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Dr. Mahesh Mohan Jha

Asst. Professor,Astrologer,Author

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आपका प्रेसिडेंट गोरिया वीडियो जो चन चन है उस चंचल मुझको एक बिंदु पर केंद्रित करने की क्रिया ही ध्यान है

aapka president goriya video jo chann chann hai us chanchal mujhko ek bindu par kendrit karne ki kriya hi dhyan hai

आपका प्रेसिडेंट गोरिया वीडियो जो चन चन है उस चंचल मुझको एक बिंदु पर केंद्रित करने की क्

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Sshikhar (Shankar Singh )

Spiritual Life Coach

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपने पूछा है ध्यान क्या है ध्यान है मन की अनुपस्थिति जितनी भी समस्याएं हैं मन की समस्याएं मन से उठी हुई समस्याएं हैं पतंजलि ने योग सूत्र का जो दूसरा सूत्र दिया है वह सूत्र है चित्त वृत्ति निरोध योगिनी जो भी चित्र की विकृतियां हैं जो भी उसकी वृत्तियां हैं उस कोशिश कर देना उसको रोक देना उसे रोकने के बाद जो अवस्था शेष रह जाती है वह युवक व्यवस्था है अभियोग होता क्या है यू का मतलब ऐसा नहीं कि आत्मा से परमात्मा का मिलन योग एक अवस्था है जो मन रहित अवस्था है जब मन नहीं है तो योगी अवस्था है और युग की अवस्था ही ध्यान की अवस्था है मैं बहुत सारे लोगों को सुनता हूं जो इसे बहुत ही कॉम्प्लिकेटेड ढंग से पेश करते हैं इस को परिभाषित करते हैं उनका मानना है कि ध्यान करने से सुख मिलता है ध्यान करने से यह फल की प्राप्ति होती है यह सब इच्छाएं मन के तल की विकृतियां है तो ध्यान करने अपने आप से ही जिस चीज की अनुभूति होती है उस अनुभूति का नाम है आनंद और उमंग की अवस्था तो ध्यान क्या है खोजपूर्ण जीना सजगता से जीना हम ज्यादातर खोए खोए सोए सोए रहते हैं विचारों में हमारा पूरा का पूरा तादाद जो होने का ढंग है जो जीने का ढंग है बेहोशी का ढंग है बेहोशी मतलब मन के तल में होना एक चीज याद रखें मन आपकी आईडेंटिटी नहीं है यह आपकी पहचान नहीं है मन बाहर से शिक्षित किया हुआ ट्रेन किया हुआ प्रोग्राम किया हुआ फेनोमेना है शुरू से आप जो भी चीजें बाहर से सीखते हैं चाहे वह आप को स्कूल से सिखाया गया हो बाप के घर से परिवार से समाज से देश से यह सब चीजें बाहर से सिखाइए इन सिखाई हुई चीजों के लगातार दोहराने से अभ्यास से एक हमारे भीतर एक सिस्टम की क्रिएशन होती है उसी का नाम है मन मन का मतलब एक स्वभाव एक व्यवहार आपका आप की एक आदत और जितनी भी समस्याएं हैं समझो आपने कभी दो-तीन साल पहले या कभी बचपन में कोई गलत अनुभव किया कुछ ऐसी घटनाएं देखी या कुछ ऐसी स्थितियां देखी जो पेनफुल कि आपने नोटिस किया होगा कि वह कंसीक्वेंस वह समस्या या वह यादास आपको हमेशा चीज रखी पूरी जिंदगी भर आपको वह अनुभव याद रहता है और उससे बाहर निकल पाना बहुत मुश्किल होता है ऐसे ही बहुत सारे पेनफुल एक्सपीरियंस एस है जिसको हम जान पाते हैं कुछ ऐसे हैं जो अंदर ही पैसिवली हमें चेंज करते हैं जो अनचाहे में हमें तकलीफ देते हैं हमें दुख देते हैं समस्याएं देते हैं इश्यूज देते हैं जिसे मूड स्विंग्स कहते हैं मूड डिसऑर्डर कहते हैं इन समस्याओं से क्योंकि यह सारी की सारी समस्याएं मन की समस्याएं हैं तो एक ही उपाय है जो सभी संतो ने एक ही बात पर सभी राजी हुए हैं हर परंपरा के जितने भी संत हैं कि मन से मुक्त हो जाएं तो मन से मुक्ति ध्यान है अब मन से मुक्त कैसे होंगे इसके लिए आपका जो नया तादात में है जैसे मन के साथ हमारा एक तादात में है हमारी एक आदत है कि मन को लेकर चलने की ऐसे ही इसी के पैनल एक नई आदत का निर्माण करना होगा एक नई आदत बिल्ड करनी होगी नए पैटर्न बनाने होंगे वह पैटर्न सुनके हॉर्स पूर्ण और सजगता से जीना तो ध्यान के तीन कदम हो सकते हैं पहला शांत हो जाएं विश्राम की अवस्था कोई कलह नहीं कोई संदेश नहीं सब कुछ छोड़ दे मन कनफ्लिक्टेड स्टेट है तो उसको छोड़ कर आप इसी पल निर्णय लें कि आप सब छोड़ दें एकदम शांत हो जाए दूसरा कदम है कि शांति से जो भी विचार आ रहे हैं उसको देखें देखने का प्रयास विटनेसिंग जैसे आप एक ट्रैफिक रोड के बाहर खड़े हो और सड़क पर चलने वाले ट्रैफिक को देखते ही बिल्कुल ऐसे ही विचारों से एक दूरी बना लें आप देखने वाले हो जाएं धीरे धीरे धीरे आप और आपके विचारों में एक दूरी आने लगेगी तो आपका तादात में कम होना शुरू हो जाएगा और जो तीसरा कदम है वह है सजगता से भी ना होश पूंजी ना जो भी घटना घट रही है उसमें फोर्स पूर्ण हो जाए अपना होश रखें बिल्कुल ऐसे ही समझे जैसे मैं रसिक को देख रहा हूं यानी कि मैं विचारों को देखने वाला हूं मैं विचार नहीं हूं मैं विचारों को देख पहली अवस्था विश्राम की अवस्था कोई संघर्ष नहीं कोई कनफ्लिक्ट नहीं हुई कल है नहीं एकदम शांत शरीर के तल पर शांति मन के तल पर शांति और भावनाओं के तल पर शांति ऐसी जगह शांतिपूर्ण चुनने जहां आप इन तीनों तलों पर शांत हो सके विश्राम कर पाए ऐसी एक मुजराई अवस्था लगा ले दूसरा एकदम शांत और शिथिल हो जाएं और तीसरा सजगता से जो भी विचार आ रहे हैं चाहे पॉजिटिव हो चाहे नेगेटिव हर तरह के विचार समस्याएं तो ध्यान कोई पॉजिटिव थिंकिंग नहीं है ध्यान का मतलब यह नहीं कि आप अच्छा सोचें ध्यान है वर्तमान का छोटा सा फल और उसमें जीने की कला और जब भी आप वर्तमान में होते हैं मन से मुक्त हो जाते हैं चित्र की जितनी भी पिक्चर या है आप उनसे मुक्त हो जाते हैं और यही मुक्ति असली मुक्ति है यही आजादी असली आजादी तो जो कुछ भी आप काम करें वह उस पूर्वक करें आप पाएंगे कि ध्यान अवतरित होने लगा और आपका जीवन आनंद से भरने लगा बहुत सारी शुभकामनाएं

aapne poocha hai dhyan kya hai dhyan hai man ki anupsthiti jitni bhi samasyaen hain man ki samasyaen man se uthi hui samasyaen hain patanjali ne yog sutra ka jo doosra sutra diya hai vaah sutra hai chitt vriti nirodh yogini jo bhi chitra ki vikritiyan hain jo bhi uski vrittiyan hain us koshish kar dena usko rok dena use rokne ke baad jo avastha shesh reh jaati hai vaah yuvak vyavastha hai abhiyog hota kya hai you ka matlab aisa nahi ki aatma se paramatma ka milan yog ek avastha hai jo man rahit avastha hai jab man nahi hai toh yogi avastha hai aur yug ki avastha hi dhyan ki avastha hai main bahut saare logo ko sunta hoon jo ise bahut hi complicated dhang se pesh karte hain is ko paribhashit karte hain unka manana hai ki dhyan karne se sukh milta hai dhyan karne se yah fal ki prapti hoti hai yah sab ichhaen man ke tal ki vikritiyan hai toh dhyan karne apne aap se hi jis cheez ki anubhuti hoti hai us anubhuti ka naam hai anand aur umang ki avastha toh dhyan kya hai khojpurn jeena sajgata se jeena hum jyadatar khoe khoe soye soye rehte hain vicharon me hamara pura ka pura tadad jo hone ka dhang hai jo jeene ka dhang hai behoshi ka dhang hai behoshi matlab man ke tal me hona ek cheez yaad rakhen man aapki identity nahi hai yah aapki pehchaan nahi hai man bahar se shikshit kiya hua train kiya hua program kiya hua phenomena hai shuru se aap jo bhi cheezen bahar se sikhate hain chahen vaah aap ko school se sikhaya gaya ho baap ke ghar se parivar se samaj se desh se yah sab cheezen bahar se sikhaiye in sikhai hui chijon ke lagatar dohrane se abhyas se ek hamare bheetar ek system ki creation hoti hai usi ka naam hai man man ka matlab ek swabhav ek vyavhar aapka aap ki ek aadat aur jitni bhi samasyaen hain samjho aapne kabhi do teen saal pehle ya kabhi bachpan me koi galat anubhav kiya kuch aisi ghatnaye dekhi ya kuch aisi sthitiyan dekhi jo painful ki aapne notice kiya hoga ki vaah kansikwens vaah samasya ya vaah yadas aapko hamesha cheez rakhi puri zindagi bhar aapko vaah anubhav yaad rehta hai aur usse bahar nikal paana bahut mushkil hota hai aise hi bahut saare painful experience S hai jisko hum jaan paate hain kuch aise hain jo andar hi paisivali hamein change karte hain jo anchahe me hamein takleef dete hain hamein dukh dete hain samasyaen dete hain issues dete hain jise mood swings kehte hain mood disorder kehte hain in samasyaon se kyonki yah saari ki saari samasyaen man ki samasyaen hain toh ek hi upay hai jo sabhi santo ne ek hi baat par sabhi raji hue hain har parampara ke jitne bhi sant hain ki man se mukt ho jayen toh man se mukti dhyan hai ab man se mukt kaise honge iske liye aapka jo naya tadat me hai jaise man ke saath hamara ek tadat me hai hamari ek aadat hai ki man ko lekar chalne ki aise hi isi ke panel ek nayi aadat ka nirmaan karna hoga ek nayi aadat build karni hogi naye pattern banane honge vaah pattern sunake horse purn aur sajgata se jeena toh dhyan ke teen kadam ho sakte hain pehla shaant ho jayen vishram ki avastha koi kalah nahi koi sandesh nahi sab kuch chhod de man state hai toh usko chhod kar aap isi pal nirnay le ki aap sab chhod de ekdam shaant ho jaaye doosra kadam hai ki shanti se jo bhi vichar aa rahe hain usko dekhen dekhne ka prayas vitnesingh jaise aap ek traffic road ke bahar khade ho aur sadak par chalne waale traffic ko dekhte hi bilkul aise hi vicharon se ek doori bana le aap dekhne waale ho jayen dhire dhire dhire aap aur aapke vicharon me ek doori aane lagegi toh aapka tadat me kam hona shuru ho jaega aur jo teesra kadam hai vaah hai sajgata se bhi na hosh punji na jo bhi ghatna ghat rahi hai usme force purn ho jaaye apna hosh rakhen bilkul aise hi samjhe jaise main rasik ko dekh raha hoon yani ki main vicharon ko dekhne vala hoon main vichar nahi hoon main vicharon ko dekh pehli avastha vishram ki avastha koi sangharsh nahi koi kanaflikt nahi hui kal hai nahi ekdam shaant sharir ke tal par shanti man ke tal par shanti aur bhavnao ke tal par shanti aisi jagah shantipurna chunane jaha aap in tatvo talon par shaant ho sake vishram kar paye aisi ek mujrai avastha laga le doosra ekdam shaant aur shithil ho jayen aur teesra sajgata se jo bhi vichar aa rahe hain chahen positive ho chahen Negative har tarah ke vichar samasyaen toh dhyan koi positive thinking nahi hai dhyan ka matlab yah nahi ki aap accha sochen dhyan hai vartaman ka chota sa fal aur usme jeene ki kala aur jab bhi aap vartaman me hote hain man se mukt ho jaate hain chitra ki jitni bhi picture ya hai aap unse mukt ho jaate hain aur yahi mukti asli mukti hai yahi azadi asli azadi toh jo kuch bhi aap kaam kare vaah us purvak kare aap payenge ki dhyan avtarit hone laga aur aapka jeevan anand se bharne laga bahut saari subhkamnaayain

आपने पूछा है ध्यान क्या है ध्यान है मन की अनुपस्थिति जितनी भी समस्याएं हैं मन की समस्याएं

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मित्रों नमस्कार मैं बैठी दिनेश पटेल आपके सोच प्रस्तुत हूं ध्यान क्या है यह प्रश्न दिया गया है ध्यान एक ऐसी प्रक्रिया है जिसने मन वाणी और शरीफ तीनों को विराम देना पड़ता है मन में जो विचार हैं उनको निकाल कर के और मौन साधना करके शरीर को नियंत्रित करके एक आसन में बैठ कर के किसी बिंदु पर या जो भी आपके इष्ट हैं उस पर ध्यान लगाया जाता है और उसके भाव प्रार्थना की जाती है कि हमारे जीवन में अच्छे विचार आने हमारे मन में अच्छे विचार हैं हमारे जून में अच्छे कर्म फल पढ़ें और ईश्वर हमें को शक्ति दे जिससे हमारे अंदर आत्मक बढ़े मनोबल बढ़े और मन को हम अपने अनुकूल बना सके जो हमारी कुछ इस टाइम है जो उस तरीके की बुरी इच्छाएं हैं उनका संबंध हो और अच्छाइयों की तरफ हमारा मन लगे इस प्रकार से ध्यान प्रक्रिया मन को एकाग्र करके की जाती है ध्यान समस्त इंद्रियों को अपने बस में करके उस परमपिता परमेश्वर में या जिनको भी इस्तेमाल थे उसके ध्यान लगाना हिज है ध्यान कहलाता है धन्यवाद

mitron namaskar main baithi dinesh patel aapke soch prastut hoon dhyan kya hai yah prashna diya gaya hai dhyan ek aisi prakriya hai jisne man vani aur sharif tatvo ko viraam dena padta hai man me jo vichar hain unko nikaal kar ke aur maun sadhna karke sharir ko niyantrit karke ek aasan me baith kar ke kisi bindu par ya jo bhi aapke isht hain us par dhyan lagaya jata hai aur uske bhav prarthna ki jaati hai ki hamare jeevan me acche vichar aane hamare man me acche vichar hain hamare june me acche karm fal padhen aur ishwar hamein ko shakti de jisse hamare andar aatmkatha badhe manobal badhe aur man ko hum apne anukul bana sake jo hamari kuch is time hai jo us tarike ki buri ichhaen hain unka sambandh ho aur acchhaiyon ki taraf hamara man lage is prakar se dhyan prakriya man ko ekagra karke ki jaati hai dhyan samast indriyon ko apne bus me karke us parampita parmeshwar me ya jinako bhi istemal the uske dhyan lagana his hai dhyan kehlata hai dhanyavad

मित्रों नमस्कार मैं बैठी दिनेश पटेल आपके सोच प्रस्तुत हूं ध्यान क्या है यह प्रश्न दिया गया

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Spiritual Guru Shri Pradeep Ji

Meditation Teacher, Spiritual Guide

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ध्यान क्या है ध्यान एक ऐसी शक्ति है जिसके द्वारा हम अपने आप को और अपनी सोच को नियंत्रित करते हैं यह एक तरह की प्रक्रिया है जिसके द्वारा हम अपने दिमाग को प्रशिक्षित करते हैं कि इस तरह की सोच हम चाहते हैं उसे की सूची हमारी हो हमारी सोच किसी बाहरी वातावरण किसी बाहरी कार्य से प्रेरित नहीं हो हम वही सोचे हैं हमारी सोच का हमारे ऊपर प्रभाव वैसा ही हो जैसा कि हम चाहते हैं जैसे हम कोई भी चीज बाहर देखते हैं कोई भी अच्छी चीज बाहर देखते हैं तो उसका असर हमारे ऊपर बहुत ही अच्छा होता है हमें उससे बहुत खुशी मिलती है लेकिन यदि हम कोई चीज गलत देखे हैं तो उसका असर हमारे ऊपर नेगेटिव होता है गलत होता है और इसी चीजों की वजह से जो भी असर हमारी पर होता है चाहे वह अच्छा हो खराब हो उसी अच्छे खराब होने की वजह से हमें या तो खुशी मिलती है यह हमें दुख होता है खुशी और दुख है यह बहुत कुछ हमारी सोचने की प्रक्रिया पर निर्भर करता है हमें परिवार बहुत ज्यादा दुख भरी मिलते हैं जैसे हमारी कोई बहुत दिन महत्वपूर्ण कोई बहुत ही अमूल चीज का खो जाना या हमने कोई चीज बहुत मेहनत की हो उस चीज को प्राप्त करने के लिए लेकिन जब बहुत प्राप्त नहीं होती है तो हम बहुत दुखी हो जाते हैं और जब हम कुछ अच्छा करते हैं तो बहुत खुशी मिलती है इसका यदि हमारे दिमाग के ऊपर हमारे ऊपर कोई प्रभाव नहीं हो यदि हम दुख में भी सुख में भी यदि हम एक समान रहे तो निश्चित ही यह किसी स्वतंत्रता से कम नहीं है यह किसी फ्रीडम से कम नहीं है यदि आप हर समय एक समान यदि आप हर समय आनंद में स्थिति में रहे और आपका किसी दो किसी सुख से आपकी कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़े तो मैं कहूंगा कि आपने अपने जीवन में वह स्वतंत्रता गोल्डन आपने प्राप्त कर ली है जिसकी आप पूरा जीवन प्रयास करते हैं और आपका हर प्रतिक्षण आपका जो प्रयास रहता है जीवन में खुशी प्राप्त करने का आनंद प्राप्त होने का उस स्थिति को आप इस ध्यान के द्वारा आप प्राप्त कर सकते हैं जब आप ध्यान करते हैं तो आपका मन बहुत ही शांत हो जाता है आपका मन इस तरह से प्रिंट हो जाता है कि आप हर चीज को एक सच्चे रूप में देखना शुरु कर देते हैं एक बार आप किसी भी चीज की सही नेचर को उसके सही रुको आप एक बार पहचान ना उसको एक बार जाना है आप शुरू कर देते हैं तो फिर आपका जो आपकी जो गलत सोच है उस चीज के बारे में वह दूर हो जाती है और उसके बाद फिर आपका जो उसके प्रति आपकी जो खुशी प्राप्त करने की जो आपकी इच्छा रहती है कि आपको उसे खुशी मिलेगी आपको उससे कुछ फायदा मिलेगा उसकी सोच आपकी बदल जाती है सोच आपकी सही हो जाती है रात को वह चीज प्राप्त हो अथवा नहीं हो खुशी मिले या नहीं मिले आप हमेशा एक समान एक रूप में आप रहते हैं आपको कोई दुख नहीं होता है आप हमेशा ही खुशी और आनंद में रहना शुरू कर देते हैं इस प्रकार की स्थिति को प्राप्त करना ही ध्यान है इस प्रकार की स्वतंत्रता किस प्रकार की फ्रीडम को प्राप्त करने का जो मार्क है वही मार्ग ध्यान के द्वारा प्राप्त होता है ध्यान एक साधना है जिसको आप को नियमित रूप से आपको करना है और कोशिश यह करें इसमें किसी प्रकार का कोई ज्ञात नहीं हो जब आप ध्यान लगातार करते रहते हैं तो शुरू में आपको बहुत दिक्कतें आती हैं क्योंकि आपको माइंड स्ट्रेस है आपका दिमाग इससे आपको ट्रेन है क्या आपको हमेशा हर समय चलना है दौड़ लगाना है वह करना है भागना है उसमें आपको प्राप्त करनी है लेकिन ध्यान में क्या होता है ध्यान में आपको एक जगह शान बैठना होता है एक चीज के ऊपर आपको फोकस करके आपको अपना ध्यान आप पर सदा फोकस करना होता है और सुनने यह कन्नस्सा डिफिकल्ट रहता है क्योंकि आपने कि वाले कभी किया नहीं है लेकिन आप आस्था स्ट्रेस का शुरुआत करें 2 मिनट में 5 मिनट में 10 मिनट धीरे बढ़ाते जाएं और बढ़ाते बढ़ाते फिर आप इसमें ऐसा आएगा कि आप 15:20 मिनट 30 मिनट आप आराम से हम कर पायेंगे और जैसे-जैसे आप का ध्यान बहुत ही प्रकार होता जाएगा बहुत ही लंबा होता जायेगा उतनी ही ज्यादा आपकी मां ने स्थिति उसने अच्छा आपकी जो सोचने की प्रक्रिया है आपका जो दिमाग पर कंट्रोल है नियंत्रण है और अधिक बढ़ता जाएगा और फिर आप देखेंगे आपके जीवन में असीम शांति सुख और आनंद का प्रवाह होना शुरू हो जाएगा इसको आप नियमित रूप से करें दिल्ली करें और फिर आप देखेंगे इसके जो फायदे हैं वह बहुमूल्य हैं इसके फायदे जो हैं इसके बारे में आप जवाब ध्यान करना शुरू करते हैं तो आप ध्यान के बारे में आप इस के अनुभव के बारे में इसके फायदे के बारे में बिल्कुल नहीं सोचा यह आप सोच लें कि आपकी जो दिल्ली की आप की जो प्रक्रिया है दिल्ली की आपकी जो दिनचर्या है उसमें आपको कम से कम 30 मिनट 25 मिनट यह सारी सूचना भी आप हमें इसमें आप दे सकते हैं कम से कम दिन में दोबारा आवेश में अपना समय दें तो बात को आप अपने नियमित रूप से करें और फिर आप देखेंगे इसका जो फायदा होगा इसका जो एडवांटेज होगा वह बहुत ही ज्यादा होगा और आपका जीवन शैली से अधिक और अधिक होता जाएगा बाबा धन्यवाद आपकी समय के लिए प्रदीप जी की तरफ से आपको प्रणाम

dhyan kya hai dhyan ek aisi shakti hai jiske dwara hum apne aap ko aur apni soch ko niyantrit karte hain yah ek tarah ki prakriya hai jiske dwara hum apne dimag ko prashikshit karte hain ki is tarah ki soch hum chahte hain use ki suchi hamari ho hamari soch kisi bahri vatavaran kisi bahri karya se prerit nahi ho hum wahi soche hain hamari soch ka hamare upar prabhav waisa hi ho jaisa ki hum chahte hain jaise hum koi bhi cheez bahar dekhte hain koi bhi achi cheez bahar dekhte hain toh uska asar hamare upar bahut hi accha hota hai hamein usse bahut khushi milti hai lekin yadi hum koi cheez galat dekhe hain toh uska asar hamare upar Negative hota hai galat hota hai aur isi chijon ki wajah se jo bhi asar hamari par hota hai chahen vaah accha ho kharab ho usi acche kharab hone ki wajah se hamein ya toh khushi milti hai yah hamein dukh hota hai khushi aur dukh hai yah bahut kuch hamari sochne ki prakriya par nirbhar karta hai hamein parivar bahut zyada dukh bhari milte hain jaise hamari koi bahut din mahatvapurna koi bahut hi amul cheez ka kho jana ya humne koi cheez bahut mehnat ki ho us cheez ko prapt karne ke liye lekin jab bahut prapt nahi hoti hai toh hum bahut dukhi ho jaate hain aur jab hum kuch accha karte hain toh bahut khushi milti hai iska yadi hamare dimag ke upar hamare upar koi prabhav nahi ho yadi hum dukh mein bhi sukh mein bhi yadi hum ek saman rahe toh nishchit hi yah kisi swatantrata se kam nahi hai yah kisi freedom se kam nahi hai yadi aap har samay ek saman yadi aap har samay anand mein sthiti mein rahe aur aapka kisi do kisi sukh se aapki koi dushprabhav nahi pade toh main kahunga ki aapne apne jeevan mein vaah swatantrata golden aapne prapt kar li hai jiski aap pura jeevan prayas karte hain aur aapka har pratikshan aapka jo prayas rehta hai jeevan mein khushi prapt karne ka anand prapt hone ka us sthiti ko aap is dhyan ke dwara aap prapt kar sakte hain jab aap dhyan karte hain toh aapka man bahut hi shaant ho jata hai aapka man is tarah se print ho jata hai ki aap har cheez ko ek sacche roop mein dekhna shuru kar dete hain ek baar aap kisi bhi cheez ki sahi nature ko uske sahi ruko aap ek baar pehchaan na usko ek baar jana hai aap shuru kar dete hain toh phir aapka jo aapki jo galat soch hai us cheez ke bare mein vaah dur ho jaati hai aur uske baad phir aapka jo uske prati aapki jo khushi prapt karne ki jo aapki iccha rehti hai ki aapko use khushi milegi aapko usse kuch fayda milega uski soch aapki badal jaati hai soch aapki sahi ho jaati hai raat ko vaah cheez prapt ho athva nahi ho khushi mile ya nahi mile aap hamesha ek saman ek roop mein aap rehte hain aapko koi dukh nahi hota hai aap hamesha hi khushi aur anand mein rehna shuru kar dete hain is prakar ki sthiti ko prapt karna hi dhyan hai is prakar ki swatantrata kis prakar ki freedom ko prapt karne ka jo mark hai wahi marg dhyan ke dwara prapt hota hai dhyan ek sadhna hai jisko aap ko niyamit roop se aapko karna hai aur koshish yah kare isme kisi prakar ka koi gyaat nahi ho jab aap dhyan lagatar karte rehte hain toh shuru mein aapko bahut dikkaten aati hain kyonki aapko mind stress hai aapka dimag isse aapko train hai kya aapko hamesha har samay chalna hai daudh lagana hai vaah karna hai bhaagna hai usme aapko prapt karni hai lekin dhyan mein kya hota hai dhyan mein aapko ek jagah shan baithana hota hai ek cheez ke upar aapko focus karke aapko apna dhyan aap par sada focus karna hota hai aur sunne yah kannassa difficult rehta hai kyonki aapne ki waale kabhi kiya nahi hai lekin aap astha stress ka shuruat kare 2 minute mein 5 minute mein 10 minute dhire badhate jaye aur badhate badhate phir aap isme aisa aayega ki aap 15 20 minute 30 minute aap aaram se hum kar payenge aur jaise jaise aap ka dhyan bahut hi prakar hota jaega bahut hi lamba hota jayega utani hi zyada aapki maa ne sthiti usne accha aapki jo sochne ki prakriya hai aapka jo dimag par control hai niyantran hai aur adhik badhta jaega aur phir aap dekhenge aapke jeevan mein asim shanti sukh aur anand ka pravah hona shuru ho jaega isko aap niyamit roop se kare delhi kare aur phir aap dekhenge iske jo fayde vaah bahumulya hain iske fayde jo hain iske bare mein aap jawab dhyan karna shuru karte hain toh aap dhyan ke bare mein aap is ke anubhav ke bare mein iske fayde ke bare mein bilkul nahi socha yah aap soch le ki aapki jo delhi ki aap ki jo prakriya hai delhi ki aapki jo dincharya hai usme aapko kam se kam 30 minute 25 minute yah saree soochna bhi aap hamein isme aap de sakte hain kam se kam din mein dobara aavesh mein apna samay de toh baat ko aap apne niyamit roop se kare aur phir aap dekhenge iska jo fayda hoga iska jo advantage hoga vaah bahut hi zyada hoga aur aapka jeevan shaili se adhik aur adhik hota jaega baba dhanyavad aapki samay ke liye pradeep ji ki taraf se aapko pranam

ध्यान क्या है ध्यान एक ऐसी शक्ति है जिसके द्वारा हम अपने आप को और अपनी सोच को नियंत्रित कर

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Anil Kumar Tiwari

Yoga, Meditation & Astrologer

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Girijakant Singh

Founder/ President Yog Bharati Foundation Trust

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आपका प्रश्न है ध्यान क्या है देखिए अध्यान एक योग अष्टांग योग का एक अंग है अष्टांग योग में आठ अंग माने गए हैं यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार ध्यान धारणा और समाधि ध्यान जो है अष्टांग योग में एक अंग है जो हम योग साधना करते हैं तो हम मेडिटेशन करते हैं और मेडिटेशन करने से हमें मानसिक शांति मिलती है मानसिक ऊर्जा मिलती है हम तनाव और अवसाद से बचे रहते हैं और जब हम मिट्टी शुरू करते हैं करने के लिए हम अहम् मेडिटेशन तभी करें तो योगा योगासनों के और प्राणायाम के अभ्यास के बाद ही करें ताकि हमारा ध्यान जल्दी से दो सके और जब एवं मेडिटेशन करें इसके लिए हम अपने शरीर के किसी अंग का ध्यान कर मेडिटेशन कर सकते हैं जैसे नाड़ी चक्र आज्ञा चक्र नाश्ता का अग्रभाग या स्वास स्वास की क्रिया ध्यान से देखें इसके अलावा कोई बाय वस्तु साकार या निराकार वस्तु पर भी ध्यान लगाकर हम कर सकते हैं धन्यवाद

aapka prashna hai dhyan kya hai dekhiye adhyan ek yog ashtanga yog ka ek ang hai ashtanga yog mein aath ang maane gaye hain yum niyam aasan pranayaam pratyahar dhyan dharana aur samadhi dhyan jo hai ashtanga yog mein ek ang hai jo hum yog sadhna karte hain toh hum meditation karte hain aur meditation karne se hamein mansik shanti milti hai mansik urja milti hai hum tanaav aur avsad se bache rehte hain aur jab hum mitti shuru karte hain karne ke liye hum aham meditation tabhi kare toh yoga yogasanon ke aur pranayaam ke abhyas ke baad hi kare taki hamara dhyan jaldi se do sake aur jab evam meditation kare iske liye hum apne sharir ke kisi ang ka dhyan kar meditation kar sakte hain jaise naadi chakra aagya chakra nashta ka agrabhag ya swas swas ki kriya dhyan se dekhen iske alava koi bye vastu saakar ya nirakaar vastu par bhi dhyan lagakar hum kar sakte hain dhanyavad

आपका प्रश्न है ध्यान क्या है देखिए अध्यान एक योग अष्टांग योग का एक अंग है अष्टांग योग में

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Liyakat Ali Gazi

Motivational Speaker, Life Coach & Soft Skills Trainer 📲 9956269300

0:29
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ध्यान जो है वह खुद किताब तेज है ध्यान मतलबी होता है कि जो इंसान खुद को जान जाए खुद के अंतर की अंतरात्मा को जान जाए परमात्मा को जान जाता है बाल उसको बोलते हैं ध्यान ध्यान का मतलब होता है कि खुद को ढूंढने की पहचान खुद के जो जीवन मिला है जन्म मिला है उसके उद्देश्यों को मूलभूत सिद्धांतों को जानने की कोशिश करना ही ध्यान रखें

dhyan jo hai vaah khud kitab tez hai dhyan matlabi hota hai ki jo insaan khud ko jaan jaaye khud ke antar ki antaraatma ko jaan jaaye paramatma ko jaan jata hai baal usko bolte hain dhyan dhyan ka matlab hota hai ki khud ko dhundhne ki pehchaan khud ke jo jeevan mila hai janam mila hai uske udyeshyon ko mulbhut siddhanto ko jaanne ki koshish karna hi dhyan rakhen

ध्यान जो है वह खुद किताब तेज है ध्यान मतलबी होता है कि जो इंसान खुद को जान जाए खुद के अंतर

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

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जान क्या है जान अपने मन को और अपने शरीर को रिलैक्स करने के लिए माध्यम है ठीक है अपना कोई अच्छा तरीका है और आप किसी और को या किसी और को पूछने की जरूरत नहीं पड़ती बहुत फायदेमंद है

jaan kya hai jaan apne man ko aur apne sharir ko relax karne ke liye madhyam hai theek hai apna koi accha tarika hai aur aap kisi aur ko ya kisi aur ko poochne ki zarurat nahi padti bahut faydemand hai

जान क्या है जान अपने मन को और अपने शरीर को रिलैक्स करने के लिए माध्यम है ठीक है अपना कोई अ

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Radha Rangoli

Holistic Healer And Energy Therapist

2:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ध्यान क्या है ध्यान ध्यान का मतलब है कुछ भी नहीं करना दोस्तों बड़ी अच्छा क्वेश्चन है आपका ध्यान क्या है और इसका जवाब देते हुए मुझे भी बड़ी खुशी हो रही है कि ध्यान क्या है यह क्वेश्चन का जवाब मुझे देने के लिए मिला वह ध्यान जो है वह सबसे पहले तो कोई किसी को करा नहीं सकता दूसरा ध्यान कि हम सिर्फ तैयारी करते हैं ध्यान खुद अपने अंदर हमारे मन करता है हम सब तैयार होते हैं उसके लिए अपने शरीर को तैयार करते हैं हमें करना सिर्फ इतना होता है कि पहले हम खुद को खाली कर ले हम जो भी कुछ मिला है इस सोसाइटी से सरकमस्टेंस है जो भी हमें इस दिमाग में हमें दिया गया है कुछ हमने बाहर से हासिल किया कुछ हमने अपने आप से परेशान से हासिल किया और अपनी समझ से तो इस तरीके से जो भी चीजें मिली है सब को खाली कर दें और जब खाली हो जाती है मतलब आप जीरो हो जाते हो और जो चीज आपके अंदर उतरती है वह है ध्यान एक लेवल पर जब आप ध्यान में बैठते हो तो आप सिर्फ और सिर्फ पहले अपने बॉडी को रिलैक्स करते हो उसके बाद आप मन को रिलायंस करते हैं उसके बाद आप धीरे-धीरे सेक्स करेंगे तो आपको पता चलेगा कि धान का मतलब है जीरो होना थैंक यू सो मच

dhyan kya hai dhyan dhyan ka matlab hai kuch bhi nahi karna doston badi accha question hai aapka dhyan kya hai aur iska jawab dete hue mujhe bhi badi khushi ho rahi hai ki dhyan kya hai yah question ka jawab mujhe dene ke liye mila vaah dhyan jo hai vaah sabse pehle toh koi kisi ko kara nahi sakta doosra dhyan ki hum sirf taiyari karte hain dhyan khud apne andar hamare man karta hai hum sab taiyar hote hain uske liye apne sharir ko taiyar karte hain hamein karna sirf itna hota hai ki pehle hum khud ko khaali kar le hum jo bhi kuch mila hai is society se sarakamastens hai jo bhi hamein is dimag mein hamein diya gaya hai kuch humne bahar se hasil kiya kuch humne apne aap se pareshan se hasil kiya aur apni samajh se toh is tarike se jo bhi cheezen mili hai sab ko khaali kar de aur jab khaali ho jaati hai matlab aap zero ho jaate ho aur jo cheez aapke andar utarati hai vaah hai dhyan ek level par jab aap dhyan mein baithate ho toh aap sirf aur sirf pehle apne body ko relax karte ho uske baad aap man ko reliance karte hain uske baad aap dhire dhire sex karenge toh aapko pata chalega ki dhaan ka matlab hai zero hona thank you so match

ध्यान क्या है ध्यान ध्यान का मतलब है कुछ भी नहीं करना दोस्तों बड़ी अच्छा क्वेश्चन है आपका

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Aditi Garg

Meditation Expert

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मेडिटेशन क्या है या ध्यान क्या है ध्यान है बॉडी और माइंड की को एकाग्र करना यानी हम जब जो नॉर्मल लाइफ होती है उसमें बहुत सारी चीजें सोच रहे होते बहुत सारी चीजें कर रही हो पूछ सकते होती है कुछ नहीं सकते होती है कुछ चीजों में आप उन्नति पा रहे होते कुछ भी नहीं पा रहे होते हम कई बार होता है कि अपने शरीर के कौन से अंग में बहुत जगह दूर दे रहे होते हमें कुछ खुद पता नहीं चलता और फिर धीरे-धीरे शरीर जो बीमारियों में कन्वर्ट होने लगता है तेरी जब परेशान होता है माइंड जो परेशान होता है तू बीमारियां उसकी जिंदगी का हिस्सा बनने लगती है तो ध्यान जो है वह हमारी बॉडी को एकाग्र कर देता है एक शाम कर देता है और एक एकाग्र कर देता है ध्यान से बॉडी और माइंड का बैलेंस बन जाता है मेंटल और फिजिकल दोनों बैलेंस बन जाते हैं और इसलिए बेसिकली का गुरु हो जाता है टेंशन स्पेन और बॉडी पूरी लाइफ सो जाती है तो ध्यान है मेडिटेशन इज द टेक्निक टू हिली और बॉडी तुम एडिटेड टू मेंटेन आवर बॉडी एंड टू मेंटेन बैलेंस बिटवीन बॉडी एंड माइंड

meditation kya hai ya dhyan kya hai dhyan hai body aur mind ki ko ekagra karna yani hum jab jo normal life hoti hai usme bahut saree cheezen soch rahe hote bahut saree cheezen kar rahi ho puch sakte hoti hai kuch nahi sakte hoti hai kuch chijon mein aap unnati paa rahe hote kuch bhi nahi paa rahe hote hum kai baar hota hai ki apne sharir ke kaunsi ang mein bahut jagah dur de rahe hote hamein kuch khud pata nahi chalta aur phir dhire dhire sharir jo bimariyon mein convert hone lagta hai teri jab pareshan hota hai mind jo pareshan hota hai tu bimariyan uski zindagi ka hissa banne lagti hai toh dhyan jo hai vaah hamari body ko ekagra kar deta hai ek shaam kar deta hai aur ek ekagra kar deta hai dhyan se body aur mind ka balance ban jata hai mental aur physical dono balance ban jaate hain aur isliye basically ka guru ho jata hai tension Spain aur body puri life so jaati hai toh dhyan hai meditation is the technique to hilli aur body tum edited to maintain hour body and to maintain balance between body and mind

मेडिटेशन क्या है या ध्यान क्या है ध्यान है बॉडी और माइंड की को एकाग्र करना यानी हम जब जो न

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जय गुरुदेव प्रश्न लिखे ध्यान क्या है ध्यान रहे कि जो हम कहते हैं कि जो युग को कितने भाग में बांटा गया है अष्टांग योग में बांटा गया है यह नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान समाधि ध्यान है ध्यान क्या है चेतना का एक स्तर से दूसरे को जाने को ध्यान देते हैं 411 लाइव बैडमिंटन करते हैं तब उसको ध्यान देते हैं यानी कि उस जगह को छोड़कर जवानों की आदत में जाते हैं एकता में बैठकर आंखें बंद करके सुखासन या सिद्धासन में हो या पद्मासन में हो ध्यान मुद्रा में बैठकर आंखें बंद करके धीरे-धीरे भगवान का नाम ऊंचा करते हैं तो उसको ध्यान देते हैं ध्यान में क्या होता है ध्यान में क्या होता है चंचल मन शांत बहुत जरूरी है कि आपको इतना फायदा मिलता है हमारा मानसिक शक्ति का विकास होता है स्वास्थ्य में उन्नति होता है सामाजिक विभिन्नता सकते हैं ध्यान कीजिए अपना जीवन को असीम आनंद योगा नहीं करेंगे तो आपको इतना स्पेशल हो जाएगा तब मांग तो यह तो ध्यान ही जो कि चेक नाका एक्सरसाइज इस पुस्तक को जाने को ध्यान देते हैं कितना पेमेंट रियलिस्टिक लाइट को छोड़कर जब हम इसको लाइक मेंटेन करते हैं आंखें बंद करके बदमाश और क्योंकि सबको ध्यान करना चाहिए क्योंकि इतना शक्ति को विकसित करना चाहिए एक से दूसरे को जाने को ध्यान देते हैं तो यह जो कि ध्यान है जितना मेनी एरिया पूछोगे चेतना क्या है समस्त विश्व ब्रह्मांड को धारण करने वाली 27 शक्ति चेतना कहते हैं तो इस चेतना शक्ति को जागरण करने के लिए विकसित करने के लिए सुबह शाम ध्यान करना चाहिए तो इसीलिए बहुत अच्छा है जय गुरुदेव

jai gurudev prashna likhe dhyan kya hai dhyan rahe ki jo hum kehte hain ki jo yug ko kitne bhag me baata gaya hai ashtanga yog me baata gaya hai yah niyam aasan pranayaam pratyahar dharana dhyan samadhi dhyan hai dhyan kya hai chetna ka ek sthar se dusre ko jaane ko dhyan dete hain 411 live Badminton karte hain tab usko dhyan dete hain yani ki us jagah ko chhodkar jawano ki aadat me jaate hain ekta me baithkar aankhen band karke sukhasan ya siddhasan me ho ya padmasana me ho dhyan mudra me baithkar aankhen band karke dhire dhire bhagwan ka naam uncha karte hain toh usko dhyan dete hain dhyan me kya hota hai dhyan me kya hota hai chanchal man shaant bahut zaroori hai ki aapko itna fayda milta hai hamara mansik shakti ka vikas hota hai swasthya me unnati hota hai samajik vibhinnata sakte hain dhyan kijiye apna jeevan ko asim anand yoga nahi karenge toh aapko itna special ho jaega tab maang toh yah toh dhyan hi jo ki check naka exercise is pustak ko jaane ko dhyan dete hain kitna payment realistic light ko chhodkar jab hum isko like maintain karte hain aankhen band karke badamash aur kyonki sabko dhyan karna chahiye kyonki itna shakti ko viksit karna chahiye ek se dusre ko jaane ko dhyan dete hain toh yah jo ki dhyan hai jitna many area puchoge chetna kya hai samast vishwa brahmaand ko dharan karne wali 27 shakti chetna kehte hain toh is chetna shakti ko jagran karne ke liye viksit karne ke liye subah shaam dhyan karna chahiye toh isliye bahut accha hai jai gurudev

जय गुरुदेव प्रश्न लिखे ध्यान क्या है ध्यान रहे कि जो हम कहते हैं कि जो युग को कितने भाग मे

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Vikas Choudhary

Writer,Thinker,Analysist,Farmer,Interior Decorator,

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कुछ ना करना ही ध्यान है ध्यान लगाना कि कोशिश करना और ध्यान लग जाना एक अलग चीज है कुछ ना करना ही ध्यान है ठीक है अपने अंदर से विचारों को खत्म करें जब ध्यान लगाने बैठे हैं तो यह चीज भी यह बात भी आपके अंदर नहीं होनी चाहिए कि मैं ध्यान लगा रहा हूं आपको यह भी मालूम होना चाहिए कि मैं ध्यान लगाने की कोशिश कर रहा हूं या मैं ध्यान लगा रहा हूं या मुझे ध्याना चाहिए ठीक है सुन्न हो जाना विचारों का ना चलना जब आपके मन में विचार ना चल रहे हैं आप यह भी ना सोचा कि मैं सोच रहा हूं आप यह भी ननेके आप ध्यान लगा रहे हैं आपके मन में यह भी ना होश कर लो या मैं ध्यान लगा रहा हूं इस ध्यान करते हैं ठीक है जब आप किसी भी तरह के कोई भी चार ना चले वह समझाते हैं उसको मेडिटेशन कर कहते हैं सुनने की अवस्था या सुनने को पाना मन के पास चले जाना इसी को ध्यान कहते हैं मन हमेशा चलता रहता है ना हम हमेशा कुछ ना कुछ सोचते रहते हैं विचारों को रोक देना मन को रोक देना इसी को ध्यान कहते हैं धन्यवाद

kuch na karna hi dhyan hai dhyan lagana ki koshish karna aur dhyan lag jana ek alag cheez hai kuch na karna hi dhyan hai theek hai apne andar se vicharon ko khatam kare jab dhyan lagane baithe hain toh yah cheez bhi yah baat bhi aapke andar nahi honi chahiye ki main dhyan laga raha hoon aapko yah bhi maloom hona chahiye ki main dhyan lagane ki koshish kar raha hoon ya main dhyan laga raha hoon ya mujhe dhyana chahiye theek hai sunna ho jana vicharon ka na chalna jab aapke man me vichar na chal rahe hain aap yah bhi na socha ki main soch raha hoon aap yah bhi naneke aap dhyan laga rahe hain aapke man me yah bhi na hosh kar lo ya main dhyan laga raha hoon is dhyan karte hain theek hai jab aap kisi bhi tarah ke koi bhi char na chale vaah smajhate hain usko meditation kar kehte hain sunne ki avastha ya sunne ko paana man ke paas chale jana isi ko dhyan kehte hain man hamesha chalta rehta hai na hum hamesha kuch na kuch sochte rehte hain vicharon ko rok dena man ko rok dena isi ko dhyan kehte hain dhanyavad

कुछ ना करना ही ध्यान है ध्यान लगाना कि कोशिश करना और ध्यान लग जाना एक अलग चीज है कुछ ना कर

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ध्यान एक प्रकार से अपने माइंड कोई गैस तथा बॉडी को रिलैक्स करने में सहायता करता है तथा ध्यान से कोई व्यक्ति अपने उस घोल को याद करना चाहिए सारी दुनिया की बातों को छोड़कर पर एकत्रित एकांत में ध्यान करने से आप कमेंट करके बजाती है

dhyan ek prakar se apne mind koi gas tatha body ko relax karne me sahayta karta hai tatha dhyan se koi vyakti apne us ghol ko yaad karna chahiye saari duniya ki baaton ko chhodkar par ekatrit ekant me dhyan karne se aap comment karke bajati hai

ध्यान एक प्रकार से अपने माइंड कोई गैस तथा बॉडी को रिलैक्स करने में सहायता करता है तथा ध्या

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Suresh Jat

History & Politics Student

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हेलो एंड वेलकम टू माय वोकल हैंडल मेरा नाम सुरेश है और अभी का मारा टॉपिक ध्यान क्या है यह देखिए दोस्तों ध्यान का अर्थ होता है चेतना जब हम प्रजेंट में जीते हैं यानी वर्तमान में बिल्कुल वर्तमान में इसी पल क्या स्थिति है आस-पास क्या है क्या सुन पा रहे हैं क्या सुन पा रहे हो क्या महसूस कर पा रहे हैं क्या फील कर पा रहे हैं यह सब की चेतना ध्यान होता है जरूरी नहीं है कि आप आंख बंद करके बैठ जाए वही ध्यान होता है ज्ञान का अर्थ वर्तमान स्थिति होती थैंक यू सो मच

hello and welcome to my vocal handle mera naam suresh hai aur abhi ka mara topic dhyan kya hai yah dekhiye doston dhyan ka arth hota hai chetna jab hum present me jeete hain yani vartaman me bilkul vartaman me isi pal kya sthiti hai aas paas kya hai kya sun paa rahe hain kya sun paa rahe ho kya mehsus kar paa rahe hain kya feel kar paa rahe hain yah sab ki chetna dhyan hota hai zaroori nahi hai ki aap aankh band karke baith jaaye wahi dhyan hota hai gyaan ka arth vartaman sthiti hoti thank you so match

हेलो एंड वेलकम टू माय वोकल हैंडल मेरा नाम सुरेश है और अभी का मारा टॉपिक ध्यान क्या है यह द

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आपने पूछा ध्यान क्या है अपने आपको जानना ध्यान

aapne poocha dhyan kya hai apne aapko janana dhyan

आपने पूछा ध्यान क्या है अपने आपको जानना ध्यान

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Sadik

Social Worker

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नहीं मेरी नजर में ध्यान की जो परिभाषा होगी वह कुछ इस तरह होगी कि ध्यान से हम जीवन के काफी लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं अगर हमारा ध्यान शत-प्रतिशत है हमारे किसी लक्ष्य पर तो हम उसे आसानी से प्राप्त कर सकते हैं अगर हमारा ध्यान हमारे वश में है तो और बयान को परिभाषित ऐसे भी किया जा सकता है कि है हम एकांत में बैठकर कानों पर दोनों कानों पर हाथ लगा के हाथों से उसे प्रेस तारीख के हैं वह अपने आप से बात करें उसे भी ध्यान कह सकते हैं लेकिन ध्यान है कि यह होता है कि जो हमें बिल्कुल हमारे जैसे मुझे कुछ काम करना है मुझे कोई वर्क मिला है किसी के तीरों मुझे उस पर काम करना है मेरा ध्यान विचलित हो रहा है मैं वह काम नहीं कर पा रहा तो सबसे पहले आप उस चीज का मेडिटेशन की आदत डाल लिया आप अगर आपको यार एक बार बार होती है कि आपका ध्यान विकसित होता है तो आपको सुबह रोजाना 5 मिनट 10 मिनट अपने आप को अकेले में बैठाकर और 10 मिनट के लिए बिल्कुल आप एकांत में बैठकर ध्यान लगाइए अपने आपके अंदर किसी भी चीज में आप ध्यान लगा सकते हैं प्रभु भजन लगा दीजिए भगवान में ध्यान लगा लीजिए अपने आप में ध्यान लगा लीजिए बाकी सब बोले ही दुनिया है नहीं ऐसे सोच ही मेरी दुनिया है मेरे पीछे आपकी क्षमता बढ़ेगी ध्यान लगाने की तू जो आपको बहुत मिला है काम करने का आपके लाइफ में ऐसी प्रॉब्लम आती है कि क्या आप अभी काम करते हैं वह अधूरा छोड़ देते हैं तो ध्यान लगाने से आपके जो अधूरा काम है वह पूरे हो जाएंगे उन्हें आप पूरा करने लगोगे तो सबसे पहले आप ध्यान की आदत डालनी है कि ध्यान कैसे लगाएं अगर आपका ध्यान नहीं लग रहा कहीं जाने लग रहा आपका और आप जा रहे हैं कि मेरा ध्यान लगेगा तो आप अपने आपको फ्री छोड़िए बिल्कुल जकड़ी अहमद अपने आप अपने दिमाग को चित्र के साथ में जकड़ रखा है उनको उसको जग रही है मन को बिल्कुल भी छोड़ दीजिए ऐसा सोचिए कि मैं इस दुनिया में हुई नहीं जाना तो 1 दिन है जिनमें से पूछ लीजिए वह मेरा आखरी मूवमेंट है मैं इस दुनिया से नहीं हूं अब उस तरीके यह थिंकिंग लाकर दिमाग में तो ध्यान लगाकर आपको ध्यान जरूर लगेगा बस मेरी नजर में जाएंगे 3:00 बजे यह कि इनकी बाय

nahi meri nazar me dhyan ki jo paribhasha hogi vaah kuch is tarah hogi ki dhyan se hum jeevan ke kaafi lakshya prapt kar sakte hain agar hamara dhyan shat pratishat hai hamare kisi lakshya par toh hum use aasani se prapt kar sakte hain agar hamara dhyan hamare vash me hai toh aur bayan ko paribhashit aise bhi kiya ja sakta hai ki hai hum ekant me baithkar kanon par dono kanon par hath laga ke hathon se use press tarikh ke hain vaah apne aap se baat kare use bhi dhyan keh sakte hain lekin dhyan hai ki yah hota hai ki jo hamein bilkul hamare jaise mujhe kuch kaam karna hai mujhe koi work mila hai kisi ke tiron mujhe us par kaam karna hai mera dhyan vichalit ho raha hai main vaah kaam nahi kar paa raha toh sabse pehle aap us cheez ka meditation ki aadat daal liya aap agar aapko yaar ek baar baar hoti hai ki aapka dhyan viksit hota hai toh aapko subah rojana 5 minute 10 minute apne aap ko akele me baithakar aur 10 minute ke liye bilkul aap ekant me baithkar dhyan lagaaiye apne aapke andar kisi bhi cheez me aap dhyan laga sakte hain prabhu bhajan laga dijiye bhagwan me dhyan laga lijiye apne aap me dhyan laga lijiye baki sab bole hi duniya hai nahi aise soch hi meri duniya hai mere peeche aapki kshamta badhegi dhyan lagane ki tu jo aapko bahut mila hai kaam karne ka aapke life me aisi problem aati hai ki kya aap abhi kaam karte hain vaah adhura chhod dete hain toh dhyan lagane se aapke jo adhura kaam hai vaah poore ho jaenge unhe aap pura karne lagoge toh sabse pehle aap dhyan ki aadat daalni hai ki dhyan kaise lagaye agar aapka dhyan nahi lag raha kahin jaane lag raha aapka aur aap ja rahe hain ki mera dhyan lagega toh aap apne aapko free chodiye bilkul jakadi ahmad apne aap apne dimag ko chitra ke saath me jakad rakha hai unko usko jag rahi hai man ko bilkul bhi chhod dijiye aisa sochiye ki main is duniya me hui nahi jana toh 1 din hai jinmein se puch lijiye vaah mera aakhri movement hai main is duniya se nahi hoon ab us tarike yah thinking lakar dimag me toh dhyan lagakar aapko dhyan zaroor lagega bus meri nazar me jaenge 3 00 baje yah ki inki bye

नहीं मेरी नजर में ध्यान की जो परिभाषा होगी वह कुछ इस तरह होगी कि ध्यान से हम जीवन के काफी

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ध्यान क्या है ध्यान क्या है का मतलब है कि अपने को पहचानना मनुष्य अपने को पहचाने अपना ज्ञान होना चाहिए कि मैं कौन हूं और एक नई अनुभूति उत्पन्न होना अंदर से कोई दिव्य दृष्टि प्राप्त होना यह सारी चीजें जब हमारे ध्यान करने में आती हैं तो हम पहचान लेते हैं कि हमारा ध्यान हो रहा है और हम सही रास्ते पर जा रहे हैं इसी को हम ध्यान कहते हैं यही रास्ता ध्यान करने का है और बैठ कर के एक-एक चित्र हो करके बैठ कर के हम ध्यान की अवस्था में जा सकते हैं इसी को ध्यान बोला जाता है

dhyan kya hai dhyan kya hai ka matlab hai ki apne ko pahachanana manushya apne ko pehchane apna gyaan hona chahiye ki main kaun hoon aur ek nayi anubhuti utpann hona andar se koi divya drishti prapt hona yah saari cheezen jab hamare dhyan karne mein aati hain toh hum pehchaan lete hain ki hamara dhyan ho raha hai aur hum sahi raste par ja rahe hain isi ko hum dhyan kehte hain yahi rasta dhyan karne ka hai aur baith kar ke ek ek chitra ho karke baith kar ke hum dhyan ki avastha mein ja sakte hain isi ko dhyan bola jata hai

ध्यान क्या है ध्यान क्या है का मतलब है कि अपने को पहचानना मनुष्य अपने को पहचाने अपना ज्ञान

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ध्यान करने से आत्मविश्वास बढ़ता है परम सुख शांति का अनुभव प्राप्त होता है हर समस्या का समाधान ध्यान करने से ही होगा ध्यान कैसे करें ध्यान किसी अन्य वस्तु पदार्थ व्यक्ति का नहीं करना है ध्यान अपने शरीर का करना है हमारा शरीर पांच तत्वों से बना हुआ है स्वयं को जानिए कि मैं पांच तत्व नहीं हूं मैं पांचों तत्वों से परे चैतन्य आत्मा हूं आत्मा कभी मरती नहीं बदलती नहीं पड़ती गलती नहीं वही मैं हूं वही सब शरीर में व्याप्त है हमें चाहिए कि सभी प्राणियों के प्रति प्रेम दया का व्यवहार करते हुए जीवन जी हैं तभी हम सुखी रहेंगे और अन्य प्राणी भी सुखी रहेगा और हम आनंदित रहेंगे

dhyan karne se aatmvishvaas badhta hai param sukh shanti ka anubhav prapt hota hai har samasya ka samadhan dhyan karne se hi hoga dhyan kaise kare dhyan kisi anya vastu padarth vyakti ka nahi karna hai dhyan apne sharir ka karna hai hamara sharir paanch tatvon se bana hua hai swayam ko janiye ki main paanch tatva nahi hoon main panchon tatvon se pare chaitanya aatma hoon aatma kabhi marti nahi badalti nahi padti galti nahi wahi main hoon wahi sab sharir mein vyapt hai hamein chahiye ki sabhi praniyo ke prati prem daya ka vyavhar karte hue jeevan ji hain tabhi hum sukhi rahenge aur anya prani bhi sukhi rahega aur hum anandit rahenge

ध्यान करने से आत्मविश्वास बढ़ता है परम सुख शांति का अनुभव प्राप्त होता है हर समस्या का समा

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Kriti

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ध्यान की आईडी के ध्यान रखो कि इंग्लिश में मेडिटेशन कहा जाता है यह एक क्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने मन को चेतना की एक विशेष अवस्था में लाने का प्रयत्न करता है ध्यान का उद्देश्य कोई लाभ प्राप्त करना होता है या ध्यान करना अपने आप में एक लक्ष्य हो सकता है ध्यान से अनेकों प्रकार की क्रियाओं का बोध होता है

dhyan ki id ke dhyan rakho ki english mein meditation kaha jata hai yah ek kriya hai jisme vyakti apne man ko chetna ki ek vishesh avastha mein lane ka prayatn karta hai dhyan ka uddeshya koi labh prapt karna hota hai ya dhyan karna apne aap mein ek lakshya ho sakta hai dhyan se anekon prakar ki kriyaon ka bodh hota hai

ध्यान की आईडी के ध्यान रखो कि इंग्लिश में मेडिटेशन कहा जाता है यह एक क्रिया है जिसमें व्यक

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