क्या हमारे कर्म ही हमारा व्यवहार निर्धारित करते हैं?...


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Vikas Singh

Political Analyst

2:10
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी हां आपने बिल्कुल सही बोला हमारा कर्म ही हमारा व्यवहार निर्धारित करता है कर्म आप अच्छा करोगे जब आपका संस्कार अच्छा होगा आपका विचार अच्छा होगा आपके अंदर ईमानदारी होगी तब आप कर्म अच्छे डायरेक्शन में करोगे जब आप कर्म अच्छे डायरेक्शन में करोगे तो आपका सामाजिक दायरा भी बढ़ेगा जितने भी अच्छे लोग होंगे समाज के वह आपसे कांटेक्ट में होंगे अगर आप गलत कर्म करोगे तो गलत कर्म कभी आपको फल मिलेगा क्योंकि भगवान श्री कृष्ण ने गीता में बोला है कि कर्म प्रधान है कर्म जो अच्छा से करता है उसको अच्छा फल मिलता है जो गलत तरीके से कर्म को करता है उसको गलत कर्म का फल मिलता है तो कहने का तात्पर्य है कि हमारा कर्म ही सब कुछ निर्धारित करता है हम हम अपने जीवन में कितना तरक्की पाएंगे यह भी कर्म के ऊपर अपने परिवार को कितना आगे तक ले जाएंगे यह भी हमारा कर्म निर्धारित करता है तो हमेशा कंटिन्यू इमानदारी से रहिए सत्य के पथ पर चलिए भ्रष्टाचार का विरोध करिए अगर आपके देश का कोई एक व्यक्ति देश के आगे बढ़ाने के लिए सभी लोगों से लड़ रहा है तो उस व्यक्ति का समर्थन करके कहने का तात्पर्य है प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी देश को आगे बढ़ाने के लिए कितना संघर्ष कर रहे हैं यह आप जानते होंगे तो हम सभी भारतवासियों का भी दायित्व बनता है कि प्रधानमंत्री मोदी जी का समर्थन करें खुलकर समर्थन करिए अच्छे व्यक्ति का खुलकर समर्थन किया जाता है अच्छे व्यक्ति का हम लोग खुलकर समर्थन करेंगे उसके पक्ष में जो वार्तालाप करेंगे तो यह भी एक अच्छा कर्म है और इस कर्म का हमको और हम हमारे सभी देशवासियों को फायदा मिलेगा तो कर्म ही प्रधान है और कर्म को अच्छे से करिए अच्छे डायरेक्शन में करिए तभी आपकी तरक्की होगी और हमारे देश की तरक्की होगी धन्यवाद

ji haan aapne bilkul sahi bola hamara karm hi hamara vyavhar nirdharit karta hai karm aap accha karoge jab aapka sanskar accha hoga aapka vichar accha hoga aapke andar imaandaari hogi tab aap karm acche direction mein karoge jab aap karm acche direction mein karoge toh aapka samajik dayara bhi badhega jitne bhi acche log honge samaj ke vaah aapse Contact mein honge agar aap galat karm karoge toh galat karm kabhi aapko fal milega kyonki bhagwan shri krishna ne geeta mein bola hai ki karm pradhan hai karm jo accha se karta hai usko accha fal milta hai jo galat tarike se karm ko karta hai usko galat karm ka fal milta hai toh kehne ka tatparya hai ki hamara karm hi sab kuch nirdharit karta hai hum hum apne jeevan mein kitna tarakki payenge yah bhi karm ke upar apne parivar ko kitna aage tak le jaenge yah bhi hamara karm nirdharit karta hai toh hamesha continue imaandari se rahiye satya ke path par chaliye bhrashtachar ka virodh kariye agar aapke desh ka koi ek vyakti desh ke aage badhane ke liye sabhi logo se lad raha hai toh us vyakti ka samarthan karke kehne ka tatparya hai pradhanmantri mananiya shri narendra modi ji desh ko aage badhane ke liye kitna sangharsh kar rahe hain yah aap jante honge toh hum sabhi bharatvasiyon ka bhi dayitva baata hai ki pradhanmantri modi ji ka samarthan kare khulkar samarthan kariye acche vyakti ka khulkar samarthan kiya jata hai acche vyakti ka hum log khulkar samarthan karenge uske paksh mein jo vartalaap karenge toh yah bhi ek accha karm hai aur is karm ka hamko aur hum hamare sabhi deshvasiyon ko fayda milega toh karm hi pradhan hai aur karm ko acche se kariye acche direction mein kariye tabhi aapki tarakki hogi aur hamare desh ki tarakki hogi dhanyavad

जी हां आपने बिल्कुल सही बोला हमारा कर्म ही हमारा व्यवहार निर्धारित करता है कर्म आप अच्छा क

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महेश सेठ

रेकी ग्रैंडमास्टर,लाइफ कोच

0:31
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क्या आपके कर्मी आपका व्यवहार निर्धारित करते हैं कुछ हद तक सही भी है गलत भी हैं जैसे आप किसी की पिटाई कर दीजिए तो गलत कर्म है आप को पुलिस पकड़ कर ले जाएगी अगर आप किसी का सहायता करते हो तो पुलिस नहीं पकड़ लिया जाएगी तो डिपेंड करता है कि आप ही अवस्था क्या है ठीक है धन्यवाद नमस्कार

kya aapke karmi aapka vyavhar nirdharit karte hain kuch had tak sahi bhi hai galat bhi hain jaise aap kisi ki pitai kar dijiye toh galat karm hai aap ko police pakad kar le jayegi agar aap kisi ka sahayta karte ho toh police nahi pakad liya jayegi toh depend karta hai ki aap hi avastha kya hai theek hai dhanyavad namaskar

क्या आपके कर्मी आपका व्यवहार निर्धारित करते हैं कुछ हद तक सही भी है गलत भी हैं जैसे आप कि

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महेश दुबे

कवि साहित्यकार

0:20
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कर्म का व्यवहार से क्या लेना देना है आपका व्यवहार आपकी शिक्षा और आप के संस्कारों पर निर्भर होता है बहुत से लोग अच्छे कर्म करते दिखाई पड़ते हैं लेकिन उनका व्यवहार उतना उचित नहीं होता और बहुत सारे लोग व्यवहार कुशल होते हैं लेकिन कर्म दुष्टता भरे कर जाते हैं

karm ka vyavhar se kya lena dena hai aapka vyavhar aapki shiksha aur aap ke sanskaron par nirbhar hota hai bahut se log acche karm karte dikhai padate hain lekin unka vyavhar utana uchit nahi hota aur bahut saare log vyavhar kushal hote hain lekin karm dushtata bhare kar jaate hain

कर्म का व्यवहार से क्या लेना देना है आपका व्यवहार आपकी शिक्षा और आप के संस्कारों पर निर्भर

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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

0:29
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क्या हमारे कर्म ही हमारा व्यवहार निर्धारित करना आपका कर्म आओगे जितने कर्म की प्रधानता होगी जिसमें कर्म केंद्र सिंचाई होगी वही आपका व्यवहार को इंगित करेगा तो निश्चित तौर पर हम कह सकते हैं कि मानो का करतब भी ही उसके व्यवहार को मिलता है

kya hamare karm hi hamara vyavhar nirdharit karna aapka karm aaoge jitne karm ki pradhanta hogi jisme karm kendra sinchai hogi wahi aapka vyavhar ko ingit karega toh nishchit taur par hum keh sakte hain ki maano ka kartab bhi hi uske vyavhar ko milta hai

क्या हमारे कर्म ही हमारा व्यवहार निर्धारित करना आपका कर्म आओगे जितने कर्म की प्रधानता होगी

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Vedachary Pathak Singrauli

सनातन सुरक्षा परिषद् संस्थापक

1:11
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क्या हमारे कर्म ही हमारा व्यवहार निर्धारित करते हैं जी हां बिल्कुल आप जैसे कर्म करेंगे क्रमांक कैसे करें जिस प्रकार से आपकी सोच आपके मन में आएगी उसी प्रकार से आप कर्म करेंगे और जैसे ही आप कर्म करेंगे अच्छा या बुरा उस कर्म का जो परिणाम होता है वह पूरे शरीर पर होता है उसका प्रभाव पूरे शरीर पर होता है पूरे मस्तिष्क पर होता है वह चीजें आपके मन में चलती रहती है और फिर लोगों से अब दैनिक जीवन में भी व्यवहार उसी प्रकार से करेंगे इसलिए बिल्कुल आपके घर कर्म थोड़ी खराब है तो आम जीवन में आम लोगों से आपका व्यवहार अच्छा नहीं होगा लेकिन वहीं पर अगर आपका कर्म अच्छे हैं तो लोगों के साथ आपका व्यवहार भी अच्छा होगा तो बिल्कुल कर्म जोहार निर्धारित करता है धन्यवाद

kya hamare karm hi hamara vyavhar nirdharit karte hai ji haan bilkul aap jaise karm karenge kramank kaise kare jis prakar se aapki soch aapke man mein aayegi usi prakar se aap karm karenge aur jaise hi aap karm karenge accha ya bura us karm ka jo parinam hota hai vaah poore sharir par hota hai uska prabhav poore sharir par hota hai poore mastishk par hota hai vaah cheezen aapke man mein chalti rehti hai aur phir logo se ab dainik jeevan mein bhi vyavhar usi prakar se karenge isliye bilkul aapke ghar karm thodi kharab hai toh aam jeevan mein aam logo se aapka vyavhar accha nahi hoga lekin wahi par agar aapka karm acche hai toh logo ke saath aapka vyavhar bhi accha hoga toh bilkul karm johar nirdharit karta hai dhanyavad

क्या हमारे कर्म ही हमारा व्यवहार निर्धारित करते हैं जी हां बिल्कुल आप जैसे कर्म करेंगे क्र

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

0:21
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क्या हमारे कर्म ही हमारा व्यवहार निर्धारित करते जी हां हमारे कर्म ही हमारा व्यवहार निर्धारित करते और फिर आगे पता चलता है कि क्या करना है क्या होता है क्या नहीं होता है ठीक उस पर भी अच्छा बुरा क्या सब कुछ पता है परिणाम अब को मिलते हैं ठीक है गुलाब लाइफ

kya hamare karm hi hamara vyavhar nirdharit karte ji haan hamare karm hi hamara vyavhar nirdharit karte aur phir aage pata chalta hai ki kya karna hai kya hota hai kya nahi hota hai theek us par bhi accha bura kya sab kuch pata hai parinam ab ko milte hain theek hai gulab life

क्या हमारे कर्म ही हमारा व्यवहार निर्धारित करते जी हां हमारे कर्म ही हमारा व्यवहार निर्धार

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J.P. Y👌g i

Psychologist

6:08

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प्रश्न है क्या हमारे करम है हमारा व्यवहार निर्धारित करते हैं वैसे तो यह सामान बात है कर्म ही व्यवहार का होता है स्वरूप लेकिन फिर भी हम व्यवहार एक अलग मायने से जोड़ते हैं क्योंकि कर्म क्षेत्र अलग होता है और व्यवहार कुछ अलग छेत्र में चला जाता है तो यह हमारी सामाजिक निपुणता के ऊपर आधारित होता है कि हम किस ढंग से व्यवहार का परिचय दें क्योंकि व्यवहार से ही गुडविल बनता है आगे भविष्य के अंदर तो यहां मैं इस बात को समझ रहा हूं कि कर्म मान लीजिए कुछ ऐसा होता है कि जो बहुत ही कुछ लोगों को ठीक नहीं लगता लेकिन व्यवहार कुशल होते हैं वह दूसरे सामाजिक मेलजोल के अंदर गत तो कर्म वाला क्षेत्र होता है तो बिहार एकात्मिक सी चीज है एक अपनी सूझबूझ है उसमें अपनी एक अलग समझदारी है कदम अपनी जगह होता लेकिन ज्यादातर स्वभाव बन जाता है कर्म की ज्यादा होने पर ज्यादातर हमारे उसी कर्म के दायरे में परिभाषाएं उत्पन्न होती हैं तो इसलिए कर्म के साथ जब व्यवहार होता है वह कभी-कभी झलक आता है कि कर्मवीर इस व्यवहार के अंदर जाहिर हो रहा है लेकिन दोनों क्षेत्र अलग है तो यह सब चीजें डिपेंड करता है कि हमारे दिमाग के रैक के अंदर एक अलग अलग की भूमिका होनी चाहिए कर्म का चित्र जैसे सपोज हम कहीं नौकरी आज घर गृहस्ती कोई बाहर कार्य कर को कार्यक्रम को करके आ रहे हैं बाहर रूप से जो कर्म होता है उसके बाद हमारा गृह प्रवेश होता है उसके अंदर कुछ अलग संरचनाएं होती तो वहां जो परिवार के लोग बैठे रहते हैं कि शासन ईद में बैठते हैं तो वहां हम कर्मों के स्वरूप को हा नहीं ले जाते हैं कि वहां पर से हमें वही डील करना पड़ता है जो हमारा प्रेम व्यवहार जो अपने रिश्ते हैं जो नाते लगते हैं और जो हमारा कर्तव्य धर्म होता है इसके साथ से हमार डील करते हैं तो कर्म है एक अलग छेत्र है लेकिन आपकी जो प्रश्न में आया है कि कर्म हमारा व्यवहार ने निर्धारित करता है तो यह है भी कुछ परसेंट सही होता है लेकिन जिसे कुछ लोग होते हैं तो कर्म क्षेत्र का अलग रखते हैं और व्यवहार अलग बनाकर रखते हैं लेकिन दोनों का ही एक तालमेल बहुत ढंग से चलना चाहिए तालमेल के साथ कि जिससे कि एक सामान्य सस्ता बैठ जाए क्योंकि और कर्म का यहां अर्थ हो रहा है कि हम जो पूरे दिनचर्य रूप में हमेशा व्यतीत करते हैं कभी हमारे मित्रों में बैठ गए यह प्रफुल्लित होकर हमारे अलग ढंग से हम स्वच्छंद होकर कुछ भी मूड में अपना कहते सुनते हैं वो अलग चीज हो जाता है तो यह असर तो होता है कि कर्म से व्यवहार बनता है क्योंकि उनका क्षेत्र उसी दायरे में रहता है ज्यादातर संगठन और जब नए माहौल में जाते हैं तो उसके लिए थोड़ी सी अड़चन आती है क्योंकि हम ज्यादातर उसी टारगेट के हिसाब से बातचीत करते हैं क्योंकि जिसका ब्याज ज्यादा होता है वह यंत्र तहत प्रकट होता है तो जिस चीजों में जिस भावनाओं में जिस रूपरेखा में हम ज्यादा लिप्त होते हैं तो वही अक्सर सटीकता से प्रकट होता है लेकिन फिर भी जो समझदार कुशल लोग होते हैं वह लोग अपने घर वालों को अलग रूप से भी प्रदूषित करते हैं तो यह सब चीज जो पर्सनल कही गई है तो इसमें यही है कि इस सेल्फ नियोजित बातें हैं की कर्म मैं वैसा ही व्यवहार प्रकट हो जाता है कि अपनी सूझबूझ बनती है लेकिन मैं ऐसा मानना नहीं समझूंगा कि यह पर्टिकुलर एक सिद्धांत है तो उसकी योगिता पर डिपेंड करता है कि प्रशासन जो व्यक्ति हैं उनकी क्या उनका विकास ज्ञान का दायरा है सब चीज है इसलिए इसमें भी नेता आ सकती लेकिन पर्टिकुलर यह कोई सैद्धांतिक नहीं कहा जा सकता कि कारण यह हमारा व्यवहार निर्धारित करता है तो इसमें जो ऐसे भी लोग नजर आते जिनको बोलते हरफनमौला अलग इंसान वह भी है लेकिन वह हर जगह की विशेष रूप से अपने प्रदर्शन को जारी रखते हैं तो जैसे दिमाग की क्षमता है उसका विचरण आचरण है उसके साथ उसके हर्षल आशुतोष के मन के अंत करण की भूमिका पर डिपेंड करता है कि वह कैसा प्रदर्शन कर रहा है ना तो यह कहना चाहता हूं धन्यवाद समझिए

prashna hai kya hamare karam hai hamara vyavhar nirdharit karte hain waise toh yah saamaan baat hai karm hi vyavhar ka hota hai swaroop lekin phir bhi hum vyavhar ek alag maayne se jodte hain kyonki karm kshetra alag hota hai aur vyavhar kuch alag chetra mein chala jata hai toh yah hamari samajik nipunata ke upar aadharit hota hai ki hum kis dhang se vyavhar ka parichay de kyonki vyavhar se hi goodwill banta hai aage bhavishya ke andar toh yahan main is baat ko samajh raha hoon ki karm maan lijiye kuch aisa hota hai ki jo bahut hi kuch logo ko theek nahi lagta lekin vyavhar kushal hote hain vaah dusre samajik meljol ke andar gat toh karm vala kshetra hota hai toh bihar ekatmik si cheez hai ek apni sujhbujh hai usme apni ek alag samajhdari hai kadam apni jagah hota lekin jyadatar swabhav ban jata hai karm ki zyada hone par jyadatar hamare usi karm ke daayre mein paribhashayen utpann hoti hain toh isliye karm ke saath jab vyavhar hota hai vaah kabhi kabhi jhalak aata hai ki karmaveer is vyavhar ke andar jaahir ho raha hai lekin dono kshetra alag hai toh yah sab cheezen depend karta hai ki hamare dimag ke rack ke andar ek alag alag ki bhumika honi chahiye karm ka chitra jaise suppose hum kahin naukri aaj ghar grihasti koi bahar karya kar ko karyakram ko karke aa rahe hain bahar roop se jo karm hota hai uske baad hamara grah pravesh hota hai uske andar kuch alag sanrachanaen hoti toh wahan jo parivar ke log baithe rehte hain ki shasan eid mein baithate hain toh wahan hum karmon ke swaroop ko ha nahi le jaate hain ki wahan par se hamein wahi deal karna padta hai jo hamara prem vyavhar jo apne rishte hain jo naate lagte hain aur jo hamara kartavya dharm hota hai iske saath se hamar deal karte hain toh karm hai ek alag chetra hai lekin aapki jo prashna mein aaya hai ki karm hamara vyavhar ne nirdharit karta hai toh yah hai bhi kuch percent sahi hota hai lekin jise kuch log hote hain toh karm kshetra ka alag rakhte hain aur vyavhar alag banakar rakhte hain lekin dono ka hi ek talmel bahut dhang se chalna chahiye talmel ke saath ki jisse ki ek samanya sasta baith jaaye kyonki aur karm ka yahan arth ho raha hai ki hum jo poore dinacharya roop mein hamesha vyatit karte hain kabhi hamare mitron mein baith gaye yah prafullit hokar hamare alag dhang se hum swacchand hokar kuch bhi mood mein apna kehte sunte hain vo alag cheez ho jata hai toh yah asar toh hota hai ki karm se vyavhar banta hai kyonki unka kshetra usi daayre mein rehta hai jyadatar sangathan aur jab naye maahaul mein jaate hain toh uske liye thodi si adachan aati hai kyonki hum jyadatar usi target ke hisab se batchit karte hain kyonki jiska byaj zyada hota hai vaah yantra tahat prakat hota hai toh jis chijon mein jis bhavnao mein jis rooprekha mein hum zyada lipt hote hain toh wahi aksar satikata se prakat hota hai lekin phir bhi jo samajhdar kushal log hote hain vaah log apne ghar walon ko alag roop se bhi pradushit karte hain toh yah sab cheez jo personal kahi gayi hai toh isme yahi hai ki is self niyojit batein hain ki karm main waisa hi vyavhar prakat ho jata hai ki apni sujhbujh banti hai lekin main aisa manana nahi samjhunga ki yah particular ek siddhant hai toh uski yogita par depend karta hai ki prashasan jo vyakti hain unki kya unka vikas gyaan ka dayara hai sab cheez hai isliye isme bhi neta aa sakti lekin particular yah koi saiddhaantik nahi kaha ja sakta ki karan yah hamara vyavhar nirdharit karta hai toh isme jo aise bhi log nazar aate jinako bolte harafanamaula alag insaan vaah bhi hai lekin vaah har jagah ki vishesh roop se apne pradarshan ko jaari rakhte hain toh jaise dimag ki kshamta hai uska vichran aacharan hai uske saath uske harshal ashutosh ke man ke ant karan ki bhumika par depend karta hai ki vaah kaisa pradarshan kar raha hai na toh yah kehna chahta hoon dhanyavad samjhiye

प्रश्न है क्या हमारे करम है हमारा व्यवहार निर्धारित करते हैं वैसे तो यह सामान बात है कर्

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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सवाल है कि क्या हमारे कर्म ही हमारा विवाह निकाल करते हैं जी हां हमारे कर्म हमारा व्यवहार कर्म होता है हमारी सोच के कारण जो हमारी सोच है जो हमारे विचार अगर हमारी पॉजिटिव थिंकिंग है हम अगर पॉजिटिव सोचते हैं दूसरों के लिए अपने लिए अपने परिवार की अपने समाज अपने देश के लिए तो हम ऐसे ही कर्म करेंगे कि हमारा खुद का परिवार हमारे रिश्तेदार हमारा समाज और पॉजिटिव एटीट्यूड हमारे द्वारा किया जाता है दूसरों द्वारा किया गया अब हमने पॉजिटिव भेजने का करम अपना किया है तो व्यवहार हम अपेक्षा करेंगे कि दूसरों से ऐसा ही हमें वापस मिले और हम जैसा कर रहे हैं ऐसा हमको इंसानियत एक सोच है लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है कि हमारी सोच अच्छी होती है हमारे कर्म भी अच्छे होते हैं लेकिन व्यवहार में दूसरे लोग थोड़ा 19 जून को माफ करते अपने अच्छे कर्म अपनी सोच के अनुसार अच्छे ही करनी चाहिए कोई थोड़ा कम व्यवहार करें हमको एक व्यक्ति गलत तरीके से करें या व्यवहार थोड़ा कम तब भी हमें अपना मन बड़ा रखकर और अपने कर्म करते रहना चाहिए बाकी तो दुनिया की रीत है कि जहां पर फल के पेड़ होते हैं वह उस पर ही हमेशा ज्यादा पत्थर मारे जाते हैं ताकि फल की अपेक्षा होती है कि फल हमें ज्यादा मिले इसलिए हमारी सोच अगर पॉजिटिव है और हमारे परम अपने विचार के अनुसार काम करते और हमें थोड़ा बहुत अगर भोगना ही पड़ता है गलत तब भी हमें अपने व्यवहार विचार और कर्म सदैव अच्छे करने चाहिए यही सिद्धांत आगे चलकर हमें और भी आगे ले जाता है बहुत-बहुत शुभकामनाएं

sawaal hai ki kya hamare karm hi hamara vivah nikaal karte hain ji haan hamare karm hamara vyavhar karm hota hai hamari soch ke karan jo hamari soch hai jo hamare vichar agar hamari positive thinking hai hum agar positive sochte hain dusro ke liye apne liye apne parivar ki apne samaj apne desh ke liye toh hum aise hi karm karenge ki hamara khud ka parivar hamare rishtedar hamara samaj aur positive attitude hamare dwara kiya jata hai dusro dwara kiya gaya ab humne positive bhejne ka karam apna kiya hai toh vyavhar hum apeksha karenge ki dusro se aisa hi hamein wapas mile aur hum jaisa kar rahe hain aisa hamko insaniyat ek soch hai lekin kabhi kabhi aisa hota hai ki hamari soch achi hoti hai hamare karm bhi acche hote hain lekin vyavhar mein dusre log thoda 19 june ko maaf karte apne acche karm apni soch ke anusaar acche hi karni chahiye koi thoda kam vyavhar kare hamko ek vyakti galat tarike se kare ya vyavhar thoda kam tab bhi hamein apna man bada rakhakar aur apne karm karte rehna chahiye baki toh duniya ki reet hai ki jaha par fal ke ped hote hain vaah us par hi hamesha zyada patthar maare jaate hain taki fal ki apeksha hoti hai ki fal hamein zyada mile isliye hamari soch agar positive hai aur hamare param apne vichar ke anusaar kaam karte aur hamein thoda bahut agar bhogna hi padta hai galat tab bhi hamein apne vyavhar vichar aur karm sadaiv acche karne chahiye yahi siddhant aage chalkar hamein aur bhi aage le jata hai bahut bahut subhkamnaayain

सवाल है कि क्या हमारे कर्म ही हमारा विवाह निकाल करते हैं जी हां हमारे कर्म हमारा व्यवहार क

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Ghanshyamvan

मंदिर सेवा

0:24
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जैसे हम कर्म करते हैं उन कर्मों का फल हमारे व्यापार पर बहुत प्रभाव पड़ता है यानी के हमारे कर्मों से ही हमारे व्यवहार का पता चलता है कि हम किसके प्रति क्या व्यवहार में

jaise hum karm karte hain un karmon ka fal hamare vyapar par bahut prabhav padta hai yani ke hamare karmon se hi hamare vyavhar ka pata chalta hai ki hum kiske prati kya vyavhar mein

जैसे हम कर्म करते हैं उन कर्मों का फल हमारे व्यापार पर बहुत प्रभाव पड़ता है यानी के हमारे

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यह हमारी कमी हमारी आपके व्यवहार का निर्धारण करते हैं अगर आप अच्छे कार करते हैं तो आप अच्छे व्यवहारिक बनेंगे और आपका नाम होगा अगर आप बुरे काम करते हैं तो आपको भी हार्दिक ना कह कर के आप को घमंडी प्रवृत्ति के लोग कहेंगे आपसे लोग बात नहीं करेंगे अगर आप आ रहे हैं तो घुमा देंगे आपका कर्म ही आपके परिवार को निर्धारित करता है आप अच्छे कर्म करें ना कि बुरे कर्म करें ताकि आपका नाम रोशन हो आपके परिवार का नाम रोशन हो

yah hamari kami hamari aapke vyavhar ka nirdharan karte hain agar aap acche car karte hain toh aap acche vyavaharik banenge aur aapka naam hoga agar aap bure kaam karte hain toh aapko bhi hardik na keh kar ke aap ko ghamandi pravritti ke log kahenge aapse log baat nahi karenge agar aap aa rahe hain toh ghuma denge aapka karm hi aapke parivar ko nirdharit karta hai aap acche karm kare na ki bure karm kare taki aapka naam roshan ho aapke parivar ka naam roshan ho

यह हमारी कमी हमारी आपके व्यवहार का निर्धारण करते हैं अगर आप अच्छे कार करते हैं तो आप अच्छे

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656 Mangal Singh Thakur

Teacher/Operator

1:01
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बिल्कुल आपने बहुत अच्छा क्वेश्चन किया है आप जानते हैं त्योहार अरे आप जब मंदिर में पूजा करते हैं रोज तो सबको ईश्वर ही समझोगे ना कि मंदिर बस यही ईश्वर समझोगे आप रोज मेला उठाते हो तो आपके दिल दिमाग मेला में ही होगा कि मंदिर में होगा मेरा कहने का तात्पर्य नहीं है लेकिन आप जो क्वेश्चन की हो और सुधारो तारा जो जैसा करता है उसके विचार वैसे होते हैं उसके व्यवहार वैसे ही होंगे इस बात पर जा रहा हूं मैं कि जिसको आपने तो मत कीजिए मेरा जवाब देने का तरीका दूसरा होता है मैं कटु शब्दों में ही नफरत मूर्ति था धन्यवाद

bilkul aapne bahut accha question kiya hai aap jante hain tyohar are aap jab mandir mein puja karte hain roj toh sabko ishwar hi samjhoge na ki mandir bus yahi ishwar samjhoge aap roj mela uthate ho toh aapke dil dimag mela mein hi hoga ki mandir mein hoga mera kehne ka tatparya nahi hai lekin aap jo question ki ho aur sudharo tara jo jaisa karta hai uske vichar waise hote hain uske vyavhar waise hi honge is baat par ja raha hoon main ki jisko aapne toh mat kijiye mera jawab dene ka tarika doosra hota hai katu shabdon mein hi nafrat murti tha dhanyavad

बिल्कुल आपने बहुत अच्छा क्वेश्चन किया है आप जानते हैं त्योहार अरे आप जब मंदिर में पूजा करत

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munmun

Volunteer

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अजी हां हमारा कर्म ही जो है हमारा व्यवहार में था कि जैसे आपके करम आप जैसे लोग आपको जज करेंगे वैसे आपका व्यवहार होगा

aji haan hamara karm hi jo hai hamara vyavhar mein tha ki jaise aapke karam aap jaise log aapko judge karenge waise aapka vyavhar hoga

अजी हां हमारा कर्म ही जो है हमारा व्यवहार में था कि जैसे आपके करम आप जैसे लोग आपको जज करें

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