हिंदू देवता भारत में क्यों सीमित हैं? वे यीशु की तरह सार्वभौमिक देवता क्यों नहीं हैं?...


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Ghanshyam Vyas

Cultural Guide & Speaker

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हिंदू देवता का अर्थ है आर्य सनातन वैदिक संस्कृति जो समूचे विश्व में विद्यमान थी लेकिन जैसे जैसे पापियों का संख्या बल बढ़ते गया वह सिमर सिमर थे भारत तक रह गई है फिर भी विश्व में सभी राष्ट्रों में लगभग किसी न किसी रूप में भगवान को पूजा जाता है अनेक जिन्हें हम विदेशी कहते हैं जबकि हम उन्हें वसुदेव कुटुंबकम की दृष्टि से अपना ही परिवार का सदस्य मानते हैं अर्थात जब हम परमपिता परमेश्वर के संदर्भ में बात करते हैं तो यीशु उनके समान नहीं हो सकते हैं यीशु जो है गौर के एक दूत है अरफात मैसेंजर है इसलिए भगवान और यीशु में बहुत अंतर है और यीशु के मार्ग पर चलने के लिए विगत 2000 वर्षों में जो अनेकों अनेक प्रकार के लोग षड्यंत्र तथा हिंसा फैला कर के वहां ईसाई पंत को स्वीकार करने के लिए बाध्य किया गया है यह निश्चित ही है हमारे लिए विचारणीय है जबकि भगवान अर्थात परमपिता परमेश्वर को मानने वाले कभी या नहीं कहते हैं कि आप इनको मानी है यह हमारे भगवान आपके भी होने चाहिए इस आर्य समाज वैदिक संस्कृति की यही विशेषता रही है जो परमपिता परमेश्वर की शक्तियां विविध रूप में मुलाकात प्रकृति के रूप में पूजी जाती है इसके प्रमाण सभी विश्व में आज भी हमें दिखाई देते हैं परमपिता परमेश्वर द्वारा दी गई जो प्राकृतिक शक्तियां है हम उनके वंदन से उनके पूजन से उनका लाभ ले सकते हैं मगर इन शक्तियों का दोहन करेंगे तो निश्चित ही इस धरती पर मानव जाति का विनाश होगा हो जाएगा जो हमें आप दिख रहा है

hindu devta ka arth hai arya sanatan vaidik sanskriti jo samuche vishwa me vidyaman thi lekin jaise jaise papiyon ka sankhya bal badhte gaya vaah simar simar the bharat tak reh gayi hai phir bhi vishwa me sabhi rashtro me lagbhag kisi na kisi roop me bhagwan ko puja jata hai anek jinhen hum videshi kehte hain jabki hum unhe vasudev kutumbakam ki drishti se apna hi parivar ka sadasya maante hain arthat jab hum parampita parmeshwar ke sandarbh me baat karte hain toh yeshu unke saman nahi ho sakte hain yeshu jo hai gaur ke ek dut hai arafat messenger hai isliye bhagwan aur yeshu me bahut antar hai aur yeshu ke marg par chalne ke liye vigat 2000 varshon me jo anekon anek prakar ke log shadyantra tatha hinsa faila kar ke wahan isai pant ko sweekar karne ke liye badhya kiya gaya hai yah nishchit hi hai hamare liye vicharniya hai jabki bhagwan arthat parampita parmeshwar ko manne waale kabhi ya nahi kehte hain ki aap inko maani hai yah hamare bhagwan aapke bhi hone chahiye is arya samaj vaidik sanskriti ki yahi visheshata rahi hai jo parampita parmeshwar ki shaktiyan vividh roop me mulakat prakriti ke roop me pooji jaati hai iske pramaan sabhi vishwa me aaj bhi hamein dikhai dete hain parampita parmeshwar dwara di gayi jo prakirtik shaktiyan hai hum unke vandan se unke pujan se unka labh le sakte hain magar in shaktiyon ka dohan karenge toh nishchit hi is dharti par manav jati ka vinash hoga ho jaega jo hamein aap dikh raha hai

हिंदू देवता का अर्थ है आर्य सनातन वैदिक संस्कृति जो समूचे विश्व में विद्यमान थी लेकिन जैसे

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