ki filmo ke antar hota hai aur aatma toh ek hi hoti hai lekin aadmi ke sharir alag alag hote hain ped paudhe hote hain chitiyan hoti hai pakshi hote unke dar bhi aata hai lekin unka sharir aur manushya ka sharir alag hota hai

आत्मा अर्थात जहां से विचार उत्पन्न होता है जो आपके जैसे संवेदन है जो लोग हैं उनको शुक्रण क

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J.P. Y👌g i

Psychologist

10:00
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यह प्रश्न अच्छा है अब अधिकतम है आत्मा के मालवी अनुभव का वर्णन कैसे करेंगे पहली बार कभी-कभी ऐसा कहा जाता है कि गूंगी का सवाल जवाब तो ले रहा लेकिन बता नहीं पा रहा है लेकिन अनुभव का वर्णन हुआ है और वह अनुभव कुछ न कुछ स्तर पर प्रकाशित हुए हैं और उसमें सत्य मान रखा गया है इसीलिए आज भी उस दिशा की ओर लोग प्रेरित हो रहे हैं दायरा अपना-अपना होता है इसके अंदर कि किस आधार पर वह उचित प्रति अग्रसर होता है भौतिक विज्ञान के दायरे में यह तो मान लिया गया गया है कि कोशिश माइंड यानी अवचेतन और अचेतन मन मन का रूपरेखा या मस्तिक में जोड़ा जाता है अंधों के दानों को वर्णन कैसे करा जाए फौजी 1 किलो मिलता है कि जीव अविनाशी है अर्थात वह शीट का कोई भंजन नहीं है लेकिन उसकी ही मूल केंद्र से हमारे अंदर यह चेतन धारा प्रकट हो रही है अचेतन करना प्रक्षेप है ना हस्तक्षेप है लेकिन वह धारा हमारे पर गिर के प्रभावित करता है और हमारे को भूत वर्तमान और भविष्य काल के लिए चक्र से चलाएं मान हो रहे हो 1su पर चक्र घूम रहा है और उसके बाद दूसरा जो भी चेतन का है वह चल रहा है जो चेतन है वही तक हमारा दायरा है जब कुछ कुल की ध्यान अवस्था में चिंकी चीन का विकास हो चुका है मैच में प्रतिष्ठित हो जाते हैं तो एक भी उनको खरोश करना अर्थात जो मनुष्य क्षमता हो चेतन तक है अब इसमें मूल रूप से जो तामसी विज्ञापन इधर आ गई है भंग हो गया उसके बाद जितना उसका मूर्छा दर्शाती है भंग हो गया चेतना और फिर जागृत होते तो उसी शरीर और स्वस्थ कोशिकाओं और हार्मोन के द्वारा हम अपने को लेकर प्रकट हो जाते हैं लेकिन आने के बाद कहीं ना कहीं वह मेमोरी वह हमारा स्वरूप चेतना अवस्था एक सुरक्षात्मक ढंग से संगीत रहता है और वह क्लबड बना रहता है और भाई के प्रतिमान सुरूप हमारी रहते हैं कि हां मैं हूं वरना बेशर्म विस्मरण ऐसा हो जाए कि एक रात सोए तो दूसरी सुबह उसको कुछ पता नहीं मैं कौन हूं क्या नहीं तत्वों का भी हो पूरा होता है पाखंड चेतन रूप से और बिल्कुल कोई सोच नहीं होता समय स्वयं उसकी ऊर्जा जैसे उसके अंदर से सुरेश होती है उसी से ऊर्जावान चीजों में होता है उनके अंदर हिरण्यगर्भ बोला जाता है ऐसे हम भौतिक में अगर सूर्य दिखते हैं उनके प्रति भी कहते हैं कि आप यह अपनी उर्जा अपने ग्रुप से ही उत्पन्न कर रहा है प्रकृति के अंदर उसकी किस ढंग से उसकी ऊर्जा का केंद्र कृष्ण हो रहा है और किस तरह से मुक्त होता हुआ चला जा रहा है प्रसार होता है निरंतर का लोधी उसमें है लेकिन आत्मा को उससे भी ज्यादा है क्योंकि जिसके आधार से हमने जानने की शक्ति प्राप्त मिल लिया या हम जान लेते हैं तो जलाने वाला तो उससे बड़ा हो गया है जन आने वाली चीज है उससे भी चाय हमारे को ब्रह्मांड के बहुत महानतम दिल धड़का है महानतम उच्चतम इतनी श्रेष्ठ और उसी हिसाब से शिक्षण तो दोनों दशा को प्रतीत कराने वाली जो सत्ता चेतन ज्ञान है उस को प्रमुखता बनाते हैं शरीर की असमर्थता होती है कि हम इस शरीर जो भौतिक शरीर सकारात्मक या हमारा दे होता है इसकी सामग्री दी है इसके अलावा नहीं उस आस्वादन को ले पाता है लेकिन आज भी वैज्ञानिक रोक कुछ उपयंत्री जोड़कर के सूक्ष्म चीज को देखने की दूर की चीजों को पास अनुभव कराने के लिए उपयंत्री के सहारे अपने को संतुष्ट कर रहे हैं ज्यादातर जो लोग निर्माण पद हो जाते शरीर से अलग बिना इंद्रियों के भी अगर उनको जगत स्पष्ट हो रहा है तो यह बहुत बड़ी उपलब्ध हो जाए उपलब्धि है तो हम उड़ जा मान पहली बात हमारा केंद्र हो गया है हम इतने आंखों से जड़ है कि हम शरीर से अनुभव करते हैं हम अपने शरीर की आंखों से ही आप समझ रहे इसलिए देकर हम प्रतिभूति करा लेते कि यही कुछ लेकिन आपको भी की ज्योति को भी जोड़ चेतन अता दे रही हो वहां हम नहीं है प्रतिशत इस प्रकार से हमारे को जब टाइटन की सहूलियत मिलती है तो हमारे सूक्ष्म शरीर का निर्माण होता है और उसके दायरे से हमारी भूमिका बढ़ जाती है और हम अंतिम महान चीजों को समझने लगते हैं और वेतन चीज को भी जानने लगते हैं तो इतनी बड़ी चीजों को शिकार करता है जो मरे गॉड गिफ्ट इट्स अत्यंत करने में है और यह संरचना के कारण हम व्यवहार कर रहे हैं और उस व्यवहार में भी राग देश के अंदर अपने आप को मलिन कर देते हैं जो लोग इन से हटकर के जिनको विशाल लक्ष्य मिला है वह कुछ ना कुछ उपलब्ध कराने संसार को भी नियंत्रण के दायरे से उस ऐश्वर्य तक के द्वारे से ही उसको ज्यादा करें और ऐसे उजागर होने पर हमें ला प्रसन्नता मिलती कि हां इसमें आनंद आएगा दूसरी बात आत्म तत्व का एक उपलक्ष में जरूर है वह है आनंद एसएस समस्त ग्रंथों में प्रवचन हो मैहर देवी का धारा की आत्मा का अगर कोई लक्षण कोई है तो उसका उसका एक बार बताया जाता है आनंद तो आनंद किसी भी व्यक्ति विभिन्न विश्व के कारण सुख का प्रति बोध कराती है लेकिन आनंद के सहयोग से और आनंद के ही प्रति जगत क्या सच्ची आकर्षित हो रही है तो कृष्ण की ज्योति दी है उसी का दिव्य स्वरुप है इस तरह की जिसके अंदर गहराई में समा जा रही है वह सदन में इस में स्थित है वह आनंद ले रहे हैं और जो अन्य विषयों में अपने लिप्त होकर उसने अपना सुप्रभात आनंद की अनुभूति कराता है और भोग संसार एक अभी संयुक्त रहता है एक दिन विशेष के कारण मूवी मूवी धोने कारण जब इसका परिमार्जन होता तो दुखी होता है तो वह भी अपने आप को घुमाया जाता है अर्थात अकेला रह जाता तो कहीं से जुड़ा हुआ और पूरे परिपूर्णता से जुड़ा हुआ है जो जान लेता है तो कम से कम वह निर्भय जगत में ज्ञापन करता है तो अगर मानने की बात है अगर आपने अपने शरीर के अंदर को नहीं छुड़ाया तो उसका हम ऊर्जा भी समझ सकते कि एक विशेष अलग से उर्जा वह हमारा संपूर्ण चेतन कार्मिक जिन्होंने नियुक्तियों के साथ ऐसा प्रभाव पा लिया तो वह जिन चीजों से संसार उलझा और भ्रमित होता है वह सफल हो जाते हैं तो वहीं एक दिव्यता और महानता की शिर्डी में आ जाते हैं और यह अपने त्याग के ऊपर डिपेंड है कि हम पूरा समय कहां व्यतीत कर रहे तो उसका लाभ वही चीज में देगा जिस पर हमें अतीत करते हैं सिर्फ अपनी समझ से ही उसका अनुकरण

yah prashna accha hai ab adhiktam hai aatma ke malvi anubhav ka varnan kaise karenge pehli baar kabhi kabhi aisa kaha jata hai ki gungi ka sawaal jawab toh le raha lekin bata nahi paa raha hai lekin anubhav ka varnan hua hai aur vaah anubhav kuch na kuch sthar par prakashit hue hai aur usme satya maan rakha gaya hai isliye aaj bhi us disha ki aur log prerit ho rahe hai dayara apna apna hota hai iske andar ki kis aadhaar par vaah uchit prati agrasar hota hai bhautik vigyan ke daayre mein yah toh maan liya gaya gaya hai ki koshish mind yani avachetan aur achetan man man ka rooprekha ya mastisk mein joda jata hai andhon ke danon ko varnan kaise kara jaaye fauji 1 kilo milta hai ki jeev avinashi hai arthat vaah sheet ka koi bhanjana nahi hai lekin uski hi mul kendra se hamare andar yah chetan dhara prakat ho rahi hai achetan karna prakshep hai na hastakshep hai lekin vaah dhara hamare par gir ke prabhavit karta hai aur hamare ko bhoot vartaman aur bhavishya kaal ke liye chakra se chalaye 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swayam uski urja jaise uske andar se suresh hoti hai usi se urjavan chijon mein hota hai unke andar hiranyagarbh bola jata hai aise hum bhautik mein agar surya dikhte hai unke prati bhi kehte hai ki aap yah apni urja apne group se hi utpann kar raha hai prakriti ke andar uski kis dhang se uski urja ka kendra krishna ho raha hai aur kis tarah se mukt hota hua chala ja raha hai prasaar hota hai nirantar ka lodhi usme hai lekin aatma ko usse bhi zyada hai kyonki jiske aadhaar se humne jaanne ki shakti prapt mil liya ya hum jaan lete hai toh jalane vala toh usse bada ho gaya hai jan aane wali cheez hai usse bhi chai hamare ko brahmaand ke bahut mahantam dil dhadaka hai mahantam ucchatam itni shreshtha aur usi hisab se shikshan toh dono dasha ko pratit karane wali jo satta chetan gyaan hai us ko pramukhta banate hai sharir ki asamarthata hoti hai ki hum is sharir jo bhautik sharir sakaratmak ya hamara de hota hai iski samagri di hai iske alava nahi us aswadan ko le pata hai lekin aaj bhi 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यह प्रश्न अच्छा है अब अधिकतम है आत्मा के मालवी अनुभव का वर्णन कैसे करेंगे पहली बार कभी-क

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

6:19
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आत्मा के माननीय अनुभव प्रकाश है या यह पूरी तरह से अलग बहुत ही उत्तम कोटि का प्रश्न आहट में रखा है प्राथमिक तरीके से जवाब देने की कोशिश में मेरी कुछ लेकिन देखिए आत्मा जो है वह हमारे शरीर में प्रवेश करती है जब हम अपनी मां को घर में होते हैं चौथे या पांचवें महीने में यानी कि जब हम मां के उदर में होते हैं तो तीन साढे 3 महीने तक हम बिना बिना पुराण के मां के उदर में पल रहे हो होता है लेकिन आत्मा नहीं उसके बाद आत्मा यात्रा का संचार होता है यह साइंटिफिक फैक्ट इसलिए हमें इस बात को स्वीकार करना चाहिए जब हम अंतिम सांसे लेते अंतिम साथ कब है हमको मालूम नहीं है ड्यूटी लिस्ट को मिलते हैं कि हमारा जीवन साडे तीन चार महीने साडे 4 महीने 5 महीने के बाद हमारे शरीर में आत्मा का प्रवेश हुआ और हम हलन चलन करते हैं और मां के पोषण से हम उस समय हम जब तक 9 महीने को तब तक रोक जीवी अवस्था में क्योंकि मां के द्वार आया मैं कोटा नीलगाय उत्तर रामस्वरूप जी भी है और महान है हमें बहुत ही कष्ट प्रसव पीड़ा के दरमियां इस संसार में जन्म लिया और उसके बाद हम अपना जो सरसों का बालपन और जवानी और रोड जिसको नसीब हो क्योंकि हमको मालूम नहीं होता है कि हम कितने समय तक देने वाले हमारा अंतिम सांस कौन सी अब हमको ऊर्जा मिली वह जब हमारी आत्मा का प्रवेश हुआ हमारी मां के उदर में हमारे दर्द माता के उधर में जो हमारी गर्भ में आ जाती उर्जा का प्रवेश और आजादी पूजा जाती है जब हमारी अंतिम साहब छुट्टी इसलिए जो मांगी अनुभव है जब हमारी पहली साथ जब हमने लू माता के गरबा श्रेणी से बाहर आते हो पहली सांस ली और अंतिम जब मृत्यु हमारी उसके पहले हमने अंतिम वही अधिक उर्जा क्योंकि जब तक सांस है जब तक ऑन है वही बीच में जो समय होता है जब माता के उदर में हम पढ़ रहे हो पूजा हमारे पास हमारे शरीर में आ जाती है लेकिन क्योंकि हम इस संसार में जन्म नहीं लेते हैं इसलिए अक्षर से उर्जा उस समय बेहिसाब होती है लेकिन हम महसूस नहीं कर सकते क्योंकि हमारी अवस्था ऐसी नहीं इसलिए हमें जब हमने पहली साथ इस संसार में पदार्पण करने के बाद जी और अंतिम सांस 2:00 बजे के पहले ली बस वही हमारा आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन जाता है और हमें इस बात को मानना चाहिए विश्वास करना चाहिए यही हमारा जीवन अलग-अलग तरह के दो हमारे कार्य क्षेत्र होते हैं या अवस्था होती है वह अपने बारे में हम मान सकते हैं लेकिन आध्यात्मिक ऊर्जा जो है पहली सांस और रंक इंसाफ के बीच में होती है और माता के गरबा सही जो व्यक्ति को जा जो हमको मिली होती वह माता की धरती और माता के जो आध्यात्मिक ऊर्जा होती है दोनों का संबंध में होता मैं समझता हूं कि मैं अपनी समझ से जो बातें बताई है उसे सब लोग आप अवश्य महसूस करेंगे अच्छे से

aatma ke mananiya anubhav prakash hai ya yah puri tarah se alag bahut hi uttam koti ka prashna aahat mein rakha hai prathmik tarike se jawab dene ki koshish mein meri kuch lekin dekhiye aatma jo hai vaah hamare sharir mein pravesh karti hai jab hum apni maa ko ghar mein hote hai chauthe ya panchwe mahine mein yani ki jab hum maa ke udar mein hote hai toh teen sadhe 3 mahine tak hum bina bina puran ke maa ke udar mein pal rahe ho hota hai lekin aatma nahi uske baad aatma yatra ka sanchar hota hai yah scientific fact isliye hamein is baat ko sweekar karna chahiye jab hum antim sanse lete antim saath kab hai hamko maloom nahi hai duty list ko milte hai ki hamara jeevan saade teen char mahine saade 4 mahine 5 mahine ke baad hamare sharir mein aatma ka pravesh hua aur hum halan chalan karte hai aur maa ke poshan se hum us samay hum jab tak 9 mahine ko tab tak rok jive avastha mein kyonki maa ke dwar aaya main quota nilagay uttar ramsvarup ji bhi hai aur mahaan hai hamein bahut hi kasht prasav peeda ke darmiyan is sansar mein janam liya aur uske baad hum apna jo sarso ka balpan aur jawaani aur road jisko nasib ho kyonki hamko maloom nahi hota hai ki hum kitne samay tak dene waale hamara antim saans kaun si ab hamko urja mili vaah jab hamari aatma ka pravesh hua hamari maa ke udar mein hamare dard mata ke udhar mein jo hamari garbh mein aa jaati urja ka pravesh aur azadi puja jaati hai jab hamari antim saheb chhutti isliye jo maangi anubhav hai jab hamari pehli saath jab humne loo mata ke garba shreni se bahar aate ho pehli saans li aur antim jab mrityu hamari uske pehle humne antim wahi adhik urja kyonki jab tak saans hai jab tak on hai wahi beech mein jo samay hota hai jab mata ke udar mein hum padh rahe ho puja hamare paas hamare sharir mein aa jaati hai lekin kyonki hum is sansar mein janam nahi lete hai isliye akshar se urja us samay behisab hoti hai lekin hum mehsus nahi kar sakte kyonki hamari avastha aisi nahi isliye hamein jab humne pehli saath is sansar mein padarpan karne ke baad ji aur antim saans 2 00 baje ke pehle li bus wahi hamara aadhyatmik urja ka kendra ban jata hai aur hamein is baat ko manana chahiye vishwas karna chahiye yahi hamara jeevan alag alag tarah ke do hamare karya kshetra hote hai ya avastha hoti hai vaah apne bare mein hum maan sakte hai lekin aadhyatmik urja jo hai pehli saans aur rank insaaf ke beech mein hoti hai aur mata ke garba sahi jo vyakti ko ja jo hamko mili hoti vaah mata ki dharti aur mata ke jo aadhyatmik urja hoti hai dono ka sambandh mein hota main samajhata hoon ki main apni samajh se jo batein batai hai use sab log aap avashya mehsus karenge acche se

आत्मा के माननीय अनुभव प्रकाश है या यह पूरी तरह से अलग बहुत ही उत्तम कोटि का प्रश्न आहट में

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Ghanshyamvan

मंदिर सेवा

1:17
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देखिए आत्मा का वर्णन वाली नहीं कर सकती क्योंकि वाणी नहीं आत्मा की सानिध्य में रहकर ही काम करती है जो एनजीओ मन बुद्धि चित्त है सब आत्मा के द्वारा ही कार्य करती हैं यानी कि इन सब में भी आत्मा की ही उर्जा है हम जैसे बिना दर्पण के अपना स्वरूप नहीं देख सकते इसी तरह है हम अपनी आत्मा को अपने द्वारा कैसे देख सकते हैं यानी के जो इंद्रियां हैं मन बुद्धि चित्त है यदि हम इनको अपनी आत्मा में लगाकर ध्यान से देखें तो तभी देख सकते हैं सांसारिक मोह छोड़कर आत्मा का यही अनुभव है कि आत्मा सर्वत्र व्याप्त है 12वीं है भीतर भी है चर्बी है चर्बी है हम ऐसे ही ईश्वर की के अंशु आत्मा को बारंबार नमन करते हैं जय श्री परमात्मने

dekhiye aatma ka varnan wali nahi kar sakti kyonki vani nahi aatma ki sanidhya mein rahkar hi kaam karti hai jo ngo man buddhi chitt hai sab aatma ke dwara hi karya karti hain yani ki in sab mein bhi aatma ki hi urja hai hum jaise bina darpan ke apna swaroop nahi dekh sakte isi tarah hai hum apni aatma ko apne dwara kaise dekh sakte hain yani ke jo indriya hain man buddhi chitt hai yadi hum inko apni aatma mein lagakar dhyan se dekhen toh tabhi dekh sakte hain sansarik moh chhodkar aatma ka yahi anubhav hai ki aatma sarvatra vyapt hai vi hai bheetar bhi hai charbi hai charbi hai hum aise hi ishwar ki ke anshu aatma ko barambar naman karte hain jai shri paramatmane

देखिए आत्मा का वर्णन वाली नहीं कर सकती क्योंकि वाणी नहीं आत्मा की सानिध्य में रहकर ही काम

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Anil Rajbhar

Motivationel speaker /Counsellor/ business owner,.,mob.7769065459

5:54
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बहुत ही अच्छा सवाल है आपका मोबाइल का दृष्टिकोण स्पष्ट करने की कोशिश करेंगे देखो विज्ञान क्या कहता है कि को चलाने वाली एक उर्जा होती माता एनर्जी होती है जो शरीर को चलाती है तो पहला सवाल हम खुद को करेंगे कि दो ही चीजें हैं शारीरिक ऊर्जा है मतलब जिसको हम अपना कहते हैं तो दो ही कीजिएगा है कि हम कौन हैं हमें ऊर्जा है और हम शरीर नहीं हैं तो होता क्या है कि हम खुद को शरीर मान बैठे हैं और शरीर तो नाशिवंत है और शरीर तो देखो बदलता है बचपन में अलग दिखता है जवानी एनर्जी कहां गए दीपक एनर्जी का एकलौता है ना जी ना इधर भी क्रिएटिव नॉरबिट डिस्ट्रॉयड मतलब जानना उसका निर्माण किया गया है ना उसको नष्ट किया जाता है ठीक है अगर मैं मान लूं कि मैं उर्जा हूं मैं फ्री नहीं हूं तो अगर मैं उसको आत्मा भी कहूं मैं खुद तुम्हें आत्मा कभी यही डेफिनेशन है कि ना मैं करती हूं ना जानती हूं ना मैं देखती हूं तो मैं आत्मा भी देखो और ना जल्दी हूं ना करती हूं तुम्हें अविनाश हूं मैं अगर अविनाशी हूं और मुझ में चेतन नेता है मतलब फीलिंग से मैं सुख-दुख मांगो कर सकता हूं तो मैं शरीर के द्वारा होगा एक जगह से दूसरी जगह ले जाता है उसको ले जा सकते उसको ने बताया कि एक जगह से दूसरे चक्र में जुड़ जाए इस सृष्टि पर जितने भी चीज है उसको ऊर्जा कहा जाता है तो ऊर्जा माना क्या क्यों उड़ जा का और एक सिद्धांत है उसको जानना है हमें ऊर्जा जो है चेक समय में बहुत ही चार्ज होती है फिर एक समय में बहुत ही डिस्चार्ज हो जाती है फिर से चर्चा करने के लिए एक बहुत ही छोटी बात करते लेकिन हम जान नहीं पा रहे हैं चार्जिंग करने के बाद हम अपने पास रखते हैं कोचिंग से जोड़ देते और फिर उसको चार्ज कर देते के पैसे पूरे फिर से खाली हो जाते हैं तो फिर मन बुद्धि को सफेद कैसे बनाएं तो देखो मैंने बताया पहले की कोई भी चीज चार्ज करने तो उसको अलग करना पड़ता है तो देखो हमारे शरीर में रहकर जो कर्म करे ना तो हम शरीर से अलग होकर खुद को हाथ मत समझना है तो यह मालूम होते हैं और जो परमात्मा शक्ति है जो यहां पर सुख शांति आनंद मतलब सुख शांति आनंद प्रेम पवित्र ज्ञान और शक्ति सारे गुणों का स्रोत है परमात्मा सागर है वह तो हम आत्माएं जो कुछ को आत्मिक रूप में स्थित करते हैं कैसे दिखते हम उसका पहला ज्ञान प्राप्त करते हैं हम और जाम कैसे देते हैं उसका ज्ञान पहले प्राप्त कर फिर उसको मन बुद्धि श्याम खुद को जब आत्मा समझते तो इतिहास से न्यारे हो जाते हैं और न्यारे होने के बाद परमात्मा को हम प्राप्त कर सकते हैं उसको देख सकते हैं उसकी सारी शक्तियां खुद में खींच सकते हैं क्योंकि जिससे हम जोड़ते हैं ना उसकी सारी शिक्षा हमें ट्रांसफर होने लगती है जैसे हम चार्जिंग को अपने मोबाइल फोन में चार्जिंग से जोड़ा इलेक्ट्रिसिटी गोडसे तो उसकी सारी शक्तियां उसमें ट्रांसफर होने लगे तो खाली हो गए हैं तो हम भी जाकर ईश्वर से जुड़ जाते हैं तो सारी उसके जो सप्ताह में ट्रांसफर होने लगते तो यही चीज है जो आप जानना चाहते हैं लेकिन इसको अधिक विस्तार से आप जानना चाहेंगे तो मैं कोशिश करूंगा कि परमात्मा से जुड़कर में फिर से शक्तिशाली बनती है इसे जन्म मरण के चक्र में में जब शुरू में जब मैं अपना जब शुरू में आती हूं इस धरा पर तुम्हें चार्जिंग होके आते हो चार्जिंग हो ना मना किया कि मैं कब मेरे में सब देवी होती सारी चीजें पहले चंद्रमा पर चार्ज करता है और परमात्मा एक उड़ जाए जिसको विज्ञान कहते कि अल्ट्रा हाई एनर्जी कहते उसको करो तो मर जाए विरोधी कहते हैं विज्ञान तो यह सारी बातों से पता चलता है कि आध्यात्मिक ऊर्जा ही सबसे महान है

bahut hi accha sawaal hai aapka mobile ka drishtikon spasht karne ki koshish karenge dekho vigyan kya kahata hai ki ko chalane wali ek urja hoti mata energy hoti hai jo sharir ko chalati hai toh pehla sawaal hum khud ko karenge ki do hi cheezen hain sharirik urja hai matlab jisko hum apna kehte hain toh do hi kijiega hai ki hum kaun hain hamein urja hai aur hum sharir nahi hain toh hota kya hai ki hum khud ko sharir maan baithe hain aur sharir toh nashivant hai aur sharir toh dekho badalta hai bachpan me alag dikhta hai jawaani energy kaha gaye deepak energy ka eklauta hai na ji na idhar bhi creative narbit distrayad matlab janana uska nirmaan kiya gaya hai na usko nasht kiya jata hai theek hai agar main maan loon ki main urja hoon main free nahi hoon toh agar main usko aatma bhi kahun main khud tumhe aatma kabhi yahi definition hai ki na main karti hoon na jaanti hoon na main dekhti hoon toh main aatma bhi dekho aur na jaldi hoon na karti hoon tumhe avinash hoon main agar avinashi hoon aur mujhse me chetan neta hai matlab feeling se main sukh dukh mango kar sakta hoon toh main sharir ke dwara hoga ek jagah se dusri jagah le jata hai usko le ja sakte usko ne bataya ki ek jagah se dusre chakra me jud jaaye is shrishti par jitne bhi cheez hai usko urja kaha jata hai toh urja mana kya kyon ud ja ka aur ek siddhant hai usko janana hai hamein urja jo hai check samay me bahut hi charge hoti hai phir ek samay me bahut hi discharge ho jaati hai phir se charcha karne ke liye ek bahut hi choti baat karte lekin hum jaan nahi paa rahe hain charging karne ke baad hum apne paas rakhte hain coaching se jod dete aur phir usko charge kar dete ke paise poore phir se khaali ho jaate hain toh phir man buddhi ko safed kaise banaye toh dekho maine bataya pehle ki koi bhi cheez charge karne toh usko alag karna padta hai toh dekho hamare sharir me rahkar jo karm kare na toh hum sharir se alag hokar khud ko hath mat samajhna hai toh yah maloom hote hain aur jo paramatma shakti hai jo yahan par sukh shanti anand matlab sukh shanti anand prem pavitra gyaan aur shakti saare gunon ka srot hai paramatma sagar hai vaah toh hum aatmaen jo kuch ko atmik roop me sthit karte hain kaise dikhte hum uska pehla gyaan prapt karte hain hum aur jam kaise dete hain uska gyaan pehle prapt kar phir usko man buddhi shyam khud ko jab aatma samajhte toh itihas se nyare ho jaate hain aur nyare hone ke baad paramatma ko hum prapt kar sakte hain usko dekh sakte hain uski saari shaktiyan khud me khinch sakte hain kyonki jisse hum jodte hain na uski saari shiksha hamein transfer hone lagti hai jaise hum charging ko apne mobile phone me charging se joda electricity godse toh uski saari shaktiyan usme transfer hone lage toh khaali ho gaye hain toh hum bhi jaakar ishwar se jud jaate hain toh saari uske jo saptah me transfer hone lagte toh yahi cheez hai jo aap janana chahte hain lekin isko adhik vistaar se aap janana chahenge toh main koshish karunga ki paramatma se judakar me phir se shaktishali banti hai ise janam maran ke chakra me me jab shuru me jab main apna jab shuru me aati hoon is dhara par tumhe charging hoke aate ho charging ho na mana kiya ki main kab mere me sab devi hoti saari cheezen pehle chandrama par charge karta hai aur paramatma ek ud jaaye jisko vigyan kehte ki ultra high energy kehte usko karo toh mar jaaye virodhi kehte hain vigyan toh yah saari baaton se pata chalta hai ki aadhyatmik urja hi sabse mahaan hai

बहुत ही अच्छा सवाल है आपका मोबाइल का दृष्टिकोण स्पष्ट करने की कोशिश करेंगे देखो विज्ञान क्

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Anjali Upadhyay

I Want To Become An Ias Officer

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आप आत्मा के मानवीय अनुभवों का वर्णन कैसे करेंगे क्या यह एक का की आध्यात्मिक ऊर्जा है या यह कुछ पूरी तरह से अलग है यह चार महत्वपूर्ण है जिसमें यह भक्तियोग कर्मयोग राजयोग और ज्ञान योग इनके द्वारा आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होने लगता है

aap aatma ke manviya anubhavon ka varnan kaise karenge kya yah ek ka ki aadhyatmik urja hai ya yah kuch puri tarah se alag hai yah char mahatvapurna hai jisme yah bhaktiyog karmayog rajyog aur gyaan yog inke dwara aadhyatmik urja ka anubhav hone lagta hai

आप आत्मा के मानवीय अनुभवों का वर्णन कैसे करेंगे क्या यह एक का की आध्यात्मिक ऊर्जा है या यह

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Kesharram

Teacher

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Raghuveer Singh

👤Teacher & Advisor🙏

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हम आत्मा का मानवीय अनुभव वर्णन नहीं किया जा सकता है माननीय अनुभव यह एक प्रकार की आध्यात्मिक ऊर्जा है या कुछ पूरी तरह से अलग है तो इसके प्रति गहन चर्चा की है बहुत सारे लोगों ने आपको कोई यह कहे कि अंतरिक्ष का वर्णन करिए अंतरिक्ष का वर्णन नहीं कर सकते हम अंतरिक्ष के भीतर रहने वाले ग्रहों का नक्षत्रों का सूर्य चंद्रमा हो तारों का गलियों का ब्रह्मांड का वर्णन कर सकते हैं लेकिन हमसे कहीं के अंतरिक्ष का वर्णन खाली स्थान है या अंतरिक्ष है इसका कोई तांत्रिक सकते देख सकते कुछ नहीं कर सकते हैं मान सकते हैं कि हम क्या कर सकते हैं इसमें विस्फोट होते रहते हैं प्रति नाटक करती है चंद्रमा में बनते हैं सूर्य बनते हैं तारागढ़ नष्ट होती हैं ब्लैक होल्स बनते हैं कि सारी क्रियाएं होती लेकिन इसकी तो ठीक इसी प्रकार से आत्मा और परमात्मा का वर्णन किया गया है जो बोध की वस्तु है हम इसका वर्णन नहीं कर सकते हमेशा बिहार में रहने वाले पाताल लोक के निवासियों से आकर पूछे कि सूर्य सूर्य क्या चीज है तो क्या वह बता पाएंगे क्या वर्णन कर पाएंगे हम भी नहीं कर पाएंगे उनके सामने और नहीं वह समझ पाए आत्मा जो जानता है खुद स्वयं मैं आत्मा हूं मैं शुद्ध बुद्ध मुक्त आत्मा हूं शरीर संसार नहीं हूं अभी उसको खुद को ही पता चलता है दूसरे वाले को पता नहीं चलता चीनी में खा रहा हूं और मिठास तुम्हें बताने को कह रहा हूं तो तुम कैसे पता लगा होगी अगर तुमने पहले खाया है तो तुम्हें पता है यहां से नहीं मिठास कैसा है सब तुम्हें कैसे पता चलेगा कि चीनी मिठास कितना है मैंने कभी पूछा ही नहीं तुम खा रहे हो और मैं स्वाद महसूस करूंगा जब मैं खुद खा लूंगा तभी तो मुझे पता चलेगा कि कितना स्वाद है कि या तो यह अलग विषय है इसका वर्णन नहीं किया जा सकता व्यक्ति खुद अनुभव करता है और उसको ही पता चलता है सिर्फ

hum aatma ka manviya anubhav varnan nahi kiya ja sakta hai mananiya anubhav yah ek prakar ki aadhyatmik urja hai ya kuch puri tarah se alag hai toh iske prati gahan charcha ki hai bahut saare logo ne aapko koi yah kahe ki antariksh ka varnan kariye antariksh ka varnan nahi kar sakte hum antariksh ke bheetar rehne waale grahon ka nakshatron ka surya chandrama ho taaron ka galiyon ka brahmaand ka varnan kar sakte hain lekin humse kahin ke antariksh ka varnan khaali sthan hai ya antariksh hai iska koi tantrika sakte dekh sakte kuch nahi kar sakte hain maan sakte hain ki hum kya kar sakte hain isme visphot hote rehte hain prati natak karti hai chandrama mein bante hain surya bante hain taragadh nasht hoti hain black holes bante hain ki saree kriyaen hoti lekin iski toh theek isi prakar se aatma aur paramatma ka varnan kiya gaya hai jo bodh ki vastu hai hum iska varnan nahi kar sakte hamesha bihar mein rehne waale paatal lok ke nivasiyon se aakar pooche ki surya surya kya cheez hai toh kya vaah bata payenge kya varnan kar payenge hum bhi nahi kar payenge unke saamne aur nahi vaah samajh paye aatma jo jaanta hai khud swayam main aatma hoon main shudh buddha mukt aatma hoon sharir sansar nahi hoon abhi usko khud ko hi pata chalta hai dusre waale ko pata nahi chalta chini mein kha raha hoon aur mithaas tumhe batane ko keh raha hoon toh tum kaise pata laga hogi agar tumne pehle khaya hai toh tumhe pata hai yahan se nahi mithaas kaisa hai sab tumhe kaise pata chalega ki chini mithaas kitna hai maine kabhi poocha hi nahi tum kha rahe ho aur main swaad mehsus karunga jab main khud kha lunga tabhi toh mujhe pata chalega ki kitna swaad hai ki ya toh yah alag vishay hai iska varnan nahi kiya ja sakta vyakti khud anubhav karta hai aur usko hi pata chalta hai sirf

हम आत्मा का मानवीय अनुभव वर्णन नहीं किया जा सकता है माननीय अनुभव यह एक प्रकार की आध्यात्मि

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