जब भारत में जेंडर इक्वालिटी की बात होती है तो पुरुषों को प्रतारित करने वाली महिलाओं कि लिए सज़ा कम क्यों होती है?...


user
Play

Likes  26  Dislikes    views  692
WhatsApp_icon
21 जवाब
qIcon
ask
ऐसे और सवाल
Loading...
Loading...
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार मैं हूं श्रेष्ठ शर्मा एडवोकेट आपका सवाल है जब भारत में जेंडर इक्वलिटी की बात होती तो पुरुषों को प्रताड़ित करने वाली महिलाओं के लिए सजा कम की होती है भारत में जेंडर इक्वलिटी बात सही है ए जेंडर इक्वलिटी है विधि के समक्ष समानता आर्टिकल 14 20 के बारे में कहता है लिंग विभेद करता है यह कानून के लिए महिलाएं और पुरुष समान है लेकिन जो आपने कहा कि पुरुषों को प्रताड़ित करने वाली महिलाओं की सजा कम की होती है देखिए कितने क्लास तक केस है इस तरह के जिसमें पुरुष पीड़ित हो महिलाओं से ऐसा केस सुनने में मिलता ही नहीं है होते हैं तो भी वह अंदर के अंदर रहते हैं या के पत्ते केस को ही बाहर आते हैं जो कानून बनाया जो स्पेशल लॉ बनाएं वह महिलाओं के लिए बनाए थे डॉमेस्टिक वायलेंस एक्ट की महिलाओं के लिए दहेज प्रतिषेध अधिनियम महिलाओं के लिए इससे महिलाओं के लिए और कानून है पुरुषों के लिए आज तक कोई ऐसा कानून नहीं है तो सजा की बात थी दूर की बात है इस तरह का कानून नहीं बना है कि पुलिस परेशान हो महिलाओं से तो उसके लिए पुरुषों के लिए अलग से कोई कानून इस तरह का कोई लो नहीं है कि प्राचीन काल से महिलाओं को ही परेशान किया जा रहा था और आज तक भी किया जा रहा है अब थोड़े सालों से कुछ महिलाएं तो गलत उपयोग करती है अपने कानों का और वह पुरुषों को तंग करती है लेकिन जो लव बना था वह महिलाओं के लिए बना तभी वास्तव में बहुत परेशान थी प्राचीन काल से ही महिलाओं को बहुत ज्यादा याद नहीं होगा और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर नहीं दिया जाता था तो उन्हें महिलाओं को सशक्त करने के लिए बनाए गए ताकि वह मजबूत हो डरे नहीं ऐसे घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाएं पहले वह अंदर के अंदर सिम जाती थी तुम के लिए कानून है ताकि वह महाराष्ट्र के ठीक है इसका उपयोग करते हैं उन महिलाओं को सशक्त करने के लिए किस तरह से बनाए गए आज ढेरों कानून महिलाओं के पक्ष में पुरुषों को कभी स्तर की बात ही नहीं की पुरुष तंग होने तो उनके लिए कोई लॉ बनाने की जरूरत पड़े अब भविष्य में इस तरह के ज्यादा लग जाएंगे तो पुरुषों के लिए कानून बन जाएंगे लेकिन जेंडर इक्वलिटी की बात वहां होती है कानून में जैसे किसी महिला ने किसी का मर्डर कर दिया किसी महिला ने उसे भी 302 के तहत आजीवन कारावास या फांसी की सजा हो सकती है और पुरुष ने कर दिया किसी का मर्डर तो उसे भी फांसी या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है तो वहां जेंडर इक्वलिटी है यह जो आप बोलना जेंडर इक्विटी की बात तो वहां है जैसे किसी ने किसी को चांटा मारा तो महिला के लिए दुबई सजा होगी महिला पर भी आईपीसी सेक्शन है 323 उस पर मोहित सेक्शन लगेगा और पुरुषों के ऊपर भी वही लगेगा एक जेंडर इक्विटी की बात होती है जिसे किसी महिला ने चोरी की तो महिला पर भी 379 का एक्शन लगेगा और उस पर भी आईपीसी का 378 लगेगा तो वहां जेंडर इक्वलिटी भेजनी है तो भी जो आपका सवाल है कि पुलिस उक्त 30 दिन में महिलाओं की सजा कम की होती है पहली बात तो इस 3 मीटर आती नहीं है और पुरुषों के लिए कोयला भी नहीं बना है हां यदि पुरुष यदि कोई महिला पुरुष को मारती पीर पुरुष कोई भी चोट आती है तो महिला के ऊपर कार्रवाई होती है मालूम महिला प्रताड़ित इतना हो गया कि पुरुष की बहुत ज्यादा गंभीर चोट आई है तो आईपीसी के सेक्शन के तेरी कंप्लेंट दर्ज थी महिला के खिलाफ तो महिला पर्यवेक्षक लिए जाते हैं तो मेरे जवाब से आप संतुष्ट नहीं होंगे मुझे लाइक कीजिए फॉलो कीजिए धन्यवाद

namaskar main hoon shreshtha sharma advocate aapka sawaal hai jab bharat me gender Equality ki baat hoti toh purushon ko pratarit karne wali mahilaon ke liye saza kam ki hoti hai bharat me gender Equality baat sahi hai a gender Equality hai vidhi ke samaksh samanata article 14 20 ke bare me kahata hai ling vibhed karta hai yah kanoon ke liye mahilaye aur purush saman hai lekin jo aapne kaha ki purushon ko pratarit karne wali mahilaon ki saza kam ki hoti hai dekhiye kitne class tak case hai is tarah ke jisme purush peedit ho mahilaon se aisa case sunne me milta hi nahi hai hote hain toh bhi vaah andar ke andar rehte hain ya ke patte case ko hi bahar aate hain jo kanoon banaya jo special law banaye vaah mahilaon ke liye banaye the damestik violence act ki mahilaon ke liye dahej pratishedh adhiniyam mahilaon ke liye isse mahilaon ke liye aur kanoon hai purushon ke liye aaj tak koi aisa kanoon nahi hai toh saza ki baat thi dur ki baat hai is tarah ka kanoon nahi bana hai ki police pareshan ho mahilaon se toh uske liye purushon ke liye alag se koi kanoon is tarah ka koi lo nahi hai ki prachin kaal se mahilaon ko hi pareshan kiya ja raha tha aur aaj tak bhi kiya ja raha hai ab thode salon se kuch mahilaye toh galat upyog karti hai apne kanon ka aur vaah purushon ko tang karti hai lekin jo love bana tha vaah mahilaon ke liye bana tabhi vaastav me bahut pareshan thi prachin kaal se hi mahilaon ko bahut zyada yaad nahi hoga aur unhe aage badhne ka avsar nahi diya jata tha toh unhe mahilaon ko sashakt karne ke liye banaye gaye taki vaah majboot ho dare nahi aise gharelu hinsa se peedit mahilaye pehle vaah andar ke andar sim jaati thi tum ke liye kanoon hai taki vaah maharashtra ke theek hai iska upyog karte hain un mahilaon ko sashakt karne ke liye kis tarah se banaye gaye aaj dheron kanoon mahilaon ke paksh me purushon ko kabhi sthar ki baat hi nahi ki purush tang hone toh unke liye koi law banane ki zarurat pade ab bhavishya me is tarah ke zyada lag jaenge toh purushon ke liye kanoon ban jaenge lekin gender Equality ki baat wahan hoti hai kanoon me jaise kisi mahila ne kisi ka murder kar diya kisi mahila ne use bhi 302 ke tahat aajivan karavas ya fansi ki saza ho sakti hai aur purush ne kar diya kisi ka murder toh use bhi fansi ya aajivan karavas ki saza ho sakti hai toh wahan gender Equality hai yah jo aap bolna gender equity ki baat toh wahan hai jaise kisi ne kisi ko chaanta mara toh mahila ke liye dubai saza hogi mahila par bhi ipc section hai 323 us par mohit section lagega aur purushon ke upar bhi wahi lagega ek gender equity ki baat hoti hai jise kisi mahila ne chori ki toh mahila par bhi 379 ka action lagega aur us par bhi ipc ka 378 lagega toh wahan gender Equality bhejni hai toh bhi jo aapka sawaal hai ki police ukth 30 din me mahilaon ki saza kam ki hoti hai pehli baat toh is 3 meter aati nahi hai aur purushon ke liye koyla bhi nahi bana hai haan yadi purush yadi koi mahila purush ko marti pir purush koi bhi chot aati hai toh mahila ke upar karyawahi hoti hai maloom mahila pratarit itna ho gaya ki purush ki bahut zyada gambhir chot I hai toh ipc ke section ke teri complaint darj thi mahila ke khilaf toh mahila paryavekshak liye jaate hain toh mere jawab se aap santusht nahi honge mujhe like kijiye follow kijiye dhanyavad

नमस्कार मैं हूं श्रेष्ठ शर्मा एडवोकेट आपका सवाल है जब भारत में जेंडर इक्वलिटी की बात होती

Romanized Version
Likes  12  Dislikes    views  339
WhatsApp_icon
user

Aadesh Jee. manovid.

Counselor || Writer

0:36
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पहली स्त्री प्रताड़ना को प्रदान नहीं नहीं समझा जाता था अब समझा गया कि धारणा बड़ी तो पुरुष के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान किया गया अभी पुरुष के प्रति पुरुष के साथ इतनी इंसान नहीं हो रही बताना नहीं हो रही है बन रही है जैसे बढ़ेगा वैसे-वैसे महिलाओं को उसका दंड का ग्राफ दी बढ़ जाएगा

pehli stree prataadana ko pradan nahi nahi samjha jata tha ab samjha gaya ki dharana badi toh purush ke khilaf kathor dand ka pravadhan kiya gaya abhi purush ke prati purush ke saath itni insaan nahi ho rahi batana nahi ho rahi hai ban rahi hai jaise badhega waise waise mahilaon ko uska dand ka graph di badh jaega

पहली स्त्री प्रताड़ना को प्रदान नहीं नहीं समझा जाता था अब समझा गया कि धारणा बड़ी तो पुरुष

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  116
WhatsApp_icon
user
1:55
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बिल्कुल ठीक बात है लड़कियों को या महिलाओं को बहुत कम सजा होती है या सजा नहीं होती है उसका कारण यह है कि आज भी जेंडर इक्वलिटी की बात होने के बावजूद भी हमारे देश में जो कानून है वह सारे कानून लगभग लगभग महिलाओं का ही पक्ष रखते हैं महिलाओं के फेवर में ही होते हैं ज्यादातर जितने भी लोग हैं चाहे वह दहेज की हो चाहे घरेलू हिंसा की हो जाए खर्चे से संबंधित हो सभी कानून महिलाओं के पेपर में सुप्रीम कोर्ट के बहुत सारे रीसेंट जजमेंट आए हैं जिन जजमेंट के हिसाब से महिलाएं थोड़ा थोड़ा सा कम इस्तेमाल कर पा रही हैं इन लो उसको बट फिर भी महिलाओं के पक्ष में ज्यादा 1021 हैं अभी हाल फिलाल में पिछले कुछ वर्षों से क्या हुआ है जो 9811 झूठे कैसे हुआ करते थे उनके रजिस्ट्रेशन में ऐसी अफेयर लिखे जाने में थोड़ी सी कमी आई है क्योंकि अब पुलिस बहुत जल्दी से 498 किए फायर नहीं लिखती उनके में लिखी जा रही है फिर जहां पर या तो लड़की वालों ने किसी भी प्रकार का कोई दबाव बनाया वह पुलिस के ऊपर किसी भी नेता अभिनेता की सोच लगाई हो या सीधी सीधी बात है पैसे पैसे वगैरा पुलिस को दिए हो तभी उनके सिर में एफआईआर लिख कर जाती है दर वाइज पुलिस अब जनरल ई सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को देखते हुए ऐसा नहीं लिखती है और अगर मान लीजिए ऐसी भी जाती है तो आज वर्तमान में 498 के जितने भी केसेज होते हैं उनका कोई भी भविष्य नहीं रह जाता यह केस केवल कोर्ट में चलते ही रहते हैं

bilkul theek baat hai ladkiyon ko ya mahilaon ko bahut kam saza hoti hai ya saza nahi hoti hai uska karan yah hai ki aaj bhi gender Equality ki baat hone ke bawajud bhi hamare desh me jo kanoon hai vaah saare kanoon lagbhag lagbhag mahilaon ka hi paksh rakhte hain mahilaon ke favour me hi hote hain jyadatar jitne bhi log hain chahen vaah dahej ki ho chahen gharelu hinsa ki ho jaaye kharche se sambandhit ho sabhi kanoon mahilaon ke paper me supreme court ke bahut saare recent judgement aaye hain jin judgement ke hisab se mahilaye thoda thoda sa kam istemal kar paa rahi hain in lo usko but phir bhi mahilaon ke paksh me zyada 1021 hain abhi haal filal me pichle kuch varshon se kya hua hai jo 9811 jhuthe kaise hua karte the unke registration me aisi affair likhe jaane me thodi si kami I hai kyonki ab police bahut jaldi se 498 kiye fire nahi likhti unke me likhi ja rahi hai phir jaha par ya toh ladki walon ne kisi bhi prakar ka koi dabaav banaya vaah police ke upar kisi bhi neta abhineta ki soch lagayi ho ya seedhi seedhi baat hai paise paise vagera police ko diye ho tabhi unke sir me FIR likh kar jaati hai dar wise police ab general E supreme court ke disha nirdeshon ko dekhte hue aisa nahi likhti hai aur agar maan lijiye aisi bhi jaati hai toh aaj vartaman me 498 ke jitne bhi casus hote hain unka koi bhi bhavishya nahi reh jata yah case keval court me chalte hi rehte hain

बिल्कुल ठीक बात है लड़कियों को या महिलाओं को बहुत कम सजा होती है या सजा नहीं होती है उसका

Romanized Version
Likes  2  Dislikes    views  80
WhatsApp_icon
user

Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

1:56
Play

Likes  176  Dislikes    views  5223
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नई आपका भ्रम है कानून में जो कानून जिस कानून के अंतर्गत सजा दी गई है उस कानून के अंतर्गत फिक्स है उसको कम कर ही नहीं सकता थोड़ा बहुत आर्थिक दंड कम ज्यादा 10 जज महोदय कर सकते हैं उनके देव एकाधिकार में होता है धारा के अंतर्गत जो सजा लिखी हुई है उसका तुम सजा कम हुई नहीं सकती धन्यवाद

nayi aapka bharam hai kanoon me jo kanoon jis kanoon ke antargat saza di gayi hai us kanoon ke antargat fix hai usko kam kar hi nahi sakta thoda bahut aarthik dand kam zyada 10 judge mahoday kar sakte hain unke dev ekadhikar me hota hai dhara ke antargat jo saza likhi hui hai uska tum saza kam hui nahi sakti dhanyavad

नई आपका भ्रम है कानून में जो कानून जिस कानून के अंतर्गत सजा दी गई है उस कानून के अंतर्गत फ

Romanized Version
Likes  50  Dislikes    views  1153
WhatsApp_icon
user

Dr. Roshani Verma

Ayurveda And Yoga Expert, Motivational Speaker, Life Coach,

0:58
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लिखी मेरे हिसाब से जहां तक बात भारत की है और जेंडर इक्वलिटी की आप बात कर रहे हैं तो आप जैसा आप ने बताया कि पुरुषों को जो प्रताड़ित करने वाली महिलाएं उनके लिए सजा कम क्यों होती है तो वैसे क्योंकि इंडिया में ऐसे कोई कैसे बहुत कम होते हैं जिससे महिलाएं प्रताड़ित कर रही है और सरकार में तो अधिकतर क्या होता है जो महिलाएं हैं पहले वह पुरुषों द्वारा प्रताड़ित हो रही होती है और उसके बाद में फिर वह पुरुषों को प्रताड़ित करती हैं तो ऐसे मामले जो होते हैं इनकी संभावना ज्यादा होती है तो इस कारण ऐसा लगता है कि जो महिलाएं हैं उनके लिए सजा कम है क्योंकि वह खुद पहले उस चीज को भुगतनी है और उसका जो रिएक्शन है उसके रूप में वह दूसरे को प्रताड़ित करती है शायद इसलिए यह सा है यह मेरा विचार है

likhi mere hisab se jaha tak baat bharat ki hai aur gender Equality ki aap baat kar rahe hain toh aap jaisa aap ne bataya ki purushon ko jo pratarit karne wali mahilaye unke liye saza kam kyon hoti hai toh waise kyonki india me aise koi kaise bahut kam hote hain jisse mahilaye pratarit kar rahi hai aur sarkar me toh adhiktar kya hota hai jo mahilaye hain pehle vaah purushon dwara pratarit ho rahi hoti hai aur uske baad me phir vaah purushon ko pratarit karti hain toh aise mamle jo hote hain inki sambhavna zyada hoti hai toh is karan aisa lagta hai ki jo mahilaye hain unke liye saza kam hai kyonki vaah khud pehle us cheez ko bhugatani hai aur uska jo reaction hai uske roop me vaah dusre ko pratarit karti hai shayad isliye yah sa hai yah mera vichar hai

लिखी मेरे हिसाब से जहां तक बात भारत की है और जेंडर इक्वलिटी की आप बात कर रहे हैं तो आप जैस

Romanized Version
Likes  8  Dislikes    views  76
WhatsApp_icon
user

Deepika Bhardwaj

Independent journalist, Documentary filmmaker and Human Rights activist

3:48
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बहुत ही अच्छा क्वेश्चन है और उनके तुम कंप्लेंट कर पाएगी बहुत मुश्किल की बात है कि सोते हैं जहां पर एक महिला के खिलाफ कंप्लेंट कर दी जाती है खासकर मार पिटाई की राजनीति की रोटियां पकाई जाती है और और कनेक्शन चालू होती है वह कि अगर कहीं करो सा राम लखन के लिए कोई ऐसे नहीं सोचते नहीं है बट इंटरनेशनल को सबसे ज्यादा सस्ती होती है मुझे लगता है कि टूट गए किक सॉफ्ट कॉर्नर रहता है महिलाओं के लिए पूरी सोसाइटी लोगों में रहता है और इसे कैसे होते हैं उसका कोई काट रहा है इसका सिस्टम हम लोग का बचपन से हमारी महिलाओं या लड़कियों के प्रति ज्यादा होती है आदमी को गाली निकालने से पहले लोग सोचते हैं लेकिन यूसुफ और अगर वह छोटी बच्चे हैं तो उनका क्या होगा और अगर उसका घर परिवार में अगर वह उसको कोई को किसी भी तरह से उसके ऊपर तो उनका क्या होगा या फिर अगर उसने पहले ऐसा कभी नहीं किया और यह पहला उसका क्राइम था तो इसलिए कम सजा या लगता है कि रिफॉर्म की बहुत गुंजाइश है उसको की करते राशि तो बहुत सारे और यहीं से बोलो कि हमेशा ऐसा होता है कितनी जल्दी से बाहर निकाला जाए तो कुछ कर सकती हैं अगर उन्होंने कुछ गलत किया किया भी है तो उनको एक चांस देना चाहिए

bahut hi accha question hai aur unke tum complaint kar payegi bahut mushkil ki baat hai ki sote hain jaha par ek mahila ke khilaf complaint kar di jaati hai khaskar maar pitai ki raajneeti ki rotiyan pakai jaati hai aur aur connection chaalu hoti hai vaah ki agar kahin karo sa ram lakhan ke liye koi aise nahi sochte nahi hai but international ko sabse zyada sasti hoti hai mujhe lagta hai ki toot gaye kick soft corner rehta hai mahilaon ke liye puri society logo mein rehta hai aur ise kaise hote hain uska koi kaat raha hai iska system hum log ka bachpan se hamari mahilaon ya ladkiyon ke prati zyada hoti hai aadmi ko gaali nikalne se pehle log sochte hain lekin yusuf aur agar vaah choti bacche hain toh unka kya hoga aur agar uska ghar parivar mein agar vaah usko koi ko kisi bhi tarah se uske upar toh unka kya hoga ya phir agar usne pehle aisa kabhi nahi kiya aur yah pehla uska crime tha toh isliye kam saza ya lagta hai ki reform ki bahut gunjaiesh hai usko ki karte rashi toh bahut saare aur yahin se bolo ki hamesha aisa hota hai kitni jaldi se bahar nikaala jaaye toh kuch kar sakti hain agar unhone kuch galat kiya kiya bhi hai toh unko ek chance dena chahiye

बहुत ही अच्छा क्वेश्चन है और उनके तुम कंप्लेंट कर पाएगी बहुत मुश्किल की बात है कि सोते हैं

Romanized Version
Likes  127  Dislikes    views  3309
WhatsApp_icon
play
user

Ruchi Garg

Counsellor and Psychologist(Gold MEDALIST)

1:16

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बहुत आप क्वेश्चन बहुत अच्छा कि जब जेंडर इनिक्वालिटी की बात होती है तो पूछो को प्रताड़ित करने वाली महिलाओं की सजा कम क्यों है सबसे पहली बात तो यह है कि आज भी चीज है वह महिलाओं के प्रति जो शोषण हो रहा है उसके ज्यादा है एस कंपेयर टो जो पुरुष है उनके ऊपर हमें बिल्कुल मानती हूं कि पुरुषों के साथ भी बहुत बार गलत होता है उन पर झूठे इल्जाम भी लगते हैं उन्हें प्रताड़ित भी किया जाता है ऐसा कुछ नहीं है कि हमेशा महिलाओं पर ही जो है छुपा कभी नहीं होता ऐसा बिल्कुल भी नहीं है लेकिन यह है कि सबसे बड़ी बात तो यही है बहुत और दूसरा धीरे-धीरे जो है पहले तो इसे बिल्कुल समझा ही नहीं जाता था अब चूहे धीरे-धीरे कैसे जाने लगे हैं और सजा भी मिल रही है कम क्यों मिल रही है मैं यही तो उंगली की धीरे-धीरे लॉस चेंज हो रहे हैं और फूल जो है बिल्कुल इक्वल पनिशमेंट भी मिलेगी जो लोग ठीक लगेगा वह पनिशमेंट भी मिलेगी गुड लक

bahut aap question bahut accha ki jab gender inikwaliti ki baat hoti hai toh pucho ko pratarit karne wali mahilaon ki saza kam kyon hai sabse pehli baat toh yah hai ki aaj bhi cheez hai vaah mahilaon ke prati jo shoshan ho raha hai uske zyada hai s compare toe jo purush hai unke upar hamein bilkul maanati hoon ki purushon ke saath bhi bahut baar galat hota hai un par jhuthe illajam bhi lagte hain unhe pratarit bhi kiya jata hai aisa kuch nahi hai ki hamesha mahilaon par hi jo hai chupa kabhi nahi hota aisa bilkul bhi nahi hai lekin yah hai ki sabse badi baat toh yahi hai bahut aur doosra dhire dhire jo hai pehle toh ise bilkul samjha hi nahi jata tha ab chuhe dhire dhire kaise jaane lage hain aur saza bhi mil rahi hai kam kyon mil rahi hai yahi toh ungli ki dhire dhire loss change ho rahe hain aur fool jo hai bilkul equal punishment bhi milegi jo log theek lagega vaah punishment bhi milegi good luck

बहुत आप क्वेश्चन बहुत अच्छा कि जब जेंडर इनिक्वालिटी की बात होती है तो पूछो को प्रताड़ित कर

Romanized Version
Likes  636  Dislikes    views  8945
WhatsApp_icon
user

Dr. Guddy Kumari

UPSC Coach / Ph.d

0:36
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

प्रश्न है जब भारत में जनरल क्वालिटी की बात होती है तो पुरुषों को प्रताड़ित करने वाली महिलाओं के लिए सजा कम क्यों होती हैं ऐसी बात नहीं है कि पुरुषों को प्रताड़ित करने वाली महिलाओं के लिए सजा कम होती है कानून सबके लिए समान है और सबको एक कानून को फॉलो करना पड़ता है और कानून की जो अपराध होते हैं जिससे जो अपराध होते उनके अनुसार सजा देती हैं

prashna hai jab bharat mein general quality ki baat hoti hai toh purushon ko pratarit karne wali mahilaon ke liye saza kam kyon hoti hain aisi baat nahi hai ki purushon ko pratarit karne wali mahilaon ke liye saza kam hoti hai kanoon sabke liye saman hai aur sabko ek kanoon ko follow karna padta hai aur kanoon ki jo apradh hote hain jisse jo apradh hote unke anusaar saza deti hain

प्रश्न है जब भारत में जनरल क्वालिटी की बात होती है तो पुरुषों को प्रताड़ित करने वाली महिला

Romanized Version
Likes    Dislikes    views  47
WhatsApp_icon
user

DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

3:26
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत में जेंडर इक्वलिटी की बात आती है तो पुरुषों को प्रताड़ित करने वाली महिलाओं की जनसंख्या क्यों कम दिखाई जाती है आप ऐसा कहना चाह रहे हैं देख इसमें कोई दो राय नहीं है कि महिलाओं की सजा कम क्यों हो जाती है जिस तरह पुरुष महिलाओं को प्रताड़ित करते हैं महिलाएं भी पुरुषों को प्रताड़ित करती हूं पुरुष और स्त्री गमन पत्नियों पर शक शराब के आदी जुए के आदि और गलत धारणाओं के आदी शक और संदेह के घेरे से गिरे हुए अपनी पत्नियों के ऊपर अत्याचार करते हैं और इतना अत्याचार करते क्यों पत्नियां गाय की तरह सेटिंग रतनारी का यह रूप है दूसरी तरफ तू नारी पर पुरुष गमन होती है उच्च मंगल होती है ना नित्य से कोसों दूर होती है आधुनिक संसाधनों की होगी होती है पैसे की हवस का शिकार होती है और अपनी सुंदरता और अपने ह्यूमन की जानकारी होती है ऐसी स्त्रियां पुरुषों को बहुत प्रताड़ित करके चले इतना प्रताड़ित करती हैं कि पुरुष और खुश रहते हैं उनके सामने कमजोर पड़ जाते हैं अपनी मान मर्यादा के लिए परिवार की इज्जत के लिए परिवार की खुशी के लिए तो दो रूप देखने को मिले पिकनिक पता है जिस तरह पुरुषों के ऊपर कठोर दंड की सजाएं महिलाओं को इतना कठोर दंड नहीं मिलता जो पुरुषों को प्रताड़ित करके आप सोचें मेरी बात को गंभीरता से क्योंकि पुरुषों के समर्थन में हमारे देश के जो न्यायाधीश हैं उनकी भी सोच सिर्फ महिलाओं तक केंद्रित हो गई हुई एक डायरी में सोचकर पुरुषों को सजा सुनाते हैं जबकि वह स्वयं पुरुष एक महिला को महिला की पहचान होनी चाहिए महिला जज भी पुरुषों पर दया नहीं करती बल्कि उनको गहन अध्ययन करने के बाद सजा बनानी चाहिए टेंपो पुरुषों या महिला

bharat me gender Equality ki baat aati hai toh purushon ko pratarit karne wali mahilaon ki jansankhya kyon kam dikhai jaati hai aap aisa kehna chah rahe hain dekh isme koi do rai nahi hai ki mahilaon ki saza kam kyon ho jaati hai jis tarah purush mahilaon ko pratarit karte hain mahilaye bhi purushon ko pratarit karti hoon purush aur stree gaman patniyon par shak sharab ke adi jue ke aadi aur galat dharnaon ke adi shak aur sandeh ke ghere se gire hue apni patniyon ke upar atyachar karte hain aur itna atyachar karte kyon patniya gaay ki tarah setting ratnari ka yah roop hai dusri taraf tu nari par purush gaman hoti hai ucch mangal hoti hai na nitya se koson dur hoti hai aadhunik sansadhano ki hogi hoti hai paise ki hawas ka shikaar hoti hai aur apni sundarta aur apne human ki jaankari hoti hai aisi striyan purushon ko bahut pratarit karke chale itna pratarit karti hain ki purush aur khush rehte hain unke saamne kamjor pad jaate hain apni maan maryada ke liye parivar ki izzat ke liye parivar ki khushi ke liye toh do roop dekhne ko mile picnic pata hai jis tarah purushon ke upar kathor dand ki sajayen mahilaon ko itna kathor dand nahi milta jo purushon ko pratarit karke aap sochen meri baat ko gambhirta se kyonki purushon ke samarthan me hamare desh ke jo nyayadhish hain unki bhi soch sirf mahilaon tak kendrit ho gayi hui ek diary me sochkar purushon ko saza sunaate hain jabki vaah swayam purush ek mahila ko mahila ki pehchaan honi chahiye mahila judge bhi purushon par daya nahi karti balki unko gahan adhyayan karne ke baad saza banani chahiye tempo purushon ya mahila

भारत में जेंडर इक्वलिटी की बात आती है तो पुरुषों को प्रताड़ित करने वाली महिलाओं की जनसंख्

Romanized Version
Likes  335  Dislikes    views  3229
WhatsApp_icon
user

Dr. Shakeel Akhtar

Homeopathy Doctor

0:51
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए लोगों की मानसिकता ही कुछ ऐसी है मेंटालिटी ही कुछ ऐसी है कि भले ही एक औरत की गलती हो लेकिन वह गलती जब भी निकालेंगे पुरुष की ज्यादा गलती निकाल लेंगे यह हमारी मानसिकता की कमी है बात को सही तरह से समझने के बजाय हो जाते हैं कि भले ही औरत की गलती से आता है लेकिन फिर भी औरतों में हम जल्दी कम देखते हैं और आदमी में गलती हम ज्यादा निकालते हैं जबकि यह बात बिल्कुल गलत है जब औरत और मर्द को समान अधिकार मिलते हैं यहां हमारे भारतवर्ष में और होता भी ऐसा ही है क्या अधिकार बराबर ही होते हैं तो फिर दोनों को सदा भी बराबर होनी चाहिए लेकिन ऐसा होता नहीं है

dekhiye logo ki mansikta hi kuch aisi hai mentalaity hi kuch aisi hai ki bhale hi ek aurat ki galti ho lekin vaah galti jab bhi nikalenge purush ki zyada galti nikaal lenge yah hamari mansikta ki kami hai baat ko sahi tarah se samjhne ke bajay ho jaate hain ki bhale hi aurat ki galti se aata hai lekin phir bhi auraton me hum jaldi kam dekhte hain aur aadmi me galti hum zyada nikalate hain jabki yah baat bilkul galat hai jab aurat aur mard ko saman adhikaar milte hain yahan hamare bharatvarsh me aur hota bhi aisa hi hai kya adhikaar barabar hi hote hain toh phir dono ko sada bhi barabar honi chahiye lekin aisa hota nahi hai

देखिए लोगों की मानसिकता ही कुछ ऐसी है मेंटालिटी ही कुछ ऐसी है कि भले ही एक औरत की गलती हो

Romanized Version
Likes  219  Dislikes    views  1894
WhatsApp_icon
user

Dr.Manoj kumar Pandey

M.D (A.M) ,Astrologer ,9044642070

1:14
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारतवर्ष में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की सजा कर्म कम नहीं है पर क्योंकि हम ज्यादा जानते नहीं हैं इसलिए हमें लगता है कि सारी सजाएं पुरुषों के लिए संविधान में स्त्री-पुरुष का भेद नहीं जो कोई कर्म करेगा उसका फल है हमारे संविधान में किस तारीख को थोड़ा एक सॉफ्ट माना गया कि बच्चे भी हैं उसके और सरल है और कहा है कि ने अधीन है दया भाव आ जाती परेशानी है कि कानून में लिखा है कि इस तरह किसी का मर्डर कर दे तो उसको सजा नहीं ऐसा नहीं है समझ करके न्याय में पूरा छूट मिल जाती है कि नहीं इसके बच्चे भी मिताली कहां जाएगी तू तो जेल काट सकता है अगर यह लोग यदि बच्चे भूखे मर जाएंगे तो हल्का से उसको दया के भाव से उसके सजा जाति नहीं तो दोनों के लिए समान सजा है आप परेशान हो आईडी आपसे कोई महिला परेशान कर रही है तो बताइए फोन करिए मैं तमाम रास्ते बता दूंगा उसको सजा मिलेगी कोई दिक्कत नहीं है धन्यवाद

bharatvarsh me purushon ki tulna me mahilaon ki saza karm kam nahi hai par kyonki hum zyada jante nahi hain isliye hamein lagta hai ki saari sajayen purushon ke liye samvidhan me stree purush ka bhed nahi jo koi karm karega uska fal hai hamare samvidhan me kis tarikh ko thoda ek soft mana gaya ki bacche bhi hain uske aur saral hai aur kaha hai ki ne adheen hai daya bhav aa jaati pareshani hai ki kanoon me likha hai ki is tarah kisi ka murder kar de toh usko saza nahi aisa nahi hai samajh karke nyay me pura chhut mil jaati hai ki nahi iske bacche bhi mitali kaha jayegi tu toh jail kaat sakta hai agar yah log yadi bacche bhukhe mar jaenge toh halka se usko daya ke bhav se uske saza jati nahi toh dono ke liye saman saza hai aap pareshan ho id aapse koi mahila pareshan kar rahi hai toh bataiye phone kariye main tamaam raste bata dunga usko saza milegi koi dikkat nahi hai dhanyavad

भारतवर्ष में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की सजा कर्म कम नहीं है पर क्योंकि हम ज्यादा जानत

Romanized Version
Likes  47  Dislikes    views  775
WhatsApp_icon
user

Jyotsna

Homemaker

0:51
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इक्वलिटी के होने के बावजूद भी सजा देने के लिए कम महिलाओं को कम सजा दी जाए पुरुषों की अपेक्षा ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मानसिक रूप से तो वह पुरुष से ज्यादा कहीं ज्यादा ताकतवर हो सकती हैं लेकिन शारीरिक रूप से वह कमजोर ही होती है उनका स्ट्रक्चर ऐसा होता है शरीर का मनुष्य सेवर कमजोर ही तो इसलिए शारीरिक संरचना के आधार पर स्त्री और पुरुष को सजा के लिए एक जैसा प्रावधान नहीं है ऐसा इसीलिए होगा

Equality ke hone ke bawajud bhi saza dene ke liye kam mahilaon ko kam saza di jaaye purushon ki apeksha aisa isliye hota hai kyonki mansik roop se toh vaah purush se zyada kahin zyada takatwar ho sakti hain lekin sharirik roop se vaah kamjor hi hoti hai unka structure aisa hota hai sharir ka manushya sevar kamjor hi toh isliye sharirik sanrachna ke aadhar par stree aur purush ko saza ke liye ek jaisa pravadhan nahi hai aisa isliye hoga

इक्वलिटी के होने के बावजूद भी सजा देने के लिए कम महिलाओं को कम सजा दी जाए पुरुषों की अपेक्

Romanized Version
Likes  10  Dislikes    views  217
WhatsApp_icon
user
0:44
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यहां पर फिर वहीं पुरुषों को प्रताड़ित करने वाली महिलाओं के लिए जो सजा कम होती है उनकी सुंदरता को देखकर क्या जाता है क्योंकि महिलाएं बहुत कम ऑफेंस करती है और आपने देखा भी होगा कि जब आपके कोर्ट वगैरह में जो कानून का जो कानून की जो तराजू लेकर खड़ी है वही की आंखों पर पट्टी बंधी है यह शो करती है कि महिला कभी भी खुली आंखें होकर इंजस्टिस नहीं कर सकती है इवन बंद आंखों से भी बहुत राजू खुलती है तो इसीलिए महिलाओं को सजा कम मिलती है और संवेदनशीलता पर चलते हुए महिलाओं की कुर्बानियों को देखते हुए यह और

yahan par phir wahi purushon ko pratarit karne wali mahilaon ke liye jo saza kam hoti hai unki sundarta ko dekhkar kya jata hai kyonki mahilaye bahut kam offense karti hai aur aapne dekha bhi hoga ki jab aapke court vagera me jo kanoon ka jo kanoon ki jo taraju lekar khadi hai wahi ki aakhon par patti bandhi hai yah show karti hai ki mahila kabhi bhi khuli aankhen hokar injustice nahi kar sakti hai even band aakhon se bhi bahut raju khulti hai toh isliye mahilaon ko saza kam milti hai aur samvedansheelata par chalte hue mahilaon ki kurbaniyon ko dekhte hue yah aur

यहां पर फिर वहीं पुरुषों को प्रताड़ित करने वाली महिलाओं के लिए जो सजा कम होती है उनकी सुंद

Romanized Version
Likes  9  Dislikes    views  139
WhatsApp_icon

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जब भारत में जैन जेंडर इक्वलिटी की बात होती है तो पुरुषों को प्रसारित करने वाली महिलाओं के लिए सजा कम क्यों होती है इसके पीछे महत्वपूर्ण कारण यह है कि हमारा देश जो है पुरुष प्रधान देश पुरुष प्रधान देश होने के कारण यदि कोई दोषपूर्ण बनता है तो वह पहली प्राथमिकता पुरुष पर आती है हमारे देश में प्राथमिकता है उनके अनुसार लेडीस फर्स्ट अर्थात सुविधाओं में लेडिस वॉच समस्या के समाधान में लेडीस फर्स्ट महिला को सपोर्ट दिया गया है आरक्षण बताओ भी सपोर्ट किया गया है जबकि पुरुष के साथ में ऐसा नहीं है पुरुष पुरुष को अपने आप में सफल माना गया है और महिला को अबला माना गया है और अबला होने के नाते हमारे संविधान में ऐसी व्यवस्था रखी गई है कि वह अबला है इसलिए उस पर कोई भी अत्याचार किए जा सकते हैं जबकि यह कहीं भी दूर-दूर तक नहीं है कि पुरुष भी अबला हो सकता है और उस पर भी महिला अत्याचार कर सकती है और यदि कोई अत्याचार करती भी है तो उसका पक्ष पुरुष का पक्ष कभी भी मजबूत नहीं रहता महिलाएं उसमें मजबूत रहती है और दोष आरोपित पुरुष को ही किया जाता है और उसकी सजा पुरुष को भुगतनी पड़ती है जबकि महिलाएं इस में शेर से और महिला को कोई किसी भी प्रकार का धंधा हमारी व्यवस्था में नहीं किया गया

jab bharat me jain gender Equality ki baat hoti hai toh purushon ko prasarit karne wali mahilaon ke liye saza kam kyon hoti hai iske peeche mahatvapurna karan yah hai ki hamara desh jo hai purush pradhan desh purush pradhan desh hone ke karan yadi koi doshpurn banta hai toh vaah pehli prathamikta purush par aati hai hamare desh me prathamikta hai unke anusaar ladies first arthat suvidhaon me ledis watch samasya ke samadhan me ladies first mahila ko support diya gaya hai aarakshan batao bhi support kiya gaya hai jabki purush ke saath me aisa nahi hai purush purush ko apne aap me safal mana gaya hai aur mahila ko abhla mana gaya hai aur abhla hone ke naate hamare samvidhan me aisi vyavastha rakhi gayi hai ki vaah abhla hai isliye us par koi bhi atyachar kiye ja sakte hain jabki yah kahin bhi dur dur tak nahi hai ki purush bhi abhla ho sakta hai aur us par bhi mahila atyachar kar sakti hai aur yadi koi atyachar karti bhi hai toh uska paksh purush ka paksh kabhi bhi majboot nahi rehta mahilaye usme majboot rehti hai aur dosh aropit purush ko hi kiya jata hai aur uski saza purush ko bhugatani padti hai jabki mahilaye is me sher se aur mahila ko koi kisi bhi prakar ka dhandha hamari vyavastha me nahi kiya gaya

जब भारत में जैन जेंडर इक्वलिटी की बात होती है तो पुरुषों को प्रसारित करने वाली महिलाओं के

Romanized Version
Likes  7  Dislikes    views  126
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपने क्वेश्चन पूछा है जब भारत में जेंडर इक्वलिटी की बात होती है तो पुरुषों को प्रताड़ित करने वाली महिलाओं के कम क्यों होती है इसका बहुत साधारण का जवाब है आप खुद ही सोचें कि जब किसी खेल में आप जाते हैं उसमें स्त्री बजाती है पुरुष भी जाता है तो आप देखते होंगे आप शॉटपुट को ही ले लीजिए लिए बदन होता है 5kg लेकिन महिलाओं के लिए क्या होता है सिर्फ 3:30 केजी इसका मतलब उन्हें सिर्फ सजा में ही नहीं उन्हें खेल में समय रिजर्वेशन से मिल जाती है

aapne question poocha hai jab bharat me gender Equality ki baat hoti hai toh purushon ko pratarit karne wali mahilaon ke kam kyon hoti hai iska bahut sadhaaran ka jawab hai aap khud hi sochen ki jab kisi khel me aap jaate hain usme stree bajati hai purush bhi jata hai toh aap dekhte honge aap shatput ko hi le lijiye liye badan hota hai 5kg lekin mahilaon ke liye kya hota hai sirf 3 30 KG iska matlab unhe sirf saza me hi nahi unhe khel me samay reservation se mil jaati hai

आपने क्वेश्चन पूछा है जब भारत में जेंडर इक्वलिटी की बात होती है तो पुरुषों को प्रताड़ित कर

Romanized Version
Likes  8  Dislikes    views  90
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जब भारत में जेंडर इक्वलिटी की बात होती है तो हमेशा पुरुषों से महिलाओं को एक उत्तम वर्ग दिया गया है क्योंकि हमारे यहां भारत में क्या है कि एक महिला को ना एक अबला का रूप दे दिया क्या बेकार ही बेसहारा हमारे सन में भारत के संविधान का कुछ नहीं हो सकता ना होगा शायद अब आप यह सोच रहा हूं मैं ऐसा क्यों बोल रहा हूं क्योंकि मैं जो बोल रहा हूं वह सही बोल रहा हूं यहां कब सच को झूठ झूठ को सच तो इसमें महिला या पुरुष कुछ नहीं करता है इसमें हमारा कानून है सरकार कॉन्स्टिट्यूशन तो एक नाम का बनाया गया ऐसा लगता है सरकार में इतनी छोटे दे दी गई है इतने प्रोविजन दे दिए गए हैं इतने राइट दे दिए गए हैं लेडीस को कि वह अब अबला नहीं है वह जो बोले वह सही उसमें कोर्ट प्रूफ भी नहीं मानता ऐसा नहीं है जब ह्यूमन जब मानव जीवन बोला गया तो सब कोई कॉमेंट रखना चाहिए ना यह हमारा नहीं है पहले महिला बोलती थी लेकिन आज महिला क्यों नहीं बोलती क्योंकि उन पर ह्यूमन और 100 से ज्यादा अधिकार लिए बैठी वह जो चाहे वह कर देती हैं ऐसा ही हो चैन गलत इसका वह लोग फायदा उठा रही इसलिए उनकी सजा भी कम कर दी गई उनको हर चीज में सजा मैं उनको उनके लिए फ्री ऑफ लॉयल होता है कोर्ट में सब चीज सारे प्रोविजन जितने भी हैं वह नहीं दे दी गई तो यह हमारे भारत के कौन से ट्यूशन का कुछ नहीं होने वाला या महिला पहले भी राज करती थी आज भी करेंगे और आने वाले टाइम नई एक इंडिकेट वर्क कोई नहीं मैं तो बता रहा हूं इस चीज को चॉइस क्वेश्चन की नींव है जो पूछा गया है उस चीज को तो मुझे नहीं लगता ना महिला कमजोर है आज जेंट्स बस यह है अब वह अपने राइट का गलत फायदा उठाती

jab bharat me gender Equality ki baat hoti hai toh hamesha purushon se mahilaon ko ek uttam varg diya gaya hai kyonki hamare yahan bharat me kya hai ki ek mahila ko na ek abhla ka roop de diya kya bekar hi besahara hamare san me bharat ke samvidhan ka kuch nahi ho sakta na hoga shayad ab aap yah soch raha hoon main aisa kyon bol raha hoon kyonki main jo bol raha hoon vaah sahi bol raha hoon yahan kab sach ko jhuth jhuth ko sach toh isme mahila ya purush kuch nahi karta hai isme hamara kanoon hai sarkar Constitution toh ek naam ka banaya gaya aisa lagta hai sarkar me itni chote de di gayi hai itne provision de diye gaye hain itne right de diye gaye hain ladies ko ki vaah ab abhla nahi hai vaah jo bole vaah sahi usme court proof bhi nahi maanta aisa nahi hai jab human jab manav jeevan bola gaya toh sab koi comment rakhna chahiye na yah hamara nahi hai pehle mahila bolti thi lekin aaj mahila kyon nahi bolti kyonki un par human aur 100 se zyada adhikaar liye baithi vaah jo chahen vaah kar deti hain aisa hi ho chain galat iska vaah log fayda utha rahi isliye unki saza bhi kam kar di gayi unko har cheez me saza main unko unke liye free of loyal hota hai court me sab cheez saare provision jitne bhi hain vaah nahi de di gayi toh yah hamare bharat ke kaun se tuition ka kuch nahi hone vala ya mahila pehle bhi raj karti thi aaj bhi karenge aur aane waale time nayi ek indicate work koi nahi main toh bata raha hoon is cheez ko choice question ki neev hai jo poocha gaya hai us cheez ko toh mujhe nahi lagta na mahila kamjor hai aaj gents bus yah hai ab vaah apne right ka galat fayda uthaati

जब भारत में जेंडर इक्वलिटी की बात होती है तो हमेशा पुरुषों से महिलाओं को एक उत्तम वर्ग दिय

Romanized Version
Likes  5  Dislikes    views  127
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

समाज में भले ही पिपली जिंदल को क्वालिटी माना गया है लेकिन कहीं न कहीं पुरुष और महिला के मामले में पार्शियल्टी दिखाई जाने जाती है जैसे कि बता दे अगर घरेलू हिंसा में महिलाएं मतलब कि घरेलू हिंसा में महिला ही आती है कि महिलाओं के ऊपर घरेलू हिंसा होती है यह बात है सही हंड्रेड परसेंट पांच परसेंट दो परसेंट हम कह दे कि वह घरेलू हिंसा में महिला का हाथ ना कर मतलब महिला घरेलू हिंसा करती है पुरुषों पर ऐसे सोशल यह बहुत ही आम बात है कल ही मैं टीवी देख रही थी तो सावधान इंडिया में 1 एपिसोड आया जिसमें एक बहु पूरे परिवार को परेशान करके तंग करके रखी थी तो यह एक प्रकार से बोला जाए कि यह महिला द्वारा किया गया प्रताड़ना है पुरुषों के ऊपर और उसके परिवार वालों की सजा कम हो जाती है क्योंकि पहले तो कोई विश्वास ही नहीं करता पहले तो सब यही कहते हैं कि ससुराल वालों ने ही किया होगा क्योंकि बदनाम तो हो गए हैं ससुराल वाले ने अपनी चाल से ही इतना उन्होंने कर दिया है महिलाओं के ऊपर तू बदनाम तो हो गए हैं और चुपके से वह बहुत ही जैसे सॉन्ग प्रताड़ित महिला महिलाओं महिलाओं में से 100 लोगों में से देखा जाए पंचानवे महिला प्रताड़ित होती हैं तो पांच परसेंट पुरुष पर इतना ही अंतर है मतलब इतना है देखियो है तो उसमें चाहे पुलिस हो या समाज हो मानता हूं सिंह बात रही महिला की तो महिला को हर जगह आरक्षण होता है और महिला को एक यह देखा जाता है कि महिला है जिसमें बतिया रहे यार महिलाओं को मत बोलो लड़कियां लड़कों को मत बोलो यह वह करके थोड़ा थोड़ी जाता है कि इनको कोई भारी सुमन उठाना हो तो महिलाएं ज्यादा जल्दी नहीं आती है यह बात सही है और सही भी है कि नहीं उठाना चाहिए तो इसी में ही आपको देखोगी और छोटे-मोटे से ही प्राप्त होता है महिलाओं को फिर धीरे-धीरे यह प्रताड़ना तक होता है कि महिलाओं को ज्यादा मत प्रताड़ित कितनी सजा नहीं मिलती जितनी पुरुषों को मिलती है अब पार्टी की सजा महिलाओं को नहीं मिलती है वह सिर्फ पुरुषों को ही मिलती है यही होता है ना पार्शियल्टी महिला कोई कमजोर समझ लिया जाता है भले ही थे कि हम कमजोर नहीं है बात करती महिलाएं लेकिन हर जगह लेने में तो आंखें लेकिन अगर कोई गलत काम करते हैं तो सजावट करने में आगे नहीं रखती है तो यह है तो महिलाओं को सजा अगर गलत काम करती हैं तो सजा दोनों को ही देना चाहिए क्योंकि जब हम कहते हैं हमको लाए ट्रिपल सजा मिलनी चाहिए मेरे तरफ से और नहीं लेना है तो गलती ही क्यों करो यार बहनों आज के बहने अगर हमारे भाई लोग सब सही हो रहे हैं धीरे-धीरे समाज में तो उन्हीं को उन सिधाई का फायदा ना उठाएं महिलाएं और महिला मतलब कि स्त्री मतलब नारी मतलब छमा होती है वह हमेशा सब कुछ सही करके लोगों को सुधार की है वह किसी को सहने के लिए और अपने अंदर भरी बूटी नहीं करती है कि तुम मेरा हो वह दूसरों का करती है और दूसरे को कृतज्ञ करती है ना कि दूसरे के ऊपर अत्याचार करती है

samaj me bhale hi pipli jindal ko quality mana gaya hai lekin kahin na kahin purush aur mahila ke mamle me parshiyalti dikhai jaane jaati hai jaise ki bata de agar gharelu hinsa me mahilaye matlab ki gharelu hinsa me mahila hi aati hai ki mahilaon ke upar gharelu hinsa hoti hai yah baat hai sahi hundred percent paanch percent do percent hum keh de ki vaah gharelu hinsa me mahila ka hath na kar matlab mahila gharelu hinsa karti hai purushon par aise social yah bahut hi aam baat hai kal hi main TV dekh rahi thi toh savdhaan india me 1 episode aaya jisme ek bahu poore parivar ko pareshan karke tang karke rakhi thi toh yah ek prakar se bola jaaye ki yah mahila dwara kiya gaya prataadana hai purushon ke upar aur uske parivar walon ki saza kam ho jaati hai kyonki pehle toh koi vishwas hi nahi karta pehle toh sab yahi kehte hain ki sasural walon ne hi kiya hoga kyonki badnaam toh ho gaye hain sasural waale ne apni chaal se hi itna unhone kar diya hai mahilaon ke upar tu badnaam toh ho gaye hain aur chupake se vaah bahut hi jaise song pratarit mahila mahilaon mahilaon me se 100 logo me se dekha jaaye panchanave mahila pratarit hoti hain toh paanch percent purush par itna hi antar hai matlab itna hai dekhiyo hai toh usme chahen police ho ya samaj ho maanta hoon Singh baat rahi mahila ki toh mahila ko har jagah aarakshan hota hai aur mahila ko ek yah dekha jata hai ki mahila hai jisme batiya rahe yaar mahilaon ko mat bolo ladkiya ladko ko mat bolo yah vaah karke thoda thodi jata hai ki inko koi bhari suman uthana ho toh mahilaye zyada jaldi nahi aati hai yah baat sahi hai aur sahi bhi hai ki nahi uthana chahiye toh isi me hi aapko dekhogi aur chote mote se hi prapt hota hai mahilaon ko phir dhire dhire yah prataadana tak hota hai ki mahilaon ko zyada mat pratarit kitni saza nahi milti jitni purushon ko milti hai ab party ki saza mahilaon ko nahi milti hai vaah sirf purushon ko hi milti hai yahi hota hai na parshiyalti mahila koi kamjor samajh liya jata hai bhale hi the ki hum kamjor nahi hai baat karti mahilaye lekin har jagah lene me toh aankhen lekin agar koi galat kaam karte hain toh sajawat karne me aage nahi rakhti hai toh yah hai toh mahilaon ko saza agar galat kaam karti hain toh saza dono ko hi dena chahiye kyonki jab hum kehte hain hamko laye triple saza milani chahiye mere taraf se aur nahi lena hai toh galti hi kyon karo yaar bahnon aaj ke behne agar hamare bhai log sab sahi ho rahe hain dhire dhire samaj me toh unhi ko un sidhai ka fayda na uthaye mahilaye aur mahila matlab ki stree matlab nari matlab chama hoti hai vaah hamesha sab kuch sahi karke logo ko sudhaar ki hai vaah kisi ko sahane ke liye aur apne andar bhari buti nahi karti hai ki tum mera ho vaah dusro ka karti hai aur dusre ko kritagya karti hai na ki dusre ke upar atyachar karti hai

समाज में भले ही पिपली जिंदल को क्वालिटी माना गया है लेकिन कहीं न कहीं पुरुष और महिला के मा

Romanized Version
Likes  10  Dislikes    views  152
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जेंडर इक्वलिटी की बात तो लगभग हर देश में हो रही है होती है और अगर बहुत नशे से भी में हमारे भारत की बात करें हम अपने देश की बात करें तो यहां पर दिक्कत यह एक बहुत तो एक फिल्म की बहुत फेमस डायलॉग है कि किसी को इतना भी मत डराओ किधर ही खत्म हो जाए जन्म से लेकर और मरने तक एक नारी की जिंदगी हमेशा दूसरों पर आधारित होती है दूसरों के बारे में सोचना दूसरे के बारे में कहना बस सुबह उल्टी चीज है कि अगर वह कभी अपने बारे में सोचो अपने बारे में खुद के सपने के बारे में तो वहां पर लोगों का जो नजरिया होता है ना वह बदल जाता है सरकार की बहुमत की बनती है तू यह सही बात है कि पुरुष भी प्रताड़ित होते हैं महिलाओं से बस वह कभी-कभी का केस है हर घर में नहीं होता है जबकि औरतें हर घर में प्रताड़ित होती हैं कोई भी ऐसी औरत नहीं है जो यह दावा कर दे कि मैं जीवन में एक बार भी घरेलू हिंसा का शिकार नहीं हुई किसी ने हाथ नहीं उठाया या आप किसी ने मानसिक रूप से प्रताड़ित नहीं किया ऐसा कोई कोई भी औरत दावा कर ही नहीं सकती है तो जब संविधान बनाया जब कानून की रचना हुई उस वक्त जो बहुमत था मोहम्मद यही है कि औरतों पर ज्यादा होता है और ज्यादा प्रताड़ित होती है हर मामले में छेड़खानी का मामला हो अगर आप और केस स्टडी करो अगर आप बहुत गहरा से पढ़ो जिस पर मैं मैं ज्यादा ध्यान देती हूं तो वहां पर ही होता है कि शोषण शारीरिक शोषण औरतों का ज्यादा होता है मानसिक शोषण और तो क्या फायदा होता है लड़कियों का होता है पढ़ने गया तो रोड पर छेड़खानी या होती है कपड़ों पर कमेंट में करते कमेंट मतलब हर जगह 130 रहती है जो छुट्टी रहती है इसलिए यहां पर ज्यादा बने हैं और अब धीरे-धीरे जैसे-जैसे चीजें सामने आ रही हैं कि हां पुरुषों पर भी अत्याचार हो रहा है कुछ महिलाएं ऐसा कर रही है जब कानून के सामने जो चीज आएगी विकट परिस्थिति आएगी उसके हिसाब से कानून बनेगा तो वह कानून बन रहा है यह कैसी सजा है कम है ऐसी कोई बात नहीं है आप बाद में कुछ कैसे जा रहे हैं उसके आधार पर बन रहा है कि चलो नियम बना और अंतर क्या है औरतों की और मर्दों की स्थिति में हम 1 वर्ष उदाहरण ले लेते हैं तलाक का औरत और पति पत्नी में जब तलाक हो जाता है तो पति के लिए लाइफ में आगे बढ़ना आसान होता है कि वह आर्थिक रूप से सही होता है वह कोई भी नौकरी कर सकता है किसी भी वक्त जा सकता है आ सकता है या फिर वह अपने आर्थिक संपन्नता के आधार पर तुरंत विवाह भी कर सकता है लेकिन वही नगरिया औरतों के लिए अलग हमारे समाज के लोगों का कहते वाले हैं कि हम पढ़े लिखे हैं यह हमको है लेकिन ऐसा कुछ है नहीं अरे डरो सी है सेकंड हैंड है वह क्या सेक्सुअली सेटिस्फाइड नहीं कर पाएगी वह छोड़ी हुई है क्यों छोड़ा गया है तू बहुत सारी चीजें सामने आ जाती है जिसकी वजह से बहुत कम ऐसी होती है जो डिवोर्स के बाद आगे बढ़ पाती है हमें हमारे लिए एक लिमिट समय है कि हाइट में देख सकती तुम घर से बाहर रह सकते हो वरना तुम सुरक्षित नहीं हो इसकी वजह से हो सकता है सजा मिलने के बाद वैसे भी उसकी जिंदगी बर्बाद है योगेश में सजा पाए उसकी जिंदगी तो वैसे भी बर्बाद है तुम छोड़कर बर्बाद रखो यह साथ रहेंगे रहो बस मेरी नजर में बस यही है

gender Equality ki baat toh lagbhag har desh me ho rahi hai hoti hai aur agar bahut nashe se bhi me hamare bharat ki baat kare hum apne desh ki baat kare toh yahan par dikkat yah ek bahut toh ek film ki bahut famous dialogue hai ki kisi ko itna bhi mat darao kidhar hi khatam ho jaaye janam se lekar aur marne tak ek nari ki zindagi hamesha dusro par aadharit hoti hai dusro ke bare me sochna dusre ke bare me kehna bus subah ulti cheez hai ki agar vaah kabhi apne bare me socho apne bare me khud ke sapne ke bare me toh wahan par logo ka jo najariya hota hai na vaah badal jata hai sarkar ki bahumat ki banti hai tu yah sahi baat hai ki purush bhi pratarit hote hain mahilaon se bus vaah kabhi kabhi ka case hai har ghar me nahi hota hai jabki auraten har ghar me pratarit hoti hain koi bhi aisi aurat nahi hai jo yah daawa kar de ki main jeevan me ek baar bhi gharelu hinsa ka shikaar nahi hui kisi ne hath nahi uthaya ya aap kisi ne mansik roop se pratarit nahi kiya aisa koi koi bhi aurat daawa kar hi nahi sakti hai toh jab samvidhan banaya jab kanoon ki rachna hui us waqt jo bahumat tha muhammad yahi hai ki auraton par zyada hota hai aur zyada pratarit hoti hai har mamle me chedkhani ka maamla ho agar aap aur case study karo agar aap bahut gehra se padho jis par main main zyada dhyan deti hoon toh wahan par hi hota hai ki shoshan sharirik shoshan auraton ka zyada hota hai mansik shoshan aur toh kya fayda hota hai ladkiyon ka hota hai padhne gaya toh road par chedkhani ya hoti hai kapdo par comment me karte comment matlab har jagah 130 rehti hai jo chhutti rehti hai isliye yahan par zyada bane hain aur ab dhire dhire jaise jaise cheezen saamne aa rahi hain ki haan purushon par bhi atyachar ho raha hai kuch mahilaye aisa kar rahi hai jab kanoon ke saamne jo cheez aayegi vikat paristhiti aayegi uske hisab se kanoon banega toh vaah kanoon ban raha hai yah kaisi saza hai kam hai aisi koi baat nahi hai aap baad me kuch kaise ja rahe hain uske aadhar par ban raha hai ki chalo niyam bana aur antar kya hai auraton ki aur mardon ki sthiti me hum 1 varsh udaharan le lete hain talak ka aurat aur pati patni me jab talak ho jata hai toh pati ke liye life me aage badhana aasaan hota hai ki vaah aarthik roop se sahi hota hai vaah koi bhi naukri kar sakta hai kisi bhi waqt ja sakta hai aa sakta hai ya phir vaah apne aarthik sampannata ke aadhar par turant vivah bhi kar sakta hai lekin wahi nagaria auraton ke liye alag hamare samaj ke logo ka kehte waale hain ki hum padhe likhe hain yah hamko hai lekin aisa kuch hai nahi are daro si hai second hand hai vaah kya sexual setisfaid nahi kar payegi vaah chodi hui hai kyon choda gaya hai tu bahut saari cheezen saamne aa jaati hai jiski wajah se bahut kam aisi hoti hai jo divorce ke baad aage badh pati hai hamein hamare liye ek limit samay hai ki height me dekh sakti tum ghar se bahar reh sakte ho varna tum surakshit nahi ho iski wajah se ho sakta hai saza milne ke baad waise bhi uski zindagi barbad hai Yogesh me saza paye uski zindagi toh waise bhi barbad hai tum chhodkar barbad rakho yah saath rahenge raho bus meri nazar me bus yahi hai

जेंडर इक्वलिटी की बात तो लगभग हर देश में हो रही है होती है और अगर बहुत नशे से भी में हमारे

Romanized Version
Likes  3  Dislikes    views  95
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल पुरुषों के प्रताड़ित करने वाली महिलाओं की अपेक्षा महिलाओं को सजा कम होती है जेंडर इक्वलिटी की बात होती है मैं आपको बता दूं लेकर जी की भारत में कानून में जेंडर इक्वलिटी दोनों को बराबर है किसी को भी उसकी महिला और पुरुष होने से सजा में कोई तब्दीली नहीं है हां सिर्फ फांसी की सजा महिलाओं के लिए मुकर्रर नहीं की जानी है इस पर भी विचार चल रहा है और आज तक भारत में किसी महिला को फांसी नहीं दी गई अभी दी जाने वाली थी राजीव गांधी हत्याकांड में फिर भी रोक दिया गया है जहां तक औरतों को प्रताड़ित करने वाली महिलाओं के लिए सजा का प्रावधान है तो वह बराबर है और उसी तरह से है जैसे कि पुरुष महिला को प्रताड़ित करता है इस तरह कोई यह हिंदू नहीं है कि पुरुष को प्रताड़ित करने वाली महिलाओं को कम सजा मिली फिलहाल सवाल आपका बहुत अच्छा और मुद्दा भी बहुत अच्छा है कि कम से कम और उसको एक आधार मिल रहा है आप जैसे बातें संपन्न व्यक्तियों के माध्यम से

aapka sawaal purushon ke pratarit karne wali mahilaon ki apeksha mahilaon ko saza kam hoti hai gender Equality ki baat hoti hai main aapko bata doon lekar ji ki bharat me kanoon me gender Equality dono ko barabar hai kisi ko bhi uski mahila aur purush hone se saza me koi tabdili nahi hai haan sirf fansi ki saza mahilaon ke liye mukarrar nahi ki jani hai is par bhi vichar chal raha hai aur aaj tak bharat me kisi mahila ko fansi nahi di gayi abhi di jaane wali thi rajeev gandhi hatyakand me phir bhi rok diya gaya hai jaha tak auraton ko pratarit karne wali mahilaon ke liye saza ka pravadhan hai toh vaah barabar hai aur usi tarah se hai jaise ki purush mahila ko pratarit karta hai is tarah koi yah hindu nahi hai ki purush ko pratarit karne wali mahilaon ko kam saza mili filhal sawaal aapka bahut accha aur mudda bhi bahut accha hai ki kam se kam aur usko ek aadhar mil raha hai aap jaise batein sampann vyaktiyon ke madhyam se

आपका सवाल पुरुषों के प्रताड़ित करने वाली महिलाओं की अपेक्षा महिलाओं को सजा कम होती है जें

Romanized Version
Likes  12  Dislikes    views  189
WhatsApp_icon
qIcon
ask
QuestionsProfiles

Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is available in 11 Indian languages. Users ask questions on 100s of topics related to love, life, career, politics, religion, sports, personal care etc. We have 1000s of experts from different walks of life answering questions on the Vokal App. People can also ask questions directly to experts apart from posting a question to the entire answering community. If you are an expert or are great at something, we invite you to join this knowledge sharing revolution and help India grow. Download the Vokal App!