क्या 'वन नेशन, वन लैंग्वेज', जैसा कि गृह मंत्री अमित शाह ने हिंदी दिवस पर किया था, क्या वास्तव में भारत में काम होता है इसका फायदा और नुकसान क्या होगा?...


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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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वन नेशन वन लैंग्वेज जैसा के गृह मंत्री श्री अमित शाह ने हिंदी दिवस पर किया था क्या वास्तव में भारत में काम होता है इसका फायदा क्या होगा अभी हिंदी दिवस पर उन्होंने ऐसा एक विचार देश के सामने रखा था कि हिंदी को वन नेशन वन लैंग्वेज के तहत शिकार किया था लेकिन दक्षिण के कुछ राज्यों से उसका उस विचार का विरोध हुआ था कि हमारे ऊपर हिंदी फुकिंग ऐसा लगता है कि जब तक पूरे देश के सभी राज्यों के राजनेताओं को जब तक यह स्वीकार्य नहीं होगा तब तक वन नेशन वन लैंग्वेज का विचार है सरकार को पास होना मुश्किल होगा अभी हिंदी को राजकीय भाषा के रूप में पहले से ही पुरस्कृत करते आए हैं और हमारी राष्ट्रीय भाषा हिंदी है और अधिकतर काम हिंदी में यह जाते का नुकसान यह है कि जैसे कि कुछ शब्द है कुछ शब्द जो है उसे अंग्रेजी में प्रचलित है अब उसका हिंदी में रूपांतर करना कभी कभी मुश्किल हो जाता है इसलिए उसको अंग्रेजी शब्द का इस्तेमाल किया जाता है ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की जो इंग्लिश में हिंदी शब्दों का भोजपुरिया गाना नुकसान के बारे में सोचें तो अलग-अलग प्रदेश में अलग-अलग राजकीय भाषा साउथ के राज्यों में वहां की प्रादेशिक भाषा का उपयोग करते हैं और उसके अलावा अंग्रेजी का बहिष्कार तो नहीं किया है लेकिन उसका उपयोग कब करते हैं अब फायदा तो बहुत है वन नेशन वन लैंग्वेज हमारा राष्ट्रपिता जो हमारे गांधी जी हमारे राष्ट्रपति जो है वर्तमान हमारे प्रधानमंत्री जी हमारा राष्ट्रीय पक्षी मोर हमारा राष्ट्रीय गीत एक है तो राष्ट्रीय भाषा क्यों नहीं हो सकती इस पर गहनता से पूरे देश के सभी प्रांतों के राजनेताओं को एक मत होना बेशक बहुत जरूरी भविष्य में हो जाएगा ऐसा मेरा मानना है धन्यवाद जय हिंद

van nation van language jaisa ke grah mantri shri amit shah ne hindi divas par kiya tha kya vaastav mein bharat mein kaam hota hai iska fayda kya hoga abhi hindi divas par unhone aisa ek vichar desh ke saamne rakha tha ki hindi ko van nation van language ke tahat shikaar kiya tha lekin dakshin ke kuch rajyon se uska us vichar ka virodh hua tha ki hamare upar hindi fuking aisa lagta hai ki jab tak poore desh ke sabhi rajyon ke rajnetao ko jab tak yah svikarya nahi hoga tab tak van nation van language ka vichar hai sarkar ko paas hona mushkil hoga abhi hindi ko rajkiya bhasha ke roop mein pehle se hi puraskrit karte aaye hain aur hamari rashtriya bhasha hindi hai aur adhiktar kaam hindi mein yah jaate ka nuksan yah hai ki jaise ki kuch shabd hai kuch shabd jo hai use angrezi mein prachalit hai ab uska hindi mein roopantar karna kabhi kabhi mushkil ho jata hai isliye usko angrezi shabd ka istemal kiya jata hai oxford university ki jo english mein hindi shabdon ka bhojpuriya gaana nuksan ke bare mein sochen toh alag alag pradesh mein alag alag rajkiya bhasha south ke rajyon mein wahan ki pradeshik bhasha ka upyog karte hain aur uske alava angrezi ka bahishkar toh nahi kiya hai lekin uska upyog kab karte hain ab fayda toh bahut hai van nation van language hamara rashtrapita jo hamare gandhi ji hamare rashtrapati jo hai vartmaan hamare pradhanmantri ji hamara rashtriya pakshi mor hamara rashtriya geet ek hai toh rashtriya bhasha kyon nahi ho sakti is par gahanata se poore desh ke sabhi praaton ke rajnetao ko ek mat hona beshak bahut zaroori bhavishya mein ho jaega aisa mera manana hai dhanyavad jai hind

वन नेशन वन लैंग्वेज जैसा के गृह मंत्री श्री अमित शाह ने हिंदी दिवस पर किया था क्या वास्तव

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Pandit Prem

शायर, पुस्तक संपादक

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गृहमंत्री की जो बात है वह मूर्खतापूर्ण लगती है क्योंकि गृहमंत्री खुद भी अंग्रेजी में काम करते हैं आधे से ज्यादा उन्हें सोचना चाहिए कि संसद की कार्रवाई है जो होती है वह 90% अंग्रेजी में क्यों होती है पहले संसद में तो हिंदी पहला ओ पहले संसद की कार्यवाही हो तो हिंदी में करो पूरे देश की बात करते हो और खुद अंग्रेजी में काम करते हो यह लोगों को पागल बनाने की बात है पहले उन्हें सोचना पड़ेगा किस देश में कितनी बोलियां कितनी भाषाएं हैं और अगर वन नेशन वन लैंग्वेज की बात करते हैं तो पहले तो यह सोचना पड़ेगा कि पूरे देश के लिए हिंदी क्यों कई जगह तो हिंदी में आपको काम नहीं करने देते हैं आप हिंदी में फॉर्म भरे मना कर देते हैं अंग्रेजी में भरने को कहा जाता है चाइनीस चाइना में चाइनीस भाषा है बहुत सारे देश है जिनमें अपनी भाषा है वह अंग्रेजी को नहीं अपनाते अंग्रेजी में आती है बात करेंगे लेकिन अपने यहां की पढ़ाई अपने आका सब कुछ अपनी भाषा में करते हैं तो भारत में क्यों नहीं लागू करते पहले तो संसद की कार्यवाही अंग्रेजी में क्यों करते हो हिंदी में करिए आप कोर्ट चली जाइए कोर्ट में आपको अंग्रेजी में सब कुछ करना पड़ता है यह क्या है हिंदी में कोई नहीं लेना चाहता बहुत मुश्किल है साहब मुश्किल इसलिए है क्योंकि हमारे नेता लोग दोगली बात करते हैं इन लोगों को खाने को भरपेट मिलना है इन लोगों को इन लोगों को जूते पड़ने चाहिए जूते को कि यह दोगली बातें करके राजनीति करते हैं और यह देश के लोगों को भ्रमित करते हैं धन्यवाद

grihmantri ki jo baat hai vaah murkhtapurn lagti hai kyonki grihmantri khud bhi angrezi mein kaam karte hain aadhe se zyada unhe sochna chahiye ki sansad ki karyawahi hai jo hoti hai vaah 90 angrezi mein kyon hoti hai pehle sansad mein toh hindi pehla o pehle sansad ki karyavahi ho toh hindi mein karo poore desh ki baat karte ho aur khud angrezi mein kaam karte ho yah logon ko Pagal banaane ki baat hai pehle unhe sochna padega kis desh mein kitni boliyan kitni bhashayen hain aur agar van nation van language ki baat karte hain toh pehle toh yah sochna padega ki poore desh ke liye hindi kyon kai jagah toh hindi mein aapko kaam nahi karne dete hain aap hindi mein form bhare mana kar dete hain angrezi mein bharne ko kaha jata hai Chinese china mein Chinese bhasha hai bahut saare desh hai jinmein apni bhasha hai vaah angrezi ko nahi apanate angrezi mein aati hai baat karenge lekin apne yahan ki padhai apne aaka sab kuch apni bhasha mein karte hain toh bharat mein kyon nahi laagu karte pehle toh sansad ki karyavahi angrezi mein kyon karte ho hindi mein kariye aap court chali jaiye court mein aapko angrezi mein sab kuch karna padta hai yah kya hai hindi mein koi nahi lena chahta bahut mushkil hai saheb mushkil isliye hai kyonki hamare neta log dogli baat karte hain in logon ko khane ko bharapet milna hai in logon ko in logon ko joote padane chahiye joote ko ki yah dogli batein karke raajneeti karte hain aur yah desh ke logon ko bharmit karte hain dhanyavad

गृहमंत्री की जो बात है वह मूर्खतापूर्ण लगती है क्योंकि गृहमंत्री खुद भी अंग्रेजी में काम क

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Kumar

Social Worker

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हर जगह नेशन बदलेंगे तो फायदे ही फायदे हैं क्योंकि हम जानते हैं कि जापान दुनिया का नंबर वन टेक्नोलॉजी देश है और जापान और चाइना एक ऐसा देश है जिस के पास कंप्यूटर में भी उसका अपना लैंग्वेज है लेकिन हम भारतीयों के पास ऐसी तकनीक अभी तक नहीं उपलब्ध हो पाई आदित्य बजाते हम कंप्यूटर को भी अपनी लैंग्वेज में अपने हिसाब से यूज करें कहने का मतलब है आप कंप्यूटर का लैंग्वेज तो यूज़ यह कर सकते हैं इनपुट आउटपुट इंग्लिश से हिंदी से कर सकते हैं लेकिन वह सारे काम खोज बहन चोद और रिसर्च के मामला में कहें तो वह आपको इंग्लिश में ही करते हैं किसी भी चीज को तो यह चीज अभी हमारे भारत किस चीज में हम लोग पीछे हैं उनसे लेकिन कहा जाता है कि जापान एक और चाइना एक ऐसा कंट्री है जो लगभग 69 सैनिक क्या उपयोग करता है और हर जगह लगभग उसका अपना लैंग्वेज लैंग्वेज है और हमारी अपनी आता हमें किसी भी काम को जब हम खुद से करते हैं खुद पर करते हैं तो हमें उस चीज में गर्व महसूस होता है और वैज्ञानिकों ने यह बात पता कर चुका है कि कंप्यूटरीकृत करने में संस्कृत सबसे आसान रंगोली आज तक इस बात पर पहल नहीं हो रही है यह बड़ी दुख की बात है हमें अपने आप में इन बातों को कि गलानी होनी चाहिए और जो भी हमारे एक्सपर्ट्स हैं वह यह चीज को नजरअंदाज कर रहे हैं तब तो आज जितना पीछे हम लोग

har jagah nation badalenge toh fayde hi fayde hain kyonki hum jante hain ki japan duniya ka number van technology desh hai aur japan aur china ek aisa desh hai jis ke paas computer mein bhi uska apna language hai lekin hum bharatiyon ke paas aisi takneek abhi tak nahi uplabdh ho payi aditya bajaate hum computer ko bhi apni language mein apne hisab se use karen kehne ka matlab hai aap computer ka language toh use yah kar sakte hain input output english se hindi se kar sakte hain lekin vaah saare kaam khoj behen chod aur research ke maamla mein kahein toh vaah aapko english mein hi karte hain kisi bhi cheez ko toh yah cheez abhi hamare bharat kis cheez mein hum log peeche hain unse lekin kaha jata hai ki japan ek aur china ek aisa country hai jo lagbhag 69 sainik kya upyog karta hai aur har jagah lagbhag uska apna language language hai aur hamari apni aata hamein kisi bhi kaam ko jab hum khud se karte hain khud par karte hain toh hamein us cheez mein garv mahsus hota hai aur vaigyaanikon ne yah baat pata kar chuka hai ki kampyutarikrit karne mein sanskrit sabse aasaan rangoli aaj tak is baat par pahal nahi ho rahi hai yah badi dukh ki baat hai hamein apne aap mein in baaton ko ki galani honi chahiye aur jo bhi hamare experts hain vaah yah cheez ko najarandaj kar rahe hain tab toh aaj jitna peeche hum log

हर जगह नेशन बदलेंगे तो फायदे ही फायदे हैं क्योंकि हम जानते हैं कि जापान दुनिया का नंबर वन

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Anurag

Student

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हेलो फ्रेंड्स जैसा कि आपने क्वेश्चन करा है वन नेशन वन लैंग्वेज चाहिए भारत में संभव है तो मित्रो जो भारत के संविधान है और जो संविधान में हमारे मौलिक अधिकार दिए हुए हैं जैसा कि आप जानते हैं तो मौलिक अधिकारों में हमें कुछ स्वतंत्रता भी दी गई हैं जिसने धर्म को मानने की स्वतंत्रता और अपनी भाषा को चुनने की स्वतंत्रता या फिर हमारा जो रहन-सहन है जैसा आप जानते हैं भारत बहुत सारे जाती वह सारे धर्मों को मिलकर बना हुआ एक देश है और अनेकता में एकता और बोलता बारिश की जो है 1000 तरीके से तो इसकी ताकत है इस देश कि यहां पर वन नेशन और वन लैंग्वेज तो संभव बिल्कुल ही नहीं है क्योंकि हमारे यहां देखा जाए तो वैसे तो हमारी संवैधानिक भाषाओं में 22 भाषाओं को दर्जा दिया हुआ है संवैधानिक भाषाओं में और उसके अलावा भी जाने भारत के अंदर देखा जाए तो बहुत सारी भाषाएं क्षेत्रीय आधार पर जो अलग-अलग चित्र समूह में लोगों द्वारा बोली जाती है तो संभव नहीं है और वैसे देखा जाए तो हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिला हुआ है 1949 में दरियाबाद मिल गया था संवैधानिक भाषा का दर्जा राज्य की भाषा का चौकी हिंदी जो है भारत में सबसे ज्यादा राज्य में बोली जाने वाली भाषाएं और हिंदी एक ऐसी भाषा है जिसमें यह वैज्ञानिक भाषा है सबसे बड़ी बात तो इसके अंदर देखा जाए व्याकरण यह सब देखी जाए तो यह इतने अधिक हैं और और किसी अन्य भाषा में इतने अधिक शब्द व्याकरण वगैरह जो है प्रचुर मात्रा में नहीं है अंग्रेजी में भी नहीं है तो इसलिए हिंदी को है रांची भाषा और देखा जाए तो भारत के करीब करीब करीब 12 से 15 ऐसे राज्य हैं जहां पर हिंदी बोली जाती हिंदी भाषी राज्य जिनको कहा जाता है तो इसीलिए हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया गया और देवनार देवनागरी लिपि है उसको लिपि का दर्जा दिया गया है और जैसे कि आप सभी जानते हैं और यह किसी पर थोपना सही भी नहीं है अपने भारत के परिपेक्ष में देखे तो क्योंकि यहां पर सब को स्वतंत्रता दी गई है अपनी भाषा अपना धर्म अपना मजहब अपने रहने का तरीका उसकी स्वतंत्रता मिली हुई है तो भारत के परिपेक्ष में अगर भारतीय संवैधानिक रूप से देखा जाए तो यह उचित भी नहीं है 1 नेशनल लैंग्वेज है क्योंकि भारत की जो ताकत है वही अनेकता में एकता की है तो मेरे हिसाब से यह संवैधानिक रूप से और व्यवहारिक रूप से दोनों रूप से यह देखा जाए तो यह उचित नहीं है धन्यवाद जय हिंद

hello friends jaisa ki aapne question kara hai van nation van language chahiye bharat me sambhav hai toh mitro jo bharat ke samvidhan hai aur jo samvidhan me hamare maulik adhikaar diye hue hain jaisa ki aap jante hain toh maulik adhikaaro me hamein kuch swatantrata bhi di gayi hain jisne dharm ko manne ki swatantrata aur apni bhasha ko chunane ki swatantrata ya phir hamara jo rahan sahan hai jaisa aap jante hain bharat bahut saare jaati vaah saare dharmon ko milkar bana hua ek desh hai aur anekata me ekta aur bolta barish ki jo hai 1000 tarike se toh iski takat hai is desh ki yahan par van nation aur van language toh sambhav bilkul hi nahi hai kyonki hamare yahan dekha jaaye toh waise toh hamari samvaidhanik bhashaon me 22 bhashaon ko darja diya hua hai samvaidhanik bhashaon me aur uske alava bhi jaane bharat ke andar dekha jaaye toh bahut saari bhashayen kshetriya aadhar par jo alag alag chitra samuh me logo dwara boli jaati hai toh sambhav nahi hai aur waise dekha jaaye toh hindi ko rashtrabhasha ka darja mila hua hai 1949 me dariyabad mil gaya tha samvaidhanik bhasha ka darja rajya ki bhasha ka chowki hindi jo hai bharat me sabse zyada rajya me boli jaane wali bhashayen aur hindi ek aisi bhasha hai jisme yah vaigyanik bhasha hai sabse badi baat toh iske andar dekha jaaye vyakaran yah sab dekhi jaaye toh yah itne adhik hain aur aur kisi anya bhasha me itne adhik shabd vyakaran vagera jo hai prachur matra me nahi hai angrezi me bhi nahi hai toh isliye hindi ko hai ranchi bhasha aur dekha jaaye toh bharat ke kareeb kareeb kareeb 12 se 15 aise rajya hain jaha par hindi boli jaati hindi bhashi rajya jinako kaha jata hai toh isliye hindi ko rashtrabhasha ka darja diya gaya aur devanar devnagari lipi hai usko lipi ka darja diya gaya hai aur jaise ki aap sabhi jante hain aur yah kisi par thopna sahi bhi nahi hai apne bharat ke paripeksh me dekhe toh kyonki yahan par sab ko swatantrata di gayi hai apni bhasha apna dharm apna majhab apne rehne ka tarika uski swatantrata mili hui hai toh bharat ke paripeksh me agar bharatiya samvaidhanik roop se dekha jaaye toh yah uchit bhi nahi hai 1 national language hai kyonki bharat ki jo takat hai wahi anekata me ekta ki hai toh mere hisab se yah samvaidhanik roop se aur vyavaharik roop se dono roop se yah dekha jaaye toh yah uchit nahi hai dhanyavad jai hind

हेलो फ्रेंड्स जैसा कि आपने क्वेश्चन करा है वन नेशन वन लैंग्वेज चाहिए भारत में संभव है तो म

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