योग स्ट्रेचिंग या अन्य प्रकार की फिटनेस से कैसे अलग है?...


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Somit Yoga Varanasi

Yoga Trainer and Astrologer

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Gyanchand Soni

Yoga Instructor.

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

योग अपने आप में प्राचीनतम और विज्ञानिक व्यायाम योग का कोई पूरी दुनिया में मुकाबला नहीं है इसलिए युवकों ने तो जिनसे नाइस पैकिंग से न दूर से किसी से भी कंपेयर नहीं करेगी योग अपने आप में एक अनुपम महाविद्या है जिसका पूरी दुनिया में कहीं कोई तोड़ नहीं है धन्यवाद आपका दिन शुभ रहे

yog apne aap me prachintam aur vigyanik vyayam yog ka koi puri duniya me muqabla nahi hai isliye yuvakon ne toh jinse nice packing se na dur se kisi se bhi compare nahi karegi yog apne aap me ek anupam mahavidya hai jiska puri duniya me kahin koi tod nahi hai dhanyavad aapka din shubha rahe

योग अपने आप में प्राचीनतम और विज्ञानिक व्यायाम योग का कोई पूरी दुनिया में मुकाबला नहीं है

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Narendar Gupta

प्राकृतिक योगाथैरिपिस्ट एवं योगा शिक्षक,फीजीयोथैरीपिस्ट

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Shailesh Kumar Dubey

Yoga Teacher , Retired Government Employee

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

प्रश्न है योग स्टैकिंग या अन्य प्रकार के फटने से कैसे अलग है इसका उत्तर है इस टेकिंग और अन्य प्रकार के जितने फिटनेस है जितने भी आयाम है यह सब हमारे शरीर को सुदृढ़ बनाते हैं और योग बाह्य और आंतरिक दोनों शरीर को दोनों शरीर का फिटनेस दोनों शरीर को मजबूत बनाता है हमारी शरीर दो प्रकार की है तुझे बाहर दिखती है वह बाय शरीफ और दूसरा जो हमारे अंदर की शरीर है जो दिखती नहीं है आंतरिक शरीर जिसमें हृदय है फेफड़ा है किडनी है पैंक्रियाज है तो यह लोग जो है योग एवं प्राणायाम करते हैं वह हमारे आंतरिक शरीर को बहुत सुदृढ़ बनाता है तो प्राणायाम आंतरिक शरीर को मजबूत बनाएगा और 12 प्रकार की पीटी आसन सूर्य नमस्कार सूक्ष्म व्यायाम एक बार शरीर को सुदृढ़ बनाएगा इसलिए आपको योग करना चाहिए करें योग रहें निरोग

prashna hai yog staiking ya anya prakar ke fatne se kaise alag hai iska uttar hai is taking aur anya prakar ke jitne fitness hai jitne bhi aayam hai yah sab hamare sharir ko sudridh banate hain aur yog bahya aur aantarik dono sharir ko dono sharir ka fitness dono sharir ko majboot banata hai hamari sharir do prakar ki hai tujhe bahar dikhti hai vaah bye sharif aur doosra jo hamare andar ki sharir hai jo dikhti nahi hai aantarik sharir jisme hriday hai fefda hai KIDNEY hai pancreas hai toh yah log jo hai yog evam pranayaam karte hain vaah hamare aantarik sharir ko bahut sudridh banata hai toh pranayaam aantarik sharir ko majboot banayega aur 12 prakar ki PT aasan surya namaskar sukshm vyayam ek baar sharir ko sudridh banayega isliye aapko yog karna chahiye kare yog rahein nirog

प्रश्न है योग स्टैकिंग या अन्य प्रकार के फटने से कैसे अलग है इसका उत्तर है इस टेकिंग और अन

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Dhananjay Janardan Suryavanshi

Founder & Director - Yogeej Meditation

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

योगा से सिर्फ शरीर के नहीं तो मानसिक भी संतुलन बढ़ता है शरीर और मन का संवर्धन होता है और आपने जो पंचू कोषाध्यक्ष अरे उसमें बदलाव आता है सकारात्मक बताते अगर दूसरा कोई स्टेशन हो फिटनेस के लिए कुछ हम करें तो उसमें सिर्फ शरीर संवर्धन के लिए देखा जाता है उसमें बाकी के पंचों को साथ में डेवलपमेंट नहीं होते तो योग्य के ऐसे की जो सर्वांग सुंदर परिपूर्ण है जहां पर हमारी पूरी तरह से ऑलराउंडर जिसे बोलते हैं पूरी तरह से अपना संवर्धन होता है आपने क्षमता बढ़ती है अपनी ताकत भी बढ़ते इच्छा शक्ति बढ़ती है और विल पावर एंड और बॉडी को बॉडी एंड माइंड कॉन्प्लेक्स बोथ कैन बे डेवलप्ड इन योगा

yoga se sirf sharir ke nahi toh mansik bhi santulan badhta hai sharir aur man ka samvardhan hota hai aur aapne jo panchu koshadhyaksh are usme badlav aata hai sakaratmak batatey agar doosra koi station ho fitness ke liye kuch hum kare toh usme sirf sharir samvardhan ke liye dekha jata hai usme baki ke panchon ko saath mein development nahi hote toh yogya ke aise ki jo sarvang sundar paripurna hai jaha par hamari puri tarah se allrounder jise bolte hain puri tarah se apna samvardhan hota hai aapne kshamta badhti hai apni takat bhi badhte iccha shakti badhti hai aur will power and aur body ko body and mind kanpleks both can be developed in yoga

योगा से सिर्फ शरीर के नहीं तो मानसिक भी संतुलन बढ़ता है शरीर और मन का संवर्धन होता है और आ

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Girijakant Singh

Founder/ President Yog Bharati Foundation Trust

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है कि योगा स्ट्रैचिंग या किसी अन्य प्रकार के जो फिटनेस हैं उन से कैसे अलग है तो योग जो है वह एकदम अलग है आप एक्सरसाइज फिटनेस केयर स्ट्रेचिंग प्रयोग करते हैं कहीं पर प्रेशर नहीं दिया जाता हालांकि जब हम योगाभ्यास करते हैं योगासनों का अभ्यास करते हैं तो कुछ शारीरिक ब्याह में सूक्ष्म व्यायाम क्लोज ने एक्सरसाइज सभी करते हैं लेकिन उनको नहीं करते फोर्सफुली ऐसा नहीं करते हैं तो बिल्कुल ही स्लो स्लो करने की प्रक्रिया को योगासन करते हैं इसमें किसी प्रकार का योग की परिभाषा है आसन योगासन में जो आसन स्टैप है उसकी परिभाषा ही है सनम सुख पूर्वक आप इस तरह के उम्र ही आसान है सबके स्ट्रेचिंग इसके अलग जिम्मेदार हैं तो उसमें एड्रेस दिया जाता है ऐसा कुछ नहीं दिया जाता है तो यह बिल्कुल अलग है लेकिन हां कुछ ऐसा ही आसन इसमें कराई जाती है तो इसलिए कुछ लोग उसको यह कह सकते हैं कि यह लेकिन योगासन और फिटनेस के जो अलग हुए हैं वह अलग ही हैं

aapka prashna hai ki yoga straiching ya kisi anya prakar ke jo fitness hain un se kaise alag hai toh yog jo hai vaah ekdam alag hai aap exercise fitness care stretching prayog karte hain kahin par pressure nahi diya jata halaki jab hum yogabhayas karte hain yogasanon ka abhyas karte hain toh kuch sharirik byaah mein sukshm vyayam close ne exercise sabhi karte hain lekin unko nahi karte forcefully aisa nahi karte hain toh bilkul hi slow slow karne ki prakriya ko yogasan karte hain isme kisi prakar ka yog ki paribhasha hai aasan yogasan mein jo aasan staip hai uski paribhasha hi hai sanam sukh purvak aap is tarah ke umr hi aasaan hai sabke stretching iske alag zimmedar hain toh usme address diya jata hai aisa kuch nahi diya jata hai toh yah bilkul alag hai lekin haan kuch aisa hi aasan isme karai jaati hai toh isliye kuch log usko yah keh sakte hain ki yah lekin yogasan aur fitness ke jo alag hue hain vaah alag hi hain

आपका प्रश्न है कि योगा स्ट्रैचिंग या किसी अन्य प्रकार के जो फिटनेस हैं उन से कैसे अलग है त

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Ankit Laur

Yoga Instructor

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हेलो आपका सवाल है योग स्ट्रेचिंग और अन्य प्रकार की फिटनेस से कैसे अलग है चाहे आप जिम की बात ले ले या जिमनास्टिक की बात दे दो और रही स्ट्रैचिंग की बात योगा में भी चैटिंग होती है पर इससे अलग इसमें क्या होता है इससे अलग इसमें यह होता है कि आप योगा एक अभी फिजिकली फिट होने से संबंधित नहीं है आपके मानसिक रूप से भी स्वस्थ होने से अब मैं क्यों कह रहा हूं यह बात योगा वाला प्रशन अगर मानसिक रूप से अस्वस्थ है ठीक है क्योंकि योगासन के मानसिक रूप से भी बदलते हैं आपके विचार को बदलता है आप के रहन-सहन के तरीके उबलते हैं बहुत सारी चीजों को बदलते हैं अपने करना का भाव उत्पन्न होता है कि सारे भाव भी बदल देते हैं तो जीवन कैसा होना चाहिए युग में होना चाहिए ठीक है जब आप कभी भी छोड़ोगी ना ठीक है आप 24 घंटे ही होगा में योग में जीवन है आपको तो धीरे-धीरे आपका जीवन में हो जाता है अपने जिमनास्टिक अरे अभी किसी स्तर के तरह की स्टेचिंग करके अपने आप को ढाल लिया है एक अच्छी सी सेहत में या फिर आप अच्छे से देख रहे हो और आपको मानसिक रूप से स्वस्थ हो क्या फायदा या फिर आपके पास बड़ा बंगला है या फिर आपके पास बड़ी गाड़ियां हैं या फिर आपके पास कुछ भी है पर आप अपने आप को अच्छा फील नहीं कर रहे तो क्या फायदा ऐसे बहुत सारे लोगों के साथ हो रहा है इसलिए योगा स्टेचिंग ही नहीं है यह मानसिक रूप से ही बदलता है जब मानसिक रूप से स्वस्थ आदमी किसी को मिलता है तो उसे दूसरा अपने आप तो खुश होता ही है दूसरे को भी खुशी मिलती है उसे क्या मिल गए राइट पर्सन एंड इस ए गुड पर्सन अगर क्योंकि सत्य सही राइट राइट होता है उसे कोई झुठला नहीं सकता ऐसे ही बताई हो इसीलिए थोड़ा सा अपना फिजिकल फिटनेस चला गया शारीरिक रूप से ही सोच नहीं करता मानसिक रूप से स्वस्थ करता है

hello aapka sawaal hai yog stretching aur anya prakar ki fitness se kaise alag hai chahen aap gym ki baat le le ya gymnastic ki baat de do aur rahi straiching ki baat yoga mein bhi chatting hoti hai par isse alag isme kya hota hai isse alag isme yah hota hai ki aap yoga ek abhi physically fit hone se sambandhit nahi hai aapke mansik roop se bhi swasthya hone se ab main kyon keh raha hoon yah baat yoga vala prashn agar mansik roop se aswasth hai theek hai kyonki yogasan ke mansik roop se bhi badalte hai aapke vichar ko badalta hai aap ke rahan sahan ke tarike ubalate hai bahut saree chijon ko badalte hai apne karna ka bhav utpann hota hai ki saare bhav bhi badal dete hai toh jeevan kaisa hona chahiye yug mein hona chahiye theek hai jab aap kabhi bhi chodogi na theek hai aap 24 ghante hi hoga mein yog mein jeevan hai aapko toh dhire dhire aapka jeevan mein ho jata hai apne gymnastic are abhi kisi sthar ke tarah ki steching karke apne aap ko dhal liya hai ek achi si sehat mein ya phir aap acche se dekh rahe ho aur aapko mansik roop se swasthya ho kya fayda ya phir aapke paas bada bangla hai ya phir aapke paas baadi gadiyan hai ya phir aapke paas kuch bhi hai par aap apne aap ko accha feel nahi kar rahe toh kya fayda aise bahut saare logo ke saath ho raha hai isliye yoga steching hi nahi hai yah mansik roop se hi badalta hai jab mansik roop se swasthya aadmi kisi ko milta hai toh use doosra apne aap toh khush hota hi hai dusre ko bhi khushi milti hai use kya mil gaye right person and is a good person agar kyonki satya sahi right right hota hai use koi jhuthla nahi sakta aise hi batai ho isliye thoda sa apna physical fitness chala gaya sharirik roop se hi soch nahi karta mansik roop se swasthya karta hai

हेलो आपका सवाल है योग स्ट्रेचिंग और अन्य प्रकार की फिटनेस से कैसे अलग है चाहे आप जिम की बा

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महेश दुबे

कवि साहित्यकार

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

योगासन को अहिंसक न्याय कहा जाता है इससे शरीर पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता जबकि दूसरी जो एक्सरसाइज होती है वह शरीर को तनाव में डालती हैं तनाव पूर्वक को नहीं किया जाता है और शीघ्रता पूर्वक किया जाता है जबकि योगासन किसी भी एक अवस्था में कुछ देर बैठे गाने को योगासन करें उसके शरीर बहुत सहज रहता है और शरीर को किसी प्रकार का कष्ट नहीं होता और प्रतिकूल प्रभाव नहीं आते इन दोनों एक्सरसाइज में यही फर्क है और जो तेज गति से एक्सरसाइज की जाती है उससे कभी-कभी नसों में खिंचाव आ जाता है मांसपेशियों से ग्रस्त हो सकती हैं

yogasan ko ahinsak nyay kaha jata hai isse sharir par koi viprit prabhav nahi padta jabki dusri jo exercise hoti hai vaah sharir ko tanaav mein daalti hain tanaav purvak ko nahi kiya jata hai aur shighrata purvak kiya jata hai jabki yogasan kisi bhi ek avastha mein kuch der baithe gaane ko yogasan kare uske sharir bahut sehaz rehta hai aur sharir ko kisi prakar ka kasht nahi hota aur pratikul prabhav nahi aate in dono exercise mein yahi fark hai aur jo tez gati se exercise ki jaati hai usse kabhi kabhi nason mein khinchav aa jata hai mansapeshiyon se grast ho sakti hain

योगासन को अहिंसक न्याय कहा जाता है इससे शरीर पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता जबकि दूसरी जो

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Yog Guru Gyan Ranjan Maharaj

Founder & Director - Kashyap Yogpith

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका क्वेश्चन है योग स्टिचिंग या अन्य प्रकार की फिटनेस से कैसे अलग हैं तो देखिए और जो अन्य प्रकार के बेटे की जहां तक आवाज बोल रहा है तो सिर्फ उसमें आपको फिटनेस ही नजर आ रहा है इंटरनल एनर्जी सारे अंगों को योग के द्वारा मिलता है उस चीज को शायद आप को नजरअंदाज कर रहे हैं योग के द्वारा जो वापस टेस्टिंग करना है वो किसी भी अंग में चार्जिंग का उपयोग कर रहे हैं जिस बीमारी के लिए कर रहे हैं चाहे जिससे वजह से करना उसका इंटरनल और एक्सटर्नल दोनों ही स्थितियों में उसमें एनर्जी का फ्लोर होता है योग के द्वारा और जिसके लिए आप कर रहे हैं और से अंग को अंदर अंतर एक और बाएं दोनों ही सबको बेवकूफ स्वस्थ करता है बाकी और जो चीज है स्ट्रैचिंग आशिक ने इसकी तो उसमें सिर्फ आपको लगेगा कि ऊपरी भाग में कि आपका फिटनेस सही हो गया लेकिन अंदरूनी हो सकता है कि कोई न कोई विकार उसमें उत्पन्न हो जाए इसलिए योग का जेस्टेटिंग उसका कोई तुलना किसी अन्य तरीके सिंह के बदौलत काफी बेहतर है इसलिए इसमें कोई संदेश की बात नहीं है धन्यवाद

aapka question hai yog stitching ya anya prakar ki fitness se kaise alag hain toh dekhiye aur jo anya prakar ke bete ki jaha tak awaaz bol raha hai toh sirf usme aapko fitness hi nazar aa raha hai internal energy saare angon ko yog ke dwara milta hai us cheez ko shayad aap ko najarandaj kar rahe hain yog ke dwara jo wapas testing karna hai vo kisi bhi ang mein charging ka upyog kar rahe hain jis bimari ke liye kar rahe hain chahen jisse wajah se karna uska internal aur external dono hi sthitiyo mein usme energy ka floor hota hai yog ke dwara aur jiske liye aap kar rahe hain aur se ang ko andar antar ek aur baen dono hi sabko bewakoof swasthya karta hai baki aur jo cheez hai straiching aashik ne iski toh usme sirf aapko lagega ki upari bhag mein ki aapka fitness sahi ho gaya lekin andaruni ho sakta hai ki koi na koi vikar usme utpann ho jaaye isliye yog ka jesteting uska koi tulna kisi anya tarike Singh ke badaulat kaafi behtar hai isliye isme koi sandesh ki baat nahi hai dhanyavad

आपका क्वेश्चन है योग स्टिचिंग या अन्य प्रकार की फिटनेस से कैसे अलग हैं तो देखिए और जो अन्य

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Dr.Swatantra Sharma

Yoga Expert & Consultant

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अन्य प्रकार की स्टिचिंग जहां केवल शरीर से ही ताल्लुक रखती है वही योगिक अभ्यास में की गई स्टिचिंग का हम विद अवेयरनेस अभ्यास करते जहां भी स्टिचिंग होती है हम अपने मन को वहां ले जाते हैं वहां के रक्त संचार को देखते हैं वहां के स्पंदन ओं को अनुभव करते हैं और इंटरनल वाइटल और बेंच में जो चेंजिंग आ रहे हैं उनको हम भावनात्मक रूप से उन का अवलोकन करते हैं तो विद अवेयरनेस जितने भी अभ्यास किए जाते हैं वह योग्य प्रैक्टिस और स्टिचिंग के अंतर्गत आते हैं जबकि सामान्य व्यायाम केवल शरीर शरीर को लचीला बनाने के लिए किया जाता है जिससे जिसका कोई दूरगामी परिणाम अधिक रूप में प्राप्त नहीं होता है योगाभ्यास के द्वारा की गई स्टेचिंग अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और हमारे जीवन शरीर मन बुद्धि और प्राण को साधने वाली होती है

anya prakar ki stitching jaha keval sharir se hi talluk rakhti hai wahi yogic abhyas mein ki gayi stitching ka hum with awareness abhyas karte jaha bhi stitching hoti hai hum apne man ko wahan le jaate hain wahan ke rakt sanchar ko dekhte hain wahan ke spandan on ko anubhav karte hain aur internal vital aur bench mein jo changing aa rahe hain unko hum bhavnatmak roop se un ka avalokan karte hain toh with awareness jitne bhi abhyas kiye jaate hain vaah yogya practice aur stitching ke antargat aate hain jabki samanya vyayam keval sharir sharir ko lachila banane ke liye kiya jata hai jisse jiska koi durgami parinam adhik roop mein prapt nahi hota hai yogabhayas ke dwara ki gayi steching atyant mahatvapurna hoti hai aur hamare jeevan sharir man buddhi aur praan ko sadhane wali hoti hai

अन्य प्रकार की स्टिचिंग जहां केवल शरीर से ही ताल्लुक रखती है वही योगिक अभ्यास में की गई स्

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