नारद मुनि हिंदू पौराणिक कथाओं में सबसे आकर्षक पात्रों में से एक है। क्या आप हमें हिंदू पौराणिक कथाओं से नारद मुनि की कुछ दिलचस्प कहानियां बता सकते हैं?...


user

Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

3:54
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नारद मुनि जी ब्रह्म ऋषि और उनको मन की गति से चलने का वरदान भगवान नारायण के द्वारा प्राप्त है लेकिन उनको एक के शराब भी है कि बेटे किसान तो कभी क्लिक करके नहीं रह सकते हैं क्योंकि एक स्थान पर टिक करके रह जाएंगे तो फिर इस प्रकार से हरी नाम की चर्चा नहीं होगी दूसरा भी कितनी लड़ाइयां करा देंगे क्योंकि नारदजी टककारी था देव कार्य करना और राक्षसों का विनाश करवाना लेकिन एक के बाद दूसरे को दूसरे के बाद तीसरे को इस प्रकार भी कहते हुए भ्रमण करते हैं नारद जी को एक बार अभिमान हो गया कि मुझसे बड़ा इस संसार में नारायण का कोई बात नहीं है और मैं संसार का सबसे ब्रहमचारी हूं मेरे समान कोई भी ब्रह्मचर्य का पालन नहीं कर सकता है भगवान श्रीहरि नहीं यह जान लिया मेरे भक्तों को बहुत बड़ा अभिमान हो गया है उन्होंने क्या किया कि एक सुंदर स्त्री का रूप धारण किया यह योग माया को सुंदर स्त्री का रूप धारण करवाया और वह अपने महल के ऊपर अपने बाल सुखाने लगे नारे जी ऊपर छोड़ कर के जा रहे थे तो उस लड़की के सौंदर्य को देखकर के नारद जी का मन मोहित हो गया और वे भूल गए कि मैं ब्रह्म ऋषि हूं मियां में ब्रह्मचर्य का पालन करने वाला हूं और मैं उस लड़की के समुचित से और कहा कि ही सुंदरी मैं तुम से विवाह करना चाहता हूं तो उसने कहा कि परसों मेरा नंबर है आप सब कुछ में पधारी है और मैं निश्चित रूप से आप और योग्य होंगे तो मैं आपको बरन कर लूंगी इस प्रकार से उसके सौंदर्य से मुक्त मोहित होकर के नारद जी वापिस आए और उन्होंने भगवान विष्णु का स्मरण किया या विष्णु जी का अपमान किया भगवान विष्णु से कहा कि एगो श्रीहरि मुझे कुछ दिनों के लिए आप का रूप दे दो उस श्रीहरि ने कहा तथास्तु अब नारदजी को हरि भगवान नारायण जी ने हरि का रूप दे दिया हर एक बंदर को भी कहते हैं हरिश्चंद्र को भी कहते हैं उनको भी कहते हैं और बंदर का रूप दे दिया अब नारदजी बंदर के रूप को लेकर क्यों उस नंबर पर चले गए वहां समस्त राजाओं नहीं तो अंदर को देखा तो फिर सवारने लगे उधर वह राजकुमारी बी आई जो लक्ष्मी जी का रूप थी और उसने भी नाराज जी को देखा बंदर रूप में तो वह भी हंस करके निकल गई रिचा करके उसने भगवान विष्णु के गले में वरमाला पहना दी इस बात से नाराज जी बहुत क्रोधित हुए उन्होंने कहा कि हृदय नारायण तुमने जिस तरह से मेरा मजाक उड़ाया है देश शराब देता तुम भी एक स्त्री के वियोग में किसी प्रकार तड़पाओगे जब भगवान विष्णु ने कहा हंसते हुए नाराज तुमको तुमने एक बात बताता हूं कि जैसे एक मां भोजन बना रही है चूल्हे पर और उसका छोटा सा मुन्ना बालक को साग में हाथ दे रहा है तो मां क्या करेगी कि मां अपना हाथ जला लेगी लेकिन बालक के हाथ को जलने नहीं देगी फिर ठीक इसी प्रकार मैंने किया तो मारे ब्रह्मचर्य व्रत टूटता है इसलिए मैंने तुमको यह रूप दिया था तब नारदजी को बड़ा दुख हुआ और नारद जी ने भगवान विष्णु के चरण पकड़ लिया कहां की गोविंद निरंतर आप तो दे दिया है लेकिन यही बंदर रूप तुम्हारे काम आएगा और श्री राम के जन्म के समय में इसी बंदर रूप में भगवान की सहायता की थी

narad muni ji Brahma rishi aur unko man ki gati se chalne ka vardaan bhagwan narayan ke dwara prapt hai lekin unko ek ke sharab bhi hai ki bete kisan toh kabhi click karke nahi reh sakte hain kyonki ek sthan par tick karke reh jaenge toh phir is prakar se hari naam ki charcha nahi hogi doosra bhi kitni ladaiyan kara denge kyonki naradji takkari tha dev karya karna aur rakshason ka vinash karwana lekin ek ke baad dusre ko dusre ke baad teesre ko is prakar bhi kehte hue bhraman karte hain narad ji ko ek baar abhimaan ho gaya ki mujhse bada is sansar me narayan ka koi baat nahi hai aur main sansar ka sabse brahamchari hoon mere saman koi bhi brahmacharya ka palan nahi kar sakta hai bhagwan shrihari nahi yah jaan liya mere bhakton ko bahut bada abhimaan ho gaya hai unhone kya kiya ki ek sundar stree ka roop dharan kiya yah yog maya ko sundar stree ka roop dharan karvaya aur vaah apne mahal ke upar apne baal sukhane lage nare ji upar chhod kar ke ja rahe the toh us ladki ke saundarya ko dekhkar ke narad ji ka man mohit ho gaya aur ve bhool gaye ki main Brahma rishi hoon miyan me brahmacharya ka palan karne vala hoon aur main us ladki ke samuchit se aur kaha ki hi sundari main tum se vivah karna chahta hoon toh usne kaha ki parso mera number hai aap sab kuch me padhari hai aur main nishchit roop se aap aur yogya honge toh main aapko baran kar lungi is prakar se uske saundarya se mukt mohit hokar ke narad ji vaapas aaye aur unhone bhagwan vishnu ka smaran kiya ya vishnu ji ka apman kiya bhagwan vishnu se kaha ki ego shrihari mujhe kuch dino ke liye aap ka roop de do us shrihari ne kaha tathastu ab naradji ko hari bhagwan narayan ji ne hari ka roop de diya har ek bandar ko bhi kehte hain harishchandra ko bhi kehte hain unko bhi kehte hain aur bandar ka roop de diya ab naradji bandar ke roop ko lekar kyon us number par chale gaye wahan samast rajaon nahi toh andar ko dekha toh phir savarane lage udhar vaah rajkumari be I jo laxmi ji ka roop thi aur usne bhi naaraj ji ko dekha bandar roop me toh vaah bhi hans karke nikal gayi richa karke usne bhagwan vishnu ke gale me varmala pehna di is baat se naaraj ji bahut krodhit hue unhone kaha ki hriday narayan tumne jis tarah se mera mazak udaya hai desh sharab deta tum bhi ek stree ke viyog me kisi prakar tadapaoge jab bhagwan vishnu ne kaha hansate hue naaraj tumko tumne ek baat batata hoon ki jaise ek maa bhojan bana rahi hai choolhe par aur uska chota sa munna balak ko saag me hath de raha hai toh maa kya karegi ki maa apna hath jala legi lekin balak ke hath ko jalne nahi degi phir theek isi prakar maine kiya toh maare brahmacharya vrat tootata hai isliye maine tumko yah roop diya tha tab naradji ko bada dukh hua aur narad ji ne bhagwan vishnu ke charan pakad liya kaha ki govind nirantar aap toh de diya hai lekin yahi bandar roop tumhare kaam aayega aur shri ram ke janam ke samay me isi bandar roop me bhagwan ki sahayta ki thi

नारद मुनि जी ब्रह्म ऋषि और उनको मन की गति से चलने का वरदान भगवान नारायण के द्वारा प्राप्त

Romanized Version
Likes  510  Dislikes    views  6643
WhatsApp_icon
5 जवाब
qIcon
ask
ऐसे और सवाल
Loading...
Loading...
play
user
4:07

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नारद मुनि की हिंदू पौराणिक कथाओं में कई कहानियां हैं और सभी दिलचस्प है उसमें से एक कहानी में आपको बताता हूं एक समय की बात है नारद मुनि पृथ्वी लोक पर घूमने आए तो उन्होंने एक अति सुंदर रूपवान कन्या को देखा और उनके मन में विवाह करने की इच्छा उत्पन्न हो गई तो वे भगवान श्री हरि के पास अर्थात नारायण के पास गए और उन्हें बताया कि हे प्रभु मुझे एक कन्या पसंद आ गई है और मैं उससे विवाह करना चाहता हूं पता मुझे आप का स्वरूप हरि का स्वरूप दे दो भगवान ने कहा चेताया कि देख लो सोच लो उन्होंने कहा नहीं मुझे तो हरी का ही स्वरूप दे दो भगवान ने होने का स्वरूप प्रदान कर दिया और नारद जी पुनः उसी नगरी में गए जाओ राजकन्या रहती थी भगवान उसकी नारद मुनि स्वयंवर में जाकर बैठ गए ज्ञापन की उस राज कन्या का विवाह विवाह शुरू हुआ और वह राजकन्या तो नारद जी को लगा कि अब मुझे ही बढ़ेगी क्योंकि मुझे तो हारी का स्वरूप प्राप्त है और मुझ से सुंदर कोई कोई नहीं सकता है लेकिन जब उन्होंने देखा क्यों कन्या माला लेकर उनके आगे से निकल गई और उन्होंने दूसरे व को चुन लिया तब आसपास के बेटे लो नाराज जी को देख कर आज भी रहे थे तो नाराज जीने को बड़ा गुस्सा आया उन्होंने कहा कि मेरा तो हरि का रूप है फिर मुझे कन्या ने क्यों नहीं छूना तुम्हें बड़े नाराज हुए तब उनके आसपास बैठे लोगों करते देखकर उन्होंने कहा कि मूर्खों तुम मेरा क्यों मजाक उड़ा रहे हो इस सभा में तो सबसे ज्यादा सुंदर नहीं हूं तब उन लोगों ने अन्य राजकुमारों ने नारद मुनि से कहा कि आप पहले अपना चेहरा तो किसी आईने में जाकर देखो तब नारद मुनि ने जल में जाकर अपना चेहरा देखा तो उनका स्वरूप बंदर के समान नर्सरी के समान दिखाई दिया इससे वे बड़े ही नाराज हुए और नाराज होकर भगवान नारायण को अनाप-शनाप शराब देने लगे और उन्होंने शराब दिया के नारायण तुम जब राम अवतार लोगे पृथ्वी पर तो तुम्हें पत्नी का वीडियो देना पड़ेगा गुस्से गुस्से में नहा रहा है नया सॉफ्ट नारायण को दे दिया लेकिन जब भी नारायण रूप में वापस पहुंचे तो अपनी गलती का एहसास हुआ भगवान नारायण ने कहा कि कोई बात नहीं तुमने मुझे श्राप दिया मैं ब्राह्मण का सॉफ्टवेयर तो नहीं जाने दूंगा और तुम्हारा है शराब फलीभूत होगा लेकिन तुम एक सन्यासी ब्राह्मणों और तुम्हारे मन में तनिक विवाह काया गया था और मेरी कोई गलती नहीं तुमने हरि का रूप मुझ से मांगा तो हरी तो वानर को भी कहते हैं इसलिए मैंने तुम्हें हरि का रूप दे दिया और तुम्हें विवाह से करने से बचाया तब नारद मुनि की आंखें खुल गई और वे भगवान से बड़े प्रसन्न हो गए उन्होंने अपने किए पर क्षमा मांगी और फिर से नारायण नारायण करके ब्रह्मांड में भी चलने लगे इस प्रकार से यह नारद मुनि की एक दिलचस्प कहानी है क्योंकि रामायण के अंतर्गत आती है इस प्रकार से बहुत सारी कहानियां नारद मुनि के पर हो और कभी समय मिलेगा तो आपको मैं अवश्य सुनाऊंगा

narad muni ki hindu pouranik kathao mein kai kahaniya hain aur sabhi dilchasp hai usme se ek kahani mein aapko batata hoon ek samay ki baat hai narad muni prithvi lok par ghoomne aaye toh unhone ek ati sundar rupvan kanya ko dekha aur unke man mein vivah karne ki iccha utpann ho gayi toh ve bhagwan shri hari ke paas arthat narayan ke paas gaye aur unhe bataya ki hai prabhu mujhe ek kanya pasand aa gayi hai aur main usse vivah karna chahta hoon pata mujhe aap ka swaroop hari ka swaroop de do bhagwan ne kaha chetaya ki dekh lo soch lo unhone kaha nahi mujhe toh hari ka hi swaroop de do bhagwan ne hone ka swaroop pradan kar diya aur narad ji punh usi nagari mein gaye jao rajakanya rehti thi bhagwan uski narad muni sawamber mein jaakar baith gaye gyapan ki us raj kanya ka vivah vivah shuru hua aur vaah rajakanya toh narad ji ko laga ki ab mujhe hi badhegi kyonki mujhe toh haari ka swaroop prapt hai aur mujhse se sundar koi koi nahi sakta hai lekin jab unhone dekha kyon kanya mala lekar unke aage se nikal gayi aur unhone dusre va ko chun liya tab aaspass ke bete lo naaraj ji ko dekh kar aaj bhi rahe the toh naaraj jeene ko bada gussa aaya unhone kaha ki mera toh hari ka roop hai phir mujhe kanya ne kyon nahi chhuna tumhe bade naaraj hue tab unke aaspass baithe logo karte dekhkar unhone kaha ki murkhon tum mera kyon mazak uda rahe ho is sabha mein toh sabse zyada sundar nahi hoon tab un logo ne anya rajkumaron ne narad muni se kaha ki aap pehle apna chehra toh kisi aaine mein jaakar dekho tab narad muni ne jal mein jaakar apna chehra dekha toh unka swaroop bandar ke saman nursery ke saman dikhai diya isse ve bade hi naaraj hue aur naaraj hokar bhagwan narayan ko anap shanap sharab dene lage aur unhone sharab diya ke narayan tum jab ram avatar loge prithvi par toh tumhe patni ka video dena padega gusse gusse mein naha raha hai naya soft narayan ko de diya lekin jab bhi narayan roop mein wapas pahuche toh apni galti ka ehsaas hua bhagwan narayan ne kaha ki koi baat nahi tumne mujhe shraap diya main brahman ka software toh nahi jaane dunga aur tumhara hai sharab falibhut hoga lekin tum ek sanyaasi brahmanon aur tumhare man mein tanik vivah kaaya gaya tha aur meri koi galti nahi tumne hari ka roop mujhse se manga toh hari toh vanar ko bhi kehte hain isliye maine tumhe hari ka roop de diya aur tumhe vivah se karne se bachaya tab narad muni ki aankhen khul gayi aur ve bhagwan se bade prasann ho gaye unhone apne kiye par kshama maangi aur phir se narayan narayan karke brahmaand mein bhi chalne lage is prakar se yah narad muni ki ek dilchasp kahani hai kyonki ramayana ke antargat aati hai is prakar se bahut saree kahaniya narad muni ke par ho aur kabhi samay milega toh aapko main avashya sunaunga

नारद मुनि की हिंदू पौराणिक कथाओं में कई कहानियां हैं और सभी दिलचस्प है उसमें से एक कहानी म

Romanized Version
Likes  99  Dislikes    views  1983
WhatsApp_icon
user

Ranjeet Singh Uppal

Retired GM ONGC

1:42
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

एक बार नारद मुनि को अपने ऊपर बहुत घमंड हो गया कि मैंने अपनी सारी इंद्रियों को वश में कर लिया है मेरे जितना भक्त पूरे ब्रह्मांड में कोई नहीं विष्णु जी को इसका आभास हुआ तो उन्होंने सोचा कि इस नाराजगी को कोई सबक सिखाना चाहिए इसलिए उन्होंने मोहनी नामक एक सुंदर कन्या के रूप में अवतार लिया और उसका संबर रचाया जब नारद मुनि को पता चला कि मोनी नाम की कोई सुंदर कन्या है तो उनके मन में जागृत हुई मैं भी उस स्वयंवर में जाऊं लेकिन उनको लगा कि इस शरीर के साथ जाऊंगा तो शायद में सफल नहीं हो सके तो उन्होंने विष्णु जी से आग्रह किया कि मेरे को कोई सुंदर सा स्वरूप प्रदान कर दीजिए तो विष्णु जी ने उनको एक बंदर का रूप प्रदान किया और जब नारद मुनि सोमवार में पहुंचे तो बहुत आशा लेकर गए थे लेकिन वहां पर उनकी काफी बेज्जती हुई उससे वह बहुत दुखी हुए और बहुत ज्यादा क्रोध वापिस आकर उन्होंने विष्णु जी को श्राप दिया कि तुमने जिस बंदर का रूप मेरे को देख कर भेजा था अगला उतार जब तुम लोगे तो वह बंदर ही तुम्हारी सहायता करेंगे अगले अवतार के रूप में जब विष्णु भगवान ने श्री राम का अवतार लिया तो लंका विजय के लिए बंदरों की सेना नहीं उनकी सहायता की

ek baar narad muni ko apne upar bahut ghamand ho gaya ki maine apni saree indriyon ko vash mein kar liya hai mere jitna bhakt poore brahmaand mein koi nahi vishnu ji ko iska aabhas hua toh unhone socha ki is narajgi ko koi sabak sikhaana chahiye isliye unhone mohni namak ek sundar kanya ke roop mein avatar liya aur uska sambar rachaya jab narad muni ko pata chala ki moni naam ki koi sundar kanya hai toh unke man mein jagrit hui main bhi us sawamber mein jaaun lekin unko laga ki is sharir ke saath jaunga toh shayad mein safal nahi ho sake toh unhone vishnu ji se agrah kiya ki mere ko koi sundar sa swaroop pradan kar dijiye toh vishnu ji ne unko ek bandar ka roop pradan kiya aur jab narad muni somwar mein pahuche toh bahut asha lekar gaye the lekin wahan par unki kaafi beijjati hui usse vaah bahut dukhi hue aur bahut zyada krodh vaapas aakar unhone vishnu ji ko shraap diya ki tumne jis bandar ka roop mere ko dekh kar bheja tha agla utar jab tum loge toh vaah bandar hi tumhari sahayta karenge agle avatar ke roop mein jab vishnu bhagwan ne shri ram ka avatar liya toh lanka vijay ke liye bandaron ki sena nahi unki sahayta ki

एक बार नारद मुनि को अपने ऊपर बहुत घमंड हो गया कि मैंने अपनी सारी इंद्रियों को वश में कर लि

Romanized Version
Likes  16  Dislikes    views  125
WhatsApp_icon
user
2:26
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लड़की से चुम्मा देते हुए पुरानी खबर है उस दुकान इस प्रकार की कोई भी बहुत खूबसूरत राजकुमारी थी उधर प्यार आता तो नाराज होते हुए उनकी शादी हो जाए उसके लिए मुसलमान के भगवान से हमारी आंखें तो विश्वास करो आप मुझे मेरा के लिए आपका चेहरा दोगी या नहीं अगर आपको पता है तो बता दीजिए मुसलमान ने कहा तो था उसके बारे में बताएं और राजकुमारी के प्रभाव पड़ता है राजकुमारी वीडियो में नरेश जी की वजह से राजकुमारी नहीं है वरमाला मामा जी के पास से निकलते हुए नहीं डालते हुए अकेले में डाल देना रानी से मेरी गलियों वाला मेघालियासन चेहरा दिखा उनका चेहरा बांध के लिए मालूम ही बैल नौजवान के पास गए हैं नारद जी वर्मा ने कहा कि आपने क्या भेजा आपने यह मेरी बहन करीना के साथ देता हूं कि आपने जैसे बाल है शादी का चेहरा मेरे चेहरे को हमारा आपसे उन्हीं के साथ बजे लेनी पड़ेगी या कर दो भारत की नजरों ने श्राप दिया और सरकार को पुरस्कार के रूप में जो है भगवान श्रीराम ने माना ग्रुप ग्रुप के एल्बम मानव जाति फायदा चमेली है इसके कारण से बनाने जनजाति छात्राओं के प्रिंट की तलवार

ladki se chumma dete hue purani khabar hai us dukaan is prakar ki koi bhi bahut khoobsurat rajkumari thi udhar pyar aata toh naaraj hote hue unki shaadi ho jaaye uske liye musalman ke bhagwan se hamari aankhen toh vishwas karo aap mujhe mera ke liye aapka chehra dogi ya nahi agar aapko pata hai toh bata dijiye musalman ne kaha toh tha uske bare me bataye aur rajkumari ke prabhav padta hai rajkumari video me naresh ji ki wajah se rajkumari nahi hai varmala mama ji ke paas se nikalte hue nahi daalte hue akele me daal dena rani se meri galiyon vala meghaliyasan chehra dikha unka chehra bandh ke liye maloom hi bail naujawan ke paas gaye hain narad ji verma ne kaha ki aapne kya bheja aapne yah meri behen kareena ke saath deta hoon ki aapne jaise baal hai shaadi ka chehra mere chehre ko hamara aapse unhi ke saath baje leni padegi ya kar do bharat ki nazro ne shraap diya aur sarkar ko puraskar ke roop me jo hai bhagwan shriram ne mana group group ke album manav jati fayda chameli hai iske karan se banane janjaati chhatraon ke print ki talwar

लड़की से चुम्मा देते हुए पुरानी खबर है उस दुकान इस प्रकार की कोई भी बहुत खूबसूरत राजकुमारी

Romanized Version
Likes  23  Dislikes    views  622
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हां नारद मुनि को सबसे अच्छे पात्रों में बताया गया है क्योंकि नारद नारद का मतलब होता है जो कभी नष्ट ना होना मतलब नहीं राजमाने नष्ट होना ना ही नष्ट होना नारद मुनि जो कि हमेशा अच्छा अजर अमर हैं वह तीनों लोगों का शेयर करते रहते हैं हमारी पृथ्वी में कहीं भी कोई अनहोनी हो ना हो यह नारद मुनि को सबसे पहले पता चल जाता है नाराज जो है ब्राह्मण के पुत्र माने गए हैं वह ब्राह्मण के पुत्र हैं और विष्णु के परम भक्त हैं एक बार नारद मुनि कोमो हो गया था और उन्होंने शादी करने की इच्छा व्यक्त की विष्णु भगवान के सामने तो विष्णु भगवान ने एक मायानगरी का निर्माण किया लक्ष्मी वहां लड़की के रूप में लड़की के रूप में प्रकट हुई और वहां सभी देवताओं को भी निमंत्रण दिया गया उसमें नारद ने विष्णु भगवान से कहा कि मैं आपका परम भक्त हूं मैं शादी करना चाहता हूं इसलिए आप हमें अपने जैसा रूप दीजिए तो नारद चौकी भगवत भक्त भगवान जानते थे कि शादी करके नारद खुश नहीं अभी यह मोह में व्याप्त है इसलिए ऐसा कर रहे हैं इसलिए उन्होंने उनको बंदर का शरीर दे दिया और उस सभा में जय और विजय नाम के दो गण भगवान के बैठे हुए थे जब नारद जी को उन्होंने बंदर का रूप देखा तो हंस रहे थे नारद जी गुस्सा में वह के बोल रहे थे कि तुम लोग क्यों हंस रहे हो और वह बार-बार जो रूप सुंदरी थी लक्ष्मी तो विष्णु कोई जय माला पहनाने वाली इसलिए कि वह तो मोह माया रूपी सभा थी तो बार-बार उठ उठ कर देख रहे थे कि वह देवी हमारे गले में हार डालेंगे लेकिन लक्ष्मी जी ने ऐसा नहीं किया देश बदल कर बैठे हुए विष्णु भगवान के गले में ही जयमाला डाला तो उन्होंने कहा कि नारद जी आप अपना चेहरा थोड़ा जल में जा कर देखिए जब उन्होंने जल में अपने चेहरे को देखा बंदर जैसी शक्ल थी तो उसी समय उन्होंने विष्णु भगवान को श्राप दिया कि जिस इतना भयंकर चेहरा जो आपने हमें दिया है यही चेहरा एक दिन आपका सहयोग करेगा और इसीलिए जब भगवान विष्णु राम अवतार में जन्म लिया राम के रूप में जन्म लिए सीता को वनवास हुआ तो बंदरों ने उनकी सहायता की उसी नारद मुनि के श्राप के कारण ही

haan narad muni ko sabse acche patron me bataya gaya hai kyonki narad narad ka matlab hota hai jo kabhi nasht na hona matlab nahi rajmane nasht hona na hi nasht hona narad muni jo ki hamesha accha ajar amar hain vaah tatvo logo ka share karte rehte hain hamari prithvi me kahin bhi koi anahoni ho na ho yah narad muni ko sabse pehle pata chal jata hai naaraj jo hai brahman ke putra maane gaye hain vaah brahman ke putra hain aur vishnu ke param bhakt hain ek baar narad muni como ho gaya tha aur unhone shaadi karne ki iccha vyakt ki vishnu bhagwan ke saamne toh vishnu bhagwan ne ek mayanagari ka nirmaan kiya laxmi wahan ladki ke roop me ladki ke roop me prakat hui aur wahan sabhi devatao ko bhi nimantran diya gaya usme narad ne vishnu bhagwan se kaha ki main aapka param bhakt hoon main shaadi karna chahta hoon isliye aap hamein apne jaisa roop dijiye toh narad chowki bhagwat bhakt bhagwan jante the ki shaadi karke narad khush nahi abhi yah moh me vyapt hai isliye aisa kar rahe hain isliye unhone unko bandar ka sharir de diya aur us sabha me jai aur vijay naam ke do gan bhagwan ke baithe hue the jab narad ji ko unhone bandar ka roop dekha toh hans rahe the narad ji gussa me vaah ke bol rahe the ki tum log kyon hans rahe ho aur vaah baar baar jo roop sundari thi laxmi toh vishnu koi jai mala pahnane wali isliye ki vaah toh moh maya rupee sabha thi toh baar baar uth uth kar dekh rahe the ki vaah devi hamare gale me haar daalenge lekin laxmi ji ne aisa nahi kiya desh badal kar baithe hue vishnu bhagwan ke gale me hi jaymala dala toh unhone kaha ki narad ji aap apna chehra thoda jal me ja kar dekhiye jab unhone jal me apne chehre ko dekha bandar jaisi shakl thi toh usi samay unhone vishnu bhagwan ko shraap diya ki jis itna bhayankar chehra jo aapne hamein diya hai yahi chehra ek din aapka sahyog karega aur isliye jab bhagwan vishnu ram avatar me janam liya ram ke roop me janam liye sita ko vanvas hua toh bandaron ne unki sahayta ki usi narad muni ke shraap ke karan hi

हां नारद मुनि को सबसे अच्छे पात्रों में बताया गया है क्योंकि नारद नारद का मतलब होता है जो

Romanized Version
Likes  10  Dislikes    views  144
WhatsApp_icon
qIcon
ask

Related Searches:
narad muni ki mala ;

QuestionsProfiles

Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is available in 11 Indian languages. Users ask questions on 100s of topics related to love, life, career, politics, religion, sports, personal care etc. We have 1000s of experts from different walks of life answering questions on the Vokal App. People can also ask questions directly to experts apart from posting a question to the entire answering community. If you are an expert or are great at something, we invite you to join this knowledge sharing revolution and help India grow. Download the Vokal App!