बुद्ध ने अपनी शिक्षाओं में भगवान का उल्लेख क्यों नहीं किया?...


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Gyandeep Kkr

Social Activist

1:57
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बौद्ध जी ने हठयोग किया फिर उन्हें पता चला कि इससे भगवान नहीं मिलता वास्तव में उनकी साधना शास्त्री विरोध की बुध जी ने जो साधना कि वह शास्त्र विरोध होने के कारण उनको भगवान का लाभ नहीं मिल सका उन्होंने फिर यह कहा कि भूखा मरने से भगवान नहीं मिलता वास्तव में यह बात तो सच है कि भूखा मरने से भगवान नहीं मिलता व्रत करने से नहीं मिलता कैसे हैं वह भी जारी है वह मिलता है शाहपुर भक्ति विधि से जो बुध जी की भी नहीं थी के कारण काफी लोग नास्तिक हो चुकी हैं जैसे देखिए नास्तिक राष्ट्र जैसे चीन अब जैसे हम बुध के अनुसार चले तो वह परमात्मा प्राप्ति का रास्ता नहीं है परमात्मा प्राप्ति का रास्ता है वह शासन कुल भक्ति विधि है जिससे लाभ मिलता है आपको लास्ट में यह नहीं कहना पड़ता कि भगवान है ही नहीं भगवान होता है सौ पर्सेंट होता है और उसके लाभ कैसे मिलते हैं उसके लाभ मिलते हैं शास्त्र अनुकूल भक्ति विधि से और वह ऐसे नहीं मानने में मिलते थे वह वर्तमान में मिलते हैं वह कैसे मिलते हैं इसके लिए आप अभी वर्तमान में धारण देख लीजिए एक सत्संग में आपको प्राप्त हुआ सुनने मैंने भी सुना और आप कुछ दिन में ही सिंचाई जान जाएंगे मैंने तो कुछ भी मंगवा ली थी अब लॉकडाउन कारण शायद ना आप आई पुस्तक फ्री में आती है तो यह सत्संग है साधना चैनल पर आता है शाम को 7:30 से 8:30 बजे संत रामपाल जी का सत्संग है और जो शास्त्र अनुकूल भक्ति विधि बताते हैं और ईश्वर टीवी पर शाम को 8:30 से 9:30 बजे और नेपाल 1 जनवरी सुबह 6:00 से 7:00 बजे जरूर देखिए आपको सच्चाई आंखों के सामने दिखेगी प्रमाण दिखाते हैं वह

Baudh ji ne hathyog kiya phir unhe pata chala ki isse bhagwan nahi milta vaastav me unki sadhna shastri virodh ki buddha ji ne jo sadhna ki vaah shastra virodh hone ke karan unko bhagwan ka labh nahi mil saka unhone phir yah kaha ki bhukha marne se bhagwan nahi milta vaastav me yah baat toh sach hai ki bhukha marne se bhagwan nahi milta vrat karne se nahi milta kaise hain vaah bhi jaari hai vaah milta hai shahpur bhakti vidhi se jo buddha ji ki bhi nahi thi ke karan kaafi log nastik ho chuki hain jaise dekhiye nastik rashtra jaise china ab jaise hum buddha ke anusaar chale toh vaah paramatma prapti ka rasta nahi hai paramatma prapti ka rasta hai vaah shasan kul bhakti vidhi hai jisse labh milta hai aapko last me yah nahi kehna padta ki bhagwan hai hi nahi bhagwan hota hai sau percent hota hai aur uske labh kaise milte hain uske labh milte hain shastra anukul bhakti vidhi se aur vaah aise nahi manne me milte the vaah vartaman me milte hain vaah kaise milte hain iske liye aap abhi vartaman me dharan dekh lijiye ek satsang me aapko prapt hua sunne maine bhi suna aur aap kuch din me hi sinchai jaan jaenge maine toh kuch bhi mangwa li thi ab lockdown karan shayad na aap I pustak free me aati hai toh yah satsang hai sadhna channel par aata hai shaam ko 7 30 se 8 30 baje sant rampal ji ka satsang hai aur jo shastra anukul bhakti vidhi batatey hain aur ishwar TV par shaam ko 8 30 se 9 30 baje aur nepal 1 january subah 6 00 se 7 00 baje zaroor dekhiye aapko sacchai aakhon ke saamne dikhegi pramaan dikhate hain vaah

बौद्ध जी ने हठयोग किया फिर उन्हें पता चला कि इससे भगवान नहीं मिलता वास्तव में उनकी साधना श

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Karan Janwa

Automobile Engineer

1:38
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गौतम बुद्ध के समय में लोगों को मंदिरों में जाने की अनुमति नहीं थी सूरत है जो मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी और जो ब्राह्मण थे उसको सोच निकृष्ट से समझते थे और भगवान के नाम पर ही वह अपना अस्तित्व बनाए रखते थे तो भगवान गौतम बुद्ध उन्होंने जीवन में दुख के कारण को समझा और उन्होंने सिर्फ जो एक जन्म है किसी एक जन्म को आहत करने की शिक्षा दी थी उनके अनुसार प्रभु सदाचार का पालन करते हैं तो हमें कोई नहीं होता है और कौन होता है अगर हम सही तरीके से करें 1 तरीके से मुकर रहे हो चित्र करते हैं तो हम और बौद्ध धर्म में जो सिद्धांत बताए गए सत्य अहिंसा अस्तेय के सभी बौद्ध धर्म के सिद्धांत और यही सिद्धांत किसे कहते हैं और भगवान जी कहते हैं कि आप मेरे बताए हुए रास्ते पर चलो चलते हैं कि उधर में भगवान का उल्लेख नहीं हो अगर बौद्ध धर्म में भगवान का उल्लेख होता तो फिर से लोग वही मंदिर बनाने लग जाते हैं फिर से शुरू हो गया था

gautam buddha ke samay mein logon ko mandiro mein jaane ki anumati nahi thi surat hai jo mandir mein pravesh karne ki anumati nahi thi aur jo brahman the usko soch nikrisht se samajhte the aur bhagwan ke naam par hi vaah apna astitva banaye rakhte the toh bhagwan gautam buddha unhone jeevan mein dukh ke karan ko samjha aur unhone sirf jo ek janam hai kisi ek janam ko aahat karne ki shiksha di thi unke anusaar prabhu sadachar ka palan karte hain toh hamein koi nahi hota hai aur kaun hota hai agar hum sahi tarike se karen 1 tarike se mukar rahe ho chitra karte hain toh hum aur Baudh dharam mein jo siddhant bataye gaye satya ahinsa astey ke sabhi Baudh dharam ke siddhant aur yahi siddhant kise kehte hain aur bhagwan ji kehte hain ki aap mere bataye hue raste par chalo chalte hain ki udhar mein bhagwan ka ullekh nahi ho agar Baudh dharam mein bhagwan ka ullekh hota toh phir se log wahi mandir banaane lag jaate hain phir se shuru ho gaya tha

गौतम बुद्ध के समय में लोगों को मंदिरों में जाने की अनुमति नहीं थी सूरत है जो मंदिर में प्र

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M S Aditya Pandit

Entrepreneur | Politician

1:36
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जिस ने यह कहा है शायद उसे मालूम नहीं है कि जो आज के समय हो चुके हैं वह कभी खुद ही इश्वर के चरण में थे उन्होंने 438 रोशनी गुरु के समक्ष में रहकर उन्होंने हमारे अंदर ही हमारे मन के अंदर हमारे कर्म के अंदर है ईश्वर का महत्व हमारे अंतर्मन से होता है जरूरी नहीं कि उसके लिए हम मूर्ति पूजा करें या दिखावे के एल्बम पर करें जरूरी नहीं है उन्होंने उस महिमा को दूसरे शब्दों में वर्णन किया है इसके अंदर में है क्रिश्चन धर्म में है और भी इसी तरह हर इंसान का अपना खुद का व्यक्तित्व को किस चीज से बुलाते हैं उसके ऊपर निर्भर करता हूं कोई भी लहू से तुम्हें कुदरत बोलता तेरा शब्द है मेरा प्रेम हूं उनके पर उन्होंने जो शब्द का निर्माण किया है आपको ऐसे किसी भी संदेह और उसमें उस कंफ्यूजन मत होइए बस आप अपने मित्र मन की बात सुने और जरुर सफल होंगे और धर्म के प्रति आपकी आस्था और गहरे हो

jis ne yah kaha hai shayad use maloom nahi hai ki jo aaj ke samay ho chuke hain vaah kabhi khud hi ishvar ke charan mein the unhone 438 roshni guru ke samaksh mein rahkar unhone hamare andar hi hamare man ke andar hamare karm ke andar hai ishwar ka mahatva hamare antarman se hota hai zaroori nahi ki uske liye hum murti puja karen ya dikhaave ke album par karen zaroori nahi hai unhone us mahima ko dusre shabdon mein varnan kiya hai iske andar mein hai christian dharam mein hai aur bhi isi tarah har insaan ka apna khud ka vyaktitva ko kis cheez se bulate hain uske upar nirbhar karta hoon koi bhi lahoo se tumhe kudrat bolta tera shabd hai mera prem hoon unke par unhone jo shabd ka nirmaan kiya hai aapko aise kisi bhi sandeh aur usmein us confusion mat hoiye bus aap apne mitra man ki baat sune aur zaroor safal honge aur dharam ke prati aapki astha aur gehre ho

जिस ने यह कहा है शायद उसे मालूम नहीं है कि जो आज के समय हो चुके हैं वह कभी खुद ही इश्वर के

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J.P. Y👌g i

Psychologist

6:44
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प्रश्न आता है बुध ने अपनी शिक्षा में भगवान का उल्लेख क्यों नहीं किया तो उनकी मनोदशा का क्या स्थिति है उस वक्त और समाज के और संसार के प्रति प्रवीण की परिस्थिति जागो कुछ उपदेश दे रहे थे और जहां तक उन्होंने जगत में मनुष्य के प्रति जो आचरण देखा होगा और अंधविश्वास की धाराएं जो फुटरी होंगे इस वजह से उन्होंने जाता भगवान सब की शादी थी उस पर कास्ट की गहराई में समाधि में पहुंच चुके थे कि जो सृष्टि का ज्ञान व अनुभव हो रहा था और जिस विधि से जिस त्याग तपस्या से उन्होंने यह उपलब्धि करें तो उसका तालमेल उन्होंने समझा है कैसा जनसाधारण मेरे जैसा तो हर कोई हो नहीं सकेगा लेकिन जो आत्म चिंतन धारा के विषय में जो लोग अध्ययनरत हैं उनके लिए क्या दिशा हो सकती है तो बहुत सारी बातें हो सकती है कि जिससे उन्होंने परिचर्चा का इससे विषय को नहीं रखा लेकिन साधना के मार्ग में मिलती-जुलती पद्धतियां मिलते हैं जो साधना की भूमि में ही रहता है प्रणब की भी रूपरेखा मिलती है हर चीज मिलता है उसमें लेकिन फिर भी कि भगवान का उल्लेख नहीं किया क्योंकि मनोदशा में भीड़ इतनी क्षमता में बहुत शक का संकल्प विकल्प को संभावित रूप से प्रदर्शित कर देती है क्योंकि अंधकार व्यक्तियों में जितनी भी सुकृति और विकृति होती है वह क्षण मात्र में सकारात्मक स्वरूप लेकर स्थापित प्रदेश में आती हैं तो उसमें भ्रांति भी हो सकती है क्योंकि इस क्षेत्र में कोई भी कल्पना कोई भी हमारे अंदर अगर भावनाएं उत्पन्न होती है तो किसी ना किसी रूप से वह प्रकट होती रहती है और जगत में भी देखा जा रहा सुकृति और विकृत बीपी सृष्टि सफर शुरू हो रही है तो इस प्रकार उस दिव्य दशा की मनो विवेचना जो हुई है तो स्विच भूत के संसार को क्योंकि संसार अवलोकन कर्ता अनुकरण करता है और संसार में मानवतावाद में क्या मैं मनुष्यता उत्पन्न हो रही है किस प्रकार किनकेल समरसता है इन सब का अध्यापन कंकण में जागृत हुआ ही था तो ऐसे और दूसरी बात दिव्य विभूति आया दिव्य सिद्धियां होती है इसके प्रति जो कि लोगों में से स्वभाव होता है कि वह प्रकृति के द्विवेदी और ऐश्वर्य को शाम में अपने आप को ढालना चाहते हैं और उसमें आनन-फानन में बहुत से नहीं होती है जो जनसाधारण के लिए वह घातक बन सकते हैं क्योंकि उसका सतत रूप से उनकी ज्ञान चेतना में आगे का कोई हिसाब नहीं बनता है तो बहुत सारी चीजें हैं जल साधारण से लेकर और उसी स्तर के मैचों में उन्होंने विवेचना रखी है कि क्या प्रदर्शित कर आ जाए और जो लोग हमेशा हंसता है और आपस में तालमेल ता बने इसी आधार पर ही उन्होंने उस तत्व को उजागर नहीं कहा इस तरह की भावना में नहीं तो वह कुछ भी कहते हैं जो अनुयाई हैं वह शुरू का ही मनन चिंतन करते हैं लेकिन जो साधना की गहराई में इनके अंदर भी शाखा में बनी थी हीनयान वज्रयान महायान इत्यादि रवि अगर इसको जो अध्ययन करके अलग अलग से समझते हैं तो तुझे जो भी और साधना का दिन 2 पॉइंट है ओझा तक सामान्य सर्वमान्य होता है हम माने ना माने या देखे अपने ही तत्काल स्वरूप को ही चिंतन विषय करके अपने आप को मजबूत बनाने की दिशा में क्या गर्म और भी किसी का सहारा नहीं लेता नंबर नहीं करते तो हम अपने आप को कुछ रूप में डालकर प्रदर्शित करते हैं तो यह सारे विषय है लेकिन यह भूतिया सब को उच्चतम धारा में एहसास होती है जो कि प्रदेश के प्रदर्शन के प्रति नहीं मैं नहीं आता और अनुभव के स्तर पर और दूसरी बातें जो मैं विवाद होने का ज्यादा ही मौका रहता है क्योंकि विभाग से अलग रहना चाहते हैं तो यह आत्म विश्लेषण का विषय होता है जो नीच व्यक्तिगत विचार धारणा पर अवस्थित है इस कारण से उल्लेख नहीं किया है और जनसमूह की वृत्ति भ्रांतियों को समझने के लिए साइट इस देश का करा है कि किसी चीज पर भरोसा ना करें तो यह सारी चीजें हैं यह एक वर्गीकरण क्षेत्र आ जाता है जिसका हम उल्लेख नहीं कर सकते हैं ठीक है अपने अपने रूप से जो भी विवेचना हुई है लेकिन मूल रूप से आज भावना आत्म कल्याण की बहाली होती है मानववाद की कल्याण की भावना होती है जिसमें मनुष्य अपने कर्म की चेष्टा को जो प्रकृति की विशेषताएं हैं और उसके अनुरूप ढालने और अपने अंदर आत्म बल का ज्ञान के महत्व को समझकर के विश्रांति को प्राप्त हो मैं यही कहूंगा धन्यवाद साहब चिंतन मनन के J7 6

prashna aata hai buddha ne apni shiksha mein bhagwan ka ullekh kyon nahi kiya toh unki manodasha ka kya sthiti hai us waqt aur samaaj ke aur sansar ke prati praveen ki paristhiti jaago kuch updesh de rahe the aur jahan tak unhone jagat mein manushya ke prati jo aacharan dekha hoga aur andhavishvas ki dharayen jo futri honge is wajah se unhone jata bhagwan sab ki shadi thi us par caste ki gehrai mein samadhi mein pahunch chuke the ki jo shrishti ka gyaan v anubhav ho raha tha aur jis vidhi se jis tyag tapasya se unhone yah upalabdhi karen toh uska talmel unhone samjha hai kaisa janasadharan mere jaisa toh har koi ho nahi sakega lekin jo aatm chintan dhara ke vishay mein jo log adhayantar hain unke liye kya disha ho sakti hai toh bahut saree batein ho sakti hai ki jisse unhone paricharcha ka isse vishay ko nahi rakha lekin sadhna ke marg mein milti julti paddhatiyan milte hain jo sadhna ki bhoomi mein hi rehta hai pranab ki bhi rooprekha milti hai har cheez milta hai usmein lekin phir bhi ki bhagwan ka ullekh nahi kiya kyonki manodasha mein bheed itni kshamta mein bahut shak ka sankalp vikalp ko sambhavit roop se pradarshit kar deti hai kyonki andhakar vyaktiyon mein jitni bhi sukriti aur vikriti hoti hai vaah kshan matra mein sakaratmak swaroop lekar sthapit pradesh mein aati hain toh usmein bhranti bhi ho sakti hai kyonki is kshetra mein koi bhi kalpana koi bhi hamare andar agar bhavnaayen utpann hoti hai toh kisi na kisi roop se vaah prakat hoti rehti hai aur jagat mein bhi dekha ja raha sukriti aur vikrit BP shrishti safar shuru ho rahi hai toh is prakar us divya dasha ki mano vivechna jo hui hai toh switch bhoot ke sansar ko kyonki sansar avalokan karta anukaran karta hai aur sansar mein manavatavad mein kya main manushyata utpann ho rahi hai kis prakar kinkel samarsata hai in sab ka adhyapan kankan mein jaagarrett hua hi tha toh aise aur dusri baat divya vibhuti aaya divya siddhiyan hoti hai iske prati jo ki logon mein se swabhav hota hai ki vaah prakriti ke dwivedi aur aishwarya ko shaam mein apne aap ko dhalna chahte hain aur usmein anan fanan mein bahut se nahi hoti hai jo janasadharan ke liye vaah ghatak ban sakte hain kyonki uska satat roop se unki gyaan chetna mein aage ka koi hisab nahi banta hai toh bahut saree cheezen hain jal sadhaaran se lekar aur usi sthar ke matchon mein unhone vivechna rakhi hai ki kya pradarshit kar aa jaaye aur jo log hamesha hansata hai aur aapas mein talmel ta bane isi aadhaar par hi unhone us tatva ko ujagar nahi kaha is tarah ki bhavna mein nahi toh vaah kuch bhi kehte hain jo anuyayi hain vaah shuru ka hi manan chintan karte hain lekin jo sadhna ki gehrai mein inke andar bhi shakha mein bani thi hinyaan vajrayan mhayaan ityadi ravi agar isko jo adhyayan karke alag alag se samajhte hain toh tujhe jo bhi aur sadhna ka din 2 point hai ojha tak samanya sarvmanya hota hai hum maane na maane ya dekhe apne hi tatkal swaroop ko hi chintan vishay karke apne aap ko mazboot banaane ki disha mein kya garam aur bhi kisi ka sahara nahi leta number nahi karte toh hum apne aap ko kuch roop mein dalkar pradarshit karte hain toh yah saare vishay hai lekin yah bhutiya sab ko ucchatam dhara mein ehsaas hoti hai jo ki pradesh ke pradarshan ke prati nahi main nahi aata aur anubhav ke sthar par aur dusri batein jo main vivaad hone ka zyada hi mauka rehta hai kyonki vibhag se alag rehna chahte hain toh yah aatm vishleshan ka vishay hota hai jo neech vyaktigat vichar dharana par avasthit hai is karan se ullekh nahi kiya hai aur janasamuh ki vriti bhrantiyon ko samjhne ke liye site is desh ka kara hai ki kisi cheez par bharosa na karen toh yah saree cheezen hain yah ek vargikaran kshetra aa jata hai jiska hum ullekh nahi kar sakte hain theek hai apne apne roop se jo bhi vivechna hui hai lekin mul roop se aaj bhavna aatm kalyan ki bahali hoti hai manavwad ki kalyan ki bhavna hoti hai jisme manushya apne karm ki cheshta ko jo prakriti ki visheshtayen hain aur uske anurup dhalne aur apne andar aatm bal ka gyaan ke mahatva ko samajhkar ke vishraanti ko prapt ho main yahi kahunga dhanyavad saheb chintan manan ke J7 6

प्रश्न आता है बुध ने अपनी शिक्षा में भगवान का उल्लेख क्यों नहीं किया तो उनकी मनोदशा का क्

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गुज्जर स्वयं ईश्वर का रूप दे तो उन्हें भगवान का उल्लेख करने की क्या आवश्यकता है उन्होंने अपने ज्ञान से जो चीजें इस जगत को शिकायत बताई आज बुद्ध के द्वारा फैलाया गया ज्ञान उनके द्वारा दी गई शिक्षा विश्व के कई देशों में लोग उनके फॉलोअर हैं उनको मानते हैं भारत में श्रीलंका में चाइना में कई देशों में आज को माना जाता है पर भगवान बुद्ध अवतार बुद्धम शरणम गच्छामि देखा गया है धम्मम शरणम बचा भगवान बुद्ध गो नियमों का उल्लेख करने की कोई आवश्यकता नहीं थी और उन्होंने जो शिक्षा दी जाती है वह शिवराज कई देश के नागरिक उसको फॉलो करना

gujjar swayam ishwar ka roop de toh unhe bhagwan ka ullekh karne ki kya avashyakta hai unhone apne gyaan se jo cheezen is jagat ko shikayat batai aaj buddha ke dwara faelaya gaya gyaan unke dwara di gayi shiksha vishwa ke kai deshon mein log unke follower hain unko maante hain bharat mein sri lanka mein china mein kai deshon mein aaj ko mana jata hai par bhagwan buddha avatar buddham sharnam gachchhami dekha gaya hai dhammam sharnam bacha bhagwan buddha go niyamon ka ullekh karne ki koi avashyakta nahi thi aur unhone jo shiksha di jaati hai vaah shivraj kai desh ke nagarik usko follow karna

गुज्जर स्वयं ईश्वर का रूप दे तो उन्हें भगवान का उल्लेख करने की क्या आवश्यकता है उन्होंने अ

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