इंसान पूजा क्यों करता है?...


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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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प्रपोज करना कोई गुनाह नहीं करनी चाहिए यह ईश्वर को अभागन के विभिन्न साधन है विभिन्न माध्यम अब आप ही कहेंगे ना मानने वाले मस्जिद में जाकर की नमाज पढ़ते हैं तो भी क्या गुनाह करके आप का मैटर को याद करने का और कोई सा कारवादी है कोई मंदिर में जाकर ईश्वर पूजन करता है आराधन करता है वंदन करता है नमन करता है तो वह क्या गलत है कोई गिरजा करने जा करके बहुत के सामने राजन करता है उनका पूरा मैटर क्योंकि हम भारतीय संविधान सभी धर्मावलंबियों का देता है एक दूसरे के धर्म को बुरा ना कि तू ही एक दूसरे के धर्म को भी अपने धर्म के समान सम्मान सम्मान देते हुए सभा के साथ अपने धर्म के अनुसार आराधन कर सकते हैं तू अपने अपने विश्वास होते हैं अपने अपने विचार होते हैं लेकिन हम भारतीयों में एक बहुत बड़ी कमी है कि हम इतने धार्मिक आस्था एवं एक दूसरे के धर्म को बुरा कहते हैं गलत कहते हैं अपशब्द कहते हैं और सिर्फ जिस धर्म को मानते हैं उसी धर्म को हमसे कहते हैं हमारी धार्मिक असहिष्णुता है यह धार्मिक अमरिक कटता है यह हमारी अशिक्षा है हमारी अज्ञानता है कि हमारी मूर्खता हमारी अरब्रिट पर क्वेश्चन मार्क हमारी क्वालिफिकेशन पर क्वेश्चन मार्क है क्योंकि हर समझदार व्यक्ति दूसरों को भी उतनी इज्जत देता है जितनी अपने लिए जो चाहता है इसलिए किसी दूसरे की आराधना पद्धति पर हमको उंगली उठाने का कोई अर्थ नहीं होता है हमें ठीक है हम अपने में हम ईश्वर का पूजन करते हैं लेकिन दूसरों को ऑफ करना दूसरों की भावनाओं को चोट पहुंचाना दूसरों पर लांछन लगाना दूसरों पर आरोप लगाना सबसे बड़ा गुनाह है आदमी को दूसरों का भी इज्जत करनी चाहिए दूसरों का भी सम्मान करना चाहिए दूसरों की भावनाओं की कद्र करनी चाहिए वह सबसे अच्छा आदमी है पहली फाइट जीनियस है ब्यूटीफुल है और मैं उसे जेंटल प्रसन्न कर सकता हूं जो दूसरों की भावनाओं को फिर बताएं जो दूसरों की भावनाओं में दोस्त निकालता है बस्ती में चाहे वह सपा पास लिख दिया पीएचडी की हो चाय पी ली क्यों क्या कितनी बड़ी उच्च पद पर काम करता हूं मैं उससे नथिंग मानता हूं वह पार्टी लेट्स है वह एबिलिटी लेस कॉलेज के जलजले है क्योंकि दूसरों को दूसरों को सम्मान देना चाहिए सबके अपने अपने अलग विचार होते हैं इसका मतलब यह नहीं कि मेरे विचार ही मात्र सत्य संसार में और के भी विचार सकते हैं और भी उनके मेथड है उनको भी सकते हैं सभी को सम्मान देना हमारा फर्ज है कर्तव्य है पर यही हमारी कॉल भी संस्कृति है यही हमारा नंबर समझाता है

propose karna koi gunah nahi karni chahiye yah ishwar ko abhagan ke vibhinn sadhan hai vibhinn madhyam ab aap hi kahenge na manne waale masjid mein jaakar ki namaz padhte hain toh bhi kya gunah karke aap ka matter ko yaad karne ka aur koi sa karvadi hai koi mandir mein jaakar ishwar pujan karta hai aradhan karta hai vandan karta hai naman karta hai toh vaah kya galat hai koi giraja karne ja karke bahut ke saamne rajan karta hai unka pura matter kyonki hum bharatiya samvidhan sabhi dharmavalambiyon ka deta hai ek dusre ke dharm ko bura na ki tu hi ek dusre ke dharm ko bhi apne dharm ke saman sammaan sammaan dete hue sabha ke saath apne dharm ke anusaar aradhan kar sakte hain tu apne apne vishwas hote hain apne apne vichar hote hain lekin hum bharatiyon mein ek bahut badi kami hai ki hum itne dharmik astha evam ek dusre ke dharm ko bura kehte hain galat kehte hain apashabd kehte hain aur sirf jis dharm ko maante hain usi dharm ko humse kehte hain hamari dharmik asahishnuta hai yah dharmik amarik katata hai yah hamari asiksha hai hamari agyanata hai ki hamari murkhta hamari arabrit par question mark hamari qualification par question mark hai kyonki har samajhdar vyakti dusro ko bhi utani izzat deta hai jitni apne liye jo chahta hai isliye kisi dusre ki aradhana paddhatee par hamko ungli uthane ka koi arth nahi hota hai hamein theek hai hum apne mein hum ishwar ka pujan karte hain lekin dusro ko of karna dusro ki bhavnao ko chot pahunchana dusro par lanchan lagana dusro par aarop lagana sabse bada gunah hai aadmi ko dusro ka bhi izzat karni chahiye dusro ka bhi sammaan karna chahiye dusro ki bhavnao ki kadra karni chahiye vaah sabse accha aadmi hai pehli fight genius hai beautiful hai aur main use Gentle prasann kar sakta hoon jo dusro ki bhavnao ko phir bataye jo dusro ki bhavnao mein dost nikalata hai basti mein chahen vaah sapa paas likh diya phd ki ho chai p li kyon kya kitni badi ucch pad par kaam karta hoon main usse nothing manata hoon vaah party lets hai vaah ability less college ke jaljale hai kyonki dusro ko dusro ko sammaan dena chahiye sabke apne apne alag vichar hote hain iska matlab yah nahi ki mere vichar hi matra satya sansar mein aur ke bhi vichar sakte hain aur bhi unke method hai unko bhi sakte hain sabhi ko sammaan dena hamara farz hai kartavya hai par yahi hamari call bhi sanskriti hai yahi hamara number samajhaata hai

प्रपोज करना कोई गुनाह नहीं करनी चाहिए यह ईश्वर को अभागन के विभिन्न साधन है विभिन्न माध्यम

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Shubham Saini

Software Engineer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इंसान पूजा इसलिए करता है कि वह अंतर्मन से शुद्ध हो जाता है और उसे शांति की प्राप्ति होती है इंसान का सबसे बड़ा सुख शांति है खुद से अपने अंतर्मन से शांत हो वह इसकी सबसे बड़ी संपत्ति है

insaan puja isliye karta hai ki vaah antarman se shudh ho jata hai aur use shanti ki prapti hoti hai insaan ka sabse bada sukh shanti hai khud se apne antarman se shaant ho vaah iski sabse badi sampatti hai

इंसान पूजा इसलिए करता है कि वह अंतर्मन से शुद्ध हो जाता है और उसे शांति की प्राप्ति होती ह

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इंसान पूजा इसलिए करता है ताकि उसे आत्मिक शांति मिले उसका भगवान के ऊपर अटूट विश्वास रहता है और उसे मन की शांति रहती है कि वह ईश्वर को बज रहा उसके साथ रहेगा और जीवन में कभी उसका बुरा नहीं होगा तो अच्छे पथ पर अग्रसर रोता रहेगा उसकी सारी समस्याओं का निराकरण करेगा इसलिए व्यक्ति ईश्वर की पूजा पाठ करता है

insaan puja isliye karta hai taki use atmik shanti mile uska bhagwan ke upar atut vishwas rehta hai aur use man ki shanti rehti hai ki vaah ishwar ko baj raha uske saath rahega aur jeevan mein kabhi uska bura nahi hoga toh acche path par agrasar rota rahega uski saree samasyaon ka nirakaran karega isliye vyakti ishwar ki puja path karta hai

इंसान पूजा इसलिए करता है ताकि उसे आत्मिक शांति मिले उसका भगवान के ऊपर अटूट विश्वास रहता है

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Kesharram

Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इंसान पूजा क्यों करता है दोस्तों इंसान पूजा इसलिए कहता है कि उसके तेज बुद्धि हो और सोचने की समझ सकते इसमें बहुत ज्यादा हो और उस देश से वह कार्य कर सकें जान भी जाए उनका मान सम्मान हो तो दोस्तों हर किसी को किसी न किसी तरह से अपने को साबित करने का मौका ईश्वर ने दिया है लेकिन कोई तो उस समय का प्रयोग अपने सटीक समय में कर पाते हैं लेकिन कई ऐसे हैं जिनको पता नहीं है कि मेरा ही संस्थान में उचित है क्या है तो दोस्तों इस सच्चे इंसान की पूजा वह यह कि हमें ऐश्वर्य प्राप्त करना है और जो जिस मार्ग पर हम सब ने उसको और भी आगे बढ़ाना है जैसे माली जी आपके पास 1 मंजिल की हेली है तो आप यह सोच रहे हो कि 2 मंजिल कब बनेगी जिस दिन 2 मंजिल भी सोचोगे 3 दिन कब बनेगी

insaan puja kyon karta hai doston insaan puja isliye kahata hai ki uske tez buddhi ho aur sochne ki samajh sakte isme bahut zyada ho aur us desh se vaah karya kar sake jaan bhi jaaye unka maan sammaan ho toh doston har kisi ko kisi na kisi tarah se apne ko saabit karne ka mauka ishwar ne diya hai lekin koi toh us samay ka prayog apne sateek samay mein kar paate hain lekin kai aise hain jinako pata nahi hai ki mera hi sansthan mein uchit hai kya hai toh doston is sacche insaan ki puja vaah yah ki hamein aishwarya prapt karna hai aur jo jis marg par hum sab ne usko aur bhi aage badhana hai jaise maali ji aapke paas 1 manjil ki heli hai toh aap yah soch rahe ho ki 2 manjil kab banegi jis din 2 manjil bhi sochoge 3 din kab banegi

इंसान पूजा क्यों करता है दोस्तों इंसान पूजा इसलिए कहता है कि उसके तेज बुद्धि हो और सोचने क

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Aditya Kapoor

I Am Studying B A First Year

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इंसान पूजा इसलिए करता है क्योंकि उसकी एक आस रहती है कि हां मैं यह मान लूंगा इन्हें पूछूंगा तो हमारी मनोकामना या हमारी जो भी कमी घटी है वह पूर्ण हो जाएगी बताइए इंसान की सोच पर निर्भर करता है कि हां मैं पूजा करता हूं उसे उसे 134 उसे मतलब पूजा करने का मतलब है कैसा टाइम होता है जिस समय आपके ईश्वर का सही आपके भगवान से मेल मिलाप होता है आपका और आपके प्रदूषण का मन से तो इंसान पूजा करता है

insaan puja isliye karta hai kyonki uski ek aas rehti hai ki haan main yah maan lunga inhen poochhoonga toh hamari manokamana ya hamari jo bhi kami ghati hai vaah purn ho jayegi bataiye insaan ki soch par nirbhar karta hai ki haan main puja karta hoon use use 134 use matlab puja karne ka matlab hai kaisa time hota hai jis samay aapke ishwar ka sahi aapke bhagwan se male milap hota hai aapka aur aapke pradushan ka man se toh insaan puja karta hai

इंसान पूजा इसलिए करता है क्योंकि उसकी एक आस रहती है कि हां मैं यह मान लूंगा इन्हें पूछूंगा

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इंसान पूजा करता है अपनी आंतरिक शांति के लिए और अपने अंदर आत्मविश्वास जगाने के लिए इंसान मेहनत तो कर लेता है लेकिन उसको एक अंधा विश्वास भी तो होना चाहिए कि यहां मेहनत करना हो जाएगा कि नहीं सिलेक्शन मेरा या मेहनत कर रहा हूं व्यापार में मेरा हो जाएगा फायदा कि नहीं तू वह जो होती है उसी के लिए ही वह आदमी श्वास के लिए वह सांत्वना के लिए उसी के लिए पूजा करता है और अपनी शाम की सबसे चौड़ी होते मन की शांति के लिए कभी आप हाथ जोड़ के सितम आएंगे सच में बहुत शांति मिलती है दिल में मेरी तस्वीर है मैंने खुद लोग सभी लोग ऐसे ही कोई चीज नहीं होता है ना खराब भी देखें इंसान के लिए पूजा करता है और पूजा करने से अंदर कुछ ना कुछ बदलाव होता रहता है नियमित पूजा करना चाहिए अगर अब कुछ सुनाओ जो है वह चेंज हो जाते हैं कुछ बुरे कर्म दूर हो जाते हैं तो हमें अच्छे बुरे दोनों लोग होते हैं और जैसे हम बुरा कर्म करेंगे तुम्हारा बुरा होगा वह बढ़ता चला जाएगा बुराई परसेंटेज और रक्षाबंधन डाउन होती के लिए अच्छा करेंगे तो अच्छा ही बढ़ती जाएगी अब बुराई बढ़ती जाएगी उसके हिसाब से हमको फल भोगना पड़ता है इसीलिए आप अच्छा ही परसेंटेज बढ़ाइए जवाब पर पूजा पाठ करेंगे आप की हिम्मत ही नहीं होंगी कि बोला करें क्योंकि आप सोचेंगे कि भगवान देख रहा है सच में देख रहा है देख रहा है तो भाई क्यों आपको आसपास देखोगे चलो ठीक है कोई नहीं है अरे ऊपर भी देख लेना ऊपर वाला भी देख रहा है इसलिए ऊपर हमेशा देखकर पाप करो तुम ऐसा मेरे मन में डर रहे थे या कर देने जा रहा हूं या गलत नफरत हो गई भगवान तुम्हें अच्छा लगा इसलिए पूजा करता है भगवान भगवान पर विश्वास करता है

insaan puja karta hai apni aantarik shanti ke liye aur apne andar aatmvishvaas jagaane ke liye insaan mehnat toh kar leta hai lekin usko ek andha vishwas bhi toh hona chahiye ki yahan mehnat karna ho jaega ki nahi selection mera ya mehnat kar raha hoon vyapar mein mera ho jaega fayda ki nahi tu vaah jo hoti hai usi ke liye hi vaah aadmi swas ke liye vaah santwana ke liye usi ke liye puja karta hai aur apni shaam ki sabse chaudi hote man ki shanti ke liye kabhi aap hath jod ke sitam aayenge sach mein bahut shanti milti hai dil mein meri tasveer hai maine khud log sabhi log aise hi koi cheez nahi hota hai na kharab bhi dekhen insaan ke liye puja karta hai aur puja karne se andar kuch na kuch badlav hota rehta hai niyamit puja karna chahiye agar ab kuch sunao jo hai vaah change ho jaate hain kuch bure karm dur ho jaate hain toh hamein acche bure dono log hote hain aur jaise hum bura karm karenge tumhara bura hoga vaah badhta chala jaega burayi percentage aur rakshabandhan down hoti ke liye accha karenge toh accha hi badhti jayegi ab burayi badhti jayegi uske hisab se hamko fal bhogna padta hai isliye aap accha hi percentage badhaiye jawab par puja path karenge aap ki himmat hi nahi hongi ki bola kare kyonki aap sochenge ki bhagwan dekh raha hai sach mein dekh raha hai dekh raha hai toh bhai kyon aapko aaspass dekhoge chalo theek hai koi nahi hai are upar bhi dekh lena upar vala bhi dekh raha hai isliye upar hamesha dekhkar paap karo tum aisa mere man mein dar rahe the ya kar dene ja raha hoon ya galat nafrat ho gayi bhagwan tumhe accha laga isliye puja karta hai bhagwan bhagwan par vishwas karta hai

इंसान पूजा करता है अपनी आंतरिक शांति के लिए और अपने अंदर आत्मविश्वास जगाने के लिए इंसान मे

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देखिए जाके अपनी प्रश्न किया एक इंसान पूजा क्यों करता है इंसान कब तक कर्म करता है कि कर्म ही पूजा है और पूजा भी एक कर्म है तो इंसान अपना कर्म करता है धन्यवाद

dekhiye jake apni prashna kiya ek insaan puja kyon karta hai insaan kab tak karm karta hai ki karm hi puja hai aur puja bhi ek karm hai toh insaan apna karm karta hai dhanyavad

देखिए जाके अपनी प्रश्न किया एक इंसान पूजा क्यों करता है इंसान कब तक कर्म करता है कि कर्म ह

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munmun

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इंसान पूजा इसलिए करता है क्योंकि वह जो है अपने मन की शांति के लिए पूजा करता है अपने-अपने उसके मन में नकारात्मक विचार ना इसलिए भाई पूजा करता है और घर की सुख शांति के लिए पूजा करता है

insaan puja isliye karta hai kyonki vaah jo hai apne man ki shanti ke liye puja karta hai apne apne uske man mein nakaratmak vichar na isliye bhai puja karta hai aur ghar ki sukh shanti ke liye puja karta hai

इंसान पूजा इसलिए करता है क्योंकि वह जो है अपने मन की शांति के लिए पूजा करता है अपने-अपने उ

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