महाभारत की कौन सी घटना हमें जीवन के बारे में गहराई से सोचने पर मजबूर करती है?...


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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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Rajveer

Career Counselor

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत की सबसे बड़ी घटना यह थी कि जो बोलना चाहिए वह सोच समझकर बोलना चाहिए कि कहते हैं द्रोपती ने दुर्योधन पर व्यंग्य कसा था कि भी अंधों के तो अंधी पुत्री जन्मदिन दूसरा झूठ का सहारा लिया गया था महाभारत में इसीलिए भगवान कृष्ण ने कहा था कि जो करना है सत्य करना है अपने कर्म करने हैं

bharat ki sabse badi ghatna yah thi ki jo bolna chahiye vaah soch samajhkar bolna chahiye ki kehte hain draupadi ne duryodhan par vyangya kaisa tha ki bhi andhon ke toh andhi putri janamdin doosra jhuth ka sahara liya gaya tha mahabharat mein isliye bhagwan krishna ne kaha tha ki jo karna hai satya karna hai apne karm karne hain

भारत की सबसे बड़ी घटना यह थी कि जो बोलना चाहिए वह सोच समझकर बोलना चाहिए कि कहते हैं द्रोपत

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

महाभारत की कौन सी घटना में जीवन के बारे में गहराई से सोचने पर मजबूर करती है कि जो हमें जिंदगी में बहुत ही गहराई से सोचने को मजबूर करती है उसमें अगर न कुछ घटनाओं का आपसे वर्णन करो तो कहना यह है कि द्रौपदी का जो और दुर्योधन के साथ वार्तालाप हुआ था के अंधे का पुत्र अंधा होता है उसको दिखता नहीं है वह पानी में गिर गए उसे फौज में उस समय द्रोपदी ने इस्तीफा दिया था लेकिन वह महाभारत की होने का कारण बना क्योंकि उसे अपना गोरखनाथ दूसरी बात है कि हमें छुआ नहीं खेलना चाहिए जुआ के कारण ही द्रोपदी को उन्होंने दांव पर लगाया था आज भी हम इसको यह की दुआ खिलाफ दूसरा यह कि द्रौपदी को एक क्या एक धन या वस्तु या चीज समझ कर अपनी पत्नी को दांव पर लगा दिया क्या हमारी पत्नी यह होती है यह भी एक बहुत बड़ी सोच है कि हमें आज भी सोचने को मजबूर करती है कि हम अपनी पत्नी को क्या समझते हैं हमें हमारी पत्नी को इतनी इज्जत क्यों नहीं देनी चाहिए कि हम अपनी पत्नी को कभी क्या दांव पर लगा सकते हैं और इसके अलावा दूसरा और यह भी सोचने वाली बात है कि महाभारत में अर्जुन ने जब युद्ध होने को था तब हथियार अपने रख दिए और उस समय श्रीकृष्ण भगवान ने विराट रूप दिखाया था और उन्होंने कहा था कि हम सब एक दूसरे से बंधे हुए हैं लेकिन अगर हमारे हक की लड़ाई में अगर हमारा अपना ही अगर हमें हक ना देकर हमारे ऊपर अत्याचार अत्याचार को हम हैं नहीं सोना चाहिए और हमारे अपने ही हमको युद्ध करना पड़ता है वह आज भी इतना ही प्रेरक है और हमें सोचने को मजबूर करता है कि बाहर वाले जो नुकसान करते हैं या हमारे घर वाले भी नुकसान करते हैं हमें अत्याचार को सहन नहीं करना चाहिए यह सब बातें हमें जीवन में सभी प्रसंगों में सोचने के लिए मजबूर करती हैं एक तो हमें बिना सोचे समझे नहीं बोलना चाहिए जैसा कि द्रोपदी ने किया उसके बाद महाभारत के युद्ध के समय जो विराट स्वरूप दिखाया और उन्होंने जो बातें कही वह बहुत ही समझने लायक थी उसको हमें अवश्य सोचना चाहिए और जुआ कभी नहीं खेलना चाहिए और खासकर अपनी पत्नी को जुए में कदापि नहीं लगाना चाहिए यह सब बातें हैं जो हमें बहुत ही गंदा और बहुत ही विचार मांग लेती है कि आज भी वो आज के पद पर यदि वह आज भी सकते हैं और हमें सोच कर आगे अपने रूटीन लाइफ में उस अवश्य करना चाहिए धन्यवाद

mahabharat ki kaun si ghatna mein jeevan ke bare mein gehrai se sochne par majboor karti hai ki jo hamein zindagi mein bahut hi gehrai se sochne ko majboor karti hai usmein agar na kuch ghatnaon ka aapse varnan karo toh kehna yah hai ki draupadi ka jo aur duryodhan ke saath vartalaap hua tha ke andhe ka putra andha hota hai usko dikhta nahi hai vaah paani mein gir gaye use fauj mein us samay draupadi ne istifa diya tha lekin vaah mahabharat ki hone ka karan bana kyonki use apna gorakhnath dusri baat hai ki hamein chhua nahi khelna chahiye jua ke karan hi draupadi ko unhone dav par lagaya tha aaj bhi hum isko yah ki dua khilaf doosra yah ki draupadi ko ek kya ek dhan ya vastu ya cheez samajh kar apni patni ko dav par laga diya kya hamari patni yah hoti hai yah bhi ek bahut badi soch hai ki hamein aaj bhi sochne ko majboor karti hai ki hum apni patni ko kya samajhte hain hamein hamari patni ko itni izzat kyon nahi deni chahiye ki hum apni patni ko kabhi kya dav par laga sakte hain aur iske alava doosra aur yah bhi sochne waali baat hai ki mahabharat mein arjun ne jab yudh hone ko tha tab hathiyar apne rakh diye aur us samay shrikrishna bhagwan ne virat roop dikhaya tha aur unhone kaha tha ki hum sab ek dusre se bandhe hue hain lekin agar hamare haq ki ladai mein agar hamara apna hi agar hamein haq na dekar hamare upar atyachar atyachar ko hum hain nahi sona chahiye aur hamare apne hi hamko yudh karna padta hai vaah aaj bhi itna hi prerak hai aur hamein sochne ko majboor karta hai ki bahar waale jo nuksan karte hain ya hamare ghar waale bhi nuksan karte hain hamein atyachar ko sahan nahi karna chahiye yah sab batein hamein jeevan mein sabhi prasangon mein sochne ke liye majboor karti hain ek toh hamein bina soche samjhe nahi bolna chahiye jaisa ki draupadi ne kiya uske baad mahabharat ke yudh ke samay jo virat swaroop dikhaya aur unhone jo batein kahi vaah bahut hi samjhne layak thi usko hamein avashya sochna chahiye aur jua kabhi nahi khelna chahiye aur khaskar apni patni ko jue mein kadapi nahi lagana chahiye yah sab batein hain jo hamein bahut hi ganda aur bahut hi vichar maang leti hai ki aaj bhi vo aaj ke pad par yadi vaah aaj bhi sakte hain aur hamein soch kar aage apne routine life mein us avashya karna chahiye dhanyavad

महाभारत की कौन सी घटना में जीवन के बारे में गहराई से सोचने पर मजबूर करती है कि जो हमें जिं

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Rasbihari Pandey

लेखन / कविता पाठ

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

महाभारत की तमाम घटनाएं अपने जीवन पर हमें सोचने के लिए बाध्य करती हैं खासतौर से हुआ घटना जिसमें दुर्योधन या कहता है कि वह बिना लड़ाई के इंच भर भूमि भी नहीं देगा उसने पांडवों को लड़ने पर मजबूर किया तो हमें इस बात से क्या सबक लेना चाहिए कि अपने जीवन में किसी को इतना मजबूर कभी न करें कि वह हमसे हाथापाई या लड़ाई पर उतारू हो जाए

mahabharat ki tamaam ghatnayen apne jeevan par hamein sochne ke liye badhya karti hain khaasataur se hua ghatna jisme duryodhan ya kahata hai ki vaah bina ladai ke inch bhar bhoomi bhi nahi dega usne pandavon ko ladane par majboor kiya toh hamein is baat se kya sabak lena chahiye ki apne jeevan mein kisi ko itna majboor kabhi na karen ki vaah humse hathapai ya ladai par utaru ho jaaye

महाभारत की तमाम घटनाएं अपने जीवन पर हमें सोचने के लिए बाध्य करती हैं खासतौर से हुआ घटना जि

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

महाभारत के अनेक घटनाएं योग्य में जीवन के बारे में गहराई से सोचने पर मजबूर करती है आता महाभारत का ज्ञान प्राप्त करने के लिए उसको ध्यान से पढ़ना आवश्यक है जानना आवश्यक है गीता का ज्ञान समझने की आवश्यकता है क्योंकि महाभारत में छल कपट साम-दाम-दंड-भेद धर्मा धर्मा सभी की राजनीति जीवन जीने के बारे में हमें गहराई से सोचने को मजबूर करती

mahabharat ke anek ghatnayen yogya mein jeevan ke bare mein gehrai se sochne par majboor karti hai aata mahabharat ka gyaan prapt karne ke liye usko dhyan se padhna aavashyak hai janana aavashyak hai geeta ka gyaan samjhne ki avashyakta hai kyonki mahabharat mein chhal kapat saam daam dand bhed dharma dharma sabhi ki raajneeti jeevan jeene ke bare mein hamein gehrai se sochne ko majboor karti

महाभारत के अनेक घटनाएं योग्य में जीवन के बारे में गहराई से सोचने पर मजबूर करती है आता महाभ

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Ankit Saini

Civil Engineer | Businessman

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

महाभारत में कुंती को मजबूर को पता था कि उसका दोस्त गलत है यह सोचने को मजबूर कर देती कि दोस्ती के लिए धर्म धर्म कुछ नहीं होता दोस्त की हेल्प करना होता है

mahabharat me kuntee ko majboor ko pata tha ki uska dost galat hai yah sochne ko majboor kar deti ki dosti ke liye dharm dharm kuch nahi hota dost ki help karna hota hai

महाभारत में कुंती को मजबूर को पता था कि उसका दोस्त गलत है यह सोचने को मजबूर कर देती कि दोस

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ब्रदर प्रकाशन का इससे राज्य सरकार के बताया जाए कौन है इस प्रकार निकलती की फैमिली योगी गलती नहीं थी वजह से दिखाया गया है जो उनकी गलती नहीं थी वह छोटी सी गलती की उन्नति का समंदर तेरा देवर भाभी जी परिवार से आती है देवर की जबरदस्ती दक्षिणा देने में भी तकलीफ है कल आप ऐसा ऐसा ऐसा कुछ से दुश्मनों ने ऐसा कुछ नहीं कहा था उन्हें जो बहुत जगह है बहुत छोटी गलती से मिली थी उन्होंने जब बजे साल का 3:00 का 3:30 बजे तक दोस्ती को अच्छा नहीं लगता है इसे सजा मिलती है कि नारी तक सफल आयोजन तत्र देवता रमंते नारी तुम केवल श्रद्धा हो विश्वास ना करो कल के समय समतल में मुसलमान और उनकी भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहिए और हमेशा प्रगति के रास्ते पर चलते हुए

brother prakashan ka isse rajya sarkar ke bataya jaaye kaun hai is prakar nikalti ki family yogi galti nahi thi wajah se dikhaya gaya hai jo unki galti nahi thi vaah choti si galti ki unnati ka samundar tera devar bhabhi ji parivar se aati hai devar ki jabardasti dakshina dene me bhi takleef hai kal aap aisa aisa aisa kuch se dushmano ne aisa kuch nahi kaha tha unhe jo bahut jagah hai bahut choti galti se mili thi unhone jab baje saal ka 3 00 ka 3 30 baje tak dosti ko accha nahi lagta hai ise saza milti hai ki nari tak safal aayojan tatra devta ramante nari tum keval shraddha ho vishwas na karo kal ke samay samtal me musalman aur unki bhavnao ko thes nahi pahunchana chahiye aur hamesha pragati ke raste par chalte hue

ब्रदर प्रकाशन का इससे राज्य सरकार के बताया जाए कौन है इस प्रकार निकलती की फैमिली योगी गलती

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

महाभारत की जो है कृष्ण अर्जुन संवाद अध्याय 10 का जो है कहानी जो भी उनके बीच में वार्तालाप हुई श्रीमद्भागवत गीता के रूप में संकलित है वह चीज सोचने वाली है इंसान की नहीं पूरे के पूरे दुनिया के लिए हर चीज एक मानवता के लिए गीता कोई इंसान किसी धर्म की ताकत नहीं है वह मानवता मात्र की शास्त्र है उसे हर एक मानव को पढ़ना चाहिए

mahabharat ki jo hai krishna arjun samvaad adhyay 10 ka jo hai kahani jo bhi unke beech mein vartalaap hui shrimadbhagavat geeta ke roop mein sankalit hai vaah cheez sochne waali hai insaan ki nahi poore ke poore duniya ke liye har cheez ek manavta ke liye geeta koi insaan kisi dharam ki takat nahi hai vaah manavta matra ki shastra hai use har ek manav ko padhna chahiye

महाभारत की जो है कृष्ण अर्जुन संवाद अध्याय 10 का जो है कहानी जो भी उनके बीच में वार्तालाप

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