योग के कुछ उन्नत पद क्या हैं?...


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Dr Hemant Yogi

Yoga and Naturopathy

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

योग उन्नत पद जो है पतंजलि महर्षी पतंजलि है उन्होंने बनाए अष्टांग योग यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान और समाधि अगर हम इस योग को अपने जीवन में उतारते हैं द्वारा अपने शरीर की मन की शुद्धि कर लेते हैं तो यह हमारे युग के उन्नत पद है और से हम शारीरिक मानसिक और आत्मिक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं धन्यवाद

yog unnat pad jo hai patanjali maharshi patanjali hai unhone banaye ashtanga yog yum niyam aasan pranayaam pratyahar dharana dhyan aur samadhi agar hum is yog ko apne jeevan mein utarate hain dwara apne sharir ki man ki shudhi kar lete hain toh yah hamare yug ke unnat pad hai aur se hum sharirik mansik aur atmik aur aadhyatmik labh prapt kar sakte hain dhanyavad

योग उन्नत पद जो है पतंजलि महर्षी पतंजलि है उन्होंने बनाए अष्टांग योग यम नियम आसन प्राणायाम

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Dr. Kartik Kumar

Yoga Instructor

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

योग का उन्नत पद गुम आनंद की प्राप्ति परमात्मा की प्राप्ति योग की उन्नत अवस्था से कुंडलिनी जागरण सद्गुरु कृपा से सहयोग में उन्नत पद प्राप्त करने के लिए आप संपर्क कर सकते हैं स्वर्ग को प्राप्त कर सकते हैं 7005 3801

yog ka unnat pad gum anand ki prapti paramatma ki prapti yog ki unnat avastha se kundalini jagran sadguru kripa se sahyog mein unnat pad prapt karne ke liye aap sampark kar sakte hain swarg ko prapt kar sakte hain 7005 3801

योग का उन्नत पद गुम आनंद की प्राप्ति परमात्मा की प्राप्ति योग की उन्नत अवस्था से कुंडलिनी

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Vedachary Pathak Singrauli

सनातन सुरक्षा परिषद् संस्थापक

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लिखिए आप उस आयोग के कुछ उन्नत अधिक उन्नत पद सिरसासन है व्याघ्रासन है इस प्रकार के कई ऐसे आसन हैं जो उन्नत पद में आते हैं धन्यवाद

likhiye aap us aayog ke kuch unnat adhik unnat pad sirsasan hai vyaghrasan hai is prakar ke kai aise aasan hain jo unnat pad mein aate hain dhanyavad

लिखिए आप उस आयोग के कुछ उन्नत अधिक उन्नत पद सिरसासन है व्याघ्रासन है इस प्रकार के कई ऐसे

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Girijakant Singh

Founder/ President Yog Bharati Foundation Trust

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आपका प्रश्न आयोग के कुछ उक्त पद क्या है देखिए योग का जो है कई अपराधियों के माध्यम से लेकिन जोश का सर्वोच्च पद है वह मोक्ष ही है आत्मसाक्षात्कार ही है आत्मा का परमात्मा से मिलन है यही योग का अंतिम लक्ष्मी है धन्यवाद

aapka prashna aayog ke kuch ukth pad kya hai dekhiye yog ka jo hai kai apradhiyon ke madhyam se lekin josh ka sarvoch pad hai vaah moksha hi hai atmasakshatkar hi hai aatma ka paramatma se milan hai yahi yog ka antim laxmi hai dhanyavad

आपका प्रश्न आयोग के कुछ उक्त पद क्या है देखिए योग का जो है कई अपराधियों के माध्यम से लेकिन

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हरि ओम प्लीज साधक भाइयों एवं बहनों आप लोगों के अंदर उस विराजमान चेतन स्वरूप आत्मा को हमारी ओर से नमन है दोस्तों आज हम आप लोगों को योग की विषय में बताने जा रहे हैं कि योग में उत्पन्न मनी योग में बढ़ने के कौन कौन से अच्छे रास्ते हैं कैसे बढ़ाया जाए एक नियम किधर से तो देखी युग में चार पांच दिए गए हैं महर्षि पतंजलि के द्वारा कृत पहला है समाज का दूसरा हिस्सा धनबाद तीसरा हैप्पी भूत और चौथा है कई बल्लेबाज इंस्टॉल में जो समाजवाद है यह उच्च कोटि के कोर्ट के साधकों के लिए है जो आशा और निराशा से पूरी तरह से उग गए हैं आ सकती और विरक्ति की भी सफलता और असफलता के बीच पूरी तरह से यहां तक की सोचने की शक्ति भी जब खत्म हो गई है सब कुछ संसार से जो आपाधापी भागदौड़ से पूरी तरह से निराश हो गए उन लोगों के लिए समाजवाद का अभ्यास चोरी इसमें प्रथम अध्याय में जो आता है अभी योगा अनुशासनम सामाजिक उत्पाद का प्रथम सूत्र है योगा अनुशासनम था अफगानी होता है शुरुआत शुरुआत ऐसा लगता है कि योग अब से चालू हुआ है नहीं हम से नहीं मतलब जब आप स्टार्ट करते हैं तब यह चालू होता है मतलब भारत के बहुत से ऐसे सहस्त्र होते हैं जो आज से शुरु होता है अब युग सहस्त्र के शास्त्र को आरंभ किया जाता है दूसरे अध्याय सूत्र में बोलते हैं योगश्चित्त वृत्ति निरोध अर्थात चित्त की वृत्तियों का निरोध हो जाना ही कहने का तात्पर्य मेरा हुआ मन में उठने वाले वह संकल्पों की लहर सर का सर्वथा रुक जाना ही योग है यू दिस दिखी योगश्चित्त वृत्ति निरोध है जो सब दिया गया है महर्षि पतंजलि योग ऋषि ने इसका वृतांत झूठी भी शब्द में बहुत बड़ी बात कह दिए योगश्चित्त वृत्ति निरोध का मतलब यह हुआ यू क्या है चित्र की व्रत यूका निरुद्ध हो जाना ही योग है अब इसमें आप जानेंगे चित्र चित्र के कई प्रकार हैं यह पांच प्रकार का होता है शिफ्ट मूड विक्षिप्त घाघरा और विरुद्ध अवस्था या पांच प्रकार के चित्र भी जिस प्रकार के आपके चित्र में मन आपका इस प्रकार से हुआ तो बच्चियां भी प्रकार के होती है वृत्तीय बहुत विचार विचार भी प्रकार की होती है जैसा चित्र वैसे विचार मंच उठती रहती है यह भी पांच प्रकार का होता है जिसको जाना हर मनुष्य के लिए बहुत ही जरूरी है दोस्तों वह पांच प्रकार की जो वृत्तियां है प्रमाण विपर्यय विकल्प निद्रा स्मृति प्रमाण नामक वृत्ति प्रत्यक्ष अनुमान आगम नामक विश्वरूपा की होती है और दोस्तों इन दोनों सूत्रों को याद कर लीजिए आपको बहुत जीवन में काम आएंगे इस तरह से समाधि पाद के जो प्रथम अध्याय है समाजवाद का उसमें कुल 51 सूत्र हर व्यक्ति को उन सूत्रों को जरूर याद रखना चाहिए तो और उन्नत पद युग के कुछ उन्नत पद यह है कि आप महर्षि पतंजलि का अष्टांग योग का नियम का पालन करें 8 मार्गों को इन राठ पद को पाकर आप अपने जीवन में उन्नत कर सकते हैं वह कौन से कौन से हैं यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान और समाधि इस तरह से इन 8 मार्गों पर चलकर व्यक्ति अपने आप को उज्जवल कर सकता है और अंत में उसे मोक्ष की प्राप्ति मिल ही जाती है इस तरह से आप लोग को अंखियों का अनुशासन के सूत्र के अनुसार स्टार्ट करें और योगश्चित्त वृत्ति निरोध आपका जहां जहां मन जाता है वहां वहां से खींचकर एक ही स्थान पर टीका इसको कैसे पिया जा सकता है जब प्रसिद्ध दिन करेंगे तभी हो इसलिए हुए दोस्तों है भाइयों ही साधक भाइयों और बहनों इसका अभ्यास न करें प्राणायाम प्रतिदिन करें योग प्रतिदिन करें आसन प्रतिदिन करें तब जाकर आप पूरी तरह से सिद्ध हो पर धीरे-धीरे आप योग के क्षेत्र में बस जाएंगे नारायण नारायण नारायण शांति

hari om please sadhak bhaiyo evam bahnon aap logo ke andar us viraajamaan chetan swaroop aatma ko hamari aur se naman hai doston aaj hum aap logo ko yog ki vishay mein bata ja rahe hain ki yog mein utpann money yog mein badhne ke kaun kaunsi acche raste hain kaise badhaya jaaye ek niyam kidhar se toh dekhi yug mein char paanch diye gaye hain maharshi patanjali ke dwara krit pehla hai samaj ka doosra hissa dhanbad teesra happy bhoot aur chautha hai kai ballebaaz install mein jo samajavad hai yah ucch koti ke court ke sadhakon ke liye hai jo asha aur nirasha se puri tarah se ug gaye hain aa sakti aur virakti ki bhi safalta aur asafaltaa ke beech puri tarah se yahan tak ki sochne ki shakti bhi jab khatam ho gayi hai sab kuch sansar se jo apadhapi bhagdaud se puri tarah se nirash ho gaye un logo ke liye samajavad ka abhyas chori isme pratham adhyay mein jo aata hai abhi yoga anushasanam samajik utpaad ka pratham sutra hai yoga anushasanam tha AFGANI hota hai shuruat shuruaat aisa lagta hai ki yog ab se chaalu hua hai nahi hum se nahi matlab jab aap start karte hain tab yah chaalu hota hai matlab bharat ke bahut se aise sahastra hote hain jo aaj se shuru hota hai ab yug sahastra ke shastra ko aarambh kiya jata hai dusre adhyay sutra mein bolte hain yogashchitt vriti nirodh arthat chitt ki vrittiyon ka nirodh ho jana hi kehne ka tatparya mera hua man mein uthane waale vaah sankalpon ki lahar sir ka sarvatha ruk jana hi yog hai you this dikhi yogashchitt vriti nirodh hai jo sab diya gaya hai maharshi patanjali yog rishi ne iska vritant jhuthi bhi shabd mein bahut badi baat keh diye yogashchitt vriti nirodh ka matlab yah hua you kya hai chitra ki vrat yuka niruddh ho jana hi yog hai ab isme aap jaanege chitra chitra ke kai prakar hain yah paanch prakar ka hota hai shift mood vikshipt ghagra aur viruddh avastha ya paanch prakar ke chitra bhi jis prakar ke aapke chitra mein man aapka is prakar se hua toh bachchiyan bhi prakar ke hoti hai vr̥ttiya bahut vichar vichar bhi prakar ki hoti hai jaisa chitra waise vichar manch uthati rehti hai yah bhi paanch prakar ka hota hai jisko jana har manushya ke liye bahut hi zaroori hai doston vaah paanch prakar ki jo vrittiyan hai pramaan viparyay vikalp nidra smriti pramaan namak vriti pratyaksh anumaan aagam namak vishwarupa ki hoti hai aur doston in dono sootron ko yaad kar lijiye aapko bahut jeevan mein kaam aayenge is tarah se samadhi pad ke jo pratham adhyay hai samajavad ka usme kul 51 sutra har vyakti ko un sootron ko zaroor yaad rakhna chahiye toh aur unnat pad yug ke kuch unnat pad yah hai ki aap maharshi patanjali ka ashtanga yog ka niyam ka palan kare 8 margon ko in rath pad ko pakar aap apne jeevan mein unnat kar sakte hain vaah kaunsi kaun se hain yum niyam aasan pranayaam pratyahar dharana dhyan aur samadhi is tarah se in 8 margon par chalkar vyakti apne aap ko ujjawal kar sakta hai aur ant mein use moksha ki prapti mil hi jaati hai is tarah se aap log ko ankhiyon ka anushasan ke sutra ke anusaar start kare aur yogashchitt vriti nirodh aapka jaha jahan man jata hai wahan wahan se khichkar ek hi sthan par tika isko kaise piya ja sakta hai jab prasiddh din karenge tabhi ho isliye hue doston hai bhaiyo hi sadhak bhaiyo aur bahnon iska abhyas na kare pranayaam pratidin kare yog pratidin kare aasan pratidin kare tab jaakar aap puri tarah se siddh ho par dhire dhire aap yog ke kshetra mein bus jaenge narayan narayan narayan shanti

हरि ओम प्लीज साधक भाइयों एवं बहनों आप लोगों के अंदर उस विराजमान चेतन स्वरूप आत्मा को हमार

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Dhananjay Janardan Suryavanshi

Founder & Director - Yogeej Meditation

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योग के उन्नत कोई योगा अनुभव करना यही उन्नत शेती है लेकिन जो मुनि पतंजलि ने जो बताया था अष्टांग योग यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान और समाधि उसमें समाधि तो उन्नत है इसके लिए बाकी चीजों की जरूरत पड़ती है उसमें बहिरंग योग है अंतरंग योग है अंतरंग साधना जैसे से करते जाएंगे वैसे डिजाइन समाधि का अनुभव कर सकते हैं आनंद में कुछ निश्चित होना यही योग के अंतिम स्थिति है यही उन्नत पद है

yog ke unnat koi yoga anubhav karna yahi unnat sheti hai lekin jo muni patanjali ne jo bataya tha ashtanga yog yum niyam aasan pranayaam pratyahar dharana dhyan aur samadhi usme samadhi toh unnat hai iske liye baki chijon ki zarurat padti hai usme bahirang yog hai antarang yog hai antarang sadhna jaise se karte jaenge waise design samadhi ka anubhav kar sakte hain anand mein kuch nishchit hona yahi yog ke antim sthiti hai yahi unnat pad hai

योग के उन्नत कोई योगा अनुभव करना यही उन्नत शेती है लेकिन जो मुनि पतंजलि ने जो बताया था अष्

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Yog Guru Gyan Ranjan Maharaj

Founder & Director - Kashyap Yogpith

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका क्वेश्चन है योग के कुछ उन्नत पद क्या है योग तो अपने आप में एक उन्नत पद है ही है बाकी किसी आलिया तेज यूनिवर्सिटी से आप योग का कोर्स करें खुद योग का संस्था खोलें योग सिखाएं रजिस्ट्रेशन कराएं खुद अपने आप में आपको उन्नत पद हासिल हो जाएगा इसमें कुछ भी सोचने की जरूरत नहीं है धन्यवाद

aapka question hai yog ke kuch unnat pad kya hai yog toh apne aap mein ek unnat pad hai hi hai baki kisi aliya tez university se aap yog ka course kare khud yog ka sanstha kholen yog sikhaye registration karaye khud apne aap mein aapko unnat pad hasil ho jaega isme kuch bhi sochne ki zarurat nahi hai dhanyavad

आपका क्वेश्चन है योग के कुछ उन्नत पद क्या है योग तो अपने आप में एक उन्नत पद है ही है बाकी

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Anil Ramola

Yoga Instructor | Engineer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

उपाध्याय अष्टांग योग में दिखाया गया है हमारी आधी है उसे हमें मांगते हो जाता है यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान और समाधि किस तरीके से सबसे उन्नत जाता है इसका हुए समाधि की ओर अग्रसर होते हैं और विभिन्न बाद से निकाल कि हम आसन करते हैं प्रणाम करते हैं ध्यान करते हैं और फिर हमारी की ओर अग्रसर होने का अभ्यास करते हैं तो सबसे उन्नत हमारा यह समाधि है तो दूसरी तरीके से देखा जाए कि आप ऐसे पोजीशन ऑफ द हैं आते हैं आप योग के क्षेत्र में योगदान आचार्य हैं तो योग के क्षेत्र में शिक्षकों के 16 पद क्या होगा तुम ऐसी पतंजलि में दर्शाया गया है कि उसे महर्षि हो गया और योगाचार्य हो गया इस तरीके के विभिन्न पद होते हैं एल शिक्षक के रूप में देखा जाए तो हम इसको शिक्षित

upadhyay ashtanga yog mein dikhaya gaya hai hamari aadhi hai use hamein mangate ho jata hai yum niyam aasan pranayaam pratyahar dharana dhyan aur samadhi kis tarike se sabse unnat jata hai iska hue samadhi ki aur agrasar hote hain aur vibhinn baad se nikaal ki hum aasan karte hain pranam karte hain dhyan karte hain aur phir hamari ki aur agrasar hone ka abhyas karte hain toh sabse unnat hamara yah samadhi hai toh dusri tarike se dekha jaaye ki aap aise position of the hain aate hain aap yog ke kshetra mein yogdan aacharya hain toh yog ke kshetra mein shikshakon ke 16 pad kya hoga tum aisi patanjali mein darshaya gaya hai ki use maharshi ho gaya aur yogacharya ho gaya is tarike ke vibhinn pad hote hain el shikshak ke roop mein dekha jaaye toh hum isko shikshit

उपाध्याय अष्टांग योग में दिखाया गया है हमारी आधी है उसे हमें मांगते हो जाता है यम नियम आसन

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