क्या योग, संस्कृति और आध्यात्मिकता के बीच कोई संबंध है?...


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Narendar Gupta

प्राकृतिक योगाथैरिपिस्ट एवं योगा शिक्षक,फीजीयोथैरीपिस्ट

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Vijay Sharma

Yoga Trainer (P.G.D.Y.)

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Bk Ashok Pandit

आध्यात्मिक गुरु

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Dr. R. K. Gupta

Yoga & Nature Care Health center

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Somit Yoga Varanasi

Yoga Trainer and Astrologer

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Girijakant Singh

Founder/ President Yog Bharati Foundation Trust

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

संस्कृति और कोई संबंध जी बिल्कुल संबंध भारतीय संस्कृति और हमारे पुराने ऋषि मुनि हुए उन्होंने ही इस योग को उन्होंने योग को स्थापित किया है महर्षि पतंजलि ने स्थापित किया किया जो आज हम इतनी आसानी से पा रहे हैं संस्कृति और योग में

sanskriti aur koi sambandh ji bilkul sambandh bharatiya sanskriti aur hamare purane rishi muni hue unhone hi is yog ko unhone yog ko sthapit kiya hai maharshi patanjali ne sthapit kiya kiya jo aaj hum itni aasani se paa rahe hain sanskriti aur yog mein

संस्कृति और कोई संबंध जी बिल्कुल संबंध भारतीय संस्कृति और हमारे पुराने ऋषि मुनि हुए उन्हों

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Dhananjay Janardan Suryavanshi

Founder & Director - Yogeej Meditation

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

युवा अपने हिंदू आर्यावर्त की संस्कृति है कोई अलग सा धर्म नहीं है और यही संस्कृति आध्यात्मिक के तरफ हमें ले जाती है तो इस देश और संस्कृति और आध्यात्मिक धरोहर अध्यक्ष निर्विरोध के लिए योगा ही बहुत उपयुक्त है और ए संस्कृति समस्त मानव जाति के लिए है किसी एक रिलीजन के लिए नहीं है

yuva apne hindu Aryavarta ki sanskriti hai koi alag sa dharm nahi hai aur yahi sanskriti aadhyatmik ke taraf hamein le jaati hai toh is desh aur sanskriti aur aadhyatmik dharohar adhyaksh nirvirodh ke liye yoga hi bahut upyukt hai aur a sanskriti samast manav jati ke liye hai kisi ek religion ke liye nahi hai

युवा अपने हिंदू आर्यावर्त की संस्कृति है कोई अलग सा धर्म नहीं है और यही संस्कृति आध्यात्मि

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Ankit Laur

Yoga Instructor

3:41
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका क्वेश्चन है क्या योग संस्कृति और आध्यात्मिकता के बीच कोई संबंध है मैं तो कहना चाहूंगा हां संबंध में इसे प्लस का निशान देना चाहूंगा क्योंकि योग से ही जरूरी है संस्कृति और संस्कृति में ही आध्यात्मिक क्योंकि हम इन चीजों से अलग नहीं हो सकते क्योंकि गीता भी पूरा का पूरा इससे ही संबंधित है तो किसी ने कोई सब दिया या फिर हम जिसे कल्चर में रह रहे हो संस्कृति हमारी है तो वह भी हमारी योग से संबंधित है ठीक है हालांकि हम अपना धीरे-धीरे हम किसी चीज को भूल जाए ये कुछ कर जाए अभी अभी जो है ठीक है यूपी जाएंगे ओके तो चारों ही जाएंगे फिर घड़ी याद आ जाएगा मैं यह भी कहता हूं हम जिसे मैं हम के सभी जगह चेंज टाइम मैसेज करते हैं उसे मिट जाएंगे तब भी रहेगी और वापस चलेगा संबंधित है अब आते हैं वन पर्सन के ऊपर बात है जिसे भी किसी ने हमने किसी ने जन्म दिया एक संस्कृति में जन्म लिया है तो अगर वह फिर कुछ भी करता है ठीक है कुछ भी करता है तो धीरे-धीरे वह कुछ भी करता है लास्ट में जाकर एक के जो एक बालिका बाल्यवस्था होता है और भूसा में ज्यादा ही चीजों को तो काफी लंबा भी निकल जाता भी होता है तो ऐसी धारणाएं हमारी चीजें तो ऐसे टाइम में फिर अगर हमारे जैसे व्यवस्था बीत गई हमारी तो फिर आए हमारी ऐसी अवस्था है जिसमें हमारी उम्र तकरीबन टाइम की बात है तो 30 40 के टाइम में वापस दे दिया कर दिया कर दिया इसी महिमा कही क्या है तो ढूंढ ढूंढ ढूंढ बहुत अच्छा है ठीक है हम भी कुछ मिला नहीं है ठीक है तो वही चीजों का हमारे साथ ही हो गाना चालू जाता है किस चीज का दूसरी आमंत्रित कर रहे हैं कि नहीं हम दिमाग से भरे हुए नहीं हमें कुछ भी पता नहीं है यह स्वीकार नहीं बहुत बड़ी बात है सब कुछ हमने दूसरे अभी भी आप मुझसे सुन रहे हैं पर अपने आप भी लाइक नहीं किया तो अपने आप रिलायंस लेने के लिए उसी के नाम से राज्य मिकता देगा अध्यात्मिक हो गया भी अपने आप इलायची के सामने दिखते हैं एक ही दिखती है इंसान की और आसपास के चल रही अलग नजरिए से देखना चालू जाता है भारतीय संस्कृति से ही आध्यात्मिकता है

aapka question hai kya yog sanskriti aur aadhyatmikta ke beech koi sambandh hai toh kehna chahunga haan sambandh mein ise plus ka nishaan dena chahunga kyonki yog se hi zaroori hai sanskriti aur sanskriti mein hi aadhyatmik kyonki hum in chijon se alag nahi ho sakte kyonki geeta bhi pura ka pura isse hi sambandhit hai toh kisi ne koi sab diya ya phir hum jise culture mein reh rahe ho sanskriti hamari hai toh vaah bhi hamari yog se sambandhit hai theek hai halaki hum apna dhire dhire hum kisi cheez ko bhool jaaye ye kuch kar jaaye abhi abhi jo hai theek hai up jaenge ok toh charo hi jaenge phir ghadi yaad aa jaega main yah bhi kahata hoon hum jise main hum ke sabhi jagah change time massage karte hain use mit jaenge tab bhi rahegi aur wapas chalega sambandhit hai ab aate hain van person ke upar baat hai jise bhi kisi ne humne kisi ne janam diya ek sanskriti mein janam liya hai toh agar vaah phir kuch bhi karta hai theek hai kuch bhi karta hai toh dhire dhire vaah kuch bhi karta hai last mein jaakar ek ke jo ek balika balyavastha hota hai aur bhusa mein zyada hi chijon ko toh kaafi lamba bhi nikal jata bhi hota hai toh aisi dharnae hamari cheezen toh aise time mein phir agar hamare jaise vyavastha beet gayi hamari toh phir aaye hamari aisi avastha hai jisme hamari umr takareeban time ki baat hai toh 30 40 ke time mein wapas de diya kar diya kar diya isi mahima kahi kya hai toh dhundh dhundh dhundh bahut accha hai theek hai hum bhi kuch mila nahi hai theek hai toh wahi chijon ka hamare saath hi ho gaana chaalu jata hai kis cheez ka dusri aamantrit kar rahe hain ki nahi hum dimag se bhare hue nahi hamein kuch bhi pata nahi hai yah sweekar nahi bahut badi baat hai sab kuch humne dusre abhi bhi aap mujhse sun rahe hain par apne aap bhi like nahi kiya toh apne aap reliance lene ke liye usi ke naam se rajya mikta dega adhyatmik ho gaya bhi apne aap elaichi ke saamne dikhte hain ek hi dikhti hai insaan ki aur aaspass ke chal rahi alag nazariye se dekhna chaalu jata hai bharatiya sanskriti se hi aadhyatmikta hai

आपका क्वेश्चन है क्या योग संस्कृति और आध्यात्मिकता के बीच कोई संबंध है मैं तो कहना चाहूंगा

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Liyakat Ali Gazi

Motivational Speaker, Life Coach & Soft Skills Trainer 📲 9956269300

1:05
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए योग एक खुद को शारीरिक रूप से फिट रखने की है तंदुरुस्त रखने की क्रिया है सांस्कृतिक सांस्कृतिक जो है यह संस्कृति जो है वह हर धर्म की हर मौज है कि अलग-अलग है हर धर्म में रहना धर्म के अनुसार जीना धर्म के मूलभूत सिद्धांतों के अनुसार नियम को मानते हुए जीना धर्म की जो किताबें हैं उनके बताए हुए रास्ते पर चलने को संस्कृत कहते हैं और जो आध्यात्मिक की बात है आध्यात्मिक अलग होती अलग है आध्यात्मिक में खुद को पाने की प्राप्त होती है परमात्मा को ढूंढने की प्राप्ति होती जाती है उससे मिलने की कोशिश की जाती है इसलिए का विचार है कि आत्मा में परमात्मा की खोज करना या आत्मा को परमात्मा से मिलाना है आध्यात्मिकता है तो यह तीनों ही चीजें बहुत अलग-अलग हैं थैंक यू

dekhiye yog ek khud ko sharirik roop se fit rakhne ki hai tandurust rakhne ki kriya hai sanskritik sanskritik jo hai yah sanskriti jo hai vaah har dharm ki har mauj hai ki alag alag hai har dharm mein rehna dharm ke anusaar jeena dharm ke mulbhut siddhanto ke anusaar niyam ko maante hue jeena dharm ki jo kitaben hain unke bataye hue raste par chalne ko sanskrit kehte hain aur jo aadhyatmik ki baat hai aadhyatmik alag hoti alag hai aadhyatmik mein khud ko paane ki prapt hoti hai paramatma ko dhundhne ki prapti hoti jaati hai usse milne ki koshish ki jaati hai isliye ka vichar hai ki aatma mein paramatma ki khoj karna ya aatma ko paramatma se milana hai aadhyatmikta hai toh yah tatvo hi cheezen bahut alag alag hain thank you

देखिए योग एक खुद को शारीरिक रूप से फिट रखने की है तंदुरुस्त रखने की क्रिया है सांस्कृतिक स

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Yog Guru Gyan Ranjan Maharaj

Founder & Director - Kashyap Yogpith

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आपका क्वेश्चन है कि आयोग संस्कृति और आध्यात्मिकता के बीच कोई संबंध है तो देखिए योग संस्कृत कृति और आध्यात्मिकता के बीच ट्रांसफर राणा से संबंध है यह तीनों एक सिक्के के 3 पहलू है योग के बिना संस्कृति अधूरी है योग के अभाव में आध्यात्मिकता का आभार व्यक्ति के अंदर नहीं हो पाता है इसलिए योग तो मान लीजिए कि एक संस्कृति और आध्यात्मिकता का चित्रहार योग माना जा सकता है धन्यवाद

aapka question hai ki aayog sanskriti aur aadhyatmikta ke beech koi sambandh hai toh dekhiye yog sanskrit kriti aur aadhyatmikta ke beech transfer rana se sambandh hai yah tatvo ek sikke ke 3 pahaloo hai yog ke bina sanskriti adhuri hai yog ke abhaav mein aadhyatmikta ka abhar vyakti ke andar nahi ho pata hai isliye yog toh maan lijiye ki ek sanskriti aur aadhyatmikta ka chitrahar yog mana ja sakta hai dhanyavad

आपका क्वेश्चन है कि आयोग संस्कृति और आध्यात्मिकता के बीच कोई संबंध है तो देखिए योग संस्कृत

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Dr.Swatantra Sharma

Yoga Expert & Consultant

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

योग के द्वारा संस्कृति और आध्यात्मिकता का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है हमारी भारतीय प्राचीन संस्कृति योग और अध्यात्म की ही संस्कृति है जीवन में तनाव मुक्ति की अवस्था सहज रूप से अपने नित्य कर्मों को किए जाने के साथ ही प्राप्त की जा सके मन हमारा शांत रहे चित्त की वृत्तियों से हम दूर रहें और अपने सर्वाधिक महत्वपूर्ण लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति अर्थात समाधिया के बल्ले की प्राप्ति हम जिस मार्ग से होकर के प्राप्त कर सके वहां स्थिति योग कहलाती है और यही योग मार्ग चार चरणों में कर्मयोग ज्ञानयोग भक्तियोग राजयोग के नाम से जाना जाता है अतः भारतीय परंपरा और भारतीय दर्शन में योग संस्कृति और आध्यात्म का गहरा

yog ke dwara sanskriti aur aadhyatmikta ka gyaan prapt kiya ja sakta hai hamari bharatiya prachin sanskriti yog aur adhyaatm ki hi sanskriti hai jeevan mein tanaav mukti ki avastha sehaz roop se apne nitya karmon ko kiye jaane ke saath hi prapt ki ja sake man hamara shaant rahe chitt ki vrittiyon se hum dur rahein aur apne sarvadhik mahatvapurna lakshya moksha ki prapti arthat samadhiya ke balle ki prapti hum jis marg se hokar ke prapt kar sake wahan sthiti yog kahalati hai aur yahi yog marg char charno mein karmayog gyanyog bhaktiyog rajyog ke naam se jana jata hai atah bharatiya parampara aur bharatiya darshan mein yog sanskriti aur aadhyatm ka gehra

योग के द्वारा संस्कृति और आध्यात्मिकता का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है हमारी भारतीय प्राच

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Kanta Jhanwar

Self Employed

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखे आपने लिखा योग संस्कृति और आध्यात्मा के बीच कोई समय देखे संस्कृति एक तरह का जो हमारा पारिवारिक पेंशन है जो संस्कार हमको बचपन से मिलके जो बचपन आप जन्म लेते हो तब से जो माता-पिता के बीच में रहते हो परिवार के बीच में रहते हो आपको जो परिवेश मिलता है जो शिक्षा मिलती है शादी-वादी शिक्षा मिलती है उसको संस्कृति और योग और आध्यात्मिकता इन दोनों के बीच संबंध है क्योंकि योग्य क्रिया करता है तो पूरा क्लिप शरीर से जुड़ा हुआ शरीर के द्वारा और जब वही जब ध्यान में बैठता है ना तो वह अपने अंदर के अध्यात्म की तरफ भागता है उसे बोलते अपने अंदर झांक अपनी आत्मा का अध्ययन करता है तो योग और आध्यात्मिकता का संबंध है और संस्कृति परिवेश

dekhe aapne likha yog sanskriti aur adhyatma ke beech koi samay dekhe sanskriti ek tarah ka jo hamara parivarik pension hai jo sanskar hamko bachpan se milke jo bachpan aap janam lete ho tab se jo mata pita ke beech me rehte ho parivar ke beech me rehte ho aapko jo parivesh milta hai jo shiksha milti hai shaadi wadi shiksha milti hai usko sanskriti aur yog aur aadhyatmikta in dono ke beech sambandh hai kyonki yogya kriya karta hai toh pura clip sharir se juda hua sharir ke dwara aur jab wahi jab dhyan me baithta hai na toh vaah apne andar ke adhyaatm ki taraf bhagta hai use bolte apne andar jhank apni aatma ka adhyayan karta hai toh yog aur aadhyatmikta ka sambandh hai aur sanskriti parivesh

देखे आपने लिखा योग संस्कृति और आध्यात्मा के बीच कोई समय देखे संस्कृति एक तरह का जो हमारा प

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

योग और संस्कृति और अध्यात्मिक बीच बहुत सारे संदेश योग से शरीर का विकास होता अध्यात्मिक से मैं अतीत नैतिकता का शिक्षा मंत्री और संबंध से विचार बनता है

yog aur sanskriti aur adhyatmik beech bahut saare sandesh yog se sharir ka vikas hota adhyatmik se main ateet naitikta ka shiksha mantri aur sambandh se vichar banta hai

योग और संस्कृति और अध्यात्मिक बीच बहुत सारे संदेश योग से शरीर का विकास होता अध्यात्मिक से

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