फ़ेमिनिज़म का क्या महत्व है क्या यह ज़रूरी है?...


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Vinod uttrakhand Tiwari

Author,You Tuber(Thoght Of सक्सेस)

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ऐसे और सवाल
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Nikhil Ranjan

HoD - NIELIT

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देसी रसिया का प्रश्न फैमिली का क्या महत्व है क्या यह जरूरी है तो बिल्कुल बताना चाहेंगे आजकल के दौर में हर कोई अपने उसके बातें करता है नारीवाद की बातें करता है तो यहां पर नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा देना ही चाहिए क्योंकि जो कि समाज है समाज पुरुष प्रधान समाज के बात करते हैं पहले भी था आज भी है और सालों साल रहेगा भी तो यहां पर जो नारी के अधिकार हैं उनको जो सशक्त करने की जरूरत है उसको लेकर के फैमिली सोसाइटी ऑफ असाइनमेंट कल्चर की शुरुआत हुई और वह कमोड भी हो रहा है धीरे-धीरे गवर्नमेंट के द्वारा भी सोसाइटीज के द्वारा भी एनजीओस के द्वारा और उस चीज को बढ़ावा देना भी चाहिए तभी एक सशक्त समाज की परिकल्पना हम पूरी कर सकते हैं धन्यवाद

desi rasiya ka prashna family ka kya mahatva hai kya yah zaroori hai toh bilkul bataana chahenge aajkal ke daur mein har koi apne uske batein karta hai narivad ki batein karta hai toh yahan par nari shshaktikaran ko badhawa dena hi chahiye kyonki jo ki samaaj hai samaaj purush pradhan samaaj ke baat karte hain pehle bhi tha aaj bhi hai aur salon saal rahega bhi toh yahan par jo nari ke adhikaar hain unko jo sashakt karne ki zaroorat hai usko lekar ke family society of assignment culture ki shuruaat hui aur vaah kamod bhi ho raha hai dhire dhire government ke dwara bhi societies ke dwara bhi enajios ke dwara aur us cheez ko badhawa dena bhi chahiye tabhi ek sashakt samaaj ki parikalpana hum puri kar sakte hain dhanyavad

देसी रसिया का प्रश्न फैमिली का क्या महत्व है क्या यह जरूरी है तो बिल्कुल बताना चाहेंगे आजक

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Dr. KRISHNA CHANDRA

Rehabilitation Psychologist

1:20

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अगर हम अर्धनारीश्वर को मांगते हैं तो हमें ओवन फॉर कन्याओं का स्त्रियों का पत्नियों का माताओं का सम्मान करना पड़ेगा और जहां पर कन्याओं का बलात्कार हो उसको 2-butanol सेट करना पड़ेगा हमारे यहां धन्यवाद के साथ फिर भी हो जाए हम उसका विरोध नहीं करते यह जेंडर जस्टिस के खिलाफ है वास्तव में जनरल दसवीं का प्रश्न ही नहीं होना चाहिए था हिंदुस्तान में लेकिन जब विभेद तब शुरू हुआ जब जनधन के अंदर दिगंबर पितांबर हमारी जरूरत खाती समाज की उसको तोड़ने के लिए निकल पड़े और उनको डिलीट करना शुरू किया

agar hum ardhnareshwar ko mangate hain toh hamein oven for kanyaon ka sthreeyon ka patniyon ka mataon ka sammaan karna padega aur jahan par kanyaon ka balatkar ho usko 2 butanol set karna padega hamare yahan dhanyavad ke saath phir bhi ho jaaye hum uska virodh nahi karte yah gender justice ke khilaf hai vaastav mein general dasavi ka prashna hi nahi hona chahiye tha Hindustan mein lekin jab vibhed tab shuru hua jab jandhan ke andar digambar pitambar hamari zaroorat khati samaaj ki usko todne ke liye nikal pade aur unko delete karna shuru kiya

अगर हम अर्धनारीश्वर को मांगते हैं तो हमें ओवन फॉर कन्याओं का स्त्रियों का पत्नियों का मा

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

1:43
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फिल्म दिल का क्या महत्व है चाहिए जरूरी है जी हां यह जरूरी है और इसको बढ़ावा मिलना सदियों से हमारे दबाकर रखा गया है इसे अपनी का विचार घूम के आए हमें चाहिए बराबर हम उनके महत्व कोशिश करें और उनके सम्मान को किसी तरीके धन्यवाद हमको महिलाओं के सशक्तिकरण के वर्तमान सफल प्रयास की बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ और हमारा देश आगे बढ़ेगा

film dil ka kya mahatva hai chahiye zaroori hai ji haan yah zaroori hai aur isko badhawa milna sadiyon se hamare dabakar rakha gaya hai ise apni ka vichar ghum ke aaye hamein chahiye barabar hum unke mahatva koshish karen aur unke sammaan ko kisi tarike dhanyavad hamko mahilaon ke shshaktikaran ke vartmaan safal prayas ki beti padhao beti bachao aur hamara desh aage badhega

फिल्म दिल का क्या महत्व है चाहिए जरूरी है जी हां यह जरूरी है और इसको बढ़ावा मिलना सदियों स

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Deepika Bhardwaj

Independent journalist, Documentary filmmaker and Human Rights activist

2:18
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हमारे समाज में हैं मेरे ख्याल से पूरे पूरे विश्व में किसी भी समाज में महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार होना और तमन्ना का समान अपॉर्चुनिटी मिलना है उनका उनके साथ व्यवहार करना मुझे लगता है कि कल से समाज की पहचान है और जहां तक फैमिली को लेकर काम करती है ऐसी बहुत सारी आज के समय में लोग उनको यह लगता है और हमारे 19 नेट ही हूं जहां को यह लगता है कि बहुत ही टेस्टी ना कहीं गई है और 1 महिलाओं को आगे लाने की महिलाओं को पुरुषों के समान लाने की इलेक्शन में जा रहे हैं कि जिसकी वजह से पुरुष हैं उनको बहुत ज्यादा उनको प्रताड़ना कानून की वजह से आज का सामना करना पड़ रहा है और कहीं ना कहीं उनको लगता है कि हमें करना चाहिए था कि हम दोनों को साथ में लेकर आएं डांस दोनों को साथ में लेकर चलेगा कहीं ना कहीं पढ़ा जो है वह दूसरी तरफ झुकने की कगार पर ना होने की डिटेक्शन मैं नहीं बोलूंगी को सपोर्ट करें उनको जरूरत होती है मेरे को बिल्कुल भूल जाए उसकी पोस्टिंग संस्कार के सचिव हो रहा है वह कभी इग्नोर करते उनके पास नौकरी कर सकते हैं और करते भी हैं तो

hamare samaaj mein hain mere khayal se poore poore vishwa mein kisi bhi samaaj mein mahilaon aur purushon ko saman adhikaar hona aur tamanna ka saman opportunity milna hai unka unke saath vyavhar karna mujhe lagta hai ki kal se samaaj ki pehchaan hai aur jahan tak family ko lekar kaam karti hai aisi bahut saree aaj ke samay mein log unko yah lagta hai aur hamare 19 net hi hoon jahan ko yah lagta hai ki bahut hi tasty na kahin gayi hai aur 1 mahilaon ko aage lane ki mahilaon ko purushon ke saman lane ki election mein ja rahe hain ki jiski wajah se purush hain unko bahut zyada unko prataadana kanoon ki wajah se aaj ka samana karna pad raha hai aur kahin na kahin unko lagta hai ki hamein karna chahiye tha ki hum dono ko saath mein lekar aaen dance dono ko saath mein lekar chalega kahin na kahin padha jo hai vaah dusri taraf jhukane ki kagar par na hone ki detection main nahi bolungi ko support karen unko zaroorat hoti hai mere ko bilkul bhool jaaye uski posting sanskar ke sachiv ho raha hai vaah kabhi ignore karte unke paas naukri kar sakte hain aur karte bhi hain toh

हमारे समाज में हैं मेरे ख्याल से पूरे पूरे विश्व में किसी भी समाज में महिलाओं और पुरुषों क

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्ते आपने पूछा है कि फेमिनिज्म का महत्व क्या है समत्व है क्या यह जरूरी है आधे की फेमिनिज्म अवश्य क्यों नहीं मैं कहता हूं कि फेमिनिज्म भी एक को जिस में भी एक अस्तित्व है अगर हम पूछे कि आप पर कैंसिल के लिए आपकी शादी हो गई फिर अगर हम आपसे पूछते कि क्या आपको अपनी वाइफ की जरूरत है तो शायद मुझे लगता है कि आप जवाब देने में थोड़ा सा डिफिकल्टी महसूस करेंगे नारियों के साथ ही बहुत ज्यादा प्रताड़ना किया गया आप हमारे हिंदू धर्म में देखें तो उन्हें चारदीवारी के अंदर रहने की कोई तथ्य दी गई लेकिन हां नारियों को सही संस्कार में रहना हर चीज के लिए स्कीम आई बनाई गई एक पक्षी आकाश में उड़ सकती है एक जानवर आकाश में उड़ने सफल मिशन के लिए कहूंगा कि हां उनकी जो पुरानी परंपरागत तौर पर जो प्रताड़ना दी जाती थी उनके साथ बर्ताव ना हो लेकिन अन्य को संस्कारित चीजें हैं उनको तो फेमिनिज्म को एक्सेप्ट करना चाहिए क्योंकि वह संस्कार और संस्कृतियों से बने होते हैं और सबके लिए एक अपना अलग मानदंड प्रस्तुत करता है मैं समझता हूं कि स्वतंत्रता समानता नागरिकता और स्पीच ऑफ एक्सप्रेशन अगर वुमंस को दिया गया है तो मैं नहीं समझता हूं कि उनकी कोई स्वतंत्रता बाधित होती है लेकिन फिर भी अगर फेमिनिज्म की जरूरत है कि हां पर जवाब चाहिए तो इसमें मैं मंजूरी देने से पीछे नहीं हो तो मैं आपको जरूरी है लेकिन एक्सवाइड संस्कृति और संस्कार में पालने के लिए फेमिनिज्म की कोई जरूरत नहीं है लेकिन यदि फेमिनिज्म में फेमिनिस्ट को प्रॉब्लम होती है तो यह मंजूरी देना आवश्यक होगा

namaste aapne poocha hai ki feminism ka mahatva kya hai samatwa hai kya yah zaroori hai aadhe ki feminism avashya kyon nahi main kahata hoon ki feminism bhi ek ko jis mein bhi ek astitva hai agar hum pooche ki aap par cancel ke liye aapki shadi ho gayi phir agar hum aapse poochhte ki kya aapko apni wife ki zaroorat hai toh shayad mujhe lagta hai ki aap jawab dene mein thoda sa difficulty mahsus karenge nariyon ke saath hi bahut zyada prataadana kiya gaya aap hamare hindu dharam mein dekhen toh unhe chardivari ke andar rehne ki koi tathya di gayi lekin haan nariyon ko sahi sanskar mein rehna har cheez ke liye scheme I banai gayi ek pakshi akash mein ud sakti hai ek janwar akash mein udane safal mission ke liye kahunga ki haan unki jo purani paramparagat taur par jo prataadana di jaati thi unke saath bartaav na ho lekin anya ko sanskarit cheezen hain unko toh feminism ko except karna chahiye kyonki vaah sanskar aur sanskritiyon se bane hote hain aur sabke liye ek apna alag manadand prastut karta hai main samajhata hoon ki swatatrata samanata nagarikta aur speech of expression agar vumans ko diya gaya hai toh main nahi samajhata hoon ki unki koi swatatrata badhit hoti hai lekin phir bhi agar feminism ki zaroorat hai ki haan par jawab chahiye toh isme main manjuri dene se peeche nahi ho toh main aapko zaroori hai lekin eksavaid sanskriti aur sanskar mein palne ke liye feminism ki koi zaroorat nahi hai lekin yadi feminism mein feminist ko problem hoti hai toh yah manjuri dena aavashyak hoga

नमस्ते आपने पूछा है कि फेमिनिज्म का महत्व क्या है समत्व है क्या यह जरूरी है आधे की फेमिनिज

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Pawan Kumar Bohare

Social Worker

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार टेररिज्म का महत्व क्या है क्या जरूरी है आज के आधुनिक मानव समाज में संगठन को आदमी पसंद भी करते हैं और कुछ समुदाय कुछ लोग उसका विरोध करते हैं यह है कि सीधे-सीधे शब्दों को पुरुष की बराबरी का दर्जा देना आदमी कर सकता है और उसको आदमी के पुरुष के दर्जे की बराबरी पर लाने चाहिए दरिया देना चाहिए उसी स्तर पर ठीक है मैं भी उसको बुरा नहीं मानता आना चाहिए कई बार तो कई जगह तो फेमिनिज्म पूरा हो नहीं पाया भारत में खासतौर से दूरदराज के जो बसे हुए गांवों में आज भी सैकड़ों वर्ष पुरानी परंपराएं महिलाओं के प्रति अब यह तो नहीं कर सकते को दबाया जाता है उनके ऊपर कोई बहुत ज्यादा की जाती हो यार बहुत ज्यादा को प्रताड़ित किया जाता है एक यह है कि एक परिवार के 2 चक्के होते हैं एक महिला एक पुरुष परिवार की जो गाड़ी है महिला की अपनी अलग कार्यपद्धती है पुरुषों के लागे पुरुष ज्यादातर मामलों में आज तक भी उर्वशी आर्थिक रूप से जो परिवार को सुदृढ़ करता है वह पुरुष अपने काम से करता है और घर की अंदरूनी देखभाल जो है जो महिला के जिम्मे आती है और आज भी ऐसा कोई कुछ भी कहे आज भी महिला जो है मलाई मूवी पुरुष के बराबर नौकरी कर रही है संभाल रही है सारे काम का है लेकिन घर का जो है मुख्य काम है खाना घर की साफ सफाई देखरेख रखरखाव बच्चों का बच्चे पालना बच्चे तो केवल महिलाएं पाल सकती है पुरुष मैं तो बस कर भी नहीं है और ना प्रकृति तो मुझे लगता है कि इस तरीके से निर्माण भी किया पुरस्कार कि वो बच्चों को संभाले देखभाल करे लुक आफ्टर अरे महिलाओं के गांव शौक से कर रही है अच्छा लगता है और देखे प्रकृति में यह मत कहना कि मैं प्रकृति ने ही महिलाओं को पुरुष से कोमल बगैर उसका टो रूप से मानसिक रूप से मैं कहता हूं कि पुरुष ही जो है उसको ही कठोर बनाया गया है ज्यादा शर्म पुरुष कर पाता महिलाएं शामिल कर बाद उसने प्रकृति सामान्य तौर पर स्वस्थ और पर देखा जाए तो प्रकृति में ही नर और मादा में ज्यादातर मादा को कोमल और कम ताकतवर बनाया पुरुष को या प्राणी को प्राणियों में जो ना रहे उनको ज्यादा शक्ति प्रदान किया जाए कोई बात नहीं दिया भी जा रहा है सेना में भी महिलाएं आजकल ली जा रही और बाकी क्षेत्र में तो कई सालों से है तो यही है मजा में जरूरी तो है जरूरी इसलिए है कि ठीक है आज कल याद में संसार में यूनिट जय परिवार की वह अकेले पति-पत्नी बच्चों की महिलाएं भी दिन भर घर में रहकर क्या करें अगर कुछ बाहर काम करती है पुरुष के साथ पुरुष का हाथ बताती है अपने घर को जा लाती है कुछ काम करते हैं तो ठीक करना चाहिए उनको बाहर निकलने दे अब हर उसके कुछ चित्र के साथ पट भी होता है जो कि क्या होता है कि महिलाएं चौकी कमजोर है और बाहर निकलती है खुद खुद अपनी रक्षा करने में उतनी सक्षम नहीं है और पुरुषों का वर्चस्व आज भी ज्यादा है तो वह थोड़ा सा अपना देखभाल करके समाज में अपनी स्थिति को सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बाहर निकले काम करें और मिलियन से किसी को कोई बुराई नहीं है ना होना चाहिए काम करो हमारी महिलाएं हमारी बहन मां बेटी तो है कोई अलग से दूसरे ग्रह से नहीं आई है लेकिन जो एक सहज जो पुरुषों का महिला विपरीत लिंग वाले कार्ड महिलाओं की कमजोर होने के कारण कम होने पर हावी होने की कोशिश करते हैं अब यह देखना भी पड़ती है सुरक्षा के बारे में सरकार को समाज को भी बहुत ज्यादा ध्यान देना चाहिए कि हमारी माता है हमारी बहन के घर की बेटियां काम पर निकली है बाहर जा रही है हमारे हाथ से कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं तो उनकी सुरक्षा हमारा सबसे पहला कर्तव्य होने चाहिए तो फिर निजामी का महत्व भी है और ठीक है जरूरी भी है जो अभी समाज की व्यवस्था है उस हिसाब से हम यह कह सकते हैं कि जरूरी भी है तो शायद यह तो बहुत वाद-विवाद का विषय है कई वर्षों से इस पर बात चल रहा है चल रहा है विरोध में और इसके समर्थन में भी चलता रहेगा जो मेरे दिमाग में था वह मैंने अपना बताया

namaskar terrorism ka mahatva kya hai kya zaroori hai aaj ke aadhunik manav samaaj mein sangathan ko aadmi pasand bhi karte hain aur kuch samuday kuch log uska virodh karte hain yah hai ki seedhe seedhe shabdon ko purush ki barabari ka darja dena aadmi kar sakta hai aur usko aadmi ke purush ke darje ki barabari par lane chahiye dariya dena chahiye usi sthar par theek hai main bhi usko bura nahi manata aana chahiye kai baar toh kai jagah toh feminism pura ho nahi paya bharat mein khaasataur se durdaraj ke jo base hue gaon mein aaj bhi saikadon varsh purani paramparayen mahilaon ke prati ab yah toh nahi kar sakte ko dabaya jata hai unke upar koi bahut zyada ki jaati ho yaar bahut zyada ko pratarit kiya jata hai ek yah hai ki ek parivar ke 2 chakke hote hain ek mahila ek purush parivar ki jo gaadi hai mahila ki apni alag karyapaddhati hai purushon ke lage purush jyadatar mamlon mein aaj tak bhi urvashi aarthik roop se jo parivar ko sudridh karta hai vaah purush apne kaam se karta hai aur ghar ki andaruni dekhbhal jo hai jo mahila ke jimme aati hai aur aaj bhi aisa koi kuch bhi kahe aaj bhi mahila jo hai malai movie purush ke barabar naukri kar rahi hai sambhaal rahi hai saare kaam ka hai lekin ghar ka jo hai mukhya kaam hai khana ghar ki saaf safaai dekhrekh rakharakhav bacchon ka bacche paalna bacche toh keval mahilaen pal sakti hai purush main toh bus kar bhi nahi hai aur na prakriti toh mujhe lagta hai ki is tarike se nirmaan bhi kiya puraskar ki vo bacchon ko sambhale dekhbhal kare look after arre mahilaon ke gaon shauk se kar rahi hai accha lagta hai aur dekhe prakriti mein yah mat kehna ki main prakriti ne hi mahilaon ko purush se komal bagair uska toe roop se mansik roop se main kahata hoon ki purush hi jo hai usko hi kathor banaya gaya hai zyada sharm purush kar pata mahilaen shaamil kar baad usne prakriti samanya taur par swasth aur par dekha jaaye toh prakriti mein hi nar aur mada mein jyadatar mada ko komal aur kam takatwar banaya purush ko ya prani ko praaniyon mein jo na rahe unko zyada shakti pradan kiya jaaye koi baat nahi diya bhi ja raha hai sena mein bhi mahilaen aajkal li ja rahi aur baki kshetra mein toh kai salon se hai toh yahi hai maza mein zaroori toh hai zaroori isliye hai ki theek hai aaj kal yaad mein sansar mein unit jai parivar ki vaah akele pati patni bacchon ki mahilaen bhi din bhar ghar mein rahkar kya karen agar kuch bahar kaam karti hai purush ke saath purush ka hath batati hai apne ghar ko ja lati hai kuch kaam karte hain toh theek karna chahiye unko bahar nikalne de ab har uske kuch chitra ke saath pat bhi hota hai jo ki kya hota hai ki mahilaen chowki kamjor hai aur bahar nikalti hai khud khud apni raksha karne mein utani saksham nahi hai aur purushon ka varchaswa aaj bhi zyada hai toh vaah thoda sa apna dekhbhal karke samaaj mein apni sthiti ko suraksha ko dhyan mein rakhte hue bahar nikle kaam karen aur million se kisi ko koi burayi nahi hai na hona chahiye kaam karo hamari mahilaen hamari behen maa beti toh hai koi alag se dusre grah se nahi I hai lekin jo ek sehaz jo purushon ka mahila viprit ling waale card mahilaon ki kamjor hone ke karan kam hone par haavi hone ki koshish karte hain ab yah dekhna bhi padti hai suraksha ke bare mein sarkar ko samaaj ko bhi bahut zyada dhyan dena chahiye ki hamari mata hai hamari behen ke ghar ki betiyan kaam par nikli hai bahar ja rahi hai hamare hath se kandhe se kandha milakar chal rahe hain toh unki suraksha hamara sabse pehla kartavya hone chahiye toh phir nijami ka mahatva bhi hai aur theek hai zaroori bhi hai jo abhi samaaj ki vyavastha hai us hisab se hum yah keh sakte hain ki zaroori bhi hai toh shayad yah toh bahut vad vivaad ka vishay hai kai varshon se is par baat chal raha hai chal raha hai virodh mein aur iske samarthan mein bhi chalta rahega jo mere dimag mein tha vaah maine apna bataya

नमस्कार टेररिज्म का महत्व क्या है क्या जरूरी है आज के आधुनिक मानव समाज में संगठन को आदमी प

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ganesh pazi

Motivator

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह नारियों के अपनी स्वतंत्रता के लिए घोषणा एक आंदोलन और होना भी चाहिए जब हम पत्नी को अर्धांगिनी कहते हैं तो जाहिर है कि जो हमारी अध्ययन की मालकिन है उसको मारे अधिकार भी मिले बस यही एक अंतर है विकी लगभग यूरोप में अमेरिका में समाप्ति की अंतिम शिखर पर है और हमारे भारतवर्ष में अभी भी बहुत सारी बेड़ियां हैं जिन्होंने आंदोलन को कुचल रखा है उसी के खिलाफ फैमिली का समर्थन करना चाहिए

yah nariyon ke apni swatatrata ke liye ghoshana ek aandolan aur hona bhi chahiye jab hum patni ko ardhangini kehte hain toh jaahir hai ki jo hamari adhyayan ki malakin hai usko maare adhikaar bhi mile bus yahi ek antar hai vicky lagbhag europe mein america mein samapti ki antim shikhar par hai aur hamare bharatvarsh mein abhi bhi bahut saree bediyan hain jinhone aandolan ko kuchal rakha hai usi ke khilaf family ka samarthan karna chahiye

यह नारियों के अपनी स्वतंत्रता के लिए घोषणा एक आंदोलन और होना भी चाहिए जब हम पत्नी को अर

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TANMAY KR.

Teacher

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Vinod Kumar Jain

Business Owner

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत में नारी का महत्व बहुत ही उच्च शब्दों में आकर गया है यत्र नारी पूज्यंते तत्र देवता जहां पर नारी की पूजा होती है पापा देवता बसते हैं और नारी को हमें का स्थान हमेशा पुरुष से आगे रखा गया है जैसे सीताराम उमाशंकर और भारत में हमेशा नारी को समानता का दिया है लेकिन आने वाले कुछ समय में पिछले कुछ वर्षों में मतलब प्राचीन भारत के बाद निकाला मध्यकालीन भारत में नारी की स्थिति थोड़ी खराब हुई है लेकिन प्राचीन भारत में पूर्व कालीन सभ्यता में नारी को समानता का दर्जा दिया था नारी को सम्मान और गौरव प्राप्त था मतलब जितने भी महापुरुष थे उनकी माताओं के नाम पत्नियों के नाम पुत्रों के नाम बड़े सम्मान पूर्वक उनके कुल परंपरा और वंश परंपरा में ले जाता था हत्यारी का गौरव और सम्मान भारतीय संस्कृति में सदैव रहा है पाश्चात्य संस्कृति से भी पहले और भारतीय संस्कृति में इसका अत्याधिक महत्व रहा है और भारत में जितनी नारी को समानता दी गई है मैं नहीं समझता हूं जिससे मैं कह दी गई हो क्योंकि यहां पर जितने बड़े-बड़े महापुरुष हुए हैं उनमें कई महापुरुष नारियों में भी हो और कई महापुरुषों के साथ में नारियों का नाम जुड़ा हुआ है और यहां पर जैसे देवी देवता के हम पूजा करते हैं तो उसमें कई बीवियों की बड़े ही आदर और श्रद्धा भाव से पूजा की जाती है उनकी स्तुति की जाती है तो मैं नहीं समझता हूं कि और जो सवाल है उसको दूसरा भाग है कि क्या यह जरूरी है हां बिल्कुल यह बहुत जरूरी है क्योंकि आज के संदर्भ में अगर हम नारी की पूजा नहीं करेंगे उनका सम्मान नहीं करेंगे उनको समानता का अधिकार नहीं देंगे तो उसके विपरीत समाज में विकृति आने आने शुरू हो जाएगी उनके ऊपर अत्याचार अपराध और लैंगिक हाय समानता और अमर्यादित जो अपराध है वह बढ़ने लग जाएंगे इसलिए नारी को सम्मान था उनकी महानता उन के महत्व को बढ़ाना बहुत ही जरूरी है एक सभ्य समाज के लिए मैं यह समझता हूं बहुत जरूरी है कि जितने भी पुरुषों में महापुरुष हुए हैं बड़े-बड़े आईकॉनिक पुरुष हुए हैं वह सभी उन्हें अपने अपनी माताओं के संस्कारों के बदौलत है तो यह हमारी संस्कृति में उनको बहुत ऊंचा स्थान दिया हुआ है इसलिए यह बहुत जरूरी है

bharat me nari ka mahatva bahut hi ucch shabdon me aakar gaya hai yatarr nari pujyante tatra devta jaha par nari ki puja hoti hai papa devta baste hain aur nari ko hamein ka sthan hamesha purush se aage rakha gaya hai jaise sitaram umashankar aur bharat me hamesha nari ko samanata ka diya hai lekin aane waale kuch samay me pichle kuch varshon me matlab prachin bharat ke baad nikaala madhyakalin bharat me nari ki sthiti thodi kharab hui hai lekin prachin bharat me purv kaleen sabhyata me nari ko samanata ka darja diya tha nari ko sammaan aur gaurav prapt tha matlab jitne bhi mahapurush the unki mataon ke naam patniyon ke naam putron ke naam bade sammaan purvak unke kul parampara aur vansh parampara me le jata tha hatyari ka gaurav aur sammaan bharatiya sanskriti me sadaiv raha hai pashchayat sanskriti se bhi pehle aur bharatiya sanskriti me iska atyadhik mahatva raha hai aur bharat me jitni nari ko samanata di gayi hai main nahi samajhata hoon jisse main keh di gayi ho kyonki yahan par jitne bade bade mahapurush hue hain unmen kai mahapurush nariyon me bhi ho aur kai mahapurushon ke saath me nariyon ka naam juda hua hai aur yahan par jaise devi devta ke hum puja karte hain toh usme kai beeviyon ki bade hi aadar aur shraddha bhav se puja ki jaati hai unki stuti ki jaati hai toh main nahi samajhata hoon ki aur jo sawaal hai usko doosra bhag hai ki kya yah zaroori hai haan bilkul yah bahut zaroori hai kyonki aaj ke sandarbh me agar hum nari ki puja nahi karenge unka sammaan nahi karenge unko samanata ka adhikaar nahi denge toh uske viprit samaj me vikriti aane aane shuru ho jayegi unke upar atyachar apradh aur laingik hi samanata aur amaryadit jo apradh hai vaah badhne lag jaenge isliye nari ko sammaan tha unki mahanata un ke mahatva ko badhana bahut hi zaroori hai ek sabhya samaj ke liye main yah samajhata hoon bahut zaroori hai ki jitne bhi purushon me mahapurush hue hain bade bade aikanik purush hue hain vaah sabhi unhe apne apni mataon ke sanskaron ke badaulat hai toh yah hamari sanskriti me unko bahut uncha sthan diya hua hai isliye yah bahut zaroori hai

भारत में नारी का महत्व बहुत ही उच्च शब्दों में आकर गया है यत्र नारी पूज्यंते तत्र देवता जह

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Kesharram

Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

फैमिली जन का क्या टाइम है पर इसका संघ द्वारा पुरुष सहित आधा महिला शरीर और अफगान पर जो कि उनका क्या मत होता है वह किस प्रकार से हमें क्या प्रेरणा लेनी चाहिए क्या मैं वह हमें मोटिवेशन दे सकता है मतलब इसका मतलब कारण विद्युत और हम भी देंगे क्योंकि अपने जीवन में उतारना चाहते हैं धन्यवाद

family jan ka kya time hai par iska sangh dwara purush sahit aadha mahila sharir aur afgan par jo ki unka kya mat hota hai vaah kis prakar se hamein kya prerna leni chahiye kya main vaah hamein motivation de sakta hai matlab iska matlab karan vidyut aur hum bhi denge kyonki apne jeevan mein utarana chahte hain dhanyavad

फैमिली जन का क्या टाइम है पर इसका संघ द्वारा पुरुष सहित आधा महिला शरीर और अफगान पर जो कि उ

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