सिखों के पूजा स्थल को क्या कहा जाता है?...


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J.P. Y👌g i

Psychologist

3:19

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देवास से अधिक प्रसन्न है सिखों के पूजा के स्थान को क्या कहा जाता है सीखो मनुष्य होता है सीखो से संबंधित है और महान गुरु नानक जी ज्वाइन के संस्थापक हैं उन्होंने इस सीधी साधी है और सर्वमान्य गुरु को दिया है इसलिए उन्हें पूजा स्थल को गुरु का द्वारा द्वार गुरु का द्वार मतलब गुरु की शरण का आश्रय पक्ष और उसको गुरुद्वारा बोला गया है लेकिन उसका स्ट्रक्चर जो कुछ है वह वही है जो हृदय का काश होता है और इन्होंने क्योंकि प्रत्यक्ष रूप से जो प्रमाणित दिशा देता है वह गुरु होता है और उनकी गुरु के माध्यम से यहां में दूसरी विवेचना अध्यात्मिक की धारा को पकड़ आता है और उस पर हम आत्म समर्पण भाव के अंदर तल्लीन हो करके उसकी अनुभूतियों को जोड़ते हैं प्राप्ति होती है उसे गुरुद्वारा बोला जाता है और वहां पर गुरु ग्रंथ साहिब को मनोनीत कर आ गया है और उसमें वह भावनाएं उत्पन्न होती है कि जो ज्ञान समूह हैं और वह जो शब्द ज्ञान है उसके अनुरूप मनुष्य को आगे आचरण करना चाहिए बड़ा महत्वपूर्ण चीज है यह एक स्वास्तिक भान स्थल अति उत्तम श्रेष्ठ और बहुत अच्छा है ध्यान लगाने का केंद्र होता है यहां पर हाथ में कोको विश्रांति मिलती है इसलिए उसका जो मुंह पर आरोप है वह गुरु की ही माध्यमिक से होता है गुरु ही अभीष्ट होता है इसी कारण ही उन्होंने इस पुण्य स्थल को गुरुद्वारा नाम दिया है धन्यवाद

devas se adhik prasann hai Sikhon ke puja ke sthan ko kya kaha jata hai sikho manushya hota hai sikho se sambandhit hai aur mahaan guru nanak ji join ke sansthapak hain unhone is seedhi saadhee hai aur sarvmanya guru ko diya hai isliye unhe puja sthal ko guru ka dwara dwar guru ka dwar matlab guru ki sharan ka asray paksh aur usko gurudwara bola gaya hai lekin uska structure jo kuch hai vaah wahi hai jo hriday ka kash hota hai aur inhone kyonki pratyaksh roop se jo pramanit disha deta hai vaah guru hota hai aur unki guru ke madhyam se yahan mein dusri vivechna adhyatmik ki dhara ko pakad aata hai aur us par hum aatm samarpan bhav ke andar tallinn ho karke uski anubhutiyon ko jodte hain prapti hoti hai use gurudwara bola jata hai aur wahan par guru granth sahib ko manonit kar aa gaya hai aur usme vaah bhaavnaye utpann hoti hai ki jo gyaan samuh hain aur vaah jo shabd gyaan hai uske anurup manushya ko aage aacharan karna chahiye bada mahatvapurna cheez hai yah ek swastik bhan sthal ati uttam shreshtha aur bahut accha hai dhyan lagane ka kendra hota hai yahan par hath mein cocoa vishraanti milti hai isliye uska jo mooh par aarop hai vaah guru ki hi madhyamik se hota hai guru hi abhisht hota hai isi karan hi unhone is punya sthal ko gurudwara naam diya hai dhanyavad

देवास से अधिक प्रसन्न है सिखों के पूजा के स्थान को क्या कहा जाता है सीखो मनुष्य होता है सी

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