क्या पुरुषों को भी कर्मक्षेत्र में शोषण का शिकार बनना पड़ता है यह महिलाओं पर होने वाली शोषण से कैसे अलग है?...


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Dr. Mahesh Mohan Jha

Asst. Professor,Astrologer,Author

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आपके प्रश्न के अनुसार आजकल पुरुष भी महिलाओं के द्वारा शोषित हो रहे क्योंकि भारत में जितने भी संविधान बने एक कानून बने हैं सब का उपयोग होता है तो दुरुपयोग होता और अधिकांश का दुरुपयोग होता है बहुत सी ऐसी महिलाएं जो पुरुषों पर बलात्कार छेड़खानी क्या कई ऐसे आरोप लगाकर के पुरुषों को कानून के द्वारा प्रताड़ित करने के लिए वह प्रयास करती है आजकल जितने भी बलात्कार से संबंधित केस होते हैं उसमें से 70% केस और सोता है गलत होता है तो जिस तरह sc-st कानून कहा ग्रुप की हो ऐसी एसटी के द्वारा किया जाता है डराने के लिए धमकाने के लिए उसी तरह महिलाओं को डराने के लिए धमकाने के लिए वह कई प्रकार से कानूनी उपयोग का सहारा देती है इसलिए रूपों का भी शोषण होता है धन्यवाद

aapke prashna ke anusaar aajkal purush bhi mahilaon ke dwara shoshit ho rahe kyonki bharat me jitne bhi samvidhan bane ek kanoon bane hain sab ka upyog hota hai toh durupyog hota aur adhikaansh ka durupyog hota hai bahut si aisi mahilaye jo purushon par balatkar chedkhani kya kai aise aarop lagakar ke purushon ko kanoon ke dwara pratarit karne ke liye vaah prayas karti hai aajkal jitne bhi balatkar se sambandhit case hote hain usme se 70 case aur sota hai galat hota hai toh jis tarah sc st kanoon kaha group ki ho aisi ST ke dwara kiya jata hai darane ke liye dhamakane ke liye usi tarah mahilaon ko darane ke liye dhamakane ke liye vaah kai prakar se kanooni upyog ka sahara deti hai isliye roopon ka bhi shoshan hota hai dhanyavad

आपके प्रश्न के अनुसार आजकल पुरुष भी महिलाओं के द्वारा शोषित हो रहे क्योंकि भारत में जितने

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Nikhil Ranjan

HoD - NIELIT

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कपड़ों को भी करूं सच में शोषण का शिकार बनना पड़ता है यहां पर होने वाले शोषण से कैसे अलग है देखे यहां पर बिल्कुल आज के डेट में अगर बात किया करो को भी यहां पर शोषण का शिकार होना होता है और सिर्फ सेक्सुअल एसॉल्ट की बात की जाए या उसके शोषण की बात किया था फिर वही तक नहीं मानसिक रूप से भी शोषण किया जाता है कई बार इस तरह के पास दे दिया ते हैं डेडलाइन देते हैं जो कि महिलाओं को मिशंस दे दी जाती है जबकि पुरुषों को वही टाइम है सोने का रेट एस पर करनी होती हैं तो इस तरह का पैसा भी हमको डाले जाते हैं और वह भी अकेले का शोषण होता है मैं शुभकामनाएं आपके साथ हैं धन्यवाद

kapdo ko bhi karu sach me shoshan ka shikaar banna padta hai yahan par hone waale shoshan se kaise alag hai dekhe yahan par bilkul aaj ke date me agar baat kiya karo ko bhi yahan par shoshan ka shikaar hona hota hai aur sirf sexual esalt ki baat ki jaaye ya uske shoshan ki baat kiya tha phir wahi tak nahi mansik roop se bhi shoshan kiya jata hai kai baar is tarah ke paas de diya te hain deadline dete hain jo ki mahilaon ko mishans de di jaati hai jabki purushon ko wahi time hai sone ka rate S par karni hoti hain toh is tarah ka paisa bhi hamko dale jaate hain aur vaah bhi akele ka shoshan hota hai main subhkamnaayain aapke saath hain dhanyavad

कपड़ों को भी करूं सच में शोषण का शिकार बनना पड़ता है यहां पर होने वाले शोषण से कैसे अलग है

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Pramod Kumar Singh

Motivator And Business

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Er Pankaj Rai

International Motivational speaker · Counsellor · Writer. Trainer

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Neelam Chauhan

Yoga Teacher

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नमः शिवाय आपका प्रश्न है क्या पुरुषों को भी कार्य क्षेत्र में शोषण का शिकार बनना पड़ता है यह महिलाओं पर होने वाले शोषण से कैसे अलग हैं देखिए जो महिलाओं का शोषण होते हैं वह सबसे ज्यादा काम वासना की पूर्ति के लिए शोषण महिलाओं पर किए जाते हैं और इसके अलावा जो पुरुषों पर जो शोषण होता है वह ज्यादातर फाइनेंशली मैंने देखा है और तो इसलिए और जो पुरुषों का जो शोषण है वह महिलाओं से अलग होता है ऐसा मैं मानती हूं कि यह पुरुषों का और महिलाओं का शोषण जो होता है वह अलग-अलग प्रकार से होता है

namah shivay aapka prashna hai kya purushon ko bhi karya kshetra me shoshan ka shikaar banna padta hai yah mahilaon par hone waale shoshan se kaise alag hain dekhiye jo mahilaon ka shoshan hote hain vaah sabse zyada kaam vasana ki purti ke liye shoshan mahilaon par kiye jaate hain aur iske alava jo purushon par jo shoshan hota hai vaah jyadatar financially maine dekha hai aur toh isliye aur jo purushon ka jo shoshan hai vaah mahilaon se alag hota hai aisa main maanati hoon ki yah purushon ka aur mahilaon ka shoshan jo hota hai vaah alag alag prakar se hota hai

नमः शिवाय आपका प्रश्न है क्या पुरुषों को भी कार्य क्षेत्र में शोषण का शिकार बनना पड़ता है

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देखिए महिला हो या पुरुष कार्यक्षेत्र हो या समाज दोनों का शोषण इसलिए होता है क्योंकि वह अपना शोषण स्वयं करवाते हैं अगर कोई महिला या पुरुष अपना शोषण ना करवाएं तो किसी की हिम्मत नहीं है कि कोई किसी का शोषण कर सके उसके लिए हमारे यहां कानून व्यवस्था है अब हमारे समाज में लोगों को ऊपर दोषारोपण करने का एक समभाव बन गया है और यही चुनाव शोषण के नाम का एक डंका बजा रहे हैं कि हमारा शोषण हो रहा हो रहा चलो चलो ना चाहे किसी की हिम्मत नहीं है कि हमारा शोषण कर ले वह कैसे मैं आपको समझाता हूं ए के कार्य क्षेत्र में यह सामाजिक स्थिति में हमने किसी से कुछ अपेक्षा की और जब वह अपेक्षा हमारी उस व्यक्ति ने उस महिला ने पूरी कर दी इसके बाद उसके मन में जो विचार हमें लिखे हैं तो वह अपने उस उस उस का यशवंत अपने मन की बात को बोल कर बोलेगा जैसे उधार देता हूं किसी स्त्री ने अपने बॉस से क्या आप मेरी सिफारिश कर दीजिए और मेरा प्रमोशन हो जाए आपके हाथ में है अब उसने उसको दो चार बार चेक किया मीठी मीठी बातें सुनी उसकी और उसका प्रमोशन करवा दिया अब जिसने प्रमोशन करवाया वह व्यक्ति यह कहेगा कि मैंने तेरा प्रमोशन करवा दिया है अब मुझे भी कुछ चाहिए अब उसने कहा डिमांड की हिसाब मुझे फिजिकल चाहिए और उस उस महिला ने मना कर दिया कि हम नहीं कर सकते अब बॉस है वह बॉस है तो उसने कहा कि अगर नहीं करोगे तो फिर डिमोशन कर उसकी धमकी है जब उसकी धमकी है तो आपने पहले अपने मतलब को शुद्ध करने के लिए अपने बॉस को अप्रोच क्यों किया उस प्रक्रिया को स्वता ही होने देते अपने आप प्रमोशन होने देते और अब जो आपसे डिमांड कर रहा है तो आप उसे शोषण का नाम दे रहे हैं फिर आप कहोगे मैं मेरी नौकरी खतरे में डाल रहा है मुझे किसी केस में फंसा दे रहा है जहां लालच है वहां आप अपना शोषण स्वयं करवाएंगे और यह सोशल कभी ना बंद हुआ है ना होगा जब तक हमारे मन में लालच भरा हुआ है और लाल से किए गए कार्य गलत ही होंगे इसलिए सबसे पहले लालच को निकाल कर देखिए तब जाकर शोषण अपने आप बंद हो जाएगा जब आपने लालच किया तब उस व्यक्ति के उसके बारे में सोचा था कि जो है वह हमारा शोषण भी कर सकता है उसके पास जयपुर मौसम देने की पावर है तो डिमोशन किया नौकरी से हटाने की भी पावर होगी तो ऐसे हमारे निज स्वार्थ जिनकी वजह से हम फंस जाते हैं और थक जाने के बाद कोई व्यक्ति हमारा शोषण तभी करता है जब कहीं ना कहीं हमारा स्वार्थ अटका हुआ होता है इसलिए चाहे पुरुष स्त्रियों जब कोई व्यक्ति लालच में आकर रुकता है तब जाकर उसका शोषण कहीं ना कहीं चालू हो जाएगा वह करेगा इसके बाद में जो है एक महान व्यक्ति बनके यह मिस्त्री बन के बाहर आएगा कि जाएगा हमारा 216 लेकिन वह शोषण के पीछे छिपी हुई कहानी नहीं बताएगा इस वजह से मैंने सोचा दूसरों पर दोषारोपण करना बहुत आसान है और दोषारोपण ही सोशल का नाम है

dekhiye mahila ho ya purush karyakshetra ho ya samaj dono ka shoshan isliye hota hai kyonki vaah apna shoshan swayam karwaate hain agar koi mahila ya purush apna shoshan na karvaaein toh kisi ki himmat nahi hai ki koi kisi ka shoshan kar sake uske liye hamare yahan kanoon vyavastha hai ab hamare samaj me logo ko upar dosharopan karne ka ek sambhav ban gaya hai aur yahi chunav shoshan ke naam ka ek danka baja rahe hain ki hamara shoshan ho raha ho raha chalo chalo na chahen kisi ki himmat nahi hai ki hamara shoshan kar le vaah kaise main aapko samajhaata hoon a ke karya kshetra me yah samajik sthiti me humne kisi se kuch apeksha ki aur jab vaah apeksha hamari us vyakti ne us mahila ne puri kar di iske baad uske man me jo vichar hamein likhe hain toh vaah apne us us us ka yashvant apne man ki baat ko bol kar bolega jaise udhaar deta hoon kisi stree ne apne boss se kya aap meri sifarish kar dijiye aur mera promotion ho jaaye aapke hath me hai ab usne usko do char baar check kiya mithi mithi batein suni uski aur uska promotion karva diya ab jisne promotion karvaya vaah vyakti yah kahega ki maine tera promotion karva diya hai ab mujhe bhi kuch chahiye ab usne kaha demand ki hisab mujhe physical chahiye aur us us mahila ne mana kar diya ki hum nahi kar sakte ab boss hai vaah boss hai toh usne kaha ki agar nahi karoge toh phir demotion kar uski dhamki hai jab uski dhamki hai toh aapne pehle apne matlab ko shudh karne ke liye apne boss ko approach kyon kiya us prakriya ko swata hi hone dete apne aap promotion hone dete aur ab jo aapse demand kar raha hai toh aap use shoshan ka naam de rahe hain phir aap kahoge main meri naukri khatre me daal raha hai mujhe kisi case me fansa de raha hai jaha lalach hai wahan aap apna shoshan swayam karavaenge aur yah social kabhi na band hua hai na hoga jab tak hamare man me lalach bhara hua hai aur laal se kiye gaye karya galat hi honge isliye sabse pehle lalach ko nikaal kar dekhiye tab jaakar shoshan apne aap band ho jaega jab aapne lalach kiya tab us vyakti ke uske bare me socha tha ki jo hai vaah hamara shoshan bhi kar sakta hai uske paas jaipur mausam dene ki power hai toh demotion kiya naukri se hatane ki bhi power hogi toh aise hamare neej swarth jinki wajah se hum fans jaate hain aur thak jaane ke baad koi vyakti hamara shoshan tabhi karta hai jab kahin na kahin hamara swarth ataka hua hota hai isliye chahen purush sthreeyon jab koi vyakti lalach me aakar rukata hai tab jaakar uska shoshan kahin na kahin chaalu ho jaega vaah karega iske baad me jo hai ek mahaan vyakti banke yah mistiri ban ke bahar aayega ki jaega hamara 216 lekin vaah shoshan ke peeche chipi hui kahani nahi batayega is wajah se maine socha dusro par dosharopan karna bahut aasaan hai aur dosharopan hi social ka naam hai

देखिए महिला हो या पुरुष कार्यक्षेत्र हो या समाज दोनों का शोषण इसलिए होता है क्योंकि वह अ

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गोपाल पांडेय

Journalist, Counselor, motivational speaker

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Deepika Bhardwaj

Independent journalist, Documentary filmmaker and Human Rights activist

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अमेरिका से आगे आएं हैं जहां पर एक पुरुष को अपनी काम काम करने की जगह पर रहो किसी महिला द्वारा आम परेशान किया गया आजा सेक्सी मुझे कहते हैं राम नाम मांगे गए या किसी तरह की अनकंफरटेबल सिचुएशन में डालना कि आप यह मुझे मेरे मायनों में या मेरी समझ में यह सारा डिस्टेंस नहीं है अगर एक का महीना के साथ एक पुरुष काम किसी भी तरह का संबंध बनाना चाहता है जिसमें इंटरेस्ट नहीं है क्या जो इस संबंध में वह नहीं जाना चाहती जितना वह आ परेशानी का सबब उसके लिए बनता है उतना ही एक पुरुष के लिए भी बनता है और राजा को पुरुष शादीशुदा हो और खासकर कुरकुरी सके उतना उतना आराम से अपनी बात बता सकती हो कुछ महिलाएं होती हैं जो बहुत थोड़ी ठीक होती है अपनी चीजें आसानी को बताने में बहुत डरती हो कि तेरे बेटे पुरुष भी होते तो कोई ऐसा पुरुषों बहुत ज्यादा किसी से बात नहीं करता किसी को पता नहीं सकता है या छिपता है उसको तो और भी ज्यादा दिक्कत वाली बात होती है लोहे की प्रताड़ना सिर्फ महिलाओं के ऊपर पुरुषों द्वारा को ही माननीय रखता है उसके पुरुष पुरुष के साथ पड़ोसियों से 40 मिनट हो रही है तो वह अपने ऐसा को कंप्लेंट कर सकते हैं करो कि कंपनी मित्र की पॉलिसी और अगर कोई कंपनी अच्छी है तो उसको आंखों से की कंपनी जहां शूटिंग होती है और मुझे करते हैं कमेटी उठाते हैं वह भी चंदन महिला कम करती तो उसको ट्रेस करने के लिए नाम होता है मेरी समझ में मोटे था ना कि इस बात में कोई दो राय नहीं है कि आमतौर की जिंदगी पर इतना ज्यादा महिलाओं को इस चीज का सामना करना पड़ता पुरुषों को बिल्कुल भी नहीं करना पड़ता है लेकिन इसमें और एक्सप्लोइटेशन या किसी इंसान से तो करवाना जो आप करना चाहते हो उस पावर का गेम है जहां पर आपको लगता है कि आप उस इंसान को दबा सकते हैं उसको एक रोहित कर सकता नहीं उठाएगा तो बातें तड़पाती है और आपकी तबीयत कैसी बहुत-बहुत महिलाएं हैं जो का वंश और जागते रहते हैं जहां पर उनका समाज का एकता पर शक होता है कि ऐसा तो होता ही नहीं है तो इस वजह से कोई बात नहीं रख पाता और मेरे पास महिला ने उसको साफ साफ नहीं बोला कि अगर तुम यह लोगों को बताओगे कि मैं तुम्हारे रही हूं तू मैं जाकर सही कर मेरे को मेरे पता नहीं कर रही हूं क्योंकि तुम तो पूरी तुम्हारी तो कोई सुनेगा नहीं मुझे लोग सुनेंगे तो थोड़ा सा इंटरेस्ट इसमें और दिक्कत वाली बात आ जाती है

america se aage aaen hain jaha par ek purush ko apni kaam kaam karne ki jagah par raho kisi mahila dwara aam pareshan kiya gaya aajad sexy mujhe kehte hain ram naam mange gaye ya kisi tarah ki anakamfaratebal situation mein dalna ki aap yah mujhe mere maayano mein ya meri samajh mein yah saara distance nahi hai agar ek ka mahina ke saath ek purush kaam kisi bhi tarah ka sambandh banana chahta hai jisme interest nahi hai kya jo is sambandh mein vaah nahi jana chahti jitna vaah aa pareshani ka sabab uske liye baata hai utana hi ek purush ke liye bhi baata hai aur raja ko purush shaadishuda ho aur khaskar kurkuri sake utana utana aaram se apni baat bata sakti ho kuch mahilaye hoti hain jo bahut thodi theek hoti hai apni cheezen aasani ko batane mein bahut darti ho ki tere bete purush bhi hote toh koi aisa purushon bahut zyada kisi se baat nahi karta kisi ko pata nahi sakta hai ya chipta hai usko toh aur bhi zyada dikkat wali baat hoti hai lohe ki prataadana sirf mahilaon ke upar purushon dwara ko hi mananiya rakhta hai uske purush purush ke saath padoshiyon se 40 minute ho rahi hai toh vaah apne aisa ko complaint kar sakte hain karo ki company mitra ki policy aur agar koi company achi hai toh usko aankho se ki company jaha shooting hoti hai aur mujhe karte hain committee uthate hain vaah bhi chandan mahila kam karti toh usko trays karne ke liye naam hota hai meri samajh mein mote tha na ki is baat mein koi do rai nahi hai ki aamtaur ki zindagi par itna zyada mahilaon ko is cheez ka samana karna padta purushon ko bilkul bhi nahi karna padta hai lekin isme aur eksaploiteshan ya kisi insaan se toh karwana jo aap karna chahte ho us power ka game hai jaha par aapko lagta hai ki aap us insaan ko daba sakte hain usko ek rohit kar sakta nahi uthayega toh batein tadpati hai aur aapki tabiyat kaisi bahut bahut mahilaye hain jo ka vansh aur jagte rehte hain jaha par unka samaj ka ekta par shak hota hai ki aisa toh hota hi nahi hai toh is wajah se koi baat nahi rakh pata aur mere paas mahila ne usko saaf saaf nahi bola ki agar tum yah logo ko bataoge ki main tumhare rahi hoon tu main jaakar sahi kar mere ko mere pata nahi kar rahi hoon kyonki tum toh puri tumhari toh koi sunegaa nahi mujhe log sunenge toh thoda sa interest isme aur dikkat wali baat aa jaati hai

अमेरिका से आगे आएं हैं जहां पर एक पुरुष को अपनी काम काम करने की जगह पर रहो किसी महिला द्वा

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Ruchi Garg

Counsellor and Psychologist(Gold MEDALIST)

0:47

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बिल्कुल ऐसा बिल्कुल होता है कि कर्म क्षेत्र में पुरुषों को शोषण का शिकार होना पड़ता है महिलाओं के शिकार से यह कैसे अलग है ज्यादातर ऐसा होता है कि महिलाओं को सेक्स प्लीज याद अप्लाई अप्लाई किया जाता है जो पुरुष होते हैं उन्हें फिजिकली राधे स्प्राइट किया जाता है महिलाएं जो है उन्हें सैलरी कम दी जाती है ऐसा माना जाता है कि पुरुषों के मुकाबले उन्हें सैलरी कम दी जाती है और इस तरह से उनका शोषण होता है जो पुरुष होते हैं वह बहुत बार ऐसा होता है कि वह भी पॉलिटिक्स का शिकार महिलाएं भी ऑफिस कि वह पुलिस की पॉलिटिक्स का शिकार होती तो पुरुष भी उस वक्त प्लेस पॉलिटिक्स का शिकार होते हैं

bilkul aisa bilkul hota hai ki karm kshetra mein purushon ko shoshan ka shikaar hona padta hai mahilaon ke shikaar se yah kaise alag hai jyadatar aisa hota hai ki mahilaon ko sex please yaad apply apply kiya jata hai jo purush hote hain unhe physically radhe Sprite kiya jata hai mahilaye jo hai unhe salary kam di jaati hai aisa mana jata hai ki purushon ke muqable unhe salary kam di jaati hai aur is tarah se unka shoshan hota hai jo purush hote hain vaah bahut baar aisa hota hai ki vaah bhi politics ka shikaar mahilaye bhi office ki vaah police ki politics ka shikaar hoti toh purush bhi us waqt place politics ka shikaar hote hain

बिल्कुल ऐसा बिल्कुल होता है कि कर्म क्षेत्र में पुरुषों को शोषण का शिकार होना पड़ता है महि

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Dr. Guddy Kumari

UPSC Coach / Ph.d

0:43
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्या पुरुषों को भी कर्म क्षेत्र में शोषण का शिकार बनना पड़ता है या महिलाओं पर होने वाले शोषण कैसे अलग है बिल्कुल होना पड़ता है मनुष्य में यह कि पुरुष और महिलाओं में जो कमी होती है उस शिकार भी उन्हीं कमियों का होते हैं इसलिए पुरुषों में जो कमी होती है तो वह कर्म क्षेत्र में उनका शोषण भी उन्हीं बातों को लेकर वहीं महिलाओं में भी तो ऐसी बात है कि महिलाओं पर होने वाले शोषण से कैसे अलग अलग है और कमियां में अलग-अलग तरीके भी अलग-अलग होते हैं अपनी कमियों को दूर करें और कष्ट करें धन्यवाद

kya purushon ko bhi karm kshetra mein shoshan ka shikaar bana padta hai ya mahilaon par hone waale shoshan kaise alag hai bilkul hona padta hai manushya mein yah ki purush aur mahilaon mein jo kami hoti hai us shikaar bhi unhi kamiyon ka hote hai isliye purushon mein jo kami hoti hai toh vaah karm kshetra mein unka shoshan bhi unhi baaton ko lekar wahi mahilaon mein bhi toh aisi baat hai ki mahilaon par hone waale shoshan se kaise alag alag hai aur kamiyan mein alag alag tarike bhi alag alag hote hai apni kamiyon ko dur kare aur kasht kare dhanyavad

क्या पुरुषों को भी कर्म क्षेत्र में शोषण का शिकार बनना पड़ता है या महिलाओं पर होने वाले शो

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DR. I.P.SINGH

Doctorate in Literature

3:06
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मित्रों हमारे पास तो इतिहास है वह कर्म क्षेत्र पुरुषों का ही रहा है और शोषण पुरुषों का होता रहा है उसका क्या है स्वार्थ जो है वह केवल अपनी चिंता करता है और स्वार्थी जब शक्तिशाली होता है तो यह नहीं देखता है को किस का शोषण कर रहा है और कैसा शोषण कर रहा है थोड़ा सा अपने प्रश्न पूछा कि महिलाओं पर होने वाले सोशल से कैसे अलग है तो महिला प्रतीत का एक दूसरा पक्ष है कुछ माने में शारीरिक संबंधों के मामले में भावनाओं के मामले में सबसे आपने जैसे अगर आप महिला को ले तो महिला की एक कमजोरी उसका मात्र तो होता है एक कमजोरी कैमरा के सामने आज भी महिलाएं जो है एक तरफ पुरुषों का सहारा लेकर के आगे बढ़ रही हैं और अपनी उपलब्धियों का परचम फहरा रही है ऐसा नहीं है लेकिन भैया रही बात उस शोषण की तो पुरुषों का शोषण भी होता रहा है और महिलाओं का भी हो रहा है यह दोनों एक दूसरे से अलग नहीं है अंदर मैंने आपको बताया कि जैसे एक पुरुष पीता है और उसकी संतानों को दांव पर लगा कर के आप चलेंगे तो गुरु गोविंद सिंह जैसा व्यक्ति जो है अपने बच्चों को दांव पर लगाकर के और सब कुछ सहन कर लेता है एक मक्कम शंकर पाती है जैसे पन्ना भाई को देखें तो पन्नाधाय जैसी महिलाएं बिराली होती हैं उनका मातृत्व का सबसे कमजोर पक्ष होता है उनकी करुणा उनका सबसे कमजोर पक्ष होत महिलाओं को विश्वास में जल्दी लिया जा सकता है और उनके साथ विश्वासघात किया जा सकता हम तो बात एक और है कि अभी हमारे समाज में पुरुष की तुलना में महिलाओं की इज्जत कहीं ज्यादा है घर परिवार में आप देखें बेटा बाहर चला गया तो पिता उतनी चिंता नहीं करता लेकिन बेटी बाहर चली जाए तो अभी सबसे ज्यादा चिंता उसे होती है और उसका कारण शायद यही है कि बेटियां महिला जो होती है वह त्याग दया करना या ममता के धरातल पर पुरुषों से कहीं कमजोर होती है बस इतना संतरे अन्यथा दोनों के शोषण लगभग एक जैसे ही होते रहे हैं जैसे कमाई में शोषण होना विश्वासघात हो ना धोखा देना उन कमियों का लाभ उठाना यह दोनों के साथ एक जैसे होते हैं और बाकी रसोई 12 संदर्भ की शारीरिक शोषण थोड़ा सा या भावनात्मक शोषण या मातृत्व पार्क को केंद्र में रखकर केस ओपन करना थोड़ा सा अलग है थैंक यू

mitron hamare paas toh itihas hai vaah karm kshetra purushon ka hi raha hai aur shoshan purushon ka hota raha hai uska kya hai swarth jo hai vaah keval apni chinta karta hai aur swaarthi jab shaktishali hota hai toh yah nahi dekhta hai ko kis ka shoshan kar raha hai aur kaisa shoshan kar raha hai thoda sa apne prashna poocha ki mahilaon par hone waale social se kaise alag hai toh mahila pratit ka ek doosra paksh hai kuch maane mein sharirik sambandhon ke mamle mein bhavnao ke mamle mein sabse aapne jaise agar aap mahila ko le toh mahila ki ek kamzori uska matra toh hota hai ek kamzori camera ke saamne aaj bhi mahilaye jo hai ek taraf purushon ka sahara lekar ke aage badh rahi hain aur apni uplabdhiyon ka parcham fahara rahi hai aisa nahi hai lekin bhaiya rahi baat us shoshan ki toh purushon ka shoshan bhi hota raha hai aur mahilaon ka bhi ho raha hai yah dono ek dusre se alag nahi hai andar maine aapko bataya ki jaise ek purush pita hai aur uski santano ko dav par laga kar ke aap chalenge toh guru govind Singh jaisa vyakti jo hai apne baccho ko dav par lagakar ke aur sab kuch sahan kar leta hai ek makkam shankar pati hai jaise panna bhai ko dekhen toh pannadhay jaisi mahilaye birali hoti hain unka matritwa ka sabse kamjor paksh hota hai unki karuna unka sabse kamjor paksh hot mahilaon ko vishwas mein jaldi liya ja sakta hai aur unke saath vishwasghat kiya ja sakta hum toh baat ek aur hai ki abhi hamare samaj mein purush ki tulna mein mahilaon ki izzat kahin zyada hai ghar parivar mein aap dekhen beta bahar chala gaya toh pita utani chinta nahi karta lekin beti bahar chali jaaye toh abhi sabse zyada chinta use hoti hai aur uska karan shayad yahi hai ki betiyan mahila jo hoti hai vaah tyag daya karna ya mamata ke dharatal par purushon se kahin kamjor hoti hai bus itna santre anyatha dono ke shoshan lagbhag ek jaise hi hote rahe hain jaise kamai mein shoshan hona vishwasghat ho na dhokha dena un kamiyon ka labh uthana yah dono ke saath ek jaise hote hain aur baki rasoi 12 sandarbh ki sharirik shoshan thoda sa ya bhavnatmak shoshan ya matritwa park ko kendra mein rakhakar case open karna thoda sa alag hai thank you

मित्रों हमारे पास तो इतिहास है वह कर्म क्षेत्र पुरुषों का ही रहा है और शोषण पुरुषों का होत

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बिल्कुल पुरुष भी अपने कार्य क्षेत्र में कहीं-कहीं शोषित फील करते हैं जब उनके हिसाब से डिसीजन में ही लिए जाते हैं महिलाओं पर यह जो शोषण वाला है वह कुछ ज्यादा लागू होता है क्योंकि महिलाएं बहुत ज्यादा अच्छी रहती है हर चीज के प्रति पुरुष कहीं ना कहीं रखकर जाते हैं वह अपने आपको कहीं ना कहीं भरी लेकर जाते हैं पर महिलाएं स्वेदन शीलता में है करती अपनी प्रेस्टीज कहीं अपने परिवार की तरह चीज के बारे में सोच कर और अपने बच्चों के बारे में सोचते हो कहीं ना कहीं ज्यादा शोषण के बोझ में दबी रहती है और कुछ पुलिस व पुरुष भी रहते हैं पर पुरुष थोड़ा लेट कर लेते हैं और उनकी सदस्यता भी महिलाओं की अपेक्षा कमी रहती है

bilkul purush bhi apne karya kshetra me kahin kahin shoshit feel karte hain jab unke hisab se decision me hi liye jaate hain mahilaon par yah jo shoshan vala hai vaah kuch zyada laagu hota hai kyonki mahilaye bahut zyada achi rehti hai har cheez ke prati purush kahin na kahin rakhakar jaate hain vaah apne aapko kahin na kahin bhari lekar jaate hain par mahilaye swedan sheelta me hai karti apni prestige kahin apne parivar ki tarah cheez ke bare me soch kar aur apne baccho ke bare me sochte ho kahin na kahin zyada shoshan ke bojh me dabi rehti hai aur kuch police va purush bhi rehte hain par purush thoda late kar lete hain aur unki sadasyata bhi mahilaon ki apeksha kami rehti hai

बिल्कुल पुरुष भी अपने कार्य क्षेत्र में कहीं-कहीं शोषित फील करते हैं जब उनके हिसाब से डिसी

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जिपकर ही आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आपने इस तरह का सवाल एक महिला होने के नाते उठाया जो बहुत संवेदनशील है एक बिंदु पर विचार करने की बात भी बिल्कुल सही है कि पुरुष कार्य क्षेत्र से लेकर हर क्षेत्र में महिलाओं द्वारा प्रताड़ित हो सकता है मुझे भी डर लगता है कि जब कभी किसी खाली डिब्बे में या ट्रेन में बैठा हूं सामने वाली सीट पर कोई लेडीस बैठी है तो बड़ा डर लगता है कि कहीं ऐसा ना हो कि यह कुछ कर दे या कोई शिकायत कर दिया और आज के परिपेक्ष में तो और भी खतरा बढ़ता जा रहा है संवेदनशील गांवों में पुरुष से ज्यादा महिलाएं इसका लाभ लेना चाहती हैं और विक्रम की जो मॉडल शॉप रेडी है उसे हम बहुत डरे हुए हैं हम हमारा समाज आपने एक बहुत अच्छा मुद्दा उठाया है आपने मिट्ठू कैंपियन के बारे में भी सुना होगा कोई भी महिला या कोई भी पुरुष किसी महिला के साथ बलात्कार नहीं कर सकता रहा सामान कानून में महिलाओं को इसका अलग से दर्जा दिया गया है तो इसमें डरने की बात नहीं है हमारी एविडेंस एक्ट में और हमारी व्यवस्थाओं में बहुत कुछ ऐसे जांच के बिंदु हैं जैसे मैं डीएनए प्रोफाइलिंग दिया किसी ने अपने कैसेट से लेकर तमाम तरह की ऐसी बिंदु हैं जिनसे हम इससे निजात पा सकते हैं और हकीकत सामने ला सकते हैं कभी कभी हकीकत सामने नहीं आ पाती है इसमें आईपीसी की धारा 195 211 182 इस पर झूठे मुकदमे बनाने वाली महिला के खिलाफ में माननीय सर्वोच्च न्यायालय से लेकर के नीचे तक कभी-कभी ₹20000 जुर्माने तो 10 वर्ष की सजा हुई है तो मैं समझता हूं कि यह मुद्दा बहुत खतरनाक तरीके से समाज को टेररिस्ट की ओर बढ़ रहा है ऐसे सोशल टेनिस में कहा जाए तो कोई ज्यादा नहीं होगा दूसरी ओर घरेलू हिंसा जो कानून बनाए गए हैं वह 2005 के परिपेक्ष में कुछ भी उसमें नया नहीं है करने के लिए अक्सर यह देखा गया है कि कोई महिला कहीं भी खड़ी होकर किसी भी पुरुष को किसी भी जगह गालियां देने के लिए अपनी निजता से वापस बाज नहीं आती है और पुरुष एक चुपचाप सहन करते हुए वहां से जाने में अपनी बुराई समझता है दूसरी बात आपके साथ जो मुद्दे बनाए गए हैं और पुरुष को प्रताड़ना दी जाती है और हकीकत है बलात्कार होना एक अलग बात है छोटे बच्चों के साथ में अत्याचार होना यह अलग बात है यह मनोवैज्ञानिक दशाओं का परिणाम है पर किसी अकेली महिला के साथ में किसी तरह की छेड़छाड़ या इस तरह का कोई हिंदू बनना एक अलग बात है हां ऑफिस में जब किसी प्रेशर या किसी गलत लाख लेने के लिए अपना उपयोग खुश करने दिया जाए और फिर इसके बाद विरोध ना करती हूं उसका रोंगफुल जिम जाने पर जब आवेला हो जाता है व्यक्ति तो उसमें अपराध भाव पैदा हो जाता है और वह उसे प्रताड़ना की ओर ले जाता है इसमें आपने जो मुद्दा उठाया वह संगीन और बहुत ही न्यायोचित बाकी है जिस पर हमारा समाज टिका हुआ है इसलिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद इसमें पुरुषों के साथ में अत्याचार होना एकदम लाजमी हैं लेकिन कई तकनीकी जांच और एविडेंस के साथ में चलने पर इनसे विजय पाना कोई ज्यादा मुश्किल नहीं है मैंने ऐसे कई केसों को हैंडल किया है

jipakar hi aapka bahut bahut dhanyavad aapne is tarah ka sawaal ek mahila hone ke naate uthaya jo bahut samvedansheel hai ek bindu par vichar karne ki baat bhi bilkul sahi hai ki purush karya kshetra se lekar har kshetra me mahilaon dwara pratarit ho sakta hai mujhe bhi dar lagta hai ki jab kabhi kisi khaali dibbe me ya train me baitha hoon saamne wali seat par koi ladies baithi hai toh bada dar lagta hai ki kahin aisa na ho ki yah kuch kar de ya koi shikayat kar diya aur aaj ke paripeksh me toh aur bhi khatra badhta ja raha hai samvedansheel gaon me purush se zyada mahilaye iska labh lena chahti hain aur vikram ki jo model shop ready hai use hum bahut dare hue hain hum hamara samaj aapne ek bahut accha mudda uthaya hai aapne mitthu kaimpiyan ke bare me bhi suna hoga koi bhi mahila ya koi bhi purush kisi mahila ke saath balatkar nahi kar sakta raha saamaan kanoon me mahilaon ko iska alag se darja diya gaya hai toh isme darane ki baat nahi hai hamari evidence act me aur hamari vyavasthaon me bahut kuch aise jaanch ke bindu hain jaise main DNA profailing diya kisi ne apne kaiset se lekar tamaam tarah ki aisi bindu hain jinse hum isse nijat paa sakte hain aur haqiqat saamne la sakte hain kabhi kabhi haqiqat saamne nahi aa pati hai isme ipc ki dhara 195 211 182 is par jhuthe mukadme banane wali mahila ke khilaf me mananiya sarvoch nyayalaya se lekar ke niche tak kabhi kabhi Rs jurmane toh 10 varsh ki saza hui hai toh main samajhata hoon ki yah mudda bahut khataranaak tarike se samaj ko terrorist ki aur badh raha hai aise social tennis me kaha jaaye toh koi zyada nahi hoga dusri aur gharelu hinsa jo kanoon banaye gaye hain vaah 2005 ke paripeksh me kuch bhi usme naya nahi hai karne ke liye aksar yah dekha gaya hai ki koi mahila kahin bhi khadi hokar kisi bhi purush ko kisi bhi jagah galiya dene ke liye apni nijata se wapas baaj nahi aati hai aur purush ek chupchap sahan karte hue wahan se jaane me apni burayi samajhata hai dusri baat aapke saath jo mudde banaye gaye hain aur purush ko prataadana di jaati hai aur haqiqat hai balatkar hona ek alag baat hai chote baccho ke saath me atyachar hona yah alag baat hai yah manovaigyanik dashao ka parinam hai par kisi akeli mahila ke saath me kisi tarah ki chedchad ya is tarah ka koi hindu banna ek alag baat hai haan office me jab kisi pressure ya kisi galat lakh lene ke liye apna upyog khush karne diya jaaye aur phir iske baad virodh na karti hoon uska rongaful gym jaane par jab avela ho jata hai vyakti toh usme apradh bhav paida ho jata hai aur vaah use prataadana ki aur le jata hai isme aapne jo mudda uthaya vaah sangeen aur bahut hi nyayochit baki hai jis par hamara samaj tika hua hai isliye aapka bahut bahut dhanyavad isme purushon ke saath me atyachar hona ekdam lajmi hain lekin kai takniki jaanch aur evidence ke saath me chalne par inse vijay paana koi zyada mushkil nahi hai maine aise kai keson ko handle kiya hai

जिपकर ही आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आपने इस तरह का सवाल एक महिला होने के नाते उठाया जो बहुत सं

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जो भी अधिकारी होते हैं और काम निकलता हुआ न्यू रिलीज फुल

jo bhi adhikari hote hain aur kaam nikalta hua new release full

जो भी अधिकारी होते हैं और काम निकलता हुआ न्यू रिलीज फुल

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यह गलत है कि क्या पुरुष को भी कम रोशन शिकार बनना पड़ता है यदि महिला पर होने वाले शोषण से अलग है यह बिल्कुल गलत है यह बिल्कुल सत्य है यह बिल्कुल तस्दीक से भी बहुत गलत बोला गया है ऐसा किसी के अनुसार भी नहीं किया जा सकता

yah galat hai ki kya purush ko bhi kam roshan shikaar banna padta hai yadi mahila par hone waale shoshan se alag hai yah bilkul galat hai yah bilkul satya hai yah bilkul tasdik se bhi bahut galat bola gaya hai aisa kisi ke anusaar bhi nahi kiya ja sakta

यह गलत है कि क्या पुरुष को भी कम रोशन शिकार बनना पड़ता है यदि महिला पर होने वाले शोषण से अ

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