उपनिषदों, वेदांत और वेदों में क्या अंतर है?...


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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

2:33
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बच्चों सबसे पहले वेदों की रचना हुई वेदों में जो मंत्र हैं वह मंत्र रूप में है उनकी व्याख्या नहीं है उनको व्याख्या व्याख्या की गई उन मंत्रों की मंत्रों के रहस्यों को प्रकट किया गया है बताया गया है कि मैं भी दाम तो मैं उपनिषदों में भी तो उड़ता रह गई उनको बेनाम के द्वारा बताया गया है उम्मीदों के द्वारा अनेकों के द्वारा क्लियर किया गया है यह हमारे मतलब बहुत हैं जिनमें जी समस्त ज्ञान है आप जिस ज्ञान को आज विश्व में देख रहे हैं इस समस्त हमारे वेदों और विधान परिषदों के द्वारा है भारतीयों ने उस ज्ञान को समेटा नहीं उसकी कदर नहीं की जबकि अंग्रेज लोगों ने उसका अध्ययन किया और विभिन्न प्रकार के अविष्कार आदि आज किए और अपने नाम वेस्टिशन करा लिए और आज भी रजिस्ट्रेशन उनके नाम बोलते हैं जबकि सच्चाई यह है कि वह यदि वेदों को पड़ेंगे इनाम तो ऑफिस कम पड़ेंगे तो आपको ज्ञात होगा कि सारा यह सारे अविष्कार जो अंग्रेजों के नाम बताए जाते हैं वह सारे अविष्कार हमारे भारत में हवाई जहाज का आविष्कार कब हुआ है अरे रावण को सीता का हरण करके ले गया था वह विमान ही था श्री राम जब लंका से जीतकर के रावण को मारकर के अयोध्या आए थे तो वह भी पुष्पक विमान में आए थे विमान में हमारे यहां हम लोगों ने इन विधान की ज्ञान की वेद की ज्ञान की बताएं कि हम लोगों ने उनको सुधार की मांग करके छोड़ दिया हमको याद नहीं किया अंग्रेज लोगों ने उस पर रिसर्च किए अध्ययन किए दीप और अध्ययन करके उन लोगों ने उनके आविष्कार किए और उसके अविष्कार चलाते हैं जबकि हमारे धार्मिक ग्रंथों से ही है

bacchon sabse pehle vedon ki rachna hui vedon mein jo mantra hain vaah mantra roop mein hai unki vyakhya nahi hai unko vyakhya vyakhya ki gayi un mantron ki mantron ke rahasyon ko prakat kiya gaya hai bataya gaya hai ki main bhi daam toh main upnishadon mein bhi toh udta reh gayi unko benaam ke dwara bataya gaya hai ummidon ke dwara anekon ke dwara clear kiya gaya hai yah hamare matlab bahut hain jinmein ji samast gyaan hai aap jis gyaan ko aaj vishwa mein dekh rahe hain is samast hamare vedon aur vidhan parishadon ke dwara hai bharatiyon ne us gyaan ko sameta nahi uski kadar nahi ki jabki angrej logon ne uska adhyayan kiya aur vibhinn prakar ke avishkaar aadi aaj kiye aur apne naam vestishan kara liye aur aaj bhi registration unke naam bolte hain jabki sacchai yah hai ki vaah yadi vedon ko padenge inam toh office kam padenge toh aapko gyaat hoga ki saara yah saare avishkaar jo angrejo ke naam bataye jaate hain vaah saare avishkaar hamare bharat mein hawai jahaj ka avishkar kab hua hai arre ravan ko sita ka haran karke le gaya tha vaah Vimaan hi tha shri ram jab lanka se jeetkar ke ravan ko marakar ke ayodhya aaye the toh vaah bhi Pushpak Vimaan mein aaye the Vimaan mein hamare yahan hum logon ne in vidhan ki gyaan ki ved ki gyaan ki batayen ki hum logon ne unko sudhaar ki maang karke chhod diya hamko yaad nahi kiya angrej logon ne us par research kiye adhyayan kiye deep aur adhyayan karke un logon ne unke avishkar kiye aur uske avishkaar chalte hain jabki hamare dharmik granthon se hi hai

बच्चों सबसे पहले वेदों की रचना हुई वेदों में जो मंत्र हैं वह मंत्र रूप में है उनकी व्याख्य

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समझने का प्रयास कीजिए गीत एक वेद वेद नाम से मूल ग्रंथ आगे चलकर सुविधा की दृष्टि से उनको तीन भागों में बांट दिया गया जिसको वेदंतही कहा गया यह वेदत रही ऋग्वेद सामवेद तथा यजुर्वेद थे और आगे चल के अनेक ऋषि यों ने जिसमें अथर्वण राम आदि प्रमुख ऐसी थे इन्होंने एक और ज्ञान कोष तैयार किया इसको अथर्व वेद का जावेद चार हो गए हालांकि ऐसा कहा जाता है कि अथर्ववेद की कुछ विचार द्वीप से भी प्राचीन रिचा इसका मतलब अथर्व वेद की रचना है ऋग्वेद से पहले ही प्रारंभ हो चुकी थी चारों के चारों वेद मूल ग्रंथ कहलाए इसमें इन वेदों में दो खंड से पहले का नाम था कर्मकांड खंड कर्म खंड और दूसरे का नाम था ज्ञान खंड वेदों का जो ज्ञान खंड था उसको उपनिषदों के नाम से संग्रहित किया गया तो वेदों का ज्ञान खंड ही उपनिषद है इन्हीं उपनिषदों को आगे चलकर वेदांत कहा कि वेदांत दर्शन मुख्य स्रोत यह उपनिषद ही हैं वेदांत इसलिए यह वेदों के संपूर्ण सार के दांत का किया मत लीजिए कि वेद का अंत दे दो किस शहर के रूप में वेदांता और उपनिषदों की गणना किस प्रकार और वेदांत तो लगभग एक ही हैं किंतु इनके मूलगंज कह जाते हैं

samjhne ka prayas kijiye geet ek ved ved naam se mul granth aage chalkar suvidha ki drishti se unko teen bhaagon me baant diya gaya jisko vedantahi kaha gaya yah vedat rahi rigved samved tatha yajurved the aur aage chal ke anek rishi yo ne jisme atharvan ram aadi pramukh aisi the inhone ek aur gyaan kosh taiyar kiya isko atharva ved ka javed char ho gaye halaki aisa kaha jata hai ki atharvaved ki kuch vichar dweep se bhi prachin richa iska matlab atharva ved ki rachna hai rigved se pehle hi prarambh ho chuki thi charo ke charo ved mul granth kahalae isme in vedo me do khand se pehle ka naam tha karmakand khand karm khand aur dusre ka naam tha gyaan khand vedo ka jo gyaan khand tha usko upnishadon ke naam se sangrahit kiya gaya toh vedo ka gyaan khand hi upanishad hai inhin upnishadon ko aage chalkar vedant kaha ki vedant darshan mukhya srot yah upanishad hi hain vedant isliye yah vedo ke sampurna saar ke dant ka kiya mat lijiye ki ved ka ant de do kis shehar ke roop me vedanta aur upnishadon ki ganana kis prakar aur vedant toh lagbhag ek hi hain kintu inke mulaganj keh jaate hain

समझने का प्रयास कीजिए गीत एक वेद वेद नाम से मूल ग्रंथ आगे चलकर सुविधा की दृष्टि से उनको

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Akhil

Yoga Expert

2:04
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वेद भारतीय संस्कृति के सबसे पुरातन ग्रंथ हैं वेदों को अपौरूषेय कहा जाता है यानी कि किसी भी पुरुष ने वेदों को नहीं लिखा वेदों में जो भी मंत्र हैं वह इशू द्वारा ध्यान की अवस्था में प्राप्त किया हुआ ज्ञान है मुख्यतः चार वेद है ऋग्वेद सामवेद यजुर्वेद और अथर्ववेद वेदों में अद्वित के सिद्धांत को बताया गया है यानी कि एक सकते हैं इसको ब्रह्मा कहा जाता है हर वेद के चार भाग हैं मंत्र संहिता ब्राह्मण आरण्यक और उपनिषद पहले भागों में कर्मकांड बताया गया है यानी कि किसी फल की प्राप्ति के लिए यज्ञ करना मंत्र वेद के आखरी भाग यानी उपनिषद में ज्ञान कांड की बात बताई गई है यानी कि परम सत्य को कैसे जाने परम सत्य क्या है उपनिषद वेद के आखिरी भाग हैं जिसमें परम सत्य को जानने की विधि बताई गई है मुख्यतः 10 उपनिषद है ईशा केन कटर मुंडक मांडू के तहत रहते श्रेया प्रश्न बंद हो गया और ब्रदर निगम इसके बाद आता है वेदांत वेदांत दो शब्दों से मिलकर बना है वेद और अंत यानी वेदांत वेदों के अंतिम वेद के जो आखिरी ज्ञान है वेदों का जो परम ज्ञान है उसको वेदांत कहते हैं उपनिषदों में विवेक 2 का आखिरी कहानी परम ज्ञान बताया गया है इसलिए उपनिषद भी एक वेदांत का हिस्सा है और वेदांत के अंदर भगवत गीता और ब्रह्म सूत्र भी आते हैं तो यह है वेद उपनिषद और वेदांत के बीच का अंतर

ved bharatiya sanskriti ke sabse puratan granth hain vedo ko apaurushey kaha jata hai yani ki kisi bhi purush ne vedo ko nahi likha vedo me jo bhi mantra hain vaah issue dwara dhyan ki avastha me prapt kiya hua gyaan hai mukhyata char ved hai rigved samved yajurved aur atharvaved vedo me adwit ke siddhant ko bataya gaya hai yani ki ek sakte hain isko brahma kaha jata hai har ved ke char bhag hain mantra sanhita brahman aranyak aur upanishad pehle bhaagon me karmakand bataya gaya hai yani ki kisi fal ki prapti ke liye yagya karna mantra ved ke aakhri bhag yani upanishad me gyaan kaand ki baat batai gayi hai yani ki param satya ko kaise jaane param satya kya hai upanishad ved ke aakhiri bhag hain jisme param satya ko jaanne ki vidhi batai gayi hai mukhyata 10 upanishad hai isha cane Cutter mundak mandu ke tahat rehte shreya prashna band ho gaya aur brother nigam iske baad aata hai vedant vedant do shabdon se milkar bana hai ved aur ant yani vedant vedo ke antim ved ke jo aakhiri gyaan hai vedo ka jo param gyaan hai usko vedant kehte hain upnishadon me vivek 2 ka aakhiri kahani param gyaan bataya gaya hai isliye upanishad bhi ek vedant ka hissa hai aur vedant ke andar bhagwat geeta aur Brahma sutra bhi aate hain toh yah hai ved upanishad aur vedant ke beech ka antar

वेद भारतीय संस्कृति के सबसे पुरातन ग्रंथ हैं वेदों को अपौरूषेय कहा जाता है यानी कि किसी भी

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

3:09

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उपनिषदों वेदांत और वेदों में क्या प्रशिक्षित हमारी हमारे जो जो धरोहर हमारी भारतीय हिंदू संस्कृति की जो पूरे विश्व के लिए जरूर है कि हमारे चारों वेद रिग वेद अथर्व वेद सामवेद यजुर्वेद उसने सब संस्कृत में श्लोक के द्वारा सब बातों का ज्ञान दिया गया लेकिन क्योंकि संस्कृत भाषा देववाणी कही जाती रही और उसका जो प्रचार और प्रसार कम होता गया इसलिए हमारे वेद वह वर्तमान समय में इतने जो प्रखर रूप से खेलना चाहिए वह नहीं फैलता है अब उसको समझा कर उपनिषदों में उसको भाषांतर थोड़ा करके बड़े रूप में समझाया गया है इसलिए यह वेद के बाद उपनिषद और उसके बाद वेदांत में जो बातें कही गई थोड़ी गई तो उसको भी समझा कर बताया गया यह हमारी धरोहर है हमारी संस्कृति की उसमें बहुत कुछ है और बहुत कुछ सीखने लायक हैं पूरे विश्व को जीरो जो आज हम बोलते 0 0 का आविष्कार हमारे भारत में ही हमारी संस्कृति में हुआ विश्व को सुनिए देने वाला भारत चंद्र और पृथ्वी के बीच की दूरी उस समय में ना कर बताई गई है लेकिन अब उसको बहुत ही डिटेल्स में अभ्यास करके और सब कुछ करते हमारे यूरोपियन कंट्री में उसको प्रकाश प्रकाश वर्ष किसको कहते हैं उसमें उन्होंने किलोमीटर में ना कर दिया वह लोग कि जो भी अचीवमेंट्स है वह हमारे वेद उपनिषद और विधान के गहन अभ्यास के बाद मिले हैं और वह जो भी इनोवेशंस करते हैं वह इसमें सही निकला हुआ छोटा सा अंश होता है लेकिन हमको इस बात का गर्व होना चाहिए और हमें जहां हो सके तो उसका अभ्यास जरूर करना चाहिए धन्यवाद धन्य

upnishadon vedant aur vedon mein kya prashikshit hamari hamare jo jo dharohar hamari bharatiya hindu sanskriti ki jo poore vishwa ke liye zaroor hai ki hamare charo ved rig ved atharva ved samved yajurved usne sab sanskrit mein shlok ke dwara sab baaton ka gyaan diya gaya lekin kyonki sanskrit bhasha devavani kahi jaati rahi aur uska jo prachar aur prasaar kam hota gaya isliye hamare ved vaah vartmaan samay mein itne jo prakhar roop se khelna chahiye vaah nahi failata hai ab usko samjha kar upnishadon mein usko bhashantar thoda karke bade roop mein samjhaya gaya hai isliye yah ved ke baad upanishad aur uske baad vedant mein jo batein kahi gayi thodi gayi toh usko bhi samjha kar bataya gaya yah hamari dharohar hai hamari sanskriti ki usmein bahut kuch hai aur bahut kuch seekhne layak hain poore vishwa ko zero jo aaj hum bolte 0 0 ka avishkar hamare bharat mein hi hamari sanskriti mein hua vishwa ko suniye dene vala bharat chandra aur prithvi ke beech ki doori us samay mein na kar batai gayi hai lekin ab usko bahut hi details mein abhyas karke aur sab kuch karte hamare european country mein usko prakash prakash varsh kisko kehte hain usmein unhone kilometre mein na kar diya vaah log ki jo bhi achievements hai vaah hamare ved upanishad aur vidhan ke gahan abhyas ke baad mile hain aur vaah jo bhi innovations karte hain vaah isme sahi nikala hua chota sa ansh hota hai lekin hamko is baat ka garv hona chahiye aur hamein jahan ho sake toh uska abhyas zaroor karna chahiye dhanyavad dhanya

उपनिषदों वेदांत और वेदों में क्या प्रशिक्षित हमारी हमारे जो जो धरोहर हमारी भारतीय हिंदू स

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सबसे पहली बात है वेद उपनिषद दे दान तीन चीजें हैं तो वेद जो है वह मूल है जरा है और वेद के शब्द जो हैं वह बहुत कठिन है तो वेद को वेदांत और उपनिषदों में बांटा गया है उसको सुलभ करने के लिए क्योंकि पुराने भारत में बहुत सारे अच्छाइयां और बुराइयां भी थी तो उनमें से एक एक बार प्रथा भी था जिसमें सिर्फ और सिर्फ ब्राह्मण को ही बेल पढ़ने की अनुमति दी जाती थी जो कि ब्राह्मणों द्वारा बनाया गया रूम था जो कि वेदों के अनुसार नहीं था तो भेजने यह सही है कि 4 बार उनके उल्लेख किए गए हैं और वेद वेद को आसान और शूद्रों को पढ़ने के लिए उनको सुलभ बनाया गया तो उसे उपनिषद कहते हैं अंत में बेल को संक्षेप में जो वर्णन किया गया है उसे वेदांत कहते हैं यदि बेल का भूमिका प्रस्तावना पढ़ना हो तो हमें उसे वेदांत कहते हैं यानी देश काल और उपनिषद जो है वेद का खंडित रूप है उसका उसका सुलभता ने आदमी को समझने वाला लैंग्वेज में कठिन से सरल भाषा में व्यक्त सरल संस्कृत में व्यक्त किया गया उपनिषद है तो तीनों चीजें हैं जहां तक वेद की बात है तो वेद मूल रूप से वह जड़ और बाकी शाखा और पत्तियां

sabse pehli baat hai ved upanishad de daan teen cheezen hain toh ved jo hai vaah mul hai zara hai aur ved ke shabd jo hain vaah bahut kathin hai toh ved ko vedant aur upnishadon mein banta gaya hai usko sulabh karne ke liye kyonki purane bharat mein bahut saare achhai aur buraiyan bhi thi toh unmen se ek ek baar pratha bhi tha jisme sirf aur sirf brahman ko hi bell padhne ki anumati di jaati thi jo ki brahmanon dwara banaya gaya room tha jo ki vedon ke anusaar nahi tha toh bhejne yah sahi hai ki 4 baar unke ullekh kiye gaye hain aur ved ved ko aasaan aur shudron ko padhne ke liye unko sulabh banaya gaya toh use upanishad kehte hain ant mein bell ko sankshep mein jo varnan kiya gaya hai use vedant kehte hain yadi bell ka bhumika prastavna padhna ho toh hamein use vedant kehte hain yani desh kaal aur upanishad jo hai ved ka khandit roop hai uska uska sulabhata ne aadmi ko samjhne vala language mein kathin se saral bhasha mein vyakt saral sanskrit mein vyakt kiya gaya upanishad hai toh teenon cheezen hain jahan tak ved ki baat hai toh ved mul roop se vaah jad aur baki shakha aur pattiyan

सबसे पहली बात है वेद उपनिषद दे दान तीन चीजें हैं तो वेद जो है वह मूल है जरा है और वेद के श

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