हम मूर्ति पूजन क्यों करते हैं?...


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Dr Priya Shankar

Homeopath Doctor

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मूर्ति पूजा अध्यात्म की ओर या शुभ कर्म की ओर बढ़ने का प्रथम पायदान जैसे हम विद्या सीखना प्रारंभ करते हैं तो सबसे पहले प्लेट या पेंसिल ऐसा कुछ लेकर उस पर लिखते पढ़ते हैं वैसे ही प्रारंभ में मूर्ति पूजा करना संकेतों की पूजा करना बहुत आवश्यक होता है पूजा करने से मन में विनम्रता आती है और क्रूरता खत्म होती जो लोग पूजा कम करते हैं प्रकृति की पूजा नहीं करते नदियों की पूजा नहीं करते हनु की पूजा नहीं करते पत्थरों की पूजा नहीं करते किया पूजा करने में विश्वास नहीं रखते उन लोगों में विनम्रता की जगह कुर्ता का भाव पैदा होने लगता है इसलिए अधिक से अधिक पूजा करें संकेतों की पूजा करें मूर्तियों की पूजा करें नदियों की पूजा करें प्राकृतिक जो भी आपको लाभदायक प्रकृति के सारे तत्व लाभदायक है अपनी पूजा करें और पूजा से धीरे-धीरे आपके अंदर विनम्रता होती लेकिन ऐसा ना समझे वह मूर्ति ही ईश्वर है ऐसा ना समझो प्राकृतिक के तत्व ही ईश्वर है बल्कि ईश्वर उन सारे रूपों में आपकी सहायता कर रहा है और इसको सिर्फ एक ही है जो इंसानी रूप में अपनी सहायता पता है लेकिन मूर्ति पूजा प्रारंभिक स्तर पर इसे अवश्य करना चाहिए और पूजा करने से आपका हृदय विनम्र होगा जैसे खेत में हल चलाने से ₹1 हो जाता है वैसे ही पूजा करने से हृदय विनम्र होता है क्रूरता कम होती है और संसार की सबसे बड़ी समस्या यदि कोई है तो वह क्रूरता है उसी क्रूरता की वजह से समाज से पूरा विश्व संकट में आज आ जाता है आ गया है आज की समस्या हो या पहले प्राचीन काल की समस्याओं सारी समस्याओं समस्याएं कुर्ता से ही फायदा होती है सारा युद्ध क्रूरता का ही रूप है इसलिए अधिक से अधिक सबको पूजा करना चाहिए और क्रूरता से बचना चाहिए विनम्रता की ओर बढ़ना चाहिए

murti puja adhyaatm ki aur ya shubha karm ki aur badhne ka pratham payadan jaise hum vidya sikhna prarambh karte hain toh sabse pehle plate ya pencil aisa kuch lekar us par likhte padhte hain waise hi prarambh me murti puja karna sanketon ki puja karna bahut aavashyak hota hai puja karne se man me vinamrata aati hai aur krurta khatam hoti jo log puja kam karte hain prakriti ki puja nahi karte nadiyon ki puja nahi karte hanu ki puja nahi karte pattharon ki puja nahi karte kiya puja karne me vishwas nahi rakhte un logo me vinamrata ki jagah kurta ka bhav paida hone lagta hai isliye adhik se adhik puja kare sanketon ki puja kare murtiyon ki puja kare nadiyon ki puja kare prakirtik jo bhi aapko labhdayak prakriti ke saare tatva labhdayak hai apni puja kare aur puja se dhire dhire aapke andar vinamrata hoti lekin aisa na samjhe vaah murti hi ishwar hai aisa na samjho prakirtik ke tatva hi ishwar hai balki ishwar un saare roopon me aapki sahayta kar raha hai aur isko sirf ek hi hai jo insani roop me apni sahayta pata hai lekin murti puja prarambhik sthar par ise avashya karna chahiye aur puja karne se aapka hriday vinamra hoga jaise khet me hal chalane se Rs ho jata hai waise hi puja karne se hriday vinamra hota hai krurta kam hoti hai aur sansar ki sabse badi samasya yadi koi hai toh vaah krurta hai usi krurta ki wajah se samaj se pura vishwa sankat me aaj aa jata hai aa gaya hai aaj ki samasya ho ya pehle prachin kaal ki samasyaon saari samasyaon samasyaen kurta se hi fayda hoti hai saara yudh krurta ka hi roop hai isliye adhik se adhik sabko puja karna chahiye aur krurta se bachna chahiye vinamrata ki aur badhana chahiye

मूर्ति पूजा अध्यात्म की ओर या शुभ कर्म की ओर बढ़ने का प्रथम पायदान जैसे हम विद्या सीखना प्

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Isu Vasava

PASTOR in CHURCH.

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Sapna

Social Worker

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हमें जब से इस बात का पता चला है कि ईशा कवर कण कण में है इसीलिए हम पत्थर में भी ईश्वर का रूप देखते हैं इसीलिए हम मूर्ति पूजा का सम्मान करते हैं और उसे अपने ईश्वर के रूप में जगह देते हैं सपना शर्मा

hamein jab se is baat ka pata chala hai ki isha cover kan kan me hai isliye hum patthar me bhi ishwar ka roop dekhte hain isliye hum murti puja ka sammaan karte hain aur use apne ishwar ke roop me jagah dete hain sapna sharma

हमें जब से इस बात का पता चला है कि ईशा कवर कण कण में है इसीलिए हम पत्थर में भी ईश्वर का रू

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Rakesh Kothiyal

Astrologer And Yoga Teacher

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हरि ओम नमस्कार दोस्तों सभी वह कल ग्रुप के मेंबर को मेरा नमस्कार दोस्तों आपका प्रश्न है हम मूर्ति पूजन क्यों करते हैं दोस्तों जब तक हमें यह पता नहीं रहता कि मूर्ति क्या चीज है उसमें हाव भाव कैसा बनेगा उसमें श्रद्धा कैसे बनेगी दोस्तों एक उदाहरण दे रहा हूं आप लिखे हैं आपने गणेश भगवान की मूर्ति स्थापित तो पहचाने गणेश भगवान जी की मूर्ति है यह आपने कैसे पहचाना क्योंकि यार लंबी सूंड है उनका हाथ भी है वह रूठे पराए रूठे पीटी बड़ा आकार है वृत्ताकार भी है यार हाय रे गणेश भगवान जी है जब कृष्ण जी की मूर्ति पूजा करेंगे आप का भाव वैसे ही बनेगा आपकी श्रद्धा विश्वास वैसे ही बन जाएगी हायर गणेश भगवान जी तो यार विघ्न बाधाओं को दूर करेंगे हमारे और सद्बुद्धि देने वाले यार वह तो जब तक उनकी पूजा करने से हमें बुद्धि आ जाए ऐसा बन जाएगा भगवान की मूर्ति के प्रति दवा क्या करोगे गं गणपति नमः ओम गं गणपतए नमः शिवाय भजन बिकाऊ जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा यह गणित का भगवान का नाम लिखो और उनके नाम भी आ रहे इसमें माता पार्वती का नाम भी आ जाए और उसे ही मिलता है क्योंकि पूजा करते करते करते क्यों हम कर्म कर रहे हैं करते करते हमारा भाव विभोर हो जाता है उसी भाभी को श्रद्धा भाव से हमें फल मिलने लगता है हमारी बिकने बाद ही सब दूर होती हैं हम सब परिवार को हमारे बच्चों में सर्दी में में रहती हैं क्यों उसमें भगवान की बड़ी कृपा बनी रहती है ईस्ट कृपा बनी रहती है दोस्तों आनंद में रहे व्यस्त रहें जय माता दी

hari om namaskar doston sabhi vaah kal group ke member ko mera namaskar doston aapka prashna hai hum murti pujan kyon karte hain doston jab tak hamein yah pata nahi rehta ki murti kya cheez hai usme hav bhav kaisa banega usme shraddha kaise banegi doston ek udaharan de raha hoon aap likhe hain aapne ganesh bhagwan ki murti sthapit toh pehchane ganesh bhagwan ji ki murti hai yah aapne kaise pehchana kyonki yaar lambi sund hai unka hath bhi hai vaah roothe parae roothe PT bada aakaar hai vritakaar bhi hai yaar hi ray ganesh bhagwan ji hai jab krishna ji ki murti puja karenge aap ka bhav waise hi banega aapki shraddha vishwas waise hi ban jayegi hire ganesh bhagwan ji toh yaar vighn badhaon ko dur karenge hamare aur sadbuddhi dene waale yaar vaah toh jab tak unki puja karne se hamein buddhi aa jaaye aisa ban jaega bhagwan ki murti ke prati dawa kya karoge gan ganapati namah om gan ganapatye namah shivay bhajan bikau jai ganesh jai ganesh jai ganesh deva mata jaki parvati pita mahadeva yah ganit ka bhagwan ka naam likho aur unke naam bhi aa rahe isme mata parvati ka naam bhi aa jaaye aur use hi milta hai kyonki puja karte karte karte kyon hum karm kar rahe hain karte karte hamara bhav vibhor ho jata hai usi bhabhi ko shraddha bhav se hamein fal milne lagta hai hamari bikne baad hi sab dur hoti hain hum sab parivar ko hamare baccho me sardi me me rehti hain kyon usme bhagwan ki badi kripa bani rehti hai east kripa bani rehti hai doston anand me rahe vyast rahein jai mata di

हरि ओम नमस्कार दोस्तों सभी वह कल ग्रुप के मेंबर को मेरा नमस्कार दोस्तों आपका प्रश्न है हम

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अशोक गुप्ता

Founder of Vision Commercial Services.

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जब हमारी आंख खुलती है तो अपने सामने ही मिक्स आकार शुरू को देखते हैं वह मेरी मां होती हैं इसके बाद भी हम जिसको भी देख पाते हैं वह एक साकार रूप में हम से संबंधित होता है जोड़ता है इसलिए हमारी सहज प्रवृत्ति होती है कि जब कोई साकार हो तुम मुझसे अपने को कनेक्ट कर पाते हैं चुकी हम भगवान के बारे में सुने होते हैं कि वह कहीं दूर बैठा हुआ है जो स्वर्ग हो या कुछ और तो हमें उससे कनेक्ट होने में उसने साहस था नहीं होती है क्योंकि हमने उसका देखा नहीं है सिर्फ के बारे में सुना है इसलिए एक बीच में से 2 बनाया गया है एक परिकल्पना से परमात्मा की मूर्ति उसके गुणों के आधार पर बनाई जाती है विशेष की चार हाथ है मतलब वो सभी कुछ कर सकता है इसी तरह से मूर्ति हमें एक माध्यम की तरह काम करती है पर हम मूर्ति के सामने आज से बंद हो जाती है ताकत जोड़ते तो सेल के भीतर के परमात्मा से ही है लेकिन मूर्ति एक माध्यम का काम करती है इसीलिए शायद हिंदू जीवन दर्शन ने मूर्ति का उपयोग किया है जीवन के अंतर यात्रा में आशा है आप इस विषय को इसी ढंग से समझने की कोशिश करेंगे धन्यवाद मां

jab hamari aankh khulti hai toh apne saamne hi mix aakaar shuru ko dekhte hain vaah meri maa hoti hain iske baad bhi hum jisko bhi dekh paate hain vaah ek saakar roop me hum se sambandhit hota hai Jodta hai isliye hamari sehaz pravritti hoti hai ki jab koi saakar ho tum mujhse apne ko connect kar paate hain chuki hum bhagwan ke bare me sune hote hain ki vaah kahin dur baitha hua hai jo swarg ho ya kuch aur toh hamein usse connect hone me usne saahas tha nahi hoti hai kyonki humne uska dekha nahi hai sirf ke bare me suna hai isliye ek beech me se 2 banaya gaya hai ek parikalpana se paramatma ki murti uske gunon ke aadhar par banai jaati hai vishesh ki char hath hai matlab vo sabhi kuch kar sakta hai isi tarah se murti hamein ek madhyam ki tarah kaam karti hai par hum murti ke saamne aaj se band ho jaati hai takat jodte toh cell ke bheetar ke paramatma se hi hai lekin murti ek madhyam ka kaam karti hai isliye shayad hindu jeevan darshan ne murti ka upyog kiya hai jeevan ke antar yatra me asha hai aap is vishay ko isi dhang se samjhne ki koshish karenge dhanyavad maa

जब हमारी आंख खुलती है तो अपने सामने ही मिक्स आकार शुरू को देखते हैं वह मेरी मां होती हैं

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Vinita Rastogi

Career Counsellor / Life Coach

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क्योंकि हमें अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए किसी ना किसी आकृति की जरूरत होती है निराकार सेवा बहुत कठिन है हम जब किसी चीज पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं तो हमारे सामने यदि कोई मूर्ति होती है तो हम आसानी से अपना ध्यान उस तक केंद्रित कर सकते हैं और अपना लक्ष्य निर्धारित करके उसे प्राप्त का प्रयास भी कर सकते हैं दूसरे जब हम आनंद में बहुत लीन होते हैं निराकार होगा तो वह आनंद नहीं आएगा अगर हम श्री राम श्री कृष्ण किसी की भी प्रतिमा को अपने मन में धारण करते हैं तो वह हमारे लिए हमें लक्ष्य तक पहुंचने में हमें मोक्ष प्राप्त कराने में हमारा ध्यान केंद्रित करने में ज्यादा सहायक होता है

kyonki hamein apna dhyan kendrit karne ke liye kisi na kisi akriti ki zarurat hoti hai nirakaar seva bahut kathin hai hum jab kisi cheez par apna dhyan kendrit karna chahte hain toh hamare saamne yadi koi murti hoti hai toh hum aasani se apna dhyan us tak kendrit kar sakte hain aur apna lakshya nirdharit karke use prapt ka prayas bhi kar sakte hain dusre jab hum anand me bahut Lean hote hain nirakaar hoga toh vaah anand nahi aayega agar hum shri ram shri krishna kisi ki bhi pratima ko apne man me dharan karte hain toh vaah hamare liye hamein lakshya tak pahuchne me hamein moksha prapt karane me hamara dhyan kendrit karne me zyada sahayak hota hai

क्योंकि हमें अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए किसी ना किसी आकृति की जरूरत होती है निराकार

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Varun deshmukh

Business Owner

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विक्रम मूर्ति पूजा क्यों करते हैं हिंदू धर्म जो है वह पोलिंग नैतिक धर्म में मतलब हम अनेक भगवानों को मानते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश दिनेश कार्तिक बालाजी साईं बाबा अलग-अलग भगवानों को मानते हैं और यह जो मूर्ति पूजा का गीत चंदन है यह पोस्ट वैदिक है मतलब सिंधु घाटी सभ्यता और वैदिक कल्चर के आने के बाद मूर्ति पूजा का चलन होगा क्योंकि अगर हम त्रिवेदी कहरा देखें अगर हमें सिंधु घाटी सभ्यता उस समय के भगवानों की के बारे में पड़े उन्हें तो वहां पर जो भगवान थे वह वह वह मूर्तियों तक सीमित नहीं तो चाहे वह आदमी हूं वायु हो इंद्र हो वरुण हो यह मूर्तिकार भगवान नहीं थे मूर्तिकार भगवानों की जो संरचना है यह जो कल्पना है आज उनका जो दर्शन है वह भी दोस्ती आया है वेदों के बाद उपनिषदों से आया हुआ है तो फिर शिव भगवान हो गणेश जी हो दुर्गा जी हो भगवानों की जो कल्पना है यह पोस्ट में दिखाइए वेदों के बाद हुई है और फिर जैसे जैसे देश में भी अलग अलग राज्य आए अलग-अलग धर्म उनके साथ जो कंपटीशन होता रहा उस में मूर्ति पूजा कहीं ना कहीं बढ़कर बढ़ चढ़कर आई आज मुझे लगता है मूर्ति पूजा का जो एक चलाया है इस देश में मंदिरों की स्थापना होने से और जैसे हम विकसित होते रहे जैसे जैसे इंसानी सोच विकसित होती रही और धर्म के प्रति चेतना और दर्शन बढ़ता रहा हम लोगों ने मंदिरों का कांसेप्ट शुरू किया तो वह कौन से मंदिर का एक कंसर्ट से पूजा-अर्चना तक ही सीमित नहीं था वह कमर्शियल सेंटर भी था वह 111 लोगों को जोड़ने का भी सेंटर था उन मंदिरों से मेले उद्योग के सभी जुड़े हुए थे मंदिर और मूर्ति से भगवान तक लोगों को लाया गया और उसके जरिए कॉमर्स किया गया अतिथियों से जुड़ा हुआ है हिंदू धर्म जो है वह अर्थ नीतियों में बहुत ज्यादा मिश्रण है हमारे धर्म की हमारी जो भी बात है जो हमारे बीच में इकनॉमिक अर्थ नीति आपको हमेशा दिखेगी तो मुझे लगता है मूर्ति पूजा और मंदिरों की स्थापना के पीछे भी एक कारण रहा बाकी लोग आए हैं एक दूसरे के साथ मिले जुले ऑफ कॉमर्स बड़े इकनोमिक एक्टिविटी पूजन हिंदू धर्म में आया और वो एक बहुत प्रचलित हुआ कॉलेजों में अनेक भगवान होने के कारण धर्म के विस्तार के कारण और मंदिरों के तू इकोनामिक एक्टिविटीज को चलाने के लिए मूर्ति पूजा हमारे देश में एक बहुत इंपोर्टेंट है

vikram murti puja kyon karte hain hindu dharm jo hai vaah polling naitik dharm me matlab hum anek bhagwano ko maante hain brahma vishnu mahesh dinesh kartik balaji sai baba alag alag bhagwano ko maante hain aur yah jo murti puja ka geet chandan hai yah post vaidik hai matlab sindhu ghati sabhyata aur vaidik culture ke aane ke baad murti puja ka chalan hoga kyonki agar hum trivedi kahra dekhen agar hamein sindhu ghati sabhyata us samay ke bhagwano ki ke bare me pade unhe toh wahan par jo bhagwan the vaah vaah vaah murtiyon tak simit nahi toh chahen vaah aadmi hoon vayu ho indra ho varun ho yah murtikar bhagwan nahi the murtikar bhagwano ki jo sanrachna hai yah jo kalpana hai aaj unka jo darshan hai vaah bhi dosti aaya hai vedo ke baad upnishadon se aaya hua hai toh phir shiv bhagwan ho ganesh ji ho durga ji ho bhagwano ki jo kalpana hai yah post me dikhaiye vedo ke baad hui hai aur phir jaise jaise desh me bhi alag alag rajya aaye alag alag dharm unke saath jo competition hota raha us me murti puja kahin na kahin badhkar badh chadhakar I aaj mujhe lagta hai murti puja ka jo ek chalaya hai is desh me mandiro ki sthapna hone se aur jaise hum viksit hote rahe jaise jaise insani soch viksit hoti rahi aur dharm ke prati chetna aur darshan badhta raha hum logo ne mandiro ka concept shuru kiya toh vaah kaun se mandir ka ek kansart se puja archna tak hi simit nahi tha vaah commercial center bhi tha vaah 111 logo ko jodne ka bhi center tha un mandiro se mele udyog ke sabhi jude hue the mandir aur murti se bhagwan tak logo ko laya gaya aur uske jariye commerce kiya gaya atithiyon se juda hua hai hindu dharm jo hai vaah arth nitiyon me bahut zyada mishran hai hamare dharm ki hamari jo bhi baat hai jo hamare beech me economic arth niti aapko hamesha dikhegi toh mujhe lagta hai murti puja aur mandiro ki sthapna ke peeche bhi ek karan raha baki log aaye hain ek dusre ke saath mile joule of commerce bade economic activity pujan hindu dharm me aaya aur vo ek bahut prachalit hua collegeon me anek bhagwan hone ke karan dharm ke vistaar ke karan aur mandiro ke tu economic activities ko chalane ke liye murti puja hamare desh me ek bahut important hai

विक्रम मूर्ति पूजा क्यों करते हैं हिंदू धर्म जो है वह पोलिंग नैतिक धर्म में मतलब हम अनेक भ

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Harish Sharma

Yog Acharya

2:02
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आपका परेशान है बोर की पूजा क्यों आवश्यक है या मूर्ति पूजन क्यों करते हैं वैसे तो कोई जरूरी नहीं है कि मूर्ति का पूजन करें परंतु मूर्ति पूजा इसकी आवश्यक है या इसलिए हम करते हैं क्योंकि यह प्राथमिक का लाश है यह बात में कक्षा है यह प्रथम सीढ़ी है व्यक्ति को यह बताने के लिए कि भगवान क्या होते हैं क्योंकि यह दुनिया स्थल दुनिया है इसमें किसी भी चीज को इजीली समझाने के लिए हमें से साक्षात्कार करना आवश्यक है उसका चित्र दिखाना हो सके उसको स्थूल रूप से दिखाना और सके तभी समझ आता है क्योंकि यह दुनिया स्कूल है इसके प्रारंभिक अच्छा है मूर्ति का पूजन इतनी करते हैं ताकि हमारे आने वाली नई पीढ़ियां बच्चे को जाने ईश्वर के बारे में जाने भगवान के बारे में जाने उनको पता लगे भगवान क्या है हम एक प्रकार का उनका साक्षात्कार आदि मूर्ति के माध्यम से और जो व्यक्ति आगे आगे बढ़ता जाता है अध्यात्म की ओर जाता है तभी चीजें सारी पर हो जाती है मूर्ति पूजा हम इसलिए करते हैं ताकि आने वाली पीढ़ी को हम समझा सके ईश्वर के बारे में साक्षात्कार करा सकें उनका परिचय दे सके इसलिए आवश्यक है इसलिए हम मूर्ति पूजन करते हैं और कोई औचित्य नहीं है

aapka pareshan hai bore ki puja kyon aavashyak hai ya murti pujan kyon karte hain waise toh koi zaroori nahi hai ki murti ka pujan kare parantu murti puja iski aavashyak hai ya isliye hum karte hain kyonki yah prathmik ka laash hai yah baat me kaksha hai yah pratham sidhi hai vyakti ko yah batane ke liye ki bhagwan kya hote hain kyonki yah duniya sthal duniya hai isme kisi bhi cheez ko ijili samjhane ke liye hamein se sakshatkar karna aavashyak hai uska chitra dikhana ho sake usko sthool roop se dikhana aur sake tabhi samajh aata hai kyonki yah duniya school hai iske prarambhik accha hai murti ka pujan itni karte hain taki hamare aane wali nayi peedhiyaan bacche ko jaane ishwar ke bare me jaane bhagwan ke bare me jaane unko pata lage bhagwan kya hai hum ek prakar ka unka sakshatkar aadi murti ke madhyam se aur jo vyakti aage aage badhta jata hai adhyaatm ki aur jata hai tabhi cheezen saari par ho jaati hai murti puja hum isliye karte hain taki aane wali peedhi ko hum samjha sake ishwar ke bare me sakshatkar kara sake unka parichay de sake isliye aavashyak hai isliye hum murti pujan karte hain aur koi auchitya nahi hai

आपका परेशान है बोर की पूजा क्यों आवश्यक है या मूर्ति पूजन क्यों करते हैं वैसे तो कोई जरूरी

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Ramesh Bait

Astrologer & Spiritual Healer

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धर्मेश भाई ज्योतिषी हो सम्मोहन पत्नियों यह सवाल है मूर्ति पूजा क्यों करते हैं अब किसी भी चीज को महसूस कैसे कर सकते हैं जब आप या तो उसे देखते हो या उसे सुनते हो या उसे स्पष्ट करते हो बराबर तो जो भगवान है वह भगवान को तो ना ही हम सुन सकते हैं ना उसको वैसे स्पर्श कर सकते हैं मैं उसका स्पर्श अपने आप पर मानव कर सकते हैं तब ध्यान कैसे लगा उस पर क्योंकि अगर हम सुनने में ध्यान लगाए तो स्टार्टिंग में तो बहुत तकलीफ होगी ना कोई ना कोई तो चीज चाहिए जिस पर हमारा ध्यान एकाग्र हो और उसके गुण जो है मम्मी आ जाए इसके लिए हमने मूर्ति की स्थापना की जो उसका प्रतीक होती है तो जब हम उसके पति को देखते हैं आंख खोलकर पहले उसकी याद आती है हम उससे एकाग्र हो जाते हैं धीरे-धीरे करके आंख बंद करते हैं और आप बंद करके भी उसे महसूस करने की कोशिश करते हैं क्योंकि वह एक फोटो स्वरूप में आपके मंच पर दिखता है फिर आगे चलकर उस मूर्ति की जरूरत नहीं रहती क्योंकि आप आंख बंद करके उसे देख सकते हो मगर कोई भी चीज जब तक साकार रूप में आपके सामने प्रकट में हो रही है या तो फोटो के माध्यम से या मूर्ति के माध्यम से या प्रत्यक्ष हुआ इंसान तब तक आप उसके बारे में सोच ही नहीं सकते उसका ध्यान ही नहीं कर सकते अगर मैं कॉलेज जास्वंद का फूल है ऐसा कुछ कहूं तो आप कहोगे भाई यह क्या बोल रहा है जास्वंद होता क्या है फिर अगर मैं आपको उसका फोटो दिखाओ यह है यशवंतापुर फिर आप जब भी आप बंद करोगे कभी भी जा सुनने से सुनोगे तो आंख बंद करके फोटो आपके सामने आ जाए इसीलिए मूर्ति पूजा का बहुत महत्व है क्योंकि उसकी एक छवि बन जाती है हमारे मन पर पर एक बार मंत्र छवि बनी जैसे आज हम बोलते राम राम जैसे ही राम आता है हमने टीवी सीरियल में आंखों से देखा रहता है या उसकी मूर्ति लेकर रहती है हनुमान तो हनुमान की मूर्ति देखिए रहती है इसके लिए अब मैं आपको आबरा का डाबरा का आबरा का डाबरा मन में कुछ आ ही नहीं रहा तुम ध्यान लगाने के लिए पूजा करने के लिए जिसके भी आप चाहते हो उसकी तस्वीर आपके मन पर आने में बहुत बोल रही है इसके लिए हिंदू शास्त्रों में मूर्ति पूजा की जाती है और उसका महत्व है धन्यवाद

dharmesh bhai jyotishi ho sammohan patniyon yah sawaal hai murti puja kyon karte hain ab kisi bhi cheez ko mehsus kaise kar sakte hain jab aap ya toh use dekhte ho ya use sunte ho ya use spasht karte ho barabar toh jo bhagwan hai vaah bhagwan ko toh na hi hum sun sakte hain na usko waise sparsh kar sakte hain main uska sparsh apne aap par manav kar sakte hain tab dhyan kaise laga us par kyonki agar hum sunne me dhyan lagaye toh starting me toh bahut takleef hogi na koi na koi toh cheez chahiye jis par hamara dhyan ekagra ho aur uske gun jo hai mummy aa jaaye iske liye humne murti ki sthapna ki jo uska prateek hoti hai toh jab hum uske pati ko dekhte hain aankh kholakar pehle uski yaad aati hai hum usse ekagra ho jaate hain dhire dhire karke aankh band karte hain aur aap band karke bhi use mehsus karne ki koshish karte hain kyonki vaah ek photo swaroop me aapke manch par dikhta hai phir aage chalkar us murti ki zarurat nahi rehti kyonki aap aankh band karke use dekh sakte ho magar koi bhi cheez jab tak saakar roop me aapke saamne prakat me ho rahi hai ya toh photo ke madhyam se ya murti ke madhyam se ya pratyaksh hua insaan tab tak aap uske bare me soch hi nahi sakte uska dhyan hi nahi kar sakte agar main college jaswand ka fool hai aisa kuch kahun toh aap kahoge bhai yah kya bol raha hai jaswand hota kya hai phir agar main aapko uska photo dikhaao yah hai yashavantapur phir aap jab bhi aap band karoge kabhi bhi ja sunne se sunoge toh aankh band karke photo aapke saamne aa jaaye isliye murti puja ka bahut mahatva hai kyonki uski ek chhavi ban jaati hai hamare man par par ek baar mantra chhavi bani jaise aaj hum bolte ram ram jaise hi ram aata hai humne TV serial me aakhon se dekha rehta hai ya uski murti lekar rehti hai hanuman toh hanuman ki murti dekhiye rehti hai iske liye ab main aapko abara ka dabra ka abara ka dabra man me kuch aa hi nahi raha tum dhyan lagane ke liye puja karne ke liye jiske bhi aap chahte ho uski tasveer aapke man par aane me bahut bol rahi hai iske liye hindu shastron me murti puja ki jaati hai aur uska mahatva hai dhanyavad

धर्मेश भाई ज्योतिषी हो सम्मोहन पत्नियों यह सवाल है मूर्ति पूजा क्यों करते हैं अब किसी भी

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Dinesh Mishra

Theosophists | Accountant

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देखिए भगवान की भक्ति करने के लिए व्यक्ति को कुछ ना कुछ सहारा देश की आवश्यकता हुआ करती है उस देश और सहने के लिए हमने मूर्ति को स्थापित किया और उसको सहारा मान करके उसको आसरा मान करके उसको भी स्नान करके हमने पूजन किया यह हमारा साकार मूर्ति के प्रति पूजन है श्रद्धा है विश्वास है इस कारण से वह मूर्ति जो है वह हमें बलवती हुई और उसने हमारी कामनाओं की पूर्ति की इससे हमारी श्रद्धा उस मूर्ति के प्रति और अधिक बढ़ गई और हमने उसका पूजन करके मूर्ति को उसको जीवित कर का प्रयास किया

dekhiye bhagwan ki bhakti karne ke liye vyakti ko kuch na kuch sahara desh ki avashyakta hua karti hai us desh aur sahane ke liye humne murti ko sthapit kiya aur usko sahara maan karke usko aasra maan karke usko bhi snan karke humne pujan kiya yah hamara saakar murti ke prati pujan hai shraddha hai vishwas hai is karan se vaah murti jo hai vaah hamein balvati hui aur usne hamari kamanaon ki purti ki isse hamari shraddha us murti ke prati aur adhik badh gayi aur humne uska pujan karke murti ko usko jeevit kar ka prayas kiya

देखिए भगवान की भक्ति करने के लिए व्यक्ति को कुछ ना कुछ सहारा देश की आवश्यकता हुआ करती है उ

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Ajay kumar

Motivational Speaker , Life Coach

1:03
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हेलो फ्रेंड्स मैं अजय कुमार मोटिवेशनल स्पीकर लाइफ कोच आपका प्रश्न आए हम मूर्ति पूजन क्यों करते हैं कि मूर्ति पूजा हम इसलिए करते हैं क्योंकि मूर्ति भगवान की मूर्ति हमें एक माध्यम प्रदान करती है जिससे समक्ष बैठकर हम भगवान से अपने आप को जोड़ पाते अमिताभ मूर्ति के सामने बैठते हैं तो हम कल्पनाओं के साथ में भावनाओं के साथ में उस परमपिता से उस ऊपर वाले से जुड़ जाते हैं तो मूर्ति पूजा एक माध्यम प्रदान करती है जो आपके ध्यान को केंद्रित करने का काम करती है भगवान में थैंक यू

hello friends main ajay kumar Motivational speaker life coach aapka prashna aaye hum murti pujan kyon karte hain ki murti puja hum isliye karte hain kyonki murti bhagwan ki murti hamein ek madhyam pradan karti hai jisse samaksh baithkar hum bhagwan se apne aap ko jod paate amitabh murti ke saamne baithate hain toh hum kalpanaaon ke saath me bhavnao ke saath me us parampita se us upar waale se jud jaate hain toh murti puja ek madhyam pradan karti hai jo aapke dhyan ko kendrit karne ka kaam karti hai bhagwan me thank you

हेलो फ्रेंड्स मैं अजय कुमार मोटिवेशनल स्पीकर लाइफ कोच आपका प्रश्न आए हम मूर्ति पूजन क्यों

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Yogesh Kumar Shukla

Student (Research scholar)

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हमारा मूर्ति पूजन करने का मुख्य उद्देश्य होता है भगवान के प्रति आस्था और श्रद्धा अगर हम कहें कि हम बिना मूर्ति के भी पूजन कर सकते हैं तो हमारी धारणा और श्रद्धा नहीं बनती क्योंकि जहां पर किसी ना किसी चीज का आधार और आधी होता है तुझे कोई चीज आधारित होती है तभी हम उसके प्रति श्रद्धा मृत हो सकते हैं श्रद्धा के प्रति समर्पित हो सकते हैं इसलिए हमें मूर्ति पूजा करने में आवश्यक करने की आवश्यकता है और मूर्ति पूजन जल्दी सार्थक होता है क्योंकि कहते हैं ना कि जब किसी चीज को करने के लिए उसका एक आधार होना चाहिए तो हमारे सामने जो भगवान की मूर्ति होती तो एक आधार होता है तो हम फिर अपने अंतःकरण से भगवान का स्मरण कर सकते हैं और हमारा मन ध्यान केंद्रित होता है और भगवान के प्रति ज्यादा अटूट विश्वास होता है मारा यदि हम बिना देखे बिना मूर्ति के किसी किसी की पूजा करते तो हैं परंतु वहां पर हमें मन केंद्रित करने के लिए बहुत सारी चीज़ें सोच में पढ़ती हैं और अगर वैसे मूर्ति मूर्ति पूजन करते हैं तो हमें इन चीजों को विशेष ध्यान नहीं देना पड़ता है और हम मूर्ति पूजन पर अपना ध्यान बहुत अच्छे से केंद्रित कर सकते हैं इसलिए मूर्ति पूजन हमारे लिए आवश्यक है

hamara murti pujan karne ka mukhya uddeshya hota hai bhagwan ke prati astha aur shraddha agar hum kahein ki hum bina murti ke bhi pujan kar sakte hain toh hamari dharana aur shraddha nahi banti kyonki jaha par kisi na kisi cheez ka aadhar aur aadhi hota hai tujhe koi cheez aadharit hoti hai tabhi hum uske prati shraddha mrit ho sakte hain shraddha ke prati samarpit ho sakte hain isliye hamein murti puja karne me aavashyak karne ki avashyakta hai aur murti pujan jaldi sarthak hota hai kyonki kehte hain na ki jab kisi cheez ko karne ke liye uska ek aadhar hona chahiye toh hamare saamne jo bhagwan ki murti hoti toh ek aadhar hota hai toh hum phir apne antahkaran se bhagwan ka smaran kar sakte hain aur hamara man dhyan kendrit hota hai aur bhagwan ke prati zyada atut vishwas hota hai mara yadi hum bina dekhe bina murti ke kisi kisi ki puja karte toh hain parantu wahan par hamein man kendrit karne ke liye bahut saari chize soch me padhati hain aur agar waise murti murti pujan karte hain toh hamein in chijon ko vishesh dhyan nahi dena padta hai aur hum murti pujan par apna dhyan bahut acche se kendrit kar sakte hain isliye murti pujan hamare liye aavashyak hai

हमारा मूर्ति पूजन करने का मुख्य उद्देश्य होता है भगवान के प्रति आस्था और श्रद्धा अगर हम कह

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ज्योतिषी झा मेरठ (Pt. K L Shashtri)

Astrologer Jhaमेरठ,झंझारपुर और मुम्बई

0:36
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Pramod Kushwaha

famous Motivational Guru N Painter

2:23
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किसी ने प्रश्न किया है और अच्छा प्रश्न हमारे और वो कल की तरफ से जिसने भी यह प्रश्न की है उसको धन्यवाद देते हैं उसका स्वागत करते हैं वो कल प्रश्न है हम मूर्ति पूजन क्यों करते तो मेरे प्यारे भाई यह जिसने भी यह प्रश्न किया है क्या मोटी पूजन क्यों करते तो ध्यान से सुनेंगे मूर्ति सिंबॉल जब तक हम किसी चीज को मस्तिक में नहीं लाएंगे जब हम दिल्ली का सोचते हैं तो हमको दिल्ली देखने लगती दिल्ली स्टेशन देखने लगता है तो जब तक उसका एक चित्र तैयार नहीं कर लेते तब तक उसके बारे में यह हम जब चर्चा करते हैं तो उसको एक चित्र मस्तिक में तैयार होने लगता है ऐसे किसी भगवान को हम पूछते हैं अभी आप अपने पिताजी को सोचिए जब आप सोच रहे हैं मगर पिताजी का चित्र मस्तिक में बनने लगता है चलिए अपने मित्र को सोचिए या मित्र की बात करिए ऐसे ही आप मित्र की बात करते हैं मित्र का चित्र आपके मस्तक में दिखने लगता है तो ऐसे ही जिस भगवान को हम पूछते हैं तो उसकी मूर्ति मतलब से मोर बनाना जरूरी होता है तो दिल्ली की बात कर रहा है तो मस्तिक में एक सिंबल बन जाता है दिल्ली स्टेशन दिल्ली में कभी गए होंगे तो क्या होटल में खाना खाया होगा उतना जहां आपने देखा होगा अब कुतुबमीनार में तो आपके पास तो खाली नहीं है मगर आपको तो बोलते हैं तुम मूर्ति किस लिए पूजा करते हैं या की मूर्ति मतलब सिंबॉल किसी सिंबॉल को सामने रखते हैं और सिंबॉल को सामने रखते हैं तो फिर पूजा करने में होती सुविधा होती है सरलता होती है प्रश्न पूछने के लिए धन्यवाद थैंक यू

kisi ne prashna kiya hai aur accha prashna hamare aur vo kal ki taraf se jisne bhi yah prashna ki hai usko dhanyavad dete hain uska swaagat karte hain vo kal prashna hai hum murti pujan kyon karte toh mere pyare bhai yah jisne bhi yah prashna kiya hai kya moti pujan kyon karte toh dhyan se sunenge murti simbal jab tak hum kisi cheez ko mastisk me nahi layenge jab hum delhi ka sochte hain toh hamko delhi dekhne lagti delhi station dekhne lagta hai toh jab tak uska ek chitra taiyar nahi kar lete tab tak uske bare me yah hum jab charcha karte hain toh usko ek chitra mastisk me taiyar hone lagta hai aise kisi bhagwan ko hum poochhte hain abhi aap apne pitaji ko sochiye jab aap soch rahe hain magar pitaji ka chitra mastisk me banne lagta hai chaliye apne mitra ko sochiye ya mitra ki baat kariye aise hi aap mitra ki baat karte hain mitra ka chitra aapke mastak me dikhne lagta hai toh aise hi jis bhagwan ko hum poochhte hain toh uski murti matlab se mor banana zaroori hota hai toh delhi ki baat kar raha hai toh mastisk me ek symbol ban jata hai delhi station delhi me kabhi gaye honge toh kya hotel me khana khaya hoga utana jaha aapne dekha hoga ab qutub minar me toh aapke paas toh khaali nahi hai magar aapko toh bolte hain tum murti kis liye puja karte hain ya ki murti matlab simbal kisi simbal ko saamne rakhte hain aur simbal ko saamne rakhte hain toh phir puja karne me hoti suvidha hoti hai saralata hoti hai prashna poochne ke liye dhanyavad thank you

किसी ने प्रश्न किया है और अच्छा प्रश्न हमारे और वो कल की तरफ से जिसने भी यह प्रश्न की है

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Rajan Pandey

Social Worker

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ईश्वर तो प्रत्येक जगह हैं ईश्वर तो कण-कण में व्याप्त है पर मूर्ति को ईश्वर का प्रतिरूप मानकर उस में अपनी आस्था दिखाने के लिए ईश्वर में अपनी आस्था दिखाने के लिए हम मूर्ति पूजन करते हैं क्योंकि ईश्वर हर जगह है कण कण में है तो किसी एक निश्चित स्थान या वस्तु को हम ईश्वर का प्रतिरूप मानकर मूर्ति पूजन करते हैं

ishwar toh pratyek jagah hain ishwar toh kan kan me vyapt hai par murti ko ishwar ka pratirup maankar us me apni astha dikhane ke liye ishwar me apni astha dikhane ke liye hum murti pujan karte hain kyonki ishwar har jagah hai kan kan me hai toh kisi ek nishchit sthan ya vastu ko hum ishwar ka pratirup maankar murti pujan karte hain

ईश्वर तो प्रत्येक जगह हैं ईश्वर तो कण-कण में व्याप्त है पर मूर्ति को ईश्वर का प्रतिरूप मान

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Dr. J.Singh

Financial Expert || Ayurvedic Doctor

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मिथुन मेरे विचार से हम मूर्ती पूजा क्यों करते हैं इसका एक सीधा सा को कि मैं भी सनातन धर्म के समय से बिलोंग करता हूं से हूं और हम लोग भी पूछते हैं हमारे जो पूर्वी पूर्वी जमशेद यह सब चला आ रहा है धरना चली आ रही है कि हमारे भगवान का स्वरूप यह था इस भगवान पर शुरू किया था तो उस मूर्ति में उस भगवान के स्वरुप हम देखते हैं हमारे मन में ठानी थी कि हम भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति भगवान शिव जी के प्रति हम पूजा हनुमान जी की मूर्ति को तस्वीर को लेकर हमारी भावना हनुमान जी की वह माध्यम है उसे अपनी भावना को भगवान तक पहुंचाने का जहां तक मेरी जानकारी के अनुसार मैंने आपको बताया है किसी को अच्छी लगती किसकी गलती होती है कभी पहले हमारे विद्यालय के नीचे विद्वान होते थे और विद्वान आज के वैज्ञानिकों से बहुत ज्यादा खुश और समझदार और गुण होते थे वह हर बात को जान लेते थे जिसको इसी तरीके से बहुत सारे अंधविश्वास आज भी परिचय दीजिए कि जो वैज्ञानिक दृष्टि से बहुत सही है कोई शक है क्या नहीं था इसलिए वह उसी तरह से लोगों को मनवाने का प्रयास करते थे ताकि उनका कोई नुकसान ना हो धन्यवाद

maithun mere vichar se hum moorti puja kyon karte hain iska ek seedha sa ko ki main bhi sanatan dharm ke samay se belong karta hoon se hoon aur hum log bhi poochhte hain hamare jo purvi purvi jamshed yah sab chala aa raha hai dharna chali aa rahi hai ki hamare bhagwan ka swaroop yah tha is bhagwan par shuru kiya tha toh us murti me us bhagwan ke swarup hum dekhte hain hamare man me thani thi ki hum bhagwan shri krishna ki murti bhagwan shiv ji ke prati hum puja hanuman ji ki murti ko tasveer ko lekar hamari bhavna hanuman ji ki vaah madhyam hai use apni bhavna ko bhagwan tak pahunchane ka jaha tak meri jaankari ke anusaar maine aapko bataya hai kisi ko achi lagti kiski galti hoti hai kabhi pehle hamare vidyalaya ke niche vidhwaan hote the aur vidhwaan aaj ke vaigyaniko se bahut zyada khush aur samajhdar aur gun hote the vaah har baat ko jaan lete the jisko isi tarike se bahut saare andhavishvas aaj bhi parichay dijiye ki jo vaigyanik drishti se bahut sahi hai koi shak hai kya nahi tha isliye vaah usi tarah se logo ko manvane ka prayas karte the taki unka koi nuksan na ho dhanyavad

मिथुन मेरे विचार से हम मूर्ती पूजा क्यों करते हैं इसका एक सीधा सा को कि मैं भी सनातन धर्म

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Umesh kumar

Lecturer & Brain Guru ,Finger Prints Consultant

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अच्छा कैसे नाचता है मूर्ति पूजन क्यों करते हैं लेकिन एक तो होता है कि आप किसी टारगेट के लिए नक्शे के लिए मेरे जैसे आप ग्रुप की मिट्टी की प्रतिमा बनाई और उन्होंने परंपरागत हमें पता नहीं हमें उसका फायदा नहीं

accha kaise nachta hai murti pujan kyon karte hain lekin ek toh hota hai ki aap kisi target ke liye nakshe ke liye mere jaise aap group ki mitti ki pratima banai aur unhone paramparagat hamein pata nahi hamein uska fayda nahi

अच्छा कैसे नाचता है मूर्ति पूजन क्यों करते हैं लेकिन एक तो होता है कि आप किसी टारगेट के लि

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Rakesh Tiwari

Life Coach, Management Trainer

2:01
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आपका प्रश्न है हम मूर्ति पूजन क्यों करते हैं इसलिए कि हम मूर्तियों में हम बेवक्त का साकार रूप हम देखते हैं भक्ति का साकार रूप श्रद्धा का साकार रूप हम मूर्तियों में देखते हैं वह एक वस्तु नहीं पत्थर की या मेटल की या प्लास्टिक की वास्तव में उसमें हमारी भावनाएं जुड़ी हैं और वह भावनाएं उस पत्थर को मूर्ति का ईश्वर का स्वरूप देते हैं जैसे आपके माता पिता ने कल आपके साथ नहीं रहे कागज के टुकड़े में तस्वीर रहती है वह कागज का ही है लेकिन आपके अंदर अपने पिता की अनुभूति पिता की भावनाओं और संवेदनाओं का जीता जागता प्रमाण होता है तो उस कागज की आप तस्वीर में अपने पिता को देखते हैं पिता के प्रति आदर का भाव देते हैं पिता का हाथ में अनुराग और प्रेम देखते हैं इसलिए एक बार सम विवेकानंद से 1 किमी बालकों ने हद करते हुए मूर्ति पूजा का विरोध किया था उन्होंने उन बच्चों से कहा कि आपके पास कोई परिवार की कोई तस्वीर है तो उन्हें बताया कि यहां है फिल्म निकालिए तो 1 दिन की फैमिली की फोटो उसके मां-बाप से तो कागज का टुकड़ा है भरतमुनि ने बोला कि अपने पिताजी के भाव है वही भाग 618 पत्थर की मूर्तियों में देता है

aapka prashna hai hum murti pujan kyon karte hain isliye ki hum murtiyon me hum bevakt ka saakar roop hum dekhte hain bhakti ka saakar roop shraddha ka saakar roop hum murtiyon me dekhte hain vaah ek vastu nahi patthar ki ya metal ki ya plastic ki vaastav me usme hamari bhaavnaye judi hain aur vaah bhaavnaye us patthar ko murti ka ishwar ka swaroop dete hain jaise aapke mata pita ne kal aapke saath nahi rahe kagaz ke tukde me tasveer rehti hai vaah kagaz ka hi hai lekin aapke andar apne pita ki anubhuti pita ki bhavnao aur sanvednaon ka jita jaagta pramaan hota hai toh us kagaz ki aap tasveer me apne pita ko dekhte hain pita ke prati aadar ka bhav dete hain pita ka hath me anurag aur prem dekhte hain isliye ek baar some vivekananda se 1 kilometre baalakon ne had karte hue murti puja ka virodh kiya tha unhone un baccho se kaha ki aapke paas koi parivar ki koi tasveer hai toh unhe bataya ki yahan hai film nikaliye toh 1 din ki family ki photo uske maa baap se toh kagaz ka tukda hai bharatamuni ne bola ki apne pitaji ke bhav hai wahi bhag 618 patthar ki murtiyon me deta hai

आपका प्रश्न है हम मूर्ति पूजन क्यों करते हैं इसलिए कि हम मूर्तियों में हम बेवक्त का साकार

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Dr. Mahesh Mohan Jha

Asst. Professor,Astrologer,Author

1:14
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नमस्कार आपका प्रश्न है हम मूर्ति पूजन क्यों करते हैं हिंदू धर्म में पूजा उपासना की तमाम पद्धतियां प्रचलित है इसमें प्रकार की उपासना भी की जाती है और निराकार की भी उपासना की जाती है साकार ईश्वर की उपासना में मूर्ति पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि व्यक्ति का मन अत्याधिक चंचल और नकारात्मक होता है मन को एकाग्र करने के लिए किसी आधार का प्रयोग किया जाता है और अपने आप को जोड़ने तथा एकाग्रता के लिए मूर्ति का प्रयोग करते हैं मूर्ति पूजा से चीजें पुरी आसान और भावात्मक हो जाती है इसलिए मूर्ति पूजन का सनातन धर्म में विशेष महत्व है

namaskar aapka prashna hai hum murti pujan kyon karte hain hindu dharm me puja upasana ki tamaam paddhatiyan prachalit hai isme prakar ki upasana bhi ki jaati hai aur nirakaar ki bhi upasana ki jaati hai saakar ishwar ki upasana me murti puja ka vishesh mahatva hai kyonki vyakti ka man atyadhik chanchal aur nakaratmak hota hai man ko ekagra karne ke liye kisi aadhar ka prayog kiya jata hai aur apne aap ko jodne tatha ekagrata ke liye murti ka prayog karte hain murti puja se cheezen puri aasaan aur bhavatmak ho jaati hai isliye murti pujan ka sanatan dharm me vishesh mahatva hai

नमस्कार आपका प्रश्न है हम मूर्ति पूजन क्यों करते हैं हिंदू धर्म में पूजा उपासना की तमाम पद

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Pawan

Financial Planer

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भारत में मूर्ति पूजन एक आस्था के दौर में की जाती है कि भगवान को हम बहुत बड़ा मानते हैं और उसकी जरूरी के लिए गर्म चीज को अपने पद नहीं मानेगी तो हम उसको लगा देंगे क्योंकि चंडीगढ़ सेक्स स्टोरी की क्षमता लगे इसलिए भगवान की पूजा करते हैं वीडियो अच्छी लगे तो लाइक कीजिए

bharat me murti pujan ek astha ke daur me ki jaati hai ki bhagwan ko hum bahut bada maante hain aur uski zaroori ke liye garam cheez ko apne pad nahi manegi toh hum usko laga denge kyonki chandigarh sex story ki kshamta lage isliye bhagwan ki puja karte hain video achi lage toh like kijiye

भारत में मूर्ति पूजन एक आस्था के दौर में की जाती है कि भगवान को हम बहुत बड़ा मानते हैं और

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Acharya shree guru ji vyas

Shreemad Bhagwat Katha, Ramkatha, Bhajan Sandhya Program , Mata Ki Chowki, Jagran , all Types Devosnal & Festival Program Contact Us- 8898408005

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BK Kalyani

Teacher On Rajyoga Spiritual Knowledge

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Umesh Upaadyay

Life Coach | Motivational Speaker

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देखिए जहां तक मुझे लगता है आपको कोई भी बस नहीं करता होगा कि आप मूर्ति पूजन कीजिए यह आपकी अपनी श्रद्धा का विषय विषय हैं और आप जैसा उचित समझें वैसा कीजिए लेकिन एक आपको बात बताता हूं कि जब हम पूजन की बात करते हैं मतलब यहां तक आप सहमत हैं कि मुझे पूजन करना चाहिए तो दो तरीके हैं इसको समझने का जाने का कहीं ना कहीं कोई क्रिएटर तो है जिसने इस विषय को बनाया है आपको हमको बनाए सब चीजों को बनाए हैं उस क्रिएटर को अगर आप पूछना चाहते हैं अपनी श्रद्धा दिखाना चाहते हैं भक्ति भाव में जाना चाहते हैं तो आप ऐसे ही जा सकते हैं उसके लिए आपको किसी रास्ते की जरूरत नहीं है उसके लिए आपको मूर्ति कैलेंडर इन सब चीजों की जरूरत नहीं होती है आप ऐसे भी होते ध्यान करें या अपनी भावनाएं वैसे करें विचार ऐसे आए तो आप उनके बारे में सोच सकते हैं पूजन वगैरह कर सकते हैं बिना किसी मूर्ति मूर्ति वगैरह का कॉन्सेप्ट समझ लीजिए वह इसलिए आया होगा जहां तक मुझे लगता है वह इसलिए होगा कि देखिए हम लोग कुछ न कुछ हमको ठोस चाहिए होता है जहां पर हम अपनी एकाग्रता बना लें अब कोई चीज अगर हमें ठोस दिखती नहीं है और इस फिजिकल फॉर्म में नहीं दिखती है तो एकाग्र होना पड़ा मुश्किल हो जाता है हमारा दिमाग तो वैसे ही इधर-उधर भागता रहता है तो जब हम ऐसी बात करेंगे कि भगवान सर्वत्र हैं तो इंसान कहां ध्यान लगेगा क्या सोचेगा क्या करेगा लेकिन अगर सामने मूर्ति दिखती है तो हमें यह होता है कि चलो ठीक है कौन से स्टेशन और अटेंशन बाहर लगाना है सोच मेरी वही जाएगी और भावनाएं मेरी वैसे ही आती है और पूजन किया है वह है असली भावना है पूजन पूजन तो दिल से आती है भावना की बात होती है पूजन में अगर सही मायने में देखे तो मूर्ति पूजा करना नहीं करना चाहते लेकिन यह आपको एक-एक आराम प्रदान करता है कि सहूलियत सॉरी आराम नहीं सहूलियत प्रदान करता है आपको आपको एक अपनी नजरिया अपनी दृष्टि या आपका आशुतोष संभावनाएं सब एक जगह पर एकत्रित करने में मदद करता है

dekhiye jaha tak mujhe lagta hai aapko koi bhi bus nahi karta hoga ki aap murti pujan kijiye yah aapki apni shraddha ka vishay vishay hai aur aap jaisa uchit samajhe waisa kijiye lekin ek aapko baat batata hoon ki jab hum pujan ki baat karte hai matlab yahan tak aap sahmat hai ki mujhe pujan karna chahiye toh do tarike hai isko samjhne ka jaane ka kahin na kahin koi creator toh hai jisne is vishay ko banaya hai aapko hamko banaye sab chijon ko banaye hai us creator ko agar aap poochna chahte hai apni shraddha dikhana chahte hai bhakti bhav mein jana chahte hai toh aap aise hi ja sakte hai uske liye aapko kisi raste ki zarurat nahi hai uske liye aapko murti calendar in sab chijon ki zarurat nahi hoti hai aap aise bhi hote dhyan kare ya apni bhaavnaye waise kare vichar aise aaye toh aap unke bare mein soch sakte hai pujan vagera kar sakte hai bina kisi murti murti vagera ka concept samajh lijiye vaah isliye aaya hoga jaha tak mujhe lagta hai vaah isliye hoga ki dekhiye hum log kuch na kuch hamko thos chahiye hota hai jaha par hum apni ekagrata bana le ab koi cheez agar hamein thos dikhti nahi hai aur is physical form mein nahi dikhti hai toh ekagra hona pada mushkil ho jata hai hamara dimag toh waise hi idhar udhar bhagta rehta hai toh jab hum aisi baat karenge ki bhagwan sarvatra hai toh insaan kahaan dhyan lagega kya sochega kya karega lekin agar saamne murti dikhti hai toh hamein yah hota hai ki chalo theek hai kaunsi station aur attention bahar lagana hai soch meri wahi jayegi aur bhaavnaye meri waise hi aati hai aur pujan kiya hai vaah hai asli bhavna hai pujan pujan toh dil se aati hai bhavna ki baat hoti hai pujan mein agar sahi maayne mein dekhe toh murti puja karna nahi karna chahte lekin yah aapko ek ek aaram pradan karta hai ki sahuliyat sorry aaram nahi sahuliyat pradan karta hai aapko aapko ek apni najariya apni drishti ya aapka ashutosh sambhavnayen sab ek jagah par ekatrit karne mein madad karta hai

देखिए जहां तक मुझे लगता है आपको कोई भी बस नहीं करता होगा कि आप मूर्ति पूजन कीजिए यह आपकी अ

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Anil Kumar Tiwari

Yoga, Meditation & Astrologer

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Karan Janwa

Automobile Engineer

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श्री भगवत गीता में कहा गया कि समझता है उसको उसी रूप में फल देता हूं ईश्वर को पाने के मार्ग अलग-अलग सब का मंदिर एक ही है भारत में भुजा 18 साल से होती आ रही है यह हमारे संस्कारों के अंदर है पुराने समय में ऋषि मुनि निराकार ईश्वर की कल्पना करते थे निराकार का ध्यान करना ऋषि मुनि के बस की बात है हमारे इमेजिन मेकर्स परंपरा का मूल्यांकन के लिए अधिकार की व्याख्या करने का अवसर मिला योगेंद्र करते तो कोई भी धर्म किसी बिंदु के ऊपर ध्यान सिर्फ फल प्रसाद अगरबत्ती गेहूं तरसते हैं ऐसी तैसी करो दुनिया के किसी भी कोने में रहते हो

shri bhagwat geeta mein kaha gaya ki samajhata hai usko usi roop mein fal deta hoon ishwar ko paane ke marg alag alag sab ka mandir ek hi hai bharat mein bhuja 18 saal se hoti aa rahi hai yah hamare sanskaron ke andar hai purane samay mein rishi muni nirakaar ishwar ki kalpana karte the nirakaar ka dhyan karna rishi muni ke bus ki baat hai hamare imejin makers parampara ka mulyankan ke liye adhikaar ki vyakhya karne ka avsar mila yogendra karte toh koi bhi dharm kisi bindu ke upar dhyan sirf fal prasad agarbatti gehun taraste hain aisi taisi karo duniya ke kisi bhi kone mein rehte ho

श्री भगवत गीता में कहा गया कि समझता है उसको उसी रूप में फल देता हूं ईश्वर को पाने के मार्ग

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

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छपरा से हम उसी पूजन क्यों करते हैं हम मूर्ति पूजन करते हैं क्योंकि हमें अच्छा लगता है हम मूर्ति की पूजा भी करते हैं ना के यह भगवान विराज का दिन अच्छा जाए तो कुछ अच्छा हो कर भला तो हो भला सुख दुख के साथी उनके चित्र पर वाले अच्छे-अच्छे मूर्ति का कर दे दिया जो कि

chapra se hum usi pujan kyon karte hain hum murti pujan karte hain kyonki hamein accha lagta hai hum murti ki puja bhi karte hain na ke yah bhagwan viraaj ka din accha jaaye toh kuch accha ho kar bhala toh ho bhala sukh dukh ke sathi unke chitra par waale acche acche murti ka kar de diya jo ki

छपरा से हम उसी पूजन क्यों करते हैं हम मूर्ति पूजन करते हैं क्योंकि हमें अच्छा लगता है हम म

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

8:46
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हम मूर्ति पूजा क्यों करते हैं कौन-कौन में रहते हैं ऐसे ही हिंदू मान्यता हमारे धर्म में है और इसी तरह से ईश्वर का छोटा स्वरूप हमारी खुद में विद्यमान है उसको ऑन आत्मा स्वरुप या प्राण करते हैं अब जो हम अपने आप से बात करते हैं वह अपनी आत्मा से बात करते हैं लेकिन प्रतीक स्वरूप एक मूर्ति को अगर देखकर और हमारे दिमाग से आत्मा से हम सामने रखकर अपना हमारे अंदर है भगवान हमारे अंदर है लेकिन हम उसको भगवान का स्वरूप मानकर और शिकायत ना करते इससे एक तरह का भाव एक यह शुभम पैदा होता है हाथ जोड़कर हम झुकते हैं नमन करते हैं साष्टांग दंडवत करते हैं तो हमें हमारी जो कुछ भाव जो हमारे मन में है वह तय है कि हम बहुत कुछ नगण्य हैं आपके कृपा दृष्टि हमेशा हमारे ऊपर बनी रहे और हम शांति से रहे भगवान से लोग बहुत कुछ मांगने जाते हैं लेकिन कभी भगवान का मंदिर में जाकर मूर्ति से धन्यवाद अदा बहुत कम रखते हैं कि भगवान हम आपने हमें जितना दिया है मैं तो इसके काबिल नहीं अभी आपने मुझे बहुत कुछ दिया है और विश्व को शांति प्रदान करें सब को सुख साता में रखें अब मूर्ति पूजा इस भाव से की जाती है कि उसको हम स्वरूप देखने जैसे श्री कृष्ण भगवान को हमने कभी देखा नहीं है लेकिन श्री कृष्ण भगवान को उस समय की जो मूर्ति है द्वारकाधीश में द्वारका में द्वारकाधीश की मूर्ति विद्यमान है और हम पूजा करते हैं इस तरह से शंकर भगवान की पूजा क्यों होती है मूर्ति की होती है लेकिन शिवलिंग की पूजा होती है वह सही शक्तिपुंज के रूप में सीलिंग है और वह हमारे देश में 12 ज्योतिर्लिंग के रूप में विद्यमान है पुरातन समय से होती पहले कि हम 70805 5000 वर्ष पुरानी मूर्तियां और शिवलिंग जो है अजय द्वादश ज्योतिर्लिंग पूरे भारत में इसको बोलते हैं सोमनाथ से केदारनाथ शेषनाथ से महाकालेश्वर है मलिकार्जुन है भीमाशंकर रामेश्वरम इस तरह से उन बाबर ज्योतिर्लिंग बहुत ही अति प्राचीन है और एक शक्ति के तेज पुंज के रूप में हमें उसकी आस्था को बेलपत्र चढ़ाकर पूजा करते हैं और शंकर भगवान को शिवलिंग के रूप में पूजा उसी तरह विष्णु भगवान की भी छवि और मूर्ति के रूप में ब्रह्मा जी का भी इसी तरह से हम ब्रह्मा मंदिर पुष्कर में जो इस तरह से एक हफ्ता कैसे बनी मूर्तियों की पूजा करते हैं इसी तरह समाज में मूर्ति पूजा का निषेध है मूर्ति पूजा उन लोगों में नहीं होती है वह नहीं करते हैं क्योंकि स्वामी विवेकानंद है उन्होंने एक कहानी जो है हम बचपन से सुनते आ रहे हैं कि मैं प्रसाद चढ़ाया गया था और मुंह से काटती है का प्रसाद खा रहा था तो विवेकानंद जी को वकील गई खुद अपने प्रसाद की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं तो हमारी रक्षा कैसे करेंगे लेकिन सब कहानी बताई गई मूर्ति पूजा का प्रचलन नहीं है लेकिन यज्ञ करना आहुति देने का अलग अलग अलग अलग तरह के और मूर्ति पूजा को विशेष माना गया है यह जो मुस्लिम धर्म है उसमें मूर्ति पूजा को निषेध माना गया है बुत परस्ती को नहीं मानते हैं वह मूर्ति को बोलते हैं और वह कहते हैं कि बुत परस्ती नहीं होनी चाहिए मूर्ति पूजा का मतलब उनके दर में निश्चित है ठीक है और ईसा मसीह जो कुश्ती करना है ईसाई धर्म उसमें ईसा मसीह जी की जो वही उनकी जो मूर्ति एक ही सब जगह पूरे विश्व में देखी जाती है और जो इसके अलावा जो जस्ट सुदी लोग देते हैं पारसी लोग जो होते हैं वह अग्नि की पूजा करते हैं वह अग्नि कोई मन से उनका जो उदवाड़ा में पारसी लोगों का धर्म स्थान है इस तरह से अलग-अलग धर्मों में अलग-अलग और हिंदू धर्म में आर्य समाज को छोड़कर लगभग सभी पंच में हिंदू के पंखों में मूर्ति पूजा को प्रचलित और सर्वमान्य माना गया है इसके पीछे भाव बस यही है कि हम भगवान को पटना करें तो सब लोग अलग-अलग कल्पना करेगा सब के मूर्ति का स्वरूप या भगवान का स्वरूप अलग अलग लूंगा और उसको एक सेब जे कृष्णमूर्ति जो बनाई जाती है उसकी आंख से होती है वह अति सुंदर और आंख बोलने लगे इसे मूर्तिकार मूर्ति बनाते हैं भगवान की और हमें यह भाव से जाते हैं मंदिर में कि वहां पर इतनी सेवा पूजा भगवान की आरती और वहां पर जांच मंत्रों के रुपए उस तरह से वह मूर्ति के ऊपर इफेक्ट तो आता ही है वहां पर इतनी पूजा जो होती है कि इतनी आरती होती है की मूर्ति के ऊपर चेक करता है और एक मूर्ति का एक तरह से जिसको बोले कि अलग स्वरुप हमें दिखाई देता है और हम उसके सामने नतमस्तक हो जाते हैं और हमारे भाव अच्छे शुभ हो जाते हैं इसलिए मूर्ति पूजा जो है वह को बोले कि बेकार कि हम मूर्ति पूजा करते हैं ऐसा ना मानकर उसे पॉजिटिव शुरू किया जाना चाहिए और मूर्ति पूजा को मानकर और हम अपने ही भगवान को एक स्वरूप में देखकर और उनका शुभ कल ग्रहण करते सुख एवं विश्व कल्याण में हो ऐसी कामना करते हैं जय हिंद जय भारत

hum murti puja kyon karte hain kaun kaun mein rehte hain aise hi hindu manyata hamare dharm mein hai aur isi tarah se ishwar ka chota swaroop hamari khud mein vidyaman hai usko on aatma swarup ya praan karte hain ab jo hum apne aap se baat karte hain vaah apni aatma se baat karte hain lekin prateek swaroop ek murti ko agar dekhkar aur hamare dimag se aatma se hum saamne rakhakar apna hamare andar hai bhagwan hamare andar hai lekin hum usko bhagwan ka swaroop maankar aur shikayat na karte isse ek tarah ka bhav ek yah subham paida hota hai hath jodkar hum jhukate hain naman karte hain sashtang dandvat karte hain toh hamein hamari jo kuch bhav jo hamare man mein hai vaah tay hai ki hum bahut kuch naganya hain aapke kripa drishti hamesha hamare upar bani rahe aur hum shanti se rahe bhagwan se log bahut kuch mangne jaate hain lekin kabhi bhagwan ka mandir mein jaakar murti se dhanyavad ada bahut kam rakhte hain ki bhagwan hum aapne hamein jitna diya hai toh iske kaabil nahi abhi aapne mujhe bahut kuch diya hai aur vishwa ko shanti pradan kare sab ko sukh sata mein rakhen ab murti puja is bhav se ki jaati hai ki usko hum swaroop dekhne jaise shri krishna bhagwan ko humne kabhi dekha nahi hai lekin shri krishna bhagwan ko us samay ki jo murti hai dwarakadheesh mein dwarka mein dwarakadheesh ki murti vidyaman hai aur hum puja karte hain is tarah se shankar bhagwan ki puja kyon hoti hai murti ki hoti hai lekin shivling ki puja hoti hai vaah sahi shaktipunj ke roop mein ceiling hai aur vaah hamare desh mein 12 jyotirling ke roop mein vidyaman hai puratan samay se hoti pehle ki hum 70805 5000 varsh purani murtiya aur shivling jo hai ajay dwadash jyotirling poore bharat mein isko bolte hain somnath se kedarnath sheshnath se mahakaleshwar hai malikarjun hai bhimashankara rameshwaram is tarah se un babar jyotirling bahut hi ati prachin hai aur ek shakti ke tez punj ke roop mein hamein uski astha ko bailpatra chadhakar puja karte hain aur shankar bhagwan ko shivling ke roop mein puja usi tarah vishnu bhagwan ki bhi chhavi aur murti ke roop mein brahma ji ka bhi isi tarah se hum brahma mandir pushkar mein jo is tarah se ek hafta kaise bani murtiyon ki puja karte hain isi tarah samaj mein murti puja ka nishedh hai murti puja un logo mein nahi hoti hai vaah nahi karte hain kyonki swami vivekananda hai unhone ek kahani jo hai hum bachpan se sunte aa rahe hain ki main prasad chadaya gaya tha aur mooh se katatee hai ka prasad kha raha tha toh vivekananda ji ko vakil gayi khud apne prasad ki raksha nahi kar paa rahe hain toh hamari raksha kaise karenge lekin sab kahani batai gayi murti puja ka prachalan nahi hai lekin yagya karna aahutee dene ka alag alag alag alag tarah ke aur murti puja ko vishesh mana gaya hai yah jo muslim dharm hai usme murti puja ko nishedh mana gaya hai but parasti ko nahi maante hain vaah murti ko bolte hain aur vaah kehte hain ki but parasti nahi honi chahiye murti puja ka matlab unke dar mein nishchit hai theek hai aur isa masih jo kushti karna hai isai dharm usme isa masih ji ki jo wahi unki jo murti ek hi sab jagah poore vishwa mein dekhi jaati hai aur jo iske alava jo just shudi log dete hain parasi log jo hote hain vaah agni ki puja karte hain vaah agni koi man se unka jo udavada mein parasi logo ka dharm sthan hai is tarah se alag alag dharmon mein alag alag aur hindu dharm mein arya samaj ko chhodkar lagbhag sabhi punch mein hindu ke pankhon mein murti puja ko prachalit aur sarvmanya mana gaya hai iske peeche bhav bus yahi hai ki hum bhagwan ko patna kare toh sab log alag alag kalpana karega sab ke murti ka swaroop ya bhagwan ka swaroop alag alag lunga aur usko ek seb je krishnamurti jo banai jaati hai uski aankh se hoti hai vaah ati sundar aur aankh bolne lage ise murtikar murti banate hain bhagwan ki aur hamein yah bhav se jaate hain mandir mein ki wahan par itni seva puja bhagwan ki aarti aur wahan par jaanch mantron ke rupaye us tarah se vaah murti ke upar effect toh aata hi hai wahan par itni puja jo hoti hai ki itni aarti hoti hai ki murti ke upar check karta hai aur ek murti ka ek tarah se jisko bole ki alag swarup hamein dikhai deta hai aur hum uske saamne natamastak ho jaate hain aur hamare bhav acche shubha ho jaate hain isliye murti puja jo hai vaah ko bole ki bekar ki hum murti puja karte hain aisa na maankar use positive shuru kiya jana chahiye aur murti puja ko maankar aur hum apne hi bhagwan ko ek swaroop mein dekhkar aur unka shubha kal grahan karte sukh evam vishwa kalyan mein ho aisi kamna karte hain jai hind jai bharat

हम मूर्ति पूजा क्यों करते हैं कौन-कौन में रहते हैं ऐसे ही हिंदू मान्यता हमारे धर्म में है

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Dr Kanahaiya

Dr Kanahaiya Reki Grand Masstr Apt .Sujok .Homyopathy .

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महेश सेठ

रेकी ग्रैंडमास्टर,लाइफ कोच

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हम मूर्ति पूजन क्यों करते हैं हमारी गरज होती है हमारा स्वार्थ होता है हमारा लालच होता है इसलिए हम मूर्तिपूजक हम भय के कारण मूर्ति पूजन करते हैं अगर हमारे अंदर आत्मविश्वास हो हम मूर्ति पूजन करेंगे परंतु हमारा उद्देश्य के साथ स्थापित करना अपने अंदर के ईश्वर को अगर मूर्ति देखकर के आपके अंदर के ईश्वर नहीं जागता तो आप काम क्रोध लोभ मोह अहंकार में ही ईश्वर की मूर्ति की पूजा कर रहे हैं तो बस इतनी सी बात है समझ में आ जाए तो बहुत बड़ी बात है नहीं आए तो सब लोग कर ही रहे हैं पूजा धन्यवाद

hum murti pujan kyon karte hain hamari garaj hoti hai hamara swarth hota hai hamara lalach hota hai isliye hum murtipujak hum bhay ke karan murti pujan karte hain agar hamare andar aatmvishvaas ho hum murti pujan karenge parantu hamara uddeshya ke saath sthapit karna apne andar ke ishwar ko agar murti dekhkar ke aapke andar ke ishwar nahi jaagta toh aap kaam krodh lobh moh ahankar mein hi ishwar ki murti ki puja kar rahe hain toh bus itni si baat hai samajh mein aa jaaye toh bahut badi baat hai nahi aaye toh sab log kar hi rahe hain puja dhanyavad

हम मूर्ति पूजन क्यों करते हैं हमारी गरज होती है हमारा स्वार्थ होता है हमारा लालच होता है इ

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