कैसे समझाये कि परमात्मा सर्वत्र है, क्या तर्क होगा?...


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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

छपरा से कैसे समझाए कि परमात्मा सर्वत्र है क्या तर्क होगा नहीं तर्क नहीं होगा परमात्मा सर्वत्र है हर जगह परमात्मा है परमात्मा है ठीक है इसलिए परमात्मा हर जगह है सर्वत्र है क्या तर्क होगा करके होगा क्या ईश्वर होगा कि नहीं यह होगा कि नहीं यह ऐसा ही होता होगा यह सिर्फ

chapra se kaise samjhaye ki paramatma sarvatra hai kya tark hoga nahi tark nahi hoga paramatma sarvatra hai har jagah paramatma hai paramatma hai theek hai isliye paramatma har jagah hai sarvatra hai kya tark hoga karke hoga kya ishwar hoga ki nahi yah hoga ki nahi yah aisa hi hota hoga yah sirf

छपरा से कैसे समझाए कि परमात्मा सर्वत्र है क्या तर्क होगा नहीं तर्क नहीं होगा परमात्मा सर्व

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Daivagya Krishna Shastri

Astrologer, Ved, Bhagvat Mahapuran

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जय श्री राधे कृष्णा इसमें समझाने की कोई बात ही नहीं है यह तो स्वयं सिद्ध है बाबा तुलसीदास से कह कर के गए बिहारी व्यापक सर्वत्र समाना प्रेम से प्रगट हुए मैं जाना अर्थात जो मानता है उसको समझाने की आवश्यकता ही नहीं है वह तो खुद ही जानता है कि परमात्मा हर अरुण पुत्रों में कण-कण में व्याप्त रूप से व्यापक रूप से विद्यमान है और तो और वेद पुराण भी कहते हैं इस सेवा सदन सर्व विदित जगत राम जगत में परमात्मा की सत्ता विद्यमान है परमात्मा वहां पर उपस्थित होकर के उस वस्तु का प्रतिपादन करता है संचालन करता है अर्थात हमें अपने वेद पुराणों की बातों को जो नहीं मानता वह निश्चित रूप से उसे सनातन धर्म और हिंदू कहने का अधिकारी नहीं है इसलिए हमें अपने पुराणों की अपने जो महापुर अपने जो पूर्वज हैं उनका अनुसरण करना चाहिए और यह विचार करना चाहिए कि हर जगह परमात्मा है और जब ऐसा विटारा आपके अंदर आ जाएगा तो कुत्ते में भी आपको भगवान के प्रति मूर्ति दिखाई देगी आप कुत्ते को भी पीड़ा नहीं पहुंचाएंगे बिल्ली को भी पीड़ा नहीं पहुंचाएंगे सबके अंदर क्षमता का भाव आ जाएगा एकाग्रता का भाव आ जाएगा श्री राधे श्यामा श्री राधे कृष्णा

jai shri radhe krishna isme samjhane ki koi baat hi nahi hai yah toh swayam siddh hai baba tulsidas se keh kar ke gaye bihari vyapak sarvatra samaana prem se pragat hue main jana arthat jo manata hai usko samjhane ki avashyakta hi nahi hai vaah toh khud hi jaanta hai ki paramatma har arun putron mein kan kan mein vyapt roop se vyapak roop se vidyaman hai aur toh aur ved puran bhi kehte hain is seva sadan surv widit jagat ram jagat mein paramatma ki satta vidyaman hai paramatma wahan par upasthit hokar ke us vastu ka pratipadan karta hai sanchalan karta hai arthat hamein apne ved purano ki baaton ko jo nahi manata vaah nishchit roop se use sanatan dharm aur hindu kehne ka adhikari nahi hai isliye hamein apne purano ki apne jo mahapur apne jo purvaj hain unka anusaran karna chahiye aur yah vichar karna chahiye ki har jagah paramatma hai aur jab aisa vitara aapke andar aa jaega toh kutte mein bhi aapko bhagwan ke prati murti dikhai degi aap kutte ko bhi peeda nahi pahunchaenge billi ko bhi peeda nahi pahunchaenge sabke andar kshamta ka bhav aa jaega ekagrata ka bhav aa jaega shri radhe shyaama shri radhe krishna

जय श्री राधे कृष्णा इसमें समझाने की कोई बात ही नहीं है यह तो स्वयं सिद्ध है बाबा तुलसीदास

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Umesh Upaadyay

Life Coach | Motivational Speaker

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखें इंसान के पास यह शक्ति है कि वह सोच सकता है समझ सकता है तर्क वितर्क कर सकता है जाने की इच्छा रखता है कोई चीज को के चढ़ते जाने की उसमें क्षमता है समझने की क्षमता है वह चीजों को अनुभव भी कर सकता है लेकिन हम क्या कर रहे हैं हम अपने दिमाग का प्रयोग बहुत ज्यादा करते हैं और तर्क वितर्क करने से हमें लगता है कि हमारे पास बहुत ज्ञान है हमने चंद किताबे पढ़ ली और थोड़ा अपनी लाइफ को ठीक-ठाक से मैनेज कर पा रहे हैं तो हमें लगता है कि नहीं मेरे में तो ज्ञान का भंडार विषय आस्था का होता है ना जब विषय कुछ ऐसा होता है जहां पर आपको महसूस करने की जरूरत होती हैं तो वहां पर आप अपने नॉलेज से ज्ञान से कुछ हासिल नहीं कर पाते हैं लेकिन जब बात करते हैं कि कैसे समझाएं कि परमात्मा सर्वत्र हैं या वगैरा-वगैरा बड़ी सिंपल सी बात है मैं तो एक ही चीज बोलता हूं ड्रॉइंग देखते हैं पेंटिंग बिकती है तो उसको बनाने वाला कोई ना कोई तो होगा ना पेंटर कोई ना कोई तो होगा ना अगर आपको सृष्टि देखती है ब्रह्मांड दिखता है तो इसके रचयिता कोई ना कोई तो होंगे ना आधे वॉइस कैसे आ गया सोच कर देखें जब आप बात करते कि परमात्मा सर्वत्र हैं वहीं पर आप किताब से पढ़ना चाहते हैं या कहीं कैसे आप इसको जाना चाहते देखना चाहते समझना चाहते हैं आप अपने बुद्धि को समझना चाहते हैं मैं उसको बोलता हूं कि आप अपने अनुभव से इसको समझ गए क्या आपके जीवन में कभी भी ऐसा अनुभव नहीं आया जिससे आपको क्षण भर के लिए भी लगा हो कि नहीं किसी ने मुझे बचाया है कोई शक्ति तो थी कोई ऐसा काम था जो कि मैं नहीं कर सकता लेकिन वह काम हो गया कहीं ना कहीं से आपको कोई सपोर्ट मिला होगा कभी ऐसा नहीं हुआ तो क्या है अगर अगर ऐसा हुआ है तो वह क्या है वह कैसे होगा आपके जीवन में नहीं होगा आपके घर के परिवार के किसी न किसी जीवन में कुछ ना कुछ तो ऐसा अनुभव होगा वही अनुभव आपको यह बता सकता है गाइड कर सकता है कि यह भाई कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ नहीं सर का टेस्ट का अपना सिस्टम है वह चल रहा है और बहुत अच्छे तरीके से चल रहा है सुचारु रुप से चल रहा है तो कहीं चीज को आप तर्क वितर्क अपने नॉलेज अपने लॉजिक से मत आने की कोशिश कीजिए क्योंकि आप सोचो ना या मेरा जो नॉलेज है बहुत सीमित है और नॉलेज है क्या नॉलेज इज नथिंग बट मेमोरी हमारे दिमाग में मेमोरी होते हमारे पूरे बॉडी में मेमोरी होती है अगर मैं ब्रॉडली बोलो तो दिमाग में जो मेमोरी होती हैं जो डाटा हमने डाला हुआ है फील्ड किया होता है आप उसी में से तो इंफॉर्मेशन निकालते हैं ना सोच कर देखें अगर मैं आपको बोलूं कोई चीज नई सोच कर बताओ तो आप कहां से सोचेंगे आप अपने मेमोरी से ही सोचेंगे आप अपने दिमाग से ही सोचेंगे तो फिर दिमाग में है ही नहीं कुछ चीजें दुआ प्रोड्यूस कैसे करेंगे सोच कर देखिए तो इसीलिए कुछ चीजों में ज्यादा तर्क वितर्क करने की बजाय उसको किताबी रूप में पड़ने की वजह हालांकि बहुत सारी किताबें जरूर है और आप भी उठा लीजिए कुछ भी उठा लीजिए आपको कहीं ना कहीं कोई ना कोई इंडिकेशन मिलेगा लेकिन फिर भी उससे संतुष्ट नहीं है तो मैं कहता हूं कि आप वह सब छोड़िए किसी और कोई और आपको क्या बोलते हैं उसको छोड़िए आप अपने पर्सनल अनुभव को लीजिए और देखें कि अगर कुछ अभी तक हुआ है तो आप मानना चाहते तो माननीय माली से नहीं मानना चाहते तो भी आपकी लाइफ चलेगी क्योंकि जीवन आपको मिला है मनुष्य रूप में आपके कर्म के साथ इस पर जैसा चल चलना चाहते हैं फ्रीव्हील है आपके पास आप इसको कैसे चला सकते हैं कंप्लीट ही आपके ऊपर है आप की मर्जी है अभी गुजरात

dekhen insaan ke paas yah shakti hai ki vaah soch sakta hai samajh sakta hai tark vitark kar sakta hai jaane ki iccha rakhta hai koi cheez ko ke chadhte jaane ki usme kshamta hai samjhne ki kshamta hai vaah chijon ko anubhav bhi kar sakta hai lekin hum kya kar rahe hai hum apne dimag ka prayog bahut zyada karte hai aur tark vitark karne se hamein lagta hai ki hamare paas bahut gyaan hai humne chand kitabe padh li aur thoda apni life ko theek thak se manage kar paa rahe hai toh hamein lagta hai ki nahi mere mein toh gyaan ka bhandar vishay astha ka hota hai na jab vishay kuch aisa hota hai jaha par aapko mehsus karne ki zarurat hoti hai toh wahan par aap apne knowledge se gyaan se kuch hasil nahi kar paate hai lekin jab baat karte hai ki kaise samjhayen ki paramatma sarvatra hai ya vagaira vagaira baadi simple si baat hai toh ek hi cheez bolta hoon drawing dekhte hai painting bikti hai toh usko banane vala koi na koi toh hoga na painter koi na koi toh hoga na agar aapko shrishti dekhti hai brahmaand dikhta hai toh iske rachiyata koi na koi toh honge na aadhe voice kaise aa gaya soch kar dekhen jab aap baat karte ki paramatma sarvatra hai wahi par aap kitab se padhna chahte hai ya kahin kaise aap isko jana chahte dekhna chahte samajhna chahte hai aap apne buddhi ko samajhna chahte hai usko bolta hoon ki aap apne anubhav se isko samajh gaye kya aapke jeevan mein kabhi bhi aisa anubhav nahi aaya jisse aapko kshan bhar ke liye bhi laga ho ki nahi kisi ne mujhe bachaya hai koi shakti toh thi koi aisa kaam tha jo ki main nahi kar sakta lekin vaah kaam ho gaya kahin na kahin se aapko koi support mila hoga kabhi aisa nahi hua toh kya hai agar agar aisa hua hai toh vaah kya hai vaah kaise hoga aapke jeevan mein nahi hoga aapke ghar ke parivar ke kisi na kisi jeevan mein kuch na kuch toh aisa anubhav hoga wahi anubhav aapko yah bata sakta hai guide kar sakta hai ki yah bhai kahin na kahin kuch na kuch nahi sir ka test ka apna system hai vaah chal raha hai aur bahut acche tarike se chal raha hai suruchi roop se chal raha hai toh kahin cheez ko aap tark vitark apne knowledge apne logic se mat aane ki koshish kijiye kyonki aap socho na ya mera jo knowledge hai bahut simit hai aur knowledge hai kya knowledge is nothing but memory hamare dimag mein memory hote hamare poore body mein memory hoti hai agar main broadly bolo toh dimag mein jo memory hoti hai jo data humne dala hua hai field kiya hota hai aap usi mein se toh information nikalate hai na soch kar dekhen agar main aapko bolu koi cheez nayi soch kar batao toh aap kahaan se sochenge aap apne memory se hi sochenge aap apne dimag se hi sochenge toh phir dimag mein hai hi nahi kuch cheezen dua produce kaise karenge soch kar dekhiye toh isliye kuch chijon mein zyada tark vitark karne ki bajay usko kitabi roop mein padane ki wajah halaki bahut saree kitaben zaroor hai aur aap bhi utha lijiye kuch bhi utha lijiye aapko kahin na kahin koi na koi indication milega lekin phir bhi usse santusht nahi hai toh main kahata hoon ki aap vaah sab chodiye kisi aur koi aur aapko kya bolte hai usko chodiye aap apne personal anubhav ko lijiye aur dekhen ki agar kuch abhi tak hua hai toh aap manana chahte toh mananiya maali se nahi manana chahte toh bhi aapki life chalegi kyonki jeevan aapko mila hai manushya roop mein aapke karm ke saath is par jaisa chal chalna chahte hai frivil hai aapke paas aap isko kaise chala sakte hai complete hi aapke upar hai aap ki marji hai abhi gujarat

देखें इंसान के पास यह शक्ति है कि वह सोच सकता है समझ सकता है तर्क वितर्क कर सकता है जाने क

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

परमात्मा शिव स्त्रोत आप उसे प्राप्त कर सकते हैं जैसा कि आप इस बात से समझ सकते हैं कि हिरण्यकश्यप भक्त प्रहलाद को प्रताड़ित किया और उससे पूछा कि बताओ तुम्हारे परमात्मा कहां है तो उसने कहा कि मेरे परमात्मा तो सब जगह पर उसके पिता ने उससे कहा कि क्या इस खंभे में परमात्मा परमात्मा मौजूद प्रमुख का मारा और उस पर भी तोड़ दिया और शनि के बीच में रखकर चीर कर दिया इससे हम समझ सकते हैं कि परमात्मा सर्वत्र व्याप्त है हो सकता है

paramatma shiv satrot aap use prapt kar sakte hain jaisa ki aap is baat se samajh sakte hain ki hiranyakashyap bhakt prahlad ko pratarit kiya aur usse poocha ki batao tumhare paramatma kahaan hai toh usne kaha ki mere paramatma toh sab jagah par uske pita ne usse kaha ki kya is khambhe mein paramatma paramatma maujud pramukh ka mara aur us par bhi tod diya aur shani ke beech mein rakhakar chir kar diya isse hum samajh sakte hain ki paramatma sarvatra vyapt hai ho sakta hai

परमात्मा शिव स्त्रोत आप उसे प्राप्त कर सकते हैं जैसा कि आप इस बात से समझ सकते हैं कि हिरण्

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M S Aditya Pandit

Entrepreneur | Politician

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

का सबसे बड़ा लॉजिक यही है कि जिस तरह प्रकृति है ब्रह्मांड इनविजिबल नोचे इसका पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर चलता है उसे बस श्याम श्याम से शिव पुराण पुस्तक चलता चलता है लेकिन बिकता नहीं यह चीज है पूरा आनंद है हल्क लिमिटेड एरिया में जानते लिमिटेड एरिया में रहते हैं बाकी हम नहीं जानते हैं अलग-अलग जगह तो अभी हम सब पृथ्वी के आजू-बाजू है इस तरह से उसका ऐड कर सकते हैं कि कल स्वरूप बैडमिंटन लाइव पार्टिकल इन द पार्टिकल जो क्रिएट करता है नई चीज पर वह लाइफ में हूं चाय अलर्ट में है वह काम करते हैं तो वह हर जगह बट आपको ही करना होगा तो आपको मिले

ka sabse bada logic yahi hai ki jis tarah prakriti hai brahmaand inavijibal noche iska pura infrastructure chalta hai use bus shyam shayam se shiv puran pustak chalta chalta hai lekin bikta nahi yah cheez hai pura anand hai Hulk limited area mein jante limited area mein rehte hain baki hum nahi jante hain alag alag jagah toh abhi hum sab prithvi ke aju baju hai is tarah se uska aid kar sakte hain ki kal swaroop Badminton live particle in the particle jo create karta hai nayi cheez par vaah life mein hoon chai alert mein hai vaah kaam karte hain toh vaah har jagah but aapko hi karna hoga toh aapko mile

का सबसे बड़ा लॉजिक यही है कि जिस तरह प्रकृति है ब्रह्मांड इनविजिबल नोचे इसका पूरा इंफ्रास्

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Mahender Dhar Dwivedi

Founder & Director - Roric Educational Solution

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार मित्रों बड़ा ही पुराना है और नवीन है इस प्रकार के प्रश्नों का उत्तर सामान्य दूसरों के शब्दों में दिया जाना या दूसरों द्वारा बताया जा ना उतना उचित नहीं है जितना कि स्व अनुभव होना मेरा आपसे एक मात्र प्रश्न है कि आपके जीवन में जब भी कोई विषम परिस्थिति आती है अर्थात आप किन्ही भी समस्याओं से पीड़ित होते हैं या कभी भी कोई मुश्किल की घड़ी आती है तो आप हमेशा ईश्वर को याद करता स्वरूप अलग हो सकता है कोई उसको याद करता है कोई भगवान शिव को याद करता है कोई अल्लाह मियां को याद करता है कोई अलग अलग मतलब सबका अपना अपना स्वरूप है कोई किसी साधु महात्मा को मानता है तो उसको याद करता है आजकल बड़े धर्मगुरु भी पसंद हो गए हैं कोई साईं बाबा में आस्था रखता है तुमको मानता है पर मेरा अपना अनुभव यही कहता है कि परमात्मा या ईश्वर आपके स्वयं अंदर अगर आप हैं तो ईश्वर है अपने अंतर्मन को टटोला और ज्ञान प्राप्त करें आपको जवाब मिल जाएगा धन्यवाद मित्रों

namaskar mitron bada hi purana hai aur naveen hai is prakar ke prashnon ka uttar samanya dusro ke shabdon mein diya jana ya dusro dwara bataya ja na utana uchit nahi hai jitna ki swa anubhav hona mera aapse ek matra prashna hai ki aapke jeevan mein jab bhi koi visham paristithi aati hai arthat aap kinhi bhi samasyaon se peedit hote hain ya kabhi bhi koi mushkil ki ghadi aati hai toh aap hamesha ishwar ko yaad karta swaroop alag ho sakta hai koi usko yaad karta hai koi bhagwan shiv ko yaad karta hai koi allah miyan ko yaad karta hai koi alag alag matlab sabka apna apna swaroop hai koi kisi sadhu mahatma ko manata hai toh usko yaad karta hai aajkal bade dharmguru bhi pasand ho gaye hain koi sai baba mein astha rakhta hai tumko manata hai par mera apna anubhav yahi kahata hai ki paramatma ya ishwar aapke swayam andar agar aap hain toh ishwar hai apne antarman ko tatola aur gyaan prapt kare aapko jawab mil jaega dhanyavad mitron

नमस्कार मित्रों बड़ा ही पुराना है और नवीन है इस प्रकार के प्रश्नों का उत्तर सामान्य दूसरों

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Greeshma Nataraj

Psychology Counseling, Life Coach, NLP, Cognitive Behavioral Therapist, Motivational Speaker, Handwriting Signature Analyst.

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

गुड आफ्टरनून देखिए आई डोंट नो आप मेरे से कितने सहमत होंगे आपने पूछा पूछा है कि परमात्मा शरबत को है है क्या उसका तर्क होगा क्या आप आप इंसान हो इस दिन डाटा अपने धरती पर जन्म लिया है आज आप चल फिर सकते बोल सकते हो आप किसी के लिए अच्छी बातें बोलते हो किसी के लिए गुस्सा करते हो तो आपने परमात्मा है इसका मतलब यही हुआ ना आप आज बैठ कर बात कर रहे हो आज आप बैठकर कुछ काम कर रहे हो अब टेबल कुर्सी के जैसे नहीं हो इस आप में भगवान बसता है इसलिए आप चल फिर सकते हो आप आप में रहे हैं आप में दुख होता है आपको आपको गुस्सा आता है यह सभी चीजों का जो सम्मेलन है यह किसने करवाया है भगवान ने करवाया है है ना मैं मानती हूं कि भगवान मंदिरों में नहीं है इंसानों में होता है अब जब किसी को दुखी होते हो तो आप भी रोते हो आप कोई खुश होता है छोटा बच्चा खेल खेलता है उसको देखकर आप खुश होते हो बड़े कोई आपकी मजाक उड़ाते हो आप उसके साथ खुश होते हो लेकिन अगर कोई रोता है कोई गुजर जाता है या कुछ ऐसा हो जाता है लाइफ में जिससे आपको ठोस पूछते तो आप रोते हो तो यह सारी चीजें आपको उसी तरह निर्देशित करती है जिसका कहना है कि इंसान में भगवान है इंसान में आत्मा बसती है जो एक पुण्य आत्माएं होती है तो मेरे हिसाब से भगवान हर एक इंसान में है हर एक चीज में है जिसमें भेदभाव नहीं है और जो हर एक को अपना हिसाब से एक ही समझता है तो माय डियर फ्रेंड मेरा यह तर्क मुझे पता नहीं आपको पसंद आए या नहीं लेकिन मैं समझती हूं मंदिरों में भगवान नहीं बसते हैं लेकिन इंसानों में परमात्मा होता है इंसान ने आज यह शक्ति है कि वह दूसरों के होठों पर सुख भी दे सके और दूसरों के माथे पर चिंता के चंडी दे सके तो भगवान हर एक में है यह मेरा मानना है आई होप यू लाइक माय आंसर थैंक यू वेरी मच हैव अ ग्रेट डे

good afternoon dekhiye I dont no aap mere se kitne sahmat honge aapne poocha poocha hai ki paramatma sharbat ko hai hai kya uska tark hoga kya aap aap insaan ho is din data apne dharti par janam liya hai aaj aap chal phir sakte bol sakte ho aap kisi ke liye achi batein bolte ho kisi ke liye gussa karte ho toh aapne paramatma hai iska matlab yahi hua na aap aaj baith kar baat kar rahe ho aaj aap baithkar kuch kaam kar rahe ho ab table kursi ke jaise nahi ho is aap mein bhagwan basta hai isliye aap chal phir sakte ho aap aap mein rahe hain aap mein dukh hota hai aapko aapko gussa aata hai yah sabhi chijon ka jo sammelan hai yah kisne karvaya hai bhagwan ne karvaya hai hai na main maanati hoon ki bhagwan mandiro mein nahi hai insano mein hota hai ab jab kisi ko dukhi hote ho toh aap bhi rote ho aap koi khush hota hai chota baccha khel khelta hai usko dekhkar aap khush hote ho bade koi aapki mazak udte ho aap uske saath khush hote ho lekin agar koi rota hai koi gujar jata hai ya kuch aisa ho jata hai life mein jisse aapko thos poochhte toh aap rote ho toh yah saree cheezen aapko usi tarah nirdeshit karti hai jiska kehna hai ki insaan mein bhagwan hai insaan mein aatma basti hai jo ek punya aatmaen hoti hai toh mere hisab se bhagwan har ek insaan mein hai har ek cheez mein hai jisme bhedbhav nahi hai aur jo har ek ko apna hisab se ek hi samajhata hai toh my dear friend mera yah tark mujhe pata nahi aapko pasand aaye ya nahi lekin main samajhti hoon mandiro mein bhagwan nahi baste hain lekin insano mein paramatma hota hai insaan ne aaj yah shakti hai ki vaah dusro ke hothon par sukh bhi de sake aur dusro ke mathe par chinta ke chandi de sake toh bhagwan har ek mein hai yah mera manana hai I hope you like my answer thank you very match have a great day

गुड आफ्टरनून देखिए आई डोंट नो आप मेरे से कितने सहमत होंगे आपने पूछा पूछा है कि परमात्मा शर

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Ghanshyamvan

मंदिर सेवा

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ईश्वर के विषय में समझाया नहीं जाता इस पर एक सजा आस्था का केंद्र है ईश्वर के प्रति श्रद्धा और आस्था हो तो इंसान अपने आप खुद समझ जाता है एकता का विषय है ना कुत्ता का विषय है ना वितरक का विषय है ईश्वर है तो ईश्वर सत्य है सर व्यापक है समय होत है हर प्राणियों को जीवन दे रहा है यह मृत्यु भी उसी का ही भोजन है समय उसी के ही आदेश पर चलता है ईश्वर को आप कहीं भी देख सकते हैं हम भी देख सकते हैं मगर ईश्वर के प्रति श्रद्धा और आस्था हो तो ईश्वर सर्वत्र दिखाई देता है और किस मी के मन में ईश्वर के प्रति श्रद्धा है विश्वास नाश्ता है तो उसे समझाने से क्या लाभ

ishwar ke vishay mein samjhaya nahi jata is par ek saza astha ka kendra hai ishwar ke prati shraddha aur astha ho toh insaan apne aap khud samajh jata hai ekta ka vishay hai na kutta ka vishay hai na vitarak ka vishay hai ishwar hai toh ishwar satya hai sir vyapak hai samay hot hai har praniyo ko jeevan de raha hai yah mrityu bhi usi ka hi bhojan hai samay usi ke hi aadesh par chalta hai ishwar ko aap kahin bhi dekh sakte hain hum bhi dekh sakte hain magar ishwar ke prati shraddha aur astha ho toh ishwar sarvatra dikhai deta hai aur kis me ke man mein ishwar ke prati shraddha hai vishwas nashta hai toh use samjhane se kya labh

ईश्वर के विषय में समझाया नहीं जाता इस पर एक सजा आस्था का केंद्र है ईश्वर के प्रति श्रद्ध

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परमात्मा है अरे तभी यह प्रकृति है सृष्टि है और सूर्य चंद्र आदि में गति है सही फरमाया के द्वारा गतिमान है और सुदामा के द्वारा ही हो न सका मुझे पहचान पत्र पड़तिक माध्यम से होता है ऐसा करते हुए मुसलमान का वास्तविक रोगन के द्वारा सृष्टि का निर्माण हुआ था तभी से तय करती है उन्होंने 3 साल पहले अपनी बुद्धि को अपनी गति को प्राप्त करते हैं पूरे समय बलवान है वह भी कान होते हैं आंसू लेकर ऐसे थोड़ी बनता है वह संकेश्वर कि हमें स्वर्गीय चौहान के द्वारा सिस्टिक हम चार अनुपात इन तमिल

paramatma hai are tabhi yah prakriti hai shrishti hai aur surya chandra aadi me gati hai sahi farmaya ke dwara gatiman hai aur sudama ke dwara hi ho na saka mujhe pehchaan patra padtik madhyam se hota hai aisa karte hue musalman ka vastavik rogan ke dwara shrishti ka nirmaan hua tha tabhi se tay karti hai unhone 3 saal pehle apni buddhi ko apni gati ko prapt karte hain poore samay balwan hai vaah bhi kaan hote hain aasu lekar aise thodi banta hai vaah sankeshwar ki hamein swargiya Chauhan ke dwara sistik hum char anupat in tamil

परमात्मा है अरे तभी यह प्रकृति है सृष्टि है और सूर्य चंद्र आदि में गति है सही फरमाया के द्

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Kesharram

Teacher

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कैसे समझेगी परमात्मा श्री तरह तरक्की क्या तक होगा देखो परमात्मा चरित्र है यह हम जानते भी हैं लेकिन हम क्या है कि थोड़ा भ्रम में पड़ जाते हैं और वह हमें क्या है कि हमारे और मतलब इतनी नेगेटिव ऊर्जा प्राप्त हो जाती है कि हम उस से बाहर निकले नहीं पाते हैं मैं सबसे पहले अब आपको बात बता देता हूं कि अगर परमात्मा ना होते ना तो हम यह जो जल ग्रहण है यह भी नहीं हम नहीं कर पाते माली जी आप एक छोटा सा मैं आपको एग्जांपल दे देता हूं माली भोज पर निमंत्रण पर जा रहे हो वहां आप गए और वहां पर 1 घंटे तक आपने वहां के मतलब एक्टिविटीज में भाग लिया और फिर अचानक आपको कॉल आ गया कि आप किसी जरूरी कार्य से आपको वहां से लौटना पड़ रहा है तो वह बहुत परमात्मा की अनुमति के बगैर आप वहां पर गए थे अगर परमात्मा के निमित्त ज्योति तापमान पर बौद्ध सर्वे करके आते क्योंकि परमात्मा सर्वत्र है चाहे आप पर जीव जंतु से लेकर के मनुष्य जाति और जितने भी हमारे प्राणी शास्त्र उन सब अपने मतलब के रंगों में यह परमात्मा बसा हुआ है परमात्मा के बगैर हम कुछ नहीं कर सकते हैं जो भी कार्य करें हैं उनकी देखरेख में कर रहे हैं हां हो सकता है कुछ लोगों को पूर्व जन्म का जो पुल मिलता है कुछ लोगों को इस सीजन में जो कार्य कार्य करते हैं उसका फल मिलता है गुर्जरों का साथ मिलता है किसी ने किसी कार्य में मतलब किसी न किसी का सहयोग मिलता है तभी तो हम कार्य कर पाते हैं अगर आपके पिता आप को जन्म नहीं देंगे तो क्या आप यह संसार बात कर सकते हो अरे परमात्मा कौन है यह लोग भ्रम में रहते हैं कि परमात्मा है कौन परमात्मा सब व्यक्ति होता है ना कि अन्य कोई आप यह सोच रहे हो कि हां कोई अलग से प्रमाण वह होता है जो अपने बच्चों को सही ज्ञान दे मार्गदर्शन दें और जिनके सहयोग में जो जो व्यक्ति आ रहे हैं और वह सेव करते जा रहे हैं तो आदमी कहां से कहां तक पहुंच जाता है कीजिए एक तो आप सुबह जैसे मान लीजिए रात को खाना खाकर के सो रहे थे और आपको नाइट में यह सपना है कि एक-दो दिन में आपके वहां जा रहे हो और वह आप वहां जाकर के इतना प्रोग्रेस करोगे कि आपको पता ही नहीं चलेगा कि कब कौन सा काम कैसे हो रहा है तो इसमें परमात्मा का तो योगदान है हमारा क्या योगदान है यह बताइए कि जो भी काम है वह परमात्मा है यह नहीं है कि आप यह सोच रहे हो कि हमारे यहां भारत में इतने मतलब है इनके बारे में हम क्यों दिल करे हैं विदेशों में क्यों नहीं है वह तो सबके लिए हैं ईश्वर एक है उनके रूप अनेक है तो आप रूपों में बताइए आप एक ख्वाब में विश्वास रखिए बिहार वह एक बंदा है जो हमें प्रेरणा दे रहे हैं और हमें मिलता है मोटिवेशन रात रहना और मोटिवेशन यह ईश्वर की देन है हमारी इसी में किसी प्रकार की भावना उत्पन्न हो रही है किसी ने किसी प्रकार की भावना उत्पन्न तो इसका क्या है कारण क्या है क्योंकि परमात्मा का रूप है और वह हमें आ कर दी है और आकार दे करके हमें सही मार्गदर्शन दे रहा है और अगर उसका मार्गदर्शन हमें मिल जाते हैं तो हम कहां का कहां तक पहुंच जाते हैं यह हम अनुमान नहीं लगा सकते और हमें खुद को ही पता नहीं चलता है कि मैं आज मालवीय एक डॉक्टर और वह बहुत बड़ा मतलब है एक ऑपरेशन करने के लिए जाने तो वह पहले सबसे पहले अपने ईश्वर को याद करेगा कि है मेरा राधे दे आज जो मैं काम करो उसने मेरे को सफलता तो मतलब वह एक विज्ञान पड़ा हुआ व्यक्ति को अगर इतनी बड़ी बात कर रहे हैं तो यह सोचो हम क्या है यह सोचा आप जो बंदा ब्लॉक करते हैं किसान हां सही से जिस बंदे ने यह डिग्री हासिल की है और वह बंदा अगर परमात्मा का नाम ले रहे तो मतलब मैं तो यह मानता हूं कि वास्तव में आप भर में नहीं रही है और आप अपने इष्ट को ज्यादा से ज्यादा याद करिए और जो वह दिशानिर्देश आपको दे उसी हिसाब से आप कार्य करते जाइए सफलता मिलेगी आपको परमात्मा सर्वत्र होता है इसी जगह और किसी का गुलाम नहीं होता है धन्यवाद

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कैसे समझेगी परमात्मा श्री तरह तरक्की क्या तक होगा देखो परमात्मा चरित्र है यह हम जानते भी ह

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आदि गुरु शंकराचार्य के अनुसार शरबत में ब्रह्मा मंत्र यह संसार में कोई भी अस्थान ऐसा नहीं है जो ब्राह्मण हो ब्रह्म सत्यं जगत मिथ्या अनुसार ब्रह्म सकते हैं और इस संसार में अच्छा है सभी जगह व्याप्त ब्रह्मा महेश जी वार्ता निवास

aadi guru shankaracharya ke anusaar sharbat me brahma mantra yah sansar me koi bhi asthan aisa nahi hai jo brahman ho Brahma satyan jagat mithya anusaar Brahma sakte hain aur is sansar me accha hai sabhi jagah vyapt brahma mahesh ji varta niwas

आदि गुरु शंकराचार्य के अनुसार शरबत में ब्रह्मा मंत्र यह संसार में कोई भी अस्थान ऐसा नहीं ह

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