लोगों को आज कल सिर्फ़ मसाला फ़िल्में ही क्यों पसंद आती हैं। सीरीयस आर्ट फ़िल्मों की कभी वैसी प्रशंसा क्यों नहीं होती?...


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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

1:16
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लोगों को आजकल सिर्फ मसाला करी में 12 का संरक्षण में कभी जो माल मसाला या घर बोलते हैं कमर्शियल फिल्में होती है निश्चित तौर पर करके बताया जाता है कि चीजें अच्छी लगती है इसमें से मार-धाड़ एक्शन हो गया और वह सारी चीजें ऐसी होती कॉमेडी भी होती है एक्शन विष्णु कहते हैं वह भी दिखाया जाते हैं शायद वह चीजें हैं लोगों के दर्शनों की संख्या ज्यादा है जहां तक में है यहां पर भी यह चीजें बनती हैं और जो जीवन की वास्तविकता समाज की वस्तया देश के वासी हैं और आप जानते हो कि जो जहां पर कमीशन मसाला फिल्मों के दर्शकों की संख्या 95% है तो इनकी 5 परसेंट है कभी-कभी दो परसेंट भी कम हो जाती है तो निश्चित तौर पर इनकी संख्या कम होने की वजह से उत्तराखंड का प्रमोशन नहीं मिल पाता

logo ko aajkal sirf masala kari me 12 ka sanrakshan me kabhi jo maal masala ya ghar bolte hain commercial filme hoti hai nishchit taur par karke bataya jata hai ki cheezen achi lagti hai isme se maar dhad action ho gaya aur vaah saari cheezen aisi hoti comedy bhi hoti hai action vishnu kehte hain vaah bhi dikhaya jaate hain shayad vaah cheezen hain logo ke darshano ki sankhya zyada hai jaha tak me hai yahan par bhi yah cheezen banti hain aur jo jeevan ki vastavikta samaj ki vastaya desh ke waasi hain aur aap jante ho ki jo jaha par commision masala filmo ke darshakon ki sankhya 95 hai toh inki 5 percent hai kabhi kabhi do percent bhi kam ho jaati hai toh nishchit taur par inki sankhya kam hone ki wajah se uttarakhand ka promotion nahi mil pata

लोगों को आजकल सिर्फ मसाला करी में 12 का संरक्षण में कभी जो माल मसाला या घर बोलते हैं कमर्श

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

0:50

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मातीचे प्रश्न है लोगों को आजकल सिर्फ मसाला फिल्में ही क्यों पसंद आती है सीरियस आठ फिल्मों की कमी कभी वैसी प्रशंसा क्या नहीं होती देखी आजकल लोगों को कॉमेडी सीरियल ज्यादा पसंद है कॉमेडी मूवीस दादा पसंद है उनके मन में जोश आ जाए चाहे वह 2 या 6 घंटे के लिए जब तक मूवी देखी तब तक उनको लगेगी जहां क्या-क्या मूवी किया बहुत अच्छा बताइए वही पसंद है

matiche prashna hai logo ko aajkal sirf masala filme hi kyon pasand aati hai serious aath filmo ki kami kabhi vaisi prashansa kya nahi hoti dekhi aajkal logo ko comedy serial zyada pasand hai comedy Movies dada pasand hai unke man mein josh aa jaaye chahen vaah 2 ya 6 ghante ke liye jab tak movie dekhi tab tak unko lagegi jaha kya kya movie kiya bahut accha bataye wahi pasand hai

मातीचे प्रश्न है लोगों को आजकल सिर्फ मसाला फिल्में ही क्यों पसंद आती है सीरियस आठ फिल्मों

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

4:07
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लोगों को आजकल तो सिर्फ मसाला फिल्में ही क्यों पसंद है सीरियस 8 के मुख्य कवि रशीद सकता क्यों नहीं है विक्की हमेशा फिल्मों को सिर्फ एक मनोरंजन का साधन ही माना है और हम सिनेमा देखने जाते हैं तो अपने दिमाग को परेशानियों से चिंताओं से मुक्त होकर 3 घंटे हम आनंद प्राप्त करने की भावना से जाते इसलिए जो चीजें रियल लाइफ में बहुत कम संभव हो पाती है वह चीजों को देखकर हमारा मन प्रफुल्लित हो जाता है खुश हो जाता है इसलिए हमेशा हम लोगों का दिमाग खुशी ग्रहण करना और उसे समय खुश रहना ज्यादा पसंद करता है और यह मसाला फिल्मों को इसीलिए पसंद करता है जबकि वास्तविक जिंदगी में ऐसा संभव हो ना बहुत कम पॉसिबल रहता है बाकी जो कलात्मक सिनेमा है सीरियस आर्ट दिल में जो है उसमें समाज की बुराइयां समाज की समस्या गरीबी और समय अनुसार सब चीजों को प्रतिबिंब प्रतिबिंब किया जाता है और आम जनता से उसमें जोड़ कर और कहीं ना कहीं समाज को हम आदमियों को आम जनता को समझने और सुधारने के लिए उस दाल लाने के लिए प्रेरित किया जाता है क्योंकि 8 फिल्में और मसाला फिल्मों में बस यही अंतर होता है कि आम जनता मनोरंजन के लिए थिएटर जाती है बाकी जो जीवन की सच्चाई उसे तो खुद जूही रहे होते हैं जीवन की सच्चाई उसे जूते जूते वह फिल्मों का सहारा मनोरंजक इवेंट्स मनोरंजक डायलॉग्स मनोरंजक संगीत चाहे वह कितना भी बेसुरा संगीत क्यों ना हो लेकिन सिर्फ पे लोग बेसुरे संगीत पर उसे खुद को पैर की अंगुली आई लाने के लिए मजबूर कर देते हैं और वह उसी में खुश होकर तालियां बजाता है उसमें वह लोग भूल जाते हैं कि जो वास्तविक जिंदगी में वह जो चल रहे हैं पिक्चर पूरा होने के बाद वापिस वही चीजों से सामना करना है और वही वास्तविक चीजों से योजना है वह कम से कम पिक्चर के दौरान भूल जाते इसलिए मसाला फिल्मों को लोग पसंद करते हैं बहुत-बहुत धन्यवाद

logon ko aajkal toh sirf masala filme hi kyon pasand hai serious 8 ke mukhya kavi rasheed sakta kyon nahi hai vicky hamesha filmo ko sirf ek manoranjan ka sadhan hi mana hai aur hum cinema dekhne jaate hai toh apne dimag ko pareshaniyo se chintaon se mukt hokar 3 ghante hum anand prapt karne ki bhavna se jaate isliye jo cheezen real life mein bahut kam sambhav ho pati hai vaah chijon ko dekhkar hamara man prafullit ho jata hai khush ho jata hai isliye hamesha hum logo ka dimag khushi grahan karna aur use samay khush rehna zyada pasand karta hai aur yah masala filmo ko isliye pasand karta hai jabki vastavik zindagi mein aisa sambhav ho na bahut kam possible rehta hai baki jo kalaatmak cinema hai serious art dil mein jo hai usme samaj ki buraiyan samaj ki samasya garibi aur samay anusaar sab chijon ko pratibimb pratibimb kiya jata hai aur aam janta se usme jod kar aur kahin na kahin samaj ko hum adamiyo ko aam janta ko samjhne aur sudhaarne ke liye us daal lane ke liye prerit kiya jata hai kyonki 8 filme aur masala filmo mein bus yahi antar hota hai ki aam janta manoranjan ke liye theater jaati hai baki jo jeevan ki sacchai use toh khud juhi rahe hote hai jeevan ki sacchai use joote joote vaah filmo ka sahara manoranjak events manoranjak dialogues manoranjak sangeet chahen vaah kitna bhi besura sangeet kyon na ho lekin sirf pe log besure sangeet par use khud ko pair ki anguli I lane ke liye majboor kar dete hai aur vaah usi mein khush hokar taliyan bajata hai usme vaah log bhool jaate hai ki jo vastavik zindagi mein vaah jo chal rahe hai picture pura hone ke baad vaapas wahi chijon se samana karna hai aur wahi vastavik chijon se yojana hai vaah kam se kam picture ke dauran bhool jaate isliye masala filmo ko log pasand karte hai bahut bahut dhanyavad

लोगों को आजकल तो सिर्फ मसाला फिल्में ही क्यों पसंद है सीरियस 8 के मुख्य कवि रशीद सकता क्यो

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Kavita Panyam

Certified Award Winning Counseling Psychologist

0:57
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लोगों को आजकल सिर्फ मसाला फिल्म में ही क्यों पसंद आती है सीरियस 8th जन तो कभी वैसी प्रशंसा क्यों नहीं होती लेकिन लोगों की जिंदगी इतनी सीरियस हो गई है रिश्ते नाते बिखर गए हैं पेंसिल का विमोचन प्रॉब्लम अंदर जिंदगी जीने का मजा है वह कितना मेकेनिकल हो गया है कि लाइफ ही बहुत सीरियस हो गई जिसकी हंसी निकल गई तो अगर आप मसाले फिल्म देखेंगे थोड़ा मजा आएगा हसाएंगे तेरा माइंड डाइवर्ट होगा तो उसे क्या होगा कि आप अपने रोजगार आकर प्रॉब्लम को उस कुछ पलों के लिए भुला देंगे तभी अचानक जो शिफ्ट है वह मीनिंग फुल 8 सिनेमा से एकदम सुपरहिट कॉमेडी रोम कांग्रेस पर क्यों चला गया क्योंकि जिंदगी इतनी बोरिंग और डायलॉग से प्रॉब्लम मैटिक बन गई है कि लोगों को छुटकारा चाहिए डिटेल में चाहिए जो कि इन फिल्मों में मिलती है उन लोगों को कि कुछ पलों के लिए अपना दुख दर्द भूल जाते हैं फॉर काउंसलिंग प्लीज कनेक्ट ऑन कविता पानी एम डॉट कॉम

logon ko aajkal sirf masala film mein hi kyon pasand aati hai serious 8th jan toh kabhi vaisi prashansa kyon nahi hoti lekin logo ki zindagi itni serious ho gayi hai rishte naate bikhar gaye hain pencil ka vimochan problem andar zindagi jeene ka maza hai vaah kitna Mechanical ho gaya hai ki life hi bahut serious ho gayi jiski hansi nikal gayi toh agar aap masale film dekhenge thoda maza aayega hasaenge tera mind Divert hoga toh use kya hoga ki aap apne rojgar aakar problem ko us kuch palon ke liye bhula denge tabhi achanak jo shift hai vaah meaning full 8 cinema se ekdam superhit comedy roam congress par kyon chala gaya kyonki zindagi itni boaring aur dialogue se problem matic ban gayi hai ki logo ko chhutkara chahiye detail mein chahiye jo ki in filmo mein milti hai un logo ko ki kuch palon ke liye apna dukh dard bhool jaate hain for kaunsaling please connect on kavita paani M dot com

लोगों को आजकल सिर्फ मसाला फिल्म में ही क्यों पसंद आती है सीरियस 8th जन तो कभी वैसी प्रशंसा

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Abhishek Sharma

Forest Range Officer, MP

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आजकल व्यक्ति बहुत परेशानियों में जीवन जी रहा है उसे जॉब की टेंशन है घर के सामान की टेंशन है बच्चे की फीस की टेंशन है हमेशा चाहता है कि मैं इन चीजों से फ्री होकर अपनी जिंदगी का कुछ समय अच्छी चीजों में गुजार लूंगा सी खुशी में को चारों लोग सभी कैंसर फ्री होते हैं तो अपने बच्चों बीवी के साथ जाकर मसाला फिल्में देखते हैं और उसमें उनका कोई दोष नहीं है अगर वह चाहते हैं कि 3000 घंटे इसमें अगर आप अगर आप एक घूमने जाते हैं मूवी देखते हैं तो उसके बाद उन्होंने माइंड फ्रेश होने का मौका मिलता है वह चाहते हैं कि मूवी जिसमें किलर हो एक कॉमेडी होश में रोमांस हो तो जिसको देखकर उनका मन अच्छा हो जाए मूनलाइट हो जाए शादी होता है कि आपको पूरे चेतन मन के साथ उस मूवी में देखना पड़ता है तभी वह आर्ट मूवी आपके समझ में आती है भारत में पिछले कुछ समय से 8 मूवीस की संख्या बढ़ गई है और यह भारत की सीमा के लिए बहुत ज्यादा अच्छी खबर है जब देखी बहुत ज्यादा अच्छे दिन आ रही है और वह फिर मैं ना सिर्फ अच्छी कर रही है बल्कि उनकी कमाई भी काफी हद तक एक अच्छी रेपुटेशन तक हो गई है यंगस्टर्स और आजकल बड़ी उम्र के लोगों को पसंद कर रहे हैं और धीरे-धीरे इन का स्तर बढ़ता जाएगा क्योंकि हमारी जो दूसरी डिब्बी है कि डिमांड है मूवी मसाला से होती जा रही है जो डिमांड होगी भाई हमको देखने को मिलेगा तो अगर हम सीरियस फिल्म की डिमांड करेंगे तेरे साथ नहीं तो वह भी बढ़ेगी और वह अच्छी बात है कि बढ़ रही है बहुत धन्यवाद आपके विचार भी कमेंट में जरूर दीजिए

aajkal vyakti bahut pareshaniyo mein jeevan ji raha hai use job ki tension hai ghar ke saamaan ki tension hai bacche ki fees ki tension hai hamesha chahta hai ki main in chijon se free hokar apni zindagi ka kuch samay achi chijon mein gujar lunga si khushi mein ko charo log sabhi cancer free hote hai toh apne baccho biwi ke saath jaakar masala filme dekhte hai aur usme unka koi dosh nahi hai agar vaah chahte hai ki 3000 ghante isme agar aap agar aap ek ghoomne jaate hai movie dekhte hai toh uske baad unhone mind fresh hone ka mauka milta hai vaah chahte hai ki movie jisme killer ho ek comedy hosh mein romance ho toh jisko dekhkar unka man accha ho jaaye munlait ho jaaye shadi hota hai ki aapko poore chetan man ke saath us movie mein dekhna padta hai tabhi vaah art movie aapke samajh mein aati hai bharat mein pichle kuch samay se 8 Movies ki sankhya badh gayi hai aur yah bharat ki seema ke liye bahut zyada achi khabar hai jab dekhi bahut zyada acche din aa rahi hai aur vaah phir main na sirf achi kar rahi hai balki unki kamai bhi kaafi had tak ek achi reputation tak ho gayi hai youngsters aur aajkal baadi umr ke logo ko pasand kar rahe hai aur dhire dhire in ka sthar badhta jaega kyonki hamari jo dusri dibbi hai ki demand hai movie masala se hoti ja rahi hai jo demand hogi bhai hamko dekhne ko milega toh agar hum serious film ki demand karenge tere saath nahi toh vaah bhi badhegi aur vaah achi baat hai ki badh rahi hai bahut dhanyavad aapke vichar bhi comment mein zaroor dijiye

आजकल व्यक्ति बहुत परेशानियों में जीवन जी रहा है उसे जॉब की टेंशन है घर के सामान की टेंशन ह

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Damini

Study

1:33
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पहले लोग जब भी मूवी देखने जाते थे तो वह यह सोचते थे कि अभी मेरी फेवरेट हीरो या मेरे फेवरेट हीरोइन का मूवी आया है चलो देखना चाहते हैं इसलिए जाते थे ताकि वो यह सोचते थे कि जब हम अभी जो मूवी आई है उसे देखने जाएंगे तो हम यह देखेंगे कि जिनको हम इतना पसंद करते हैं इस मूवी में इस पिक्चर में कौन सा रोल लेकर आया क्या कर रहे हैं क्या देने वाले हैं उनके क्या विचार हैं उनकी सोच कर मूवी देखने जाते थे आज आज हर कोई मूवी देखने आता है वह यह सोचकर जाता है कि मेरा मूड अपसेट है मैं बहुत परेशान हूं चलता हूं वह भी देख कर थोड़ा फ्रेश हो जाता हूं इसलिए अगर वह कुछ सीखने नहीं जाते हैं बट वो अपने मूड को फ्रेश करने के लिए जाते हैं इस वजह से लोगों को आज सीरियल आज नहीं पसंद है वो लोग धमाकेदार मूवी बहुत सारे हंसी बहुत सारी में जाटों शरीफ रोमांस वाली मूवी देखना चाहते हैं ताकि जितना टाइम मिला है जो टाइम वह मूवी को देखने में इन्वेस्ट कर रहे हैं उनसे करो ताजा हो जाए मगर पहले लोग यह नहीं सोचते थे पहले लोग अपने पसंदीदा लोगों से कुछ सीखने के लिए जाते थे कि इस बार उन्होंने क्या लिखूं क्या सिखाए सिखाने के लिए इस मूवी को लेकर आए यही हम सबसे ज्यादा अंडर मतलब क्या बताएं कि सबसे ज्यादा अंतर है इन दोनों में जले स्नो में

pehle log jab bhi movie dekhne jaate the toh vaah yah sochte the ki abhi meri favourite hero ya mere favourite heroine ka movie aaya hai chalo dekhna chahte hain isliye jaate the taki vo yah sochte the ki jab hum abhi jo movie I hai use dekhne jaenge toh hum yah dekhenge ki jinako hum itna pasand karte hain is movie mein is picture mein kaun sa roll lekar aaya kya kar rahe kya dene waale hain unke kya vichar hain unki soch kar movie dekhne jaate the aaj aaj har koi movie dekhne aata hai vaah yah sochkar jata hai ki mera mood upset hai bahut pareshan hoon chalta hoon vaah bhi dekh kar thoda fresh ho jata hoon isliye agar vaah kuch sikhne nahi jaate hain but vo apne mood ko fresh karne ke liye jaate hain is wajah se logo ko aaj serial aaj nahi pasand hai vo log dhamakedar movie bahut saare hansi bahut saree mein jaaton sharif romance wali movie dekhna chahte hain taki jitna time mila hai jo time vaah movie ko dekhne mein invest kar rahe hain unse karo taaza ho jaaye magar pehle log yah nahi sochte the pehle log apne pasandida logo se kuch sikhne ke liye jaate the ki is baar unhone kya likhun kya sikhaye sikhane ke liye is movie ko lekar aaye yahi hum sabse zyada under matlab kya bataye ki sabse zyada antar hai in dono mein jale snow mein

पहले लोग जब भी मूवी देखने जाते थे तो वह यह सोचते थे कि अभी मेरी फेवरेट हीरो या मेरे फेवरेट

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