पागल और मनोरोगी में क्या अंतर है?...


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Karishma

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पागल और मनोरोगी मैं बहुत फर्क यह है नहीं फर्क यह है कि पागल जो वर्ड है होटल मेडिकल नहीं है वह हम लोगों की सामाजिक लोकेलिटी से बनाई हुई 1 वर्ड और यह एक लैंग्वेज हो चुकी है कि जिसको हम मेडी के लिए आप अगर समझना चाहोगे तो फिर यह वर्ड आपको बहुत ही बेतुका लगेगा वह बहुत ही लगेगा कि पागल कोई ऐसे हो ही नहीं सकता है हर एक इंसान को अपनी कमजोरियों के बदौलत कुछ ना कुछ ऐसे ही दिमाग की बीमारी होती है या फिर अपने कुछ परिस्थितियों की वजह से वह नॉर्मल लाइफ नहीं जी पाता है तो कहीं ना कहीं शुरुआत एक अच्छे खासे इंसान से उसकी रूटीन उसकी जिंदगी के तनाव और उसकी मानसिक स्थिति उस तरीके से बन जाती है कि वह धीरे रॉकी तू उसकी पर्सनालिटी पूरी चेंज हो जाती है तो वैसे ही चली कोई पागल नहीं होता है पागल तो इंसान इंसानों ने बनाए हुए जिसको समझने के लिए आपको दिखावे पर आप जिसको आप बोलते हो ना कि जिस दिखावा पागल जैसा होता है आप उसको मनोरोगी ही बोल सकते हो मनोरोगी यह है कि जो दवाई के तू अपनी कंडीशन को कंट्रोल करने में और उसको मेडिकल हेल्प मिलती है तो वह धीरे धीरे धीरे धीरे करके वह अपनी कंडीशन में सुधार के आ सकता है और पागल वह कंडीशन है अब पागल तू बोलना भी नहीं चाहिए वह मानसिक स्थिति की कुछ ऐसी और दशा होती है जिसकी अकॉर्डिंग हो उसको खरे टाइम पर वह सारी फैसिलिटी वह सारी ट्रीटमेंट नहीं मिल पाई जाती है और उसकी केयर करने वाले हमारे जैसे इंसान नहीं मौजूद होते हैं जब कोई भी कानपुर कुछ भी ऐसे तनावग्रस्त परिस्थिति में आप आते हो या फिर मैं कुछ भी डिस्काउंट मिल जाता है तो वह पागल की कंडीशन तक पहुंच स्टाइल नहीं है इसे लोकल पब्लिक पागल बोलते हैं वह कैसी कंडीशन है जिसको ट्रीट करने के लिए बहुत टाइम निकल चुका होता है और उसकी कंडीशन इतनी खराब हो चुकी होती है कि वह अनट्रीटेबल और मनोरोगी यह भी होता है कि जब कोई मन आशिकी से ग्रस्त और उसकी रोटी और उसके जिंदगी पूरी तरीके से अस्त-व्यस्त हो चुकी होती है सेम जैसे आप बोलते हो अपनी भाषा में पागल तो वह दोनों एक ही है कोई उसको पागल बोलता है कोई अच्छी भाषा बोलता है पर सही है कि वह पागल पागल नहीं होता है पागल उसको बना दिया जाता है अच्छी ट्रीटमेंट के हाउस

Pagal aur manorogi main bahut fark yah hai nahi fark yah hai ki Pagal jo word hai hotel medical nahi hai vaah hum logo ki samajik lokeliti se banai hui 1 word aur yah ek language ho chuki hai ki jisko hum medi ke liye aap agar samajhna chahoge toh phir yah word aapko bahut hi betukaa lagega vaah bahut hi lagega ki Pagal koi aise ho hi nahi sakta hai har ek insaan ko apni kamzoriyo ke badaulat kuch na kuch aise hi dimag ki bimari hoti hai ya phir apne kuch paristhitiyon ki wajah se vaah normal life nahi ji pata hai toh kahin na kahin shuruat ek acche khase insaan se uski routine uski zindagi ke tanaav aur uski mansik sthiti us tarike se ban jaati hai ki vaah dhire rocky tu uski personality puri change ho jaati hai toh waise hi chali koi Pagal nahi hota hai Pagal toh insaan insano ne banaye hue jisko samjhne ke liye aapko dikhaave par aap jisko aap bolte ho na ki jis dikhawa Pagal jaisa hota hai aap usko manorogi hi bol sakte ho manorogi yah hai ki jo dawai ke tu apni condition ko control karne mein aur usko medical help milti hai toh vaah dhire dhire dhire dhire karke vaah apni condition mein sudhaar ke aa sakta hai aur Pagal vaah condition hai ab Pagal tu bolna bhi nahi chahiye vaah mansik sthiti ki kuch aisi aur dasha hoti hai jiski according ho usko khare time par vaah saree facility vaah saree treatment nahi mil payi jaati hai aur uski care karne waale hamare jaise insaan nahi maujud hote hain jab koi bhi kanpur kuch bhi aise tanaavgrast paristithi mein aap aate ho ya phir main kuch bhi discount mil jata hai toh vaah Pagal ki condition tak pohch style nahi hai ise local public Pagal bolte hain vaah kaisi condition hai jisko treat karne ke liye bahut time nikal chuka hota hai aur uski condition itni kharab ho chuki hoti hai ki vaah anatritebal aur manorogi yah bhi hota hai ki jab koi man aashiqui se grast aur uski roti aur uske zindagi puri tarike se ast vyast ho chuki hoti hai same jaise aap bolte ho apni bhasha mein Pagal toh vaah dono ek hi hai koi usko Pagal bolta hai koi achi bhasha bolta hai par sahi hai ki vaah Pagal Pagal nahi hota hai Pagal usko bana diya jata hai achi treatment ke house

पागल और मनोरोगी मैं बहुत फर्क यह है नहीं फर्क यह है कि पागल जो वर्ड है होटल मेडिकल नहीं है

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Gunjan

Junior Volunteer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पागल और मनोरोगी में अंतर की बात करें तो बेसिकली जो मनोरोग होता है तो आपके अगर और दिमाग में कोई किसी भी तरीके की कोई दिक्कत होती है कोई भी परेशानी होती है तो उसको जो है वह मनोरोगी आप बोला जाता है जिसमें कि आपका दिमाग अच्छी तरीके से रथ कौन नहीं करता है वह बहुत सारी चीजें को समझ नहीं पाता है और के कई तरीके के प्रकार होते हैं तो उसमें से जो है वह आप जो व्यक्ति जिसका कि आई क्यू लेवल कम होता है तो आमतौर पर उसको नॉर्मल जो भाषा है उसको पागल बोला जाता है उसी का ही एक प्रकार होता है

Pagal aur manorogi mein antar ki baat kare toh basically jo manorog hota hai toh aapke agar aur dimag mein koi kisi bhi tarike ki koi dikkat hoti hai koi bhi pareshani hoti hai toh usko jo hai vaah manorogi aap bola jata hai jisme ki aapka dimag achi tarike se rath kaun nahi karta hai vaah bahut saree cheezen ko samajh nahi pata hai aur ke kai tarike ke prakar hote hain toh usme se jo hai vaah aap jo vyakti jiska ki I kyu level kam hota hai toh aamtaur par usko normal jo bhasha hai usko Pagal bola jata hai usi ka hi ek prakar hota hai

पागल और मनोरोगी में अंतर की बात करें तो बेसिकली जो मनोरोग होता है तो आपके अगर और दिमाग में

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