राज योग, हठ योग और क्रिया योग में क्या अंतर है?...


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kuldeep mod

Yoga Instructor

2:07
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हमारे योग ग्रंथों में बताया गया है कि हठयोग और राजीव यह दोनों एक दूसरे के पूरक है मतलब पार्टियों के बिना राज्यों की और राज्यों के बिना हड्डियों की सिद्धि नहीं हो सकती राजयोग में 8 अंक आते हैं यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान समाधि यह सब राज्य योग योग का मतलब होता है बैलेंस सूर्य और चंद्र नाड़ी का बैलेंस तो हमारी जो सूर्य नाड़ी चंद्र नाड़ी होती है तो आप योगिक आसन और प्राणायाम द्वारा हम उन नाड़ी को सुषुम्ना मतलब दोनों को बैलेंस करके सूचना में प्राण को प्रवाह करते हैं और दोनों को बैलेंस करते हैं तो यह राजीव पहला तो यहीं से राज्यों की शुरुआत होती है यह हट योग इक्रिया से राज्यों की शुरुआत होती है और राज्य को पाने के लिए ऑडियो करना पड़ता है अब क्रिया क्योंकि अगर बात करें तो महर्षि पतंजलि ने प्रिया युग के तीन का बताएं तो ईश्वर का निदान का मतलब यहां होता है तो पास हो गए शरीर को कष्ट देना इंटरसिटी दीक्षा हो गई गर्मी सर्दी को सहन करना यह सब चीजें तब के अंतर्गत आती है दूसरा है स्वाध्याय स्वाध्याय में बस जा तेरे से किसी भी धर्म ग्रंथों को अध्ययन करना उपनिषद गीता आदि को पढ़ना उसका मंगल करना चिंतन करना और उसको अपने जीवन में उतारना गायत्री मंत्र का जप करना ओमकार का जप करना यह सब चीजें स्वाध्याय के अंतर्गत आती है तीसरा आता है ईश्वर का निदान निदान में आता है कि भगवान का जो गुण है जो भगवान के गुण हैं उनके जब कर्म है उनको अपने जीवन में उतारना और पूरी तल्लीनता से अपने आपको अपने हर कर्म को भगवान को समर्पित कर देना यही होता है क्रिया योग

hamare yog granthon me bataya gaya hai ki hathyog aur rajeev yah dono ek dusre ke purak hai matlab partiyon ke bina rajyo ki aur rajyo ke bina haddiyon ki siddhi nahi ho sakti rajyog me 8 ank aate hain yum niyam aasan pranayaam pratyahar dharana dhyan samadhi yah sab rajya yog yog ka matlab hota hai balance surya aur chandra naadi ka balance toh hamari jo surya naadi chandra naadi hoti hai toh aap yogic aasan aur pranayaam dwara hum un naadi ko sushumna matlab dono ko balance karke soochna me praan ko pravah karte hain aur dono ko balance karte hain toh yah rajeev pehla toh yahin se rajyo ki shuruat hoti hai yah hut yog ikriya se rajyo ki shuruat hoti hai aur rajya ko paane ke liye audio karna padta hai ab kriya kyonki agar baat kare toh maharshi patanjali ne priya yug ke teen ka bataye toh ishwar ka nidan ka matlab yahan hota hai toh paas ho gaye sharir ko kasht dena intercity diksha ho gayi garmi sardi ko sahan karna yah sab cheezen tab ke antargat aati hai doosra hai swaadhyaay swaadhyaay me bus ja tere se kisi bhi dharm granthon ko adhyayan karna upanishad geeta aadi ko padhna uska mangal karna chintan karna aur usko apne jeevan me utarana gayatri mantra ka jap karna omkar ka jap karna yah sab cheezen swaadhyaay ke antargat aati hai teesra aata hai ishwar ka nidan nidan me aata hai ki bhagwan ka jo gun hai jo bhagwan ke gun hain unke jab karm hai unko apne jeevan me utarana aur puri tallinata se apne aapko apne har karm ko bhagwan ko samarpit kar dena yahi hota hai kriya yog

हमारे योग ग्रंथों में बताया गया है कि हठयोग और राजीव यह दोनों एक दूसरे के पूरक है मतलब पार

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राजीव हड्डियों परमात्मा की प्राप्ति जो वो इसलिए कि जो व्यक्ति जिस तरीके से कटता है जिस बात को चिंता है इस बात से पूर्ण समर्थन करते हैं कीमत पर आगे तुम्हारा मन करे ऐसा कुछ नहीं है कर्म फल ऊर्जा किस प्रकार से हमारे शरीर को रोमांचित कर किस प्रकार से हमारे शरीर को मार्केट

rajeev haddiyon paramatma ki prapti jo vo isliye ki jo vyakti jis tarike se katata hai jis baat ko chinta hai is baat se purn samarthan karte hain kimat par aage tumhara man kare aisa kuch nahi hai karm fal urja kis prakar se hamare sharir ko romanchit kar kis prakar se hamare sharir ko market

राजीव हड्डियों परमात्मा की प्राप्ति जो वो इसलिए कि जो व्यक्ति जिस तरीके से कटता है जिस बात

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Girijakant Singh

Founder/ President Yog Bharati Foundation Trust

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आपका प्रश्न है राजयोग हट योग और क्रिया योग में क्या अंतर है देखिए तीनों ही योग हैं और योग के ही मार्ग हैं और योग ईश्वर तक पहुंचने के साधन है राजयोग में जो है अष्टांग योग किया गया इसके 8 अंक बनाए गए यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान और समाधि योग में योगा वाइफ और कुछ ऐसी क्रियाएं भी हैं योगासनों के साथ-साथ जो आर्थिक रूप से होती हैं उनको जबरदस्ती किया जाता है इसलिए हटिया है और क्रियायोग है स्वाध्याय और ईश्वर पानी यह तीनों क्रियायोग माने गए हैं धन्यवाद

aapka prashna hai rajyog hut yog aur kriya yog mein kya antar hai dekhiye teenon hi yog hain aur yog ke hi marg hain aur yog ishwar tak pahuchne ke sadhan hai rajyog mein jo hai ashtanga yog kiya gaya iske 8 ank banaye gaye yum niyam aasan pranayaam pratyahar yum niyam aasan pranayaam pratyahar dharana dhyan aur samadhi yog mein yoga wife aur kuch aisi kriyaen bhi hain yogasanon ke saath saath jo aarthik roop se hoti hain unko jabardasti kiya jata hai isliye hatiya hai aur kriyayog hai swaadhyaay aur ishwar paani yah teenon kriyayog maane gaye hain dhanyavad

आपका प्रश्न है राजयोग हट योग और क्रिया योग में क्या अंतर है देखिए तीनों ही योग हैं और योग

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Ashish Tandon

Yoga Teacher

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हठयोग हां उठा से मिलकर बना है आखिरकार छात्र झकास आकार चुनरी थकान चंद्र नाड़ी राज्यों का विषय एक ही है परंतु क्रिया योग में थोड़ा सा अंतर हो जाता है क्रियायोग महर्षि पतंजलि के द्वारा लिखी गई

hathyog haan utha se milkar bana hai aakhirkaar chatra jhakaas aakaar chunari thakan chandra naadi rajyon ka vishay ek hi hai parantu kriya yog mein thoda sa antar ho jata hai kriyayog maharshi patanjali ke dwara likhi gayi

हठयोग हां उठा से मिलकर बना है आखिरकार छात्र झकास आकार चुनरी थकान चंद्र नाड़ी राज्यों का वि

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जैसा कि राजू के बारे में बताते हैं सच प्रथम राज्य के आठ बताए गए हैं जिसमें यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान और समाधि के बारे में बताएं गया हठयोग जो है वह आपके कुंडलिनी जागरण के लिए ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है जिसमें जो हठयोग में हा मतलब आपका सूर्य और था मतलब चंदैनी की जो आपका सूर्य नाड़ी चंद्र नाड़ी नाश्ता पर फोकस किया जाता है उसको हर्ट यू कहते हैं क्रिया योग और हठयोग दोनों लगभग सामान्य क्रिया योग क्रियाओं का किया जाता था जिसमें सटके आय होती हैं नीति धोती बस्ती कपालभाति 819 जी ऐसे हैं जिनका इस्तेमाल किया जाता है और क्रिया योग योग में सारी क्रियाओं का इस्तेमाल किया जाता है बात करें राजू भी तो राजयोग में भी इन क्रियाओं का इस्तेमाल है बट विशेषता करना भी किया जाए तो काम चल जाता है पठारी हो हड्डियों को सीखने के लिए आपको क्रिया योग एनी की शर्ट कर्मा इंसर्ट क्रियाएं आपको करनी पड़ती है जिसमें आप अच्छी तरीके से पारंगत हो जाएंगे तो आप उन्नत्थर तक पहुंच सकते हैं धन्यवाद

jaisa ki raju ke bare mein batatey hain sach pratham rajya ke aath bataye gaye hain jisme yum niyam aasan pranayaam pratyahar dharana dhyan aur samadhi ke bare mein batayen gaya hathyog jo hai vaah aapke kundalini jagran ke liye zyada istemal kiya jata hai jisme jo hathyog mein ha matlab aapka surya aur tha matlab chandaini ki jo aapka surya naadi chandra naadi nashta par focus kiya jata hai usko heart you kehte hain kriya yog aur hathyog dono lagbhag samanya kriya yog kriyaon ka kiya jata tha jisme satake aay hoti hain niti dhoti basti kapalbhati 819 ji aise hain jinka istemal kiya jata hai aur kriya yog yog mein saree kriyaon ka istemal kiya jata hai baat karen raju bhi toh rajyog mein bhi in kriyaon ka istemal hai but visheshata karna bhi kiya jaaye toh kaam chal jata hai pathari ho haddiyon ko seekhne ke liye aapko kriya yog any ki shirt karma insert kriyaen aapko karni padti hai jisme aap achi tarike se paarangat ho jaenge toh aap unnatthar tak pahunch sakte hain dhanyavad

जैसा कि राजू के बारे में बताते हैं सच प्रथम राज्य के आठ बताए गए हैं जिसमें यम नियम आसन प्र

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Dr Chandra Shekhar Jain

MBBS, Yoga Therapist Yoga Psychotherapist

2:25
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भारत में शुरू से ही मोक्ष को जीवन का लक्ष्य बनाकर जीवन जीने का एक प्रश्न रहा है और यह हमारे प्राचीन भारतीय सभ्यता का एक अभिन्न अंग था पर जैसे जैसे जीवन में परिवर्तन आटा गया और लोगों का आध्यात्मिक से ध्यान हटा दिया जिससे जीवन में विभिन्न प्रकार की विसंगति आने लगी तो उन विसंगतियों को दूर करके और जल्दी से अपनी आध्यात्मिक प्रगति के लिए युग का आरंभ हुआ और कितने प्रकार के विवाह होते हैं उन सब का यही उद्देश्य होता है कि अपने आप को अनुशासित का नियंत्रण करें और जितना संभव हो सके जल्दी से जल्दी प्रगति करके आध्यात्मिक रास्ते को अपनाएं और अपना कल्याण करें राजीव का में योगी पतंजलि द्वारा चला गया है इसे स्थानों का भी कहते हैं और दूसरा हाथी होगा हठयोग में योग की क्रियाओं को हम अपनी मानसिक शक्ति का उपयोग करके फोर्सफुली करते हैं जबकि क्रिया योगा में इसी आध्यात्मिक ग्रुप को बहुत तेजी से बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार के पुराने हैं हम मंत्र और मुद्राओं का उपयोग किया जाता है इसमें सबसे कठिन क्रिया योगी होता है जो कि हमेशा गुरु के संपर्क में ही सीखा जा सकता है उपयोग करने के लिए भी आपको अच्छे योग प्रशिक्षक की जरूरत होती है क्योंकि उसमें नुकसान होने की बहुत ज्यादा संभावना रहती है जबकि राज योगा कंपलीटली साजन योग है हिंदुओं के मुकाबले तो इसलिए आप थोड़ा बहुत कुछ सीख सकते हैं राजयोग में भी यदि आपको बहुत अच्छे शिक्षक मिल जाते हैं उसमें भी तेजी से प्रगति होती है इस प्रकार से और अन्य प्रकार के योग होते हैं परंतु यदि योग को आप किसी प्रशिक्षक से सीखते हैं तो बहुत ज्यादा अच्छा रहता है और आपको उसका नुकसान भी नहीं होता और लाभ भी जल्दी से मिलता है

bharat mein shuru se hi moksha ko jeevan ka lakshya banakar jeevan jeene ka ek prashna raha hai aur yah hamare prachin bharatiya sabhyata ka ek abhinn ang tha par jaise jaise jeevan mein parivartan atta gaya aur logon ka aadhyatmik se dhyan hata diya jisse jeevan mein vibhinn prakar ki visangati aane lagi toh un visangatiyon ko dur karke aur jaldi se apni aadhyatmik pragati ke liye yug ka aarambh hua aur kitne prakar ke vivah hote hain un sab ka yahi uddeshya hota hai ki apne aap ko anushasit ka niyantran karen aur jitna sambhav ho sake jaldi se jaldi pragati karke aadhyatmik raste ko apanaen aur apna kalyan karen rajeev ka mein yogi patanjali dwara chala gaya hai ise sthanon ka bhi kehte hain aur doosra haathi hoga hathyog mein yog ki kriyaon ko hum apni mansik shakti ka upyog karke forcefully karte hain jabki kriya yoga mein isi aadhyatmik group ko bahut teji se badhane ke liye vibhinn prakar ke purane hain hum mantra aur mudrawon ka upyog kiya jata hai isme sabse kathin kriya yogi hota hai jo ki hamesha guru ke sampark mein hi seekha ja sakta hai upyog karne ke liye bhi aapko acche yog parshikshak ki zaroorat hoti hai kyonki usmein nuksan hone ki bahut zyada sambhavna rehti hai jabki raj yoga kampalitli sajan yog hai hinduon ke muqable toh isliye aap thoda bahut kuch seekh sakte hain rajyog mein bhi yadi aapko bahut acche shikshak mil jaate hain usmein bhi teji se pragati hoti hai is prakar se aur anya prakar ke yog hote hain parantu yadi yog ko aap kisi parshikshak se sikhate hain toh bahut zyada accha rehta hai aur aapko uska nuksan bhi nahi hota aur labh bhi jaldi se milta hai

भारत में शुरू से ही मोक्ष को जीवन का लक्ष्य बनाकर जीवन जीने का एक प्रश्न रहा है और यह हमार

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Rajkumar Koree

Founder & Director - Fitstop Fitness Studio

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राजयोग अपनी जगह एक अलग योग है उनको अलग नशा होता है उस चीज का जिनको राज योग और लिक में ऐसी हुआ हो और हठयोग जो योगी लोग करते हैं संत महात्मा करते हैं वह एक हड्डी योग में भी गिना जाता है जिनकी लंबी प्रोसेस होती है जिसे क्रिया योग क्रिया योग भी एक हवाई है जहां पर बहुत सारी क्रियाएं होती हैं जिनसे बहुत सारी बीमारियों को कंट्रोल किया जाता है इस तरीके अलग-अलग प्रक्रिया है तो एक दूसरे के पूरक हैं और एक दूसरे को सपोर्ट भी करते हैं और इनमें राजयोग और हाथियों को या

rajyog apni jagah ek alag yog hai unko alag nasha hota hai us cheez ka jinako raj yog aur lick mein aisi hua ho aur hathyog jo yogi log karte hain sant mahatma karte hain vaah ek haddi yog mein bhi gina jata hai jinki lambi process hoti hai jise kriya yog kriya yog bhi ek hawai hai jahan par bahut saree kriyaen hoti hain jinse bahut saree bimariyon ko control kiya jata hai is tarike alag alag prakriya hai toh ek dusre ke purak hain aur ek dusre ko support bhi karte hain aur inmein rajyog aur haathiyo ko ya

राजयोग अपनी जगह एक अलग योग है उनको अलग नशा होता है उस चीज का जिनको राज योग और लिक में ऐसी

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आज का जवाब थोड़ा बड़ा है राजयोग के विषय में राजयोग क्रिया योग हठयोग देखिए राजयोग सबसे राजाओं का सबसे उत्तम योग माना जाता है और हठयोग इसकी शुरुआती क्रिया है हट योग का उद्देश्य होता है राज्यों की प्राप्ति और इन सबसे हटकर क्रिया योग है क्रिया योग के अंतर्गत तीन चीजे आती हैं आपका एक तो तप है दूसरा स्वाध्याय हैं और तीसरा हिस्सा पानी ध्यान है इन तीनों को अच्छी तरह जानने के लिए अथवा पातंजल योगदर्शन में पहुंच सकते हैं पातंजल योगदर्शन के दूसरे सूत्र में यानी साधन पाद में यह सारा कुछ आपको वर्णित है तो आप उसमे जरूर पढ़ लेंगे पापू क्रिया योग के बारे में अच्छी तरह सब कुछ मिल जाएगा और बाकी हाथियों के राज्यों के बारे में तो सिर्फ इतना ही कहूंगा हठ योग का उद्देश्य है राज्यों की प्राप्ति और राज्यों के सबसे उत्तम योग है और हठयोग के द्वारा ही राज्यों के प्राप्त की जा सकती है या उसका उद्देश्य है धन्यवाद

aaj ka jawab thoda bada hai rajyog ke vishay mein rajyog kriya yog hathyog dekhiye rajyog sabse rajaon ka sabse uttam yog mana jata hai aur hathyog iski suruaati kriya hai hut yog ka uddeshya hota hai rajyon ki prapti aur in sabse hatakar kriya yog hai kriya yog ke antargat teen chije aati hain aapka ek toh tap hai doosra swaadhyaay hain aur teesra hissa paani dhyan hai in teenon ko achi tarah jaanne ke liye athva patanjal yogadarshan mein pahunch sakte hain patanjal yogadarshan ke dusre sutra mein yani sadhan pad mein yah saara kuch aapko varnit hai toh aap usme zaroor padh lenge papu kriya yog ke bare mein achi tarah sab kuch mil jaega aur baki haathiyo ke rajyon ke bare mein toh sirf itna hi kahunga hath yog ka uddeshya hai rajyon ki prapti aur rajyon ke sabse uttam yog hai aur hathyog ke dwara hi rajyon ke prapt ki ja sakti hai ya uska uddeshya hai dhanyavad

आज का जवाब थोड़ा बड़ा है राजयोग के विषय में राजयोग क्रिया योग हठयोग देखिए राजयोग सबसे राजा

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Anil Ramola

Yoga Instructor | Engineer

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राजयोग हठयोग और क्रियायोग जो है एक दूसरे के पूरक में अंतर है वह सिर्फ इनकी लैंग्वेज का हो सकता है कुछ इनके जीवन का जो है यह एक सीरीज है पहुंचने कि इन तीनों के द्वारा ही आप अपने जीवन में समाधि का और हम बात करते हैं ओके हगना है जिसके द्वारा हम अपने जीवन में शारीरिक और मानसिक रूप से स्वास्थ्य को प्राप्त कर सकते हैं और इसमें जो आसन और परिणाम होते इसके आबिदा है जिनके द्वारा हम राजयोग चौकी राजू एक लक्ष्य होता है अवस्था होती है को प्राप्ति करने के बाद हम अपने जीवन में सुख का अनुभव करते हैं पृथ्वी के हम किसको सही समझ सकते हैं हाथी और खाती हो 1 साल हो गई है और राजू एक लक्ष्य हो गया एक उपाधि हो गई है उसको प्राप्त करने के बाद हम सुख की अनुभूति कर हम बात करें क्रियाओं के द्वारा अपने शरीर की शुद्धि करते हैं हमारे जनतंत्र के हमारे पाचन तंत्र की और जो क्रियाओं का जो प्रकार 16 का कार्यक्रम में क्रियाओं का वर्णन किया गया है जल्दी हो गया हो गया हो गया हो गया अपने शरीर की शुद्धि करते हैं तो यह का मुखिया है

rajyog hathyog aur kriyayog jo hai ek dusre ke purak mein antar hai vaah sirf inki language ka ho sakta hai kuch inke jeevan ka jo hai yah ek series hai pahuchne ki in teenon ke dwara hi aap apne jeevan mein samadhi ka aur hum baat karte hain ok hagana hai jiske dwara hum apne jeevan mein sharirik aur mansik roop se swasthya ko prapt kar sakte hain aur isme jo aasan aur parinam hote iske abida hai jinke dwara hum rajyog chowki raju ek lakshya hota hai avastha hoti hai ko prapti karne ke baad hum apne jeevan mein sukh ka anubhav karte hain prithvi ke hum kisko sahi samajh sakte hain haathi aur khati ho 1 saal ho gayi hai aur raju ek lakshya ho gaya ek upadhi ho gayi hai usko prapt karne ke baad hum sukh ki anubhuti kar hum baat karen kriyaon ke dwara apne sharir ki shudhi karte hain hamare jantantra ke hamare pachan tantra ki aur jo kriyaon ka jo prakar 16 ka karyakram mein kriyaon ka varnan kiya gaya hai jaldi ho gaya ho gaya ho gaya ho gaya apne sharir ki shudhi karte hain toh yah ka mukhiya hai

राजयोग हठयोग और क्रियायोग जो है एक दूसरे के पूरक में अंतर है वह सिर्फ इनकी लैंग्वेज का हो

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Akash Mishra

Yoga Expert | Author | Naturopathist | Acupressure Specialist |

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आपका प्रश्न है राजयोग हथियार और क्रिया योग क्या है प्राचीन भारत में मन से मन पर विजय प्राप्त करने का योग की मन के अभ्यास से ही हम मन पर विजय प्राप्त करते थे और समाधि के की ओर अग्रसर होने का प्रयास करते थे क्योंकि ग्रंथों के बारे में बात करें तो सबसे अधिक प्रचलित योग ग्रंथ है और जो योग का सबसे सर्वप्रथम प्रमाणित बीज पतंजलि योग सूत्र पतंजलि योग सूत्र में राज्यों के बारे में वृहद रूप से चर्चा की गई है बात करी हठयोग की राशियों के कुछ समय उपरांत जब ऐसा हुआ कि मनुष्य के जीवन में एक ऐसे युवक की हुई जिसका आधार यह था कि शरीर से मन पर बैठा हूं और बंद के अभ्यास से हम अपने आप को राज्यों के अनुरूप बनाते थे के स्तर पर पहुंचाने के लिए प्रयोग करते थे तो इसका मतलब यह है कि योग राजयोग कहीं से अलग नहीं है योग राज्यों के तक पहुंचने के लिए तैयारी की जिन लोगों को महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग के नियम को फॉलो करने में करने में समस्या होती थी यह करने के उपरांत धारणा ध्यान समाधि तक साधन पाद में दूसरे जो साधन पाद है जो दूसरा कौन है उसे प्रथम श्लोक में किया योग के बारे में बताया है स्वाध्याय स्वाध्याय और ईश्वर प्रधान जी क्रिया योग है कि इन तीनों के समन्वय को क्रिया योग कहते हैं जो प्रवृत्ति के लोग हैं महर्षि पतंजलि ने तीन पत्तियों के मनुष्यों का वर्णन किया गया है किया है सात्विक प्रवृत्ति के मनुष्य के मनुष्य के लिए अभ्यास और वैराग्य की प्रवृत्ति के लोगों को समाधि की प्राप्ति के लिए उन्होंने क्रिया योग के अभ्यास के लिए बताया गया है समाधि की प्राप्ति के लिए तो यह था आपके प्रश्न का उत्तर आपको आकाश नाम से यूट्यूब पर है तो क्या करते हो

aapka prashna hai rajyog hathiyar aur kriya yog kya hai prachin bharat mein man se man par vijay prapt karne ka yog ki man ke abhyas se hi hum man par vijay prapt karte the aur samadhi ke ki aur agrasar hone ka prayas karte the kyonki granthon ke bare mein baat karen toh sabse adhik prachalit yog granth hai aur jo yog ka sabse sarvapratham pramanit beej patanjali yog sutra patanjali yog sutra mein rajyon ke bare mein vrihad roop se charcha ki gayi hai baat kari hathyog ki raashiyon ke kuch samay uprant jab aisa hua ki manushya ke jeevan mein ek aise yuvak ki hui jiska aadhar yah tha ki sharir se man par baitha hoon aur band ke abhyas se hum apne aap ko rajyon ke anurup banate the ke sthar par pahunchane ke liye prayog karte the toh iska matlab yah hai ki yog rajyog kahin se alag nahi hai yog rajyon ke tak pahuchne ke liye taiyari ki jin logon ko maharshi patanjali ke ashtanga yog ke niyam ko follow karne mein karne mein samasya hoti thi yah karne ke uprant dharana dhyan samadhi tak sadhan pad mein dusre jo sadhan pad hai jo doosra kaun hai use pratham shlok mein kiya yog ke bare mein bataya hai swaadhyaay swaadhyaay aur ishwar pradhan ji kriya yog hai ki in teenon ke samanvay ko kriya yog kehte hain jo pravritti ke log hain maharshi patanjali ne teen pattiyo ke manushyo ka varnan kiya gaya hai kiya hai Satvik pravritti ke manushya ke manushya ke liye abhyas aur varagya ki pravritti ke logon ko samadhi ki prapti ke liye unhone kriya yog ke abhyas ke liye bataya gaya hai samadhi ki prapti ke liye toh yah tha aapke prashna ka uttar aapko akash naam se youtube par hai toh kya karte ho

आपका प्रश्न है राजयोग हथियार और क्रिया योग क्या है प्राचीन भारत में मन से मन पर विजय प्राप

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Dr. Shivam Sharma (yoga therapist)

Yogatharapisrt Dr.shivam Sharma ,plz Subscribehttps://www.youtube.com/channel/UCB95ewujlU5zM_wwKcALVCA

0:44
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हटिया का मतलब होता है कि अपने शारीरिक बॉडी का पूरे पूरे ध्यान से इस्तेमाल करना हम जैसे आसन में जानते हैं कि अपना पूरा शरीर का इस्तेमाल करते हैं तो कहते हैं जैसे कि आपको मालूम है कि कई आसन होते छुपाती डेंजरस होते खतरनाक होते हैं उनको करने के लिए हमारी बॉडी में बहुत ही ज्यादा ताला चाहिए आपको मालूम है कि मेरे बच्चे में जो मेरी प्रोफाइल है उसमें देखिए आपका मस्तिष्क इसलिए गलत होता है उस आसन कहते हैं

hatiya ka matlab hota hai ki apne sharirik body ka poore poore dhyan se istemal karna hum jaise aasan mein jante hain ki apna pura sharir ka istemal karte hain toh kehte hain jaise ki aapko maloom hai ki kai aasan hote chupati dangerous hote khataranaak hote hain unko karne ke liye hamari body mein bahut hi zyada tala chahiye aapko maloom hai ki mere bacche mein jo meri profile hai usmein dekhiye aapka mastishk isliye galat hota hai us aasan kehte hain

हटिया का मतलब होता है कि अपने शारीरिक बॉडी का पूरे पूरे ध्यान से इस्तेमाल करना हम जैसे आसन

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Sks

योग

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राजू हाथियों की लड़ाई शांत है राजू किसी से मैं कभी कैसे भी किया जा सकता है लेकिन निकट से रूबरू है उसमें भटपुरवा किया जाता है यानी कि कितने देर तक उसने रहा जा सकता है उतना दिन टकरा जाता है

raju haathiyo ki ladai shaant hai raju kisi se main kabhi kaise bhi kiya ja sakta hai lekin nikat se rubaru hai usme bhatapurva kiya jata hai yani ki kitne der tak usne raha ja sakta hai utana din takara jata hai

राजू हाथियों की लड़ाई शांत है राजू किसी से मैं कभी कैसे भी किया जा सकता है लेकिन निकट से र

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