चिंता वह लोग चिता कहते हैं जिसे किसी प्रचंड चिंता ने पकड़ लिया है, क्या यह सही है?...


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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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मेरे मित्रों यह समझने की बात है किसी विद्वान ने कहा है कि चिंता चिता से बढ़कर होती है चिता से आदमी एक बार चलता है लेकिन चिंता आदमी को धीरे धीरे सुनना शुरू आकर मारती है चिंता ही मानव के विनाश का कारण है आज तुम देखे हो कि प्रत्येक मानव किसी ना किसी परेशानी से इस समस्या से परेशान हैं कोई आर्थिक रूप से परेशान है कोई सामाजिक रूप से परेशान है कोई परिवारिक रुप से परेशान है कि शारीरिक रूप से परेशान है कोई राजनीतिक रूप से परेशान है सभी लोग चिंताओं से ग्रस्त हैं क्योंकि आज आप यदि देखें भारत में तो सिर्फ 10 परसेंट लोग कैसे पा सकते हैं जो शायद चिंता मुक्त होंगे वरना हर किसी व्यक्ति को कुछ ना कुछ तनाव कोई न कोई टेंशन चिंताएं परेशानी संकट मादा पक्षी के जीवन भारती चिंता मुक्त रहते हैं जो सादा जीवन उच्च विचार किस सिद्धांत पर रखते हैं जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए सीताराम सीताराम सीताराम कहिए ऐसे आस्थावान लोग जुड़ते हैं वे लोग चिंता मुक्त रहते हैं क्योंकि वे जानते हैं जो कुछ होना है वह तो खुदा ही अब तुम रोक पाओगे ना मैं रोक पाऊंगा इसलिए इस सब का ध्यान करते हैं भजन करते हैं और मस्त रहते हैं

mere mitron yah samjhne ki baat hai kisi vidhwaan ne kaha hai ki chinta chita se badhkar hoti hai chita se aadmi ek baar chalta hai lekin chinta aadmi ko dhire dhire sunana shuru aakar marti hai chinta hi manav ke vinash ka karan hai aaj tum dekhe ho ki pratyek manav kisi na kisi pareshani se is samasya se pareshan hain koi aarthik roop se pareshan hai koi samajik roop se pareshan hai koi pariwarik roop se pareshan hai ki sharirik roop se pareshan hai koi raajnitik roop se pareshan hai sabhi log chintaon se grast hain kyonki aaj aap yadi dekhen bharat me toh sirf 10 percent log kaise paa sakte hain jo shayad chinta mukt honge varna har kisi vyakti ko kuch na kuch tanaav koi na koi tension chintaen pareshani sankat mada pakshi ke jeevan bharati chinta mukt rehte hain jo saada jeevan ucch vichar kis siddhant par rakhte hain jahi vidhi rakhe ram tahi vidhi rahiye sitaram sitaram sitaram kahiye aise asthawan log judte hain ve log chinta mukt rehte hain kyonki ve jante hain jo kuch hona hai vaah toh khuda hi ab tum rok paoge na main rok paunga isliye is sab ka dhyan karte hain bhajan karte hain aur mast rehte hain

मेरे मित्रों यह समझने की बात है किसी विद्वान ने कहा है कि चिंता चिता से बढ़कर होती है चिता

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