मैं अपनी इच्छाओं को कैसे सम्भालूँ?...


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inderjeet singh

Yoga Trainer

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ऐसे और सवाल
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Dr Anil Shalwa

Life Coach, Past Life Regression Therapist

2:60
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

राकेश ने सवाल किया मैं अपनी इच्छाओं को कैसे संभालूं तो देखी सबसे पहले तो समझने की बात यह है कि अक्सर जिंदगी में ऐसा होता है कि हम बिना सोचे समझे उन चीजों पर काम करना शुरू कर देते हैं जिनका एक्चुली काम करने की जरूरत ही नहीं है अभी इसी सब्जेक्ट की बात करें आपने बोला कि मैं अपनी इच्छाओं को कैसे संभालूं तो पहले सोचने की जरूरत है कि क्या वाकई में इच्छाओं को संभालने की जरूरत है या हमने तो लिफ्ट इसको इतना बड़ा चैलेंज बना लिया है कि वह मेरी इच्छा है बहुत ज्यादा होती हर मुझे से संभालने की जरूरत है सोचने की जरूरत पहले यही कि क्या उनको इच्छा संभालने की जरूरत है अभी की शिक्षा क्या बात कर रहे हैं किसी की इच्छा हो सकती कि भी मुझे खाना बहुत अच्छा लगता है तो ठीक है लाइफ को एंजॉय करो एक बैलेंस हुए मैं आप खाओ इस चीज को होश में रह कर खाओ कि मुझे कितना खाना है क्या खाना है या उसको बड़े इंजॉय कर सकते हैं यह इच्छा हो तो इंसान की जिंदगी में होना जरूरी है इच्छा ही नहीं होगी तो वो तो डेड बॉडी हो जाएगा कि मरा हुआ इंसान ही ऐसा हो सकता है इसके अंदर कोई इच्छा ना हो तो इच्छा को खत्म कर कोई समाधान नहीं है कि वे मे छाई खत्म है अच्छा है आपने बोला अच्छा हूं कैसे संभालूं इंसान इच्छाओं के खत्म होने का मतलब यह है कि इंसान मर गया खत्म हो गया सब इच्छाएं हैं तो इच्छा है तो जिंदगी जीने का तरीका है अगर आप इस वॉइस को भी सुन रहे तो आपकी इच्छा है इसको सुनने के लिए आप सुन ले मेरी इच्छा है सवाल को पढ़कर जवाब देने की इसलिए मैं जवाब दे रहा हूं किसी की इच्छा है कि वह सुबह उठे नीमेश्वर अपने ऑफिस जा अपने स्कूल जाए कॉलेज जैक इच्छा होना जरूरी नहीं होगी तो इंसान खत्म हो गया तो कई बार मैंने जो शुरू में कहा था कि यह समझने की जरूरत है कि हम जिनसे फाइट कर रहे हैं इनसे फाइट करने की जरूरत है क्या यहां पर इच्छाओं को संभालने की जरूरत नहीं है यहां पर बैलेंस क्रिएट करने की जरूरत है एक शाम में पैदा करने की जरूरत है कि एक्सट्रीम में ना जाएं किसी भी चीज के एक्टिंग में न जाएं कोई भी इच्छा जीवन में ऐसी ना छोड़े जिसको आपने पूरा ना किया हो जो आपके दिल में आता है वह हर एक काम को करके देखें पूरे होश में करके देखें एक्सपी में ना जाएं क्योंकि यदि आपने उसे को आज पूरा नहीं किया तो दबी हुई इच्छा रह जाएगी तब प्रेस पर जाएगी आंजना निकलकर कल निकलेगी जो काम आप 18 20 साल की उम्र में कर सकते हैं उसे इच्छा को आपने दवा दिया तो यह काम आप 60 साल की उम्र में जाकर करेंगे जो काम और 40 साल की उम्र में कर सकते हो आपने अभी नहीं करा तो आप 7 साल की उम्र में जाकर करेंगे अदर वाइज आपको फ्रस्ट्रेशन होगा कि मैंने अपनी जिंदगी जी नहीं और मैं तो घुट घुट के मर तारा अपनी इच्छाओं को डेफिनिटी पूरा करें लेकिन लिमिट में लिमिट में मतलब कि इस चीज को समझें कि क्या मेरी लिमिट है कहां तक मुझे जाना है एक्सट्रीम में ना जाएं और अपनी लाइफ को एंजॉय करें इच्छा के बिना तो जीवन ही नहीं है तो इस चीज को इस तरीके से नेगेटिव तरीके से ना लें कि मुझे सारी अपनी इच्छाएं खत्म करनी है इच्छाओं को इंजॉय करें होश में रहे बैलेंस रहें अगर आपकी इच्छा होती है कि आपको लगता है कि मूवी देखना है आपको तो ठीक है डिसाइड कीजिए कि मुझे मंथ में एक मूवी देखना है और मूवी देखने चाहिए आप थैंक यू वेरी मच

rakesh ne sawaal kiya main apni ikchao ko kaise sambhalun toh dekhi sabse pehle toh samjhne ki baat yah hai ki aksar zindagi mein aisa hota hai ki hum bina soche samjhe un chijon par kaam karna shuru kar dete hain jinka ekchuli kaam karne ki zarurat hi nahi hai abhi isi subject ki baat kare aapne bola ki main apni ikchao ko kaise sambhalun toh pehle sochne ki zarurat hai ki kya vaakai mein ikchao ko sambhalne ki zarurat hai ya humne toh lift isko itna bada challenge bana liya hai ki vaah meri iccha hai bahut zyada hoti har mujhe se sambhalne ki zarurat hai sochne ki zarurat pehle yahi ki kya unko iccha sambhalne ki zarurat hai abhi ki shiksha kya baat kar rahe hain kisi ki iccha ho sakti ki bhi mujhe khana bahut accha lagta hai toh theek hai life ko enjoy karo ek balance hue main aap khao is cheez ko hosh mein reh kar khao ki mujhe kitna khana hai kya khana hai ya usko bade enjoy kar sakte hain yah iccha ho toh insaan ki zindagi mein hona zaroori hai iccha hi nahi hogi toh vo toh dead body ho jaega ki mara hua insaan hi aisa ho sakta hai iske andar koi iccha na ho toh iccha ko khatam kar koi samadhan nahi hai ki ve mein chhai khatam hai accha hai aapne bola accha hoon kaise sambhalun insaan ikchao ke khatam hone ka matlab yah hai ki insaan mar gaya khatam ho gaya sab ichhaen hain toh iccha hai toh zindagi jeene ka tarika hai agar aap is voice ko bhi sun rahe toh aapki iccha hai isko sunne ke liye aap sun le meri iccha hai sawaal ko padhakar jawab dene ki isliye main jawab de raha hoon kisi ki iccha hai ki vaah subah uthe nimeshwar apne office ja apne school jaaye college jack iccha hona zaroori nahi hogi toh insaan khatam ho gaya toh kai baar maine jo shuru mein kaha tha ki yah samjhne ki zarurat hai ki hum jinse fight kar rahe hain inse fight karne ki zarurat hai kya yahan par ikchao ko sambhalne ki zarurat nahi hai yahan par balance create karne ki zarurat hai ek shaam mein paida karne ki zarurat hai ki extreme mein na jaye kisi bhi cheez ke acting mein na jaye koi bhi iccha jeevan mein aisi na chode jisko aapne pura na kiya ho jo aapke dil mein aata hai vaah har ek kaam ko karke dekhen poore hosh mein karke dekhen XP mein na jaye kyonki yadi aapne use ko aaj pura nahi kiya toh dabi hui iccha reh jayegi tab press par jayegi anjana nikalkar kal nikalegi jo kaam aap 18 20 saal ki umr mein kar sakte hain use iccha ko aapne dawa diya toh yah kaam aap 60 saal ki umr mein jaakar karenge jo kaam aur 40 saal ki umr mein kar sakte ho aapne abhi nahi kara toh aap 7 saal ki umr mein jaakar karenge other wise aapko frustration hoga ki maine apni zindagi ji nahi aur main toh ghut ghut ke mar tara apni ikchao ko definiti pura kare lekin limit mein limit mein matlab ki is cheez ko samajhe ki kya meri limit hai kahaan tak mujhe jana hai extreme mein na jaye aur apni life ko enjoy kare iccha ke bina toh jeevan hi nahi hai toh is cheez ko is tarike se Negative tarike se na le ki mujhe saree apni ichhaen khatam karni hai ikchao ko enjoy kare hosh mein rahe balance rahein agar aapki iccha hoti hai ki aapko lagta hai ki movie dekhna hai aapko toh theek hai decide kijiye ki mujhe month mein ek movie dekhna hai aur movie dekhne chahiye aap thank you very match

राकेश ने सवाल किया मैं अपनी इच्छाओं को कैसे संभालूं तो देखी सबसे पहले तो समझने की बात यह ह

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DR. MANISH

MULTI TASKER & DR.M.D (A.M.), B-PHARMA, PGDM-M

2:14
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखो शाम को संभालने के 2 तरीके होते हैं सबसे पहली बात पर दो सबसे आसान तरीका है जो भी तुम्हारी इच्छा है उसके पूरे करते तुम्हारी इच्छा का इच्छा शादी करनी शादी कर लो तुम्हारी इच्छा के जीबी रोड पर जाना है तुम्हारी इच्छा सोनागाछी जाना है तुम्हारी इच्छा दारू पीनी है और इच्छा बकरी मुर्गी खाने तुम्हारी इच्छा शुद्ध सात्विक भोजन करना है तुम्हारी इच्छा गरीबों को दान करना है हमारी इच्छा है मंदिर में भंडारा लगाना है जो तुम्हारी इच्छा कर लो इच्छा को रोका मंत्र एक समय ऐसा आएगा सारी इच्छाएं तिरोहित हो जाएंगी कोई भी इच्छा शेष नहीं बचेगी दूसरी बात अगर तुम्हारे पास साधन संसाधन नहीं हैं परीक्षाओं को कंट्रोल करने के लिए जैसे सूर्य भगवान के रथ में सात घोड़े होते हैं और सात घोड़ों के साथ राशि होती है जो सूर्य भगवान उनके साथ में रहती है ऐसे तुम्हारी इच्छा जागृत होती है इनको रास्ते रस्सी से बांध लो और जो धीरे-धीरे जवाब याद करोगे तो कि जैसे तुम जिम्मेदार थे पहले दिन 100 किलो लोहा नहीं उठाते हो पहले पांच 10 किलो 20 किलो 30 किलो धीरे अभ्यास करते अगर तुम सोच ले तो पहुंचते ऐसे ही जब तुम यह करोगे आप जांच करो अपनी इच्छाओं को सीमित करने का यूज करने का कंट्रोल करने का दूसरी बात जो भी तुम्हारी इच्छा जागृत होती है चाय अच्छी अच्छा है तो बोला ना मुझे बताने के लिए थे ना अपने परिवार को ना दोस्तों को ना सामाजिक इच्छा जागृत होती है जो कॉपी पर लिखते चलो डेट बाय डेट डेट बाय डेट और को शाम को रात को पर दो तो इतनी सारी बकवास है इनका कोई जीवन अनमोल नहीं है यह सब बकवास है कुछ सार्थक इसमें इच्छा है ही नहीं इससे भी तुम्हारी इच्छा इन तिरोहित हो जाएंगी तेरी मेरी बातें बड़ी अशांति लगेंगे इस सिंपल सी लगेगी क्योंकि मैं हूं इस चीज में एक्सपर्ट के मुश्किल काम को आसान तरीके से करा देता हूं पता भी नहीं चलता और इलाज कर देता हूं धन्यवाद जय हिंद साधुवाद

dekho shaam ko sambhalne ke 2 tarike hote hain sabse pehli baat par do sabse aasaan tarika hai jo bhi tumhari iccha hai uske poore karte tumhari iccha ka iccha shaadi karni shaadi kar lo tumhari iccha ke gb road par jana hai tumhari iccha sonagachi jana hai tumhari iccha daaru peeni hai aur iccha bakri murgi khane tumhari iccha shudh Satvik bhojan karna hai tumhari iccha garibon ko daan karna hai hamari iccha hai mandir me bhandara lagana hai jo tumhari iccha kar lo iccha ko roka mantra ek samay aisa aayega saari ichhaen tirohit ho jayegi koi bhi iccha shesh nahi bachegi dusri baat agar tumhare paas sadhan sansadhan nahi hain parikshao ko control karne ke liye jaise surya bhagwan ke rath me saat ghode hote hain aur saat ghodon ke saath rashi hoti hai jo surya bhagwan unke saath me rehti hai aise tumhari iccha jagrit hoti hai inko raste rassi se bandh lo aur jo dhire dhire jawab yaad karoge toh ki jaise tum zimmedar the pehle din 100 kilo loha nahi uthate ho pehle paanch 10 kilo 20 kilo 30 kilo dhire abhyas karte agar tum soch le toh pahunchate aise hi jab tum yah karoge aap jaanch karo apni ikchao ko simit karne ka use karne ka control karne ka dusri baat jo bhi tumhari iccha jagrit hoti hai chai achi accha hai toh bola na mujhe batane ke liye the na apne parivar ko na doston ko na samajik iccha jagrit hoti hai jo copy par likhte chalo date bye date date bye date aur ko shaam ko raat ko par do toh itni saari bakwas hai inka koi jeevan anmol nahi hai yah sab bakwas hai kuch sarthak isme iccha hai hi nahi isse bhi tumhari iccha in tirohit ho jayegi teri meri batein badi ashanti lagenge is simple si lagegi kyonki main hoon is cheez me expert ke mushkil kaam ko aasaan tarike se kara deta hoon pata bhi nahi chalta aur ilaj kar deta hoon dhanyavad jai hind sadhuwaad

देखो शाम को संभालने के 2 तरीके होते हैं सबसे पहली बात पर दो सबसे आसान तरीका है जो भी तुम्ह

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Narendra Bhardwaj

Spirituality Reformer

2:05
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अपनी इच्छा को कैसे संभाल लूं इच्छा है तो आनंद है जितनी कम होंगी संभल जाएंगे ज्यादा होगी बिखर जाएंगे इच्छा है तो एक के बाद एक एक के बाद एक आते जाते रहते हैं पूरे जीवन भर आदमी छम मैं तो मरता है एक इच्छा पूरी हुई दूसरी खड़ी है दूसरी पूरी हुई तीसरी कड़ी तीसरे क्रम कभी खत्म नहीं होता भौतिक जीवन का आधार ही इच्छा है जब बच्चा बड़ा होता तो कहता है छोटा होता है तो कहता बड़े होकर ही बनूंगा जब बड़ा हो जाता तो जब वह बन जाता है तो किताब शादी हो जाए तो एक शादी हो गई तो कुत्ता बच्चे आ जाए तभी करूंगा जब बच्चे हो गए सोचता है कि बच्चों की शादी करूं तेरे को बच्चों की शादी हो जाए तो सोचता है नाती पोते हो गया तभी करूंगा जिंदगी मुट्ठी में रेत की तरह से चलती है आती है कभी खत्म नहीं होती इसलिए इच्छाओं को मारने के लिए जो किया जा सके वह गाना चाहिए भगवान कृष्ण ने तो यहां तक कहा है जब कर्म की बात आएगी कर्म क्या है तो भगवान श्रीकृष्ण बोले इच्छाओं को त्यागने के नियमित किए जाने वाले कार्य को कर्म कहते हैं तो कर्म इच्छाओं को त्यागना ही कर्म है ड्यूटी जाना ऑफिस पर काम करना है घर कर्म है यह जीवन निर्वाह के कर्म जीवन के जो वास्तविक कर्म है जो लक्ष्य की पूर्ति कर आते हैं वह तो इच्छा को त्यागना ही है इच्छाएं अनंत है यह कभी पूर्ति नहीं कर सकते यह जीवन छोटा पड़ जाएगा इच्छाएं कभी नहीं मरेंगे इसलिए इच्छाओं को संभालने का सबसे अच्छा लिखा है कम से कम इच्छाएं रखें धन्यवाद

apni iccha ko kaise sambhaal loon iccha hai toh anand hai jitni kam hongi sambhal jaenge zyada hogi bikhar jaenge iccha hai toh ek ke baad ek ek ke baad ek aate jaate rehte hain poore jeevan bhar aadmi cham main toh marta hai ek iccha puri hui dusri khadi hai dusri puri hui teesri kadi teesre kram kabhi khatam nahi hota bhautik jeevan ka aadhar hi iccha hai jab baccha bada hota toh kahata hai chota hota hai toh kahata bade hokar hi banunga jab bada ho jata toh jab vaah ban jata hai toh kitab shaadi ho jaaye toh ek shaadi ho gayi toh kutta bacche aa jaaye tabhi karunga jab bacche ho gaye sochta hai ki baccho ki shaadi karu tere ko baccho ki shaadi ho jaaye toh sochta hai nati pote ho gaya tabhi karunga zindagi mutthi me ret ki tarah se chalti hai aati hai kabhi khatam nahi hoti isliye ikchao ko maarne ke liye jo kiya ja sake vaah gaana chahiye bhagwan krishna ne toh yahan tak kaha hai jab karm ki baat aayegi karm kya hai toh bhagwan shrikrishna bole ikchao ko tyaagane ke niyamit kiye jaane waale karya ko karm kehte hain toh karm ikchao ko tyagna hi karm hai duty jana office par kaam karna hai ghar karm hai yah jeevan nirvah ke karm jeevan ke jo vastavik karm hai jo lakshya ki purti kar aate hain vaah toh iccha ko tyagna hi hai ichhaen anant hai yah kabhi purti nahi kar sakte yah jeevan chota pad jaega ichhaen kabhi nahi marenge isliye ikchao ko sambhalne ka sabse accha likha hai kam se kam ichhaen rakhen dhanyavad

अपनी इच्छा को कैसे संभाल लूं इच्छा है तो आनंद है जितनी कम होंगी संभल जाएंगे ज्यादा होगी बि

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ज्योतिषी झा मेरठ (Pt. K L Shashtri)

Astrologer Jhaमेरठ,झंझारपुर और मुम्बई

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Subrat Kar

Tax , Project , Consultant, Spiritual Guru

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जब आप इस दुनिया को होकर आनंद होने की जा के रूप में देखते हैं इच्छाओं के प्रभाव में इस दुनिया का गुलाम होंगे जीवन भर हम अपनी इच्छाओं को पूरी करने के लिए उदासीन प्रयास करते हैं क्या मैं पूर्णता भेजे जाएं एक बड़ी कतार में हैं किसी ऐसे सेक्स के बारे में आती है जो अन्य है जो हम नहीं हैं जहां वो के लिए उपयोग करते हैं आपको इच्छाएं छोड़ने की जरूरत नहीं है तब संभव होगा जब आपके दृष्टिकोण में बदलाव आएगा ज्ञान में परिपक्वता ने पर दृष्टिकोण में परिवर्तन होने पर किसी भी चीज के लिए संघर्ष करना नहीं पड़ेगा

jab aap is duniya ko hokar anand hone ki ja ke roop mein dekhte hain ikchao ke prabhav mein is duniya ka gulam honge jeevan bhar hum apni ikchao ko puri karne ke liye udasin prayas karte kya main purnata bheje jayen ek badi katar mein hain kisi aise sex ke bare mein aati hai jo anya hai jo hum nahi hain jaha vo ke liye upyog karte hain aapko ichhaen chodne ki zarurat nahi hai tab sambhav hoga jab aapke drishtikon mein badlav aayega gyaan mein paripakvata ne par drishtikon mein parivartan hone par kisi bhi cheez ke liye sangharsh karna nahi padega

जब आप इस दुनिया को होकर आनंद होने की जा के रूप में देखते हैं इच्छाओं के प्रभाव में इस दुनि

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Manish Sharma

Hypnotherapist and Founder, SecondSightIndia

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कंसंट्रेशन बढ़ाइए पढ़ाई पर ध्यान कीजिए और सल्फर फॉरमेशन दीजिए मैं अपने माइंड पर कंट्रोल करता हूं या फिर मैं सुन बार-बार बोलते रही है सोते समय उठते समय आपकी इच्छाओं पर आपको कब हुआ जाएगा

kansantreshan badhaiye padhai par dhyan kijiye aur sulphur formation dijiye main apne mind par control karta hoon ya phir main sun baar baar bolte rahi hai sote samay uthte samay aapki ikchao par aapko kab hua jaega

कंसंट्रेशन बढ़ाइए पढ़ाई पर ध्यान कीजिए और सल्फर फॉरमेशन दीजिए मैं अपने माइंड पर कंट्रोल क

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Dr Sampadananda Mishra

Sanskrit scholar, Author, Director, Sri Aurobindo Foundation for Indian Culture

3:49
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हम हमारी इच्छाओं के ऊपर किस नियंत्रण ला सकते हैं और हमारी इच्छाएं क्या होती है तमाम को समझना पड़ेगा उसकी इच्छाएं कहां से आते हैं तो एक आध्यात्मिक दृष्टि से हम खुद कुछ करोगे तो हम जान पाएंगे कि हमारी हम हमेशा एक ही तो कहते हैं हमारी परछाई होती है कि बाहरी बाहरी चेतना में स्थित होते हैं जो पंच इंद्रिय विषयों के प्रति आसक्ति होते हैं औषधि निरीक्षक जीता में इसलिए हमको कहा गया है कि जब तक हम हमारी चेतना में स्थित रहते हैं हम हमारे खुद के शत्रु हैं जब हम हमारे आंसर कितना में रहते हैं हम हमारे खुद के मित्र हैं तो यह बाहरी चेतना से हमको खुद को भी करना पड़ेगा अंतर कितना में हमको जाना पड़ेगा कुछ करेक्शन करवाने के माध्यम से ही बच्चा करना पड़ा पड़ेगा निगार सुल्ताना की बात है हमारे हमारे हमारे अंदर जो हमारे लिए सारी उम्र को काबू में एक होकर हमारे अंदर की ओर देखें जो आत्मा रूपी अग्नि हमारे हृदय में प्रज्जवलित है उसके प्रति ध्यान आकर्षित करें और अंडे इसके लिए बहुत प्यार करते हुए योग योग योग के माध्यम से हम हमको बाहरी चेतना से मुक्त कर के अंदर के मूर्ति से कितनी बार तुम्हारा मन होता है उसके अंदर की ओर खींच के अंदर अंदर इच्छाओं पर काबू ला सकते बढ़ता से खुद को मुक्त करते

hum hamari ikchao ke upar kis niyantran la sakte hai aur hamari ichhaen kya hoti hai tamaam ko samajhna padega uski ichhaen kahaan se aate hai toh ek aadhyatmik drishti se hum khud kuch karoge toh hum jaan payenge ki hamari hum hamesha ek hi toh kehte hai hamari parchai hoti hai ki bahri baahri chetna mein sthit hote hai jo punch indriya vishyon ke prati aasakti hote hai aushadhi nirikshak jita mein isliye hamko kaha gaya hai ki jab tak hum hamari chetna mein sthit rehte hai hum hamare khud ke shatru hai jab hum hamare answer kitna mein rehte hai hum hamare khud ke mitra hai toh yah bahri chetna se hamko khud ko bhi karna padega antar kitna mein hamko jana padega kuch correction karwane ke madhyam se hi baccha karna pada padega nigar sultana ki baat hai hamare hamare hamare andar jo hamare liye saree umr ko kabu mein ek hokar hamare andar ki aur dekhen jo aatma rupee agni hamare hriday mein prajjavalit hai uske prati dhyan aakarshit kare aur ande iske liye bahut pyar karte hue yog yog yog ke madhyam se hum hamko bahri chetna se mukt kar ke andar ke murti se kitni baar tumhara man hota hai uske andar ki aur khinch ke andar andar ikchao par kabu la sakte badhta se khud ko mukt karte

हम हमारी इच्छाओं के ऊपर किस नियंत्रण ला सकते हैं और हमारी इच्छाएं क्या होती है तमाम को समझ

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इच्छाएं अनंत होती है मन चंचल होता है अतः अपनी इच्छाओं और मन पर इंद्रियों पर काबू करना बहुत कठिन होता है इसके लिए कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है और इच्छा है तो हमारी अनंत है उनको पूर्ण करना या उनको संभालना कठिन होता है

ichhaen anant hoti hai man chanchal hota hai atah apni ikchao aur man par indriyon par kabu karna bahut kathin hota hai iske liye kadi mehnat ki avashyakta hoti hai aur iccha hai toh hamari anant hai unko purn karna ya unko sambhaalna kathin hota hai

इच्छाएं अनंत होती है मन चंचल होता है अतः अपनी इच्छाओं और मन पर इंद्रियों पर काबू करना बहुत

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Dinesh Mishra

Theosophists | Accountant

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैं अपनी इच्छाओं को कैसे संभालूं देखिए इंसान की जरूरत छाए हैं वह अनंत हुआ करती हैं और इच्छाओं की पूर्ति कर पाना हर किसी के बात नहीं हुआ करती है किसी जाति आपने पूछा कि उसके बाद में दूसरी इच्छा प्रबल हो जाया करती है ऐसे समय में यह आपको देखना होगा कि ना कभी किसी की इच्छाएं सभी पूरी हो सकी है और ना होना अतः आप एग्जाम की तरफ से ध्यान हटाकर की आवश्यकता ओं की तरफ ध्यान देने का कष्ट करें और जो प्राथमिक आवश्यकता है उसकी पूर्ति के लिए प्रश्न करें और एक चाय जो हैं वह यह देखे हैं उन इच्छाओं में भी आप चयन करें मन जो है निरंतर इच्छाओं की लिए अग्रसर रहता है अब इन इच्छाओं पर नियंत्रण कैसे किया जाए उसके लिए आपको विचार करना पड़ेगा मन को संयमित करके आप अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रख सकते हैं यदि आप मन को संयमित कर लेंगे तो एक चाय चौथा है समाप्त तो नहीं होंगी लेकिन कम हो जाएंगे और उसमें यह भी चयन करें कि कौन सी झा नीतिगत है और कौन सी एक चाय अनीता थी जो नीच मान इच्छाएं हैं पर भी आप विचार करें और उनकी मूर्तियों का ध्यान देवें और यद्यपि मूर्तियां सीमित करें एक इच्छा के बाद में दूसरी चाय जागृत होंगी और दूसरी की बाद में तीसरी यह सिलसिला अनवरत चलता रहेगा जैसे किसी के पास में धन होता है तो वह धन को बे करने में उसको कष्ट होता है या दुख होता है और उस धन को वॉइस अंग्रेज करने की उसकी इच्छाएं हुआ करती हैं और धन संग्रह हो जाए ज्यादा से ज्यादा धन संग्रह हो जाए इसी प्रकार एक शाम का सिलसिला है कि आपकी आपने सोचा कि वह पूर्ति हो गई है दूसरी इच्छा है आपकी प्रबल होती जाएंगे जैसे जैसे आप एक इच्छाओं को प्राप्त करेंगे उस शिक्षा से आपका मन भर जाएगा और फिर दूसरी इच्छा के लिए मन जागृत हो जाएगा अतः आप इसकी तरफ मन को हटाकर की आवश्यकताओं की तरफ ध्यान दें जो आवश्यकता के लिए हो आपके परिवार के लिए हो उस आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते हुए उसकी पूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास करें और आवश्यकताओं की पूर्ति पर आपको संतोष भी होगा मन भी प्रसन्न चित्त रहेगा यद्यपि इच्छाओं और आवश्यकताओं में अंतर हुआ करता है इच्छाएं अनंत होती है और आवश्यकता जरूरी हो जाया करती है यह अंतर है इच्छाओं और आवश्यकताओं में आता या श्राद्ध अभियान है या जो आपका उद्देश्य है औषध उद्देश्य की पूर्ति के लिए आप यदि आवश्यकताएं हैं आपकी स्वयं की आवश्यकताएं हो आपकी पत्नी की हो या बच्चों को बच्चों की हो उसमें आप प्राथमिकता देवें और उनकी पूर्ति करने का प्रति करें लेकिन इच्छाओं की तरफ मन को यदि जाता हो तो आप सहमत करके अपनी इच्छाओं को संभाल सकते हैं अपनी इच्छाओं को सीमित कर सकते हैं यही मेरा कथन है और यही मेरे विचार हैं धन्यवाद

main apni ikchao ko kaise sambhalun dekhiye insaan ki zarurat chay hain vaah anant hua karti hain aur ikchao ki purti kar paana har kisi ke baat nahi hua karti hai kisi jati aapne poocha ki uske baad mein dusri iccha prabal ho jaya karti hai aise samay mein yah aapko dekhna hoga ki na kabhi kisi ki ichhaen sabhi puri ho saki hai aur na hona atah aap exam ki taraf se dhyan hatakar ki avashyakta on ki taraf dhyan dene ka kasht kare aur jo prathmik avashyakta hai uski purti ke liye prashna kare aur ek chai jo hain vaah yah dekhe hain un ikchao mein bhi aap chayan kare man jo hai nirantar ikchao ki liye agrasar rehta hai ab in ikchao par niyantran kaise kiya jaaye uske liye aapko vichar karna padega man ko sanyamit karke aap apni ikchao par niyantran rakh sakte hain yadi aap man ko sanyamit kar lenge toh ek chai chautha hai samapt toh nahi hongi lekin kam ho jaenge aur usme yah bhi chayan kare ki kaun si jha nitigat hai aur kaun si ek chai anita thi jo neech maan ichhaen hain par bhi aap vichar kare aur unki murtiyon ka dhyan deven aur yadyapi murtiya simit kare ek iccha ke baad mein dusri chai jagrit hongi aur dusri ki baad mein teesri yah silsila anvarat chalta rahega jaise kisi ke paas mein dhan hota hai toh vaah dhan ko be karne mein usko kasht hota hai ya dukh hota hai aur us dhan ko voice angrej karne ki uski ichhaen hua karti hain aur dhan sangrah ho jaaye zyada se zyada dhan sangrah ho jaaye isi prakar ek shaam ka silsila hai ki aapki aapne socha ki vaah purti ho gayi hai dusri iccha hai aapki prabal hoti jaenge jaise jaise aap ek ikchao ko prapt karenge us shiksha se aapka man bhar jaega aur phir dusri iccha ke liye man jagrit ho jaega atah aap iski taraf man ko hatakar ki avashayaktaon ki taraf dhyan de jo avashyakta ke liye ho aapke parivar ke liye ho us avashayaktaon ko prathamikta dete hue uski purti sunishchit karne ka prayas kare aur avashayaktaon ki purti par aapko santosh bhi hoga man bhi prasann chitt rahega yadyapi ikchao aur avashayaktaon mein antar hua karta hai ichhaen anant hoti hai aur avashyakta zaroori ho jaya karti hai yah antar hai ikchao aur avashayaktaon mein aata ya shraddh abhiyan hai ya jo aapka uddeshya hai awasadhi uddeshya ki purti ke liye aap yadi aavashyakataen hain aapki swayam ki aavashyakataen ho aapki patni ki ho ya baccho ko baccho ki ho usme aap prathamikta deven aur unki purti karne ka prati kare lekin ikchao ki taraf man ko yadi jata ho toh aap sahmat karke apni ikchao ko sambhaal sakte hain apni ikchao ko simit kar sakte hain yahi mera kathan hai aur yahi mere vichar hain dhanyavad

मैं अपनी इच्छाओं को कैसे संभालूं देखिए इंसान की जरूरत छाए हैं वह अनंत हुआ करती हैं और इच्छ

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इच्छाओं को संभालने का तरीका हमारे धर्म शास्त्रों में कहा गया है मन एव मनुष्याणां कारण बंद मोक्ष योग इच्छाएं मन के पेट से उत्पन्न होती हैं और मन मन की गति अनंत है जब तक मनुष्य अपने मन में नियंत्रण नहीं पा लेता तब तक इच्छाओं का जो परवाह है वह शांत होने वाला नहीं है इच्छाओं को संभालने के लिए मनुष्य को सबसे पहले योग चित्त वृत्ति निरोध परमात्मा न्यूज़ को संभालने का तरीका बताया है जब हम लोग का मतलब होता है मिलना अपने को स्वयं से स्वयं को परमात्मा से जब हम मिलान मिलाने का प्रयास करते हैं या मिलाते हैं तो एक युवक की उत्पन्न होती है और वह जो योग है वह हर प्रकार की इच्छाओं को शांत करने में समर्थ है कृष्ण परमात्मा ने अगर आपको इच्छाओं को संभालने की आप चाहते हैं कि आप एक शाम को संभाले नियंत्रित करें संभालने का मतलब है नियंत्रित करना अगर आप अपनी इच्छाओं को नियंत्रित करना चाहते हैं तो आप भगवत गीता पढ़ें और भगवत गीता में कृष्ण परमात्मा के द्वारा बताए गए मार्ग से ही आप इच्छाओं को नियंत्रित कर सकते हैं इच्छाओं से रहित होने का मतलब कामना रहित हो जाना और कामना रहित तभी हो सकता है जो मनुष्य स्वयं को परमात्मा में मिला दे ईश्वरी सत्ता के प्रति समर्पित हो जाए तो निश्चित रूप से व्हिस्की चाय स्वयं ही नियंत्रित हो जाएंगी और उसकी इच्छा सोते हैं समझ जाए नहीं 56 रही होगी ऑफिशल इच्छा उन पर ध्यान नहीं जाएगा और सारा चिंतन ईश्वर की सत्ता की तरफ हमारा बढ़ता चला जाएगा इस प्रकार इच्छा है संबंधी चली जाएगी

ikchao ko sambhalne ka tarika hamare dharm shastron me kaha gaya hai man ev manushyanan karan band moksha yog ichhaen man ke pet se utpann hoti hain aur man man ki gati anant hai jab tak manushya apne man me niyantran nahi paa leta tab tak ikchao ka jo parvaah hai vaah shaant hone vala nahi hai ikchao ko sambhalne ke liye manushya ko sabse pehle yog chitt vriti nirodh paramatma news ko sambhalne ka tarika bataya hai jab hum log ka matlab hota hai milna apne ko swayam se swayam ko paramatma se jab hum milaan milaane ka prayas karte hain ya milaate hain toh ek yuvak ki utpann hoti hai aur vaah jo yog hai vaah har prakar ki ikchao ko shaant karne me samarth hai krishna paramatma ne agar aapko ikchao ko sambhalne ki aap chahte hain ki aap ek shaam ko sambhale niyantrit kare sambhalne ka matlab hai niyantrit karna agar aap apni ikchao ko niyantrit karna chahte hain toh aap bhagwat geeta padhen aur bhagwat geeta me krishna paramatma ke dwara bataye gaye marg se hi aap ikchao ko niyantrit kar sakte hain ikchao se rahit hone ka matlab kamna rahit ho jana aur kamna rahit tabhi ho sakta hai jo manushya swayam ko paramatma me mila de ISHWARI satta ke prati samarpit ho jaaye toh nishchit roop se whiskey chai swayam hi niyantrit ho jayegi aur uski iccha sote hain samajh jaaye nahi 56 rahi hogi official iccha un par dhyan nahi jaega aur saara chintan ishwar ki satta ki taraf hamara badhta chala jaega is prakar iccha hai sambandhi chali jayegi

इच्छाओं को संभालने का तरीका हमारे धर्म शास्त्रों में कहा गया है मन एव मनुष्याणां कारण बंद

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जहां आपने मैं शब्द बोला वही इच्छाओं को संभालना समझ लिए शुरू हो गया यह मैं शब्द आपके नाम का नहीं है यह मैसेज उसका ना उसका है जो अंदर से बोल रहा है क्या आप अपने हाथ को मैं बोलते हैं यासिर को मैं बोलते हैं आपको बोलते हैं शरीर को बोलते हैं नहीं जब आपका सिर दुख रहा हो तो आपको बोलना पड़ता हाथ दुख रहा पेट दुख रहा है परंतु जब मैं बीमार हूं या मैं अपनी इच्छाओं को नियंत्रण करना चाहता हूं तो इस आत्मा की बात करते हैं या कई लोग उसको मांगते आत्मा नहीं मानते तो मन या माइंड को संभालना पड़ता है मन को संभालने के लिए हमें किसी ने किसी का सहारा लेना पड़ेगा चाहे वह उसका नाम ओपन ईश्वर दो चाहे अपन उसको परम शक्तिमान ले उसको ध्यान में रखते हुए और आदर्श तक को सामने रखते हुए जब कोई कार्य कर रहे हो तो मन जो है मन आपको दो तरह के विचार आते हैं क्या करना है या नहीं करना है तो मन होता वह सदैव अच्छी भावना रखता है और जो दूसरे प्रकार के विकार होते हैं वह हमें दूसरी तरफ धकेला चाहते हैं मन की बात सुनना पड़ेगी जो आत्मा से निकलती है तो हम अपने आप में इंसान को समाचार इच्छाओं को संभाल पाएंगे आशा को पोस्ट पसंद आई धन्यवाद

jaha aapne main shabd bola wahi ikchao ko sambhaalna samajh liye shuru ho gaya yah main shabd aapke naam ka nahi hai yah massage uska na uska hai jo andar se bol raha hai kya aap apne hath ko main bolte hain yasir ko main bolte hain aapko bolte hain sharir ko bolte hain nahi jab aapka sir dukh raha ho toh aapko bolna padta hath dukh raha pet dukh raha hai parantu jab main bimar hoon ya main apni ikchao ko niyantran karna chahta hoon toh is aatma ki baat karte hain ya kai log usko mangate aatma nahi maante toh man ya mind ko sambhaalna padta hai man ko sambhalne ke liye hamein kisi ne kisi ka sahara lena padega chahen vaah uska naam open ishwar do chahen apan usko param shaktiman le usko dhyan me rakhte hue aur adarsh tak ko saamne rakhte hue jab koi karya kar rahe ho toh man jo hai man aapko do tarah ke vichar aate hain kya karna hai ya nahi karna hai toh man hota vaah sadaiv achi bhavna rakhta hai aur jo dusre prakar ke vikar hote hain vaah hamein dusri taraf dhakela chahte hain man ki baat sunana padegi jo aatma se nikalti hai toh hum apne aap me insaan ko samachar ikchao ko sambhaal payenge asha ko post pasand I dhanyavad

जहां आपने मैं शब्द बोला वही इच्छाओं को संभालना समझ लिए शुरू हो गया यह मैं शब्द आपके नाम का

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Ramandeep Singh

Waheguru industry

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देखिए इन इच्छाओं को खत्म करना इतना आसान नहीं है इतना सरल नहीं है इसको एक ही तरीका है इच्छाओं को खत्म करने का या इच्छाओं को शांत करने का इच्छा ईशांत मतलब मन शांत उसका सिर्फ क्या तरीका है आप फकीर हो जाओ ऐसे फकीर इस दुनिया में भी रहो दुनिया की सेवा भी करो सही गलत का आपको पता भी हो लेकिन अपने फर्ज निभाना शुरू पर अपने फर्ज निभाओ मां के साथ हर पिता के साथ फर्ज और हर वक्त तुम्हें प्रभु चरणों का गुणगान करना है उसके अंदर ही नतमस्तक करना है उस परमात्मा में विलीन होना शुरू हो जाओ जैसे जैसे तुम मुसल्ला उसको दा उस वाहेगुरु के अंदर विलीन होना शुरू हो जाओगे वैसे वैसे तुम्हारा मन शांत होना शुरू हो जाएगा और जैसे जैसे तुम विलीन होकर परमात्मा हो जाओगे यानी तुम भगवान खुद बन जाओगे जो जिंदा जी भक्त पूर्ण हो गया जो जिंदा जी फकीर पूर्ण हो गया प्रभु के जिसने दर्शन कर लिए वह इंसान की सभी इच्छाएं खत्म हो जाती मन शांत हो जाता है फिर संसार में कोई लेना-देना नहीं सिर्फ तो सिर्फ जो कर्म है कौन से क्रम कि हमने अपने जिस जगह पर हैं पड़ोसियों के साथ देश के साथ मां के साथ किसी के भी साथ हमने कौन सा फर्ज निभाना है वह फर्ज निभाना फिर शुरू हो जाता है प्यार परमात्मा से हो जाता है फर्ज इंसानियत सो जाता है हम इंसान जॉनी में आए हैं तो अपने फर्ज पूरे करके चले जाएंगे बात खत्म हो गई

dekhiye in ikchao ko khatam karna itna aasaan nahi hai itna saral nahi hai isko ek hi tarika hai ikchao ko khatam karne ka ya ikchao ko shaant karne ka iccha ishant matlab man shaant uska sirf kya tarika hai aap fakir ho jao aise fakir is duniya me bhi raho duniya ki seva bhi karo sahi galat ka aapko pata bhi ho lekin apne farz nibhana shuru par apne farz nibhao maa ke saath har pita ke saath farz aur har waqt tumhe prabhu charno ka gunagan karna hai uske andar hi natamastak karna hai us paramatma me vileen hona shuru ho jao jaise jaise tum musalla usko the us vaheguru ke andar vileen hona shuru ho jaoge waise waise tumhara man shaant hona shuru ho jaega aur jaise jaise tum vileen hokar paramatma ho jaoge yani tum bhagwan khud ban jaoge jo zinda ji bhakt purn ho gaya jo zinda ji fakir purn ho gaya prabhu ke jisne darshan kar liye vaah insaan ki sabhi ichhaen khatam ho jaati man shaant ho jata hai phir sansar me koi lena dena nahi sirf toh sirf jo karm hai kaun se kram ki humne apne jis jagah par hain padoshiyon ke saath desh ke saath maa ke saath kisi ke bhi saath humne kaun sa farz nibhana hai vaah farz nibhana phir shuru ho jata hai pyar paramatma se ho jata hai farz insaniyat so jata hai hum insaan Jonny me aaye hain toh apne farz poore karke chale jaenge baat khatam ho gayi

देखिए इन इच्छाओं को खत्म करना इतना आसान नहीं है इतना सरल नहीं है इसको एक ही तरीका है इच्छा

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Vyakaranacharya SANJAY Chandigarh

sanskrit / Hindi Teacher

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प्रश्न में अपनी इच्छाओं को कैसे संभालूं मनुष्य एक ऐसा जीव है और मनुष्य के साथ-साथ और सभी जीवो की भी एक इच्छा आवश्यक आवश्यक मूलभूत आवश्यकता बनाई हुई है जिस व्यक्ति ने अपनी इच्छाओं पर काबू कर लिया समझ लो उसी व्यक्ति का जीवन सफल है इच्छाएं कभी समाप्त नहीं होती हैं इच्छाएं कभी पूरी नहीं होती है इसलिए वही इच्छा करनी चाहिए जो हमें आसानी से मिल सके भ्रष्टाचार लालच आदि की इच्छाएं तो हमें बिल्कुल ही नहीं करनी चाहिए हमें अच्छे कार्यों को करने की इच्छा ही हमेशा करनी चाहिए धन्यवाद अध्यापक संजय चंडीगढ़ यदि आपको मेरा उत्तर जवाब सही लगे तो लाइक और फॉलो जरूर करें धन्यवाद

prashna me apni ikchao ko kaise sambhalun manushya ek aisa jeev hai aur manushya ke saath saath aur sabhi jeevo ki bhi ek iccha aavashyak aavashyak mulbhut avashyakta banai hui hai jis vyakti ne apni ikchao par kabu kar liya samajh lo usi vyakti ka jeevan safal hai ichhaen kabhi samapt nahi hoti hain ichhaen kabhi puri nahi hoti hai isliye wahi iccha karni chahiye jo hamein aasani se mil sake bhrashtachar lalach aadi ki ichhaen toh hamein bilkul hi nahi karni chahiye hamein acche karyo ko karne ki iccha hi hamesha karni chahiye dhanyavad adhyapak sanjay chandigarh yadi aapko mera uttar jawab sahi lage toh like aur follow zaroor kare dhanyavad

प्रश्न में अपनी इच्छाओं को कैसे संभालूं मनुष्य एक ऐसा जीव है और मनुष्य के साथ-साथ और सभी ज

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Brajwasi sharma

Astrologer

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भाई एक चौका तो कभी अंतर नहीं होता है मन को चित्र बनाते रहो इतनी इच्छा बढ़ती है कभी याद ही सोजा जमाता था आज 100 से 500 कमाता है 500 के बाद कल 50000 का नौकर बनता है कोलकाता 50000 से 5000000 का बढ़िया 50,000 से ज्यादा 50 करोड़ का बन जाऊं 50 कोर्स का 502 बन जाऊं कविता के सारे संसार का डॉन मेरे घर में राजस्थान को मानना पड़ता है स्थल कंट्रोल करना पड़ता है यह भक्ति योग से बहुत दर्द करता होती है इसी माध्यम से दर्द होती है कि आदमी के पास जितनी करो उतनी बर्तन को जितना विशाल करोगे बढ़ता चला जाएगा इसलिए अब बंद को थोड़ा सीमित करो यह देखो संसार कैसा है तू कैसा है उसी के हिसाब से अपना प्रभाव बढ़ाते चले जाऊं

bhai ek chowka toh kabhi antar nahi hota hai man ko chitra banate raho itni iccha badhti hai kabhi yaad hi souza jamaata tha aaj 100 se 500 kamata hai 500 ke baad kal 50000 ka naukar banta hai kolkata 50000 se 5000000 ka badhiya 50 000 se zyada 50 crore ka ban jaaun 50 course ka 502 ban jaaun kavita ke saare sansar ka don mere ghar me rajasthan ko manana padta hai sthal control karna padta hai yah bhakti yog se bahut dard karta hoti hai isi madhyam se dard hoti hai ki aadmi ke paas jitni karo utani bartan ko jitna vishal karoge badhta chala jaega isliye ab band ko thoda simit karo yah dekho sansar kaisa hai tu kaisa hai usi ke hisab se apna prabhav badhate chale jaaun

भाई एक चौका तो कभी अंतर नहीं होता है मन को चित्र बनाते रहो इतनी इच्छा बढ़ती है कभी याद ही

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gyanendra tiwari

Singer&dharmik

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आपका सवाल है मैं अपनी इच्छाओं को कैसे संभालो देखिए अपनी इच्छाओं को संभालने के लिए किसी दूसरे की राय लेने की जरूरत नहीं किसी दूसरे की राय लेकर आप कुछ नहीं कर सकते हैं कुछ अपने आप को समझदार बनाइए और अपने आप को समझने की कोशिश करिए आपकी जो इच्छा है जो सही है उनको सही रास्ते पर ले चलिए उनको कभी भटकने मत दीजिए आपकी जो गलत है उनको बिल्कुल अपने अंदर पढ़ने ही ना दीजिए और इच्छाओं को संभालने के लिए आपको एक-एक आक्रमण करना पड़ेगा देखे अपना चित्र जो है एक जगह पर रखना पड़ेगा और सिर्फ और सिर्फ नेगेटिव सोचना पड़ेगा अन्य गेट नहीं सोचना है सॉरी नेगेटिव नहीं सोचना है सिर्फ और सिर्फ आपको पॉजिटिव सोचना है और अच्छे कामों के लिए सोचना है आरक्षक काम ही करना है अपने मन में यह बिठा लेना है कि हमको अच्छा काम करना है और साईं अगर आपकी गलत राह दिखाने की कोशिश करती हैं तो नेताओं को आप दबाइए उनको उगने मत दीजिए बन अपने मत दीजिए यही मेरी राहें धन्यवाद

aapka sawaal hai apni ikchao ko kaise sambhalo dekhiye apni ikchao ko sambhalne ke liye kisi dusre ki rai lene ki zarurat nahi kisi dusre ki rai lekar aap kuch nahi kar sakte hai kuch apne aap ko samajhdar banaiye aur apne aap ko samjhne ki koshish kariye aapki jo iccha hai jo sahi hai unko sahi raste par le chaliye unko kabhi bhatakne mat dijiye aapki jo galat hai unko bilkul apne andar padhne hi na dijiye aur ikchao ko sambhalne ke liye aapko ek ek aakraman karna padega dekhe apna chitra jo hai ek jagah par rakhna padega aur sirf aur sirf Negative sochna padega anya gate nahi sochna hai sorry Negative nahi sochna hai sirf aur sirf aapko positive sochna hai aur acche kaamo ke liye sochna hai aarakshak kaam hi karna hai apne man mein yah bitha lena hai ki hamko accha kaam karna hai aur sai agar aapki galat raah dikhane ki koshish karti hai toh netaon ko aap dabaiye unko ugne mat dijiye ban apne mat dijiye yahi meri rahen dhanyavad

आपका सवाल है मैं अपनी इच्छाओं को कैसे संभालो देखिए अपनी इच्छाओं को संभालने के लिए किसी दूस

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ओम शांति ओम मूवी के सपने देखे थे और आपके पास अभी आप भेज सकते हैं नहीं तो आप किसके भरोसे मरीजों को करें इंसान अगर आप पैसा कमाते हैं या फिर कुछ और करना है तो ठीक है जैसे कि आप अपनी फोटो नहीं सुना सकते हैं

om shanti om movie ke sapne dekhe the aur aapke paas abhi aap bhej sakte hain nahi toh aap kiske bharose marizon ko kare insaan agar aap paisa kamate hain ya phir kuch aur karna hai toh theek hai jaise ki aap apni photo nahi suna sakte hain

ओम शांति ओम मूवी के सपने देखे थे और आपके पास अभी आप भेज सकते हैं नहीं तो आप किसके भरोसे मर

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Sarita Prasad

House Wife And Study

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आप अपनी इच्छा को अपनी औकात के हिसाब से संभाल सकते हैं आपकी औकात कितनी है हर इंसान के अंदर इच्छा बहुत ही बड़ी होती है जब वह इंसान अपनी औकात देखती है तो उसे इच्छा भूल जाते हैं जबकि उसके बारे में वह सोचते भी नहीं

aap apni iccha ko apni aukat ke hisab se sambhaal sakte hain aapki aukat kitni hai har insaan ke andar iccha bahut hi badi hoti hai jab vaah insaan apni aukat dekhti hai toh use iccha bhool jaate hain jabki uske bare me vaah sochte bhi nahi

आप अपनी इच्छा को अपनी औकात के हिसाब से संभाल सकते हैं आपकी औकात कितनी है हर इंसान के अंदर

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मैं अपनी जान को कैसे संभालूं का फीचर प्रशन है हम सबको अपनी इच्छाएं संभालने चाहिए बिल्कुल और खाद का जो हमारी बुरी आदतें हैं उनको छोड़ देना चाहिए हमें अपनी इच्छाओं को अगर सच में संभालना है तो हमें अपने आप को आध्यात्मिकता की ओर ले कर जाना चाहिए आध्यात्मिकता एक ऐसी चीज है भगवान नहीं वह चीज है जो हमारी इच्छा को हमें देता तो सब कुछ है पर भेजो हमारी इच्छा को भी सीमित कर देते हैं जब हमें भगवान के बारे में पूर्ण ज्ञान हो जाता है और अगर आप सच में अपनी जान को संभालना चाहते हैं तो मैं आपको एक सलाह देना चाहूंगी आप जरूर पढ़ें पुस्तक जीने की राह पुस्तक को प्राप्त करने के लिए या तो अपना फुल एड्रेस कमेंट बॉक्स में सेंड कर दीजिए यह पुस्तक आपके घर पर निशुल्क आ जाएगी या फिर इसका दूसरा तरीका है कि आप अपना फुल एड्रेस 74968 01825 के ऊपर व्हाट्सएप कर दीजिए यह पुस्तक आपको फ्री भेज दी जाएगी मैं एक बार फिर से रिपीट कर रही हूं 74968 01825

main apni jaan ko kaise sambhalun ka feature prashn hai hum sabko apni ichhaen sambhalne chahiye bilkul aur khad ka jo hamari buri aadatein hai unko chod dena chahiye hamein apni ikchao ko agar sach mein sambhaalna hai toh hamein apne aap ko aadhyatmikta ki aur le kar jana chahiye aadhyatmikta ek aisi cheez hai bhagwan nahi vaah cheez hai jo hamari iccha ko hamein deta toh sab kuch hai par bhejo hamari iccha ko bhi simit kar dete hai jab hamein bhagwan ke bare mein purn gyaan ho jata hai aur agar aap sach mein apni jaan ko sambhaalna chahte hai toh main aapko ek salah dena chahungi aap zaroor padhen pustak jeene ki raah pustak ko prapt karne ke liye ya toh apna full address comment box mein send kar dijiye yah pustak aapke ghar par nishulk aa jayegi ya phir iska doosra tarika hai ki aap apna full address 74968 01825 ke upar whatsapp kar dijiye yah pustak aapko free bhej di jayegi main ek baar phir se repeat kar rahi hoon 74968 01825

मैं अपनी जान को कैसे संभालूं का फीचर प्रशन है हम सबको अपनी इच्छाएं संभालने चाहिए बिल्कुल औ

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आपने पूछा कि मैं अपनी इच्छाओं को किस तरीके से संभालूं देखें इच्छाएं तो कभी इंसान की कभी खत्म हो ही नहीं सकती हैं इच्छाओं का कोई एंड नहीं है यह तो हमें योग साधना की तरी जरिए हम अपनी इच्छाओं को काबू कर सकते हैं आप योग कीजिए योग के द्वारा ही आप अपनी इच्छाओं को काबू कर सकते हैं और भगवान का जितना ज्यादा से ज्यादा ध्यान लगाएंगे भगवान में जितना अपने आप को मोहित करेंगे उसने आपकी जो इच्छा है सब खत्म होती चली जाएंगी

aapne poocha ki main apni ikchao ko kis tarike se sambhalun dekhen ichhaen toh kabhi insaan ki kabhi khatam ho hi nahi sakti hain ikchao ka koi and nahi hai yah toh hamein yog sadhna ki tari jariye hum apni ikchao ko kabu kar sakte hain aap yog kijiye yog ke dwara hi aap apni ikchao ko kabu kar sakte hain aur bhagwan ka jitna zyada se zyada dhyan lagayenge bhagwan me jitna apne aap ko mohit karenge usne aapki jo iccha hai sab khatam hoti chali jayegi

आपने पूछा कि मैं अपनी इच्छाओं को किस तरीके से संभालूं देखें इच्छाएं तो कभी इंसान की कभी खत

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सुनील सिंह

अध्यापक

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अपनी इच्छाओं को संभालने के लिए सबसे पहले एकाग्रता की जरूरत है आप अपने मन को धीरे से परिवर्तित कर सकते हैं अच्छी किताबें पढ़ें जिनमें ज्यादातर शिक्षा हिंदी गई हो तो ज्यादातर पढ़ने में आपको आनंद की अनुभूति हो और ऐसी-ऐसी बुक्स पड़े जिनसे आपको मतलब ज्यादा समय बैठने को मिले ज्यादा समय जब बैठना आप काट कर देंगे तो उसके बाद आपकी इच्छा हो मैं अपने आप कंट्रोल हो जाएगा और आप उचित सोचने लगेंगे

apni ikchao ko sambhalne ke liye sabse pehle ekagrata ki zarurat hai aap apne man ko dhire se parivartit kar sakte hain achi kitaben padhen jinmein jyadatar shiksha hindi gayi ho toh jyadatar padhne mein aapko anand ki anubhuti ho aur aisi aisi books pade jinse aapko matlab zyada samay baithne ko mile zyada samay jab baithana aap kaat kar denge toh uske baad aapki iccha ho main apne aap control ho jaega aur aap uchit sochne lagenge

अपनी इच्छाओं को संभालने के लिए सबसे पहले एकाग्रता की जरूरत है आप अपने मन को धीरे से परिवर्

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तुम अपनी इच्छा को यह सब के को परमेश्वर मान के संभालो यीशु मसीह उद्धार करता है शंघाई देने वाला अब यह सो जानिए परमेश्वर को जाने यीशु परमेश्वर को जानना

tum apni iccha ko yah sab ke ko parmeshwar maan ke sambhalo yeshu masih uddhar karta hai shanghai dene vala ab yah so janiye parmeshwar ko jaane yeshu parmeshwar ko janana

तुम अपनी इच्छा को यह सब के को परमेश्वर मान के संभालो यीशु मसीह उद्धार करता है शंघाई देने व

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हेलो हमारी अपनी खुद की जो इच्छा है हैं उनका कोई अंत नहीं होता असीमित है इच्छाओं की पूर्ति तो नहीं की जा सकती लेकिन आप अपनी जरूरतों और इच्छाओं को प्राथमिकता का क्रम दे दीजिए और पार्टी के हिसाब से प्राथमिकता के हिसाब से उनको पूरा करने की कोशिश करिए जो पूरी हो जाए उनसे ही खुश रहिए और जो पूरी नहीं हो सकती असंभव है उनको छोड़ देती है और जो पूरी हो सकती है उसके लिए कोशिश कीजिए

hello hamari apni khud ki jo iccha hai hain unka koi ant nahi hota asimeet hai ikchao ki purti toh nahi ki ja sakti lekin aap apni jaruraton aur ikchao ko prathamikta ka kram de dijiye aur party ke hisab se prathamikta ke hisab se unko pura karne ki koshish kariye jo puri ho jaaye unse hi khush rahiye aur jo puri nahi ho sakti asambhav hai unko chhod deti hai aur jo puri ho sakti hai uske liye koshish kijiye

हेलो हमारी अपनी खुद की जो इच्छा है हैं उनका कोई अंत नहीं होता असीमित है इच्छाओं की पूर्ति

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अपनी आंखों आप को अकेले में एकांत में ले जाकर के अपने स्कूल धरा लगाएं आंखों को बंद करके करके ओम का उच्चारण करें अपने इष्ट को ध्यान करें शांति मिलेगी ट्रेन भागेगा अब मन को खींचते अपने इष्ट के चरणों में लगाएं मन शांत हो जाएगा आपका

apni aakhon aap ko akele me ekant me le jaakar ke apne school dhara lagaye aakhon ko band karke karke om ka ucharan kare apne isht ko dhyan kare shanti milegi train bhagega ab man ko khichte apne isht ke charno me lagaye man shaant ho jaega aapka

अपनी आंखों आप को अकेले में एकांत में ले जाकर के अपने स्कूल धरा लगाएं आंखों को बंद करके करक

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इच्छाओं को संभालना बहुत बड़ी बात है कि जो व्यक्ति अपने आप पर काबू पा लेता है वह खुद का रूप लेता है और यह दुनिया इच्छाएं दुख का कारण होता है हम किसी से कोई इच्छा रखते हैं कोई उम्मीद रखते हैं वह पूरा नहीं होता तुम दुखी होते हैं तो हमें अपनी इच्छाओं को काबू कैसे करना चाहिए जैसे अब किसी भी इच्छा को काबू में रखना एयरप्लेन आप कर सकते हो एक बार में कल भाई मुझे यह नहीं चाहिए खत्म उस पर ध्यान मत दो ऑटोमेटिक देखोगे क्या आपका इंटरव्यू है उस वक्त से हट जाएगा अनुसरण करने का यही फायदा होता है टाइम नहीं करना अब देख पाओगे आप अपनी इच्छा को कम कर लोगे

ikchao ko sambhaalna bahut badi baat hai ki jo vyakti apne aap par kabu paa leta hai vaah khud ka roop leta hai aur yah duniya ichhaen dukh ka karan hota hai hum kisi se koi iccha rakhte hain koi ummid rakhte hain vaah pura nahi hota tum dukhi hote hain toh hamein apni ikchao ko kabu kaise karna chahiye jaise ab kisi bhi iccha ko kabu me rakhna airplane aap kar sakte ho ek baar me kal bhai mujhe yah nahi chahiye khatam us par dhyan mat do Automatic dekhoge kya aapka interview hai us waqt se hut jaega anusaran karne ka yahi fayda hota hai time nahi karna ab dekh paoge aap apni iccha ko kam kar loge

इच्छाओं को संभालना बहुत बड़ी बात है कि जो व्यक्ति अपने आप पर काबू पा लेता है वह खुद का रूप

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Jinendra sen

Beautician

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जय श्री राम आप जैसा कि आपने अपना श्रीमान आपने अपनी बहुत ही सुंदर प्रश्न पूछा ही में अपनी इच्छा को कैसे संभाल मंडी किच्छा संभाली नहीं जाती है किसी से पूछने की आवश्यकता नहीं कि मैं अपनी इच्छाओं के संभालो इसको संभालने के लिए आपको खुद को तब की जरूरत है आप कोशिश कीजिए क्या आप अपनी * को अपने मन को अपनी बुद्धि को वश में करें और इसके लिए आपके पास सबसे बढ़िया उपाय है मेडिटेशन मेडिटेशन कीजिए अपना ध्यान केंद्रित किया पर अपना ध्यान केंद्रित कीजिए अपना लक्ष्य तो आप चाहे तो हम भक्ति में लगाएं या फिर किसी काम में लगाए या फिर जिसमें आपका आपकी रुचि हो आप उसमें अपने ध्यान को लगाएं इससे क्या होगा कि आपका मन वश में हुआ अगर आपका मन बस में देता आपकी इंडिया भी आपके बस में हो जाएगी फिर आप जैसा चाहेंगे अपनी इंदौर से आप वह काम करवा सकते हैं आप चाहेंगे कि आशीष इससे यह हुआ क्या आपकी भूख लास्ट था आपकी जरूरत है सारी खत्म हो जाएगी इससे अपनी इच्छा को संभालने के लिए किसी की जरूरत नहीं होती उसके लिए तब मेडिटेशन मैंने अपनी जान की जरूरत होती है जहां तक हो सके अपने शरीर को संतुलित करके और ध्यान करें और अपने शहर को संतुलित स्थिर करें जातक आप जान अब जवाब का सही हो जाएगा तो यह सही समस्या आपके जीवन से निकल जाएगी जय श्री राम

jai shri ram aap jaisa ki aapne apna shriman aapne apni bahut hi sundar prashna poocha hi me apni iccha ko kaise sambhaal mandi kiccha sambhali nahi jaati hai kisi se poochne ki avashyakta nahi ki main apni ikchao ke sambhalo isko sambhalne ke liye aapko khud ko tab ki zarurat hai aap koshish kijiye kya aap apni ko apne man ko apni buddhi ko vash me kare aur iske liye aapke paas sabse badhiya upay hai meditation meditation kijiye apna dhyan kendrit kiya par apna dhyan kendrit kijiye apna lakshya toh aap chahen toh hum bhakti me lagaye ya phir kisi kaam me lagaye ya phir jisme aapka aapki ruchi ho aap usme apne dhyan ko lagaye isse kya hoga ki aapka man vash me hua agar aapka man bus me deta aapki india bhi aapke bus me ho jayegi phir aap jaisa chahenge apni indore se aap vaah kaam karva sakte hain aap chahenge ki aashish isse yah hua kya aapki bhukh last tha aapki zarurat hai saari khatam ho jayegi isse apni iccha ko sambhalne ke liye kisi ki zarurat nahi hoti uske liye tab meditation maine apni jaan ki zarurat hoti hai jaha tak ho sake apne sharir ko santulit karke aur dhyan kare aur apne shehar ko santulit sthir kare jatak aap jaan ab jawab ka sahi ho jaega toh yah sahi samasya aapke jeevan se nikal jayegi jai shri ram

जय श्री राम आप जैसा कि आपने अपना श्रीमान आपने अपनी बहुत ही सुंदर प्रश्न पूछा ही में अपनी इ

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अपनी इच्छाओं को संभालने के लिए प्रतिदिन जो सुबह उठ के अपना अपना कोई क्रिया कर्म करता है सुबह उठे फ्रेश हो इस देवी देवताओं या जिस धर्म को मानता हो अपने देवी-देवताओं को उनका नित्या सुबह शाम को स्मरण करना यह क्रिया करने से अपनी इच्छाओं को काबू में संभाला जा सकता है

apni ikchao ko sambhalne ke liye pratidin jo subah uth ke apna apna koi kriya karm karta hai subah uthe fresh ho is devi devatao ya jis dharm ko manata ho apne devi devatao ko unka nithya subah shaam ko smaran karna yah kriya karne se apni ikchao ko kabu mein sambhala ja sakta hai

अपनी इच्छाओं को संभालने के लिए प्रतिदिन जो सुबह उठ के अपना अपना कोई क्रिया कर्म करता है सु

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Rajkumar

Student

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यहां पर प्रश्न है कि मैं अपनी इच्छाओं को कैसे समझा दो हजार तक कोई भी अपनी इच्छा हो तो नहीं संभाल सकता है और जो परीक्षाओं को संभाल लेता है व सुन्नी हो जाता है जो सुननी है वह भगवान है और सुनने तो कहीं किया जो कि भगवान है तो अपनी इच्छाओं को संभाला तो किसी के बस की बात नहीं है लेकिन कंट्रोल करना हमारे बस में तो नियंत्रण योग के द्वारा हो सकती है उस चीज से अगर किसी चीज के बारे में बुरा मिले तो हमसे दूर हो सकता है लेकिन उसके बारे में अच्छा सोचे उसके पास हो सकते हैं यही हमारी हाइट में प्रवेश करता है उसको क्या बोलता है अच्छा समझता है तो उसकी तरफ और जाता है और औरत रात होता है लेकिन कोई उसको बुरा समझते तो परेशान हो जाएगा उसी तरह हमारी इच्छाओं को शांत करने के लिए हम जिस वस्तु या जिस चीज किया जिस अकाउंट की इच्छा है उसको हमेशा करने के लिए उसमें एक नकारात्मकता वैसे घूमने के लिए नकारात्मकता ढूंढ ढूंढ गुस्सा करना चाहिए ठीक है और दूसरी जहां पर कुछ गलत हो रहा हूं अब जरूरत है और गलत वाला बात है कि हुए माल ले अगर कोई लड़की को छेड़ा गुस्सा करना मर जाए मम्मी के सामने झुकता हूं जिसके लिए उसके लिए उसके लिए लाभ लाभ लाभ इन सब चीजों को रोकने के लिए मंत्र अपेंड जहां से हमें इच्छाएं हमें मिल सकती हैं उन रास्तों को बंद कर सकते हमें नहीं चाहिए इच्छा तो सबके मन में आती है ऐसा तो है नहीं तो इच्छाधारी इच्छाधारी टेबल के मन में यह इच्छा होती है प्यार में रितिक वाले भ्रष्टाचार और इतनी ही देर में वो काम करूंगा या फिर वह काम हो जाए फिर मैं यह काम छोड़ दूंगा ऐसा करना असंभव है तो इसके लिए तो हमें बस गुस्सा होना पड़े खुद पर कि नहीं यार मुझे यह नहीं करना और दूसरी कि जैसे कि कोई किसी से कम 2 बार बार बार बार बार बार बार कट जा तो 2364 खत्म हो जाती है खाना खाने पड़े पड़े पड़े पड़े पड़े पड़े पड़े पड़े हमें और ऑप्शन आएगा और इच्छा जागृत होकर खा लो तो यह ज्यादा खाने वाला तरीका भी गलत है और ना खाने वाला तेल वाले तुझे शांत करने का तो एक ही तरीका क्या अपने आप को समर्पित कर दो या तो किसी एक पैशन की तरफ यार किसी को यह काम की तरह धर्म की तरफ समाज के कार्य की तरह इस्तेमाल इच्छा क्योंकि शांत होगी

yahan par prashna hai ki main apni ikchao ko kaise samjha do hazaar tak koi bhi apni iccha ho toh nahi sambhaal sakta hai aur jo parikshao ko sambhaal leta hai va sunni ho jata hai jo sunnani hai vaah bhagwan hai aur sunne toh kahin kiya jo ki bhagwan hai toh apni ikchao ko sambhala toh kisi ke bus ki baat nahi hai lekin control karna hamare bus mein toh niyantran yog ke dwara ho sakti hai us cheez se agar kisi cheez ke bare mein bura mile toh humse dur ho sakta hai lekin uske bare mein accha soche uske paas ho sakte hain yahi hamari height mein pravesh karta hai usko kya bolta hai accha samajhata hai toh uski taraf aur jata hai aur aurat raat hota hai lekin koi usko bura samajhte toh pareshan ho jaega usi tarah hamari ikchao ko shaant karne ke liye hum jis vastu ya jis cheez kiya jis account ki iccha hai usko hamesha karne ke liye usme ek nakaratmakta waise ghoomne ke liye nakaratmakta dhundh dhundh gussa karna chahiye theek hai aur dusri jaha par kuch galat ho raha hoon ab zarurat hai aur galat vala baat hai ki hue maal le agar koi ladki ko cheda gussa karna mar jaaye mummy ke saamne jhukta hoon jiske liye uske liye uske liye labh labh labh in sab chijon ko rokne ke liye mantra append jaha se hamein ichhaen hamein mil sakti hain un raston ko band kar sakte hamein nahi chahiye iccha toh sabke man mein aati hai aisa toh hai nahi toh ichchhaadhaaree ichchhaadhaaree table ke man mein yah iccha hoti hai pyar mein hrithik waale bhrashtachar aur itni hi der mein vo kaam karunga ya phir vaah kaam ho jaaye phir main yah kaam chod dunga aisa karna asambhav hai toh iske liye toh hamein bus gussa hona pade khud par ki nahi yaar mujhe yah nahi karna aur dusri ki jaise ki koi kisi se kam 2 baar baar baar baar baar baar baar cut ja toh 2364 khatam ho jaati hai khana khane pade pade pade pade pade pade pade pade hamein aur option aayega aur iccha jagrit hokar kha lo toh yah zyada khane vala tarika bhi galat hai aur na khane vala tel waale tujhe shaant karne ka toh ek hi tarika kya apne aap ko samarpit kar do ya toh kisi ek passion ki taraf yaar kisi ko yah kaam ki tarah dharm ki taraf samaj ke karya ki tarah istemal iccha kyonki shaant hogi

यहां पर प्रश्न है कि मैं अपनी इच्छाओं को कैसे समझा दो हजार तक कोई भी अपनी इच्छा हो तो नहीं

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Rahil Alam

Accountant

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैं परीक्षा को कैसे संभालती अच्छी-अच्छी इच्छा होना पूरा करने की कोशिश करो शिक्षणाची जो पूरा हो सके बुरे नहीं

main pariksha ko kaise sambhaalati achi achi iccha hona pura karne ki koshish karo shikshanachi jo pura ho sake bure nahi

मैं परीक्षा को कैसे संभालती अच्छी-अच्छी इच्छा होना पूरा करने की कोशिश करो शिक्षणाची जो पूर

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