क्या महाभारत में द्रौपदी सभी पांच पांडवों के साथ सोई थी? यदि हां, तो हम यह कैसे कह सकते हैं कि वह अच्छे चरित्र की महिला थी?...


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Gayatri Shukla

Social Worker Director Of Smt Educational Society

0:41
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डॉगी की पांचों पांडवों से विवाह के पांचो पांडव उनके पति के साथ रहने में जीवन में उन्हें पुरुष तथा 23 पतियों के राजा दशरथ की तीन पत्नियां थी

doggy ki panchon pandavon se vivah ke paancho pandav unke pati ke saath rehne me jeevan me unhe purush tatha 23 patiyon ke raja dashrath ki teen patniya thi

डॉगी की पांचों पांडवों से विवाह के पांचो पांडव उनके पति के साथ रहने में जीवन में उन्हें पु

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देखो पांडव ज्योति पांच भाई थे लेकिन पांडवों में सबसे बड़े थे युधिष्ठिर को युधिष्ठिर के अलावा और किसी के जिंदगी अर्जुन की शादी हुई है भीम की शादी हुई नकुल सहदेव की शादी हुई क्रिस्टल की शादी नहीं पत्नी वह मेनी डिस्ट्रिक्ट कितनी लेकिन पांडवों की पत्नी कहलाती थी और पंच कन्याए सदैव पवित्र रहती हैं जैसे सीता हैं मंदोदरी हैं द्रोपति हैं अनसूया हैं और एक और मलाई 6752 है नारियां थी सूर सती सुलोचना के कोई पांच नारी है जो हैं यह पंच कन्याए बोली जाती है जो हमेशा सती रही हैं और सती कभी चरित्रहीन नहीं होती

dekho pandav jyoti paanch bhai the lekin pandavon me sabse bade the yudhishthir ko yudhishthir ke alava aur kisi ke zindagi arjun ki shaadi hui hai bhim ki shaadi hui nakul sahdev ki shaadi hui crystal ki shaadi nahi patni vaah many district kitni lekin pandavon ki patni kahalati thi aur punch kanyaye sadaiv pavitra rehti hain jaise sita hain mandodari hain dropati hain ANSUYA hain aur ek aur malai 6752 hai nariyan thi sur sati sulochna ke koi paanch nari hai jo hain yah punch kanyaye boli jaati hai jo hamesha sati rahi hain aur sati kabhi charitraheen nahi hoti

देखो पांडव ज्योति पांच भाई थे लेकिन पांडवों में सबसे बड़े थे युधिष्ठिर को युधिष्ठिर के अला

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Harish Purohit

Business Owner

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नमस्कार दोस्तों में हरीश प्रताप सभी का बहुत-बहुत स्वागत करता हूं मेरे किसी भाई या बहन ने पूछा है यह सवाल भाई कोई पूछ सकते बहने हमारी कभी ऐसे सवाल नहीं करती और बल बड़ी गलत तरीके से आपने पूछा है उत्तर यार आप तरीका आप अपना जगह चेंज करके पूछ सकते थे सर सवाल है क्या महाभारत में द्रौपदी सभी पांच पांडव के साथ सोई थी यदि हां तो हम यह कैसे कह सकते कि वह अच्छे चरित्र की महिला थी लेकिन मैं आपको यह बताना चाहता हूं पर्सनली उनको जिन्होंने यह सवाल पूछा है कि दुनिया में हम जो एक सांस भी ले रहे हैं यह जो भी हो रहे हमारे साथ हमारे पिछले किए गए कर्मों का फल है और अब जो है चलते हैं आपके सवाल की तरफ महाभारत में द्रौपदी सभी पांच पांडवों के साथ सोई थी आपका यह सवाल है आप इसको चेंज करके भी पूछ सकते थे सभ्यता से तरीके से पैर तो आपको यादों की द्रौपदी ने भगवान शंकर की तपस्या की थी तो उसने एक पांच गुणों वाला पांच गुणों वाला एक पति के रूप में एक जो है पुरुषों से चाहिए था कि भाई एक पति उसको ऐसा मिले 5 गुणों वाला पासवर्ड कैसे थे कि वह धर्मराज हो जैसा सच्चा धर्मराज बल में पराक्रम में ऐसा हो कि उसके जैसा पर बलशाली कोई ना धरती पर उसके जैसा भी धनुर्धर किया अमुक शक्तियों वाला पुरुष कोई ना हो उसके जैसा बुद्धिमान कोई ना हो धरती पर और उसके जैसा सुंदर दिखने वाला पुरुष भी कोई ना हो धरती पर इस सारे गुण उसमें हो तो भगवान शंकर जो है भोलेनाथ बड़े भोले थे उन्होंने तथास्तु कहा और यह वरदान दिया कि तुम्हें इन्हीं गुणों वाला ऐसे गुणों में जो पति की प्राप्ति होगी अब जो है चलते हैं आगे तो यह कहानी हमें एक्चुअली क्या सिखाती है कहानी में पता चलता है भगवान श्रीकृष्ण ने भी गीता में एक बार कहा था और महाभारत में भी कहानी में हम लोग स्टोरी आपने देखी हो तो यह सुनने हैं कि भगवान शिव को बार-बार अपने वरदान ओं के बदले जो है परेशानी भुगतनी पड़ती ही है तो बिना सोचे बिना समझे वरदान देते हैं क्योंकि भूले हैं बिना सोचे समझे वरदान दे ही देते हैं और उन्हें संभालने के लिए मुझे उनके परिजनों को संभालने के लिए उनको पूरा करने के लिए उनकी जो है तकलीफों को दूर करने के लिए उनसे हुई हानियों को ठीक करने के लिए मुझे आना पड़ता है अब द्रौपदी ने जब जन्म लिया नेट से नंबर द्रोपति जो है अग्निकुंड से पैदा हुई कुल में पैदा हुई तो अब उसके जो है वरदान का पूरे होने का समय होने का होना ही था तो स्वयंबर तो हुआ था वह तो अर्जुन ने जीता यह तो सभी जानते हैं अर्जुन ने जो है मछली की आंख में तीर मारा था तेल की कढ़ाई में देख के नीचे और ऊपर मछली घूम रही थी उसकी आंख में तीर मारा जो पति को जीत लिया स्वयंवर में लेकर गए दूसरा कारण यह था कि जब जो है वह घर पर पहुंचे भीम बाकी भाई तू पहले चले गए थे अगर बाकी भाई घर पर नहीं क्यों कुछ कामों में थे लेकिन बाकी भाई चले गए थे इधर उधर बाकी अर्जुन और भीम लाए द्रौपदी को घर पर तो उन्होंने अपनी मां से जो है मजाक करने की सूची उपहास करते हम जैसे ठट्ठा करते हैं अब तो सीमा हम कुछ लाए हैं एक चीज लाखो तो मां को लगा कुछ खाने की चीज है कुछ है तुम आने का पांचों भाई आपस में बांट दो दूसरी बात यह है कि इस बात पर ज्यादा तो ज्यादा जोर दे दिया जाता है कहते हैं कि जो वरदान प्राप्त किया था जवाब दिया था इस बार जान को स्वस्थ तो होना ही था अब यहां भगवान शिव ने वरदान दे दिया था कि मैं ऐसा होगा लेकिन किस रूप में पैदा होगा तो कुंती के मुंह से निकला हुआ था पांचों भाई उन्होंने बिना देखे बिना जाने क्या चीज है क्या नहीं तो उसे पुत्र को भी ऐसा नहीं करना चाहिए मजाक तो मुझे अब जो है भगवान कृष्ण वहां आए फिर उन्होंने जो है बताया कि यह तो जो पति का मंगाई वही है और मैंने जो बोला है वह उनकी बात उस वक्त ऐसा नहीं तो मां जो बोलती थी उनकी बात आजकल के बच्चे तो बड़ी नालायक है मां-बाप कुछ बोलते हैं करते हम कुछ अरे कभी तो बात मानते हैं लेकिन वह वक्त ऐसा था कि मां-बाप जो बोला वह करना ही है तो वह श्री राम को उनके पिता ने जब बोला कि वनवास जाना है तो उन्होंने यह नहीं पूछा कि क्यों जाओ उन्होंने कपड़े पहने बना सके और चलेंगे तो वह चीज होते थे कि मां-बाप की बात मानने वाले खैर अब जो है द्रौपदी ने जब जो है वरदान की बारी आई तो अब क्या होगा पति तो चाहिए लेकिन संसार में उस वक्त भी ऐसा कोई नहीं वह धर्मात्मा हो तो परम भंसाली फिर फिर उसमें परमवीर और अमुक शक्तियों का स्वामी सुंदर भी दिखे और बुद्धिमान भी ऐसे तो कोई इंसान हुआ नहीं आज तक और ना आगे होगा तो फिर उन्होंने युधिष्ठिर के रूप में जो यह मिला सच्चा और धर्म राय का जो है यूनिटी मिला अर्जुन के रूप में उन्हें परम जो है यह मिला योद्धा और अमुक शक्तियों का स्वामी भीम के रूप में उन्हें ऐसा बलशाली जिसकी भुजाओं में वह कहते हैं कि कई हजार हाथियों का बल था वह मिला नकुल और सहदेव में यह सुंदर नकुल को जैसा सुंदर उस वक्त दुनिया में कोई नहीं था और सहदेव जैसी बुद्धि किसी की नहीं थी तो यह पांचों भाइयों से फिर द्रोपदी का विवाह हुआ और भगवान कृष्ण ने इसे जायज करार दिया यानी कि सही ठहराना भगवान कृष्ण चयन नारायण का अवतार थे उन्होंने इसे जायज ठहराया सही ठहराया यह बात है तो द्रौपदी को को हम यह नहीं कह सकते कि भाई वह चरित्रहीन महिला थी बिल्कुल नहीं उस वक्त जब जो है भगवान शंकर का जो है यह था वरदान था तो उसका खुद का किया हुआ था खुद के कर्म के वरदानी ऐसा नहीं मांगना चाहिए था तो हमारे भी बहुत सारे कदम है आज के लिए तो कुछ भी नहीं है द्रौपदी का तो चलो कुछ भी नहीं है आजकल माहौल बाहर हमारा देख रहे देश का या विदेशों में जो हो रहा है तो वह तो इतना बुरा माहौल इतना बुरा बाहों में रावण का पुतला जलाते क्योंकि माता सीता का हरण किया था लेकिन हमारे जो है वैसी दरिंदे ऐसे हैं कि जो है हमारी मां हो बहनों के साथ में जो करते हैं उनका जो हासिल किया जाता है उनकी इज्जत के साथ खेला जाता है रावण ने कितना किया था उस मुकाबले लेकिन उसका पुतला जलाते पुतला तो इनका चलना चाहिए जो ऐसी बैलेंस चाहिए और दरिंदगी करते हैं समाज में

namaskar doston me harish pratap sabhi ka bahut bahut swaagat karta hoon mere kisi bhai ya behen ne poocha hai yah sawaal bhai koi puch sakte behne hamari kabhi aise sawaal nahi karti aur bal badi galat tarike se aapne poocha hai uttar yaar aap tarika aap apna jagah change karke puch sakte the sir sawaal hai kya mahabharat me draupadi sabhi paanch pandav ke saath soi thi yadi haan toh hum yah kaise keh sakte ki vaah acche charitra ki mahila thi lekin main aapko yah batana chahta hoon personally unko jinhone yah sawaal poocha hai ki duniya me hum jo ek saans bhi le rahe hain yah jo bhi ho rahe hamare saath hamare pichle kiye gaye karmon ka fal hai aur ab jo hai chalte hain aapke sawaal ki taraf mahabharat me draupadi sabhi paanch pandavon ke saath soi thi aapka yah sawaal hai aap isko change karke bhi puch sakte the sabhyata se tarike se pair toh aapko yaadon ki draupadi ne bhagwan shankar ki tapasya ki thi toh usne ek paanch gunon vala paanch gunon vala ek pati ke roop me ek jo hai 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नमस्कार दोस्तों में हरीश प्रताप सभी का बहुत-बहुत स्वागत करता हूं मेरे किसी भाई या बहन ने प

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Ashok Bajpai

Rtd. Additional Collector P.C.S. Adhikari

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राम जी की दिव्य प्रश्न है क्या महाभारत में द्रौपदी सभी पांच पांडवों के साथ हुई थी यदि हां तो हमें कैसे कह सकते हैं वह चित्र आपका यह प्रश्न का उत्तर यह है कि देखिए ना उसमें आपके नाम में था जो इस बात के साक्ष्य को प्रस्तुत करें कि दो कि पांच पांडव शासन किया नहीं लेकिन यह मानना है कि जब अर्जुन ने द्रौपदी को स्वयंवर में जीता था तब वह अपनी पत्नी को लेकर अपनी मां के पास आए मौसम एहसान कर रही मां ने कहा अर्जुन ने कहा मैं तुम्हारे को क्या मानेगा 522 आपस में बात समय वापर में माता-पिता की आज्ञा सबसे ज्यादा मन किया इसलिए कुंती का विवाह माता कुंती के आदेश से सभी के साथ हुआ और उसने भूपति भूपति और बहू पत्नी का पालन होता था परंपरा थी कि एक स्त्री पति रख सकती थी और एक पति अपनी पत्नी आरक्षण माता के आदेश से पांचों पांडवों के साथ द्रौपदी की शादी हुई थी अब वह सब के साथ सोई नहीं सोई थी यह तो मैं देखने नहीं गया था ना मैं थाना आपसे लेकिन यह पांचों पांडवों के साथ इनकी हुआ हुआ था और यह पांचों पांडवों की पत्नी कहलाती थी लेकिन आपका इस ओर भी ध्यान आकर्षित करूंगा कि द्रौपदी की गिनती पांचवा सत्यम होती है सती अनुसुइया सती सुलोचना सती मंदोदरी सती द्रौपदी इस प्रकार इकोनामी ध्यान नहीं आ रहा है इस प्रकार पांच महा शक्तियों में धोबी की गिनती होती है तो स्पष्ट है कि द्रौपदी जी की माता कुंती के आदेश से जो पांच पांडवों का जुआ हुआ था उसमें स्कोर धार्मिक मान्यता मिली थी लोगों ने स्वीकार किया था इसीलिए उनकी पांच महा शक्तियों में उपासना शक्तियों में से एक मासूम

ram ji ki divya prashna hai kya mahabharat me draupadi sabhi paanch pandavon ke saath hui thi yadi haan toh hamein kaise keh sakte hain vaah chitra aapka yah prashna ka uttar yah hai ki dekhiye na usme aapke naam me tha jo is baat ke sakshya ko prastut kare ki do ki paanch pandav shasan kiya nahi lekin yah manana hai ki jab arjun ne draupadi ko sawamber me jita tha tab vaah apni patni ko lekar apni maa ke paas aaye mausam ehsaan kar rahi maa ne kaha arjun ne kaha main tumhare ko kya manega 522 aapas me baat samay vapar me mata pita ki aagya sabse zyada man kiya isliye kuntee ka vivah mata kuntee ke aadesh se sabhi ke saath hua aur usne bhoopati bhoopati aur bahu patni ka palan hota tha parampara thi ki ek stree pati rakh sakti thi aur ek pati apni patni aarakshan mata ke aadesh se panchon pandavon ke saath draupadi ki shaadi hui thi ab vaah sab ke saath soi nahi soi thi yah toh main dekhne nahi gaya tha na main thana aapse lekin yah panchon pandavon ke saath inki hua hua tha aur yah panchon pandavon ki patni kahalati thi lekin aapka is aur bhi dhyan aakarshit karunga ki draupadi ki ginti panchava satyam hoti hai sati anusuiya sati sulochna sati mandodari sati draupadi is prakar economy dhyan nahi aa raha hai is prakar paanch maha shaktiyon me dhobi ki ginti hoti hai toh spasht hai ki draupadi ji ki mata kuntee ke aadesh se jo paanch pandavon ka jua hua tha usme score dharmik manyata mili thi logo ne sweekar kiya tha isliye unki paanch maha shaktiyon me upasana shaktiyon me se ek masoom

राम जी की दिव्य प्रश्न है क्या महाभारत में द्रौपदी सभी पांच पांडवों के साथ हुई थी यदि हां

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Loan Guru

Financial Expert

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आपका जो सवाल है बहुत ही डिफरेंट सवाल का जवाब का जवाब देना काम नहीं होती और कहां की थी उनको यह वरदान भी था साथ में साधक पतन हो द्रोपदी एक बहुत ही साध्वी स्थिति काफी तपस्या की थी जब उन्हें वरदान मांगा था कि मुझे यह सब चाहिए मेरे पति से शक्तिशाली होते सुंदर औरत बलवाना बहुत कुछ होता नहीं हूं तो पर्वतमाला में होते नहीं है तब यह पांडवों में 5 गुण मिल रहे थे तब उनकी शादी में कर दी गई थी अब रही बात संबंध के बारे में उनके अंदर द्रौपदी के अंदर जो दिन था उस दिन हो कुंवारी कन्या की तरह बन जाती थी आप माने पत्रकार से आज अर्जुन के साथ हैं तो नया रूप है इनके साथ अलग रूप है और अगर वह किसी और के साथ है तो अलग रूप है उनके रूप भी चले जाते थे उनके टी पावर सकती थी उनके तीन भी उनको क्लियर अनुभव से भगवान इनकी मदद की थी आप हो सकते हैं वो कितनी भाव चल रही होंगी उनका धर्म का ज्ञान उन का अपाचे कितने रही होगी तो उनके प्रति उठाना यह हमारी उठाएं कम नहीं है हमारे अज्ञानता बोल सकते हैं ऐसी लेकिन उनकी तपन की साधना उनके सुख तो आप ऐसे सवाल पूछे तो और भी अच्छा रहेगा जाता है तो मिल चुका होगा क्योंकि रूप धारण करती थी और जब कुंवारी करने बन जाती थी जब किसी समझाती थी इस प्रकार से आपकी अगर जो भी घर में आज है वह किस दिन में किसी और की बीवी रही होंगी वापसी है कल किधर भी हो सकते हैं आशा करता हूं मित्रों करना है वापस को धन्यवाद

aapka jo sawaal hai bahut hi different sawaal ka jawab ka jawab dena kaam nahi hoti aur kaha ki thi unko yah vardaan bhi tha saath me sadhak patan ho draupadi ek bahut hi sadhvi sthiti kaafi tapasya ki thi jab unhe vardaan manga tha ki mujhe yah sab chahiye mere pati se shaktishali hote sundar aurat balvana bahut kuch hota nahi hoon toh parvatamala me hote nahi hai tab yah pandavon me 5 gun mil rahe the tab unki shaadi me kar di gayi thi ab rahi baat sambandh ke bare me unke andar draupadi ke andar jo din tha us din ho kuwaari kanya ki tarah ban jaati thi aap maane patrakar se aaj arjun ke saath hain toh naya roop hai inke saath alag roop hai aur agar vaah kisi aur ke saath hai toh alag roop hai unke roop bhi chale jaate the unke T power sakti thi unke teen bhi unko clear anubhav se bhagwan inki madad ki thi aap ho sakte hain vo kitni bhav chal rahi hongi unka dharm ka gyaan un ka apache kitne rahi hogi toh unke prati uthana yah hamari uthaye kam nahi hai hamare agyanata bol sakte hain aisi lekin unki tapan ki sadhna unke sukh toh aap aise sawaal pooche toh aur bhi accha rahega jata hai toh mil chuka hoga kyonki roop dharan karti thi aur jab kuwaari karne ban jaati thi jab kisi samjhati thi is prakar se aapki agar jo bhi ghar me aaj hai vaah kis din me kisi aur ki biwi rahi hongi wapsi hai kal kidhar bhi ho sakte hain asha karta hoon mitron karna hai wapas ko dhanyavad

आपका जो सवाल है बहुत ही डिफरेंट सवाल का जवाब का जवाब देना काम नहीं होती और कहां की थी उनको

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Rajkumar

Astrologer

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BK Vishal

Rajyoga Trainer

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यह बड़ी विचित्र सी कहानी और कहानी जिस तरह से दिखाई गई है उसे स्पष्ट होता है कि यह कोई यथार्थ के धरातल पर हुई कहानी नहीं है लेकिन किसी रचनाकार के मांस की अपनी रचनाएं कुछ चीजों को समझा और समझाने की दृष्टि से एक ऐसा नाटक रूपांतरण किया ताकि लोग उसको समझ सके जहां तक द्रौपदी का प्रशन है वह किसी स्त्री की बात नहीं है द्रोपदी एक आत्मा है मनुष्य शरीर में मनुष्य शरीर में सभी आत्माओं आत्माओं का प्रतीकात्मक नाम उसकी मानस की एक तमन्ना एक इच्छा है उस आत्मा की पंच भूतों के साथ मिलन की बात है विकारी महात्मा इनके पास में आ जाती और उसकी पसंद की बन जाती है उसको समझाने के लिए चित्रण किया गया है तो कोई वास्तविक धरातल पर ऐसा कभी नहीं हुआ कि 55 पुरुषों के साथ पुलिस विभाग करें और 1 दिन किसके साथ सो 1 दिन किसके साथ ऐसा नहीं होता ऐसा नहीं है आज भी नहीं है तो प्राचीन काल में क्या हुआ इसको केवल प्रतीकात्मक रूप से समझ कर के

yah badi vichitra si kahani aur kahani jis tarah se dikhai gayi hai use spasht hota hai ki yah koi yatharth ke dharatal par hui kahani nahi hai lekin kisi rachnakar ke maas ki apni rachnaye kuch chijon ko samjha aur samjhane ki drishti se ek aisa natak rupantaran kiya taki log usko samajh sake jaha tak draupadi ka prashn hai vaah kisi stree ki baat nahi hai draupadi ek aatma hai manushya sharir me manushya sharir me sabhi atmaon atmaon ka pratikatmak naam uski manas ki ek tamanna ek iccha hai us aatma ki punch bhooton ke saath milan ki baat hai vikari mahatma inke paas me aa jaati aur uski pasand ki ban jaati hai usko samjhane ke liye chitran kiya gaya hai toh koi vastavik dharatal par aisa kabhi nahi hua ki 55 purushon ke saath police vibhag kare aur 1 din kiske saath so 1 din kiske saath aisa nahi hota aisa nahi hai aaj bhi nahi hai toh prachin kaal me kya hua isko keval pratikatmak roop se samajh kar ke

यह बड़ी विचित्र सी कहानी और कहानी जिस तरह से दिखाई गई है उसे स्पष्ट होता है कि यह कोई यथार

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MUKESH KUMAR

network and markiting

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Narendra Dwivedi

Purchase Manager

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Hem Upreti

Motivational Speaker

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देखिए द्रोपदी पांचों भाइयों क्या सोई थी नहीं सोई थी यह मैटर नहीं करता ना उस टाइम पर आप थे ना उस टाइम पर हमसे और दूसरी बात कोई पत्नी या कोई औरत उसका पति है तो उसका धर्म है उसके साथ सोना अब से साथ होना जरूरी नहीं है कि आप गलत भी मिलो है ना बाकी क्या है सबको पता होता है चीजें हुई थी तो उसको अच्छे चरित्र गुर्जर द्रोपदी कोई चरित्रहीन नारी थोड़ी ना थी उसको भगवान शंकर का वरदान था इसलिए उसको उसको ऐसा पति चाहिए था जिसके अंदर 5 * 5 उन्होंने एक व्यक्ति में नहीं हो सकते थे इसलिए पांच भाई पांडव से उसका विवाह हुआ उसका विवाह नहीं हुआ था पांच पांडव की माता के कहने पर उन्होंने पांच भाइयों ने शादी करी थी उससे महादेव का वरदान कैसे इसीलिए पांचों भाइयों खूबसूरत भी थे धर्मराज भी थे धनुर्धर भी थे महाबली भी थे सहनशील होते युधिष्ठिर हो गए धर्मराज भीम जैसा कोई नहीं था अर्जुन जैसा धनुर्धर को ही था उस टाइम पर नकुल जैसा सुंदर कोई नहीं था सहदेव जैसा सहनशील कोई नहीं था इसलिए 5 गुण एक व्यक्ति में नहीं हो सकते इसीलिए द्रोपदी के पांच पति हुए और रही बात चरित्रहीन और चरित्रवान महिला कि अगर वह चरित्रहीन महिला होती तो शायद दुर्योधन के साथ महाभारत नहीं होती तो पवित्र पवित्र स्थिति हमारे लिए पूजनीय श्री रही है उसे उसके चरित्र पर कोई भी अंगुली नहीं उठानी चाहिए कोई भी लांछन नहीं है

dekhiye draupadi panchon bhaiyo kya soi thi nahi soi thi yah matter nahi karta na us time par aap the na us time par humse aur dusri baat koi patni ya koi aurat uska pati hai toh uska dharm hai uske saath sona ab se saath hona zaroori nahi hai ki aap galat bhi milo hai na baki kya hai sabko pata hota hai cheezen hui thi toh usko acche charitra gurjar draupadi koi charitraheen nari thodi na thi usko bhagwan shankar ka vardaan tha isliye usko usko aisa pati chahiye tha jiske andar 5 5 unhone ek vyakti me nahi ho sakte the isliye paanch bhai pandav se uska vivah hua uska vivah nahi hua tha paanch pandav ki mata ke kehne par unhone paanch bhaiyo ne shaadi kari thi usse mahadev ka vardaan kaise isliye panchon bhaiyo khoobsurat bhi the Dharamraj bhi the dhanurdhar bhi the mahabali bhi the sahanashil hote yudhishthir ho gaye Dharamraj bhim jaisa koi nahi tha arjun jaisa dhanurdhar ko hi tha us time par nakul jaisa sundar koi nahi tha sahdev jaisa sahanashil koi nahi tha isliye 5 gun ek vyakti me nahi ho sakte isliye draupadi ke paanch pati hue aur rahi baat charitraheen aur charitravan mahila ki agar vaah charitraheen mahila hoti toh shayad duryodhan ke saath mahabharat nahi hoti toh pavitra pavitra sthiti hamare liye pujaniya shri rahi hai use uske charitra par koi bhi anguli nahi uthani chahiye koi bhi lanchan nahi hai

देखिए द्रोपदी पांचों भाइयों क्या सोई थी नहीं सोई थी यह मैटर नहीं करता ना उस टाइम पर आप थे

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Ajay Kumar

Engineer

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द्रौपदी महाभारत के अनुसार द्रोपदी पांच पांडवों के साथ सभी को प्राप्त हुआ था महिला महिला नहीं की क्योंकि द्रौपदी को वरदान मिला था और अभिशाप भी था अभिशाप था कि माता कुंती को बोल दिया था जब अंतिम शादी करके लाए थे द्रोपदी को बोला था हम आपके लिए कुछ लेकर आए हो अपने पांचों भाई आपस में बराबर बराबर बांट लो पर जब उन्होंने देखा कि द्रौपदी है तो उन्होंने अपनी बात को मना किया पर उस समय के लोग ऐसे हुआ करते थे एक ही मुंह से निकली बात को पत्थर की लकीर मान लिया करते थे अतः अर्जुन और उसके पांचों भाइयों ने आज्ञा मां की आज्ञा का पालन करते हुए द्रौपदी को आपस में बांट लिया था द्रोपदी के साथ उनको भगवान शिव का वरदान था कि जब भी वह अपने कभी भी पहले तक एक पति के पास से दूसरे के पास जाएंगे तो उनका दो नारी तो है वह समाप्त नहीं होगा उनका नारी तो वापस आ जाएगा जिसको हम वर्जिनिटी भी कहते हैं आपको जवाब अच्छा लगा हो तो प्लीज लाइक कीजिएगा

draupadi mahabharat ke anusaar draupadi paanch pandavon ke saath sabhi ko prapt hua tha mahila mahila nahi ki kyonki draupadi ko vardaan mila tha aur abhishap bhi tha abhishap tha ki mata kuntee ko bol diya tha jab antim shaadi karke laye the draupadi ko bola tha hum aapke liye kuch lekar aaye ho apne panchon bhai aapas me barabar barabar baant lo par jab unhone dekha ki draupadi hai toh unhone apni baat ko mana kiya par us samay ke log aise hua karte the ek hi mooh se nikli baat ko patthar ki lakir maan liya karte the atah arjun aur uske panchon bhaiyo ne aagya maa ki aagya ka palan karte hue draupadi ko aapas me baant liya tha draupadi ke saath unko bhagwan shiv ka vardaan tha ki jab bhi vaah apne kabhi bhi pehle tak ek pati ke paas se dusre ke paas jaenge toh unka do nari toh hai vaah samapt nahi hoga unka nari toh wapas aa jaega jisko hum virginity bhi kehte hain aapko jawab accha laga ho toh please like kijiega

द्रौपदी महाभारत के अनुसार द्रोपदी पांच पांडवों के साथ सभी को प्राप्त हुआ था महिला महिला नह

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जैसे एक गाय वह कितने सालों से नए दूध को बनाने में सफल होती है मगर फिर भी हम गाय को माता और 33 करोड़ देवी देवताओं का समुदाय स्वरूप मानते हैं ठीक इसी तरह देवी द्रोपती थी जिसमें जिसमें सद्गुण हूं जो जगत के लिए कल्याण कार्य को हो और जिसने धर्म की प्रतिष्ठा की गई हो तो उसे हम चरित्रहीन कैसे कह सकते हैं

jaise ek gaay vaah kitne salon se naye doodh ko banane me safal hoti hai magar phir bhi hum gaay ko mata aur 33 crore devi devatao ka samuday swaroop maante hain theek isi tarah devi draupadi thi jisme jisme sadgun hoon jo jagat ke liye kalyan karya ko ho aur jisne dharm ki prathishtha ki gayi ho toh use hum charitraheen kaise keh sakte hain

जैसे एक गाय वह कितने सालों से नए दूध को बनाने में सफल होती है मगर फिर भी हम गाय को माता और

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यह आपका गलत प्रश्न है पांडवों के साथ पांच भाइयों के साथ द्रोपति नहीं सोई थी वह तो पांचाली के लिए बनी की जब शादी करके युधिष्ठिर द्रोपदी को लेकर पांडव घर में आए तब उनकी माताएं स्नान कर रही थी और उन्होंने माता सीता की माता देखो हम आपके लिए कुछ लेकर आए हैं तब माता ने अंदर से कहा कि तुम जो भी लाए हो वह पांचों भाई आपस में बांट लो क्योंकि माता की आज्ञा दी और समय माता पिता की आज्ञा ही सर्वत्र अतिथि पांचाली को पांचो भाइयों ने पत्नी रूप में स्वीकार किया लेकिन धर्म के इस प्रकार से आपको मजाक उड़ाने का कोई हक नहीं है कि पांचाली पांचों पांडवों के साथ सोई थी और उसका चरित्र अच्छा नहीं था यह सब चीजें देने का आपको कोई अधिकार नहीं है और अगर आप धर्म को नहीं जानते हैं तो धर्म के बारे में शास्त्रों के बारे में इस प्रकार की भर्ती की बातें नहीं करें तो ही अच्छा होगा

yah aapka galat prashna hai pandavon ke saath paanch bhaiyo ke saath dropati nahi soi thi vaah toh panchali ke liye bani ki jab shadi karke yudhishthir draupadi ko lekar pandav ghar mein aaye tab unki matayein snan kar rahi thi aur unhone mata sita ki mata dekho hum aapke liye kuch lekar aaye hain tab mata ne andar se kaha ki tum jo bhi laye ho vaah panchon bhai aapas mein baant lo kyonki mata ki aagya di aur samay mata pita ki aagya hi sarvatra atithi panchali ko paancho bhaiyo ne patni roop mein sweekar kiya lekin dharm ke is prakar se aapko mazak udane ka koi haq nahi hai ki panchali panchon pandavon ke saath soi thi aur uska charitra accha nahi tha yah sab cheezen dene ka aapko koi adhikaar nahi hai aur agar aap dharm ko nahi jante hain toh dharm ke bare mein shastron ke bare mein is prakar ki bharti ki batein nahi kare toh hi accha hoga

यह आपका गलत प्रश्न है पांडवों के साथ पांच भाइयों के साथ द्रोपति नहीं सोई थी वह तो पांचाली

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

3:14
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क्या महाभारत में द्रौपदी सभी पांच पांडव के साथ सोई थी यदि हां तो हम यह पैसे को सच्चे चरित्र की आपने जो महाभारत का कोई पसंद शायद कम किया होगा उसमें यह एक संभवतः झोपड़ी का समय हुआ था तब अर्जुन ने बड़े-बड़े बनावानी आए स्वयंवर में अर्जुन ने जो आंख मछली की थी घूमती हुई ऊपर मछली की आंख में तीर मारा था घूमती हुई मछली में आंख को भेजा था और इस तरह से रोकने का विवाह अर्जुन के साथ हुआ था इसलिए अर्जुन की पत्नी बनेगी और जब पांचों भाई अपने घर गए तो उनकी माता कुंती पांचो पांडव की माता कुंती के अंदर थी और जब उन्होंने दरवाजा खटखटाया तो उनकी माता से अर्जुन का वार्तालाप वर्षा और अर्जुन ने बताया कि मैं देखी क्या आपके लिए लाया हूं देखिए ऐसा थोड़ा बात किया तुम माता कुंती ने अंदर से ही बोला कि बेटा जो भी अपने पांचों भाइयों में बांट लेना स्पर्श जीजू ब्रोकली ज्योति वह पांचों भाइयों में बट गई वैसे जो जो अपनी जी की अर्जुन की पत्नी थी लेकिन माता कुंती के आदेश के अनुसार वह पांचों पांडवों की पत्नी कहलाए इसलिए यह कहना कि ऐसा उचित है या नहीं उस समय आपको ज्ञात होगा की बहु पत्नी और बहु पति तत्व की प्रथा अमन मिट्टी महाभारत काल में बहु पतित व और भूपति की कथा कमल मिर्ची वहां के राजे महाराजे बहू पत्नी तो रखते थे और एक पत्नी ज्यादा पति ही विवाह कर सकती धन्यवाद

kya mahabharat mein draupadi sabhi paanch pandav ke saath soi thi yadi haan toh hum yah paise ko sacche charitra ki aapne jo mahabharat ka koi pasand shayad kam kiya hoga usme yah ek sanbhavatah jhopdi ka samay hua tha tab arjun ne bade bade banavani aaye sawamber mein arjun ne jo aankh machli ki thi ghoomti hui upar machli ki aankh mein teer mara tha ghoomti hui machli mein aankh ko bheja tha aur is tarah se rokne ka vivah arjun ke saath hua tha isliye arjun ki patni banegi aur jab panchon bhai apne ghar gaye toh unki mata kuntee paancho pandav ki mata kuntee ke andar thi aur jab unhone darwaja khatakhataya toh unki mata se arjun ka vartalaap varsha aur arjun ne bataya ki main dekhi kya aapke liye laya hoon dekhiye aisa thoda baat kiya tum mata kuntee ne andar se hi bola ki beta jo bhi apne panchon bhaiyo mein baant lena sparsh jiju broccoli jyoti vaah panchon bhaiyo mein but gayi waise jo jo apni ji ki arjun ki patni thi lekin mata kuntee ke aadesh ke anusaar vaah panchon pandavon ki patni kahalae isliye yah kehna ki aisa uchit hai ya nahi us samay aapko gyaat hoga ki bahu patni aur bahu pati tatva ki pratha aman mitti mahabharat kaal mein bahu patit va aur bhoopati ki katha kamal mirchi wahan ke raje maharaje bahu patni toh rakhte the aur ek patni zyada pati hi vivah kar sakti dhanyavad

क्या महाभारत में द्रौपदी सभी पांच पांडव के साथ सोई थी यदि हां तो हम यह पैसे को सच्चे चरित्

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

5:12
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नंबर एक बात यह है कि वे लोग इतने वासना में लिप्त नहीं से पृथ्वी की किस साल के लड़के लड़कियां हैं तो आपको यह सब जो भी सोचा है आपने फिर भी इसके पश्चात में बता रहा हूं आपको तो द्रोपती को पंच कन्याओं में गिना जाता है द्रौपदी है सब्जियों में इनके अकाउंट नाम अकाउंट है मंदोदरी है ना उसकी पत्नी किसकी मेघनाथ की पत्नी यह सब सब्जियों में पंच कन्याओं में अकाउंट की जाती हैं द्रौपदी का चरित्र अपने आप में बेमिसाल है बहुत त्याग पूर्ण है सीखने लायक है वह अच्छी चल चुकी महिला तो अच्छी चल कि मैं ना नहीं होती तो इतना बुरा महाभारत युद्ध नहीं होता लड़कियों की तरह गिरी हुई होती जबकि शादीशुदा होते हुए भी पद्दल कॉलेज फ्रेंडों के साथ जब तक तक भ्रमण करती करती हैं कि आज के लड़कों की तरह उनके चरित्र गिरोह होते तो तुम सोच पांडवों के नाम कौन क्या ना होता विरोधी कुछ ऐसे बहुत से ली जा सकती हैं द्रोपती का पश्चिमी महिला थी श्रीकृष्ण की जो सखी सहेली रूप में तीन रूप में पीओपी को अच्छे चरित्र की महिला नहीं कहेंगे तो किसको कहेंगे आप इसलिए मेरे मित्र आप ऐसा ना सोचे पांचो पांडव पांडवों के साथ तो उसने उसकी मां ने कह दिया था लेकिन पति ईमानदारी से उसका अर्जुनी था और उसका फंक्शन भी अर्जुन से ही था यही कारण था कि जब पांचो पांडव लास्ट में यह जीत गए उसके बाद राज्य स्थापित हो गया परीक्षण को राय दे दिया कि पांचो पांडव और द्रौपदी हिमालय में तपस्या करने के लिए निकल गए तो रास्ते में निकलते गए तो सबसे आगे चल रहा था एक कुत्ता उसके पीछे था युधिस्टर और उसके पीछे साहब पीछे द्रोपती थी और उसके बाद शायद उसको भीम अर्जुन नकुल और सहदेव किस प्रकार से यह कौन से जा रहे थे रास्ते में सबसे पहले नकुल और सहदेव गले बर्तन धोती ने कहा कि स्वामी रुको नकुल सहदेव बस निकलती जा रहे हैं बस रहे हैं तो उनका तुम चलो द्रोपती आगे की हो और उसके बाद अर्जुन का नंबर आया अर्जुन ने फिर कहा कि वह गांधी भरी अर्जुन तुम्हारा प्रिय अनुज बिट्टू को प्राप्त हो रहा है आप रुको और लेकिन नहीं रुके उन्होंने वहां के द्रोपती मैं जानता हूं कि तुम्हारा अर्जुन के साथ था फिर भीम गला फिर द्रोपती गली और लास्ट में कुत्ता और युधिस्टर रहेंगे तब स्वर्ग से इमाम उत्तर के आया और युद्ध से बोले वह आइए राजा में आप बैठी हो चली चली मैं अकेला नहीं जा सकता हूं क्योंकि कुत्ता जो है मेरे साथ वहां से चल कर के आया है उसने उसने मेरे साथ मुक्त बंद करके यात्रा की है इसलिए मैं कुत्ते के सर को नहीं जाऊंगा इंद्र ने कहा कि कुत्ते कैसे जा सकते हैं आप नहीं जा सकते कुत्ते के नहीं जाना चाहता ब्लास्ट में हुआ हिंदू को वर्कर एक कुत्ते को भी ले जाना पड़ा इसके लिए उनके चल बे मिसाल है हमें ऐसा नहीं सोचना चाहिए द्रोपती महिला थी उसकी पंचम अकाउंट की जाती है यह बात अलग है कि आम जन की पंक्तियों में लोग अशिक्षा के कारण जो बचत महिला होती है जिस पर पांच पांच अच्छे अच्छे लोगों से संबंध होते हैं उसको हम लोग प्रतिज्ञा देते हैं यह हमारी अशिक्षा है वहां की द्रोपती एक महान महिला थी श्रीकृष्ण ने उसे पुलिस चौकी रूप में याद किया है याद किया है मैं एक बात और बता दूं विशेषता आपको द्रोपती का एक नाम कृष्णा है कृष्णा क्योंकि कुछ ने उसे अपनी टाइम रूप में सखी रूप से स्वीकार किया था

number ek baat yah hai ki ve log itne vasana mein lipt nahi se prithvi ki kis saal ke ladke ladkiyan hai toh aapko yah sab jo bhi socha hai aapne phir bhi iske pashchat mein bata raha hoon aapko toh draupadi ko punch kanyaon mein gina jata hai draupadi hai sabjiyon mein inke account naam account hai mandodari hai na uski patni kiski meghnath ki patni yah sab sabjiyon mein punch kanyaon mein account ki jaati hai draupadi ka charitra apne aap mein BEMISAL hai bahut tyag purn hai sikhne layak hai vaah achi chal chuki mahila toh achi chal ki main na nahi hoti toh itna bura mahabharat yudh nahi hota ladkiyon ki tarah giri hui hoti jabki shaadishuda hote hue bhi paddal college frendon ke saath jab tak tak bhraman karti karti hai ki aaj ke ladko ki tarah unke charitra giroh hote toh tum soch pandavon ke naam kaun kya na hota virodhi kuch aise bahut se li ja sakti hai draupadi ka pashchimi mahila thi shrikrishna ki jo sakhi saheli roop mein teen roop mein POP ko acche charitra ki mahila nahi kahenge toh kisko kahenge aap isliye mere mitra aap aisa na soche paancho pandav pandavon ke saath toh usne uski maa ne keh diya tha lekin pati imaandaari se uska arjuni tha aur uska function bhi arjun se hi tha yahi karan tha ki jab paancho pandav last mein yah jeet gaye uske baad rajya sthapit ho gaya parikshan ko rai de diya ki paancho pandav aur draupadi himalaya mein tapasya karne ke liye nikal gaye toh raste mein nikalte gaye toh sabse aage chal raha tha ek kutta uske peeche tha yudhistar aur uske peeche saheb peeche draupadi thi aur uske baad shayad usko bhim arjun nakul aur sahdev kis prakar se yah kaunsi ja rahe the raste mein sabse pehle nakul aur sahdev gale bartan dhoti ne kaha ki swami ruko nakul sahdev bus nikalti ja rahe hai bus rahe hai toh unka tum chalo draupadi aage ki ho aur uske baad arjun ka number aaya arjun ne phir kaha ki vaah gandhi bhari arjun tumhara priya anuj bittu ko prapt ho raha hai aap ruko aur lekin nahi ruke unhone wahan ke draupadi main jaanta hoon ki tumhara arjun ke saath tha phir bhim gala phir draupadi gali aur last mein kutta aur yudhistar rahenge tab swarg se imam uttar ke aaya aur yudh se bole vaah aaiye raja mein aap baithi ho chali chali main akela nahi ja sakta hoon kyonki kutta jo hai mere saath wahan se chal kar ke aaya hai usne usne mere saath mukt band karke yatra ki hai isliye main kutte ke sir ko nahi jaunga indra ne kaha ki kutte kaise ja sakte hai aap nahi ja sakte kutte ke nahi jana chahta blast mein hua hindu ko worker ek kutte ko bhi le jana pada iske liye unke chal be misal hai hamein aisa nahi sochna chahiye draupadi mahila thi uski pancham account ki jaati hai yah baat alag hai ki aam jan ki panktiyon mein log asiksha ke karan jo bachat mahila hoti hai jis par paanch paanch acche acche logo se sambandh hote hai usko hum log pratigya dete hai yah hamari asiksha hai wahan ki draupadi ek mahaan mahila thi shrikrishna ne use police chowki roop mein yaad kiya hai yaad kiya hai ek baat aur bata doon visheshata aapko draupadi ka ek naam krishna hai krishna kyonki kuch ne use apni time roop mein sakhi roop se sweekar kiya tha

नंबर एक बात यह है कि वे लोग इतने वासना में लिप्त नहीं से पृथ्वी की किस साल के लड़के लड़किय

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महेश दुबे

कवि साहित्यकार

1:55

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भिन्न-भिन्न काल में अलग-अलग परंपराएं होती हैं अलग-अलग मान्यताएं होती हैं अलग अलग परिस्थितियां होती हैं उस काल के हिसाब से उस परिस्थिति के हिसाब से उस क्रियाकलाप को उचित या अनुचित ठहराया जा सकता है आज मैच बहुत ही बातों को अनुचित मानते हैं जो पहले वह चित्र ही होंगे जैसे पहले सती प्रथा का बोलबाला था आज सती प्रथा अपराधी पहले बाल विवाह होते थे आज बाल विवाह पर आधे यह कहा जाता है कि ईश्वर ने पहले आदम को बनाया फिर उन्हीं की पथरी निकाल कर उसने हवा को बनाया अर्थात आदम के शरीर से हवा का जन्म हुआ बाद में उनका विवाह हो गया इसलिए पास तो आज सही नहीं मानी जाती मुस्लिम धर्म में अपने निकट संबंधियों में विवाह हो जाते हैं जो भाई-बहन लगते हैं रिश्ते में उनकी शादी अब भी होती है लेकिन उसे कोई बुरा नहीं करता क्योंकि उन क्या प्रथा चली आ रही है महाभारत की कथा में द्रोपदी के साथ कुछ ऐसा घटित हुआ कि उनकी मां ने अपने बेटे से कहा कि तुम जो भी चीज लाए हो उसे आपस में बांट लो और उसे पालन करने के लिए उन्हें ऐसा करना पड़ा वह घटना है और उसके पहले दो पति ने पूजन में ऐसा माना था कि उन्हें पति के रूप में पांच देव मिले तो एक ही देव में पांचों का समाहित होना बड़ा मुश्किल था इसीलिए कालांतर में जब द्वापर युग आया तब सूर्य इंद्र इत्यादि देवों के अंश के रूप में पांच पांडव पैदा हुए थे और वहीं पांच पांडव पति के रूप में द्रोपदी को मिले ऐसी भी कथा है यह बहुत लंबा विवरण है इसके बारे में बहुत कुछ कहा जा सकता है लेकिन द्रोपदी को सखियों में माना जाता है उनके चरित्र को कोई शंका नहीं की जा सकती

bhinn bhinn kaal mein alag alag paramparayen hoti hai alag alag manyatae hoti hai alag alag paristhiyaann hoti hai us kaal ke hisab se us paristithi ke hisab se us kriyakalap ko uchit ya anuchit thehraya ja sakta hai aaj match bahut hi baaton ko anuchit maante hai jo pehle vaah chitra hi honge jaise pehle sati pratha ka bolbala tha aaj sati pratha apradhi pehle baal vivah hote the aaj baal vivah par aadhe yah kaha jata hai ki ishwar ne pehle aadam ko banaya phir unhi ki pathari nikaal kar usne hawa ko banaya arthat aadam ke sharir se hawa ka janam hua baad mein unka vivah ho gaya isliye paas toh aaj sahi nahi maani jaati muslim dharm mein apne nikat sambandhiyon mein vivah ho jaate hai jo bhai behen lagte hai rishte mein unki shadi ab bhi hoti hai lekin use koi bura nahi karta kyonki un kya pratha chali aa rahi hai mahabharat ki katha mein draupadi ke saath kuch aisa ghatit hua ki unki maa ne apne bete se kaha ki tum jo bhi cheez laye ho use aapas mein baant lo aur use palan karne ke liye unhe aisa karna pada vaah ghatna hai aur uske pehle do pati ne pujan mein aisa mana tha ki unhe pati ke roop mein paanch dev mile toh ek hi dev mein panchon ka samahit hona bada mushkil tha isliye kalantar mein jab dwapar yug aaya tab surya indra ityadi Devon ke ansh ke roop mein paanch pandav paida hue the aur wahi paanch pandav pati ke roop mein draupadi ko mile aisi bhi katha hai yah bahut lamba vivran hai iske bare mein bahut kuch kaha ja sakta hai lekin draupadi ko sakhiyon mein mana jata hai unke charitra ko koi shanka nahi ki ja sakti

भिन्न-भिन्न काल में अलग-अलग परंपराएं होती हैं अलग-अलग मान्यताएं होती हैं अलग अलग परिस्थिति

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Rasbihari Pandey

लेखन / कविता पाठ

0:43
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सोने की बात या संबंध बनाने की जो बात आपने कही है आज भी हरियाणा में एक स्त्री तीन या चार पुरुषों के साथ होती है उसका कारण है कि वहां रेस्क्यू बहुत कम है औरतों का और सर की शादी नहीं हो पाती है एक व्यक्ति की शादी होती है और चार-पांच भाई उसके साथ रहते हैं गुजरते हैं द्रोपदी के बारे में जो कथा है आपको शायद पता ही होगा तो उसे उसने पूर्व जन्म में भगवान शंकर से वरदान मांगा था पांच पतियों के लिए जेल में अलग-अलग तरह के गुण होने चाहिए तो इसको चरित्र से जोड़कर देखना बिल्कुल गलत है

sone ki baat ya sambandh banane ki jo baat aapne kahi hai aaj bhi haryana mein ek stree teen ya char purushon ke saath hoti hai uska karan hai ki wahan rescue bahut kam hai auraton ka aur sir ki shadi nahi ho pati hai ek vyakti ki shadi hoti hai aur char paanch bhai uske saath rehte hain gujarate hain draupadi ke bare mein jo katha hai aapko shayad pata hi hoga toh use usne purv janam mein bhagwan shankar se vardaan manga tha paanch patiyon ke liye jail mein alag alag tarah ke gun hone chahiye toh isko charitra se jodkar dekhna bilkul galat hai

सोने की बात या संबंध बनाने की जो बात आपने कही है आज भी हरियाणा में एक स्त्री तीन या चार पु

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उसे जिस व्यवस्था में जीने के लिए कहा गया उस व्यवस्था में वह जी रही थी वह अपने हवस की पूर्ति के लिए गैर मर्दों के साथ नहीं सो रही थी 5 के साथ उसे बांधा गया तो कोई छठा उसके जीवन में नहीं आया यह उसके चरित्र की खूबसूरती है आपको जिस व्यवस्था के तहत व्यवस्थित किया जाए उसकी सीमाओं का ख्याल आप रखें यही आपके सच्चरित्र अता का प्रमाण धन्यवाद

use jis vyavastha mein jeene ke liye kaha gaya us vyavastha mein vaah ji rahi thi vaah apne hawas ki purti ke liye gair mardon ke saath nahi so rahi thi 5 ke saath use bandha gaya toh koi chhata uske jeevan mein nahi aaya yah uske charitra ki khoobsoorti hai aapko jis vyavastha ke tahat vyavasthit kiya jaaye uski seemaon ka khayal aap rakhen yahi aapke sachcharitra ata ka pramaan dhanyavad

उसे जिस व्यवस्था में जीने के लिए कहा गया उस व्यवस्था में वह जी रही थी वह अपने हवस की पूर्त

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Ranjeet Singh Uppal

Retired GM ONGC

0:42
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यह सत्य है कि द्रौपदी पांचों पांडवों के साथ सोती थी किंतु वह पांच पांच पांडव की पत्नी थी और अपने पतियों के अलावा को किसी और के साथ नहीं सोए इसलिए हम उसको चैट चरित्रहीन नहीं कह सकते अगर एक पुरुष की चार पत्नियां होती है और चारों पत्नियों के साथ सोता है अगर वह चरित्रहीन नहीं तो द्रौपदी क्यों चरित्रहीन होगी द्रौपदी के अपने पतियों से 5 पुत्र भी थे इसके अलावा उसको शिवजी का वरदान भी था जब वह रोज सोकर उठी थी तो उसका कौमार्य अक्षम रहता था

yah satya hai ki draupadi panchon pandavon ke saath soti thi kintu vaah paanch paanch pandav ki patni thi aur apne patiyon ke alava ko kisi aur ke saath nahi soye isliye hum usko chat charitraheen nahi keh sakte agar ek purush ki char patniya hoti hai aur charo patniyon ke saath sota hai agar vaah charitraheen nahi toh draupadi kyon charitraheen hogi draupadi ke apne patiyon se 5 putra bhi the iske alava usko shivaji ka vardaan bhi tha jab vaah roj sokar uthi thi toh uska kaumarya aksham rehta tha

यह सत्य है कि द्रौपदी पांचों पांडवों के साथ सोती थी किंतु वह पांच पांच पांडव की पत्नी थी औ

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श्री बहुत बड़ी विडंबना है हमारे यहां ठीक है हम स्त्री के चरित्र को उसके शरीर से योगी चरित्र क्या है चरित्र यह नहीं है कि आपका शरीर कहां जा रहा है क्या कर रहा है यह किवदंती है ऐसा माना जाता है कि द्रौपदी को कहा गया कि तुम पांचो भाइयों की पत्नी हो हालांकि इस क्यों कोई बहुत प्रमाण नहीं है लेकिन अगर ऐसा था अभी तो द्रौपदी 1 वर्ष एक भाई के साथ रहती थी जैसा कि कहा गया है कि इसमें चरित्र कहां से आ गया उसने वह किया जो उसकी सास ने कहा अपने बड़ों की बात का सम्मान किया लेकिन चरित्र वहां होता अगर वह एक भाई के साथ रहते हुए किसी दूसरे व्यक्ति के बारे में सोचती या किसी और के साथ छल करती चरित्र शरीर से जुड़ा हुआ नहीं होता है यह बात आप स्पष्ट समझ लीजिए और खासकर महिलाओं के मामले में यह हमारे समाज बहुत बड़ी बहन ती है बहुत बड़ी इच्छा है महिलाओं को नीचे गिराने की कि उनके शरीर को उनके उनकी आत्मा उनका चरित्र किया जाता है शरीर चरित्र नहीं रखता अगर द्रौपदी ने ऐसा किया वह पांच भाइयों के साथ रहे तो उससे उसके चरित्र पर उंगली नहीं उठाई जा सकती चरित्र मन से होता है आत्मा की शुद्धता से होता है और उस ग्रुप में जो भी आपने आत्मिक रूप से बहुत सुंदर थी इसलिए हम कह सकते हैं कि उसका चरित्र बहुत ऊंचा था तो अपने कंसेप्ट मिसकनसेप्शन ठीक कीजिए और शरीर और चरित्र दो अलग-अलग चीजें हैं इस बात को समझने की कोशिश धन्यवाद

shri bahut badi widambana hai hamare yahan theek hai hum stree ke charitra ko uske sharir se yogi charitra kya hai charitra yah nahi hai ki aapka sharir kaha ja raha hai kya kar raha hai yah kivadanti hai aisa mana jata hai ki draupadi ko kaha gaya ki tum paancho bhaiyo ki patni ho halaki is kyon koi bahut pramaan nahi hai lekin agar aisa tha abhi toh draupadi 1 varsh ek bhai ke saath rehti thi jaisa ki kaha gaya hai ki isme charitra kaha se aa gaya usne vaah kiya jo uski saas ne kaha apne badon ki baat ka sammaan kiya lekin charitra wahan hota agar vaah ek bhai ke saath rehte hue kisi dusre vyakti ke bare me sochti ya kisi aur ke saath chhal karti charitra sharir se juda hua nahi hota hai yah baat aap spasht samajh lijiye aur khaskar mahilaon ke mamle me yah hamare samaj bahut badi behen ti hai bahut badi iccha hai mahilaon ko niche girane ki ki unke sharir ko unke unki aatma unka charitra kiya jata hai sharir charitra nahi rakhta agar draupadi ne aisa kiya vaah paanch bhaiyo ke saath rahe toh usse uske charitra par ungli nahi uthayi ja sakti charitra man se hota hai aatma ki shuddhta se hota hai aur us group me jo bhi aapne atmik roop se bahut sundar thi isliye hum keh sakte hain ki uska charitra bahut uncha tha toh apne concept misakanasepshan theek kijiye aur sharir aur charitra do alag alag cheezen hain is baat ko samjhne ki koshish dhanyavad

श्री बहुत बड़ी विडंबना है हमारे यहां ठीक है हम स्त्री के चरित्र को उसके शरीर से योगी चरित्

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Harish Chand

Social Worker

1:22
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है कि महाभारत में द्रोपती से पांच पांडवों के साथ सोई थी तो कैसे कह सकते हैं कि वह अच्छे चरित्र की महिला थी आपको एक बात बताऊं ही उठ पटांग सवाल सवाल उठ पटांग क्योंकि आपने महाभारत को पढ़ाने आपने गीता को पढ़ा नहीं आपने रामायण को पढ़ा नहीं जिस दिन आप पढ़ लोगे आपकी सारा कुछ समझ में आ जाएगा कि वह सोई थी या नहीं सोई थी या क्या हुआ था ठीक है ना किसी भी धर्म के ऊपर कोई आक्षेप लगाने से पहले उस ग्रंथ के अंदर पड़े उसको डीपी पड़े और उसका आंसर निकाल है ऐसे उटपटांग सवालों की लंबी आप पर नहीं बैठे हैं ध्यान से सुनो और सुनो कभी द्रोपती सोई नहीं थी पांचों पांडवों के साथ ठीक है आई लव यू बताओ अलग सिस्टम था वह अलग बिल्कुल ही अलग था वहां तक तुम जैसे कुत्तों की सोच पहुंचने सकती इस तरह की घटिया और वाहियात सवाल द्वारा पूछने की जरूरत मत करना ठीक है फिर भी कोई समस्या हो तो कमेंट बॉक्स में आ करके बात करो

aapka sawaal hai ki mahabharat me draupadi se paanch pandavon ke saath soi thi toh kaise keh sakte hain ki vaah acche charitra ki mahila thi aapko ek baat bataun hi uth patang sawaal sawaal uth patang kyonki aapne mahabharat ko padhane aapne geeta ko padha nahi aapne ramayana ko padha nahi jis din aap padh loge aapki saara kuch samajh me aa jaega ki vaah soi thi ya nahi soi thi ya kya hua tha theek hai na kisi bhi dharm ke upar koi akshep lagane se pehle us granth ke andar pade usko dipi pade aur uska answer nikaal hai aise utaptang sawalon ki lambi aap par nahi baithe hain dhyan se suno aur suno kabhi draupadi soi nahi thi panchon pandavon ke saath theek hai I love you batao alag system tha vaah alag bilkul hi alag tha wahan tak tum jaise kutto ki soch pahuchne sakti is tarah ki ghatiya aur vahiyat sawaal dwara poochne ki zarurat mat karna theek hai phir bhi koi samasya ho toh comment box me aa karke baat karo

आपका सवाल है कि महाभारत में द्रोपती से पांच पांडवों के साथ सोई थी तो कैसे कह सकते हैं कि व

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Sumita Pal

Pharmacist

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क्या महाभारत में द्रोपती सभी पांच पांडवों के साथ सोई थी यदि हां तो हम यह कह सकते हैं कि मैं अच्छे चल की महिला थी कि आपका सवाल बहुत सही जवाब है आपका यह बिल्कुल सही बात है महाभारत में पांचो पांडव से एक-एक पुत्र प्राप्त हुए थे और वह खुद एक बर्दानी करनी आती है और उनको एक और वरदान था वह हर एक रात के बाद कॉमर्स को प्राप्त होगी इसलिए हम उनके चरित्र पर दाग नहीं लगा सकते उन्होंने बाकायदा विवाह किया था समाज की नजर से उन्होंने अपने पति के साथ बराबर 10 बटा

kya mahabharat mein draupadi sabhi paanch pandavon ke saath soi thi yadi haan toh hum yah keh sakte hain ki main acche chal ki mahila thi ki aapka sawaal bahut sahi jawab hai aapka yah bilkul sahi baat hai mahabharat mein paancho pandav se ek ek putra prapt hue the aur vaah khud ek bardani karni aati hai aur unko ek aur vardaan tha vaah har ek raat ke baad commerce ko prapt hogi isliye hum unke charitra par daag nahi laga sakte unhone bakayada vivah kiya tha samaj ki nazar se unhone apne pati ke saath barabar 10 bataa

क्या महाभारत में द्रोपती सभी पांच पांडवों के साथ सोई थी यदि हां तो हम यह कह सकते हैं कि मै

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सुरेश चंद आचार्य

Social Worker ( Self employed )

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नमस्कार साथियों हां यह सच है कि द्रोपती सभी पांच पांडवों के साथ सोई थी लेकिन यह उसने अपनी खुशी शौक के लिए नहीं किया था इसके लिए आपको थोड़ा समझने की जरूरत है द्रोपती पूर्व जन्म में तपस्या के फलस्वरूप भिन्न-भिन्न लक्षणों वाले पांच पतियों की मांग करती है और वे सद्गुण किसी एक पुरुष में नहीं हो सकते इसलिए भगवान ने उसे वरदान दिया कि यह 5 गुण 5 मनुष्य में मिलेंगे जब अर्जुन उसको स्वयंवर में जीत के लाया और माता कुंती ने मिल बांट कर कहने के लिए आदेश दिया बाद में पता चला कि यह तो द्रौपदी है कोई वस्तु नहीं तब भगवान कृष्ण ने स्वयं यह कथा सबको सुनाई थी कि पूर्व जन्म के अनुसार ही द्रोपती को यह पांच पति मिले हैं उसके बाद उनके जीवन में जो नियम अपनाए गए उनके बारे में आप लोगों को बताया नहीं गया है नाराज जी स्वयं वहां पर आए और उन्होंने पांचों भाइयों द्रोपती को बैठाकर यह बात समझाई कि तुम्हें चरित्र हीनता का नाम नहीं दिया जाए इसलिए तुम्हें नियम बनाने पड़ेंगे तब उन्होंने नियम बनाया कि द्रौपदी 2 वर्ष तक एक भाई की पत्नी बन की रहेगी उस 2 वर्ष के काल में चारों भाई उसके लिए पर पुरुष के समान होंगे और वह जो जिसके भी साथ उस समय घर में रहती है उस समय कोई भाई घर में अंदर प्रवेश नहीं करेगा चाहे कुछ भी हो और अगर किसी कारणवश को यह नियम तोड़ता है तो उसे 1 वर्ष का वनवास भोगना पड़ेगा इस प्रकार वह बारी-बारी से इस नियम का पालन करते हुए बहू पत्नी या बहू पति ने बनके एक पत्नी व्रत का पालन किया और पांचों भाइयों से उसने एक पुत्र पैदा किया और महाभारत के अनुसार पांचों भाइयों के पुत्र होने के पश्चात लगभग पूर्ण रूप से वह केवल युधिष्ठिर की ही पत्नी बन कर रही वह द्रोपदी ने माता-पिता के संतान के रूप में गर्भ से जन्म नहीं लिया वह अधिवेशन में थी और देवी ग्रुप में अग्नि से प्रकट हुई थी और साथ-साथ शक्ति की और बाघ मन की इच्छा अनुसार महाभारत में जिस प्रकार रामायण या अन्य शिव पुराण में जैसे भगवान के अवतार के रूप में देवता सहायक बन कर जन्म लेते हैं उसी प्रकार द्रोपती भी भगवान के कार्य में धर्म के काम में सहायक के रूप में जन्म लिया था भगवान के अनन्य भक्ति हर हाल में उसने पतिव्रत धर्म का पालन किया है ऐसी कोई घटना नहीं है जिससे हम द्रोपती को चरित्रहीन कह सकें धन्यवाद

namaskar sathiyo haan yah sach hai ki draupadi sabhi paanch pandavon ke saath soi thi lekin yah usne apni khushi shauk ke liye nahi kiya tha iske liye aapko thoda samjhne ki zarurat hai draupadi purv janam mein tapasya ke phalswarup bhinn bhinn lakshano waale paanch patiyon ki maang karti hai aur ve sadgun kisi ek purush mein nahi ho sakte isliye bhagwan ne use vardaan diya ki yah 5 gun 5 manushya mein milenge jab arjun usko sawamber mein jeet ke laya aur mata kuntee ne mil baant kar kehne ke liye aadesh diya baad mein pata chala ki yah toh draupadi hai koi vastu nahi tab bhagwan krishna ne swayam yah katha sabko sunayi thi ki purv janam ke anusaar hi draupadi ko yah paanch pati mile hain uske baad unke jeevan mein jo niyam apnaye gaye unke bare mein aap logo ko bataya nahi gaya hai naaraj ji swayam wahan par aaye aur unhone panchon bhaiyo draupadi ko baithakar yah baat samjhai ki tumhe charitra hinata ka naam nahi diya jaaye isliye tumhe niyam banane padenge tab unhone niyam banaya ki draupadi 2 varsh tak ek bhai ki patni ban ki rahegi us 2 varsh ke kaal mein charo bhai uske liye par purush ke saman honge aur vaah jo jiske bhi saath us samay ghar mein rehti hai us samay koi bhai ghar mein andar pravesh nahi karega chahen kuch bhi ho aur agar kisi karanvash ko yah niyam todta hai toh use 1 varsh ka vanvas bhogna padega is prakar vaah baari baari se is niyam ka palan karte hue bahu patni ya bahu pati ne banke ek patni vrat ka palan kiya aur panchon bhaiyo se usne ek putra paida kiya aur mahabharat ke anusaar panchon bhaiyo ke putra hone ke pashchat lagbhag purn roop se vaah keval yudhishthir ki hi patni ban kar rahi vaah draupadi ne mata pita ke santan ke roop mein garbh se janam nahi liya vaah adhiveshan mein thi aur devi group mein agni se prakat hui thi aur saath saath shakti ki aur bagh man ki iccha anusaar mahabharat mein jis prakar ramayana ya anya shiv puran mein jaise bhagwan ke avatar ke roop mein devta sahayak ban kar janam lete hain usi prakar draupadi bhi bhagwan ke karya mein dharm ke kaam mein sahayak ke roop mein janam liya tha bhagwan ke anany bhakti har haal mein usne pativrat dharm ka palan kiya hai aisi koi ghatna nahi hai jisse hum draupadi ko charitraheen keh sake dhanyavad

नमस्कार साथियों हां यह सच है कि द्रोपती सभी पांच पांडवों के साथ सोई थी लेकिन यह उसने अपनी

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार आपका प्रश्न मैंने पढ़ा बहुत ही अजीब प्रश्न है लेकिन जैसा कि युग परिवर्तन आ चुका है यह बात त्रेता युग की है और अभी कलयुग में आप महाभारत को पढ़ रहे हैं समझ रहे हैं तो स्वाभाविक है कि आपके मन में यह प्रश्न उठ जाए लेकिन आप को प्रसन्न करने से पहले यह जानना होगा कि द्रोपती कौन थी द्रोपती यज्ञ सैनी थी अग्नि से उत्पन्न थी हम कह सकते हैं कि द्रोपती अग्नि ही थी अब आप मान सकते हो यह बात तो प्रैक्टिकल है अब अग्नि में कुछ भी डालो अग्नि कभी अपवित्र नहीं होती वही बात द्रोपती के केस में है द्रोपती ने कोई चाहकर कोई पांच पतियों को थोड़ी चुना था नहीं जैसा की कथा आती है कि द्रोपती की द्रौपदी का स्वयंवर हुआ था अर्जुन के साथ विवाह हुआ था लेकिन जब लेकर द्रोपती को लेकर अर्जुन युधिष्ठिर यह सब वहां अपने माता के पास गए या अज्ञातवास के समय की बात है माता के पास गए तो घर घर बंद था रूम माता अंदर स्नान कर रही थी तो उन्होंने आवाज लगाई माता हम आपके लिए क्या लाए हैं माता को भी पता नहीं था और माता को ऐसी आशा भी नहीं थी कि पत्नी उठा कर लाएंगे उनको वह खुश हो जाएंगे उन्होंने सोचा कि कोई भिक्षा लेकर आए दीपिका के लिए भेजा था पांचों भाइयों को सुनाना तो माता ने कहा पांचों भाई आपस में बांटना और पहले यह था कि हर आदमी पावरफुल था तो कुंती मां के वचनों में भी वजन था और वह होना क्यों जरूरी था क्योंकि जब द्रोपती छोटी थी तो द्रोपती ने भगवान की तपस्या करी तो भगवान से ऐसे ऐसे वर मांगे कि मुझे मेरे पति में यह गुण चाहिए मुझे मेरे पति मुझे एक आदमी इतनी दूर होने को सफल नहीं थे इसलिए पांचों पांडवों में जो गुण थे वह सारे गुंजोती को चाहिए थे इसलिए वह कोई विधाता का संविधान था जिसकी वजह से कुंती मां के मुंह से यह लाइन निकली के पांचों मिलकर बांट लो और माता की आज्ञा का आदेश कब अवहेलना नहीं करी जाती थी उस वक्त इस वजह से द्रोपती को बच्चों के साथ में विवाह करना पड़ा लेकिन बहुत ही अच्छी बात यह है कि वहां पर भी एक सिस्टम था द्रौपदी का पांचो पांडव बहुत सम्मान करते थे कोई भोग की वस्तु नहीं समझा कभी किसी ने वहां पर नियम था कि 1 साल में एक ही ही पत्नी मन करो रहेंगी कैसे पहला सालवी डिस्टर्ब को मिला है तो अगर उस 1 साल में युधिष्ठिर के अलावा द्रोपती के महल में बाकी चार पांडवों में से कोई प्रवेश करता है तो उसको 12 महीने के लिए जंगल में तपस्या करने के लिए जाना पड़ता इतनी कठोर दंड होता था उसका एक बार ऐसी कहानी आती भी है जब भीम और द्रोपती अपने महल में चौपड़ खेल रहे थे उस वक्त अर्जुन को जाना पड़ा अचानक से सूचना आई कि युद्ध हो रहा है तो उसने अपना गांडीव लाने के लिए गांडीव धनुष टार्जन का वह लाने के लिए महल में प्रवेश करना पड़ा और उसके कारण उस युद्ध को लड़ने की बजाय 12 वर्ष के 12 महीने के लिए वन में तपस्या करने के लिए गया था और सबसे बड़ी बात होती कोई मामूली औरत नहीं थी द्रोपती एक तपस्वी नहीं हुई थी आपको पता ही अज्ञ शनि जिसका यज्ञ से हवन से अग्नि से जिसका जन्म हुआ हो वह कितनी ज्यादा पावरफुल हो जी भगवान श्री कृष्ण के सखी थी वह भगवान श्रीकृष्ण को अपने भाई के पिल्ले मानती थी वह आपको पता है जब चीर हरण हुआ था तो श्री कृष्ण भगवान ने किस तरह से उनकी रक्षा करें आज ऐसा पॉसिबल है क्या लेकिन उस वक्त था क्योंकि कर्म इतनी पावरफुल होते थे लोगों की आज हमारे कर्म भी तो इतनी पावर नहीं है इसलिए यह ऐसी चीजें अपने माइंड में ना सोचे आप इतना सोचे कि द्रोपती है कि यज्ञ सैनी थी बहुत पावरफुल थी अगली के अंदर आप पानी मिट्टी कुछ भी डालो कोई फर्क नहीं पड़ेगा अभी नहीं बहुत गंदगी ज्वाला को कभी रोक नहीं सकते आप वैसे ही द्रोपती को यह भी वरदान था कि वह निर्मित नहीं एक लव यू टी की तरह रहेगी और वह रोज जैसे स्नान करती एक नदी की तरह हो जाती है द्रोपती ने बुढ़ापा नहीं देखा कभी वह हमेशा यूं ही बंद कर रही है धन्यवाद

namaskar aapka prashna maine padha bahut hi ajib prashna hai lekin jaisa ki yug parivartan aa chuka hai yah baat treta yug ki hai aur abhi kalyug me aap mahabharat ko padh rahe hain samajh rahe hain toh swabhavik hai ki aapke man me yah prashna uth jaaye lekin aap ko prasann karne se pehle yah janana hoga ki draupadi kaun thi draupadi yagya saini thi agni se utpann thi hum keh sakte hain ki draupadi agni hi thi ab aap maan sakte ho yah baat toh practical hai ab agni me kuch bhi dalo agni kabhi apavitra nahi hoti wahi baat draupadi ke case me hai draupadi ne koi chahkar koi paanch patiyon ko thodi chuna tha nahi jaisa ki katha aati hai ki draupadi ki draupadi ka sawamber hua tha arjun ke saath vivah hua tha lekin jab lekar draupadi ko lekar arjun yudhishthir yah sab wahan apne mata ke paas gaye ya agyatavas ke samay ki baat hai mata ke paas gaye toh ghar ghar band tha room mata andar snan kar rahi thi toh unhone awaaz lagayi mata hum aapke liye kya laye hain mata ko bhi pata nahi tha aur mata ko aisi asha bhi nahi thi ki patni utha kar layenge unko vaah khush ho jaenge unhone socha ki koi bhiksha lekar aaye deepika ke liye bheja tha panchon bhaiyo ko sunana toh mata ne kaha panchon bhai aapas me bantana aur pehle yah tha ki har aadmi powerful tha toh kuntee maa ke vachano me bhi wajan tha aur vaah hona kyon zaroori tha kyonki jab draupadi choti thi toh draupadi ne bhagwan ki tapasya kari toh bhagwan se aise aise var mange ki mujhe mere pati me yah gun chahiye mujhe mere pati mujhe ek aadmi itni dur hone ko safal nahi the isliye panchon pandavon me jo gun the vaah saare gunjoti ko chahiye the isliye vaah koi vidhata ka samvidhan tha jiski wajah se kuntee maa ke mooh se yah line nikli ke panchon milkar baant lo aur mata ki aagya ka aadesh kab avhelna nahi kari jaati thi us waqt is wajah se draupadi ko baccho ke saath me vivah karna pada lekin bahut hi achi baat yah hai ki wahan par bhi ek system tha draupadi ka paancho pandav bahut sammaan karte the koi bhog ki vastu nahi samjha kabhi kisi ne wahan par niyam tha ki 1 saal me ek hi hi patni man karo rahegi kaise pehla salvi disturb ko mila hai toh agar us 1 saal me yudhishthir ke alava draupadi ke mahal me baki char pandavon me se koi pravesh karta hai toh usko 12 mahine ke liye jungle me tapasya karne ke liye jana padta itni kathor dand hota tha uska ek baar aisi kahani aati bhi hai jab bhim aur draupadi apne mahal me chaupad khel rahe the us waqt arjun ko jana pada achanak se soochna I ki yudh ho raha hai toh usne apna gandiv lane ke liye gandiv dhanush tarjan ka vaah lane ke liye mahal me pravesh karna pada aur uske karan us yudh ko ladane ki bajay 12 varsh ke 12 mahine ke liye van me tapasya karne ke liye gaya tha aur sabse badi baat hoti koi mamuli aurat nahi thi draupadi ek tapaswi nahi hui thi aapko pata hi agya shani jiska yagya se hawan se agni se jiska janam hua ho vaah kitni zyada powerful ho ji bhagwan shri krishna ke sakhi thi vaah bhagwan shrikrishna ko apne bhai ke pille maanati thi vaah aapko pata hai jab chir haran hua tha toh shri krishna bhagwan ne kis tarah se unki raksha kare aaj aisa possible hai kya lekin us waqt tha kyonki karm itni powerful hote the logo ki aaj hamare karm bhi toh itni power nahi hai isliye yah aisi cheezen apne mind me na soche aap itna soche ki draupadi hai ki yagya saini thi bahut powerful thi agli ke andar aap paani mitti kuch bhi dalo koi fark nahi padega abhi nahi bahut gandagi jwala ko kabhi rok nahi sakte aap waise hi draupadi ko yah bhi vardaan tha ki vaah nirmit nahi ek love you T ki tarah rahegi aur vaah roj jaise snan karti ek nadi ki tarah ho jaati hai draupadi ne budhapa nahi dekha kabhi vaah hamesha yun hi band kar rahi hai dhanyavad

नमस्कार आपका प्रश्न मैंने पढ़ा बहुत ही अजीब प्रश्न है लेकिन जैसा कि युग परिवर्तन आ चुका है

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P.K.Panchal

Business Owner

3:32
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नमस्कार मैं पीके पांचाल बाद में उनकी माता कुंती के वचन के आदेश को पालन करते हुए सभी पांडवों से उन्होंने विवाह किया तदोपरांत वैवाहिक परंपराओं को प्राप्त करने के बाद व्यवस्था अनुसार प्रतिवर्ष किसी एक के पास अपना संपूर्ण जीवन व्यतीत करती थी 1 वर्ष के लिए समर्पण देती थी 1 वर्ष के लिए यह पहली बार हिंदू महाकाव्य में या हिंदू इतिहास के अंदर या सनातन धर्म के इतिहास के अंदर पहली बार ने इससे पूर्व भी मनु की पुत्री पुत्री द्वारा पत्र विवाह का एक कथा वेद शास्त्रों के अंतर्गत आती है परंतु अगर बात हो रही है चरित्र की चरित्रहीन या चरित्रवान चरित्र के विषय में समझना बहुत जरूरी है जब कोई स्त्री अपनी स्वेच्छा से कामवासना की पूर्ति के लिए विभिन्न व्यक्तियों से संबंध स्थापित करती है या कोई पुरुष अपनी कामवासना की पूर्ति के लिए धर्म के विरुद्ध जाकर इस प्रकार का कोई कृत्य करता है तो उसको हम चरित्रहीन कहते हैं बेतिया जो कृत्य करती है उसमें विरोध होता है पति की अनुमति के बिना उसके विरोध में या उससे चुपके उसकी आज्ञा के विरुद्ध जाकर किसी और व्यक्ति के साथ संबंध बनाना इसको हम चरित्र ही नेता कहते हैं जबकि द्रौपदी और पांडवों के मध्य संबंध था वह धार्मिक विचारधाराओं का मान रखते हुए पूरी तरह से व्यवस्था दी को ऋषि और उस समय क्या समाज द्वारा मान्यता प्राप्त थी किसी भी पांडव द्वारा विरोध नहीं किया गया सभी ने शिक्षा के निर्णय को स्वीकार किया और जो महाकाव्य के अंदर वर्णन है कि जिस प्रकार अर्जुन से विवाह करने के बाद अर्जुन ने जिस प्रकार से उनको एकदम नंबर के मंडप से प्राप्त किया इसके बाद वह अपने माता के पास पहुंचे और माता का भजन हुआ उस वचन का पालन यदि नहीं किया जाता उस स्थिति में अन्यत्र चार पांडवों को सन्यास ग्रहण करना पड़ता यदि काव्य के पूर्ण ग्रंथ और महाभारत की पूर्ण विधि को पूर्ण तरीके से समझा जाए तब हम इस बात को समझ पाएंगे कि जो पांचाली या द्रोपति द्वारा किया गया वह अन्य चार पांडवों के हित में था यदि वह उनको विवाह नहीं करती और उनका अपने पति पर स्वीकार नहीं करती उस स्थिति में अर्जुन के अन्यत्र चार पांडवों को सन्यास लेना पड़ता द्रोपति में जीवन में एक बहुत बड़ा त्याग किया है भगवान श्रीकृष्ण ने उनका संरक्षण प्रदान करके इस बात को सिद्ध किया है कि उनका त्याग उनका मन और उनका चरित्र निर्मल था नमस्कार

namaskar main pk paanchaal baad me unki mata kuntee ke vachan ke aadesh ko palan karte hue sabhi pandavon se unhone vivah kiya tadoprant vaivahik paramparaon ko prapt karne ke baad vyavastha anusaar prativarsh kisi ek ke paas apna sampurna jeevan vyatit karti thi 1 varsh ke liye samarpan deti thi 1 varsh ke liye yah pehli baar hindu mahakavya me ya hindu itihas ke andar ya sanatan dharm ke itihas ke andar pehli baar ne isse purv bhi manu ki putri putri dwara patra vivah ka ek katha ved shastron ke antargat aati hai parantu agar baat ho rahi hai charitra ki charitraheen ya charitravan charitra ke vishay me samajhna bahut zaroori hai jab koi stree apni swachcha se kaamvasna ki purti ke liye vibhinn vyaktiyon se sambandh sthapit karti hai ya koi purush apni kaamvasna ki purti ke liye dharm ke viruddh jaakar is prakar ka koi kritya karta hai toh usko hum charitraheen kehte hain betiya jo kritya karti hai usme virodh hota hai pati ki anumati ke bina uske virodh me ya usse chupake uski aagya ke viruddh jaakar kisi aur vyakti ke saath sambandh banana isko hum charitra hi neta kehte hain jabki draupadi aur pandavon ke madhya sambandh tha vaah dharmik vichardharaon ka maan rakhte hue puri tarah se vyavastha di ko rishi aur us samay kya samaj dwara manyata prapt thi kisi bhi pandav dwara virodh nahi kiya gaya sabhi ne shiksha ke nirnay ko sweekar kiya aur jo mahakavya ke andar varnan hai ki jis prakar arjun se vivah karne ke baad arjun ne jis prakar se unko ekdam number ke mandap se prapt kiya iske baad vaah apne mata ke paas pahuche aur mata ka bhajan hua us vachan ka palan yadi nahi kiya jata us sthiti me anyatra char pandavon ko sanyas grahan karna padta yadi kavya ke purn granth aur mahabharat ki purn vidhi ko purn tarike se samjha jaaye tab hum is baat ko samajh payenge ki jo panchali ya dropati dwara kiya gaya vaah anya char pandavon ke hit me tha yadi vaah unko vivah nahi karti aur unka apne pati par sweekar nahi karti us sthiti me arjun ke anyatra char pandavon ko sanyas lena padta dropati me jeevan me ek bahut bada tyag kiya hai bhagwan shrikrishna ne unka sanrakshan pradan karke is baat ko siddh kiya hai ki unka tyag unka man aur unka charitra nirmal tha namaskar

नमस्कार मैं पीके पांचाल बाद में उनकी माता कुंती के वचन के आदेश को पालन करते हुए सभी पांडवो

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रत्ने क्या महाभारत द्रोपदी पांच पांडव के साथ सोई थी यदि हां तो हम सब यह कैसे कह सकते हो अच्छा चलो ठीक है और जो पीस शरीर को सौंपी थी अपनी इच्छा थी तब की थी इसमें क्या समस्या है महाभारत में वर्णित है पांच पति थे तो क्या समस्या जब जब एक पति चार पत्नी को रख सकता है तो एक पत्नी के पांच पति क्यों नहीं करते तब तक सतात्मक समाज की जड़ तक समाज सहित पांच पति रखती रखती तक कोई नहीं कहता कोई नहीं उठाता नहीं है

ratne kya mahabharat draupadi paanch pandav ke saath soi thi yadi haan toh hum sab yah kaise keh sakte ho accha chalo theek hai aur jo peace sharir ko saumpi thi apni iccha thi tab ki thi isme kya samasya hai mahabharat me varnit hai paanch pati the toh kya samasya jab jab ek pati char patni ko rakh sakta hai toh ek patni ke paanch pati kyon nahi karte tab tak satatmak samaj ki jad tak samaj sahit paanch pati rakhti rakhti tak koi nahi kahata koi nahi uthaata nahi hai

रत्ने क्या महाभारत द्रोपदी पांच पांडव के साथ सोई थी यदि हां तो हम सब यह कैसे कह सकते हो अच

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Shri Nirmal Dev Ji

Shirmad Bhagwat Kathaparwekta

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कारण यह ग्रुप टी जी का पांच पतियों से विवाह करने का संकल्प नहीं था इनकी सासु मां कुंती के द्वारा कहे गए शब्द का इन्होंने संकल्प ले लिया था और फिर भी अर्जुन को छोड़कर के सभी लोग युधिष्ठिर भीम नकुल सहदेव बंकी और गमन करना चाहते थे ब्रह्माचारी पालन करना चाहते थे लेकिन जो है द्रोपदी ने सोचा कि अगर मैं टीवी बंकी और बे ब्रह्मचारी का पालन किया तो इनको सृष्टि कभी क्षमा नहीं करेगी तो इतिहास कभी क्षमा नहीं करेगा इसलिए इन्होंने सोच विचार करके फिर संकल्प लिया कि मेरे लिए यही बेहतर होगा कि पांचों भाइयों के साथ में संकल्प लेकर इनकी भार्या बनाई यही शुभ था और इसीलिए द्रोपदी इतिहास में आज ही बहुत ही महान है आज भी उनकी कथाएं अमर है

karan yah group T ji ka paanch patiyon se vivah karne ka sankalp nahi tha inki sasu maa kuntee ke dwara kahe gaye shabd ka inhone sankalp le liya tha aur phir bhi arjun ko chhodkar ke sabhi log yudhishthir bhim nakul sahdev banki aur gaman karna chahte the brahmachari palan karna chahte the lekin jo hai draupadi ne socha ki agar main TV banki aur be brahmachari ka palan kiya toh inko shrishti kabhi kshama nahi karegi toh itihas kabhi kshama nahi karega isliye inhone soch vichar karke phir sankalp liya ki mere liye yahi behtar hoga ki panchon bhaiyo ke saath me sankalp lekar inki bharya banai yahi shubha tha aur isliye draupadi itihas me aaj hi bahut hi mahaan hai aaj bhi unki kathaen amar hai

कारण यह ग्रुप टी जी का पांच पतियों से विवाह करने का संकल्प नहीं था इनकी सासु मां कुंती के

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Hari R Ahir

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Chandrakant Shrivastav

Educationist N Counsellor. PD Trainer. Motivator

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भाई मुझे आपके सवाल से से लगा एक पल के लिए मैं गलत हो सकता हूं कि शायद आप मुस्लिम है और आपको महाभारत का इतना ज्यादा अभ्यास नहीं है इसलिए आपने चलो कोई बात नहीं आप ने सवाल किया जवाब देना मेरा फर्ज है तो द्रोपदी ज्योति उसका बहुत बड़ा इतिहास है महाभारत में कृष्ण का जन्म हुआ पहले ध्रुपद का और फिर द्रोपदी का आज के नीति नियम की सबसे ऊंची यह कलयुग है और महाभारत की कथा जो है ना उस युग की है सचिव के आज के मापदंड से आप आज के मेजरमेंट से उस समय के निजी को आप नहीं माफ कर देना भाई साहब और वो एकदम मोस्ट डेवलप्ड एस था किसने पूछा साहब भगवत गीता में ऐसा लिखा है यह सही है क्या इसकी पहले मेरे पास एक बहुत अच्छा सवाल आया था बोली कर्मण्ए वाधिकारस्ते हम कर्म करो फल की इच्छा ना करें तो कहने लगे बोले यदि हम को सैलरी नहीं मिलेगी तो कर्म करने की प्रेरणा कहां से मिलेगी पूछने वाला आक्रोश में था मैंने जवाब नहीं दिया कि आप भगवत गीता पढ़ते समय एक बार ध्यान में रखिए कि भगवान कृष्ण ने वह कही है अर्जुन के लिए आपके लिए नहीं रही है आप योद्धा नहीं है आप उसमें नहीं है उसको समझने के लिए भी इतने ऊंचे स्तर पर आपको जाना पड़ेगा क्योंकि बिल्ली के हाथ में कुछ हो ना लग जाए कुत्ते के हाथ में चांदी लग जाए वह पीछा करके निकल जाएगा उसको क्या पता क्या है वही हमारी कलयुग के लोगों की है बिना सोचे समझे अध्ययन किए रिसर्च इन करते हैं किसी को बुरा बोलते हैं अब रहा सवाल आपके सवाल का तो द्रोपदी ज्योति थी जब स्वयंवर में अर्जुन ने द्रौपदी को जीता और घर के बाहर वह पहुंची अज्ञातवास में से अपनी झोपड़ी के बाहर और मम्मी को उन्होंने बोला कि मम्मी हम कुछ लाए हैं आप को दिखाना चाहते हैं तो मम्मी ने बगैर देखे का बेटा जो भी लाए होना पांचों भाई आपस में बांट लो अब समझ कर वहां से शुरू हुई क्योंकि उस समय माता-पिता का आदर मान जो बात कह दी वह करना ही है वह कलयुग ना भाई उसके बाद भी सलाह मशवरा हुआ अब इसमें एक बात और है द्रोपदी ने भी बहुत तपस्या की थी और महादेव से उन्होंने यह मांगा था कि मुझे ऐसा पति चाहिए तो धर्म नष्ट हो धर्मराज हो जो धनुर्विद्या में माहिर हो जो सुंदर हो सुशील हो शक्तिशाली हो कितने गुणों ने मांग ली है ऐसा तो कोई एक व्यक्ति में इतने सारे होना संभव नहीं था तो महादेव ने उनको वरदान दिया क्या आपको जितने कोई चाहिए ऐसे ही पति आपको मिलेंगे तो उनको धर्म का धर्मराज मिला सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन मिला सुंदर नकुल सहदेव मिले और सबसे शक्तिशाली भीम मिला तो यह बहुत अंदरूनी बातें हैं बगैर रिसर्च किए हैं आप हमारे धर्म ग्रंथों पर इस तरीके के मतलब ऐसे सवाल न उठाए ठीक है और आपने महाभारत पूरी पूरी पढ़ी होगी तो आपने देखा होगा के अपमान उनका तब हुआ जब दुशासन ने वस्त्र हरण किया पूरा का पूरा कुल का नाश हो गया था नष्ट हो गया एक स्त्री अग्नि जन्मा पांच पतियों के साथ रहने वाली आपका जो यह सवाल है ना उस समय करना ने भरी सभा में कहा था कि पांच पतियों वाली पत्नी पत्नी नहीं होती वह वैसा होती है आत्मा को भी उसका खामियाजा भुगतना पड़ा कर भी करना नहीं भी अपने इस स्टेटमेंट पर बहुत रिग्रेट किया कृष्ण के बाद उसने कहा कि मेरे ऐसी बात निकली मैं क्या करूं मैं बहुत शर्मिंदा हूं क्योंकि उसको पता चला कि कोई पांच पुरुष के साथ शादी करके भी पवित्र रह सकता है और कोई स्त्री एक पुरुष के साथ रहकर भी माफ करना लेकिन वह चरित्रहीन हो सकती है उसके मन में यदि जैसे कि कलयुग में होता है शादी किसके साथ हुई उसके साथ तो निभा कर रहे हैं लेकिन जब वह समय होता है रात्रि का समय निश्चित है कभी-कभी किसके साथ में कैसे कर रहे हैं हमको लगता है कि हमारे बाग में शाहरुख खान है सलमान खान है धोनी है यह हमारे साथ में तो भाई मुझे बताइए आप मन का भाव है अभी वेश्या पर नहीं तो और क्या है आप गहराई से सोचिए हमारे धर्म ग्रंथ पर आप आप चुप मत लीजिए आपके अज्ञानता के वजह से रुकता नहीं होना चाहिए लोगों को समझ में नहीं आता और ना ही बदनाम करते हैं कम से कम ज्ञान में ज्यादा जैसी ज्यादा बजना आई अच्छी बात नहीं है भैया थोड़ा सा भी सर्च करो अपने दादा परदादा जीवित होंगे तो अपने मम्मी पापा इनके साथ बैठकर चर्चा करो ठीक से देखो पढ़ो समझो तो मैं उम्मीद करता हूं कि मेरा सवाल मेरा जवाब आपके समझ में आ गया होगा गलती बोलने में भी हो रही है कि बेवकूफ राहुल गांधी का वीडियो देख लिया व्हाट्सएप इसलिए जवाब का सवाल सवाल का जवाब है ऐसे में मैं भी बोलने में गड़बड़ कर रहा हूं गांधी सत्य मास्टर का जवाब देने से पहले मैं एक बार मोदी जी का भाषण सुनाएं

bhai mujhe aapke sawaal se se laga ek pal ke liye main galat ho sakta hoon ki shayad aap muslim hai aur aapko mahabharat ka itna zyada abhyas nahi hai isliye aapne chalo koi baat nahi aap ne sawaal kiya jawab dena mera farz hai toh draupadi jyoti uska bahut bada itihas hai mahabharat me krishna ka janam hua pehle dhrupad ka aur phir draupadi ka aaj ke niti niyam ki sabse unchi yah kalyug hai aur mahabharat ki katha jo hai na us yug ki hai sachiv ke aaj ke maapdand se aap aaj ke measurement se us samay ke niji ko aap nahi maaf kar dena bhai saheb aur vo ekdam most developed S tha kisne poocha saheb bhagwat geeta me aisa likha hai yah sahi hai kya iski pehle mere paas ek bahut accha sawaal aaya tha boli karmanye vadhikaraste hum karm karo fal ki iccha na kare toh kehne lage bole yadi hum ko salary nahi milegi toh karm karne ki prerna kaha se milegi poochne vala aakrosh me tha maine jawab nahi diya ki aap bhagwat geeta padhte samay ek baar dhyan me rakhiye ki bhagwan krishna ne vaah kahi hai arjun ke liye aapke liye nahi rahi hai aap yodha nahi hai aap usme nahi hai usko samjhne ke liye bhi itne unche sthar par aapko jana padega kyonki billi ke hath me kuch ho na lag jaaye kutte ke hath me chaandi lag jaaye vaah picha karke nikal jaega usko kya pata kya hai wahi hamari kalyug ke logo ki hai bina soche samjhe adhyayan kiye research in karte hain kisi ko bura bolte hain ab raha sawaal aapke sawaal ka toh draupadi jyoti thi jab sawamber me arjun ne draupadi ko jita aur ghar ke bahar vaah pahuchi agyatavas me se apni jhopdi ke bahar aur mummy ko unhone bola ki mummy hum kuch laye hain aap ko dikhana chahte hain toh mummy ne bagair dekhe ka beta jo bhi laye hona panchon bhai aapas me baant lo ab samajh kar wahan se shuru hui kyonki us samay mata pita ka aadar maan jo baat keh di vaah karna hi hai vaah kalyug na bhai uske baad bhi salah mashwara hua ab isme ek baat aur hai draupadi ne bhi bahut tapasya ki thi aur mahadev se unhone yah manga tha ki mujhe aisa pati chahiye toh dharm nasht ho Dharamraj ho jo dhanurvidya me maahir ho jo sundar ho sushil ho shaktishali ho kitne gunon ne maang li hai aisa toh koi ek vyakti me itne saare hona sambhav nahi tha toh mahadev ne unko vardaan diya kya aapko jitne koi chahiye aise hi pati aapko milenge toh unko dharm ka Dharamraj mila sarvashreshtha dhanurdhar arjun mila sundar nakul sahdev mile aur sabse shaktishali bhim mila toh yah bahut andaruni batein hain bagair research kiye hain aap hamare dharm granthon par is tarike ke matlab aise sawaal na uthye theek hai aur aapne mahabharat puri puri padhi hogi toh aapne dekha hoga ke apman unka tab hua jab dushasan ne vastra haran kiya pura ka pura kul ka naash ho gaya tha nasht ho gaya ek stree agni janma paanch patiyon ke saath rehne wali aapka jo yah sawaal hai na us samay karna ne bhari sabha me kaha tha ki paanch patiyon wali patni patni nahi hoti vaah waisa hoti hai aatma ko bhi uska khamiyaja bhugatna pada kar bhi karna nahi bhi apne is statement par bahut rigret kiya krishna ke baad usne kaha ki mere aisi baat nikli main kya karu main bahut sharminda hoon kyonki usko pata chala ki koi paanch purush ke saath shaadi karke bhi pavitra reh sakta hai aur koi stree ek purush ke saath rahkar bhi maaf karna lekin vaah charitraheen ho sakti hai uske man me yadi jaise ki kalyug me hota hai shaadi kiske saath hui uske saath toh nibha kar rahe hain lekin jab vaah samay hota hai ratri ka samay nishchit hai kabhi kabhi kiske saath me kaise kar rahe hain hamko lagta hai ki hamare bagh me shahrukh khan hai salman khan hai dhoni hai yah hamare saath me toh bhai mujhe bataiye aap man ka bhav hai abhi vaishya par nahi toh aur kya hai aap gehrai se sochiye hamare dharm granth par aap aap chup mat lijiye aapke agyanata ke wajah se rukata nahi hona chahiye logo ko samajh me nahi aata aur na hi badnaam karte hain kam se kam gyaan me zyada jaisi zyada bajna I achi baat nahi hai bhaiya thoda sa bhi search karo apne dada pardada jeevit honge toh apne mummy papa inke saath baithkar charcha karo theek se dekho padho samjho toh main ummid karta hoon ki mera sawaal mera jawab aapke samajh me aa gaya hoga galti bolne me bhi ho rahi hai ki bewakoof rahul gandhi ka video dekh liya whatsapp isliye jawab ka sawaal sawaal ka jawab hai aise me main bhi bolne me gadbad kar raha hoon gandhi satya master ka jawab dene se pehle main ek baar modi ji ka bhashan sunaen

भाई मुझे आपके सवाल से से लगा एक पल के लिए मैं गलत हो सकता हूं कि शायद आप मुस्लिम है और आपक

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