क्यूँ भारतीय लड़कियों के कपड़े को लेकर हमेशा विवाद होता है?...


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DR. MANISH

MULTI TASKER & DR.M.D (A.M.), B-PHARMA, PGDM-M

0:28
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

वाद-विवाद तो हर एक देश में होता है बस तुम्हारी शब्द तो क्या कि तुम हिंदुस्तान के हिंदुस्तान में रहते हो विदेश गए नहीं हो और ना समाचार सुनते हो ना लेटेस्ट कपड़ों से तुम्हारा को लेना देना है मुझे लगता है कि हर कंट्री में हर देश में है हर देश में है हर कंट्री में है और हर एक युग में होता है यह कोई ऐसा नया नहीं है अपने घर में मरीज को पूर्व करो और इस तरह के तुम्हारी क्वेश्चन करने का मन ही नहीं करेगा

vad vivaad toh har ek desh me hota hai bus tumhari shabd toh kya ki tum Hindustan ke Hindustan me rehte ho videsh gaye nahi ho aur na samachar sunte ho na latest kapdo se tumhara ko lena dena hai mujhe lagta hai ki har country me har desh me hai har desh me hai har country me hai aur har ek yug me hota hai yah koi aisa naya nahi hai apne ghar me marij ko purv karo aur is tarah ke tumhari question karne ka man hi nahi karega

वाद-विवाद तो हर एक देश में होता है बस तुम्हारी शब्द तो क्या कि तुम हिंदुस्तान के हिंदुस्ता

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Shipra Ranjan

Life Coach

2:18
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपा सवालिगे क्यों भारतीय लड़कियों के कपड़ों को लेकर के हमेशा विवाद होता है तो शायद इसीलिए होता है क्योंकि हमें हमेशा से हमारे जो दिमाग में जेनरेशन टो जेनरेशन पास हो गया गया है वह कैसा लेबल्स महिलाओं के लिए दिमाग में बिठा दे गया कि उन्हें हाथों में साड़ी पहन कर के ही रखना है पूरा शरीर ढका होना चाहिए है और सूट को भी बचा नहीं मानते पंजाबी कल्चर की बात करें या कुछ कल्चर की बात करें मुस्लिम कंट्रीज की तो बात अलग है लेकिन अधिकतर जो है उसको भी अच्छा नहीं मानते हैं यह मैरिड मैंने तो उसको साड़ी पहननी है पूरा सिंगार करके ढंग से ही रहना है ऐसा कांसेप्ट हमारे अंदर बचपन से बसा दिया गया दिमाग में बसा दिया गया है तो हमारा नजरिया ही वैसा बन गया है आज की तारीख में कर्म योगियों को जींस में या स्कर्ट में देखते हैं तो हम उसको राजेश कहीं नहीं पाता क्योंकि बचपन से हमारे दिमाग में वही चीज स्पीड की गई है तो इसमें गलती किसी की भी नहीं है कि लड़कियों की तो बिल्कुल भी नहीं कही जाएगी उनको भी हक है जीने का उनको भी हक है कि वह कुछ भी पहने डीसेंट जो भी दिख रहा है वह कोई भी कपड़ा वह पहन सकती हैं हर वह चीज जिस तरीके से लड़के लड़कों को पहनने की आजादी है वैसी लड़कियों को भी पहनने की आजादी बिल्कुल होनी चाहिए और किसी का हक नहीं बनता है जिसको डॉक्टॉक करने का चाहे वह शादीशुदा हो या ना हो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता यदि लड़की ने डीसेंट कपड़े पहने हुए हैं तो बिल्कुल उसे हर किसी को ओपन करना चाहिए और लाइक करना चाहिए है उसको कभी भी खराब नजर से देख करके उसको कमेंट पास नहीं करना चाहिए हैं चाहे वह लड़का होता उसके घर का कोई सदस्य हो चाहे बाहरी कोई हो उसका दोस्तों किसी को भी कोई हक नहीं बनता है किसी के भी कपड़ों के ऊपर कोई भी कमेंट करने का यह सबकी अपनी सोच है यह बात बिल्कुल किसी भी इंडिविजुअल पर ही डिपेंड करती है कि वह क्या पहनना चाहती हैं या नहीं पहना चाहती हैं किस चीज में वह कंफर्टेबल है क्योंकि फेमस को बहुत सारे काम भी होते हैं मैडोना की बात की जाए तो घर में बहुत सारे हम होते हैं जो जहाज मोड ड्रेस बोले बस जिसमें वह कंफर्टेबल होंगी तो वह जल्दी और अच्छे से काम कर पाएंगे वरना से ज्यादा ध्यान तो उनका साड़ी संभालने में ही लगा रहेगा फिर ऐसी लिबास का प्रधान का क्या फायदा है आप कुछ सोच कर के देखिए आपका दिन शुभ रहे धन्यवाद

aapa savalige kyon bharatiya ladkiyon ke kapdo ko lekar ke hamesha vivaad hota hai toh shayad isliye hota hai kyonki hamein hamesha se hamare jo dimag mein generation toe generation paas ho gaya gaya hai vaah kaisa labels mahilaon ke liye dimag mein bitha de gaya ki unhe hathon mein saree pahan kar ke hi rakhna hai pura sharir dhaka hona chahiye hai aur suit ko bhi bacha nahi maante punjabi culture ki baat kare ya kuch culture ki baat kare muslim countries ki toh baat alag hai lekin adhiktar jo hai usko bhi accha nahi maante hai yah married maine toh usko saree pahananee hai pura shingar karke dhang se hi rehna hai aisa concept hamare andar bachpan se basa diya gaya dimag mein basa diya gaya hai toh hamara najariya hi waisa ban gaya hai aaj ki tarikh mein karm yogiyon ko jeans mein ya skirt mein dekhte hai toh hum usko rajesh kahin nahi pata kyonki bachpan se hamare dimag mein wahi cheez speed ki gayi hai toh isme galti kisi ki bhi nahi hai ki ladkiyon ki toh bilkul bhi nahi kahi jayegi unko bhi haq hai jeene ka unko bhi haq hai ki vaah kuch bhi pehne disent jo bhi dikh raha hai vaah koi bhi kapda vaah pahan sakti hai har vaah cheez jis tarike se ladke ladko ko pahanne ki azadi hai vaisi ladkiyon ko bhi pahanne ki azadi bilkul honi chahiye aur kisi ka haq nahi baata hai jisko daktak karne ka chahen vaah shaadishuda ho ya na ho usse koi fark nahi padta yadi ladki ne disent kapde pehne hue hai toh bilkul use har kisi ko open karna chahiye aur like karna chahiye hai usko kabhi bhi kharab nazar se dekh karke usko comment paas nahi karna chahiye hai chahen vaah ladka hota uske ghar ka koi sadasya ho chahen bahri koi ho uska doston kisi ko bhi koi haq nahi baata hai kisi ke bhi kapdo ke upar koi bhi comment karne ka yah sabki apni soch hai yah baat bilkul kisi bhi individual par hi depend karti hai ki vaah kya pahanna chahti hai ya nahi pehna chahti hai kis cheez mein vaah Comfortable hai kyonki famous ko bahut saare kaam bhi hote hai maidona ki baat ki jaaye toh ghar mein bahut saare hum hote hai jo jahaj mode dress bole bus jisme vaah Comfortable hongi toh vaah jaldi aur acche se kaam kar payenge varna se zyada dhyan toh unka saree sambhalne mein hi laga rahega phir aisi libas ka pradhan ka kya fayda hai aap kuch soch kar ke dekhiye aapka din shubha rahe dhanyavad

आपा सवालिगे क्यों भारतीय लड़कियों के कपड़ों को लेकर के हमेशा विवाद होता है तो शायद इसीलिए

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Kriti Gupta

Clinical Psychologist

2:13

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्योंकि हमारे पास और कोई मुद्दा ही नहीं है चर्चा करने की क्या कह सकते हैं कि हम लोग के पास इस समय हम एक इगनोरिंग व्यवस्था में बैठे हुए मतलब इग्नोर हमें लगे कि हमने अपनी आंखें बंद कर ली तुम्हारी आजकल के युवा है या हमारा जो समाज है वह या तो धर्म के नाम पर बात कर रहा है या एक औरत को एक लड़की को कैसे रहना चाहिए एक संस्कारी एक स्त्री कैसे होती है उसका क्या व्यवहार करना चाहिए उस पर ज्यादा जैसा करना ज्यादा उनको एंटरटेनिंग लग रहा है ज्यादा फ्रूटफुल लग रहा है बजाय इस बात की चर्चा करने की क्या मारी क्यों अभी भी हम चांद से पहुंचने की बात कर रहे हैं और अभी भी हमारे समाज में अंधविश्वास पैदा हुआ है या धर्म के नाम पर आडंबर जो फैलाया जा रहा है यह जो बेरोजगारी की समस्या है वह सब समस्या तो हम कभी भी हल कर सकते हैं लेकिन यह समस्या ज्यादा जरूरी है हल करना क्योंकि इससे हमारे भारत को महान है उसकी जो छवि तो जैसा कि अभी तक हमारे भारतीय समाज में रहता है कि एक औरत को ही इज्जत का क्या बोलेंगे इज्जत के लिए उत्तरदाई समझा जाता है उसके व्यवहार के लिए दिशानिर्देश निर्धारित किए गए हैं तो चुकी अब चुकी है वह हमारी इज्जत है तो जाहिर सी बात है कि हमें वह क्या कर रही है कैसे कपड़े पहनती है किससे बात कर रही है इस पर चर्चा नहीं करेंगे तो फिर कैसे काम चलेगा तो यह लोग जो लोग हैं जो इस बात पर विवाद करते हैं उनके पास और कोई काम नहीं है करने के लिए लोगों ने यह जरूरी समस्या है जिससे कि हमारा भारत देश पीछे जा रहा है उसको ने चर्चा करने से कोई खास लाभ नहीं मिलेगा क्योंकि आजकल आजकल की जनता है ना हम लोग हैं कि हम लोग हर चीज में या कॉन्ट्रोवर्सी खोजते हैं तो उसे कॉन्ट्रोवर्सी नहीं है तो उसमें कोई इंटरेस्ट नहीं है कल अपनी लाइफ में भी टीआरपी खोजते रहते हैं तो इसी कारण है कि भारतीय लड़कियों के कपड़े लेकर जाता होता है बजाएं इसको लेकर कि हमारे भारत में भी वीर बेरोजगारी की या पर्यावरण की समस्या क्यों बढ़ती जा रही है मुझे लगता है कि आपको मेरे जवाब से संतुष्टि मिली होगी धन्यवाद

kyonki hamare paas aur koi mudda hi nahi hai charcha karne ki kya keh sakte hain ki hum log ke paas is samay hum ek iganoring vyavastha mein baithe hue matlab ignore hamein lage ki humne apni aankhen band kar li tumhari aajkal ke yuva hai ya hamara jo samaj hai vaah ya toh dharm ke naam par baat kar raha hai ya ek aurat ko ek ladki ko kaise rehna chahiye ek sanskari ek stree kaise hoti hai uska kya vyavhar karna chahiye us par zyada jaisa karna zyada unko entertaining lag raha hai zyada frutful lag raha hai bajay is baat ki charcha karne ki kya mari kyon abhi bhi hum chand se pahuchne ki baat kar rahe hain aur abhi bhi hamare samaj mein andhavishvas paida hua hai ya dharm ke naam par aandabar jo faelaya ja raha hai yah jo berojgari ki samasya hai vaah sab samasya toh hum kabhi bhi hal kar sakte hain lekin yah samasya zyada zaroori hai hal karna kyonki isse hamare bharat ko mahaan hai uski jo chhavi toh jaisa ki abhi tak hamare bharatiya samaj mein rehta hai ki ek aurat ko hi izzat ka kya bolenge izzat ke liye uttardai samjha jata hai uske vyavhar ke liye dishanirdesh nirdharit kiye gaye hain toh chuki ab chuki hai vaah hamari izzat hai toh jaahir si baat hai ki hamein vaah kya kar rahi hai kaise kapde pahanti hai kisse baat kar rahi hai is par charcha nahi karenge toh phir kaise kaam chalega toh yah log jo log hain jo is baat par vivaad karte hain unke paas aur koi kaam nahi hai karne ke liye logo ne yah zaroori samasya hai jisse ki hamara bharat desh peeche ja raha hai usko ne charcha karne se koi khaas labh nahi milega kyonki aajkal aajkal ki janta hai na hum log hain ki hum log har cheez mein ya controversy khojate hain toh use controversy nahi hai toh usme koi interest nahi hai kal apni life mein bhi trp khojate rehte hain toh isi karan hai ki bharatiya ladkiyon ke kapde lekar jata hota hai bajaye isko lekar ki hamare bharat mein bhi veer berojgari ki ya paryavaran ki samasya kyon badhti ja rahi hai mujhe lagta hai ki aapko mere jawab se santushti mili hogi dhanyavad

क्योंकि हमारे पास और कोई मुद्दा ही नहीं है चर्चा करने की क्या कह सकते हैं कि हम लोग के पास

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

0:15
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्यों भारतीय लड़कियों के कपड़ों को लेकर हमेशा विवाद होता है पता नहीं इंसान तो अच्छे होते लेकिन उनकी सोच बहुत गलत होती है तब तक ही यह विवाद वरना नहीं हो पाते एंड एंजॉय

kyon bharatiya ladkiyon ke kapdo ko lekar hamesha vivaad hota hai pata nahi insaan toh acche hote lekin unki soch bahut galat hoti hai tab tak hi yah vivaad varna nahi ho paate and enjoy

क्यों भारतीय लड़कियों के कपड़ों को लेकर हमेशा विवाद होता है पता नहीं इंसान तो अच्छे होते ल

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महेश सेठ

रेकी ग्रैंडमास्टर,लाइफ कोच

1:38
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारतीय लड़कियों के कपड़ों को लेकर भी व्याख्याता होता है ऐसा नहीं है गलत बात है यह कुछ लड़कियां जो अपने आपको ज्यादा एक्सपोर्ट करती उनके कपड़ों को लेकर विवाद होता है सारी भारतीय लड़कियां ऐसे नंगे नहीं होती हैं जिससे कुछ लड़कियां लड़कियां ऐसी हैं और लोगों का गजल कि वह कहते हैं कि हमारी स्वतंत्र हम कुछ भी पहने ऐसे ही दूसरों की भी सुनता है वह कुछ भी बोले तो इसको अगर आप भी बात करते हैं तो ठीक है कोई दिक्कत नहीं और बस वास्तव में मेरा विचार यह है कि लड़कियों को हमेशा ऐसे कपड़े पहने हैं जिससे दूसरों की भावनाएं उत्तेजित ना हो क्योंकि प्रकृति इसी तरह की है कि यह जो यौन भावना है यह उत्तेजित होती ही है अगर कोई कहे कि उसका साधु हैं जैसा नहीं होता ओके जब अनैतिक चीजें होती हैं तो फिर लोग चिल्लाते ऐसा क्यों हुआ उसकी दृष्टि गलत थी तो भी देखती गलत करने के लिए अगर वह भी एक कारक है वह लड़की भी तो सोचना पड़ेगा समाज को भी सोचना पड़ेगा उन लड़कियों को भी सोचना पड़ेगा कि ऐसा क्यों होता है और मैं यह नहीं कह रहा कि जो अच्छे कपड़े पहनती उनके साथ ऐसे गलत काम नहीं होते उनके साथ होते हैं बैलेंस की जरूरत है कि हम सही है के संतुलन बनाए समाज में अपने कपड़ों में और अपने गवार में कोशिश करें और फिर भी घटनाएं तो होती ही हैं धन्यवाद नमस्कार

bharatiya ladkiyon ke kapdo ko lekar bhi vyakhyata hota hai aisa nahi hai galat baat hai yah kuch ladkiyan jo apne aapko zyada export karti unke kapdo ko lekar vivaad hota hai saree bharatiya ladkiyan aise nange nahi hoti hai jisse kuch ladkiyan ladkiyan aisi hai aur logo ka gazal ki vaah kehte hai ki hamari swatantra hum kuch bhi pehne aise hi dusro ki bhi sunta hai vaah kuch bhi bole toh isko agar aap bhi baat karte hai toh theek hai koi dikkat nahi aur bus vaastav mein mera vichar yah hai ki ladkiyon ko hamesha aise kapde pehne hai jisse dusro ki bhaavnaye uttejit na ho kyonki prakriti isi tarah ki hai ki yah jo yaun bhavna hai yah uttejit hoti hi hai agar koi kahe ki uska sadhu hai jaisa nahi hota ok jab anaitik cheezen hoti hai toh phir log chillate aisa kyon hua uski drishti galat thi toh bhi dekhti galat karne ke liye agar vaah bhi ek kaarak hai vaah ladki bhi toh sochna padega samaj ko bhi sochna padega un ladkiyon ko bhi sochna padega ki aisa kyon hota hai aur main yah nahi keh raha ki jo acche kapde pahanti unke saath aise galat kaam nahi hote unke saath hote hai balance ki zarurat hai ki hum sahi hai ke santulan banaye samaj mein apne kapdo mein aur apne gavar mein koshish kare aur phir bhi ghatnaye toh hoti hi hai dhanyavad namaskar

भारतीय लड़कियों के कपड़ों को लेकर भी व्याख्याता होता है ऐसा नहीं है गलत बात है यह कुछ लड़क

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Liyakat Ali Gazi

Motivational Speaker, Life Coach & Soft Skills Trainer 📲 9956269300

4:08
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मेरे प्यारे साथी आपका यह जो सवाल है कि भारत में भारतीय लड़कियों के कपड़ों को लेकर के अक्षर जो है बवाल होता है बहुत से लोग भारतीय लड़कियों के पहनावे के ऊपर कपड़ों के ऊपर उनके पास उनके ऊपर उनकी लाइफस्टाइल जीने के ऊपर उनके धन तौर-तरीकों के ऊपर आजकल आलोचनाएं कर रहे हैं सामाजिक लोग भी कर रहे हैं राजनीतिक नेता भी कर रहे हैं इसके साथ ही साथ में बहुत से वर्ग इन सब बातों को उठा रहे हैं उसके दो कारण हैं भारतीय लड़कियों के कपड़े पहनने पहनावे के दो कारण है सबसे पहला कारण मैं आपको समझाता हूं कि पहला कारण यह है कि जो लोग भारतीय लड़कियों के पहनावे के ऊपर बातों को उठा रहे हैं उनके पहनावे के ऊपर उठा रहे हैं वह ज्यादातर राजनीतिक नेता लोग उठा रहे हैं राजनीतिक नेता लोग भारतीय लड़कियों के पहनावे के ऊपर कपड़ों के ऊपर इसलिए अपनी राय रखते हैं इसलिए वह इसके पर भाषण देते हैं जिस्म की आलोचना करते हैं क्योंकि राजनीतिक नेता लोग हमेशा पॉपुलर टी चाहते हैं चली बैटरी चाहते हैं और साथ ही साथ में उन नेताओं की जो सोच है वह तुच्छ किस्म की है दूसरी चीज यह है कि वह अपने आप को मीडिया में हाईलाइट होने रखने के लिए यह सब बातें बोलते हैं तीसरी चीज यह है कि जो पार्टी है जिस पार्टी के नेता अपने क्षेत्र में विकास नहीं कर पाते हैं जो पार्टी अपने देश का अपने प्रदेश का अपने क्षेत्र का विकास नहीं कर पाती अपनी योजनाओं का विधिवत तरीके से लागू नहीं कर पाती है और इसके साथ ही साथ में जो जो उसके कानून नियम है उनमें वह मजबूती से नहीं पैसा पाती है हो रहे समाज में फैली कुरीतियों को जैसे कि बलात्कार रेप हो गया और लड़कियों का शोषण हो गया महिलाओं का शोषण हो गया महिलाओं के खिलाफ जो सामाजिक विराजत चीजें चल रही है उनको जब रोकने में असफल हो जाते हैं और खासकर यह आज के माहौल में ज्यादा बात चल रही है कि हम सभी लोग आए दिन न्यूज़पेपर में मीडिया में समाचार में सुनते हैं कि हजारों लड़कियों को रेप किया जा रहा है हजारों मासूम बच्चियों का बलात्कार किया जा रहा है मुझे बात कहते बहुत शर्म आ रही है कि हजारों बड़े-बड़े नेता इस काम में संलग्न है और वह इस काम को कर रहे हैं तो समाज में भी यह बात बहुत तेजी से फैल रही है तो वह लोग इन बातों को उठाते हैं कि लड़कियों का पहनावा नहीं सही है लड़कियां कपड़े पहनती हैं लड़कियों को कमेंट करके अपने आप को बचा कर अपनी पार्टी को बता बचा के अपने भविष्य को बनाने के लिए खुद को बचाकर यह सब बातें बोलते हैं दूसरी चीज यह वह लोग बात बोलते हैं जो धार्मिक रूढ़िवादी हैं धार्मिक परंपरा में आज भी बंधे हुए हैं वह लोग ही बात बोलते हैं कि लड़कियां कैसे कपड़े पहनती हैं जैसी बातें एक तरफ ने हमारे देश के नेता हमारे देश के सामाजिक कार्यकर्ता हमारे देश के सामाजिक पहलू कार जो समाज को विकास करने के बारे में सोचते हैं बड़ी-बड़ी बातें करते हैं वो यह कहते हैं कि हमारे देश को तरक्की करना चाहिए महिलाओं को आगे निकल के बच्चियों को लड़कियों का आगे निकलकर तरक्की करना चाहिए आगे देश की देश की जीडीपी में देश के कार्य में सहयोग देना कि जो आगे समाज में निकलेंगे तो आप यह सोचते हो एक तरफ उनके पहनावे पर और उनके हसन पर आप वाला क्यों नहीं यह बोलते हैं बोलोगे तो खुद सोच गंदी है और अपनी गंदी सोच को बचाने के लिए मदद या का जवाब आपको है पसंद तो प्लीज मुझे कीजिएगा फलों लाइक कमेंट करो लाइक

mere pyare sathi aapka yah jo sawaal hai ki bharat mein bharatiya ladkiyon ke kapdo ko lekar ke akshar jo hai bawaal hota hai bahut se log bharatiya ladkiyon ke pahnawe ke upar kapdo ke upar unke paas unke upar unki lifestyle jeene ke upar unke dhan taur trikon ke upar aajkal aalochanaen kar rahe hain samajik log bhi kar rahe hain raajnitik neta bhi kar rahe hain iske saath hi saath mein bahut se varg in sab baaton ko utha rahe hain uske do karan hain bharatiya ladkiyon ke kapde pahanne pahnawe ke do karan hai sabse pehla karan main aapko samajhaata hoon ki pehla karan yah hai ki jo log bharatiya ladkiyon ke pahnawe ke upar baaton ko utha rahe hain unke pahnawe ke upar utha rahe hain vaah jyadatar raajnitik neta log utha rahe hain raajnitik neta log bharatiya ladkiyon ke pahnawe ke upar kapdo ke upar isliye apni rai rakhte hain isliye vaah iske par bhashan dete hain jism ki aalochana karte hain kyonki raajnitik neta log hamesha popular T chahte hain chali battery chahte hain aur saath hi saath mein un netaon ki jo soch hai vaah tucch kism ki hai dusri cheez yah hai ki vaah apne aap ko media mein highlight hone rakhne ke liye yah sab batein bolte hain teesri cheez yah hai ki jo party hai jis party ke neta apne kshetra mein vikas nahi kar paate hain jo party apne desh ka apne pradesh ka apne kshetra ka vikas nahi kar pati apni yojnao ka vidhivat tarike se laagu nahi kar pati hai aur iske saath hi saath mein jo jo uske kanoon niyam hai unmen vaah majbuti se nahi paisa pati hai ho rahe samaj mein faili kuritiyon ko jaise ki balatkar rape ho gaya aur ladkiyon ka shoshan ho gaya mahilaon ka shoshan ho gaya mahilaon ke khilaf jo samajik virajat cheezen chal rahi hai unko jab rokne mein asafal ho jaate hain aur khaskar yah aaj ke maahaul mein zyada baat chal rahi hai ki hum sabhi log aaye din Newspaper mein media mein samachar mein sunte hain ki hazaro ladkiyon ko rape kiya ja raha hai hazaro masoom bachiyo ka balatkar kiya ja raha hai mujhe baat kehte bahut sharm aa rahi hai ki hazaro bade bade neta is kaam mein sanlagn hai aur vaah is kaam ko kar rahe hain toh samaj mein bhi yah baat bahut teji se fail rahi hai toh vaah log in baaton ko uthate hain ki ladkiyon ka pahanava nahi sahi hai ladkiyan kapde pahanti hain ladkiyon ko comment karke apne aap ko bacha kar apni party ko bata bacha ke apne bhavishya ko banne liye khud ko bachakar yah sab batein bolte hain dusri cheez yah vaah log baat bolte hain jo dharmik rudhivadi hain dharmik parampara mein aaj bhi bandhe hue hain vaah log hi baat bolte hain ki ladkiyan kaise kapde pahanti hain jaisi batein ek taraf ne hamare desh ke neta hamare desh ke samajik karyakarta hamare desh ke samajik pahaloo car jo samaj ko vikas karne ke bare mein sochte hain badi badi batein karte hain vo yah kehte hain ki hamare desh ko tarakki karna chahiye mahilaon ko aage nikal ke bachiyo ko ladkiyon ka aage nikalkar tarakki karna chahiye aage desh ki desh ki gdp mein desh ke karya mein sahyog dena ki jo aage samaj mein nikalenge toh aap yah sochte ho ek taraf unke pahnawe par aur unke hasan par aap vala kyon nahi yah bolte hain bologe toh khud soch gandi hai aur apni gandi soch ko bachane ke liye madad ya ka jawab aapko hai pasand toh please mujhe kijiega falon like comment karo like

मेरे प्यारे साथी आपका यह जो सवाल है कि भारत में भारतीय लड़कियों के कपड़ों को लेकर के अक्षर

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Dr. Guddy Kumari

UPSC Coach / Ph.d

0:57
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

प्रश्न है क्यों भारतीय लड़कियों के कपड़े को लेकर हमेशा विवाद होता है ऐसा इसलिए है कि समाज का जो शिक्षित वर्ग या शिक्षित होकर भी जिनकी सोच जो है ना नैनो है विवाद को लेकर वही बताते हैं क्योंकि यह बुराई जोतिया कपड़ों में नहीं होती है नजरों में होती हैं इसीलिए मैं यह कहना चाहूंगी कि आप नजर साफ कीजिए अपने विचार साफ कीजिए कपड़ों में आपकी कोई बुराई नहीं दिखेगी ओके शायद यही कारण है कि भारतीय महिलाओं कपड़े को लेकर हमेशा विवाद होता है या सुरक्षा मंत्री बनाने वाले समाज के कोई नेहरू माइंड वाले नेहरू सोच वाले बैठते ही होते हैं धन्यवाद

prashna hai kyon bharatiya ladkiyon ke kapde ko lekar hamesha vivaad hota hai aisa isliye hai ki samaj ka jo shikshit varg ya shikshit hokar bhi jinki soch jo hai na nano hai vivaad ko lekar wahi batatey hain kyonki yah burayi jotiya kapdo mein nahi hoti hai nazro mein hoti hain isliye main yah kehna chahungi ki aap nazar saaf kijiye apne vichar saaf kijiye kapdo mein aapki koi burayi nahi dikhegi ok shayad yahi karan hai ki bharatiya mahilaon kapde ko lekar hamesha vivaad hota hai ya suraksha mantri banane waale samaj ke koi nehru mind waale nehru soch waale baithate hi hote hain dhanyavad

प्रश्न है क्यों भारतीय लड़कियों के कपड़े को लेकर हमेशा विवाद होता है ऐसा इसलिए है कि समाज

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

2:37
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारतीय लड़कियों के कपड़े को लेकर हमेशा विवाद होता है क्योंकि हमारा तो भारतीय कल्चर है वह बहुत ही पुराना है बहुत ही पुरातन काल से हमारी मानव सभ्यता विकसित हुई है और पुराने समय के मतलब पहले के समय की दुहाई देकर और लड़कियों के आधुनिक कपड़े पर टिकट होता रहता है होती है कि लोग कहेंगे कि भाई इंग्लिश तो बहुत ही मतलब पुराने समय की लेडी है अगर जींस पहना करो यह जींस पहने लगी अगर वह कपड़े पहने कपड़ा पहना है इसलिए इस तरह की टीका की पड़े होती रहती है लेकिन लड़कियां इतनी मेंटली तैयार हो गई है कि इन सब बातों के ऊपर बहुत ज्यादा गौर नहीं करती है बस इतना देखना चाहिए लड़कियों की शालीनता जो है वह बरकरार रहे कि किसी के भी सामने जाए तो उनका शरीर ढका हुआ अब क्या होगा आबू हाफ पैंट पहनकर घूमेंगे लड़कियां पर गर्मी में तो उसने भी कोई बुराई नहीं है और जो है लड़कों की दूसरे लोगों की सोच में थोड़ा बदलाव हमको करना पड़ेगा हो रहा है सीने में सब समय के अनुरूप सब लोग अपना विचार बदलने लगती कमियां दूर हो जाएंगे लेकिन एक कल देखने वाली बात है सोचने वाली बात है कहीं भी जाएं तो समय और जो प्रश्न चंदू कपड़े हो तो अच्छा लगता है क्योंकि भगवान कुदरती रूप से सुंदरता प्रदान की हुई है और उसमें शालीनता हो तो उसमें बहुत ही अच्छा बहुत अच्छे से दिखा सकती है और वह प्रश्न को देखकर मान कर सकते हैं बहुत-बहुत धन्यवाद

bharatiya ladkiyon ke kapde ko lekar hamesha vivaad hota hai kyonki hamara toh bharatiya culture hai vaah bahut hi purana hai bahut hi puratan kaal se hamari manav sabhyata viksit hui hai aur purane samay ke matlab pehle ke samay ki duhaai dekar aur ladkiyon ke aadhunik kapde par ticket hota rehta hai hoti hai ki log kahenge ki bhai english toh bahut hi matlab purane samay ki lady hai agar jeans pehna karo yah jeans pehne lagi agar vaah kapde pehne kapda pehna hai isliye is tarah ki tika ki pade hoti rehti hai lekin ladkiyan itni mentally taiyar ho gayi hai ki in sab baaton ke upar bahut zyada gaur nahi karti hai bus itna dekhna chahiye ladkiyon ki shalinata jo hai vaah barkaraar rahe ki kisi ke bhi saamne jaaye toh unka sharir dhaka hua ab kya hoga aabu half pant pehankar ghumenga ladkiyan par garmi mein toh usne bhi koi burayi nahi hai aur jo hai ladko ki dusre logo ki soch mein thoda badlav hamko karna padega ho raha hai seene mein sab samay ke anurup sab log apna vichar badalne lagti kamiyan dur ho jaenge lekin ek kal dekhne wali baat hai sochne wali baat hai kahin bhi jayen toh samay aur jo prashna chandu kapde ho toh accha lagta hai kyonki bhagwan kudarati roop se sundarta pradan ki hui hai aur usme shalinata ho toh usme bahut hi accha bahut acche se dikha sakti hai aur vaah prashna ko dekhkar maan kar sakte hai bahut bahut dhanyavad

भारतीय लड़कियों के कपड़े को लेकर हमेशा विवाद होता है क्योंकि हमारा तो भारतीय कल्चर है वह

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Dr. Shakeel Akhtar

Homeopathy Doctor

0:59
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देखिए हमारे भारतीय सभ्यता पहनावे के मामले में शुरू से ही ऐसी रही है कि हमारी भारतीय जो महिलाएं हैं वह अपने पूरे शरीर को कपड़ों से जाती हैं यानी कपड़े से अपने पूरे शरीर को डरती है ऐसा कपड़ा पहनती जिससे उनका पूरा शरीर ढका हुआ रहता है यह हमारी भारतीय सभ्यता संस्कृति रही है आजकल हमारी बच्ची हमारी बेटियां पश्चिमी सभ्यता के पहनावे को अपनाती जा रही हैं तो आजकल का पहनावा देखते हैं के शरीर के सारे अंग एमसीपी कपड़े पहनने के बाद भी साफ हो चमकते हैं शरीर के अंगो का उभार बिल्कुल साफ चमकता है जिसकी इजाजत हमारी भारतीय सभ्यता और हमारा समाज नहीं देता है तो इसलिए कपड़ों को लेकर यहां पर जो है आए दिन विवाद होता है धन्यवाद

dekhiye hamare bharatiya sabhyata pahnawe ke mamle mein shuru se hi aisi rahi hai ki hamari bharatiya jo mahilaye hain vaah apne poore sharir ko kapdo se jaati hain yani kapde se apne poore sharir ko darti hai aisa kapda pahanti jisse unka pura sharir dhaka hua rehta hai yah hamari bharatiya sabhyata sanskriti rahi hai aajkal hamari bachi hamari betiyan pashchimi sabhyata ke pahnawe ko apanati ja rahi hain toh aajkal ka pahanava dekhte hain ke sharir ke saare ang MCP kapde pahanne ke baad bhi saaf ho chamakate hain sharir ke angon ka ubhar bilkul saaf chamakta hai jiski ijajat hamari bharatiya sabhyata aur hamara samaj nahi deta hai toh isliye kapdo ko lekar yahan par jo hai aaye din vivaad hota hai dhanyavad

देखिए हमारे भारतीय सभ्यता पहनावे के मामले में शुरू से ही ऐसी रही है कि हमारी भारतीय जो महि

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Abhishek Sharma

Forest Range Officer, MP

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दिखी नवदुर्गा का समय चल रहा है आज आखिरी दिन है और अपने इस सवाल पूछा है इसका बहुत आसान जवाब है कि भारतीय लड़कियों के कपड़ों को लेकर विवाद इसलिए रहता है क्योंकि हम लोग विवाद खड़ा करते हैं हम लोग ही विवाद खड़ा कर रहे हैं हम क्यों करें कर रहे हैं क्योंकि हमें नॉलेज नहीं है हमें शायद कुछ चीजों की जानकारी नहीं है या फिर हम बहुत ज्यादा रिजल्ट है डिजिट का मतलब बहुत सख्त है हमने सोच लिया है कि भारत की स्त्री और पहने की जो साड़ी पहने की भली उसमें जो उसका पल्लू है वह सिर पर ना हो कोई दिक्कत नहीं है भले उसके अन्य परिधान चाहे वह उसको कंफर्टेबल लगे ना लगे तभी उसको वही पहनना है जो भी हमारी सांस्कृतिक परिधान है जो गुजरात में पहनते हैं मराजो मराठी पहनते हैं जो तमिल लोग पहनते हैं वही उन पहन सकते हैं ऐसा नहीं है अब पूरा का पूरा देश या कह सकते हैं पूरी की पूरी दुनिया एक छोटा सा घर बन गया है जहां पर आप अपने विचारों का खान आन का रहन-सहन का पहनने वाले कपड़ों का आदान-प्रदान कर सकते हैं भारत में लड़कियां बाहर के तौर-तरीके कपड़ों को लेकर सीख रही हैं और उनको पहन रही है उनको ट्राई कर रही है वह कंफर्टेबल लग रहा है हम लोग शायद इतने ज्यादा रिजल्ट है क्योंकि हम संस्कृति को तो मुझे पता है कि हम लोग इतने ज्यादा रिजल्ट फॉलो नहीं करते हम खुद अंग्रेजो के द्वारा बनाए गए पेंट शर्ट को पहनते हैं अगर हमें संस्कृति का ध्यान बता तो हम सभी लोग कुर्ता पजामा पहन कर घूमते लेकिन नहीं घूमते क्योंकि हमें ही संस्कृति का ध्यान देंगे तो हम दूसरों पर क्यों नाचे लगाए हम क्यों भारतीय महिलाओं के बारे में इस तरह की बात करें वह बिल्कुल फ्री है उन्हें जो पहने वह पहन सकती है और मेरा यह विचार है कि उनको आजादी हमेशा से ही है उनको आजादी के लिए कोई जाना नहीं है लेकिन हम लोग जानबूझकर इस तरह की चीजें क्रिएट करते हैं जो कि बंद होनी चाहिए मेरा पूरा समर्थन है इस बात पर आपका क्या विचार है कमेंट में जरूर बताएं बहुत-बहुत धन्यवाद

dikhi navdurga ka samay chal raha hai aaj aakhiri din hai aur apne is sawaal poocha hai iska bahut aasaan jawab hai ki bharatiya ladkiyon ke kapdo ko lekar vivaad isliye rehta hai kyonki hum log vivaad khada karte hai hum log hi vivaad khada kar rahe hai hum kyon kare kar rahe hai kyonki hamein knowledge nahi hai hamein shayad kuch chijon ki jaankari nahi hai ya phir hum bahut zyada result hai digit ka matlab bahut sakht hai humne soch liya hai ki bharat ki stree aur pehne ki jo saree pehne ki bhali usme jo uska pallu hai vaah sir par na ho koi dikkat nahi hai bhale uske anya paridhan chahen vaah usko Comfortable lage na lage tabhi usko wahi pahanna hai jo bhi hamari sanskritik paridhan hai jo gujarat mein pehente hai marajo marathi pehente hai jo tamil log pehente hai wahi un pahan sakte hai aisa nahi hai ab pura ka pura desh ya keh sakte hai puri ki puri duniya ek chota sa ghar ban gaya hai jaha par aap apne vicharon ka khan Aan ka rahan sahan ka pahanne waale kapdo ka aadaan pradan kar sakte hai bharat mein ladkiyan bahar ke taur tarike kapdo ko lekar seekh rahi hai aur unko pahan rahi hai unko try kar rahi hai vaah Comfortable lag raha hai hum log shayad itne zyada result hai kyonki hum sanskriti ko toh mujhe pata hai ki hum log itne zyada result follow nahi karte hum khud angrejo ke dwara banaye gaye paint shirt ko pehente hai agar hamein sanskriti ka dhyan bata toh hum sabhi log kurta payjama pahan kar ghumte lekin nahi ghumte kyonki hamein hi sanskriti ka dhyan denge toh hum dusro par kyon nache lagaye hum kyon bharatiya mahilaon ke bare mein is tarah ki baat kare vaah bilkul free hai unhe jo pehne vaah pahan sakti hai aur mera yah vichar hai ki unko azadi hamesha se hi hai unko azadi ke liye koi jana nahi hai lekin hum log janbujhkar is tarah ki cheezen create karte hai jo ki band honi chahiye mera pura samarthan hai is baat par aapka kya vichar hai comment mein zaroor bataye bahut bahut dhanyavad

दिखी नवदुर्गा का समय चल रहा है आज आखिरी दिन है और अपने इस सवाल पूछा है इसका बहुत आसान जवाब

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Rihan Shah

I want to become An IAS Officer (Love Realationship Full Experience)

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लेकिन मांगते ही भारतीय लड़कियों के कपड़े लेकर विवाद होता है क्योंकि हमारे भारत के अंदर जो है वह विदेशी फेरन जगह रखी है हमारे अंदर जो हमारी लड़कियों पर चीज के लिए शोभा नहीं बना तो नहीं चीज की है तो दे दे हमारा समाज में लड़कियों को छोटे कपड़े पहनने की इजाजत नहीं देता बल्कि इस बताता है और सिखाता है कि अदब के और तहरीक डायरिंग हाउ मच किराया उसी के कोड़ी उसी के थ्रू उसके रूल नियम के साथ सूचना

lekin mangate hi bharatiya ladkiyon ke kapde lekar vivaad hota hai kyonki hamare bharat ke andar jo hai vaah videshi fern jagah rakhi hai hamare andar jo hamari ladkiyon par cheez ke liye shobha nahi bana toh nahi cheez ki hai toh de de hamara samaj mein ladkiyon ko chote kapde pahanne ki ijajat nahi deta balki is batata hai aur sikhata hai ki adab ke aur tahrik dayring how match kiraaya usi ke kodi usi ke through uske rule niyam ke saath soochna

लेकिन मांगते ही भारतीय लड़कियों के कपड़े लेकर विवाद होता है क्योंकि हमारे भारत के अंदर जो

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भाई साहब हमारा देश सनातन धर्म का देश है हमें अपनी संस्कृति को बचाकर रखना होगा भारतीय संस्कृति हमारी पहचान है वो लोग हमारी नकल कर रहे हैं हम पश्चिमी सभ्यता के पीछे घूम रहे हैं ऐसा क्यों है

bhai saheb hamara desh sanatan dharm ka desh hai hamein apni sanskriti ko bachakar rakhna hoga bharatiya sanskriti hamari pehchaan hai vo log hamari nakal kar rahe hain hum pashchimi sabhyata ke peeche ghum rahe hain aisa kyon hai

भाई साहब हमारा देश सनातन धर्म का देश है हमें अपनी संस्कृति को बचाकर रखना होगा भारतीय संस्क

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भारतीय लड़कियों के कपड़े के विषय में इसलिए होता है क्योंकि हमारी सभ्यता और संस्कृति जो है वह एक विशेष है तो हम उसी हिसाब से बदतर जो है पश्चिमी संस्कृति के हिसाब से जब भी हम पहनते हैं तो बहुत सारे आलोचनाएं होती है समाज में तो इन आलोचनाओं को ध्यान में रखते हुए फिर जो है ऐसा माना जाता है कि जो है कपड़े गलत है उसकी वजह से हुई है तो सबसे पहले उसकी बात है कपड़े की वजह से एक्साइटमेंट यह फिजिकली जो है मेंटली इंसान पर यह मनोवैज्ञानिक कारण है कि इंसान की जो है वह भावनाएं थोड़ी सी बदलती है लेकिन उनके पास सद्विचार हो तो ऐसा कुछ नहीं होता है कपड़ों लेकिन और बुराई का कोई सीमा नहीं है और फिर भी इंसानियत फैक्ट सोच रहा होता है तो उसके दिमाग में किसी प्रकार की कपड़ा से नहीं हो ऐसा कुछ और ऐसा जो भी मानते हैं वह उनकी मानना है गलत है क्योंकि उन्हें ऐसा नहीं मानना चाहिए

bharatiya ladkiyon ke kapde ke vishay mein isliye hota hai kyonki hamari sabhyata aur sanskriti jo hai vaah ek vishesh hai toh hum usi hisab se badataar jo hai pashchimi sanskriti ke hisab se jab bhi hum pehente hain toh bahut saare aalochanaen hoti hai samaj mein toh in aalochanaon ko dhyan mein rakhte hue phir jo hai aisa mana jata hai ki jo hai kapde galat hai uski wajah se hui hai toh sabse pehle uski baat hai kapde ki wajah se exitement yah physically jo hai mentally insaan par yah manovaigyanik karan hai ki insaan ki jo hai vaah bhaavnaye thodi si badalti hai lekin unke paas sadwichar ho toh aisa kuch nahi hota hai kapdo lekin aur burayi ka koi seema nahi hai aur phir bhi insaniyat fact soch raha hota hai toh uske dimag mein kisi prakar ki kapda se nahi ho aisa kuch aur aisa jo bhi maante hain vaah unki manana hai galat hai kyonki unhe aisa nahi manana chahiye

भारतीय लड़कियों के कपड़े के विषय में इसलिए होता है क्योंकि हमारी सभ्यता और संस्कृति जो है

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भारतीय लड़कियों के कपड़ों को लेकर हमेशा विवाद इसलिए होता है क्योंकि यहां पर लोगों की सोच छोटी है बाहर विदेश ना पकड़ जाओगे तो उनमें लड़कियों के कपड़ों को लेकर कुछ भी विवाद नहीं होता है क्यों क्योंकि वहां की सोच काफी ब्रॉड है हम लोग की छुट्टी है इसलिए हम लोग के विवाद बड़े मिलाते हैं

bharatiya ladkiyon ke kapdo ko lekar hamesha vivaad isliye hota hai kyonki yahan par logo ki soch choti hai bahar videsh na pakad jaoge toh unmen ladkiyon ke kapdo ko lekar kuch bhi vivaad nahi hota hai kyon kyonki wahan ki soch kaafi broad hai hum log ki chhutti hai isliye hum log ke vivaad bade milaate hain

भारतीय लड़कियों के कपड़ों को लेकर हमेशा विवाद इसलिए होता है क्योंकि यहां पर लोगों की सोच छ

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