निधियों के गैर-आवंटन के कारण आंध्र में बंद होगा।क्या आप बंद का समर्थन करते हो? क्यों?...


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Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

2:00

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैं किसी भी समस्या के समाधान के लिए बंद का समर्थन नहीं करती हूं नहीं कर सकती हूं और ना ही कभी करना चाहूंगी क्योंकि बंद से कितना नुकसान होता है कितनी तकलीफ होती है जनता कितनी परेशान होती है लोग कितने परेशान होते हैं इसकी गहराई से अब अगर आप सोचेंगे तो आप समझेंगे कि कितना गलत है इस समस्या के समाधान के लिए आप कितनी समस्याएं खड़ी कर देते हैं और बंदिश का कोई हल नहीं है इस से अच्छा है कि आप बातचीत करके किसी और तरीके से उन समस्याओं का समाधान ढूंढे और उन्हें एक तो बंद होने से जनता में भय व्याप्त हो जाता है जो उपद्रवी लोग हैं वह दंगे फसाद पर उतारू हो जाते हैं उन्हें एक मौका मिल जाता है दंगे करने का कि बंद है तो चलो दुकानें बंद करो बसों को जलाओ लोगों को परेशान करो यह सब तो होता ही है उसके अलावा हम अपनी कार्य क्षमता अपनी ऊर्जा बंद में लगा देते हैं जो हमारे राज्य आसपास के राज्यों का इतना नुकसान करता है माल का आना जाना रुक जाता है माल सड़ जाता है वह नुकसान तो होता ही है फिर उसकी भरपाई करने के लिए हमें कितने दिन तक वापस मेहनत करनी पड़ती है जनता कितनी परेशान होती है आप लोग कितने परेशान होते हैं बच्चों में डर फैल जाता है और लोगों में असंतोष बढ़ता जाता है हम अपनी-अपनी विकास को एक कदम और पीछे धकेल देते हैं बंद करके और फिर से नए सिरे से उसको उठाने में उसको चलाने में उसको वापस गतिशील करने में कितना वक्त बर्बाद कर देते हैं लेकिन हम यह सब नहीं सोचते हैं और बंद को एक समस्या का समाधान मांग लेते हैं जो कि मेरे हिसाब से बिल्कुल गलत है इसके लिए कोई और तरीके खोज नहीं चाहिए लेकिन बंद नहीं करना चाहिए बंद से राज्य का नुकसान तो होता ही है उसके आसपास के जो राज्य से जुड़े होते हैं उनका भी नुकसान होता है और दंगे फैलने की पूरी संभावना रहती है इसलिए बंद का समर्थन में नहीं करती हूं

main kisi bhi samasya ke samadhan ke liye band ka samarthan nahi karti hoon nahi kar sakti hoon aur na hi kabhi karna chahungi kyonki band se kitna nuksan hota hai kitni takleef hoti hai janta kitni pareshan hoti hai log kitne pareshan hote hain iski gehrai se ab agar aap sochenge toh aap samjhenge ki kitna galat hai is samasya ke samadhan ke liye aap kitni samasyaen khadi kar dete hain aur bandish ka koi hal nahi hai is se accha hai ki aap batchit karke kisi aur tarike se un samasyaon ka samadhan dhundhe aur unhe ek toh band hone se janta mein bhay vyapt ho jata hai jo upadravi log hain vaah dange fasad par utaru ho jaate hain unhe ek mauka mil jata hai dange karne ka ki band hai toh chalo dukanein band karo bason ko jalao logo ko pareshan karo yah sab toh hota hi hai uske alava hum apni karya kshamta apni urja band mein laga dete hain jo hamare rajya aaspass ke rajyo ka itna nuksan karta hai maal ka aana jana ruk jata hai maal sad jata hai vaah nuksan toh hota hi hai phir uski bharpai karne ke liye hamein kitne din tak wapas mehnat karni padti hai janta kitni pareshan hoti hai aap log kitne pareshan hote hain baccho mein dar fail jata hai aur logo mein asantosh badhta jata hai hum apni apni vikas ko ek kadam aur peeche dhakel dete hain band karke aur phir se naye sire se usko uthane mein usko chalane mein usko wapas gatisheel karne mein kitna waqt barbad kar dete hain lekin hum yah sab nahi sochte hain aur band ko ek samasya ka samadhan maang lete hain jo ki mere hisab se bilkul galat hai iske liye koi aur tarike khoj nahi chahiye lekin band nahi karna chahiye band se rajya ka nuksan toh hota hi hai uske aaspass ke jo rajya se jude hote hain unka bhi nuksan hota hai aur dange failane ki puri sambhavna rehti hai isliye band ka samarthan mein nahi karti hoon

मैं किसी भी समस्या के समाधान के लिए बंद का समर्थन नहीं करती हूं नहीं कर सकती हूं और ना ही

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