क्या आपको लगता है कि भारत के मुसलमान अब देश में असुरक्षित महसूस करते हैं?...


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पंकज

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नहीं ऐसा नहीं है एक मानसिकता बनी है और मैं कहूंगा कि अभी नहीं बनी बल्कि आजादी के टाइम से ही है मानसिकता यह है कि मुसलमान ने भारत को कभी अपना ही नहीं उसके मन में एक अजीब सा बहरा हमेशा की जो से अंदर ही अंदर होता है उसे लगता है कि भारत का हिस्सा ही नहीं है और 18 में जाएंगे तो हम पाते हैं कि 22955 टी-शर्ट वह था जो मुस्लिमों का वोट था वह मशीन 1 गया था और मुस्लिम लोग लिखो देने का मतलब यह था कि मुस्लिम लीग का जो मांग थी अलग देश की उसको अपना समर्थन लेना यह सच है इसलिए खेत में एक्टिव 259 प्रतिशत जो वह 30 मई को गया था और मुस्लिम लीग ने उस चुनाव में 29 तारीख में जो हुआ था उसमें लगभग लगभग लगभग इसका सीधा सीधा अर्थ यह है कि जिन्होंने चुनाव में समर्थन किया था मुस्लिम लीग का समर्थन तो कर दिया लेकिन जब बंटवारा बटवारा हुआ और बंटवारे के बाद अपना घर बार छोड़कर जाने का नंबर आया तो उन्होंने क्या किया वह गेम खेलने गेम खेलने की एक तुम हो ने चुनाव में मुस्लिम लीग को सपोर्ट कर दिया और सपोर्ट करने के बाद उसका जो मांगते हो गई और दूसरी की थी कि वह खेल गेम खेल गए क्यों भेजी नहीं अब मुझे भावना होती है अगर आपने जो निजी तौर पर देखें तो उस तरह की अगर आप करोगे तो आपके मन में भावना चलेगी वही होगी कि मैंने क्या क्या है मनी ऋषिकेश की डेट की गद्दारी की है धोखा दिया है और इस भावना के साथ ही आपकी स्पीड है जी हां यही तो खुद को असुरक्षित महसूस करेंगे तो भले ही आपको कितना भी कुछ कर लो अब तो क्या आप धोखा दे चुके तो आपको हमेशा लगेगा कि यह जो बंदा है यह आपको कभी ना कभी तो आप बदला लेगा हमारा है मन क्यों कहते यह देश हमारा भी है इसका मतलब फिराक बात करते हैं कि ऐसा क्यों है क्या हुआ मुस्लिम लीग ने जो का नेट फास्ट क्यों मांगा था इसका कारण क्या है भारत में अपना अधिकार जमाया था उस टाइम शुरू समझते थे कि यह जो भारत है यह मुगलों से संगठन के अंग्रेजी में लिया था और जाते हुए इस्लामिक लोग अंग्रेजी लोग सेवा की भावना के साथ मांगा था भारत इस्लामिक राष्ट्र बने लेकिन जब बात नहीं बनी तो ठीक है धन्यवाद

nahi aisa nahi hai ek mansikta bani hai aur main kahunga ki abhi nahi bani balki azadi ke time se hi hai mansikta yah hai ki musalman ne bharat ko kabhi apna hi nahi uske man me ek ajib sa behra hamesha ki jo se andar hi andar hota hai use lagta hai ki bharat ka hissa hi nahi hai aur 18 me jaenge toh hum paate hain ki 22955 T shirt vaah tha jo muslimo ka vote tha vaah machine 1 gaya tha aur muslim log likho dene ka matlab yah tha ki muslim league ka jo maang thi alag desh ki usko apna samarthan lena yah sach hai isliye khet me active 259 pratishat jo vaah 30 may ko gaya tha aur muslim league ne us chunav me 29 tarikh me jo hua tha usme lagbhag lagbhag lagbhag iska seedha seedha arth yah hai ki jinhone chunav me samarthan kiya tha muslim league ka samarthan toh kar diya lekin jab batwara batwara hua aur batware ke baad apna ghar baar chhodkar jaane ka number aaya toh unhone kya kiya vaah game khelne game khelne ki ek tum ho ne chunav me muslim league ko support kar diya aur support karne ke baad uska jo mangate ho gayi aur dusri ki thi ki vaah khel game khel gaye kyon bheji nahi ab mujhe bhavna hoti hai agar aapne jo niji taur par dekhen toh us tarah ki agar aap karoge toh aapke man me bhavna chalegi wahi hogi ki maine kya kya hai money rishikesh ki date ki gaddari ki hai dhokha diya hai aur is bhavna ke saath hi aapki speed hai ji haan yahi toh khud ko asurakshit mehsus karenge toh bhale hi aapko kitna bhi kuch kar lo ab toh kya aap dhokha de chuke toh aapko hamesha lagega ki yah jo banda hai yah aapko kabhi na kabhi toh aap badla lega hamara hai man kyon kehte yah desh hamara bhi hai iska matlab firak baat karte hain ki aisa kyon hai kya hua muslim league ne jo ka net fast kyon manga tha iska karan kya hai bharat me apna adhikaar Jamaya tha us time shuru samajhte the ki yah jo bharat hai yah mugalon se sangathan ke angrezi me liya tha aur jaate hue islamic log angrezi log seva ki bhavna ke saath manga tha bharat islamic rashtra bane lekin jab baat nahi bani toh theek hai dhanyavad

नहीं ऐसा नहीं है एक मानसिकता बनी है और मैं कहूंगा कि अभी नहीं बनी बल्कि आजादी के टाइम से ह

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