क्या आप जाति-धर्म की जंजीरों से मुक्त हैं?...


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N. K. SINGH 'Nitesh'

Educator, Life Coach, Writer and Expert in British English Language, Author of Book/Fiction Lucky Girl (Love vs Marriage)

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जी नहीं बिल्कुल नहीं कर सकता मैं कि मैं जाकर जान की जंजीरों से मुक्त हूं हां इतना जरूर कह सकता हूं कि मैं तुम्हें अपनी जाति की कट्टर हूं ना मैं अपने धर्म के प्रति कट्टर हूं कोई व्यक्ति किसी जाति से आता है तो उसका अपनी जाति के प्रति थोड़ा बहुत आता है 2 जातियों के लोग आते हैं तो वहां कई बार ऐसा होता है मन में आता है कि अमुक व्यक्ति हमारी जाति का है हमारी बिरादरी का है और उसके लिए शुभा को थोड़ा सा झुका हो जाता है लेकिन जब न्याय की बात आती है कोई सत्ता की बात आती है तो वैसे मैं एक बुद्धिजीवी व्यक्ति सब की तरफ से झुकता हुआ दिखता है न्याय की तरह की जीता हुआ और मैं भी वैसा ही करता हूं मैं तो नहीं हूं लेकिन जब भी मेरे सामने इस तरह की कोई बात आती है तो मैं वहां देखता हूं कि सही क्या है और गलत क्या है सही और गलत देखने के टाइम में किसी जाति और धर्म की चिंता नहीं करता बड़ा धर्म की बात तो मैं अपने धर्म को लेकर के सजग हो और मुझे अपने धर्म में रूचि है मैं अपने धर्म को पसंद करता हूं अपने धर्म के प्रति मुझे गर्व है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरे धर्मों को लेकर के मस्तिष्क नहीं हो और दूसरे धर्म के लोगों का मैं आदत नहीं करता दूसरे धर्मों के लोगों के लिए भी मेरे मन में उतना ही आदर है जितना कि मुझे अपने धर्म के लोगों को है और किसी सामने वाले व्यक्ति को किसी तरह की कोई दिक्कत आती है तो मैं मदद करना भी वहां अपना समझता हूं तो इस तरह से बिल्कुल ही नहीं कर सकता कि मैं अपनी जाति और धर्म की जंजीरों से बिल्कुल मुफ्त इतना जरूर कह सकता हूं कि मैं सभी जातियों और सभी धर्म के प्रति और अपनी जाति और धर्म को लेकर के मैं करता नहीं

ji nahi bilkul nahi kar sakta main ki main jaakar jaan ki janjiron se mukt hoon haan itna zaroor keh sakta hoon ki main tumhe apni jati ki kattar hoon na main apne dharm ke prati kattar hoon koi vyakti kisi jati se aata hai toh uska apni jati ke prati thoda bahut aata hai 2 jaatiyo ke log aate hain toh wahan kai baar aisa hota hai man mein aata hai ki amuk vyakti hamari jati ka hai hamari biradari ka hai aur uske liye shubha ko thoda sa jhuka ho jata hai lekin jab nyay ki baat aati hai koi satta ki baat aati hai toh waise main ek buddhijeevi vyakti sab ki taraf se jhukta hua dikhta hai nyay ki tarah ki jita hua aur main bhi waisa hi karta hoon main toh nahi hoon lekin jab bhi mere saamne is tarah ki koi baat aati hai toh main wahan dekhta hoon ki sahi kya hai aur galat kya hai sahi aur galat dekhne ke time mein kisi jati aur dharm ki chinta nahi karta bada dharm ki baat toh main apne dharm ko lekar ke sajag ho aur mujhe apne dharm mein ruchi hai apne dharm ko pasand karta hoon apne dharm ke prati mujhe garv hai lekin iska matlab yah nahi hai ki dusre dharmon ko lekar ke mastishk nahi ho aur dusre dharm ke logo ka main aadat nahi karta dusre dharmon ke logo ke liye bhi mere man mein utana hi aadar hai jitna ki mujhe apne dharm ke logo ko hai aur kisi saamne waale vyakti ko kisi tarah ki koi dikkat aati hai toh main madad karna bhi wahan apna samajhata hoon toh is tarah se bilkul hi nahi kar sakta ki main apni jati aur dharm ki janjiron se bilkul muft itna zaroor keh sakta hoon ki main sabhi jaatiyo aur sabhi dharm ke prati aur apni jati aur dharm ko lekar ke main karta nahi

जी नहीं बिल्कुल नहीं कर सकता मैं कि मैं जाकर जान की जंजीरों से मुक्त हूं हां इतना जरूर कह

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Pandit Prem

शायर, पुस्तक संपादक

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नमस्कार बंधु हां मैं जाति बंधन से बिल्कुल मुक्त धर्म बंधन से भी बिल्कुल मुफ्त हूं मुझे फिजूल के प्रोपेगंडा फिजूल के ऐसी चीज है जिससे देश पराया देश पराया लोग बैठे हुए लोग एक दूसरे से खड़ा करते हैं बिल्कुल ना पसंद है मैं इन सब से मुक्त हूं धन्यवाद

namaskar bandhu haan main jati bandhan se bilkul mukt dharm bandhan se bhi bilkul muft hoon mujhe fizool ke propaganda fizool ke aisi cheez hai jisse desh paraaya desh paraaya log baithe hue log ek dusre se khada karte hain bilkul na pasand hai in sab se mukt hoon dhanyavad

नमस्कार बंधु हां मैं जाति बंधन से बिल्कुल मुक्त धर्म बंधन से भी बिल्कुल मुफ्त हूं मुझे फिज

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Karan Janwa

Automobile Engineer

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मैं जाति के धर्म से तो मुक्त हूं लेकिन धर्म की जंजीरों से मुक्त नहीं हो मुझसे मेरा कोई धर्म छीन नहीं सकता है मुझे घर में बंद कर रहना ही पड़ेगा क्योंकि अगर मैं धर्म से मुक्त हो गया समय बिल्कुल सच हो जाऊंगा मैं अगर उनकी तरफ प्रवृत्त हो जाऊंगा तो मैं तो सभी इंसानों को एक समान मानता हूं लेकिन जो मेरा घर में है मेरा धर्म अर्थात मेरा सत्य मेरा अभिमान मेरा जाए मेरी पवित्रता है जो कुछ मेरे जितने अधिक से ईमानदारी नेक दिल मेरा धर्म है वह धर्म की जंजीरों से मुक्त नहीं होना चाहता हूं क्योंकि धर्म मुझे बंद करते मुझे हमेशा सही काम करने की प्रेरणा देता है कभी जातिवाद से मुक्त हों लेकिन धर्म से मुक्त नहीं हूं क्योंकि मेरा धर्म ही मुझे मुक्ति दिलाएगा

main jati ke dharm se toh mukt hoon lekin dharm ki janjiron se mukt nahi ho mujhse mera koi dharm cheen nahi sakta hai mujhe ghar mein band kar rehna hi padega kyonki agar main dharm se mukt ho gaya samay bilkul sach ho jaunga main agar unki taraf parvirt ho jaunga toh main toh sabhi insano ko ek saman manata hoon lekin jo mera ghar mein hai mera dharm arthat mera satya mera abhimaan mera jaaye meri pavitrata hai jo kuch mere jitne adhik se imaandaari neck dil mera dharm hai vaah dharm ki janjiron se mukt nahi hona chahta hoon kyonki dharm mujhe band karte mujhe hamesha sahi kaam karne ki prerna deta hai kabhi jaatiwad se mukt ho lekin dharm se mukt nahi hoon kyonki mera dharm hi mujhe mukti dilaega

मैं जाति के धर्म से तो मुक्त हूं लेकिन धर्म की जंजीरों से मुक्त नहीं हो मुझसे मेरा कोई धर्

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क्या जाति धर्म की जंजीरों से मुक्त से बिल्कुल सही है हमें जाति धर्म की जंजीरों से मुक्ति रहना चाहिए और बेवजह जाति धर्म की कट्टरता बंद में नहीं पड़ना चाहिए या अवश्य को वहीं उतना निभाना चाहिए बेवजह के हमें उसमें पढ़कर और यातना कट्टरवादी था क्या धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा नहीं देना चाहिए

kya jati dharm ki janjiron se mukt se bilkul sahi hai hamein jati dharm ki janjiron se mukti rehna chahiye aur bewajah jati dharm ki kattartaa band mein nahi padhna chahiye ya avashya ko wahi utana nibhana chahiye bewajah ke hamein usme padhakar aur yatana kattaravadi tha kya dharmik kattartaa ko badhawa nahi dena chahiye

क्या जाति धर्म की जंजीरों से मुक्त से बिल्कुल सही है हमें जाति धर्म की जंजीरों से मुक्ति र

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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क्या आपको जाति धर्म की जंजीरों से मुक्त है जी हां क्योंकि हम लोगों का मानना है कि हम जो भी जाति के हैं लेकिन सब जातियों का सम्मान करते हैं हम हिंदू हैं तो हम बाकी के जो हमारे अलावा जो हमारे धर्म दूसरे धर्म पालने वाले भाई बंधु है भाई तू कभी हम सम्मान करते उनके धर्म का सम्मान करते हैं धार्मिक जंजीरों से जकड़े हुए हैं और ना ही हम लोग जाति के चरणों से जाति के बंधनों से जकड़े हुए हैं हम सिर्फ अपने आप को भारतीय मानसून एक भारतीय होने के नाते हमें अवश्य साथ अधिकार दो मिले हुए हैं इस काम को जहां तक लगता रहता है और इन शब्दों से ही आपका दिन शुभ रहे

kya aapko jati dharm ki janjiron se mukt hai ji haan kyonki hum logo ka manana hai ki hum jo bhi jati ke hain lekin sab jaatiyo ka sammaan karte hain hum hindu hain toh hum baki ke jo hamare alava jo hamare dharm dusre dharm palne waale bhai bandhu hai bhai tu kabhi hum sammaan karte unke dharm ka sammaan karte hain dharmik janjiron se jakade hue hain aur na hi hum log jati ke charno se jati ke bandhanon se jakade hue hain hum sirf apne aap ko bharatiya monsoon ek bharatiya hone ke naate hamein avashya saath adhikaar do mile hue hain is kaam ko jaha tak lagta rehta hai aur in shabdon se hi aapka din shubha rahe

क्या आपको जाति धर्म की जंजीरों से मुक्त है जी हां क्योंकि हम लोगों का मानना है कि हम जो भ

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मैं एक लोहिया वादी समाजवादी विचारों को मानता हूं यह आज के बिहार और उत्तर प्रदेश की जो समाजवादी लोग हैं उस तरीके के नहीं किसी जमाने में डॉक्टर नेहरू के बराबर के कद के डॉक्टर राम मनोहर लोहिया जयप्रकाश नारायण यह सब हुआ करते थे तो मैं चुकी लोहिया वादी हूं और मैं लोहिया वादी होने के कारण जाति धर्म इन चीजों से बिल्कुल पूरी तरीके से मुक्त हो मैं जाति और धर्म में बिल्कुल विश्वास नहीं करता

main ek lohiya wadi samajwadi vicharon ko maanta hoon yah aaj ke bihar aur uttar pradesh ki jo samajwadi log hain us tarike ke nahi kisi jamane me doctor nehru ke barabar ke kad ke doctor ram manohar lohiya jayprakash narayan yah sab hua karte the toh main chuki lohiya wadi hoon aur main lohiya wadi hone ke karan jati dharm in chijon se bilkul puri tarike se mukt ho main jati aur dharm me bilkul vishwas nahi karta

मैं एक लोहिया वादी समाजवादी विचारों को मानता हूं यह आज के बिहार और उत्तर प्रदेश की जो स

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जाति धर्म की जंजीरों से तो सब लोग इन मुक्त नहीं हमारी सोच ही ऐसी है जिन लोगों की सोच ऐसी होती तो बोलो तो वैसा करते हैं इसलिए मैं भारत में काफी लोगों की सोच बदलनी चाहिए अगर मैं अगर मैं से सोचते हैं तो हमें भी आगे एडवाइज देनी चाहिए

jati dharm ki janjiron se toh sab log in mukt nahi hamari soch hi aisi hai jin logo ki soch aisi hoti toh bolo toh waisa karte hain isliye main bharat mein kaafi logo ki soch badalni chahiye agar main agar main se sochte hain toh hamein bhi aage edavaij deni chahiye

जाति धर्म की जंजीरों से तो सब लोग इन मुक्त नहीं हमारी सोच ही ऐसी है जिन लोगों की सोच ऐसी ह

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