कृष्णा ने दुर्योधन को क्यों नहीं मारा?...


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Gayatri Shukla

Social Worker Director Of Smt Educational Society

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Dr. Guddy Kumari

UPSC Coach / Ph.d

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सच में जो है कृष्णा ने दुर्योधन को क्यों नहीं मारा जय श्री कृष्णा दुर्योधन को क्यों मारेंगे दुर्योधन का दोषी नहीं है जो धन पांडव का दोषी था तो फिर भगवान है तो वह बस भगवान है वह एक पल में सब कुछ कर सकते हैं लेकिन वह दे पूरी दुनिया को अपने सिस्टम के अनुसार चलने देना चाहते थे इसलिए दुर्योधन जिनका 2 सीट के प्रति उसने अपराध किया था उसने उसको तानिया

sach mein jo hai krishna ne duryodhan ko kyon nahi mara jai shri krishna duryodhan ko kyon marenge duryodhan ka doshi nahi hai jo dhan pandav ka doshi tha toh phir bhagwan hai toh vaah bus bhagwan hai vaah ek pal mein sab kuch kar sakte hain lekin vaah de puri duniya ko apne system ke anusaar chalne dena chahte the isliye duryodhan jinka 2 seat ke prati usne apradh kiya tha usne usko Tania

सच में जो है कृष्णा ने दुर्योधन को क्यों नहीं मारा जय श्री कृष्णा दुर्योधन को क्यों मारेंग

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Umesh Upaadyay

Life Coach | Motivational Speaker

1:16

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी बिल्कुल हरे हरे कृष्ण चाहते तो वह दुर्योधन को मार सकते थे या कि जो कुछ ऐसा कर सकते थे लेकिन उन्होंने इसका इसको इस तरीके से हैंडल करने के लिए नहीं सोचा उन्होंने उसी तरीके से सोचा कि एक इंसान उसी युग में किसी भी समय किस तरीके से चीज को हैंडल करता है किस तरीके से देखते हैं और फिर उन्हें आगे ले जाने की बात कही फॉर एग्जांपल शांति प्रस्ताव रखना लोगों को समझाना वगैरा-वगैरा लेकिन अगर उसके बाद भी वह नहीं माने तो फिर यह रुकना मुश्किल हो गया था और महाभारत का युद्ध होने हुआ अब कृष्ण दुर्योधन को क्यों नहीं महाराज भाई कृष्ण ने कभी यह नहीं कहा और ना वह चाहते थे कि वह शास्त्र उठाएंगे युद्ध के दौरान हालांकि वो युद्ध में रहेंगे लेकिन उन्होंने शस्त्र उठाने का अकेले हां नहीं कहा था उन्होंने अपनी हसीना दे दी थी दुर्योधन को और खुद सारथी गए थे गांडीव धारी अर्जुन के इसीलिए उन्होंने यह दुर्योधन को नहीं मारेगा पदक मटक किसी को भी उन्होंने अपने अस्त्र-शस्त्र से नहीं मारा वह साथी बन के अर्जुन के नाटक

ji bilkul hare hare krishna chahte toh vaah duryodhan ko maar sakte the ya ki jo kuch aisa kar sakte the lekin unhone iska isko is tarike se handle karne ke liye nahi socha unhone usi tarike se socha ki ek insaan usi yug mein kisi bhi samay kis tarike se cheez ko handle karta hai kis tarike se dekhte hain aur phir unhe aage le jaane ki baat kahi for example shanti prastaav rakhna logo ko samajhana vagaira vagaira lekin agar uske baad bhi vaah nahi maane toh phir yah rukna mushkil ho gaya tha aur mahabharat ka yudh hone hua ab krishna duryodhan ko kyon nahi maharaj bhai krishna ne kabhi yah nahi kaha aur na vaah chahte the ki vaah shastra uthayenge yudh ke dauran halaki vo yudh mein rahenge lekin unhone shastra uthane ka akele haan nahi kaha tha unhone apni hasina de di thi duryodhan ko aur khud saarthi gaye the gandiv dhari arjun ke isliye unhone yah duryodhan ko nahi marenge padak matak kisi ko bhi unhone apne astra shastra se nahi mara vaah sathi ban ke arjun ke natak

जी बिल्कुल हरे हरे कृष्ण चाहते तो वह दुर्योधन को मार सकते थे या कि जो कुछ ऐसा कर सकते थे ल

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

1:42
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कृष्ण ने दुर्योधन को क्यों नहीं मारा महाभारत के युद्ध के दरमियां दुर्योधन और पांडवों की तरफ से अर्जुन आंध्र मदद मांगने गए थे एक तरफ मुन्ने अब तो नीचे ना अपनी लड़की और एक तरफ अपने खुद को रखा है तो वीर दल ने अपनी सेना को पसंद किया था और वह उनकी तरफ से लड़ने कोई भी शस्त्र उठाने से मना किया था कुछ को और वह शस्त्र बिना सिर्फ अर्जुन के रथ के सारथी बने दुर्योधन को चाहते तो मारी सकते से कोई बड़ी बात नहीं लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया क्योंकि सब चीजें जो महाभारत में लिखी गई हैं वह सब का होना जरूरी था कर्म आधारित सिद्धांत देखें और उसके परिणाम वह उनको सच साबित करने से ऐसा महाभारत को पढ़कर लगता है और इसीलिए मदद करें और उनका जो बच जाना पसंद का वह सब आपकी वजह से ही था कल्याण

krishna ne duryodhan ko kyon nahi mara mahabharat ke yudh ke darmiyan duryodhan aur pandavon ki taraf se arjun andhra madad mangne gaye the ek taraf munne ab toh niche na apni ladki aur ek taraf apne khud ko rakha hai toh veer dal ne apni sena ko pasand kiya tha aur vaah unki taraf se ladane koi bhi shastra uthane se mana kiya tha kuch ko aur vaah shastra bina sirf arjun ke rath ke saarthi bane duryodhan ko chahte toh mari sakte se koi badi baat nahi lekin unhone aisa nahi kiya kyonki sab cheezen jo mahabharat mein likhi gayi hain vaah sab ka hona zaroori tha karm aadharit siddhant dekhen aur uske parinam vaah unko sach saabit karne se aisa mahabharat ko padhakar lagta hai aur isliye madad kare aur unka jo bach jana pasand ka vaah sab aapki wajah se hi tha kalyan

कृष्ण ने दुर्योधन को क्यों नहीं मारा महाभारत के युद्ध के दरमियां दुर्योधन और पांडवों की त

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

9:37
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अगर चाहते एक पल में ही समस्त कर्मों को नष्ट कर सकते हैं क्योंकि उनके पास जो हथियार है सुदर्शन चक्र का कोई तोड़ नहीं और कोई रुकावट नहीं किच्छा मातृशक्ति से चलता है लेकिन गोविंद ऐसे नहीं गोविंद अपने ऊपर सिर पर भी लेना चाहते हैं कि गोविंद में नेमाराम जभी तो रौनक देशों की चतुराई मोनी प्रतिज्ञा कर ली कि मैं पूरे युद्ध में कभी हत्या नहीं बताऊंगा और जब की समस्त कौरवों को मारा इसी महाशक्ति में प्रश्न मारा है लेकिन सिर्फ एक ही नहीं दिया कोई यह नहीं कह सकता कि करण अर्जुन की क्या औकात जो पांडवों की क्या औकात थी कौन जसीम आरोपियों को जीतना कन्फ़र्म काम नहीं था लेकिन इस सब गोविंद के माया गोविंद की शक्ति यही कारण था कि गोविंद रिदम को क्यों नहीं मारा अरे कहीं भी देख लो देख लो फोटो तुम्हारे कर्मों के परिणाम ही तुमको अपने आप अच्छे कर्म हैं सकती हो और ब्रेकर में दुर्गति होगी दुर्गति के मुख्य हो इसलिए मेरे मित्र गोविंद तो गोविंद की नीतियां तो सारे संसार के लिए एक पत्थर साबित करने वाली हैं उन्होंने साम-दाम-दंड-भेद की जो मिट्टी दी है चाणक्य नीति यहां पर एक कंकड़ कोविंद ने किया तो सबसे पहले शामली की का प्रयोग लो फिर धाम का प्रयोग लो फिर भेद का प्रयोग लो जब फ्री हो जाए जब कोई सहारा नहीं बचा है कोई उपाय नहीं बचा है अब उन्होंने कहा कि हमारा शत्रु कितना पुल है कि किसी भी गति से नहीं रुक रहा है अन्याय अधर्म सेहत पीछे नहीं लग रहा है आप उसका फोन तो नहीं आपके पास शांति के लिए भी फेल हो चुकी है राम की नीति घोषित की है दंड भेद की नीति फेल हो चुकी है वहां कोविंद ने कहा कि यही कारण था कि समस्त कौरवों को बार-बार समझाने के लिए गोद रूप में जाते रहे और भी कौरव गोविंद का अपमान करते रहे लेकिन गोविंद ने कभी अपने से नहीं लिया कभी क्रोध भी किया था चाहते तो एकड़ में समस्त वर्गों को मार डालते तो क्या औकात समस्त लोगों को याद होगा इस समय विश्व पितामह प्रतिज्ञा कर ली तो लालू गंगा जमनी को शांत जांच की जद में यदि उनसे अस्त नहीं होता लिए क्योंकि तुम्हारी प्रतिज्ञा है कि मैं सिर्फ दिमाग तो नहीं हो पाऊंगा और जो मेरी प्रतिज्ञा है कि मैं तुमसे आज अबे तो आप उस दिन भी सुखराम ने सब भयंकर चंदिया समस्त पांडवों में खलबली मच गई और उनको लगने लगा कि आज हमारी पराजय हो जाएगी भक्तों ने अर्जुन से कहा कि कायर तू इतनी देर से दबाव को सहन कर रहा है तेरी सारी सेना आ रही है और तू कह रहा था कि मैं बंद करूंगा गोविंद को बंद करो चडगया चंद क्रोध आ गया गोविंद भूल गए अपनी प्रतिज्ञा को तो मैंने क्या क्योंकि वक्त देता है क्या हम वक्त तुम्हारे अब्बू पत्नी के प्यार मेरे वक्त मेरे स्वामी उनके लिए अपना सब कुछ छोड़ सकता हूं बेटी मेरी मान अपमान की परवाह नहीं लेकिन मेरे भक्तों का कोई अपमान कर दे यह मैं नहीं कह सकता इसलिए गोविंद ने भीष्म की प्रतिज्ञा पूर्ण करने के लिए क्योंकि 20 कौम के परम भक्त थे प्रतिज्ञा पूर्ण करने के लिए गोविंद अपनी प्रतिज्ञा भूल गए और उन्होंने रथ का पहिया निकाल दिया और सुधाकर कमाने लगे थे जब भी तो बताने में हाथ जोड़कर सामने खड़े हो गए उन्होंने कहा तो मैंने तुमसे बात करने को तैयार हूं मैं आप से ही तो नहीं कर सकता क्योंकि आप तो गोविंद नारायण है चाचा मैं आपसे क्या कर सकती हूं आप लेकिन मुझे तुम्हारी मौत शिकार है और बता अपने हाथ जोड़ लिए सभी गोविंदनंद को सजा रखी है अर्जुन हाथ जोड़कर कहां पड़ा था अर्जुन बंदोबस्त करो मेरा मेरे प्राण प्रतिज्ञा मत चला रहा हूं मैं तो मेरे रसके पिया की दूरी सही कर रहा था जिससे रक्त सही चल जाए और उन्हें उसी को भैया को उसमें लगा के रखना यह ऐसे गोविंद से ऐसी गोविंदा हैं परंतु यादों में परम कृपालु में भक्तों ने कह रहा हूं कि सारे अखबारों में विष्णु के 24 अवतारों में दिखाया जाए 2 अवतार यंत्र श्रेष्ठ एंड सलाद में हमेशा स्तुत्य हैं पूर्ण अवतार माने जाते हैं इसलिए कृष्ण नीतियों से परिपूर्ण थे मस्त सारी जनता के लाडले थे प्रचलित विशेष लाल ने थे ब्रिज में आज भी वहां गोविंद नहीं कहते हैं उनको कोई भोपाल नहीं कहता है हमारा लल्ला कितना प्यारा कितना मिठास कितना मदरसा कुल कितनी हसरत सुकून है भाषा है इसलिए कहते हैं कि गोविंद ने जहां पर भ्रमण किया है जहां की खुशी में हम तो गोवर्धन मथुरा आधी जाते हैं उसकी ध्वज में लौटना अपना परम भाग्य मानते हैं इसलिए क्योंकि वह गोविंद की भूमि है वो कृष्णा की भूमि है उसका ने वचन लिया उनके साथ रहे उनके साथ भी लाए कि सारे जनता को हंसाया देखो आप उन गोपियों के मुख्यम चलाते थे उन्हीं गोपियों का दही दूध से थे लेकिन वही गोपियां कृष्ण के जिस दिन प्रस्तुत चोरी करने नहीं जाते मखन चोरी करने या दही लूटते थे उस दिन उनको बेचैनी हो जाती थी और वे दादा देव कुमार ने यशोदा मैया से आती है भैया आज गोविंद को बांध के रख दिया है तो गोविंदा ही नहीं आप तो हमारे दही और मक्खन में से किसी ने चोरी नहीं की किसी ने कप्तानी खाया यह प्रेम था गोविंद का समस्त पेन में बना दिया उन्होंने अपना खेत अपना ऐसे घूम को मैं बार-बार नमन करता हूं बार-बार चरण वंदना करता हूं बंदे गोविंद गोविंद

agar chahte ek pal mein hi samast karmon ko nasht kar sakte hain kyonki unke paas jo hathiyar hai sudarshan chakra ka koi tod nahi aur koi rukavat nahi kiccha matrishakti se chalta hai lekin govind aise nahi govind apne upar sir par bhi lena chahte hain ki govind mein nemaram jab bhi toh raunak deshon ki chaturaai moni pratigya kar li ki main poore yudh mein kabhi hatya nahi bataunga aur jab ki samast kauravon ko mara isi mahashakti mein prashna mara hai lekin sirf ek hi nahi diya koi yah nahi keh sakta ki karan arjun ki kya aukat jo pandavon ki kya aukat thi kaun jasim aaropiyon ko jeetna confirm kaam nahi tha lekin is sab govind ke maya govind ki shakti yahi karan tha ki govind ryhthm ko kyon nahi mara are kahin bhi dekh lo dekh lo photo tumhare karmon ke parinam hi tumko apne aap acche karm hain sakti ho aur breakup mein durgati hogi durgati ke mukhya ho isliye mere mitra govind toh govind ki nitiyan toh saare sansar ke liye ek patthar saabit karne wali hain unhone saam daam dand bhed ki jo mitti di hai chanakya niti yahan par ek kankad kovind ne kiya toh sabse pehle shamili ki ka prayog lo phir dhaam ka prayog lo phir bhed ka prayog lo jab free ho jaaye jab koi sahara nahi bacha hai koi upay nahi bacha hai ab unhone kaha ki hamara shatru kitna pool hai ki kisi bhi gati se nahi ruk raha hai anyay adharma sehat peeche nahi lag raha hai aap uska phone toh nahi aapke paas shanti ke liye bhi fail ho chuki hai ram ki niti ghoshit ki hai dand bhed ki niti fail ho chuki hai wahan kovind ne kaha ki yahi karan tha ki samast kauravon ko baar baar samjhane ke liye god roop mein jaate rahe aur bhi kaurav govind ka apman karte rahe lekin govind ne kabhi apne se nahi liya kabhi krodh bhi kiya tha chahte toh acre mein samast vargon ko maar daalte toh kya aukat samast logo ko yaad hoga is samay vishwa pitamah pratigya kar li toh lalu ganga jumani ko shaant jaanch ki jad mein yadi unse ast nahi hota liye kyonki tumhari pratigya hai ki main sirf dimag toh nahi ho paunga aur jo meri pratigya hai ki main tumse aaj abe toh aap us din bhi sukhram ne sab bhayankar chandia samast pandavon mein khalbali match gayi aur unko lagne laga ki aaj hamari parajay ho jayegi bhakton ne arjun se kaha ki kayar tu itni der se dabaav ko sahan kar raha hai teri saree sena aa rahi hai aur tu keh raha tha ki main band karunga govind ko band karo chadgaya chand krodh aa gaya govind bhool gaye apni pratigya ko toh maine kya kyonki waqt deta hai kya hum waqt tumhare abbu patni ke pyar mere waqt mere swami unke liye apna sab kuch chod sakta hoon beti meri maan apman ki parvaah nahi lekin mere bhakton ka koi apman kar de yah main nahi keh sakta isliye govind ne bhishma ki pratigya purn karne ke liye kyonki 20 com ke param bhakt the pratigya purn karne ke liye govind apni pratigya bhool gaye aur unhone rath ka pahiya nikaal diya aur sudhakar kamane lage the jab bhi toh batane mein hath jodkar saamne khade ho gaye unhone kaha toh maine tumse baat karne ko taiyar hoon main aap se hi toh nahi kar sakta kyonki aap toh govind narayan hai chacha main aapse kya kar sakti hoon aap lekin mujhe tumhari maut shikaar hai aur bata apne hath jod liye sabhi govindanand ko saza rakhi hai arjun hath jodkar kahaan pada tha arjun bandobast karo mera mere praan pratigya mat chala raha hoon main toh mere rasake piya ki doori sahi kar raha tha jisse rakt sahi chal jaaye aur unhe usi ko bhaiya ko usme laga ke rakhna yah aise govind se aisi govinda hain parantu yaadon mein param kripalu mein bhakton ne keh raha hoon ki saare akhbaron mein vishnu ke 24 avataron mein dikhaya jaaye 2 avatar yantra shreshtha and salad mein hamesha stutya hain purn avatar maane jaate hain isliye krishna nitiyon se paripurna the mast saree janta ke ladle the prachalit vishesh laal ne the bridge mein aaj bhi wahan govind nahi kehte hain unko koi bhopal nahi kahata hai hamara lalla kitna pyara kitna mithaas kitna madarsa kul kitni hasrat sukoon hai bhasha hai isliye kehte hain ki govind ne jaha par bhraman kiya hai jaha ki khushi mein hum toh govardhan mathura aadhi jaate hain uski dhwaj mein lautna apna param bhagya maante hain isliye kyonki vaah govind ki bhoomi hai vo krishna ki bhoomi hai uska ne vachan liya unke saath rahe unke saath bhi laye ki saare janta ko hansaya dekho aap un gopiyon ke mukhyam chalte the unhi gopiyon ka dahi doodh se the lekin wahi gopiyaan krishna ke jis din prastut chori karne nahi jaate makhan chori karne ya dahi lootate the us din unko bechaini ho jaati thi aur ve dada dev kumar ne yashoda maiya se aati hai bhaiya aaj govind ko bandh ke rakh diya hai toh govinda hi nahi aap toh hamare dahi aur makhan mein se kisi ne chori nahi ki kisi ne kaptani khaya yah prem tha govind ka samast pen mein bana diya unhone apna khet apna aise ghum ko main baar baar naman karta hoon baar baar charan vandana karta hoon bande govind govind

अगर चाहते एक पल में ही समस्त कर्मों को नष्ट कर सकते हैं क्योंकि उनके पास जो हथियार है सुदर

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Amit Arya

Youtuber - Motivation Speaker

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ए प्रश्न अच्छा है कि कृष्णा ने दुर्योधन को क्यों नहीं मारा तो दोस्तों देखिएगा कहना अगर चाहते तो महाभारत का पूरा युद्ध स्वयं ही समाप्त कर सकते थे लेकिन उन्होंने युद्ध में लड़ने का काम नहीं किया क्योंकि वह संसार को बताना चाहते थे कि जब युद्ध अपनों के बीच में हो तो हमें वहां पर शस्त्र उठाना चाहिए तो धर्म के पक्ष के उठाना चाहिए लेकिन हमारा मेन उद्देश्य है कि पक्ष में रहते हैं तो उनका दुर्योधन भी अपना था और पांडव भी अपने थे अर्थात कौरव और पांडव दोनों अपने थे तो उन्होंने यह निर्णय लिया कि मैं धर्म के पक्ष उन्होंने उनके सामने यह भी कहा था कि एक बेटी हमारी सेना ले सकता और दूसरा व्यक्ति मुझे दुर्योधन ने सोचा कि मैं इनकी सीना ले लूंगा इस शस्त्र नहीं उठाएंगे तो क्या कर सकते हैं लेकिन उन्होंने पांडवों का चयन किया और वे चाहते हैं कि के धर्म के पक्ष में ही कान्हा रहते थे अगर दुर्योधन के पक्ष में होते तो फिर धर्म की स्थापना और कृष्ण ने दुर्योधन को क्यों नहीं मारा तो उसका कारण था क्योंकि दुर्योधन की मृत्यु भीम के हाथों ही लिख दी थी जिस व्यक्ति की मृत्यु जिसके हाथों लिखी होती है उसकी मृत्यु उसके ही हाथों होती है इसीलिए कान्हा ने दुर्योधन को नहीं मारा था

a prashna accha hai ki krishna ne duryodhan ko kyon nahi mara toh doston dekhiega kehna agar chahte toh mahabharat ka pura yudh swayam hi samapt kar sakte the lekin unhone yudh mein ladane ka kaam nahi kiya kyonki vaah sansar ko bataana chahte the ki jab yudh apnon ke beech mein ho toh hamein wahan par shastra uthana chahiye toh dharm ke paksh ke uthana chahiye lekin hamara main uddeshya hai ki paksh mein rehte hain toh unka duryodhan bhi apna tha aur pandav bhi apne the arthat kaurav aur pandav dono apne the toh unhone yah nirnay liya ki main dharm ke paksh unhone unke saamne yah bhi kaha tha ki ek beti hamari sena le sakta aur doosra vyakti mujhe duryodhan ne socha ki main inki seena le lunga is shastra nahi uthayenge toh kya kar sakte hain lekin unhone pandavon ka chayan kiya aur ve chahte hain ki ke dharm ke paksh mein hi kanha rehte the agar duryodhan ke paksh mein hote toh phir dharm ki sthapna aur krishna ne duryodhan ko kyon nahi mara toh uska karan tha kyonki duryodhan ki mrityu bhim ke hathon hi likh di thi jis vyakti ki mrityu jiske hathon likhi hoti hai uski mrityu uske hi hathon hoti hai isliye kanha ne duryodhan ko nahi mara tha

ए प्रश्न अच्छा है कि कृष्णा ने दुर्योधन को क्यों नहीं मारा तो दोस्तों देखिएगा कहना अगर चाह

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भगवान श्री कृष्ण भगवान को नहीं मारा भीम के द्वारा जो है जो है याद है जो है भीम के द्वारा स्वीकार की शूटिंग जाकर चुराया है उनको अधिकार जैसे बताया घटना करूंगा जब तू आता भगवान श्री कृष्ण के द्वारा इस प्रकार कोई ऐसा ऐप जिसमें यह बताया गया महाभारत में युद्ध में पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे कि जो सैनिक उनको एक्सीलक मरी नहीं बताया था कि अगर हो तो धन को घर देख ले तो उनकी तपस्या और उनकी जो है इतनी बड़ी शक्ति है उनकी मौत का कारण रेलवे धर्म का पालन किया है कि ऑफिस है रोशन का संपूर्ण त्रिभुज का हो जाए और उसमें कोई भी वेतन प्रति कर्तव्य विषय विज्ञान होने के कारण जो है कल दर्जी ने क्यों नहीं आने वाला जीवन को बताया कि उसका में जानकारी के अनुसार व्यक्ति का मरीज ने कहा है स्नान करने के पश्चात रतन जी जो है गाना डीजे सोंग्स जा रहे थे उनका सहयोग आज का हो गया कुछ नहीं कर पाए तो संभाल के कछुआ पर मां के निकले और रास्ते में उनकी इच्छा थी वहां से निकले आवरण के बाद वह ग्रुप में जोड़ें महाविद्या रहे थे तो सिर्फ वाले में एक चौका और का किस प्रकार से अनुचित नहीं है और आप जो है कुछ 150 पर्यावरण एवं की जय सरकार क्यों नहीं किया है हंसते हुए ऐसे कहा जिस पर परिजनों को बुरा लगा और उन्होंने अपने एक केला के पत्ता से अपने शरीर में बांध जाओ पर बांध दिया और इसके उपरांत जो है वह गांधारी जी के समक्ष गाय माता के समक्ष प्रकाश अकेला का पत्ता बांधने के पश्चात को गांधारी की नजर है जब वह हस्ती खोली तो उनका शरीर का हो गया उनके प्रभाव से मनकापुर वह स्थान जहां पर और केला का पत्ता वाला था वो रह गया था पाकिस्तान का युद्ध कब हुआ था दुकानदार चित्र प्रयोग भाग जो जो नहीं था तो भगवान को पता था कि सदन का सारा खर्चा है जब आना तब राजस्थान में यही क्या महादेवन की चरणों पर को याद किया जिससे कि राज्य में है

bhagwan shri krishna bhagwan ko nahi mara bhim ke dwara jo hai jo hai yaad hai jo hai bhim ke dwara sweekar ki shooting jaakar churaya hai unko adhikaar jaise bataya ghatna karunga jab tu aata bhagwan shri krishna ke dwara is prakar koi aisa app jisme yah bataya gaya mahabharat me yudh me padhai nahi kar paa rahe the ki jo sainik unko eksilak mari nahi bataya tha ki agar ho toh dhan ko ghar dekh le toh unki tapasya aur unki jo hai itni badi shakti hai unki maut ka karan railway dharm ka palan kiya hai ki office hai roshan ka sampurna tribhuj ka ho jaaye aur usme koi bhi vetan prati kartavya vishay vigyan hone ke karan jo hai kal darji ne kyon nahi aane vala jeevan ko bataya ki uska me jaankari ke anusaar vyakti ka marij ne kaha hai snan karne ke pashchat ratan ji jo hai gaana DJ songs ja rahe the unka sahyog aaj ka ho gaya kuch nahi kar paye toh sambhaal ke kachua par maa ke nikle aur raste me unki iccha thi wahan se nikle aavaran ke baad vaah group me joden mahavidya rahe the toh sirf waale me ek chowka aur ka kis prakar se anuchit nahi hai aur aap jo hai kuch 150 paryavaran evam ki jai sarkar kyon nahi kiya hai hansate hue aise kaha jis par parijanon ko bura laga aur unhone apne ek kela ke patta se apne sharir me bandh jao par bandh diya aur iske uprant jo hai vaah gandhari ji ke samaksh gaay mata ke samaksh prakash akela ka patta bandhne ke pashchat ko gandhari ki nazar hai jab vaah hasti kholi toh unka sharir ka ho gaya unke prabhav se mankapur vaah sthan jaha par aur kela ka patta vala tha vo reh gaya tha pakistan ka yudh kab hua tha dukaandar chitra prayog bhag jo jo nahi tha toh bhagwan ko pata tha ki sadan ka saara kharcha hai jab aana tab rajasthan me yahi kya mahadevan ki charno par ko yaad kiya jisse ki rajya me hai

भगवान श्री कृष्ण भगवान को नहीं मारा भीम के द्वारा जो है जो है याद है जो है भीम के द्वारा स

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Mohitg

Student & Shopkeeper

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कृष्ण ने दुर्योधन को क्यों नहीं मारा सजना उठाने का वादा किया था सिर्फ अर्जुन को गीता का परिचय देते हुए लड़ने वाले छक्के

krishna ne duryodhan ko kyon nahi mara sajna uthane ka vada kiya tha sirf arjun ko geeta ka parichay dete hue ladane waale chakke

कृष्ण ने दुर्योधन को क्यों नहीं मारा सजना उठाने का वादा किया था सिर्फ अर्जुन को गीता का पर

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Aryan

A Philosopher and Motivator (Skin Care Taker, Hairs Care Taker)

2:19
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श्री कृष्ण भगवान विष्णु के अवतार माने गए हैं आपका प्रश्न बहुत ही अच्छा है कि भगवान श्रीकृष्ण ने खुद ही दुर्योधन को क्यों नहीं मार दिया परंतु अगर भगवान श्री कृष्ण खुद ही दुर्योधन को मार देते तो तू पहले दिन ही दुल्हन को मार सकते थे ना तो युद्ध होता ना इसकी कोई आवश्यकता थी परंतु यदि भगवान ही बुरे इंसानों को खुदा कर मुक्तिधाम मारने लगे तो इंसानों का यहां पर रहना किस काम का रह जाएगा क्योंकि इंसानों को अपनी समस्याओं से खुद ही लड़ना होगा ऐसा भगवान का नियम है जब तक कि ईश्वर की आवश्यकता ना हो तब तक अपनी समस्याओं से खुद ही लड़ना चाहिए हम भी अंत में ही ईश्वर की शरण में जाते हैं ईश्वर हमेशा साथ है परंतु अपनी समस्याओं से हमें खुद लड़ना चाहिए जो खुद का साथ देता है ईश्वर भी उसी का साथ देते हैं साहसी व्यक्ति का साथ ही ईश्वर देते हैं उसी प्रकार अगर श्रीकृष्ण खुद ही निवेदन को मार देते तो ना तो युद्ध होता मैं गीता का उपदेश आता नहीं किसी अन्य प्रकार के अच्छे काम दुखी अर्जुन के द्वारा होने थे मूवी नहीं हो पाती लोगों को शिक्षा ही नहीं मिल पाती और भगवान का जो अवतार लेने का महत्व था वह बहुत ही कम हो जाता है या सीमित हो जाता इसलिए कंच को क्योंकि कोई नहीं मार सकता था मानना बहुत ही असंभव था इसलिए भगवान श्री कृष्ण ने मार दिया दुल्हन को अर्जुन के द्वारा भी मारा जा सकता था ऐसा ही प्रारंभ में था इसलिए उन्होंने खुद नहीं मारा यह बहुत ही अच्छा प्रश्न था क्योंकि श्री कृष्ण एक संदेश देना चाहते थे युद्ध के माध्यम से इसीलिए उन्होंने खुद दुर्योधन को नहीं मारा वैसे तो कण-कण में भगवान है इसीलिए निर्धन को अर्जुन के द्वारा मरवाया गया धन्यवाद

shri krishna bhagwan vishnu ke avatar maane gaye hain aapka prashna bahut hi accha hai ki bhagwan shrikrishna ne khud hi duryodhan ko kyon nahi maar diya parantu agar bhagwan shri krishna khud hi duryodhan ko maar dete toh tu pehle din hi dulhan ko maar sakte the na toh yudh hota na iski koi avashyakta thi parantu yadi bhagwan hi bure insano ko khuda kar muktidham maarne lage toh insano ka yahan par rehna kis kaam ka reh jaega kyonki insano ko apni samasyaon se khud hi ladana hoga aisa bhagwan ka niyam hai jab tak ki ishwar ki avashyakta na ho tab tak apni samasyaon se khud hi ladana chahiye hum bhi ant me hi ishwar ki sharan me jaate hain ishwar hamesha saath hai parantu apni samasyaon se hamein khud ladana chahiye jo khud ka saath deta hai ishwar bhi usi ka saath dete hain sahasi vyakti ka saath hi ishwar dete hain usi prakar agar shrikrishna khud hi nivedan ko maar dete toh na toh yudh hota main geeta ka updesh aata nahi kisi anya prakar ke acche kaam dukhi arjun ke dwara hone the movie nahi ho pati logo ko shiksha hi nahi mil pati aur bhagwan ka jo avatar lene ka mahatva tha vaah bahut hi kam ho jata hai ya simit ho jata isliye kanch ko kyonki koi nahi maar sakta tha manana bahut hi asambhav tha isliye bhagwan shri krishna ne maar diya dulhan ko arjun ke dwara bhi mara ja sakta tha aisa hi prarambh me tha isliye unhone khud nahi mara yah bahut hi accha prashna tha kyonki shri krishna ek sandesh dena chahte the yudh ke madhyam se isliye unhone khud duryodhan ko nahi mara waise toh kan kan me bhagwan hai isliye nirdhan ko arjun ke dwara marwaya gaya dhanyavad

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के अवतार माने गए हैं आपका प्रश्न बहुत ही अच्छा है कि भगवान श्रीकृष

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भगवान श्री कृष्ण ने दुर्योधन को क्यों नहीं मारा भगवान कृष्ण ने जब नारी के सामने प्रतिज्ञा की थी कि मैं इस युद्ध में लड़ाई नहीं करूंगा ना शस्त्र का प्रयोग करूंगा और मैं केवल सारथी के रूप में काम करूंगा

bhagwan shri krishna ne duryodhan ko kyon nahi mara bhagwan krishna ne jab nari ke saamne pratigya ki thi ki main is yudh mein ladai nahi karunga na shastra ka prayog karunga aur main keval saarthi ke roop mein kaam karunga

भगवान श्री कृष्ण ने दुर्योधन को क्यों नहीं मारा भगवान कृष्ण ने जब नारी के सामने प्रतिज्ञा

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