आत्मा न तो शरीर है और न ही मन। हकीकत में यह क्या है क्या मेरे शरीर के अंदर आत्मा है?...


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Ashok Bajpai

Rtd. Additional Collector P.C.S. Adhikari

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ऐसे और सवाल
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दुखी आत्मा जो होती है वह ईश्वर का आंसर अपनी शक्ति का छोटा सा अंशु आपकी आत्मा के अंदर डाल देता है और इतना बलशाली होता है कि आपकी जीवन जीने का एक लक्ष्य निर्धारित करता है वह लक्ष्य पूरा करने के लिए ईश्वर अंश जीव अविनाशी चेतन अमल सहज सुख राशि इसलिए ईश्वर का अंश है और वह आपको इस चेतना शक्ति देती है और आपको जीवन जीने की कला सिखाती कर्मों पर चलने का आदेश थी

dukhi aatma jo hoti hai vaah ishwar ka answer apni shakti ka chota sa anshu aapki aatma ke andar daal deta hai aur itna balshali hota hai ki aapki jeevan jeene ka ek lakshya nirdharit karta hai vaah lakshya pura karne ke liye ishwar ansh jeev avinashi chetan amal sehaz sukh rashi isliye ishwar ka ansh hai aur vaah aapko is chetna shakti deti hai aur aapko jeevan jeene ki kala sikhati karmon par chalne ka aadesh thi

दुखी आत्मा जो होती है वह ईश्वर का आंसर अपनी शक्ति का छोटा सा अंशु आपकी आत्मा के अंदर डाल द

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ज्योतिषी झा मेरठ (Pt. K L Shashtri)

Astrologer Jhaमेरठ,झंझारपुर और मुम्बई

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Vedpal

Social Worker

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S Bajpay

Yoga Expert | Beautician & Gharelu Nuskhe Expert

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Isu Vasava

PASTOR in CHURCH.

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आत्मा को रहने के लिए शरीर चाहे इसीलिए तो जब हम अपने मां के पेट में गर्भ में रहते हैं जब हमारा पालन शुरू होता है गर्भ में तभी से हमारी आत्मा को शरीर मिल जाता है और जिसे हम जन्म लेते हैं तो हमारा हमारे अंदर आत्मा प्राण और सर यह तीन चीज होती है उसमें मन भी आता है इसलिए परमेश्वर ने इंसान को अपने प्रतिमा करो कि बनाया और उसको आत्मा दिए हर एक इंसान में अपनी खुद की आत्मा रहते हैं और आपके अंदर भी आपकी आत्मा है आपके सारे में अगर आप मर जाओगे उसके बाद आत्मा आपका शरीर छोड़ कर चली जाएगी

aatma ko rehne ke liye sharir chahen isliye toh jab hum apne maa ke pet me garbh me rehte hain jab hamara palan shuru hota hai garbh me tabhi se hamari aatma ko sharir mil jata hai aur jise hum janam lete hain toh hamara hamare andar aatma praan aur sir yah teen cheez hoti hai usme man bhi aata hai isliye parmeshwar ne insaan ko apne pratima karo ki banaya aur usko aatma diye har ek insaan me apni khud ki aatma rehte hain aur aapke andar bhi aapki aatma hai aapke saare me agar aap mar jaoge uske baad aatma aapka sharir chhod kar chali jayegi

आत्मा को रहने के लिए शरीर चाहे इसीलिए तो जब हम अपने मां के पेट में गर्भ में रहते हैं जब हम

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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आपको ठीक कहा कि आप मना तो चढ़ी रे नहीं माने शरीर आत्मा का वास थे अमन उसे गति देने वाला है हकीकत में आत्मा हमारे शरीर के अंदर मौजूद एक असीम शक्ति है अंगूर शक्ति हमें संचालित करती है पूरे शरीर का अच्छी बन जाए उसी के निर्देशों पर चलता है जम्मू अपना कार्य बंद कर देती है तो शरीर चांद चाहिए और इस नश्वर शरीर रूपी फर्स्ट सको छोड़कर तो किसी दूसरे शरीर में प्रवेश कर देती है

aapko theek kaha ki aap mana toh chadhi ray nahi maane sharir aatma ka was the aman use gati dene vala hai haqiqat me aatma hamare sharir ke andar maujud ek asim shakti hai angoor shakti hamein sanchalit karti hai poore sharir ka achi ban jaaye usi ke nirdeshon par chalta hai jammu apna karya band kar deti hai toh sharir chand chahiye aur is nashwar sharir rupee first Sako chhodkar toh kisi dusre sharir me pravesh kar deti hai

आपको ठीक कहा कि आप मना तो चढ़ी रे नहीं माने शरीर आत्मा का वास थे अमन उसे गति देने वाला है

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आपके सवाल है आत्म नाते शरीफ है और ना ही मन हकीकत में यह क्या है क्या मेरे शरीर में अंदर आत्मा है तो बिल्कुल आपकी शरीर के अंदर आत्मा आ जाओ आत्मा तो आपका शरीर होना हिमालय बिल्कुल सही है हकीकत में यही है फर्क सिर्फ इतना है कि आपको इस चीज का पता नहीं आपने कभी इसको जानने की कोशिश नहीं की कि आपका आपकी आत्मा शरीर नहीं आपकी आत्मा मन नहीं है क्योंकि आपकी शरीर मन बुद्धि चित्त अहंकार अध्य करेंट्स बिल्कुल पृथक है आपकी आत्मा आत्मा हर चीज से अलग है बिल्कुल अलग अलग थलग उसका स्वरूप है उसकी संरचना है और आत्मा में जन्मतिथि नंबर मरती है और वह बिल्कुल इसका अलग ही स्थित है और हमारी और हमारे शरीर के अंदर आत्मा का निवास होता है एवं कैसे समझे कि हमारे शरीर के अंदर आत्मा का निवास होता है तो आदमी कुछ नहीं शक्ति का नाम है वह शक्ति हर प्राणी बात के अंदर निवास करती किसी भी प्राणी के अंदर प्राण तभी होंगे जब घुस सकती हो कि वह आत्माओं की अनीता साड़ी के अंदर और प्राण होने की कोई संभावना नहीं है पानी के अंदर पुराने समझ जाएगी उसके अंदर आत्मा है ठीक है ना तो आत्मा एक शक्ति का नाम है उसे आप कोई भी नाम ले सकते हैं निश्चित ही हर पानी के अंदर में आत्मा होती है ना ही वह शरीर है और ना ही वह मान है इन सबसे परे है इन सबसे हटकर है इन सब की जब गहराई में जाते हैं तो हमें आत्मा नाम की वस्तु व्यक्ति व परिस्थिति का एहसास होता है और गहराई का विषय है और बहुत अच्छा विषय है आत्मा के विषय में जानने के लिए ही आपको जन्म हुआ आप जितना ज्यादा उस आत्मा के विषय में जानेंगे उतनी ही ज्यादा आप जीवन में सफल होते चले जाएंगे

aapke sawaal hai aatm naate sharif hai aur na hi man haqiqat me yah kya hai kya mere sharir me andar aatma hai toh bilkul aapki sharir ke andar aatma aa jao aatma toh aapka sharir hona himalaya bilkul sahi hai haqiqat me yahi hai fark sirf itna hai ki aapko is cheez ka pata nahi aapne kabhi isko jaanne ki koshish nahi ki ki aapka aapki aatma sharir nahi aapki aatma man nahi hai kyonki aapki sharir man buddhi chitt ahankar adhya currants bilkul prithak hai aapki aatma aatma har cheez se alag hai bilkul alag alag thalag uska swaroop hai uski sanrachna hai aur aatma me janmtithi number marti hai aur vaah bilkul iska alag hi sthit hai aur hamari aur hamare sharir ke andar aatma ka niwas hota hai evam kaise samjhe ki hamare sharir ke andar aatma ka niwas hota hai toh aadmi kuch nahi shakti ka naam hai vaah shakti har prani baat ke andar niwas karti kisi bhi prani ke andar praan tabhi honge jab ghus sakti ho ki vaah atmaon ki anita saree ke andar aur praan hone ki koi sambhavna nahi hai paani ke andar purane samajh jayegi uske andar aatma hai theek hai na toh aatma ek shakti ka naam hai use aap koi bhi naam le sakte hain nishchit hi har paani ke andar me aatma hoti hai na hi vaah sharir hai aur na hi vaah maan hai in sabse pare hai in sabse hatakar hai in sab ki jab gehrai me jaate hain toh hamein aatma naam ki vastu vyakti va paristhiti ka ehsaas hota hai aur gehrai ka vishay hai aur bahut accha vishay hai aatma ke vishay me jaanne ke liye hi aapko janam hua aap jitna zyada us aatma ke vishay me jaanege utani hi zyada aap jeevan me safal hote chale jaenge

आपके सवाल है आत्म नाते शरीफ है और ना ही मन हकीकत में यह क्या है क्या मेरे शरीर में अंदर आत

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Rakesh Tiwari

Life Coach, Management Trainer

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आप मानव शरीर के अंदर पंखे लाइट बल्ब मनुष्य के अंदर जो आप उस तत्व है जो चेतना के रूप में जब तक वह आत्म तत्व चेतना शरीर में है तब तक यह दिमाग सोचने का काम करता है आंखें देखने का काम करते कान सुनने का काम करते हैं गाने का कलाकार अपने अंदर भूत कर सकते हैं महसूस कर सकता हूं

aap manav sharir ke andar pankhe light bulb manushya ke andar jo aap us tatva hai jo chetna ke roop me jab tak vaah aatm tatva chetna sharir me hai tab tak yah dimag sochne ka kaam karta hai aankhen dekhne ka kaam karte kaan sunne ka kaam karte hain gaane ka kalakar apne andar bhoot kar sakte hain mehsus kar sakta hoon

आप मानव शरीर के अंदर पंखे लाइट बल्ब मनुष्य के अंदर जो आप उस तत्व है जो चेतना के रूप में जब

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

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Loan Guru

Financial Expert

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दोस्त आपका यह सवाल है बहुत सवाल मार्मिक सवाल है कि हाथ में दिखती नहीं है लेकिन होती है से लोग क्यों बोलते हैं आत्माएं होती है उसका अगर आपको प्रिय पता करना है तो सिंपल सी बात है कि जो बॉडी होती है एक तरफ उसकी और एक तरफ अनुष्य जिंदा होता है आप इन दोनों का अलार्म सेट करते हैं कुछ खास ज्यादा डिफेंस नहीं देखेगा हमें सिर्फ देखेगा कि एक मर चुका है और एक जिंदा है

dost aapka yah sawaal hai bahut sawaal marmik sawaal hai ki hath me dikhti nahi hai lekin hoti hai se log kyon bolte hain aatmaen hoti hai uska agar aapko priya pata karna hai toh simple si baat hai ki jo body hoti hai ek taraf uski aur ek taraf anushya zinda hota hai aap in dono ka alarm set karte hain kuch khas zyada defence nahi dekhega hamein sirf dekhega ki ek mar chuka hai aur ek zinda hai

दोस्त आपका यह सवाल है बहुत सवाल मार्मिक सवाल है कि हाथ में दिखती नहीं है लेकिन होती है से

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BK Kalyani

Teacher On Rajyoga Spiritual Knowledge

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Shailesh Kumar Dubey

Yoga Teacher , Retired Government Employee

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Dinesh Mishra

Theosophists | Accountant

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भाई श्री महात्मा ना तो शरीर है और ना ही मन हकीकत में यह क्या है या मेरे शरीर के अंदर आत्मा है देखिए आत्मा का जो स्वरूप इस प्रकार से हुआ करता है ना मैं शरीर हूं ना मैं इंद्रियों नाम है मेरा नाम है मनु और नाम ही बुद्धि हूं मैं इन सबसे परे अखंड आनंद असंग अभय अविनाशी चेतन आनंद माय आत्मा स्वरुप है यह आत्मा हुआ करती है और यह शरीर में विद्यमान रहा करती है अनुवाद इन तत्वों से शरीर का निर्माण हुआ करता है और आत्माएं स्वयं आज किया करती है जब व्यक्ति की मृत्यु जाया करती है तो पंच भौतिक जो शरीर है वह नष्ट हो जाया करता है और आत्मा में से निकल जाया करती है

bhai shri mahatma na toh sharir hai aur na hi man haqiqat me yah kya hai ya mere sharir ke andar aatma hai dekhiye aatma ka jo swaroop is prakar se hua karta hai na main sharir hoon na main indriyon naam hai mera naam hai manu aur naam hi buddhi hoon main in sabse pare akhand anand asang abhay avinashi chetan anand my aatma swarup hai yah aatma hua karti hai aur yah sharir me vidyaman raha karti hai anuvad in tatvon se sharir ka nirmaan hua karta hai aur aatmaen swayam aaj kiya karti hai jab vyakti ki mrityu jaya karti hai toh punch bhautik jo sharir hai vaah nasht ho jaya karta hai aur aatma me se nikal jaya karti hai

भाई श्री महात्मा ना तो शरीर है और ना ही मन हकीकत में यह क्या है या मेरे शरीर के अंदर आत्मा

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

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आत्मा तो शरीर है और न ही मन हकीकत में यह क्या है मेरे शरीर के अंदर आत्मा है या हर इंसान के शरीर के अंदर आत्मा है शरीर मर जाता है लेकिन आत्मा नहीं मरती ठीक है आत्मा अमर होती है लाइफ प्लान उधमी क्या तत्व की वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए एक बार बॉडी में ओके बस यही चीज है वैज्ञानिक दृष्टि शास्त्री दृष्टि से और आध्यात्मिक दृष्टि से

aatma toh sharir hai aur na hi man haqiqat mein yah kya hai mere sharir ke andar aatma hai ya har insaan ke sharir ke andar aatma hai sharir mar jata hai lekin aatma nahi marti theek hai aatma amar hoti hai life plan udhami kya tatva ki vaigyanik drishti se dekha jaaye ek baar body mein ok bus yahi cheez hai vaigyanik drishti shastri drishti se aur aadhyatmik drishti se

आत्मा तो शरीर है और न ही मन हकीकत में यह क्या है मेरे शरीर के अंदर आत्मा है या हर इंसान के

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सभी व्यक्तियों के शरीर के अंदर आत्मा है अगर आप आ रही होगी तो आप जीवित नहीं रह सकेंगे आत्मा अजर अमर है शरीर तो नश्वर शरीर आमरण मांस का व्रत होगा बनाए पुतला जब उसके अंदर आत्मा है तभी तो चलता रहता है लेकिन जैसे ही आत्मा शरीर से निकलती है शरीर जाता है और मन लायक हो जाता है अगर मनुष्य के अंदर आत्मा का वास होता है बिना आत्मा के सजीव निर्जीव है

sabhi vyaktiyon ke sharir ke andar aatma hai agar aap aa rahi hogi toh aap jeevit nahi reh sakenge aatma ajar amar hai sharir toh nashwar sharir aamran maans ka vrat hoga banaye putalaa jab uske andar aatma hai tabhi toh chalta rehta hai lekin jaise hi aatma sharir se nikalti hai sharir jata hai aur man layak ho jata hai agar manushya ke andar aatma ka was hota hai bina aatma ke sajeev nirjeev hai

सभी व्यक्तियों के शरीर के अंदर आत्मा है अगर आप आ रही होगी तो आप जीवित नहीं रह सकेंगे आत्मा

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Karan Janwa

Automobile Engineer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यू आर नॉट ए बॉडी यूआरएल एंड यू हैव शरीफ नहीं है अब एक आत्मा है और आपके पास एक सीरियल

you rss not a body URL and you have sharif nahi hai ab ek aatma hai aur aapke paas ek serial

यू आर नॉट ए बॉडी यूआरएल एंड यू हैव शरीफ नहीं है अब एक आत्मा है और आपके पास एक सीरियल

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Greeshma Nataraj

Psychology Counseling, Life Coach, NLP, Cognitive Behavioral Therapist, Motivational Speaker, Handwriting Signature Analyst.

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गुड आफ्टरनून दिव्य आत्मा यानी 1681 शरीर के अंदर होती है अगर सोल है तो शरीर है चाल है तो ही इंसान है जिस वक्त हम मर जाते हैं जिस वक्त हम अपना प्यार प्यार देते हैं तो सिर्फ शरीर रह जाता है और जसोल है वह किसी और के अंदर जाकर फिर तेरी बर्थ लेती है वह सौम्या आत्मा एक ऐसी चीज है जिसे हम कपड़े बदलते हैं तो हर व्यक्ति के अंदर रहती है और वह अपना शरीर बदलती रहती है जब खुशी का आत्म जब किसी की मौत हो जाती है तो साल किसी और के अंदर चली जाती है आत्मा का जो साइकिल है वह नॉनस्टॉप है वह कंटिन्यूज टाइप्स ऑफ साइंटिफिक रीजन से देखिएगा या फिर किसी डर के हिसाब से भी आप देखिएगा वह यही कहेंगे कि आत्मा हमेशा अमर है रेनो लिमिट फॉर द सोल आत्मा कंटीन्यूअस टेंस कंटीन्यूअस प्रोसेस आज अगर आपने मनुष्य जीवन जीवन लिया है तो अगली बार आपका जसोल है या आत्मा है शायद पेड़ बनकर हो या फिर चिड़िया बनकर जन्मले आत्मा हर एक व्यक्ति के अंदर होती है हर एक चीज में आत्मा होती है जिस चीज को प्रकृति ने जीवनदान दिया है उस सारी चीज में सृष्टि में प्रकृति में आत्माएं हैं और आत्मा रहेगी और आत्मा हमेशा अमर रहेगी यह ध्यान रखिएगा सुधर इज नॉट फॉर 10 ऑल माय डिअर फ्रेंड एक्सप्लेन यू वेरी वेल और आपको मेरा जवाब पसंद आया होगा धन्यवाद टेक केयर थैंक यू

good afternoon divya aatma yani 1681 sharir ke andar hoti hai agar soul hai toh sharir hai chaal hai toh hi insaan hai jis waqt hum mar jaate hain jis waqt hum apna pyar pyar dete hain toh sirf sharir reh jata hai aur jasol hai vaah kisi aur ke andar jaakar phir teri birth leti hai vaah saumya aatma ek aisi cheez hai jise hum kapde badalte hain toh har vyakti ke andar rehti hai aur vaah apna sharir badalti rehti hai jab khushi ka aatm jab kisi ki maut ho jaati hai toh saal kisi aur ke andar chali jaati hai aatma ka jo cycle hai vaah nonstop hai vaah continues types of scientific reason se dekhiega ya phir kisi dar ke hisab se bhi aap dekhiega vaah yahi kahenge ki aatma hamesha amar hai reno limit for the soul aatma kantinyuas tense kantinyuas process aaj agar aapne manushya jeevan jeevan liya hai toh agli baar aapka jasol hai ya aatma hai shayad ped bankar ho ya phir chidiya bankar janmale aatma har ek vyakti ke andar hoti hai har ek cheez mein aatma hoti hai jis cheez ko prakriti ne jivanadan diya hai us saree cheez mein shrishti mein prakriti mein aatmaen hain aur aatma rahegi aur aatma hamesha amar rahegi yah dhyan rakhiega sudhar is not for 10 all my dear friend explain you very well aur aapko mera jawab pasand aaya hoga dhanyavad take care thank you

गुड आफ्टरनून दिव्य आत्मा यानी 1681 शरीर के अंदर होती है अगर सोल है तो शरीर है चाल है तो ही

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Dr Sampadananda Mishra

Sanskrit scholar, Author, Director, Sri Aurobindo Foundation for Indian Culture

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आत्मा नत्थू शरीर और नंबर स्कूल समझने के लिए हमको बहुत प्रयास करना पड़ता है प्रयास की आवश्यकता है मन आत्मा तो नहीं है शरीर आत्मा तो नहीं है लेकिन आत्मा से अलग भी नहीं आत्मा है तो शरीर में मन है कान्हा के बिना मानव शरीर प्राण प्राण नहीं रह सकते लेकिन मन शरीर कांड को लेकर ही आत्मा का विकास होता है जो इवॉल्विंग छोड़ते हैं क्योंकि यह सब साधन होते हैं जिससे एक व्यक्तिगत आत्मा जो है एक तो है कि जीवात्मा के एक-एक अंतरात्मा है एक परमात्मा है परमात्मा जो है जो परम है अखंड है एक है अद्वितीय है केवल है सर्वशक्तिमान है वही एक नहीं इस बहू को रचा है महात्मा जब अपने को अपने से पीछे तो नहीं करता है अपने से अपने खुद खुद स्वयं को एक्सटेंट कर देता है सृष्टि की रचना के लिए एक आत्मा है जो इंडिविजुअल सौल के रूप में वह क्या कहते हैं दोस्ती एक आधार के रूप में सबके अंदर वह आत्मा है जब यकीन नहीं होता है इसका कोई परिवर्तन नहीं होता है उसके साथ साथ एक अलग है जो आत्मा का विकास होता है जो विकास परक आत्मा है जिसको हम अंतरात्मा मानते हैं और दूसरे लोगों ने जिस प्रकार से उसको देखा है जो अनुभव जापानी डॉग इस प्रकार उसको देखेंगे कि हमारे जो सकता है हमारे स्वतंत्रता के मानवता के जो जब्बिंग है कि मन बिगड़ सकता है आनंद सकता है उसके केंद्र में हृदय मानते हैं का मतलब भी वही जो फिजिकल हॉट इमेज लेकिन जो जो श्रुति चेतना का जो दुबई में जो केंद्र है उसमें एक आदमी के रूप में एक फ्लेम 1 अग्निशिखा के रूप में हमारे अंदर ही स्थित जो सेंटर है जो हमारा आधार है जो हम को सही मार्ग पर ले सकता है तो इसी प्रकार हमारे ही अंदर जो आत्मा की उपलब्धि खुली है इससे यह स्पष्ट है कि हमारे अंदर ही हमारी आत्मा उड़ीसा को उपलब्ध करना जानना और आत्मा के मार्ग पर चलना आत्मा के निर्देश पर चलना आत्मा के निर्देश पर मन प्राण और शरीर को चलाना और मन प्राण शरीर को आत्मा के संपर्क में लाना यह आत्मज्ञान और प्रश्न के हिसाब से हम देखें और उसको थोड़ा छोटा बनाएं तो हमारे शरीर के अंदर की आत्मा है इसलिए शरीर को एक पोस्ट माना जाता है शरीर को एक कवर माना जाता है जिसके अंदर आत्मा छुपा हुआ है पुरुष अंदर छुपा हुआ आत्मा ही तुम्हारा सब कुछ है और वही आत्मा ही हमको परमात्मा से मिला सकता है तो हमारे अंदर आत्मा है हमारा मन और शरीर तो आत्मा नहीं है परंतु आत्मा के बिना विकास कितनी देर कर दी और अंततोगत्वा मन शरीर और कान को आत्मा के साथ ना तब जाकर हम आत्मा से परिचालित होकर एक जीवन निर्वाह कर सकते हैं इसलिए श्रीमद्भगवद्गीता में यह कहा गया है कि हमारे अंदर जो बंद है जो सबसे श्रेष्ठ इंद्रिय जो मानव को मानव इसीलिए कहा जाता है मनुष्य के लिए कहा जाता है क्योंकि उसके पास मन है बहुत बड़ा सागर है जिसके माध्यम से हम और भी चेतना के उच्च स्तर तक पहुंच सकते हैं लेकिन यह संभव तब हो सकता है जब मन आत्मा में ही फिट हो सकता है आपको समय कम वक्त हुआ जब मन आत्मा के साथ ही नहीं टूटता आध्यात्मिक केंद्र में स्थित नहीं होता है तब वह मन सीमित होता है तो आत्मा संबंधित आत्मा में स्थित मन असीम मन है इस मन के माध्यम से चेतना के जितने ऊपर के जो स्तर है वहां तक हम पहुंच सकते हैं सब काम इसलिए संभव हो पाएगा तो मनुष्य जो भी चाहे वह कर सकता है इतना भी उच्च स्तर जितना के उच्च स्तर पर पहुंचना चाहिए मन से अधिक मानस तक भी पहुंच सकता है उसका कारण यह है कि हमारे अंदर वह भागवत टीवी के रूप में सूर्य के रूप आवश्यक जिसको अपना का नाम दिया गया है वह ज्योति स्वरूप वह पूर्ण परमात्मा के अंश जो हमारी जुदाई के मध्य में सत्ता के केंद्र में स्थित है वही आता है जिसके बल पर हम असीम बन सकते हैं पूर्ण बन सकते हैं इसके लिए करना यह है कि हमारे पास में चेतना के जितने भी सीमित अदाएं ज्योति दुर्बल अदाएं हैं उस से मुक्त होकर हमको का असीम चेतना की ओर जाने की अभिलाषा को और भी प्रबल करके आत्मा के साथ जुट गए और पूर्णता को हम प्राप्त कर सकें तो यह है मेरा उत्तर इस प्रश्न के लिए

aatma natthu sharir aur number school samjhne ke liye hamko bahut prayas karna padta hai prayas ki avashyakta hai man aatma toh nahi hai sharir aatma toh nahi hai lekin aatma se alag bhi nahi aatma hai toh sharir mein man hai kanha ke bina manav sharir praan praan nahi reh sakte lekin man sharir kaand ko lekar hi aatma ka vikas hota hai jo ivalwing chodte hain kyonki yah sab sadhan hote hain jisse ek vyaktigat aatma jo hai ek toh hai ki jivaatma ke ek ek antaraatma hai ek paramatma hai paramatma jo hai jo param hai akhand hai ek hai adwitiya hai keval hai sarvshaktimaan hai wahi ek nahi is bahu ko racha hai mahatma jab apne ko apne se peeche toh nahi karta hai apne se apne khud khud swayam ko extent kar deta hai shrishti ki rachna ke liye ek aatma hai jo individual saul ke roop mein vaah kya kehte hain dosti ek aadhaar ke roop mein sabke andar vaah aatma hai jab yakin nahi hota hai iska koi parivartan nahi hota hai uske saath saath ek alag hai jo aatma ka vikas hota hai jo vikas parak aatma hai jisko hum antaraatma maante hain aur dusre logon ne jis prakar se usko dekha hai jo anubhav japani dog is prakar usko dekhenge ki hamare jo sakta hai hamare swatatrata ke manavta ke jo jabbing hai ki man bigad sakta hai anand sakta hai uske kendra mein hriday maante hain ka matlab bhi wahi jo physical hot image lekin jo jo shruti chetna ka jo dubai mein jo kendra hai usmein ek aadmi ke roop mein ek flame 1 agnishikha ke roop mein hamare andar hi sthit jo center hai jo hamara aadhaar hai jo hum ko sahi marg par le sakta hai toh isi prakar hamare hi andar jo aatma ki upalabdhi khuli hai isse yah spasht hai ki hamare andar hi hamari aatma orissa ko uplabdh karna janana aur aatma ke marg par chalna aatma ke nirdesh par chalna aatma ke nirdesh par man praan aur sharir ko chalana aur man praan sharir ko aatma ke sampark mein lana yah atmagyan aur prashna ke hisab se hum dekhen aur usko thoda chota banaye toh hamare sharir ke andar ki aatma hai isliye sharir ko ek post mana jata hai sharir ko ek cover mana jata hai jiske andar aatma chhupa hua hai purush andar chhupa hua aatma hi tumhara sab kuch hai aur wahi aatma hi hamko paramatma se mila sakta hai toh hamare andar aatma hai hamara man aur sharir toh aatma nahi hai parantu aatma ke bina vikas kitni der kar di aur antatogatwa man sharir aur kaan ko aatma ke saath na tab jaakar hum aatma se parichalit hokar ek jeevan nirvah kar sakte hain isliye shrimadbhagavadgita mein yah kaha gaya hai ki hamare andar jo band hai jo sabse shreshtha indriya jo manav ko manav isliye kaha jata hai manushya ke liye kaha jata hai kyonki uske paas man hai bahut bada sagar hai jiske madhyam se hum aur bhi chetna ke ucch sthar tak pahunch sakte hain lekin yah sambhav tab ho sakta hai jab man aatma mein hi fit ho sakta hai aapko samay kam waqt hua jab man aatma ke saath hi nahi tootata aadhyatmik kendra mein sthit nahi hota hai tab vaah man simit hota hai toh aatma sambandhit aatma mein sthit man asim man hai is man ke madhyam se chetna ke jitne upar ke jo sthar hai wahan tak hum pahunch sakte hain sab kaam isliye sambhav ho payega toh manushya jo bhi chahen vaah kar sakta hai itna bhi ucch sthar jitna ke ucch sthar par pahunchana chahiye man se adhik manas tak bhi pahunch sakta hai uska karan yah hai ki hamare andar vaah bhagwat TV ke roop mein surya ke roop aavashyak jisko apna ka naam diya gaya hai vaah jyoti swaroop vaah purn paramatma ke ansh jo hamari judai ke madhya mein satta ke kendra mein sthit hai wahi aata hai jiske bal par hum asim ban sakte hain purn ban sakte hain iske liye karna yah hai ki hamare paas mein chetna ke jitne bhi simit adaen jyoti durbal adaen hain us se mukt hokar hamko ka asim chetna ki aur jaane ki abhilasha ko aur bhi prabal karke aatma ke saath jut gaye aur purnata ko hum prapt kar sakein toh yah hai mera uttar is prashna ke liye

आत्मा नत्थू शरीर और नंबर स्कूल समझने के लिए हमको बहुत प्रयास करना पड़ता है प्रयास की आवश्य

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M S Aditya Pandit

Entrepreneur | Politician

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हां यह सभी के अंदर है यह एक तरह का एनर्जी है जो आपकी बॉडी को चलाता है बट इनविजिबल इनविजिबल सकता है ना सुन सकती से महसूस कर सकता है हम भी एक्टिवेट होता है वह अपने पास इसका मास्टर कि नहीं होता है वह मास्टर की कुदरत के पास होता है वह अगर उसको डीएक्टिवेट कर देता आपके बॉडी में उसका काम बंद हो जाता उसको एक्टिवेट कर दिया तो चालू हो जाता है वह सब उनके हाथ में है इसका रेट कौन है वह भी मालूम है जब कोई चीज हमें नहीं मिलती जिस तरह से मैच में कोई चीज नहीं मिलती तो हम उसको माल लेकर मल्लम्माना ए प्लस बी लाइट लेटेस्ट क्वेश्चन फॉर्मूलेशन यूज करते सेंड चीज है जहां हमारी सोच खत्म होते हमें नहीं समझ में आता है वहां पर हम एक आईडेंटिटी दे देते हैं दीपिका ने भगवान के हाथ में होता है इनविजिबल हम इसे महसूस कर सकते अपने अंदर महसूस करने का सबसे आसान तरीका क्या होगा जो तकलीफ होगी उससे आपको आभास होता है कि यह जो चीज है वह एक्टिवेट है या डीएक्टिवेट है इसके प्रॉब्लम हो तो उससे आप महसूस कर सकते हैं

haan yah sabhi ke andar hai yah ek tarah ka energy hai jo aapki body ko chalata hai but inavijibal inavijibal sakta hai na sun sakti se mahsus kar sakta hai hum bhi activate hota hai vaah apne paas iska master ki nahi hota hai vaah master ki kudrat ke paas hota hai vaah agar usko deactivate kar deta aapke body mein uska kaam band ho jata usko activate kar diya toh chaalu ho jata hai vaah sab unke hath mein hai iska rate kaun hai vaah bhi maloom hai jab koi cheez hamein nahi milti jis tarah se match mein koi cheez nahi milti toh hum usko maal lekar mallammana a plus be light latest question Formulation use karte send cheez hai jahan hamari soch khatam hote hamein nahi samajh mein aata hai wahan par hum ek identity de dete hain deepika ne bhagwan ke hath mein hota hai inavijibal hum ise mahsus kar sakte apne andar mahsus karne ka sabse aasaan tarika kya hoga jo takleef hogi usse aapko aabhas hota hai ki yah jo cheez hai vaah activate hai ya deactivate hai iske problem ho toh usse aap mahsus kar sakte hain

हां यह सभी के अंदर है यह एक तरह का एनर्जी है जो आपकी बॉडी को चलाता है बट इनविजिबल इनविजिबल

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

4:20
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आत्मा ना तो शरीर है नहीं मन हकीकत में या क्या है या शरीर के अंदर आत्मा है जो वस्तु जीवित है उसके अंदर आत्मा का निवास है वही भगवान का सूक्ष्म रूप है ऐसा हम मांग सकते यह शरीर जो है आत्मा का घर और इसी आत्मा की वजह से हमारी शारीरिक क्रियाएं जो दैनिक दिनचर्या हैं और जो भी है वह चलती लगती इसका एक उदाहरण में आपको सिर्फ दूंगा कि हम दिन भर जाते हैं और रात को सो जाते हैं हमारी समझ ली थी और जो मृत अवस्था है लेकिन क्योंकि शरीर में आत्मा है इसलिए हमारी क्रियाएं चालू रहती हैं और हमारा दिमाग को उठने का आर्डर करती हैं तो सुबह हम आंख खोलकर और जागृत अवस्था में आ जाते हैं बाकी फिर बाद में काम करना हम अपनी बुद्धि से जो भी काम करते हैं वह सब आत्मा के कारण होता है या आत्मा जब तक शरीर में रहती है तभी तक ही हो पाता है जैसे ही अपना घर से अपने शरीर से निकलती है वैसे ही हमें हमारा करते हैं कि यह स्वर्गवासी हो इसलिए आत्मा दो हमारे शरीर के अंदर है वह भगवान का शुक्र है यह मानकर हमें चलना चाहिए और कभी भी किसी दूसरे की आत्मा को दुखी नहीं करना चाहिए हम किसी भी आत्मा को या किसी भी अन्य शरीर को दुखी करते हैं तो उसकी आत्मा जो है वह चित्र होती है इसलिए सदैव आत्मा यानी कि प्रभु के सूक्ष्म रूप पर विश्वास करके और यह सभी कितने तालुका है हमें नहीं मालूम और अभी तक की आत्मा का निवास है हमारे शरीर में इसलिए कहा जाता है कि यह शरीर आत्मा के लिए भाड़े का शरीर है कि वह कितने दिनों तक कि 7 मई से शरीर रूपी घर में रहेगी वह हमें भी नहीं मालूम और किसी को भी नहीं मालूम महाभारत के युद्ध में श्री कृष्ण भगवान ने अपने विराट स्वरूप में 12 श्लोक बोला है जो कि नए नाम चित्रण चेतना नहीं यह जो है आत्मा के लिए बोला गया है कि आत्मा अजर अमर है अविनाशी है ना उसको जलाया जा सकता है ना उसको पानी में डूब आया जा सकता है इसलिए इन सब बातों को ध्यान में रखकर हमें यह पौराणिक मान्यताओं के अनुसार और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार और साइंस भी इस बात को इस तर्क को स्वीकार कर चुका है कि ऐसी कोई शक्ति हमारे शरीर में है जो यह शरीर को कंट्रोल करती है चलाती है और सिस्टम को बंद भी कर देती है जब वह यहां से शरीर में से जो हमारी पांच चित्र जो शरीर में है उसी में से उसका परिणाम होता है ऐसा हमारे शास्त्रों में कहा गया है इसलिए सदैव आत्मा का ध्यान रखिए अपने आचरण सही रखें किसी की आत्मा को दुखी मत करें धन्यवाद जय हिंद

aatma na toh sharir hai nahi man haqiqat mein ya kya hai ya sharir ke andar aatma hai jo vastu jeevit hai uske andar aatma ka niwas hai wahi bhagwan ka sukshm roop hai aisa hum maang sakte yah sharir jo hai aatma ka ghar aur isi aatma ki wajah se hamari sharirik kriyaen jo dainik dincharya hain aur jo bhi hai vaah chalti lagti iska ek udaharan mein aapko sirf dunga ki hum din bhar jaate hain aur raat ko so jaate hain hamari samajh li thi aur jo mrit avastha hai lekin kyonki sharir mein aatma hai isliye hamari kriyaen chaalu rehti hain aur hamara dimag ko uthane ka order karti hain toh subah hum aankh kholakar aur jaagarrett avastha mein aa jaate hain baki phir baad mein kaam karna hum apni buddhi se jo bhi kaam karte hain vaah sab aatma ke karan hota hai ya aatma jab tak sharir mein rehti hai tabhi tak hi ho pata hai jaise hi apna ghar se apne sharir se nikalti hai waise hi hamein hamara karte hain ki yah swargavasi ho isliye aatma do hamare sharir ke andar hai vaah bhagwan ka shukra hai yah manakar hamein chalna chahiye aur kabhi bhi kisi dusre ki aatma ko dukhi nahi karna chahiye hum kisi bhi aatma ko ya kisi bhi anya sharir ko dukhi karte hain toh uski aatma jo hai vaah chitra hoti hai isliye sadaiv aatma yani ki prabhu ke sukshm roop par vishwas karke aur yah sabhi kitne Taluka hai hamein nahi maloom aur abhi tak ki aatma ka niwas hai hamare sharir mein isliye kaha jata hai ki yah sharir aatma ke liye bhade ka sharir hai ki vaah kitne dino tak ki 7 may se sharir rupee ghar mein rahegi vaah hamein bhi nahi maloom aur kisi ko bhi nahi maloom mahabharat ke yudh mein shri krishna bhagwan ne apne virat swaroop mein 12 shlok bola hai jo ki naye naam chitran chetna nahi yah jo hai aatma ke liye bola gaya hai ki aatma ajar amar hai avinashi hai na usko jalaaya ja sakta hai na usko paani mein doob aaya ja sakta hai isliye in sab baaton ko dhyan mein rakhakar hamein yah pouranik manyataon ke anusaar aur dharmik manyataon ke anusaar aur science bhi is baat ko is tark ko sweekar kar chuka hai ki aisi koi shakti hamare sharir mein hai jo yah sharir ko control karti hai chalati hai aur system ko band bhi kar deti hai jab vaah yahan se sharir mein se jo hamari paanch chitra jo sharir mein hai usi mein se uska parinam hota hai aisa hamare shastron mein kaha gaya hai isliye sadaiv aatma ka dhyan rakhiye apne aacharan sahi rakhen kisi ki aatma ko dukhi mat karen dhanyavad jai hind

आत्मा ना तो शरीर है नहीं मन हकीकत में या क्या है या शरीर के अंदर आत्मा है जो वस्तु जीवित ह

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Harish Chand

Social Worker

0:56
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आत्मा ना तो शरीर है और ना ही मन है हकीकत में क्या है क्या मेरे शरीर के अंदर आत्मा है तो मेरे मित्र मेरे भाई यह सवाल है इस सवाल में ही आपका जवाब है जो आपको बोलने के लिए प्रेरित कर रहा है यह आपके हाथ पैरों में किसी मूवमेंट के लिए प्रेरित कर रहा है वही तो आत्मा है जो हम बोल रहे हैं जो हम महसूस कर रहे हैं जो इस सृष्टि में जितने भी सजीव प्राणी है मनुष्य हैं उनमें आत्माओं का वास है आशा है आप मेरी बात से संतुष्ट हूं और किसी परामर्श की आवश्यकता है तो आप संपर्क कर सकते हैं

aatma na toh sharir hai aur na hi man hai haqiqat mein kya hai kya mere sharir ke andar aatma hai toh mere mitra mere bhai yah sawaal hai is sawaal mein hi aapka jawab hai jo aapko bolne ke liye prerit kar raha hai yah aapke hath pairon mein kisi movement ke liye prerit kar raha hai wahi toh aatma hai jo hum bol rahe hain jo hum mahsus kar rahe hain jo is shrishti mein jitne bhi sajeev prani hai manushya hain unmen atmaon ka was hai asha hai aap meri baat se santusht hoon aur kisi paramarsh ki avashyakta hai toh aap sampark kar sakte hain

आत्मा ना तो शरीर है और ना ही मन है हकीकत में क्या है क्या मेरे शरीर के अंदर आत्मा है तो मे

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Dr.Sumeet Gautam

Homeopathy Doctor

3:25
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बिल्कुल आत्मा ना शरीर है ना मन है मेरे व्यक्तिगत विचार से आत्मा एक ऊर्जा है एक प्रकार की ऊर्जा है जिससे कि हमारा शरीर संचालित होता है गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है आत्मा ना मरती है ना आत्मा पैदा होती है केवल इसका एक शरीर को त्यागकर आत्मा दूसरे शरीर में प्रवेश करते हैं ठीक इसी प्रकार का एक सिद्धांत है विज्ञान में ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत इसे हम कहते हैं उसमें भी यह लिखा गया है कि ऊर्जा न तो कभी नष्ट होती है ना ही उर्जा कभी उत्पन्न होती है केवल ऊर्जा का एक रूप से दूसरे रूप में रूपांतरण हो सकता है तो यह दोनों परिभाषाएं बिल्कुल एक जैसी प्रतीत होती हैं गीता में कही गई आत्मा के विषय में बात और ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत इन दोनों का एक साथ होना प्रमाणित करता है कि आत्मा ही ऊर्जा है और ऊर्जा ही आत्मा हर व्यक्ति के शरीर में उस शरीर को संचालित करने के लिए एक ऊर्जा की जरूरत होती है एक एनर्जी की जरूरत होती है वह एनर्जी आत्मा होती है जब शरीर का समय पूरा हो जाता है तो वह एनर्जी हमारे शरीर से निकलकर इसे वायुमंडल में आलोक हो जाती है या डीजल हो जाती है तो हम कहते हैं कि व्यक्ति का शरीर साथ छोड़ गया या शरीर का आत्मा का मतलब शरीर मर गया उसका तो व्यक्ति के मरने पर उसके शरीर की जो ऊर्जा है जिस सुरजा से शरीर संचालित हो रहा है वह निकल जाती है उदाहरण के लिए मैं बताता हूं आपने देखा होगा कि जब भी हम किसी छिपकली हमारे घर में छिपकली या होती है और हम छिपकली को भगाने के लिए किसी भी प्रकार के डंडे झाड़ू से उस पर प्रहार करते हैं तो छिपकली हमें डराने के लिए अपनी पूंछ को गिरा देती है यह छिपकलियों में एक ईश्वर ने बनाया हुआ गुण है कि उसका कटा हुआ अंग केवल पूछ उसकी दोबारा से वापस आ जाती है यह पुनरुदभवन की क्रिया होती है जब भी आप देखेंगे छिपकली अपनी पूंछ कराएगी अथवा आपके किसी डंडे या झाड़ू के प्रहार से छिपकली की पूंछ गिर जाएगी तो कुछ समय तक फड़फड़ा की रहती है फड़फड़ाने का जो उसका कारण है वह यही है कि पूछ मैं जो ऊर्जा है वह ऊर्जा जब शरीर से छलक हो गई तो उसकी जो ऊर्जा है वह धीरे-धीरे कंट्रोल ना मिलने की वजह से क्योंकि ब्रेन से उसका कंट्रोल खत्म हो गया शरीर से टूटता ही शरीर ब्रेन तो शरीफ मिलेगा जरूर जागो नियंत्रित करता है अब जलवा कंट्रोल रहा ही नहीं तो उस कंट्रोल की नाव पानी को ऐसे ऊर्जा वायुमंडल में एडिसोल हो जाएगी तो वह फड़फड़ा ती हुई क्यों गुस्सा कंट्रोल नहीं रहता है और वह बिना किसी दिशा निर्देश के ऊर्जा पढ़ाती हुई वायुमंडल में निकल जाती है तो कुछ समय बाद वह छिपकली की पूछ कर पढ़ाती हुई अपने आप शांत हो जाती है ठीक इसी प्रकार जब मनुष्य का कोई हिस्सा जाता है कई बार देखा है रेलवे एक्सीडेंट हो जाते हैं किसी का हाथ कट गया पैर कट गया तो कटने के बाद में बहुत देर तक वह हिस्सा फड़फड़ा ता रहता है उसका भी तात्पर्य ही है उसके अंदर जो ऊर्जा होती है ऊर्जा वायुमंडल में विलीन हो जाती है क्योंकि दिमाग से संपर्क कर चुका होता है उसे कंट्रोल करने वाला जो है दिमाग उसके संपर्क में ही नहीं है तो यह बिल्कुल प्रमाणित करते हैं कि ऊर्जा हमारे शरीर में होती है और ऊर्जा ही आत्मा है

bilkul aatma na sharir hai na man hai mere vyaktigat vichar se aatma ek urja hai ek prakar ki urja hai jisse ki hamara sharir sanchalit hota hai geeta mein bhagwan shrikrishna ne kaha hai aatma na marti hai na aatma paida hoti hai keval iska ek sharir ko tyagakar aatma dusre sharir mein pravesh karte hain theek isi prakar ka ek siddhant hai vigyan mein urja sanrakshan ka siddhant ise hum kehte hain usme bhi yah likha gaya hai ki urja na toh kabhi nasht hoti hai na hi urja kabhi utpann hoti hai keval urja ka ek roop se dusre roop mein rupantaran ho sakta hai toh yah dono paribhashayen bilkul ek jaisi pratit hoti hain geeta mein kahi gayi aatma ke vishay mein baat aur urja sanrakshan ka siddhant in dono ka ek saath hona pramanit karta hai ki aatma hi urja hai aur urja hi aatma har vyakti ke sharir mein us sharir ko sanchalit karne ke liye ek urja ki zaroorat hoti hai ek energy ki zaroorat hoti hai vaah energy aatma hoti hai jab sharir ka samay pura ho jata hai toh vaah energy hamare sharir se nikalkar ise vayumandal mein alok ho jaati hai ya diesel ho jaati hai toh hum kehte hain ki vyakti ka sharir saath chhod gaya ya sharir ka aatma ka matlab sharir mar gaya uska toh vyakti ke marne par uske sharir ki jo urja hai jis surja se sharir sanchalit ho raha hai vaah nikal jaati hai udaharan ke liye main batata hoon aapne dekha hoga ki jab bhi hum kisi chhipakali hamare ghar mein chhipakali ya hoti hai aur hum chhipakali ko bhagane ke liye kisi bhi prakar ke dande jhadu se us par prahaar karte hain toh chhipakali hamein darane ke liye apni poonchh ko gira deti hai yah chhipakaliyon mein ek ishwar ne banaya hua gun hai ki uska kata hua ang keval poochh uski dobara se wapas aa jaati hai yah punrudabhavan ki kriya hoti hai jab bhi aap dekhenge chhipakali apni poonchh karegi athva aapke kisi dande ya jhadu ke prahaar se chhipakali ki poonchh gir jayegi toh kuch samay tak fadfada ki rehti hai fadafadane ka jo uska karan hai vaah yahi hai ki poochh main jo urja hai vaah urja jab sharir se chhalak ho gayi toh uski jo urja hai vaah dhire dhire control na milne ki wajah se kyonki brain se uska control khatam ho gaya sharir se tootata hi sharir brain toh sharif milega zaroor jaago niyantrit karta hai ab jalwa control raha hi nahi toh us control ki nav paani ko aise urja vayumandal mein edisol ho jayegi toh vaah fadfada ti hui kyon gussa control nahi rehta hai aur vaah bina kisi disha nirdesh ke urja padhati hui vayumandal mein nikal jaati hai toh kuch samay baad vaah chhipakali ki poochh kar padhati hui apne aap shaant ho jaati hai theek isi prakar jab manushya ka koi hissa jata hai kai baar dekha hai railway accident ho jaate hain kisi ka hath cut gaya pair cut gaya toh katane ke baad mein bahut der tak vaah hissa fadfada ta rehta hai uska bhi tatparya hi hai uske andar jo urja hoti hai urja vayumandal mein vileen ho jaati hai kyonki dimag se sampark kar chuka hota hai use control karne vala jo hai dimag uske sampark mein hi nahi hai toh yah bilkul pramanit karte hain ki urja hamare sharir mein hoti hai aur urja hi aatma hai

बिल्कुल आत्मा ना शरीर है ना मन है मेरे व्यक्तिगत विचार से आत्मा एक ऊर्जा है एक प्रकार की ऊ

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Achal srivastava

Playback singer

2:35
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जी हां आत्मा ना तो शरीर है और ना ही मन आत्मा को अंग्रेजी में स्प्रिट या सोल भी कहते हैं सो यानी की आत्मा तो आत्मा यानी कि sod1 स्पिरिचुअल एंड आईटी और मन जो है हनी माइंड यह एक साइकोलॉजिकल एंड आईटी और जो आपका ब्रेन होता है ब्रेन एक फिजिकल यानी भौतिक एंट्रीटी है और शरीर एनीबॉडी वह भी फिजिकल यानी भौतिक वस्तु है किस तरह से आत्मा जो है वह एक स्पिरिचुअल एंड आईटी है उसका संबंध अध्यात्म से है आत्मा का आपकी आत्मा पवित्र होनी चाहिए और मन शुद्ध होना चाहिए आप का चित्र या मन निर्मल होना चाहिए आत्मा जो है यह आपके शरीर में होती है और शरीर नश्वर है जब शरीर नष्ट होता है तो आत्मा जाकर परमात्मा में विलीन हो जाती है ऐसा कहा जाता है अब यह कर्मों का आप का लेखा-जोखा जिस तरह का होता है उस तरह से ही होता है आदमी को इस दुनिया में बार बार आना पड़ता है वह इसलिए कि उसके जो कर्म का भार जो बचा हुआ है उसको पूरा करने के लिए उसे बाहर आना होता है इस दुनिया में क्योंकि उसके कर्मों का अगर खाता पूरा नहीं हुआ है तो उसे अगले जन्म में आकर कर्मों का हिसाब पूरा करना होता है तो इस तरह से यह एक पूरी प्रक्रिया है और जिसमें आत्मा जो है वह एक स्पेशल एंड आईटी है ना कि कोई भौतिक वस्तु है आत्मा यानी सोल्ड हिस स्पिरिचुअल एंड आईटी नेट सेट

ji haan aatma na toh sharir hai aur na hi man aatma ko angrezi mein sprit ya soul bhi kehte hain so yani ki aatma toh aatma yani ki sod1 Spiritual and it aur man jo hai honey mind yah ek saikolajikal and it aur jo aapka brain hota hai brain ek physical yani bhautik entriti hai aur sharir anybody vaah bhi physical yani bhautik vastu hai kis tarah se aatma jo hai vaah ek Spiritual and it hai uska sambandh adhyaatm se hai aatma ka aapki aatma pavitra honi chahiye aur man shudh hona chahiye aap ka chitra ya man nirmal hona chahiye aatma jo hai yah aapke sharir mein hoti hai aur sharir nashwar hai jab sharir nasht hota hai toh aatma jaakar paramatma mein vileen ho jaati hai aisa kaha jata hai ab yah karmon ka aap ka lekha jokha jis tarah ka hota hai us tarah se hi hota hai aadmi ko is duniya mein baar baar aana padta hai vaah isliye ki uske jo karm ka bhar jo bacha hua hai usko pura karne ke liye use bahar aana hota hai is duniya mein kyonki uske karmon ka agar khaata pura nahi hua hai toh use agle janam mein aakar karmon ka hisab pura karna hota hai toh is tarah se yah ek puri prakriya hai aur jisme aatma jo hai vaah ek special and it hai na ki koi bhautik vastu hai aatma yani sold hiss Spiritual and it net set

जी हां आत्मा ना तो शरीर है और ना ही मन आत्मा को अंग्रेजी में स्प्रिट या सोल भी कहते हैं सो

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Bk soni

Rajyoga Teacher

1:09
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अपने प्रश्न किया है आत्मा ना तो शरीर है ना कि मरना ही मन हकीकत में यह क्या है क्या मेरे शरीर के अंदर आत्मा है अगर आप बात कर रहे हैं तो डेफिनेटली आपके अंदर आत्मा है आप देख रहे हैं सब कुछ काम कर रहे हैं तो कर कौन रही है यह शरीर के द्वारा आत्मा ही कर रही है और सोच कौन रहा है आत्मा के अंदर मंदबुद्धि संस्कार होता है मानव आत्मा के अंदर जो मन है वही सोच रहा है ना तो सत्य में आंख के अंदर शरीर के अंदर आत्मा है और आत्मा शरीर के द्वारा सोच समझ कर कर रही है काम इसमें कन्फ्यूजन की बात नहीं है एक मरा हुआ मुर्दा कुछ करता है क्या कुछ सोचता है क्या उसके अंदर भी दिमाग होती है होती है नहीं होता नहीं सोचते ना इसी तरह से जब हमारे शरीर में आत्मा रहती तो हम चल परी तारा कम छोटा से छोटा बड़ा से बड़ा काम करते हैं सोचते हैं समझते करते हैं इस सब शरीर में आत्मा रहती है तभी होता है अधिक जानकारी के लिए हमारे ऑडियो सुनते रहेंगे तो मिल सकते धनी

apne prashna kiya hai aatma na toh sharir hai na ki marna hi man haqiqat me yah kya hai kya mere sharir ke andar aatma hai agar aap baat kar rahe hain toh definetli aapke andar aatma hai aap dekh rahe hain sab kuch kaam kar rahe hain toh kar kaun rahi hai yah sharir ke dwara aatma hi kar rahi hai aur soch kaun raha hai aatma ke andar mandbuddhi sanskar hota hai manav aatma ke andar jo man hai wahi soch raha hai na toh satya me aankh ke andar sharir ke andar aatma hai aur aatma sharir ke dwara soch samajh kar kar rahi hai kaam isme confusion ki baat nahi hai ek mara hua murda kuch karta hai kya kuch sochta hai kya uske andar bhi dimag hoti hai hoti hai nahi hota nahi sochte na isi tarah se jab hamare sharir me aatma rehti toh hum chal pari tara kam chota se chota bada se bada kaam karte hain sochte hain samajhte karte hain is sab sharir me aatma rehti hai tabhi hota hai adhik jaankari ke liye hamare audio sunte rahenge toh mil sakte dhani

अपने प्रश्न किया है आत्मा ना तो शरीर है ना कि मरना ही मन हकीकत में यह क्या है क्या मेरे शर

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Rashmin Trivedi

Motivational Speaker | Writer | Life Coach

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आत्मा ना तो शरीर है ना मन हकीकत में हर एक के भीतर आत्मा होती है आत्मा का दूसरा अर्थ है परम ऊर्जा ऊर्जा एक बिंदु जैसी है एक दीजिए की ज्योति जैसे होती है उस तरक्की और मुरझा हमारे भीतर जब हम जन्म लेते हैं तभी हमारे भीतर एंटर होती है शरीर के भीतर एंटर होती है और जब हमारा शरीर में स्वास्थ चलना बंद हो जाता है तभी वह ज्योति शरीर से छूट जाती है उसे आसमां कहते हैं और हमारा जो सेलिब्रेट को टेक्स्ट है वहां पर यह उसकी रहने की जगह वही है शरीर को टेक्स्ट सैनी एक ऐसे छोटी सी चवन्नी जैसी एरिया है साइलेंट एरिया जो हमारे ब्रेन सिस्टम में है जहां यह ब्राह्मण लोग छोटी रखते हैं तो वह छोटी की जो जगह है उसे सेरेब्रल कोरटेक्स कहते हैं वहां हमारे शरीर की सारी नारियां वहां मिलती है तो उस जगह पर यह दिव्य ज्योति रहती है रात को हम जब सो जाते हैं सब यह आत्मा है वह हमारे ह्रदय केंद्र में आ जाती है राधे का केंद्र हमारा जो है उसमें आकर वह मोमेंट करती है तो उस मूवमेंट की जो ऐसी बहुत थोड़ी सी मिनिट होती है उसमें जो उसकी मोमेंट होती है उस मोमेंट से हमारे सारे सेंटर आनंद प्रेम और शांति से भर जाते हैं हमारी सारी थकान चली जाती है तो इस तरह की हमारे भीतर जो रचना है उसे समझने के लिए योग शास्त्र का अभ्यास जरूरी है यह बातें सच है ऐसे महायोगी श्री सांवरिया जी ने कहा है और उनके पुस्तक पर्पस ऑफ बर्थ एंड डेथ और दूसरे उनकी पुस्तक है एजुकेशन फॉर अटेंशन उसमें भी इस तरह की बातें कही गई है और यह बातें जब आप ध्यान योग करोगे तो आपको खुद अनुभव होगी ऐसी बातें नहीं है कि जो काल्पनिक है आप प्रयोग करोगे तो आपको खुद अनुभव में आएगा और यह बातों का अनुभव आपको ही आएगा दूसरे को नहीं आ सकता क्या समा क्या है और हमारे भीतर से जो गाय लेंस मिलता है हमारे बीदर से कोई देखने वाला तक तो है जिसे साक्षी कहते हैं वही आत्मा है तो जो देखने वाला तत्व है विचार वही हमें गाइडेंस देता है नींद आती है तब पता चलता है हमें कि बहुत गहरी नींद आई तो वह गहरी नींद आई उस समय हम तो सो गए हैं किसे पता चला जिससे सारी चीजों का पता चलता है उसे आसमां कहते हैं उसे साक्षी कहते हैं और वह निर्विकार है निराकार है उसे सर्वज्ञान है उसको सब ज्ञानी है वह तो उसे सारी चीजों का पता चलता है और ब्रह्मांड की जो इन प्लेंस थी जिसे बोलते हैं कॉस्मिक इनक्रीस उसके फीचर टच होती है इसकी वजह से हम बाहर की दुनिया की नॉलेज पा सकते हैं और हमें इनट्यूशन आती है जैसे कविता आती है अच्छा बोलने का मन होता है या चित्र अच्छे बनाने का मन होता है या कोई काम अच्छी तरह से करने का मन होता रसोई बनाते हैं यह सब हमारे भीतर से जहां से आता है वह तत्व है आत्म तत्व

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आत्मा ना तो शरीर है ना मन हकीकत में हर एक के भीतर आत्मा होती है आत्मा का दूसरा अर्थ है परम

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Ramandeep Singh

Waheguru industry

2:46
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए आत्मा जो है वह वाकई में ना तो शरीर है ना मन है आत्मा परमात्मा होने के लिए लेकिन कोई भी शरीर है उसमें जो सूक्ष्म शरीर हर जर्रे में एक सूक्ष्म शरीर है जो शरीर को टिकाए हुए जो शरीर को चलाता है वह सूक्ष्म शरीर अगर हमारा मन विचलित नहीं हो जाए तो भी हमारी बॉडी खड़ी रहती है सांस लेती रहती है खून दौड़ता रहता है सक्षम शरीर शरीर को जला रहा है उसको आत्मा और मन है आत्मा और शरीर को टिकाए हुए हैं और जो मन है वह इस आत्मा को दूर शरीर प्रदान करती अर्थात जो मन है जैसा हमारा विचार होगा वक्त आने पे स्थूल शरीर खत्म हो जाएगा और हमें एक और फूल शरीर मिल जाएगा एक ऐसा शरीर हमको मिल जाएगा जो हमारे मन के कारण मिलेगा हमारा मन जिन विचारों में जाता होगा आत्मा को कैसे कपड़े पहनने पड़ेंगे और आत्मा को बार-बार कपड़े पहनने पड़ते हैं इस मन के कारण बार-बार वह कपड़े खत्म हो जाते हैं खराब हो जाते हो तर जाते हैं फिर दोबारा कपड़े फिर दोबारा कपड़े जिसको हम जन्म मरण कहते हैं आत्मा हमेशा कपड़े बदलती रहती है लेकिन वह वाले कपड़े पहनती है जो मन चाहता है मन में अगर हम हरामखोर इतनी कर ली जानवर बन गया जानवर जैसा देव कर रहा है इंसानी जून में आकर उसको जानवर कपड़े अवश्य मिले अब हमारा जो मन है जब तक प्रभु प्रेम प्रेम में नहीं लग जाता उस अल्लाह खुदा की खोज में नहीं लग जाता तब तक ही आत्मा परमात्मा नहीं हो जाती ऐसी जगह ऐसे जगह में विलीन हो जाती है कि जिसको फिर शरीर की अब जरूरत नहीं है फिर इसको शरीर की जरूरत नहीं फिर इसके जितने भी शरीर है फिर सब इसके वह है परमात्मा जितना भी जरा है जितने भी बदतर हैं जितना भी सब कुछ है पूरा ब्राह्मण कितने ब्राह्मण हैं वह सब कुछ परमात्मा है आत्मा परमात्मा में विलीन होना चाहती है लेकिन मन की वजह से घूमती रहती है फिर से यह बात कह दूं आत्मा जो ऐसी सूक्ष्म शरीर है जो शरीर को संभाले हुए जो शरीर के अंदर शरीर को स्कूल शरीर को रोके हुए हैं उसे आप धन

dekhiye aatma jo hai vaah vaakai me na toh sharir hai na man hai aatma paramatma hone ke liye lekin koi bhi sharir hai usme jo sukshm sharir har jarre me ek sukshm sharir hai jo sharir ko tikaye hue jo sharir ko chalata hai vaah sukshm sharir agar hamara man vichalit nahi ho jaaye toh bhi hamari body khadi rehti hai saans leti rehti hai khoon daudata rehta hai saksham sharir sharir ko jala raha hai usko aatma aur man hai aatma aur sharir ko tikaye hue hain aur jo man hai vaah is aatma ko dur sharir pradan karti arthat jo man hai jaisa hamara vichar hoga waqt aane pe sthool sharir khatam ho jaega aur hamein ek aur fool sharir mil jaega ek aisa sharir hamko mil jaega jo hamare man ke karan milega hamara man jin vicharon me jata hoga aatma ko kaise kapde pahanne padenge aur aatma ko baar baar kapde pahanne padate hain is man ke karan baar baar vaah kapde khatam ho jaate hain kharab ho jaate ho tar jaate hain phir dobara kapde phir dobara kapde jisko hum janam maran kehte hain aatma hamesha kapde badalti rehti hai lekin vaah waale kapde pahanti hai jo man chahta hai man me agar hum haramkhor itni kar li janwar ban gaya janwar jaisa dev kar raha hai insani june me aakar usko janwar kapde avashya mile ab hamara jo man hai jab tak prabhu prem prem me nahi lag jata us allah khuda ki khoj me nahi lag jata tab tak hi aatma paramatma nahi ho jaati aisi jagah aise jagah me vileen ho jaati hai ki jisko phir sharir ki ab zarurat nahi hai phir isko sharir ki zarurat nahi phir iske jitne bhi sharir hai phir sab iske vaah hai paramatma jitna bhi zara hai jitne bhi badataar hain jitna bhi sab kuch hai pura brahman kitne brahman hain vaah sab kuch paramatma hai aatma paramatma me vileen hona chahti hai lekin man ki wajah se ghoomti rehti hai phir se yah baat keh doon aatma jo aisi sukshm sharir hai jo sharir ko sambhale hue jo sharir ke andar sharir ko school sharir ko roke hue hain use aap dhan

देखिए आत्मा जो है वह वाकई में ना तो शरीर है ना मन है आत्मा परमात्मा होने के लिए लेकिन कोई

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