क्या किसानों को किसानी छोड़ देनी चाहिए?...


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धर्मदेव सिंह भाटी

कुश्ती प्रशिक्षक

1:18
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आपने प्रसन्न किया है क्या किसानों को किसानी छोड़ देनी चाहिए बहुत ही शानदार प्रसन्न किया है आपने जैसा कि आज के समय में सभी को पता है किसानी घाटे का सौदा साबित हो रही है लेकिन यदि किसान किसानी करना छोड़ देंगे तो क्या आप लोग एक पत्थर खाएंगे क्या सोना चांदी खाएंगे यह कौन सी महंगी धातु खाएंगे जिससे आपका पेट भर सके तो भाई मैं तो यही कहूंगा कि किसानों को किसानी करना नहीं छोड़ना चाहिए हां सरकारों को किसानों की सुध लेनी चाहिए किसानों की फसलों के दाम बढ़ाने चाहिए किसानों को सारी सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए जिससे वह अपना जीवन यापन अच्छी तरह से कर सकें ईश्वर के बाद किसानों को अन्नदाता कहा जाता है अन्नदाता का दर्जा बिल्कुल ईश्वर के समकक्ष ही होता है तो अतः मेरे भाई किसानों को किसानी करने किसी भी हाल में नहीं छोड़नी चाहिए

aapne prasann kiya hai kya kisano ko kisaani chod deni chahiye bahut hi shandar prasann kiya hai aapne jaisa ki aaj ke samay mein sabhi ko pata hai kisaani ghate ka sauda saabit ho rahi hai lekin yadi kisan kisaani karna chod denge toh kya aap log ek patthar khayenge kya sona chaandi khayenge yah kaun si mehengi dhatu khayenge jisse aapka pet bhar sake toh bhai main toh yahi kahunga ki kisano ko kisaani karna nahi chhodna chahiye haan sarkaro ko kisano ki sudh leni chahiye kisano ki fasalon ke daam badhane chahiye kisano ko saree suvidhaen muhaiya karani chahiye jisse vaah apna jeevan yaapan achi tarah se kar sake ishwar ke baad kisano ko annadata kaha jata hai annadata ka darja bilkul ishwar ke samkaksh hi hota hai toh atah mere bhai kisano ko kisaani karne kisi bhi haal mein nahi chhodni chahiye

आपने प्रसन्न किया है क्या किसानों को किसानी छोड़ देनी चाहिए बहुत ही शानदार प्रसन्न किया है

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Dr. Radha kant Singh

किसान

0:26

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आपने पूछा क्या किसानों को किसान ही छोड़ देनी चाहिए बिल्कुल छोड़ देनी चाहिए लेकिन स्वयं के उपयोग के लिए स्वयं के उपयोग के लिए उसे खेती करते लेनी चाहिए उतना ही अनाज पैदा करें जितना वह अपने घर में यह परिवार में कंज्यूम कर सकता है इससे अधिक उत्पादन नहीं करना चाहिए अगर ऐसा हमने 3 साल भी रूटीन कर लिया तो यह सरकारें घुटने के बल चलते हमारे पास बहन धन्यवाद

aapne poocha kya kisano ko kisan hi chod deni chahiye bilkul chod deni chahiye lekin swayam ke upyog ke liye swayam ke upyog ke liye use kheti karte leni chahiye utana hi anaaj paida kare jitna vaah apne ghar mein yah parivar mein consume kar sakta hai isse adhik utpadan nahi karna chahiye agar aisa humne 3 saal bhi routine kar liya toh yah sarkaren ghutne ke bal chalte hamare paas behen dhanyavad

आपने पूछा क्या किसानों को किसान ही छोड़ देनी चाहिए बिल्कुल छोड़ देनी चाहिए लेकिन स्वयं के

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आपका प्रश्न है कि क्या किसानों को किसान छोड़ देनी चाहिए आपका प्रश्न तो बहुत इंटरेस्टिंग हैं दोस्त अगर मैं आपको कहूं आप खाना खाना छोड़ दो तो छोड़ दो क्या मेरा मेरे हिसाब से तो आप बोलोगे नहीं यह कैसा सवाल है इसी तरह आपका भी सवाल इसी तरह है अगर किसान किसानी करना छोड़ देगा लोग भूखे ही मर जाएंगे किसान तो मर ही रहे हो तो बात की बात है बट लोग भी भूखे मर जाएंगे किसान के अंदर बहुत ताकत है वह शक्ति है जो इंसानों का पेट तो भर रहा है बट इस धरती मां के एक पूजा भी है वह क्योंकि धरती में जो बीज होता है योग धरती मां से प्यार करता है उसकी सेवा करता है उसमें शिबू किसानी देख सकता है नॉर्मल इंसान को तो उसे वह खेत और बीज शिबू दिखेगा शिबू मेहनत बटु धरती मां से प्रेम करता है वही महसूस कर सकता है जब उसकी फसल लहर आती है जब वो काटा है जब वह अन्य उठता है उसकी जो खुशी होती है शायद वह आप नहीं महसूस कर पाओगे मुझे बता यह प्रश्न पूरी दुनिया में सभी सुनेंगे किसान मर रहे हैं आज तक सब खाली सरकार पर दोष दे रहे हैं मैंने तो कभी नहीं सुना किसानों के लिए कोई हेल्प किया है मैंने तो नहीं सुना किसानों की कभी कोई तारीफ की है किसान एक ऐसा इंसान है जिस तरह खेत में एक बैल चलती है पीछे उसके छोटे पढ़ते हैं उसी तरह जनता का जवाब है सिर्फ उसे ताने देती है तारीफ तो मैंने कभी नहीं सुना है किसान जो मेहनत करता है अपने फैमिली की तो पेट भरता है मगर दोस्त पूरे देश के लिए काम करते हो अगर आज किसान बंद कर दे अन्य हो गाना जो आज आप चावल दाल जो भी खा रहे हो 30 ₹40 किलो या दो जो भी रेट है उसके दुगने रेट में भी आपको नहीं मिलेगा जब है नहीं तो मिलेगा और रही बात आपकी किसान अपने जो प्रश्न पूछा है उसका जवाब दो मिली क्या आपको अगर वह किसानी छोड़ देंगे तो आप सोचा आप क्या खाओगे ऐसा कुछ सोचो जो किसानों को हेल्प उनके लिए एक सुविधा है बहुत सारी अभी लॉन्च हुए गवर्नमेंट ने केवल उन्हें पता ही नहीं उनको हेल्प कैसा हुआ उन्हें पता ही नहीं है कि वह उतना एजुकेट नहीं होता अगर है भी तो खेती ऐसी कोई वह नहीं है कि बोल दिया हो जाता है उसकी मेहनत टाइम है वोट देने के बाद कभी कभी मौसम खराब होने की वजह से उसका जो बीच का दाम है वह भी नहीं मिल पाता है तो उसमें किसान क्या करें उसकी कोई गलती है नेचर है कभी-कभी हो जाता है किसान को तो किसान नहीं करनी ही चाहिए आपका प्रश्न का जवाब तो मिल गया होगा कर नहीं करेगा तो पूरे लोग संकट में आ जाएंगे जय महाराष्ट्र

aapka prashna hai ki kya kisano ko kisan chhod deni chahiye aapka prashna toh bahut interesting hain dost agar main aapko kahun aap khana khana chhod do toh chhod do kya mera mere hisab se toh aap bologe nahi yah kaisa sawaal hai isi tarah aapka bhi sawaal isi tarah hai agar kisan kisaani karna chhod dega log bhukhe hi mar jaenge kisan toh mar hi rahe ho toh baat ki baat hai but log bhi bhukhe mar jaenge kisan ke andar bahut takat hai vaah shakti hai jo insano ka pet toh bhar raha hai but is dharti maa ke ek puja bhi hai vaah kyonki dharti me jo beej hota hai yog dharti maa se pyar karta hai uski seva karta hai usme sibu kisaani dekh sakta hai normal insaan ko toh use vaah khet aur beej sibu dikhega sibu mehnat batu dharti maa se prem karta hai wahi mehsus kar sakta hai jab uski fasal lahar aati hai jab vo kaata hai jab vaah anya uthata hai uski jo khushi hoti hai shayad vaah aap nahi mehsus kar paoge mujhe bata yah prashna puri duniya me sabhi sunenge kisan mar rahe hain aaj tak sab khaali sarkar par dosh de rahe hain maine toh kabhi nahi suna kisano ke liye koi help kiya hai maine toh nahi suna kisano ki kabhi koi tareef ki hai kisan ek aisa insaan hai jis tarah khet me ek bail chalti hai peeche uske chote padhte hain usi tarah janta ka jawab hai sirf use tane deti hai tareef toh maine kabhi nahi suna hai kisan jo mehnat karta hai apne family ki toh pet bharta hai magar dost poore desh ke liye kaam karte ho agar aaj kisan band kar de anya ho gaana jo aaj aap chawal daal jo bhi kha rahe ho 30 Rs kilo ya do jo bhi rate hai uske dugne rate me bhi aapko nahi milega jab hai nahi toh milega aur rahi baat aapki kisan apne jo prashna poocha hai uska jawab do mili kya aapko agar vaah kisaani chhod denge toh aap socha aap kya khaoge aisa kuch socho jo kisano ko help unke liye ek suvidha hai bahut saari abhi launch hue government ne keval unhe pata hi nahi unko help kaisa hua unhe pata hi nahi hai ki vaah utana educate nahi hota agar hai bhi toh kheti aisi koi vaah nahi hai ki bol diya ho jata hai uski mehnat time hai vote dene ke baad kabhi kabhi mausam kharab hone ki wajah se uska jo beech ka daam hai vaah bhi nahi mil pata hai toh usme kisan kya kare uski koi galti hai nature hai kabhi kabhi ho jata hai kisan ko toh kisan nahi karni hi chahiye aapka prashna ka jawab toh mil gaya hoga kar nahi karega toh poore log sankat me aa jaenge jai maharashtra

आपका प्रश्न है कि क्या किसानों को किसान छोड़ देनी चाहिए आपका प्रश्न तो बहुत इंटरेस्टिंग है

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Govihnsingh

कृषि

2:05
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aryan

Health consultant(09717895167)

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किसान जो अपने खेतों में कड़ी मेहनत करके धूप तूफान गर्मी सर्दी यह सारी चीजें खेलते हुए अपने खेतों में जो अनाज पैदा करते हैं ना वही हमारे हम सब नागरिकों के शरीर में लहू बनकर दौड़ता है और आप कहते हैं कि किसानों को किसानी छोड़ देनी चाहिए अगर किसान किसानी छोड़ देगा तो आप खाएंगे क्या खाएंगे आप किसानी करना बच्चों का खेल नहीं है किसानी करना एक तरह से बहुत बड़ा देखिए तपस्या होती है जहां पर किसान अपने आपको अपने जितने भी निजी सुख होते हैं वह सारे छोड़कर सुबह और शाम किसी कोई वक़्त का ध्यान रखते अपने खेतों में दिन-रात लगा रहता है और तब जाकर हमारे लिए वह अनाज खाने के लिए रोटी पैदा करता है और आप कहते हैं कि किसानों को किसानी कर देनी चाहिए

kisan jo apne kheton mein kadi mehnat karke dhoop toofan garmi sardi yah saree cheezen khelte hue apne kheton mein jo anaaj paida karte hain na wahi hamare hum sab nagriko ke sharir mein lahoo bankar daudata hai aur aap kehte hain ki kisano ko kisaani chod deni chahiye agar kisan kisaani chod dega toh aap khayenge kya khayenge aap kisaani karna baccho ka khel nahi hai kisaani karna ek tarah se bahut bada dekhiye tapasya hoti hai jaha par kisan apne aapko apne jitne bhi niji sukh hote hain vaah saare chhodkar subah aur shaam kisi koi waqt ka dhyan rakhte apne kheton mein din raat laga rehta hai aur tab jaakar hamare liye vaah anaaj khane ke liye roti paida karta hai aur aap kehte hain ki kisano ko kisaani kar deni chahiye

किसान जो अपने खेतों में कड़ी मेहनत करके धूप तूफान गर्मी सर्दी यह सारी चीजें खेलते हुए अपने

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नहीं किसानों को किसानी नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि पूरा देश पूरे देश की आर्थिक व्यवस्था जितने भी कर्मचारी जितने भी अधिकारी जितने भी एमएलए एमपी यहां तक कि प्रधानमंत्री सभी किसानों के दम पर राज कर रहे हैं

nahi kisano ko kisaani nahi chhodni chahiye kyonki pura desh poore desh ki aarthik vyavastha jitne bhi karmchari jitne bhi adhikari jitne bhi mla MP yahan tak ki pradhanmantri sabhi kisano ke dum par raj kar rahe hain

नहीं किसानों को किसानी नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि पूरा देश पूरे देश की आर्थिक व्यवस्था जितन

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सतीश चौधरी

कृषि, (किसान चिंतक, युवा शक्ति जनजागृति)

9:40
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आप ने सवाल किया है क्या किसानों को किसानी छोड़ देनी चाहिए तो मैं सतीश चौधरी एक किसान चिंतक होने के नाते यह कहना चाहूंगा कि जी नहीं किसानों को खेती किसानी नहीं छोड़नी चाहिए यह बहुत ही विचारणीय प्रश्न है यदि किसानों ने खेती करना बंद कर दिया ऑन उत्पादन बंद कर दिया जीवन को चलाने वाली जो भोजन है उसकी कितनी बड़ी किल्लत होगी देश भूखों मर जाएगा किसान बड़ा उदारवादी होता है किसान सही मायने में संसार का मसीहा होता है जीव प्रेमी होता है बड़ा दयालु होता है अपने निजी स्वार्थ के लिए कारपोरेट जगत धन्ना सेठ आदि आदि कई तरह के व्यक्ति कई तरह के सामाजिक प्राणी कुछ भी कर सकते हैं लेकिन यह किसान अपने धर्म से विमुख नहीं हो सकता किसानों का धर्म महेश खेती करना ही नहीं है संसार भर के प्राणियों का पेट पालने की जिम्मेदारी उनकी भूख मिटाने की जिम्मेदारी हर जीव के पालन पोषण की जिम्मेदारी स्वयं प्रभु परमेश्वर ने ईश्वर ने किसान के हिस्से में दी है किसान को अपना वह धर्म बाकू भी निभाना चाहिए आज के बदलते परिवेश में बदलते हालातों में जरूर खेती घाटे का सौदा हुई है किसान कर्जदार हुआ उसमें किसान का दोष नहीं उसमें दोषी हैं तो वर्तमान सरकारों की नीतियां नीति बनाने वाले आयोगों के में बैठे वह सफेदपोश जनक महेश किताबी ज्ञान है भारतीय धरातल के ज्ञान का अभाव इसका सबसे मूल कारण है कृषि प्रधान देश का यह दुर्भाग्य है कि नीति बनाने वाले नीति निर्माता जिन्होंने कभी खेती किसानी को देखा ही नहीं केवल आंकड़ों के आधार पर अपने पुस्तक या ज्ञान के आधार पर वह नीति निर्माण करते हैं कागदी हवाई और धरातल यह तीनों बातों में बहुत अंतर होता है मुख्य था उतना ही अंतर होता है उतनी ही दूरी होती है जितनी धरती और आसमान के बीच किसान को समृद्ध बनाने के लिए किसान को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसान उद्धार के लिए देश को विकसित करने के लिए देश की तरक्की करने के लिए किसान को समृद्ध करना होगा किसान को कर्जा मुक्त करना होगा हमारा बुद्धिजीवियों से किस प्लेटफार्म के द्वारा एक संदेश एक दाना जब किसान जमीन में डालता है एक दाने से अनेकों दाने कभी-कभी ऐसी फसलें भी होती हैं कि उन्हें गिनना भी इतना आसान नहीं होता इतना उत्पादन करने के बाद भी किसान कर्जदार आखिर क्यों किसान स्वयं किसान का पूरा परिवार उसके मासूम बच्चे जिनकी खेलने की आयु होती है जिनकी पढ़ने की आयु होती है जिनकी आयु देश का कर्णधार बनने की होती है वह अपने पिता के साथ अपने उस बूढ़े पिता के साथ अपने उस गरीब पिता के साथ खेती किसानी में सहयोग करते हैं चिलचिलाती धूप कड़कड़ाती ठंड बारिश कोहरा पाला बहुत तीव्र गर्मी सबकी चिंता किए बिना किसान का पूरा परिवार कठोर परिश्रम करता रहता है तब जाकर एक फसल उत्पादित होती है अपने पैदा किए हुए उत्पादन को जब किसान बाजार लेकर जाता है तो वहां व्यापारी वहां बिचौलिए उसका मूल्य तय करते हैं उसकी बिक्री कितनी कठिनाइयों से होती है यह कभी किसी ने सोचा भी नहीं होगा काश वह नीति निर्धारक वह नीति निर्माता वह हवाई जुमलेबाज किसान के दर्द को समझ सके बड़ी विडंबना है बड़ा दुर्भाग्य है किसान की गाथा चंद शब्दों में नहीं कही जा सकती एक ग्रंथ लिखा जा सकता है मेरे अनेकों किसान चिंतक विचारक साथी हैं किसान की व्यथा शब्दों के माध्यम से एक पुस्तक में लिखने का प्रयास भी किया है लेकिन फिर भी किसान की व्यथा को किसान के दुख दर्द को पूरी तरह समेट नहीं पाए तो चंद लफ्जों में किसान की व्यथा कह देना संभव ही नहीं है फिर भी मेरा इशारा है मेरी कोशिश है कि देश के किसान की पीड़ा देश के किसान की मजबूरी देश के किसान की समस्या वह हमारे बुद्धिजीवी समाज के सामने उजागर हो और हमारा समाज किसान के प्रति आदर के भाव रखें किसान के प्रति चिंतन करें किसान को उसकी मेहनत का उसके उत्पादन का सही मूल्य तब तक ना मिले तब तक किसान के साथ आवाज उठाएं संघर्ष करें और इस सपूत सफेदपोश चंद्र लोगों को चंद उद्योग पतियों को चंद बेईमान टाइप के लोगों को सबक सिखाने का काम करें जय हिंद जय भारत जय किसान जय जवान

aap ne sawaal kiya hai kya kisano ko kisaani chhod deni chahiye toh main satish choudhary ek kisan chintak hone ke naate yah kehna chahunga ki ji nahi kisano ko kheti kisaani nahi chhodni chahiye yah bahut hi vicharniya prashna hai yadi kisano ne kheti karna band kar diya on utpadan band kar diya jeevan ko chalane wali jo bhojan hai uski kitni badi killat hogi desh bhukhon mar jaega kisan bada udarvaadi hota hai kisan sahi maayne me sansar ka masiha hota hai jeev premi hota hai bada dayalu hota hai apne niji swarth ke liye karporet jagat dhanna seth aadi aadi kai tarah ke vyakti kai tarah ke samajik prani kuch bhi kar sakte hain lekin yah kisan apne dharm se vimukh nahi ho sakta kisano ka dharm mahesh kheti karna hi nahi hai sansar bhar ke praniyo ka pet palne ki jimmedari unki bhukh mitane ki jimmedari har jeev ke palan poshan ki jimmedari swayam prabhu parmeshwar ne ishwar ne kisan ke hisse me di hai kisan ko apna vaah dharm baaku bhi nibhana chahiye aaj ke badalte parivesh me badalte halaton me zaroor kheti ghate ka sauda hui hai kisan karzdar hua usme kisan ka dosh nahi usme doshi hain toh vartaman sarkaro ki nitiyan niti banane waale aayogon ke me baithe vaah safedposh janak mahesh kitabi gyaan hai bharatiya dharatal ke gyaan ka abhaav iska sabse mul karan hai krishi pradhan desh ka yah durbhagya hai ki niti banane waale niti nirmaata jinhone kabhi kheti kisaani ko dekha hi nahi keval aankado ke aadhar par apne pustak ya gyaan ke aadhar par vaah niti nirmaan karte hain kagdi hawai aur dharatal yah tatvo baaton me bahut antar hota hai mukhya tha utana hi antar hota hai utani hi doori hoti hai jitni dharti aur aasman ke beech kisan ko samriddh banane ke liye kisan ko aatmanirbhar banane ke liye kisan uddhar ke liye desh ko viksit karne ke liye desh ki tarakki karne ke liye kisan ko samriddh karna hoga kisan ko karja mukt karna hoga hamara buddhijiviyon se kis platform ke dwara ek sandesh ek dana jab kisan jameen me dalta hai ek daane se anekon daane kabhi kabhi aisi faslen bhi hoti hain ki unhe ginna bhi itna aasaan nahi hota itna utpadan karne ke baad bhi kisan karzdar aakhir kyon kisan swayam kisan ka pura parivar uske masoom bacche jinki khelne ki aayu hoti hai jinki padhne ki aayu hoti hai jinki aayu desh ka karndhar banne ki hoti hai vaah apne pita ke saath apne us budhe pita ke saath apne us garib pita ke saath kheti kisaani me sahyog karte hain chilchilati dhoop kadakadati thand barish koharaa pala bahut tivra garmi sabki chinta kiye bina kisan ka pura parivar kathor parishram karta rehta hai tab jaakar ek fasal utpadit hoti hai apne paida kiye hue utpadan ko jab kisan bazaar lekar jata hai toh wahan vyapaari wahan bichauliye uska mulya tay karte hain uski bikri kitni kathinaiyon se hoti hai yah kabhi kisi ne socha bhi nahi hoga kash vaah niti nirdharak vaah niti nirmaata vaah hawai jumlebaj kisan ke dard ko samajh sake badi widambana hai bada durbhagya hai kisan ki gaatha chand shabdon me nahi kahi ja sakti ek granth likha ja sakta hai mere anekon kisan chintak vicharak sathi hain kisan ki vyatha shabdon ke madhyam se ek pustak me likhne ka prayas bhi kiya hai lekin phir bhi kisan ki vyatha ko kisan ke dukh dard ko puri tarah samet nahi paye toh chand lafjon me kisan ki vyatha keh dena sambhav hi nahi hai phir bhi mera ishara hai meri koshish hai ki desh ke kisan ki peeda desh ke kisan ki majburi desh ke kisan ki samasya vaah hamare buddhijeevi samaj ke saamne ujagar ho aur hamara samaj kisan ke prati aadar ke bhav rakhen kisan ke prati chintan kare kisan ko uski mehnat ka uske utpadan ka sahi mulya tab tak na mile tab tak kisan ke saath awaaz uthaye sangharsh kare aur is sapoot safedposh chandra logo ko chand udyog patiyon ko chand beiimaan type ke logo ko sabak sikhane ka kaam kare jai hind jai bharat jai kisan jai jawaan

आप ने सवाल किया है क्या किसानों को किसानी छोड़ देनी चाहिए तो मैं सतीश चौधरी एक किसान चिंतक

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नहीं किसानों को किस-किस ने नई छोड़ दे चाहिए क्योंकि कृषि करना एक बहुत बड़ी बातें हैं और कषिका का विषय है क्योंकि कृषि से ही सभी लोग होते हैं

nahi kisano ko kis kis ne nayi chod de chahiye kyonki krishi karna ek bahut badi batein hain aur kashika ka vishay hai kyonki krishi se hi sabhi log hote hain

नहीं किसानों को किस-किस ने नई छोड़ दे चाहिए क्योंकि कृषि करना एक बहुत बड़ी बातें हैं और कष

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Kriti

Volunteer

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किसानों की सारी छोड़ देनी चाहिए ताकि किसान की खानी छोड़ देंगे तो देश के लोग खाना ही नहीं खा पाएंगे तो यह चीज कभी पॉसिबल नहीं होनी चाहिए लेकिन सरकार को अगर किसान अगर काम इतना कर रही है धन इतना बोल रही है फसल उगा रही है तो सरकार को उनके लिए कुछ करना चाहिए जितना भी उनका करजा है उसको माफ करने का सोचना चाहिए क्योंकि किसान की मेहनत करते दी किसान मेहनत नहीं करेंगे किसान नहीं करेंगे देश में खाना नहीं आ पाएगा और इससे बहुत लोगों को प्रॉब्लम हो सकती है हो सकता है कि बहुत लोग भूख के कारण मर सकते हैं तो यह चीज कभी भी नहीं होनी चाहिए कि सानिया फसल उगाने में 10 दिन में 15 दिन का समय नहीं लगता उसमें कोई साल भर की फसल होती है तो यदि किसान ऐसा कुछ सोच लेंगे तुम कुछ भी नहीं कर पाएंगे और सरकार कुछ नहीं कर पाएगी तो यह जिस कभी भी किसानों के दिमाग में नहीं आनी चाहिए

kisano ki saree chod deni chahiye taki kisan ki khaani chod denge toh desh ke log khana hi nahi kha payenge toh yah cheez kabhi possible nahi honi chahiye lekin sarkar ko agar kisan agar kaam itna kar rahi hai dhan itna bol rahi hai fasal uga rahi hai toh sarkar ko unke liye kuch karna chahiye jitna bhi unka kurja hai usko maaf karne ka sochna chahiye kyonki kisan ki mehnat karte di kisan mehnat nahi karenge kisan nahi karenge desh mein khana nahi aa payega aur isse bahut logo ko problem ho sakti hai ho sakta hai ki bahut log bhukh ke karan mar sakte hain toh yah cheez kabhi bhi nahi honi chahiye ki saniya fasal ugane mein 10 din mein 15 din ka samay nahi lagta usme koi saal bhar ki fasal hoti hai toh yadi kisan aisa kuch soch lenge tum kuch bhi nahi kar payenge aur sarkar kuch nahi kar payegi toh yah jis kabhi bhi kisano ke dimag mein nahi aani chahiye

किसानों की सारी छोड़ देनी चाहिए ताकि किसान की खानी छोड़ देंगे तो देश के लोग खाना ही नहीं ख

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