क्या योग रचनात्मकता को प्रभावित करता है यदि हाँ, तो कैसे?...


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Narendar Gupta

प्राकृतिक योगाथैरिपिस्ट एवं योगा शिक्षक,फीजीयोथैरीपिस्ट

1:08

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Vijay Sharma

Yoga Trainer (P.G.D.Y.)

6:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

योग रचनात्मकता को प्रभावित ही नहीं करता बल्कि पूरी जिंदगी को ऐसा परिवर्तन ला के रख देता है जो इंसान कभी सोच भी नहीं सकता वो अपने आप में एक दिव्य शक्ति है एक ब्रह्मांड है आपने आपने इसको आदित्य खन्ना ही बहुत बड़ी चरम सीमा पर ना होता है यो एक सोच है जिंदगी एक दिल्ली की लाइफ स्टाइल है जीने की कला है जो यह कैडमैटिक साइंस जय जिंदगी के अंदर इंसान के एक पल चिट्ठी लाता है नकारात्मकता जो सोच लो खत्म करता है सोच पैदा होती एक अंदाज इंटरनल और एक्सटर्नल प्यारे तेरे चलाता है यू संतोष पैदा करता है और संयमित बनाता है योगिता नियमित हो जाता है इंसान तो वही योगी कहलाता है योग 10 स्तरीकरण से जाता है स्वाध्याय योग ईश्वर प्राणी धान इंसान को उसके प्रति करता है ईश्वर की समर्पित करता है यो मानसिक रूप से शारीरिक रूप से यह चित्र बनाकर सबको अध्यात्म की हो इंसान को ले जाता है जिसकी वजह से इंसान भौतिक संसार से दूर रखें अलौकिक दिव्य शक्तियों से उसका कांटेक्ट हो जाता है तब वह पांच विद्वान हैं लड़के उनसे छुटकारा पा जाते हैं जिसकी वजह से इंसान जीवन चक्र के यह गीत उससे दूर हो जाता है और जितने भी इंसान ही प्रॉब्लम से उससे तो दूर हो जाता है और योग जो होता है इंद्रियों को कंट्रोल करता है तो उस को कंट्रोल करता है माइंड कंट्रोल करता है इंद्रियां बार उनकी लाशों के अंतर्मुखी हो जाती है तब इंसान डेरा की स्थिति में आ जाता है जिसको प्रत्याहार बोलते हैं कंटेंपलेशन या नो नथिंग तब उसके अंदर काम क्रोध मद मोह अहंकार के द्वारा आतंकियों से दूरी बना के रहता है और जिन व्यक्तियों की तरफ रुझान उसका समर्थन होने लगता है होने जाता है धारणा ध्यान समाधि की ओर अग्रसर रहता है भावना के अंदर वह लोग उनको इस तरीके से उसकी व्यक्तियों के अनुसार व्यक्तियों को तक में दे देता है जो कि बाद में ध्यान की स्थिति बन जाती है जो की कॉमेडी किशन बोलते हैं इसमें चित्र व शराब की एक केंद्र बिंदु पर केंद्रित कर देना होते हैं उसको पास ना बोलते हैं अगर वह बिंदु लक्ष्य यह भगवान या परमात्मा हो जो पास में होता है जोगी बाद में उन्नत होकर 10 मिनट पर समाधि की ओर अग्रसर हो जाता है जो कि संदेश बोलते हैं यह पूर्ण चेतना संपूर्ण ज्ञान ब्रह्मांड का पूरा नॉलेज प्राप्त होती है हजार गोल्डन लाइफ विचारों और आनंद लगता है इंसान को जिंदगी जागृत हो जाती है भूत भविष्य वर्तमान की जानकारी प्राप्त हो जाती है और दिव्य शक्तियां उसको प्राप्त होने लगती है इसके फलस्वरूप उसकी जहां तक की कुंडली भी जागृत हो जाती है कुंडली जागृत हो जाना चलो दीजिए बहुत बड़ी ईश्वर की महिमा उस व्यक्ति पर हो जाती है जिसकी वजह से वह साधारण से असाधारण व्यक्ति बन जाता है उसके अंदर वह शक्तियां समाहित हो जाती हैं जो आम आदमी के अंदर नहीं पाई जाती तो यह रचनात्मकता जहर डालता है इंसान के अंदर अगर योग ढंग से अपनाया गया जिंदगी में अपने अंदर आत्मसात किया जाए जबकि कस्टम का मतलब इसी में आता है इसका भी तरसते आपकी कामवासना ही शक्ति भारत के मानचित्र में सवार को हटा के एक बिंदु पर किया जाए तब्बू सब चीजों की अवस्थाएं होती हैं भोग विलास ताकि की ओर आदमी बना रहता है तनाव टेंशन देती है सब कुछ चुराता है और बाद में जाके इससे हटके हैं वह फिर सत्यप्रकाश बढ़ने लगता है जब कोई योग का सहारा लेता है

yog rachnatmaka ko prabhavit hi nahi karta balki puri zindagi ko aisa parivartan la ke rakh deta hai jo insaan kabhi soch bhi nahi sakta vo apne aap me ek divya shakti hai ek brahmaand hai aapne aapne isko aditya khanna hi bahut badi charam seema par na hota hai yo ek soch hai zindagi ek delhi ki life style hai jeene ki kala hai jo yah kaidmaitik science jai zindagi ke andar insaan ke ek pal chitthi lata hai nakaratmakta jo soch lo khatam karta hai soch paida hoti ek andaaz internal aur external pyare tere chalata hai you santosh paida karta hai aur sanyamit banata hai yogita niyamit ho jata hai insaan toh wahi yogi kehlata hai yog 10 starikaran se jata hai swaadhyaay yog ishwar prani dhaan insaan ko uske prati karta hai ishwar ki samarpit karta hai yo mansik roop se sharirik roop se yah chitra banakar sabko adhyaatm ki ho insaan ko le jata hai jiski wajah se insaan bhautik sansar se dur rakhen alaukik divya shaktiyon se uska Contact ho jata hai tab vaah paanch vidhwaan hain ladke unse chhutkara paa jaate hain jiski wajah se insaan jeevan chakra ke yah geet usse dur ho jata hai aur jitne bhi insaan hi problem se usse toh dur ho jata hai aur yog jo hota hai indriyon ko control karta hai toh us ko control karta hai mind control karta hai indriya baar unki lashon ke antarmukhi ho jaati hai tab insaan dera ki sthiti me aa jata hai jisko pratyahar bolte hain kantempaleshan ya no nothing tab uske andar kaam krodh mad moh ahankar ke dwara atankiyo se doori bana ke rehta hai aur jin vyaktiyon ki taraf rujhan uska samarthan hone lagta hai hone jata hai dharana dhyan samadhi ki aur agrasar rehta hai bhavna ke andar vaah log unko is tarike se uski vyaktiyon ke anusaar vyaktiyon ko tak me de deta hai jo ki baad me dhyan ki sthiti ban jaati hai jo ki comedy kishan bolte hain isme chitra va sharab ki ek kendra bindu par kendrit kar dena hote hain usko paas na bolte hain agar vaah bindu lakshya yah bhagwan ya paramatma ho jo paas me hota hai jogi baad me unnat hokar 10 minute par samadhi ki aur agrasar ho jata hai jo ki sandesh bolte hain yah purn chetna sampurna gyaan brahmaand ka pura knowledge prapt hoti hai hazaar golden life vicharon aur anand lagta hai insaan ko zindagi jagrit ho jaati hai bhoot bhavishya vartaman ki jaankari prapt ho jaati hai aur divya shaktiyan usko prapt hone lagti hai iske phalswarup uski jaha tak ki kundali bhi jagrit ho jaati hai kundali jagrit ho jana chalo dijiye bahut badi ishwar ki mahima us vyakti par ho jaati hai jiski wajah se vaah sadhaaran se asadharan vyakti ban jata hai uske andar vaah shaktiyan samahit ho jaati hain jo aam aadmi ke andar nahi payi jaati toh yah rachnatmaka zehar dalta hai insaan ke andar agar yog dhang se apnaya gaya zindagi me apne andar aatmsat kiya jaaye jabki custom ka matlab isi me aata hai iska bhi taraste aapki kaamvasna hi shakti bharat ke manchitra me savar ko hata ke ek bindu par kiya jaaye tabu sab chijon ki avasthae hoti hain bhog vilas taki ki aur aadmi bana rehta hai tanaav tension deti hai sab kuch churata hai aur baad me jake isse hatake hain vaah phir sathyaprakash badhne lagta hai jab koi yog ka sahara leta hai

योग रचनात्मकता को प्रभावित ही नहीं करता बल्कि पूरी जिंदगी को ऐसा परिवर्तन ला के रख देता ह

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Awanish Kumar

Yoga Instructor

1:32
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी योग बिल्कुल लक्ष्मण रचनात्मकता को प्रभावित करता है यानी क्रिएटिविटी को बढ़ाता है वह कुछ ऐसे इसके लिए थोड़ा सा हम एक मनोवैज्ञानिक शोध को समझना होगा वह सोच यह है कि एक स्वस्थ व्यक्ति के मन में पूरे 24 घंटे में 7000 से लेकर के 72000 विचार आते हैं अब सोचिए कि एक मस्तिष्क कितने अच्छे से विचार होना चाहिए तू खुद एक के ट्रैक में फंसा पढ़ाई पर 40 आरोपी ट्रक में विचारों के ट्रैक में कुछ अच्छे कुछ क्रिएटिव कैसे आएंगे वह तो आएंगे जब हम विचारों के प्रवाह को थोड़ा सा ठहरने दे उसके उस में चल रहे आलतू फालतू के विचारों को हम साइड करें मतलब कि मुझे 7000 की संख्या उसको कम करें और योग के अभ्यास होते हैं वह चाहे आतंकी माध्यम से हो या प्राणायाम के माध्यम से हो या फिर धारणा प्रत्याहार के माध्यम से हो ध्यान तो है ही सदियों के माध्यम से हम अपने मन में अलीगढ़ विचारों पर नियंत्रण पास आते हैं और जैसे ही हम अपने भीतर के अंदर विचारों पर नियंत्रण पाते हैं तो वैसे ही हमारे भीतर का जो हमारे भीतर बैठा हो जो वैज्ञानिक जाग उठता है हमारे भीतर बैठा हुआ एक बुद्धिमता पूर्ण हमारा है वह जाग उठता है और वो जाग उठता है तो हम क्रिएटिविटी लेट हो जाते हैं क्रिएटिविटी हमारे सामने हो जाती है हमारे हमसे दुनिया को दिखा जाता है और मुझे बदलता है तो हम ही से बहुत कुछ होने लगता है धन्यवाद

ji yog bilkul lakshman rachnatmaka ko prabhavit karta hai yani creativity ko badhata hai vaah kuch aise iske liye thoda sa hum ek manovaigyanik shodh ko samajhna hoga vaah soch yah hai ki ek swasthya vyakti ke man mein poore 24 ghante mein 7000 se lekar ke 72000 vichar aate hain ab sochiye ki ek mastishk kitne acche se vichar hona chahiye tu khud ek ke track mein fansa padhai par 40 aaropi truck mein vicharon ke track mein kuch acche kuch creative kaise aayenge vaah toh aayenge jab hum vicharon ke pravah ko thoda sa thaharane de uske us mein chal rahe alatu faltu ke vicharon ko hum side kare matlab ki mujhe 7000 ki sankhya usko kam kare aur yog ke abhyas hote hain vaah chahen aatanki madhyam se ho ya pranayaam ke madhyam se ho ya phir dharana pratyahar ke madhyam se ho dhyan toh hai hi sadiyon ke madhyam se hum apne man mein aligarh vicharon par niyantran paas aate hain aur jaise hi hum apne bheetar ke andar vicharon par niyantran paate hain toh waise hi hamare bheetar ka jo hamare bheetar baitha ho jo vaigyanik jag uthata hai hamare bheetar baitha hua ek buddhimata purn hamara hai vaah jag uthata hai aur vo jag uthata hai toh hum creativity late ho jaate hain creativity hamare saamne ho jaati hai hamare humse duniya ko dikha jata hai aur mujhe badalta hai toh hum hi se bahut kuch hone lagta hai dhanyavad

जी योग बिल्कुल लक्ष्मण रचनात्मकता को प्रभावित करता है यानी क्रिएटिविटी को बढ़ाता है वह कुछ

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Ashok Clinic

Sexologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्या योग्य चमत्कार को प्रभावित करता है यदि हां तो कैसे देखें योगा आपको से सेहत तंदुरुस्ती का करता सिखाता है एकाग्र मन से योग्यता से योग किया जाता है जब ऐसा एकाग्रता दिमाग में आती है टिक्की एक घंटा घंटा बैठ के उस असम को सिस्टम को किया जाता है तो नीचे भी आपकी बालपोथी स्थान पर तरह चमकता आगे बढ़ते हैं

kya yogya chamatkar ko prabhavit karta hai yadi haan toh kaise dekhen yoga aapko se sehat tandurusti ka karta sikhata hai ekagra man se yogyata se yog kiya jata hai jab aisa ekagrata dimag mein aati hai tikki ek ghanta ghanta baith ke us assam ko system ko kiya jata hai toh niche bhi aapki balpothi sthan par tarah chamakta aage badhte hain

क्या योग्य चमत्कार को प्रभावित करता है यदि हां तो कैसे देखें योगा आपको से सेहत तंदुरुस्ती

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Yog Guru Gyan Ranjan Maharaj

Founder & Director - Kashyap Yogpith

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका क्वेश्चन है क्या योग्य रचनात्मकता को प्रभावित करता है तो मेरा मानना है कि योग एक रचनात्मक शक्ति को ही प्रभावित करता है कारण कि योग का सूत्रपात क्या शुरुआत पर जब आप करेंगे तो उसके लिए अन्य अन्य बहुत सारे विधाएं हैं जिस को फॉलो करना पड़ता है जैसे कि आप आपको योग में बहुत सारी ऐसी क्रियाएं हैं इसे बताना पड़ता है जैसे आपको योगनिद्रा एक शब्द आता है इसमें टाइमली सोना और टाइम ही जगने का विधान है ब्रह्म मुहूर्त में जागना है 9:00 बजे के आसपास है हो जाना है और ब्रह्म मुहूर्त में जागने के बाद आप पंडित क्रियाओं से निवृत्त होने के बाद स्नान आदि करने के बाद आप जहां तक हो सके वज्रासन में बैठने का प्रयास करें मजाक में बैठने के बाद आपको शुक्रिया करेंगे उससे आपको खुद ब खुद दे आपको लगने लगेगा कि योग किस तरीके से रचनात्मकता को प्रभावित करता है उस चीज को थोड़ा सा ध्यान देने की जरूरत है उसमें थोड़ा सा टाइम लगेगा आपको समझने में इसलिए कि योग कोई छोटा-मोटा विषय वस्तु नहीं है तथा महासागर के रूप में इसे हम लोग समझते हैं कोई व्यक्ति का है कि हम युग में पारंगत हो गए तो इस चीज को हम नहीं मानते हैं इसलिए रचनात्मकता तो है क्योंकि इसको बड़े-बड़े ऋषि मुनि भी मान चुके हैं हम लोग क्या है धन्यवाद

aapka question hai kya yogya rachnatmaka ko prabhavit karta hai toh mera manana hai ki yog ek rachnatmak shakti ko hi prabhavit karta hai karan ki yog ka sutrapaat kya shuruat par jab aap karenge toh uske liye anya anya bahut saare vidhaen hain jis ko follow karna padta hai jaise ki aap aapko yog mein bahut saree aisi kriyaen hain ise bataana padta hai jaise aapko yognidra ek shabd aata hai isme timely sona aur time hi jagane ka vidhan hai Brahma muhurt mein jagana hai 9 00 baje ke aaspass hai ho jana hai aur Brahma muhurt mein jagne ke baad aap pandit kriyaon se sevanervit hone ke baad snan aadi karne ke baad aap jaha tak ho sake vajrasan mein baithne ka prayas kare mazak mein baithne ke baad aapko shukriya karenge usse aapko khud bsp khud de aapko lagne lagega ki yog kis tarike se rachnatmaka ko prabhavit karta hai us cheez ko thoda sa dhyan dene ki zarurat hai usme thoda sa time lagega aapko samjhne mein isliye ki yog koi chota mota vishay vastu nahi hai tatha mahasagar ke roop mein ise hum log samajhte hain koi vyakti ka hai ki hum yug mein paarangat ho gaye toh is cheez ko hum nahi maante hain isliye rachnatmaka toh hai kyonki isko bade bade rishi muni bhi maan chuke hain hum log kya hai dhanyavad

आपका क्वेश्चन है क्या योग्य रचनात्मकता को प्रभावित करता है तो मेरा मानना है कि योग एक रचना

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Dr.Swatantra Sharma

Yoga Expert & Consultant

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

योगाभ्यास से हमारा विवेक बढ़ जाता है विवेक की जागृति होने से हमारे दाया और बाया मस्तिष्क संतुलित रूप से काम करने लगता है बाया मस्तिष्क जब टीवी से कार्य करता है तब हमारी तर्क शक्ति बढ़ती है जबकि बाएं मस्तिष्क से रचनात्मकता बढ़ती है तो व्यक्ति जब नियमित रूप से योगाभ्यास करता है तब उसकी रचनात्मकता स्वयमेव बढ़ती चली जाती है और उसका लाभ भी उसके व्यक्तित्व में दिखाई देता है

yogabhayas se hamara vivek badh jata hai vivek ki jagriti hone se hamare daya aur baya mastishk santulit roop se kaam karne lagta hai baya mastishk jab TV se karya karta hai tab hamari tark shakti badhti hai jabki baen mastishk se rachnatmaka badhti hai toh vyakti jab niyamit roop se yogabhayas karta hai tab uski rachnatmaka swayamev badhti chali jaati hai aur uska labh bhi uske vyaktitva mein dikhai deta hai

योगाभ्यास से हमारा विवेक बढ़ जाता है विवेक की जागृति होने से हमारे दाया और बाया मस्तिष्क स

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Yogacharya Aaditya

Yoga Instructor

1:04

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

योगाभ्यास के माध्यम से हमारे मन की शक्ति बढ़ती है हमारी एकाग्रता बढ़ती है हमारे संकल्प शक्ति बढ़ती है हमारी विल पावर बढ़ जाती है तो इन चीजों के बढ़ने से और मस्तिष्क की एकाग्रता प्राप्त कर लेने से हमें चीजों को ज्यादा फोकस करने और ज्यादा ध्यान पूर्वक चीजों को करने का अभ्यास आसानी से हो जाता है यदि हम किसी कार्य को ध्यानपूर्वक कर रहे हैं तो उसमें स्वाभाविक बात है कि किसी कार्य को ध्यान पूर्वक करने का लाभ उसको हम अधिक निपुणता से कर पाते हैं अधिक रचनात्मकता से कर पाते हैं तो यह अलावा कोई और योगाभ्यास में भी विशेष रूप से प्राणायाम से आपको मिलता है तो यह लाभ लेने के लिए आपको रचनात्मक होने के लिए आपको योगाभ्यास अवश्य निरंतर और पूर्णता के साथ करना चाहिए

yogabhayas ke madhyam se hamare man ki shakti badhti hai hamari ekagrata badhti hai hamare sankalp shakti badhti hai hamari will power badh jaati hai toh in chijon ke badhne se aur mastishk ki ekagrata prapt kar lene se hamein chijon ko zyada focus karne aur zyada dhyan purvak chijon ko karne ka abhyas aasani se ho jata hai yadi hum kisi karya ko dhyanapurvak kar rahe hain toh usme swabhavik baat hai ki kisi karya ko dhyan purvak karne ka labh usko hum adhik nipunata se kar paate hain adhik rachnatmaka se kar paate hain toh yah alava koi aur yogabhayas mein bhi vishesh roop se pranayaam se aapko milta hai toh yah labh lene ke liye aapko rachnatmak hone ke liye aapko yogabhayas avashya nirantar aur purnata ke saath karna chahiye

योगाभ्यास के माध्यम से हमारे मन की शक्ति बढ़ती है हमारी एकाग्रता बढ़ती है हमारे संकल्प शक्

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