पेड़ों के कटने पर हमारा ही नुक़सान होता है, ये लोग क्यूँ नहीं समझते?...


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Ashok Bajpai

Rtd. Additional Collector P.C.S. Adhikari

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ऐसे और सवाल
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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

समाज शिक्षा के कारण से अज्ञानता के कारण से उसी प्रकार से जैसे कोई व्यक्ति पेड़ पर बैठा है और जिस तरह दो बेटा उसी डाली को पुलिस जनता के नजदीक जाऊंगा और लग जाएगी और मर जाऊंगा लेकिन ऐसे लोग जो यह नहीं जानते कि पर्यावरण को प्रसन्न करने में बहुत सहयोगी हो रहे हैं क्योंकि पेड़ स्वच्छता फैलाते सछवा देते हैं कि अधिक तरजीह देते दवाइयां भेज देंगे कल देते हैं फ्रूट जल देते पत्तियां देते हैं इनका सब कुछ काम आता है परदेसी तो चाहिए स्वच्छ वायु देते हैं उचित कि हम पेड़ लगा सकेंगे और हमारा पर्यावरण स्वच्छ रहेगा स्वच्छ रहेगा हम स्वस्थ रहेंगे और जिन पेड़ों की कटाई हो जाएगी उतना ही पर्यावरण को दूषित हो तो चला जाएगा आपको याद होगी देश तो मुझे अभिमन्यु नाम याद नहीं आ रहा वहां पर पेड़ों की बहुत आनंद पटेल जी प्रणाम सर बहुत भयंकर रूप से वहां पर अकाल पड़ा था तो मेरे से हमें पेड़ नहीं काटना चाहिए शिक्षक होने के नाते हमारा फर्ज बनता है कि हम कितने पेड़ लगा सके हमें पेड़ लगाने चाहिए हमारे आसपास हरियाली कितनी चाहिए को यह सभी हम सभी मानव जाति के लिए कार्य पर्यावरण प्रदूषण बढ़ेगा तोमर मानव जीवन कट जाएगा और पर्यावरण स्वच्छ रहेगा दिन परिवार पर्यावरण को साफ सकेंगे स्वच्छ रखेंगे संग्रहित रखेंगे उतना ही हमारे मानव जीवन के लिए तैयारी है सभी मानवों के लिए तैयारी है

samaaj shiksha ke karan se agyanata ke karan se usi prakar se jaise koi vyakti ped par baitha hai aur jis tarah do beta usi dali ko police janta ke nazdeek jaunga aur lag jayegi aur mar jaunga lekin aise log jo yah nahi jante ki paryavaran ko prasann karne mein bahut sahyogi ho rahe hai kyonki ped swachhta failate sachava dete hai ki adhik tarajih dete davaiyan bhej denge kal dete hai fruit jal dete pattiyan dete hai inka sab kuch kaam aata hai pardesi toh chahiye swachh vayu dete hai uchit ki hum ped laga sakenge aur hamara paryavaran swachh rahega swachh rahega hum swasthya rahenge aur jin pedon ki katai ho jayegi utana hi paryavaran ko dushit ho toh chala jaega aapko yaad hogi desh toh mujhe abhimanyu naam yaad nahi aa raha wahan par pedon ki bahut anand patel ji pranam sir bahut bhayankar roop se wahan par akaal pada tha toh mere se hamein ped nahi kaatna chahiye shikshak hone ke naate hamara farz baata hai ki hum kitne ped laga sake hamein ped lagane chahiye hamare aaspass hariyali kitni chahiye ko yah sabhi hum sabhi manav jati ke liye karya paryavaran pradushan badhega tomar manav jeevan cut jaega aur paryavaran swachh rahega din parivar paryavaran ko saaf sakenge swachh rakhenge sangrahit rakhenge utana hi hamare manav jeevan ke liye taiyari hai sabhi manavon ke liye taiyari hai

समाज शिक्षा के कारण से अज्ञानता के कारण से उसी प्रकार से जैसे कोई व्यक्ति पेड़ पर बैठा है

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Rajveer

Career Counselor

0:32
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जब तक आम जनता इस भागीदारी में नहीं जुड़ जाएगी तब तक कुछ नहीं हो पाएगा चाय सरकार कितनी योजना चला रहे पर्यावरण संरक्षण के लिए कितनी ठोस कदम इस मुहिम से लोग जुड़ जाएंगे पर्यावरण का संरक्षण करने लगेंगे तब उनको समझ में आएगी सबसे ज्यादा नुकसान हमारे पर्यावरण को हो रहा है और इस प्रदूषण से हमारे महानगर हूं इतने प्रदूषित हैं कि उनमें यदि आप 10 दिन पहले तो आप बीमार हो सकते हैं

jab tak aam janta is bhagidari mein nahi jud jayegi tab tak kuch nahi ho payega chai sarkar kitni yojana chala rahe paryavaran sanrakshan ke liye kitni thos kadam is muhim se log jud jaenge paryavaran ka sanrakshan karne lagenge tab unko samajh mein aayegi sabse zyada nuksan hamare paryavaran ko ho raha hai aur is pradushan se hamare mahanagar hoon itne pradushit hain ki unmen yadi aap 10 din pehle toh aap bimar ho sakte hain

जब तक आम जनता इस भागीदारी में नहीं जुड़ जाएगी तब तक कुछ नहीं हो पाएगा चाय सरकार कितनी योजन

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महेश सेठ

रेकी ग्रैंडमास्टर,लाइफ कोच

0:56
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पेड़ों के कटने पर हमारा नुकसान होता है सही बात है परंतु विकास के लिए कहीं ना कहीं पर काटे जाते हैं क्या आपको पता है कि जंगल चोरी भी हो जाते हैं लोग धीरे-धीरे अपना पेट पालने के लिए जंगल में खेल बना लेते हैं मुश्किल यह है कि इंसान को जंगल भी लगाने आने चाहिए और यह सहज तरीके से होना चाहिए इसमें कोई जबरदस्ती नहीं है कटेंगे वह नेचुरल है हर चीज का दोहन होगा ही होगा क्योंकि मनुष्य को एक सर्किल बनना है उसमें एक हिस्सा होता ही है बस यह है कि उसको जो दूसरा हिस्सा है कि वह पेड़ लगाए उसको पूरा नहीं करता फिर काटने में दिक्कत होती नहीं है जो कि पेड़ लगाना चाहिए ठीक है धन्यवाद नमस्कार

pedon ke katane par hamara nuksan hota hai sahi baat hai parantu vikas ke liye kahin na kahin par kaate jaate kya aapko pata hai ki jungle chori bhi ho jaate hain log dhire dhire apna pet palne ke liye jungle mein khel bana lete hain mushkil yah hai ki insaan ko jungle bhi lagane aane chahiye aur yah sehaz tarike se hona chahiye isme koi jabardasti nahi hai katenge vaah natural hai har cheez ka dohan hoga hi hoga kyonki manushya ko ek circle banna hai usme ek hissa hota hi hai bus yah hai ki usko jo doosra hissa hai ki vaah ped lagaye usko pura nahi karta phir katne mein dikkat hoti nahi hai jo ki ped lagana chahiye theek hai dhanyavad namaskar

पेड़ों के कटने पर हमारा नुकसान होता है सही बात है परंतु विकास के लिए कहीं ना कहीं पर काटे

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

0:59

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह प्रश्न है कि पेड़ों के कटने पर हमारा ही नुकसान होता है यह लोग क्यों नहीं समझते देखे सब समझ गए कि पेड़ों को काट देंगे जब फ्रिज को काट देते नुकसान होगा ऑक्सीजन कब मिलेगा कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ जाएगा पोलूशन बढ़ते प्रदूषण बढ़ जाएगा फिर भी लोग नहीं समझते लेकिन जब वह इटली समझेंगे नहीं करेंगे और इसके लिए गवर्नमेंट तो जागरूकता लाई रही है नहीं रही है लेकिन हमें खुद भी अपने स्वयं को समझना चाहिए कि पेड़ बहुत जरूरी है ओके बना दी जाती जाकर खुद को दिक्कत होगी अपने कुछ नहीं या फिर अपने आने वाली बेटियों को भी दिक्कत हो सकती है ठीक है गुड नाइट

yah prashna hai ki pedon ke katane par hamara hi nuksan hota hai yah log kyon nahi samajhte dekhe sab samajh gaye ki pedon ko kaat denge jab fridge ko kaat dete nuksan hoga oxygen kab milega carbon dioxide badh jaega pollution badhte pradushan badh jaega phir bhi log nahi samajhte lekin jab vaah italy samjhenge nahi karenge aur iske liye government toh jagrukta lai rahi hai nahi rahi hai lekin hamein khud bhi apne swayam ko samajhna chahiye ki ped bahut zaroori hai ok bana di jaati jaakar khud ko dikkat hogi apne kuch nahi ya phir apne aane wali betiyon ko bhi dikkat ho sakti hai theek hai good night

यह प्रश्न है कि पेड़ों के कटने पर हमारा ही नुकसान होता है यह लोग क्यों नहीं समझते देखे सब

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Liyakat Ali Gazi

Motivational Speaker, Life Coach & Soft Skills Trainer 📲 9956269300

1:01
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पेड़ों को काटने पर हमारा ही नुकसान होता है फिर भी लोग नहीं समझते हैं क्योंकि लोगों की देखी दिल और दिमाग में जो है लालच भर गया है यार आज के साथ साथ में एक ऐसा लालच भरा है इसका एक ऐसा बैठा है जिसको हम लोग फैशन बोलते हैं आजकल के लोग फैशन में जीते हैं फैशन में जीने के लिए अपना स्टेटस बनाने के लिए समाज में हाई प्रोफाइल बनने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं यहां तक लोग करते भी अपनी जो मूलभूत धार्मिक परंपरा है उनको भी लोग क्या करने को तैयार हत्या कर भी रहे जैसा कि हम लोग देख रहे हैं तो इन्हीं बातों को समझते हुए लोग यह जानते हैं कि पेड़ों को काटना हमारी नुकसानदायक है लेकिन अपनी प्रोफाइल हाई प्रोफाइल स्टेटस बनाने के लिए समाज में अपने आप को ऊंचा दिखाने के लिए समाज में अपने आप को बढ़-चढ़कर दिखाने के लिए और अपने लालच को अपनी लाल की इच्छाओं को पूरा करने के लिए पेड़ों को काटते हैं और पेड़ों की कीमतों को भूल जाते हैं थैंक यू

pedon ko katne par hamara hi nuksan hota hai phir bhi log nahi samajhte hai kyonki logo ki dekhi dil aur dimag mein jo hai lalach bhar gaya hai yaar aaj ke saath saath mein ek aisa lalach bhara hai iska ek aisa baitha hai jisko hum log fashion bolte hai aajkal ke log fashion mein jeete hai fashion mein jeene ke liye apna status banne liye samaj mein high profile banne ke liye kuch bhi karne ko taiyar hai yahan tak log karte bhi apni jo mulbhut dharmik parampara hai unko bhi log kya karne ko taiyar hatya kar bhi rahe jaisa ki hum log dekh rahe hai toh inhin baaton ko samajhte hue log yah jante hai ki pedon ko kaatna hamari nukasanadayak hai lekin apni profile high profile status banne liye samaj mein apne aap ko uncha dikhane ke liye samaj mein apne aap ko badh chadhakar dikhane ke liye aur apne lalach ko apni laal ki ikchao ko pura karne ke liye pedon ko katatey hai aur pedon ki kimton ko bhool jaate hai thank you

पेड़ों को काटने पर हमारा ही नुकसान होता है फिर भी लोग नहीं समझते हैं क्योंकि लोगों की देखी

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पेड़ों के कटने पर हमारे इंसान होता है यह लोग क्यों नहीं समझते यही तो खराबी है कि किसी भी पेड़ को लगाने में और उगने में सालों लग जाते हैं कम से कम 15 से 20 साल लगते हैं एक पेड़ को उधर ने जोवन स्तरीकरण के लिए जो योजना बनती है पौधे लगाने की तो पौधे पनपते नहीं और पेड़ काटे जाते हैं तो यह आगे चलकर जंगलों की कटाई जो हो जाएगी तो बरसात हमारे उत्तर प्रदेश में होना बहुत ही मुश्किल हो जाएगा और जलजमाव जो है वह समस्या दी आएगी और लोगों को समझना चाहिए कि पेड़ है वही हम पेड़ है तो जल और जल है तो ही हमारा अस्तित्व इस पृथ्वी पर है इसलिए पेड़ को नहीं काटना चाहिए पेड़ को थोड़ा ऊपर से छोटा कर दिया जाता है और उसको चरण सहित निकालकर मिट्टी सहित और दूसरी जगह उसका प्रत्यारोपण करना वह अपनाना जरूरी है और विदेशों में इस तरह के जल स्तर की पढ़ाई की जाती है हमारे देश में कुछ जगहों पर इस तरह से किया गया है लेकिन हमें समझ ही नहीं है कि हम क्या कर रहे हैं अपने याद से हम अपने भविष्य को और जलवायु परिवर्तन पर एक तरफ से गिफ्ट देते हैं और उनका स्तर नहीं होना चाहिए पर्यावरण पर इतना काम करते हो और अपनी आज से हम पेड़ कटवा रहे हैं तो यह गलत बात है और मैं समझना चाहिए और पेड़ों को कटने से बचाना चाहिए धन्यवाद

pedon ke katane par hamare insaan hota hai yah log kyon nahi samajhte yahi toh kharabi hai ki kisi bhi ped ko lagane mein aur ugne mein salon lag jaate hai kam se kam 15 se 20 saal lagte hai ek ped ko udhar ne jovan starikaran ke liye jo yojana banti hai paudhe lagane ki toh paudhe panpate nahi aur ped kaate jaate hai toh yah aage chalkar jungalon ki katai jo ho jayegi toh barsat hamare uttar pradesh mein hona bahut hi mushkil ho jaega aur jalajamav jo hai vaah samasya di aayegi aur logo ko samajhna chahiye ki ped hai wahi hum ped hai toh jal aur jal hai toh hi hamara astitva is prithvi par hai isliye ped ko nahi kaatna chahiye ped ko thoda upar se chota kar diya jata hai aur usko charan sahit nikalakar mitti sahit aur dusri jagah uska pratyaropan karna vaah apnana zaroori hai aur videshon mein is tarah ke jal sthar ki padhai ki jaati hai hamare desh mein kuch jagaho par is tarah se kiya gaya hai lekin hamein samajh hi nahi hai ki hum kya kar rahe hai apne yaad se hum apne bhavishya ko aur jalvayu parivartan par ek taraf se gift dete hai aur unka sthar nahi hona chahiye paryavaran par itna kaam karte ho aur apni aaj se hum ped katva rahe hai toh yah galat baat hai aur main samajhna chahiye aur pedon ko katane se bachaana chahiye dhanyavad

पेड़ों के कटने पर हमारे इंसान होता है यह लोग क्यों नहीं समझते यही तो खराबी है कि किसी भी प

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Abhishek Sharma

Forest Range Officer, MP

1:57
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए मुझे लगता है कि जब भी इंसानों को कोई भी चीज मुफ्त पर मिलती है और प्रकृति से तब हमेशा इंसान उसको बहुत ही हल्के में लेता है और जब उसका नुकसान होता है जब उसको अनाज की तरह इंसान बढ़ने लगता है तब उसे समझ में आता है कि यह हमारे भले के लिए ही था पृथ्वी को इंसानों का रहने के लायक बनाने के लिए इतने कई सारे मिलीयन ईयर्स लगे तब जाकर वहां पर इंसान पैदा हुए इंसानों में केवल ढाई हजार वर्ष पूर्व से लेकर अभी तक का इतिहास देखें तो जब पेड़ों की कटाई करना शुरू की तब से लेकर अब तक डेवलपमेंट के नाम पर उन्होंने पेड़ पूरी तरह से नष्ट कर दी है अभी भी काफी सारे पेड़ काटे जा रहे हैं जो कि भविष्य में आकर ऐसी घटनाओं के कारण बनेगा जो कि बिल्कुल भी संभव नहीं थी आप देख लीजिए क्लाइमेट में कितना परिवर्तन आ रहा है पिछले 10 वर्षों में मौसम में कितना परिवार नारायण मौसम का आज ऑफिस है वह आगे बढ़ गया है जो मौसम जनवरी-फरवरी मूर्खता आजकल वह मौसम मार्च-अप्रैल में होता है तो पेड़ों को काटने पर रिंबॉल पर असर पड़ता है जो मिट्टी है उसकी उपजाऊ होने पर फर्क पड़ता है क्योंकि 36 पानी गिरने पर रन ऑफ हो जाता है ऊपर की मिट्टी का उपजाऊ मिट्टी चली जाती है पानी जब मिट्टी रोक नहीं पाती तो जल्दी गिर जाता है भूमिगत उसकी वजह से इस जमीन के अंदर जो पानी होता है वह खत्म हो जाता है इसलिए बोरवेल और जो भूमिगत पानी है खत्म होने पर आप किसी शहरों को बहुत समस्या उठानी पड़ती है साउथ इंडिया में यह काफी जगह पर इस समस्या है चेन्नई में कोयंबटूर में जहां मैं रहता हूं वहां पर भी काफी समस्या है तो हम ही समझना चाहिए कि पेड़ों से मैं बहुत फायदा है वृक्षारोपण करना हमारी जिम्मेदारी है वरना आगे आने वाली पीढ़ी पर हम लोग ऐसा क्या नेट छोड़कर जाएंगे जो कि ना उनके लिए अच्छा होगा ना हमारे लिए अच्छा होगा बहुत-बहुत धन्यवाद

dekhiye mujhe lagta hai ki jab bhi insano ko koi bhi cheez muft par milti hai aur prakriti se tab hamesha insaan usko bahut hi halke mein leta hai aur jab uska nuksan hota hai jab usko anaaj ki tarah insaan badhne lagta hai tab use samajh mein aata hai ki yah hamare bhale ke liye hi tha prithvi ko insano ka rehne ke layak banane ke liye itne kai saare million years lage tab jaakar wahan par insaan paida hue insano mein keval dhai hazaar varsh purv se lekar abhi tak ka itihas dekhen toh jab pedon ki katai karna shuru ki tab se lekar ab tak development ke naam par unhone ped puri tarah se nasht kar di hai abhi bhi kaafi saare ped kaate ja rahe hai jo ki bhavishya mein aakar aisi ghatnaon ke karan banega jo ki bilkul bhi sambhav nahi thi aap dekh lijiye climate mein kitna parivartan aa raha hai pichle 10 varshon mein mausam mein kitna parivar narayan mausam ka aaj office hai vaah aage badh gaya hai jo mausam january february murkhta aajkal vaah mausam march april mein hota hai toh pedon ko katne par rimbal par asar padta hai jo mitti hai uski upajau hone par fark padta hai kyonki 36 paani girne par run of ho jata hai upar ki mitti ka upajau mitti chali jaati hai paani jab mitti rok nahi pati toh jaldi gir jata hai bhumigat uski wajah se is jameen ke andar jo paani hota hai vaah khatam ho jata hai isliye borewell aur jo bhumigat paani hai khatam hone par aap kisi shaharon ko bahut samasya uthani padti hai south india mein yah kaafi jagah par is samasya hai Chennai mein Coimbatore mein jaha main rehta hoon wahan par bhi kaafi samasya hai toh hum hi samajhna chahiye ki pedon se main bahut fayda hai vriksharopan karna hamari jimmedari hai varna aage aane wali peedhi par hum log aisa kya net chhodkar jaenge jo ki na unke liye accha hoga na hamare liye accha hoga bahut bahut dhanyavad

देखिए मुझे लगता है कि जब भी इंसानों को कोई भी चीज मुफ्त पर मिलती है और प्रकृति से तब हमेशा

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह कृष्णा कपूर से यह हमारा ही नुकसान होता है लेकिन यदि कोई पेड़ ऐसी जगह में आ जाता है या ऐसी स्थिति में आ जाता है जहां पर वहां का आवाज आवा रुक जाए या फिर वह ऐसी स्थान पर आ जाए तो उसका हटाना जरूरी हो जाता है अब यदि स्टेशन में पड़ सकता है तो वह तो ठीक है लेकिन यदि पेड़ों की कटाई शायद इसलिए भी की जाती है कि बहुत सारी चीजें ऐसी हैं जो निकली इंधन की इकाई होती है और जहां तो करती है आज भी लोग लकड़ियां जलाकर कुछ अपना जेसीबी चलाकर लोगों की रोशनी कैसी अंडरवाटर हो लेकिन आगे नहीं हो सकती आज फिर लोग लगी आग जलाकर कुछ इस तरह से इस महंगाई के जमाने में प्रधानमंत्री मोदी जी ने कर रहे थे कि पेड़ों की कटाई में करो परिवार से 11 घंटे का टाइम पर किया आपने कुछ करके ही बहुत सारी जगह बहन को बता सकती हूं सही जगह रहती हैं आज पूरी रात में सोते हुए भी कुछ नहीं था आपसे आपने सुना होगा तो क्या खाना ना खाने से बीमारियां हो रही मारुति गैस पंप गैस ज्यादा बनती कैसे स्थित कितने समय से नहीं होते पर आजकल है क्या खाने से खुद के पास कैलेंडर है सब कुछ है गांव के रहने वाले उसके बाद भी आज भी वही है लकड़ी इंधन की आवश्यकता होती है तो लकड़ी से बने खाने का खाना खाना पसंद करते हैं कृपया कहीं आपको इतना दिन के सिलेंडर के लिए लेकिन नहीं होता तुझे बहुत ही बड़ी समस्या है तो तेरा घाट पर हमारा ही पूछ लो इसीलिए नहीं समझते की कटाई रोकने के लिए काटने पर हमारा जीवन साधना को सुधारने के तरीके चीजें उस समय जब इंसान उस कंडीशन होती है तो वह यह कैसे समझ सका चीज आ रही है तो इनके घर में गार्डन बदलूंगा करते हैं तो उसकी पिटाई कर सकता तो नहीं है लेकिन यदि किसी के हाथ कोरेगांव नदी का चेक किया जाता है क्या बताओ की बात तो छोड़ के शहर में हर जगह लकड़ियां बिजली बिजली बिजली से चलता हुआ तो यह तो हो सकता है लेकिन फिर उससे बिजली की कसम खाते हैं तो सबकी आए इस आदमी की सोच एक से नहीं होते तो यह भी बहुत खुश हूं कि नहीं पाते कुछ नेता ऐसे हैं जो समझाना बहुत ही मुश्किल है और लोग असमंजस की स्थिति में होते हैं तो वह तो करते ही हैं यदि वह चीज बताने भी पड़े तो हो जाते हैं जिस तरह की जनसंख्या बढ़ती जा रही है सैमसंग

yah krishna kapur se yah hamara hi nuksan hota hai lekin yadi koi ped aisi jagah me aa jata hai ya aisi sthiti me aa jata hai jaha par wahan ka awaaz ava ruk jaaye ya phir vaah aisi sthan par aa jaaye toh uska hatana zaroori ho jata hai ab yadi station me pad sakta hai toh vaah toh theek hai lekin yadi pedon ki katai shayad isliye bhi ki jaati hai ki bahut saari cheezen aisi hain jo nikli indhan ki ikai hoti hai aur jaha toh karti hai aaj bhi log lakdiyan jalakar kuch apna JCB chalakar logo ki roshni kaisi andaravatar ho lekin aage nahi ho sakti aaj phir log lagi aag jalakar kuch is tarah se is mahangai ke jamane me pradhanmantri modi ji ne kar rahe the ki pedon ki katai me karo parivar se 11 ghante ka time par kiya aapne kuch karke hi bahut saari jagah behen ko bata sakti hoon sahi jagah rehti hain aaj puri raat me sote hue bhi kuch nahi tha aapse aapne suna hoga toh kya khana na khane se bimariyan ho rahi maaruti gas pump gas zyada banti kaise sthit kitne samay se nahi hote par aajkal hai kya khane se khud ke paas calendar hai sab kuch hai gaon ke rehne waale uske baad bhi aaj bhi wahi hai lakdi indhan ki avashyakta hoti hai toh lakdi se bane khane ka khana khana pasand karte hain kripya kahin aapko itna din ke cylinder ke liye lekin nahi hota tujhe bahut hi badi samasya hai toh tera ghat par hamara hi puch lo isliye nahi samajhte ki katai rokne ke liye katne par hamara jeevan sadhna ko sudhaarne ke tarike cheezen us samay jab insaan us condition hoti hai toh vaah yah kaise samajh saka cheez aa rahi hai toh inke ghar me garden badlunga karte hain toh uski pitai kar sakta toh nahi hai lekin yadi kisi ke hath koregaon nadi ka check kiya jata hai kya batao ki baat toh chhod ke shehar me har jagah lakdiyan bijli bijli bijli se chalta hua toh yah toh ho sakta hai lekin phir usse bijli ki kasam khate hain toh sabki aaye is aadmi ki soch ek se nahi hote toh yah bhi bahut khush hoon ki nahi paate kuch neta aise hain jo samajhana bahut hi mushkil hai aur log asamanjas ki sthiti me hote hain toh vaah toh karte hi hain yadi vaah cheez batane bhi pade toh ho jaate hain jis tarah ki jansankhya badhti ja rahi hai samsung

यह कृष्णा कपूर से यह हमारा ही नुकसान होता है लेकिन यदि कोई पेड़ ऐसी जगह में आ जाता है या ऐ

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ऐसा लोग इसलिए समझते हैं क्योंकि पैरों को लोग अपने बाप की संपत्ति समझते हैं और वह अपनी वो पर्यावरण और नेचुरल प्रॉपर्टी नहीं समझते वह खुद की प्रॉपर्टी समझ रहे हैं पैरों की यह हमारी मानसिकता होती है और हम सोच लेते हैं कि पेड़ को जब भी काट सकते हैं जब भी चाहे लगा सकते हैं तो इसलिए ऐसा होता है जो कि गलत है हमें इसे नहीं सोचना चाहिए उसमें भी जीव है वह भी प्रकृति की देन है वह भी बिल्कुल हमारी तरह उन्हें भी सुख दुख का अनुभव होता है तो यह मानसिकता कब बदलेगी जब हम साइंस के विषय में सोचेंगे जब हमारे समाज में विज्ञान का जो है वह समझ आएगी तभी संभव है तो हम लोग को जागरूक होना है इस चीज के प्रति

aisa log isliye samajhte hain kyonki pairon ko log apne baap ki sampatti samajhte hain aur vaah apni vo paryavaran aur natural property nahi samajhte vaah khud ki property samajh rahe hain pairon ki yah hamari mansikta hoti hai aur hum soch lete hain ki ped ko jab bhi kaat sakte hain jab bhi chahen laga sakte hain toh isliye aisa hota hai jo ki galat hai hamein ise nahi sochna chahiye usme bhi jeev hai vaah bhi prakriti ki the hai vaah bhi bilkul hamari tarah unhe bhi sukh dukh ka anubhav hota hai toh yah mansikta kab badalegi jab hum science ke vishay mein sochenge jab hamare samaj mein vigyan ka jo hai vaah samajh aayegi tabhi sambhav hai toh hum log ko jagruk hona hai is cheez ke prati

ऐसा लोग इसलिए समझते हैं क्योंकि पैरों को लोग अपने बाप की संपत्ति समझते हैं और वह अपनी वो प

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पीएम बात आपकी सही है लेकिन मनुष्य अपने जरूरतों को पूरा करने के लिए और अपने खर्च को पूरा करने के लिए केवल की पिटाई करता है और अपनी और सब को पूर्ति करने के लिए तो आगे की नस मसकारा आफ मास्टर पेड़ों की कटाई करता हूं अगर हमें परेशानी उठानी पड़ेगी हमारी आने वाली पीढ़ी को तो कोई लोग पेड़ ही ना काटेंगे और काटेंगे तो काटेंगे तो काटेंगे उसके एवज में 2 पौधों का रोपण करेंगे ऐसा करना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी रोग से ग्रसित ना हो और हमें ऑक्सीजन की कमी ना महसूस हो

pm baat aapki sahi hai lekin manushya apne jaruraton ko pura karne ke liye aur apne kharch ko pura karne ke liye keval ki pitai karta hai aur apni aur sab ko purti karne ke liye toh aage ki nas maskara of master pedon ki katai karta hoon agar hamein pareshani uthani padegi hamari aane wali peedhi ko toh koi log ped hi na katenge aur katenge toh katenge toh katenge uske evaj mein 2 paudho ka ropan karenge aisa karna chahiye taki aane wali peedhi rog se grasit na ho aur hamein oxygen ki kami na mehsus ho

पीएम बात आपकी सही है लेकिन मनुष्य अपने जरूरतों को पूरा करने के लिए और अपने खर्च को पूरा कर

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