महाभारत के बाद क्या हुआ?...


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Sunil Kumar Pandey

Editor & Writer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

महाभारत की अंतिम चरण में कलयुग का पदार्पण हुआ था अतः कलयुग महाराज परीक्षित से आज्ञा लेकर आया था उसने परीक्षित से पूछा ही राजन मैं कहां रहूं तू महाराज परीक्षित ने उसे कुछ स्थान बताए थे जिनमें स्वर्ण गंदगी आदि जहां परियां हो वहां पर आप बात कर सकते हैं धन्यवाद

mahabharat ki antim charan me kalyug ka padarpan hua tha atah kalyug maharaj parikshit se aagya lekar aaya tha usne parikshit se poocha hi rajan main kaha rahun tu maharaj parikshit ne use kuch sthan bataye the jinmein swarn gandagi aadi jaha pariyaan ho wahan par aap baat kar sakte hain dhanyavad

महाभारत की अंतिम चरण में कलयुग का पदार्पण हुआ था अतः कलयुग महाराज परीक्षित से आज्ञा लेकर आ

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Gyandeep Kkr

Social Activist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

महाभारत के बाद जब श्री कृष्ण जी को तीर लगा तो जब अर्जुन और उनके पास आए तो श्री कृष्ण दिन को सलाह दी कि आप हिमालय में तब करके कल जाना तो अर्जुन ने पूछा ऐसा भी क्यों तो उन्होंने बताया कि आपको पाप कर्म जो आपके ऊपर पाप कर्म अर्जुन ने पूछा कि मैं तो युद्ध से मना कर रहा था तब श्री कृष्ण जी ने बताया कि मुझे नहीं पता मैंने उस समय क्या कहा था परंतु यह काम कर लेना और पांडव हिमालय में गले और उसके बाद उनको नर्क में जाना पड़ा युद्ध में किए हुए पापों के कारण और युधिष्ठिर की को भी अपना फल भोगने के लिए कुछ समय क्योंकि उन्होंने कहा था सुदामा मारा गया झूठ बोला था कुछ समय नाक में जाना पड़ा था जब उनको अपने परिजनों की याद आई थी धोखे से उनको भी नर्क में वहां मिलवाया गया हूं तब धर्मराज इनकी ने कहा कि आप जब युधिष्ठिर जी ने कहा कि मुझे भी यहां रख लो तो उन्होंने कहा युक्ति बताता हूं कि आप अपने पूर्व इनके संकल्प कर दीजिए तो युधिष्ठिर ने ऐसा कि यूजीसी के पूर्व कर्मों से कुछ समय के लिए उन को स्वर्ग में स्थान मिला यानी कि परमानेंट स्वर्ग में पांडव नहीं गए महाभारत के बाद से हुआ यह एक शक्ति है काल से आप भ्रम के नाम से ही जानते होंगे जो कभी किसी के समक्ष नहीं आता जो व्यक्ति रहता है यानी कि वह वास्तव में है परंतु किसी के सामने नहीं आता ऐसा क्यों तुम किसकी भयंकर शक्ल है और यह जीवो को मारता और खाता है जहां देखो जन्म मृत्यु होती है यह बहुत हंसते हैं हमारी बुद्धि पर ऐसे पत्थर पड़े हुए कि हम जानने की कोशिश भी नहीं करते परंतु जब आप मृत्यु के बाद एक भयंकर सत्य से परिचित हो गए तब आपके हाथ कुछ नहीं लग सकता इसलिए समय रहते कार्य चांदी की पुस्तकों में भी जिक्र है हमारी बूटी पकड़ नहीं पाती मैं सोचा करती थी पहले ब्रह्मा विष्णु महेश के बारे में तो मुझे इतनी जानकारी नहीं थी क्रम में भागवत पुराण पढ़ने लगी तब श्री श्री कृष्ण मिश्रा डा हो गई एक दिन मैंने उसी भागवत पुराण में पड़ा कि इनसे ऊपर कोई और परमात्मा है या कोई और परमात्मा है उसमें लिखा हुआ था उसके बारे में तो इस तरह से आपका वहां गौर गया या नहीं गया यह तो आप जाने परंतु इनकी मृत्यु के बारे में भी संकेत है तो आप अब जैसे मैंने जाना आप भी ऐसे जान क्योंकि हमें जन्म मृत्यु से पीछा छुड़ाना चाहिए परमात्मा आपको संकेत किस तरह से दे रहा है आप समझिए अगर आपको यह ज्ञान पहुंच जाए जो मैं बताना चाहती हूं आप भी पुस्तक पढ़िए जान दूंगा यह आप अभी प्राप्त कर सकते हैं मैंने अपने प्रोफाइल के डिस्क्रिप्शन में लिंक दिया हुआ है वहां से डाउनलोड कर लीजिए

mahabharat ke baad jab shri krishna ji ko teer laga toh jab arjun aur unke paas aaye toh shri krishna din ko salah di ki aap himalaya me tab karke kal jana toh arjun ne poocha aisa bhi kyon toh unhone bataya ki aapko paap karm jo aapke upar paap karm arjun ne poocha ki main toh yudh se mana kar raha tha tab shri krishna ji ne bataya ki mujhe nahi pata maine us samay kya kaha tha parantu yah kaam kar lena aur pandav himalaya me gale aur uske baad unko nark me jana pada yudh me kiye hue paapon ke karan aur yudhishthir ki ko bhi apna fal bhogane ke liye kuch samay kyonki unhone kaha tha sudama mara gaya jhuth bola tha kuch samay nak me jana pada tha jab unko apne parijanon ki yaad I thi dhokhe se unko bhi nark me wahan milvaya gaya hoon tab Dharamraj inki ne kaha ki aap jab yudhishthir ji ne kaha ki mujhe bhi yahan rakh lo toh unhone kaha yukti batata hoon ki aap apne purv inke sankalp kar dijiye toh yudhishthir ne aisa ki ugc ke purv karmon se kuch samay ke liye un ko swarg me sthan mila yani ki permanent swarg me pandav nahi gaye mahabharat ke baad se hua yah ek shakti hai kaal se aap bharam ke naam se hi jante honge jo kabhi kisi ke samaksh nahi aata jo vyakti rehta hai yani ki vaah vaastav me hai parantu kisi ke saamne nahi aata aisa kyon tum kiski bhayankar shakl hai aur yah jeevo ko maarta aur khaata hai jaha dekho janam mrityu hoti hai yah bahut hansate hain hamari buddhi par aise patthar pade hue ki hum jaanne ki koshish bhi nahi karte parantu jab aap mrityu ke baad ek bhayankar satya se parichit ho gaye tab aapke hath kuch nahi lag sakta isliye samay rehte karya chaandi ki pustakon me bhi jikarr hai hamari buti pakad nahi pati main socha karti thi pehle brahma vishnu mahesh ke bare me toh mujhe itni jaankari nahi thi kram me bhagwat puran padhne lagi tab shri shri krishna mishra da ho gayi ek din maine usi bhagwat puran me pada ki inse upar koi aur paramatma hai ya koi aur paramatma hai usme likha hua tha uske bare me toh is tarah se aapka wahan gaur gaya ya nahi gaya yah toh aap jaane parantu inki mrityu ke bare me bhi sanket hai toh aap ab jaise maine jana aap bhi aise jaan kyonki hamein janam mrityu se picha chhudana chahiye paramatma aapko sanket kis tarah se de raha hai aap samjhiye agar aapko yah gyaan pohch jaaye jo main batana chahti hoon aap bhi pustak padhiye jaan dunga yah aap abhi prapt kar sakte hain maine apne profile ke description me link diya hua hai wahan se download kar lijiye

महाभारत के बाद जब श्री कृष्ण जी को तीर लगा तो जब अर्जुन और उनके पास आए तो श्री कृष्ण दिन क

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महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने वर्षों तक राज किया और अंत में सुबह अपना शरीर त्याग कर स्वर्ग हो गए और उसके बाद में पांडवों के अंतिम जो ट्रेन से उन्होंने अंतिम समय तक राज्य और उसके बाद में कलयुग का अवतरण हुआ और कलयुग का कॉल आया

mahabharat yudh ke baad pandavon ne varshon tak raj kiya aur ant mein subah apna sharir tyag kar swarg ho gaye aur uske baad mein pandavon ke antim jo train se unhone antim samay tak rajya aur uske baad mein kalyug ka avataran hua aur kalyug ka call aaya

महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने वर्षों तक राज किया और अंत में सुबह अपना शरीर त्याग कर स्वर

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Shashi

Author, Spiritual Blogger

1:11
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महाभारत तो एक पूरी जाता है जो कि शुरू से लेकर अंत तक एक समय पढ़ी जाती है उसकी पूरी बहुत सारी चीजों का महाभारत के युद्ध के बाद दोबारा 15 साल 36 साल राज किया वह डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल माइक्रोसॉफ्ट द्वारिका धाम चले गए उनका एक अलग कहानी है कहानी महाभारत और महाभारत और महाभारत के लिए हमारे हिसाब से लोगों को उससे ज्यादा नहीं सोच रहा है कि भारत और चीन का युद्ध खत्म हो गया उसके बाद जब युधिष्ठिर भारत की बात करें तो महाभारत 18 दिन की छुट्टी

mahabharat toh ek puri jata hai jo ki shuru se lekar ant tak ek samay padhi jaati hai uski puri bahut saree chijon ka mahabharat ke yudh ke baad dobara 15 saal 36 saal raj kiya vaah district hospital microsoft dwarika dhaam chale gaye unka ek alag kahani hai kahani mahabharat aur mahabharat aur mahabharat ke liye hamare hisab se logo ko usse zyada nahi soch raha hai ki bharat aur china ka yudh khatam ho gaya uske baad jab yudhishthir bharat ki baat kare toh mahabharat 18 din ki chhutti

महाभारत तो एक पूरी जाता है जो कि शुरू से लेकर अंत तक एक समय पढ़ी जाती है उसकी पूरी बहुत सा

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Rasbihari Pandey

लेखन / कविता पाठ

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महाभारत के कुछ समय बाद परीक्षित को राजा बनाया गया और पांडव स्वर्ग की ओर चले गए महाभारत के कुछ ही समय बाद श्री कृष्ण भी अपने परमधाम को चले गए इससे दुखी होकर ही पांडव और द्रौपदी हिमालय के रास्ते स्वर्ग की ओर चल पड़े लेकिन दुर्भाग्य से युधिष्ठिर के अलावा कोई भी स्वस्थ शरीर स्वर्ग नहीं पहुंच सका सॉरी बाकी लोग बर्फ में गिरकर परमधाम को चले गए एकमात्र युधिष्ठिर सो शरीर स्वर्ग में पहुंचे

mahabharat ke kuch samay baad parikshit ko raja banaya gaya aur pandav swarg ki aur chale gaye mahabharat ke kuch hi samay baad shri krishna bhi apne paramadham ko chale gaye isse dukhi hokar hi pandav aur draupadi himalaya ke raste swarg ki aur chal pade lekin durbhagya se yudhishthir ke alava koi bhi swasth sharir swarg nahi pohch saka sorry baki log barf mein girkar paramadham ko chale gaye ekmatra yudhishthir so sharir swarg mein pahuche

महाभारत के कुछ समय बाद परीक्षित को राजा बनाया गया और पांडव स्वर्ग की ओर चले गए महाभारत के

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Sumita Pal

Pharmacist

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महाभारत के बाद क्या हुआ महाभारत के बाद युद्ध पांडव युद्ध जीतने के बाद युधिष्ठिर का राजतिलक हस्तिनापुर में हुआ और कई वर्षों तक राज किया उसके बाद अब मुनियों के पुत्र राजा परीक्षित ने राज किया

mahabharat ke baad kya hua mahabharat ke baad yudh pandav yudh jitne ke baad yudhishthir ka rajtilak hastinapur mein hua aur kai varshon tak raj kiya uske baad ab muniyon ke putra raja parikshit ne raj kiya

महाभारत के बाद क्या हुआ महाभारत के बाद युद्ध पांडव युद्ध जीतने के बाद युधिष्ठिर का राजतिलक

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Sandeep Saini

Spiritual Guide | Journalist

10:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पनडु्बी हुए और दुनिया मारी गई उसकी इच्छा के कारण राजगद्दी देने से मना कर दिया कल कितने पाप के राज को मां प्रेशर पर नहीं उठाना चाहता कि आप एक साधारण धर्म कर दिया बैठ गया उस पर राज करने लगे उसको कुछ साल 2 साल के बाद बहुत बुरे बुरे बहुत बुरे सपने किसी की नाक कटी थी खुशी कभी नरक में कोई हाहाकार कर रहा है कई बहन के किस राक्षस ने हमारा सुहाग राजा बैठा से हमारा खून पी रहा है मेरे पति का खून पी रहा है द्रोपती पूछा महाराज क्या हो गया कोई हालत नहीं है सबको इकट्ठा कर लिया कहते इसका इलाज क्या है भगवान कृष्ण से पूछेंगे भगवान कृष्ण के पास जाते हैं भगवान कृष्ण कहता है कि तुमने जो महाभारत में पाठ किए हैं ना वह तुम्हें दुखदाई हो रहे हैं और इनका इलाज है कल सुबह में एक-एक करो जब तो साधारण करी थी इसमें तुम्हारे ऊपर कोई कर्म लागू नहीं रहेगा तेरे पाप कट जाएंगे शुरू होती है उसमें के पहचान रखी थी कि एक पंचजन्य शंख जिसमें 523 अंक के ऊंचे आसन पर सुंदर सुंदर स्थान पर रख दिया गया कि कोई पूर्ण संत इसमें बहुत सही अपने आप हो जाएगा उस समय ब्राह्मण थे या में बता दिया करते कि स्वर्ग लोक में की हुई आशा अज्ञ की होने वाला रोड ब्रह्मा विष्णु महेश गुप्त रूप में उसी को संपन्न करने के लिए आ जाते हैं अपने हम सबकी और एक ब्राह्मण का रूप बनाकर वह भी आगे उधर से कृष्ण भगवान सब ने खा लिया अब यह बात अटक सबका के 20 अंक क्यों नहीं बाजा ऐसा संत रहेगा जिसमें बंदी छोड़ कबीर साहिब का हंस अपनी उठाके कबीर कहां से आ गया तो आयोग में बंदी छोड़ कबीर साहेब सतयुग में सत सुकृत नाम से आए थे द्वापर में मुनेंद्र नाम से आए थे द्वापर में करुणा में नाम से आई थी अब कबीर नाम से कलयुग में वही परमात्मा त्रेता युग द्वापर युग में करुणा में नाम से आए थे उनका एक शिष्य भंगी जाति का क्या नीची जाति का समझो संत जाति नहीं मानते पर समाज के अनुसार उसका नाम था सुदर्शन कशिश हो गया था या नहीं करो ना मैं साहिब का तो उनके नाम के प्रभाव से सारनाम की कमाई से उसमें इतनी शक्ति आ गई थी दास जी महाराज के अंत कोडरमा हुए अनंत कोटि साहिब बंदगी जी खोजा जगदीश जी इन तीन लोक के परमात्मा से परम शक्ति का हो जाता है सतगुरु के नाम के जाप के प्रभाव से पूर्ण ब्रह्म के नाम के जाप के प्रभाव से तो बहुत करो श्री महाराज क्या मन में कोई पूर्ण संत नहीं है एक ओर रह गया जिसमें परम शक्ति है वह कौन रह गया एक सुदर्शन नाम का शुद्ध नाम संस्कार भीम बुला लिया गया था तो खेतों में बताऊंगा भगवान विष्णु सुदर्शन सुदर्शन को तो कहीं भी 15% गुरलाल बदल सकता है तो उसी को पार भी करेगा तो आ गया जब कृष्ण भगवान कृष्ण भगवान आज तो कहते हैं भगवान कहता है सुदर्शन कहता है कि महाराज मेरे को सफल बना राज होगा तो खुद भगवान कृष्ण कहते हैं कभी सामने यह बानी हर युग में लिखिए आज फिर लिखकर जारी से कहते हैं राजा और राजा पर नंगे पैर भगवान आपसे मिलने पर वह हमारे दरबार एक बार दर्शन तो अपनी रख लो क्योंकि एक कदम संत की तरह जब चलते हैं सत्संग संत से मिलने का समय कितना होता है दूर से आए हैं कितनी जगहों के मालिक बाकी हम दलितों को हम छोटी वालों को दे दो और आप अपने सरसों का भाव का कल का को खाना अर्जुन का बुखार थी उसके बारे में भी हमसे का के भी नेता उतार कर दिए मेरी माला पसीना पसीना भगवान ने जब हम आते हैं तो बड़े बड़े बड़े बड़े बड़े बड़े बड़े वाले संत ने देखकर अनुमान था तब जाकर बैठ जाती कौन है कल के भोजन खाते शंख बाजे गा दो प्रकार के लोक नहीं सकती है उस संत के चरण धोकर पिए द्रोपती द्रोपती नगीना चरणामृत हाथ जोड़कर समंदर का पानी तो उसी समय भगवान कृष्ण कहते हैं कोर्ट जग में आए 88 सारे द्वादश कोर्ट बिंदकी तारे

panadubi hue aur duniya mari gayi uski iccha ke karan rajagaddi dene se mana kar diya kal kitne paap ke raj ko maa pressure par nahi uthana chahta ki aap ek sadhaaran dharm kar diya baith gaya us par raj karne lage usko kuch saal 2 saal ke baad bahut bure bure bahut bure sapne kisi ki nak katee thi khushi kabhi narak me koi hahakar kar raha hai kai behen ke kis rakshas ne hamara suhaag raja baitha se hamara khoon p raha hai mere pati ka khoon p raha hai draupadi poocha maharaj kya ho gaya koi halat nahi hai sabko ikattha kar liya kehte iska ilaj kya hai bhagwan krishna se puchenge bhagwan krishna ke paas jaate hain bhagwan krishna kahata hai ki tumne jo mahabharat me path kiye hain na vaah tumhe dukhdai ho rahe hain aur inka ilaj hai kal subah me ek ek karo jab toh sadhaaran kari thi isme tumhare upar koi karm laagu nahi rahega tere paap cut jaenge shuru hoti hai usme ke pehchaan rakhi thi ki ek panchajanya shankh jisme 523 ank ke unche aasan par sundar sundar sthan par rakh diya gaya ki koi purn sant isme bahut sahi apne aap ho jaega us samay brahman the ya me bata diya karte ki swarg lok me ki hui asha agya ki hone vala road brahma vishnu mahesh gupt roop me usi ko sampann karne ke liye aa jaate hain apne hum sabki aur ek brahman ka roop banakar vaah bhi aage udhar se krishna bhagwan sab ne kha liya ab yah baat atak sabka ke 20 ank kyon nahi baaja aisa sant rahega jisme bandi chhod kabir sahib ka hans apni uthake kabir kaha se aa gaya toh aayog me bandi chhod kabir saheb satayug me sat sukrit naam se aaye the dwapar me munendra naam se aaye the dwapar me corona me naam se I thi ab kabir naam se kalyug me wahi paramatma treta yug dwapar yug me corona me naam se aaye the unka ek shishya bhangi jati ka kya nichi jati ka samjho sant jati nahi maante par samaj ke anusaar uska naam tha sudarshan kashish ho gaya tha ya nahi karo na main sahib ka toh unke naam ke prabhav se sarnam ki kamai se usme itni shakti aa gayi thi das ji maharaj ke ant kodarama hue anant koti sahib bandagi ji khoja jagdish ji in teen lok ke paramatma se param shakti ka ho jata hai satguru ke naam ke jaap ke prabhav se purn Brahma ke naam ke jaap ke prabhav se toh bahut karo shri maharaj kya man me koi purn sant nahi hai ek aur reh gaya jisme param shakti hai vaah kaun reh gaya ek sudarshan naam ka shudh naam sanskar bhim bula liya gaya tha toh kheton me bataunga bhagwan vishnu sudarshan sudarshan ko toh kahin bhi 15 gurlal badal sakta hai toh usi ko par bhi karega toh aa gaya jab krishna bhagwan krishna bhagwan aaj toh kehte hain bhagwan kahata hai sudarshan kahata hai ki maharaj mere ko safal bana raj hoga toh khud bhagwan krishna kehte hain kabhi saamne yah bani har yug me likhiye aaj phir likhkar jaari se kehte hain raja aur raja par nange pair bhagwan aapse milne par vaah hamare darbaar ek baar darshan toh apni rakh lo kyonki ek kadam sant ki tarah jab chalte hain satsang sant se milne ka samay kitna hota hai dur se aaye hain kitni jagaho ke malik baki hum dalito ko hum choti walon ko de do aur aap apne sarso ka bhav ka kal ka ko khana arjun ka bukhar thi uske bare me bhi humse ka ke bhi neta utar kar diye meri mala paseena paseena bhagwan ne jab hum aate hain toh bade bade bade bade bade bade bade waale sant ne dekhkar anumaan tha tab jaakar baith jaati kaun hai kal ke bhojan khate shankh baje jaayega do prakar ke lok nahi sakti hai us sant ke charan dhokar piye draupadi draupadi nagina charanamrit hath jodkar samundar ka paani toh usi samay bhagwan krishna kehte hain court jag me aaye 88 saare dwadash court bindki taare

पनडु्बी हुए और दुनिया मारी गई उसकी इच्छा के कारण राजगद्दी देने से मना कर दिया कल कितने पाप

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नमस्कार महाभारत का युद्ध 18 दिन तक चला यह एक धर्म युद्ध जिसमें धर्म की तो विजय होनी ही थी क्योंकि जहां भी भगवान होते हैं वहां धर्म होता है और धर्म की कभी हार नहीं हो सकती इसलिए धर्म था और धर्म की विजय हुई अंत में सिर्फ पांच पांडव बचे थे उसके अलावा कौरव और उनकी सेना ए सब खत्म हो गई थी तो उसके बाद पांडवों ने वहां हस्तिनापुर में राजकीय और छठा जो व्यक्ति जीवित था वह था अर्जुन की पुत्रवधू उत्तरा उत्तरा के गर्भ में बच्चा था यह कहानी आपको अपने सुनी होगी प्रथमा जो गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र था उसने ब्रह्मास्त्र छोड़ा था कि इनका आगे वंश नहीं चलना चाहिए और वह काया और अश्वथामा उनका उनका मित्र था तो उनसे मिला हुआ था तो वह उनका मानना था कि पांडवों को तो युद्ध में मारी देंगे हमको यह समझता ना कोई भी लड़ाई हो तो हमें जीतेंगे इसलिए पांडवों का मानना था कि हम ही जीतेंगे तो पांडवों को तो पहुंचाओ मारे देंगे अभी इनका अंश नहीं चलना चाहिए और अब इनका अंश कौन बचाता अभिमन्यु को भी उन सब कर लूंगा मार दिया था तो बचा कौन बचा वह बच्चा जो उतरा के पेट में था तो हमने सोचा कि लड़की हो लड़का हो कुछ भी हो कर के पेट में पता नहीं चलता ना बच्चा कौन है इसलिए लड़की को लड़का जो भी हो लेकिन का अंश नहीं चलना चाहिए तो उत्तरा के पेट में भी ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया था अश्वत्थामा ने जो अच्छी भगवान श्री कृष्ण ने अपना चक्र सूक्ष्म रूप में उत्तरा के पेट में अपना चक्कर चलाया सुदर्शन चक्र से ब्रह्मास्त्र के प्रभाव को नष्ट किया था और उनका जो बच्चा जन्म हुआ था उसका नाम होता परीक्षित और जब तक परीक्षित 12 साल का नहीं होगा तब तक पांडवों ने राजकीय वहां पर और फिर परीक्षित को राज्य संभाला सुला दिया और खुद ने तपस्या करने की क्या आपको पता है महाभारत जैसा विश्व में युद्ध हुआ था कितने लोगों की जान पांडवों ने ली थी तो आप किसी की हत्या करते हो तो हत्या का पाप तो लगता ही है इसलिए इस हत्या के पाप को ढूंढने के लिए उसने तपस्या करने के लिए वह निकल गए एक बात यह भी आती है कि जब युद्ध पूरा हो गया तब कृष्ण भगवान द्वारिका की तरफ जा रहे थे तो उन्होंने अर्जुन ने पूछा कि भगवान मैंने कितने सारे लोगों को मारा है क्या मुझे पाप नहीं लगेगा उन्होंने कहा बिल्कुल लगेगा और जुलेखा भगवान आप भी मजे लेते हो कैसी बात को तो जब युद्ध चल रहा था तब मैंने कहा मैं इनको नहीं मारूंगा मुझे इनको मार के राजा नहीं चाहिए तब तो आपने कहा था कि वह क्षत्रिय धर्म निभाओ अपना कर्तव्य पूरा करो जब यह लोग तुम्हें अगर तुम सामने से हथियार नहीं उठाओगे तो यह तुम्हें पक्का मार देंगे अपने बताओ मैं अब रक्षा करो अपने धरती की रक्षा करो और अधर्म का विनाश करो आप मुझे अच्छी शिक्षा दे रहे थे डाटा जैसा महान ग्रंथ सुना कर मेरे को मोटिवेट कर दिया आपने और अब आप यही बात है से बोल रहे हो मुझे देखो हर बात वक्त की होती है वक्त भी डिसीजन लेना होता है इस समय की मांग क्या कहती है वह होना चाहिए अब अब तुम्हें किसी चीज नहीं करना है कि जो लड़ाई थी वह खत्म हो गई तो अब तुम्हें तपस्या करनी है और अपने पापों का प्रायश्चित करना है और सब के सब की तपस्या करने लग निकल जाते हैं इसी श्रंखला में उनको वह पोस्ट धाम के तरफ चले जाते हैं और बाकी पीछे से परीक्षित राजा है वह हर राज्य करता है और हस्तिनापुर का राज्यवार संभालता है

namaskar mahabharat ka yudh 18 din tak chala yah ek dharm yudh jisme dharm ki toh vijay honi hi thi kyonki jaha bhi bhagwan hote hain wahan dharm hota hai aur dharm ki kabhi haar nahi ho sakti isliye dharm tha aur dharm ki vijay hui ant me sirf paanch pandav bache the uske alava kaurav aur unki sena a sab khatam ho gayi thi toh uske baad pandavon ne wahan hastinapur me rajkiya aur chhata jo vyakti jeevit tha vaah tha arjun ki putravadhu uttara uttara ke garbh me baccha tha yah kahani aapko apne suni hogi prathama jo guru dronacharya ka putra tha usne Brahmastr choda tha ki inka aage vansh nahi chalna chahiye aur vaah kaaya aur ashwathama unka unka mitra tha toh unse mila hua tha toh vaah unka manana tha ki pandavon ko toh yudh me mari denge hamko yah samajhata na koi bhi ladai ho toh hamein jitenge isliye pandavon ka manana tha ki hum hi jitenge toh pandavon ko toh pahunchao maare denge abhi inka ansh nahi chalna chahiye aur ab inka ansh kaun bachata abhimanyu ko bhi un sab kar lunga maar diya tha toh bacha kaun bacha vaah baccha jo utara ke pet me tha toh humne socha ki ladki ho ladka ho kuch bhi ho kar ke pet me pata nahi chalta na baccha kaun hai isliye ladki ko ladka jo bhi ho lekin ka ansh nahi chalna chahiye toh uttara ke pet me bhi Brahmastr chhod diya tha ashvatthaama ne jo achi bhagwan shri krishna ne apna chakra sukshm roop me uttara ke pet me apna chakkar chalaya sudarshan chakra se Brahmastr ke prabhav ko nasht kiya tha aur unka jo baccha janam hua tha uska naam hota parikshit aur jab tak parikshit 12 saal ka nahi hoga tab tak pandavon ne rajkiya wahan par aur phir parikshit ko rajya sambhala sula diya aur khud ne tapasya karne ki kya aapko pata hai mahabharat jaisa vishwa me yudh hua tha kitne logo ki jaan pandavon ne li thi toh aap kisi ki hatya karte ho toh hatya ka paap toh lagta hi hai isliye is hatya ke paap ko dhundhne ke liye usne tapasya karne ke liye vaah nikal gaye ek baat yah bhi aati hai ki jab yudh pura ho gaya tab krishna bhagwan dwarika ki taraf ja rahe the toh unhone arjun ne poocha ki bhagwan maine kitne saare logo ko mara hai kya mujhe paap nahi lagega unhone kaha bilkul lagega aur zulekha bhagwan aap bhi maje lete ho kaisi baat ko toh jab yudh chal raha tha tab maine kaha main inko nahi marunga mujhe inko maar ke raja nahi chahiye tab toh aapne kaha tha ki vaah kshatriya dharm nibhao apna kartavya pura karo jab yah log tumhe agar tum saamne se hathiyar nahi uthaoge toh yah tumhe pakka maar denge apne batao main ab raksha karo apne dharti ki raksha karo aur adharma ka vinash karo aap mujhe achi shiksha de rahe the data jaisa mahaan granth suna kar mere ko motivate kar diya aapne aur ab aap yahi baat hai se bol rahe ho mujhe dekho har baat waqt ki hoti hai waqt bhi decision lena hota hai is samay ki maang kya kehti hai vaah hona chahiye ab ab tumhe kisi cheez nahi karna hai ki jo ladai thi vaah khatam ho gayi toh ab tumhe tapasya karni hai aur apne paapon ka prayashchit karna hai aur sab ke sab ki tapasya karne lag nikal jaate hain isi shrinkhala me unko vaah post dhaam ke taraf chale jaate hain aur baki peeche se parikshit raja hai vaah har rajya karta hai aur hastinapur ka rajyavar sambhalata hai

नमस्कार महाभारत का युद्ध 18 दिन तक चला यह एक धर्म युद्ध जिसमें धर्म की तो विजय होनी ही थी

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Tejnath sahu

Social Worker

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

महाभारत के बाद जो समय था वह बहुत ही दुर्गति और कष्ट दाई था छोटे बच्चे अनाथ हो गए थे और दे विधवा हो गई थी बुजुर्ग माता-पिता की लाठी पकड़ने वाला कोई नहीं था एक प्रकार से कहा जाए बहुत ही कष्ट जुदाई जिंदगी महाभारत के बाद हुआ था

mahabharat ke baad jo samay tha vaah bahut hi durgati aur kasht dai tha chote bacche anath ho gaye the aur de vidva ho gayi thi bujurg mata pita ki lathi pakadane vala koi nahi tha ek prakar se kaha jaaye bahut hi kasht judai zindagi mahabharat ke baad hua tha

महाभारत के बाद जो समय था वह बहुत ही दुर्गति और कष्ट दाई था छोटे बच्चे अनाथ हो गए थे और दे

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