शिव को सबसे महान क्यूं माना जाता हैं?...


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क्यों को सबसे महान इसलिए कहा जाता है क्योंकि शिव निरंकारी परमपिता परमेश्वर ब्रह्मा और जितने भी देवी देवता उत्पन्न हुए हैं उन्हीं के द्वारा उत्पन्न किए गए सदाशिव सबसे महान एवं परमपिता परमेश्वर

kyon ko sabse mahaan isliye kaha jata hai kyonki shiv nirankari parampita parmeshwar brahma aur jitne bhi devi devta utpann hue hain unhi ke dwara utpann kiye gaye sadashiv sabse mahaan evam parampita parmeshwar

क्यों को सबसे महान इसलिए कहा जाता है क्योंकि शिव निरंकारी परमपिता परमेश्वर ब्रह्मा और जितन

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Dr Sampadananda Mishra

Sanskrit scholar, Author, Director, Sri Aurobindo Foundation for Indian Culture

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इसी अम्मा अगर विभिन्न पुराणों को देखे अगर हम विष्णु पुराण पढ़ते हैं तो उसने भगवान विष्णु को ही सर्वोच्च माना कि कुरान में जब हम जाते हैं पढ़ते हैं उसमें शिव जी को भगवान माना जाता है गणेश पुराण में पढ़ते हैं तो गणेश जी को महान माना जो सृष्टि की रचना है चेतना का जो आविर्भाव से तो उसमें भी दूध देवी देवता हैं अनेक रूप से सृष्टि की रचना है क्रियाएं हैं जो पालन पोषण है जो कुछ भी होता है होता है विकास उनके अंदर बहुत शैतान कुमार गुप्ता सृष्टि के संहार करता मानते हैं सब डिस्ट्रक्चरिंग डिस्टर्ब शब्द को विनाश करता है इसका जितने भी अब उन्हें भी पता है कि दुर्गा लगाएं तो उसको विनाश करके कुर्बानी करते हैं एक्सप्रेस में खिलाते सृष्टि की रचना है जब जब हम कुछ नया बनाना चाहते हैं तो पुरानी चीजों को हम को नष्ट कर देना नष्ट कर देते हैं पुरानी पुरानी चीजें जो है पूरा उसको हम नष्ट करते नहीं सकते शिवजी का काम है कि जितने हमारे अंदर की जो दुर्बल बताएं जो बताए जो बादलों की तरह उसका विनाश करते हैं नाश्ता करने का जो सामान चाहिए शिव जी के अंदर ऐसा उपलब्धि इस प्रकार की उपलब्धि हमारे खातिर पूर्वजों ने जो मनु ऋषि लोग चले जो छुपा सकता पर्सेंट लोग हैं उनको स्वामी विवेकानंद ने एक बार कहा था कि हमको अगर डायनामिक बनना है कुछ नया बनाना पढ़ना है तो हमको वह शिवजी के तांडव चाहिए क्योंकि आपने बहुत शक्ति है कि वह सारे चित्र बताएं उसको वह विनाश करने का सामर्थ्य उस्ताद ताकि एक नया कुछ बन सके तो विकास की जो धारा है तो उस प्रगति की जो धारा है विकास के उपरांत उस विकास तब में विकास की धारा पुरातन को विनाश करके नूतन को पैदा करना कि जो गुणशिप जगह है और इन चाइना में पैदा करना प्रदान करना हमको एक मतलब शिक्षक क्रियात्मक देना यह शब्द जरूर प्रभाव है तो उसे हम को मिलता है तो शायद ही कारण हो सकता है जिसके लिए शिवजी महान माना जाता है देवों के देव और महादेव माना जाता है क्योंकि उनका सामर्थ्य है जो सब कुछ का विनाश करके एक नया एक नई सृष्टि की रचना में सहायक प्रत्यय और सारी जो अशुभ इशारे और शुभम का विनाश करने का सामर्थ्य भेजें भेजें ऐसा उपलब्धि इस प्रकार के बलात्कार को महान माना जाता है क्योंकि यह तो बहुत बड़ा कोई अशोक नहीं चाहता है तो अशोक से मुक्त हो तो शुभ या अशुभ मुक्ति पाने का अचूक उपाय है वह शिवजी की उपासना शिवजी तू पाषाण का मतलब यह है कि पर शिव भक्तों को प्रतिष्ठित को विकसित करना उसका मतलब शुभ ही शुभ दाता अपने अंदर प्रकाश ही प्रकाश भर दे देंगे आप प्रकाश की ओर ले जाते हैं एक कारण है दूसरा कारण है जो पशुपति भी कहा जाता है पशुपति का मतलब है ऐसा नहीं है कि उसका पति पर हमारी जो मांगना है मानव क्षेत्र में जो भी ग्रुप है उन सभी प्रवृत्तियों पर शिवजी का ही नियंत्रण हेतु का जो रूपांतरित करके हमको वीर मार्ग पर उड़ते हुए मार्ग पर ले जाते हैं शिव को प्रतिष्ठित करने का अपने अंदर इसका अर्थ यह है कि हम 5:30 सभी प्रवृत्तियों के ऊपर अपना नियंत्रण लाते हैं और इन पशुओं का दमन कर के हम वीर बनते हैं और वीर भाग से प्रथम द्वितीय व यह जो जर्नी है पशु भाग से वीर बाल वीर भाग से खेल एक दिव्य भाग में जाकर स्थित होना स्थित होना और उसके प्रभाव से अपने जीवन का संचालन करना उसमें प्रारंभ जो है उन शिवजी से होता है इसलिए उनको पशुपति कहा जाता है तो यह कारण है कुछ कारण अनेक कारण अनेक लोग अपने विचार से प्रदान कर सकते हैं मैंने यहां पर कुछ कारण रखा है जिनके लिए शिवजी को महादेव माना जाता है

isi amma agar vibhinn purano ko dekhe agar hum vishnu puran padhte hain toh usne bhagwan vishnu ko hi sarvoch mana ki quraan mein jab hum jaate hain padhte hain usme shiv ji ko bhagwan mana jata hai ganesh puran mein padhte hain toh ganesh ji ko mahaan mana jo shrishti ki rachna hai chetna ka jo avirbhaav se toh usme bhi doodh devi devta hain anek roop se shrishti ki rachna hai kriyaen hain jo palan poshan hai jo kuch bhi hota hai hota hai vikas unke andar bahut shaitaan kumar gupta shrishti ke sanhar karta maante hain sab distrakcharing disturb shabd ko vinash karta hai iska jitne bhi ab unhe bhi pata hai ki durga lagaye toh usko vinash karke kurbani karte hain express mein khilaate shrishti ki rachna hai jab jab hum kuch naya banana chahte hain toh purani chijon ko hum ko nasht kar dena nasht kar dete hain purani purani cheezen jo hai pura usko hum nasht karte nahi sakte shivaji ka kaam hai ki jitne hamare andar ki jo durbal bataye jo bataye jo badalon ki tarah uska vinash karte hain nashta karne ka jo saamaan chahiye shiv ji ke andar aisa upalabdhi is prakar ki upalabdhi hamare khatir purvajon ne jo manu rishi log chale jo chupa sakta percent log hain unko swami vivekananda ne ek baar kaha tha ki hamko agar dynamic bana hai kuch naya banana padhna hai toh hamko vaah shivaji ke tandav chahiye kyonki aapne bahut shakti hai ki vaah saare chitra bataye usko vaah vinash karne ka samarthya ustad taki ek naya kuch ban sake toh vikas ki jo dhara hai toh us pragati ki jo dhara hai vikas ke uprant us vikas tab mein vikas ki dhara puratan ko vinash karke nutan ko paida karna ki jo gunship jagah hai aur in china mein paida karna pradan karna hamko ek matlab shikshak kriyatmak dena yah shabd zaroor prabhav hai toh use hum ko milta hai toh shayad hi karan ho sakta hai jiske liye shivaji mahaan mana jata hai Devon ke dev aur mahadev mana jata hai kyonki unka samarthya hai jo sab kuch ka vinash karke ek naya ek nayi shrishti ki rachna mein sahayak pratyay aur saree jo ashubh ishare aur subham ka vinash karne ka samarthya bheje bheje aisa upalabdhi is prakar ke balatkar ko mahaan mana jata hai kyonki yah toh bahut bada koi ashok nahi chahta hai toh ashok se mukt ho toh shubha ya ashubh mukti paane ka achuk upay hai vaah shivaji ki upasana shivaji tu pashan ka matlab yah hai ki par shiv bhakton ko pratishthit ko viksit karna uska matlab shubha hi shubha data apne andar prakash hi prakash bhar de denge aap prakash ki aur le jaate hain ek karan hai doosra karan hai jo pashupati bhi kaha jata hai pashupati ka matlab hai aisa nahi hai ki uska pati par hamari jo maangna hai manav kshetra mein jo bhi group hai un sabhi parvirtiyon par shivaji ka hi niyantran hetu ka jo rupantarit karke hamko veer marg par udte hue marg par le jaate hain shiv ko pratishthit karne ka apne andar iska arth yah hai ki hum 5 30 sabhi parvirtiyon ke upar apna niyantran laate hain aur in pashuo ka daman kar ke hum veer bante hain aur veer bhag se pratham dwitiya va yah jo journey hai pashu bhag se veer baal veer bhag se khel ek divya bhag mein jaakar sthit hona sthit hona aur uske prabhav se apne jeevan ka sanchalan karna usme prarambh jo hai un shivaji se hota hai isliye unko pashupati kaha jata hai toh yah karan hai kuch karan anek karan anek log apne vichar se pradan kar sakte hain maine yahan par kuch karan rakha hai jinke liye shivaji ko mahadev mana jata hai

इसी अम्मा अगर विभिन्न पुराणों को देखे अगर हम विष्णु पुराण पढ़ते हैं तो उसने भगवान विष्णु क

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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शिव को इसलिए महान माना जाता है क्योंकि आपको याद होगा कि जिस समय में शिव सागर का मंथन हुआ था तुझको 14 रत्ती होते थे तो लक्ष्मी जी और विष्णु जी लेके कौस्तुभ मणि को भी तो जिंदे लिया एरावत हाथी को इंद्र लेने दे दिया इस प्रकार से सभी अच्छे-अच्छे रत्नों को खोले गए देवगढ़ अन्य देवता लेकिन जब हलाहल निकला अंत में वह सवाल को पीने के लिए कोई भी तैयार नहीं हुआ समस्त विश्व जलने लगा चारों ओर हाहाकार मच गया आर्डर दानिश शुभ को याद किया गया और वहां देवाधिदेव दे हलाहल विष को भी संसार की रक्षक करने के लिए समस्त विश्व ब्रह्मांड की रक्षा करने के लिए खोदी गई इसलिए उन्होंने कंट्रोल से रोक लिया इसलिए उनका नाम नीलकंठ पड़ गया और अडानी उन्हें कहते हैं और देवा दी देव महादेव उनका नाम प्रसिद्ध हो गया इस प्रकार हम देखते हैं कि संसार में जब जब कष्ट आए हैं जब जब संकट आए हैं तो देवाधिदेव महादेव ने हमेशा रक्षा की है अपने भक्तों को वरदान दिए हैं कभी महादेव नहीं यह नहीं सोचा कि मैं जो वरदान दे रहा हूं हो सकता है मेरे ऊपर इसका प्रयोग करें तो पार्वती के पीछे पड़ गया उसको प्राप्त करने के लिए शिवजी को मारना चाहता शिवजी पर यश प्रदान का प्रयोग करना चाहा तब वहां विष्णु भगवान ने मोदी अवतार धारण करके उसको मारा था इस प्रकार देवाधिदेव भोले हैं समस्त देवों में और ज्ञानी हैं आशुतोष से बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं इसलिए शुभ को सबसे महान माना जाता है इसलिए मैं देवा दी देव महादेव कहते हैं

shiv ko isliye mahaan mana jata hai kyonki aapko yaad hoga ki jis samay mein shiv sagar ka manthan hua tha tujhko 14 ratti hote the toh laxmi ji aur vishnu ji leke kaustubh mani ko bhi toh jinde liya erawat haathi ko indra lene de diya is prakar se sabhi acche acche ratnon ko khole gaye devgadh anya devta lekin jab halahal nikala ant mein vaah sawaal ko peene ke liye koi bhi taiyar nahi hua samast vishwa jalne laga charo aur hahakar match gaya order danish shubha ko yaad kiya gaya aur wahan devadhidev de halahal vish ko bhi sansar ki rakshak karne ke liye samast vishwa brahmaand ki raksha karne ke liye khodi gayi isliye unhone control se rok liya isliye unka naam neelkanth pad gaya aur adani unhe kehte hain aur deva di dev mahadev unka naam prasiddh ho gaya is prakar hum dekhte hain ki sansar mein jab jab kasht aaye hain jab jab sankat aaye hain toh devadhidev mahadev ne hamesha raksha ki hai apne bhakton ko vardaan diye hain kabhi mahadev nahi yah nahi socha ki main jo vardaan de raha hoon ho sakta hai mere upar iska prayog kare toh parvati ke peeche pad gaya usko prapt karne ke liye shivaji ko marna chahta shivaji par yash pradan ka prayog karna chaha tab wahan vishnu bhagwan ne modi avatar dharan karke usko mara tha is prakar devadhidev bhole hain samast Devon mein aur gyani hain ashutosh se bahut jaldi prasann ho jaate hain isliye shubha ko sabse mahaan mana jata hai isliye main deva di dev mahadev kehte hain

शिव को इसलिए महान माना जाता है क्योंकि आपको याद होगा कि जिस समय में शिव सागर का मंथन हुआ थ

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शिव का अर्थ क्या होता है हिंदी अक्षरमाला जाता है

shiv ka arth kya hota hai hindi aksharmala jata hai

शिव का अर्थ क्या होता है हिंदी अक्षरमाला जाता है

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