जब रावण ने सीता को छुआ भी नहीं था तो रावण को एक बहुत ही क्रूर चरित्र के रूप में क्यों दिखाया गया?...


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Ashok Bajpai

Rtd. Additional Collector P.C.S. Adhikari

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BK Vishal

Rajyoga Trainer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार मैं तो पहले इस बात का समर्थन ही नहीं करूंगा कि रावण जैसा कोई व्यक्ति था यह सीता जैसी कोई बेबी फिश का प्रण किया गया यह सब शिक्षा देने के लिए कुछ नाट्य रूपांतरण करके खाने की विधियां दी और जहां आप ही कहते हो कि रावण ने सीता को छुआ ही नहीं तो कहानी तो यह दिखाती है कि छूने का प्रयास तो किया उसने मगर क्योंकि सीता पतिव्रता पतिव्रता दिन तो लिया उसको उठा कर के तो खींच कर के अपनी दिखा जहां तक आपका प्रश्न नहीं है कि छुआ भी नहीं था और 24 को क्रूर शासक बताया क्रूर शासक तो इसलिए होता है कि उसने वैसा की कहानियां बताया कि उत्तरी को छोड़ा तो अलग बात थी लेकिन उसके अलावा भी उसमें बहुत कुत्ते किए थे हमें कृष्ण को साधु को अच्छे काम करने वालों को धर्म का काम करने वालों को उसने विद्वान संतों देवी देवताओं को नक्षत्रों को अपना गुलाम बना बाहुबली बाहुबली के भक्ति का भी प्रयोग किया कहीं शक्ति कभी पूरी होती है परंतु लोगों को जबरन उनकी मर्जी के विरुद्ध अधिकार तेलिया सबसे बड़ा दिखाने का बताने का विषय था कि उसके अंदर मुंबई पैदा हो चुका था और अपनी भक्ति के मन से कुछ भी कर सकता है कोई स्त्री को छूना ना छूना तो एक बात है काम विकार तो एक है परंतु उसके अंदर क्रोध भीतर लोग भी था वह भी था और अहंकार भी था इसलिए रावण तो पंच भूतों का एक प्रतीक है रावण शब्द का ही अर्थ है रुलाने वाला दुख देने वाला यह बात भी सकते हैं कि उसको विद्वान भी लिखा गया विद्वान व्यक्ति ही जगदंब में आ जाता है तो उसकी वीडियो उसकी शत्रु हो जाती है कितना शुरू हो जाती है उसको अपने पड़े हुए नॉलेज पर इतना गर्म हो जाता है कि वह धर्म क्या है धर्म क्या है यह भी भूल जाता है इसमें ही अंतर समझने की जरूरत है कि चोरी और प्रैक्टिकल में बहुत अंतर हो जाता है कुछ चीजें पॉलिटिकल होती है और वर्तमान के धरातल पर तो उनका प्रैक्टिकल कुछ और हो जाता है रावण कैसे चरित्र बना है समाज में रावण चरित्र के रूप में हम जी रहे हैं वह मनुष्य मनुष्य मनुष्य का मनुष्य का चरित्र कैसा है जैसा कि बड़े बड़े ज्ञानी बावजूद इसके कामी क्रोधी खुद स्वीकार भी करते देवी देवताओं के सामने मैं मुरकामी मैं सेवक तुम स्वामी मेकअप टीमें को धीमा करो जब कोई बाहर आ करके कहता है तो नहीं मानते वजह यह है कि सामने वाले इसीलिए हम खुद ही रावण का बड़ा से बड़ा पुतला भी संभाल कर 1 साल के बाद फिर भी हम समझ ही नहीं पाते रावण का चरित्र है किस का रावण है कौन हम तो यही मानकर चलते सोने की लंका थी जहां एक राजा रावण रहता था जिसमें स्थिति पर गौर पापा 4 किया था जिस को मारने के लिए आपने हमारी एक कहानी कहानी के माध्यम से लोगों के चरित्र पर चोट पहुंचाने का प्रयास जरूर किया है क्या परंतु लोग अपनी विद्वता के अहंकार में यह मानते हैं कि कहानी रावण की और राम की थी हमें तो कोई दोष नहीं समझते कि हमारे ही भीतर के चरित्र को चित्रित किया गया है राम और रावण की कहानी के रूप में इसको बहुत गहराई से समझने की जरूरत है

namaskar main toh pehle is baat ka samarthan hi nahi karunga ki ravan jaisa koi vyakti tha yah sita jaisi koi baby fish ka pran kiya gaya yah sab shiksha dene ke liye kuch natya rupantaran karke khane ki vidhiyan di aur jaha aap hi kehte ho ki ravan ne sita ko chhua hi nahi toh kahani toh yah dikhati hai ki chune ka prayas toh kiya usne magar kyonki sita PATIVRATA PATIVRATA din toh liya usko utha kar ke toh khinch kar ke apni dikha jaha tak aapka prashna nahi hai ki chhua bhi nahi tha aur 24 ko krur shasak bataya krur shasak toh isliye hota hai ki usne waisa ki kahaniya bataya ki uttari ko choda toh alag baat thi lekin uske alava bhi usme bahut kutte kiye the hamein krishna ko sadhu ko acche kaam karne walon ko dharm ka kaam karne walon ko usne vidhwaan santo devi devatao ko nakshatron ko apna gulam bana bahubali bahubali ke bhakti ka bhi prayog kiya kahin shakti kabhi puri hoti hai parantu logo ko jabran unki marji ke viruddh adhikaar teliya sabse bada dikhane ka batane ka vishay tha ki uske andar mumbai paida ho chuka tha aur apni bhakti ke man se kuch bhi kar sakta hai koi stree ko chhuna na chhuna toh ek baat hai kaam vikar toh ek hai parantu uske andar krodh bheetar log bhi tha vaah bhi tha aur ahankar bhi tha isliye ravan toh punch bhooton ka ek prateek hai ravan shabd ka hi arth hai rulaane vala dukh dene vala yah baat bhi sakte hain ki usko vidhwaan bhi likha gaya vidhwaan vyakti hi jagdamb me aa jata hai toh uski video uski shatru ho jaati hai kitna shuru ho jaati hai usko apne pade hue knowledge par itna garam ho jata hai ki vaah dharm kya hai dharm kya hai yah bhi bhool jata hai isme hi antar samjhne ki zarurat hai ki chori aur practical me bahut antar ho jata hai kuch cheezen political hoti hai aur vartaman ke dharatal par toh unka practical kuch aur ho jata hai ravan kaise charitra bana hai samaj me ravan charitra ke roop me hum ji rahe hain vaah manushya manushya manushya ka manushya ka charitra kaisa hai jaisa ki bade bade gyani bawajud iske kami krodhi khud sweekar bhi karte devi devatao ke saamne main murkami main sevak tum swami makeup teamen ko dheema karo jab koi bahar aa karke kahata hai toh nahi maante wajah yah hai ki saamne waale isliye hum khud hi ravan ka bada se bada putalaa bhi sambhaal kar 1 saal ke baad phir bhi hum samajh hi nahi paate ravan ka charitra hai kis ka ravan hai kaun hum toh yahi maankar chalte sone ki lanka thi jaha ek raja ravan rehta tha jisme sthiti par gaur papa 4 kiya tha jis ko maarne ke liye aapne hamari ek kahani kahani ke madhyam se logo ke charitra par chot pahunchane ka prayas zaroor kiya hai kya parantu log apni vidwata ke ahankar me yah maante hain ki kahani ravan ki aur ram ki thi hamein toh koi dosh nahi samajhte ki hamare hi bheetar ke charitra ko chitrit kiya gaya hai ram aur ravan ki kahani ke roop me isko bahut gehrai se samjhne ki zarurat hai

नमस्कार मैं तो पहले इस बात का समर्थन ही नहीं करूंगा कि रावण जैसा कोई व्यक्ति था यह सीता जै

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रावण ने सीता कुछ हुआ नहीं था ऐसा हुआ है दो धर्मों में जो सीरियल वगैरह टीवी पर आते रहे अभी लिखा हुआ है रावण की अग्नि वर्षा उठाकर ले आना यह मांगी है और उसकी उसको जबरदस्ती अपने पास रखना अपने यहां रखना यह मांगी है तू क्रूरता इसी में है कि आप नियम के विरुद्ध कोई अपनी मर्जी से आ रहा है तो आने दो अब अपनी मर्जी नहीं है उसके खिलाफ उसकी मर्जी के खिलाफ कोई काम करोगे और सीधी रामचंद्र जी को चुनौती दी कि देखो तुमने जो है मेरी बहन की नाक और कान काटे उसकी बहन की जबरदस्ती विभाग की जो है भाई को बुरा लगा किसी को बुरा लगता है तू इस्तेमाल किया था सीता जी की इच्छा के विरुद्ध

ravan ne sita kuch hua nahi tha aisa hua hai do dharmon me jo serial vagera TV par aate rahe abhi likha hua hai ravan ki agni varsha uthaakar le aana yah maangi hai aur uski usko jabardasti apne paas rakhna apne yahan rakhna yah maangi hai tu krurta isi me hai ki aap niyam ke viruddh koi apni marji se aa raha hai toh aane do ab apni marji nahi hai uske khilaf uski marji ke khilaf koi kaam karoge aur seedhi ramachandra ji ko chunauti di ki dekho tumne jo hai meri behen ki nak aur kaan kaate uski behen ki jabardasti vibhag ki jo hai bhai ko bura laga kisi ko bura lagta hai tu istemal kiya tha sita ji ki iccha ke viruddh

रावण ने सीता कुछ हुआ नहीं था ऐसा हुआ है दो धर्मों में जो सीरियल वगैरह टीवी पर आते रहे अभी

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Shailesh Kumar Dubey

Yoga Teacher , Retired Government Employee

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एस के मानव 'पौराणिक' | Sanjeev Kumar

धर्मशिक्षक व विधिज्ञ

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रावण द्वारा दो अफसरों और एक तपस्विनी के साथ बलात्कार किया गया था इसलिए उसको जो चरित्र कहा गया

ravan dwara do afsaron aur ek tapaswini ke saath balatkar kiya gaya tha isliye usko jo charitra kaha gaya

रावण द्वारा दो अफसरों और एक तपस्विनी के साथ बलात्कार किया गया था इसलिए उसको जो चरित्र कहा

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Sharad Dixit

Jounalist/Wildlife Expert

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महेश दुबे

कवि साहित्यकार

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रावण महाशक्तिशाली था परम ऐश्वर्या ली था बहुत बड़ा विद्वान था लेकिन उसने एक ही अवगुण था कि वह बहुत अहंकारी था अपने बल के दम पर उसने सर सभी को गुलाम बना लिया था देवता किन्नर गंधर्व सभी उसके गुलाम थे और ऐसा नियम है कि विजेता ही हमेशा से पूजित होता है और जो हार जाता है फिर उसके बारे में बहुत सारी बातें प्रचलित हो जाती हैं उन्हें तरह तरह से नियंत्रित किया जाता है राम और रावण के युद्ध में रावण हार गया उसकी सोने की लंका सर्वनाश हो गई इसीलिए उसका पुतला भी जलाया जाने लगा और विजेता का हर कोई सम्मान करता है हारे हुए व्यक्ति के बारे में कुछ भी कहने के लिए लोग स्वतंत्र हो जाते हैं

ravan mahashaktishali tha param aishwarya li tha bahut bada vidhwaan tha lekin usne ek hi avgun tha ki vaah bahut ahankari tha apne bal ke dum par usne sir sabhi ko gulam bana liya tha devta kinnar gandharv sabhi uske gulam the aur aisa niyam hai ki vijeta hi hamesha se pujit hota hai aur jo haar jata hai phir uske bare mein bahut saree batein prachalit ho jaati hai unhe tarah tarah se niyantrit kiya jata hai ram aur ravan ke yudh mein ravan haar gaya uski sone ki lanka sarvanash ho gayi isliye uska putalaa bhi jalaya jaane laga aur vijeta ka har koi sammaan karta hai hare hue vyakti ke bare mein kuch bhi kehne ke liye log swatantra ho jaate hain

रावण महाशक्तिशाली था परम ऐश्वर्या ली था बहुत बड़ा विद्वान था लेकिन उसने एक ही अवगुण था कि

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S Bajpay

Yoga Expert | Beautician & Gharelu Nuskhe Expert

1:08
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राम राम जी की देखिए किसी विवाहित स्त्री का या कुंवारी स्त्री का लड़की का अपहरण करके बुरे उद्देश्य पकड़ना और करके अपने संग ले जाना एक अपराध है रावण अपराध किया था अब आपका प्रश्न है जब रावण ने सीता को छुआ भी नहीं था तो रावण कुकू चरित्र के रूप में क्यों दिखाया गया रावण ने सीता जी को श्री नहीं छुआ के उसको ब्रह्मा जी का साथ था और उसको अपने भतीजे के साथ था उसने अपनी सगी मस्ती और सौतेली भतीजी की पत्नी रंभा नाम की अक्षरा से बलात्कार किया था इस कारण कुंदन कुबेर ने उसके भतीजे ने श्राप दिया था कि तुम किसी स्त्री को उसकी इच्छा के बगैर शुरू होगी तो तुम्हारे सर के हजार टुकडे हो जाएंगे इसी प्रकार का शब्द है मैंने उसको दिया था इसलिए रावण ने डर के मारे सीता जी को नहीं छुआ था यही आपके प्रश्न का उत्तर है जय राम जी की

ram ram ji ki dekhiye kisi vivaahit stree ka ya kuwaari stree ka ladki ka apahran karke bure uddeshya pakadna aur karke apne sang le jana ek apradh hai ravan apradh kiya tha ab aapka prashna hai jab ravan ne sita ko chhua bhi nahi tha toh ravan kuku charitra ke roop mein kyon dikhaya gaya ravan ne sita ji ko shri nahi chhua ke usko brahma ji ka saath tha aur usko apne bhatije ke saath tha usne apni sagi masti aur sauteli bhatiji ki patni rambha naam ki akshara se balatkar kiya tha is karan kundan kuber ne uske bhatije ne shraap diya tha ki tum kisi stree ko uski iccha ke bagair shuru hogi toh tumhare sir ke hazaar tukde ho jaenge isi prakar ka shabd hai maine usko diya tha isliye ravan ne dar ke maare sita ji ko nahi chhua tha yahi aapke prashna ka uttar hai jai ram ji ki

राम राम जी की देखिए किसी विवाहित स्त्री का या कुंवारी स्त्री का लड़की का अपहरण करके बुरे उ

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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रामायण में जो राम रावण का चरित्र है या राम का चरित्र है कि अच्छाई और बुराई 2 भावों के चरित्र हैं अच्छाई के रूप में श्री राम की योग्यताएं श्रीराम के गुणों का बखान किया गया है उनके द्वारा मानव को एक संदेश दिया गया कि मानव को सदाचार पियो होना चाहिए सन्मुख सद्गुणों के प्रति आग रहित होना चाहिए सद्गुरु को अपने जीवन में डालना चाहिए एक अच्छी पूर्ण सुसज्जित उदार नागरिक बनने के लिए राम का रास्ता अपनाना चाहिए और यदि आप छल कपट झूठ अन्याय अधर्म आप की राशि को अपनाते हैं तो आप रावण के चरित्र को जी रहे हैं आपको मार्ग दामिनी अधोगति को प्राप्त करेंगे आपकी समाज और देश के प्रति पाप के रास्ते को अपना रहे हैं विरोधी रास देश विरोधी कार्यवाही कार्य कर रहे हैं यह रावण का चर्च कहता है इसलिए राव मानव मात्र को एक संदेश दिया गया इंसान को एक संदेश दिया गया है यदि आप सुख भी चाहते हैं यदि आप सब भी इंसान के लाना चाहते हैं यदि आप अच्छी भारतीय का रोल अदा करना चाहते हैं तो आपको राम के पद चिन्हों पर चलना चाहिए उस राम की संस्कृति का अनुसरण करना चाहिए सब मार्ग का मिलना चाहिए और रावण की जो चरित्र से छल कपट झूठ अन्याय अधर्म वरना जो रास्ता है उसका निशा त्याग करना चाहिए क्योंकि यह मानवता की जरूरी है यह चल चुकी है इंसानियत के विरोधी है और यह क्रांति है इसलिए मानव मात्र को समझाने के लिए राम रावण को पूजते से दिए गए क्या अपने खेल मिलने की उम्मीद को फिल्म फिल्मों में अभिनेता की चरित्र को मारने के लिए हीरो के चरित्र को मारने के लिए एक क्लेम यह कई प्लेन होते उनके लेखकों को दिखा करके ही हीरो के कार्यों को जनता को समझाया जाता है जनता को दिखाया जाता है कि इसी प्रकार रावण के चरित्र को दिखा करके छल कपट झूठ अन्याय अधर्म पाप कर्मों की सजा के रूप में बताया है कि ऐसे कुमार ग्रामीणों को यह फल प्राप्त होता है इस प्रकार से दंड प्राप्त करते हैं क्योंकि वे राक्षस आदि मानव मात्र के दुश्मन है रावण ने सीता को छुआ नहीं था नहीं मैं ऐसा तो नहीं कह सकता क्योंकि जब रावण अपहरण करके सीता को लेकर गया था तो उस वक्त विमान में लेकर गया था और उससे कि वह लंका में लेकर गया था ऐसा तो नहीं पड़ रहा यह कह सकता हूं कि रावण त्रिताल अन्यथा विद्वान था योग्यता और रावण जानता था इस बात को को भगवान से भगवान को प्राप्त करने के दो ही साधन है या तो भक्ति मार के द्वारा और या फिर पैर उनसे पैर करके असफलता करके रावण जानता था कि भक्ति मार्ग का जो रास्ता है तो बहुत लंबा है कॉल पर चलने वाला है जबकि बेर का जो रास्ता है दुश्मनी का जो रास्ता है उससे बहुत जल्दी ही उसे मुक्ति प्राप्त हो जाएगी ऐसा नहीं कि रावण ज्ञानी था लेकिन उसने पैर वाले रास्ते को शत्रु वाले रास्ते को लिया और वह राम से पहले राम की का हमको गया वह पैकिंग तुम लोग को राम से पहले गया तो इस प्रकार की जनता को एक सोमवार पर चलाने के लिए धर्म पर चलने के लिए अच्छे रास्ते पर चलने के लिए मानव मात्र की पढ़ाई करने के लिए मानव मात्र की सेवा सहायता के उपदेशों को समझाने के लिए इनकी रचनाएं कि नहीं

ramayana mein jo ram ravan ka charitra hai ya ram ka charitra hai ki acchai aur burayi 2 bhavon ke charitra hai acchai ke roop mein shri ram ki yogyataen shriram ke gunon ka bakhan kiya gaya hai unke dwara manav ko ek sandesh diya gaya ki manav ko sadachar piyo hona chahiye sanmukh sadgunon ke prati aag rahit hona chahiye sadguru ko apne jeevan mein dalna chahiye ek achi purn susajjit udaar nagarik banne ke liye ram ka rasta apnana chahiye aur yadi aap chhal kapat jhuth anyay adharma aap ki rashi ko apanate hai toh aap ravan ke charitra ko ji rahe hai aapko marg damini adhogati ko prapt karenge aapki samaj aur desh ke prati paap ke raste ko apna rahe hai virodhi ras desh virodhi karyavahi karya kar rahe hai yah ravan ka church kahata hai isliye rav manav matra ko ek sandesh diya gaya insaan ko ek sandesh diya gaya hai yadi aap sukh bhi chahte hai yadi aap sab bhi insaan ke lana chahte hai yadi aap achi bharatiya ka roll ada karna chahte hai toh aapko ram ke pad chinho par chalna chahiye us ram ki sanskriti ka anusaran karna chahiye sab marg ka milna chahiye aur ravan ki jo charitra se chhal kapat jhuth anyay adharma varna jo rasta hai uska nisha tyag karna chahiye kyonki yah manavta ki zaroori hai yah chal chuki hai insaniyat ke virodhi hai aur yah kranti hai isliye manav matra ko samjhane ke liye ram ravan ko pujte se diye gaye kya apne khel milne ki ummid ko film filmo mein abhineta ki charitra ko maarne ke liye hero ke charitra ko maarne ke liye ek claim yah kai plane hote unke lekhako ko dikha karke hi hero ke karyo ko janta ko samjhaya jata hai janta ko dikhaya jata hai ki isi prakar ravan ke charitra ko dikha karke chhal kapat jhuth anyay adharma paap karmon ki saza ke roop mein bataya hai ki aise kumar grameeno ko yah fal prapt hota hai is prakar se dand prapt karte hai kyonki ve rakshas aadi manav matra ke dushman hai ravan ne sita ko chhua nahi tha nahi main aisa toh nahi keh sakta kyonki jab ravan apahran karke sita ko lekar gaya tha toh us waqt Vimaan mein lekar gaya tha aur usse ki vaah lanka mein lekar gaya tha aisa toh nahi pad raha yah keh sakta hoon ki ravan trital anyatha vidhwaan tha yogyata aur ravan jaanta tha is baat ko ko bhagwan se bhagwan ko prapt karne ke do hi sadhan hai ya toh bhakti maar ke dwara aur ya phir pair unse pair karke asafaltaa karke ravan jaanta tha ki bhakti marg ka jo rasta hai toh bahut lamba hai call par chalne vala hai jabki ber ka jo rasta hai dushmani ka jo rasta hai usse bahut jaldi hi use mukti prapt ho jayegi aisa nahi ki ravan gyani tha lekin usne pair waale raste ko shatru waale raste ko liya aur vaah ram se pehle ram ki ka hamko gaya vaah packing tum log ko ram se pehle gaya toh is prakar ki janta ko ek somwar par chalane ke liye dharm par chalne ke liye acche raste par chalne ke liye manav matra ki padhai karne ke liye manav matra ki seva sahayta ke upadeshon ko samjhane ke liye inki rachnaye ki nahi

रामायण में जो राम रावण का चरित्र है या राम का चरित्र है कि अच्छाई और बुराई 2 भावों के चरित

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Dr. Sudha Chauhan

Author / Social Worker/Writer

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यह बात सत्य है कि रामायण सीता कुछ हुआ नहीं था रावण बहुत ज्ञानी था वह महान पंडित था और बहुत बहादुर था लेकिन उसे इसलिए कुर्बान हो जाता है उसने अपने क्षेत्र के कारण अपने पूरे परिवार को नष्ट कर दिया था अगर व सीता को त्याग देगा तो उसका परिवार नष्ट नहीं होता नहीं सोने की लंका का विध्वंस होता एक लाख पूत सवा लख नाती इतना बड़ा परिवार था कि उसने अपने ही सामने सारे परिवार को नष्ट कर दिया और अंत में सब नष्ट हो गए

yah baat satya hai ki ramayana sita kuch hua nahi tha ravan bahut gyani tha vaah mahaan pandit tha aur bahut bahadur tha lekin use isliye kurban ho jata hai usne apne kshetra ke karan apne poore parivar ko nasht kar diya tha agar va sita ko tyag dega toh uska parivar nasht nahi hota nahi sone ki lanka ka vidhawanse hota ek lakh poot sava lakh nati itna bada parivar tha ki usne apne hi saamne saare parivar ko nasht kar diya aur ant me sab nasht ho gaye

यह बात सत्य है कि रामायण सीता कुछ हुआ नहीं था रावण बहुत ज्ञानी था वह महान पंडित था और बहुत

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प्रश्न है जब रावण ने सीता को छुआ भी नहीं था तो रावण को एक बहुत ही क्रूर चरित्र के रूप में क्यों दिखाया गया रावण ने सीता को छुआ नहीं था इसलिए उसको हम अच्छे चरित्र का व्यक्ति नहीं कह सकते उसी को उसके परिवार से अलग कर देना उसको ऐसे स्थान पर ले जाना जहां से उसके लिए कहीं भी आना जाना कठिन हो दूसरे को परेशानी में डाल देना यह भी क्रूरता के अंतर्गत आते हैं इसके अलावा भी रावण ने बहुत से कार्य किए गए थे तो केवल इसी के कारण रावण को क्रूर चरित्र वाला नहीं दिखाया गया बल्कि उनके अन्य उसके अन्य कार्य जिनमें ऋषि-मुनियों को तंग करना जनसामान्य को तंग करना दूसरे राज्य अधिकार कर लेना इस सारी चीजें क्रूरता में आती है इसलिए उसको ग्रुप चरित्र का व्यक्ति दिखाया गया केवल सीता को स्पर्श नहीं किया इसके से हम उसको अच्छा लिखते नहीं कह सकते हैं उसने बहुत से ऐसे कार्य किए हैं जो की बहुत ही मानवता के लिए बहुत ही कलंक है ऐसी स्थिति में हम उसको वर्क्रूट चरित्र ही कहेंगे निर्मल चरित्र का व्यक्ति नहीं कहेंगे आपको अवश्य जो है रामचरितमानस पढ़ना चाहिए रामायण पढ़ना चाहिए ताकि आपकी जान भी और अधिक वृद्धि हो

prashna hai jab ravan ne sita ko chhua bhi nahi tha toh ravan ko ek bahut hi krur charitra ke roop me kyon dikhaya gaya ravan ne sita ko chhua nahi tha isliye usko hum acche charitra ka vyakti nahi keh sakte usi ko uske parivar se alag kar dena usko aise sthan par le jana jaha se uske liye kahin bhi aana jana kathin ho dusre ko pareshani me daal dena yah bhi krurta ke antargat aate hain iske alava bhi ravan ne bahut se karya kiye gaye the toh keval isi ke karan ravan ko krur charitra vala nahi dikhaya gaya balki unke anya uske anya karya jinmein rishi muniyon ko tang karna janasamanya ko tang karna dusre rajya adhikaar kar lena is saari cheezen krurta me aati hai isliye usko group charitra ka vyakti dikhaya gaya keval sita ko sparsh nahi kiya iske se hum usko accha likhte nahi keh sakte hain usne bahut se aise karya kiye hain jo ki bahut hi manavta ke liye bahut hi kalank hai aisi sthiti me hum usko varkrut charitra hi kahenge nirmal charitra ka vyakti nahi kahenge aapko avashya jo hai ramcharitmanas padhna chahiye ramayana padhna chahiye taki aapki jaan bhi aur adhik vriddhi ho

प्रश्न है जब रावण ने सीता को छुआ भी नहीं था तो रावण को एक बहुत ही क्रूर चरित्र के रूप में

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सुरेश चंद आचार्य

Social Worker ( Self employed )

2:21
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नमस्कार दोस्तों रावण का क्रूर होना सीता को छूने या ना छूने से प्रभावित नहीं है इसके लिए आपको रावण की जीवनी देखनी पड़ेगी रावण शुरुआत से ही उग्र स्वभाव का था और तपस्या करो उसमें शक्ति प्राप्त की जिसका उसने हमेशा दुरुपयोग किया मानवता के प्रति दुरुपयोग किया धर्म के प्रति दुरुपयोग किया देव एक शक्ति के प्रति दुरुपयोग किया लगातार अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए क्रूर स्वभाव का बना सीता का हरण कर ले जाना मैं तो उसका अंतिम कार्य था सीता को न छूना उसका एक साहसिक मर्दाना कदम था किंतु जो व्यक्ति प्रकृति को चैलेंज करेगा उसको नंबर सोमवार कहना उचित नहीं है आप तीन प्रकार से किए गए पहला मन से दूसरा वचन से और तीसरा कर्म से अगर आप मन से बुरा सोचते हैं वह भी पाप है आप वाणी से बुरा करते हैं वह भी पाप और कर्म से तो है ही है इसलिए इसको सीता के संदर्भ में न देखा जाए आप रावण की जीवनी पड़े उसकी क्रूरता ओं का आपको ज्ञान होगा धन्यवाद

namaskar doston ravan ka krur hona sita ko chune ya na chune se prabhavit nahi hai iske liye aapko ravan ki jeevni dekhni padegi ravan shuruat se hi ugra swabhav ka tha aur tapasya karo usme shakti prapt ki jiska usne hamesha durupyog kiya manavta ke prati durupyog kiya dharm ke prati durupyog kiya dev ek shakti ke prati durupyog kiya lagatar apni shaktiyon ka durupyog karte hue krur swabhav ka bana sita ka haran kar le jana main toh uska antim karya tha sita ko na chhuna uska ek sahasik mardaana kadam tha kintu jo vyakti prakriti ko challenge karega usko number somwar kehna uchit nahi hai aap teen prakar se kiye gaye pehla man se doosra vachan se aur teesra karm se agar aap man se bura sochte hain vaah bhi paap hai aap vani se bura karte hain vaah bhi paap aur karm se toh hai hi hai isliye isko sita ke sandarbh me na dekha jaaye aap ravan ki jeevni pade uski krurta on ka aapko gyaan hoga dhanyavad

नमस्कार दोस्तों रावण का क्रूर होना सीता को छूने या ना छूने से प्रभावित नहीं है इसके लिए आप

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बात सुने ना सुने कि नहीं बात पराई स्त्री के अपराहन की है जिसका पर है बहुत ही घोर निंदनीय दंडनीय अपराध और मानवता को शर्मसार करने वाला है किसी की इज्जत से और उसे चरित्र से खेलना पाप है जिसकी जो क्षमा योग्य नहीं है इसीलिए रावण को कोर चरित्र वाला दिखाया जाता है उसके बाद किसी भी व्यक्ति के साथ उसके पूर्वाग्रह पूर्व में किए हुए कर्म भी साथ चलते हैं उसने इससे पहले कुबेर की पत्नी के साथ दुराचार किया था जो कि उसके चरित्र का प्रमाण देने के लिए पर्याप्त है इसीलिए उसे क्रूर चरित्र वाला कहा वह माना जाता है

baat sune na sune ki nahi baat parai stree ke aparahan ki hai jiska par hai bahut hi ghor nindaniya dandniya apradh aur manavta ko sharmasar karne vala hai kisi ki izzat se aur use charitra se khelna paap hai jiski jo kshama yogya nahi hai isliye ravan ko core charitra vala dikhaya jata hai uske baad kisi bhi vyakti ke saath uske purvagrah purv me kiye hue karm bhi saath chalte hain usne isse pehle kuber ki patni ke saath durachar kiya tha jo ki uske charitra ka pramaan dene ke liye paryapt hai isliye use krur charitra vala kaha vaah mana jata hai

बात सुने ना सुने कि नहीं बात पराई स्त्री के अपराहन की है जिसका पर है बहुत ही घोर निंदनीय द

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जय किशन मौर्य

टेलर मास्टर

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रावण एचडी बुरा था कि उसने धर्म का रास्ता छोड़ का धर्म का रास्ता बना दिया उन्होंने भले माता सीता को छुआ नहीं लेकिन उनका हरण किया उन्हें गलत काम की है जो बनाए जाएंगे मैंने उसमें भावनाएं गलत नहीं थी लेकिन गलत ही कहा जाएगा और तीसरी बात कृष्ण करने का दृढ़ निश्चय कर लिया था वह का अहंकार अहंकार क्लास में आकर उसने अपने भाई विभीषण को लात मारकर भगा दिया अलंकार के नाम पर बैठा के अपने सारे भाइयों अपने भाइयों के पुत्रों आप खुद सहित बलिदान कर आ गया है विकास नेत्रदान किया ही आधार में को अत्याचारी को राजा ने देंगे तो क्या गम है उसको तो बहुत सारा ज्ञान था ज्ञान होते हुए दिया वह अधर्म के रास्ते पर चल पड़े तो वह उससे बड़ा घर में कोई नहीं होता

ravan hd bura tha ki usne dharm ka rasta chhod ka dharm ka rasta bana diya unhone bhale mata sita ko chhua nahi lekin unka haran kiya unhe galat kaam ki hai jo banaye jaenge maine usme bhaavnaye galat nahi thi lekin galat hi kaha jaega aur teesri baat krishna karne ka dridh nishchay kar liya tha vaah ka ahankar ahankar class me aakar usne apne bhai vibhishan ko laat marakar bhaga diya alankar ke naam par baitha ke apne saare bhaiyo apne bhaiyo ke putron aap khud sahit balidaan kar aa gaya hai vikas netradaan kiya hi aadhar me ko atyachari ko raja ne denge toh kya gum hai usko toh bahut saara gyaan tha gyaan hote hue diya vaah adharma ke raste par chal pade toh vaah usse bada ghar me koi nahi hota

रावण एचडी बुरा था कि उसने धर्म का रास्ता छोड़ का धर्म का रास्ता बना दिया उन्होंने भले मात

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प्रेस ने जब रावण ने सीता कुछ हुआ भी नहीं था तू रावण को एक बहुत ही प्रचलित रूप में क्यों दिखाए गए रावण रावण रावण रावण की पत्नी का रेप किया था रावण ने अपनी बहू के साथ खंडों में विभाजित हो जाएगा रावण आते जाते हैं जितने वाले इतिहास लिखते हैं ओपन कुमावत खुली अर्थव्यवस्था एक भारतीय स्त्री का हरण हुआ था तो यही कारण

press ne jab ravan ne sita kuch hua bhi nahi tha tu ravan ko ek bahut hi prachalit roop me kyon dekhiye gaye ravan ravan ravan ravan ki patni ka rape kiya tha ravan ne apni bahu ke saath khando me vibhajit ho jaega ravan aate jaate hain jitne waale itihas likhte hain open kumawat khuli arthavyavastha ek bharatiya stree ka haran hua tha toh yahi karan

प्रेस ने जब रावण ने सीता कुछ हुआ भी नहीं था तू रावण को एक बहुत ही प्रचलित रूप में क्यों दि

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देखी आपने बहुत ही अच्छा प्रश्न किया है जब रावण ने सीता को छुआ भी नहीं तो रावण की बातें कुरुक्षेत्र के रूप में क्यों दिखाया गया समाज का काम है दूसरे पर शिन चैन लगाना दूसरों पर उंगली उठाना समाज का यह काम है लेकिन सत्यता तो यह है कि राम को सीता जी 20 मिलीग्राम की दावत थी राम को सीता जीवित मिल गई है राम की दावत थी लेकिन सीता पवित्र मिली सिर्फ और सिर्फ रावण की मर्यादा थी धन्यवाद

dekhi aapne bahut hi accha prashna kiya hai jab ravan ne sita ko chhua bhi nahi toh ravan ki batein kurukshetra ke roop mein kyon dikhaya gaya samaj ka kaam hai dusre par shin chain lagana dusro par ungli uthana samaj ka yah kaam hai lekin satyata toh yah hai ki ram ko sita ji 20 milligram ki daawat thi ram ko sita jeevit mil gayi hai ram ki daawat thi lekin sita pavitra mili sirf aur sirf ravan ki maryada thi dhanyavad

देखी आपने बहुत ही अच्छा प्रश्न किया है जब रावण ने सीता को छुआ भी नहीं तो रावण की बातें कुर

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रावण ने सीता का हरण कल तथास्तु सीता को छुआ था उनका हाथ पकड़कर उसे वह लंका चले गया था इसलिए नहीं कहा जा सकता कि रावण ने सीता को नाइट पहले के जमाने में किसी स्त्री को छूना दूध अगर गलत नजरों से देख लिया तो बड़ा रावण ने सीता का हरण किया था

ravan ne sita ka haran kal tathastu sita ko chhua tha unka hath pakadakar use vaah lanka chale gaya tha isliye nahi kaha ja sakta ki ravan ne sita ko night pehle ke jamane mein kisi stree ko chhuna doodh agar galat nazro se dekh liya toh bada ravan ne sita ka haran kiya tha

रावण ने सीता का हरण कल तथास्तु सीता को छुआ था उनका हाथ पकड़कर उसे वह लंका चले गया था इसलिए

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Aditya Kapoor

I Am Studying B A First Year

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यह अंधा युग है यहां पर उल्टी को सीधा और सीधा उल्टा कहते हैं उसी तरह जब रावण ने सीता को छुआ ही नहीं इसलिए साबित कर दिया गया कि भाई बुरा था और उसको बुरा लोग जानते थे इसलिए बुरा बोल दिए मैं आज सारा सिस्टम में उल्टा है जो गलत करता है वह घर पर आता है जो गलती नहीं करते हो जेल में चक्की पीसते

yah andha yug hai yahan par ulti ko seedha aur seedha ulta kehte hain usi tarah jab ravan ne sita ko chhua hi nahi isliye saabit kar diya gaya ki bhai bura tha aur usko bura log jante the isliye bura bol diye main aaj saara system mein ulta hai jo galat karta hai vaah ghar par aata hai jo galti nahi karte ho jail mein chakki peeste

यह अंधा युग है यहां पर उल्टी को सीधा और सीधा उल्टा कहते हैं उसी तरह जब रावण ने सीता को छुआ

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क्योंकि उसने गलत किया सीता से नहीं पर खैरागढ़ से राम से लेना चाहिए

kyonki usne galat kiya sita se nahi par khairagarh se ram se lena chahiye

क्योंकि उसने गलत किया सीता से नहीं पर खैरागढ़ से राम से लेना चाहिए

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