भगवान शिव को बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है?...


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ज्योतिषी झा मेरठ (Pt. K L Shashtri)

Astrologer Jhaमेरठ,झंझारपुर और मुम्बई

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B.k.Narayana swamy

Yoga Instructor and Meditation Expert

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प्रिय भक्त गाना भगवान शिव को विशेष करके बेलपत्र पूजा के समय पर चढ़ाया जाता है इसका मीनिंग क्या है पूछा गया है देखिए बेलपत्र हो या कोई भी पक्का फूल हो क्यों चढ़ाया जाता है इसका मतलब है भगवान को बहुत साधारण आत्माएं बहुत प्रिय लगते हैं इसलिए भगवान को गरीब निवाज कहा जाता है इसलिए मंदिरों में देवी-देवताओं को बहुत अच्छे-अच्छे फूलों के श्रृंगार करते हैं परंतु भगवान देवी देवताओं को भी ऐसा खुशबूदार फूल जैसा बनाए हैं इसलिए बहुत अच्छे-अच्छे सुगंधित फूलों के मंदिरों में पूजा सजावट आदि करते हैं परंतु शिव परमात्मा को बेल पत्री आक का फूल चढ़ाते साधारण फूल चढ़ाते हैं क्योंकि साधारण आत्मा भगवान को बहुत प्रिय है साधारण मनुष्य आत्माओं को ही भगवान शिवा करके अपना बना करके गरीबों को साहूकार पति तुमको पवन साधारण आत्माओं का महान मनुष्य आत्माओं का देव मानव आदि बनाने का कार्य करते हैं इसलिए भगवान शिव के ऊपर बेलपत्र चढ़ाया जाता है धन्यवाद

priya bhakt gaana bhagwan shiv ko vishesh karke bailpatra puja ke samay par chadaya jata hai iska meaning kya hai poocha gaya hai dekhiye bailpatra ho ya koi bhi pakka fool ho kyon chadaya jata hai iska matlab hai bhagwan ko bahut sadhaaran aatmaen bahut priya lagte hain isliye bhagwan ko garib nivaj kaha jata hai isliye mandiro me devi devatao ko bahut acche acche fulo ke shringar karte hain parantu bhagwan devi devatao ko bhi aisa khushboodaar fool jaisa banaye hain isliye bahut acche acche sugandhit fulo ke mandiro me puja sajawat aadi karte hain parantu shiv paramatma ko bell patarri ak ka fool chadhate sadhaaran fool chadhate hain kyonki sadhaaran aatma bhagwan ko bahut priya hai sadhaaran manushya atmaon ko hi bhagwan shiva karke apna bana karke garibon ko sahukar pati tumko pawan sadhaaran atmaon ka mahaan manushya atmaon ka dev manav aadi banane ka karya karte hain isliye bhagwan shiv ke upar bailpatra chadaya jata hai dhanyavad

प्रिय भक्त गाना भगवान शिव को विशेष करके बेलपत्र पूजा के समय पर चढ़ाया जाता है इसका मीनिंग

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Gayatri Shukla

Social Worker Director Of Smt Educational Society

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BK Vishal

Rajyoga Trainer

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अगर मैं इसका आध्यात्मिक रहस्य को थोड़ा सा चिंतन करूं तो मुझे पता लगता है कि मेल के जो पत्ते होते हैं वह एक में तीन होते क्योंकि परमात्मा शिव त्रिमूर्ति है त्रिनेत्री हैं प्रकाल दर्शी तो उनकी महिमा को मान और सम्मान देने के लिए यह पत्र चढ़ाया जाता है बाकी किसी पेड़ पौधे में ऐसा पता नहीं देखा जाता वॉशडे गुण भी इसमें होते हैं बेलपत्र में बेल का पेड़ बहुत प्रकार से औषधि गुण रखता है क्योंकि भगवान शिव धन्वंतरी भी है और प्रकृति जीत भी है तो इसलिए उन पर यह बेलपत्र चढ़ाकर के उनके प्रति अपना प्रेम अर्पित किया जाता है अन्य दूसरी जो बात है वह दंत कथाओं के रूप में कई सोने जाती है उनका कोई विशेष अर्थ नहीं है

agar main iska aadhyatmik rahasya ko thoda sa chintan karu toh mujhe pata lagta hai ki male ke jo patte hote hain vaah ek me teen hote kyonki paramatma shiv trimurti hai trinetri hain prakal darshi toh unki mahima ko maan aur sammaan dene ke liye yah patra chadaya jata hai baki kisi ped paudhe me aisa pata nahi dekha jata vashde gun bhi isme hote hain bailpatra me bell ka ped bahut prakar se aushadhi gun rakhta hai kyonki bhagwan shiv dhanwantari bhi hai aur prakriti jeet bhi hai toh isliye un par yah bailpatra chadhakar ke unke prati apna prem arpit kiya jata hai anya dusri jo baat hai vaah dant kathao ke roop me kai sone jaati hai unka koi vishesh arth nahi hai

अगर मैं इसका आध्यात्मिक रहस्य को थोड़ा सा चिंतन करूं तो मुझे पता लगता है कि मेल के जो पत्त

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Daivagya Krishna Shastri

Astrologer, Ved, Bhagvat Mahapuran

1:26
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जय श्री राधे कृष्णा जय श्री श्याम भगवान शिव को बेलपत्र इसलिए चढ़ाया जाता है कि जब समुद्र मंथन हुआ था समुद्र मंथन के पश्चात भगवान श्री शिव जी ने अपने कंठ में वह कोलाहल हलाहल विष को धारण किया था उस समय भगवान श्री शिव जी का कंठ नीला पड़ गया था इसलिए नीलकंठेश्वर कहलाए और उनका कंठ अवरुद्ध हो गया था और अनिरुद्ध हो गया तो नाना प्रकार से ऋषि यों ने नाना प्रकार से देवों ने मिलकर के कोई भगवान का घी से अभिषेक किया किसी ने दूध से अभिषेक किया और उस समय औषधि के रूप में भगवान को बेलपत्र का लेपन किया गया बेलपत्र का सेवन कराया गया ताकि भगवान का जो कंठ अवरुद्ध है वह पुनः सुचारु रुप से संचालित से चलने लगे इसके लिए भगवान को बेलपत्र बहुत ही प्रिय है और कहा जाता है कि करोड़ों कन्या ओके धन का फल मिलता है एक बेलपत्र चढ़ाने से और भगवान की तीन ही नेतरे हैं और भगवान के त्रिशूल में तीन ही आयुध है भगवान का तीन ही गुण सत्व रज और तम और बेलपत्र में तीन ही पत्ते हैं इसलिए भगवान को अत्यंत प्रिय है उसको स्पर्श करने मात्र से भगवान श्री शिव जी अति प्रसन्न हो जाते हैं श्री राधे श्याम

jai shri radhe krishna jai shri shyam bhagwan shiv ko bailpatra isliye chadaya jata hai ki jab samudra manthan hua tha samudra manthan ke pashchat bhagwan shri shiv ji ne apne kanth mein vaah kolahal halahal vish ko dharan kiya tha us samay bhagwan shri shiv ji ka kanth neela pad gaya tha isliye nilakantheshwar kahalae aur unka kanth avaruddh ho gaya tha aur anirudh ho gaya toh nana prakar se rishi yo ne nana prakar se Devon ne milkar ke koi bhagwan ka ghee se abhishek kiya kisi ne doodh se abhishek kiya aur us samay aushadhi ke roop mein bhagwan ko bailpatra ka lepan kiya gaya bailpatra ka seven karaya gaya taki bhagwan ka jo kanth avaruddh hai vaah punh suruchi roop se sanchalit se chalne lage iske liye bhagwan ko bailpatra bahut hi priya hai aur kaha jata hai ki karodo kanya ok dhan ka fal milta hai ek bailpatra chadhane se aur bhagwan ki teen hi netre hain aur bhagwan ke trishool mein teen hi ayudh hai bhagwan ka teen hi gun satwa raj aur tum aur bailpatra mein teen hi patte hain isliye bhagwan ko atyant priya hai usko sparsh karne matra se bhagwan shri shiv ji ati prasann ho jaate hain shri radhe shayam

जय श्री राधे कृष्णा जय श्री श्याम भगवान शिव को बेलपत्र इसलिए चढ़ाया जाता है कि जब समुद्र म

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Dr. Guddy Kumari

UPSC Coach / Ph.d

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प्रश्न है कि भगवान शिव को बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है तो पहली बात भगवान शिव को बेलपत्र जो पसंद है ऐसा भी कहा जाता है कि बेल के पेड़ पर उगा दिए है तीसरी भगवान ने जो लिखा जाता है क्योंकि वह उन्होंने या इसलिए बेल्टवे एक ठंडा वृक्ष है इसीलिए बेल के वृक्ष के पत्तों से पवन जी को ठंडक में बेलपत्र चढ़ाया जाता है उसका विधि

prashna hai ki bhagwan shiv ko bailpatra kyon chadaya jata hai toh pehli baat bhagwan shiv ko bailpatra jo pasand hai aisa bhi kaha jata hai ki bell ke ped par uga diye hai teesri bhagwan ne jo likha jata hai kyonki vaah unhone ya isliye beltway ek thanda vriksh hai isliye bell ke vriksh ke patton se pawan ji ko thandak mein bailpatra chadaya jata hai uska vidhi

प्रश्न है कि भगवान शिव को बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है तो पहली बात भगवान शिव को बेलपत्र जो

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भगवान शिव को बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रसन्न पसंद है भगवान शिव को जल और बेलपत्र चढ़ाने से उन्हें ठंडक मिलती है वह शांति पहुंचती है इसलिए भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने का बहुत ही बड़ा महत्त्व है शिव पुराण के अंतर्गत इसकी एक कथा भी आती है जब एक शिकारी एक दिन शिकार के लिए एक बेल वृक्ष के ऊपर चढ़ता है राज भरोसे बेलपत्र के वृक्ष पर एक बितानी पड़ती है ऐसी दशा में उसे पता नहीं रहता है कुछ बेल वृक्ष के नीचे भगवान शिव का एक शिवलिंग रहता है और वह रात भर उस पर शिकार की तलाश में जागता हुआ 11 बेलपत्र छोड़ते हुए नीचे डालता रहता है और वह बेल्ट भगवान शिव को चढ़ते रहते हैं जिसके कारण से रात भर में हजारों बेलपत्र भगवान शिव को वह चढ़ा देता है और इससे भगवान शिव को प्रसन्न हो जाते हैं और उसे वरदान देते हैं इसीलिए भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है होली है भगवान शिव के मस्तक पर धारण किया जाता है जल के साथ इससे भगवान शिव को ठंडक मिलती है और भगवान शिव का अत्यंत प्रिय बेलपत्र है

bhagwan shiv ko bailpatra kyon chadaya jata hai bhagwan shiv ko bailpatra atyant prasann pasand hai bhagwan shiv ko jal aur bailpatra chadhane se unhe thandak milti hai vaah shanti pohchti hai isliye bhagwan shiv ko bailpatra chadhane ka bahut hi bada mahatva hai shiv puran ke antargat iski ek katha bhi aati hai jab ek shikaaree ek din shikaar ke liye ek bell vriksh ke upar chadhta hai raj bharose bailpatra ke vriksh par ek bitani padti hai aisi dasha mein use pata nahi rehta hai kuch bell vriksh ke niche bhagwan shiv ka ek shivling rehta hai aur vaah raat bhar us par shikaar ki talash mein jaagta hua 11 bailpatra chodte hue niche dalta rehta hai aur vaah belt bhagwan shiv ko chadhte rehte hain jiske karan se raat bhar mein hazaro bailpatra bhagwan shiv ko vaah chadha deta hai aur isse bhagwan shiv ko prasann ho jaate hain aur use vardaan dete hain isliye bhagwan shiv ko bailpatra atyant priya hai holi hai bhagwan shiv ke mastak par dharan kiya jata hai jal ke saath isse bhagwan shiv ko thandak milti hai aur bhagwan shiv ka atyant priya bailpatra hai

भगवान शिव को बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रसन्न पसंद है भगवा

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

1:11
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

छपरा से पढ़ाया जाता है जाता है उनका दूसरा समोसे और दूसरी कहानी एक एक शिकारी था तो उसने शिवलिंग पर बेलपत्र के पेड़ पर गया था और कार का वेट कर रहा था और उसकी पूजा बेलपत्र यही

chapra se padhaya jata hai jata hai unka doosra samose aur dusri kahani ek ek shikaaree tha toh usne shivling par bailpatra ke ped par gaya tha aur car ka wait kar raha tha aur uski puja bailpatra yahi

छपरा से पढ़ाया जाता है जाता है उनका दूसरा समोसे और दूसरी कहानी एक एक शिकारी था तो उसने शिव

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

4:20
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भगवान शिव को बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है इसके विषय में मेरा यही मानना है कि भगवान शिव को बेलपत्र इसलिए चढ़ाया जाता है कि एक कहानी हमारे शास्त्रों में लिखी गई है कि एक शिकारी उसको कोई शिकार नहीं मिला तब वह एक पेड़ पर चढ़ गया और पूरी रात शिकार के इंतजार में और एक-एक हो जो पत्ती तीन पत्ती थी वह एकता गया और नीचे शिवलिंग और वहां पर सिंह भगवान साक्षात प्रसन्न होकर उसको पूछा कि आपको क्या चाहिए यह कहानी है और उसी तरफ से शिवरात्रि की जाती यह कहानी आगे चली और सब लोग हिंदू शास्त्र के अनुसार सब मान्य लगे कि शंकर भगवान शिवलिंग के रूप में मानते हैं उसमें बेलपत्र प्रमुख है कि उनको तीन पत्ती वाला बेलपत्र और चार पत्ती वाला भी होता है पांच पत्ती वाला भी होता है लेकिन अधिकतर तीन पत्ती वाला जो बेलपत्र मिलता है वह अर्जित चढ़ाने से भगवान शिव प्रसिद्ध बहुत खुश होते हैं दूध दूध पानी और हद और जो बेल का फल होता है बेल के पेड़ का फल होता है वह धतूरा यह सब भगवान को शिवलिंग पर चढ़ाने से शंकर भगवान प्रसन्न होते हैं इस हिंदू भावनाओं के जो लिखा हुआ है उससे यह सब हम काम करते हैं और इसके पीछे एक शुभ भावना बस एक ही है कि हम अपने इष्ट देव वह ब्रह्मा विष्णु महेश त्रिदेव बोलते हैं भगवान ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता है विष्णु पालक करता है और सृष्टि के जो शंकर भगवान हैं वह विनाश करता भी हो सकते हैं लेकिन वह बहुत भोले इसलिए हम भगवान शंकर को खुश करने के लिए यह सब पूजा और जल अर्पण करना यह सब वगैरा करते इससे हमारी एक मानसिकता मानव समाज में यह हिंदू शास्त्रों के अनुसार श्याम अपने इष्ट देव को प्रसन्न करना चाहते हैं क्योंकि हम मानव समाज की भलाई चाहते हैं इस सृष्टि का विनाश ना हो इसलिए हम भगवान शंकर की पूजा करते हैं और उनसे हम से जो बन सकता है जो कार्य भी हम कर सकते हैं हम भगवान शंकर को उनके शिवलिंग को अर्पण करते हैं जल अर्पण करते इसलिए जो भी हम पूजा करते हैं वह मानव सृष्टि के भलाई के लिए करते हैं और वह सदैव अच्छा कार्य है सृष्टि के विनाश को रोकने का कार्य है हम सदा शंकर भगवान शिवलिंग से यही कामना करते हैं कि हम आपको जैसे प्रसन्न कर सके हम अजय खा सकते आपको पसंद करते हैं और आप हमेशा मानव समूह पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें हम यही कामना करते हैं धन्यवाद ओम नमः शिवाय

bhagwan shiv ko bailpatra kyon chadaya jata hai iske vishay mein mera yahi manana hai ki bhagwan shiv ko bailpatra isliye chadaya jata hai ki ek kahani hamare shastron mein likhi gayi hai ki ek shikaaree usko koi shikaar nahi mila tab vaah ek ped par chad gaya aur puri raat shikaar ke intejar mein aur ek ek ho jo patti teen patti thi vaah ekta gaya aur niche shivling aur wahan par Singh bhagwan sakshat prasann hokar usko poocha ki aapko kya chahiye yah kahani hai aur usi taraf se shivratri ki jaati yah kahani aage chali aur sab log hindu shastra ke anusaar sab manya lage ki shankar bhagwan shivling ke roop mein maante hain usme bailpatra pramukh hai ki unko teen patti vala bailpatra aur char patti vala bhi hota hai paanch patti vala bhi hota hai lekin adhiktar teen patti vala jo bailpatra milta hai vaah arjit chadhane se bhagwan shiv prasiddh bahut khush hote hain doodh doodh paani aur had aur jo bell ka fal hota hai bell ke ped ka fal hota hai vaah dhatura yah sab bhagwan ko shivling par chadhane se shankar bhagwan prasann hote hain is hindu bhavnao ke jo likha hua hai usse yah sab hum kaam karte hain aur iske peeche ek shubha bhavna bus ek hi hai ki hum apne isht dev vaah brahma vishnu mahesh tridev bolte hain bhagwan brahma shrishti ke rachiyata hai vishnu paalak karta hai aur shrishti ke jo shankar bhagwan hain vaah vinash karta bhi ho sakte hain lekin vaah bahut bhole isliye hum bhagwan shankar ko khush karne ke liye yah sab puja aur jal arpan karna yah sab vagera karte isse hamari ek mansikta manav samaj mein yah hindu shastron ke anusaar shyam apne isht dev ko prasann karna chahte hain kyonki hum manav samaj ki bhalai chahte hain is shrishti ka vinash na ho isliye hum bhagwan shankar ki puja karte hain aur unse hum se jo ban sakta hai jo karya bhi hum kar sakte hain hum bhagwan shankar ko unke shivling ko arpan karte hain jal arpan karte isliye jo bhi hum puja karte hain vaah manav shrishti ke bhalai ke liye karte hain aur vaah sadaiv accha karya hai shrishti ke vinash ko rokne ka karya hai hum sada shankar bhagwan shivling se yahi kamna karte hain ki hum aapko jaise prasann kar sake hum ajay kha sakte aapko pasand karte hain aur aap hamesha manav samuh par apni kripa drishti banaye rakhen hum yahi kamna karte hain dhanyavad om namah shivay

भगवान शिव को बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है इसके विषय में मेरा यही मानना है कि भगवान शिव को

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Dr. Narayan Sharma

Agriculture Adviser

3:32
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नमस्कार मित्रों आपका प्रश्न है भगवान शिव को बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है मित्रों आपका बहुत ही सुंदर प्रश्न है भगवान शिव को बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है ऐसा प्रश्न किया है उसके लिए आपका धन्यवाद तो बताना चाहेंगे मित्र भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाए आता है बस सेवा शुरू का है और साक्षात माता सेवा का ही स्वरूप है एक बार माता शिवा भूत भावन भोलेनाथ की तपस्या कर पूजन करें पूजन करते समय भगवान ने उनकी परीक्षा लेते उस परीक्षा में भगवान भोलेनाथ ने उसमें से जो फल था चलाने के लिए उसको चोरी कर लिया हो तो उठा लिया कर दिया तो सुबह जब पूजा करते करते जब फसाने का नंबर आया माता का देखा गया तो फल है ही नहीं फुल कहां गया उसकी उस समय तो बाद में बात करेंगे लेकिन हम तो अभी चलाना है तो बहुत पूजा अगर नहीं चलाती हो तो पूजा अधूरी रह गई मन में शिक्षक की किस फल को मानकर के संसार में सभी लोग बड़े होते हैं क्यों ना मैं वही पल भगवान वामन पर चढ़ा धमाका शिवा नहीं जो बालक जैसे जन्म लेता है उमा का स्तनपान करता है तो वह भी एक फल है जिसके विशेष बालक का भरण पोषण होता है वही है जिसे भी सदा भूख बढ़ती है तो माता सेवा ने अपना स्त्री काट के वह तो हम भोलेनाथ को प्रसन्न कर दिया भूत भावन में बड़े प्रशंसक थे उसको स्वीकार किया और कहा कि आज के बाद आपका फलक तक नहीं जाएगा तो वही इतना करके जो बेलपत्र के रूप में प्रकट हुआ इसे बेलपत्र कहते हैं तो भगवान ने कहा कि जब तक यह हमारे ऊपर चढ़ना ही जाएगा या इसकी बस में इसकी इसका पत्र इसका फल मारू पर नहीं चलेगा तब तक मैं पसंद नहीं हूं तो भगवान भूत भावन भोलेनाथ के लिए बेलपत्र सबसे अधिक पर यह है यह साक्षात शिवा सुरूपा है तो मित्रों अगर हमारा ही जवाब पसंद आए तो कृपया लाइक करना ना भूलें नमस्कार

नमस्कार मित्रों आपका प्रश्न है भगवान शिव को बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है मित्रों आपका बहुत

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Ghanshyamvan

मंदिर सेवा

1:01
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भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने का कोई एक कारण नहीं है कुछ विद्वानों का मत है बेलपत्र में जो 3 पत्ते होते हैं सत रज तम यानी के तीर गुणात्मक उत्पत्ति जो सृष्टि की है वह शिव से ही हुई है कुछ लोगों का मत है अब सूर्य भगवान शिव के 3 में से सूर्य चंद्रमा और अग्नि इसलिए भगवान शिव को बेलपत्र कीजिए है कुछ लोगों का मत है कि ब्रह्मा विष्णु और महेश तीनों रूप शिव में ही व्याप्त है इन्हें भगवान शिव को बेलपत्र पी लिया है भगवान बेलपत्र में लक्ष्मी का वास होता है भगवान शिव को चढ़ाने से लक्ष्मी धन धान्य संपदा बनी रहती है

bhagwan shiv ko bailpatra chadhane ka koi ek karan nahi hai kuch vidvaano ka mat hai bailpatra mein jo 3 patte hote hain sat raj tum yani ke teer gunatmak utpatti jo shrishti ki hai vaah shiv se hi hui hai kuch logo ka mat hai ab surya bhagwan shiv ke 3 mein se surya chandrama aur agni isliye bhagwan shiv ko bailpatra kijiye hai kuch logo ka mat hai ki brahma vishnu aur mahesh tatvo roop shiv mein hi vyapt hai inhen bhagwan shiv ko bailpatra p liya hai bhagwan bailpatra mein laxmi ka was hota hai bhagwan shiv ko chadhane se laxmi dhan dhanya sampada bani rehti hai

भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने का कोई एक कारण नहीं है कुछ विद्वानों का मत है बेलपत्र में जो 3

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Priyanka Raghav Teacher

Teacher - Hindi / Social Science

0:54
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हेलो दोस्तों आप का क्वेश्चन है भगवान शिव को बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है कि भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाया जाता है वह तीन पत्तों वाला होता है तीन पत्तों का बिल पत्र चढ़ाया जाता है और वह जो तीन पत्ते होते हैं उन तीन पत्तों का मतलब होता है धर्म अर्थ और काम तीनों का अलग-अलग अर्थ होता है धर्म अर्थ और काम इसे चढ़ाने से मूछ की प्राप्ति होती है जवाब धर्म अर्थ काम यह चीज ना दोगे तो मुझको आपको खुद ब खुद प्राप्त हो जाएगा मुस्काती के लिए धर्म अर्थ काम इनाम के लिए तीन पत्तों वाला बेलपत्र आवाज को अर्पित किया जाता है लेकिन यह ध्यान रखें कि बस कहीं से भी कोई पत्ता कटा हुआ ना हो प्लीज बता चढ़ाए जाते हैं वह मुझ प्रार्थी के लिए हुआ शिव को चढ़ाए जाते हैं धन्यवाद

hello doston aap ka question hai bhagwan shiv ko bailpatra kyon chadaya jata hai ki bhagwan shiv ko bailpatra chadaya jata hai vaah teen patton vala hota hai teen patton ka bill patra chadaya jata hai aur vaah jo teen patte hote hain un teen patton ka matlab hota hai dharm arth aur kaam tatvo ka alag alag arth hota hai dharm arth aur kaam ise chadhane se mooch ki prapti hoti hai jawab dharm arth kaam yah cheez na doge toh mujhko aapko khud bsp khud prapt ho jaega muskati ke liye dharm arth kaam inam ke liye teen patton vala bailpatra awaaz ko arpit kiya jata hai lekin yah dhyan rakhen ki bus kahin se bhi koi patta kata hua na ho please bata chadhae jaate hain vaah mujhse prarthi ke liye hua shiv ko chadhae jaate hain dhanyavad

हेलो दोस्तों आप का क्वेश्चन है भगवान शिव को बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है कि भगवान शिव को ब

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शशांक पाण्डेय

इंकलाब जिंदाबाद

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माना जाता है कि बेलपत्र में जो है तीनों भगवान वास करते हैं शिव जी विष्णु जी और जो है ब्रह्मा जी इन तीनों के पास होने के कारण जो है शिवजी को बेलपत्र जहा यादव ने बहुत प्रिय है बेलपत्र और आपको यह भी जानते हो जो है अचंभित होगी किसी भी जो बेलपत्र शंकर भगवान को जो चढ़ा है उसको धूल के आपको चाहा शुद्ध माना जाएगा लेकिन धूल धूल आ जाएगा वह गंगाजल द्वारा धुला होना चाहिए और पत्ते फटे नहीं होना चाहिए इंकलाब जिंदाबाद वंदे मातरम

mana jata hai ki bailpatra mein jo hai tatvo bhagwan was karte hain shiv ji vishnu ji aur jo hai brahma ji in tatvo ke paas hone ke karan jo hai shivaji ko bailpatra jaha yadav ne bahut priya hai bailpatra aur aapko yah bhi jante ho jo hai achambhit hogi kisi bhi jo bailpatra shankar bhagwan ko jo chadha hai usko dhul ke aapko chaha shudh mana jaega lekin dhul dhul aa jaega vaah gangajal dwara dhula hona chahiye aur patte phate nahi hona chahiye inkalab zindabad vande mataram

माना जाता है कि बेलपत्र में जो है तीनों भगवान वास करते हैं शिव जी विष्णु जी और जो है ब्रह्

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Kesharram

Teacher

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भगवान शिव को बेलपत्र इसलिए छोटा जाता है क्योंकि बेलपत्र भगवान शिव का प्रिय है और वह जल्दी ही प्रसन्न होते हैं इसलिए भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाकर के हम कुछ कर सकते हैं और हमारा जीवन में उनसे कुछ हमारे लिए अनमोल है वह उनसे हम गिफ्ट में ले सकते हैं धन्यवाद

bhagwan shiv ko bailpatra isliye chota jata hai kyonki bailpatra bhagwan shiv ka priya hai aur vaah jaldi hi prasann hote hain isliye bhagwan shiv ko bailpatra chadhakar ke hum kuch kar sakte hain aur hamara jeevan mein unse kuch hamare liye anmol hai vaah unse hum gift mein le sakte hain dhanyavad

भगवान शिव को बेलपत्र इसलिए छोटा जाता है क्योंकि बेलपत्र भगवान शिव का प्रिय है और वह जल्दी

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मेरी जानकारी के अनुसार जो बेल पात्र होते हैं और वह ठंडे होते हैं मला आता है कि शिव भगवान ने समुद्र मंथन के समय से निकला हुआ जहर पी लिया था इसलिए पार्वती मां ने उनके सर पर मेरे पात्र चढ़ाया के का लेप लगाया था और ठंडे होते हैं इस कार्य से मनाया था कि भगवान शिव को मेरे पास कराया था

meri jaankari ke anusaar jo bell patra hote hain aur vaah thande hote hain mala aata hai ki shiv bhagwan ne samudra manthan ke samay se nikala hua zehar p liya tha isliye parvati maa ne unke sir par mere patra chadaya ke ka lep lagaya tha aur thande hote hain is karya se manaya tha ki bhagwan shiv ko mere paas karaya tha

मेरी जानकारी के अनुसार जो बेल पात्र होते हैं और वह ठंडे होते हैं मला आता है कि शिव भगवान न

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