क्या योग, संस्कृति और आध्यात्मिकता के बीच कोई संबंध है?...


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Vijay Sharma

Yoga Trainer (P.G.D.Y.)

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योग अध्यात्म से और संस्कृति से बहुत गहरा संबंध है क्योंकि हम जानते हैं योग कोई आज से 11 साल पहले से इसका इजाजत नहीं हुआ योग जो है अनादि काल से चला आ रहा है हर हिंदुस्तान और इसकी उत्पत्ति हमारे भारतवर्ष से ही हुई है योग का मन करता है कि महेश जी भगवान शंकर ने स्कूल शुरू किया था उसके बाद उन्होंने वैदिक ऋषि मुनियों से उन लोगों ने स्टार्ट किया उसके बाद श्री कृष्ण भाभी और बुद्ध ने स्कोर भरा या बाद में सिद्ध वन सेवन नाथ पंथ वैष्णव पंथ और पंछियों में योग को आगे बढ़ाया इसके बाद करीब 200 बीसी के करीब महर्षि पतंजलि योग दर्शन का मूल ग्रंथ बनाया जिसका नाम था योग सूत्र जोकि 127 ग्रंथ है जिसके अंदर 195 सूत्र होते हैं सच सच बता दो एक गरीब योगाभ्यास तुझे प्रमाण जो मिला है अभी तक उसी में आरबीसी सिंधु घाटी की सभ्यता की जो मरे हैं अंगूर की ओर से मिलता है अब बात आती है योगसूत्र की जो कि एक सिस्टम आई ग्रंथ है इसके 19569 होते हैं चार अध्याय होते हैं चैप्टर्स समाधि पर साधना पर विभूति भारत के बल्लेबाज समाधि पाठ पहला अध्याय हैं इसमें 51 51 सूत्र होते हैं इसमें योग की परिभाषा दी गई है योगश्चित्त वृत्ति निरोध है चित्त की वृत्तियों के विरोध को ही योग कहते हैं साधना पाठ दूसरा चैप्टर 50 साल 55 सूत्र होते हैं इसमें योग के व्यवहार को बताया गया है ऑनर के पांच द्वारों की बारे में बताया गया है वह के वह होते हैं काम क्रोध मद लोभ लस्ट एंगर ईगो ग्रीड अटैचमेंट इन को कैसे खत्म किया जाए इसके बारे में बताया गया है अष्टांग योग और साधना चित्तौड़ तरीके बताए गए हैं विभूति भाग तीसरा अध्याय इसे 55 सूत्र होते हैं 55 इसमें संयम के बारे में बताए गए हैं इस चयन कैसे बनाया जाता है इसमें धारणा ध्यान समाधि यह तीनों जो वह मुख्य बिंदु हैं वह अष्टांग योग से लिए गए हैं उसके बारे में बताया गया है क्या चीज है सही है आना चाहिए यह आपके अंदर होता है शहादत को यह बताया है कि स्त्रियों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए चौथा जो चैप्टर है वह केवल आज चरम लक्ष्य इसमें 34 सूत्र होते हैं 34 सूत्र इसमें सामाजिक के बारे में बताया गया है कैसे केवल प्राप्त कर सकते हैं और कैसी केवल लगी अवस्था होती है इसके बारे में बताया गया है इसके अलावा हमारी जो सनातन संस्कृति है इस जमीन से या टेस्ट है इसके अलावा हमारे ऋग्वेद जोगी सर्वप्रथम धर्म ग्रंथ है और जिनको परमात्मा की भारी मानते हैं ऋग्वेद कली 15 100 1000 बीसी के में लिखे गए थे ईश्वर ने देशों को वेदों के बारे में बताया इसलिए श्रुति कहां गया बीफ का मतलब होता है ज्ञान ज्ञान का भंडार वेद का हो गया अभय शतपथ ब्राह्मण में चार ऋषि हुए थे अग्नि ऋषि ने ऋग्वेद की स्थापना की जिसमें ज्ञान का भंडार है वायु ऋषि यजुर्वेद की स्थापना की जिसमें कर्म का भंडार है सूर्य आदित्य ऋषि ने संदीप की स्थापना की याद रखना गरीबी इसमें संगीत विद्या का भंडार है उंगली वाली सीने अथर्ववेद की रचना की थी जिसने विज्ञान का भंडार है इसके अलावा ऋग्वेद में जो है आपकी चिकित्सा भी आती है जैसे जल चिकित्सा वायु चिकित्सा चिकित्सक मानव चिकित्सा चिकित्सा ऋग्वेद के दसवें मंडल में अध्याय में दवाओं का भी जिक्र है 25 दवाई बताई गई है और एक संस्थान साथ स्थान पर मिलती है चमन ऋषि के बारे में ऋग्वेद में बताया गया है ऐसे ही अथर्ववेद के बारे में इसका मतलब होता है धर्म का मतलब कंपन और अथर्व का मतलब जो कर्म करके परमात्मा की उपासना में लीन रहता है वहीं कंपनी को प्राप्त करके मोक्ष धारण करता है वह योग के द्वारा ही संभव है इसमें रहस्यमई विज्ञान जड़ी-बूटी चमत्कार आयुर्वेदिक कब जिक्र है यह सब अध्यात्म के साक्ष्य हैं इससे मालूम पड़ता है कि योग हमारा अनादि काल से इसमें भारतवर्ष से मौजूद रहा है और किसका संबंध हिंदू सनातन धर्म से जुड़ा हुआ है इस परीक्षण भी है इससे योग के द्वारा योग जो है फिजिकली स्ट्रांग करता है मेंटली स्ट्रांग स्पीच ओं लीजिए जोड़ता है क्योंकि लोग ईश्वर से मिलन खाता है अपने आप से बनकर आता है योग योगश्चित्त वृत्ति निरोध की वृत्तियों का निरोध के योग को योग बकरियों को रोकता है कामना शिक्षा किसे कहते हैं इन सब चीजों से इसके अलावा इलेक्ट्रिकल स्विच बर्लिन में क्या होता है जिसमें धारणा ध्यान समाधि की ओर जहां लोग चलते हैं उससे पहले हम अपनी बॉडी को और मयंक को चोरी करते हैं तब कहीं जाकर मोक्ष मुक्ति की जा सकते हैं योगी साधन है या रास्ता है जो हम इस भौतिकता वादी दुनिया को छोड़कर एक अलौकिक दुनिया से जुड़ते हैं कि आध्यात्मिक दुनिया से जोड़ते हैं इसमें वह चकिया हैं जिसको अभ्यास करने से आपको दिव्य शक्तियों का शक्तियां प्राप्त होंगी दिल शक्तियों से आपका कांटेक्ट होगा आपकी छठी इंद्री जागृत होगी और भूत भविष्य वर्तमान की जानकारी लोगों की संपूर्ण ज्ञान प्राप्त हुआ एंकर खत्म होगा एंकर इन 5 लड़के द्वारा को पैदा करता है काम क्रोध मद लोभ श्री कृष्ण ने अर्जुन को भगवत गीता में

yog adhyaatm se aur sanskriti se bahut gehra sambandh hai kyonki hum jante hain yog koi aaj se 11 saal pehle se iska ijajat nahi hua yog jo hai anadi kaal se chala aa raha hai har Hindustan aur iski utpatti hamare bharatvarsh se hi hui hai yog ka man karta hai ki mahesh ji bhagwan shankar ne school shuru kiya tha uske baad unhone vaidik rishi muniyon se un logo ne start kiya uske baad shri krishna bhabhi aur buddha ne score bhara ya baad me siddh van seven nath panth vaisnav panth aur panchiyon me yog ko aage badhaya iske baad kareeb 200 BC ke kareeb maharshi patanjali yog darshan ka mul granth banaya jiska naam tha yog sutra joki 127 granth hai jiske andar 195 sutra hote hain sach sach bata do ek garib yogabhayas tujhe pramaan jo mila hai abhi tak usi me RBC sindhu ghati ki sabhyata ki jo mare hain angoor ki aur se milta hai ab baat aati hai yogsutra ki jo ki ek system I granth hai iske 19569 hote hain char adhyay hote hain chapters samadhi par sadhna par vibhuti bharat ke ballebaaz samadhi path pehla adhyay hain isme 51 51 sutra hote hain isme yog ki paribhasha di gayi hai yogashchitt vriti nirodh hai chitt ki vrittiyon ke virodh ko hi yog kehte hain sadhna path doosra chapter 50 saal 55 sutra hote hain isme yog ke vyavhar ko bataya gaya hai honour ke paanch dwaron ki bare me bataya gaya hai vaah ke vaah hote hain kaam krodh mad lobh lust anger ego greed attachment in ko kaise khatam kiya jaaye iske bare me bataya gaya hai ashtanga yog aur sadhna chittor tarike bataye gaye hain vibhuti bhag teesra adhyay ise 55 sutra hote hain 55 isme sanyam ke bare me bataye gaye hain is chayan kaise banaya jata hai isme dharana dhyan samadhi yah tatvo jo vaah mukhya bindu hain vaah ashtanga yog se liye gaye hain uske bare me bataya gaya hai kya cheez hai sahi hai aana chahiye yah aapke andar hota hai shadat ko yah bataya hai ki sthreeyon ke chakkar me nahi padhna chahiye chautha jo chapter hai vaah keval aaj charam lakshya isme 34 sutra hote hain 34 sutra isme samajik ke bare me bataya gaya hai kaise keval prapt kar sakte hain aur kaisi keval lagi avastha hoti hai iske bare me bataya gaya hai iske alava hamari jo sanatan sanskriti hai is jameen se ya test hai iske alava hamare rigved jogi sarvapratham dharm granth hai aur jinako paramatma ki bhari maante hain rigved kalee 15 100 1000 BC ke me likhe gaye the ishwar ne deshon ko vedo ke bare me bataya isliye shruti kaha gaya beef ka matlab hota hai gyaan gyaan ka bhandar ved ka ho gaya abhay shatpath brahman me char rishi hue the agni rishi ne rigved ki sthapna ki jisme gyaan ka bhandar hai vayu rishi yajurved ki sthapna ki jisme karm ka bhandar hai surya aditya rishi ne sandeep ki sthapna ki yaad rakhna garibi isme sangeet vidya ka bhandar hai ungli wali seene atharvaved ki rachna ki thi jisne vigyan ka bhandar hai iske alava rigved me jo hai aapki chikitsa bhi aati hai jaise jal chikitsa vayu chikitsa chikitsak manav chikitsa chikitsa rigved ke dasven mandal me adhyay me dawaon ka bhi jikarr hai 25 dawai batai gayi hai aur ek sansthan saath sthan par milti hai chaman rishi ke bare me rigved me bataya gaya hai aise hi atharvaved ke bare me iska matlab hota hai dharm ka matlab kampan aur atharva ka matlab jo karm karke paramatma ki upasana me Lean rehta hai wahi company ko prapt karke moksha dharan karta hai vaah yog ke dwara hi sambhav hai isme rahasyamai vigyan jadi buti chamatkar ayurvedic kab jikarr hai yah sab adhyaatm ke sakshya hain isse maloom padta hai ki yog hamara anadi kaal se isme bharatvarsh se maujud raha hai aur kiska sambandh hindu sanatan dharm se juda hua hai is parikshan bhi hai isse yog ke dwara yog jo hai physically strong karta hai mentally strong speech on lijiye Jodta hai kyonki log ishwar se milan khaata hai apne aap se bankar aata hai yog yogashchitt vriti nirodh ki vrittiyon ka nirodh ke yog ko yog bakariyon ko rokta hai kamna shiksha kise kehte hain in sab chijon se iske alava electrical switch berlin me kya hota hai jisme dharana dhyan samadhi ki aur jaha log chalte hain usse pehle hum apni body ko aur mayank ko chori karte hain tab kahin jaakar moksha mukti ki ja sakte hain yogi sadhan hai ya rasta hai jo hum is bhautikata wadi duniya ko chhodkar ek alaukik duniya se judte hain ki aadhyatmik duniya se jodte hain isme vaah chakkiyan hain jisko abhyas karne se aapko divya shaktiyon ka shaktiyan prapt hongi dil shaktiyon se aapka Contact hoga aapki chathi indri jagrit hogi aur bhoot bhavishya vartaman ki jaankari logo ki sampurna gyaan prapt hua anchor khatam hoga anchor in 5 ladke dwara ko paida karta hai kaam krodh mad lobh shri krishna ne arjun ko bhagwat geeta me

योग अध्यात्म से और संस्कृति से बहुत गहरा संबंध है क्योंकि हम जानते हैं योग कोई आज से 11 स

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Somit Yoga Varanasi

Yoga Trainer and Astrologer

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Ankit Bhardwaj

Yoga Instructor

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Manmohan Bhutada

Founder & Director - Yog Prayog

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Hemraj Gurjar

Yoga Trainer

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योग संस्कृति और आध्यात्मिकता तीनों के बीच में एक अटूट संबंध है क्योंकि योग के द्वारा ही हम अपनी प्राचीन संस्कृति के बारे में पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर पाएंगे और योग के द्वारा ही आध्यात्मिक सत्र में उन्नति कर पाएंगे जो मारा आध्यात्मिक उद्देश्य है आत्मा का परमात्मा से मिलन हो योग के द्वारे संबंध है संभव है पुलिस ने योग संस्कृति और आध्यात्मिकता तीनों का समीकरण ही संपूर्ण योग है इसलिए नियमित रूप से योग करें जैसे जैसे आप योग में प्रवीण होंगे तो आपको संस्कृति का ज्ञान भी होगा मनुष्य जीवन का मूल उद्देश्य क्या है वह भी मालूम पड़ेगा और फिर आप आध्यात्मिक क्षेत्र में भी उन्नति का खाएंगे धन्यवाद

yog sanskriti aur aadhyatmikta tatvo ke beech me ek atut sambandh hai kyonki yog ke dwara hi hum apni prachin sanskriti ke bare me purn gyaan prapt kar payenge aur yog ke dwara hi aadhyatmik satra me unnati kar payenge jo mara aadhyatmik uddeshya hai aatma ka paramatma se milan ho yog ke dware sambandh hai sambhav hai police ne yog sanskriti aur aadhyatmikta tatvo ka samikaran hi sampurna yog hai isliye niyamit roop se yog kare jaise jaise aap yog me praveen honge toh aapko sanskriti ka gyaan bhi hoga manushya jeevan ka mul uddeshya kya hai vaah bhi maloom padega aur phir aap aadhyatmik kshetra me bhi unnati ka khayenge dhanyavad

योग संस्कृति और आध्यात्मिकता तीनों के बीच में एक अटूट संबंध है क्योंकि योग के द्वारा ही ह

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

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तीनों चीजें अलग है योग जो है आप किस देश को अच्छा लगता है आपको तो दुश्मन आता है बीमारियों से बनाता है संस्कृति जो है आपको अच्छे ज्ञान देती है अच्छी शिक्षा देती है अच्छा वह विचार देती है आध्यात्मिकता जो है वह आपको बताती है कि हमारी संस्कृति का क्या मतलब होता है क्या होता है क्या सही है और उसे आप सो सकते हैं

tatvo cheezen alag hai yog jo hai aap kis desh ko accha lagta hai aapko toh dushman aata hai bimariyon se banata hai sanskriti jo hai aapko acche gyaan deti hai achi shiksha deti hai accha vaah vichar deti hai aadhyatmikta jo hai vaah aapko batati hai ki hamari sanskriti ka kya matlab hota hai kya hota hai kya sahi hai aur use aap so sakte hain

तीनों चीजें अलग है योग जो है आप किस देश को अच्छा लगता है आपको तो दुश्मन आता है बीमारियों स

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Swami Umesh Yogi

Peace-Guru (Global Peace Education)

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देखी योग आध्यात्मिक और संस्कृत के बीच जो संबंध है तो योग क्या है एक आध्यात्मिक संस्कृति का भाग है आध्यात्मिक संस्कृति से योग जन्म लिया उसका वह पाठ अध्याय संस्कृत वेदिक कल्चर जिसको कहते हैं वैदिक कल्चर सहयोग निकला इसलिए एवं वैदिक कल्चर का पाठ

dekhi yog aadhyatmik aur sanskrit ke beech jo sambandh hai toh yog kya hai ek aadhyatmik sanskriti ka bhag hai aadhyatmik sanskriti se yog janam liya uska vaah path adhyay sanskrit vedic culture jisko kehte hain vaidik culture sahyog nikala isliye evam vaidik culture ka path

देखी योग आध्यात्मिक और संस्कृत के बीच जो संबंध है तो योग क्या है एक आध्यात्मिक संस्कृति का

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दीना एक चक्र की तरह है जिस प्रकार प्रकृति का चक्र होता है बारिश का होना और जल का भाग बन के आसमान में वैसे ही सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं योग सबसे पहले अपने मन को नियंत्रित कर देने का नाम है पतंजलि योग दर्शन में चित्रित अपने चित्र को समाप्त करके चित्र को रोककर के जब आप की आत्मा शक्ति जागृत हो जाती है जब भी चार एक बिंदु पर एकत्रित हो जाता है तुझे जो और विचार एक बिंदु पर एकत्रित होने से क्या होता है कि आपकी जो आत्मशक्ति है वह पूर्णता को प्राप्त करने लगती है तो आध्यात्मिकता का तात्पर्य आत्मशक्ति कुर्ता की तरफ ले जाना सुनिश्चित करने से सही तरीके से आध्यात्मिकता की प्राप्ति होती है और संस्कृत की रही संस्कृत की बात तो संस्कृत योग किसी ने किसी संस्कृति से निकला है और वह संस्कृति है भारतीय भारतीय संस्कृति देश में युवाओं की परंपरा रही प्राचीनता रही और वहां से योग निकल करके पुनः जो है जीवन हुआ है आज के वर्तमान समय भारतीय संस्कृति नहीं होती है भारतीय संस्कृति सकरी नहीं होती गति सीलिंग होती भारतीय संस्कृति कहीं ना कहीं से तो इनमें ग्रंथों में पड़े हुए जो योगशास्त्र है इसकी तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया होता तो योग आज नहीं निकल पाता योग आज वही पड़ा रह जाता तो कहीं ना कहीं से हमारी संस्कृति की देन है योग और योग जो है आध्यात्मिकता को प्राप्त करने का एक मार्ग

dina ek chakra ki tarah hai jis prakar prakriti ka chakra hota hai barish ka hona aur jal ka bhag ban ke aasman me waise hi sab ek dusre se jude hue hain yog sabse pehle apne man ko niyantrit kar dene ka naam hai patanjali yog darshan me chitrit apne chitra ko samapt karke chitra ko rokakar ke jab aap ki aatma shakti jagrit ho jaati hai jab bhi char ek bindu par ekatrit ho jata hai tujhe jo aur vichar ek bindu par ekatrit hone se kya hota hai ki aapki jo atmashakti hai vaah purnata ko prapt karne lagti hai toh aadhyatmikta ka tatparya atmashakti kurta ki taraf le jana sunishchit karne se sahi tarike se aadhyatmikta ki prapti hoti hai aur sanskrit ki rahi sanskrit ki baat toh sanskrit yog kisi ne kisi sanskriti se nikala hai aur vaah sanskriti hai bharatiya bharatiya sanskriti desh me yuvaon ki parampara rahi praachinata rahi aur wahan se yog nikal karke punh jo hai jeevan hua hai aaj ke vartaman samay bharatiya sanskriti nahi hoti hai bharatiya sanskriti sakari nahi hoti gati ceiling hoti bharatiya sanskriti kahin na kahin se toh inmein granthon me pade hue jo yogshastra hai iski taraf kisi ne dhyan nahi diya hota toh yog aaj nahi nikal pata yog aaj wahi pada reh jata toh kahin na kahin se hamari sanskriti ki then hai yog aur yog jo hai aadhyatmikta ko prapt karne ka ek marg

दीना एक चक्र की तरह है जिस प्रकार प्रकृति का चक्र होता है बारिश का होना और जल का भाग बन के

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Anshu Sarkar

Founder & Director, Sarkar Yog Academy

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सबसे पहले मैं आपको नमस्कार करता हूं और आपका सवाल का जवाब देने का प्रयत्न करता हूं कि आयोग संस्कृति और आध्यात्मिकता का बीच कोई संबंध है योग हमारा महान देश भारतवर्ष के धरोहर है विगत हजार वर्ष पूर्व समारोह महान देश भारतवर्ष के ऋषि मुनियों ने योग का शिक्षा लेकर ही रोक श्री चिंतामन आत्मविश्वास भरा दिल एवं दीर्घायु जीवन व्यतीत किए हैं आज हम लोग इस स्थिति में चिड़िया में योग प्राइम अभियान करके निरोग शरीर चिंतामन आपको स्वाद बिल पास करने का प्रयत्न कर रहे हमारा भारतीय संस्कृति की देन है और योग से नाम से ध्यान से आध्यात्मिक कभी जुड़ाव है कि आपका सोच के ऊपर निर्भर कर रहा है क्योंकि जब आप योग प्राणी उद्यान कर रहे का सर्वांगीण विकास होता है शारीरिक मानसिक नैतिक आध्यात्मिक संपूर्ण विकास होता है और आप नए सिरे से जिंदगी जी सकते हैं नए जीवन में आ सकता है योग ध्यान के माध्यम से सब कुछ अच्छा लगने लगेगा हर चीज आपका फेवर में हो जाएगा आने वाला हर पल सुख हमेशा आपके पास रहेगा दुख आप भी नहीं कर पाएगा और योग्य भारतीय संस्कृति के दिन है इसमें नकारा नहीं जा सकता है और आध्यात्मिकता योग के साथ जुड़ा हुआ है धन्यवाद

sabse pehle main aapko namaskar karta hoon aur aapka sawaal ka jawab dene ka prayatn karta hoon ki aayog sanskriti aur aadhyatmikta ka beech koi sambandh hai yog hamara mahaan desh bharatvarsh ke dharohar hai vigat hazaar varsh purv samaroh mahaan desh bharatvarsh ke rishi muniyon ne yog ka shiksha lekar hi rok shri chintaman aatmvishvaas bhara dil evam dirghayu jeevan vyatit kiye hain aaj hum log is sthiti me chidiya me yog prime abhiyan karke nirog sharir chintaman aapko swaad bill paas karne ka prayatn kar rahe hamara bharatiya sanskriti ki then hai aur yog se naam se dhyan se aadhyatmik kabhi judav hai ki aapka soch ke upar nirbhar kar raha hai kyonki jab aap yog prani udyan kar rahe ka Sarvangiṇa vikas hota hai sharirik mansik naitik aadhyatmik sampurna vikas hota hai aur aap naye sire se zindagi ji sakte hain naye jeevan me aa sakta hai yog dhyan ke madhyam se sab kuch accha lagne lagega har cheez aapka favour me ho jaega aane vala har pal sukh hamesha aapke paas rahega dukh aap bhi nahi kar payega aur yogya bharatiya sanskriti ke din hai isme nakara nahi ja sakta hai aur aadhyatmikta yog ke saath juda hua hai dhanyavad

सबसे पहले मैं आपको नमस्कार करता हूं और आपका सवाल का जवाब देने का प्रयत्न करता हूं कि आयोग

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योगाचार्य S.S.Rawat🕉🔱🚩🙏

Lecturer Of Yog And Alternative Therapy

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Bk Ashok Pandit

आध्यात्मिक गुरु

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Narendar Gupta

प्राकृतिक योगाथैरिपिस्ट एवं योगा शिक्षक,फीजीयोथैरीपिस्ट

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बिल्कुल संबंध है योग संस्कृति और आध्यात्मिकता परस्पर एक दूसरे के पूरक के रूप में कार्य करते हैं योग यहां हिंदू संस्कृति की पहचान है और प्राचीन ऋषि-मुनियों का देना है जैसे कि आपने सुना होगा कि किस प्रकार महात्मा नगर स्थित है वह भगवान शिव को भगवान शिव से मारा था कि योग विद्या सीकर और यह फिर सामान्य जनों को उपलब्ध करवाएं फिर महर्षि पतंजलि हुए किस प्रकार हिंदू संस्कृति भारतीय संस्कृति को आयोग की धारा से जुड़ कर पूरे विश्व को जो योग करने का जोड़ने का काम किया और जो हमारे देश की पहचान है वह मुक्त आध्यात्मिकता नहीं है नैतिकता मतलब स्पिरिचुअलिटी अपने मन का अध्यन करना अपने व्यवहारों का चयन करना अपने क्रियाकलापों का अध्ययन करने और एक उत्कृष्ट जीवन स्तर स्थापित करना लोगों को इसके लिए प्रेरित करना चाहिए इसका उदाहरण बनना तो अगर आप प्रयोग करते हैं और तो यह सबसे महत्वपूर्ण है जब आप योग करते हैं तो आप अपने अंदर एक प्रतीक जी रहे होते हैं और संस्कृति जीने लगते हैं तो प्रसन्नता के रूप में सहयोग के रूप में सद्भाव के रूप में यह संपूर्ण आपके व्यक्तित्व में चमकने लगता है और जैसे ही आपका व्यक्तित्व निखरता है आध्यात्मिकता आकृति पुणे लगती है प्रकार आप सफलता के रूप में नदी के रूप में प्रोन्नति के रूप में अपने आसपास यश कीर्ति फैलाते हैं कीर्तिमान बन जाते हैं

bilkul sambandh hai yog sanskriti aur aadhyatmikta paraspar ek dusre ke purak ke roop me karya karte hain yog yahan hindu sanskriti ki pehchaan hai aur prachin rishi muniyon ka dena hai jaise ki aapne suna hoga ki kis prakar mahatma nagar sthit hai vaah bhagwan shiv ko bhagwan shiv se mara tha ki yog vidya sikar aur yah phir samanya jano ko uplabdh karvaaein phir maharshi patanjali hue kis prakar hindu sanskriti bharatiya sanskriti ko aayog ki dhara se jud kar poore vishwa ko jo yog karne ka jodne ka kaam kiya aur jo hamare desh ki pehchaan hai vaah mukt aadhyatmikta nahi hai naitikta matlab spirituality apne man ka adhyan karna apne vyavaharon ka chayan karna apne kriyaklapon ka adhyayan karne aur ek utkrasht jeevan sthar sthapit karna logo ko iske liye prerit karna chahiye iska udaharan banna toh agar aap prayog karte hain aur toh yah sabse mahatvapurna hai jab aap yog karte hain toh aap apne andar ek prateek ji rahe hote hain aur sanskriti jeene lagte hain toh prasannata ke roop me sahyog ke roop me sadbhav ke roop me yah sampurna aapke vyaktitva me chamakane lagta hai aur jaise hi aapka vyaktitva nikharata hai aadhyatmikta akriti pune lagti hai prakar aap safalta ke roop me nadi ke roop me pronnati ke roop me apne aaspass yash kirti failate hain kirtiman ban jaate hain

बिल्कुल संबंध है योग संस्कृति और आध्यात्मिकता परस्पर एक दूसरे के पूरक के रूप में कार्य करत

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अनमोल मणी

योग शिक्षक

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Indrajit Chakraborty

Yoga Instructor

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संबंध हमारे इंडियन कल्चर उसने योगा कब होती है कि जो योग साधना में इंडियन कल्चर अपने पति को डालनी लोग बहुत सारे लोग बोलते हैं उसको आज का डेट में अमीन और मोहम्मद में बोलते अल्लाह पंजाबी लोग बोलते हैं जो भी बोले थे कि हम इस कल्चर एंड कल्चरल अटैचमेंट तक अपना कल्चर है कि गॉड को प्यार करते हैं योग साधना भी कर रहे हैं आप अंतर आत्मा को जानने के लिए जोक

sambandh hamare indian culture usne yoga kab hoti hai ki jo yog sadhna mein indian culture apne pati ko daalni log bahut saare log bolte hain usko aaj ka date mein ameen aur muhammad mein bolte allah punjabi log bolte hain jo bhi bole the ki hum is culture and cultural attachment tak apna culture hai ki god ko pyar karte hain yog sadhna bhi kar rahe hain aap antar aatma ko jaanne ke liye joke

संबंध हमारे इंडियन कल्चर उसने योगा कब होती है कि जो योग साधना में इंडियन कल्चर अपने पति को

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Dr Chandra Shekhar Jain

MBBS, Yoga Therapist Yoga Psychotherapist

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मानव कल्याण के लिए जो कुछ भी है चाहे भाइयों को संस्कृति हो अध्यात्म और धर्म हो उस संबंध में उस समय आपस में गहरा संबंध जैसे योग आध्यात्मिक उन्नति के लिए किया जाता है आध्यात्मिक उन्नति जीवन कल्याण के लिए आ सकते आवश्यक है और ऐसी हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति की इस तरह से यह तीनों बातें आपस में मिली हुई है इसको समझने का सबसे अच्छा उपाय है कि आप और अनुभव करने का कि आप 1 घंटे नियमित रूप से सुबह उठकर 4:05 बजे के आसपास योगाभ्यास करें कम से कम आप इसका एक ताल अभ्यास करें तो आपको यह सारी बातें समझ में आने लगेगी इनमें आपस में क्या संबंध है यह भी आपको समझ में आने लगेगा हो जब इस तरह से आप लगातार योगाभ्यास करते रहेंगे तो आप की आत्मिक उन्नति से इसके अलावा भी और दूसरे ढेर सारी भर में वह दूर हो जाएंगे

manav kalyan ke liye jo kuch bhi hai chahen bhaiyon ko sanskriti ho adhyaatm aur dharam ho us sambandh mein us samay aapas mein gehra sambandh jaise yog aadhyatmik unnati ke liye kiya jata hai aadhyatmik unnati jeevan kalyan ke liye aa sakte aavashyak hai aur aisi hamari prachin bharatiya sanskriti ki is tarah se yah teenon batein aapas mein mili hui hai isko samjhne ka sabse accha upay hai ki aap aur anubhav karne ka ki aap 1 ghante niyamit roop se subah uthakar 4 05 baje ke aaspass yogabhayas karen kam se kam aap iska ek taal abhyas karen toh aapko yah saree batein samajh mein aane lagegi inmein aapas mein kya sambandh hai yah bhi aapko samajh mein aane lagega ho jab is tarah se aap lagatar yogabhayas karte rahenge toh aap ki atmik unnati se iske alava bhi aur dusre dher saree bhar mein vaah dur ho jaenge

मानव कल्याण के लिए जो कुछ भी है चाहे भाइयों को संस्कृति हो अध्यात्म और धर्म हो उस संबंध मे

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Kumar Ajit

Yoga Trainer (पतंजलि योग समिति योग शिक्षक)

1:06
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क्या योग संस्कृति और आध्यात्मिकता के बीच कोई संबंध है उत्तर में है जब अलग अलग दृष्टिगोचर होंगे तो थोड़ी बहुत कह सकते हैं लेकिन सभी सभी एक-दूसरे के पूरक हैं और एक ही एक ही चीज का नाम तीनों को कह सकते हैं कि यह योग भी भारतीय भारतीय है संस्कृति भी भारतीय की बात करता है आध्यात्मिकता भी भारतीयता ही तो हमारे सनातन में और जो हमारी एक कैब फिलॉस्फी है भारत की उसने योग संस्कृति और आध्यात्मिकता संस्कृति मतलब भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता और योग तो बिल्कुल हो उसे भी है इसमें तो कोई ज्यादा अंतर नहीं है तो संस्कृति मतलब भारतीयता भारतीय संस्कृति आइस को समग्र रूप से देखें तो यह तीनों एक ही चीज है बिल्कुल अलग-अलग चीजें नहीं है

kya yog sanskriti aur aadhyatmikta ke beech koi sambandh hai uttar mein hai jab alag alag drishtigochar honge toh thodi bahut keh sakte hain lekin sabhi sabhi ek dusre ke purak hain aur ek hi ek hi cheez ka naam teenon ko keh sakte hain ki yah yog bhi bharatiya bharatiya hai sanskriti bhi bharatiya ki baat karta hai aadhyatmikta bhi bharatiyta hi toh hamare sanatan mein aur jo hamari ek cab philosophy hai bharat ki usne yog sanskriti aur aadhyatmikta sanskriti matlab bharatiya sanskriti aur aadhyatmikta aur yog toh bilkul ho use bhi hai isme toh koi zyada antar nahi hai toh sanskriti matlab bharatiyta bharatiya sanskriti ice ko samagra roop se dekhen toh yah teenon ek hi cheez hai bilkul alag alag cheezen nahi hai

क्या योग संस्कृति और आध्यात्मिकता के बीच कोई संबंध है उत्तर में है जब अलग अलग दृष्टिगोचर

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PANKAJ SHARMA

Yoga Instructor

0:40
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उद्यमिता और यू एक दूसरे के पूरक है परंतु इस बात का ध्यान दें कि आदित्य नेता और योग में संस्कृति धर्म ऊंच-नीच जात-पात स्त्री और पुरुष साथ में किसी भी अमीरी और गरीबी का कोई संबंध नहीं है आधुनिकता और योग सिर्फ और सिर्फ उन मनुष्यों के लिए जिनकी सांसे चलती है और धड़कन चल इसके अतिरिक्त और कुछ भी नहीं

udhmita aur you ek dusre ke purak hai parantu is baat ka dhyan dein ki aditya neta aur yog mein sanskriti dharam unch neech jaat pat stree aur purush saath mein kisi bhi amiri aur gareebi ka koi sambandh nahi hai adhunikata aur yog sirf aur sirf un manushyo ke liye jinki sanse chalti hai aur dharakan chal iske atirikt aur kuch bhi nahi

उद्यमिता और यू एक दूसरे के पूरक है परंतु इस बात का ध्यान दें कि आदित्य नेता और योग में संस

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सूर्य नारायण

योग शिक्षक

1:05
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हमारा योग संस्कृति का एक अंग है और योग में ईश्वर को मानते हैं और ईश्वर को बताया जाता है हाथ में क्या होता है परमात्मा क्या होता है योग में जो है 8 अंग होते हैं यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान समाधि तो नियम के अंतर्गत सोच संतोष तत्व स्वाध्याय व ईश्वर प्राणी धान तो ईश्वर के प्रति जो होता है समर्पण का भाव बताया जाता है तो उसमें ईश्वर के बारे में भी बताते हैं इसलिए अब यहां पर अध्यात्मा भी हो जाता है तो हमारा तीनों जो है जुड़ा हुआ है संस्कृति का अंग जो है योग हैं योग में हमें ईश्वर के बारे में बताया जाता है तो अध्यात्म में भी हो गया

hamara yog sanskriti ka ek ang hai aur yog mein ishwar ko maante hain aur ishwar ko bataya jata hai hath mein kya hota hai paramatma kya hota hai yog mein jo hai 8 ang hote hain yum niyam aasan pranayaam pratyahar dharana dhyan samadhi toh niyam ke antargat soch santosh tatva swaadhyaay v ishwar prani dhaan toh ishwar ke prati jo hota hai samarpan ka bhav bataya jata hai toh usmein ishwar ke bare mein bhi batatey hain isliye ab yahan par adhyatma bhi ho jata hai toh hamara teenon jo hai juda hua hai sanskriti ka ang jo hai yog hain yog mein hamein ishwar ke bare mein bataya jata hai toh adhyaatm mein bhi ho gaya

हमारा योग संस्कृति का एक अंग है और योग में ईश्वर को मानते हैं और ईश्वर को बताया जाता है हा

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Yog Guru Gyan Ranjan Maharaj

Founder & Director - Kashyap Yogpith

1:10
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आपका क्वेश्चन है क्या योग संस्कृति और आध्यात्मिकता के बीच कोई संबंध है तो लिखिए एवं का संस्कृति और आध्यात्मिकता यही योग का आधार स्तंभ है यहां तक का आप का क्वेश्चन है कोई संबंध परस्पर संबंध है अन्य उना से संबंध है बहुत नजदीकी का संबंध है योग और संस्कृति और आध्यात्मिकता के अंदर ऐसा कुछ नहीं है योग संस्कृति और आध्यात्मिकता को ही जान देता है जो करने वाला व्यक्ति की संस्कृति और है आध्यात्मिकता में कौन रुचि योग के द्वारा पैदा इसलिए संस्कृति और आध्यात्मिकता में काफी गहरा रिश्ता है योग का धन्यवाद

aapka question hai kya yog sanskriti aur aadhyatmikta ke beech koi sambandh hai toh likhiye evam ka sanskriti aur aadhyatmikta yahi yog ka aadhaar stambh hai yahan tak ka aap ka question hai koi sambandh paraspar sambandh hai anya una se sambandh hai bahut najdiki ka sambandh hai yog aur sanskriti aur aadhyatmikta ke andar aisa kuch nahi hai yog sanskriti aur aadhyatmikta ko hi jaan deta hai jo karne vala vyakti ki sanskriti aur hai aadhyatmikta mein kaun ruchi yog ke dwara paida isliye sanskriti aur aadhyatmikta mein kafi gehra rishta hai yog ka dhanyavad

आपका क्वेश्चन है क्या योग संस्कृति और आध्यात्मिकता के बीच कोई संबंध है तो लिखिए एवं का संस

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Yogi Vinod Soni

Yoga Instructor

1:13
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हत्या के संबंध में शहीद उन तीनों में है और इससे अलग नहीं हो सकता है लेकिन हर आदमी अपनी जीवन जीता है तो उसको उसने सुख और दुख चंद्रभान रह सकता है ताकि ताकि बहुत जल्दी आदमी है जो ज्ञान है वह अभी तक मिलता है यह क्या है मैं क्या हूं मैं शरीर क्या है जीवन क्या है आदमी की तरफ देखो तो जीवन में संसार में कोई दुख नहीं है जीवन सुखी है अच्छा है जीवन में सिर्फ आनंद है भगवान ने जीवन को सिर्फ इसलिए हमें दुख नजर आता है तू कभी सोच नहीं पाता उसका कभी वादा नहीं होता

hatya ke sambandh mein shaheed un teenon mein hai aur isse alag nahi ho sakta hai lekin har aadmi apni jeevan jita hai toh usko usne sukh aur dukh chandrabhan reh sakta hai taki taki bahut jaldi aadmi hai jo gyaan hai vaah abhi tak milta hai yah kya hai main kya hoon main sharir kya hai jeevan kya hai aadmi ki taraf dekho toh jeevan mein sansar mein koi dukh nahi hai jeevan sukhi hai accha hai jeevan mein sirf anand hai bhagwan ne jeevan ko sirf isliye hamein dukh nazar aata hai tu kabhi soch nahi pata uska kabhi vada nahi hota

हत्या के संबंध में शहीद उन तीनों में है और इससे अलग नहीं हो सकता है लेकिन हर आदमी अपनी जीव

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Dr.Pavan Mishra

Naturopath Doctor | Physician

1:16
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ऑडियो पेंट जिस प्रकार से हमारे शरीर का निर्माण पंचमहाभूत ओं से हुआ है जल अग्नि वायु पृथ्वी और आकाश इसी प्रकार से यही योग है हमारी संस्कृति है और आध्यात्मिकता है इनके बीच में भी बहुत गहरा संबंध है अगर यह तीनों ठीक रहते हैं तो आप बिल्कुल फिट रहेंगे कहा गया है ना कि कोई स्वस्थ इसको हम स्वस्थ मानेंगे मिनिस्टर किसको हेल्दी मानेंगे हिंदी का मतलब यह नहीं होता है कि हम शारीरिक रूप से हेल्थी क्योंकि शारीरिक रूप से भी हल्दी होना चाहिए मानसिक रूप से भी हेल्दी होना चाहिए और आर्थिक रूप से भी हेल्दी होना चाहिए तो वह एक अच्छा स्वास्थ्य कहलाता है इसी प्रकार से हमें ठीक रखने के लिए हमें स्वस्थ रखने के लिए इन तीनों का सम्मिश्रण बहुत ही आवश्यक है तो स्वस्थ रहने के लिए इन हेलो की जरूरत है जिस प्रकार से हमारे शरीर के लिए पांच तत्व की जरूरत है उसी तरह से हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भी इन तीनों चीजों की जरूरत है योग संस्कृति और आध्यात्मिकता धन्यवाद

audio paint jis prakar se hamare sharir ka nirmaan panchamahabhut on se hua hai jal agni vayu prithvi aur akash isi prakar se yahi yog hai hamari sanskriti hai aur aadhyatmikta hai inke beech mein bhi bahut gehra sambandh hai agar yah teenon theek rehte hain toh aap bilkul fit rahenge kaha gaya hai na ki koi swasth isko hum swasth manenge minister kisko healthy manenge hindi ka matlab yah nahi hota hai ki hum sharirik roop se healthy kyonki sharirik roop se bhi haldi hona chahiye mansik roop se bhi healthy hona chahiye aur aarthik roop se bhi healthy hona chahiye toh vaah ek accha swasthya kehlata hai isi prakar se hamein theek rakhne ke liye hamein swasth rakhne ke liye in teenon ka sammishran bahut hi aavashyak hai toh swasth rehne ke liye in hello ki zaroorat hai jis prakar se hamare sharir ke liye paanch tatva ki zaroorat hai usi tarah se hamare sharir ko swasth rakhne ke liye bhi in teenon chijon ki zaroorat hai yog sanskriti aur aadhyatmikta dhanyavad

ऑडियो पेंट जिस प्रकार से हमारे शरीर का निर्माण पंचमहाभूत ओं से हुआ है जल अग्नि वायु पृथ्वी

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Yogi Narendra

Yoga Teacher

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डेफिनेटली है जी योग योग और आध्यात्मिकता अगर आप आध्यात्मिक होंगे तभी आप योग की तरफ आध्यात्मिक होंगे पहले तो सबसे पहले तो जिस तरह एक आदमी को साधारण बंदे को पता ही नहीं होता कि मोबाइल बिना सिम के नहीं चल सकता साधारण मनुष्य ही जानता है कि एक आदमी है बस आदमी है वह आया और चला जाएगा लेकिन जैसे ही वह आध्यात्मिकता में आता है तो उसे पता चलता है उसकी डिवीजन का अरे नहीं भैया इसका पंच तत्वों का शरीर अलग है और आत्मा अलग है पंच तत्वों का शरीर जलने चढ़ने या खराब होने लायक है और आत्मा एक नश्वर है जिसका विनाश नहीं हो सकता मदद एक ऐसी चीज एक खराब होने वाली चीज और एक बिल्कुल हमेशा सही रहने वाली तो जब मनुष्य को यह पता लगता है कि हमें डेफिनेटली कुछ मतलब इसके बारे में कुछ मुझे ज्ञान लेना है यह मुझे उस सिस्टम से जोड़ना है यह मुझे जीवन में कुछ कर गुजर ना है कुछ ऐसा कर गुजर ना है जो कि आज से पहले लोगों ने ना किया हो या हमने और कोई मेरी बराबरी ना कर पाए तो वह आध्यात्मिकता की ओर झुकता है क्यों झुकता है तो उसे इस बारे में पता लगता है योग के बारे में

definetli hai ji yog yog aur aadhyatmikta agar aap aadhyatmik honge tabhi aap yog ki taraf aadhyatmik honge pehle toh sabse pehle toh jis tarah ek aadmi ko sadhaaran bande ko pata hi nahi hota ki mobile bina sim ke nahi chal sakta sadhaaran manushya hi jaanta hai ki ek aadmi hai bus aadmi hai vaah aaya aur chala jaega lekin jaise hi vaah aadhyatmikta mein aata hai toh use pata chalta hai uski division ka arre nahi bhaiya iska punch tatvon ka sharir alag hai aur aatma alag hai punch tatvon ka sharir jalne chadhne ya kharaab hone layak hai aur aatma ek nashwar hai jiska vinash nahi ho sakta madad ek aisi cheez ek kharaab hone waali cheez aur ek bilkul hamesha sahi rehne waali toh jab manushya ko yah pata lagta hai ki hamein definetli kuch matlab iske bare mein kuch mujhe gyaan lena hai yah mujhe us system se jodna hai yah mujhe jeevan mein kuch kar gujar na hai kuch aisa kar gujar na hai jo ki aaj se pehle logon ne na kiya ho ya humne aur koi meri barabari na kar paye toh vaah aadhyatmikta ki aur jhukta hai kyon jhukta hai toh use is bare mein pata lagta hai yog ke bare mein

डेफिनेटली है जी योग योग और आध्यात्मिकता अगर आप आध्यात्मिक होंगे तभी आप योग की तरफ आध्यात्म

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Jivananda Nitai Das

Yoga Instructor

2:49
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रक्षा संबंध है इस योग एक्चुअली युग में ही कलर और उसकी सुनी थी सब समाया हुआ है यह को इसे डिजाइन किया गया है इसमें कब से है जैसे जैसे कल सल के बाद पहले बोलते हैं तो इसमें योगा में जो सिखाया गया है जो कि एक गिलास लाइफ स्टाइल कैसे ऑडियो के बारे में हम लोग को देखते हैं तो योनियों में यम 5cm है और 5 नियम है उसमें जो चीज है वह सब कॉन्सर्ट में अंदर जाता है जैसे अहिंसा हो गया ना तो यह गौ रक्षा एक सामाजिक वह है तो फिर हम सब सत्य हमेशा चुटकुले तो यह कल सरगांव पार्ट हो गया फिर आस्ट्रेलिया में छोड़ी नहीं करना तो एक ही कल सिंह का एक लक्षण है कि वह दूसरों को शो नहीं करता जो जिंदगी में जो कुछ हम लोग को मिला है थोड़ा मेहनत करके जो मिला है उसी में संतुष्ट तो इसको बोलते हैं अपरिग्रह ऐसे ही हम हैं और फिल्मों में आपका हो गया कोई नया जो अभी हम लोग का देश में बहुत इतना महत्व दिया जाता है कि निवेश रिपोर्ट ऑफ कल्चरल 3 संतोष सेटिस्फेक्शन फेरस अध्याय सेल्फ एनालिसिस और सेल्फ स्टडी 295 सेवर मोड़ नियमों में जितना कुछ पार्ट्स है 5 साल तक तो यह पूरा पूरा कल साल का ही एक वह है कल से लाइट कनेक्शन है कि आध्यात्मिकता की तब हम देखेंगे तो आध्यात्मिक जो सिर्फ वह है फिर से आत्मज्ञान एक्चुली मैं कौन हूं तो यही होगा कार्यक्रम एमपार्टो है कि self-knowledge मैं कौन हूं तो इसके इलावा और जैसे ब्रह्म ज्ञान है भगवान जो ईश्वर ईश्वर का ज्ञान जी जो संबंध है मैं यह यूनिवर्स जो और यह जो दुनिया है यह जगत है तो इसके साथ मेरा रिश्ता क्या है फिर दूसरा जो सीन है यह दूसरा जी वोकेशन मेरा संबंध संबंध क्या है और प्राईमेलिटी जो जो सृष्टि करता है ईश्वर बोलते हैं उनको क्या भगवान बोलते हैं उसके साथ हम लोग का क्या रिश्ता है संबंध है तो यह जो कनेक्शन है मेरा और जो ईश्वर तो उनके साथ जो संबंध है प्लीज दूसरा जी को किधर से संबंध है तो फटी के साथ संबंध है तो यह संबंध को ही योग कहता है तो योग में संबंध रिलेशनशिप कैसी यह संबंध को स्थापित किया जाए योग का विषय है तो योग और स्पेशल की और कल सर यह बहुत ही कनेक्टेड

raksha sambandh hai is yog actually yug mein hi color aur uski suni thi sab samaya hua hai yah ko ise design kiya gaya hai isme kab se hai jaise jaise kal sal ke baad pehle bolte hain toh isme yoga mein jo sikhaya gaya hai jo ki ek gilas life style kaise audio ke bare mein hum log ko dekhte hain toh yoniyon mein yum 5cm hai aur 5 niyam hai usmein jo cheez hai vaah sab Concert mein andar jata hai jaise ahinsa ho gaya na toh yah gau raksha ek samajik vaah hai toh phir hum sab satya hamesha chutkule toh yah kal sarganv part ho gaya phir Australia mein chodi nahi karna toh ek hi kal Singh ka ek lakshan hai ki vaah dusron ko show nahi karta jo zindagi mein jo kuch hum log ko mila hai thoda mehnat karke jo mila hai usi mein santusht toh isko bolte hain aparigrah aise hi hum hain aur filmo mein aapka ho gaya koi naya jo abhi hum log ka desh mein bahut itna mahatva diya jata hai ki nivesh report of cultural 3 santosh setisfekshan ferrous adhyay self analysis aur self study 295 sevar mod niyamon mein jitna kuch parts hai 5 saal tak toh yah pura pura kal saal ka hi ek vaah hai kal se light connection hai ki aadhyatmikta ki tab hum dekhenge toh aadhyatmik jo sirf vaah hai phir se atmagyan ekchuli main kaun hoon toh yahi hoga karyakram emaparto hai ki self knowledge main kaun hoon toh iske alawa aur jaise Brahma gyaan hai bhagwan jo ishwar ishwar ka gyaan ji jo sambandh hai main yah Universe jo aur yah jo duniya hai yah jagat hai toh iske saath mera rishta kya hai phir doosra jo seen hai yah doosra ji vocation mera sambandh sambandh kya hai aur praimeliti jo jo shrishti karta hai ishwar bolte hain unko kya bhagwan bolte hain uske saath hum log ka kya rishta hai sambandh hai toh yah jo connection hai mera aur jo ishwar toh unke saath jo sambandh hai please doosra ji ko kidhar se sambandh hai toh fati ke saath sambandh hai toh yah sambandh ko hi yog kahata hai toh yog mein sambandh Relationship kaisi yah sambandh ko sthapit kiya jaaye yog ka vishay hai toh yog aur special ki aur kal sir yah bahut hi connected

रक्षा संबंध है इस योग एक्चुअली युग में ही कलर और उसकी सुनी थी सब समाया हुआ है यह को इसे डि

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Mit Prasanna

Yoga Instructor

1:53
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मतलब दौरान योगा और एक्सरसाइज आता जो भारतीय हैं वही करते हैं जो हमारे यहां पर लोग बुक सलोनी के यहां पर जितने भी अगर सिक्स सिक्स सिक्स अमेरिका जापान जी टी वी फी स्टडी 10 राजस्थान से होकर आया तो वहां पर भी लेकर जाइए सब है वहां पर वीडियो रिंग कंट्री इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट जो उनका मूलभूत कल्चर था योगा के शिवजी विदाउट गुरु क्योंकि राजा जानी भगवान हो एचडी क्वालिटी कभी जी रहा है उसमें रहना बहुत जरूरी है

matlab dauran yoga aur exercise aata jo bharatiya hain wahi karte hain jo hamare yahan par log book saloni ke yahan par jitne bhi agar six six six america japan ji T v fee study 10 rajasthan se hokar aaya toh wahan par bhi lekar jaiye sab hai wahan par video ring country in indian subcontinent jo unka mulbhut culture tha yoga ke shivaji without guru kyonki raja jani bhagwan ho hd quality kabhi ji raha hai usmein rehna bahut zaroori hai

मतलब दौरान योगा और एक्सरसाइज आता जो भारतीय हैं वही करते हैं जो हमारे यहां पर लोग बुक सलोनी

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Girijakant Singh

Founder/ President Yog Bharati Foundation Trust

0:27
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क्या योग संस्कृति और आध्यात्मिकता के बीच कोई संबंध है हां योग भारतीय संस्कृति की देन है प्राचीन सभ्यता की देन है और आध्यात्मिकता भी है योग चिकित्सा विज्ञान धन्यवाद

kya yog sanskriti aur aadhyatmikta ke beech koi sambandh hai haan yog bharatiya sanskriti ki then hai prachin sabhyata ki then hai aur aadhyatmikta bhi hai yog chikitsa vigyan dhanyavad

क्या योग संस्कृति और आध्यात्मिकता के बीच कोई संबंध है हां योग भारतीय संस्कृति की देन है प्

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

0:23

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संस्कृति और आध्यात्मिकता के बीच में कोई संबंध है जी हां बहुत बड़े आध्यात्मिकता तो वह तो सबसे बड़ा है उसमें भी योगदान के लिए ठीक है और

sanskriti aur aadhyatmikta ke beech mein koi sambandh hai ji haan bahut bade aadhyatmikta toh vaah toh sabse bada hai usmein bhi yogdan ke liye theek hai aur

संस्कृति और आध्यात्मिकता के बीच में कोई संबंध है जी हां बहुत बड़े आध्यात्मिकता तो वह तो सब

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नमस्कार दोस्तों आपका दोस्त आपका फ्रेंड है क्या योग संस्कृति और आध्यात्मिक के बीच कोई संबंध है जिनको संबंध है अगर योग है योग हमारी पुरानी संस्कृति है हमारी ऐसी संस्कृति हमारी सभ्यता है कि कल्चर है ऐसा मैं थोड़े से गिरी है एक शरीर को स्वस्थ रखने की जो कि बहुत ही प्राचीन है और इंसान को बिना किसी साइड इफेक्ट के स्वस्थ रखती है बिना किसी खर्चे के स्वस्थ रखती है तो योग जो करता है वह आध्यात्म की ओर भी जाता है क्योंकि मेडिटेशन ध्यान योग योग से ही जुड़ा हुआ है और योग से ही होकर आपको इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है तो दोस्त बहुत महत्व है योग का संस्कृति और आध्यात्म के बीच प्रयोग करें स्वस्थ रहें मस्त रहें खुश रहें धन्यवाद

namaskar doston aapka dost aapka friend hai kya yog sanskriti aur aadhyatmik ke beech koi sambandh hai jinako sambandh hai agar yog hai yog hamari purani sanskriti hai hamari aisi sanskriti hamari sabhyata hai ki culture hai aisa main thode se giri hai ek sharir ko swasth rakhne ki jo ki bahut hi prachin hai aur insaan ko bina kisi side effect ke swasth rakhti hai bina kisi kharche ke swasth rakhti hai toh yog jo karta hai vaah aadhyatm ki aur bhi jata hai kyonki meditation dhyan yog yog se hi juda hua hai aur yog se hi hokar aapko is prakriya se gujarana padta hai toh dost bahut mahatva hai yog ka sanskriti aur aadhyatm ke beech prayog karen swasth rahein mast rahein khush rahein dhanyavad

नमस्कार दोस्तों आपका दोस्त आपका फ्रेंड है क्या योग संस्कृति और आध्यात्मिक के बीच कोई संबंध

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Anil Ramola

Yoga Instructor | Engineer

1:14
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यू संस्कृति और आध्यात्मिकता के बीच बिल्कुल निश्चित रूप से मंडे कुछ प्रमुख रूप से कुछ अप्रत्यक्ष रूप से क्या होता है कि हम लोग को करते हैं तो हमें हमारे शारीरिक और मानसिक दोनों के समय शांति प्रदान करते समय स्वास्थ्य की उपलब्ध कराते हैं और हिमाचल होते हैं अंबेडकर होते हैं जिससे मैं अटैक का का ज्ञान होता है हम बात करें कि योग की योग हमारी संस्कृति का एक बहुत बड़ा शहर प्राचीन युग है हमारी संस्कृति बहुत अच्छी तरह देने का बहुत ही एक दूसरे से संबंध है और हर व्यक्ति को अपने जीवन में योग के द्वारा उसका जीवन है उसका जो बहुत ही सुधार आता है उसमें धैर्य शीलता बढ़ती है उसमें परिपक्वता बढ़ती है समझ पड़ती है सोचने का तरीका है बिल्कुल चेंज होता है जिससे कि संस्कृति को समझ आते हैं और आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर होते जाते तो कोशिश कीजिए सुबह के समय योग करने की और अपने जीवन को और स्वास्थ बनने की और अच्छा करने की निश्चित रूप से आप अपने जीवन को स्वास्थ्य क्यों ले जाएंगे धन्यवाद

you sanskriti aur aadhyatmikta ke beech bilkul nishchit roop se monday kuch pramukh roop se kuch apratyaksh roop se kya hota hai ki hum log ko karte hain toh hamein hamare sharirik aur mansik dono ke samay shanti pradan karte samay swasthya ki uplabdh karate hain aur himachal hote hain ambedkar hote hain jisse main attack ka ka gyaan hota hai hum baat karen ki yog ki yog hamari sanskriti ka ek bahut bada shehar prachin yug hai hamari sanskriti bahut achi tarah dene ka bahut hi ek dusre se sambandh hai aur har vyakti ko apne jeevan mein yog ke dwara uska jeevan hai uska jo bahut hi sudhaar aata hai usmein dhairya sheelta badhti hai usmein paripakvata badhti hai samajh padti hai sochne ka tarika hai bilkul change hota hai jisse ki sanskriti ko samajh aate hain aur aadhyatmikta ki aur agrasar hote jaate toh koshish kijiye subah ke samay yog karne ki aur apne jeevan ko aur swaasth banne ki aur accha karne ki nishchit roop se aap apne jeevan ko swasthya kyon le jaenge dhanyavad

यू संस्कृति और आध्यात्मिकता के बीच बिल्कुल निश्चित रूप से मंडे कुछ प्रमुख रूप से कुछ अप्रत

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Akash Mishra

Yoga Expert | Author | Naturopathist | Acupressure Specialist |

1:04
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क्या है कि सबसे पहला दूसरा इन शॉर्ट आंसर है वह यही है ऐसा कुछ भी नहीं है कि ठीक उलट इनका को रिप्रेजेंट नहीं करता है बिल्कुल भी नहीं करता है बिजनौर सिटी है वह भी किसी पर्टिकुलर धर्म को लेकर के नहीं बनाए गए हैं जो किसी भगवान की पूजा या किसी अल्लाह की इबादत के बारे में नहीं बताया गया है उसको धर्म के साथ में मारपीट कर सकते हैं बीमारियां कोई जरूरी नहीं है कि जो प्रार्थना है कि बंद करके अल्लाह का जो है अल्लाह की इबादत कर सकते हैं गॉड का और दूसरी चीजों को एक लड़की की तरह देखें आप एक रिलीजन से जोड़ करके उसको बिल्कुल भी नहीं देखना चाहिए आजकल के टाइम में जॉब को सबसे ज्यादा थी कि

kya hai ki sabse pehla doosra in short answer hai vaah yahi hai aisa kuch bhi nahi hai ki theek ulat inka ko represent nahi karta hai bilkul bhi nahi karta hai bijnor city hai vaah bhi kisi particular dharam ko lekar ke nahi banaye gaye hain jo kisi bhagwan ki puja ya kisi allah ki ibadat ke bare mein nahi bataya gaya hai usko dharam ke saath mein maar peet kar sakte hain bimariyan koi zaroori nahi hai ki jo prarthna hai ki band karke allah ka jo hai allah ki ibadat kar sakte hain god ka aur dusri chijon ko ek ladki ki tarah dekhen aap ek religion se jod karke usko bilkul bhi nahi dekhna chahiye aajkal ke time mein job ko sabse zyada thi ki

क्या है कि सबसे पहला दूसरा इन शॉर्ट आंसर है वह यही है ऐसा कुछ भी नहीं है कि ठीक उलट इनका क

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