भगवद् गीता का सार क्या है?...


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आचार्य प्रशांत

IIT-IIM Alumnus, Ex Civil Services Officer, Mystic

7:27

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श्री कृष्ण है तो महसूस कर सकेंगे और अगर आप ठीक नहीं हैं तो नहीं कर पाएंगे श्री कृष्ण का बोध तो श्री कृष्ण जैसे ही किसी को होगा ना जो उनको समझ में आ रहा है जो उनको अनुभव हो रहा है वह तो उनके जैसे ही किसी को अनुभव होगा तो आप भी उनके जैसे हो जाएं जो उनको दिख रहा है आपको भी दिखेगा जब भी दिखाई दे शास्त्रों की बात पुत्रों की बात गुरुओं की बात समझ में नहीं आ रही है दोष अपनी समझ को मत दीजिएगा अपनी हस्ती को अपनी अस्मिता को अपने पूरे वजूद को दीजिएगा वह वाक्य पूछ लो क्या वह व्यक्ति आपको समझ में इसलिए नहीं आ रहा है क्योंकि आपके जीवन और उसके जीवन में बहुत दूरी है वह किसी और केंद्र में संचालित किसी और आया है आपका केंद्र ही दूसरा कोई और आया इसीलिए उसकी बात उसका ग्रह क्या उसके जीवन कुछ युक्तिसंगत नहीं मालूम पड़ता कुछ भी संगति दिखती है कुछ ठीक लगता है दो और दो चार होता नहीं दिखता दो और दो चार हो गई तभी उसके जैसे हो जाएंगे वास्तव में महापुरुषों के कथनों को समझने का कोई तरीका ही नहीं है विधि कोई है ही नहीं वही हो जाना पड़ता है जिसने वह बात बोली थी बात समझने के लिए वही हो जाना पड़ता है जिसने वह बात बोली थी तभी वो पल्ले पड़ेगी अगर आप वह है नहीं जिसने वह बात बोली है और फिर भी आप का दावा है कि मैं तो समझता हूं झटका खाने के लिए तैयार रहें कुछ समझते नहीं है गीता के श्लोकों का अर्थ कर लेने से कुछ लोग समझ में नहीं आ गए जब जीवन में कृष्णा तो आए कृष्ण की बात समझ में आई जैसे हो जाएंगे फिर श्लोक सहज हो जाएंगे तो पड़ेंगे कहां बात कराइए अंजानी या दूर की लगेगी ही नहीं है मेरी बात मैं तो जानता हूं जब तक बात आपकी नहीं हुई अब तक समझ में कैसे आ गई भाई इसे आगे भी समझ गए होंगे कि समझाने की प्रक्रिया वास्तव में होती क्या है जब गुरु शिष्य को समझा रहा है या जब कृष्ण अर्जुन को समझा रहे हैं तो घटना घट रही है घटना घट रही है कि अर्जुन को कृष्ण अपने जैसा बना रहे हैं समझा नहीं रहे 4 जून को अपने में समाहित किए ले रहे हैं वर्जिन को पी रहे हैं अर्जुन में ड्राई एसएस अर्जुनमृता जाता है यही समझने की प्रक्रिया है गुरु और शिष्य के मध्य हमेशा यही घटती है जितना मिटेगा उतना समझेगा मीठा नहीं है अपनी अकड़ में दूर खड़ा है उसे अपनी हस्तियां भी प्यारी है उसे अपनी सत्ता बरकरार रखनी है उसे कुछ समझ में आ भी नहीं रहा होगा प्ले देकर के हर धर्म ग्रंथ का और हर गुरु का उपदेश मात्र इतना होता है मेरे जैसे हो जाओ बाकी सब बातें तो बहाना है बातचीत करनी है तो कुछ मुद्दा होना चाहिए ना तो मुद्दे खड़े करे जाते हैं कभी किसी विषय पर बात होती है कभी किसी विषय पर बात होती है गीता में 18 मुद्दे खड़े करेगा एक के बाद एक लेकिन सब मुद्दे बहाना है चल क्या रहा है अर्जुन के विलेन की बड़े मालिक परिवर्तन की प्रक्रिया चल रही है ऊपर ऊपर बातें चल रही है नीचे नीचे अर्जुन को मिटाया जा रहा है की छतरी से बात नहीं होता है तो टूथ को रिझाने के लिए जरूरी होता है कि ऊपर पर बातचीत चलती रहे शशि को लगा रहता है टांडव रहता है हम तो ना रहती है कि बातचीत ही तो चल रही है बातचीत ऊपर ऊपर चल रही है नीचे नीचे कुछ और चल रहा है इशिता बातों को लेकर इतना आग्रह ना होता गुरु पर्व पर ही बातचीत ना करता

shri krishna hai toh mehsus kar sakenge aur agar aap theek nahi hain toh nahi kar payenge shri krishna ka bodh toh shri krishna jaise hi kisi ko hoga na jo unko samajh mein aa raha hai jo unko anubhav ho raha hai vaah toh unke jaise hi kisi ko anubhav hoga toh aap bhi unke jaise ho jaye jo unko dikh raha hai aapko bhi dikhega jab bhi dikhai de shastron ki baat putron ki baat guruon ki baat samajh mein nahi aa rahi hai dosh apni samajh ko mat dijiyega apni hasti ko apni asmita ko apne poore wajood ko dijiyega vaah vakya puch lo kya vaah vyakti aapko samajh mein isliye nahi aa raha hai kyonki aapke jeevan aur uske jeevan mein bahut doori hai vaah kisi aur kendra mein sanchalit kisi aur aaya hai aapka kendra hi doosra koi aur aaya isliye uski baat uska grah kya uske jeevan kuch yuktisangat nahi maloom padta kuch bhi sangati dikhti hai kuch theek lagta hai do aur do char hota nahi dikhta do aur do char ho gayi tabhi uske jaise ho jaenge vaastav mein mahapurushon ke kathanon ko samjhne ka koi tarika hi nahi hai vidhi koi hai hi nahi wahi ho jana padta hai jisne vaah baat boli thi baat samjhne ke liye wahi ho jana padta hai jisne vaah baat boli thi tabhi vo palle padegi agar aap vaah hai nahi jisne vaah baat boli hai aur phir bhi aap ka daawa hai ki main toh samajhata hoon jhatka khane ke liye taiyar rahein kuch samajhte nahi hai geeta ke shlokon ka arth kar lene se kuch log samajh mein nahi aa gaye jab jeevan mein krishna toh aaye krishna ki baat samajh mein I jaise ho jaenge phir shlok sehaz ho jaenge toh padenge kahaan baat karaiye anjani ya dur ki lagegi hi nahi hai meri baat main toh jaanta hoon jab tak baat aapki nahi hui ab tak samajh mein kaise aa gayi bhai ise aage bhi samajh gaye honge ki samjhane ki prakriya vaastav mein hoti kya hai jab guru shishya ko samjha raha hai ya jab krishna arjun ko samjha rahe hain toh ghatna ghat rahi hai ghatna ghat rahi hai ki arjun ko krishna apne jaisa bana rahe hain samjha nahi rahe 4 june ko apne mein samahit kiye le rahe hain virgin ko p rahe hain arjun mein dry SS arjunamrita jata hai yahi samjhne ki prakriya hai guru aur shishya ke madhya hamesha yahi ghatati hai jitna mitega utana samjhega meetha nahi hai apni akad mein dur khada hai use apni hastiyan bhi pyaari hai use apni satta barkaraar rakhni hai use kuch samajh mein aa bhi nahi raha hoga play dekar ke har dharm granth ka aur har guru ka updesh matra itna hota hai mere jaise ho jao baki sab batein toh bahana hai batchit karni hai toh kuch mudda hona chahiye na toh mudde khade kare jaate hain kabhi kisi vishay par baat hoti hai kabhi kisi vishay par baat hoti hai geeta mein 18 mudde khade karega ek ke baad ek lekin sab mudde bahana hai chal kya raha hai arjun ke villain ki bade malik parivartan ki prakriya chal rahi hai upar upar batein chal rahi hai niche neeche arjun ko mitaya ja raha hai ki chatri se baat nahi hota hai toh tooth ko rijhaane ke liye zaroori hota hai ki upar par batchit chalti rahe shashi ko laga rehta hai tandav rehta hai hum toh na rehti hai ki batchit hi toh chal rahi hai batchit upar upar chal rahi hai niche neeche kuch aur chal raha hai ishita baaton ko lekar itna agrah na hota guru parv par hi batchit na karta

श्री कृष्ण है तो महसूस कर सकेंगे और अगर आप ठीक नहीं हैं तो नहीं कर पाएंगे श्री कृष्ण का ब

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kanha

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भगवती गीता का सार है कि अच्छा कर्म कीजिए किसी को दुख मत पहुंचाया अगर आप किसी को सुख किसी को दुख नहीं पहुंचा किसी को दुख पहुंचाते हो तो आपको भी दुख मिलेगा तो कुछ लगते हो अच्छे सद्भावना देते हो तो आपको भी खुशी देगा कौन देगा भगवान देगा

bhagwati geeta ka saar hai ki accha karm kijiye kisi ko dukh mat pahunchaya agar aap kisi ko sukh kisi ko dukh nahi pohcha kisi ko dukh pahunchate ho toh aapko bhi dukh milega toh kuch lagte ho acche sadbhavana dete ho toh aapko bhi khushi dega kaun dega bhagwan dega

भगवती गीता का सार है कि अच्छा कर्म कीजिए किसी को दुख मत पहुंचाया अगर आप किसी को सुख किसी क

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