अगर मुझसे कोई बुरा बर्ताव करें तो क्या करना चाहिए?...


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Dinesh Mishra

Theosophists | Accountant

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अगर मुझसे कोई बुरा बर्ताव करे तो क्या करना चाहिए देखिए आपसे कोई बुरा बर्ताव करता है तो उसे करने दें लेकिन आपको हमेशा उससे अच्छा बर्ताव करना चाहिए और यदि आप भी बुरा बर्ताव करने लगे फिर क्या मतलब है फिर तो दोनों एक ही समान हो गए इसलिए यदि वह सामने वाला बुरा बर्ताव कर रहा है लेकिन आप फिर भी अच्छा बर्ताव करें जिससे कि उसे सीख भी मिले

agar mujhse koi bura bartaav kare toh kya karna chahiye dekhiye aapse koi bura bartaav karta hai toh use karne de lekin aapko hamesha usse accha bartaav karna chahiye aur yadi aap bhi bura bartaav karne lage phir kya matlab hai phir toh dono ek hi saman ho gaye isliye yadi vaah saamne vala bura bartaav kar raha hai lekin aap phir bhi accha bartaav kare jisse ki use seekh bhi mile

अगर मुझसे कोई बुरा बर्ताव करे तो क्या करना चाहिए देखिए आपसे कोई बुरा बर्ताव करता है तो उसे

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Ansh jalandra

Motivational speaker & criminal lawyer

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

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Dr Sampadananda Mishra

Sanskrit scholar, Author, Director, Sri Aurobindo Foundation for Indian Culture

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मिस कोई कहानी के रूप में समझा लूंगा एक बार एक व्यक्ति बुद्ध देव जी के सामने गुड्डू देव जी को गालियां देना शुरू करने की गालियां दी आप बोलते तो मैं उसको खत्म कर देता और आपने कुछ भी बोले मुझे एक छोटा सा कर वस्त्र दे सकते हो अपनाकर वस्त्र दे सकते तो वह अपने जो रुमाल हैकर वस्त्र हैं उनको दिया तो बुद्ध ने अपने नाक अच्छी तरह से साफ करके फिर उस शिष्य को दिया तूने रखो इसको पास में रखो करते हैं इसको पीछे से पास में रख सकता हूं जब तुम नहीं चाहते क्यों नहीं चाहते हो पास में रखने के लिए क्योंकि अन्य वस्तुएं रखी वस्तु नहीं है इसको कोई भी स्वीकार नहीं करेगा तो जिसे तुम इसको रखना नहीं चाहते तो इसी प्रकार उस व्यक्ति ने जो मुझे गालियां दे रहा था जो व्यक्ति हूं गालियां भी इस प्रकार होते हैं गंदी वस्तु बताएं जो मैं अपने पास रखना नहीं चाहते तुम अभी स्वीकार नहीं करते हो नूर मियां मिर्ची काट लेता तो मन मेरा हो जाता मेरे पास रहता उसका जो काम करना है वह कोई हमसे बुरे बर्ताव करें तो यह देखना पड़ेगा ऐसा नहीं है कि हम एक मोर आर्टिकल बनकर एक जेंटलमैन बंद कर ऊपर ही ऊपर उसको कुछ नहीं बोले हां हां ठीक है क्या है मुट्ठी को विकसित करना है इससे हमें क्षमा भाव में रह सकते हैं कि वह क्यों बोलता है मुझे क्यों ऐसे बर्ताव करता है उसके कारण क्या है उसका मेरा कोई दोस्त नहीं और बोलता है और भीम एक कहानी सुनाता हूं जिससे स्पष्ट होगा कि आप तो एक शिष्य अपने गुरु के पास आकर बोला कि गुरुजी देखो उसके प्रति ना मेरे बहुत गुस्सा है गुस्से में मैं कुछ भी कर सकता हूं उसको मैं मार दी सकता तू ग्रुप में क्यों क्या बोला उसने झूठ बोलता है क्या तुम चोर हो चोर हो तो बोलता है उसको कि तुम चोर हो अगर तुम चोर नहीं हो तो वह झूठ बोलता है तुम मुझसे क्यों अफेक्टेड होते हो अगर तुम चोर हो तो वह सत्य बोलता है उसको स्वीकार अगर वह तुम चोर नहीं होगा तभी वह बोलता है कि तुम चोर हो और तुम अच्छी तरह जानते हो फिर तुमको तुम फिर उसके बाद में अफेक्टेड होना तुम्हारे लिए कोई आवश्यक नहीं है तू बुद्धि पर काम करना जो सही मार्क है कि हमको यह देखना पड़ेगा कि वास्तविक रूप में कोई हमसे हमसे बुरा बर्ताव करता है उसके पीछे कारण क्या है क्या बिना कारण कोई कर रहा है हमारा कुछ भी दोष नहीं क्या यह पूरी तरह से सच या झूठ बोलता है जब हम आत्म निरीक्षण के मार्ग पर रहते हैं तो वह हमारे अंदर विकसित होता है और हमको एक्शन होता कि स्थिति पता है जो समझ सकती है तो वह हमारे अंदर विकसित होता रहता है इसे आवश्यकता है कि हम देखें हम कहां गलत है खुद को देखें दूसरों को देखने की वजह लेकिन ज्यादातर यह होता है कि हम दूसरों के बारे में ज्यादा फंक्शन के खुद के बारे में इतना टेंशन नहीं हो तो आत्म निरीक्षण हम करें हमेशा के लिए क्या सही है क्या गलत है कोई अगर बोल रहा है तो कितने हद तक वह सच बोल रहा है कितने हद तक वह झूठ बोलता है हमारे बारे में क्या सच्चाई है उसको जानने का हम एक अभिलाषा रखें और दूसरों के प्रति उदार भाग देना चाहिए गुस्से में आता है गुस्सा आता है आप बोल देता है कुछ कर देता है मतलब पर कोई नियंत्रण नहीं मतलब बेचारा खुद को कंट्रोल नहीं कर पाता है अपने ऊपर नियंत्रण नहीं ले पाता है इस भाव को अगर हम रखें कि वह बेचारा है अपने अंदर बहुत सामर्थ्य नहीं है कि वह खुद को कंट्रोल करें उसके प्रति हमारा ही दया करुणा और उदार भाव 1 मई प्रभाव रहना चाहिए कंपैशनेट टुवर्ड्स 10% इस प्रकार के भाग को हम अगर धीरे धीरे धीरे धीरे अपने अंदर विकसित करें और एक-दो दिन में 1 महीने में 1 साल भी नहीं हो सकता है उसके लिए परसिस्टेंस चाहिए परिचय देना चाहिए लेकिन विकसित कर सकते हैं एक करुणा और मंत्री का भाग रखना जिसे वेदों में यह कहा गया है कि मित्र शिक्षक सोचा कि हम एक दूसरे को एक मित्र के धार से हम देखें अगर कोई गुस्से में आता है या कुछ भी लेकर आता है हमसे बुरे बर्ताव करता है क्या हम उसको एक मित्र मित्र की दृष्टि से हम देख सकते हैं अगर एक स्माइल दे सकते हैं उसके प्रति और एक तू स्माइल हॉर्स पावर टू किल द ग्रेटेस्ट एनिमी दो अगर हम उस पर करें तो हम निश्चित रूप से उस पर विजय प्राप्त कर सकते हैं और इस प्रकार का भाव इस प्रकार के जो गुण है उधार बन्ना मित्र अभाव रखना करुणा का भाव रखना यही भाभी हमको इस प्रकार की स्थितियों से कैसे जोजना समत्व के भाग को कैसे अपने अंदर स्थापित करके इस प्रकार के जोड़ जानेंगे जो परिस्थितियां प्रतिकूल परिस्थितियां तो इसे किस प्रकार

miss koi kahani ke roop mein samjha lunga ek baar ek vyakti buddha dev ji ke saamne guddu dev ji ko galiya dena shuru karne ki galiya di aap bolte toh main usko khatam kar deta aur aapne kuch bhi bole mujhe ek chota sa kar vastra de sakte ho apnakar vastra de sakte toh vaah apne jo rumaal hacker vastra hain unko diya toh buddha ne apne nak achi tarah se saaf karke phir us shishya ko diya tune rakho isko paas mein rakho karte hain isko peeche se paas mein rakh sakta hoon jab tum nahi chahte kyon nahi chahte ho paas mein rakhne ke liye kyonki anya vastuyen rakhi vastu nahi hai isko koi bhi sweekar nahi karega toh jise tum isko rakhna nahi chahte toh isi prakar us vyakti ne jo mujhe galiya de raha tha jo vyakti hoon galiya bhi is prakar hote hain gandi vastu bataye jo main apne paas rakhna nahi chahte tum abhi sweekar nahi karte ho noor miyan mirchi kaat leta toh man mera ho jata mere paas rehta uska jo kaam karna hai vaah koi humse bure bartaav kare toh yah dekhna padega aisa nahi hai ki hum ek mor article bankar ek gentleman band kar upar hi upar usko kuch nahi bole haan haan theek hai kya hai mutthi ko viksit karna hai isse hamein kshama bhav mein reh sakte hain ki vaah kyon bolta hai mujhe kyon aise bartaav karta hai uske karan kya hai uska mera koi dost nahi aur bolta hai aur bhim ek kahani sunata hoon jisse spasht hoga ki aap toh ek shishya apne guru ke paas aakar bola ki guruji dekho uske prati na mere bahut gussa hai gusse mein main kuch bhi kar sakta hoon usko main maar di sakta tu group mein kyon kya bola usne jhuth bolta hai kya tum chor ho chor ho toh bolta hai usko ki tum chor ho agar tum chor nahi ho toh vaah jhuth bolta hai tum mujhse kyon affected hote ho agar tum chor ho toh vaah satya bolta hai usko sweekar agar vaah tum chor nahi hoga tabhi vaah bolta hai ki tum chor ho aur tum achi tarah jante ho phir tumko tum phir uske baad mein affected hona tumhare liye koi aavashyak nahi hai tu buddhi par kaam karna jo sahi mark hai ki hamko yah dekhna padega ki vastavik roop mein koi humse humse bura bartaav karta hai uske peeche karan kya hai kya bina karan koi kar raha hai hamara kuch bhi dosh nahi kya yah puri tarah se sach ya jhuth bolta hai jab hum aatm nirikshan ke marg par rehte hain toh vaah hamare andar viksit hota hai aur hamko action hota ki sthiti pata hai jo samajh sakti hai toh vaah hamare andar viksit hota rehta hai ise avashyakta hai ki hum dekhen hum kahaan galat hai khud ko dekhen dusro ko dekhne ki wajah lekin jyadatar yah hota hai ki hum dusro ke bare mein zyada function ke khud ke bare mein itna tension nahi ho toh aatm nirikshan hum kare hamesha ke liye kya sahi hai kya galat hai koi agar bol raha hai toh kitne had tak vaah sach bol raha hai kitne had tak vaah jhuth bolta hai hamare bare mein kya sacchai hai usko jaanne ka hum ek abhilasha rakhen aur dusro ke prati udaar bhag dena chahiye gusse mein aata hai gussa aata hai aap bol deta hai kuch kar deta hai matlab par koi niyantran nahi matlab bechaara khud ko control nahi kar pata hai apne upar niyantran nahi le pata hai is bhav ko agar hum rakhen ki vaah bechaara hai apne andar bahut samarthya nahi hai ki vaah khud ko control kare uske prati hamara hi daya karuna aur udaar bhav 1 may prabhav rehna chahiye compassionate tuvards 10 is prakar ke bhag ko hum agar dhire dhire dhire dhire apne andar viksit kare aur ek do din mein 1 mahine mein 1 saal bhi nahi ho sakta hai uske liye parasistens chahiye parichay dena chahiye lekin viksit kar sakte hain ek karuna aur mantri ka bhag rakhna jise vedo mein yah kaha gaya hai ki mitra shikshak socha ki hum ek dusre ko ek mitra ke dhar se hum dekhen agar koi gusse mein aata hai ya kuch bhi lekar aata hai humse bure bartaav karta hai kya hum usko ek mitra mitra ki drishti se hum dekh sakte hain agar ek smile de sakte hain uske prati aur ek tu smile horse power to kill the greatest enemy do agar hum us par kare toh hum nishchit roop se us par vijay prapt kar sakte hain aur is prakar ka bhav is prakar ke jo gun hai udhaar banna mitra abhaav rakhna karuna ka bhav rakhna yahi bhabhi hamko is prakar ki sthitiyo se kaise jojna samatwa ke bhag ko kaise apne andar sthapit karke is prakar ke jod jaanege jo paristhiyaann pratikul paristhiyaann toh ise kis prakar

मिस कोई कहानी के रूप में समझा लूंगा एक बार एक व्यक्ति बुद्ध देव जी के सामने गुड्डू देव जी

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महेश दुबे

कवि साहित्यकार

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कोई अगर आपसे बुरा बर्ताव करे तो पहले उसके कारण को जानने की कोशिश करें ऐसा क्या है कि वह व्यक्ति आपसे बुरा बर्ताव कर रहा है उसके कौन से ऐसे ही हैं जो आप के कारण बाधित हो रहे हैं आप यह सोच कर के देखेंगे कहीं आप में कोई कमी तो नहीं किया आपसे उसका कोई अभी तो नहीं हो रहा है अगर इन कारणों पर आप विचार करेंगे तो आपको पता चल जाएगा कि उसका बुरा करने का कारण क्या है क्योंकि बिना कारण के इस जगत में कोई काम नहीं होता

koi agar aapse bura bartaav kare toh pehle uske karan ko jaanne ki koshish kare aisa kya hai ki vaah vyakti aapse bura bartaav kar raha hai uske kaunsi aise hi hain jo aap ke karan badhit ho rahe hain aap yah soch kar ke dekhenge kahin aap mein koi kami toh nahi kiya aapse uska koi abhi toh nahi ho raha hai agar in karanon par aap vichar karenge toh aapko pata chal jaega ki uska bura karne ka karan kya hai kyonki bina karan ke is jagat mein koi kaam nahi hota

कोई अगर आपसे बुरा बर्ताव करे तो पहले उसके कारण को जानने की कोशिश करें ऐसा क्या है कि वह व्

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मेरे साथ कोई बुरा बर्ताव कर रहा है बार-बार मुंह से हानि पहुंचा रहा है तो पहली बार मैं उसको सचित करूंगा और अगर नहीं मानता है ऐसा व्यवहार करता है वैसा मैं भी करूंगा रविंद्र नाथ टैगोर जी ने भी कहा था अगर अंजाम सहने का साहस उतना किया जाए जहां तक हद हो तो उसका उसी भाषा में जवाब दिया जाए तो अंजाम करने वाला कभी दूसरों पंजाब नहीं

mere saath koi bura bartaav kar raha hai baar baar mooh se hani pohcha raha hai toh pehli baar main usko sachit karunga aur agar nahi manata hai aisa vyavhar karta hai waisa main bhi karunga ravindra nath tagore ji ne bhi kaha tha agar anjaam sahane ka saahas utana kiya jaaye jaha tak had ho toh uska usi bhasha mein jawab diya jaaye toh anjaam karne vala kabhi dusro punjab nahi

मेरे साथ कोई बुरा बर्ताव कर रहा है बार-बार मुंह से हानि पहुंचा रहा है तो पहली बार मैं उसको

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