इस देश में धर्म के लिए जीना अच्छा है या धर्म मुक्त बनकर?...


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Pankaj Vasuja

Cinematographer

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देश में धर्म के लिए जीना अच्छा है या धर्म मुक्त बन कर देखिए सारे भाइयों ने राम-राम धर्म के साथ अगर आप धर्म को हिंदू मुस्लिम सिख इसाई मानकर चलते हैं तो गलत धर्म हिंदू मुस्लिम सिख इसाई नहीं है धर्म इंसानियत भगवान की नजर में धर्म इंसानियत है आप अपना जो भी काम करते हैं हर धर्म में आप देखेंगे हिंदू में मंदिरों में पंडितों को श्रेष्ठ माना जाता है उनको दान दिया जाता है दान को दक्षिणा को मुसलमानों में और कोई भी धार्मिक संस्थाओं कुछ भी उनके अंदर अपनी नेक कमाई का कुछ हिस्सा भगवान को देना को धर्म कहा जाता है मेरे ख्याल से गरीबों की मदद करने को इस तरह से जी बरकत होती है इसकी मदद करें आप फ्री में अपने पैसे ऐसी जगह पर कलयुग आ गया है मत बताएं कि उसको अंधविश्वास का आ जाए हो आप की धार्मिक आस्था का लोग मजाक उड़ाए और गलत यूज़ करें ऐसा नहीं जरूरतमंद को ही धर्म में देना चाहिए धर्म का साथ जीने से सभी मानव जाति धर्म के अंदर ही आती है राम-राम सुनवाई

desh me dharm ke liye jeena accha hai ya dharm mukt ban kar dekhiye saare bhaiyo ne ram ram dharm ke saath agar aap dharm ko hindu muslim sikh isai maankar chalte hain toh galat dharm hindu muslim sikh isai nahi hai dharm insaniyat bhagwan ki nazar me dharm insaniyat hai aap apna jo bhi kaam karte hain har dharm me aap dekhenge hindu me mandiro me pandito ko shreshtha mana jata hai unko daan diya jata hai daan ko dakshina ko musalmanon me aur koi bhi dharmik sasthaon kuch bhi unke andar apni neck kamai ka kuch hissa bhagwan ko dena ko dharm kaha jata hai mere khayal se garibon ki madad karne ko is tarah se ji barkat hoti hai iski madad kare aap free me apne paise aisi jagah par kalyug aa gaya hai mat bataye ki usko andhavishvas ka aa jaaye ho aap ki dharmik astha ka log mazak udaye aur galat use kare aisa nahi jaruratmand ko hi dharm me dena chahiye dharm ka saath jeene se sabhi manav jati dharm ke andar hi aati hai ram ram sunvai

देश में धर्म के लिए जीना अच्छा है या धर्म मुक्त बन कर देखिए सारे भाइयों ने राम-राम धर्म के

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मुरारी स्वामी, छपरा बिहार

सन्त समाजसेवी सह Journalist

1:38
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जय श्री कृष्णा आप ने प्रश्न किया है इस देश अर्थात भारत में धर्म के लिए जीना अच्छा है या धर्म मुक्त होकर आप पर निर्भर करता है कि आप धर्म मुक्त रहकर जीना चाहते हैं या धर्म युक्त होकर किसी भी देश में चले जाइए शुभ भारत दुनिया के किसी भी देश में चले जाइए वहां पर लोग अधिकांश लोग धर्म को मानते हैं 99% लोग किसी न किसी धर्म को मानते हैं साइको माने मुस्लिम को माने सनातन को माने या न माने किसी न किसी रूप में धर्म को अवश्य मानते हैं इस देश की बात हो रही है तो इस देश में धार्मिक जो है एक जीवन का काला है आदमी को सिखाता है कि कैसे जीना जीवन में क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए इसलिए लोग धर्म से जुड़े रहते हैं और धर्म के बताए हुए मार्ग पर चलते हैं और आपके ऊपर निर्भर है कि धार्मिक

jai shri krishna aap ne prashna kiya hai is desh arthat bharat me dharm ke liye jeena accha hai ya dharm mukt hokar aap par nirbhar karta hai ki aap dharm mukt rahkar jeena chahte hain ya dharm yukt hokar kisi bhi desh me chale jaiye shubha bharat duniya ke kisi bhi desh me chale jaiye wahan par log adhikaansh log dharm ko maante hain 99 log kisi na kisi dharm ko maante hain psycho maane muslim ko maane sanatan ko maane ya na maane kisi na kisi roop me dharm ko avashya maante hain is desh ki baat ho rahi hai toh is desh me dharmik jo hai ek jeevan ka kaala hai aadmi ko sikhata hai ki kaise jeena jeevan me kya karna chahiye kya nahi karna chahiye isliye log dharm se jude rehte hain aur dharm ke bataye hue marg par chalte hain aur aapke upar nirbhar hai ki dharmik

जय श्री कृष्णा आप ने प्रश्न किया है इस देश अर्थात भारत में धर्म के लिए जीना अच्छा है या धर

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DR. I.P.SINGH

Doctorate in Literature

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अभी पहुंचा इस देश में धर्म के लिए जीना चाहे धर्म का धर्म संप्रदाय से जुड़ा हुआ है धर्म तो करके जीना ज्यादा अच्छा है लेकिन एक परम सत्ता को स्वीकार करते हुए जिला और ज्यादा अच्छा केक परम शक्ति है जो हमारे उचित अनुचित पर ध्यान रखेगी जो संकट में हमारी मदद करेगी जो हमारी सहयोगी है इसका स्वरूप हमारे अंदर विराजमान है आत्मा के रूप में उस परमात्मा को स्वीकार करके दिमाग ज्यादा अच्छा है तो किस संकट के क्षणों में ईश्वर ये मान्यताएं कहीं न कहीं हमारी रचना धर्मी मदद भी करती है

abhi pohcha is desh me dharm ke liye jeena chahen dharm ka dharm sampraday se juda hua hai dharm toh karke jeena zyada accha hai lekin ek param satta ko sweekar karte hue jila aur zyada accha cake param shakti hai jo hamare uchit anuchit par dhyan rakhegi jo sankat me hamari madad karegi jo hamari sahyogi hai iska swaroop hamare andar viraajamaan hai aatma ke roop me us paramatma ko sweekar karke dimag zyada accha hai toh kis sankat ke kshanon me ishwar ye manyatae kahin na kahin hamari rachna dharami madad bhi karti hai

अभी पहुंचा इस देश में धर्म के लिए जीना चाहे धर्म का धर्म संप्रदाय से जुड़ा हुआ है धर्म तो

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देखे कैसे जीना है यह आपकी चॉइस होनी चाहिए ना की किसी और के कहने पर आप कैसे जी का मतलब क्या है आपको धर्म के साथ जीना है या बिना धर्म के जीना है आपका खुद का डिसीजन होना चाहिए मैं आपको आज कहूं कि नहीं आप धर्म छोड़ दो और आप छोड़ देंगे तो फिर उसमें आपकी खुशी किस बात की आप तो फिर मेरे लिए है वह काम कर रहे हो तो क्या उसमें जीने का कोई मतलब ही नहीं है तो जो आपको पसंद आया जो आपकी इच्छा करे जो आपका दिल गवाही दे दिमाग गवाही दे वह करो अगर आप जैसे भी जीना चाहते हो जी अगर किसी और के साथ सलमान के अपनी लाइफ को बदल रहे हो मतलब क्या पूछते खुशी के लिए कर रहे हो तो आप देखो आपको धर्म से ज्यादा शांति सुकून मिलता है या ऐसे रहकर वैसे मेरा मानना है कि अपने धर्म संस्कृति और अपने रीति रिवाजों को छोड़कर के जीना एक कठिन काम है उससे अपनी पहचान नहीं बनती है

dekhe kaise jeena hai yah aapki choice honi chahiye na ki kisi aur ke kehne par aap kaise ji ka matlab kya hai aapko dharm ke saath jeena hai ya bina dharm ke jeena hai aapka khud ka decision hona chahiye main aapko aaj kahun ki nahi aap dharm chhod do aur aap chhod denge toh phir usme aapki khushi kis baat ki aap toh phir mere liye hai vaah kaam kar rahe ho toh kya usme jeene ka koi matlab hi nahi hai toh jo aapko pasand aaya jo aapki iccha kare jo aapka dil gawaahi de dimag gawaahi de vaah karo agar aap jaise bhi jeena chahte ho ji agar kisi aur ke saath salman ke apni life ko badal rahe ho matlab kya poochhte khushi ke liye kar rahe ho toh aap dekho aapko dharm se zyada shanti sukoon milta hai ya aise rahkar waise mera manana hai ki apne dharm sanskriti aur apne riti rivajon ko chhodkar ke jeena ek kathin kaam hai usse apni pehchaan nahi banti hai

देखे कैसे जीना है यह आपकी चॉइस होनी चाहिए ना की किसी और के कहने पर आप कैसे जी का मतलब क्या

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Dr. KRISHNA CHANDRA

Rehabilitation Psychologist

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Ruchi Garg

Counsellor and Psychologist(Gold MEDALIST)

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बहुत ही गहरा सवाल है आपका कि धर्म के लिए जीना अच्छा है या धर्म मुक्त बनकर तो उस पर मैं यह कहूंगी कि धर्म अब जब हम कहते कि धर्म के लिए जीना चाहेंगे तो कई बार ऐसा होता है कि हमारे जहन में हम पहले बड़े इस को फॉलो करें उनकी बातें हमारी पर्सनल वैल्यू से कुछ अंखियों से ली जाती है वह मैच नहीं करती जैसे कि जो हमने अपने वातावरण से सीखा जो हमने अपने भाई-बहनों या फ्रेंड से सीखा है अपने जीवन की एक्सपीरियंस से सीखा है वह और जो धर्म कहता है वह मैच नहीं करता तो मैं यह कहूंगी कि धार्मिक की जगह अध्यात्मिक बन्नी अध्यात्मिक स्पिरिचुअल एक्सपीरियंस आन क्या करता है वह हर धर्म में वह अपना लेता है जो उसे अच्छा लगता है कुछ ऐसा ईसा मसीह ने भी कहा था जो दिल को छू जाता है कभी जैन मुनियों की बातें सुनकर देखी कुछ बातें उनकी ऐसे ही होती है जो जो संसार के बारे में बहुत ही और अच्छी लगती है जब भी गौतम बुद्ध की वाणी सुनी जाती है या उनका मंत्र जाप किया जाता है तो ऐसा लगता है कि इसके अलावा कहीं शांति मिलती नहीं सकती जब इस्कॉन कि आप स्कूल में जाते हैं और जब आप हरे रामा हरे कृष्णा की चांटिंग पर डांस करते हैं तो उससे ज्यादा आनंद में शायद ही इस संसार में कुछ और हो सकता है तू मैं यह कहूंगी कि धार्मिक नहीं आध्यात्मिक बनी जिसे हम इंग्लिश में स्पिरिचुअलिटी भी कहते हैं उसको जिए तो आपको बहुत प्रोग्रेस करेंगे अपनी लाइफ में

bahut hi gehra sawaal hai aapka ki dharm ke liye jeena accha hai ya dharm mukt bankar toh us par main yah kahungi ki dharm ab jab hum kehte ki dharm ke liye jeena chahenge toh kai baar aisa hota hai ki hamare zahan mein hum pehle bade is ko follow kare unki batein hamari personal value se kuch ankhiyon se li jaati hai vaah match nahi karti jaise ki jo humne apne vatavaran se seekha jo humne apne bhai bahnon ya friend se seekha hai apne jeevan ki experience se seekha hai vaah aur jo dharm kahata hai vaah match nahi karta toh main yah kahungi ki dharmik ki jagah adhyatmik bani adhyatmik Spiritual experience Aan kya karta hai vaah har dharm mein vaah apna leta hai jo use accha lagta hai kuch aisa isa masih ne bhi kaha tha jo dil ko chu jata hai kabhi jain muniyon ki batein sunkar dekhi kuch batein unki aise hi hoti hai jo jo sansar ke bare mein bahut hi aur achi lagti hai jab bhi gautam buddha ki vani suni jaati hai ya unka mantra jaap kiya jata hai toh aisa lagta hai ki iske alava kahin shanti milti nahi sakti jab iskcon ki aap school mein jaate hain aur jab aap hare rama hare krishna ki chanting par dance karte hain toh usse zyada anand mein shayad hi is sansar mein kuch aur ho sakta hai tu main yah kahungi ki dharmik nahi aadhyatmik bani jise hum english mein spirituality bhi kehte hain usko jiye toh aapko bahut progress karenge apni life mein

बहुत ही गहरा सवाल है आपका कि धर्म के लिए जीना अच्छा है या धर्म मुक्त बनकर तो उस पर मैं यह

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Dr Asha B Jain

Dip in Naturopathy, Yoga therapist Pranic healer, Counselor

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खेत कहीं पर भी धर्म आपको बंधन में नहीं बन सकता है ना बनता है इसलिए मुक्त होकर अपने कर्म पर ध्यान दें कि आप कर्म कैसे कर रहे हैं कर्म ही आगे आपकी प्रोग्रेस करेंगे और आगे आपको अपनी लाइफ को अच्छे या बुरे की तरफ लीड करेंगे जो आपने पिछला कर्म किया है वह आप अभी देख ही रहे हैं उसकी क्या फल मिल रहा होगा आपको और जो आज करेंगे उसके आपको आगे का फल मिलेगा हर धर्म में यही सिखाया जाता है तो धर्म कोई बंधन नहीं है धर्म फ्रीडम है जिसमें आप जो चाहे वह करें ध्यान रहे यह हर कर्म का आपको परिणाम भोगना ही पड़ेगा

khet kahin par bhi dharm aapko bandhan mein nahi ban sakta hai na banta hai isliye mukt hokar apne karm par dhyan de ki aap karm kaise kar rahe hain karm hi aage aapki progress karenge aur aage aapko apni life ko acche ya bure ki taraf lead karenge jo aapne pichla karm kiya hai vaah aap abhi dekh hi rahe hain uski kya fal mil raha hoga aapko aur jo aaj karenge uske aapko aage ka fal milega har dharm mein yahi sikhaya jata hai toh dharm koi bandhan nahi hai dharm freedom hai jisme aap jo chahen vaah kare dhyan rahe yah har karm ka aapko parinam bhogna hi padega

खेत कहीं पर भी धर्म आपको बंधन में नहीं बन सकता है ना बनता है इसलिए मुक्त होकर अपने कर्म पर

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Dr. Priya Shatanjib Jha

Psychologist|Counselor|Dentist

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नमस्ते नमस्ते दोस्तों मेरी आनी डॉक्टर प्रिया झा के तरफ से आप सब को दिन की बहुत सारी शुभकामनाएं देखिए आप पर डिपेंड करता है कि आपको धर्म के लिए जीना है या धर्म से मुक्त आपको रहना आइडियल मतलब सबसे उच्च तरीका इसमें रहने का यह होगा कि आप एक बैलेंस मतलब काफी बीच में रही है धर्म रखना देखिए अच्छी बात है लेकिन दूसरे पर अपना धर्म अपना यह बुरी बात है आप जो हो अगर आप हिंदू हो या बगैर बुद्धिस्ट हो या जो भी हो आप अपना धर्म मानो दूसरों का पैगाम आने दो लेकिन दूसरों को यह कहना कि मेरा दादा अच्छा है तुझे भी यह होना चाहिए देखी आप इससे तो नर्क नहीं जाओगे यह मेरा ऐसा सोचना है यू आर नोबल समरी व्हाट टू डू और हाउ टू लीव द लाइंस एंड ऊदल आपको यहां पर यह करने के लिए नहीं भेजा गया है कि आपको दूसरों को अपना धर्म में लाना है आपको उनको यह बनाना है और यह करके आप किसको क्या बात बता रहे हो आपको खुद मालूम है कि आप क्या करने वाले हो आप कहां जाओगे ठीक है तो आप इंसान हो हम लोग काफी बोल्ड स्पीशीज हैं कि हमेशा ही मैं कहती हूं वर्ल्ड स्पीशीज यानी कि हम काफी आगे तक आए हैं इसका मतलब यह है कि दूसरों को हम दुख नहीं पहुंचा सकते हैं अगर दूसरे आपसे खुश नहीं है इसी से समझ जाओ कि आप इतने घटिया इंसान हो या आप कितना घटिया सोच रखते हो सो धर्म जो है आरंभ मुक्त होने तंग आकर धर्म मुक्त होने की जरूरत नहीं है और धर्म से चक्कर भी सब चीज नहीं करना है आपको कि आप नारी लेकर जा रहे हो और आप जुलूस जो कर रहे हो चुपचाप रहकर भी आप शांति से भी अपना धर्म जो है वह निभा सकते हो दूसरों को तंग करने बिना काम किए बिना तो बीच में रहिए धर्म फॉलो भी कर सकते हो नहीं भी कर सकते हो और उस बारे में चुप ही रहो वह बेस्ट है लेकिन दूसरों को कभी तंग नहीं करना चाहिए यह आपको समझना होगा थैंक यू

namaste namaste doston meri aani doctor priya jha ke taraf se aap sab ko din ki bahut saree subhkamnaayain dekhiye aap par depend karta hai ki aapko dharm ke liye jeena hai ya dharm se mukt aapko rehna ideal matlab sabse ucch tarika isme rehne ka yah hoga ki aap ek balance matlab kaafi beech mein rahi hai dharm rakhna dekhiye achi baat hai lekin dusre par apna dharm apna yah buri baat hai aap jo ho agar aap hindu ho ya bagair Buddhist ho ya jo bhi ho aap apna dharm maano dusro ka paigam aane do lekin dusro ko yah kehna ki mera dada accha hai tujhe bhi yah hona chahiye dekhi aap isse toh nark nahi jaoge yah mera aisa sochna hai you R noble summary what to do aur how to leave the lines and udal aapko yahan par yah karne ke liye nahi bheja gaya hai ki aapko dusro ko apna dharm mein lana hai aapko unko yah banana hai aur yah karke aap kisko kya baat bata rahe ho aapko khud maloom hai ki aap kya karne waale ho aap kahaan jaoge theek hai toh aap insaan ho hum log kaafi bold species hain ki hamesha hi main kehti hoon world species yani ki hum kaafi aage tak aaye hain iska matlab yah hai ki dusro ko hum dukh nahi pohcha sakte hain agar dusre aapse khush nahi hai isi se samajh jao ki aap itne ghatiya insaan ho ya aap kitna ghatiya soch rakhte ho so dharm jo hai aarambh mukt hone tang aakar dharm mukt hone ki zarurat nahi hai aur dharm se chakkar bhi sab cheez nahi karna hai aapko ki aap nari lekar ja rahe ho aur aap jhullus jo kar rahe ho chupchap rahkar bhi aap shanti se bhi apna dharm jo hai vaah nibha sakte ho dusro ko tang karne bina kaam kiye bina toh beech mein rahiye dharm follow bhi kar sakte ho nahi bhi kar sakte ho aur us bare mein chup hi raho vaah best hai lekin dusro ko kabhi tang nahi karna chahiye yah aapko samajhna hoga thank you

नमस्ते नमस्ते दोस्तों मेरी आनी डॉक्टर प्रिया झा के तरफ से आप सब को दिन की बहुत सारी शुभकाम

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Rajesh Rishi

Indian Politician

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

धर्म जो है वह इंसान को बांध के रखने के लिए होता है जाती जाती है तो सब को बांधकर रखने के लिए है देश के सामने धर्म नहीं होना चाहिए हर धर्म का सम्मान में चाहिए और राष्ट्रीय नीति ऐसी होनी चाहिए जिसमें हर जगह सम्मान हो लेकिन राष्ट्रपति पर ही हो

dharam jo hai wah insaan ko bandh ke rakhne ke liye hota hai jati jati hai toh sab ko bandhkar rakhne ke liye hai desh ke saamne dharm nahi hona chahiye har dharm ka sammaan mein chahiye aur rashtriya niti aisi honi chahiye jisme har jagah sammaan ho lekin Rashtrapati par hi ho

धर्म जो है वह इंसान को बांध के रखने के लिए होता है जाती जाती है तो सब को बांधकर रखने के लि

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Vikas Singh

Political Analyst

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है कि इस देश में धर्म के लिए जीना अच्छा है या धर्म के लिए नहीं जीना अच्छा है मैं आपको बताना चाहता हूं कि धर्म के लिए आप नहीं जी सकते हैं तो आपका धरती पर रहना ही बेकार है जो हम लोग साथ 70 किलो का वेट लेकर धरती मां के ऊपर सर के ऊपर चढ़ते हैं चलते हैं तो लोड है इसका धर्म के लिए जीना चाहिए सनातन परंपरा जो जो धरती का सबसे पहला परंपरा है जो संसार का सबसे पहला परंपरा है उस परंपरा से हम लोग जुड़े हुए हैं बहुत गर्व की बात है कि हम लोग हिंदू हैं स्वामी विवेकानंद जी ने शिकागो में जाकर बोला था गर्व से बोलो कि हम हिंदू हैं तो हिंदुत्व की विचारधारा आपके अंदर होनी चाहिए कट्टर विचारधारा होनी चाहिए आज 800 साल हमारे देश में अंग्रेजों ने मुगल शासकों ने मिलाकर 1000 साल राज किया कांग्रेस पार्टी में 70 साल हमारे देश में राज किया इन सारे लोगों ने हिंदुत्व को खत्म करने की पूरी कोशिश की लेकिन आज भी हमारा हिंदुत्व जिंदा है हिंदुत्व जिंदा रहेगा भविष्य में भी हम लोगों को अपना वोट बस भारतीय जनता पार्टी को देना होगा मोदी जी को देना होगा मोदी जी विशाल हिंदू हृदय सम्राट हैं उनको अगर हम लोग वोट देंगे तभी हमारा देश तरक्की करेगा मैं सभी देशवासियों से निवेदन करना चाहता हूं अपना वोट भारतीय जनता पार्टी को दें कैंडिडेट कोई भी हो लेकिन हम सभी का वोट बीजेपी को बीजेपी को देना चाहिए कमल के फूल पर देना चाहिए तभी देश तरक्की करेगा आइए मिलजुल कर अपना वोट बीजेपी को करें ताकि देश आगे बढ़ सके हमारे देश में हिंदुत्व जिंदा रह सके धन्यवाद

aapka sawaal hai ki is desh mein dharm ke liye jeena accha hai ya dharm ke liye nahi jeena accha hai aapko bataana chahta hoon ki dharm ke liye aap nahi ji sakte hain toh aapka dharti par rehna hi bekar hai jo hum log saath 70 kilo ka wait lekar dharti maa ke upar sir ke upar chadhte hain chalte hain toh load hai iska dharm ke liye jeena chahiye sanatan parampara jo jo dharti ka sabse pehla parampara hai jo sansar ka sabse pehla parampara hai us parampara se hum log jude hue hain bahut garv ki baat hai ki hum log hindu hain swami vivekananda ji ne chicago mein jaakar bola tha garv se bolo ki hum hindu hain toh hindutv ki vichardhara aapke andar honi chahiye kattar vichardhara honi chahiye aaj 800 saal hamare desh mein angrejo ne mughal shaasakon ne milakar 1000 saal raj kiya congress party mein 70 saal hamare desh mein raj kiya in saare logo ne hindutv ko khatam karne ki puri koshish ki lekin aaj bhi hamara hindutv zinda hai hindutv zinda rahega bhavishya mein bhi hum logo ko apna vote bus bharatiya janta party ko dena hoga modi ji ko dena hoga modi ji vishal hindu hriday samrat hain unko agar hum log vote denge tabhi hamara desh tarakki karega main sabhi deshvasiyon se nivedan karna chahta hoon apna vote bharatiya janta party ko de candidate koi bhi ho lekin hum sabhi ka vote bjp ko bjp ko dena chahiye kamal ke fool par dena chahiye tabhi desh tarakki karega aaiye miljul kar apna vote bjp ko kare taki desh aage badh sake hamare desh mein hindutv zinda reh sake dhanyavad

आपका सवाल है कि इस देश में धर्म के लिए जीना अच्छा है या धर्म के लिए नहीं जीना अच्छा है मैं

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sadhak vijay

Yoga Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इस देश में धर्म के लिए दिन अच्छा है या धर्म मुक्त बंद कर देखिए पहले आप को धर्म को जान जो आप धर्म के लिए जीना बता रहे हैं यह सबको बता रहे हैं धर्म को नहीं आए हिंदू मुस्लिम सिख इसाई जैन पारसी यह तो बस और याद रखना मजहब हमेशा आपस में लड़ जाते हैं इस धर्म आपस में जुड़ जाता है धर्म धारण करने योग्य तो जोड़ देता है वह घर में जो लड़ वादे हिंदू कहता है हिंदू बनो सिक्के आता है हमारे धर्म को मानो हम सबसे बड़े हैं मुस्लिम कहते हैं आपने देखा होगा मुस्लिम कहते हैं हमारा धर्म सबसे हमारा मजहब सबसे ऊंचा है तो इसलिए सबसे पहले धर्म जैसे अग्नि है अग्नि का धार में हमेशा ऊपर उठना हमें सो कर उठेगी चाहे वहां हो पाकिस्तान में हो कहीं भी हो कहीं भी चलो अब उसे नीचे से भरी जाएगी और अग्नि में कुछ भी उसका गुण होता है कुछ भी आप डालोगे जला देगी कितना ही बड़ा कुछ भी याद रखना हमेशा चलाएगी ऐसे ही पानी पानी का धर्म है नीचे की और बहनों और नीचे की ओर बढ़ेगा और क्यों नहीं पाएगा हमेशा पानी गला रहता है उसका धर्मेंद्र ला देना सत्य सत्य हमेशा सच बोलना यह धर्म में आपका दो और दो चार ही होते हैं दो प्लस दो चार ही होते हैं कि अब यहां भारत में रोते अमरीका में जाओ इंग्लैंड में इसको बोलते हैं सिद्धांत सिद्धांत का दूसरा रूप में मिला जो कभी बदलता नहीं हम कभी बदलता नहीं तो इसलिए धर्म की परिभाषा धर्म के लिए तो जीना अच्छा है आप इस देश में क्या पूरी दुनिया में धर्म के बिना नहीं जी सकते हैं हमेशा धर्म चलता है आपका तो इसलिए धर्म लगे मजहब अलग है धन्यवाद

is desh mein dharm ke liye din accha hai ya dharm mukt band kar dekhiye pehle aap ko dharm ko jaan jo aap dharm ke liye jeena bata rahe hai yah sabko bata rahe hai dharm ko nahi aaye hindu muslim sikh isai jain parasi yah toh bus aur yaad rakhna majhab hamesha aapas mein lad jaate hai is dharm aapas mein jud jata hai dharm dharan karne yogya toh jod deta hai vaah ghar mein jo lad waade hindu kahata hai hindu bano sikke aata hai hamare dharm ko maano hum sabse bade hai muslim kehte hai aapne dekha hoga muslim kehte hai hamara dharm sabse hamara majhab sabse uncha hai toh isliye sabse pehle dharm jaise agni hai agni ka dhar mein hamesha upar uthna hamein so kar uthegee chahen wahan ho pakistan mein ho kahin bhi ho kahin bhi chalo ab use niche se bhari jayegi aur agni mein kuch bhi uska gun hota hai kuch bhi aap daloge jala degi kitna hi bada kuch bhi yaad rakhna hamesha chalaegi aise hi paani paani ka dharm hai niche ki aur bahnon aur niche ki aur badhega aur kyon nahi payega hamesha paani gala rehta hai uska dharmendra la dena satya satya hamesha sach bolna yah dharm mein aapka do aur do char hi hote hai do plus do char hi hote hai ki ab yahan bharat mein rote america mein jao england mein isko bolte hai siddhant siddhant ka doosra roop mein mila jo kabhi badalta nahi hum kabhi badalta nahi toh isliye dharm ki paribhasha dharm ke liye toh jeena accha hai aap is desh mein kya puri duniya mein dharm ke bina nahi ji sakte hai hamesha dharm chalta hai aapka toh isliye dharm lage majhab alag hai dhanyavad

इस देश में धर्म के लिए दिन अच्छा है या धर्म मुक्त बंद कर देखिए पहले आप को धर्म को जान जो आ

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Mainpal Kashyap

Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

तुमने कभी भी जातिवाद के ऊपर कोई भी चुनाव नहीं रखना चाहिए और जाति के पर हमने कोई भी कदम नहीं किसी प्रकार सभी को एक समान समझना चाहिए अगर हम जाती पाती कि अगर बात करेंगे तो गुड़िया भेद-भाव हम देंगे उसके अंदर उसके अंदर कुछ भी मतलब हो सकता है लेकिन देश में जो अपराध हो जाती है तो आपस में विवाद है वह पैदा होते हैं हमने कभी भी भेदभाव आपस में नहीं समझना चाहिए

tumne kabhi bhi jaatiwad ke upar koi bhi chunav nahi rakhna chahiye aur jati ke par humne koi bhi kadam nahi kisi prakar sabhi ko ek saman samajhna chahiye agar hum jati pati ki agar baat karenge toh gudiya bhed bhav hum denge uske andar uske andar kuch bhi matlab ho sakta hai lekin desh mein jo apradh ho jati hai toh aapas mein vivaad hai wah paida hote hain humne kabhi bhi bhedbhav aapas mein nahi samajhna chahiye

तुमने कभी भी जातिवाद के ऊपर कोई भी चुनाव नहीं रखना चाहिए और जाति के पर हमने कोई भी कदम नही

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Markandey Pandey

Senior Journalist

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अधर्म मुक्त तो बनकर जीना बिल्कुल ही खराब है राक्षसी का जीवन हो जाएगा धर्म को आप हिंदू मुस्लिम क्रिश्चियन इकाई वगैरह महात्मा गांधी ने भी धर्म को कहा कि धर्म विहीन राजनीति जो है पूरा है और एकदम बिल्कुल अगर धर्म नहीं है राजनीति में तो पूरा है तो तो धर्म की जो परिभाषा है सुप्रीम कोर्ट के अनुसार वह यह है कि घर में एक जीवन पद्धति है लाइफ स्टाइल है और जो व्यक्ति जितना धार्मिक होगा वह उतना ही अच्छा होगा उसका हर जगह दिखे एक्सेप्शन अपवाद होते हैं और कई धार्मिक लोग जो दिखाई देते हैं कि उन्होंने गलत काम किया जेल में चले गए क्या हुआ वैसा हुआ उनके अंदर धार्मिकता नहीं है वह धर्म का चोला पहने हुए तो धर्म एक जीवन पद्धति है भाई हिंदुस्तान तो धर्म का देश है यह तो इसकी संस्कृति और धर्म या का जीवन पद्धति पूरी तरह से हो जुड़ा हुआ है धर्म से तो मेरा मानना है कि धर्म मुक्त होकर जीना तो बिल्कुल स्वामी विवेकानंद निकाय की नास्तिक है जो अपने आप पर भरोसा नहीं करता ईश्वर और मूर्ति पूजा मंदिर जाना यह धर्म नहीं है धर्म को एक जीवन पद्धति है आध्यात्मिक तो व्यक्ति को धार्मिक ओके जीना चाहिए और धर्म मुक्त घर में जीवन होना चाहिए

adharma mukt toh bankar jeena bilkul hi kharab hai raakshasi ka jeevan ho jaega dharm ko aap hindu muslim Christian ikai vagera mahatma gandhi ne bhi dharm ko kaha ki dharm vihin raajneeti jo hai pura hai aur ekdam bilkul agar dharm nahi hai raajneeti mein toh pura hai toh toh dharm ki jo paribhasha hai supreme court ke anusaar vaah yah hai ki ghar mein ek jeevan paddhatee hai life style hai aur jo vyakti jitna dharmik hoga vaah utana hi accha hoga uska har jagah dikhe exception apavad hote hai aur kai dharmik log jo dikhai dete hai ki unhone galat kaam kiya jail mein chale gaye kya hua waisa hua unke andar dharmikata nahi hai vaah dharm ka chola pehne hue toh dharm ek jeevan paddhatee hai bhai Hindustan toh dharm ka desh hai yah toh iski sanskriti aur dharm ya ka jeevan paddhatee puri tarah se ho juda hua hai dharm se toh mera manana hai ki dharm mukt hokar jeena toh bilkul swami vivekananda nikaay ki nastik hai jo apne aap par bharosa nahi karta ishwar aur murti puja mandir jana yah dharm nahi hai dharm ko ek jeevan paddhatee hai aadhyatmik toh vyakti ko dharmik ok jeena chahiye aur dharm mukt ghar mein jeevan hona chahiye

अधर्म मुक्त तो बनकर जीना बिल्कुल ही खराब है राक्षसी का जीवन हो जाएगा धर्म को आप हिंदू मुस्

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

0:44
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अब का प्रश्न है इस देश में धर्म के लिए जीना अच्छा है या धर्म मुक्त बनकर इच्छा है इस देश में जीना है तो धर्म के लिए भी जीना चाहिए हर वक्त बंद कर देना चाहिए ठीक है दोनों तरीके से जीना चाहिए और दोनों तरफ से मुक्ति सीख ले ठीक है जिनको पॉजिटिव लगता है वह धर्म के साथ चाहिए और दोनों में है धन्यवाद

ab ka prashna hai is desh mein dharm ke liye jeena accha hai ya dharm mukt bankar iccha hai is desh mein jeena hai toh dharm ke liye bhi jeena chahiye har waqt band kar dena chahiye theek hai dono tarike se jeena chahiye aur dono taraf se mukti seekh le theek hai jinako positive lagta hai vaah dharm ke saath chahiye aur dono mein hai dhanyavad

अब का प्रश्न है इस देश में धर्म के लिए जीना अच्छा है या धर्म मुक्त बनकर इच्छा है इस देश मे

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Rajesh Rana

Educator, Lawyer

2:31
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लेकिन वास्तव में यह जाने की आवश्यकता है इस धर्म क्या है धर्म का मतलब है धारण करना आप किसी भी जिम्मेदारी को धारण करते हैं तो उसी तरफ कहते हैं जैसे एक ही परिवार में पिता का धर्म क्या है बच्चों की परवरिश के उनके रे कमाना माता का धर्म क्या है बच्चों की देखभाल कर राजा का धर्म क्या है प्रजा के भले के लिए सोचना प्रजा की रक्षा के बारे में सोचें तो एक ही देश में कितने सारे धर्म तो यह धर्म अब जो हम बोलते हैं हिंदू मुस्लिम सिख इसाई धर्म नहीं सबकी अपनी-अपनी जींस स्टाइलिश एक जीवन पद्धति ए कमिटी है बहुत बड़ी हिंदू कब मीटिंग मुस्लिम कभी जिनके अपने रीति रिवाज होना है अपने तरीके से धन कमाने के बना ले तो यह धर्म नहीं कोई भी देश धर्म से मुक्त हो ही नहीं सकता क्या आप अपनी जिम्मेवारी को छोड़ सकते हैं क्या आप अपने बच्चे के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं दे पाएंगे कि आपका बच्चा आपके प्रति जिम्मेदारी नहीं ले पाए अगर वह नहीं भाई कभी उसका धर्म आपके बच्चे का धर्म है कि आप की देखभाल करेगा वह बुढ़ापे में और आपका इधर में क्या आप अपने बच्चे की परवरिश करेंगे तो धर्म तो हम कभी होकर रहेगी सकते जो धर्म है धर्म से विमुख हो चुका है वह तो साधु सन्यासी से देना ही किसी से कुछ ना कोई जिम्मेदारी किसी की दूसरे का कोई उसके लिए करेगा किसी से उम्मीद करेगा ना किसी के लिए गोली फिर से मुक्त हो सकता यह हो सकता है कि वो किसी और से मिलके आपका धर्म बन जाता है उस जिम्मेदारी को बखूबी निभाए तो हमारे देश में अब धर्म से भी मत नहीं तो अच्छा समान सबसे स्मार्ट मंच आधार कार्ड पैदा हो जाएगी

lekin vaastav mein yah jaane ki avashyakta hai is dharm kya hai dharm ka matlab hai dharan karna aap kisi bhi jimmedari ko dharan karte hain toh usi taraf kehte hain jaise ek hi parivar mein pita ka dharm kya hai baccho ki parvarish ke unke ray kamana mata ka dharm kya hai baccho ki dekhbhal kar raja ka dharm kya hai praja ke bhale ke liye sochna praja ki raksha ke bare mein sochen toh ek hi desh mein kitne saare dharm toh yah dharm ab jo hum bolte hain hindu muslim sikh isai dharm nahi sabki apni apni jeans stylish ek jeevan paddhatee a committee hai bahut badi hindu kab meeting muslim kabhi jinke apne riti rivaaj hona hai apne tarike se dhan kamane ke bana le toh yah dharm nahi koi bhi desh dharm se mukt ho hi nahi sakta kya aap apni jimmewari ko chod sakte kya aap apne bacche ke prati apni jimmedari nahi de payenge ki aapka baccha aapke prati jimmedari nahi le paye agar vaah nahi bhai kabhi uska dharm aapke bacche ka dharm hai ki aap ki dekhbhal karega vaah budhape mein aur aapka idhar mein kya aap apne bacche ki parvarish karenge toh dharm toh hum kabhi hokar rahegi sakte jo dharm hai dharm se vimukh ho chuka hai vaah toh sadhu sanyaasi se dena hi kisi se kuch na koi jimmedari kisi ki dusre ka koi uske liye karega kisi se ummid karega na kisi ke liye goli phir se mukt ho sakta yah ho sakta hai ki vo kisi aur se milke aapka dharm ban jata hai us jimmedari ko bakhubi nibhaye toh hamare desh mein ab dharm se bhi mat nahi toh accha saman sabse smart manch aadhaar card paida ho jayegi

लेकिन वास्तव में यह जाने की आवश्यकता है इस धर्म क्या है धर्म का मतलब है धारण करना आप किसी

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

1:40
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इस देश में धर्म के लिए जीना अच्छा है अगर मुक्त बंद कर देखिए आपने जिस भी धर्म के माता-पिता की है जन्म लिया तो उस धर्म को आप फॉलो करिए और दूसरे जो धर्म के लोग हैं उन सब का भी सम्मान के लिए उनके धर्मों का सम्मान करते हैं बस इतना करना है और देश के लिए यही काफी है बाकी कट्टरता किसी भी धर्म की हो वह तो सितारे नहीं होगी क्योंकि हमारा धर्मनिरपेक्ष देश है सभी धर्मों को यहां आकर मिलता है सभी धर्मों को यहां प्रेम मिलता है इसलिए नहीं बनना है अपने धर्म को अपने-अपने जो धर्म है उसको पालन करना है उसके लिए प्रिवाज जो है उसने अपने इष्ट देव को पालन करना है और धर्म ने दो बातें अगर आता है तो हम उसको फॉलो करते हैं बाकी जो धर्म कोई नहीं होता है क्योंकि जो धर्म में जन्म लिया तो शंका ठंडाई कहलाता है वह मन करता है बाकी सबसे अच्छा धर्म इंसानियत का धर्म है चाहे किसी का भी जो भी शर्मा इंसानियत कभी नहीं झुकना चाहिए क्योंकि कभी हमें खून की जरूरत पड़ती है तो खून से लिखा नहीं होता है किसी धर्म का नाम नहीं लिखा होता है खून खून होता है इसलिए हमें इंसानियत कदर कभी नहीं भूलना धन्यवाद

is desh mein dharm ke liye jeena accha hai agar mukt band kar dekhiye aapne jis bhi dharm ke mata pita ki hai janam liya toh us dharm ko aap follow kariye aur dusre jo dharm ke log hain un sab ka bhi sammaan ke liye unke dharmon ka sammaan karte hain bus itna karna hai aur desh ke liye yahi kaafi hai baki kattartaa kisi bhi dharm ki ho vaah toh sitare nahi hogi kyonki hamara dharmanirapeksh desh hai sabhi dharmon ko yahan aakar milta hai sabhi dharmon ko yahan prem milta hai isliye nahi banna hai apne dharm ko apne apne jo dharm hai usko palan karna hai uske liye privaj jo hai usne apne isht dev ko palan karna hai aur dharm ne do batein agar aata hai toh hum usko follow karte hain baki jo dharm koi nahi hota hai kyonki jo dharm mein janam liya toh shanka thandai kehlata hai vaah man karta hai baki sabse accha dharm insaniyat ka dharm hai chahen kisi ka bhi jo bhi sharma insaniyat kabhi nahi jhukna chahiye kyonki kabhi hamein khoon ki zarurat padti hai toh khoon se likha nahi hota hai kisi dharm ka naam nahi likha hota hai khoon khoon hota hai isliye hamein insaniyat kadar kabhi nahi bhoolna dhanyavad

इस देश में धर्म के लिए जीना अच्छा है अगर मुक्त बंद कर देखिए आपने जिस भी धर्म के माता-पिता

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SUSHIL LAKRA

Politician

0:56
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

दशा है गोचर आना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए क्योंकि हम ना हम कितना भी काम आएंगे फिर से उसका में कभी शांति माहौल से जी नहीं पाएगा जब तक अपनी आंखों में शांति नहीं रहेगा पैसा सब कुछ नहीं है जितना की बिल्डिंग रहेगा रहेगा उसके पास पैसा है बंद है वह कमजोर को मारेगा कमजोर को सताएगा धाम का है इसलिए क्रिश्चन लोगों को शांति देता है वह अपने जो ऊपर वाले से दुआ करते हैं अपने परिवार के लिए प्रार्थना करता है और उसके लिए भी करता है देश के लिए भी करता है आशा करते हैं

dasha hai gochar aana chahiye kya nahi karna chahiye kyonki hum na hum kitna bhi kaam aayenge phir se uska mein kabhi shanti maahaul se ji nahi payega jab tak apni aankho mein shanti nahi rahega paisa sab kuch nahi hai jitna ki building rahega rahega uske paas paisa hai band hai wah kamjor ko marenge kamjor ko sataega dham ka hai isliye christian logo ko shanti deta hai wah apne jo upar wale se dua karte hain apne parivar ke liye prarthna karta hai aur uske liye bhi karta hai desh ke liye bhi karta hai asha karte hain

दशा है गोचर आना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए क्योंकि हम ना हम कितना भी काम आएंगे फिर से उसका

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

1:59
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मेरी मित्र यहां पर नहीं है अच्छी तरह से कहना चाहूंगा बड़े स्टोर इन शब्दों में ही कहना चाहूंगा धर्म एक साधन है जो जनता के विचारों के साथ में रख धारण किया जाता है उसका पालन के संदर्भ में अब देश भक्ति से बढ़कर कोई धर्म नहीं है इससे तो यह भारत में तो होना ही चाहिए कोई भी धर्म कोई भी जाती कोई भी पद देश से बढ़कर के नहीं हो सकता है जो दारु देश के प्रति भक्ति भाव जागृत करे वही धर्म है और हम भारतीयों के लिए इन राजनीतिक योग के द्वारा यह धर्म की कट्टरता जाति वालों की कट्टरता इन राजनीतिज्ञों के द्वारा फैलाई हुई है यह गंदी राजनीति का एक भाग बन चुके हैं भारत देश में पहले सभी धर्मावलंबियों आपके साथ नहीं रहती थी सब मिल जुल मिलकर कर लेते थे कि भारत की संस्कृति का दर्शा की संस्कृति है रमन भाई वादी है किंतु दुर्भाग्यवश हो गया है कि देश में धर्म जाति के खेल में बन गए हैं उनके आधार पर इस देश में बहुत सारी रोज की समस्याएं उत्पन्न होती है तो धर्म के लिए जीना नहीं है धर्म से मुक्त कर दीजिए हां राष्ट्रवादी और शंकर के लिए देश के लिए निष्ठा बड़ी आवश्यक है देश से बड़ा देश की उन्नति से बढ़कर कोई धर्म नहीं है देश के प्रति निष्ठा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है देश के प्रति विचार समर्पित भाव प्याज से बढ़कर कोई धर्म नहीं है देश की देश भक्ति सबसे बड़ा धर्म है और कोशिका में पालन करना चाहिए

meri mitra yahan par nahi hai achi tarah se kehna chahunga bade store in shabdon mein hi kehna chahunga dharm ek sadhan hai jo janta ke vicharon ke saath mein rakh dharan kiya jata hai uska palan ke sandarbh mein ab desh bhakti se badhkar koi dharm nahi hai isse toh yah bharat mein toh hona hi chahiye koi bhi dharm koi bhi jaati koi bhi pad desh se badhkar ke nahi ho sakta hai jo daaru desh ke prati bhakti bhav jagrit kare wahi dharm hai aur hum bharatiyon ke liye in raajnitik yog ke dwara yah dharm ki kattartaa jati walon ki kattartaa in rajaneetigyon ke dwara failai hui hai yah gandi raajneeti ka ek bhag ban chuke hain bharat desh mein pehle sabhi dharmavalambiyon aapke saath nahi rehti thi sab mil jul milkar kar lete the ki bharat ki sanskriti ka darsha ki sanskriti hai raman bhai wadi hai kintu durbhaagyavash ho gaya hai ki desh mein dharm jati ke khel mein ban gaye hain unke aadhaar par is desh mein bahut saree roj ki samasyaen utpann hoti hai toh dharm ke liye jeena nahi hai dharm se mukt kar dijiye haan rashtrawadi aur shankar ke liye desh ke liye nishtha badi aavashyak hai desh se bada desh ki unnati se badhkar koi dharm nahi hai desh ke prati nishtha se badhkar koi dharm nahi hai desh ke prati vichar samarpit bhav pyaaz se badhkar koi dharm nahi hai desh ki desh bhakti sabse bada dharm hai aur koshika mein palan karna chahiye

मेरी मित्र यहां पर नहीं है अच्छी तरह से कहना चाहूंगा बड़े स्टोर इन शब्दों में ही कहना चाहू

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Vivek Shukla

Life coach

2:05
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

एक मित्र धर्म जो होता है वह आंतरिक नियंत्रण होता है मनुष्य को भगवान के नाम पर यह उस ईश्वर या फिर उस ऊपर वाले के नाम पर कंट्रोल किया जाता है कि यदि वह गलत कर्म करेगा फिर लोगों को हानि पहुंचाई जाए या फिर अपनी स्वतंत्रता से अधिक ऊपर किसी अन्य के स्वतंत्रता में हस्तक्षेप पहुंचाता है ऊपर वाले की दर से या फिर ऊपर उसे जाकर की पूरी तरह से कंट्रोल होता है या फिर अपने आप बलात्कारियों से बचता है या फिर गलत कार्य करने से या फिर हर चीज को पूरी तरह से सामान्य पूरी तरह से सोचता रहता है यह प्रकार से अंतर आंतरिक नियंत्रण कहा जाता है समाजशास्त्र में इसको बताया गया है कि समाजशास्त्र में इसको पूरी तरह से वर्णित लेकिन यह धर्म के लोग जमाने इसे बहुत बड़ा छूट जाता है कि कोई चीज का एक फायदा है तो नुकसान भी होता है तो यह जो नुकसान इसका बहुत ही ज्यादा है आंतरिक नियंत्रण है इससे काफी हद तक लोग इससे भी बहुत ज्यादा माने नियंत्रण नियंत्रित होते हैं लेकिन जहां तक है धर्म मुक्त भी नहीं कर सकते कि मित्र क्योंकि घर मुक्त हो भी गया तो जो लोग को का नियंत्रण की खत्म हो जाएगा और धर्म रहता भी है तभी यह प्रॉब्लम है क्योंकि जहां तक है यह धर्म कर रहता है तो लोग इससे दंगे इसलिए गृह युद्ध हमेशा को का संभावना बनी थी लेकिन लोग अपनी जाति धर्म को लेकर हमेशा एक दूसरे के प्रति बंदी बनाए जाते हैं और प्रतिस्पर्धा हमेशा बनी रहती कि दूसरे के साथ माने विच्छेद एक दूसरे को हमेशा परेशान है फिर एक-दूसरे को नीचा या फिर कम करनी है खत्म करने में लगे रहते अच्छा भी है और बुरा भी लेकिन लोगों में यह जागरूकता आ जाए कि धर्म सिर्फ माने आंतरिक नियंत्रण तक रह जाए इस जातिवाद से लोग थोड़ी सोच ऊपर लाएं तू जहां तक होगा कि मैंने देश का विकास जरूर होगा और जहां तक मैं कहूंगा किधर मुक्त नहीं होना चाहिए क्योंकि धर्म तो हो जाने पर लोगों के अंदर मानसिकता से नियंत्रण खत्म हो जाएगा और वह कानून रूप से नियंत्रित नहीं किया सकते क्योंकि धर्म बहुत ही ज्यादा नियंत्रण करता है आंतरिक सेव के बाद फ्रेंड

ek mitra dharm jo hota hai vaah aantarik niyantran hota hai manushya ko bhagwan ke naam par yah us ishwar ya phir us upar waale ke naam par control kiya jata hai ki yadi vaah galat karm karega phir logo ko hani pahunchai jaaye ya phir apni swatantrata se adhik upar kisi anya ke swatantrata mein hastakshep pohchta hai upar waale ki dar se ya phir upar use jaakar ki puri tarah se control hota hai ya phir apne aap balatkariyon se bachta hai ya phir galat karya karne se ya phir har cheez ko puri tarah se samanya puri tarah se sochta rehta hai yah prakar se antar aantarik niyantran kaha jata hai samajshastra mein isko bataya gaya hai ki samajshastra mein isko puri tarah se varnit lekin yah dharm ke log jamane ise bahut bada chhut jata hai ki koi cheez ka ek fayda hai toh nuksan bhi hota hai toh yah jo nuksan iska bahut hi zyada hai aantarik niyantran hai isse kaafi had tak log isse bhi bahut zyada maane niyantran niyantrit hote hain lekin jaha tak hai dharm mukt bhi nahi kar sakte ki mitra kyonki ghar mukt ho bhi gaya toh jo log ko ka niyantran ki khatam ho jaega aur dharm rehta bhi hai tabhi yah problem hai kyonki jaha tak hai yah dharm kar rehta hai toh log isse dange isliye grah yudh hamesha ko ka sambhavna bani thi lekin log apni jati dharm ko lekar hamesha ek dusre ke prati bandi banaye jaate hain aur pratispardha hamesha bani rehti ki dusre ke saath maane vichched ek dusre ko hamesha pareshan hai phir ek dusre ko nicha ya phir kam karni hai khatam karne mein lage rehte accha bhi hai aur bura bhi lekin logo mein yah jagrukta aa jaaye ki dharm sirf maane aantarik niyantran tak reh jaaye is jaatiwad se log thodi soch upar laye tu jaha tak hoga ki maine desh ka vikas zaroor hoga aur jaha tak main kahunga kidhar mukt nahi hona chahiye kyonki dharm toh ho jaane par logo ke andar mansikta se niyantran khatam ho jaega aur vaah kanoon roop se niyantrit nahi kiya sakte kyonki dharm bahut hi zyada niyantran karta hai aantarik save ke baad friend

एक मित्र धर्म जो होता है वह आंतरिक नियंत्रण होता है मनुष्य को भगवान के नाम पर यह उस ईश्वर

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Dr. Swatantra Jain

Psychotherapist, Family & Career Counsellor and Parenting & Life Coach

3:42
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है देश में धर्म के लिए जीना चाहिए धर्म मुक्त बनकर धर्म के लिए जीना अच्छा है धर्म को आप क्या समझते हैं इस पर निर्भर करता है धर्म को अगर आप कोई एक संप्रदाय या पूजा का ढंग समझते क्या कोई खास तरीके से जीना समझते हैं तो वह धर्म नहीं है धर्म का मतलब है मान्यता वैल्यू क्या था जीना अगर उसको धर्म समझते हो राष्ट्रपति वैल्यू मिठाई खा लेना सही कंप्रेशन के मानव को मानव समझकर बराबर समझ कर किसी को छोटा बड़ा नहीं समझ कर किसी भी आधार पर किसी से कोई भेदभाव नहीं करते किसी भी धर्म का आधार हो जाए व संप्रदाय के आधार भाषा का जाति पाति को छोटे बड़े का हो अमीर गरीब गांव से ऊपर उठकर सब मानव को समान समझकर बराबर समझ कर अपने जैसा समझ कर उसको सम्मान करते हो उससे उसी की रक्षा के लिए जीते हो तो फिर ऐसे धर्म के लिए जीना अच्छा है और ऐसे धर्म से मुक्त नहीं होना चाहिए मतलब करुणामाई बनकर जीने से मुक्त नहीं होना चाहिए और जैसे हिंदुस्तान में चल रहा है कोई मुस्लिम है कोई हिंदू है कोई तो पिक है कोई ऐसा ही है और वह अपने अपने धर्म के लिए इतने कट्टर है कि दूसरे धर्म के लोगों को बर्दाश्त नहीं करते दूसरे धर्म के लोगों की बातें उनका रहन-सहन उनके तौर-तरीके उनको पसंद नहीं आते उन से ही नफरत करते हैं तो ऐसे धर्म के लिए जीना कोई जीना नहीं है मैं नहीं समझती ऐसे धर्म के लिए जीना कोई अच्छा अच्छी बात है यह और यह धर्म के रूप में मानवीय संबंधों में और देश के संबंध में राष्ट्र के संबंध में समाज में कड़वाहट पैदा करते हैं तो इस कड़वाहट से बचना चाहिए और बचाना चाहिए तुम मुझे लगता है आपके प्रश्न का उत्तर आपको मिल गया है कि धर्म को बहुत संकीर्ण रूप से ना देख कर बहुत विस्तृत रूप से देखो विस्तार करो अपने धर्म का और एक विशेष धर्म को छोड़कर उसको मान्यता के धर्म मानवता मानवीय रिश्तो में करुणामई रिश्तो में धर्म को ढूंढो और इसी रूप में देवता नहीं करें

aapka prashna hai desh mein dharm ke liye jeena chahiye dharm mukt bankar dharm ke liye jeena accha hai dharm ko aap kya samajhte hain is par nirbhar karta hai dharm ko agar aap koi ek sampraday ya puja ka dhang samajhte kya koi khaas tarike se jeena samajhte hain toh vaah dharm nahi hai dharm ka matlab hai manyata value kya tha jeena agar usko dharm samajhte ho rashtrapati value mithai kha lena sahi compression ke manav ko manav samajhkar barabar samajh kar kisi ko chota bada nahi samajh kar kisi bhi aadhar par kisi se koi bhedbhav nahi karte kisi bhi dharm ka aadhar ho jaaye va sampraday ke aadhar bhasha ka jati pati ko chote bade ka ho amir garib gaon se upar uthakar sab manav ko saman samajhkar barabar samajh kar apne jaisa samajh kar usko sammaan karte ho usse usi ki raksha ke liye jeete ho toh phir aise dharm ke liye jeena accha hai aur aise dharm se mukt nahi hona chahiye matlab karunamai bankar jeene se mukt nahi hona chahiye aur jaise Hindustan mein chal raha hai koi muslim hai koi hindu hai koi toh pic hai koi aisa hi hai aur vaah apne apne dharm ke liye itne kattar hai ki dusre dharm ke logo ko bardaasht nahi karte dusre dharm ke logo ki batein unka rahan sahan unke taur tarike unko pasand nahi aate un se hi nafrat karte hain toh aise dharm ke liye jeena koi jeena nahi hai nahi samajhti aise dharm ke liye jeena koi accha achi baat hai yah aur yah dharm ke roop mein manviya sambandhon mein aur desh ke sambandh mein rashtra ke sambandh mein samaj mein kadawahat paida karte hain toh is kadawahat se bachna chahiye aur bachaana chahiye tum mujhe lagta hai aapke prashna ka uttar aapko mil gaya hai ki dharm ko bahut sankirn roop se na dekh kar bahut vistrit roop se dekho vistaar karo apne dharm ka aur ek vishesh dharm ko chhodkar usko manyata ke dharm manavta manviya rishto mein karunamai rishto mein dharm ko dhundho aur isi roop mein devta nahi karen

आपका प्रश्न है देश में धर्म के लिए जीना चाहिए धर्म मुक्त बनकर धर्म के लिए जीना अच्छा है धर

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Kr Wahid Ali

Journalist

0:48
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नहीं धर्म के लिए जीना और वह बिल्कुल अलग पहलू है आप अपने धर्म को मानिए और दूसरों के धर्म का सम्मान करिए यही जिंदगी है और यही हमारे देश की खूबसूरती है कि ऐसा नहीं है कि आप धर्म को छोड़ दें और धर्म को छोड़कर इस जीवन को चाहिए क्योंकि हो सकता है भटक जाए तो कोई भी धर्म हो हिंदू मुसलमान सिख इसाई ताले धर्म है और अपने धर्म को और कोई मानता है तो वह फिर जो है हर तरीके से हर मुसीबत से वो निकल सकता है सिवाय छोड़कर स्टैंडर्ड उसके अंदर जो में कट्टरता नहीं होनी चाहिए किसी भी धर्म के आदमी में कटता नहीं होने चाहिए दूसरे धर्म का सम्मान उसके अंदर जरूर होना चाहिए

nahi dharm ke liye jeena aur vaah bilkul alag pahaloo hai aap apne dharm ko maniye aur dusro ke dharm ka sammaan kariye yahi zindagi hai aur yahi hamare desh ki khoobsoorti hai ki aisa nahi hai ki aap dharm ko chod de aur dharm ko chhodkar is jeevan ko chahiye kyonki ho sakta hai bhatak jaaye toh koi bhi dharm ho hindu musalman sikh isai tale dharm hai aur apne dharm ko aur koi maanta hai toh vaah phir jo hai har tarike se har musibat se vo nikal sakta hai shivaay chhodkar standard uske andar jo mein kattartaa nahi honi chahiye kisi bhi dharm ke aadmi mein katata nahi hone chahiye dusre dharm ka sammaan uske andar zaroor hona chahiye

नहीं धर्म के लिए जीना और वह बिल्कुल अलग पहलू है आप अपने धर्म को मानिए और दूसरों के धर्म का

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Mohammad Sartaj Alam

Journalist & Author

0:36
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देश में धर्म के लिए जीना अच्छा है या धर्म मुक्त बनकर नमस्कार मैं हूं सरताज आपके सवाल का जवाब देने के लिए हाजिर हूं आपके इस प्रश्न का जवाब साफ सुथरा है कि यदि याद धर्म मुक्त होकर जीना चाहेंगे तो आप पर वामपंथी होने का ठप्पा लग जाएगा यदि आप धार्मिक होकर जीना चाहेंगे तो आप पर मुल्ला या अस्त होने का ठप्पा लगा आप को डिसाइड करना है क्या आपको कैसे देना है धन्यवाद

desh me dharm ke liye jeena accha hai ya dharm mukt bankar namaskar main hoon sartaj aapke sawaal ka jawab dene ke liye haazir hoon aapke is prashna ka jawab saaf suthara hai ki yadi yaad dharm mukt hokar jeena chahenge toh aap par vampanthi hone ka thappa lag jaega yadi aap dharmik hokar jeena chahenge toh aap par mulla ya ast hone ka thappa laga aap ko decide karna hai kya aapko kaise dena hai dhanyavad

देश में धर्म के लिए जीना अच्छा है या धर्म मुक्त बनकर नमस्कार मैं हूं सरताज आपके सवाल का ज

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Pankaj Sharma

Journalist | Advocate

1:24
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इस देश भले ही किसी भी देश में धर्म के लिए ही जीना आवश्यक होता है और प्रत्येक व्यक्ति को धर्म के लिए ही जीना चाहिए जब कोई व्यक्ति धर्म से मुक्त होकर जीना चाहेगा या धर्म मुक्त होकर जिएगा अधर्मी हो जाएगा पाप और पुण्य से दूर चला जाएगा भले और बुरे कर्मों से दूर चला जाएगा वह फिर इतने बुरे रास्ते पर चला जाएगा अच्छे बुरे की सोच कि खत्म हो जाएगी फिर बुरे से बुरा काम करते हुए भी है नहीं लगेगा उसका इतना बड़ा बुरा और खराब प्रणाम आएगा कि पूरे देश पूरे विश्व में अराजकता जैसी स्थिति हो जाएगी इसलिए आदमी को धर के साथ धर्म में बंद कर ही जीना चाहिए किसी भी देश का नागरिक क्यों ना हो किसी भी धर्म को मानने वाला को लाहौर लेकिन उसे धर्म के साथ ही रहना चाहिए ताकि कोई बुरी और खराब बातें उसके ख्याल में ना आएं यही मेरा सभी लोगों से अनुरोध है

is desh bhale hi kisi bhi desh me dharm ke liye hi jeena aavashyak hota hai aur pratyek vyakti ko dharm ke liye hi jeena chahiye jab koi vyakti dharm se mukt hokar jeena chahega ya dharm mukt hokar dijiyega adharmee ho jaega paap aur punya se dur chala jaega bhale aur bure karmon se dur chala jaega vaah phir itne bure raste par chala jaega acche bure ki soch ki khatam ho jayegi phir bure se bura kaam karte hue bhi hai nahi lagega uska itna bada bura aur kharab pranam aayega ki poore desh poore vishwa me arajkata jaisi sthiti ho jayegi isliye aadmi ko dhar ke saath dharm me band kar hi jeena chahiye kisi bhi desh ka nagarik kyon na ho kisi bhi dharm ko manne vala ko lahore lekin use dharm ke saath hi rehna chahiye taki koi buri aur kharab batein uske khayal me na aaen yahi mera sabhi logo se anurodh hai

इस देश भले ही किसी भी देश में धर्म के लिए ही जीना आवश्यक होता है और प्रत्येक व्यक्ति को धर

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Mehmood Alum

Law Student

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देखिए हमारा देश एक धर्मनिरपेक्ष देश है धर्मनिरपेक्ष देश का अर्थ यह होता है कि शासन किसी धर्म में के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा सभी धर्मों को समान रूप से ट्विट करेगा और सभी धर्मों को समान रूप से केयर करेगा तो इसका अर्थ यह होता है साथ ही रही बात धर्म के साथ जीना अच्छा है या धर्म तो यह पार्टिकुलरली उस इंसान पर निर्भर करता है कि वह किस धर्म को अपना आता है या धर्म को अपना था ही नहीं है हमारे देश के संविधान के अनुसार इसकी पूरी छूट प्रदान की गई है संविधान के अनुच्छेद 25 में लिखा है कि अंतः करण की स्वतंत्रता यानी कोई भी व्यक्ति किसी धर्म को मान सकता है या चाहे तो बिना धर्म के भी रह सकता है

dekhie hamara desh ek dharmanirapeksh desh hai dharmanirapeksh desh ka arth yeh hota hai ki shasan kisi dharm mein ke mamlon mein hastakshep nahi karega sabhi dharmon ko saman roop se tweet karega aur sabhi dharmon ko saman roop se care karega toh iska arth yeh hota hai saath hi rahi baat dharm ke saath jeena accha hai ya dharm toh yeh particularly us insaan par nirbhar karta hai ki wah kis dharm ko apna aata hai ya dharm ko apna tha hi nahi hai hamare desh ke samvidhan ke anusaar iski puri chhut pradan ki gayi hai samvidhan ke anuched 25 mein likha hai ki antah karan ki swatantrata yani koi bhi vyakti kisi dharm ko maan sakta hai ya chahe toh bina dharm ke bhi reh sakta hai

देखिए हमारा देश एक धर्मनिरपेक्ष देश है धर्मनिरपेक्ष देश का अर्थ यह होता है कि शासन किसी धर

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Neeraj Shukla

Philosopher || Avid Reader.

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लेकिन मैं तो मानता हूं कि हमें धर्म मुक्त होकर इंसानियत एक इंसान धर्म के लिए जीना चाहिए और सदैव इंसानियत के लिए कार्य करना पड़े तो मुझे लगता है कि हम थोड़ी सांप्रदायिक से हो जाते हैं लेकिन हमें धर्मों को सूरत ना ऐसा नहीं हम धर्म के साथ ना रहे लेकिन हमें जो इंसानियत का धर्म है उसको फॉलो करना चाहिए इंसान बनकर ही रहना चाहिए

lekin main toh manata hoon ki hamein dharm mukt hokar insaniyat ek insaan dharm ke liye jeena chahiye aur sadaiv insaniyat ke liye karya karna pade toh mujhe lagta hai ki hum thodi sampradayik se ho jaate hain lekin hamein dharmon ko surat na aisa nahi hum dharm ke saath na rahe lekin hamein jo insaniyat ka dharm hai usko follow karna chahiye insaan bankar hi rehna chahiye

लेकिन मैं तो मानता हूं कि हमें धर्म मुक्त होकर इंसानियत एक इंसान धर्म के लिए जीना चाहिए और

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Ramandeep Singh

Waheguru industry

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आपका सवाल है इस देश में धर्म के लिए जीना अच्छा है या धर्म मुक्त होकर तो यह आपके ऊपर तो एक रास्ता है और अगर आप धार्मिक हो तो रास्ता सेम ही हैं धर्म स्वयं ही है और कोई भी इंसान धार्मिक है ईश्वर तक का उसका लक्ष्य है जो धर्म है उसके पास में धर्म है या निराकार है और मेरे में लक्ष्य को जब ईश्वर की प्राप्ति होगी तब बोलेंगे फिर हम जैसे जैसे आगे बढ़ते चले जाएंगे दीपक के समान है जो अंधेरे में हमको रोशनी दे रहा है लेकिन अगर हम दीपक गले के अंधेरा बहुत था हमने दीपक जलाया दीपक की रोशनी से अंधेरा जगह पर दूर हो गया हम बैठे हैं लेकिन जब सूरज आ गया परमात्मा ईश्वर आ गया और हम उसको दीपक दिखाएं तो फिर सर का बोझ है धर्म रास्ता है और आता जब तक पहुंचा देगा तो धर्म को छोड़ना पड़ेगा धन्यवाद

aapka sawaal hai is desh me dharm ke liye jeena accha hai ya dharm mukt hokar toh yah aapke upar toh ek rasta hai aur agar aap dharmik ho toh rasta same hi hain dharm swayam hi hai aur koi bhi insaan dharmik hai ishwar tak ka uska lakshya hai jo dharm hai uske paas me dharm hai ya nirakaar hai aur mere me lakshya ko jab ishwar ki prapti hogi tab bolenge phir hum jaise jaise aage badhte chale jaenge deepak ke saman hai jo andhere me hamko roshni de raha hai lekin agar hum deepak gale ke andhera bahut tha humne deepak jalaya deepak ki roshni se andhera jagah par dur ho gaya hum baithe hain lekin jab suraj aa gaya paramatma ishwar aa gaya aur hum usko deepak dikhaen toh phir sir ka bojh hai dharm rasta hai aur aata jab tak pohcha dega toh dharm ko chhodna padega dhanyavad

आपका सवाल है इस देश में धर्म के लिए जीना अच्छा है या धर्म मुक्त होकर तो यह आपके ऊपर तो एक

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Amit Kumar

Motivational Spiker,youtube Kriyeter,professional Advisers (For Carrier Network Marketing , Fitness, Health) And Blogger

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

धर्म से मुक्त होकर तो कोई भी नहीं करता क्योंकि घर में जो एक कर्म के पश्चात यह शक्तियां प्राप्त कर्म के माध्यम से कुछ प्राप्त हुआ है उसके बाद ही जैतारण का निर्माण हुआ है और अगर हम रियलिस्टिक से प्रकृति से सूर्य चैनल पर आती सेक्स गोष्टी लेती हैं इस प्रकार 30 वर्ष प्राप्त करते हैं तो इस तरीके सृष्टि जो है कर्म के पास जाती जो भगवान के द्वारा लगने चाहिए कर्मों का ही फल है कि उनके माध्यम से फेसबुक पर बात करते हैं तो मिस कॉल करना पड़ेगी और अगर नहीं करेंगे तो आपकी नजरों में है हमें इस प्रकार का बात करना पड़ेगी कि हमने जो है अब तक तो है नहीं निभाई इस प्रकार से जो भी हम प्राप्त करते हैं विश्वास नहीं करता किसी से भी कोई पास नदनमादी करें लेकिन एक अच्छा मार गई चोर को प्राप्त करने का और अपने जीवन को श्रेष्ठ कर और उसकी अवस्था

dharm se mukt hokar toh koi bhi nahi karta kyonki ghar me jo ek karm ke pashchat yah shaktiyan prapt karm ke madhyam se kuch prapt hua hai uske baad hi jaitaran ka nirmaan hua hai aur agar hum realistic se prakriti se surya channel par aati sex goshti leti hain is prakar 30 varsh prapt karte hain toh is tarike shrishti jo hai karm ke paas jaati jo bhagwan ke dwara lagne chahiye karmon ka hi fal hai ki unke madhyam se facebook par baat karte hain toh miss call karna padegi aur agar nahi karenge toh aapki nazro me hai hamein is prakar ka baat karna padegi ki humne jo hai ab tak toh hai nahi nibhaai is prakar se jo bhi hum prapt karte hain vishwas nahi karta kisi se bhi koi paas nadanamadi kare lekin ek accha maar gayi chor ko prapt karne ka aur apne jeevan ko shreshtha kar aur uski avastha

धर्म से मुक्त होकर तो कोई भी नहीं करता क्योंकि घर में जो एक कर्म के पश्चात यह शक्तियां प्र

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