कपालभाति और भर्तिका प्राणायाम में क्या अंतर है?...


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कपालभाति हमारे सारे शरीर को संतुलित रखता है और धीमे-धीमे सारी समस्याओं का सॉल्व कर देता और हमारा भक्तों का प्रणाम है वहां किशोरावस्था में ज्यादा किया ही जाना चाहिए जिनके लिए मैं पड़ी मजबूत होते हैं बस रात आराम से और थकावट भी बहुत जल्दी आती है 4 से 5 मिनट में भरा प्रणाम करने से बहुत ज्यादा खराब हो जाती है और 4 से 5 मिनट कपालभाति करने से कोई थकावट ना होती है इसलिए हां कपालभाति तो बस सर काम है दोनों में ध्यान करें मस्त इसके लिए सरकार बहुत ही लाभकारी है सर्दी जुकाम खांसी के लिए वस्त्र का बहुत थी सुहाग कारी बनाया है और छाती में दर्द होता हो तभी बसर का बहुत ही लाभकारी है

kapalbhati hamare saare sharir ko santulit rakhta hai aur dhime dhime saari samasyaon ka solve kar deta aur hamara bhakton ka pranam hai wahan kishoraavastha me zyada kiya hi jana chahiye jinke liye main padi majboot hote hain bus raat aaram se aur thakawat bhi bahut jaldi aati hai 4 se 5 minute me bhara pranam karne se bahut zyada kharab ho jaati hai aur 4 se 5 minute kapalbhati karne se koi thakawat na hoti hai isliye haan kapalbhati toh bus sir kaam hai dono me dhyan kare mast iske liye sarkar bahut hi labhakari hai sardi zukam khansi ke liye vastra ka bahut thi suhaag kaari banaya hai aur chhati me dard hota ho tabhi basar ka bahut hi labhakari hai

कपालभाति हमारे सारे शरीर को संतुलित रखता है और धीमे-धीमे सारी समस्याओं का सॉल्व कर देता और

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Manmohan Bhutada

Founder & Director - Yog Prayog

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Dr.Babita Singh

Yoga Master Trainer & Healer, Founder Director, Kaivalyam:The Yoga Academy

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अजी कपालभाति और भस्त्रिका प्राणायाम में अंतर इतना ही होता है कि कपालभाति क्रिया में आपला फ्रेंड आप एडमिन के द्वारा किया जाता है जिसका फोर्सफुल एग्जैगरेशन उसके द्वारा होता है और बस्ती का में एक दिलेशन फोर्सफुली होता है जिसमें लाफ एंड आफ एब्डोमेन का कोई पार्ट नहीं रहता है बस दोनों में इतना ही अंतर है धन्यवाद

aji kapalbhati aur bhastrika pranayaam me antar itna hi hota hai ki kapalbhati kriya me apla friend aap admin ke dwara kiya jata hai jiska forceful egjaigareshan uske dwara hota hai aur basti ka me ek dileshan forcefully hota hai jisme laugh and of ebdomen ka koi part nahi rehta hai bus dono me itna hi antar hai dhanyavad

अजी कपालभाति और भस्त्रिका प्राणायाम में अंतर इतना ही होता है कि कपालभाति क्रिया में आपला फ

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Neelam Chauhan

Yoga Teacher

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आपका प्रश्न है कपालभाति और बस्ती का उत्तर आपने पूछा है तो कपालभाति भस्त्रिका प्राणायाम में यह सबसे बड़ा अंतर है कि भस्त्रिका में हम सांस को उतना ही तेजी से अंदर भी लेते हैं जितना हम बाहर छोड़ते हैं और चक्की कपालभाती में हम सिर्फ अस्तित्व चकरिया करते हैं यानी कि हम से पश्चिम सांस को बाहर छोड़ते हैं तो सबसे बड़ा अंतर तो यही है

aapka prashna hai kapalbhati aur basti ka uttar aapne poocha hai toh kapalbhati bhastrika pranayaam me yah sabse bada antar hai ki bhastrika me hum saans ko utana hi teji se andar bhi lete hain jitna hum bahar chodte hain aur chakki kapalbhati me hum sirf astitva chakriya karte hain yani ki hum se paschim saans ko bahar chodte hain toh sabse bada antar toh yahi hai

आपका प्रश्न है कपालभाति और बस्ती का उत्तर आपने पूछा है तो कपालभाति भस्त्रिका प्राणायाम में

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Vijay Sharma

Yoga Trainer (P.G.D.Y.)

2:06
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कपालभाती में पेट को कैसे अंदर चोर के साथ अंदर करते हैं और नाक से सांस को बाहर निकालते हैं जिसको बात कसम कहते हैं और मस्त गाने सिंपल पैरों को बाहर निकालना पूर्व प्रेषित करें पोस्टर दोनों में चोट लगती है कपालभाति करने से 200 बीमारी ठीक होती है गैस की प्रॉब्लम एसिडिटी खत्म होती है बॉडी डिटॉक्स होती है हाथ मजबूत बनते हैं एसोसिएशन बनता है हिमोग्लोबिन सही मात्रा में बना रहता है वैसे भी कम होती है बीवी नो 1 की परेशानी खत्म हो जाती है पाई जाती है उसकी तमाम बीमारियां दूर होती टेलीविजन की जो भी परेशानी है वह खत्म होती ऑक्सीजन की भरपूर मात्रा शरीर में बॉडी पार्ट्स में कौन जाती है बस प्रदर्शन करना होता है बॉडी चंद्र वह भस्म हो जाती है जिस तरीके से पोस्ट सिंह रिंगटोन सिंह के साथ खत्म होते हैं भक्ति गाना एक से यह कहा जाता है कि हंसी भी सूख जाता है बहुत बड़ा अंतर भक्ति गाने कपालभाति

kapalbhati me pet ko kaise andar chor ke saath andar karte hain aur nak se saans ko bahar nikalate hain jisko baat kasam kehte hain aur mast gaane simple pairon ko bahar nikalna purv preshit kare poster dono me chot lagti hai kapalbhati karne se 200 bimari theek hoti hai gas ki problem acidity khatam hoti hai body detox hoti hai hath majboot bante hain association banta hai Hemoglobin sahi matra me bana rehta hai waise bhi kam hoti hai biwi no 1 ki pareshani khatam ho jaati hai payi jaati hai uski tamaam bimariyan dur hoti television ki jo bhi pareshani hai vaah khatam hoti oxygen ki bharpur matra sharir me body parts me kaun jaati hai bus pradarshan karna hota hai body chandra vaah bhasm ho jaati hai jis tarike se post Singh ringtone Singh ke saath khatam hote hain bhakti gaana ek se yah kaha jata hai ki hansi bhi sukh jata hai bahut bada antar bhakti gaane kapalbhati

कपालभाती में पेट को कैसे अंदर चोर के साथ अंदर करते हैं और नाक से सांस को बाहर निकालते हैं

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Pradeep Solanki

Corporate Yoga Consultant

1:12
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आपने पत्रिका लिखा है पत्रिका की जगह भस्त्रिका होगा तो कपालभाति एक शर्ट कर्म है बस तरीका एक प्रणाम है भस्त्रिका में नॉर्मल ही आप लोहार की भौंकने की भांति सांस लेते हैं और आपका इन हेलो रंग से लेने सांस लेना और छोड़ना बराबर होता है यानी कि जितना फूड से अपने सांस लिया उतना ही 4 से आपने छोड़ ना होता है जैसे की आवाज सुनी एक बार में सांस लेकर दिखाता हूं आपको यह भस्त्रिका कपालभाति की बात तो कपालभाति एक शर्ट कर जिसमें सिर्फ सांस छोड़ने पर जोर दिया जाता है जिसकी स्टार्टिंग नाक से होती है और उसके रिस्पांस में पेट अंदर जाता है उसमें हम सांस नहीं लेते तो सांस लेने पर छोड़ने छोड़ने पर लगाना इस तरीके से ध्यान से सुनिए तू कपालभाति में सिर्फ जिसे आपने देखा सिर्फ सांस छोड़ने की आवाज आ रही है बस तरीका में सांस लेने और छोड़ने दोनों की आवाज आती है बस तरीका बहुत फास्ट करते एक प्रणाम है कपालभाति एक शर्ट करो

aapne patrika likha hai patrika ki jagah bhastrika hoga toh kapalbhati ek shirt karm hai bus tarika ek pranam hai bhastrika me normal hi aap lohar ki bhaunkane ki bhanti saans lete hain aur aapka in hello rang se lene saans lena aur chhodna barabar hota hai yani ki jitna food se apne saans liya utana hi 4 se aapne chhod na hota hai jaise ki awaaz suni ek baar me saans lekar dikhaata hoon aapko yah bhastrika kapalbhati ki baat toh kapalbhati ek shirt kar jisme sirf saans chodne par jor diya jata hai jiski starting nak se hoti hai aur uske response me pet andar jata hai usme hum saans nahi lete toh saans lene par chodne chodne par lagana is tarike se dhyan se suniye tu kapalbhati me sirf jise aapne dekha sirf saans chodne ki awaaz aa rahi hai bus tarika me saans lene aur chodne dono ki awaaz aati hai bus tarika bahut fast karte ek pranam hai kapalbhati ek shirt karo

आपने पत्रिका लिखा है पत्रिका की जगह भस्त्रिका होगा तो कपालभाति एक शर्ट कर्म है बस तरीका एक

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Narendar Gupta

प्राकृतिक योगाथैरिपिस्ट एवं योगा शिक्षक,फीजीयोथैरीपिस्ट

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S Bajpay

Yoga Expert | Beautician & Gharelu Nuskhe Expert

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राम जी की आपका पर्सनल कपालभाति योग भस्त्रिका प्राणायाम में क्या आपको कपालभाति बहुत कम है करती इंसान अंदर लेती है बहुत तेजी से तो यह है छोड़ते और जूते भी हैं

ram ji ki aapka personal kapalbhati yog bhastrika pranayaam me kya aapko kapalbhati bahut kam hai karti insaan andar leti hai bahut teji se toh yah hai chodte aur joote bhi hain

राम जी की आपका पर्सनल कपालभाति योग भस्त्रिका प्राणायाम में क्या आपको कपालभाति बहुत कम है क

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आपके सवाल है कपालभाति और भस्त्रिका प्राणायाम में क्या अंतर अंतर बताने से पहले मैं एक उनका समानता है उनका जो कवन चीज है उसके बारे में बता दो दोनों प्रणब को हिटिंग प्रणाम कही जाती है और दोनों प्रणाम करने से शरीर में थोड़ा उदास जनरेट होती है होती है शरीर के अंदर और इसमें दोनों प्रणाम मैं आपका टक्शन शरीर से अच्छा खासा रिलीज होता है अभी थोड़ा छूटता है अब तक भी जाते हैं तो इस प्राणायाम को सब को दिया नहीं जाता दोनों प्रणब को किस कौन आदमी कर सकते हैं कौन आज नहीं कर सकते उसको देख कर दी जाती तो यह कमल से दिया नहीं जाता और अब बाकी तो प्रणब से सोनू लंबे-लंबे सा देश करता है ना यह पानी भर जाए ऐसा नहीं है कौन कर सकता है कौन नहीं कर सकते उसको देख कर दी जाती है और अभी बात रहा कि क्या अंतर है दिखे कपालभाति प्राणायाम जो है वह है प्रणाम आपको यह महसूस करनी होगी और जब आप कपालभाति प्राणायाम करते हैं तो आप सिनाक्षी फूंक रहे हैं और कोई आपको कैंडल लाइट आपको मोमबत्ती आपकी नाक के सामने जल रही है उस बाप नाक से खून कर बुझा रहे हैं यह मैसेज करके आपको करना होगा इसे करना क्या पड़ता है इसमें तो सांस लेना और छोड़ना जो बिजी होता है उसमें काफी अंतर होता है जिसे आप सांस छोड़ने के ऊपर ध्यान देना पड़ेगा आपको मतलब आपकी एक्टिवेशन अब से छोड़ते हैं उसको अब फोर्सफुली छोड़ेंगे नाक से और जो सांस लेते हैं ऑटोमेटिकली मतलब तहसील होता है और स्वतंत्रता आपके अंदर जाएगा ना के अंदर जाएगा तो एक पल भर्ती की सबसे अहम बात होती है हम मैसेज करेंगे ना कि हम पूछ रहे हैं और कोई मोमबत्ती बुझाने के लिए इसमें क्या होता है हमारा पेट अंदर की तरफ जाता है और सांस बाहर निकलता है और जब बाहर निकलता है फोर्सफुली निकलता है तो हम को खुश करते हैं सांस छोड़ने के उपाय और स्वतंत्रता हमारे नाक के अंदर फिर से सांस अंदर जाती है तो यह चीज होती है कपालभाति भस्त्रिका मैं थोड़ा अलग है अफ्रीका में क्या है क्वाली फोर्सफुल होता है और दोनों हड्डी होता है कोई आती एक्टिवेट पास नहीं होता जिस तरह कपालभाति में आती वैक्योलेशन राशि भी नहीं सुनता रहा इसमें लेकिन जो नोटिफिकेशन भी होता है तो हम इसमें करते क्या हैं हमारा लो भर्ती करते हैं सांस लेते हैं और से छोड़ते हैं कि फोर्सफुली तो दोनों एक वाली फोर्सफुली रहता है बस हम तो कपालभाति का जो टारगेट रहता है हम अब दमन को ताकत करते हैं तरीका जो प्रणाम करते हैं हमारा देश हमारा लंगड़ा हो गया चलो ठीक होता है आपका मोटापा कम है पेट का और आपका हेल्थ बढ़ता है उसका कैपेसिटी बढ़ता है और धन्यवाद

aapke sawaal hai kapalbhati aur bhastrika pranayaam me kya antar antar batane se pehle main ek unka samanata hai unka jo coven cheez hai uske bare me bata do dono pranab ko hitting pranam kahi jaati hai aur dono pranam karne se sharir me thoda udaas generate hoti hai hoti hai sharir ke andar aur isme dono pranam main aapka takshan sharir se accha khasa release hota hai abhi thoda chhutataa hai ab tak bhi jaate hain toh is pranayaam ko sab ko diya nahi jata dono pranab ko kis kaun aadmi kar sakte hain kaun aaj nahi kar sakte usko dekh kar di jaati toh yah kamal se diya nahi jata aur ab baki toh pranab se sonu lambe lambe sa desh karta hai na yah paani bhar jaaye aisa nahi hai kaun kar sakta hai kaun nahi kar sakte usko dekh kar di jaati hai aur abhi baat raha ki kya antar hai dikhe kapalbhati pranayaam jo hai vaah hai pranam aapko yah mehsus karni hogi aur jab aap kapalbhati pranayaam karte hain toh aap sinakshi phoonk rahe hain aur koi aapko Candle light aapko mombatti aapki nak ke saamne jal rahi hai us baap nak se khoon kar bujha rahe hain yah massage karke aapko karna hoga ise karna kya padta hai isme toh saans lena aur chhodna jo busy hota hai usme kaafi antar hota hai jise aap saans chodne ke upar dhyan dena padega aapko matlab aapki activation ab se chodte hain usko ab forcefully chodenge nak se aur jo saans lete hain atometikli matlab tehsil hota hai aur swatantrata aapke andar jaega na ke andar jaega toh ek pal bharti ki sabse aham baat hoti hai hum massage karenge na ki hum puch rahe hain aur koi mombatti bujhane ke liye isme kya hota hai hamara pet andar ki taraf jata hai aur saans bahar nikalta hai aur jab bahar nikalta hai forcefully nikalta hai toh hum ko khush karte hain saans chodne ke upay aur swatantrata hamare nak ke andar phir se saans andar jaati hai toh yah cheez hoti hai kapalbhati bhastrika main thoda alag hai africa me kya hai kwali forceful hota hai aur dono haddi hota hai koi aati activate paas nahi hota jis tarah kapalbhati me aati vaikyoleshan rashi bhi nahi sunta raha isme lekin jo notification bhi hota hai toh hum isme karte kya hain hamara lo bharti karte hain saans lete hain aur se chodte hain ki forcefully toh dono ek wali forcefully rehta hai bus hum toh kapalbhati ka jo target rehta hai hum ab daman ko takat karte hain tarika jo pranam karte hain hamara desh hamara langda ho gaya chalo theek hota hai aapka motapa kam hai pet ka aur aapka health badhta hai uska capacity badhta hai aur dhanyavad

आपके सवाल है कपालभाति और भस्त्रिका प्राणायाम में क्या अंतर अंतर बताने से पहले मैं एक उनका

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Anil Ramola

Yoga Instructor | Engineer

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Anshu Sarkar

Founder & Director, Sarkar Yog Academy

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सबसे पहले तो आप को मेरा नमस्कार आप का सवाल है कपालभाति भस्त्रिका प्राणायाम में क्या अंतर है कपालभाति प्राणायाम आप नाक से लेकर नाक से छोड़ते हैं दोनों नाक से सांस लेकर दो नाक से सांस छोड़ते और बद्री का मुंह से लेकर मुंह से छोड़ते हैं तो कपालभाति और भक्ति का में यही अंतर है धन्यवाद

sabse pehle toh aap ko mera namaskar aap ka sawaal hai kapalbhati bhastrika pranayaam me kya antar hai kapalbhati pranayaam aap nak se lekar nak se chodte hain dono nak se saans lekar do nak se saans chodte aur badri ka mooh se lekar mooh se chodte hain toh kapalbhati aur bhakti ka me yahi antar hai dhanyavad

सबसे पहले तो आप को मेरा नमस्कार आप का सवाल है कपालभाति भस्त्रिका प्राणायाम में क्या अंतर

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Pankaj Sharma

Yoga Instructor

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कपालभाति प्राणायाम आपके कपाल में चमक लाता है आपकी बॉडी को बैलेंस करता है और भस्त्रिका प्राणायाम आपके ऑक्सीजन लेवल को अच्छा करता है यही अंतर आपके शरीर में जितने ऑक्सीजन है कि कमी आ जाती है उसको पूर्ति करता है जस्टिका

kapalbhati pranayaam aapke kapal me chamak lata hai aapki body ko balance karta hai aur bhastrika pranayaam aapke oxygen level ko accha karta hai yahi antar aapke sharir me jitne oxygen hai ki kami aa jaati hai usko purti karta hai jastika

कपालभाति प्राणायाम आपके कपाल में चमक लाता है आपकी बॉडी को बैलेंस करता है और भस्त्रिका प्रा

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Shyam Vispute

Yoga Instructor

0:55
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जी हां कपालभाति भस्त्रिका में बहुत अंतर है कपालभाति प्राणायाम क्या करते हम सांस को बाहर छोड़ते हैं और थोड़ा सा पेट को मंदिर खींचते हैं कपालभाति में सांस लेते नहीं है सिर्फ सांस को बाहर छोड़ते हैं सांस को बाहर छोड़ते हैं झटके से और थोड़ा सा पेट अंदर लेते हैं अंदर लेते हैं जितना हो सके उतना पेट अंदर लेते जब हम सांस को बाहर छोड़ दे तब ठीक है इसके विपरीत जब हम जब हम दोस्ती का प्रणाम करते तो उसमें हम सांस लेते भी हो छोड़ते भी है उसमें पेट नहीं लाते हैं और फेफड़ों से सांस लेते थे प्रोसेशन छोड़ते हैं जितनी सांस अंदर लेते उतनी संस्था छोड़ते हैं जितनी जोर से सांस अंदर इतनी जोर से सांस तो यह दोनों में फर्क है दोनों प्राणायाम कपालभाती में सिर्फ ना उसको बाहर छोड़ते हुए पेट को अंदर लेते हैं और वृतिका में सांस लेती थी और सांस छोड़ते भी है दोनों चीज और भर्ती का में पेट का कोई सवाल ही पैदा नहीं तो क्योंकि फेफड़ों से साफ की जाती है ऐसे ही फर्क है दोनों में जयगुरुदेव

ji haan kapalbhati bhastrika me bahut antar hai kapalbhati pranayaam kya karte hum saans ko bahar chodte hain aur thoda sa pet ko mandir khichte hain kapalbhati me saans lete nahi hai sirf saans ko bahar chodte hain saans ko bahar chodte hain jhatake se aur thoda sa pet andar lete hain andar lete hain jitna ho sake utana pet andar lete jab hum saans ko bahar chhod de tab theek hai iske viprit jab hum jab hum dosti ka pranam karte toh usme hum saans lete bhi ho chodte bhi hai usme pet nahi laate hain aur phephadon se saans lete the procession chodte hain jitni saans andar lete utani sanstha chodte hain jitni jor se saans andar itni jor se saans toh yah dono me fark hai dono pranayaam kapalbhati me sirf na usko bahar chodte hue pet ko andar lete hain aur vritika me saans leti thi aur saans chodte bhi hai dono cheez aur bharti ka me pet ka koi sawaal hi paida nahi toh kyonki phephadon se saaf ki jaati hai aise hi fark hai dono me jaigurudev

जी हां कपालभाति भस्त्रिका में बहुत अंतर है कपालभाति प्राणायाम क्या करते हम सांस को बाहर छो

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Rekha Agarwal

Yoga Teacher

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प्रशंसा का मैच में कपालभाति भस्त्रिका प्राणायाम में क्या अंतर है कपालभाति पेट का प्रयास है कपालभाति करने से किसी प्रकार के पगलू नहीं होती ऐसे पेट की चर्बी को कम करने में बहुत ही आगे कारागार शब्द होता है भस्त्रिका प्राणायाम फेफड़ों का अभ्यास है या महाराष्ट्र लेवल बढ़ा देता है यह लॉक सीजन के लिए मन भर जाता है चारभुजा बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है यही अंतर है कपालभाति भस्त्रिका प्राणायाम धन्यवाद

prashansa ka match me kapalbhati bhastrika pranayaam me kya antar hai kapalbhati pet ka prayas hai kapalbhati karne se kisi prakar ke pagalu nahi hoti aise pet ki charbi ko kam karne me bahut hi aage karagar shabd hota hai bhastrika pranayaam phephadon ka abhyas hai ya maharashtra level badha deta hai yah lock season ke liye man bhar jata hai charbhuja badhti hai rog pratirodhak kshamta badhti hai yahi antar hai kapalbhati bhastrika pranayaam dhanyavad

प्रशंसा का मैच में कपालभाति भस्त्रिका प्राणायाम में क्या अंतर है कपालभाति पेट का प्रयास है

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Dharminder Kumar

Yoga Trainer

1:06
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आपने पूछा कि पार्वती और बशीर का में प्राणायाम में क्या अंतर है जब पार्वती करते हैं तो हम पेट को पीछे करते हुए श्वास को बाहर छोड़ते हैं लेकिन बस सिरका में श्वास को पूरे जोर से अंदर भरते हैं पूरे जोर से छोड़ते पार्वती में शनि करते बस सिरका में फेफड़ों को खिलाते हैं और छोड़ते हैं पार्वती में जब छोड़ते हैं तो पेट को पीछे करते हुए स्वास को झटके से छोड़ते हैं लेकिन श्वास को नेट कैसे बढ़ते नहीं बस तरीका में श्वास पूरे जोर से लेते हैं पूरे जोर से छोड़ते हैं जो बीपी के हाई बीपी वाले हैं पेशेंट है उनके लिए बस सिरका करना वर्जित होता है पुराना कपालभाति कर सकते हैं धन्यवाद

aapne poocha ki parvati aur bashir ka mein pranayaam mein kya antar hai jab parvati karte hain toh hum pet ko peeche karte hue swas ko bahar chodte hain lekin bus sirka mein swas ko poore jor se andar bharte hain poore jor se chodte parvati mein shani karte bus sirka mein phephadon ko khilaate hain aur chodte hain parvati mein jab chodte hain toh pet ko peeche karte hue swas ko jhatake se chodte hain lekin swas ko net kaise badhte nahi bus tarika mein swas poore jor se lete hain poore jor se chodte hain jo BP ke high BP waale hain patient hai unke liye bus sirka karna varjit hota hai purana kapalbhati kar sakte hain dhanyavad

आपने पूछा कि पार्वती और बशीर का में प्राणायाम में क्या अंतर है जब पार्वती करते हैं तो हम प

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हरिओम सभी साधक भाइयों की अंतः करण में विराजमान उस सत्ता को हरिओम दोस्तों आपका प्रश्न कपालभाति और बच्ची का पढ़ाया में क्या अंतर है कपालभाति में सास को छोड़ा जाता है जबकि पत्रिका पढ़ाया में आपको लेना और छोड़ना यह दोनों होता है

hariom sabhi sadhak bhaiyo ki antah karan mein viraajamaan us satta ko hariom doston aapka prashna kapalbhati aur bachi ka padhaya mein kya antar hai kapalbhati mein saas ko choda jata hai jabki patrika padhaya mein aapko lena aur chhodna yah dono hota hai

हरिओम सभी साधक भाइयों की अंतः करण में विराजमान उस सत्ता को हरिओम दोस्तों आपका प्रश्न कपालभ

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Yog Guru Gyan Ranjan Maharaj

Founder & Director - Kashyap Yogpith

2:01
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आपका क्वेश्चन है कपालभाति और बस्ती में क्या अंतर है तो देखी कपालभाति पेट की यह धरती का जो है उस संपूर्ण शरीर की क्रिया कपालभाति करने से सिर्फ पेट ही प्रभावित होता है लेकिन अफ्रीका करने से कमर की संपूर्ण ऊपरी भाग प्रभावित होता है कपालभाती अगर आपका तो पेट बहुत ज्यादा निकल गया अतिरिक्त चर्बी जम गई हो उसे कम करने के लिए किया जाता है भाभी का पेट के समस्त अंदरूनी जो अवयव इंटरनल ऑर्गन उसे प्रभावित करता है तत्पश्चात मृतिका का प्रभाव हमारे मस्तिष्क भेजो होता है दोनों में काफी अंतर है धन्यवाद

aapka question hai kapalbhati aur basti mein kya antar hai toh dekhi kapalbhati pet ki yah dharti ka jo hai us sampurna sharir ki kriya kapalbhati karne se sirf pet hi prabhavit hota hai lekin africa karne se kamar ki sampurna upari bhag prabhavit hota hai kapalbhati agar aapka toh pet bahut zyada nikal gaya atirikt charbi jam gayi ho use kam karne ke liye kiya jata hai bhabhi ka pet ke samast andaruni jo avyav internal organ use prabhavit karta hai tatpashchat mritika ka prabhav hamare mastishk bhejo hota hai dono mein kaafi antar hai dhanyavad

आपका क्वेश्चन है कपालभाति और बस्ती में क्या अंतर है तो देखी कपालभाति पेट की यह धरती का जो

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Indrajit Chakraborty

Yoga Instructor

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अगरबत्ती में बहुत कपालभाति हम लोग को असली हाउसिंग करते हैं अफ्रीका में ही नहीं आउटिंग दोनों होता है कपालभाति डिड यू सिंग होता है उसके बाद ट्रैक लेवल कम होगा दोनों का बहुत ही सजा बन ब्रिगेड पत्रिका प्रिंटिंग का बंदर बंदर ने कितनी ऑक्सीजन लेवल को बहुत बुरा बढ़ा देता है दोनों मिलकर काम करना चाहिए शादी को बढ़ा दे

agarbatti mein bahut kapalbhati hum log ko asli housing karte hain africa mein hi nahi outing dono hota hai kapalbhati did you sing hota hai uske baad track level kam hoga dono ka bahut hi saza ban brigade patrika printing ka bandar bandar ne kitni oxygen level ko bahut bura badha deta hai dono milkar kaam karna chahiye shadi ko badha de

अगरबत्ती में बहुत कपालभाति हम लोग को असली हाउसिंग करते हैं अफ्रीका में ही नहीं आउटिंग दोनो

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Yasmeen Bano

Yoga Instructor at Divine Yoga Center | Experience of 3 years | Gwalior

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आज हम जानेंगे कपालभाति भस्त्रिका प्राणायाम में क्या अंतर है तो सबसे पहले हम कपालभाति के बारे में जानेंगे कपालभाती में हम केवल स्वास्थ्य को छोड़ते छोड़ते हैं लेना सुताई होता है इसमें एक्टिवेशन होता है और पैसे इनहेलेशन होता है कपालभाति में स्वास्थ्य स्वास्थ्य क्रिया उधर से की जाती है कपालभाति का प्रयोग कर हम अपनी दोनों नारियों को शुद्ध कर सकते हैं तथा उन नारियों में प्राण के प्रवाह को संतुलित बनाए जाते हैं अब हम जानेंगे भर्ती कराया भर्ती कराया सांचौर प्रवास को दोनों दोनों को बलपूर्वक लिया जाता है और छोड़ा जाता है सांचौर पर विश्वास करें तो जो होता है वह एक समान होता है जिसे एग्जांपल की तौर पर हम अगर 2 सेकंड में श्वास लेते हैं तो 2 सेकंड में विश्वास को छोड़ेंगे इसमें स्वार्थ और विश्वास की जो क्रिया होती है वह वक्त से होती है भक्ति का प्राइम का प्रयोग कर हम फेफड़ों की क्षमता को बेहतर बना सकते हैं यह तो हुआ कपालभाति भस्त्रिका प्राणायाम में अंतर अब हम यह भी जानेंगे कि नहीं किन किन लोगों को नहीं करना चाहिए जैसे कि जिन हृदय रोग रोग है हाई बीपी है जिन्हें चक्कर आते हैं मिर्गी के दौरे पड़ते हैं जिन हर्निया गैस्ट्रिक अल्सर जैसी बीमारियां हैं उन व्यक्तियों को इन अभ्यास को इस अभ्यास को नहीं करना चाहिए धन्यवाद

aaj hum jaanege kapalbhati bhastrika pranayaam mein kya antar hai toh sabse pehle hum kapalbhati ke bare mein jaanege kapalbhati mein hum keval swasthya ko chodte chodte hain lena sutai hota hai isme activation hota hai aur paise inaheleshan hota hai kapalbhati mein swasthya swasthya kriya udhar se ki jaati hai kapalbhati ka prayog kar hum apni dono nariyon ko shudh kar sakte hain tatha un nariyon mein praan ke pravah ko santulit banaye jaate hain ab hum jaanege bharti karaya bharti karaya sanchor pravas ko dono dono ko balapurvak liya jata hai aur choda jata hai sanchor par vishwas kare toh jo hota hai vaah ek saman hota hai jise example ki taur par hum agar 2 second mein swas lete hain toh 2 second mein vishwas ko chodenge isme swarth aur vishwas ki jo kriya hoti hai vaah waqt se hoti hai bhakti ka prime ka prayog kar hum phephadon ki kshamta ko behtar bana sakte hain yah toh hua kapalbhati bhastrika pranayaam mein antar ab hum yah bhi jaanege ki nahi kin kin logo ko nahi karna chahiye jaise ki jin hriday rog rog hai high BP hai jinhen chakkar aate hain mirgi ke daure padte hain jin hernia gastric Ulcer jaisi bimariyan hain un vyaktiyon ko in abhyas ko is abhyas ko nahi karna chahiye dhanyavad

आज हम जानेंगे कपालभाति भस्त्रिका प्राणायाम में क्या अंतर है तो सबसे पहले हम कपालभाति के बा

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Jivananda Nitai Das

Yoga Instructor

0:31
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तो कपालभाति में हम लोगों को वह करते हैं ना सिर्फ विदाउट करते हैं और भविष्य का में फर्स्ट बिल्डिंग दिखाओ जो उत्पाद क्या बोलते हैं तो वह घटिया हम लोग भविष्य में करते हैं लेकिन जो कपालभाति होता है उसमें सिर्फ विदाउट करते हैं उसमें इन नहीं होता लेकिन भविष्य में दोनों चलता है कि ब्रिटेन विदाउट उपहास सेटिंग बताओ जिसका उद्घाटन ते हैं लेकिन कपालभाति मैसेज विदाउट रहता है उसमें इन साइंस इन हेल नहीं होता

toh kapalbhati mein hum logo ko vaah karte hain na sirf without karte hain aur bhavishya ka mein first building dikhaao jo utpaad kya bolte hain toh vaah ghatiya hum log bhavishya mein karte hain lekin jo kapalbhati hota hai usme sirf without karte hain usme in nahi hota lekin bhavishya mein dono chalta hai ki britain without upahas setting batao jiska udghatan te hain lekin kapalbhati massage without rehta hai usme in science in hell nahi hota

तो कपालभाति में हम लोगों को वह करते हैं ना सिर्फ विदाउट करते हैं और भविष्य का में फर्स्ट ब

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Yogacharya Aaditya

Yoga Instructor

1:43
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कपाल भारती और भस्त्रिका प्राणायाम में बहुत बड़ा बेसिक अंतर है कपालभाति प्राणायाम में जहां आपको छक्के के साथ सांस को बाहर छोड़ना होता है और उसी झटके के साथ श्वास बाहर छोड़ते हुए पेट को हल्का सा अंदर ले जाना होता है यह दोनों के लिए एकदम साथ साथ हम साथ साथ बाहर छोड़ना और उसी सांस बाहर छोड़ने के साथ ही पेट को अंदर जाना यह दो क्रियाएं साथ-साथ करते हुए 1 सेकंड में 1 सेकंड एपिसोड इस तरह से आपको कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास करना होता है वही भस्त्रिका प्राणायाम जो है उसमें अधिकतम सांस लेना होता है और संपूर्ण स्वास्थ्य को बाहर छोड़ना होता है अर्थात लंच का अधिकतम उपयोग करना होता है यह सामान्य ब्रीडिंग भी हो सकती है और उसमें आप अपने भुजा का भी इस्तेमाल कर सकते हैं भुजाओं का भी उपयोग हो सकता है जैसे सांस लेते हुए दोनों भुजाओं को ऊपर उठाएं और अधिकतम सांस लेने का प्रयास करें और सांस बाहर छोड़ते हुए दोनों भुजाओं को नीचे की ओर लेकर आए कंधों से पीछे की ओर लेकर जाएं कोनी को और संपूर्ण श्वास को बाहर छोड़े तो इस तरह से दोनों में बहुत बड़ा अंतर है जहां कपालभाति प्राणायाम आपके पाचन तंत्र से लेकर के आपके किडनी लिवर पेनक्रियाज इंटेस्टाइन इत्यादि के लिए लाभकारी है वही भस्त्रिका आप के लंच के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी है और साथ ही साथ आपके बॉडी में ऑक्सीजन का लेवल बढ़ाने के लिए बहुत उपयोगी है

kapal bharati aur bhastrika pranayaam mein bahut bada basic antar hai kapalbhati pranayaam mein jaha aapko chakke ke saath saans ko bahar chhodna hota hai aur usi jhatake ke saath swas bahar chodte hue pet ko halka sa andar le jana hota hai yah dono ke liye ekdam saath saath hum saath saath bahar chhodna aur usi saans bahar chodne ke saath hi pet ko andar jana yah do kriyaen saath saath karte hue 1 second mein 1 second episode is tarah se aapko kapalbhati pranayaam ka abhyas karna hota hai wahi bhastrika pranayaam jo hai usme adhiktam saans lena hota hai aur sampurna swasthya ko bahar chhodna hota hai arthat lunch ka adhiktam upyog karna hota hai yah samanya Breeding bhi ho sakti hai aur usme aap apne bhuja ka bhi istemal kar sakte hain bhujaon ka bhi upyog ho sakta hai jaise saans lete hue dono bhujaon ko upar uthaye aur adhiktam saans lene ka prayas kare aur saans bahar chodte hue dono bhujaon ko niche ki aur lekar aaye kandhon se peeche ki aur lekar jaye connie ko aur sampurna swas ko bahar chode toh is tarah se dono mein bahut bada antar hai jaha kapalbhati pranayaam aapke pachan tantra se lekar ke aapke KIDNEY liver penakriyaj intestine ityadi ke liye labhakari hai wahi bhastrika aap ke lunch ke liye sabse zyada upyogi hai aur saath hi saath aapke body mein oxygen ka level badhane ke liye bahut upyogi hai

कपाल भारती और भस्त्रिका प्राणायाम में बहुत बड़ा बेसिक अंतर है कपालभाति प्राणायाम में जहां

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Girijakant Singh

Founder/ President Yog Bharati Foundation Trust

1:13
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आपका प्रश्न है कपालभाति और भस्त्रिका प्राणायाम में क्या अंतर है वैसे इस प्रश्न का जवाब मैं एक बार देवी चुका हूं शायद हो सकता है आपने किसी और ने किया होगा तो सबसे पहले इसका बेसिक अंतर है कि कपालभाति जो है वह एक क्रिया है भाटियों की क्रिया है जो से क्रियाएं हैं और वस्त्र का जो है वह प्राणायाम के अंतर्गत आता है दोनों में बेसिक डिफरेंस तो यही है और दूसरा जो है क्योंकि दोनों समाज के साथ की जाते हैं तो इसमें इन हिल और एक दिल का भी अंतर है सांस लेने और छोड़ने का भी अंतर है कपालभाति प्राणायाम में हम सांस को लगातार बाहर छोड़ते हैं और सूली एग्री करते हैं उसमें इन्हें नहीं करते ऐसा नहीं होता स्वास्थ्य स्वता ही अपने आप आती है और जाती है उसको अंबेडकर के साथ बाहर निकालते रहते हैं जबकि भस्त्रिका प्राणायाम लंबा गहरा श्वास लेना पड़ता है और लंबा गहरा श्वास को छोड़ना पड़ता है या नहीं फुल फुल इन्हें और पौधों में श्वसन और बाकी तो मैं आपको बता चुका हूं कि कपालभाति क्रिया है और वस्त्र का प्रणाम धन्यवाद

aapka prashna hai kapalbhati aur bhastrika pranayaam mein kya antar hai waise is prashna ka jawab main ek baar devi chuka hoon shayad ho sakta hai aapne kisi aur ne kiya hoga toh sabse pehle iska basic antar hai ki kapalbhati jo hai vaah ek kriya hai bhatiyon ki kriya hai jo se kriyaen hain aur vastra ka jo hai vaah pranayaam ke antargat aata hai dono mein basic difference toh yahi hai aur doosra jo hai kyonki dono samaj ke saath ki jaate hain toh isme in hil aur ek dil ka bhi antar hai saans lene aur chodne ka bhi antar hai kapalbhati pranayaam mein hum saans ko lagatar bahar chodte hain aur suli agree karte hain usme inhen nahi karte aisa nahi hota swasthya swata hi apne aap aati hai aur jaati hai usko ambedkar ke saath bahar nikalate rehte hain jabki bhastrika pranayaam lamba gehra swas lena padta hai aur lamba gehra swas ko chhodna padta hai ya nahi full full inhen aur paudho mein shwasan aur baki toh main aapko bata chuka hoon ki kapalbhati kriya hai aur vastra ka pranam dhanyavad

आपका प्रश्न है कपालभाति और भस्त्रिका प्राणायाम में क्या अंतर है वैसे इस प्रश्न का जवाब मैं

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Reena kumari

Yoga Instructor

0:31
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हेलो एवरीवन जरीना युवती ने किया जाता है तो घर जाना है बंदरिया कपालभाति इन्हेल करते हैं पूरी करते हैं सिर्फ वसूली से लिया जाता है यही बात

hello everyone jarina yuvati ne kiya jata hai toh ghar jana hai bandariya kapalbhati inhale karte hain puri karte hain sirf vasuli se liya jata hai yahi baat

हेलो एवरीवन जरीना युवती ने किया जाता है तो घर जाना है बंदरिया कपालभाति इन्हेल करते हैं पूर

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Pardeep

Naturopath

1:05
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कपालभाति प्राणायाम जो पेट की पाचन तंत्र को डाइजेशन सिस्टम को बिल्कुल इंप्रूव करता अगर कोई गांठ हो गया है कहीं भी तो उसको भी खत्म करने का काम करता है और जो किसी का वेट गेन नहीं हो रहा है डिसबैलेंस उनको भी अच्छे से रिपेयर करने का काम करता है और भस्त्रिका जो बोलते हैं यह प्रणब जो होता है कि आप के लंच को नव बहुत ज्यादा बहुत ज्यादा एक्टिवेट करता है और उनको बोलते हैं कि जो आप के लंच मान लीजिए 100 में से 30% ऑक्सीजन ऑब्जर्व कर रहे हैं तो कम से कम 6 मिनट तक उज्जवल करते हैं सुख हंसते हैं औरों 11 सेल्स ऑक्सीजन को बहुत जल्दी पहुंचाते जिससे 240 जो हमारे होते हैं ना डीजलनेट होते हैं और झरने होने लगते हैं और एक शरीर में ऊर्जा का भाव ज्यादा बढ़ने लगता है तो करके देखिए बहुत अच्छा रिजल्ट मिलेंगे और आप कल्पना भी नहीं कर सकते आपकी बॉडी कितना अच्छा इंटूट करेगी आपका सिस्टम लर्न आपका मजबूत होगा उतना ही अच्छा वर्क कर पाएंगे आपको थकान मैसेज बिल्कुल भी नहीं

kapalbhati pranayaam jo pet ki pachan tantra ko digestion system ko bilkul improve karta agar koi ganth ho gaya hai kahin bhi toh usko bhi khatam karne ka kaam karta hai aur jo kisi ka wait gain nahi ho raha hai disbalance unko bhi acche se repair karne ka kaam karta hai aur bhastrika jo bolte hain yah pranab jo hota hai ki aap ke lunch ko nav bahut zyada bahut zyada activate karta hai aur unko bolte hain ki jo aap ke lunch maan lijiye 100 me se 30 oxygen abjarv kar rahe hain toh kam se kam 6 minute tak ujjawal karte hain sukh hansate hain auron 11 sales oxygen ko bahut jaldi pahunchate jisse 240 jo hamare hote hain na dijalanet hote hain aur jharane hone lagte hain aur ek sharir me urja ka bhav zyada badhne lagta hai toh karke dekhiye bahut accha result milenge aur aap kalpana bhi nahi kar sakte aapki body kitna accha intut karegi aapka system learn aapka majboot hoga utana hi accha work kar payenge aapko thakan massage bilkul bhi nahi

कपालभाति प्राणायाम जो पेट की पाचन तंत्र को डाइजेशन सिस्टम को बिल्कुल इंप्रूव करता अगर कोई

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Yog Guru Amit Agrawal Rishiyog

Yoga Acupressure Expert

1:54

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आपका प्रश्न कपालभाति और धरती का प्राणायाम में क्या अंतर है सबसे पहले तो मैं इस शब्द को ठीक कर लूंगा जो आपने भर्ती का लिखा है इसे भस्त्रिका कहते हैं तो आपका प्रश्न है कपालभाति और भस्त्रिका प्राणायाम में क्या अंतर है दिखे कपालभाति और भस्त्रिका बिल्कुल अलग दोनों अभ्यास से दोनों ही प्राणायाम भी कहते हैं और कपालभाति को काफी योगा पुस्तकों में आपको क्रिया भी मिलेगी कपालभाति को किरिया भी कहा है एक शुद्धीकरण की क्रिया है अब hansika1 प्राणायाम है कपालभाति आपका जैसा किसका नाम है कपाल ही आपके सिर के ऊपरी हिस्से में ब्लड की सप्लाई और ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाता है और साथ में जवाब कपालभाति करते हैं तो एब्डोमिनल पैकिंग जो पेट की मांसपेशियां अंदर बाहर होती है आपके पेट से संबंधित ऑर्गन स्वस्थ रहते हैं कि अभ्यास आपके पेट के भी लिए भी और सिर की मस्तिष्क के लिए भी अच्छा अभ्यास है और भस्त्रिका प्राणायाम आपकी फेफड़ों का अभ्यास है जो सीधे-सीधे लंच परफेक्ट करता है आप जानते हैं कि लंच आपके पूरे शरीर में ब्लड सप्लाई और ऑक्सीजन भेजता है इसलिए आपकी पूरी बॉडी की इम्यूनिटी बनाए रखने के लिए भस्त्रिका बहुत अच्छा अभ्यास है भस्त्रिका और कपालभाति अलग अलग तरीके से हर व्यक्ति को कराए जाते हैं यह अभ्यास सही तरीके से सीखने के लिए आप मेरे यूट्यूब चैनल पर जा सकते हैं मेरा यूट्यूब चैनल योग गुरु अमित अग्रवाल ऋषि योग प्रोफाइल पर लिंक दिया हुआ है आप चैनल को सब्सक्राइब करिए और इन अभियानों का सही तरीका सीखिए क्योंकि कोई भी अभ्यास जब तक आप सही तरीके से नहीं करते हैं तब तक बाप को हानि देता है खासतौर से कपालभाति और भस्त्रिका दोनों ही ऐसे अभ्यास हैं कि बहुत से लोग नहीं कर सकते और अगर करते हैं तो उसको किस तरीके से करना चाहिए यह जानना बहुत जरूरी है हरि ओम

aapka prashna kapalbhati aur dharti ka pranayaam mein kya antar hai sabse pehle toh main is shabd ko theek kar lunga jo aapne bharti ka likha hai ise bhastrika kehte hain toh aapka prashna hai kapalbhati aur bhastrika pranayaam mein kya antar hai dikhe kapalbhati aur bhastrika bilkul alag dono abhyas se dono hi pranayaam bhi kehte hain aur kapalbhati ko kaafi yoga pustakon mein aapko kriya bhi milegi kapalbhati ko kiriya bhi kaha hai ek shudhikaran ki kriya hai ab hansika1 pranayaam hai kapalbhati aapka jaisa kiska naam hai kapal hi aapke sir ke upari hisse mein blood ki supply aur oxygen ke sthar ko badhata hai aur saath mein jawab kapalbhati karte hain toh ebdominal packing jo pet ki manspeshiya andar bahar hoti hai aapke pet se sambandhit organ swasthya rehte hain ki abhyas aapke pet ke bhi liye bhi aur sir ki mastishk ke liye bhi accha abhyas hai aur bhastrika pranayaam aapki phephadon ka abhyas hai jo sidhe seedhe lunch perfect karta hai aap jante hain ki lunch aapke poore sharir mein blood supply aur oxygen bhejta hai isliye aapki puri body ki immunity banaye rakhne ke liye bhastrika bahut accha abhyas hai bhastrika aur kapalbhati alag alag tarike se har vyakti ko karae jaate hain yah abhyas sahi tarike se sikhne ke liye aap mere youtube channel par ja sakte hain mera youtube channel yog guru amit agrawal rishi yog profile par link diya hua hai aap channel ko subscribe kariye aur in abhiyaanon ka sahi tarika sikhiye kyonki koi bhi abhyas jab tak aap sahi tarike se nahi karte hain tab tak baap ko hani deta hai khaasataur se kapalbhati aur bhastrika dono hi aise abhyas hain ki bahut se log nahi kar sakte aur agar karte hain toh usko kis tarike se karna chahiye yah janana bahut zaroori hai hari om

आपका प्रश्न कपालभाति और धरती का प्राणायाम में क्या अंतर है सबसे पहले तो मैं इस शब्द को ठीक

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Dr Hemant Yogi

Yoga and Naturopathy

4:53
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कपालभाति ओपेरा चांद तक कपालभाति भस्त्रिका यह दोनों तरफ कपालभाति क्रिया है और सटका मूवी आदेश जो श्री की इच्छा करिया रसगुल्ला मलाई माताजी देशों पर भी आता है इसमें हम सांसों को बाहर छोड़ते हैं पेट से झटका देता है जिसके साथ सांस को बाहर से खा जाता है स्वास्थ्य प्रशासन के पैसों से थोड़े वहां पर और अपने आप साथ जब प्रीत पाल भी फ्रॉड और नाभि के नीचे अंक्शन प्रसारण होगा हम कोशिश करेंगे जबकि साथ यह भी ध्यान रखें जाट धीमी गति से कपालभाति जाना कपालभाती देवल से नीचे का पेट ज्यादा अंक चश्मा की नाभि भी जिनके दीगोद जाए और जो सांस ली और जब पेट अंदर जाएगा तो अपने आप हमारे पेट साफ लेंगे तो उसी जूती साहस की जरूरत है वह कपालभाति अपने आप इतने ही आएगी ज्यादा नहीं लेनी होती है सोना होता पूरा होने पर होता है कपालभाति के लाभ भरत कपालभाति कपालभाति बस्ती भाटी मने चमक को सेट कर की क्रिया में श्री की शादी करता है पेट की शादी करता हाथों की शुद्धि करता है हमारे एडवोकेट स्पेशली होती है एंडोक्राइन सिस्टम सही हो जाता है से निवासी किशन ठीक होता है कब्ज गैस एसिडिटी मिलती है इससे मस्तिष्क में गुरु आता चमक आती है पेट का मस्तिष्क का दोनों का साथ साथ व्यायाम होता था वो का भी होता है वर्षिका आपका सवाल भड़काऊ कपालभाति कैसे करें ऐसी प्ले लोहार होते थे उनकी एयर बैग्स होते थे उनको दबाने सांसों के द्वारा तेज गति से सांसों को लिया जाता है छुड़ाया था जीत परते बीच में लेकिन इसमें यह ध्यान रखें कि आराम आराम से करेंगे तो सांसों में जब तक लचकता नहीं आएगी जब तक कपालभाति तीसरा हरा बांस गीत बात करें मेरा नंबर 751 गहराई तक हर किसी हरसेल खरगपुर तक पहुंचे ऑक्सीजन मर्जी 5:00 बजे वाराणसी बनारस में भी तीन घटिया है वर्षगांठ और तीन विलेन है आराम से लंबा सा भी ब्लड प्रेशर नहीं है तो थोड़ा सा रुक सकते फिर से कोई भी साफ किसी भी रोका नहीं जाता यह ध्यान रखें तेज गति से मध्यम गति से विमर्श का की जाती है और तीव्र गति से कीमती वाले जिम में ताकत है निशुल्क ऑफिस वाले कर सकते किसी योग्य शांत युवाचार्य की शादी का है उसे सीखे उसके बारे में वर्ष का बहुत लाभदायक है पूरा श्वास नलिका हैदराबाद में तेज गति से करें

kapalbhati OPERA chand tak kapalbhati bhastrika yah dono taraf kapalbhati kriya hai aur satka movie aadesh jo shri ki iccha Caria rasgulla malai mataji deshon par bhi aata hai isme hum shanson ko bahar chodte hai pet se jhatka deta hai jiske saath saans ko bahar se kha jata hai swasthya prashasan ke paison se thode wahan par aur apne aap saath jab prateet pal bhi fraud aur nabhi ke niche ankshan prasaran hoga hum koshish karenge jabki saath yah bhi dhyan rakhen jaat dheemi gati se kapalbhati jana kapalbhati deol se niche ka pet zyada ank chashma ki nabhi bhi jinke digod jaaye aur jo saans li aur jab pet andar jaega toh apne aap hamare pet saaf lenge toh usi juti saahas ki zarurat hai vaah kapalbhati apne aap itne hi aayegi zyada nahi leni hoti hai sona hota pura hone par hota hai kapalbhati ke labh Bharat kapalbhati kapalbhati basti bhati mane chamak ko set kar ki kriya mein shri ki shadi karta hai pet ki shadi karta hathon ki shudhi karta hai hamare advocate speshli hoti hai endocrine system sahi ho jata hai se niwasi kishan theek hota hai kabz gas acidity milti hai isse mastishk mein guru aata chamak aati hai pet ka mastishk ka dono ka saath saath vyayam hota tha vo ka bhi hota hai varshika aapka sawaal bhadkau kapalbhati kaise kare aisi play lohar hote the unki air bags hote the unko dabane shanson ke dwara tez gati se shanson ko liya jata hai chudaya tha jeet parate beech mein lekin isme yah dhyan rakhen ki aaram aaram se karenge toh shanson mein jab tak lachkata nahi aayegi jab tak kapalbhati teesra hara bans geet baat kare mera number 751 gehrai tak har kisi harsel kharagpur tak pahuche oxygen marji 5 00 baje varanasi banaras mein bhi teen ghatiya hai varshganth aur teen villain hai aaram se lamba sa bhi blood pressure nahi hai toh thoda sa ruk sakte phir se koi bhi saaf kisi bhi roka nahi jata yah dhyan rakhen tez gati se madhyam gati se vimarsh ka ki jaati hai aur tivra gati se kimti waale gym mein takat hai nishulk office waale kar sakte kisi yogya shaant yuvacharya ki shadi ka hai use sikhe uske bare mein varsh ka bahut labhdayak hai pura swas nalika hyderabad mein tez gati se karen

कपालभाति ओपेरा चांद तक कपालभाति भस्त्रिका यह दोनों तरफ कपालभाति क्रिया है और सटका मूवी आदे

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Kumar Ajit

Yoga Trainer (पतंजलि योग समिति योग शिक्षक)

8:32
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ओम जी नमस्ते मैं कुमार अजीत आप सबका जो प्रश्न है उसको प्रथम प्रयास करता हूं कि ठीक ठीक होता है और साइंटिफिक हॉस्पिटल से प्रश्न करते हैं तो आपका प्रश्न है कपाल भारती और पकने के बाद पिता को आपने क्या लिखा है जयपुर का प्राणायाम में क्या अंतर है तो कपालभाति परिणाम के बारे में बात करें तो सामान्य रूप से यह अंतः श्वसन इस प्रकार से कह सकते हैं कि पूर्वक पर स्वास्थ अर्थात मतलब प्रयास पूर्वक प्रयास पूर्वक वही श्वसन और ट्रेड रिलेशन करा जाता है आप बलपूर्वक पर स्वास्थ्य की प्रक्रिया में महा प्राचीर आप ऐसी जो फार्म को ही कहते हैं मां प्राची रा व अधिक एब्डोमिनल देशों में संकुचन वाहन कुचन क्रिया होती है जिसके फलस्वरूप शुद्ध राष्ट्रीय वयो यहां पर विधियों का तात्पर्य उधर गत जो अंग तंत्र हमसे है जो अभय हैं यहां पर जैसा कि अमाशय अग्नाशय पेनक्रियाज यकृत प्लीहा छोटी आंख कोलन गुरुदेव गर्भाशय इत्यादि उधर में जो भी अंग है उनके बारे में चर्चा परिचर्चा है कि पशु प्रभाव प्रभाव पड़ता है इन सभी पर स्वास्थ्य का जो हम वही स्वसन जो करते हैं उसमें इसका असर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है और उधर कि यह सभी उधर की संकुचन व प्रसारण क्रिया द्वारा इतने सशक्त कार्य सक्षम हो जाते हैं कि शरीर के लिए आवश्यक हर प्रकार के रस की आपूर्ति करने लगते हैं तो अंतः स्रावी ग्रंथियां जो होने वाला चलाओ ना तो बहुत अधिक होता है ना बहुत कम तो इस प्रकार हम कह सकते हैं कि कपालभाती से महाशिवरात्रि पर पुनः पुनः दबाव डालकर अपने शरीर रूपी मशीन को पूर्ण निरोग रखने का महान उपक्रम किया जाता है इसको और अगर विस्तार से हम जाने तो इसमें तो बहुत ही ज्यादा विस्तार से भी हम समझ सकते हैं आप इसे क्रिया के द्वारा चिराग अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है ऐसे में रक्त बलपूर्वक वापस आता है इसका परिणाम क्या होता है तो इसका परिणाम परिणाम स्वरूप हृदय को अभूतपूर्व लाभ होता है जो गति स्पंदन है में प्राणायाम के द्वारा प्राप्त होता है वही आधुनिक चिकित्सा शास्त्र में एक क्या बोलते हैं ईसीपी क्रिया द्वारा संपादित किए मतलब कराया जाता है प्रदेश प्रदेश के मेडिकल राशन एलबीके रीजन रीजन बोलते हैं और इसको कष्ट द्वारा बांधा जाता है तथा प्रति मिनट लगभग 60 बार बाय आधार यानी कि एक्सटर्नल स्ट्रोक भी जाते हैं या आधुनिक चिकित्सा शास्त्र में कोरोनरी यह जो प्लास्टिक बाईपास सर्जरी के विकल्प के रूप में मानी जाती है तो ईसीपी की गति को हृदय स्पंदन गति के समान किया जाता है इससे धमनियों में स्पंदन उत्पन्न होता है और इस जो स्पंदन हो रहा है तो स्पंदन से धनिया में उपस्थित जो भी रुकावटें हैं और वह इस प्रक्रिया को धनिया स्पंदन से धनिया में जो भी उपस्थित अवरोध है वह दूर हो जाते हैं और इसे प्रक्रिया को प्रणाम द्वारा भी प्राप्त कर किया जाता है कि परिणाम के द्वारा भी जमा स्पंदन उत्पन्न करते हैं जो रक्त नलिका उसे अवरोध दूर करने में मदद करते हैं और यह नियमित प्राणायाम करने से विरोध आगे नहीं होते यह तो कपालभाति के बारे में हम जाने इसके और भी विस्तार से भी जान सकते हैं साइंटिफिक रूप से इसमें मुख्य रूप से बातें एआई किस स्वास्थ को इसमें सिर्फ हम विवेचक करते हैं और रिचर्ड से जो हमारे स्पंदन होता है हमारे अंदर उस स्पंदन के द्वारा जो उधर का आए हैं वह सभी ठीक हो जाते हैं उसके ठीक होने से लोगों में विशेष प्रकार से लाभ होता है और अगर हम प्रणाम की बात करें तो बस तेरे दोनों क्रियाएं होती है पूरक और रेचक का तात्पर्य है कि पूरा स्कोर लेना और इसका मतलब है सांस को छोड़ना तो इसकी एक नए नियम के तौर पर करें कि क्लाइव बदलता है के तौर पर किया जाता है सामान्य रूप से भी हम सांस ले रहे हैं छोड़ रहे हैं तो आप कहेंगे कि जेसिका तुम वैसे भी कर रहे हैं बिल्कुल कर रहे हैं लेकिन जब हम इसको एक निश्चित रूप में बैठ कर के जब करते हैं तो सामान्य प्रक्रिया में हम 400 से 500 ईमेल श्वास अंदर अपने से प्रेम करते हैं लेकिन जब हम भस्त्रिका प्राणायाम के नाम से जब जानते हैं और उसको कर रहे होते हैं उसी के लिए बैठे हुए होते हैं उसी के लिए अपना समय दिए हुए होते हैं तो हम 4000 से 5000 ईमेल तक श्वास को अंदर अपने कपड़े में भर लेते हैं जिससे जीवन शक्ति हमको भरपूर मात्रा में मिलता है जिसे प्राणशक्ति हमारे को प्रचुर मात्रा में शरीर को मिल जाता है और इस स्वास्थ्य स्वास्थ्य जुड़ी जुड़ी यह क्रिया शरीर को पूरी तरह से ठीक करता है इसको इस प्रकार से भी हम कह सकते हैं यदि किसी भी प्रकार का असंतुलन यह रिश्ता इस प्राणशक्ति का होता है तो ज्यादा उत्पन्न होती है इसलिए प्राण भूदान के संबंध में प्राण शक्ति का संतुलन बनाए रख सकते हैं इसलिए स्वास्थ्य पर स्वास्थ द्वारा एक अर्थ में यह बहुत बात है अध्यात्मिक रूप से कहें तो स्वास्थ्य पर स्वास्थ द्वारा एक अर्थ में हमें चैतन्य की प्राप्ति हो जाती है इतनी महान ने हमारा उद्देश्य और इसका लाभ है कि जिसकी हम कल्पना तक नहीं करते हैं उससे भी बड़े करके उन्हें भस्त्रिका और कपालभाति से लाभ मिलता है

om ji namaste main kumar ajit aap sabka jo prashna hai usko pratham prayas karta hoon ki theek theek hota hai aur scientific hospital se prashna karte hain toh aapka prashna hai kapal bharati aur pakne ke baad pita ko aapne kya likha hai jaipur ka pranayaam mein kya antar hai toh kapalbhati parinam ke bare mein baat kare toh samanya roop se yah antah shwasan is prakar se keh sakte hain ki purvak par swaasth arthat matlab prayas purvak prayas purvak wahi shwasan aur trade relation kara jata hai aap balapurvak par swasthya ki prakriya mein maha prachir aap aisi jo form ko hi kehte hain maa PRACHI ra va adhik ebdominal deshon mein sankuchan vaahan kuchan kriya hoti hai jiske phalswarup shudh rashtriya vayo yahan par vidhiyon ka tatparya udhar gat jo ang tantra humse hai jo abhay hain yahan par jaisa ki amashay agnashay penakriyaj yakrit pliha choti aankh kolan gurudev garbhashay ityadi udhar mein jo bhi ang hai unke bare mein charcha paricharcha hai ki pashu prabhav prabhav padta hai in sabhi par swasthya ka jo hum wahi svasan jo karte hain usme iska asar bahut accha prabhav padta hai aur udhar ki yah sabhi udhar ki sankuchan va prasaran kriya dwara itne sashakt karya saksham ho jaate hain ki sharir ke liye aavashyak har prakar ke ras ki aapurti karne lagte hain toh antah srawi granthiyan jo hone vala chalao na toh bahut adhik hota hai na bahut kam toh is prakar hum keh sakte hain ki kapalbhati se mahashivaratri par punh punh dabaav dalkar apne sharir rupee machine ko purn nirog rakhne ka mahaan upakram kiya jata hai isko aur agar vistaar se hum jaane toh isme toh bahut hi zyada vistaar se bhi hum samajh sakte hain aap ise kriya ke dwara chirag atirikt dabaav badh jata hai aise mein rakt balapurvak wapas aata hai iska parinam kya hota hai toh iska parinam parinam swaroop hriday ko abhutpurv labh hota hai jo gati spandan hai mein pranayaam ke dwara prapt hota hai wahi aadhunik chikitsa shastra mein ek kya bolte hain ECP kriya dwara sanpadit kiye matlab karaya jata hai pradesh pradesh ke medical raashan LBK reason reason bolte hain aur isko kasht dwara bandha jata hai tatha prati minute lagbhag 60 baar bye aadhaar yani ki external stroke bhi jaate hain ya aadhunik chikitsa shastra mein coronary yah jo plastic bypaas surgery ke vikalp ke roop mein maani jaati hai toh ECP ki gati ko hriday spandan gati ke saman kiya jata hai isse ghamaniyon mein spandan utpann hota hai aur is jo spandan ho raha hai toh spandan se dhania mein upasthit jo bhi rookaavatein hain aur vaah is prakriya ko dhania spandan se dhania mein jo bhi upasthit avarodh hai vaah dur ho jaate hain aur ise prakriya ko pranam dwara bhi prapt kar kiya jata hai ki parinam ke dwara bhi jama spandan utpann karte hain jo rakt nalika use avarodh dur karne mein madad karte hain aur yah niyamit pranayaam karne se virodh aage nahi hote yah toh kapalbhati ke bare mein hum jaane iske aur bhi vistaar se bhi jaan sakte hain scientific roop se isme mukhya roop se batein AI kis swaasth ko isme sirf hum vivechak karte hain aur richard se jo hamare spandan hota hai hamare andar us spandan ke dwara jo udhar ka aaye hain vaah sabhi theek ho jaate hain uske theek hone se logo mein vishesh prakar se labh hota hai aur agar hum pranam ki baat kare toh bus tere dono kriyaen hoti hai purak aur rechak ka tatparya hai ki pura score lena aur iska matlab hai saans ko chhodna toh iski ek naye niyam ke taur par kare ki clive badalta hai ke taur par kiya jata hai samanya roop se bhi hum saans le rahe hain chod rahe hain toh aap kahenge ki jessica tum waise bhi kar rahe hain bilkul kar rahe hain lekin jab hum isko ek nishchit roop mein baith kar ke jab karte hain toh samanya prakriya mein hum 400 se 500 email swas andar apne se prem karte hain lekin jab hum bhastrika pranayaam ke naam se jab jante hain aur usko kar rahe hote hain usi ke liye baithe hue hote hain usi ke liye apna samay diye hue hote hain toh hum 4000 se 5000 email tak swas ko andar apne kapde mein bhar lete hain jisse jeevan shakti hamko bharpur matra mein milta hai jise pranshakti hamare ko prachur matra mein sharir ko mil jata hai aur is swasthya swasthya judi judi yah kriya sharir ko puri tarah se theek karta hai isko is prakar se bhi hum keh sakte hain yadi kisi bhi prakar ka asantulan yah rishta is pranshakti ka hota hai toh zyada utpann hoti hai isliye praan bhoodan ke sambandh mein praan shakti ka santulan banaye rakh sakte hain isliye swasthya par swaasth dwara ek arth mein yah bahut baat hai adhyatmik roop se kahein toh swasthya par swaasth dwara ek arth mein hamein chaitanya ki prapti ho jaati hai itni mahaan ne hamara uddeshya aur iska labh hai ki jiski hum kalpana tak nahi karte hain usse bhi bade karke unhe bhastrika aur kapalbhati se labh milta hai

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Yogacharya Bindu Rani

Yoga Instructor Yog Teacher Yogacharya=yogdham Yog Center In Meerut, 19 Years Experience,yoga Classes At Home Yoga, Mediation Classes, Aerobic Classes ,yoga Classes For Ladies, Power Yoga Classes, Pilates Yoga Classes, Yoga Classes For Children's, Yoga Classes For Pregnant Women, आयुर्वेदाचार्य, नैचुरोपैथी

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ओम सुप्रभात कपालभाति भस्त्रिका प्राणायाम में बहुत अंतर है भर्ती का परिणाम नहीं होता भस्त्रिका प्राणायाम होता है बस्ती का प्रणाम ऊंचा कर रखा लंबी गहरी सांसों के साथ लिया जाता है बस्ती का प्रणाम में लंबे के लिए सांसो को स्वतंत्र सहस तरीके से

om suprabhat kapalbhati bhastrika pranayaam mein bahut antar hai bharti ka parinam nahi hota bhastrika pranayaam hota hai basti ka pranam uncha kar rakha lambi gehri shanson ke saath liya jata hai basti ka pranam mein lambe ke liye saanso ko swatantra sahas tarike se

ओम सुप्रभात कपालभाति भस्त्रिका प्राणायाम में बहुत अंतर है भर्ती का परिणाम नहीं होता भस्त्र

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PANKAJ SHARMA

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कपालभाति प्राणायाम में सांसों के सिर्फ बाहर की ओर निकालते हैं जबकि पति का प्राण में साधु को तेजी से अंदर ले तेजी से बाहर निकाल दो

kapalbhati pranayaam mein shanson ke sirf bahar ki aur nikalate hain jabki pati ka praan mein sadhu ko teji se andar le teji se bahar nikaal do

कपालभाति प्राणायाम में सांसों के सिर्फ बाहर की ओर निकालते हैं जबकि पति का प्राण में साधु क

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