आयुर्वेद क्या है?...


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Dr. Ravendra Pratap

Ayurvedic Doctor

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सत्य का स्ट्रक्चर मातृश्री कार पर सुरक्षाकर्मियों का विकार दूर करना यह देव का इलाज होता था पति से

satya ka structure matrishri car par surakshakarmiyon ka vikar dur karna yah dev ka ilaj hota tha pati se

सत्य का स्ट्रक्चर मातृश्री कार पर सुरक्षाकर्मियों का विकार दूर करना यह देव का इलाज होता था

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Dr. D K Dwivedi

Ayurvedic Doctor, Bareilly

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Pinkesh Negi

Yoga Ayurveda

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आयुर्वेद दो शब्दों से मिलकर बना है जिसका सामान्य आता है आयोग का चांद वहां चिकित्सा शास्त्र जिस राष्ट्र के द्वारा हम आयोग का ज्ञान करते हैं आयोग का बोध करते हैं उसे आयुर्वेद कहते हैं और आयुर्वेद में ही इसके दो मुख्य प्रयोजन है स्वस्थ स्वस्थ रक्षणम आतुर की कार प्रश्न मंच स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और हाथ और यदि रोगी व्यक्ति के रोग का निवारण करना और या मुख्य था इसके जो स्तंभ है यह तो डिपेंड करता है इसमें दो प्रकार के दो सोते हैं हार्दिक दो और मानसिक 2412 1 दिन उसके बाद इसमें इनके भी 55 दूसरा है मानसिक सत रज और तम जिसमें संतो को दोष रहित माना गया है लेकिन उसे भी दोष में काम किया गया है क्योंकि बिना सत्य के हम ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकते तो ज्ञान प्राप्त करने की स्थिति के कारण से दोस्त माना गया है तीसरी यह हमारे ही धातुओं पर डिपेंड करता है जिसमें कि हमारे शरीर में सात धातु में होती है रन रन मान में अस्थि मज्जा शुक्र और इसके अलावा इसमें इनकी पार्क के अनुसार ये आपके इम्यून सिस्टम को बताया गया है कि किस प्रकार से हमारे बॉडी में इन 7 बातों से पोषण होता है और पोषण होने के बाद अंत में जो धातु बनती है शुक्र औरतों औरतों को उठा दो माना गया उसके फल स्वरुप जो शुक्र के बाद जो था तू बनती है जिसे हम कहते हैं कुछ और खोज के बाद जो बनता है उसे कहते हैं तेज तो इसी आधार पर आयुर्वेद चलता है और आयुर्वेद में पंचतत्व का भी बहुत बड़ा इंवॉल्वमेंट है जो कि इस समय 60 की उत्पत्ति के लिए उत्पत्ति का कारण है वायु जल अग्नि आकाश पृथ्वी पंचमहाभूत है और इनकी उत्पत्ति भी कहीं से हुई है जिन्हें हम कहते हैं तन मात्राएं यह पांच प्रकार की होती है और इन पांचों प्रकार की धन मात्राओं से इन पंचतंत्र की उत्पत्ति हुई है जिनमें मुख्य था जो तन मात्रा है स्पर्श और शब्द स्पर्श और सब इनके दो मुख्य जो मेन सोर्सेज इन से पंचतंत्र की उत्पत्ति होना सूर्यवंश तो आयुर्वेद इन सब छोटी छोटी चीजों को लेकर बेसिक चीजों को देखकर काम करता है और आपके जीवन की आयु का बोध कराता है आयुर्वेद किसी बीमारी को ठीक नहीं करता बल्कि आपके शरीर को ठीक करता है या किसी भी जीव के शरीर को ठीक करता है या किसी पौधे के जीवन को ठीक करता है

ayurveda do shabdon se milkar bana hai jiska samanya aata hai aayog ka chand wahan chikitsa shastra jis rashtra ke dwara hum aayog ka gyaan karte hain aayog ka bodh karte hain use ayurveda kehte hain aur ayurveda me hi iske do mukhya prayojan hai swasth swasth rakshanam aatur ki car prashna manch swasth vyakti ke swasthya ki raksha karna aur hath aur yadi rogi vyakti ke rog ka nivaran karna aur ya mukhya tha iske jo stambh hai yah toh depend karta hai isme do prakar ke do sote hain hardik do aur mansik 2412 1 din uske baad isme inke bhi 55 doosra hai mansik sat raj aur tum jisme santo ko dosh rahit mana gaya hai lekin use bhi dosh me kaam kiya gaya hai kyonki bina satya ke hum gyaan prapt nahi kar sakte toh gyaan prapt karne ki sthiti ke karan se dost mana gaya hai teesri yah hamare hi dhatuon par depend karta hai jisme ki hamare sharir me saat dhatu me hoti hai run run maan me asthi majja shukra aur iske alava isme inki park ke anusaar ye aapke immune system ko bataya gaya hai ki kis prakar se hamare body me in 7 baaton se poshan hota hai aur poshan hone ke baad ant me jo dhatu banti hai shukra auraton auraton ko utha do mana gaya uske fal swarup jo shukra ke baad jo tha tu banti hai jise hum kehte hain kuch aur khoj ke baad jo banta hai use kehte hain tez toh isi aadhar par ayurveda chalta hai aur ayurveda me panchatatwa ka bhi bahut bada invalwament hai jo ki is samay 60 ki utpatti ke liye utpatti ka karan hai vayu jal agni akash prithvi panchamahabhut hai aur inki utpatti bhi kahin se hui hai jinhen hum kehte hain tan matraen yah paanch prakar ki hoti hai aur in panchon prakar ki dhan maatrao se in panchatantra ki utpatti hui hai jinmein mukhya tha jo tan matra hai sparsh aur shabd sparsh aur sab inke do mukhya jo main sources in se panchatantra ki utpatti hona suryavansh toh ayurveda in sab choti choti chijon ko lekar basic chijon ko dekhkar kaam karta hai aur aapke jeevan ki aayu ka bodh karata hai ayurveda kisi bimari ko theek nahi karta balki aapke sharir ko theek karta hai ya kisi bhi jeev ke sharir ko theek karta hai ya kisi paudhe ke jeevan ko theek karta hai

आयुर्वेद दो शब्दों से मिलकर बना है जिसका सामान्य आता है आयोग का चांद वहां चिकित्सा शास्त्

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Dr Padmakar Jha

Lekkchr Pol Sc Tmprori

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यजुर्वेद स्थापना हजार से 820p के लगभग हुआ था और यज्ञ से संबंधित है एकमात्र वेदर जगदेव पथ दोनों में हैं परंपरा के अनुसार यह वायु को समर्पित समर्पित है पतंजलि के अनुसार यजुर्वेद की 101 शाखाओं में बटा हुआ है कांटा क्रिस्टल मेथ रानी बादशाह ने क्षेत्रीय हिसाब का सबसे पहला उल्लेख मनुष्य यजुर्वेदी का लाया यजुर्वेद के दो पक्ष कृष्ण पक्ष शुक्ल यजुर्वेद देवताओं को प्रसन्न किए जाने वाले अनुष्ठान की चर्चा है इसमें कर्मकांड से जोड़कर इसमें 2028 मंत्र और 40 अध्याय प्रथम अध्याय में अवनीश ओम यज्ञ की चर्चा करता है दोस्त पुराने युग की चर्चा तथा पशु या की चर्चा करता है चौथे अध्याय इसमें सोम यज्ञ बादशाह ने यज्ञ राजसुईया की चर्चा है 11 से 18 ज्ञान इसमें अग्नि यज्ञ की चर्चा है उनमें से कई सदियां की चर्चा 22 से 2500 की चर्चा 26301 की चर्चा 173 मीडिया की चर्चा 3679 से संबंधित है 35 मा चित्र मेघ यज्ञ से चर्चा 3639 पूर्व दक्षिण आरजू का विस्तार विधि माथुर तथा अगस्त ऋषि के ने चर्चा किया था 40 वां अध्याय अध्याय इसे उपनिषद है इसमें नक्षत्र की चाबी दे विधि के रूप में किया गया धन्यवाद

yajurved sthapna hazaar se 820p ke lagbhag hua tha aur yagya se sambandhit hai ekmatra Weather jogdev path dono me hain parampara ke anusaar yah vayu ko samarpit samarpit hai patanjali ke anusaar yajurved ki 101 shakhaon me bataa hua hai kanta crystal meth rani badshah ne kshetriya hisab ka sabse pehla ullekh manushya yajurvedi ka laya yajurved ke do paksh krishna paksh shukla yajurved devatao ko prasann kiye jaane waale anushthan ki charcha hai isme karmakand se jodkar isme 2028 mantra aur 40 adhyay pratham adhyay me avnish om yagya ki charcha karta hai dost purane yug ki charcha tatha pashu ya ki charcha karta hai chauthe adhyay isme Som yagya badshah ne yagya rajsuiya ki charcha hai 11 se 18 gyaan isme agni yagya ki charcha hai unmen se kai sadiyan ki charcha 22 se 2500 ki charcha 26301 ki charcha 173 media ki charcha 3679 se sambandhit hai 35 ma chitra megh yagya se charcha 3639 purv dakshin aaraju ka vistaar vidhi mathur tatha august rishi ke ne charcha kiya tha 40 va adhyay adhyay ise upanishad hai isme nakshtra ki chabi de vidhi ke roop me kiya gaya dhanyavad

यजुर्वेद स्थापना हजार से 820p के लगभग हुआ था और यज्ञ से संबंधित है एकमात्र वेदर जगदेव पथ

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आयुर्वेद जैसे कि आज के समय पर होम्योपैथी है एलोपैथी है उसी तरह जो आयुर्वेद बहुत पुरानी एक ऐसी कला है जिसमें की नेचुरल चीजों से पेड़ पौधों उनके चरणों से जो किसी बीमारी का इलाज किया जाता था

ayurveda jaise ki aaj ke samay par homeopathy hai allopathy hai usi tarah jo ayurveda bahut purani ek aisi kala hai jisme ki natural chijon se ped paudho unke charno se jo kisi bimari ka ilaj kiya jata tha

आयुर्वेद जैसे कि आज के समय पर होम्योपैथी है एलोपैथी है उसी तरह जो आयुर्वेद बहुत पुरानी एक

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