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आचार्य प्रशांत

IIT-IIM Alumnus, Ex Civil Services Officer, Mystic

8:24

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को लेकर के छात्रों से चिपके हुए उन्होंने नियत कर्म का अर्थ करें कि जो भी शास्त्र वेद कर मत करना जो जैसा चल रहा है उसी जोकर सामने आ जाए वही अर्जुन अपने नियत कर्म का और कोई कर मत कर पहले सत्र में हुए थे अभी तक है कि नहीं वापस चले गए अर्जुन भाग गया है कैसे पता चलेगा कि क्या है हमको क्या सुख आनंद छुट्टी हो रही नियत कर्म कर्म आनंद के पास नहीं जा रहा हूं और जो उससे पूछता हूं जो आपको आपके स्वभाव के पास ले जाता हूं और जो आपके स्वभाव से उठता हूं चुनाव को लेकर के कोई कयास लगाने की जरूरत नहीं है क्या आपका जो भी कुछ आप सोचते रहते हो अपने बारे में सवाल नहीं है आपका जहां आप मौन हो जाते हो जहां आप जानने के क्षेत्र में प्रवेश कर जाते हैं वहां का स्वभाव जिनके बारे में आप को रंच मात्र भी ज्ञान ना हो उसको अपना सुनाओ जाने दो आप चुप कर दे और ऐसा चुप कर दे कि आपकी जानने की उत्सुकता भी ठंडी पड़ जाए उसको सुनाओ जानिए जिसको आज भी ना जानते हो लेकिन फिर भी उसे भरोसा आता हूं उसको सुबह हो जाएंगे आप को इस दिशा में ले जाता हूं कुछ भी आसमान से उठता हो वही आपका नियत कर्म कुछ दिखा करो ने कहा है कि अर्जुन का नियत कर्म हुआ युद्ध करना और कृष्ण अर्जुन को युद्ध के लिए प्रेरित कर रहे हैं क्योंकि उसकी नियति है उसका वर्णन क्यों राजपूत क्षत्रिय है तो इसलिए कृष्ण उसको प्रेरित करें हैं लड़ने के लिए हालांकि एक दोस्त लोग भी ऐसे हैं इंशाल्लाह के ही मिलता है कृष्ण 12 10 खुल करके भी यही कहा है कि अर्जुन की बात को पूरी धर्म पहुंचना होगा मात्र एक दोस्तों को यूंही उठा लेना ठीक नहीं है टुकड़े उठाना कभी भी ठीक नहीं होता है तो गीता को समझना होगा कृष्ण पूरी स्थिति को परखा है को जानते हैं कि इस मौके पर एक ही चीज है जो एक शांत मन कर सकता है वह है कि आप जब भी सामने खड़ी ही हो गई है तो लड़ने की बात बुरी लगती है हमें लगता है जो अशांत है वह तो भाई के सामने थर थर कापे को शांति कहते हैं शांति नहीं कहते चल चल रहा है अमन से ज्वाला उठ रही हो तो कैसे जा सकते हो तुम शांत हो सिर्फ इसलिए क्योंकि जर्मन कप्तानों का तोहार दिखा देगा तो नहीं पाओगे शांति ला सकता था शांत रह करके कोशिश कर ली गई ना हो शांत रह करके वह सब कुछ पा लिया गया जो हमारे ऊपर थोपा गया अब शांत रहकर भी कर लेंगे शांत रहकर के बन जा सकते थे शांत रहकर के शांत रहकर के चीरहरण देख सकते थे शांत रहकर अकेला छोड़ सकते थे शांत रहकर के दूध पीड़ा में खा सकते थे सिद्धांत है कि युद्ध करने में क्या परेशानी और यहां डिस्को शांति के नाम पर जूते देखना भागते देखना दुम दबाकर देखना उसको जान लेना कि तुम ही दबा रहा है इससे ज्यादा अशांत कोई नहीं ली जाती है आपकी सुलझ जाना जो कुछ भी आपको सुलझाओ में की तरफ ले जा रहा हो उसको लेकर के कृष्ण कहते हैं करने की जो जो आपको और हल्का करता हूं जो कुछ इकट्ठा कर रखा है मुक्त करता हूं और दूसरा विकल्प हो कुछ ऐसा कर डालने का जो 24 घाटे और बांध देता हूं पर कुछ और बढ़ा देता हूं कृष्ण क्या आपको सुना दी है क्या सलाह दी अर्जुन क्या है और जीवन में भी आपके सामने फैसले की घड़ी है कि कल के मौके आए हैं बस से इस सलाह को कसौटी बना लीजिएगा चल दीजिएगा किस ने यही कहा आप सर नमस्ते सर को चल देना आज रंग है

ko lekar ke chhatro se chipake hue unhone niyat karm ka arth kare ki jo bhi shastra ved kar mat karna jo jaisa chal raha hai usi joker saamne aa jaaye wahi arjun apne niyat karm ka aur koi kar mat kar pehle satra mein hue the abhi tak hai ki nahi wapas chale gaye arjun bhag gaya hai kaise pata chalega ki kya hai hamko kya sukh anand chhutti ho rahi niyat karm karm anand ke paas nahi ja raha hoon aur jo usse poochta hoon jo aapko aapke swabhav ke paas le jata hoon aur jo aapke swabhav se uthata hoon chunav ko lekar ke koi kayas lagane ki zarurat nahi hai kya aapka jo bhi kuch aap sochte rehte ho apne bare mein sawaal nahi hai aapka jaha aap maun ho jaate ho jaha aap jaanne ke kshetra mein pravesh kar jaate hain wahan ka swabhav jinke bare mein aap ko ranch matra bhi gyaan na ho usko apna sunao jaane do aap chup kar de aur aisa chup kar de ki aapki jaanne ki utsukata bhi thandi pad jaaye usko sunao janiye jisko aaj bhi na jante ho lekin phir bhi use bharosa aata hoon usko subah ho jaenge aap ko is disha mein le jata hoon kuch bhi aasman se uthata ho wahi aapka niyat karm kuch dikha karo ne kaha hai ki arjun ka niyat karm hua yudh karna aur krishna arjun ko yudh ke liye prerit kar rahe hain kyonki uski niyati hai uska varnan kyon rajput kshatriya hai toh isliye krishna usko prerit kare hain ladane ke liye halaki ek dost log bhi aise hain inshallah ke hi milta hai krishna 12 10 khul karke bhi yahi kaha hai ki arjun ki baat ko puri dharm pahunchana hoga matra ek doston ko yunhi utha lena theek nahi hai tukde uthana kabhi bhi theek nahi hota hai toh geeta ko samajhna hoga krishna puri sthiti ko parkha hai ko jante hain ki is mauke par ek hi cheez hai jo ek shaant man kar sakta hai vaah hai ki aap jab bhi saamne khadi hi ho gayi hai toh ladane ki baat buri lagti hai hamein lagta hai jo ashant hai vaah toh bhai ke saamne thar thar kape ko shanti kehte hain shanti nahi kehte chal chal raha hai aman se jwala uth rahi ho toh kaise ja sakte ho tum shaant ho sirf isliye kyonki german kaptano ka tohar dikha dega toh nahi paoge shanti la sakta tha shaant reh karke koshish kar li gayi na ho shaant reh karke vaah sab kuch paa liya gaya jo hamare upar thopa gaya ab shaant rahkar bhi kar lenge shaant rahkar ke ban ja sakte the shaant rahkar ke shaant rahkar ke cheerharan dekh sakte the shaant rahkar akela chod sakte the shaant rahkar ke doodh peeda mein kha sakte the siddhant hai ki yudh karne mein kya pareshani aur yahan disco shanti ke naam par joote dekhna bhagte dekhna dum dabakar dekhna usko jaan lena ki tum hi daba raha hai isse zyada ashant koi nahi li jaati hai aapki sulajh jana jo kuch bhi aapko suljhao mein ki taraf le ja raha ho usko lekar ke krishna kehte hain karne ki jo jo aapko aur halka karta hoon jo kuch ikattha kar rakha hai mukt karta hoon aur doosra vikalp ho kuch aisa kar dalne ka jo 24 ghate aur bandh deta hoon par kuch aur badha deta hoon krishna kya aapko suna di hai kya salah di arjun kya hai aur jeevan mein bhi aapke saamne faisle ki ghadi hai ki kal ke mauke aaye hain bus se is salah ko kasouti bana lijiega chal dijiyega kis ne yahi kaha aap sir namaste sir ko chal dena aaj rang hai

को लेकर के छात्रों से चिपके हुए उन्होंने नियत कर्म का अर्थ करें कि जो भी शास्त्र वेद कर मत

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Dr Sampadananda Mishra

Sanskrit scholar, Author, Director, Sri Aurobindo Foundation for Indian Culture

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कर्म क्या है साधारण अर्थ में हम जो कुछ भी करते हैं उसको कर्म करते हैं जो कुछ हमसे होता है मगर लोग मानते हैं कि हम हाथ पर से शरीर से जो करते हैं वह कम है लेकिन हमारे प्राण शरीर यह तीनों में से जो कुछ होता है उसका शरीर गर्म पानी गर्म और मानस कर मन में एक विचार आया और मन के विचारों को हम विचारों के पीछे जो कुछ होता रहता है और विचारों के साथ जो कुछ होता रहता है हमारे प्राणिक सत्ता में 131 भाग उगता है एक भाग का उदय होता है तो वह जितने भी क्रियाएं प्राणिक सत्ता के पर जो कुछ होता है इन सब को हम कर्म करें अगर भक्तों के साथ ताल मिलाकर होता है तो भागवत कर्म होता है डीजे कर्म होता है यह सचमुच में अच्छा कर्म होता जो भागवत तत्वों के साथ भागवत गुणों के साथ तालमेल नहीं रख पाता है तो हम कुकर पुष्कर इसे मानते हैं तो जितने भी प्रकार के कोई अगर शरीर से कुछ नहीं करता है जिसे बोलना कई सारे लोग मौन व्रत धारण करते हैं तो एक कर्म है बोलना भी एक कारण है कि हम मौन व्रत धारण की बाहर से लगता है कि वह कोई नहीं कर्म करता है उसको बोलना नहीं होता है या दूसरे लोग चुप रहते हैं कई चीजों में चुप रहता ज्यादा बोलते हैं लेकिन हमको यह देखना पड़ेगा कि कोई बोलता है या नहीं बोलता है या जो नहीं बोलता है जो मुंह में रहता है उसका कर्म नहीं होता है ऐसा नहीं है उल्टा तो नहीं है लेकिन उसके मन में प्राण में कई प्रकार के संवाद होते रहते हैं तो वह भी मतलब कारण एक अंदर ही अंदर होता रहता है मानव कर्म होता रहता है लेकिन जो बातचीत कर्म है बाकी दृष्टि से दिखाई नहीं देता है लोग सोचते बहुत ज्यादा बोलता नहीं बुरा मत सुनो बुरा मत बुरा मत बोलो हमने तो चुप करा दिया उनके आंखें बंद कर दी उनके काम बंद कर दिया उनके मुंह बंद कर के अंदर क्या चलता है उस पर हमने ध्यान नहीं दिया उसे समय कोई चुप रहता है उल्टा नहीं लेकिन अंदर ही अंदर बहुत चलता रहता है और जो हिंसा का भागता रहता है और दर्दनाक है कर्म से अंतर कर मुझे मानस कर्मियों ने यह कहा गया है कि जो माहिती आणि संज्ञा व्यापारियों को सहन कर लिया संयमित कर लिया मन ही मन ही कर्म होता रहता है तो यह मिठाचा तू इस प्रकार हमको देखना पड़ेगा जो कार में किस जो गति है एक तो है हम मानते हैं कि जो कुछ हमारे मन प्राण शरीर से होता है वह करो कर्म ही कर्म है या सही कर्म नहीं है उस पर विचार विमर्श करने के लिए तब तक मनुष्य के अंदर विवेक बुद्धि होनी चाहिए उस विवेक बुद्धि से वह जान पाएगा कि यह कर्म सही है या कर्म गलत है जो कर्म हमको भगवान के साथ जोड़ता है हमको हमारे आत्मा के साथ जोड़ता है हमारे अंदर आनंद उत्पन्न करता है और हमारी प्रगति के साधक होता है वही कारण हमारे मनीषियों की उपलब्धि के अनुसार उस कर्म को हम शुगर में मानते हैं और जो हमको पीछे चलता रहता है जो हमारे लिए दुखदायक है जो हमारे लिए समस्याएं पैदा करती है जो हमको आनंद से भर नहीं देता है वह कार में दुष्कर्म है उसका परिणाम दृश्य है और सुकर्म का परिणाम अमृत है तो इसी प्रकार और कर्म एक ऐसा तत्व है इसको समझना और उसको कर पाना बहुत ही दुष्कर कार्य है इसलिए श्रीमद्भागवत गीता में भी यह कहा गया है कहना कर्मणो गति किन कारणों की मकर में क्या कारण है क्या कर्म है कवर युग के प्रमुख स्थल कभी मुनि ऋषि लो जो अनुभवी लोग भी मोहित हो जाते हैं जान नहीं पाते हैं ताई नहीं कर पाते हैं कि क्या करना है क्या करें हम साधारण दृष्टि से हम देखें जो कुछ भी हम आसाम से होता है वह कर्म है चाहे वह मानव सो रानी हो शरीर को लेकिन कर्म सही है यह सही नहीं है वह अपने विवेक बुद्धि के अनुसार खुद को तय करना पड़ता है और जो भागवत तत्वों के साथ ताल मिलाकर होता है समझे तथा इस होता है समरसता और आनंद उत्पन्न करता है और हमको प्रगति के पथ पर आगे ले जाता है हमको हमारे आत्मा के साथ जोड़ता है इस प्रकार के कार्यक्रम होते हैं इस प्रकार का नंद नहीं दे पाता है समस्याएं पैदा करते हैं उस प्रकार के कर्म हमारे लिए लाभदायक नहीं है और उस प्रकरण को हम कुकर्म या दुष्कर्म के नाम

karm kya hai sadhaaran arth mein hum jo kuch bhi karte hain usko karm karte hain jo kuch humse hota hai magar log maante hain ki hum hath par se sharir se jo karte hain vaah kam hai lekin hamare praan sharir yah tatvo mein se jo kuch hota hai uska sharir garam paani garam aur manas kar man mein ek vichar aaya aur man ke vicharon ko hum vicharon ke peeche jo kuch hota rehta hai aur vicharon ke saath jo kuch hota rehta hai hamare pranika satta mein 131 bhag ugata hai ek bhag ka uday hota hai toh vaah jitne bhi kriyaen pranika satta ke par jo kuch hota hai in sab ko hum karm kare agar bhakton ke saath taal milakar hota hai toh bhagwat karm hota hai DJ karm hota hai yah sachmuch mein accha karm hota jo bhagwat tatvon ke saath bhagwat gunon ke saath talmel nahi rakh pata hai toh hum cooker pushkar ise maante hain toh jitne bhi prakar ke koi agar sharir se kuch nahi karta hai jise bolna kai saare log maun vrat dharan karte hain toh ek karm hai bolna bhi ek karan hai ki hum maun vrat dharan ki bahar se lagta hai ki vaah koi nahi karm karta hai usko bolna nahi hota hai ya dusre log chup rehte hain kai chijon mein chup rehta zyada bolte hain lekin hamko yah dekhna padega ki koi bolta hai ya nahi bolta hai ya jo nahi bolta hai jo mooh mein rehta hai uska karm nahi hota hai aisa nahi hai ulta toh nahi hai lekin uske man mein praan mein kai prakar ke samvaad hote rehte hain toh vaah bhi matlab karan ek andar hi andar hota rehta hai manav karm hota rehta hai lekin jo batchit karm hai baki drishti se dikhai nahi deta hai log sochte bahut zyada bolta nahi bura mat suno bura mat bura mat bolo humne toh chup kara diya unke aankhen band kar di unke kaam band kar diya unke mooh band kar ke andar kya chalta hai us par humne dhyan nahi diya use samay koi chup rehta hai ulta nahi lekin andar hi andar bahut chalta rehta hai aur jo hinsa ka bhagta rehta hai aur dardanak hai karm se antar kar mujhe manas karmiyon ne yah kaha gaya hai ki jo mahiti aani sangya vyapariyon ko sahan kar liya sanyamit kar liya man hi man hi karm hota rehta hai toh yah mithacha tu is prakar hamko dekhna padega jo car mein kis jo gati hai ek toh hai hum maante hain ki jo kuch hamare man praan sharir se hota hai vaah karo karm hi karm hai ya sahi karm nahi hai us par vichar vimarsh karne ke liye tab tak manushya ke andar vivek buddhi honi chahiye us vivek buddhi se vaah jaan payega ki yah karm sahi hai ya karm galat hai jo karm hamko bhagwan ke saath Jodta hai hamko hamare aatma ke saath Jodta hai hamare andar anand utpann karta hai aur hamari pragati ke sadhak hota hai wahi karan hamare manishiyon ki upalabdhi ke anusaar us karm ko hum sugar mein maante hain aur jo hamko peeche chalta rehta hai jo hamare liye dukhdayak hai jo hamare liye samasyaen paida karti hai jo hamko anand se bhar nahi deta hai vaah car mein dushkarm hai uska parinam drishya hai aur sukarm ka parinam amrit hai toh isi prakar aur karm ek aisa tatva hai isko samajhna aur usko kar paana bahut hi dushkar karya hai isliye shrimadbhagavat geeta mein bhi yah kaha gaya hai kehna karmano gati kin karanon ki makar mein kya karan hai kya karm hai cover yug ke pramukh sthal kabhi muni rishi lo jo anubhavi log bhi mohit ho jaate hain jaan nahi paate hain taii nahi kar paate hain ki kya karna hai kya kare hum sadhaaran drishti se hum dekhen jo kuch bhi hum assam se hota hai vaah karm hai chahen vaah manav so rani ho sharir ko lekin karm sahi hai yah sahi nahi hai vaah apne vivek buddhi ke anusaar khud ko tay karna padta hai aur jo bhagwat tatvon ke saath taal milakar hota hai samjhe tatha is hota hai samarsata aur anand utpann karta hai aur hamko pragati ke path par aage le jata hai hamko hamare aatma ke saath Jodta hai is prakar ke karyakram hote hain is prakar ka nand nahi de pata hai samasyaen paida karte hain us prakar ke karm hamare liye labhdayak nahi hai aur us prakaran ko hum kukarm ya dushkarm ke naam

कर्म क्या है साधारण अर्थ में हम जो कुछ भी करते हैं उसको कर्म करते हैं जो कुछ हमसे होता है

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Shashi

Author, Spiritual Blogger

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करो बहुत सिंपल शब्दों में तो यह है कि आपके सामने जो आता है करने के लिए वापस को करें वही आपका करना कि भगवान कृष्ण जी आप जो भी चाहते हैं उसको करना तो आपको उसके पीछे भागना नहीं है वह आपके व्हाट्सएप पर याद आएगा आपके अनुसार आपका काम सिर्फ इतना है कि आप अपनी पूरी शक्ति से लगन से मेहनत से उसको पूरा करें और उसके बाद उसके फल की चिंता ना कर के उसे दूसरी लो पिकअप गाड़ी पूरी करेगी तो जो भी आपके दिनचर्या में आपके कुछ काम आता है कुछ भी आप पूरी तरह से पालन करना ही करना और यही इस कलयुग बिजली कर्मियों की कथा

karo bahut simple shabdon mein toh yah hai ki aapke saamne jo aata hai karne ke liye wapas ko kare wahi aapka karna ki bhagwan krishna ji aap jo bhi chahte hain usko karna toh aapko uske peeche bhaagna nahi hai vaah aapke whatsapp par yaad aayega aapke anusaar aapka kaam sirf itna hai ki aap apni puri shakti se lagan se mehnat se usko pura kare aur uske baad uske fal ki chinta na kar ke use dusri lo pickup gaadi puri karegi toh jo bhi aapke dincharya mein aapke kuch kaam aata hai kuch bhi aap puri tarah se palan karna hi karna aur yahi is kalyug bijli karmiyon ki katha

करो बहुत सिंपल शब्दों में तो यह है कि आपके सामने जो आता है करने के लिए वापस को करें वही आप

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Kishan Kumar

Motivational speaker

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हेलो दोस्तों आप का सवाल है कर्म क्या है तो कर्म ही पूजा है और हर एक इंसान अगर महान बना है मेहनती बना है तो आप कर्म करके ही बना है और इसी का हिस्ट्री देखेंगे तो वक्त कर्म ही करके आगे बढ़ा है और कहा भी गया है आप कर्म करो फल की इच्छा मत करो तो इसलिए आप मेहनत करते जाओ करते जाओ और या मत देखो पीछे घूम कर कि हमें फल के मिलेगा आप परिश्रम करो आप अपना ल अपना कॉल पर फोकस करो और मेहनत करो पूरे दिलो जान से मन एकाग्र करके कर्म करो आपको जरूर एक ना एक दिन हम मिलेगा जो कि ऐसा हर एक व्यक्ति है कि कि कर्म ही सब श्रेष्ठ माना गया है लोग कर्म पर विश्वास करते हैं और जो विश्वास किया है अपने में घाटकोपर कर्म पर वह एक दिन जरूर महान बना है थैंक यू

hello doston aap ka sawaal hai karm kya hai toh karm hi puja hai aur har ek insaan agar mahaan bana hai mehanati bana hai toh aap karm karke hi bana hai aur isi ka history dekhenge toh waqt karm hi karke aage badha hai aur kaha bhi gaya hai aap karm karo fal ki iccha mat karo toh isliye aap mehnat karte jao karte jao aur ya mat dekho peeche ghum kar ki hamein fal ke milega aap parishram karo aap apna l apna call par focus karo aur mehnat karo poore dilo jaan se man ekagra karke karm karo aapko zaroor ek na ek din hum milega jo ki aisa har ek vyakti hai ki ki karm hi sab shreshtha mana gaya hai log karm par vishwas karte hain aur jo vishwas kiya hai apne mein ghatkopar karm par vaah ek din zaroor mahaan bana hai thank you

हेलो दोस्तों आप का सवाल है कर्म क्या है तो कर्म ही पूजा है और हर एक इंसान अगर महान बना है

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Tejnath sahu

Social Worker

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जो हम किया करते हैं वह कर्म है चाहे वह शारीरिक मानसिक कुछ भी हो सकता था बंदूक लिया करते हैं वही करवा कहलाते हैं

jo hum kiya karte hain vaah karm hai chahen vaah sharirik mansik kuch bhi ho sakta tha bandook liya karte hain wahi karva kehlate hain

जो हम किया करते हैं वह कर्म है चाहे वह शारीरिक मानसिक कुछ भी हो सकता था बंदूक लिया करते है

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मनुष्य द्वारा किया गया कार्यक्रम होता है कर्म करता है काम जब मनुष्य अपने रोजाना के कार्य को करता है चाहे वह कार्य अच्छा हो या बुरा हो वह सा कर्म होता है मनुष्य जैसा कर्म करता है उसे वैसा फल मिलता है कहा गया है कर्म ही पूजा है अतः उसके द्वारा क्या-क्या इमानदारी रावत ही उसके लिए कर्म होता है

manushya dwara kiya gaya karyakram hota hai karm karta hai kaam jab manushya apne rojana ke karya ko karta hai chahen vaah karya accha ho ya bura ho vaah sa karm hota hai manushya jaisa karm karta hai use waisa fal milta hai kaha gaya hai karm hi puja hai atah uske dwara kya kya imaandari rawat hi uske liye karm hota hai

मनुष्य द्वारा किया गया कार्यक्रम होता है कर्म करता है काम जब मनुष्य अपने रोजाना के कार्य क

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