क्या मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में पुनर्जन्म लेते हैं?...


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Loan Guru

Financial Expert

2:40
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आप कोई सवाल बहुत अच्छे सवाल इस पर काफी शोध भी कह गए हैं वैज्ञानिकों द्वारा विरोध करेगा हैं और रिश्तेदारों को शुद्ध करें और आपने देखा क्या मिलता है आपको किसकी जनसंख्या की जो है कि जो कि लगभग बढ़ती जा रही है और अनेक जीवो के पेशेंट होता है कि मनुष्य नहीं लेते हैं तो दोबारा क्योंकि हमारे विचार और 84 लाख योनि होती है वह सब जो है मनुष्य इस प्रकार से होता है पानी होता चारों तरफ और जैसे ही जाते हैं तो पांडेपुर बाहर निकलता है लेकिन पूरा पानी जहां भी जिस कॉलेज गेट की तरफ आता है बुधवार है परमार उसमें जो जाते हैं सौरव जाकर वापस आते जाते हैं मानव के पीछे बढ़ती जा रही है

aap koi sawaal bahut acche sawaal is par kaafi shodh bhi keh gaye hain vaigyaniko dwara virodh karega hain aur rishtedaron ko shudh kare aur aapne dekha kya milta hai aapko kiski jansankhya ki jo hai ki jo ki lagbhag badhti ja rahi hai aur anek jeevo ke patient hota hai ki manushya nahi lete hain toh dobara kyonki hamare vichar aur 84 lakh yoni hoti hai vaah sab jo hai manushya is prakar se hota hai paani hota charo taraf aur jaise hi jaate hain toh pandeypur bahar nikalta hai lekin pura paani jaha bhi jis college gate ki taraf aata hai budhavar hai parmar usme jo jaate hain saurav jaakar wapas aate jaate hain manav ke peeche badhti ja rahi hai

आप कोई सवाल बहुत अच्छे सवाल इस पर काफी शोध भी कह गए हैं वैज्ञानिकों द्वारा विरोध करेगा हैं

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ऐसे और सवाल
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Dr. Mahesh Mohan Jha

Asst. Professor,Astrologer,Author

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार आपका प्रश्न है क्या मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में पुनर्जन्म लेते हैं वैसे अपने सनातन धर्म में जो भी शास्त्र हैं पुराने हैं उनके अनुसार कहां जाता है एक आत्मा कई योनियों में जन्म लेने के बाद वह मनुष्य योनि प्राप्त करता है अतः इस बात से मैं सहमत भी हूं और अपने तर्क के कारण और सहमत भी हूं और मेरे तर्क के अनुसार आत्मा एक बीज है और हम देखते हैं जिस पेड़ पौधा का भी उसको अगर हम बोलते हैं उस बीज से वही फिर पेड़ पौधा जन्म लेता है इसलिए मनुष्य का बीज आत्मा है और वह आत्मा फिर मनुष्य रूप में ही जन्म देता है इंसान नहीं है जो मनुष्य का आत्मा हाथी में कोरा में कूद में दिल्ली में या फिर पौधा में जन्म लेता है जो हमको सही नहीं लगता मेरा अपना तर्क है जो मनुष्य का आत्मा फिर मन शुरू में ही पुनर जन्म लेता है और इसका एक प्रमाण भी दे सकता हूं अभी तक जो भी अपनी पुनर्जन्म के बारे में बताता है कई ऐसे अवसर आते हैं जो बाल्यावस्था तक उसको पुनर्जन्म की बातें याद आता है और जब उसके बारे में पता लगाया जाता है वह बात सही निकलती है तो इससे हम देखते हैं आज तक ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं मिला या कि प्रोटेक्शन करके जब उसको पुनर्जन्म में लिया जाता है हिंदी में टाइपिंग करके जब उसको पूर्व जन्म में ले जाया जाता है तो वह भी मनुष्य रूप में ही जाता है ऐसा नहीं है जिस दिन वह मनुष्य है और जब उसको पूजन में ले जाया गया वहां ठीक-ठाक हो रहा था उठाया फिर पूछा था यह दो प्रमुख जिस बच्चे को अपने दिल की बातें याद है और एक हिप्नोटाइजिंग द्वारा सम्मोहन विद्या द्वारा जब उसको पूजन में ले जाया जाता है यह 2:00 तक ऐसा है जो अभी तक मनुष्य पूर्व जन्म में भी मनुष्य था इसलिए अगर फिर पुनर्जन्म होता है तो हम उस में ही होगा धन्यवाद

namaskar aapka prashna hai kya manushya keval manushya ke roop me punarjanm lete hain waise apne sanatan dharm me jo bhi shastra hain purane hain unke anusaar kaha jata hai ek aatma kai yoniyon me janam lene ke baad vaah manushya yoni prapt karta hai atah is baat se main sahmat bhi hoon aur apne tark ke karan aur sahmat bhi hoon aur mere tark ke anusaar aatma ek beej hai aur hum dekhte hain jis ped paudha ka bhi usko agar hum bolte hain us beej se wahi phir ped paudha janam leta hai isliye manushya ka beej aatma hai aur vaah aatma phir manushya roop me hi janam deta hai insaan nahi hai jo manushya ka aatma haathi me quora me kud me delhi me ya phir paudha me janam leta hai jo hamko sahi nahi lagta mera apna tark hai jo manushya ka aatma phir man shuru me hi punar janam leta hai aur iska ek pramaan bhi de sakta hoon abhi tak jo bhi apni punarjanm ke bare me batata hai kai aise avsar aate hain jo baalyaavastha tak usko punarjanm ki batein yaad aata hai aur jab uske bare me pata lagaya jata hai vaah baat sahi nikalti hai toh isse hum dekhte hain aaj tak aisa koi bhi vyakti nahi mila ya ki protection karke jab usko punarjanm me liya jata hai hindi me typing karke jab usko purv janam me le jaya jata hai toh vaah bhi manushya roop me hi jata hai aisa nahi hai jis din vaah manushya hai aur jab usko pujan me le jaya gaya wahan theek thak ho raha tha uthaya phir poocha tha yah do pramukh jis bacche ko apne dil ki batein yaad hai aur ek hipnotaijing dwara sammohan vidya dwara jab usko pujan me le jaya jata hai yah 2 00 tak aisa hai jo abhi tak manushya purv janam me bhi manushya tha isliye agar phir punarjanm hota hai toh hum us me hi hoga dhanyavad

नमस्कार आपका प्रश्न है क्या मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में पुनर्जन्म लेते हैं वैसे अपने सन

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डा आचार्य महेंद्र

Astroloser,Vastusastro,pravchankarta

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क्या मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में पुनर्जन्म नहीं ऐसा नहीं है चार प्रकार के जीव दुनिया में जरायुज अंडर ब्रिज शरीर से शरीर के रूप में मनुष्य आदि गाया अंडा मुर्गी पक्षी आदि स्वेदन जो लिखा दे रिपोर्ट इस प्रकार के चार प्रकार से 84 राज्यों में हिंदू धर्म में बताइए अपने कर्मों के अनुरूप अच्छे बुरे कर्मों के अनुरूप यह शरीर इन 8400000 योनियों में से किसी भी को प्राप्त कर सकता है इस तरह की धार ना सनातनी हिंदू विचारधारा के अंतर्गत मांगने के लिए

kya manushya keval manushya ke roop me punarjanm nahi aisa nahi hai char prakar ke jeev duniya me jarayuj under bridge sharir se sharir ke roop me manushya aadi gaaya anda murgi pakshi aadi swedan jo likha de report is prakar ke char prakar se 84 rajyo me hindu dharm me bataiye apne karmon ke anurup acche bure karmon ke anurup yah sharir in 8400000 yoniyon me se kisi bhi ko prapt kar sakta hai is tarah ki dhar na sanatani hindu vichardhara ke antargat mangne ke liye

क्या मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में पुनर्जन्म नहीं ऐसा नहीं है चार प्रकार के जीव दुनिया मे

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

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BK Kalyani

Teacher On Rajyoga Spiritual Knowledge

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बहुत अच्छी क्वेश्चन है भाई आपकी क्या मनुष्य मनुष्य के रूप में जन्म लेते हैं बिल्कुल सही बात है मनुष्य मनुष्य ही जन्म ले अगर आप आम के बीच बोलेंगे तो आम का पेड़ निकलेगा केला का पौधा बोलेंगे तो केला का पेड़ निकलेगा ना तो ठीक इसी प्रकार यह शरीर एक पेड़ है और आत्मा एक डीजे तुझे बीच मनुष्य रूपी शरीर में ही जन्म लेती है किसी जानवर में नहीं लिंग मनुष्य का जन्म मनुष्य में ही होता है इसके अधिक जानकारी के लिए अपने गूगल पर सर्च करें प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की परीक्षा 7 दिन की दी जाती है

bahut achi question hai bhai aapki kya manushya manushya ke roop me janam lete hain bilkul sahi baat hai manushya manushya hi janam le agar aap aam ke beech bolenge toh aam ka ped niklega kela ka paudha bolenge toh kela ka ped niklega na toh theek isi prakar yah sharir ek ped hai aur aatma ek DJ tujhe beech manushya rupee sharir me hi janam leti hai kisi janwar me nahi ling manushya ka janam manushya me hi hota hai iske adhik jaankari ke liye apne google par search kare prajapita brahmakumari ishwariya vishwavidyalaya ki pariksha 7 din ki di jaati hai

बहुत अच्छी क्वेश्चन है भाई आपकी क्या मनुष्य मनुष्य के रूप में जन्म लेते हैं बिल्कुल सही बा

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जय श्री राधे कृष्णा कर्म के अनुसार सृष्टि की रचना हुई है जो जैसा कर्म करता है उसको कर्म के अनुसार जनार्दन करना पड़ता है 84 लाख योनि सभी प्रकार योजना तो मनुष्य केवल मानसून ग्रुप में पुनर्जन्म देश के कानून के आधार पर ईश्वर इसमें हमारा हम अपने कर्म पर विश्वास करें और अच्छे कर्म करें कर्म करना हमारे लिए

jai shri radhe krishna karm ke anusaar shrishti ki rachna hui hai jo jaisa karm karta hai usko karm ke anusaar Janardan karna padta hai 84 lakh yoni sabhi prakar yojana toh manushya keval monsoon group me punarjanm desh ke kanoon ke aadhar par ishwar isme hamara hum apne karm par vishwas kare aur acche karm kare karm karna hamare liye

जय श्री राधे कृष्णा कर्म के अनुसार सृष्टि की रचना हुई है जो जैसा कर्म करता है उसको कर्म क

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Dharamvir singh

Serviceman Indian Army

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Satpal Dahiya

Soldier in Indian Army | Spiritual Guide | Social Worker

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बहुत ही प्यारा प्रश्न है क्या मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में ही पुनर जन्म लेते हैं अगर सद्भक्ति नहीं की तो मनुष्य 8400000 योनियों में भी जन्म लेता है और अगर सद्भक्ति मिले शास्त्र विधि अनुसार संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताएगी भक्ति तो पुनर्जन्म का चकरी खत्म होकर पूर्ण मोक्ष हो जाता है और इसके लिए आप देख सकते हैं साधना टीवी पर प्रोग्राम आता है शाम 7:30 बजे से

bahut hi pyara prashna hai kya manushya keval manushya ke roop me hi punar janam lete hain agar sadbhakti nahi ki toh manushya 8400000 yoniyon me bhi janam leta hai aur agar sadbhakti mile shastra vidhi anusaar sant rampal ji maharaj dwara batayegi bhakti toh punarjanm ka chakri khatam hokar purn moksha ho jata hai aur iske liye aap dekh sakte hain sadhna TV par program aata hai shaam 7 30 baje se

बहुत ही प्यारा प्रश्न है क्या मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में ही पुनर जन्म लेते हैं अगर सद्भ

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Dinesh Mishra

Theosophists | Accountant

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क्या मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में अपना जन्म लेते हैं देखिए इस संबंध में यह कोई आवश्यक नहीं हुआ करता है यह मनुष्य का जो जन्मा है वह आए पुनर्जन्म मनुष्य के रूप में ही हूं संभव है उसके क्रियाकलापों का भी इस पर बहुत बड़ा असर पड़ा करता है और जो मनुष्य का जिस प्रकार से स्वभाव हुआ करता है संभवतः जन्म भी उसी अनुसार हुआ करता है क्योंकि व्यक्ति को जो सात्विक है राजसिक व तामसिक हैं यह जो विचार जो हैं जो जिसने बलवती हुआ करते हैं संभवत उनका जो जन्मा है उसी अनुसार किसी भी योनि में हो सकता है यह परमात्मा की व्यवस्था है कि वह मनुष्य को किस किस योनि में जन्म देवें और इस संबंध में मनुष्य जो है वह परिभाषा है उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है यह परमात्मा की व्यवस्था हुआ करती है युवा है उसको किस रूप में और कहां जन्म देवें और कब दे

kya manushya keval manushya ke roop me apna janam lete hain dekhiye is sambandh me yah koi aavashyak nahi hua karta hai yah manushya ka jo janma hai vaah aaye punarjanm manushya ke roop me hi hoon sambhav hai uske kriyaklapon ka bhi is par bahut bada asar pada karta hai aur jo manushya ka jis prakar se swabhav hua karta hai sanbhavatah janam bhi usi anusaar hua karta hai kyonki vyakti ko jo Satvik hai raajsik va tamasik hain yah jo vichar jo hain jo jisne balvati hua karte hain sambhavat unka jo janma hai usi anusaar kisi bhi yoni me ho sakta hai yah paramatma ki vyavastha hai ki vaah manushya ko kis kis yoni me janam deven aur is sambandh me manushya jo hai vaah paribhasha hai uske adhikaar kshetra me nahi hai yah paramatma ki vyavastha hua karti hai yuva hai usko kis roop me aur kaha janam deven aur kab de

क्या मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में अपना जन्म लेते हैं देखिए इस संबंध में यह कोई आवश्यक नही

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Isu Vasava

PASTOR in CHURCH.

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नहीं इंसान मरने के बाद पुनर्जन्म है नहीं या नहीं खान मर गया तो मर गया उसकी आत्मा का बाद में न्याय होगा नायक गधे में होगा नई-नई घोड़े में होगा ना इंसान में होगा यह सब गलत शिक्षा और गलत चीजें हैं

nahi insaan marne ke baad punarjanm hai nahi ya nahi khan mar gaya toh mar gaya uski aatma ka baad me nyay hoga nayak gadhe me hoga nayi nayi ghode me hoga na insaan me hoga yah sab galat shiksha aur galat cheezen hain

नहीं इंसान मरने के बाद पुनर्जन्म है नहीं या नहीं खान मर गया तो मर गया उसकी आत्मा का बाद मे

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Bk Ashok Pandit

आध्यात्मिक गुरु

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सुंदर सवाल है क्या मनुष्य केवल मनुष्य ग्रुप में अपना जन्म लेते हैं बिल्कुल मनुष्य की आत्मा मनुष्य रूप में ही पुनर जन्म लेता है जैसे यदि हम आम का बीज भूमि के अंदर डालते हैं तो आम ही निकलता है और हम कहीं फल आता है यदि हम अकेला का लगाएंगे तो अकेला ही आएगा यदि हम कांटा बोलेंगे तो कांटे ही आएगा जिस प्रकार के हम बीज डालते हैं भूमिका अंदर वह उसे वहीं विजय से उसी प्रकार का फल देता है वही देता है ठीक इसी प्रकार से मुझ से आसमान से जोड़ता है और किसी में नहीं जाता है जो जिओनी का है उसी में जाता है परंतु मनुष्य के कर्मों का अनुसार जन्म मनुष्य योनि में होता है परंतु कर्म अलग अलग करता है और प्राणी जैसा करता है इसलिए शास्त्रों में 84 लाख योनि दिखा दिया गया है जैसे गधा का काम क्या होता है भार उठाना अनुषा खींचता है यह पैसे को खींचता है तो वह व्यक्ति ऐसे है मनुष्य योनि में कम तो गधे जैसा कार्य करता है जैसे कोई व्यक्ति मांग कर घर-घर जाकर खाता है तो कुत्ते भी क्या करता है कुत्ते भी ऐसे उनको जो जितना जहां से बढ़ता है वहां से खा लेता है किस प्रकार से मनुष्य योनि में ही मनुष्य कर्म अन्यत्र आने जैसा होता है परंतु जन्म मनुष्य का ही मिलता है जैसा देश वैसा फल मनुष्य की आत्मा दूसरे प्राणी में जा नहीं सकता है मनुष्य प्राणी नहीं उनका जन्म होता है और अपने कर्मों का हिसाब किताब छप चुका है

aapka sundar sawaal hai kya manushya keval manushya group me apna janam lete hain bilkul manushya ki aatma manushya roop me hi punar janam leta hai jaise yadi hum aam ka beej bhoomi ke andar daalte hain toh aam hi nikalta hai aur hum kahin fal aata hai yadi hum akela ka lagayenge toh akela hi aayega yadi hum kanta bolenge toh kante hi aayega jis prakar ke hum beej daalte hain bhumika andar vaah use wahi vijay se usi prakar ka fal deta hai wahi deta hai theek isi prakar se mujhse se aasman se Jodta hai aur kisi me nahi jata hai jo gionee ka hai usi me jata hai parantu manushya ke karmon ka anusaar janam manushya yoni me hota hai parantu karm alag alag karta hai aur prani jaisa karta hai isliye shastron me 84 lakh yoni dikha diya gaya hai jaise gadha ka kaam kya hota hai bhar uthana anusha khinchata hai yah paise ko khinchata hai toh vaah vyakti aise hai manushya yoni me kam toh gadhe jaisa karya karta hai jaise koi vyakti maang kar ghar ghar jaakar khaata hai toh kutte bhi kya karta hai kutte bhi aise unko jo jitna jaha se badhta hai wahan se kha leta hai kis prakar se manushya yoni me hi manushya karm anyatra aane jaisa hota hai parantu janam manushya ka hi milta hai jaisa desh waisa fal manushya ki aatma dusre prani me ja nahi sakta hai manushya prani nahi unka janam hota hai aur apne karmon ka hisab kitab chhap chuka hai

आपका सुंदर सवाल है क्या मनुष्य केवल मनुष्य ग्रुप में अपना जन्म लेते हैं बिल्कुल मनुष्य की

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Shailesh Kumar Dubey

Yoga Teacher , Retired Government Employee

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मनुष्य मनुष्य के रूप में जन्म लेते वह कर्मों के हिसाब से अगर उसके कर्म अच्छे हैं सत्कर्म किया है तो जरूर मंच ग्रुप में जब मिलेगा क्योंकि फलों का भोग करने के लिए सिमरत लोग में आना पड़ता है सत्कर्म किया है पक्षी फल भोग होंगे दुष्कर्म की है उसको उसको भुगतने के लिए आना पड़ेगा आपने देखा होगा तमाम लोग बीमार हो जाते हाथ पैरों में पड़े रहते हैं कि जो कैंसर हो जाता है किसी का एक्सीडेंट हो जाता है किसी को ब्रेन की बीमारी हो जाती है सब उसके कर्मों का नतीजा होता है जो पिछले जन्मों के भाग्य के हिसाब से मिलता है कुछ इसी जन्म में भी प्राप्त हो जाता

manushya manushya ke roop me janam lete vaah karmon ke hisab se agar uske karm acche hain satkarm kiya hai toh zaroor manch group me jab milega kyonki falon ka bhog karne ke liye simarat log me aana padta hai satkarm kiya hai pakshi fal bhog honge dushkarm ki hai usko usko bhugatane ke liye aana padega aapne dekha hoga tamaam log bimar ho jaate hath pairon me pade rehte hain ki jo cancer ho jata hai kisi ka accident ho jata hai kisi ko brain ki bimari ho jaati hai sab uske karmon ka natija hota hai jo pichle janmon ke bhagya ke hisab se milta hai kuch isi janam me bhi prapt ho jata

मनुष्य मनुष्य के रूप में जन्म लेते वह कर्मों के हिसाब से अगर उसके कर्म अच्छे हैं सत्कर्म क

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Sunil Kumar Pandey

Editor & Writer

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नमस्कार आपका प्रश्न है क्या मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में पुनर्जन्म लेते हैं मेरी राय में ऐसा नहीं है आप सत्यम करेंगे तभी आपको दोबारा मानव रूप मिलता है क्योंकि ऐसा कहा गया है कि 84 लाख योनि है 84 लाख में योनि में भटक कर फिर जीव मनुष्य रूप में जन्म लेता है यह जो अच्छा कार्य करता है कर्म करता है तो उसे दोबारा मनुष्य जीवन प्राप्त होता है नहीं तो उसे उन 8400000 योनियों में भटकना पड़ता है धन्यवाद

namaskar aapka prashna hai kya manushya keval manushya ke roop me punarjanm lete hain meri rai me aisa nahi hai aap satyam karenge tabhi aapko dobara manav roop milta hai kyonki aisa kaha gaya hai ki 84 lakh yoni hai 84 lakh me yoni me bhatak kar phir jeev manushya roop me janam leta hai yah jo accha karya karta hai karm karta hai toh use dobara manushya jeevan prapt hota hai nahi toh use un 8400000 yoniyon me bhatakana padta hai dhanyavad

नमस्कार आपका प्रश्न है क्या मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में पुनर्जन्म लेते हैं मेरी राय में

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Vinita Mishra

Meditation

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जी हां मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में ही पुनर जन्म लेते हैं मनुष्य का पुनर्जन्म कभी भी किसी जानवर या पशुपति की योनि में नहीं जैसे कि हम भी देखते हैं कि अगर हम सेन का बीज लगाते हैं तो उससे चेन की पौधे और सेम का ही फल चमकेगी अगर हमें सेब का बीज लगाया था नहीं मिलेगा उसी तरह मनुष्य में खुली आंखों से देखता है और उसको हम कई बार एक्सपीरियंस करते हैं कि मैं नहीं सिंह का बीज रोपा है और इसे चेंज के पौधे निकलेंगे सेम का फल प्राप्त होगा फिर मिलेंगे आम का बीज रोपा है तो इससे आम का ही पौधा निकलेगा आम का ही बनेगा कि राम ही पलके यह हम अपनी जिंदगी में कई बार कर चुके हैं और फूल भी हमें समझ में आ जाता है कि हम रोज देखते हैं जानवरों की आत्माएं सभी एक बीज है जोकिंग खुली आंखों से नहीं दिखते इसलिए इसकी बारे में जो जानकारी है वह छोटी रूप में तो मनुष्य आत्मा जब शरीर छोड़ेंगे तो उनका नया जन्म मनुष्य के रूप में ही होगा यह निश्चित है वह किसी दूसरे जानवरों की योनि में नहीं जाती फिर हमारे शास्त्रों में ऐसा क्यों कहा कि मनुष्य का जन्म गलत कर्म की वजह से जानवर में चला जाए अगर बहुत क्रोध करता है कहीं तक जानवर बनता है अगर कोई बहुत लालच करता है तो कुत्ते जूठन चाटने वाले जानवरों की योनि में जन्म लेता है क्यों कहा कोई कारण होगा वास्तव में यह सही बात है इसमें ज्ञान है ऐसा इसलिए कहा गया कि मनुष्य अपने बुरे कर्मों से डरे अगर इन बातों को सत्य मान जाता है कि मनुष्य का अगला जन्म उसके कर्म के आधार पर किसी कुत्ते में हो जाता है बहुत लालच करता है या किसी हिंसक जानवर में हो जाता बहुत क्रोधित शेर बाघ शेर बाघ शेर बाघ जैसे ही है उसने अगर किसी मनुष्य का जन्म हो जाएगा तो उससे अपने कर्म के फल का साथ कहां से होगा सारी शेर बाग तो बस ऐसे ही चलते हैं बच्चे बोलते हैं वही खाते हैं उतने बुरे कर्म की फीलिंग का अनुभव होगा वास्तव में ऐसा नहीं है मनुष्य का जन्म जब मनुष्य योनि में ही हो कर जानवरों से दृष्ट हो जाता है जिसे पशु वध कहेंगे पशु योनि में नहीं जाता है पशु पर बने उसके व्यवहार उसके लक्षण उसका जीवन पशु की तरह पूजा पशु पक्षियों की तरह हो जाए मान लीजिए किसी मनुष्य ने इस जन्म में बहुत बुरे कर्म किए किसी के साथ बहुत बुरे का कर्म किए उसके शरीर को चोट पहुंचाई उसको चलने से मजबूर कर दिया उसका अगला जन्म मनुष्य में ही मनुष्य योनि में रहकर बस चलने के लिए मजबूर करना पड़े पापा ऐसा होगा कि मैंने ऐसा क्या कर्म किया था पिछले जन्म में आज मुझे मनुष्य जन्म में मिलकर भी मनुष्य जन्म मिलकर भी जानवरों जैसा कि सेट कर जिंदगी दिखानी पड़ रही है तब उसे अपने बुरे कर्मों का एहसास होगा और प्रताड़ना सैनिकों को यह मेरा जन्म के बुरे कर्म का फल अगर हर बुरे कर्म का फल जानवरों के रूप में मिल जाए तो जानवरों की एक पूरी जाते तो उससे उसी तरह होती है थोड़ा बहुत कुत्ते का थोड़ा बहुत अच्छे घर में रहता है तो उसे अच्छा खाना पीना इसलिए मनुष्य का जन्म मनुष्य ने नहीं जाता है शास्त्र पुराणों में इस गहराई को समझाया गया है कि अगर आपके कर्म ज्यादा खराब होने पर सुननी है जैसे किसी मनुष्य मनुष्य का जन्म उसके कर्मों के आधार पर पंप सारे योनियों में होता है तो अगर यही मान लिया जाए या फिर 8400000 योनियों के बाद मनुष्य का श्रेष्ठ जन प्राप्त होता है ऐसा कहा गया ना 8400000 योनियों के बावजूद सभी मनुष्य आज जितने भी मनुष्य दिख रहे हैं उन्होंने 8400000 योनियों प्राप्त पारखी हैं 8400000 योनियों को क्रॉस किया है तो सभी मनुष्य का जन्म होना चाहिए सभी एकदम एक्यूरेट श्रेष्ठ होना चाहिए सभी का जीवन सुखमय शांति पूर्ण आनंद से भरपूर संतुष्ट होना चाहिए नहीं कितने मनुष्य पशु जिंदगी जी रहे हैं इसलिए यह धारणा इस रहस्य को समझाने के लिए दिया गया है यह बातें इस बात को समझाने के लिए दी गई है कि मनुष्य का जन्म वास्तव में बहुत रहते हैं लेकिन श्रेष्ठ से सितम मनुष्य बनकर रहने के लिए हमें उचित कर्म करने चाहिए नहीं तो मनुष्य का जन्म पशु वध और एक चीज हम अपने सामान्य जिंदगी में भी देखते हैं अगर हमारा जीवन बहुत बुरा नहीं है बहुत ज्यादा अच्छा भी नहीं है अगर सामान्य है लेकिन एक जीवन में भी हम देखते हैं कि कभी हमारी अवस्था ऐसी होती है जब से हम 8 महीने के बच्चे को देखते हैं वह चार पैरों पर चलता है मनुष्य लेकिन अभी उसकी आयु चार पैरों पर चलने की फिर बहुत बुढ़ापे में हम देखते हैं बहुत ज्यादा बुढ़ापा जाता है वह मनुष्य है उसने अपनी सारी आयु के सारे लक्षण को पार किए हैं लेकिन बुढ़ापा कई बार कितने गुणों को देखा गया है खाना दिया जाए तो वह ऊपर रखा हुआ खाना नहीं खाते उनकी बुद्धि क्षमता ऐसी रहती है उसके खाने लगते हैं लेकिन या नीचे गिरा कर खाते हैं वह खाने को यह भी स्काई आंसर प्रताड़ना का या फिर जिस अटके चलने को मजबूर हो जाते हैं कई बार कुछ बीमारियां ऐसी हो जाती है हमें कभी-कभी कुछ दिनों के लिए हमारी अवस्था 30 वर्ष ही रहते हैं लेकिन हमें रिंग करना पड़ता है पक्का चलना पड़ता है कई दिनों हमें लेट ही रहना पड़ता है तो बहुत सारे ऐसे लक्षण है जो मनुष्य मनुष्य योनि में ही जन्म लेकर पशु पक्षियों सदृश होता किसी का प्रोफेशन देखिए आसमान में उड़ने का प्रोसेशन पायलट उनके जीवन में है तो मनुष्य उड़ने वाले पक्षी नहीं है लेकिन आधा से ज्यादा समय वह बोल रहे हैं आसमान में हल्के मनुष्य किसी का जल में कार्य है प्रोसेशन है गोताखोर है तो और भी कई तरह है तो मनुष्य में चलने वाले लेकिन उनका जीवन और भी बहुत सारे हैं आधा से ज्यादा उनका जीवन पानी नदियों में धर्म के हिसाब किताब बहुत बुरी है इसके हिसाब किताब है जिसके आधार पर हमारा नया जीवन कुशल की बातें हैं क्या हमारा जवाब मिला मनुष्य बहुत दुखता है भी मिल सकता है इसलिए इन बातों को समझाने के लिए यह कहा गया कि मनुष्य अपने बुरे कर्मों की वजह से पशु योनि में जन्म लेता है मनुष्य केवल मनुष्य के जीवन हो जाता है

ji haan manushya keval manushya ke roop me hi punar janam lete hain manushya ka punarjanm kabhi bhi kisi janwar ya pashupati ki yoni me nahi jaise ki hum bhi dekhte hain ki agar hum sen ka beej lagate hain toh usse chain ki paudhe aur same ka hi fal chamakegi agar hamein seb ka beej lagaya tha nahi milega usi tarah manushya me khuli aakhon se dekhta hai aur usko hum kai baar experience karte hain ki main nahi Singh ka beej ropa hai aur ise change ke paudhe nikalenge same ka fal prapt hoga phir milenge aam ka beej ropa hai toh isse aam ka hi paudha niklega aam ka hi banega ki ram hi palake yah hum apni zindagi me kai baar kar chuke hain aur fool bhi hamein samajh me aa jata hai ki hum roj dekhte hain jaanvaro ki aatmaen sabhi ek beej hai joking khuli aakhon se nahi dikhte isliye iski bare me jo jaankari hai vaah choti roop me toh manushya aatma jab sharir chodenge toh unka naya janam manushya ke roop me hi hoga yah nishchit hai vaah kisi dusre jaanvaro ki yoni me nahi jaati phir hamare shastron me aisa kyon kaha ki manushya ka janam galat karm ki wajah se janwar me chala jaaye agar bahut krodh karta hai kahin tak janwar banta hai agar koi bahut lalach karta hai toh kutte juthan chatne waale jaanvaro ki yoni me janam leta hai kyon kaha koi karan hoga vaastav me yah sahi baat hai isme gyaan hai aisa isliye kaha gaya ki manushya apne bure karmon se dare agar in baaton ko satya maan jata hai ki manushya ka agla janam uske karm ke aadhar par kisi kutte me ho jata hai bahut lalach karta hai ya kisi hinsak janwar me ho jata bahut krodhit sher bagh sher bagh sher bagh jaise hi hai usne agar kisi manushya ka janam ho jaega toh usse apne karm ke fal ka saath kaha se hoga saari sher bagh toh bus aise hi chalte hain bacche bolte hain wahi khate hain utne bure karm ki feeling ka anubhav hoga vaastav me aisa nahi hai manushya ka janam jab manushya yoni me hi ho kar jaanvaro se drist ho jata hai jise pashu vadh kahenge pashu yoni me nahi jata hai pashu par bane uske vyavhar uske 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janam uske karmon ke aadhar par pump saare yoniyon me hota hai toh agar yahi maan liya jaaye ya phir 8400000 yoniyon ke baad manushya ka shreshtha jan prapt hota hai aisa kaha gaya na 8400000 yoniyon ke bawajud sabhi manushya aaj jitne bhi manushya dikh rahe hain unhone 8400000 yoniyon prapt parkhi hain 8400000 yoniyon ko cross kiya hai toh sabhi manushya ka janam hona chahiye sabhi ekdam ekyuret shreshtha hona chahiye sabhi ka jeevan sukhmay shanti purn anand se bharpur santusht hona chahiye nahi kitne manushya pashu zindagi ji rahe hain isliye yah dharana is rahasya ko samjhane ke liye diya gaya hai yah batein is baat ko samjhane ke liye di gayi hai ki manushya ka janam vaastav me bahut rehte hain lekin shreshtha se sitam manushya bankar rehne ke liye hamein uchit karm karne chahiye nahi toh manushya ka janam pashu vadh aur ek cheez hum apne samanya zindagi me bhi dekhte hain agar hamara jeevan bahut bura nahi hai bahut zyada accha bhi nahi hai agar samanya hai lekin ek jeevan me bhi hum dekhte hain ki kabhi hamari avastha aisi hoti hai jab se hum 8 mahine ke bacche ko dekhte hain vaah char pairon par chalta hai manushya lekin abhi uski aayu char pairon par chalne ki phir bahut budhape me hum dekhte hain bahut zyada budhapa jata hai vaah manushya hai usne apni saari aayu ke saare lakshan ko par kiye hain lekin budhapa kai baar kitne gunon ko dekha gaya hai khana diya jaaye toh vaah upar rakha hua khana nahi khate unki buddhi kshamta aisi rehti hai uske khane lagte hain lekin ya niche gira kar khate hain vaah khane ko yah bhi sky answer prataadana ka ya phir jis atake chalne ko majboor ho jaate hain kai baar kuch bimariyan aisi ho jaati hai hamein kabhi kabhi kuch dino ke liye hamari avastha 30 varsh hi rehte hain lekin hamein ring karna padta hai pakka chalna padta hai kai dino hamein late hi rehna padta hai toh bahut saare aise lakshan hai jo manushya manushya yoni me hi janam lekar pashu pakshiyo sadrish hota kisi ka profession dekhiye aasman me udane ka procession pilot unke jeevan me hai toh manushya udane waale pakshi nahi hai lekin aadha se zyada samay vaah bol rahe hain aasman me halke manushya kisi ka jal me karya hai procession hai gotakhor hai toh aur bhi kai tarah hai toh manushya me chalne waale lekin unka jeevan aur bhi bahut saare hain aadha se zyada unka jeevan paani nadiyon me dharm ke hisab kitab bahut buri hai iske hisab kitab hai jiske aadhar par hamara naya jeevan kushal ki batein hain kya hamara jawab mila manushya bahut dukhata hai bhi mil sakta hai isliye in baaton ko samjhane ke liye yah kaha gaya ki manushya apne bure karmon ki wajah se pashu yoni me janam leta hai manushya keval manushya ke jeevan ho jata hai

जी हां मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में ही पुनर जन्म लेते हैं मनुष्य का पुनर्जन्म कभी भी किसी

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क्या मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में पुनर्जन्म लेते हैं नहीं ऐसा नहीं है अगर उन्होंने अच्छे कर्म किए तो तो मनुष्य के जन्म रूप में जन्म लेंगे और अगर उन्होंने कर्म अच्छे नहीं किए हैं कर्मों के हिसाब से उनको नहीं मिलती है वह किसी भी योनि में अगले जन्म में जा सकते हैं चाहे वह कुत्ते के रूप में जन्म ले सकते हैं चाहे घोड़े के रूप में जैसे उनके कर्म रहे हैं पूरे जीवन भर उन्होंने जैसा कर्म किया होगा उसी के अनुसार उनको योनि मिलती है ऐसा नहीं है कि मनुष्य योनि में उन्होंने घोर अपराध किए ऐसे कर्म किए जो कि एक जानवर से भी गिरे हुए कर्म होते हैं और अंतिम समय में वह मंदिर बना दे या ईश्वर के नाम देने लगे तो कर्मों का फल नहीं कटेगा बिल्कुल भी नहीं कटेगा उसको वही जन्म मिलेगा जो उसने जीवन भर अपने कर्म किए हैं लोगों को सताया है लोगों के साथ बुरा किया है उसके हिसाब से उसे कर्मों का फल मिलेगा और उसको उसी तरह से ही हो नहीं मिलेगी अगर उसने कई पशुओं के मांस खाए हैं लोगों का पशुओं का मांस खाता मांसाहारी है तो उसको अगले जन्म में कई बार हाउस योनि में जन्म लेकर भी काटना होगा फिर दूसरी योनि में जन्म लेकर घटना हुआ जैसे एग्जांपल मुर्गा का मुर्गे का जन्म लेना पड़ेगा बकरे का जन्म गाय का जन्म जन्म बदलते रहेंगे और जब तक वह कर्मों का फल नहीं पूरा हो जाता है और इस तरह से उनको हर योनि में भटकना पड़ेगा धन्यवाद

kya manushya keval manushya ke roop mein punarjanm lete hai nahi aisa nahi hai agar unhone acche karm kiye toh toh manushya ke janam roop mein janam lenge aur agar unhone karm acche nahi kiye hai karmon ke hisab se unko nahi milti hai vaah kisi bhi yoni mein agle janam mein ja sakte hai chahen vaah kutte ke roop mein janam le sakte hai chahen ghode ke roop mein jaise unke karm rahe hai poore jeevan bhar unhone jaisa karm kiya hoga usi ke anusaar unko yoni milti hai aisa nahi hai ki manushya yoni mein unhone ghor apradh kiye aise karm kiye jo ki ek janwar se bhi gire hue karm hote hai aur antim samay mein vaah mandir bana de ya ishwar ke naam dene lage toh karmon ka fal nahi katega bilkul bhi nahi katega usko wahi janam milega jo usne jeevan bhar apne karm kiye hai logo ko sataaya hai logo ke saath bura kiya hai uske hisab se use karmon ka fal milega aur usko usi tarah se hi ho nahi milegi agar usne kai pashuo ke maas khaye hai logo ka pashuo ka maas khaata masahari hai toh usko agle janam mein kai baar house yoni mein janam lekar bhi kaatna hoga phir dusri yoni mein janam lekar ghatna hua jaise example murga ka murge ka janam lena padega bakre ka janam gaay ka janam janam badalte rahenge aur jab tak vaah karmon ka fal nahi pura ho jata hai aur is tarah se unko har yoni mein bhatakana padega dhanyavad

क्या मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में पुनर्जन्म लेते हैं नहीं ऐसा नहीं है अगर उन्होंने अच्छे

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Yog Guru Amit Agrawal Rishiyog

Yoga Acupressure Expert

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आपका प्रश्न है क्या मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में पुनर्जन्म लेते हैं जी नहीं ऐसा कहीं भी नहीं लिखा हुआ है जैसा कि हम लोग शास्त्रों में पढ़ते हैं कि 8400000 योनियों होती है मनुष्य को उसके कर्म के अनुसार उसको अगला जन्म मिलता है अगर आप गीता पड़ेंगे तो गीता में बिल्कुल साफ लिखा हुआ है कि अंतिम समय पर या मृत्यु के अंतिम क्षणों में जिस जो व्यक्ति जिस विचार में रहता है उस विचार के अनुसार वह अगले जन्म में चला जाता है यह हम कह सकते हैं कि वह आत्मा उसे शरीर में प्रवेश पा लेती है यह उसकी अपनी जो उसने जीवन भर जिस मार्ग को फॉलो किया है या जिन कर्मों में वह संलग्न रहा है यह उसी पर निर्भर करता कि वो किस शरीर में उस आत्मा को स्थान मिलेगा यह जरूरी नहीं है कि आपका यह जन्म मनुष्य योनि का है तो आपको अगले जन्म में भी मनुष्य योनि मिले यह आपके सात्विक कर्मों पर निर्भर करता है हरि ओम

aapka prashna hai kya manushya keval manushya ke roop mein punarjanm lete hain ji nahi aisa kahin bhi nahi likha hua hai jaisa ki hum log shastron mein padhte hain ki 8400000 yoniyon hoti hai manushya ko uske karm ke anusaar usko agla janam milta hai agar aap geeta padenge toh geeta mein bilkul saaf likha hua hai ki antim samay par ya mrityu ke antim kshanon mein jis jo vyakti jis vichar mein rehta hai us vichar ke anusaar vaah agle janam mein chala jata hai yah hum keh sakte hain ki vaah aatma use sharir mein pravesh paa leti hai yah uski apni jo usne jeevan bhar jis marg ko follow kiya hai ya jin karmon mein vaah sanlagn raha hai yah usi par nirbhar karta ki vo kis sharir mein us aatma ko sthan milega yah zaroori nahi hai ki aapka yah janam manushya yoni ka hai toh aapko agle janam mein bhi manushya yoni mile yah aapke Satvik karmon par nirbhar karta hai hari om

आपका प्रश्न है क्या मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में पुनर्जन्म लेते हैं जी नहीं ऐसा कहीं भी न

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

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क्या मनुष्य के मनुष्य के रूप में पहचान लेते मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में पुनः जन्म नहीं लेते वह प्राणी पशु पक्षी किसी भी रूप में जन्म ले सकते हैं और यह धर्मा अध्यक्ष में भगवत गीता में सब में लिखा हुआ है

kya manushya ke manushya ke roop mein pehchaan lete manushya keval manushya ke roop mein punh janam nahi lete vaah prani pashu pakshi kisi bhi roop mein janam le sakte hain aur yah dharma adhyaksh mein bhagwat geeta mein sab mein likha hua hai

क्या मनुष्य के मनुष्य के रूप में पहचान लेते मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में पुनः जन्म नहीं ल

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Girijakant Singh

Founder/ President Yog Bharati Foundation Trust

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आपका प्रश्न क्या है मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में जन्म लेते हैं भारतीय दर्शनशास्त्र में जो हमारे लिखा है तो उसमें ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि मनुष्य की आत्मा द्वारा मनुष्य के रूप में ही जन्म लेती है ऐसा माना जाता है कि 8400000 योनियों जो हैं उनमें आत्मा को बार-बार जन्म लेती है अपने कर्म के हिसाब से और एक जन्म को पूरा कर अगले जन्म में दूसरे में भी प्रवेश कर सकती है जैसा उसका कारण है धन्यवाद

aapka prashna kya hai manushya keval manushya ke roop mein janam lete hain bharatiya darshanashastra mein jo hamare likha hai toh usme aisa kahin nahi likha hai ki manushya ki aatma dwara manushya ke roop mein hi janam leti hai aisa mana jata hai ki 8400000 yoniyon jo hain unmen aatma ko baar baar janam leti hai apne karm ke hisab se aur ek janam ko pura kar agle janam mein dusre mein bhi pravesh kar sakti hai jaisa uska karan hai dhanyavad

आपका प्रश्न क्या है मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में जन्म लेते हैं भारतीय दर्शनशास्त्र में जो

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Bk soni

Rajyoga Teacher

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यह बात सही है कि मनुष्य मनुष्य के रूप में ही पुनर जन्म लेता है पर हां उसके ऊपर कर्मा फिलॉस्फी भी आधारित होता है जैसे कि देखिए हम अगर लीची का बीज बोते हैं तो आम का फल तो नहीं निकलेगा ना आप आम का पेड़ तो नहीं निकलेगा उससे आपको नहीं मिलेगा ना इसी तरह से हमारी आत्मा मनुष्य की है तो जरूर मनुष्य ही जन्म लेगा पर हां हमारे कर्मों के अनुसार हमारा जन्म होता है जन्म में हमारा भुगतना मानव फल होता है जैसे दुनिया में अमीर बिगड़ी हुई है मध्यम वर्ग भी है आज देखिए किसी का जन्म लेते ही बड़ा पैसे वाला मालिक हो जाता है जमीन जायदाद का मालिक हो जाता है कोई जमीन जमीन लेना कोई जन्म लेते हैं क्या होता है कि बहुत गरीब रहता है देखेंगे किसी का बर्थडे है कपड़ा के घर वालों के पास जन्म लेता है मना कपड़े का दुकान होता है कोई का बहुत ज्यादा अंधन के अन्य अनाज के घर में जन्म लेता है तो क्या होगा भगवान के लिए ज्यादा कपड़ों का धान के आज के कपड़े के घर में अंतर दान किया उनके घर में पैसे का दान किया होगा फिर पैसे के पैसे वालों के घर में जन्म लेते हैं कोई ध्यान ही नहीं दिया तो गरीब के घर में जन्म लेते हैं और किसी को क्या होता है अचानक लॉटरी मिल जाती है तो जरूर उसके मरने के टाइम भी उन्होंने थोड़ा भुगतान किया होता है तो उसको लॉटरी करो के लिए जाती है मुस्कान भी हमारा जन्म होता है किसी ने देखा होगा ऐसा तो कारण किया होता है जीवन कुत्ते की तरह हो जाएगा और क्या होता है कि उसके अनुसार उसको क्या होता है इसी जन्म में वह वॉचमैन का जन्म लेता है जैसे वॉचमैन का ड्यूटी और कुत्ते की ड्यूटी में क्या होता है तुम्हारा जीवन गधे की तरह हो गया है देखो तो इधर से बहुत छोटा उधर उधर से बोलो किधर रखते रहते हो मना किसने जन्मों में उन्होंने तर्क दिया कि पिछले दिनों में किसी को पति से अलग किया होता इस जन्म में उसका पति अलग हो जाता है ऐसी बहुत अच्छे कर्मों के अनुसार हमारा पल भी होता है और पुनर्जन्म भी होता है और हम मनुष्य मनुष्य कहीं जन्म लेता है कोई भी प्राणी अगर छोड़ता है तो प्राण प्राण की तरह जन्म लेता है बड़ा कुत्ता कुत्ता में बिल्ली बिल्ली में मनुष्य मनुष्य में ही जवाब रहता है इसके बारे में आगे और भी कुछ करने हैं तो जवाब दे सकते हैं प्रश्न का इतना

yah baat sahi hai ki manushya manushya ke roop mein hi punar janam leta hai par haan uske upar karma philosophy bhi aadharit hota hai jaise ki dekhiye hum agar lichi ka beej bote hain toh aam ka fal toh nahi niklega na aap aam ka ped toh nahi niklega usse aapko nahi milega na isi tarah se hamari aatma manushya ki hai toh zaroor manushya hi janam lega par haan hamare karmon ke anusaar hamara janam hota hai janam mein hamara bhugatna manav fal hota hai jaise duniya mein amir bigadi hui hai madhyam varg bhi hai aaj dekhiye kisi ka janam lete hi bada paise vala malik ho jata hai jameen jaydaad ka malik ho jata hai koi jameen jameen lena koi janam lete kya hota hai ki bahut garib rehta hai dekhenge kisi ka birthday hai kapda ke ghar walon ke paas janam leta hai mana kapde ka dukaan hota hai koi ka bahut zyada andhan ke anya anaaj ke ghar mein janam leta hai toh kya hoga bhagwan ke liye zyada kapdo ka dhaan ke aaj ke kapde ke ghar mein antar daan kiya unke ghar mein paise ka daan kiya hoga phir paise ke paise walon ke ghar mein janam lete hain koi dhyan hi nahi diya toh garib ke ghar mein janam lete hain aur kisi ko kya hota hai achanak lottery mil jaati hai toh zaroor uske marne ke time bhi unhone thoda bhugtan kiya hota hai toh usko lottery karo ke liye jaati hai muskaan bhi hamara janam hota hai kisi ne dekha hoga aisa toh karan kiya hota hai jeevan kutte ki tarah ho jaega aur kya hota hai ki uske anusaar usko kya hota hai isi janam mein vaah watchman ka janam leta hai jaise watchman ka duty aur kutte ki duty mein kya hota hai tumhara jeevan gadhe ki tarah ho gaya hai dekho toh idhar se bahut chota udhar udhar se bolo kidhar rakhte rehte ho mana kisne janmon mein unhone tark diya ki pichle dino mein kisi ko pati se alag kiya hota is janam mein uska pati alag ho jata hai aisi bahut acche karmon ke anusaar hamara pal bhi hota hai aur punarjanm bhi hota hai aur hum manushya manushya kahin janam leta hai koi bhi prani agar chodta hai toh praan praan ki tarah janam leta hai bada kutta kutta mein billi billi mein manushya manushya mein hi jawab rehta hai iske bare mein aage aur bhi kuch karne hain toh jawab de sakte hain prashna ka itna

यह बात सही है कि मनुष्य मनुष्य के रूप में ही पुनर जन्म लेता है पर हां उसके ऊपर कर्मा फिलॉस

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Anil Kumar Tiwari

Yoga, Meditation & Astrologer

3:27
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आपका प्रश्न है क्या मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में पुनर्जन्म लेते हैं नहीं मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में पुनर्जन्म नहीं ले नहीं देते हैं यह अपने कर्म कर्मों के अनुसार है मनुष्य मनुष्य पुनर्जन्म मनुष्य के रूप में ले भी सकता है और नहीं भी दे सकता है जितनी भी जगत में यूनिया होती है कि पतंग पशु पक्षी यहां तक कि जीवित पर्वत जीवित पत्थर जो होते हैं उनमें भी पुनर्जन्म उनमें भी पुनर्जन्म व्यक्ति दे सकता है अपने कर्म के अपने कर्मों के अनुसार अगर बहुत अच्छे कर्म किए हैं तब मनुष्य का जन्म मनुष्य योनि में दोबारा मिलता है उदाहरण के तौर पर विवेक तोशाम भगवान बुध के जीवन की एक घटना है किसी जन्म में उन्होंने एक वह उनका रूप का हाथी कथा भगवान बुद्ध का किसी जन्म में एक रूप हाथी का था एक योनि हाथी की थी उस उस जंगल में एक बार आग लग गई आग लगने के कारण सब जंगली जानवर इधर उधर भाग रहे थे और हाथी भी भाग रहा था यानि भगवान बुध उस जन्म में हाथी थे हाथी भी भगा जैसे ही उसने भागने के लिए अपना पैर उठाया तीन पैर नीचे रखे एक पैर ऊपर उठा तो हल्का सा जमीन से ऊपर से पैर उठा तो पैर उठने में पैर के नीचे का भाग ऐसा हो गया जैसे एक सुरक्षित घर हो यानी पैर हाथी का पेड़ जो था वह एक घर की छत के रूप में काम कर और एक उधर से छोटा सा खरगोश का बच्चा हुआ भागा हुआ जंगल में आग लग गई थी वह वह भी भागा हुआ चला रहा था उसने उस हाथी ने जो पैर उठाया पैर के और जमीन के बीच में जो जगह बची यहां खरगोश का बच्चा नीचे दुबक करके बैठ गया उसे कुछ अच्छा की जैसी सुरक्षा मिल गई यह उस हाथी ने देख लिया फिर उस हाथी की हिम्मत नहीं नहीं पड़ी कि उसके ऊपर पैर रखकर के वह जंगल को पार करके भाग जाए कहते हैं कि वह हाथ उस हाथी ने पैर उठाया ही नहीं खरगोश का बच्चा उसके नीचे सुरक्षित बैठा रहा धीरे-धीरे जंगल की आग तेज हो गई और तेज हो गई पूरा का पूरा हाथी जल करके खाक हो गया मृत्यु को प्राप्त हो गया मगर अपने जब तक वह जिंदा था तब तक उसने पैर नहीं हटाया हाथी के करो खरगोश के बच्चे के लिए एक हल्का सा छत का काम करता रहा सुरक्षा का काम करता रहा इस परोपकार के कारण जो हाथी ने खरगोश के ऊपर पर उपकार किया तत्काल हाथी की हाथी की आत्मा निकली और उसका जन्म इंसान के रूप में भगवान बुद्ध के रूप में हुआ

aapka prashna hai kya manushya keval manushya ke roop mein punarjanm lete hain nahi manushya keval manushya ke roop mein punarjanm nahi le nahi dete hain yah apne karm karmon ke anusaar hai manushya manushya punarjanm manushya ke roop mein le bhi sakta hai aur nahi bhi de sakta hai jitni bhi jagat mein yuniya hoti hai ki patang pashu pakshi yahan tak ki jeevit parvat jeevit patthar jo hote hain unmen bhi punarjanm unmen bhi punarjanm vyakti de sakta hai apne karm ke apne karmon ke anusaar agar bahut acche karm kiye hain tab manushya ka janam manushya yoni mein dobara milta hai udaharan ke taur par vivek tosham bhagwan buddha ke jeevan ki ek ghatna hai kisi janam mein unhone ek vaah unka roop ka haathi katha bhagwan buddha ka kisi janam mein ek roop haathi ka tha ek yoni haathi ki thi us us jungle mein ek baar aag lag gayi aag lagne ke karan sab jungli janwar idhar udhar bhag rahe the aur haathi bhi bhag raha tha yani bhagwan buddha us janam mein haathi the haathi bhi bhaga jaise hi usne bhagne ke liye apna pair uthaya teen pair niche rakhe ek pair upar utha toh halka sa jameen se upar se pair utha toh pair uthane mein pair ke niche ka bhag aisa ho gaya jaise ek surakshit ghar ho yani pair haathi ka ped jo tha vaah ek ghar ki chhat ke roop mein kaam kar aur ek udhar se chota sa khargosh ka baccha hua bhaagaa hua jungle mein aag lag gayi thi vaah vaah bhi bhaagaa hua chala raha tha usne us haathi ne jo pair uthaya pair ke aur jameen ke beech mein jo jagah bachi yahan khargosh ka baccha niche dubak karke baith gaya use kuch accha ki jaisi suraksha mil gayi yah us haathi ne dekh liya phir us haathi ki himmat nahi nahi padi ki uske upar pair rakhakar ke vaah jungle ko par karke bhag jaaye kehte hain ki vaah hath us haathi ne pair uthaya hi nahi khargosh ka baccha uske niche surakshit baitha raha dhire dhire jungle ki aag tez ho gayi aur tez ho gayi pura ka pura haathi jal karke khak ho gaya mrityu ko prapt ho gaya magar apne jab tak vaah zinda tha tab tak usne pair nahi hataya haathi ke karo khargosh ke bacche ke liye ek halka sa chhat ka kaam karta raha suraksha ka kaam karta raha is paropkaar ke karan jo haathi ne khargosh ke upar par upkar kiya tatkal haathi ki haathi ki aatma nikli aur uska janam insaan ke roop mein bhagwan buddha ke roop mein hua

आपका प्रश्न है क्या मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में पुनर्जन्म लेते हैं नहीं मनुष्य केवल मनुष

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Dr Asha B Jain

Dip in Naturopathy, Yoga therapist Pranic healer, Counselor

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जी नहीं ऐसा हम कुछ भी श्योरिटी के साथ नहीं कह सकते मेरे ख्याल से तो कर्मों के हिसाब से आपको जन्म मिलते हैं अगले जन्म का वर्णन तो कर्मों के हिसाब से ही होगा जैसे आप कर्म करेंगे वैसे ही आपको जन्म की अगले जन्म की प्राप्ति होगी पूरा कर्मों का रोल है

ji nahi aisa hum kuch bhi shyoriti ke saath nahi keh sakte mere khayal se toh karmon ke hisab se aapko janam milte hain agle janam ka varnan toh karmon ke hisab se hi hoga jaise aap karm karenge waise hi aapko janam ki agle janam ki prapti hogi pura karmon ka roll hai

जी नहीं ऐसा हम कुछ भी श्योरिटी के साथ नहीं कह सकते मेरे ख्याल से तो कर्मों के हिसाब से आपक

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मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में अगला जन्म लेते यह बात सही है लेकिन मानव जीवन में मनुष्य में मतलब यह है कि अगर आपने मानव जीवन पाया है और आप बताइए

manushya keval manushya ke roop mein agla janam lete yah baat sahi hai lekin manav jeevan mein manushya mein matlab yah hai ki agar aapne manav jeevan paya hai aur aap bataiye

मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में अगला जन्म लेते यह बात सही है लेकिन मानव जीवन में मनुष्य में

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B.k.Narayana swamy

Yoga Instructor and Meditation Expert

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मनुष्य की आत्मा केवल मनुष्य के रूप में ही पुनर जन्म लेते हैं यह तो साबित हो चुका है क्योंकि जैसे बीज हम धरती पर होते हैं वैसे ही फलम को मिलता है जैसे कलम हम लगाते हैं वैसे ही पेड़ हमको मिलता है जैसे करनी वैसी भरनी कहते हैं ना इसलिए आत्मा मनुष्य की मनुष्य जन्म भी लेते हैं क्योंकि मनुष्य आत्मा के अंदर जो संस्कार है वह प्राणी योनियों में नहीं होता है मनुष्य का संस्कार में विशेषकर के ज्ञान है बुद्धि है समझ है अकल है इसलिए यह जो भगवान ने हम सब इंसान को दिया है यह अकल प्राणी है तो जानवरों में नहीं हो सकता है इसलिए मन आत्मा मनुष्य ही पैदा होता है इंसान के रात में जाकर के हिंसा भी बनते हैं कई लोग कहते हैं इंसान कभी जानवर भी बन सकता है कुत्ता बिल्ली भी बन सकता है करके कहां है क्यों कहां मना एक जमाना ऐसा था जहां पर कोई इंसान पाप नहीं करते थे जब द्वापर युग ने इंसान पाप करना स्टार्ट किया तब से यह जो बुद्धिमान लोग थे साधु संत श्री महात्मा धर्मगुरु आदित्य वह लोग लोगों को डराने के लिए अगर इंसान पाप करेंगे तो कुत्ता बिल्ली बन सकता करके डरा दिया तब लोगों ने उस घर के माफिक पाप कर्म से थोड़ा दूर रहें लेकिन आज दुनिया में हम देख रहे हैं कितनी सिद्धांत है फिर भी इंसान बुरा बनते जा रहे इसका कारण क्या है सच्चा आध्यात्मिक ज्ञान का अभाव इसलिए इंसान की ऐसी दुर्गे हो चुका है इसलिए खुद परमपिता परमात्मा करके कहते हैं आत्मा की गिलानी कर रहे हैं इंसान आत्मा का गिलानी की बात क्या है इंसान जानवर बनता है यह तो आत्मा की ग्लानि हो गया इसलिए कहते हैं आत्मा कभी भी जानवर नहीं बन सकता है अभी देखते हैं कई इंसान जानवर जैसा जी रही है तो इतना मोरिया उठाते रहते हैं वह तो जानवर जैसा ही हो गए ना गदा जैसा ही जीवन हो गए हैं और जहां कंकावा भोजन खाते रहते हैं तो सूअर जैसा हो गए ना कुत्ता जैसा हो गया है ना इसलिए इंसान की आत्मा सिंह साहनी बनता है जानवर की आत्मा जानवरी बनता है अगर पाप कर्म किया तो इंसान जाकर के जानवर जैसा कर्म का फल अनलॉक करते हैं शरीर तो इंसान की होगा लेकिन बुद्धि जानवर जैसा होगा इसलिए इंसान कभी जानवर नहीं बनता जानवर कभी इंसान नहीं बन सकते धरती पर एक ही 400001 या है 84 लाख योनि में से इंसान की जो आत्मा है सर्वश्रेष्ठ माना जाता है धन्यवाद

manushya ki aatma keval manushya ke roop mein hi punar janam lete hain yah toh saabit ho chuka hai kyonki jaise beej hum dharti par hote hain waise hi falam ko milta hai jaise kalam hum lagate hain waise hi ped hamko milta hai jaise karni vaisi bharani kehte hain na isliye aatma manushya ki manushya janam bhi lete hain kyonki manushya aatma ke andar jo sanskar hai vaah prani yoniyon mein nahi hota hai manushya ka sanskar mein visheshkar ke gyaan hai buddhi hai samajh hai akal hai isliye yah jo bhagwan ne hum sab insaan ko diya hai yah akal prani hai toh jaanvaro mein nahi ho sakta hai isliye man aatma manushya hi paida hota hai insaan ke raat mein jaakar ke hinsa bhi bante hain kai log kehte hain insaan kabhi janwar bhi ban sakta hai kutta billi bhi ban sakta hai karke kaha hai kyon kaha mana ek jamana aisa tha jaha par koi insaan paap nahi karte the jab dwapar yug ne insaan paap karna start kiya tab se yah jo buddhiman log the sadhu sant shri mahatma dharmguru aditya vaah log logo ko darane ke liye agar insaan paap karenge toh kutta billi ban sakta karke dara diya tab logo ne us ghar ke mafik paap karm se thoda dur rahein lekin aaj duniya mein hum dekh rahe hain kitni siddhant hai phir bhi insaan bura bante ja rahe iska karan kya hai saccha aadhyatmik gyaan ka abhaav isliye insaan ki aisi durge ho chuka hai isliye khud parampita paramatma karke kehte hain aatma ki gilani kar rahe hain insaan aatma ka gilani ki baat kya hai insaan janwar banta hai yah toh aatma ki glani ho gaya isliye kehte hain aatma kabhi bhi janwar nahi ban sakta hai abhi dekhte hain kai insaan janwar jaisa ji rahi hai toh itna moriya uthate rehte hain vaah toh janwar jaisa hi ho gaye na gada jaisa hi jeevan ho gaye hain aur jaha kankava bhojan khate rehte hain toh suar jaisa ho gaye na kutta jaisa ho gaya hai na isliye insaan ki aatma Singh sahani banta hai janwar ki aatma janavari banta hai agar paap karm kiya toh insaan jaakar ke janwar jaisa karm ka fal unlock karte hain sharir toh insaan ki hoga lekin buddhi janwar jaisa hoga isliye insaan kabhi janwar nahi banta janwar kabhi insaan nahi ban sakte dharti par ek hi 400001 ya hai 84 lakh yoni mein se insaan ki jo aatma hai sarvashreshtha mana jata hai dhanyavad

मनुष्य की आत्मा केवल मनुष्य के रूप में ही पुनर जन्म लेते हैं यह तो साबित हो चुका है क्योंक

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आपका प्रश्न है मनुष्य के मरने के बाद मनुष्य का जीवन है क्योंकि करता है कभी उसे होश में है तब होश में रहेगा तो उसको मालूम है ना कि मैं कहां करना है इस पर पहुंचते हॉस्टल में भी बात पे हो गए हैं और सैफ अली मुझे कैसे सेंड करें उसमें बहुत से होते हैं इस पर और चपाती मरता है उस समय उसके मनुष्य पहले उसके दिमाग में क्या है उस हिसाब से उसका जन्म होता है वह किस जानवर के बारे में सोचेगा कोठारी सकते क्योंकि अभी तक मरने के बाद कैसे पता नहीं पड़ता था कि ऐसा कौन सा काम किया

aapka prashna hai manushya ke marne ke baad manushya ka jeevan hai kyonki karta hai kabhi use hosh mein hai tab hosh mein rahega toh usko maloom hai na ki main kaha karna hai is par pahunchate hostel mein bhi baat pe ho gaye hain aur saif ali mujhe kaise send kare usme bahut se hote hain is par aur chapati marta hai us samay uske manushya pehle uske dimag mein kya hai us hisab se uska janam hota hai vaah kis janwar ke bare mein sochega kothari sakte kyonki abhi tak marne ke baad kaise pata nahi padta tha ki aisa kaun sa kaam kiya

आपका प्रश्न है मनुष्य के मरने के बाद मनुष्य का जीवन है क्योंकि करता है कभी उसे होश में है

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Narendra Bhardwaj

Spirituality Reformer

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भैया आपने पूछा है क्या मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में पुणे में जन्म लेते हैं यह जरूरी नहीं है गीता जी में भगवान कृष्ण का है जो व्यक्ति 3 गुण होते हैं सतोगुण रजोगुण तमोगुण जो व्यक्ति अपनी मृत्यु सतोगुण में करता है यानी कि जब वह इस दुनिया से जाता है और उसकी वृत्ति सतोगुण में तो निश्चित तौर पर मनुष्य बनता है और सतोगुण में मृत्यु होने पर वह किसी महापुरुष के घर में जन्म लेता है जहां देवी गुड़ ज्यादा पाए जाते हैं तो यह जरूरी नहीं है कि मनुष्य मनुष्य मरने के बाद मनुष्य रूप में ही पुनः जन्म लेंगे वह मरते समय उनकी जो वृद्धि होगी जिस गुण में होगी रजोगुण रजोनिवृत्ति है वह मनुष्य योनि में आपको जन्म लेगा लेकिन मनुष्य योनि में सामान्य से घरों में जन्म मिलेगा और व्यक्ति यदि तमोगुण में मृत्यु को प्राप्त होता है तो फिर वह निकृष्ट एवेन्यू में चला जाता है इसीलिए यह जो व्यक्ति भजन पूजन ध्यान यह सब करते हैं इसीलिए करते हैं जिससे सतोगुण हावी रहे सतोगुण प्रभावी रहे सतोगुण में मृत्यु होने पर व्यक्ति को पुनः अच्छे कुल खानदान में अच्छे महानुभावों के यहां पुनर्जन्म मिलता है लेकिन यदि व्यक्ति उस से चूक गया तो रजोगुण में राजू प्रतिभा आदमी को मनुष्य शरीर मिल जाता है लेकिन वह सामान्य से घरों में निम्नतम परिवारों में जन्म मिलता है लेकिन तमोगुण से बचे रहने के लिए ही पूजा-पाठ करते हैं कि यदि भैया आप ज्यादा आध्यात्मिक शिखर पर नहीं पहुंचे तो कम से कम इतना तो बना रहे पुणे भगवान का भजन करने के लिए हमको एक अवसर और मिले भगवान ने कहा कि जो भी व्यक्ति मेरे मार्ग पर चलता है उसके अधोगति नहीं होती मतलब वह मनुष्य से फिर ना के गाने योनियों में नहीं जाता कीट पतंगे और इनमें नहीं जाता लेकिन यदि व्यक्ति अति कर दे अति सर्वत्र वर्जित अति कर दे बात करने की अति कर दे लोगों को सताने की अति कर दे साधु संतों का अपमान की अति कर दे भगवान के अपमान की अति कर दे भगवान को ना मानने की तो फिर उस आदमी का यह जीवन है अंतिम जीवन मान के चलो फिर तो 8400000 योनियों में भटकना ही पड़ेगा क्योंकि प्रकृति का नियम है जन्म मिला है भजन के लिए जन्म मिला है ईश्वर को प्राप्त करने के लिए यदि हम मनुष्य जन्म लेकर अच्छे कर्म करते रहे तो बहुत अच्छे कर्म का फल यह है कि आप को मोक्ष भी प्राप्त हो सकता है प्रिय जन्म मरण के चक्र से भी निकल सकते हो तुम मनुष्य केवल मनुष्य रूप में जन्म लेगा यह जरूरी नहीं है यह डिपेंड करता है कि वह अपने इस मनुष्य जीवन को किस तरह गुजार रहा है किस तरह भगवान के प्रति समर्पित करके चल रहा है यह बहुत कुछ पाएंगे धन्यवाद

bhaiya aapne poocha hai kya manushya keval manushya ke roop me pune me janam lete hain yah zaroori nahi hai geeta ji me bhagwan krishna ka hai jo vyakti 3 gun hote hain satogun rajogun tamogun jo vyakti apni mrityu satogun me karta hai yani ki jab vaah is duniya se jata hai aur uski vriti satogun me toh nishchit taur par manushya banta hai aur satogun me mrityu hone par vaah kisi mahapurush ke ghar me janam leta hai jaha devi good zyada paye jaate hain toh yah zaroori nahi hai ki manushya manushya marne ke baad manushya roop me hi punh janam lenge vaah marte samay unki jo vriddhi hogi jis gun me hogi rajogun rajonivritti hai vaah manushya yoni me aapko janam lega lekin manushya yoni me samanya se gharon me janam milega aur vyakti yadi tamogun me mrityu ko prapt hota hai toh phir vaah nikrisht evenyu me chala jata hai isliye yah jo vyakti bhajan pujan dhyan yah sab karte hain isliye karte hain jisse satogun haavi rahe satogun prabhavi rahe satogun me mrityu hone par vyakti ko punh acche kul khandan me acche mahanubhavon ke yahan punarjanm milta hai lekin yadi vyakti us se chuk gaya toh rajogun me raju pratibha aadmi ko manushya sharir mil jata hai lekin vaah samanya se gharon me nimnatam parivaron me janam milta hai lekin tamogun se bache rehne ke liye hi puja path karte hain ki yadi bhaiya aap zyada aadhyatmik shikhar par nahi pahuche toh kam se kam itna toh bana rahe pune bhagwan ka bhajan karne ke liye hamko ek avsar aur mile bhagwan ne kaha ki jo bhi vyakti mere marg par chalta hai uske adhogati nahi hoti matlab vaah manushya se phir na ke gaane yoniyon me nahi jata kit patange aur inmein nahi jata lekin yadi vyakti ati kar de ati sarvatra varjit ati kar de baat karne ki ati kar de logo ko satane ki ati kar de sadhu santo ka apman ki ati kar de bhagwan ke apman ki ati kar de bhagwan ko na manne ki toh phir us aadmi ka yah jeevan hai antim jeevan maan ke chalo phir toh 8400000 yoniyon me bhatakana hi padega kyonki prakriti ka niyam hai janam mila hai bhajan ke liye janam mila hai ishwar ko prapt karne ke liye yadi hum manushya janam lekar acche karm karte rahe toh bahut acche karm ka fal yah hai ki aap ko moksha bhi prapt ho sakta hai priya janam maran ke chakra se bhi nikal sakte ho tum manushya keval manushya roop me janam lega yah zaroori nahi hai yah depend karta hai ki vaah apne is manushya jeevan ko kis tarah gujar raha hai kis tarah bhagwan ke prati samarpit karke chal raha hai yah bahut kuch payenge dhanyavad

भैया आपने पूछा है क्या मनुष्य केवल मनुष्य के रूप में पुणे में जन्म लेते हैं यह जरूरी नहीं

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Ghanshyamvan

मंदिर सेवा

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देखिए मनुष्य ही मनुष्य के रूप में जन्म नहीं लेते हैं कर्मानुसार जन्म लेते हैं जिनका जैसा कर्म होता है वैसे ही उनके जन्म होते हैं यदि हम बुरे कर्म करते हैं तो हमें ही नीच योनि में जाना पड़ता है पशु-पक्षी बनना पड़ता है जीव जंतु ही बनना पड़ता है यदि हम अच्छे कर्म करते हैं तुमसे लोग मिल जाते हैं चल वहां जाते हैं तभी तो भगवान ने 84 लोगों ने बनाई है भगवान ने कहा है 84 लाख योनि में इंसान समझ सकता है सबसे श्रेष्ठ है यदि आंख 84 लाख योनि में जाना नहीं चाहते तो ऐसे कर्म गुलाब को मनुष्य बनना बनना पड़े या सड़क में जाना पड़ेगा कम हो सके नहीं तो आपकी मुकदमों की सजा मिलेगी और आप मनुष्य योनि से भी तू क्यों नहीं जा सकते हैं धन्यवाद

dekhiye manushya hi manushya ke roop mein janam nahi lete hain karmanusar janam lete hain jinka jaisa karm hota hai waise hi unke janam hote hain yadi hum bure karm karte hain toh hamein hi neech yoni mein jana padta hai pashu pakshi banna padta hai jeev jantu hi banna padta hai yadi hum acche karm karte hain tumse log mil jaate hain chal wahan jaate hain tabhi toh bhagwan ne 84 logo ne banai hai bhagwan ne kaha hai 84 lakh yoni mein insaan samajh sakta hai sabse shreshtha hai yadi aankh 84 lakh yoni mein jana nahi chahte toh aise karm gulab ko manushya banna banna pade ya sadak mein jana padega kam ho sake nahi toh aapki mukadamon ki saza milegi aur aap manushya yoni se bhi tu kyon nahi ja sakte hain dhanyavad

देखिए मनुष्य ही मनुष्य के रूप में जन्म नहीं लेते हैं कर्मानुसार जन्म लेते हैं जिनका जैसा क

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