क्या बुज़ुर्गों को वृद्धाश्रम में छोड़ देना सही है?...


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Bhim Singh Kasnia

Acupunctrist,Motivational Speaker

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार आपका सवाल है कि क्या बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में छोड़ देना सही है देखिए जरा भी सही नहीं है क्योंकि यह बात था मगर खुद पर ले तो हम भी कभी वृद्ध होंगे अगर हमें हमारे बच्चे जिनको हम अब बड़े नाथ से पाल रहे हैं और वह हमें वृद्ध आश्रम में छोड़ जाए तो हमें कैसा अनुभव रहेगा बस इतने उदाहरण मात्र से इंसान को समझ जाना चाहिए कि तेरी युवा बने रहने का अमर आशीर्वाद किसे भी प्राप्त नहीं है इसलिए बुजुर्गों का सम्मान करें उनसे प्यार करें उनकी केयर करें उनकी रिस्पेक्ट करें क्योंकि उन्हीं के हाथों में पल बैठकर हम पढ़े हुए हैं और उन्होंने ही हमें यह दुनिया दिखाई है जो हम जी रहे हैं धन्यवाद नमस्कार

namaskar aapka sawaal hai ki kya bujurgon ko vridha ashram me chhod dena sahi hai dekhiye zara bhi sahi nahi hai kyonki yah baat tha magar khud par le toh hum bhi kabhi vriddh honge agar hamein hamare bacche jinako hum ab bade nath se pal rahe hain aur vaah hamein vriddh ashram me chhod jaaye toh hamein kaisa anubhav rahega bus itne udaharan matra se insaan ko samajh jana chahiye ki teri yuva bane rehne ka amar ashirvaad kise bhi prapt nahi hai isliye bujurgon ka sammaan kare unse pyar kare unki care kare unki respect kare kyonki unhi ke hathon me pal baithkar hum padhe hue hain aur unhone hi hamein yah duniya dikhai hai jo hum ji rahe hain dhanyavad namaskar

नमस्कार आपका सवाल है कि क्या बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में छोड़ देना सही है देखिए जरा भी सही

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Shailesh Kumar Dubey

Yoga Teacher , Retired Government Employee

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Pradeep Solanki

Corporate Yoga Consultant

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बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम में रखना ठीक नहीं है आखिरकार आपको उन्होंने पाला है आप उनको साथ रखें लेकिन अगर आपके घर में उनको बता 4:00 हो रहा है और खाना नहीं मिल रहा और उनकी बुरी हालत है तब तो घर से ज्यादा ब्रजभाषा में बैठा है कम से कम उम्र की उम्र के बाद लोग बोलेंगे दिल लग जाएगा अपने मां बाप की सेवा करते हो नहीं छोड़ना चाहिए बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिए लेकिन अगर आपने बिल्कुल दुखी करके आना तो पैटर्न खोलो

bujurgon ko vriddh ashram me rakhna theek nahi hai aakhirkaar aapko unhone pala hai aap unko saath rakhen lekin agar aapke ghar me unko bata 4 00 ho raha hai aur khana nahi mil raha aur unki buri halat hai tab toh ghar se zyada brajabhasha me baitha hai kam se kam umar ki umar ke baad log bolenge dil lag jaega apne maa baap ki seva karte ho nahi chhodna chahiye bilkul nahi chhodna chahiye lekin agar aapne bilkul dukhi karke aana toh pattern kholo

बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम में रखना ठीक नहीं है आखिरकार आपको उन्होंने पाला है आप उनको साथ रख

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Yog Guru Amit Agrawal Rishiyog

Yoga Acupressure Expert

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अपने क्या बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम में छोड़ देना सही है मैं इसके लिए सिर्फ इतना ही कहूंगा कि यह जो प्रश्न है इस पर अपने आप को रख कर देखिए कल जब आपके बच्चे बड़े होंगे और वह आपको वृद्ध आश्रम में छोड़ते हैं परिवार के रहते हुए आपके बच्चों के होते हुए आप वृद्ध आश्रम में रहते हैं तो आपको कैसा महसूस होता है तो ठीक उसी स्थिति पर रखकर विचार करिए यह बिल्कुल भी उचित नहीं है मैं ही अगर अपने आप पर यह प्रश्न रख कर बात करता हूं तो मां बाप जिन्होंने पैदा किया है जिन्होंने संस्कार दिए हैं जिन्होंने पाला है पूछा है आज हमें इस स्थिति तक पहुंचाया है क्या इसलिए आज उनकी सेवा करने की स्थिति आई है उम्र आई है कि हम उनकी इस बुजुर्ग उम्र की स्थिति में सेवा करें और उस स्थिति में हम उन्हें वृद्ध आश्रम में छोड़ा है सिर्फ अपनी आकांक्षाएं अपने आनंद जीवन के लेने के लिए यह बहुत बढ़िया पाप है इससे बड़ा पाप मुझे नहीं लगता जीवन में हो सकता है और वह मां-बाप भी कभी सुखी नहीं होंगे कभी आनंदन नहीं होंगे आप जिनके साथ ऐसा करेंगे नेचुरल ली वह अपने बच्चों को यह बच्चों के प्रति तो गलत भावना किसी मां बाप की नहीं होती लेकिन मां-बाप का दिल अंदर से बहुत दुखी होता है बहुत रोता है इसलिए ऐसा पाप कर्म मत करिए जो सेवा हो सकती है मां-बाप के रहते हुए आप उनकी सेवा करिए यह सेवा बड़े भाग्य वालों को मिलती है हर किसी के जीवन में यह सेवा नहीं होती हरिओम

apne kya bujurgon ko vriddh ashram me chhod dena sahi hai main iske liye sirf itna hi kahunga ki yah jo prashna hai is par apne aap ko rakh kar dekhiye kal jab aapke bacche bade honge aur vaah aapko vriddh ashram me chodte hain parivar ke rehte hue aapke baccho ke hote hue aap vriddh ashram me rehte hain toh aapko kaisa mehsus hota hai toh theek usi sthiti par rakhakar vichar kariye yah bilkul bhi uchit nahi hai main hi agar apne aap par yah prashna rakh kar baat karta hoon toh maa baap jinhone paida kiya hai jinhone sanskar diye hain jinhone pala hai poocha hai aaj hamein is sthiti tak pahunchaya hai kya isliye aaj unki seva karne ki sthiti I hai umar I hai ki hum unki is bujurg umar ki sthiti me seva kare aur us sthiti me hum unhe vriddh ashram me choda hai sirf apni akanchaye apne anand jeevan ke lene ke liye yah bahut badhiya paap hai isse bada paap mujhe nahi lagta jeevan me ho sakta hai aur vaah maa baap bhi kabhi sukhi nahi honge kabhi anandan nahi honge aap jinke saath aisa karenge natural li vaah apne baccho ko yah baccho ke prati toh galat bhavna kisi maa baap ki nahi hoti lekin maa baap ka dil andar se bahut dukhi hota hai bahut rota hai isliye aisa paap karm mat kariye jo seva ho sakti hai maa baap ke rehte hue aap unki seva kariye yah seva bade bhagya walon ko milti hai har kisi ke jeevan me yah seva nahi hoti hariom

अपने क्या बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम में छोड़ देना सही है मैं इसके लिए सिर्फ इतना ही कहूंगा

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Bk Ashok Pandit

आध्यात्मिक गुरु

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Shipra Ranjan

Life Coach

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आपका सवाल है कि क्या बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम में छोड़ देना सही है तो मेरे विचार में तो यह सोचना भी बहुत गलत है कि आप अपने घर के बड़े बुजुर्गों को किसी वृद्ध आश्रम में छोड़ दें ऐसा विचार आना भी बहुत गलत है जिन हमारे घर के बड़े बुजुर्गों ने आपको सूरज जीवन दिया आपकी जिंदगी के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी है पूरी जिंदगी आपको पाल पोस कर बड़ा किया कितने तारीख तक मैसेज किए हैं आपके खुद के बच्चों के लिए आप सैक्रिफाइस कर रहे हैं आप उस चीज को नहीं समझ पा रहे हैं अगर तो बहुत ही गलत है यह अगर आप अभी सोच रहे हैं अपने घर के बड़े बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम में जाने के लिए तो आप अपने आने वाली जनरेशन को नई पीढ़ी को क्या शिक्षा दे रहे हैं कल को आपके आने वाली नई पीढ़ी भी क्या करें कि आपको जाकर की व्यथा आश्रम ही छोड़ कर के आ जाएगी सोच कर देखिए हम खुद अपने आने वाली पीढ़ी के लिए उदाहरण बन रहे हैं यदि आप ऐसा विचार भी लाते हैं बहुत गलत है जब हमारे घर के बड़े बुजुर्गों ने अपनी जिंदगी में से अपनी भागदौड़ वाली जिंदगी में से हमें समय लिया है हम उन्हें क्यों नहीं दे सकते हैं समय देना चाहिए है बिल्कुल देना चाहिए है समय और हमें उनका ध्यान भी रखना चाहिए हैं ऐसे वक्त में जिंदगी के इस पड़ाव में उन्हें अकेलेपन की नहीं उन्हें हमारे साथ की जरूरत है तो बेहतर यही है कि उन्हें अपने साथ रखें प्यार दे और उनका सहारा बने आपका दिन शुभ रहे धन्यवाद

aapka sawaal hai ki kya bujurgon ko vriddh ashram mein chod dena sahi hai toh mere vichar mein toh yah sochna bhi bahut galat hai ki aap apne ghar ke bade bujurgon ko kisi vriddh ashram mein chod de aisa vichar aana bhi bahut galat hai jin hamare ghar ke bade bujurgon ne aapko suraj jeevan diya aapki zindagi ke liye apni zindagi kurban kar di hai puri zindagi aapko pal pos kar bada kiya kitne tarikh tak massage kiye hain aapke khud ke baccho ke liye aap sacrifice kar rahe hain aap us cheez ko nahi samajh paa rahe hain agar toh bahut hi galat hai yah agar aap abhi soch rahe hain apne ghar ke bade bujurgon ko vriddh ashram mein jaane ke liye toh aap apne aane wali generation ko nayi peedhi ko kya shiksha de rahe hain kal ko aapke aane wali nayi peedhi bhi kya kare ki aapko jaakar ki vyatha ashram hi chod kar ke aa jayegi soch kar dekhiye hum khud apne aane wali peedhi ke liye udaharan ban rahe hain yadi aap aisa vichar bhi laate hain bahut galat hai jab hamare ghar ke bade bujurgon ne apni zindagi mein se apni bhagdaud wali zindagi mein se hamein samay liya hai hum unhe kyon nahi de sakte hain samay dena chahiye hai bilkul dena chahiye hai samay aur hamein unka dhyan bhi rakhna chahiye hain aise waqt mein zindagi ke is padav mein unhe akelepan ki nahi unhe hamare saath ki zarurat hai toh behtar yahi hai ki unhe apne saath rakhen pyar de aur unka sahara bane aapka din shubha rahe dhanyavad

आपका सवाल है कि क्या बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम में छोड़ देना सही है तो मेरे विचार में तो यह

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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क्या बुजुर्गों को 10:00 अनेकों देना सही बिल्कुल सही नहीं है मैं इसको पुरजोर विरोध करता हूं मेरे हिसाब से तो बुजुर्गों को छोड़ना बिल्कुल सही नहीं क्योंकि आज व्रत है लेकिन जवानी उसने अपनी बगिया खड़ी की है उसी के फल स्वरुप हमारी बगिया के फूल अमर पुत्र हमारी पुत्रवधू पुत्र के बच्चे हम वही उसको परिवार समझते अब बुजुर्गों को भी आपको छोड़ देंगे तो इसका मतलब यह हुआ कि जो हमारे हिंदुस्तान परिवार की परिभाषा है कि अगले कुछ तो फिर समझाया जाए परिवार को तो बुजुर्ग और संयुक्त परिवार की जड़ और जड़ता गणेश किया उनको कहीं और छोड़ दिया जाए तो परिवार सुखी पर आती कभी भी सुखी नहीं जाना समझा अनुभव कैसा लिखा हुआ सनातन सत्य क्योंकि बुजुर्ग जो हमारे परिवार की जय हो धन्यवाद

kya bujurgon ko 10 00 anekon dena sahi bilkul sahi nahi hai isko purjor virodh karta hoon mere hisab se toh bujurgon ko chhodna bilkul sahi nahi kyonki aaj vrat hai lekin jawaani usne apni BAGIYA khadi ki hai usi ke fal swarup hamari BAGIYA ke fool amar putra hamari putravadhu putra ke bacche hum wahi usko parivar samajhte ab bujurgon ko bhi aapko chod denge toh iska matlab yah hua ki jo hamare Hindustan parivar ki paribhasha hai ki agle kuch toh phir samjhaya jaaye parivar ko toh bujurg aur sanyukt parivar ki jad aur jadata ganesh kiya unko kahin aur chod diya jaaye toh parivar sukhi par aati kabhi bhi sukhi nahi jana samjha anubhav kaisa likha hua sanatan satya kyonki bujurg jo hamare parivar ki jai ho dhanyavad

क्या बुजुर्गों को 10:00 अनेकों देना सही बिल्कुल सही नहीं है मैं इसको पुरजोर विरोध करता हूं

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Umesh Upaadyay

Life Coach | Motivational Speaker

3:37
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी नहीं यह बिल्कुल सही नहीं है बल्कि ऐसा तो सोचना भी सही नहीं है क्यों क्योंकि यह लोग हैं कौन हमारे माता-पिता हो सकते हैं यह हमारे दादा दादी हो सके ना 9:00 नहीं हो सकते हैं जो भी है क्या के सदस्य हैं अब अगर यह नहीं होते तो हम नहीं होते हमारे लालन पालन पोषण जो भी कुछ है इन्होंने किया है अभय जब इनका बुढ़ापा आ गया है और शरीर थोड़ा ठीक से काम नहीं करता आया दश थोड़ी कम होती है यह आना तो स्वभाविक है हमेशा आदमी यंग तो रहेगा नहीं अब ऐसे में यह भी होता है कि सोर्स ऑफ इनकम इन की तरफ से होता नहीं है तो चाहे हो या ना हो आप भले ही एनिवर्सरी हो ना हो याद आते हो ना हो कोई बीमारी तकलीफ हो ना हो जैसे भी है हमें तो इनका साथ देना चाहिए यह बहुत जरूरी होता है जब हम छोटे थे तो हम इन्हीं की उंगली पकड़कर चलना सीखे खड़े होना सीख हीरो नहीं हमें सिखाया बात करना सिखाया संस्कार दिए तो क्या इन्होंने यह संस्कार दिए होंगे हमें केवल 1 दिन हमें ले जाकर छोड़ देना वृद्धाश्रम में भी नहीं यह बिल्कुल गलत बात है एकदम सही नहीं है चाहे आपकी जो कोई भी स्थिति हो भाई कोई बोलेगा मेरी फ्रेंड चल स्थिति खराब है यह कहानी बोकानी यह देखिए परमात्मा आपको वह सब कुछ दे देगा एक लिस्ट चलने लायक तो दे देगा मैंने कभी यह नहीं देखा कि घर में क्योंकि आपने बुजुर्गों को रखा हुए अपने माता-पिता को रखा हुआ है वह वृद्ध है उनके कारण घर में खाने को कुछ नहीं है या फिर किसी की मृत्यु हो गई है क्यों क्योंकि घर में खाने को नहीं है पैसे नहीं है क्यों क्योंकि वृद्ध लोग घर में रहते हैं ऐसा कभी नहीं हुआ है ना कभी होगा तो इसीलिए यह सब ख्याल निकाल देना चाहिए हां थोड़ी बहुत दिक्कत आ सकते जैसे मान लीजिए दवाई वगैरा के लिए पैसे नहीं होना वगैरह यह थोड़ी दिक्कत आ सकती देखी दो ही तरीके के दिक्कत आ सकती है वह दिक्कत यह होती है कि मैं ही एक तो उनके साथ समय बिताना उनको हेल्प करना डॉक्टर के पास ले जाने में या फिर और कोई चीज से लाकर देने में वगैरा-वगैरा एक तो यह हो गया कि भाई उन पर उनके साथ समय बिताने वगैरा और दूसरा है कि हम किस तरीके से उनकी मदद कर सकते हैं चाय व रोजमर्रा के काम हो यह जो भी कुछ और है तो इस ऐसा चीजों की जरूरत होती है फाइनैंशल डेफिनेटली मदद नहीं आता है कि भैया पैसे रुपए की जरूरत पड़ती हैं आ जाए वह हेल्थ को लेकर या किसी और चीज की लेकिन वह भी कान होते हैं और एक बहुत बड़ी बीमारी है ऐसा कुछ का इलाज नहीं हो रहा था तो ठीक-ठाक है लेकिन हां जब ऐसा कुछ होता है तो थोड़े अच्छे लगते हैं तो इंसान इसीलिए हिचके जाते हैं कि मैं उसको इनको रखने में थोड़े और खर्चा ज्यादा हो जाएगा और दूसरा इनकी सेवा करनी पड़ेगी तो जी देखिए उन्होंने भी तो खास किया था ना और आए थे जब हम हमको वह बड़ा कर रहे थे उन्होंने भी तो अपना टाइम दिया था ना उन्होंने भी वह सारी कुछ की चीजें की थी ना तो हमारा फर्ज है बल्कि मैसेज को देखता हूं कि हमारी वहां पर छुट्टी है यह मौका होता है जब हम कुछ कर सके अपने से बड़ों का तो हमेशा गवाना गवाना नहीं से

ji nahi yah bilkul sahi nahi hai balki aisa toh sochna bhi sahi nahi hai kyon kyonki yah log hai kaun hamare mata pita ho sakte hai yah hamare dada dadi ho sake na 9 00 nahi ho sakte hai jo bhi hai kya ke sadasya hai ab agar yah nahi hote toh hum nahi hote hamare lalan palan poshan jo bhi kuch hai inhone kiya hai abhay jab inka budhapa aa gaya hai aur sharir thoda theek se kaam nahi karta aaya dash thodi kam hoti hai yah aana toh swabhavik hai hamesha aadmi young toh rahega nahi ab aise mein yah bhi hota hai ki source of income in ki taraf se hota nahi hai toh chahen ho ya na ho aap bhale hi enivarsari ho na ho yaad aate ho na ho koi bimari takleef ho na ho jaise bhi hai hamein toh inka saath dena chahiye yah bahut zaroori hota hai jab hum chote the toh hum inhin ki ungli pakadakar chalna sikhe khade hona seekh hero nahi hamein sikhaya baat karna sikhaya sanskar diye toh kya inhone yah sanskar diye honge hamein keval 1 din hamein le jaakar chod dena vridha ashram mein bhi nahi yah bilkul galat baat hai ekdam sahi nahi hai chahen aapki jo koi bhi sthiti ho bhai koi bolega meri friend chal sthiti kharab hai yah kahani bokani yah dekhiye paramatma aapko vaah sab kuch de dega ek list chalne layak toh de dega maine kabhi yah nahi dekha ki ghar mein kyonki aapne bujurgon ko rakha hue apne mata pita ko rakha hua hai vaah vriddh hai unke karan ghar mein khane ko kuch nahi hai ya phir kisi ki mrityu ho gayi hai kyon kyonki ghar mein khane ko nahi hai paise nahi hai kyon kyonki vriddh log ghar mein rehte hai aisa kabhi nahi hua hai na kabhi hoga toh isliye yah sab khayal nikaal dena chahiye haan thodi bahut dikkat aa sakte jaise maan lijiye dawai vagera ke liye paise nahi hona vagera yah thodi dikkat aa sakti dekhi do hi tarike ke dikkat aa sakti hai vaah dikkat yah hoti hai ki main hi ek toh unke saath samay bitana unko help karna doctor ke paas le jaane mein ya phir aur koi cheez se lakar dene mein vagera vagaira ek toh yah ho gaya ki bhai un par unke saath samay bitane vagera aur doosra hai ki hum kis tarike se unki madad kar sakte hai chai va rozmarra ke kaam ho yah jo bhi kuch aur hai toh is aisa chijon ki zarurat hoti hai fainainshal definetli madad nahi aata hai ki bhaiya paise rupaye ki zarurat padti hai aa jaaye vaah health ko lekar ya kisi aur cheez ki lekin vaah bhi kaan hote hai aur ek bahut baadi bimari hai aisa kuch ka ilaj nahi ho raha tha toh theek thak hai lekin haan jab aisa kuch hota hai toh thode acche lagte hai toh insaan isliye hichke jaate hai ki main usko inko rakhne mein thode aur kharcha zyada ho jaega aur doosra inki seva karni padegi toh ji dekhiye unhone bhi toh khaas kiya tha na aur aaye the jab hum hamko vaah bada kar rahe the unhone bhi toh apna time diya tha na unhone bhi vaah saree kuch ki cheezen ki thi na toh hamara farz hai balki massage ko dekhta hoon ki hamari wahan par chhutti hai yah mauka hota hai jab hum kuch kar sake apne se badon ka toh hamesha gavana gavana nahi se

जी नहीं यह बिल्कुल सही नहीं है बल्कि ऐसा तो सोचना भी सही नहीं है क्यों क्योंकि यह लोग हैं

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Lalit Maheshwari

Social Worker

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हेलो मेरा नाम ललित माहेश्वरी जैसा कि आपने क्वेश्चन किया है कि बुजुर्गों को वृद्धावस्था में छोड़ ना देना चाहिए सही है नहीं है आप एक बार सोचिए कि जिस समय उन्होंने आप को जन्म दिया बड़ा किया और बड़ा करने के बाद में उनकी खुल उन्होंने अपनी खुशी आपके अंदर ढूंढिए तो आज आपको यह ढूंढना चाहिए कि उनकी खुशी किस में है उनकी खुशी में ही अपनी खुशी ढूंढ के सबसे बेस्ट तरीका है

hello mera naam lalit maheswari jaisa ki aapne question kiya hai ki bujurgon ko vriddhavastha mein chod na dena chahiye sahi hai nahi hai aap ek baar sochiye ki jis samay unhone aap ko janam diya bada kiya aur bada karne ke baad mein unki khul unhone apni khushi aapke andar dhundhiye toh aaj aapko yah dhundhana chahiye ki unki khushi kis mein hai unki khushi mein hi apni khushi dhundh ke sabse best tarika hai

हेलो मेरा नाम ललित माहेश्वरी जैसा कि आपने क्वेश्चन किया है कि बुजुर्गों को वृद्धावस्था में

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Ashok Clinic

Sexologist

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क्या बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम में छोड़ देना चाहिए यह बिल्कुल गलत है बिल्कुल गलत है बिल्कुल गलत जिस मां-बाप ने हमें जन्म दिया आपने हमारे जिले में सोए हम बार-बार होते थे उधर से जाते थे जिन्होंने अपनी सांसो से हमें पाला पोषा पसंद किया हमेशा आपकी तरक्की चाहिए मेरा बेटा मेरी बेटी मेरा नाम हो इनसे मैन के नाम से जी और जल्दी हो जाती है हम उसको गिरधारी छोड़ा है क्यों ऐसा बिल्कुल नहीं करनी चाहिए अपनी लाख को से प्यार के लिए उनकी सेवा करनी चाहिए समग्र में पत्थरों को पूर्ण किए हैं मैचों में जाते हैं इसको देखा नहीं उसको पूछते हैं और जिंदा आदमी की सेवा नहीं कर सकती जय माता दी जय माता दी जय माता दी करके घूम रहे हैं और वीर दास में कौन सी किस की माता है वह हमें पता नहीं वह हमें शर्म नहीं आती मैं सुनता हूं इससे लीची से घटिया इससे गिरा हुआ काम कोई नहीं हो सकता जो लोग अपने मां बाप को वृद्ध आश्रम में छोड़ आते हैं और खुद अपनी नॉर्मल आराम की जिंदगी जीते हैं या विदेशों में भी जाते हैं कितना कितना बुरा कहा जाए कितनी इस बात की निंदा की जाए उतनी खराब है जो अच्छे बच्चे हैं एक लोग हैं आप के बंदे हैं जय माता दी को मानते हैं भगवान को मानते हैं उनको यह काम बिल्कुल नहीं करना चाहिए जहां तक हो जहां तक हो अपने मां बाप की सेवा करनी चाहिए यह बात ज्यादा रखिए जिस घर की छत पर करती है यानी बुजुर्ग रविवारी भी जल्दी ही गिर जाती है उनको दुख देखे हम सुखी रह सकते हैं नहीं रह सकते बिल्कुल नहीं रह सकते बिल्कुल नहीं

kya bujurgon ko vriddh ashram mein chod dena chahiye yah bilkul galat hai bilkul galat hai bilkul galat jis maa baap ne hamein janam diya aapne hamare jile mein soye hum baar baar hote the udhar se jaate the jinhone apni saanso se hamein pala posha pasand kiya hamesha aapki tarakki chahiye mera beta meri beti mera naam ho inse man ke naam se ji aur jaldi ho jaati hai hum usko girdhari choda hai kyon aisa bilkul nahi karni chahiye apni lakh ko se pyar ke liye unki seva karni chahiye samagra mein pattharon ko purn kiye hain matchon mein jaate hain isko dekha nahi usko poochhte hain aur zinda aadmi ki seva nahi kar sakti jai mata di jai mata di jai mata di karke ghum rahe hain aur veer das mein kaun si kis ki mata hai vaah hamein pata nahi vaah hamein sharm nahi aati main sunta hoon isse lichi se ghatiya isse gira hua kaam koi nahi ho sakta jo log apne maa baap ko vriddh ashram mein chod aate hain aur khud apni normal aaram ki zindagi jeete hain ya videshon mein bhi jaate hain kitna kitna bura kaha jaaye kitni is baat ki ninda ki jaaye utani kharab hai jo acche bacche hain ek log hain aap ke bande hain jai mata di ko maante hain bhagwan ko maante hain unko yah kaam bilkul nahi karna chahiye jaha tak ho jaha tak ho apne maa baap ki seva karni chahiye yah baat zyada rakhiye jis ghar ki chhat par karti hai yani bujurg ravivari bhi jaldi hi gir jaati hai unko dukh dekhe hum sukhi reh sakte hain nahi reh sakte bilkul nahi reh sakte bilkul nahi

क्या बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम में छोड़ देना चाहिए यह बिल्कुल गलत है बिल्कुल गलत है बिल्कुल

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

0:20
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आपका प्रश्न है क्या बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम में छोड़ देना सही नहीं कभी नहीं छोड़ना चाहिए जब हम छोटे थे तब उन्होंने संभाला जब हम बूढ़े हुए उनको हमारी जरूरत तो कभी उनको नहीं छोड़ना चाहिए ओके

aapka prashna hai kya bujurgon ko vriddh ashram mein chod dena sahi nahi kabhi nahi chhodna chahiye jab hum chote the tab unhone sambhala jab hum budhe hue unko hamari zarurat toh kabhi unko nahi chhodna chahiye ok

आपका प्रश्न है क्या बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम में छोड़ देना सही नहीं कभी नहीं छोड़ना चाहिए

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Kavita Panyam

Certified Award Winning Counseling Psychologist

2:38
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आपका सवाल है क्या बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम में छोड़ देना सही है लेकिन फेस वैल्यू अगर आप कुछ भी ना सोचे तो लगता है कि यह ऑप्शन सरासर गलत है हमारे इतिहास और हमारा जो कल्चर है भारत की संस्कृति है उसमें ऐसा जो है हर दिल जो है हम नहीं सोच सकते और कर भी नहीं सकते कोडिंग टू इंडियन हेरिटेज एंड कस्टम आपको यह भी समझना चाहिए कि हर तरह के होते हैं दुनिया में मां बाप जो अपना सब कुछ सावरकर के बच्चे को प्यार से बड़ा करते हैं तन मन धन सब के साथ कैसे बाबा होते हैं जो बच्चों को मार्केट काम करवा कर फ्लाइट करके उनका फायदा उठाकर उनको ऐप यूज करके बड़ा करते हैं ऐसे मां बाप भी होते हैं तो अगर आप पहले दर्जे के बच्चे हैं जहां पर बाबा अपने आप को बड़े प्यार से पाला है अपना सब कुछ देख कर पाना है तो वहां पर यह क्वेश्चन तो आता ही नहीं है कि आप कौन को वृद्धाश्रम में छोड़ना चाहिए कि नहीं ऑटोमेटिक लिए मुझे प्यार और अपनापन है वह सारे प्रॉब्लम्स को सॉल्व कर लेता है अगर यह सवाल पूछा जा रहा है कि छोड़ना चाहिए या नहीं बचा सकेंगे डिग्री है जहां पर आपका अच्छी तरह कैसे देखभाल नहीं हुआ है अपना तभी उसे गलत हुआ एक्सप्लोइटेशन हुआ है और आपके साथ चाइल्ड भी उस हुआ है और इन ए चाइल्ड हीलिंग कि आपको सरासर जरूरत है तभी आपके मन में यह ख्याल आएगा कि उनको वृद्ध आश्रम में छोड़ना चाहेंगे आप हो क्या बहुत गुस्सा है अपसेट है आपकी जिंदगी शराब होगी बर्बाद हो गई और आप उनका ओल्ड एज में ख्याल नहीं रखना चाहते यहां पर मैं एक और तीसरा प्रश्न बताना चाहूंगी जहां पर मां-बाप ने आपको सही तरह कैसे पाला भी होता है या फिर नहीं भी पढ़ा होता है आप करना चाहते हैं लेकिन आपकी आर्थिक स्थिति आपकी मानसिक स्थिति और फिजिकली ज्यादा बीमार हैं और उनकी देखभाल नहीं कर सकते करते आए हैं लेकिन अब नहीं कर सकते तो आपके पास शायद कोई चारा नहीं है अगर मां-बाप के भाई बहन नहीं है कोई नहीं है तो शायद यह एक ऑप्शन आपको नजर आ रहा है ताकि कोई ना कोई उनकी देखभाल करें तो वृद्ध आश्रम वहां पर एक ऑप्शन बन जाता है जहां पर अगर आप करते आए हैं और थक गए हैं आप से नहीं हो रहा है और कोई नहीं है या तो घर में कैद कर रख सकते हैं आप या फिर वह भी अगर आप फाइनेंस नहीं कर सकते अकाउंट की कॉमेडी अट होम विद आश्रम जो है वह पिक्चर में आता है यह अपने अपने पर्सनल चॉइस है कि कौन किस वजह से यह ऑप्शन चुनना चाहेगा या नहीं सुनना चाहेगा हम किसी को सही या गलत नहीं ठहरा सकते इससे मेरी पर्सनल सेशनल थिंग वी शुड रिस्पेक्ट एवरी बडी प्राइवेसी रिंगटोन कविता पर नियम डॉट कॉम

aapka sawaal hai kya bujurgon ko vriddh ashram mein chod dena sahi hai lekin face value agar aap kuch bhi na soche toh lagta hai ki yah option sarasar galat hai hamare itihas aur hamara jo culture hai bharat ki sanskriti hai usme aisa jo hai har dil jo hai hum nahi soch sakte aur kar bhi nahi sakte coding to indian heritage and custom aapko yah bhi samajhna chahiye ki har tarah ke hote hain duniya mein maa baap jo apna sab kuch savarkar ke bacche ko pyar se bada karte hain tan man dhan sab ke saath kaise baba hote hain jo baccho ko market kaam karva kar flight karke unka fayda uthaakar unko app use karke bada karte hain aise maa baap bhi hote hain toh agar aap pehle darje ke bacche hain jaha par baba apne aap ko bade pyar se pala hai apna sab kuch dekh kar paana hai toh wahan par yah question toh aata hi nahi hai ki aap kaun ko vridha ashram mein chhodna chahiye ki nahi Automatic liye mujhe pyar aur apnapan hai vaah saare problems ko solve kar leta hai agar yah sawaal poocha ja raha hai ki chhodna chahiye ya nahi bacha sakenge degree hai jaha par aapka achi tarah kaise dekhbhal nahi hua hai apna tabhi use galat hua eksaploiteshan hua hai aur aapke saath child bhi us hua hai aur in a child healing ki aapko sarasar zarurat hai tabhi aapke man mein yah khayal aayega ki unko vriddh ashram mein chhodna chahenge aap ho kya bahut gussa hai upset hai aapki zindagi sharab hogi barbad ho gayi aur aap unka old age mein khayal nahi rakhna chahte yahan par main ek aur teesra prashna bataana chahungi jaha par maa baap ne aapko sahi tarah kaise pala bhi hota hai ya phir nahi bhi padha hota hai aap karna chahte hain lekin aapki aarthik sthiti aapki mansik sthiti aur physically zyada bimar hain aur unki dekhbhal nahi kar sakte karte aaye hain lekin ab nahi kar sakte toh aapke paas shayad koi chara nahi hai agar maa baap ke bhai behen nahi hai koi nahi hai toh shayad yah ek option aapko nazar aa raha hai taki koi na koi unki dekhbhal kare toh vriddh ashram wahan par ek option ban jata hai jaha par agar aap karte aaye hain aur thak gaye hain aap se nahi ho raha hai aur koi nahi hai ya toh ghar mein kaid kar rakh sakte hain aap ya phir vaah bhi agar aap finance nahi kar sakte account ki comedy attack home with ashram jo hai vaah picture mein aata hai yah apne apne personal choice hai ki kaun kis wajah se yah option chunana chahega ya nahi sunana chahega hum kisi ko sahi ya galat nahi thahara sakte isse meri personal seshanal thing va should respect every badi privacy ringtone kavita par niyam dot com

आपका सवाल है क्या बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम में छोड़ देना सही है लेकिन फेस वैल्यू अगर आप कु

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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नहीं कदापि नहीं छोड़ना चाहिए मैं ऐसी औलाद ओके बाद में बात नहीं करना चाहता हूं जो बेशर्म हो जाते हैं जो ने लोगों को ऐसे इंसानों की बारे में क्या कहना क्योंकि 10 लोगों ने बुद्धि होती है और वह महिलाओं की कसम से हमको चाहिए कि उनकी संतान भी इसी प्रकार निकाल देगी यह संस्कारों का सवाल है दोस्त संस्कारवान सलाम करते हैं वो हमेशा अपने बुजुर्गों को रास्ता दे तो शिक्षकों का सम्मान नहीं सका है बुक वाली की संगति न्यायिक कार्य उन लोगों को जो कि बुजुर्गों को खुशियों के रंग बुजुर्गों को घर से बाहर निकाल देते हो पता समझ छोड़ देते हैं तभी उन्हें सोचना चाहिए कि जिस मकान में वह रह रहे हैं वह उनके पूर्वजों ने बनवाया है उनके पिता ने बनवाया है उनके दादा ने बनवाया था में हो गई है क्या आप यह कहेंगे कि ऐसे संपूर्ण सुंदरकांड योग्य है जो अपनों को छोड़ने के लिए विचारों को वृद्ध आश्रम अकेला छोड़ दिया जाए पुणे बुधवार दिखता रे मेरी तरफ से जो अपने माता-पिता को यह दुर्गुण को वृद्धाश्रम में छोड़ आते हैं और खुद की चाहना में अपनी के साथ अकेले जीवन जीते हैं क्या उत्पत्ति नियम का पालन पोषण किया था क्या उसकी सीधी तुम्हारा पालन पोषण किया था तुम्हारा पालन पोषण और माता-पिता ने किया बुजुर्ग लोगों ने किया मूवी कभी तुम्हारी तरह जवान तेरे तो हमने अपनी जवानी को तुम्हारे पालन पोषण के लिए बर्बाद कर डाला खून पसीना पैसा लगाकर के बने मकान बनवाया पढ़ाया लिखाया बाहर निकाल दूं छोड़ दोगे मैं ऐसे लोगों को धिक्कार नहीं योग्य मानता हूं चाहे वह कितनी बड़ी पद पर हूं उनका जीवन लाख बार देख करने योग्य हैं जो अपने बड़े बुजुर्गों प्रेस करके छोड़ आते हैं धिक्कार है

nahi kadapi nahi chhodna chahiye main aisi aulad ok baad mein baat nahi karna chahta hoon jo besharm ho jaate hai jo ne logo ko aise insano ki bare mein kya kehna kyonki 10 logo ne buddhi hoti hai aur vaah mahilaon ki kasam se hamko chahiye ki unki santan bhi isi prakar nikaal degi yah sanskaron ka sawaal hai dost sanskarvan salaam karte hai vo hamesha apne bujurgon ko rasta de toh shikshakon ka sammaan nahi saka hai book wali ki sangati nyayik karya un logo ko jo ki bujurgon ko khushiyon ke rang bujurgon ko ghar se bahar nikaal dete ho pata samajh chod dete hai tabhi unhe sochna chahiye ki jis makan mein vaah reh rahe hai vaah unke purvajon ne banwaya hai unke pita ne banwaya hai unke dada ne banwaya tha mein ho gayi hai kya aap yah kahenge ki aise sampurna sundarakand yogya hai jo apnon ko chodne ke liye vicharon ko vriddh ashram akela chod diya jaaye pune budhavar dikhta ray meri taraf se jo apne mata pita ko yah durgun ko vridha ashram mein chod aate hai aur khud ki chaahana mein apni ke saath akele jeevan jeete hai kya utpatti niyam ka palan poshan kiya tha kya uski seedhi tumhara palan poshan kiya tha tumhara palan poshan aur mata pita ne kiya bujurg logo ne kiya movie kabhi tumhari tarah jawaan tere toh humne apni jawaani ko tumhare palan poshan ke liye barbad kar dala khoon paseena paisa lagakar ke bane makan banwaya padhaya likhaya bahar nikaal doon chod doge main aise logo ko dhikkar nahi yogya manata hoon chahen vaah kitni baadi pad par hoon unka jeevan lakh baar dekh karne yogya hai jo apne bade bujurgon press karke chod aate hai dhikkar hai

नहीं कदापि नहीं छोड़ना चाहिए मैं ऐसी औलाद ओके बाद में बात नहीं करना चाहता हूं जो बेशर्म हो

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Vikas Singh

Political Analyst

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है क्या बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम में छोड़ देना सही है यह गलत बात है अपने माता-पिता को वृद्धा आश्रम में छोड़ देना गलत बात है या अपने माता-पिता को अपने से अलग कर देना यह भी गलत बात है मैं देखता हूं कि बहुत सारी ऐसी फैमिली है जिसमें माता-पिता अलग रहते हैं एक बेटा अलग रहता है दूसरा बेटा अलग रहता है तीसरा बेटा अलग रहता है तो क्या विडंबना है यार हम लोग एक माता-पिता को अपने साथ नहीं रख पाते हैं जबकि माता-पिता ने हमें जन्म दिया है हमें पाला पोषा है पाल पोस कर पढ़ाया लिखाया है बड़ा बड़े हुए हैं हम लोग और बड़े होने के बाद शादी भी उन्होंने किया और शादी के बाद पत्नियां नहीं पता कौन सा जादू करती हैं कि आप माता-पिता से अलग हो जाते हो अलग मत हो क्योंकि मां से अगर अलग हो जाओगे ना तो भगवान आपको कभी माफ नहीं करेंगे क्योंकि मां ही भगवान के अवतार होती हैं माही हमारी गुरु होती हैं मायलारी सब कुछ होते हैं मां पिता के पास कुछ नहीं है माता पिता के पास बस फ्री का आशीर्वाद है उस आशीर्वाद को जो बच्चे लेते हैं वह बहुत तरक्की पाते हैं अब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को देख लीजिए आज भी कुछ भी होता है बर्थडे है या कुछ भी है उनका तू अपनी मां के पास जाते हैं मां के पास उनका पैर छूते हैं उनका आशीर्वाद लेते हैं और देखिए उनकी तरक्की कितने आगे बढ़े हैं जीवन में तो उसी तरह आप भी करिए वृद्धा आश्रम में हम लोग छोड़ देते हैं वृद्ध आश्रम में माता-पिता आप रहते होंगे सोचते होंगे कि मेरे बेटे ने मेरे साथ ऐसा किया और वह तरस खाते होंगे कि बेटा को पैदा ही नहीं करना चाहिए था बहुत दुख होता होगा उनका उनको उनको दुख होता होगा तो क्या आपको उस दुख का प्रभाव नहीं पड़ेगा प्रभाव पड़ेगा आपके बच्चे आपके साथ हो सकता है कि बहुत ज्यादा उसी तरह बर्ताव करें जिस तरह आपने अपने माता-पिता के साथ बर्ताव किया है यह देखे न्यूटन का जो पडलॉक थाना की बॉल हम दीवाल पर फेंकते हैं दीवाल भी उतना ही पोस्ट लगाती है बॉल फिर वापस आती है वैसे ही जीवन है हम जैसा कर्म किसी दूसरे के साथ करेंगे वैसा ही कर्म उसके साथ कोई दूसरा करेगा तो कहने का तात्पर्य है कि आप अपने माता-पिता को वृद्ध आश्रम में अभी मत छोड़िए अपने माता-पिता को अपने साथ रखिए माता-पिता बुजुर्ग हो गए हैं उनकी सेवा करिए और अपनी वाइफ से भी बोलिए कि उनकी सेवा करें अपने बच्चों से बोलिए कि उनकी सेवा करिए इनका आशीर्वाद लो यह कुछ भी बोले बुरा मत मानो आशीर्वाद की तरह लो जैसा संस्कार आप अपने परिवार को दोगे अपने माता-पिता के साथ रहकर तो आपका जीवन आगे बढ़ेगा आपके परिवार में खुशहाली आएगी और आपके परिवार की तरक्की भी होगी धन्यवाद

aapka sawaal hai kya bujurgon ko vriddh ashram mein chod dena sahi hai yah galat baat hai apne mata pita ko vriddha ashram mein chod dena galat baat hai ya apne mata pita ko apne se alag kar dena yah bhi galat baat hai dekhta hoon ki bahut saree aisi family hai jisme mata pita alag rehte hain ek beta alag rehta hai doosra beta alag rehta hai teesra beta alag rehta hai toh kya widambana hai yaar hum log ek mata pita ko apne saath nahi rakh paate hain jabki mata pita ne hamein janam diya hai hamein pala posha hai pal pos kar padhaya likhaya hai bada bade hue hain hum log aur bade hone ke baad shadi bhi unhone kiya aur shadi ke baad patniya nahi pata kaun sa jadu karti hain ki aap mata pita se alag ho jaate ho alag mat ho kyonki maa se agar alag ho jaoge na toh bhagwan aapko kabhi maaf nahi karenge kyonki maa hi bhagwan ke avatar hoti hain maahi hamari guru hoti hain maylari sab kuch hote hain maa pita ke paas kuch nahi hai mata pita ke paas bus free ka ashirvaad hai us ashirvaad ko jo bacche lete hain vaah bahut tarakki paate hain ab pradhanmantri shri narendra modi ji ko dekh lijiye aaj bhi kuch bhi hota hai birthday hai ya kuch bhi hai unka tu apni maa ke paas jaate hain maa ke paas unka pair chhute hain unka ashirvaad lete hain aur dekhiye unki tarakki kitne aage badhe hain jeevan mein toh usi tarah aap bhi kariye vriddha ashram mein hum log chod dete hain vriddh ashram mein mata pita aap rehte honge sochte honge ki mere bete ne mere saath aisa kiya aur vaah taras khate honge ki beta ko paida hi nahi karna chahiye tha bahut dukh hota hoga unka unko unko dukh hota hoga toh kya aapko us dukh ka prabhav nahi padega prabhav padega aapke bacche aapke saath ho sakta hai ki bahut zyada usi tarah bartaav kare jis tarah aapne apne mata pita ke saath bartaav kiya hai yah dekhe newton ka jo padlak thana ki ball hum diwal par phenkate hain diwal bhi utana hi post lagati hai ball phir wapas aati hai waise hi jeevan hai hum jaisa karm kisi dusre ke saath karenge waisa hi karm uske saath koi doosra karega toh kehne ka tatparya hai ki aap apne mata pita ko vriddh ashram mein abhi mat chodiye apne mata pita ko apne saath rakhiye mata pita bujurg ho gaye hain unki seva kariye aur apni wife se bhi bolie ki unki seva kare apne baccho se bolie ki unki seva kariye inka ashirvaad lo yah kuch bhi bole bura mat maano ashirvaad ki tarah lo jaisa sanskar aap apne parivar ko doge apne mata pita ke saath rahkar toh aapka jeevan aage badhega aapke parivar mein khushahali aayegi aur aapke parivar ki tarakki bhi hogi dhanyavad

आपका सवाल है क्या बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम में छोड़ देना सही है यह गलत बात है अपने माता-पि

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Greeshma Nataraj

Psychology Counseling, Life Coach, NLP, Cognitive Behavioral Therapist, Motivational Speaker, Handwriting Signature Analyst.

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

गुड आफ्टरनून देखे बुजुर्गों को विद्याश्रम में रखने का जो ट्रेन है वह अपने कंट्री का नहीं है यह भारतीय संस्कारों में कभी नहीं था और कभी नहीं होना भी चाहिए यह भले ही व्यस्त में या फॉरेन कंट्री इसमें होता है लेकिन वहां भी अगर आप देखोगे तो जो बुजुर्ग है वह अपनी स्वेच्छा से विदा समझाने के लिए तैयार रहते हैं अपने जीवन भर काम करके एक अमाउंट सेव करते हैं ताकि वह अपने बच्चों के ऊपर बोलना बने और उन्हें जैसी लाइफ्सटेल जीनी है वह जीने के लिए वह रेडी रहते हैं तब तक रहते हैं इसलिए वह बर्दाश्त करने जाना चाहते हैं इन इंडिया अगर आप देखोगे हमारी जो संस्कृति है हमें हमारे बुजुर्गों की चत्रचाया की हमेशा जरूरत रहती है क्योंकि उनके जो विचार है उनका जो एक्सपीरियंस है वह हमें जीने की एक प्रेरणा देता है एक मजबूत जड़ रहते हैं वह तो जो लोग मैं माता पिता उनको या दादा दादी को वृद्धाश्रम में डाल रहे हैं उन्हें यह समझना चाहिए कि आज भले ही वह जवान है और कल के दिन जब वह बुजुर्ग होंगे और उनके बच्चे या उनके पोते पोती उनके साथ ऐसे करेगी तो कितनी बड़ी चोट या कितनी बड़ी ठेस मन को लगेगी क्योंकि जब हम को तरसे एज में यह सब घर का चेक करेंगे तो हमें क्षमा कैसे मिलेगी जो हमें जीवन देता है उसी को उठाकर अगर हम बंद कमरे में डाल दे और उस पर एग्जांपल देखिए पौधा लाते हो पौधा बढ़ जाता है उसे पानी डालना भूल गए तो फिर वह पौधा कैसे अपने रूप को पकड़ कर रख सकता है मुरझा जायेगा वहीं बुजुर्गों के साथ भी होता है उन्हें भी जीने दो जब तक उनकी सांस है आखिरी सांस तक उन्हें वह खिलखिला हक से जिंदा रहने का हक है इनके अगर कोई बुजुर्ग अपने घर वालों के साथ आगे बढ़ना चाहता है अलग रहना चाहता है वह की विचारधारा है कि आजकल आप देखोगे कि बहुत सारे का बुजुर्ग लोग भी बहुत इंडिपेंडेंट हो रहे हैं वह जो भी लाइफ टाइम की भी जो भी कमाई है उसमें से एक हिस्सा अपने आपके लिए बचा कर रखना चाहते हैं कुछ बुजुर्ग ऐसे भी है कि वह जीवन बुजुर्ग होने के बाद भी अपने बच्चों के ऊपर या अपने ग्रैंडचिल्ड्रन के ऊपर बोझ नहीं बनना चाहते इंडिपेंडेंटली जीना चाहते हैं और उनके विचारधारा से वह वृद्ध आश्रम जाना चाहते हैं वह अलग बात है तो बुजुर्गों को भी अपना फ्रीडम अपनी स्पेस देना जरूरी है अगर आप देखोगे जब हम बुजुर्ग घर में होते हैं तो एक अलग ही माहौल होता है मस्ती मजाक का छोटी-छोटी झगड़े लोग जब जब होती है तब हम उन्हीं के पीछे जाकर छुपते हैं कभी-कभी ऐसे होते हैं कृपा करके हम वापस आते हैं और चाहते हैं कि उनकी गोद में जाकर सर रखकर आराम से सो जाए और वह पैसे लाते रहे कुछ अच्छी बातें समझाते रहे हैं कि नहीं तो मेरे ख्याल से आई थिंक सो बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में छोड़ना बहुत गलत बात होगा उन्हें भी जीने का हक है उन्हें अपने परिवार के साथ अपने परिवार को खेलते हुए आगे बढ़ते हुए देखने का हक है तो यह जो सिटी आजकल जो पैदा हुई है यह मुझे लगता है गलत है क्योंकि हर कोई अपने रिस्पांसिबिलिटीज आजकल देखा जाएगा तो अंडर द नेम ऑफ रसिया मनीष अनारकली सूट के ऊपर असफल कर रहे हैं तो मैं चाहती हूं हमारी जो इसके जनरेशन के जो लोग हैं वह समझना चाहिए कि वृद्ध आश्रम मेल मिलाप के लिए हो तो अच्छी बात है लेकिन अपने बुजुर्गों को वह हमेशा के लिए रखने के लिए यह सही बात नहीं है क्योंकि कल के दिन हम भी बुजुर्ग होने वाले हैं हमें भी बुढ़ापे से कोई बचाने वाला नहीं है तब हम अकेला महसूस करेंगे और हमें अकेला रहने की आदत नहीं है इंजर्ड बिहार ऑल इंडियन इंडियन स्कोर किसी ना किसी दोस्त किसी ना किसी की सहारा की आवश्यकता जरूर होती है तो माय डियर फ्रेंड आई होप मैंने मेरा व्यूप्वाइंट क्लियर किया हुआ आपको धन्यवाद

good afternoon dekhe bujurgon ko vidyashram mein rakhne ka jo train hai vaah apne country ka nahi hai yah bharatiya sanskaron mein kabhi nahi tha aur kabhi nahi hona bhi chahiye yah bhale hi vyast mein ya foreign country isme hota hai lekin wahan bhi agar aap dekhoge toh jo bujurg hai vaah apni swachcha se vida samjhane ke liye taiyar rehte hai apne jeevan bhar kaam karke ek amount save karte hai taki vaah apne baccho ke upar bolna bane aur unhe jaisi laifsatel gini hai vaah jeene ke liye vaah ready rehte hai tab tak rehte hai isliye vaah bardaasht karne jana chahte hai in india agar aap dekhoge hamari jo sanskriti hai hamein hamare bujurgon ki chatrachaya ki hamesha zarurat rehti hai kyonki unke jo vichar hai unka jo experience hai vaah hamein jeene ki ek prerna deta hai ek majboot jad rehte hai vaah toh jo log main mata pita unko ya dada dadi ko vridha ashram mein daal rahe hai unhe yah samajhna chahiye ki aaj bhale hi vaah jawaan hai aur kal ke din jab vaah bujurg honge aur unke bacche ya unke pote poti unke saath aise karegi toh kitni baadi chot ya kitni baadi thes man ko lagegi kyonki jab hum ko tarse age mein yah sab ghar ka check karenge toh hamein kshama kaise milegi jo hamein jeevan deta hai usi ko uthaakar agar hum band kamre mein daal de aur us par example dekhiye paudha laate ho paudha badh jata hai use paani dalna bhool gaye toh phir vaah paudha kaise apne roop ko pakad kar rakh sakta hai murjha jayega wahi bujurgon ke saath bhi hota hai unhe bhi jeene do jab tak unki saans hai aakhiri saans tak unhe vaah khilkhila haq se zinda rehne ka haq hai inke agar koi bujurg apne ghar walon ke saath aage badhana chahta hai alag rehna chahta hai vaah ki vichardhara hai ki aajkal aap dekhoge ki bahut saare ka bujurg log bhi bahut independent ho rahe hai vaah jo bhi life time ki bhi jo bhi kamai hai usme se ek hissa apne aapke liye bacha kar rakhna chahte hai kuch bujurg aise bhi hai ki vaah jeevan bujurg hone ke baad bhi apne baccho ke upar ya apne graindachildran ke upar bojh nahi banna chahte independently jeena chahte hai aur unke vichardhara se vaah vriddh ashram jana chahte hai vaah alag baat hai toh bujurgon ko bhi apna freedom apni space dena zaroori hai agar aap dekhoge jab hum bujurg ghar mein hote hai toh ek alag hi maahaul hota hai masti mazak ka choti choti jhagde log jab jab hoti hai tab hum unhi ke peeche jaakar chupte hai kabhi kabhi aise hote hai kripa karke hum wapas aate hai aur chahte hai ki unki god mein jaakar sir rakhakar aaram se so jaaye aur vaah paise laate rahe kuch achi batein smajhate rahe hai ki nahi toh mere khayal se I think so bujurgon ko vridha ashram mein chhodna bahut galat baat hoga unhe bhi jeene ka haq hai unhe apne parivar ke saath apne parivar ko khelte hue aage badhte hue dekhne ka haq hai toh yah jo city aajkal jo paida hui hai yah mujhe lagta hai galat hai kyonki har koi apne rispansibilitij aajkal dekha jaega toh under the name of rasiya manish anarkali suit ke upar asafal kar rahe hai toh main chahti hoon hamari jo iske generation ke jo log hai vaah samajhna chahiye ki vriddh ashram male milap ke liye ho toh achi baat hai lekin apne bujurgon ko vaah hamesha ke liye rakhne ke liye yah sahi baat nahi hai kyonki kal ke din hum bhi bujurg hone waale hai hamein bhi budhape se koi bachane vala nahi hai tab hum akela mehsus karenge aur hamein akela rehne ki aadat nahi hai endured bihar all indian indian score kisi na kisi dost kisi na kisi ki sahara ki avashyakta zaroor hoti hai toh my dear friend I hope maine mera vyupwaint clear kiya hua aapko dhanyavad

गुड आफ्टरनून देखे बुजुर्गों को विद्याश्रम में रखने का जो ट्रेन है वह अपने कंट्री का नहीं ह

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MonuTiwari

Little Businessman And Motivational Teacher

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Abhishek Sharma

Forest Range Officer, MP

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क्या आपने यह सवाल पूछते ही इसके साथ अपना जवाब भी जोड़ दिया है बुजुर्गों को क्यों छोड़ना चाहिए विकास में बताइए क्या कोई बच्चा जब पैदा होता है तो उसके माता-पिता उसे किसी अनाथालय में छोड़ देती है क्या नहीं छोड़ देगा उन्हें अनाथ नहीं करते इस तरह आप भी अपने माता-पिता को वृद्ध होने पर उन्हें एक तरह से अनाथ ही कर देते क्योंकि उनके पास एक ही सहारा होता उनके बेटे जिस समय आप छोटे थे जिसमें हम छोटे-छोटे बच्चे होते हैं ना मैं कुछ समझ होती है ना तो कुछ पता होता है हम एक ही सवाल को 5010 बार पूछते हैं सेम यही चीज बुजुर्गों के साथ होती है और हम उसको देखकर इरिटेट होने लगते हैं तो मुझे लगता है कि इसमें सुधार करना चाहिए समाज को सुधार करने की आवश्यकता है वृद्ध आश्रम जैसी चीजें अगर भारत में बंद हो जाए बंद हो जाएगा मतलब यह कि सभी बुजुर्ग अपने अपने घर वापस लौट जाए तो शायद उस दिन सबसे ज्यादा खुशी का दिन होगा उस दिन संयुक्त दिवाली और होली मनाई जाएगी बहुत-बहुत धन्यवाद और आपके विचार भी मैं जानना चाहूंगा क्या क्या विचार हैं आपके कमेंट में बताइए

kya aapne yah sawaal poochhte hi iske saath apna jawab bhi jod diya hai bujurgon ko kyon chhodna chahiye vikas mein bataye kya koi baccha jab paida hota hai toh uske mata pita use kisi anathalay mein chod deti hai kya nahi chod dega unhe anath nahi karte is tarah aap bhi apne mata pita ko vriddh hone par unhe ek tarah se anath hi kar dete kyonki unke paas ek hi sahara hota unke bete jis samay aap chote the jisme hum chote chhote bacche hote hain na main kuch samajh hoti hai na toh kuch pata hota hai hum ek hi sawaal ko 5010 baar poochhte hain same yahi cheez bujurgon ke saath hoti hai aur hum usko dekhkar irritate hone lagte hain toh mujhe lagta hai ki isme sudhaar karna chahiye samaj ko sudhaar karne ki avashyakta hai vriddh ashram jaisi cheezen agar bharat mein band ho jaaye band ho jaega matlab yah ki sabhi bujurg apne apne ghar wapas lot jaaye toh shayad us din sabse zyada khushi ka din hoga us din sanyukt diwali aur holi manai jayegi bahut bahut dhanyavad aur aapke vichar bhi main janana chahunga kya kya vichar hain aapke comment mein bataiye

क्या आपने यह सवाल पूछते ही इसके साथ अपना जवाब भी जोड़ दिया है बुजुर्गों को क्यों छोड़ना चा

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Dr. Swatantra Jain

Psychotherapist, Family & Career Counsellor and Parenting & Life Coach

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प्रश्न है क्या बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में छोड़ देना चाहिए मेरे हिसाब से तो नहीं चाहिए सिर्फ कुछ सामान की जरूरत है प्यार की जरूरत है आदर की जरूरत है जिन बच्चों को ब्यूरो ने पाला है परवरिश दी है सब कुछ किया और वही बच्चे जब बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम में छोड़ दिया जाने के लिए विवश कर दें उनके दिल पर क्या बीती होगी आपको तभी समझ में आएगा उससे पहले नहीं समझ में आएगा उनकी पीड़ा उनकी हताशा मुझे समझ में नहीं आई इसलिए हमेशा अपने आप को उनकी जगह रखे देखे और उनको उनकी जगह खुद को रख कर देखिए फिर आपको सब समझ में आ जाएगा क्यों कुछ बर्दाश्त में छोड़ना सही है या नहीं

prashna hai kya bujurgon ko vridha ashram me chhod dena chahiye mere hisab se toh nahi chahiye sirf kuch saamaan ki zarurat hai pyar ki zarurat hai aadar ki zarurat hai jin baccho ko bureau ne pala hai parvarish di hai sab kuch kiya aur wahi bacche jab bujurgon ko vriddh ashram me chhod diya jaane ke liye vivash kar de unke dil par kya biti hogi aapko tabhi samajh me aayega usse pehle nahi samajh me aayega unki peeda unki hatasha mujhe samajh me nahi I isliye hamesha apne aap ko unki jagah rakhe dekhe aur unko unki jagah khud ko rakh kar dekhiye phir aapko sab samajh me aa jaega kyon kuch bardaasht me chhodna sahi hai ya nahi

प्रश्न है क्या बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में छोड़ देना चाहिए मेरे हिसाब से तो नहीं चाहिए सिर

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Sagar सागर

Engineer ,Singer,Director

1:28
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जी नहीं बिल्कुल सही नहीं है मैं तो वृद्ध आश्रमों के ही खिलाफ हूं हमारे देश में वृद्धाश्रम होना ही नहीं चाहिए जो मां बाप को अपने साथ नहीं रह सकते उन बच्चों पर आज सरकार द्वारा बनाए गए नियम के अनुसार कार्य कार्यवाही की जा सकती है अर्थात आज बुजुर्गों के लिए भारत में बहुत ही उत्तम कानून उपलब्ध है जो बच्चे अपने मां बाप की कदर नहीं करते या उसको खाना पीना रहना ठीक से उनको सुविधाएं नहीं दे रहे हैं वह को जब चाहें तो अपने एक फोन कॉल पर की कंप्लेंट कर कर अपने उन सब अधिकारों को प्राप्त कर सकते हैं अब उन्हें वृद्ध आश्रम में जाने की कोई आवश्यकता नहीं है हर बुजुर्ग का अपना अधिकार है कि वह अपने बच्चों से अपने उस अधिकार को ले जो उन्होंने बचपन से उनको आज तक थी हम अपने बच्चों को जैसे शिक्षा देंगे कल वहीं शिक्षा उनके बच्चे उन से सीखेंगे इसलिए जो गलतियां हो चुकी उन्हें छोड़कर हमें अपने बच्चों को सही शिक्षा देनी चाहिए वह भी वृद्धाश्रम क्यों भेजे हैं हम उन्हें तुलना उनके अपने ही घरों से बाहर निकाले हैं क्योंकि जिस घर में रह रहे हैं जब भले ही वह घर पुत्र द्वारा बनाया गया एक पिता उसमें रहने का अधिकार रखता है धन्यवाद

ji nahi bilkul sahi nahi hai main toh vriddh aashramon ke hi khilaf hoon hamare desh me vridha ashram hona hi nahi chahiye jo maa baap ko apne saath nahi reh sakte un baccho par aaj sarkar dwara banaye gaye niyam ke anusaar karya karyavahi ki ja sakti hai arthat aaj bujurgon ke liye bharat me bahut hi uttam kanoon uplabdh hai jo bacche apne maa baap ki kadar nahi karte ya usko khana peena rehna theek se unko suvidhaen nahi de rahe hain vaah ko jab chahain toh apne ek phone call par ki complaint kar kar apne un sab adhikaaro ko prapt kar sakte hain ab unhe vriddh ashram me jaane ki koi avashyakta nahi hai har bujurg ka apna adhikaar hai ki vaah apne baccho se apne us adhikaar ko le jo unhone bachpan se unko aaj tak thi hum apne baccho ko jaise shiksha denge kal wahi shiksha unke bacche un se sikhenge isliye jo galtiya ho chuki unhe chhodkar hamein apne baccho ko sahi shiksha deni chahiye vaah bhi vridha ashram kyon bheje hain hum unhe tulna unke apne hi gharon se bahar nikale hain kyonki jis ghar me reh rahe hain jab bhale hi vaah ghar putra dwara banaya gaya ek pita usme rehne ka adhikaar rakhta hai dhanyavad

जी नहीं बिल्कुल सही नहीं है मैं तो वृद्ध आश्रमों के ही खिलाफ हूं हमारे देश में वृद्धाश्रम

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vedprakash singh

Psychologist

2:07
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है क्या बुजुर्गों को बिरधा आश्रम में छोड़ देना सही है तो मैं जहां तक की मानता हूं बुजुर्ग लोग वृद्धाश्रम नहीं छोड़ना चाहिए एक मां-बाप 45 बच्चों को देख सकता है लेकिन चार पांच बच्चे मिलकर एक मां बाप अपने देख सकते इसीलिए बुजुर्गों को भी दास्तां में नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि उन्हें अजीब दास्तां में छोड़ा गया तो उन्हें उनके गुणों से हाथ धोना पड़ेगा उनके जो गुण है वैसे तो जहां तक मेरा मानना है हर घर में एक बुजुर्ग होना चाहिए लेकिन बुजुर्ग भी ऐसे नहीं रह जैसे होते थे कि मेरा मानना है कि बुरे होने के बाद लोगों के चेहरे पर चमक होनी चाहिए लेकिन आजकल के बुड्ढे मोर चमक नहीं है कोई किसी में भी चमक नहीं है महात्मा गांधी बचपन कितने अच्छे देखने में नहीं लगते थे लेकिन जैसे बूढ़े हुए उनके चेहरे की चमक बड़ी क्यों क्योंकि उसके अंदर की जो ग्रंथियां थी और कम होने लगी उसके गुस्सा कम हो गए हो शांत होने लगा जवानी तो भाग दौर है और बुढ़ापा बैटरी बचत खाता है कहीं नहीं जाना जवानी आज चंडीगढ़ में कल मुंबई दिल्ली कोलकाता और बुड्ढा बुड्ढा अनुभव होना चाहिए शरीर दुबले होने से थोड़ी होता उनके सुविचार ज्ञान अनुभव कहां गया इसीलिए गुस्सा आता है तो गुस्सा आने की जरूरत क्या है लेकिन जहां तक कि मेरे पास सभी सवाल है क्या बुजुर्ग को बिदासर में छोड़ देना सही है तो नहीं छोड़ना चाहिए उन्हें रखना चाहिए जब पहले यहां रहे तो अब क्या हो चले जाएंगे विलासम हां जी से मर्जी जाने किया वह जा सकते हैं इतने दिनों के लिए जाने आ जा सकते हैं अभी सकते इसमें क्या है तो बात सही है हो जा सकते हैं लेकिन उसे छोड़ देना सही नहीं है

aapka sawaal hai kya bujurgon ko birdha ashram me chhod dena sahi hai toh main jaha tak ki maanta hoon bujurg log vridha ashram nahi chhodna chahiye ek maa baap 45 baccho ko dekh sakta hai lekin char paanch bacche milkar ek maa baap apne dekh sakte isliye bujurgon ko bhi dastan me nahi chhodna chahiye kyonki unhe ajib dastan me choda gaya toh unhe unke gunon se hath dhona padega unke jo gun hai waise toh jaha tak mera manana hai har ghar me ek bujurg hona chahiye lekin bujurg bhi aise nahi reh jaise hote the ki mera manana hai ki bure hone ke baad logo ke chehre par chamak honi chahiye lekin aajkal ke buddhe mor chamak nahi hai koi kisi me bhi chamak nahi hai mahatma gandhi bachpan kitne acche dekhne me nahi lagte the lekin jaise budhe hue unke chehre ki chamak badi kyon kyonki uske andar ki jo granthiyan thi aur kam hone lagi uske gussa kam ho gaye ho shaant hone laga jawaani toh bhag daur hai aur budhapa battery bachat khaata hai kahin nahi jana jawaani aaj chandigarh me kal mumbai delhi kolkata aur Buddha Buddha anubhav hona chahiye sharir duble hone se thodi hota unke suvichar gyaan anubhav kaha gaya isliye gussa aata hai toh gussa aane ki zarurat kya hai lekin jaha tak ki mere paas sabhi sawaal hai kya bujurg ko bidasar me chhod dena sahi hai toh nahi chhodna chahiye unhe rakhna chahiye jab pehle yahan rahe toh ab kya ho chale jaenge vilasam haan ji se marji jaane kiya vaah ja sakte hain itne dino ke liye jaane aa ja sakte hain abhi sakte isme kya hai toh baat sahi hai ho ja sakte hain lekin use chhod dena sahi nahi hai

आपका सवाल है क्या बुजुर्गों को बिरधा आश्रम में छोड़ देना सही है तो मैं जहां तक की मानता हू

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आपका प्रश्न बुजुर्गों को वृद्धावस्था में छोड़ देना चाहिए उस कंडीशन में चाहिए जब यदि उसके कोई बाल बच्चे नहीं है और उसको देखें करने वाला नहीं है पति पत्नी जब तक साथ है तुम हो एक दूसरे के सहारे जी लेते हैं परंतु उनमें से दोनों में से एक भी कम हो गया तो उन्हें रखने वाला कोई नहीं है देखरेख करना ना कोई नहीं है इस कंडीशन में उस रास्ते में छोड़ दिया जाना आवश्यक है परंतु यदि उस बुजुर्गों के बच्चे हैं और बच्चे होकर भी उन्हें वह रखने को तैयार नहीं है इस दर्शन में मेरी जो सोचे कि उन्हें नहीं छोड़ना चाहिए वह एक उम्र के पश्चात छोटे बालक के समान रहते हैं जिनकी देखरेख उंगली पकड़कर करने के समान होती है कब उन्हें खाना चाहिए उन्हें खुद को नहीं मालूम था कब उन्हें पहनना चाहिए नहीं मालूम था क्या कर रहे हैं उन्हें यह भी नहीं मालूम रहता उस दशा में एक छोटे से बच्चे के समान उनकी स्थिति मनोज स्थिति बन जाती है उससे मिलने सहारे के बड़े यदि उस समय उनके बच्चे ने सहारा दे देते थे तो वह बच्चे समाज में भी बड़े अच्छी दृष्टिकोण से देखे जाते हैं और खुद की नजरों में भी अपने आप को बहुत अच्छे से अनुभव करते हैं यदि बच्चे जरा होकर भी उन्हें वृद्ध आश्रम में छोड़ दें तो वह उनका मन भी बड़ा दुखी और परेशान सा रहता है क्योंकि उनका ध्यान बार बार जाएगा कि हमारे होते हुए भी हम अपने माता-पिता को वृद्धावस्था में छोड़ा है थैंक यू

aapka prashna bujurgon ko vriddhavastha mein chod dena chahiye us condition mein chahiye jab yadi uske koi baal bacche nahi hai aur usko dekhen karne vala nahi hai pati patni jab tak saath hai tum ho ek dusre ke sahare ji lete hain parantu unmen se dono mein se ek bhi kam ho gaya toh unhe rakhne vala koi nahi hai dekhrekh karna na koi nahi hai is condition mein us raste mein chod diya jana aavashyak hai parantu yadi us bujurgon ke bacche hain aur bacche hokar bhi unhe vaah rakhne ko taiyar nahi hai is darshan mein meri jo soche ki unhe nahi chhodna chahiye vaah ek umr ke pashchat chote balak ke saman rehte hain jinki dekhrekh ungli pakadakar karne ke saman hoti hai kab unhe khana chahiye unhe khud ko nahi maloom tha kab unhe pahanna chahiye nahi maloom tha kya kar rahe hain unhe yah bhi nahi maloom rehta us dasha mein ek chote se bacche ke saman unki sthiti manoj sthiti ban jaati hai usse milne sahare ke bade yadi us samay unke bacche ne sahara de dete the toh vaah bacche samaj mein bhi bade achi drishtikon se dekhe jaate hain aur khud ki nazro mein bhi apne aap ko bahut acche se anubhav karte hain yadi bacche zara hokar bhi unhe vriddh ashram mein chod de toh vaah unka man bhi bada dukhi aur pareshan sa rehta hai kyonki unka dhyan baar baar jaega ki hamare hote hue bhi hum apne mata pita ko vriddhavastha mein choda hai thank you

आपका प्रश्न बुजुर्गों को वृद्धावस्था में छोड़ देना चाहिए उस कंडीशन में चाहिए जब यदि उसके क

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Aliya

Career Counsellor

2:11
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है क्या बुजुर्गों को घटाकर में छोड़ देना सही है कि आपकी इस सवाल के लिए पहले मैं थैंक्यू लगाऊंगी आपको क्योंकि आप जवाब देना अपनी राय देना भी बहुत सही है मैं बता दूं मैं कि आजकल बहुत ज्यादा संख्या में यह हो रहा है कि लोग बुजुर्गों को वितरण छोड़ देते हैं जबकि वहीं बुजुर्ग थे और आप बच्चे थे तो हमारी मां बाप हमको संभाले हमको पालन के पोषण में बड़ा किया हमें अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाया मैं अपने पैरों पर खड़ा है क्या हमारी बारी आई उनकी बचपना हुजूर बच्चे की बराबरी होते हैं बच्चे की सेवा करनी पड़ती है उसे बुजुर्गों का सेवा करना पड़ता है तो सब हमारी समय आया हमारी बारी आई उनकी सेवा करने की उनकी देखरेख करने की तो हमने उनको सब किसके लिए अपनी फैमिली के लिए अपने वाइफ के लिए अपने बच्चों के लिए ताकत वाइफ के लिए लोग छोड़ते हैं उसके लिए लेकिन जिसने जिंदगी भर अपनी पूरी जिंदगी हमें ही बनाने में भी यार दिया हमने उनको ही ताकत दास हमें छोड़ दिया बहुत गलत बात है जिन्होंने आपके साथ आपके सेवा कि आपका देखभाल किया रात का भी पूरा प्रेस काउंसिल की बनती है क्या अपने अपने माता-पिता को देख रेख करें तो माता-पिता की देखरेख करते हैं यहां पर भी खुश रहते हैं और आगे भी खुश रहते हैं मतलब होता है भगवान के पास वही खुश रहते हैं यह शिकायत है यह तो अपराध है यह ज्यादा हिंदू में पाया जाता है तो मैं उनसे बोलना चाहूंगी कि प्लीज आप अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में ना जोड़ें क्योंकि वही मां बाप है तो आप जिसकी जिसकी आप की स्थिति उनके जैसी थी और उन्होंने आपको समान आपको अपने पैर पर खड़ा किया तो आप भी अपने कर्तव्य का अच्छे से निर्वाह करें उनको संभालने उनको उनको आप को सहारा दे दो कि आप ही उनके सब कुछ हो आप के भरोसे ही आप उनके हो इसीलिए वह आपका पार्सल करते हैं आपके हम भी देखते हैं लेकिन शादी होने के बाद लोगों ने भूल जाता है तो प्लीज आप लोग ऐसा बिल्कुल ना करें कोई भी ऐसा ना करें आपको

aapka sawaal hai kya bujurgon ko ghatakar mein chod dena sahi hai ki aapki is sawaal ke liye pehle main thainkyu lagaungi aapko kyonki aap jawab dena apni rai dena bhi bahut sahi hai bata doon main ki aajkal bahut zyada sankhya mein yah ho raha hai ki log bujurgon ko vitaran chod dete hai jabki wahi bujurg the aur aap bacche the toh hamari maa baap hamko sambhale hamko palan ke poshan mein bada kiya hamein apne pairon par khada hona sikhaya main apne pairon par khada hai kya hamari baari I unki bachapana huzur bacche ki barabari hote hai bacche ki seva karni padti hai use bujurgon ka seva karna padta hai toh sab hamari samay aaya hamari baari I unki seva karne ki unki dekhrekh karne ki toh humne unko sab kiske liye apni family ke liye apne wife ke liye apne baccho ke liye takat wife ke liye log chodte hai uske liye lekin jisne zindagi bhar apni puri zindagi hamein hi banane mein bhi yaar diya humne unko hi takat das hamein chod diya bahut galat baat hai jinhone aapke saath aapke seva ki aapka dekhbhal kiya raat ka bhi pura press council ki banti hai kya apne apne mata pita ko dekh rekh kare toh mata pita ki dekhrekh karte hai yahan par bhi khush rehte hai aur aage bhi khush rehte hai matlab hota hai bhagwan ke paas wahi khush rehte hai yah shikayat hai yah toh apradh hai yah zyada hindu mein paya jata hai toh main unse bolna chahungi ki please aap apne maa baap ko vridha ashram mein na joden kyonki wahi maa baap hai toh aap jiski jiski aap ki sthiti unke jaisi thi aur unhone aapko saman aapko apne pair par khada kiya toh aap bhi apne kartavya ka acche se nirvah kare unko sambhalne unko unko aap ko sahara de do ki aap hi unke sab kuch ho aap ke bharose hi aap unke ho isliye vaah aapka parcel karte hai aapke hum bhi dekhte hai lekin shadi hone ke baad logo ne bhool jata hai toh please aap log aisa bilkul na kare koi bhi aisa na kare aapko

आपका सवाल है क्या बुजुर्गों को घटाकर में छोड़ देना सही है कि आपकी इस सवाल के लिए पहले मैं

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OMNATH DUBEY

UPSC STUDENT

0:37
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देखिए बुजुर्गों को विद्या आश्रम में छोड़ना यह बहुत गलत बात है अगर अपने घर में कोई बुजुर्ग है तो कृपया उसे विद्या आश्रम में ना छोड़ करके उनकी सेवा स्वयं करें उनका देखभाल करें लेकिन जिस प्रकार से आप देखभाल उनकी कर सकते हैं इस प्रकार से उनकी सेवा वृद्धा आश्रम में नहीं होगी इसलिए भाइयों अनुरोध है कि आप लोग अपने माता-पिता या बुजुर्गों को विद्या आश्रम में ना छोड़े और यह छोड़ देना सही नहीं है बहुत गलत होता है धन्यवाद जय हिंद

dekhiye bujurgon ko vidya ashram mein chhodna yah bahut galat baat hai agar apne ghar mein koi bujurg hai toh kripya use vidya ashram mein na chod karke unki seva swayam kare unka dekhbhal kare lekin jis prakar se aap dekhbhal unki kar sakte hain is prakar se unki seva vriddha ashram mein nahi hogi isliye bhaiyo anurodh hai ki aap log apne mata pita ya bujurgon ko vidya ashram mein na chode aur yah chod dena sahi nahi hai bahut galat hota hai dhanyavad jai hind

देखिए बुजुर्गों को विद्या आश्रम में छोड़ना यह बहुत गलत बात है अगर अपने घर में कोई बुजुर्ग

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Er Jaisingh

Mathematics Solution, 1:00PM TO 2:00PM

1:27
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क्या बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम में छोड़ देना सही है बिल्कुल सही नहीं है वृद्ध आश्रम में बिल्कुल सही नहीं है वृद्ध आश्रम नहीं अभी उसके पुत्र पुत्र या नहीं है या वह आर्थिक रूप से कमजोर है जो किसी को गोद नहीं ले सकता है तो उन लोगों के लिए वृद्ध आश्रम जाना या छोड़ देना या पहुंचना या पहुंचाना उचित है बाकी का जिस के पुत्र हैं पुत्रियां हैं है अच्छा गोद लेने के लिए समर्थ है किसी को गोद ले सकता है अपना पुत्र पुत्री मान सकता है बेटा मान सकता है तो वह सेवा करेगा तो यह पुत्र पुत्रियां हैं उनको चाहिए गौ सेवा करें अपने मां-बाप की और नहीं तो बहुत ही गलत है इससे बड़ा पाप कोई नहीं क्योंकि यह भले ही सोच ले कि वहां छोड़ दें लेकिन यह पाप कर्म की श्रेणी में है तो इसका परिणाम तो निश्चित तौर पर उनको बोलना पड़ेगा और निश्चित तौर पर मिलेगा क्योंकि जिसने मां-बाप ने अंश है उसको छोड़ दिया तो उसका कष्ट तो उन्हें झेलना पड़ेगा उसका भुगतान आ भरपाई तो देनी पड़ेगी बच्चों का धन्यवाद

kya bujurgon ko vriddh ashram mein chod dena sahi hai bilkul sahi nahi hai vriddh ashram mein bilkul sahi nahi hai vriddh ashram nahi abhi uske putra putra ya nahi hai ya vaah aarthik roop se kamjor hai jo kisi ko god nahi le sakta hai toh un logo ke liye vriddh ashram jana ya chod dena ya pahunchana ya pahunchana uchit hai baki ka jis ke putra hain putriyan hain hai accha god lene ke liye samarth hai kisi ko god le sakta hai apna putra putri maan sakta hai beta maan sakta hai toh vaah seva karega toh yah putra putriyan hain unko chahiye gau seva kare apne maa baap ki aur nahi toh bahut hi galat hai isse bada paap koi nahi kyonki yah bhale hi soch le ki wahan chod de lekin yah paap karm ki shreni mein hai toh iska parinam toh nishchit taur par unko bolna padega aur nishchit taur par milega kyonki jisne maa baap ne ansh hai usko chod diya toh uska kasht toh unhe jhelna padega uska bhugtan aa bharpai toh deni padegi baccho ka dhanyavad

क्या बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम में छोड़ देना सही है बिल्कुल सही नहीं है वृद्ध आश्रम में बिल

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बुजुर्गों को विद्या आश्रम में छोड़ देना सही बात नहीं यह बिल्कुल ही गलत बात है क्योंकि बुजुर्ग जो होते हैं वह हमारे घर की शोभा होते हैं राजनीति से जुड़े होते हैं हम लोग उनसे जुड़े होते हैं तो इसलिए हम अपने घर की शोभा को कहीं बाहर बेकार लगता है जब हम पैदा होते हैं वही लोग हमारे ख्याल रखते हैं क्योंकि हम अपने घर की शोभा अपने घर में ही रखें उसे बाहर कहीं ना रखें

bujurgon ko vidya ashram mein chod dena sahi baat nahi yah bilkul hi galat baat hai kyonki bujurg jo hote hain vaah hamare ghar ki shobha hote hain raajneeti se jude hote hain hum log unse jude hote hain toh isliye hum apne ghar ki shobha ko kahin bahar bekar lagta hai jab hum paida hote hain wahi log hamare khayal rakhte hain kyonki hum apne ghar ki shobha apne ghar mein hi rakhen use bahar kahin na rakhen

बुजुर्गों को विद्या आश्रम में छोड़ देना सही बात नहीं यह बिल्कुल ही गलत बात है क्योंकि बुजु

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BOB

Teacher

1:29
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आपका सवाल है क्या बुजुर्गों को आश्रम पर छोड़ देना चाहिए यह बहुत ही खराब सोच है और ऐसा कभी भी नहीं करना चाहिए आप यह देखिए कि जब आप छोटे से बच्चे हुए थे तो आपकी हालत भी वैसी थी कि आप बहुत अच्छे आप चलना नहीं जानते थे आप बोलना नहीं जानते थे आप खाना नहीं जानते थे तो क्या आपके मां-बाप ने आपको किसी अनाथालय में छोड़ दिया था नहीं छोड़ा था उन्होंने आपको पाला पोसा बढ़ाकर आपको फिर लायक बताया तो अगर आप के बुजुर्ग आज अगर आप हो गए हैं आपके बड़े तो आप क्या होने किसी वृद्ध आश्रम में छोड़ कर अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हट सकते हैं यह नकारा सोच आप रखते हैं तो उस टाइम पर आपके मां-बाप के बुजुर्ग को आपकी जरूरत होती है और आपका पद भी बनता है कि आप उनकी पूरी देखभाल करें क्योंकि आप सुपर उनका बहुत बड़ा पर्व है जो कि कभी जिंदगी में उतर ही नहीं सकता क्या पूरी जिंदगी में उनकी सेवा करें अर्जुन जी बता सकता तुझे सोच बहुत ही खराब है यह सोच किसी को भी ऐसे नहीं रखना चाहिए और दूसरी बात यही सोच है कि जो इंसान जैसा करता है उसको फिर वैसे ही मिलता है अगर आपके बच्चे भी कल को आपको वो बूढ़े होने के बाद किसी वृद्ध आश्रम में छोड़ आए तो आपको कैसा लगेगा अगर आप अपने मां बाप के साथ ऐसा करेगा उसके पास है कि निदान होगा आपके साथ यह करने का पूरा पूरा

aapka sawaal hai kya bujurgon ko ashram par chhod dena chahiye yah bahut hi kharab soch hai aur aisa kabhi bhi nahi karna chahiye aap yah dekhiye ki jab aap chote se bacche hue the toh aapki halat bhi vaisi thi ki aap bahut acche aap chalna nahi jante the aap bolna nahi jante the aap khana nahi jante the toh kya aapke maa baap ne aapko kisi anathalay me chhod diya tha nahi choda tha unhone aapko pala posa badhakar aapko phir layak bataya toh agar aap ke bujurg aaj agar aap ho gaye hain aapke bade toh aap kya hone kisi vriddh ashram me chhod kar apni jimmedariyon se peeche hut sakte hain yah nakara soch aap rakhte hain toh us time par aapke maa baap ke bujurg ko aapki zarurat hoti hai aur aapka pad bhi banta hai ki aap unki puri dekhbhal kare kyonki aap super unka bahut bada parv hai jo ki kabhi zindagi me utar hi nahi sakta kya puri zindagi me unki seva kare arjun ji bata sakta tujhe soch bahut hi kharab hai yah soch kisi ko bhi aise nahi rakhna chahiye aur dusri baat yahi soch hai ki jo insaan jaisa karta hai usko phir waise hi milta hai agar aapke bacche bhi kal ko aapko vo budhe hone ke baad kisi vriddh ashram me chhod aaye toh aapko kaisa lagega agar aap apne maa baap ke saath aisa karega uske paas hai ki nidan hoga aapke saath yah karne ka pura pura

आपका सवाल है क्या बुजुर्गों को आश्रम पर छोड़ देना चाहिए यह बहुत ही खराब सोच है और ऐसा कभी

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Seema

Phd Student

1:01
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बुजुर्गों का प्रकाशन छोड़ देना चाहिए यह बिल्कुल गलत है हमें यह सोचना चाहिए कि यदि हम अपने मां बाप के सास-ससुर को वृद्ध आश्रम में छोड़ देंगे हम भी बुजुर्ग होने वाले हैं तो हमारी जो औलाद है वह हमें भी पता आश्रम में छोड़ देगी हम अपने बच्चों को क्या सिखा देंगे कि हमने उनकी दादी दादा को वृद्धा आश्रम में छोड़ दिया तो हमारे बच्चे की हम पर ऐसे ही पैसा डालेंगे जब हम वृद्धावस्था में हो जाएंगे इसलिए मैं मानती हूं कि गलत है और हम अपने आने वाली पीढ़ी अपने बुजुर्गों ने वृद्ध आश्रम

bujurgon ka prakashan chod dena chahiye yah bilkul galat hai hamein yah sochna chahiye ki yadi hum apne maa baap ke saas sasur ko vriddh ashram mein chod denge hum bhi bujurg hone waale hain toh hamari jo aulad hai vaah hamein bhi pata ashram mein chod degi hum apne baccho ko kya sikha denge ki humne unki dadi dada ko vriddha ashram mein chod diya toh hamare bacche ki hum par aise hi paisa daalenge jab hum vriddhavastha mein ho jaenge isliye main maanati hoon ki galat hai aur hum apne aane wali peedhi apne bujurgon ne vriddh aashram

बुजुर्गों का प्रकाशन छोड़ देना चाहिए यह बिल्कुल गलत है हमें यह सोचना चाहिए कि यदि हम अपने

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